Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
05-13-2019, 12:20 PM,
#11
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
प्रिया के और मेरे उस रात के सपने जैसे प्रेमालाप के बाद हमें दोबारा कोई ऐसा मौका ही नहीं मिला और सच मानिये कि मैंने दोबारा ऐसी कोई कोशिश ही नहीं की.प्रिया के मन की तो प्रिया ही जाने लेकिन मैं भली-भांति जानता हूँ कि असली ख़ुशी ऐसे शाश्वत आनन्ददायक पलों को याद करने में ही होती है और अगर कोई उन सपनीले क्षणों को ज़बरदस्ती दोहराना चाहे तो गहरी मायूसी ही हाथ लगती है.
यूँ भी एक अकथनीय सा अपराधबोध मेरे मन में था. मैं तो प्रिया से आँख मिलाने में भी झिझकने लगा था. वैसे भी उस रात के बाद, प्रिया का और हमारे परिवार का साथ भी थोड़ा ही रहा. कुछ दिनों बाद प्रिया के कॉलेज खुल गए और प्रिया को हॉस्टल भी मिल गया, तो प्रिया हमारे घर से चली गयी.
कालान्तर में प्रिया कभी-कभार आ भी जाती थी मिलने लेकिन वो मिलना एक-आध घंटे का ही होता था जिस में सारा परिवार शामिल रहता. कोई किसी किस्म की शरारत नहीं, कोई चुहलबाज़ी नहीं. कभी कभी मेरी और प्रिया की नज़र मिल भी जाती तो क्षण भर के लिए… प्रिया की कजरारी आँखों में एक बिल्लौरी चमक और होंठों पर एक गुप्त सी ‘मोनालिसा मुस्कान’ आ कर गुम हो जाती जिसे सिर्फ मैं ही भांप पाता.प्रिया जैसी प्रियतमा से प्रेमालाप जैसे जैकपॉट जिंदगी में एक आध बार ही लगते हैं, यह सच्चाई मैं जानता था.
इधर मेरी अपनी वैवाहिक सैक्स-लाइफ बहुत बढ़िया थी! तो मुझे भी जिंदगी से कोई ख़ास शिक़वा नहीं था. लेकिन कभी कभी अनाम सा एक ख़ालीपन महसूस होता था. एक अरमान… दिल में कभी कभार तरंग के रूप में उठता था कि काश! मैं दिन के उजाले में या रात को लाइट जला कर प्रिया के सम्पूर्ण हुस्न को अपनी आँखों से चूम पाता… एक बार… बस! सिर्फ एक बार… प्रेमालाप के दौरान दोनों के जिस्मों की हर हरकत पर प्रिया की आँखों के भाव देख पाता, उसके बाद चाहे कयामत भी आ जाती तो मुझे रश्क़ ना होता.
लेकिन फिर वही ‘If the wishes were horses… beggars would ride!’तो मैं दिल के अरमान दिल में ही दबा लेता.
जिंदगी अपने ढर्रे पर चल रही थी. प्रिया ने M. Com कर ली और अपने घर लौट गयी. प्रिया के घर का माहौल बड़ा दकियानूसी सा था, अजीब ज़ाहिल लोग थे, औरतों को किसी प्रकार की आज़ादी नहीं थी. यहाँ तक कि लड़की घर से बाहर निकले तो परिवार का कोई ना कोई सदस्य साथ होना चाहिए.घर का छोड़िये… पूरे क़स्बे का माहौल भी सौ साल पुराना था.
पहले की बात और थी… लेकिन अब प्रिया दो साल बड़े शहर में रह कर, बड़े शहर की आज़ादी के रंग ढंग देख कर वापिस गयी थी तो… उस का ऐसी बंदिशों से ऊबना स्वाभाविक ही था. नतीज़न! घर में हल्की-फ़ुल्की बहस बाज़ी और छिट-पुट नाराज़गी के दौर शुरू हो गए थे.पता लगता था तो सुन कर कोफ़्त तो बहुत होती थी लेकिन हम क्या कर सकते थे. आँखिर यह उनके घर का अंदरूनी मसला था. फिर भी, सुन कर दुःख तो होता ही था.
प्रिया के घर वापिस लौट जाने के कोई तीन महीने बाद सुधा से उसकी बहन यानि प्रिया की मां ने फ़ोन पर सुधा को उनके यहाँ आने को कहा, कोई प्रिया की शादी-ब्याह का मसला था. आते इतवार, मैं और सुधा दोनों प्रिया के घर गए.हम से प्रिया के सब घरवाले बहुत खुल कर मिले, ख़ास तौर पर प्रिया.
मैंने नोट किया कि प्रिया का इकहरा शरीर आकर्षक रूप से थोड़ा भर गया था, वक्ष थोड़े ज्यादा सख़्त और ज्यादा उभर आये थे, फ़िगर भी शायद 34-26-34 हो चला था. काली आँखों में चमक और बढ़ गयी थी, प्राकृतिक रूप से गहन गुलाबी होंठ थोड़े और भर गए थे जिस से होंठों का कटाव और कातिल हो गया था. सर के गहरे भूरे बाल ज्यादा सिल्की हो गए थे, साफ़ गेहुंए रंग के जिस्म की रंगत में एक चमक थी और कदम धरते वक़्त पुष्ट जांघों और ठोस नितम्बों में हलकी सी हिलोर उठती थी.
कुदरत ने क़ातिल को तमाम हथियारों से नवाज़ दिया था और किसी ना किसी पर कयामत बरपा हो के रहनी ही थी.
हमारे घर में रहते या कभी हॉस्टल में रहते वक़्त जब प्रिया हमारे घर आती तो ‘मौसा जी! नमस्ते’ कह कर ही इतिश्री कर देती थी लेकिन उस दिन अपने घर में तो प्रिया ‘मौसा जी!’ कह कर मुझ से ज़ोर से लिपट कर मिली. होंठों से होंठ सिर्फ दो इंच दूर थे और बाकी सारा शरीर एक दूसरे से मिला हुआ. मेरी बायाँ हाथ प्रिया की पीठ पर ठीक ब्रा की पट्टी के ऊपर और प्रिया के दोनों हाथ मेरी पीठ पर… प्रिया का दायाँ उरोज़ मेरी छाती में इतनी ज़ोर से गड़ा हुआ था कि मैं स्पष्ट रूप से अपनी छाती पर प्रिया के उरोज़ का सख़्त निप्पल महसूस कर सकता था, प्रिया की दायीं जांघ मेरी दोनों टांगों के बीच थी और चूंकि मैं प्रिया से लंबा था फलस्वरूप मेरा लिंग प्रिया की नाभि की बगल में लग रहा था और मुझे ऐसा लगा कि प्रिया जानबूझ कर अपने पेट से मेरे लिंग को दबाया भी.एक क्षण में मेरे लिंग में ज़बरदस्त तनाव आ गया और मुझे लगा कि प्रिया ने मेरी पीठ पर एक जोर से चिकोटी भी काटी थी शायद!
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05-13-2019, 12:20 PM,
#12
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
अब तक अपने पढ़ा कि प्रिय के घर उसकी शादी की बात चल रही थी पर प्रिया मान नही रही थी तो मेरी साली और साढू ने प्रिया को समझाने के लिऐ हमे बुला लिया
अब आगे-

अलग होते वक़्त प्रिया ने कपड़ों के ऊपर से ही अपने बाएं हाथ से मेरे लिंग को भी टटोला. यह सब कुछ क्षण भर में, सब घर वालों के सामने ही हुआ और किसी को भनक तक नहीं लगी. अलग होते वक़्त प्रिया की आँखों में वही बिल्लौरी चमक और होठों पर वही कातिल मुस्कान थी.मैं थोड़ा बदहवास सा हो चला था… मुझे प्रिया से ऐसी दीदा-दिलेरी की उम्मीद हरगिज़ ना थी. कस्बई लड़की शहर में रह कर सयानी हो चली थी.
मामला यह था कि प्रिया के माँ-बाप ने प्रिया के लिए एक लड़का भी देख रखा था जो आस्ट्रेलिया में था लेकिन प्रिया जिद वश हाँ नहीं कह रही थी. मेरी और सुधा की प्रिया को समझाने की लम्बी कोशिश (जिस में असली मुद्दा तो यह था कि आस्ट्रेलिया जा कर प्रिया अपने मां-बाप की दकियानूसी रोक-टोक से आज़ाद रहेगी और कुछ अपना अपने तौर पर कर पाएगी.) के बाद प्रिया ने अपने माँ-बाप को उस रिश्ते के लिए हाँ कह दी.
शाम को वापिसी में और घर आ कर भी मैं कुछ अजीब सा खालीपन महसूस कर रहा था.‘प्रिया की शादी हो जायेगी… प्रिया ऑस्ट्रेलिया चली जायेगी… फिर जाने प्रिया से मुलाक़ात कब होगी… होगी भी या नहीं… पता नहीं? वक़्त के साथ प्रिया की प्राथमिकतायें बदल जायेंगी और वो परी कथाओं जैसा हमारा मिलन भूली-बिसरी बात हो जायेगी. ओ भगवान! यह कहाँ ला कर पटका मुझे?’मुझे, मेरे जानने वाले बहुत ही प्रैक्टिकल सोच वाला व्यक्ति मानते हैं लेकिन यह सोच तो हरगिज़ प्रैक्टिकल ना थी.
जैसे-तैसे खुद को संभाला मैंने… दुनियावी तौर पर प्रिया पर मेरा किसी किस्म का कोई हक़ ही नहीं बनता था और सब से बड़ी बात यह थी कि मुझे अपना परिवार, अपनी बीवी जान से ज्यादा प्यारे थे. पर मन पर किस का ज़ोर चलता है.
अगले दिन शाम को जब मैं ऑफिस से घर आया तो देखा कि प्रिया की माँ और प्रिया के पिता यानि मेरी साली और साढू भाई घर आये बैठे थे. पूछने पर बताया कि आस्ट्रेलिया वाले लड़के ने आगामी नवंबर में आना है और प्रिया की शादी नवंबर में ही होगी.लेकिन लड़के ने कहा है कि प्रिया को बेसिक कम्प्यूटर कोर्स और अगर हो सके तो C++ का डिप्लोमा जरूर करवा दें. अब उन लोगों का कम्प्यूटर से खुद का नाता तो ईंट और कुत्ते वाला ही था तो वो लोग मेरी शरण में आये थे.
यह सब तो मेरे लिए चुटकी बजाने जैसा आसान काम था क्योंकि शहर के 80% कम्प्यूटर इंस्टिट्यूट मुझ से जुड़े थे. अभी तो अगस्त चढ़ा ही था सो इस फ्रंट पर तो कोई दिक्क़त नहीं थी.उन का इरादा यह था कि प्रिया मेरे सुझाये किसी अच्छे इंस्टिट्यूट में 2-3 घंटे की क्लास अटेण्ड करे और रोज़ घर वापिस लौट जाए पर मैंने उन लोगों को ऐसा समझाया कि C++ लैंग्वेज़ सीखने में बहुत मेहनत और समय चाहिए और समय ही हमारे पास कम है तो अच्छा रहेगा कि प्रिया रोज़ घर आने जाने के चक्कर में ना पड़ कर 3 महीने यहीं शहर में रहे और सीखे.
मुझे पता था कि आम तौर पर कम्प्यूटर इंस्टिट्यूटस का अपना कोई हॉस्टल नहीं होता सो इस नेक काम के लिए मेरा घर तो था ही!
थोड़ी ना-नुकर के बाद प्रिया के मां-बाप ने इस के लिए हाँ कर दी.‘प्रिया आने वाले 3 महीने हमारे घर में रहने वाली है.’ सोच कर ही मेरे लिंग में तनाव आ गया.
अगले ही दिन मैंने एक बहुत नामी कम्प्यूटर इंस्टिट्यूट के मालिक से बात पक्की की जिसने एक-आध दिन पहले ही सुबह 10 से 2 टाइमिंग का नया बैच शुरू किया था और उसी शाम को थोड़ा अँधेरा हुये मैं अपनी कार पर प्रिया को लेने प्रिया के घर जा पहुंचा. चूंकि सुधा ने सब कुछ पहले से ही फ़ोन पर तय कर रखा था तो प्रिया पहले से ही तैयार थी.
प्रिया मोरपंखिया कुर्ते और काली लैगी में कहर ढा रही थी. प्राकृतिक तौर पर लाल होठों पर दिलक़श मुस्कान, बिना दुपट्टे का उन्नत वक्ष, पतला कटि-प्रदेश, सपाट पेट, अर्ध-गोलाई लिए कसे हुये नितम्ब, पुष्ट जाँघें, पारे से थिरकते जिस्म का एक-एक कटाव नुमाया हो रहा था.
प्रिया को इस रूप में देख कर उत्तेजना से मेरा बुरा हाल था.पाठकगण! वैसे तो यह कोई ऐसा छुपा राज़ नहीं… लेकिन फिर भी बता देता हूँ कि इन जनाना लैगियों में नाड़ा नहीं होता, इलास्टिक होता है जिस कारण जल्दी से लैगी उतारना और पहनना बहुत सुविधाजनक होता है और गाहे-बगाहे हाथ अंदर सरका कर स्त्री की योनि से खेलने और भगनासा सहलाने में बहुत सुविधा रहती है.
जल्दी से चाय आदि पी कर मैंने प्रिया को ले कर वापस कार मोड़ी. आने वाले आधा-पौना घण्टा कार में मैं और प्रिया बिलकुल अकेले होंगे, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. उत्कंठा के मारे मेरा गला सूख रहा था. क्या करूंगा मैं…??? क्या मैं और प्रिया कार की पिछली सीट पर ही रति-रमण करेंगे या मैं प्रिया को अपनी लैगी और पैंटी नीचे कर के अपनी ओर प्रिया का मुंह कर के अपनी गोद बिठा कर ऊपर से प्रिया के गुलाबी होठों का रस चूसूंगा और नीचे से मेरा लिंग प्रिया का योनि-भेदन करेगा?
‘ना ना! हट… छिः छिः! यह कैसी छिछोरी सोच…?? यह तो वासना है… निकृष्टतम वासना… विकृत वासना का घिनौना रूप…!’ मेरे सोये विवेक ने वापिस अंगड़ाई ली.
‘मैं तो प्रिया से प्यार करता हूँ… चाहे मुझे हक़ नहीं है ऐसा करने का, लेकिन करता हूँ. अपनी प्रियतमा से ऐसे पशुवत व्यवहार की कल्पना भी अपराध है!!! थू… थू… थू!!!’मैं थोड़ा सयंत हुआ और कार के शीशे चढ़ा कर मैंने कार मंथर गति से आगे बढ़ाई.
क़स्बे की हद से निकलते ही मैंने हिम्मत कर के अपना बायाँ हाथ गियर रॉड से उठा कर प्रिया के दायें हाथ पर रखा दिया. तत्काल एक लहर सी प्रिया के रोम रोम से गुज़र गयी जिसे मैंने स्पष्ट महसूस किया. प्रिया ने मेरे हाथ में अपने हाथ की उंगलियाँ कस कर पिरो दी. मैंने एक पल के लिए प्रिया की ओर देखा. सामने से आते किसी वाहन की हैडलाईट के नीम उजाले में प्रिया की कजरारी आँखों में वही बिल्लौरी चमक और गुलाबी होंठों पर वही जानी-पहचानी मोनालिसा मुस्कान दिखी.
हम दोनों एक दूसरे से कुछ बोल तो नहीं रहे थे लेकिन मौन सम्प्रेषण चालू था. प्रिया के शरीर में रह रह कर उत्तेज़ना की तरंग उठ रहीं थी जिन के फलस्वरूप प्रिया का हाथ मेरे हाथ पर कस कस जाता था जिन्हें मैं स्पष्ट महसूस कर रहा था. मैं निःसंदेह जन्नत में था.

कहानी जारी रहेगी.
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05-13-2019, 12:22 PM,
#13
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
अपने पढ़ा कि कैसे मेरी साली की युवा बेटी कम्प्यूटर कोर्स करने मेरे यहाँ रहने आ रही है. इस समय वो मेरे साथ कार में है.अब आगे:
दो पल बीते या सदियाँ गुज़र गयी, कुछ पता नहीं. अचानक मेरे कानों में प्रिया की आवाज़ सुनाई दी…“मैंने आप से एक बात करनी है.”“कहो…!”“आप बुरा ना मानना… प्लीज़!”“अरे नहीं… तुम बोलो?” मैंने घूम कर एक नज़र प्रिया की ओर देखा.
नज़र झुकाये, अपने दोनों हाथों में मेरा हाथ थामे, प्रिया ग्रीक की कोई देवी की मूरत सी लग रही थी.“आप मेरे जीवन के प्रथम-पुरुष हैं, मैं मन ही मन आप को पूजती हूँ और मेरे दिल में हमेशा आप की एक ऊंची और ख़ास जगह है और हमेशा रहेगी. इस के साथ ही यह भी सच है कि आप का और मेरा साथ किसी भी सूरत संभव नहीं. मेरी आप से विनती है कि जिसे मैंने अपने मन-मंदिर का देवता माना है वो देवता ही रहे.”“मैं समझा नहीं?” मैंने अनजान बन कर पूछा हालांकि समझ तो मैं गया ही था.

“आप के और मेरे बीच एक बार जो हुआ वो किस्मत थी लेकिन मैं सुधा मौसी को बहुत प्यार करती हूँ और हरगिज़-हरगिज़ नहीं चाहती कि मैं उन के दुःख का कारण बनूँ. इंसान फ़ितरतन लालची है उसे और… और… और चाहिए लेकिन मैं नहीं चाहती कि इस और… और के लालच में ये जन्नत जो आज मेरे पास है, मैं उसे भी खो बैठूं!”“प्रिया! साफ़ साफ़ कहो कि तुम मुझ से चाहती क्या हो?”
“आइंदा क़रीब तीन महीने मुझे फिर से आप के घर में रहना है और मैं चाहती हूँ कि वहाँ घर में आप ना सिर्फ़ सब के सामने बल्कि अकेले में भी सिर्फ मेरे मौसा जी ही बन कर रहें.”
बहुत गहरी बात थी लेकिन बात तो प्रिया ठीक कह रही थी पर उस की इस बात से मेरे अन्तर्मन को गहरी ठेस लगी. शायद नकारे जाने का अहसास था. मेरा हाथ जिस में प्रिया का हाथ कसा हुआ था फ़ौरन ढीला पड़ गया. प्रिया को तत्काल इस का भान हुआ और उस ने मेरा हाथ अपने हाथ में जोरों से कस लिया और मेरा हाथ यहाँ वहाँ चूमने लगी.
अचानक मेरी हथेली के पृष्ठ भाग पर पानी की दो गर्म गर्म बूंदें गिरी. मैंने तत्काल अपना हाथ छुड़ा कर कार साईड में रोकी और प्रिया की ओर मुड़ा, उसकी ठुड्ढी उठा कर देखा तो प्रिया की आँखों से गंगा-जमुना बह रही थी.मेरा दिल भर आया, जैसे ही मैंने उसे खींच कर अपने गले से लगाया तो मानो कोई बाँध ही टूट गया. प्रिया मुझ से कस कर लिपट गयी और ज़ार-ज़ार रोने लगी और मैं अनजाने में ही प्रिया के कपोलों पर से अपने होंठों से उस के आंसू बीनने लगा.
कुछ ही क्षणों के बाद मैं प्रिया के होंठ चूम रहा था और प्रिया मेरे!अचानक प्रिया ने मेरे मुंह में अपनी जुबान धकेल दी और मैं आतुरता से प्रिया की जुबान चूसने लगा, अपनी जीभ से प्रिया की जीभ चाटी, प्रिया के उरोज़ मेरी छाती में धंसे जा रहे थे और मैं दोनों हाथों से प्रिया को आलिंगन में ले कर अपनी ओर खींचे जा रहा था. प्रिया के होंठ चूमें, गालों पर, आँखों पर, माथे पर दर्ज़नों चुम्बन लिए, दोनों कानों की लौ चूसी, कानों के पीछे, गर्दन पर अपनी जीभ फेरी. दोनों उरोजों के बीच की घाटी को चूमा-चाटा पर सब्र कहाँ?
हम लोग बड़ी ही असुविधजनक स्थिति में बैठे थे लेकिन परवाह किस को थी. दोनों की साँसें इतनी तेज़ हो रही थी जैसे मीलों भाग कर आए हों. कार में इस से ज्यादा कुछ होने/करने की गुंजायश भी नहीं थी. धीरे-धीरे प्रेम-उद्वेग हल्का पड़ा तो दोनों के होशो-हवास वापिस आये. रात 9 बजे… बिज़ी नेशनल हाईवे पर खड़ी कार में प्रेम-आलाप… अव्वल दर्ज़े की मूर्खता के सिवा कुछ और हो ही नहीं सकता.मैंने धीरे से प्रिया को अपने-आप से अलग किया, प्यार से उसके चेहरे पर अपना हाथ फिराया, बाल पीछे किये, आँखें पौंछी और माथे पर एक चुम्बन लिया.
प्रिया मुस्कुरा दी. वही जादुई मुस्कान जो सारे गम बिसरा दे. मैंने इक निःश्वास भरी- ठीक है प्रिया! जैसा तुम चाहती हो वैसा ही होगा.“थैंक्यू! आप ने मेरे शब्दों की लाज रखी. आप कुछ भी मुझ से मांग सकते हैं… भगवान-कसम! मैं दे दूंगी.”“छोड़! जाने दे.”“नहीं प्लीज़! आप कहिये…. मुझे ख़ुशी मिलेगी.”“नहीं… जाने दे.”“अरे! कहिये तो… आप को मेरी कसम.”“अरे छोड़! मैं तुझ से प्यार करता हूँ और जिस से प्यार करते हैं उस को दिया करते हैं, उस से मांगा नहीं करते.”“चाहे दिल में कोई अधूरी तमन्ना… दिन-रात का चैन हराम किये रखे… तो भी??
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05-13-2019, 12:22 PM,
#14
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
क्या कहना चाह रही थी लड़की? क्या उसे मेरे दिल में पल रही ख्वाहिश का पता चल गया था? हो ही नहीं सकता. यह बात तो मैंने ख़ुद अपने से भी नहीं कही थी किसी और से कहने की बात तो बहुत दूर की कौड़ी थी. मैं नज़रें फेर कर चुप सा ही रहा और प्रिया अपनी गहन दृष्टि सर मेरे चेहरे के भाव पढ़ती रही.“ओ.के! अब अगर मैं आप से कुछ माँगूँ तो क्या आप मुझे देंगें??” कुछ पल बाद प्रिया ने पूछा.“तेरे लिए… कुछ भी! जान मांगे तो जान भी!!” कहते-कहते जाने क्यों मेरी आँख भर आयी.
प्रिया ने हाथ बढ़ा कर मेरा मुंह अपनी ओर किया और मेरी आँखों में आँखें डाल कर बोली- लाखों, करोड़ों दुआएं क़ुबूल होने पर मिली मुराद जैसा उस रात का मिलन… एक बार! सिर्फ़ एक बार और… फिर से मुझे दे दीजिये.प्रिया की यह बात सुन कर मैं भौंचक्का सा रह गया.हे भगवान्… यह चमत्कार कैसे हुआ? क्या प्रिया ने मेरा दिमाग पढ़ लिया था?“लेकिन इस बार अँधेरे की बजाए उजाले में…” मैंने पलट कर कहा.
क्षण भर के लिए प्रिया के चेहरे पर उलझन की बदली सी छायी… लेकिन जैसे ही उस को बात समझ में आयी तो उस के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, चेहरे पर हया की लाली छा गयी और उसने दोनों हाथों से अपना चेहरा छिपा लिया.“अगर ऐसा करने में तुम्हें कोई परेशानी है तो रहने दे प्रिया!”
प्रिया ने तिरछी नज़र से मेरी ओर देखा और बोली- ठीक है! जैसा आप चाहो… पर समय सीमा कोई नहीं.”“लेकिन यक़ीनन तेरी शादी से पहले!”“देखेंगे!!” प्रिया के हाव भाव में फिर से शरारत लौट आयी.मैंने कार स्टार्ट की और हम घर वापिस आ गए.
तमाम शिक़वे-शिकायतें दूर हो गए थे और मन हल्का हो गया था. इक अनाम सी ख़ुशी दिल में हिलोर मार रही थी. जिंदगी फिर शुरू हो गयी थी. प्रिया वापिस अपने कमरे में सैटल हो गयी थी. पाठक-गण! आज भी हमारे घर में उस कमरे को ‘प्रिया वाला रूम’ ही कहते हैं.
प्रिया रोज़ 9 बजे तैयार हो कर एक्टिवा लेकर कम्प्यूटर इंस्टिट्यूट चली जाती थी और करीब ढ़ाई बजे वापिस आ कर खाना खा कर थोड़ी देर आराम करती थी. पांच से सात सुधा के साथ रसोई आदि का काम, सात से नौ अपने कम्प्यूटर पर प्रेक्टिस, नौ बजे डिनर, साढ़े नौ से सोने के टाइम तक बच्चों और सुधा के साथ गप-शप.मेरा और प्रिया का आमना-सामना आम तौर पर डिनर टेबल पर या कभी कभार जब मैं ऑफिस से आता था तो प्रिया मुझे पानी देने आती थी… तब होता था. पानी का गिलास मुझे थमाते वक़्त प्रिया के होंठों पर वही ‘मोनालिसा मुस्कान’ देख कर मेरा मन तो कई बार मचला लेकिन क्या करता… वचन-बद्ध था.
दो-एक महीने बाद मैंने गौर किया कि प्रिया भी सुधा के साथ हर शनिवार शाम को ब्यूटी-पॉर्लर-कम-स्पा जाने लगी थी.एक रात सोने से पहले मैंने सुधा से इस बारे में पूछा तो उसने हंस कर कहा- अब उसकी शादी होने वाली है तो अपने शरीर को अपने पति का स्वागत करने के लिए तैयार कर रही है.“पति के स्वागत की तैयारी? मैं समझा नहीं?”“अरे बुद्धूराम! मैनिक्योर, पैडीक्योर, नेल-कलरिंग, नेल-पॉलिशिंग, स्किन-टोनिंग, फुल बॉडी वैक्सिंग, थ्रैडिंग, हेयर स्टीमिंग, हेयर कंडिशनिंग, स्टीम-बाथ, फुल बॉडी ऑइल-मसाज़ आदि आदि.”
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05-13-2019, 12:24 PM,
#15
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
“फुल बॉडी ऑइल-मसाज़? मतलब… सारे कपड़े उतार के?”“और नहीं तो क्या… कपड़े पहन कर?”“यार! तुम औरतें भी ना! अच्छा! एक बात बताओ… औरतें प्यूबिक हेयर भी वैक्स करवाती हैं?” (प्यूबिक हेयर मतलब- योनि के आस पास के बाल)“हाँ! बहुत करवाती हैं लेकिन मैं नहीं करवाती… पर प्रिया करवाती है.”
हुस्न की शमशीर को धार लग रही थी, कोई किस्मत वाला परम मोक्ष को प्राप्त होने वाला था. प्रिया के रेशम-रेशम जिस्म की कल्पना करते ही मेरे लिंग समेत मेरे जिस्म का रोयाँ-रोयाँ खड़ा हो गया और उस रात बिस्तर में मैंने सुधा की हड्डी पसली एक कर के रख दी.
ऐसे ही अक्टूबर का आखिरी हफ्ता आ पहुंचा. बच्चों को दशहरे की छुट्टियाँ थी. प्रिया का कंप्यूटर कोर्स भी अपने अंतिम चरण में था, पांच-छह दिन की और बात थी, 02 नवंबर को प्रिया ने घर लौट जाना था.प्रिया का मंगेतर 10 नवंबर को आने वाला था और शादी 19 नवंबर की फ़िक्स थी.
इधर प्रिया ने अभी तक मुझे अपने पुट्ठे पर हाथ तक नहीं धरने दिया था. मुझे अपने सपने का भविष्य बहुत अंधकारमय लग रहा था.
फिर अचानक एक चमत्कार हो गया. उसी शाम मेरी पत्नी सुधा के एक चाचा श्री हमारे घर पधारे. यह साहब एक बड़े ट्रांसपोर्टर है और इन की कोई 70-80 A.C टूरिस्ट बसें पूरे उत्तर भारत में चलती हैं, इन साहब ने अपनी कोई मनौती पूरी होने के उपलक्ष्य में अपने गोत्र की सारी लड़कियों समेत वैष्णो देवी दर्शन के लिए पूरी AC स्लीपर वाली वॉल्वो बस बुला रखी थी. यह साहब उस यात्रा के लिए हमें न्यौता देने आये थे. वीरवार रात को निकलना था, शुक्रवार सारा दिन चढ़ाई कर के दर्शन करने थे, शुक्रवार रात वहाँ से वापसी कर के शनिवार सवेरे वापिस घर पहुँच जाना था.
सुधा का बहुत मन था जाने का लेकिन मेरा जाना मुश्किल था क्यों कि सीज़न का समय था, मैं घर से सुबह का निकला रात 9-10 बजे घर आता था. चूंकि प्रिया का कंप्यूटर कोर्स आँखिरी चरण में था तो प्रिया भी सुबह की गयी शाम 5 के करीब घर वापिस आ पाती थी. तो प्रिया की मम्मी को साथ चलने के लिए फ़ोन लगाया गया और साली साहिबा भी फटाक से सुधा के साथ चलने को तैयार हो गयी.
फ़ाइनल प्रोग्राम यह बना कि प्रिया की माताश्री वीरवार शाम तक हमारे घर आ जाएंगी और सुधा और उन को मैं वीरवार शाम को चाचा जी के घर जा कर बस चढ़ा आऊंगा और शनिवार सुबह को चाचा जी के घर जा कर ले आऊंगा. दोनों बच्चे यहीं हमारे पास रहेंगें. एक ही दिन की तो बात थी.
वीरवार शाम 7 बजे के लगभग मैं घर आया तो देखा कि मेरे दोनों बच्चों ने रो रो कर आसमान सर पर उठा रखा था, दोनों अपनी मां और मौसी के साथ जाने की जिद कर रहे थे. बड़े धर्म-संकट की स्थिति थी. भगवान् जाने! बस में अब एक्सट्रा स्लीपर उपलब्ध था भी या नहीं!सुधा ने बहुत सकुचाते हुए चाचाजी को फ़ोन लगाया गया और मसला बयान किया. सुन कर चाचा जी फ़ोन पर ही रावण जैसी ऊँची हंसी हंसे और बोले- कोई बात ही नहीं… 5-7 जन और हों तो उन्हें भी ले आओ. बस एक नहीं, दो जा रहीं हैं. तुम लोग… बस! आ जाओ!
मामला हल हो गया था, आनन फ़ानन में बच्चों का भी बैग पैक किया गया. करीब 8 बजे मैं इन चारों को चाचा श्री के घर छोड़ने निकल पड़ा. प्रिया भी हमारे साथ ही थी. अचानक मुझे एक झटका सा लगा और महसूस हुआ कि आज की रात तो मुरादों वाली रात हो सकती है… आने वाले करीब 36 घंटे मेरी तमाम जिंदगी की हसरतों का हासिल हो सकते थे. ऐसा सोचते ही मैं तनाव में आ गया.
तभी सुधा ने पूछा- क्या बात है? आप अचानक चुप से क्यों हो गए?“ऐसे ही… तुम अपना और बच्चों का ख्याल रखना.”“अरे! एक दिन की तो बात है. आप फ़िक्र ना करें. बस आप कल शाम को टाइम से घर आ जाना, लेट मत होना. प्रिया घर में अकेली होगी.”“ठीक है.”
उन चारों को चाचा जी के घर छोड़ कर, जहाँ सब के लिए डिनर का प्रोग्राम भी था और साफ़ दिख रहा था कि बसें 11 बजे से पहले नहीं चलेंगी. खाना-वाना खा पी कर मुझे और प्रिया को वापिस घर पहुँचते पहुँचते 10:30 बज गए.घर पहुँचते ही प्रिया कार से उतर कर दौड़ कर अपने कमरे में जा घुसी और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया.
मैंने गैरेज का शटर डाउन किया, मेन-गेट को अंदर से ताला लगाया और अंदर दाखिल हुआ, कपड़े बदले और किचन में जा कर कॉफ़ी बनायी.“प्रिया… कॉफी पियोगी?” मैंने आवाज लगाई.कोई जबाब नहीं मिला.दोबारा आवाज़ लगाई… फिर कोई जवाब नहीं!अजीब बर्ताब कर रही थी लड़की!ख़ैर! मैं अपना कॉफ़ी का मग उठा कर प्रिया के दरवाज़े के पास आया और पूछा- प्रिया! ठीक हो?“हूँ” की एक मध्यम सी आवाज़ सुनाई दी.
मैं दो पल वहीं खड़ा रहा और फिर कॉफ़ी सिप करता करता अपने बैडरूम में आ गया. मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो गया था लड़की को?सिप-सिप कर के मैंने अपनी कॉफ़ी ख़त्म की और वाशरूम में जा कर पहले ‘अपना हाथ, जगन्नाथ’ किया, फिर ब्रश किया. अंडरवियर उतार कर लॉन्ड्री-बास्केट में डाला और बिना अंडरवियरके नाईट सूट पहन लिया.
अजीब बात थी… मैं और मेरी मुजस्सम मुमताज़ घर में अकेले थे लेकिन एक नहीं हो पा रहे थे.यही वो प्रिया थी जो सवा डेढ़ साल पहले सुधा की मौजूदगी में भी मुझ से प्यार करने में नहीं हिचकी थी और आज जब कि घर में किसी के होने का, किसी को पता चल जाने का, मुहब्बत का राज़ फाश हो जाने जैसा कोई खतरा नहीं था तो ‘वो’ अपनी मर्ज़ी से, अपने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर के बैठी थी.
बेड पर अधलेटे से बैठे, ऐसा सोचते सोचते जाने कब मेरी आँख लग गयी. ट्यूब लाइट भी जलती रह गयी. बैडरूम का दरवाज़ा तो खुला था ही!
कहानी जारी रहेगी.
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05-13-2019, 12:25 PM,
#16
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
आपने पढ़ा कि प्रिया मेरे घर में मेरे साथ अकेली है, रात हो चुकी है, वो एक बेडरूम में गयी और उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.
मैं मायूस सा हुआ और हस्तमैथुन करके आकर अपने बेडरूम में सो गया.

अब आगे:

रात नींद में ही मैंने करवट ली तो किसी नर्म-गुदाज़ चीज़ से मेरा हाथ टकराया. यह एक जनाना कंधा सा था. मैंने झट्ट से आँखें खोली तो पाया कि बैडरूम का दरवाज़ा भी बंद था और बैडरूम की ट्यूब-लाइट तो बंद थी ही अपितु फुट-लाइट भी बंद थी. पूरे बैडरूम में घुप्प अँधेरा छाया हुआ था.
मैंने कपड़ों की हल्की सी सरसराहट और साँसों की मध्यम सी आवाज़ सुनी. मेरे ही बैड पर, मेरे दायीं ओर कोई था. एक पल को तो मेरे रौंगटे खड़े हो गए लेकिन जैसे ही मुझे प्रिया के वहाँ होने का ध्यान आया तो मेरे लिंग में भयंकर तनाव आ गया. मैंने अपना बायाँ हाथ आगे बढ़ाया तो प्रिया का मरमरी और नाज़ुक हाथ मेरे हाथ पर कस गया.

अँधेरे में साईड-वॉल पर रेडियम वाल-क्लॉक 1:10 का टाइम दिखा रही थी. दो चार पल मैं बिना कोई हरकत किये ऐसे ही करवट लिए पड़ा रहा. अचानक मैंने अपने सिरहाने लगी टेबल लैंप ऑन कर दिया.सचमुच यह प्रिया ही थी. प्रिया ने तत्काल मेरा हाथ छोड़ा और चादर अपने सर तक ओढ़ ली और अपना सर जोर जोर से दाएं-बाएं हिलाती हुयी घुटी सी आवाज़ में बोली- प्लीज़… नहीं! लाइट बंद कर दीजिये.“मगर क्यों?”“मुझे शर्म आती है.”“शर्म आती है… मगर किस से?”“मुझे नहीं पता… लेकिन आप लाइट बंद कर दीजिये.”“लेकिन यहाँ तो मैं और तुम ही हो और तीसरा तो कोई है ही नहीं.”“पता है… पर प्लीज़ लाइट बुझाइये.”“प्रिया! लाइट बंद कर दी तो वादा कैसे पूरा होगा? ”“मुझे नहीं पता… लेकिन आप लाइट बंद कीजिये.”
अगर मेरी प्रियतमा को ये सब छुप छुप कर करना पसंद था तो ठीक है… मैं जो उस को पसंद है वैसे ही करूंगा. मैंने हाथ बढ़ा कर टेबल लैम्प बंद कर के हल्की नीली लाइट वाली नाईट लैंप जला दी.प्रिया ने चादर से सर बाहर निकाला और नीली लाइट जलती देखकर मेरी ओर शिकायत भरी नज़रों से देखा लेकिन कहा कुछ नहीं. चलो! बात थोड़ा तो आगे बढ़ी. अब तक मैं पूर्ण तौर पर चैतन्य हो चुका था.
“सुनो!” अचानक प्रिया ने सरगोशी की.“सुनो!” की प्रिया की आवाज़ सुन कर मुझे हल्का सा झटका सा लगा. यह संबोधन मेरे लिए सिर्फ सुधा प्रयोग करती थी. मैंने तकिये पर से सर उठाया और प्रिया की ओर सवालिया नज़रों से देखा.“उठो तो… ज़रा!” प्रिया ने इल्तिज़ा सी की.” ठूँ…?? बोले तो…?”“अरे बाबा! उठ कर खड़े हो जरा…!”“बैड पर…?”“ज़मीन पर!!… बुद्धू राम!”
एक झटका और लगा. सिर्फ सुधा ही कभी-कभार एकांत में मुझे बुद्धूराम कहती थी. भगवान् जाने… क्या चल रहा था लड़की के दिमाग में? मैं आहिस्ता से उठा और बैड से नीचे उतर कर फर्श पर खड़ा हो गया.“ज़रा ट्यूब-लाइट जलाओ तो.”प्रिया के लफ़्ज़ों में एक अधिकारपूर्ण और सत्तात्मक गूँज सी थी. मैंने नाईट-लैंप ऑफ़ कर के ट्यूब-लाइट ऑन कर दी. तभी प्रिया बैड के परली तरफ से नीचे उतर आयी और आ कर ठीक मेरे सामने खड़ी हो गयी. अजीब हालत थी मेरी… बिना अंडरवियर के मेरा लिंग पजामे को तम्बू बनाये हुये था.“अब आगे क्या?” मैंने मज़ाकिया लहज़े में पूछा.
अचानक ही प्रिया ने झुक कर अपने दोनों हाथों से मेरे पैर छू कर अपना दायाँ हाथ अपनी मांग में ऐसे फेरा जैसे सिन्दूर लगाते हैं.पल-भर के लिए मैं स्तब्ध रह गया- यह… यह क्या कर रही हो… प्रिया?कहते हुए मैंने प्रिया को दोनों कांधों से पकड़ कर उठाया.देखा तो काली कजरारी आँखों में आंसू बस गिरने की कगार तक भरे थे.
“मेरा ईश्वर गवाह है कि आप मेरे जीवन में आये प्रथम पुरुष हैं और उस रात के बाद से मैंने हमेशा आप को अपने पति के रूप में ही देखा और चाहा है. आज के बाद हम दोनों की जिंदगी में क्या क्या मोड़ आएं… मैं नहीं जानती लेकिन जो अभिसार अभी आप के और मेरे बीच में होने वाला है, मैं चाहती हूँ कि उसका स्वरूप एक पति-पत्नी के अभिसार का हो… ना कि प्रेमी-प्रेमिका के अभिसार का. आने वाले चंद घंटे मैं पूर्ण तौर पर आप की अर्धांगिनी की तरह गुज़ारना चाहती हूँ. इन चंद घंटों की मीठी याद के सहारे मैं जिंदगी की मुश्किल से मुश्किल दुश्वारी हसीं-ख़ुशी सह लूंगी. क्या आप आज मुझे यह अधिकार देंगें?”
बाप रे! … तो ये सब चल रहा था प्रिया के दिमाग में! अब मैं समझा सारी बात. मेरे गले लग कर बेवज़ह रोना, अधिकारपूर्ण मुझे पुकारना, मेरे पांव छूना और फिर मेरे पांव की वही धूल अपनी मांग में लगाना… प्रिया खुद को सुधा के स्थान पर रख कर मुझे अपना पति कह रही थी.“प्रिया! आने वाले चंद घंटे तो क्या तू हमेशा मेरे दिल में मेरी अपनी बन कर रहेगी. हो सकता है कि हम बरसों ना मिले लेकिन याद रखना कि मुझ पर तेरा इख़्तियार और अधिकार सुधा से कम नहीं.” कहते हुए मैंने भी कुछ भावुक हो गया और प्रिया को अपने अंक में समेट कर उस के माथे पर प्यार की मोहर लगा दी
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05-13-2019, 12:25 PM,
#17
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
ज़वाब में प्रिया ने मुझे जोर से अपने आलिंगन में ले लिया. आलिंगन में बंधे-बंधे दोनों बैड पर आजू-बाजू (मैं दायीं तरफ, प्रिया बायीं तरफ) लेट गए. अब की बार प्रिया ने मुझे ट्यूब-लाइट बंद करने को नहीं कहा.“अच्छा प्रिया! दो-एक बातें तो बता?”प्रिया की भवें प्रश्नात्मक तौर पर मेरी ओर उठी.
“आम तौर पर तू मुझे “मौसा जी नमस्ते” कह कर ही टाल देती रही है लेकिन उस दिन जब मैं और सुधा तेरे घर गए थे तो क्या हुआ था तुझे?”“उस दिन? उस दिन आप के आने से ज़रा पहले मेरी अपने पापा से जोरदार बहस हुई थी और उस टाइम मैं दिल से आप को याद कर रही थी.”“और वो मेरा लिंग दबाना, सहलाना और पीठ पर चिकोटी काटना?”” दबाने का तो ऐसा है कि वो या तो सिर्फ आप को पता या मुझे और यही बात पीठ पर चिकोटी काटने पर लागू होती है लेकिन सहलाने वाली बात का तो मैं कहूँगी कि वो सिर्फ एक एक्सीडेंट था.”” और आज जब हम वापिस आये थे तो क्या हुआ था तुझे? तू क्यों अपने कमरे में बंद हो गयी थी और कहने पर भी दरवाज़ा क्यों नहीं खोला तुम ने?”“आप समझे नहीं? पिछले तीन महीने से आप का इम्तिहान चल रहा था. इन तीन महीनों में आप ने मुझ से कभी कोई छिछोरी हरक़त नहीं की और आज शाम को आप का आखिरी इम्तिहान था. अगर आप ने मेरे कमरे का मुझ से दरवाज़ा खुलवाने की मनोमुनौवल की होती या जबरदस्ती दरवाज़ा खोलने की कोई जुगत की होती तो मुझे समझ आ जाना था कि आप सिर्फ एक जनाना जिस्म के पीछे पड़े हैं और प्रिया से आप को कोई लेना-देना नहीं और बीते समय में आप का मेरे साथ कोई ग़ैर-इखलाकी हरकत ना करने का कारण सिर्फ मौका नहीं मिलना ही था. अगर ऐसा होता तो मैंने आप को खुद को कभी भी छूने नहीं देना था और तमाम उम्र आप के साथ कोई वास्ता भी नहीं रखना था.”
तौबा तौबा! क्या खुराफाती सोच थी… लड़की की!“अच्छा! अब बता… मैं पास हुआ या फेल?”“आप को क्या लगता है?”“तू बता?”“मुझे ख़ुशी है कि जिसे मैंने देवता माना, वो सच में एक देवता ही है.”
भावावेश में मैंने प्रिया के चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी. हम दोनों के साँसों की गति निरंतर बढ़ती जा रही थी लेकिन इस से आगे ना वो बढ़ रही थी न मैं…लेकिन मैं पुरुष था… पहल तो मुझे ही करनी थी!आखिरकार आहिस्ता से मैंने अपना दायाँ हाथ ऊपर उठा कर प्रिया के बायें गाल पर रख दिया. प्रिया का दिल तेज़ी से धड़क रहा था, उसकी जलती गर्म सांसें मेरी कलाई झुलसाये जा रही थी. मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया तो मेरी तर्जनी और मध्यमा उंगली के बीच में प्रिया के बाएं कान की लौ आ गयी जिसे मैंने हल्के से मसल दिया.“सी… ई… ई… ई… ई… ई…!!!” शाश्वत आनन्द की पहली आनन्दमयी सिसकारी प्रिया के होंठों से फूट पड़ी. हम दोनों के बीच में कोई डेढ़-एक फुट का फ़ासला था. मैं थोड़ा सा प्रिया की तरफ़ सरका. अब मेरा दायाँ हाथ प्रिया की पीठ पर धीरे धीरे दायें-बायें, ऊपर-नीचे फिर रहा था. कपड़ों के ऊपर से प्रिया की कसी हुयी ब्रा की आउटलाइन स्पष्ट महसूस हो रही थी.
जैसे ही मैंने प्रिया का बायाँ हाथ उठा कर अपने ऊपर रखा तो प्रिया ने मुझे अपने साथ कस कर भींच लिया. दोनों के बीच का रहा सहा फासला भी ख़त्म हो गया. प्रिया के उरोज़ मेरी छाती में धँसे हुये थे और उस का बायाँ हाथ मेरी पीठ को कस कर जकड़े हुए था.कयामत तो तब बरपा हुई जब प्रिया ने अपनी बायीं टांग उठा कर मेरे ऊपर रख दी. कपड़ों के ऊपर से ही प्रिया की उतप्त योनि का ताप मेरे कठोर लिंग को जैसे जलाने पर आमादा था. मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई जलती हुयी अंगीठी मेरे लिंग के पास पड़ी हो.
मेरा दायाँ हाथ प्रिया की पीठ पर ऊपर-नीचे गर्दिश करता करता अब नितम्बों पर से होता हुआ, पैंटी-लाइन नापता-नापता योनि-द्वार तक जा रहा था. प्रिया की आँखें समर्पण के आनन्द के अतिरेक से बंद थी और प्रिया का पूरा जिस्म रह रह कर हल्के-हल्के झटके खा रहा था.
मैंने अपना बायाँ हाथ प्रिया की गर्दन के नीचे से ले जा कर प्रिया को अपनी ओर खींचा तो प्रिया के रस भरे होंठ मेरे प्यासे होंठों से आ मिले. तत्काल मैंने प्रिया के होठों का अमृतपान करना शुरू कर दिया.प्रिया भी आज बहुत गर्मजोशी से मेरा साथ दे रही थी.
अचानक मेरे निचले होंठ पर किसी मधुमक्खी ने डंक मारा हो जैसे… 

कहानी जारी रहेगी
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05-13-2019, 12:25 PM,
#18
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
मैं एकदम से हड़बड़ा गया और बैडरूम प्रिया की खनकदार हंसीं से गूँज उठा. प्रिया ने मेरे निचले होंठ पर काट लिया था. स्पष्ट था कि आज मेरा सामना छुई मुई प्रियतमा से नहीं बल्कि किसी जंगली बिल्ली से होने वाला था. मुझे सतर्क रहने की जरूरत थी लेकिन एक चीज़ मेरे हक़ में थी और वो थी मेरा बिस्तर में लम्बा अनुभव.प्रिया जिन शारीरिक अहसासों से अभी नयी नयी दो चार हो रही थी, वो सब मेरे बरसों के जाने पहचाने थे. मैंने प्रिया के होंठों पर फिर से अपने होंठ फिराने शुरू कर दिए. बीच बीच में प्रिया अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेरे होंठों की गति अवरुद्ध करने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं उस की जीभ को ही चाटना चूसना शुरू कर देता था जिस से प्रिया के जिस्म में बेचैनी और ज्यादा बढ़ती जा रही थी.
मेरे दोनों हाथ प्रिया की पीठ पर सख़्ती से क्रॉस हो रहे थे. जैसे ही मेरा कोई हाथ उसकी पीठ सहलाते सहलाते उसकी दायीं या बायीं बगल की ओर बढ़ता तो प्रिया उत्तेजनावश मुझे अपने आलिंगन में और जोर से कस कर मेरे मुंह पर यहाँ-वहाँ चुम्बनों की बारिश कर देती.
इधर मेरा दायाँ हाथ प्रिया की पीठ पर पहुँच कर कपड़ों के ऊपर से ही ब्रा का हुक टटोल रहा था. जैसे ही मेरी उंगलियाँ ब्रा के हुक पर ठहरती तत्काल प्रिया का बायाँ हाथ मेरे दाएं हाथ को इधर उधर झटक देता.
लड़की अभी और खेलने के मूड में थी…ठीक है! मुझे भी कोई जल्दी नहीं थी, सारी रात अपनी थी.
अब हालत यह थी कि हम दोनों के बीच में से हवा भी नहीं गुज़र सकती थी. उत्तेज़ना के मारे हम दोनों के दिल धक धक कर रहे थे. तत्काल मेरा दायाँ हाथ प्रिया के बाएं कंधे पर से गर्दिश करते-करते नीचे की ओर अग्रसर हुआ, कोहनी और कलाई से होते हुये अंदर पेट की ओर मुड़ गया. नर्म गुदाज़ पेट और मेरे हाथ के बीच में सिर्फ एक टीशर्ट का पतला सा आवरण था.मैं अपनी हथेली पर प्रिया के जवान और मदमस्त जिस्म की झुलसा देने वाली गर्मी साफ़ महसूस कर रहा था. मैंने अपना हाथ ज़रा सा नीचे किया तो टीशर्ट का निचला सिरा मेरी उँगलियों के नीचे आ गया.
मैंने फ़ौरन टीशर्ट का सिरा उठा कर अपना हाथ अंदर सरका दिया और इसके साथ ही प्रिया की टीशर्ट थोड़ी और ऊपर को ख़िसक गयी; तत्काल प्रिया के सारे शरीर में एक कंपकंपी सी हुई और प्रिया ने अपना दायाँ हाथ उठा कर मेरी गर्दन के नीचे से निकाल कर मुझे खींच कर अपने साथ लगा लिया.
अब मेरे दायें हाथ की उंगलियाँ प्रिया के सपाट पेट पर ब्रा की निचली सीमा से ले कर कैपरी के ऊपरी इलास्टिक की सीमा तक ऊपर-नीचे, दाएं बाएं हरकत करने लगी. मैं जानबूझ कर ना तो प्रिया के वक्ष को अभी सीधे हाथ लगा रहा था और ना ही उसकी योनि को!पेट पर ऊपर की ओर गर्दिश करती मेरी उंगलियाँ ब्रा की निचली पट्टी को छूते ही और ऊपर को जाने की जगह दायें बायें बग़ल की ओर मुड़ जाती थी, ऐसा ही नीचे की ओर उँगलियों की गर्दिश करते वक़्त प्रिया की कैपरी के ऊपरी इलास्टिक को छूते ही और नीचे जाने की बजाए पेट पर ही इधर उधर हो जाती थी.
अचानक मैंने गौर किया कि प्रिया की काँखें एकदम रोमविहीन हैं, वहाँ एक भी बाल नहीं था और बग़लों के नीचे की त्वचा एकदम नरम और मुलायम थी.“ऐसी ही बालों से रहित, रोमविहीन प्रिया की मनमोहक और कोमल योनि भी होगी…” ऐसा सोचते ही मुझ में तीव्र उत्तेज़ना की लहर उठी.
कहानी जारी रहेगी.आपको मेरी रोमांटिक सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है?मुझे सबकी प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा.

अगला अपडेट जल्द ही
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05-13-2019, 12:25 PM,
#19
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
आपने पढ़ा कि प्रिया मेरे घर में मेरे साथ अकेली है, रात हो चुकी है, वो मेरे बेडरूम में मेरे बेड पर है.
मैंने उसकी टीशर्ट में अपना हाथ सरका दिया और इसके साथ ही प्रिया की टीशर्ट थोड़ी और ऊपर को ख़िसक गयी; तत्काल प्रिया के सारे शरीर में एक कंपकंपी सी हुई और प्रिया ने अपना दायाँ हाथ उठा कर मेरी गर्दन के नीचे से निकाल कर मुझे खींच कर अपने साथ लगा लिया.
अब मेरे दायें हाथ की उंगलियाँ प्रिया के सपाट पेट पर ब्रा की निचली सीमा से ले कर कैपरी के ऊपरी इलास्टिक की सीमा तक ऊपर-नीचे, दाएं बाएं हरकत करने लगी. मैं जानबूझ कर ना तो प्रिया के वक्ष को अभी सीधे हाथ लगा रहा था और ना ही उसकी योनि को!पेट पर ऊपर की ओर गर्दिश करती मेरी उंगलियाँ ब्रा की निचली पट्टी को छूते ही और ऊपर को जाने की जगह दायें बायें बग़ल की ओर मुड़ जाती थी, ऐसा ही नीचे की ओर उँगलियों की गर्दिश करते वक़्त प्रिया की कैपरी के ऊपरी इलास्टिक को छूते ही और नीचे जाने की बजाए पेट पर ही इधर उधर हो जाती थी.
अचानक मैंने गौर किया कि प्रिया की काँखें एकदम रोमविहीन हैं, वहाँ एक भी बाल नहीं था और बग़लों के नीचे की त्वचा एकदम नरम और मुलायम थी.“ऐसी ही बालों से रहित, रोमविहीन प्रिया की मनमोहक और कोमल योनि भी होगी…” ऐसा सोचते ही मुझ में तीव्र उत्तेज़ना की लहर उठी.

ऊपर मैंने प्रिया के दायें कान की लौ होंठों से चुमकारना शुरू किया और मैं बीच बीच में प्रिया के कान में रह रह कर अपनी जीभ भी फिरा रहा था.“सी… ई… ई… ई… ई..ई..ई!!! आ… ई… ई..ई..ई!!! उफ़… फ़..फ़!!! आह… ह..ह..ह!! हा… ह..ह..ह!!!”
इस दोहरे काम-आक्रमण को झेलना प्रिया के लिए हर्गिज़ आसान न था; प्रिया के जिस्म में रह रह कर काम-तरंगें उठ रही थी और प्रिया के मुंह से आनन्ददायक सिसकारियों की आवाज़ ऊँची… और ऊँची होती जा रही थी और प्रिया की बेचैनी पल प्रतिपल उसके क़ाबू से बाहर होती जा रही थी.
अचानक प्रिया ने मुझे अपने से थोड़ा परे किया और अपने बाएं हाथ से मेरे नाईट-सूट के बटन खोलने की कोशिश करने लगी लेकिन एक हाथ से बटन खोलना और वो भी बाएं हाथ से… थोड़ी टेढ़ी खीर थी.बहुत कोशिश के बाद एक ही बटन खुल पाया. प्रिया ने शिकायत भरी नज़रों से मुझे देखा. मैंने तत्काल इशारा समझा और फ़ौरन अपने हाथों को फ़ारिग कर के चंद ही पलों में अपने नाईट-सूट के अप्पर के सारे बटन खोल दिए और उसे उतार कर परे फ़ेंक दिया.
अब मैं सिर्फ बनियान और पज़ामे में था और प्रिया के तन पर अभी भी टी-शर्ट और कैपरी थे.
मैंने प्रिया को कमर में हाथ डाल कर थोड़ा ऊपर उठाया और प्रिया के हाथ ऊपर कर के आराम से उस की टी-शर्ट निकाल दी. सफ़ेद कसी हुई ब्रा में प्रिया का कुंदन सा सुडौल शरीर मेरे सामने दमक रहा था. प्रिया ने हया-वश अपने वक्ष के आगे अपनी बाहों का क्रॉस बना कर सर झुका लिया. मैंने प्रिया का चेहरा उस की ठोढ़ी के नीचे उंगली लगा कर उठाया तो प्रिया ने शर्म के मारे आँखें बंद कर ली.
“आँखें खोलो प्रिया!”“उंहूं…! मुझे शर्म आती है.”“अरे खोलो तो… यहाँ कौन है तेरे मेरे सिवा?” मैंने दोनों हाथों से प्रिया के दोनों कंधे थाम लिए.
प्रिया ने हौले-हौले अपनी आँखें खोली तो मुझे सीधे अपनी काली कज़रारी आँखों में झांकते पाया.झट से प्रिया ने मेरी ही आँखों पर अपना हाथ रख दिया- आप मुझे ऐसे ना देखो प्लीज़… मैं तो शर्म से ही पिघल जाऊँगी.
मैंने बहुत नरमी से अपने एक हाथ से अपनी आँखों पर रखे प्रिया के हाथ को हटाया और उसी हाथ की हथेली का इक चुम्बन लेकर उसी हाथ की लम्बी पतली, नाज़ुक तर्जनी ऊँगली अपने मुंह में डाल ली और उसे चूसने लगा.
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05-13-2019, 12:26 PM,
#20
RE: Porn Kahani हसीन गुनाह की लज्जत
तत्काल प्रिया बेचैन हो उठी और अपनी उंगली मेरे मुंह में इधर उधर मोड़ने-तोड़ने लगी. तब तक मैं करीब क़रीब आधा प्रिया के ऊपर झुका हुआ था.अचानक ही प्रिया ने अपनी उंगली मेरे मुंह से निकाल ली और उसी हाथ का अंगूठा मेरे होंठों पर दाएं से बाएं, बाएं से दाएं फिराने लगी. बीच बीच में मैं मुंह से प्रिया का अंगूठा पकड़ने की कोशिश भी करता, लेकिन प्रिया अंगूठा किसी तरह छुड़ा लेती.
थोड़ी देर बाद ही मैंने प्रिया के दोनों हाथों की उंगलियाँ अपने दोनों हाथों की उँगलियों में लॉक कर के (अपना दायाँ हाथ प्रिया के बाएं हाथ में और अपना बायाँ हाथ प्रिया के दाएं हाथ में) सिरहाने के आजू बाजू रख दिए और सीधे प्रिया के ऊपर आ कर प्रिया की आँखों में झांका.प्रिया के होंठों पर वही मोनालिसा मुस्कान आयी और प्रिया ने अपनी उंगलियाँ मेरी उँगलियों में ज़ोर से कस दी.
क्या नज़ारा था…!!! साक्षात् रति भी इतनी सुन्दर ना होगी जितनी उस वक़्त प्रिया लग रही थी. मैंने झुक कर प्रिया के होंठों पर एक चुम्बन लिया, फिर धीरे से एक एक चुम्बन दोनों कपोलों पर लिया… एक ठोड़ी पर, एक गर्दन के बीच में ज़रा बायीं और दूसरा ज़रा दायीं ओर…प्रिया की गहरी साँसों में अब आनन्दमयी सीत्कारें निकलने लगी थी.
मैंने एक और चुम्बन ब्रा में कसे हुये दोनों उरोजों के मध्य में लिया और दोनों उरोजों में बनी दरार में अपनी जीभ घुसा दी.बस जी! कहर ही बरपा हो गया जैसे… प्रिया ने जोर से सीत्कार करते हुए ने जबरन अपने दोनों हाथ मेरे हाथों से छुड़ाए और दीवानावार मुझे यहाँ-वहाँ चूमने लगी; मेरे माथे पर… मेरे कंधे पर, मेरी गर्दन पर, मेरे सर पर.
प्रिया का बायाँ हाथ मेरी पीठ पर कस गया और दायाँ हाथ मेरे सर के पृष्टभाग पर जमा कर प्रिया मुझे ऐसे अपनी ओर दबाने लगी जैसे चाहती हो कि मैं उस के उरोजों में ही समा जाऊं. मैं प्रिया के उरोज़ों के बीच की दरार की लम्बाई अपनी जीभ से नापने में मशग़ूल था.“हा… हाँ, यहीं यहीं… और करो… यस! जोर से करो… यहीं हाँ यहीं… ओ गॉड!… आह हाय सी… ई..ई..ई!!! ” प्रिया आनन्द के सागर में अनवरत गोते लगा रही थी.
अचानक मैंने अपना सर जरा सा उठाया तो प्रिया की रोमविहीन आवरणहीन कोमल बायीं काँख पर मेरी नज़र पड़ी. मैंने अपनी जीभ को वक्षों की घाटी से निकला और प्रिया के बाएं वक्ष की ऊपरी सतह की कोमल और नाज़ुक त्वचा को चाटते-चूमते प्रिया की रोमविहीन बायीं बगल की ओर बढ़ा. प्रिया की बेफिक्र ऊंची-ऊंची आनन्दमयी सिसकारियाँ पूरे बैडरूम में गूँज रही थी.
जैसे ही मेरे होंठों ने प्रिया की बगल की नरम-नाज़ुक त्वचा को छुआ, तत्काल प्रिया के मुंह से लम्बी सी सिसकारी निकल गयी और प्रिया का दायाँ हाथ बनियान के अंदर से मेरी पीठ पर जोर जोर से ऊपर-नीचे फिरने लगा.
मैंने प्रिया की बगल में मुंह दे कर एक जोर से सांस ली; एक नशीली सी सुगंध मुझे बेसुध करने लगी; इस सुगंध में प्रिया के जिस्म की ख़ुश्बू, प्रिया के डिओ की ख़ुश्बू, काम-तरंग में डूबे नारी-शरीर में उठती वो अलग एक ख़ास मादक सी खुशबू… सब मिली-जुली थीं.मैंने प्रिया की कांख को चूमा… तत्काल प्रिया के मुंह से एक आनन्दमयी और लम्बी सीत्कार निकल गयी और मैंने प्रिया की बगल की अंदर वाली रेशम रेशम त्वचा को अपनी जीभ से चाटा. प्रिया के पसीने की खुशबू के साथ साथ प्रिया के पसीने का का हल्का सा नमकीन स्वाद साथ में शायद डियो का कसैला सा स्वाद था.
यही सब मैंने प्रिया की दायीं कांख पर दोहराया. कसम से! मजा आ गया. इधर प्रिया मारे उत्तेजना के बिस्तर पर जल बिन मछली की तरह तड़फ रही थी. बिस्तर की चादर पर मुट्ठियाँ कस रही थी, रह रह कर बिस्तर पर पाँव पटक रही थी, ऊँची ऊँची सिसकारियाँ ले रही थी, लम्बी लम्बी सीत्कारें भर रही थी.
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