Porn Story गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे
05-07-2022, 09:47 PM,
RE: Porn Story गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे
औलाद की चाह

CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक- नंदू के साथ चौथा दिन

अपडेट-8


पहला चुदाई अनुभव 




सोनिया भाभी ने रजोनिवृति के समय अपने भांजे नंदू के साथ अपनी आपबीती बतानी जारी रखी

जब सोना भाभी ने नन्दू से कहा मैं एक बार फिर चूसूं ? तो नंदू हैरान हो गया

उसने अपनी आँखों से मुझसे सवाल किया क्या? और मैंने अपनी आंखों से लंड की और देख कर उत्तर दिया। उफ्फ … नन्दू का लंड गनगना गया.

मैं (सोनिआ भाभी) उठकर पलंग के किनारे पर बैठ गयी । जब मैंने ऐसा किया तो इस दौरान मैंने शीशे की ओर देखा और बिस्तर पर पूरी तरह से नग्न होकर बैठी हुई मैं बेहद सेक्सी लग रही थी।

नंदू तुरंत बिस्तर से नीचे उतर गया और उसकी अपनी लटकती हुई मर्दानगी मुझे आकर्षित कर रही थी . वो मेरे मुँह के पास अपनी छड़ी ले कर आ गया । उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने खड़े लंड पर रख दिया. मैंने इसे दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपने पूरे चेहरे पर छुआया और फिर बिना समय बर्बाद किए उसे बेतहाशा इस तरह चाटने लगी जैसे कि मैंने पहले कभी लंड नहीं देखा हो ! मैंने अपनी जीभ को उ अंदर-बाहर किया और लंडमुंड को चाटा और इस बीच मैंने उसकी आश्चर्यजनक रूप से सख्त गेंदों को सहलाया। मैंने धीरे से उन्हें निचोड़ा तो नंदू सुअर की तरह जोर-जोर से कराहने लगा । मैंने उसके उपकरण को अपने खुले होंठों में ले लिया और उसे अपने होठों के भीतर एक स्टिक आइसक्रीम की तरह धीरे-धीरे, इंच दर इंच ले गयी , अंत में मैंने उसे बेतहाशा चूसना शुरू कर दिया।

नंदू की सांसें तेज हो गईं- आह अह्ह हहह हम्मह उफ्फ!

जब उसका औजार मेरे मुंह के अंदर पूरी तरह से था, तो मुझे लगा कि यह मेरे गले के आधार तक पहुंच गया है और फिर मैं अलग-अलग गति से लंबे डंडे को अंदर और बाहर चूसने लगी । नंदू इतनी जोर से चिल्लाया और कराहने लगा कि मुझे डर लगा कि उसकी चिलाने की आवाज मेरे पड़ोसीयो का ध्यान आकर्षित कर देगी !

वो बोलै - आंह मौसी छोड़ो मुझे उफ्फ … आह क्या कर रही हो, मत करो कुछ हो रहा है मुझे … आह आह आह उफ्फ हिश हिश!

लेकिन मैं चूसती रही

नंदू: नहीं, मौसी, नहीं? अब नहीं ? कृपया मत करो ?

मैंने उसकी एक नहीं सुनी और अपने पलंग के किनारे बैठे उसे चूसती रही । और फिर अचानक उसने जो किया उसने मुझे पूरी तरह से स्तब्ध कर दिया। नंदू ने धक्का देकर अपने लिंग को मेरे मुँह से निकाल लिया और मुझे अचानक रोक दिया, लेकिन यह देखकर कि मैं उसका लंड छोड़ने के मूड में नहीं थी , उसने मुझे मेरे लंबे बाल पकड़ कर लंड से खींच लिया। साथ ही साथ अपने बाएं हाथ से उसने मेरे दाहिने निप्पल को दो अंगुलियों से बहुत कसकर दबाया और मेरे बालों और मेरे निप्पल दोनों पर उसकी कार्रवाई इतनी तेज थी कि मैं दर्द में रो पड़ी ।

नंदू : उफ्फ! बस मौसी मुझे छोड़ दो!

वह अभी भी मेरे बालों को पकड़े हुए था और मुझे रोकने का प्रयास रहा था।

नंदू: मौसी प्लीज रुको आपजाती हो हैं कि अगर आप ऐसा करती रही तो मैं विस्फोट कर दूंगा!

मुझे लगा मैंने होश संभाला, मेरी आंखों में आंसू आ गए और मुझे अपने दाहिने निप्पल में अत्यधिक दर्द महसूस हुआ। मैंने अपना नियंत्रण खो दिया और सीधे उसे थप्पड़ मार दिया।

मैं: उफ्फ! कमीने! देखो तुमने क्या किया है !

उसने मेरे दाहिने स्तन की और नीचे देखा और पाया कि निप्पल पहले से ही सूजा हुआ था और मुझे वहाँ बहुत तेज़ दर्द हो रहा था और लाल हो गया था जो उसके तेज नाखून से लगी खरोंच के कारण छिल गया था । नंदू तुरंत माफी मांगने के मूड में आ गया और उसने मेरे बाल छोड़ दिए।

मैं: तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे मेरे बालों से पकड़ने की! तुम्हारे मौसा-जी ने अपने पूरे जीवन में कभी भी मुझ पर नियंत्रण करने की हिम्मत नहीं की? मूर्ख ? तुमने मुझे मेरे बालों से पकडने की हिम्मत कैसे की? तुम क्या सोचते हो? चूँकि मैंने तुम्हारे सामने अपनी साड़ी खोली है, तुम जो चाहो कर सकते हो!

नंदू: सॉरी मौसी?. मुझे सच में खेद है। मेरा मतलब आपको चोट पहुँचाना नहीं था? कृपया मुझे क्षमा करें मौसी। बस हो गया मेंरे जान बूझ कर ऐसा नहीं किया था . सॉरी मौसी?

यह कहते हुए कि नंदू जल्दी से मेरे ब्रेस्ट मसाज ऑइंटमेंट की बोतल से कुछ मलहम ले आया और मेरे दाहिने निप्पल पर लगा दी । जैसे ही उसने मेरे निप्पल को मरहम से सहलाया, मैंने उसका कान कसकर पकड़ लिया और उसे आज्ञा दी:

नंदू ! अब मुझे चोदो । अभी। क्या तुम मेरी बात समझ रहे हैं!

नंदू: लेकिन मौसी? मेरा मतलब है? ओह्ह्ह ?

मैं: तुम क्या बुदबुदा रहे हो, बदमाश?

नंदू: मौसी!, मेरा मतलब है कि मैंने कभी किसी लड़की की चुदाई नहीं की?

क्या ईमानदार स्वीकारोक्ति है!

इससे पहले कि वह ठीक से प्रतिक्रिया दे पाता, मैंने उसे अपने पास खींचा और गले से लगा लिया और बिस्तर पर ले जाकर उसे अपने शरीर के ऊपर लेटा दिया। पहली बार मैंने उसके होठों को अपने होंठो के अंदर दबा लिया और उसे गहरा चूमा। बदले में नंदू ने भी मुझे चूमा, लेकिन निश्चित रूप से वो अभी काफी बचकाना था । मैंने बार-बार उसके होठों को चूसा और अपनी जीभ को उसके मुँह के अंदर झाँका और उसकी जीभ को भी चूसा। मेरे पति के साथ मुझे वास्तव में यह अवसर नहीं मिलता है क्योंकि जब वह मुझे चूमते हैं तो वह मुख्य भूमिका निभाते हैं और ज्यादातर बार मैं बस लेटी रहती हूँ क्योंकि वह एक साथ मेरे स्तन को निचोड़ते हैं या मेरी गांड पकड़ लेते हैं।

लेकिन यहां नंदू एक नौसिखिया होने के नाते मैं उसे लंबे समय तक चूमने में सक्षम थी और मैंने वास्तव में इसका आनंद लिया। फिर मैंने उसका इरेक्ट औजार पकड़ा और उसे अपने लवस्पॉट में गाइड किया। मैं महसूस कर सकता थी कि एक तेज गति में उसकी छड़ी मेरे अंदर प्रवेश कर गहरी चली गई । यद्यपि मेरी योनि उतना गीली नहीं थी जितनी कि किसी अन्य सामान्य महिला की ऐसे मौके पर हो जाती है , नंदू का युवा और कठोर लंड मेरे छेद में अंदर जाने और बाहर निकलने में पूर्णतया सक्षम था। और एक बार अंदर जाने के बाद, उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया।

कुछ चीजे स्वाभिक होती हुई और उन्हें बताना नहीं पड़ता . उसकी कमर और नितम्ब हिलने लगे .


उसका लंड मेरी फिसलन भरी चूत में आधा अंदर चला गया और अगले जोरदार धमाके में उसने पूरी तरह से अपना रास्ता बना लिया। नंदू ने मेरे दोनों स्तनों को पकड़ा और उन्हें निचोड़ा और मेरे निपल्स को बारी-बारी से घुमाया, जबकि इस बीच उसने अपने उपकरण को लयबद्ध तरीके से अंदर और बाहर घुमाया।

अठारह वर्ष के ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रहे इस युवा लड़के ने मुझे चोदना शुरू दिया था, मैं बेशर्मी से खुशी के साथ जोर-जोर से कराह रही थी । उसने अपने उपकरण को अंदर और बाहर, तेज और धीमी, तेज और धीमी गति से धक्के दिए , जबकि उसके हाथ एक पल के लिए भी स्थिर नहीं थे, या तो मेरे स्तनों के साथ खेल रहे थे, या उन्हें निचोड़ रहे थे, या मेरे तंग निपल्स को घुमा रहे थे, या मेरी नाभि को छू रहे थे। मैं अपनी पूरी तेज आवाज के साथ चिल्ला रही थी मेरे गालो पर खुशी के आंसू बह रहे थे क्योंकि मेरे पति से इस तरह मेरी जरूरतों को नजरंअदाज करने के कारण मैं तड़प रही थी और इतने दिनों के बाद मैंने अपने अंदर उत्तेजना को बढ़ते हुए और उत्कर्ष को बनते हुए महसूस किया?

मैं: आआ? आआ? आआ?. रुको मत तेज करो करो नंदू?. बस रुको मत !
मैं: आह उह्ह्ह उउउउ उउउइइइइइइइ। तेज करो करो नंदू? आह उह्ह्ह उउउउ!

मैं जोर-जोर से कराहती रही क्योंकि जब वह हर बार मेरे अंदर घुसा करता था तो लंड मेरी योनि को भर देता था । मेरी योनि की मांसपेशियां उसके लंड को ऐंठने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन दुर्भाग्य से मेरा रास्ता उसके दुबले-पतले आकार के लंड के लिए बहुत चौड़ा था। चूँकि मेरी शादी को इतने लंबे समय हो गए थे और मनोहर के साथ वर्षों से संभोग कर रहे थे और मेरी बेटी के जनम के बाद से , मेरी योनि का मार्ग चौड़ा हो गया था और वहाँ की मांसपेशियाँ ढीली हो गई थीं; तो निश्चित रूप से मुझे नंदू के युवा लंड के साथ वह तंग महसूस नहीं हो रहा था, लेकिन फिर भी यह एक बहुत ही आंनद दायक अनुभव था। नंदू ने भी उस दर्द को महसूस नहीं किया, जो उसे आमतौर पर एक कुंवारी लड़की को चोदने में मिलता । फिर भी उसके चेहरे से लग रहा था कि वह अपनी गतिविधियों में लीन है और मजे कर रहा है । मैंने महसूस किया कि एक पल के लिए मेरा पूरा शरीर अकड़ गया है और उसके बाद मैं बहुत हिंसक रूप से कांपने लगी । नंदू के चेहरे की ओर देखते हुए मैं कांपती रही और एक चीख के साथ बेतहाशा चरमोत्कर्ष पर पहुंच गयी ।

मैं: आह उह्ह्ह उउउउ उउउइइइइइइइ।

इस युवा लड़के के लिए और अधिक संभव नहीं था और वो जोर से चिल्लाया और अगले दो झटके के भीतर उसका शरीर धनुष के आकार में झुका और उसने मेरे अंदर विस्फोट कर दिया और मेरी पूरी योनि उसके गर्म रस के साथ भर गई ।

मैं: आ आ आआआआह!

यह बहुत संतोषजनक था! किसी भी विवाहित महिला के लिए चुदाई के अलावा खुद को संतुष्ट करने का अन्य कोई विकल्प नहीं है । मैं महसूस कर सकती थी कि नंदू का लंड मेरी चूत से बाहर निकल रहा है और अपनी लचीला स्थिति खो रहा है। नंदू अब पूरी तरह थक कर मेरे शरीर के ऊपर लेट गया। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और इन बहुत ही संतोषजनक पलों को संजोने की कोशिश की, हालाँकि मुझे पर्याप्त डिस्चार्ज नहीं मिला था , जिससे मैं अंदर से अधूरा महसूस कर रही थी।

न जाने कितनी देर मैं आंखें बंद करके ऐसे ही लेटी रही । नंदू मुझसे उतरा और शौचालय में जाकर उसने अपनी सफाई की। मैं अभी भी पूरी तरह से नग्न अवस्था में अपने पैरों को फैला कर अपने बिस्तर पर लेटो हुई थी । मेरी चूत के होंठ और चूत के बाल बेशर्मी से प्रदर्शित थे और नंदू का रस अभी भी मेरी चूत के छेद से निकल रहा था।

नंदू: मौसी, मौसी! उठो और? मेरा मतलब है कुछ पहनो!

मैं: हुह! ओह! हां।

नंदू: मेरा मतलब है कि अगर मौसा-जी वापस आ जाते हैं?

उसके मुंह से मौसा जी शब्द सुनते ही मेरे होश उड़ गए। अनैच्छिक रूप से मेरे दाहिने हाथ ने मेरे नंगे स्तन को ढँक दिया। मैं उठी , हालाँकि अब मेरी चूत में बहुत दर्द हो रहा था। मुझे अपने डॉक्टर की अगले कुछ दिनों तक सेक्स न करने की सलाह याद आ गई, जिसका मैंने आज उल्लंघन किया था । नंदू मेरे पास खड़ा था और मेरी बदरंग हालत का लुत्फ उठा रहा था । पता नहीं क्यों अचानक मुझे शर्म आने लगी; शायद मेरी स्वाभाविक प्रवृत्ति अब मेरे ऊपर नियंत्रण ले रही थी। मैंने अपने लटके हुए आजाद स्तनों को दोनों हाथों से ढँक लिया और खड़ी हो गयी । मैंने बिस्तर के पास शीशे की ओर देखा, और खुद को उस अवस्था में देखकर जोर से शरमा गयी । नंदू शायद मेरी त्वचा के रोमछिद्र भी देख सकता था ! मैं बेशर्मी से नग्न ही शौचालय की ओर चल दी और इस बीच नंदू स्पष्ट रूप से मुझे घूर रहा था। मेरे स्तन हर कदम पर कामुकता से लहरा रहे थे और सोच रही थी कि अपने हाथो से क्या ढकूं? मेरी चूत, या मेरी विशाल गांड, या मेरी जुड़वां स्तनों की बड़ी चोटियाँ!

जारी रहेगी

NOTE





1. अगर कहानी किसी को पसंद नही आये तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका किसी से कोई लेना देना नही है . मेरे धर्म या मजहब  अलग  होने का ये अर्थ नहीं लगाए की इसमें किसी धर्म विशेष के गुरुओ पर या धर्म पर  कोई आक्षेप करने का प्रयास किया है , ऐसे स्वयंभू गुरु या बाबा  कही पर भी संभव है  .



2. वैसे तो हर धर्म हर मज़हब मे इस तरह के स्वयंभू देवता बहुत मिल जाएँगे. हर गुरु जी, बाबा  जी  स्वामी, पंडित,  पुजारी, मौलवी या महात्मा एक जैसा नही होते . मैं तो कहता हूँ कि 90-99% स्वामी या गुरु या प्रीस्ट अच्छे होते हैं मगर कुछ खराब भी होते हैं. इन   खराब आदमियों के लिए हम पूरे 100% के बारे मे वैसी ही धारणा बना लेते हैं. और अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं पर बुरे लोगो की बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है तो लगता है सब बुरे ही होंगे .. पर ऐसा वास्तव में बिलकुल नहीं है.



3.  इस कहानी से स्त्री मन को जितनी अच्छी विवेचना की गयी है वैसी विवेचना और व्याख्या मैंने  अन्यत्र नहीं पढ़ी है  .



4. जब मैंने ये कहानी यहाँ डालनी शुरू की थी तो मैंने भी इसका अधूरा भाग पढ़ा था और मैंने कुछ आगे लिखने का प्रयास किया और बाद में मालूम चला यह कहानी अंग्रेजी में "समितभाई" द्वारा "गुरु जी का (सेक्स) ट्रीटमेंट" शीर्षक से लिखी गई थी और अधूरी छोड़ दी गई थी।


बाद में 2017 में समीर द्वारा हिंदी अनुवाद शुरू किया गया, जिसका शीर्षक था "एक खूबसूरत हाउस वाइफ, गुरुजी के आश्रम में" और लगभग 33% अनुवाद "Xossip" पर किया गया था।

अभी तक की कहानी मुलता उन्ही की कहानी पर आधारित है या उसका अनुवाद है और कुछ हिस्सों का अनुवाद मैंने किया है ।

कहानी काफी लम्बी है और मेरा प्रयास जारी है इसको पूरा करने का।
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05-26-2022, 06:55 AM,
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CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक- नंदू के साथ

अपडेट-1






सोनिआ भाभी-भाभी ने रजोनिवृति नन्दू के साथ अपना बताना जारी रखा

पांचवा और छठा दिन

सोनिआ भाभी बोली मैंने नंदू के साथ उस सेक्सी सत्र के बाद खुद को फिर से संगठित करने के लिए समय लिया, नंदू लगभग मेरे बेटे की तरह था। मैं नंदू से आँख नहीं मिला पा रही थी और मुझे ऐसा लगता था कि हर बार जब वह मुझे देख रहा था, तो जैसे वह मुझे मेरे कपड़ों के माध्यम से नग्न देख रहा था। मैं अपने बेशर्म कृत्यों को भूल नहीं पा रही थी और उसने मुझे एक महत्त्वपूर्ण अवधि के लिए पूरी तरह से उतार-चढ़ाव और काम उत्तेजित स्थिति में देखा थी। सौभाग्य से, आजकल मैं मेरे पति के साथ बिल्कुल बिस्तर पर नहीं मिलती थी और हमारा कोई शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनता था, अन्यथा उन्हें यह समझाने में बहुत कठिनआयी होती कि मेरे दाहिने निप्पल पर उस नाखून का निशान कैसे आ गया। मनोहर को कभी भी पता ही नहीं चला कि उसकी पीठ पीछे क्या हो रहा है! उसकी बीवी किस तरह की सेक्स की गतिविधियों में लिप्त है उसे इसकी कोई भनक नहीं हुई थी । वास्तव में जब भी मैं अपने पति की ओर देखती थी तो मैं बहुत दोषी महसूस कर रही थी? नंदू भी अपनी पहली चुदाई की खुशी का अनुभव करने के बाद थोड़ा सयमित लग रहा था।

सातवा दिन

उस दिन शाम नंदू अपने घर के लिए निकलने वाला था और मैं उसे अपने तरीके से अलविदा कहना चाहती थी। लेकिन मुझे मौका नहीं मिल रहा था क्योंकि उस दिन मनोहर घर पर था, परन्तु मुझे बाद में मौका मिला जब वह किसी कारण से थोड़ी देर के लिए बाहर गया। नंदू अपने कमरे में था और मैं वहाँ गयी।

मैं: नंदू!

नंदू: जी हाँ मौसी?

मैंने अपनी सारी ताकत इकट्ठी की और सीधे उसकी आँखों में देखा। नंदू मेरी नजरो का सामना नहीं कर सका और उसने अपनी आँखें नीची कर लीं।

मैं: बेटा, उस दिन जो कुछ भी हुआ वह पूरी तरह से गोपनीय रहना चाहिए। उसे दिमाग़ में रखो। किसी भी परिस्थिति में आप किसी के साथ उस पर चर्चा या साझा नहीं करेंगे। वादा करो?

नंद जी मौसी मैं समझता हूँ। आप मुझ पर भरोसा कर सकती हैं।

मैं: अच्छा। तुम्हारे जाने से पहले?

नंदू: क्या मैं आ सकता हूँ? मेरा मतलब मौसी, क्या मैं एक बार आपके करीब आ सकता हूँ?

मैं: एक मिनट। नंदू तुम भी वादा करो कि यह आखिरी बार होगा और अब से हम अपने पुराने रिश्ते की तरफ लौट आएंगे और मौसी भांजे की तरह ही व्यवहार करेंगे ...

नंदू: ठीक है मौसी, मैं वादा करता हूँ। यह आखिरी बार होगा।

मैंने उसकी आँखों की ओर देखा और उसे अपने पास आने का इशारा किया। सच कहूँ तो मैं भी उसके लौटने से पहले नंदू को एक बार गले लगाना चाहती थी। अगले कुछ मिनटों में हम एक दूसरे की बाहो में थे? नंदू ने मेरे सुडौल शरीर के हर इंच को अपने हाथों से महसूस किया और मैंने भी उसे जोर से चूमा। नंदू के हाथों ने मेरे ब्लाउज से ढके स्तनों को दबाया और निचोड़ा, जब उसके हाथ मेरे बड़े कूल्हों के आकार को महसूस कर रहे थे, मेरे होंठ उसके होठों का स्वाद ले रहे थे; तब मैं भी अपने बड़े स्तन उसकी सपाट छाती पर दबा रही थी फिर उसके हाथ मेरे मांसल कूल्हों पर उसकी गोलाकारता को महसूस कर रहे थे, उसके बाद मेरे हाथों ने उसके पायजामा के नीचे उसका लंड खोजा और उसे सहलाया। चीजें फिर से गर्म हो रही थीं। नंदू को भी शायद एहसास हो गया था और जब वह मेरी साड़ी के ऊपर मेरी गांड थपथपा रहा था तो उसने पाया मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी हुई थी और उसकी अगली हरकत से मेरे दिमाग में खतरे की घंटी बज उठी।

नंदू धीरे-धीरे मेरी साड़ी और पेटीकोट को मेरी टांगों से ऊपर उठा रहा था और मैं स्पष्ट रूप से अपने नग्न नितंबों को सहलाने की उसकी इच्छा को महसूस कर रही थी। हालांकि ईमानदारी से मैं भी इस तरह से छुआ जाना पसंद करती हूँ, लेकिन मुझे रेखा खींचनी थी।

मैं: नंदू! नहीं। ऐसा मत करो। कृपया।

नंदू: मौसी? कृपया। एक आखिरी बार! मैं तुम्हें कल से बिलकुल परेशान नहीं करूंगा!

मैं: नंदू, मुझे पता है कि लेकिन... अरे! नहीं नहीं? विराम!

इससे पहले कि मैं एक त्वरित कार्यवाही में ठीक से प्रतिक्रिया कर पाती, वह मेरी साड़ी और पेटीकोट को मेरी जांघों तक उजागर करने में सक्षम हो गया था। जैसे ही उसके ठंडे हाथों ने मेरी नंगी गर्म जांघों को छुआ, मुझे एहसास हुआ कि मैं कमजोर हो रही हूँ।

मैं: नंदू, प्लीज मत करो। कृपया! आपके मौसा-जी किसी भी क्षण वापस आ सकते हैं।

जब तक मैं वाक्य पूरा कर पाती, मुझे महसूस हुआ कि इस लड़के ने मेरी विशाल गांड को पूरी तरह से खोल दिया है। उसने मेरी साड़ी को मेरी कमर पर अच्छी तरह से ऊपर कर दिया और मेरी कसी हुई गांड को निचोड़ने लगा। मैंने भी बेशर्मी से उसकी हरकतों के आगे घुटने टेक दिए और उसे अपने शरीर से कसकर अपने गले लगा लिया। नंदू ने अब मेरी साड़ी छोड़ दी और उसके हाथ मेरी साड़ी के नीचे मेरी नग्न गांड पर बने रहे। वह मेरी गांड पर चुटकी ले रहा था, मेरे तंग नितम्ब के गालों को दोनों हाथों से दबा रहा था और कुचल रहा था। कुछ क्षण और ऐसा ही चलता रहा और मेरे गाण्ड के दबाव से पूर्णतः संतुष्ट होने के बाद उसने मेरे नितंबों से अपने हाथ निकाल लिए। नंदू उस समय तक काफी उत्तेजित हो गया था क्योंकि उस समय मैं भी उसके पजामे के नीचे उसका कठोर लंड महसूस कर रही थी।

नंदू ने मुझे फिर से गले लगाया और एक कायाकल्प प्रयास के साथ मेरे गालों को चूमना शुरू कर दिया और वह मुझे इतना जोर से धक्का दे रहा था कि मैं अपना संतुलन नहीं रख सकी और मुझे पीछे हटना पड़ा और लगभग अपने बिस्तर पर गिर पड़ी। नंदू ने मुझे वस्तुतः अपने बिस्तर पर धकेल दिया और जैसे ही मैं उस पर बैठी, उसने फटाफट मेरा पल्लू मेरे कंधों से उतार दिया। मैंने उसे सावधान करने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मैं: नंदू, अपना व्यवहार संयत करो!

वह अब आदमखोर की तरह था, जिसने एक बार खून का स्वाद चखा था। उसने मेरे जुड़वाँ स्तनों पर छलांग लगा दी और मेरे ब्लाउज और ब्रा पर दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया। मैं उसकी चालों में अतिरिक्त शक्ति को स्पष्ट रूप से देख सकता था और आज उसकी हरकतें बहुत निश्चित थीं! मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसकी हरकतों से स्पष्ट था कि उसने मुझे निर्वस्त्र करने की ठान ली है।

मैं: रुको! कृपया?

मेरा प्रतिरोध बहुत कमजोर था और वह मेरे तंग स्तनों से मेरे ब्लाउज और ब्रा को खींचने की कोशिश कर रहा था।

मैं: नंदू? नंदू, इस तरह तुम मेरा ब्लाउज फाड़ दोगे!

लेकिन शायद ही मेरी प्रतिक्रियाएँ उस तक पहुँची और यह देखकर कि वह मेरे ब्लाउज के हुक को जल्दी से नहीं खोल पा रहा था, बदमाश ने सीधे मेरे ब्लाउज के अंदर अपना हाथ डाला और मेरे सुस्वादु आम को पकड़ लिया। उसके चेहरे के भाव बदल गए थे और वह बहुत रूखा लग रहा था। हालाँकि मैं अपने आप को उसके चंगुल से छुड़ाने के लिए बहुत संघर्ष कर रही थी, फिर भी वह मेरे ब्लाउज से मेरे बाएँ स्तन को बाहर निकालने में कामयाब रहा! जैसे ही मुझे उसके नग्न स्तन पर उसके हाथ का आभास हुआ, मेरा संघर्ष लगभग खत्म हो गया और उसने उसका पूरा फायदा उठाया और कुछ ही समय उसने मेरे दाहिने स्तन को भी मेरे ब्लाउज के ऊपर खींच लिया। मैं बस एक फूहड़ रंडी की तरह लग रही थी जो बिस्तर के किनारे पर बैठी हो!

एक बार जब वह मेरे दोनों स्तनों को मेरी पोशाक से बाहर कर उजागर करने में सफल हो गया, तो उसने एक राहत ली और मेरी जुड़वां चोटियों पर बहुत आक्रामक तरीके दबाने लगा। उसके स्पर्श से उत्तेजित होने के बावजूद, मैं बहुत अपमानित महसूस कर रही थी और नंदू के इस बलात्कारी जैसे व्यवहार को पचा नहीं सकी और उसे जोर से थप्पड़ मारा।

मैं: आपको क्या लगता है कि आप क्या कर रहे हैं? सुन रहे ही नंदू!

जैसे ही मैंने उसे थप्पड़ मारा और डांटा, तुरंत मैंने अपने स्तनों को अपने हाथों से ढकने की कोशिश की, लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि नंदू ने जबरदस्ती मेरी बाहों को पकड़ लिया और मुझे मेरी इच्छा के विरुद्ध बिस्तर पर लेटने के लिए धक्का दिया। कुछ ही दिनों में नंदू एक बदला हुआ इंसान लगने लगा! , उसने न सिर्फ मेरे थप्पड़ को नजरअंदाज किया बल्कि उसने मुझे नीचे गिराने की कोशिश की! उसके चेहरे से मासूमियत पूरी तरह गायब हो गई थी!

मैं: नंदू, तुम हद पार कर रहे हो! यह किस तरह का व्यवहार है?

नंदू ने मुझे जवाब देने की परवाह नहीं की और न ही उसने अपनी भद्दी आक्रामकता को रोका। उसने मेरी बाहों को मजबूती से पकड़ रखा था और मेरे सीने के क्षेत्र को सूँघ रहा था और मेरे खुले निपल्स को चाटने की कोशिश कर रहा था जबकि मैं अपनी गरिमा को बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी।

मैं: नंदू, रुको! ये मत करो! आखिर मैं तुम्हारी मौसी हूँ!

नंदू: बस एक बार मौसी? एक आखिरी बार!

मैं: आखिरी बार क्या?

नंदू: मैं मौसी आपको चोदना चाहता हूँ! तुम बहुत सेक्सी हो!

मैं जो भी सुन रही थी उसे सुन मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ जो! मेरा सिर जैसे घूम रहा था। क्या वह वही मासूम आज्ञाकारी नंदू था जिसके साथ मैंने पिछले कुछ दिनों में खिलवाड़ किया था? मैं इस बात को पचा नहीं पा रही थी कि नंदू जैसा छोटा लड़का मुझ पर अधिकार करने की कोशिश कर रहा था! इससे पहले कि मैं अपने आप को संभल पाती, उसने मेरी फैली हुई भुजाओं को एक हाथ में पकड़ लिया और अपना खाली हाथ मेरी कमर की ओर ले लिया और मेरी साड़ी को मेरे पैरों के ऊपर खींचने लगा। उस समय मेरी भावना बहुत अजीब और मिश्रित थी? यह मेरी यौन इच्छा और मेरे स्वाभिमान को बचाने के मिश्रण से मिली हुई अजीब स्थिति थी। यह मुझे मेरे ही घर में छेड़छाड़ करने जैसा था!

मैं: नंदू? कृपया मत करो! नहीं? नहीं? इसे रोको!


जारी रहेगी
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05-26-2022, 06:58 AM,
RE: Porn Story गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे
औलाद की चाह

CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक- नंदू के साथ सातवा दिन

अपडेट-2



नंदू के साथ सातवा दिन




सोनिआ भाभी ने रजोनिवृति के बाद अपने बहनाजे नंदू के साथ अपनी कहानी सुननी जारी राखी

सोनिआ भाभी बोली मैं नंदू को बोली-नंदू... प्लीज मत करो। नहीं... नहीं ... इसे रोको। प्लीज रुक जाओ

मैंने चिल्लायी लेकिन कोई असर नहीं हुआ। मैं उठने के लिए संघर्ष कर रही थी क्योंकि वह मेरे ऊपर था इसलिए मेरी स्थिति बहुत कमजोर थी और नंदू पूरी तरह से मेरे ऊपर था। नंदू ने मेरे हाथ छोड़े और मेरे सिर को वापस बिस्तर पर रख दिया और मेरे होठों को चूमने की कोशिश की। मैं अब उससे बचने की पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन उसने अचानक मेरे कड़े सूजे हुए दाहिने निप्पल को इतनी जोर से घुमाया कि मैं चीख पड़ी और वह इस मौके का फायदा उठाने के लिए काफी होशियार था और अपने दांतों को मेरे निचले होंठों में दबा दिया। उसकी इस दोहरी हरकत से मुझे काफी उत्तेजित कर दिया और अपने दूसरे हाथ से मेरे बाएँ स्तन को पकड़ लिया, तो मैं जो संघर्ष कर रहा था, उसे बनाए रखना मुश्किल था।

मैं-उह्ह्ह आआआआआआ:

मैं परमानंद की आह भर रहा था, हालांकि मैं अभी भी नंदू के असभ्य व्यवहार से बहुत आहत थी।

नंदू-हे मौसी... तुम कितने स्वीट हो। आह।

यह महसूस करते हुए कि मैंने उसके अश्लील स्पर्शों पर कामुक प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया था, उसने नग्न स्तनों की मालिश करना शुरू कर दिया और मेरे काले निपल्स को अपनी उंगलियों से बार-बार घुमाया। साथ ही वह मेरी साड़ी के ऊपर अपना सीधा और कड़ा औजार मेरी चूत पर दबा रहा था।

नंदू-सॉरी मौसी, पर तुम्हे देखकर मैं खुद को काबू में नहीं रख पाया। तुम दुनिया की सबसे सेक्सी महिला हो मौसी... क्या तुम अब भी मुझसे नाराज़ हो?

उसने मेरे मोटे गाल को चूमा और सीधे मेरी आँखों में देखा। मैं अब उनका "सॉरी" सुनकर थोड़ा नरम हो गयी थी और उनके प्यार भरे स्पर्शों का आनंद लेने लगी थी।

मुझे याद आया की जब मेरी नई-नई शादी हुई थी और मैंने पहले बार मनोहर के साथ सेक्स किया था । तो उसके बाद मनोहर भी मुझे छोड़ता ही नहीं था और जब भी उसे मौका मिलता तो मेरे स्तन दबा देता था या चूम लेता था । यह कभी भी कहीं पर भी मुंडका मिलते ही सेक्स शुरू कर देते थे । अब नंदू का भयउ लगभग वैसा ही हाल था । पहले सेक्स के बाद इसे दूबरा करने की इच्छा बढ़ ही जाती है और साथ में मैं नंदू से पानी तारीफ सुन कर भी कझूश थी की मैं आज भी किसी तरुण लड़के को यौन उत्तेजित कर सकती हूँ ।

नंदू-मौसी जरा देखिये... ये अब ज्यादा देर और इंतजार नहीं कर सकता।

यह कहते हुए कि उसने मेरी चूत के हिस्से को अपने क्रॉच से दबाया, जिससे मुझे उसका सख्त लंड वहाँ महसूस हुआ।

मैं-हुह।

मैंने यह दिखाने की कोशिश की कि मैं अभी भी गुस्से में थी, लेकिन फिर अगले ही पल उसने जो किया मुझे उसकी बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी। नंदू ने अचानक मुझे छोड़ दिया और मेरे शरीर से उतर गया और एक तेज कार्यवाही करते हुए उसने अपनी पायजामा की डोरी खोली और अपना गर्म लंड निकाल कर मेरे मुंह के ठीक सामने रख दिया। किसी भी विवाहित महिला की तरह, मैं उसके खड़े उपकरण को देखकर खुद का रोक नहीं स्की और सब कुछ भूलकर तुरंत उसे पकड़ लिया।

मैं-उल्स। उल्स। छ्ह एच। उम्म्म... ...

मैं हर तरह की सेक्सी आवाजें पैदा कर रही थी क्योंकि मैंने बिस्तर पर लेटे हुए उसके डिक को चूसा। नन्दू भी अपनी आँखें बंद करके खूब आनंद ले रहा था।

अचानक

"डिंग डाँग।" "डिंग डाँग।"

दरवाजे की घंटी बज रही थी। क्या मनोहर वापस आ गया था? लेकिन ऐसा संभव नहीं था क्योंकि उसे कम से कम आधे घंटे से लेकर 45 मिनट तक का समय लेना चाहिए। या यह कोई और था? हम दोनों जल्दी से उठे और कपडे ठीक कर सामान्य लगने की कोशिश की। मैंने अपने पैरों और स्तनों को ढकने के लिए अपनी साड़ी नीचे खींची और नंदू अपना पायजामा बाँधने में व्यस्त था। नंदू झट से खिड़की के पास गया और बगल से देखने की कोशिश की कि दरवाजे पर कौन है।

नंदू-मौसी, मौसा-जी।

मैं-हे भगवान। क्या करें?

नंदू-मौसी घबराओ मत। मैं दरवाजा खोलता हूँ और तुम शौचालय जाओ और कपड़े पहनो।

मैं ठीक है नंदू ।

मैं लगभग अपने कमरे में भाग कर शौचालय के अंदर पहुँच गयी मेरे स्तन अभी भी मेरे ब्लाउज और ब्रा से बाहर थे। मैंने नंदू को दरवाजा खोलते सुना। मनोहर के पास जल्दी वापस आने के कुछ कारण थे और वह वास्तव में ये मेरा बहुत नजदीकी से हुआ संकीर्ण पलायन था जिसमे मैं बच गयी। शाम को नंदू चला गया और मनोहर के साथ स्टेशन के लिए ऑटो-रिक्शा में जाने से पहले मैंने उसे बहुत सामान्य रूप से गले लगाया (क्योंकि मेरे पति वहाँ मौजूद थे) । ये मेरी बहन के बेटे नंदू के साथ मेरे सेक्सी कारनामे का अंत था।

#### << नंदू के साथ सोनिआ भाबी की कहानी यहाँ समाप्त हुई >>



सोनिआ भाबी खाली छत पर देख रही थी। मैं उसकी मानसिक स्थिति को समझ सकती था और मैंने धीरे से उनका हाथ पकड़ लिया। वह मुझ पर शुष्क रूप से मुस्कुराई और एक गहरी आह के साथ अपना पेय समाप्त किया। मैंने पुरुषो को बालकनी में हमारे पास आते हुए सुना और भाबी को सतर्क कर दिया। पल भर में मनोहर अंकल, राजेश और रितेश होटल के बरामदे में अपनी-अपनी शराब के गिलास साथ हमारे पास दिखाई दिए।



जारी रहेगी


NOTE





1. अगर कहानी किसी को पसंद नही आये तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका किसी से कोई लेना देना नही है . मेरे धर्म या मजहब  अलग  होने का ये अर्थ नहीं लगाए की इसमें किसी धर्म विशेष के गुरुओ पर या धर्म पर  कोई आक्षेप करने का प्रयास किया है , ऐसे स्वयंभू गुरु या बाबा  कही पर भी संभव है  .



2. वैसे तो हर धर्म हर मज़हब मे इस तरह के स्वयंभू देवता बहुत मिल जाएँगे. हर गुरु जी, बाबा  जी  स्वामी, पंडित,  पुजारी, मौलवी या महात्मा एक जैसा नही होते . मैं तो कहता हूँ कि 90-99% स्वामी या गुरु या प्रीस्ट अच्छे होते हैं मगर कुछ खराब भी होते हैं. इन   खराब आदमियों के लिए हम पूरे 100% के बारे मे वैसी ही धारणा बना लेते हैं. और अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं पर बुरे लोगो की बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है तो लगता है सब बुरे ही होंगे .. पर ऐसा वास्तव में बिलकुल नहीं है.



3.  इस कहानी से स्त्री मन को जितनी अच्छी विवेचना की गयी है वैसी विवेचना और व्याख्या मैंने  अन्यत्र नहीं पढ़ी है  .



4. जब मैंने ये कहानी यहाँ डालनी शुरू की थी तो मैंने भी इसका अधूरा भाग पढ़ा था और मैंने कुछ आगे लिखने का प्रयास किया और बाद में मालूम चला यह कहानी अंग्रेजी में "समितभाई" द्वारा "गुरु जी का (सेक्स) ट्रीटमेंट" शीर्षक से लिखी गई थी और अधूरी छोड़ दी गई थी।


बाद में 2017 में समीर द्वारा हिंदी अनुवाद शुरू किया गया, जिसका शीर्षक था "एक खूबसूरत हाउस वाइफ, गुरुजी के आश्रम में" और लगभग 33% अनुवाद "Xossip" पर किया गया था।

अभी तक की कहानी मुलता उन्ही की कहानी पर आधारित है या उसका अनुवाद है और कुछ हिस्सों का अनुवाद मैंने किया है ।

कहानी काफी लम्बी है और मेरा प्रयास जारी है इसको पूरा करने का।

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05-26-2022, 07:02 AM,
RE: Porn Story गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे
गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे-

औलाद की चाह

CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक-

अपडेट-3

सोनिआ भाभी रितेश के साथ 



अनिल : तुम दोनों यहाँ इतने समय से क्या कर रहे हो? एह? तुमने किया है अभी तक? लेकिन बड़ा मजा आया यार! आप दोनों को भी मजा आता हमारे साथ

मैंने देखा कि अनिल की चाल काफी अस्थिर थी और मनोहर अंकल भी अस्थिर थे । ऐसा लग रहा था कि वे शराब के नशे में धुत थे। रितेश मनोहर अंकल को पकड़ रहा था ताकि गिर न जाए!

मैं: भगवान का शुक्र है कि आपने दारु खत्म कर दी है , चलो रात के खाने के लिए आदेश दें।

अनिल : ओ? ठीक है ।

मनोहर अंकल : ज़रूर ? रश्मि !

रितेश को छोड़कर कोई भी पुरुष सभ्य अवस्था में नहीं था। मैंने रूम सर्विस का आदेश दिया और हमने किसी तरह रात का खाना खाया क्योंकि मनोहर अंकल पूरी तरह से होश खो चुके थे? और अनिल भी काफी नशे में था।

अनिल: ओ-के-बाए ! सभी को शुभ रात्रि! मेरी प्यारी पत्नी कहाँ है?

अनिल बस अपने होश में नहीं था। उसने मुझे सबके सामने गले से लगा लिया और मेरे चेहरे पर अपना चेहरा ब्रश करना शुरू कर दिया और मुझे बहुत अजीब लगा।

मैं: ओह! अनिल सम्भालो खुद को ! ठीक से व्यवहार करें!

लेकिन वह मुझे कसकर गले लगाता रहा और चलने ही वाला था। मुझे उस हालत मुझे इतनी शर्मिंदगी महसूस हुई खासकर सोनिया भाबी और मनोहर अंकल के सामने कि मैं तुरंत शर्म से लाल हो गयी ।

मनोहर अंकल : वाह बीटा अनिल !मेरी बुलबुल कहां है?

यह कहते हुए कि अंकल भाबी की ओर मुड़े , लेकिन उस समय उनकी हालत इतनी दयनीय थी कि वह लड़खड़ा गया और लगभग टेबल से टकराकर गिर पड़ा। रितेश जो काफी करीब था उसे अंकल को संभाला नहीं तो अंकल को जरूर चोट लगती ।

सोनिया भाबी: बकवास बंद करो और सो जाओ।

रितेश: भाबी, आप जाकर बिस्तर तैयार करो। हम अंकल का ख्याल रखेंगे।

सोनिया भाबी: ठीक है। और अनिल , तुम भी अपना मुंह बंद रखो और सो जाओ। रश्मि , बस एक बार मेरे साथ आ जाओ ।

यह कहकर वह अपने कमरे की ओर चली गई और मैंने और अनिल ने भी उसका अनुसरण किया। जैसे ही हम चल रहे थे, राजेश ने नशे की हालत के कारण अपना पूरा शरीरका भार मुझ पर डाल दिया और मुझे गलियारे के माध्यम से उसका मार्गदर्शन करने में बहुत कठिनाई हुई और समय लगा। वह कुछ अजीब सी धुन गा रहा था और बीच-बीच में कठबोली बोल रहा था। जैसे ही हमने अपने कमरे में प्रवेश किया, वह बिस्तर पर जाने के लिए उत्सुक था। बिस्तर पर गिरते ही आमिल ने मुझे अपने पास खींच लिया और मैं उसके सीने पर गिर पड़ी । उसने मुझे गले लगाया और मेरे गोल चूतड़ों को सहलाने और निचोड़ने लगा। ईमानदारी से कहूं तो मैं पहले से ही भाबी के निजी जीवन की कहानियों को सुनकर काफी उत्तेजित थी और मैंने तुरंत उसकी हरकतों पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया और आह भरने लगी । लेकिन दुर्भाग्य से अनिल काफी नशे में था और जल्द ही मेरे शरीर के कर्व्स पर उसके हाथ थिरकने लगे ।

मैं: ओहो! प्रिय आप क्या कर रहे हैं! मुझे ठीक से पकड़ो।

अनिल: ओह्ह! हां?.

वह मुझे चूमने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसके मुंह से आने वाली गंध इतनी प्रतिकूल थी कि मैंने चुंबन से परहेज किया। उसमे मुझ पर जबरदस्ती करने की ताकत नहीं थी और उसके होंठ ढीले पड़ रहे थे और मुझे महसूस हो रहा था कि मुझ पर उसकी पकड़ भी फिसल रही है। हालाँकि मुझे अंदर से गर्मी लग रही थी और मैं उत्तेजित थी , लेकिन अनिल की हालत देखकर मैंने उसे सो जाने दिया। मैं बिस्तर से उठी और अपने कपड़े ठीक किए और शौचालय चला गयी । मैंने अपना चेहरा धोया, और नाइटी पहनी । अब मुझे एक बार भाबी के कमरे में जाने की जरूरत थी, क्योंकि उसने मुझे बुलाया था, इसलिए मैंने बस मेरी नाइटी के ऊपर हाउसकोट लपेट दिया ताकि मैं अच्छी दिखूं।

जैसे ही मैं सोनिया भाबी के कमरे में प्रवेश करने वाली थी, मुझे अंदर रितेश की आवाज सुनाई दी। मैं तुरंत उत्सुक हो गयी ।

रितेश: ठीक है, तो मैंने अपना कर्तव्य निभाया भाबी, अब तुम अपने खजाने की देखभाल करो! हा हा हा?

सोनिया भाबी: मेरा सोता हुआ मनोहर !

अब मैंने पर्दे के माध्यम से कमरे के अंदर ध्यान से देखा और मनोहर अंकल को बिस्तर पर लेटे हुए, खर्राटे लेते हुए देखा, और भाबी बिस्तर के एक तरफ खड़े रितेश से बात कर रही थी जबकि रितेश दूसरी तरफ खड़ा था।

सोनिया भाबी: वैसे, इन्होने कितने जाम लिए ?

रितेश: सिक्स प्लस भाबी!

सोनिया भाबी: हे भगवान!

रितेश: चाचा एक ड्रम हैं! हा हा हा?

सोनिया भाबी: हुह!

रितेश: ओह! एक बात भाबी, क्या मैं यहाँ जल्दी से नहा सकता हूँ? दरअसल मेरे शौचालय में नल?.

सोनिया भाबी: क्यों? समस्या क्या है?

रितेश: मुझे नहीं पता, लेकिन मैंने पाया कि ऊपर वाले शॉवर के नल से पानी नहीं निकल रहा है।

सोनिया भाबी: ओह! ठीक है, कोई बात नहीं! आप चाहें तो तुरंत नहाने जा सकते हैं।

रितेश: धन्यवाद भाबी। मुझे ज्यादा समय नहीं लगेगा।

सोनिया भाबी: मुझे भी बदलने की जरूरत है। आज बहुत गर्मी है, है ना?

रितेश: मुझे लगता है कि आपने जिस वोदका का सेवन किया है, उसकी गर्मी आपको महसूस हो रही होगी। हा हा?

मैं अभी भी परदे के पीछे दरवाजे के किनारे पर खड़ी थी , लेकिन तनाव में हो रहा था क्योंकि अगर कोई गुजरने वाला या हाउसकीपिंग स्टाफ मुझे देखता है, तो यह बहुत अजीब होगा। लेकिन साथ ही मैं तुरंत अंदर जाने के लिए भी उत्सुक नहीं थी , क्योंकि मैं रितेश और सुनीता भाबी के बीच की केमिस्ट्री को देखने के लिए उत्सुक थी । इसलिए मैंने अपने मौके का फायदा उठाया और ऐसे ही उनकी बातचीत सुनना जारी रखा।

सोनिया भाबी: रितेश क्या आप थोड़ी देर इंतजार करेंगे? तब मैं कपडे बदल पाऊँ ?

रितेश: ज़रूर भाबी।

मैंने देखा कि सुनीता भाबी कमरे के एक कोने में गई, अलमारी खोली, और एक नीली नाइटी ली और शौचालय के अंदर बदलने के लिए चली गई। किसी भी पुरुष, जो पहले से ही नशे में था, के लिए यह दृश्य अपने आप में विचारोत्तेजक था, एक परिपक्व महिला शौचालय में जाने के लिए हाथ में एक नाइटी के साथ जा आरही थी जबकि उसका पति खर्राटे ले रहा था। रितेश बिस्तर पर बैठ गया और सिगरेट जलाते हुए शौचालय के बंद दरवाजे को देख रहा था। फिर उसने एक पल के लिए उस दरवाजे की ओर देखा जहाँ मैं खड़ी थी । मेरे दिल की धड़कन मानो रुक गई। लेकिन शुक्र है कि उन्होंने वहां ध्यान केंद्रित नहीं किया और निश्चित रूप से मुझे भी पता नहीं चल सका क्योंकि मैं पर्दे के पीछे थी ।

फिर वह खड़ा हो गया और बहुत ही बेरहमी से अपने लंड को अपनी पैंट के ऊपर से मोड़ लिया और बिस्तर पर लेट गया और मनोहर अंकल कुछ ही इंच की दूरी पर सो रहे थे। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था और मुझे अज्ञात उत्तेजना में पसीना आने लगा था। मैंने जल्दी से गलियारे की जाँच की; वहां कोई नहीं था।

सोनिया भाबी: रितेश, अब तुम वाशरूम में जा
 सकते हो।

जारी रहेगी




NOTE


1. अगर कहानी किसी को पसंद नही आये तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका किसी से कोई लेना देना नही है . मेरे धर्म या मजहब  अलग  होने का ये अर्थ नहीं लगाए की इसमें किसी धर्म विशेष के गुरुओ पर या धर्म पर  कोई आक्षेप करने का प्रयास किया है , ऐसे स्वयंभू गुरु या बाबा  कही पर भी संभव है  .



2. वैसे तो हर धर्म हर मज़हब मे इस तरह के स्वयंभू देवता बहुत मिल जाएँगे. हर गुरु जी, बाबा  जी  स्वामी, पंडित,  पुजारी, मौलवी या महात्मा एक जैसा नही होते . मैं तो कहता हूँ कि 90-99% स्वामी या गुरु या प्रीस्ट अच्छे होते हैं मगर कुछ खराब भी होते हैं. इन   खराब आदमियों के लिए हम पूरे 100% के बारे मे वैसी ही धारणा बना लेते हैं. और अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं पर बुरे लोगो की बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है तो लगता है सब बुरे ही होंगे .. पर ऐसा वास्तव में बिलकुल नहीं है.



3.  इस कहानी से स्त्री मन को जितनी अच्छी विवेचना की गयी है वैसी विवेचना और व्याख्या मैंने  अन्यत्र नहीं पढ़ी है  .



4. जब मैंने ये कहानी यहाँ डालनी शुरू की थी तो मैंने भी इसका अधूरा भाग पढ़ा था और मैंने कुछ आगे लिखने का प्रयास किया और बाद में मालूम चला यह कहानी अंग्रेजी में "समितभाई" द्वारा "गुरु जी का (सेक्स) ट्रीटमेंट" शीर्षक से लिखी गई थी और अधूरी छोड़ दी गई थी।


बाद में 2017 में समीर द्वारा हिंदी अनुवाद शुरू किया गया, जिसका शीर्षक था "एक खूबसूरत हाउस वाइफ, गुरुजी के आश्रम में" और लगभग 33% अनुवाद "Xossip" पर किया गया था।

अभी तक की कहानी मुलता उन्ही की कहानी पर आधारित है या उसका अनुवाद है और कुछ हिस्सों का अनुवाद मैंने किया है ।

कहानी काफी लम्बी है और मेरा प्रयास जारी है इसको पूरा करने का।
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06-05-2022, 07:42 PM,
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गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे

औलाद की चाह

CHAPTER 7 - पांचवी रात

फ्लैशबैक-

अपडेट-4


कोई देख रहा है!


सोनिया भाभी शौचालय से बाहर आई। उसने अपनी रात में सोने की पोशाक पहनी हुई थी, लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि उन्होंने बिना आस्तीन की नाइटी पहनी हुई थी, लेकिन बिना ओवर कोट के! इन नाइटीज़ को बाहरी लोगों के सामने नहीं पहना जा सकता क्योंकि पूरे बाजू के साथ-साथ ऊपरी स्तन क्षेत्र भी खुला रहता है। सोनिआ भाबी को बस इतना ही पहन कर सामने से बाहर आते देख मैं हैरान रह गयी । मुझे लगा भाबी पर नशे का असर जरूर पड़ा होगा। वह बिस्तर के पास आई और रोशनी के नीचे खड़ी हो गई, मैं उसकी ब्रा और पैंटी लाइनों को भी उसकी नाइटी के पतले नीले कपड़े के माध्यम से स्पष्ट रूप से देख सकती थी। मैंने देखा कि रितेश भी भाबी को लेटे-लेटे देख रहा था।

सोनिया भाबी: क्या हुआ? अपने स्नान के लिए जाओ?

रितेश: आह! मेरा मन यही सोने का कर रहा है?

सुनीता भाबी: बढ़िया! तो आप यहाँ अपने चाचा के साथ सो जाओ ताकि अगर आप बीच में उठते हैं, तो बस अपनी बोतल फिर से खोल पाएंगे? हुह! तब मैं तुम्हारे कमरे में चैन की नींद सो सकूँगी!

रितेश: हा-हा हा? और अगर आधी रात में चाचा मुझे यह सोचकर गले लगाने लगे कि यह तुम हो, तो मेरा क्या होगा? हा-हा हा?

सुनीता भाबी: ओह्ह? बहुत अजीब बात है! बस चुप रहो और नहाने के लिए जाओ? चलो! चलो! । उठ जाओ!

वह अब बिस्तर के पास गई और रितेश को ऊपर खींच का खड़ा करने की कोशिश की। सुनीता भाबी जैसे-जैसे झुकी वह अपना काफी सेक्सी अंदाज़ पेश कर रही थी। उसकेस्तनों को दरार और स्तन उजागर हो गए और रितेश इतने करीब से इसका पूरा आनंद ले रहा था, लेकिन अगले ही पल उसने जो किया तो मेरा मुंह खुला का खुला रह गया!

भाबी उसे अपने हाथ से खींच रही थी और रितेश अपनी लेटी हुई स्थिति से थोड़ा ऊपर उठा और फिर एक झटका दिया और भाबी अपना संतुलन नहीं रख सकी और उसके ऊपर आ गई!

सुनीता भाबी: इ उईईई? ।

उसके शरीर पर गिरते ही भाभी चिल्लायी। निस्संदेह, यह दृश्य यादगार था। मनोहर अंकल सो रहे थे और ठीक उनके बगल में उनकी पत्नी उसी पलंग पर दूसरे पुरुष के ऊपर पड़ी हुई थी!

सामान्य परिस्थितियों में निश्चित रूप से भाबी ने रितेश के शरीर से तुरंत खुद को अलग कर लिया होता, लेकिन चूंकि दोनों नशे में थे, इसलिए घटनाओं का क्रम थोड़ा अलग था। मैंने देखा कि रितेश काफी स्मार्ट था और उसने दोनों हाथों से भाबी को जल्दी से गले लगा लिया और स्वाभाविक रूप से भाबी इस सेक्सी मुद्रा में अपने दोनों स्तनों को सीधे रितेश की सपाट छाती पर दबाते हुए तुरंत उत्तेजित हो गई।

रितेश: ऊई माँ! कोई मुझे बचाओ!

सोनिआ भाबी: तुम? तुम शरारती क्या मैं इतनी वजनी हूँ?

रितेश: अंकल कृपया उठो औरअपनी बुलबुल की सम्भालो? ।

सुनीता भाबी: बदमाश!

रितेश: आपको सलाम अंकल! सलाम! आप यह भार रोज उठा रहे हैं? हा-हा हा?

वे जोर से हँसे और मैंने देखा कि सुनीता भाबी उसके ऊपर पड़ी रही! उसने कभी भी उठने की कोशिश नहीं की और उसके स्तन उसके सीने पर और रितेश के टांगो ने भाभी की मांसल जांघों को कसकर दबाया हुआ था। मुझे खुद ही उत्तेजना जनित गर्मी लगने लगी और ये सीन देखकर ही पसीना आ गया!

सोनिआ भाबी: आई? रितेश? मुझे उठना है! मैं इस तरह नहीं रह सकती!

रितेश: क्यों? समस्या क्या है?

सोनिआ भाबी: क्या मतलब?

रितेश: अरे हाँ! कोई जरूर आपको देख रहा है!

सुनीता भाबी: कौन? मेरा मतलब है कौन?

भाबी काफी हैरान थी, उसकी आवाज में भी हैरानी झलकती थी और मैं भी। क्या रितेश ने मुझे पर्दे के पीछे देख लिया है?

रितेश: अरे! अंकल यार! आपका पूज्य पति-देव! वह अब आपको अपने सपनों में देख रहे होंगे? हा-हा हा! हो हो?

सुनीता भाबी: तुम भी न! छोड़ो मुझे और बस उठ जाओ! उठो मैं कहती हूँ।

आखिर में भाबी ने रितेश से खुद को अलग कर लिया और उठकर रितेश का मज़ाक उड़ा रही थी और वह भी बिस्तर से उठकर शौचालय की ओर भागा। सुनीता भाबी इतनी मोटी फिगर के साथ रितेश का पीछा करते हुए उसके पीछे भागी और उस नीली नाइटी में अविश्वसनीय रूप से सेक्सी लग रही थीं।

मैंने कुछ देर इंतजार किया और उसके बाद कमरे में प्रवेश करने का फैसला किया।

ठीक उस समय मुझे से देखकर भाबी थोड़ा अचंभित थी, लेकिन बहुत जल्दी सामान्य हो गयी और मुझे उसने 600 / -रुपये सौंप दिए और बोली कि ये पैसे उन पर मेरा उधार बकाया था। वह मुझे मेरे कमरे में जल्दी से वापस भेजने के लिए काफी ज्यादा अधिक उत्सुक थी और मैं भी रितेश के साथ उनकी छोटी-सी शरारती दौड़ में खलल नहीं डालना चाहती थी। मैंने उसे शुभ रात्रि बोली और अपने कमरे की तरफ चल दी। हालाँकि मैंने गलियारे से अपने कमरे की ओर कुछ कदम उठाए, ताकि सुनीता भाबी को पूरी तरह से यकीन हो जाए कि मैं दूर हूँ, फिर मैं वापस मुड़ी और एक मिनट में फिर से उसके कमरे की तरफ लौट आयी।

मेरा भाग्य था कि मैं आगे का भी दृश्य देखू!

दरवाजा अभी भी खुला था, हालांकि पर्दा ठीक कर दिया गया था। मैं जो कुछ भी कर रही थी उसमें से मैं एक अजीब उत्तेजना का एहसास था और मैंने फिर से झाँकने से पहले एक पल के लिए इंतजार किया। इस जोखिम भरे काम को करते हुए मुझे अपने दिल की धड़कन साफ सुनाई दे रही थी। मैंने, एक बार फिर। परदे के ओट से अंदर झाँका।

सोनिआ भाबी: क्या आप का स्नान हो गया हैं?

रितेश: हाँ भाबी। एक सेकंड में बाहर आ रहा हूँ।

अगले ही पल मैंने रितेश थोडा-सा कपड़ा पहन कर शौचालय से बाहर आते देखा! मैंने देखा कि सुनीता भाबी भी उन्हें उस पोशाक एक टक देख ही थी। रितेश ने ऐसा किया कि वह भाबी को शायद सबसे अच्छे तरीके से अपना बदन दिखाना चाहता था। उसके अंडरवियर के चमकीले लाल रंग ने चीजों को और अधिक आकर्षक बना दिया क्योंकि उसके छोटे से अंडरवियर में से उसका सीधा उपकरण अपना सिर ऊपर करके खड़ा हुआ साफ़ नजर आ रहा था! स्वाभाविक रूप से सोनिया भाबी इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकीं और वह भी इसकी ओर आकर्षित हो गईं। वास्तव में, मैं भी ध्यान से उसके अंडरवियर के अंदर उसकी कड़ी छड़ का उभार देख रही थी।

रितेश: मुझे आशा है कि आपको बुरा नहीं लगेगा भाबी? मैं इस तरह बाहर आ गया हूँ? लेकिन मेरे पास कोई और उपाय नहीं है! मेरी पैंट बाल्टी में गिर कर गीली हो गयी है।

सुनीता भाबी: नहीं, नहीं? यह? ठीक है? ऐसी स्थिति में तुम और क्या कर सकते हो?

मैंने देखा की भाबी की लाली भरी आँखें उसके कच्छे के इर्द-गिर्द घूम रही थीं और साथ में वह जल्दी से अपनी ब्रा एडजस्ट कर रही थी वह रितेश के खड़े हुए लिंग को उसके कच्छे के अंदर देखकर जोर से सांस ले रही थी।

रितेश: मैंने रश्मि की आवाज सुनी? क्या वह यहाँ आई थी?

सुनीता भाबी: हाँ? मेरा मतलब है हाँ, कुछ क्षण पहले, मुझे उसके कुछ पैसे देने थे।

रितेश: ओह! तो बेहतर होगा कि मैं चला जाऊँ, अगर वह वापस आ गयी तो बहुत अजीब लगेगा? खासकर जब मैं यहाँ मैं इस तरह खड़ा हूँ।

सुनीता भाबी: नहीं, नहीं। वह चली गई है। वह नहीं आएगी अब? ।

सुनीता भाबी अपनी बात पूरी नहीं कर पाईं क्योंकि नींद में मनोहर अंकल ने सादे पलटी और एक तरफ से दूसरी तरफ घूम गए। रितेश और भाबी जैसे बिस्तर पर चाचा की हरकत देखकर ठिठक गए और जाहिर तौर पर वे डर गए। भाबी ने बिना शोर मचाए रितेश को तुरंत जाने का इशारा किया और रितेश ने भी अपने होठों पर उंगली रखकर दरवाजे की ओर दबे पाँव बढ़ गया। मनोहर अंकल अपनी मूल स्थिति में वापस आ गए थे और फिर से खर्राटे लेने लगे।

रितेश: शुभ रात्रि भाबी। रितेश लगभग फुसफुसाया।

सुनीता भाबी: ईई? एक मिनट।

भाबी लगातार अपने सोते हुए पति पर नजर रखने के बावजूद रितेश की ओर बढ़ी। मुझे यह भी एहसास हुआ कि मुझे अब चलना चाहिए।

लेकिन तभी?

सुनीता भाबी रितेश के बहुत करीब आ गई और मैं चकित रह गयी जब उसने सीधे उसके कड़े लंड को पकड़ लिया और उसके कानों में कुछ फुसफुसायी। भाबी की इस बेहद बोल्ड अदा से मैं दंग रह गयी। जैसा कि रितेश के हाव-भाव से जाहिर हो रहा था, रितेश ने भी शायद इसकी बिलकुल उम्मीद नहीं की थी और एक पल के लिए वह भी मानो विपन्न-सा देखा। जब वह ठीक हुआ तो उसने भाबी को पकड़ने की कोशिश की, वह उसे दरवाजे की ओर धकेलने लगी। मुझे घटनास्थल से जाना पड़ा नहीं तो अब मैं जरूर उन्हें देखती हुई पकड़ी जाती क्योंकि भाबी के धक्का देने के कारण रितेश दरवाजे के बहुत करीब था।

मैं तुरंत मौके से गायब हो गयी और जल्दी से अपने कमरे में आ गयी और दरवाजा बंद कर लिया। मैं अब भी सोच रही थी कि क्या रितेश इसके बाद सोने के लिए अपने कमरे में जाने को तैयार हो गया? या उस कमरे में ही कुछ और एक्शन हुआ या सुनीता भाबी रितेश के साथ उनके कमरे में गई! मुझमें दोबारा उनके कमरों में झाँकने की हिम्मत नहीं हुई और इसलिए मेरे लिए ये सस्पेंस रह गया।

राजेश गहरी नींद सो रहा था। मुझे सामान्य होने में कुछ समय लगा क्योंकि मैं यह ताक झाँक करते हुए हांफ गयी थी! ताक झाँक? और ईमानदारी से अभी मैंने जो भी आखिरी बार अपनी आँखों से देखा था मैं उस पर विश्वास करने असमर्थ थी । मैंने अपने आंतरिक वस्त्रों की निकला और बिस्तर पर सोने के लिए चली गयी और मैं सोने से पहले बहुत देर तक रितेश और भाबी के बारे में सोचती रही ।

अगली सुबह स्वाभाविक रूप से हम सभी देर से उठे और निश्चित रूप से नाश्ते की मेज पर पिछली रात से बारे में बात करते हुए और हंसी के साथ बाते हुई। मनोहर अंकल और राजेश एक बार फिर बाज़ार जाने को आतुर थे क्योंकि अगली सुबह हमे वहाँ से जाना था। सोनिया भाबी और मैं, रितेश के साथ बीच पर जाने के लिए तैयार हुए। आज हमने तय किया कि हम सूखे कपड़ों का एक सेट ले जाएंगे ताकि नहाने के बाद हमें अपने गीले कपड़ों में ज्यादा देर न रहना पड़े। कल हमने देखा था कि समुद्र तट पर चेंजिंग रूम थे।

जारी रहेगी


NOTE




1. अगर कहानी किसी को पसंद नही आये तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका किसी से कोई लेना देना नही है . मेरे धर्म या मजहब  अलग  होने का ये अर्थ नहीं लगाए की इसमें किसी धर्म विशेष के गुरुओ पर या धर्म पर  कोई आक्षेप करने का प्रयास किया है , ऐसे स्वयंभू गुरु या बाबा  कही पर भी संभव है  .







2. वैसे तो हर धर्म हर मज़हब मे इस तरह के स्वयंभू देवता बहुत मिल जाएँगे. हर गुरु जी, बाबा  जी  स्वामी, पंडित,  पुजारी, मौलवी या महात्मा एक जैसा नही होते . मैं तो कहता हूँ कि 90-99% स्वामी या गुरु या प्रीस्ट अच्छे होते हैं मगर कुछ खराब भी होते हैं. इन   खराब आदमियों के लिए हम पूरे 100% के बारे मे वैसी ही धारणा बना लेते हैं. और अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं पर बुरे लोगो की बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है तो लगता है सब बुरे ही होंगे .. पर ऐसा वास्तव में बिलकुल नहीं है.







3.  इस कहानी से स्त्री मन को जितनी अच्छी विवेचना की गयी है वैसी विवेचना और व्याख्या मैंने  अन्यत्र नहीं पढ़ी है  .







4. जब मैंने ये कहानी यहाँ डालनी शुरू की थी तो मैंने भी इसका अधूरा भाग पढ़ा था और मैंने कुछ आगे लिखने का प्रयास किया और बाद में मालूम चला यह कहानी अंग्रेजी में "समितभाई" द्वारा "गुरु जी का (सेक्स) ट्रीटमेंट" शीर्षक से लिखी गई थी और अधूरी छोड़ दी गई थी।




बाद में 2017 में समीर द्वारा हिंदी अनुवाद शुरू किया गया, जिसका शीर्षक था "एक खूबसूरत हाउस वाइफ, गुरुजी के आश्रम में" और लगभग 33% अनुवाद "Xossip" पर किया गया था।

अभी तक की कहानी मुलता उन्ही की कहानी पर आधारित है या उसका अनुवाद है और कुछ हिस्सों का अनुवाद मैंने किया है ।

कहानी काफी लम्बी है और मेरा प्रयास जारी है इसको पूरा करने का।
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06-24-2022, 09:15 AM,
RE: Porn Story गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे
गुरुजी के आश्रम में रश्मि के जलवे

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औलाद की चाह

CHAPTER 7 - छटी सुबह

फ्लैशबैक- सागर किनारे

अपडेट-1


निर्जन समुद्र तट !



मैं रितेश और सोनिया भाभी समुद्र तट पर नाश्ते के बाद ही आ गए थे, इस कारण से समुद्र तट पर भीड़ बहुत कम थी। दिन भी ज्यादा गर्म नहीं था क्योंकि ठंडी हवा चल रही थी। हमारे पास समुद्र तट की ओर बहुत से नारियल के पेड़ थे और हम सब कुछ देर रेत पर टहलते रहे।

रितेश: रश्मि, आज हम समुद्र तट के इस हिस्से में स्नान नहीं करेंगे। एक पत्थर फेंकने की दूरी पर एक और खूबसूरत जगह है। कल मैंने इसका पता लगाया था।

मैं: वाक़ई? कहाँ है?

रितेश: हम रिक्शा से जा सकते हैं। मुश्किल से 15-20 मिनट लगेंगे।

सोनिआ भाबी: यह जानकर बहुत अच्छा लगा।

मैं: चलो फिर चलते हैं। हम यहाँ जितनी देर करेंगे, सूरज जोर से चमकने लगेगा और गर्मी बढ़ जायेगी।

रितेश: ठीक है!

रितेश रिक्शा स्टैंड पर गया और हमारे लिए एक साइकिल-रिक्शा लाया और हम मुख्य सीट पर बैठ गए और रितेश ने खींचने वाले की सीट साझा की। करीब आधे घंटे में हम मौके पर पहुँच गए। दरअसल यह उतना करीब नहीं था जितना रितेश ने शुरू में बताया था। वास्तव में समुद्र तट ने एक मोड़ ले लिया था और हालांकि समुद्र तट का यह हिस्सा काफी ऊबड़-खाबड़ था, लेकिन सेटिंग अच्छी थी।

सोनिआ भाबी: वाह! यह जगह बहुत खूबसूरत लगती है, खासकर पहाड़ी पृष्ठभूमि के साथ।

रितेश: मैंने तुमसे कहा था। यह एक बहुत अच्छी जगह है।

मैंने यह भी नोट किया कि आश्चर्यजनक रूप से वह स्थान बिल्कुल उजाड़ और निर्जन था। रिक्शा वाले और हमारे अलावा उस तट पर कोई नहीं था। इसके अलावा समुद्र तट वास्तव में चट्टानी था।

मैं: लेकिन? लेकिन समुद्र तट बहुत पथरीला लगता है। यहाँ कोई कैसे स्नान कर सकता है?

रिक्शा चलाने वाला: महोदया, यहाँ लोग नहाते हैं। यहाँ रोजाना कई विदेशी आते हैं। बस कुछ देर रुकिए, 11 बजे के बाद ये आना शुरू हो जाएंगे।

रितेश: जाओ और देखो! मैं रिक्शावाले के साथ प्रतीक्षा करने की दर तय कर लेता हूँ।

हम समुद्र तट की ओर बढ़े और रितेश ने रिक्शा वाले से बात की। गहरे नीले पानी में सुनहरी रेत के साथ दृश्य वास्तव में अच्छा था और पृष्ठभूमि में पहाड़ी वास्तव में सुरम्य थी।

रितेश: चलो समंदर में चलते हैं।

हम दोनों वापस लौट आए क्योंकि रितेश पहले से ही वहाँ था और हमने देखा कि रिक्शा वाला भी हमारे कैरी बैग के साथ रितेश के पीछे आ रहा था।

रितेश: वह तब तक इंतजार करेगा जब तक हम स्नान नहीं कर लेते और हमारे कपड़े, कैमरा और सैंडल की देखभाल करेंगा।

सोनिया भाबी: वाह! बहुत बढ़िया!

मैं: लेकिन किसी भी मामले में यहाँ कोई नहीं है। इन्हें कौन चुराएगा?

रितेश: फिर भी रश्मि, सुरक्षित रहना ही बेहतर है। यह हमारे लिए एक अनजान जगह है। है ना?

सोनिआ भाबी: नहीं रश्मि, रितेश ने सही काम किया है। किसी को पहरा देना अच्छा है।

चलते समय हमें सावधान रहना पड़ा क्योंकि समुद्र तट पर बहुत सारे कंकड़ और छोटी-छोटी नुकीली चट्टानें रेत में मिली हुई थीं। हम लगभग पानी तक पहुँच चुके थे और यहाँ समुद्र तट तुलनात्मक रूप से साफ और चट्टानों से रहित था। रिक्शा वाला भी वहीं था, बैग लिए हुए कुछ ही पीछे खड़ा था, जिसमें मेरी एक सलवार-कमीज और भाबी की एक साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज था। हमने एक अंडरगारमेंट सेट भी लिया था और बैग में कैमरा भी था। रितेश कुछ भी नहीं लाया था, क्योंकि उसे विश्वास था कि वह तेज धूप में आसानी से सूख जाएगा।

मैंने अपनी-अपनी चुनरी उतारी और रितेश को सौंप दी ताकि वह उसे पैकेट में रख सके। मेरे बड़े और सुडोल स्तन अब मेरे कामिज़ के अंदर चुनरी के बिना और अधिक स्पष्ट दिख रहे थे। चूंकि रिक्शा वाला काफी पास खड़ा था, मुझे कुछ अजीब-सा लगा। रितेश ने भी अपने शॉर्ट्स उतारना शुरू कर दिए, जो उसने अपनी पतलून के नीचे पहने हुए थे।

रितेश: ठीक है, भाई तुम यहीं रुको। बस पानी से सुरक्षित दूरी बनाकर रखना क्योंकि उस पैकेट में सूखे कपड़े हैं।

रिक्शा वाला: साहब चिंता मत करो। मैं आपके पैकेट की देखभाल करूंगा। लेकिन? लेकिन मुझे लगता है कि?

रितेश: क्या आप कुछ कहना चाहते हैं?

रिक्शा चलाने वाला: हाँ साहब! मैडम के लिए।

यह कह कर उन्होंने भाबी को इशारा किया।

रितेश: क्या?

रिक्शा चलाने वाला: साहब, यहाँ समुद्र का करंट बहुत ज्यादा है। समुद्र में जाते समय साड़ी पहनना एक बड़ा जोखिम है।

सोनिया भाबी: हम गहराई में नहीं जाएंगे और फिर रितेश मेरी बगल में ही होगा।

रिक्शा चलाने वाला: फिर भी महोदया, पानी के तेह बहाव और करंट के कारण आपका संतुलन बिगड़ सकता है। आप यहाँ नए हैं, आप इस जगह में पानी के प्रवाह को नहीं जानते हैं।

भाबी और मैंने एक दूसरे को देखा। हम पानी के करंट के बारे में सुनकर थोड़े चिंतित थे।

रितेश: भाबी, क्या करें?

सोनिआ भाबी: आपका क्या सुझाव है?

रितेश: देखिए भाबी, आखिर वह एक स्थानीय है और समुद्र को हमसे बेहतर जानता है।

सोनिआ भाबी: लेकिन? लेकिन मैं अपने साथ सलवार-कमिज़ नहीं लायी हूँ।

रितेश: भाबी, वह जो कहता है उस पर शब्दशः न करें?

भाबी ने सवालिया नजरों से रितेश की तरफ देखा।

रितेश: आपको सलवार-कमिज़ में बदलने की ज़रूरत नहीं है। हाँ, करंट में साड़ी को मैनेज करना मुश्किल होगा। आप साड़ी यहीं छोड़ सकती हैं।

सोनिआ भाबी: मतलब? तुम्हारा मतलब है? मैं अपने पेटीकोट और ब्लाउज में जाऊँ?

रितेश: हाँ।

सुनीता भाबी: लेकिन? लेकिन मैं येर कैसे कर सकती हूँ?

रितेश: भाबी? यह एक बहुत ही सुरक्षित और निर्जन जगह है। बहुत कोशिश करने पर भी आपको यहाँ देखने वाला एक भी व्यक्ति नहीं मिलेगा।

सुनीता भाबी: वह तो ठीक है, लेकिन?

रिक्शा-चालक: यह पर्यटकों के लिए एक प्रसिद्ध स्थान नहीं है। मैडम यहाँ विदेशियों के अलावा कोई नहीं आता। वे भी लगभग दोपहर के समय आते हैं और आपको तो पता ही है वह तो पूरे कपडे भी निकाल देते हैं ।

स्थिति बहुत ही अजीब होती जा रही थी। दो पुरुष एक विवाहित 40+ महिला को अपनी साड़ी उतारने और स्नान के लिए जाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे कि उसे यहाँ कोई भी नहीं देखेगा!

रिक्शा-चालक: मैडम देखिये, पैरों में कुछ भी चिपक जाने से उस धारा में परेशानी हो सकती है।

रितेश: ठीक है। भाबी यहाँ चांस नहीं लेना चाहिए। अपनी साड़ी उसके पास छोड़ दो।

सुनीता भाबी: ओह! ठीक है, जैसा आप कहते हैं।

इतना कहकर भाबी हमसे दूर हो गई और साड़ी खोलने लगी। सुनीता भाबी दिन के उजाले में खड़ी अपनी साड़ी को खोलने लगी और वह भी दो पुरुषों के सामने, विशेष रूप से रिक्शा चलाने वाले के सामने, यह बेहद अजीब लग रहा था। भाबी की सुडौल पीठ और उसकी विशाल गांड को देखकर रिक्शा चलाने वाले की आँखें मानो बाहर निकल आईं। जैसे ही वह हमारी ओर मुड़ी, वह काफी आकर्षक लग रही थी, क्योंकि उसके तंग गोल स्तन उसके ब्लाउज में बहुत बड़े लग रहे थे। भाबी के स्तनों की उजली दरार भी नजर आ रही थी, जो उन्हें हॉट लुक दे रहे थे। भाबी ने अपनी साड़ी रिक्शा वाले को सौंप दी, जिसने मुस्कुराते हुए उसे ले लिया।

रितेश: भाबी आप बहुत अच्छी लग रही हो!

सोनिआ भाबी: बस चुप रहो!

भाबी अपने खुली हुए दरार को ढकने के लिए अपने ब्लाउज को समायोजित करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन यह एक असंभव काम था। तभी मैंने उनकी कमर पर नज़र डाली और चौंक गयी। भाबी को कुछ भी संकेत देने से पहले मैंने अपनी आंखों के कोने से रिक्शा वाले को देखा कि क्या उसने यह देखा है और मेरे पूर्ण सदमे में मैंने देखा कि वह केवल वही देख रहा था! मैं इस निम्न वर्ग के व्यक्ति की गंदी निगाहों को स्पष्ट रूप से समझ रही थी।

जो मैं देख रही थी, रिक्शा वाले की भी उस पर नजर थी!

जारी रहेगी


NOTE


1. अगर कहानी किसी को पसंद नही आये तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका किसी से कोई लेना देना नही है . मेरे धर्म या मजहब  अलग  होने का ये अर्थ नहीं लगाए की इसमें किसी धर्म विशेष के गुरुओ पर या धर्म पर  कोई आक्षेप करने का प्रयास किया है , ऐसे स्वयंभू गुरु या बाबा  कही पर भी संभव है  .

2. वैसे तो हर धर्म हर मज़हब मे इस तरह के स्वयंभू देवता बहुत मिल जाएँगे. हर गुरु जी, बाबा  जी  स्वामी, पंडित,  पुजारी, मौलवी या महात्मा एक जैसा नही होते . मैं तो कहता हूँ कि 90-99% स्वामी या गुरु या प्रीस्ट अच्छे होते हैं मगर कुछ खराब भी होते हैं. इन   खराब आदमियों के लिए हम पूरे 100% के बारे मे वैसी ही धारणा बना लेते हैं. और अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं पर बुरे लोगो की बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है तो लगता है सब बुरे ही होंगे .. पर ऐसा वास्तव में बिलकुल नहीं है.


3.  इस कहानी से स्त्री मन को जितनी अच्छी विवेचना की गयी है वैसी विवेचना और व्याख्या मैंने  अन्यत्र नहीं पढ़ी है  .

4. जब मैंने ये कहानी यहाँ डालनी शुरू की थी तो मैंने भी इसका अधूरा भाग पढ़ा था और मैंने कुछ आगे लिखने का प्रयास किया और बाद में मालूम चला यह कहानी अंग्रेजी में "समितभाई" द्वारा "गुरु जी का (सेक्स) ट्रीटमेंट" शीर्षक से लिखी गई थी और अधूरी छोड़ दी गई थी।


बाद में 2017 में समीर द्वारा हिंदी अनुवाद शुरू किया गया, जिसका शीर्षक था "एक खूबसूरत हाउस वाइफ, गुरुजी के आश्रम में" और लगभग 33% अनुवाद "Xossip" पर किया गया था।

अभी तक की कहानी मुलता उन्ही की कहानी पर आधारित है या उसका अनुवाद है और कुछ हिस्सों का अनुवाद मैंने किया है ।

कहानी काफी लम्बी है और मेरा प्रयास जारी है इसको पूरा करने का।
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