Sex kahani मासूमियत का अंत
08-25-2020, 01:03 PM,
#1
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मासूमियत का अंत

सबसे पहले मैं आप सबको अपने बारे में थोड़ा सा बता देती हूँ। मेरा नाम सुहानी चौधरी है। जैसा मेरा नाम है वैसे ही मेरा शरीर। मेरा ठीक ठाक हाइट की हैं और तन का रंग भी गोरा है। मैं थोड़ी सी भरी भरी शरीर की हूँ पर मोटी नहीं हूँ। मेरी शक्ल काफी मासूम सी है और स्वभाव भी शर्मीला सा ही है।
शुरू से ही मैं पढ़ाई मैं ज्यादा ध्यान देती थी, हालांकि मेरी दोस्ती लड़कों से बहुत कम थी फिर भी मैं सभी से बोल लेती थी। बहुत से लड़कों ने मुझको प्रपोज़ किया पर मैं सबको प्यार से मना कर देती थी।
जब मैंने कॉलेज में एड्मिशन लिया उस साल से मेरी मासूमियत का वक़्त पूरा होने लगा। मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई जिसका नाम तन्वी है. शुरू में लगा कि वो भी मेरी तरह शरीफ है पर जब तक मैं उसे समझ पाती, मैं सेक्स के समुंदर में उतार चुकी थी। और मुझे बिगाड़ने का पूरा श्रेय मेरी सहेली तन्वी को जाता है।
हम दोनों एक ही हॉस्टल रूम में रहती थी। शुरू के एक महीने तो सब नॉर्मल चला फिर मुझे उसकी बातें पता चलने लगी। क्लास के बहुत से लड़कों ने उससे मेरे से सेटिंग कराने को बोला क्यूंकि मैं लड़कों से ज्यादा बात नहीं करती थी, पर मैंने सबको मना कर दिया।
एक दिन रात को मेरी आँख खुली तो देखा कि तन्वी कम्प्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रही थी और अपनी चूत रगड़ रही थी। मैंने सोचा इसे डराती हूँ और मैं उठ के चिल्लाने लगी- क्या है ये सब?
पर वो ज्यादा तेज़ थी, बोली- चिल्ला क्यूँ रही है तू भी देख ले। अब बच्चों की आदतें छोड़ और बड़ों जैसी हरकतें किया कर।
उसकी बात सही थी तो मैं भी साथ में ब्लू फिल्म देखने लगी। मैंने पहली बार देखी थी तो कुछ अजीब भी लग रही थी और अच्छी भी।
मुझे पता भी नहीं चला और मैं अपनी चूत को ऊपर से रगड़ रही थी।
तन्वी ये देख के मुस्कुराने लगी, फिर वो बोली- शर्मा मत, उतार दे लोअर और फिर रगड़।
मैं शरमा रही थी तो उसने अपने सारे कपड़े उतार दिये. थोड़ा शर्माते हुये मैं भी उसके सामने नंगी हो गयी। फिर मैं फिल्म देखते हुये रगड़ने लगी अपनी चूत को।
5 मिनट के बाद मुझे बहुत अजीब सी गुदगुदी सी होने लगी और शरीर में कम्पकपी से होने लगी। फिर एकदम से काँपते हुए मेरा पानी छूट गया और मैं हाँफने लगी। मैं हंस रही थी और तन्वी फिर बोली- कैसा लगा सुहानी?
मैंने कहा- यार, मजा आ गया … ऐसा मजा तो पहले कभी नहीं आया।
उसने पूछा- इससे ज्यादा मजा चाहिये?
मैं बोली- कैसे?
तो वो बोली- मैं तेरे लिए लंड का इंतजाम कर सकती हूँ।
मैं डर गयी और बोली- नहीं यार … वो सब शादी के बाद करना सही होता है। पहले करो तो सब कैरक्टर लेस समझते हैं।
उसने कहा- जब तक कोई पकड़ा ना जाए, कोई कुछ नहीं कहता।
उसकी बात सही थी तो मैं बोली- किसी को पता तो नहीं चलेगा न?
उसने मुझे भरोसा दिलाया कि नहीं पता चलेगा।
मैंने डरते हुए हाँ कर दी।
उसने तभी अपने फोन से किसी को फोन मिलाया और सीधा बोली- मेरी सहेली सुहानी तुम्हारे लंड से चुदना चाहती है, कल तैयार रहना।
मैंने पूछा- कौन है वो?
वो बोली- कल दर्शन कर लियो दोनों के, लड़के के भी और उसके लंड के भी। अब सो जा अच्छे से, कल बहुत थकान होने वाली है।
मैं कल के बारे में सोचते हुए कब सो गयी, पता ही नहीं चला।
अगली सुबह मैं उठी, तन्वी पहले ही उठ चुकी थी, हम दोनों ने आज कॉलेज बँक मार लिया था।
उसने मुझे कहा- तैयार हो जा अच्छे से … आज तेरी अच्छे से चुदाई होगी।
मैंने शरमा के चादर में मुंह छुपा लिया।
वो बोली- अरे अभी से शरमा रही है, आज तो बेशर्म होने की बारी है, जा जल्दी से नहा ले।
मैं नहा धोकर आई तो उसने मेरे लिए अपनी ब्लैक ड्रेस निकाल के रखी थी। वो सिंगल पीस टॉप था, उसमें भी क्लीवेज दिखता था थोड़ा सा।
मैं बोली- मैं ऐसे कपड़े नहीं पहनती।
वो बोली- आज जो मैं बोल रही हूँ … वो कर, इसे पहन ले और बाहर जाते हुये ऊपर से लॉन्ग जाकेट डाल दूँगी, किसी को नहीं दिखेगा।
मैंने पहन लिए वो कपड़े और मेकअप भी कर दिया उसने मेरा।
कल तक जो लड़की शरीफ और मासूम दिखती थी, वो आज हॉट लग रही थी।
हॉस्टल खाली हो चुका था क्योंकि सभी लड़कियां क्लास लगाने जा चुकी थी।
मैंने पूछा- कितनी देर लगेगी?
तो उसने बताया- ओह हो … मैडम को चुदने की बड़ी जल्दी है?
मैं फिर शरमा गयी।
उसका फोन बजा और उसने बोला- ठीक है, अभी भेजती हूँ।
फिर तन्वी ने रूम से बाहर झाँका और बोली- रास्ता साफ है, हॉस्टल के गेट के बाहर एक गाड़ी खड़ी है.
उसने रूम के छज्जे से मुझे गाड़ी दिखा दी।
फिर मैंने अपना पर्स उठाया, तन्वी मेरे पास आई और बोली- जा सुहानी जा … जी ले अपनी ज़िंदगी।
और हंसने लगी।
मैं चुपचाप सीधा गाड़ी में आ के बैठ गयी। उसमें बस ड्राईवर था.
20 मिनट के बाद गाड़ी एक ऊंची सी बिल्डिंग के आगे आकर रुकी। ड्राईवर बोला- मैडम यहीं उतरना है आपको।
मैं उतर गयी और ड्राईवर चला गया।
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08-25-2020, 01:03 PM,
#2
RE: Sex kahani मासूमियत का अंत
तभी मेरा फोन बजा, मैंने उठाया तो उधर से एक लड़का बोला- मैंने गेट पे बोल दिया है, तुम सीधा अंदर आ जाओ फ्लैट नंबर 804 में।
मैं लिफ्ट लेके आठवें फ्लोर पे पहुंची और फ्लैट की बैल बजाई।
जैसे ही गेट खुला मैं एकदम से चौंक गयी।
इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, उसने मेरा हाथ पकड़ के अंदर खीच लिया और दरवाजा बंद कर दिया।
कमरे में मेरे कॉलेज का एक सीनियर लड़का था जिसका नाम हर्षिल था। वो दिखने में तो कुछ खास नहीं था पर काफी लंबा तगड़ा था।
मैं चौंककर बोली- सर आप?
वो बोला- हाँ मैं … आओ और सोफ़े पे बैठ जाओ।
मुझे उत्सुकता से ज्यादा अब डर सा लग रहा था।
वो समझ गया था कि मैं डर रही हूँ। उसने बोला- डरो मत, आराम से बैठो।
मैं बेचैनी से बैठ गयी।
वो बड़े सलीके से पेश आ रहा था। हर्षिल बोला- डरो मत, कुछ नहीं होगा। कुछ पियोगी?
मैं बोली- एक ग्लास पानी दे दो।
उसने पानी दे दिया।
फिर उसने तन्वी को फोन मिलाया और कहने लगा- सुहानी आ गयी है फ्लैट पे … पर डर रही है, जरा समझा दो इसे।
हर्षिल ने फोन मुझे दे दिया। मैं बाल्कनी में जा के बात करने लगी।
तन्वी ने बोला- डर मत, सर बहुत अच्छे हैं, तेरा ख्याल रखेंगे। अब तू जा और चुद ले।
मैंने खुद को समझाया और अंदर आ गयी।
हर्षिल बोला- मैं तुम्हारे लिए जूस ले आऊँ?
मैंने शर्माते हुये कहा- ठीक है।
फिर जूस पीकर हर्षिल बोला- तो शुरू करें?
मैंने कहा- मुझे शर्म आ रही है।
हर्षिल ने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है? यह काम तो सब करते हैं। चलो मैं तुम्हारी शर्म दूर कर देता हूँ।
उसने बोला- मैं आराम से करूंगा, डरो मत।
मैं बोली- क्या मैं बाथरूम जा सकती हूँ।
उसने बाथरूम का रास्ता बता दिया।
मैं अंदर गयी, शीशे के सामने खुद को सेट किया और ऊपर की और लॉन्ग जाकेट उतार दी, अपनी ड्रेस सेट की और बूब्स को थोड़ा सा ऊपर करे, बाल भी ठीक करे।
फिर मैं रूम में आ गयी.
हर्षिल सोफ़े पर बैठा था और मेरा इंतज़ार कर रहा था। मुझे खुद को इस हालत में देख के शर्म सी आ रही थी।
हर्षिल बोला- यार, कितनी खूबसूरत हो तुम! जब से तुम कॉलेज में आई हो, मैं तो तुम्हें ही देखता हूँ। बैठो न।
मैं सामने बैठ गयी.
हर्षिल बोला- तो शुरू करते हैं.
और उसने पर्दे कर दिया कमरे के।
हर्षिल मेरे पास आया और मुझे देखने लगा। मैं खड़ी हो गयी; मेरा दिल धक धक कर रहा था।
वो मेरी और करीब आया तो मैं थोड़ा पीछे हो गयी।
हर्षिल मुस्कुराने लगा।
उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये और सिर्फ कच्छा छोड़ दिया। मैं उसके जिस्म को देखे जा रही थी। एकदम बॉडी बना के हीरो लग रहा था, बस उसकी शक्ल हीरो वाली नहीं थी।
हर्षिल बोला- अब आप अपनी ड्रेस उतारो।
मैंने कहा- मुझे शर्म आ रही है।
उसने कहा- ऐसे तो काम नहीं चलेगा, मैंने भी तो अपने कपड़े उतार दिये।
फिर उसने मेरे कंधे से ड्रेस के फीते खोल दिये और वो नीचे गिर गयी।
मैं तो शर्म के मारे धरती में गड़ी जा रही थी क्योंकि अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। मैंने अपनी नंगी टाँगे क्रॉस कर के मोड़ ली और नीचे देखने लगी।
हर्षिल समझ गया कि इतना आसान नहीं है मुझे चुदने के लिए तैयार करना।
वो मेरे पास आया, मेरी ठुड्डी को उंगली से उठाया और मेरी आंखों में देख के बोला- आज सब भूल जाओ … बस इस वक्त को एंजॉय करो।
फिर उसने दोनों हाथों से मेरा चेहरा पकड़ा और मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिये। मेरी आंखें आश्चर्य से फटी रह गयी। मेरे होंठ उसके होंठों मिले हुये थे.
और फिर अपने आप मेरी आंखें बंद हो गयी, मैं उस लम्हे में डूब गयी।
फिर मैं और वो एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे। लगभग दो मिनट तक मुझे किस करने के बाद उसने मुझे छोड़ दिया। मैंने आँखें खोली, अब मेरा डर निकल चुका था और मैं मुसकुराते हुए नीचे देख रही थी।
हर्षिल बोला- यार तुम इतनी मासूम सी हो दिखने में … कि ज़बरदस्ती करने का दिल नहीं कर रहा और मैं मुस्कुरा दी।
लगभग दो मिनट तक मुझे किस करने के बाद उसने मुझे छोड़ दिया। मैंने आँखें खोली, अब मेरा डर निकल चुका था और मैं मुसकुराते हुए नीचे देख रही थी।
फिर हर्षिल ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने कच्छे पे रख दिया। अंदर तो उसका लण्ड खड़ा हो गया था; मेरी तो हथेली में भी नहीं आ रहा था। मैंने चौंक के उसको देखा तो वो मुस्कुराने लगा और कहा- यही तुम्हारी चुदाई करेगा।
मैंने डरते हुये कहा- ये तो अभी से बहुत बड़ा महसूस हो रहा है।
उसने बोला- ये लो पूरा देख लो! और अपना कच्छा नीचे उतार दिया।
अब मेरे सामने एक लंबा तगड़ा लड़का पूरा नंगा खड़ा था और मैं आश्चर्य से उसके शरीर और काले मोटे लण्ड को देख रही थी। मैं खुश भी थी और हैरान भी!
उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे हाथ में लण्ड रख दिया। मुझे बड़ी गुदगुदी सी हुयी और हाथ पीछे कर लिया।
हर्षिल बोला- डरो मत, इसे पकड़ो और सहलाओ।
वो सोफ़े पे टांगें खोल के बैठ गया और मुझे अपने पास बुला कर घुटनों के बल कार्पेट पे बैठा दिया।
मैंने उसका लण्ड हाथ में लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी। उसका लण्ड तन के और सख्त हो गया और पूरा लण्ड जोश में उफान मार रहा था जैसे कोई साँप हो।
हर्षिल ने बोला- हाथ से तो मैं भी सहला लेता हूँ, तुम इसे किस करो।
मैंने घूर के उसको देखा और कहा- छीः!
हर्षिल बोला- छीः नहीं बेबी, होंठों से किस करो टोपे को लण्ड के।
मैंने धीरे से उसके लण्ड के टोपे को किस किया तो वो झटका सा ले गया। हर्षिल ने जोर की आह भरी, मैं समझ गयी इससे और जोश आ रहा है इसे।
हर्षिल ने कहा- फिर से करो ऊपर से किस।
मैं जैसे ही किस करने के लिए झुकी, उसने मेरा सिर पीछे से दबा दिया और आधे से ज्यादा लण्ड मेरे मुंह में चला गया.
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08-25-2020, 01:03 PM,
#3
RE: Sex kahani मासूमियत का अंत
उसका लण्ड उफान मार रहा था और हर्षिल ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… स्स’ करने लगा। मुझे बड़ी घिन्न सी आ रही थी शुरू में … पर फिर अच्छे से चूसने लगी.
हर्षिल तो सातवें आसमान पे था, बोला- कितनी बार तुम्हारी फोटो देख के अपने लण्ड को बेवकूफ बनाया है, आज सच में तुम्हारे होंठों के बीच में है।
लगभग 3-4 मिनट चूसने के बाद मैंने लण्ड मुंह से बाहर निकाला, वो मेरे थूक से चिकना हो गया था।
अब बारी मेरी थी, हर्षिल ने कहा- अब शरमाना कैसा? अपनी ब्रा और पैंटी उतार दो।
मैं उठी और खड़ी हो गयी, मैंने कहा- ये काम तुम करो।
हर्षिल की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। मैंने ब्रा का हुक खोल दिया और उसने पकड़ के खींच ली और पीछे फेंक दी।
वो मेरे गोरे और मोटे बूब्स को देख के पागल सा हो गया और मैं हल्का सा शरमा रही थी। वो मेरे पास आया और मेरे बांयें बूब को हाथ में भर के भींच दिया. मैं कसमसा गयी और उसे देखने लगी।
वो बोला- ऐसे क्या देख रही है?
मैंने कहा- आराम से दबाओ।
वो हंसने लगा और फिर उसने मेरे दोनों बूब्स ज़ोर से भींच दिये. मैं दर्द से तिलमिला उठी, मैंने उसके हाथ हटा दिये।
फिर उसने कहा- बुरा मत मानो, इसी में तो मजा है। और धीरे धीरे हाथ से मसलने लगा.
मेरे बूब्स कठोर होते चले गए और मुझे भी मदहोशी सी होने लगी। तभी उसे पता नहीं क्या शरारत सूझी उसने मेरे निप्पल अपनी उँगलियों से मसल दिये ज़ोर के … और मैं चिल्ला पड़ी दर्द से।
वो हंसने लगा।
मैंने गुस्से से कहा- आराम से करना है तो करो, वरना मैं चलती हूँ! और मुंह फेर के खड़ी हो गयी।
हर्षिल पीछे से आया और मेरे बूब्स को पकड़ को आराम आराम से दबाने लगा और बोला- सॉरी बेबी!
मैं सिसकारियाँ लेने लगी, अब मुझे भी जोश चढ़ने लगा था, मैं उसका पूरा साथ देने लगी।
उसने मुझे सोफ़े पे बैठने को कहा तो मैं बैठ गयी, वो मेरे पास आया और मेरे घुटने पकड़ के मेरी टाँगें एकदम से खोल दी और पैंटी को पकड़ के एक झटके में उतार के फेंक दिया।
अब उसके सामने मेरी कुँवारी चूत थी, आधे मिनट तक तो वो देखता ही रहा, मैंने कहा- ऐसे क्या देख रहे हो?
वो बोला- क्या चीज़ बनाई है खुदा ने, इससे पहले ऐसी खूबसूरत चूत नहीं देखी, जितनी भी मारी है सब खुली हुई थी।
मैंने कहा- इसे भी तुम्हें ही खोलना है … पर प्यार से।
उसने कहा- इस चूत का तो भोसडा बना दूंगा जानेमन, तुम देखती जाओ।
मैं शरमा के मुस्कराने लगी और नीचे देखने लगी।
वो मेरी चूत के पास आके सूंघने लगा और कहा- क्या खुशबू है!
और फिर किस करने लगा।
मुझे तो मानो जन्नत का सुख मिल गया हो, मैं ‘स्ससस स्सश सश्शसस उम्म म्म’ करने लगी। अब हर्षिल अपनी जीभ से मेरी चूत चाटने लगा और जीभ अंदर बाहर करने लगा। मैं ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ भरने लगी।
करीब 3-4 मिनट तक वो मेरी चूत चाटता रहा और मैं उसका सिर अपनी चूत पे दबाती रही। मेरी चूत गीली हो चुकी थी। अब वो समझ गया कि मैं लंड लेने के लिए तैयार हूँ।
मैंने कहा- ऐसे ही लगे रहोगे या डालोगे भी? प्लीज डालो न … प्लीज प्लीज प्लीज डाल दो अब तो!
अब मेरी सील टूटने ही वाली थी।
हर्षिल खड़ा हुआ और बोला- चलो बेडरूम में चलो, मैं सबको वहीं चोदता हूँ।
उसने मेरा हाथ पकड़ा और बेडरूम में ले आया।
उसने कहा- कैसे डालूँ … सामने से या पीछे से?
मैंने कहा- सामने से डालो, मैं सील टूटते हुए तुम्हें देखना चाहती हूँ।
उसने मुझे लिटाया बेड पर और मेरी कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया चूत ऊपर करने को।
अब नज़ारा मेरे सामने था। मेरी गोरी और चिकनी टाँगें खुली हुई थी और सामने था लंबा तगड़ा हर्षिल अपने 7 इंच के लन्ड को सहलाते हुए।
वो मेरे ऊपर आया और मेरी चूत पे अपने लण्ड का मुंह रख के रगड़ने लगा। मेरी हालत जोश से खराब हो रही थी और वो मुस्कुरा के मजे ले रहा था।
मैंने कहा- प्लीज डाल दो।
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08-25-2020, 01:03 PM,
#4
RE: Sex kahani मासूमियत का अंत
उसने उँगलियों से मेरी चूत का द्वार हल्का से खोला और लण्ड घुसाने की कोशिश करने लगा, सिर्फ लण्ड का ऊपरी हिस्सा ही लगाया था।
क्योंकि लण्ड बड़ा था तो मुझे शुरू में हल्का सा दर्द होने लगा। मैंने कहा- रुको रुको … दर्द सा हो रहा है।
उसने कहा- अभी से दर्द हो रहा है अभी तो सील भी नहीं टूटी।
और इतना कह के उसने और हल्का सा लण्ड अंदर डाला।
अब दर्द तेज़ होने लगा तो मैं ‘श्शस्स स्सस स्सस’ करने लगी और कहा- अब रुक जाओ, बहुत तेज़ दर्द हो रहा है।
उसने मेरा साथ देते हुए लण्ड बाहर निकाल लिया और कहा- क्या हुआ सील तुड़वानी है या नहीं?
मैंने हाँ में सिर हिला दिया।
वो फिर डालने की कोशिश करने लगा और मुझे दर्द होने लगा तो मैंने हाथों से उसकी छाती को धक्का देते हुए फिर पीछे धकेल दिया।
वह गुस्सा हो गया और कहने लगा- ऐसे कैसे चोदूंगा मैं?
मैंने कहा- यार, बहुत दर्द हो रहा है। प्लीज अभी रुक जाओ।
उसने कहा- एक मिनट रुक! और बाहर चला गया।
वापस आया तो उसके हाथ में नारियल तेल की बोतल थी, उसने कहा- इससे चिकना कर देता हूँ, फिर आराम से घुस जाएगा।
मैंने कहा- ठीक है।
उसने मेरी चूत पे तेल डाला काफी सारा और हाथ से मालिश सी करने लगा। मेरी चूत और टाँगें सब चिकनी हो गयी और चमकने लगी।
अब हर्षिल से भी रुका नहीं जा रहा था, वो मेरे ऊपर आया और मेरे हाथ फैला के कहा- थोड़ा सा दर्द सहन कर लो, फिर मजा आने लगेगा।
मैंने सिर हिला के हामी भर दी.
उसने अपना लण्ड धीरे धीरे अंदर डालना शुरू किया तो मेरी दर्द से जान निकालने लगी, मैंने कहा- प्लीज रुको रुको!
तो हर्षिल ने कहा- मुझे माफ करना!
फिर उसने मेरे मुंह को हाथ से ज़ोर से दबाया और एक झटके में पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। चिकनी चूत होने की वजह से लण्ड मेरी सील तोड़ता हुआ पूरा अंदर चला गया। मुझे ज़ोर से दर्द हुआ और झटका सा लगा, चूत पहली बार चुदी थी तो उसे भी डालने में दिक्कत हुई।
मैं दर्द से छटपटा रही थी और उसने लण्ड अंदर ही डाले रखा और मेरे ऊपर लेट गया। मैं ‘उम्म उम्मह उम्मह …’ कर रही थी और वो ज़ोर से सांस ले रहा था। मेरी भी सांस तेज़ हो गयी थी।
फिर उसने मेरे मुंह से हाथ हटाया तो मैंने कहा- प्लीज निकालो, मुझे बिल्कुल मजा नहीं आ रहा … बस दर्द हो रहा है।
उसने कहा- रुको निकलता हूँ।
फिर उसने लण्ड निकाला और तुरंत झटके के साथ दुबारा डाल दिया और फिर लण्ड अंदर बाहर करने लगा। हर बार लण्ड अंदर बाहर होने से मुझे झटके लग रहे थे, मेरा पूरा शरीर ऊपर नीचे हिल रहा था। मेरी आँखों में आँसू थे और बहुत दर्द हो रहा था।
पर हर्षिल रुकने का नाम नहीं ले रहा था; ‘हम्म हम्म हम्म हम्म …’ आवाज कर रहा था, उसे भी बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी चोदने में।
उसने कहा- थोड़ी देर और बर्दाश्त कर लो, अभी धीरे धीरे मजा आना शुरू हो जाएगा।
मैं गीली आंखों से उसकी आँखों में देखती रही और ‘स्सस्स श्सश स्सस्स …’ करती रही और वो लण्ड को अंदर बाहर अंदर बाहर कर धक्के मारता रहा। मैंने अपने होंठ दाँतों से दबा रखे थे और दर्द सह रही थी।
फिर उसने लण्ड निकाल लिया और साइड में लेट गया और हाँफने लगा। मैं भी हाँफ रही थी।
अब मेरा दर्द कम होने लगा था, मैंने उठ के देखा तो उसका लण्ड मेरे खून से सना हुआ था और मेरी चूत पे भी खून था, कुछ बूंदें चादर पे भी पड़ी थी.
उसने कहा- मुबारक हो … अब तुम्हारी चुत कुँवारी नहीं रही।
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08-25-2020, 01:03 PM,
#5
RE: Sex kahani मासूमियत का अंत
मैं ‘आह आह आह उम्म उम्म म्म…’ करके ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी.
और अचानक मेरे पूरे शरीर में अकड़न सी हुई और काँपती टाँगों के साथ मैं एक ज़ोर की ‘आअअअह …’ के साथ फच फ़च करके झड़ गयी। मैं हर्षिल को अपने नंगे बदन से अलग कर दिया और ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगी।
मेरे होंठों पे पहली चुदाई और झड़ने की खुशी थी।
हर्षिल ने कहा- अब मुझे भी तो झड़ने दो।
मैंने मुसकुराते हुए सिर हाँ में हिला दिया। उसने मेरी गीली चूत में लण्ड डाला और धक्के मारने लगा। वो भी ‘आह आह आह आह … सुहानी आह … सुहानी बस बस आह आह सुहानी …’ कह के फच फच करके मेरी चुत में ही झड़ गया और मेरे ऊपर ही गिर गया।
हम लोग कुछ देर इसी नंगी हालत में एक दूसरे पे पड़े रहे और सांस नॉर्मल होने तक ऐसे ही रहे।
मैंने कहा- अब उतरो … अब देख तो लेने दो कि तुमने मेरी चूत का क्या हाल करा है।
वो हटा तो उसका लण्ड पतला हो चला था और उसके वीर्य और मेरी चुत के पानी से सना हुआ था और थोड़ा वीर्य भी टपक रहा था।
मैंने अपनी चूत का जायजा लिया तो सब गीला हो गया था और काफी चौड़ी हो गयी थी. और होती भी क्यूँ न … उसका 7 इंच का लंबा मोटा लण्ड अपना काम कर चुका था।
फिर हम दोनों करीब 2 घंटे कमरे में नंगे ही बैठे रहे और बात करते रहे। उसके बाद हम दोनों बाथरूम में एक साथ गए और नहाने लगे। उसने मेरे खूबसूरत गोरे नंगे जिस्म पे पानी की बूंदें फिसलती देखी तो उसका लण्ड फिर खड़ा होने लगा और हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे।
मेरे अंदर फिर चुदने की चाहत जाग गयी, मैंने कहा- दुबारा चोदोगे?
तो उसने तुरंत खड़े खड़े मेरी चूत में लण्ड ठोक दिया। मैं सीईईई की आवाज के साथ उसकी बांहों में गिर गयी। उसने मुझे बाथरूम की दीवार से सटाया और मेरी चुदाई करने लगा। मेरे मुंह से चुदने की सिसकारियाँ निकाल रही थी, मेरे मुंह से ‘आहह आहह आहह …’ की आवाज निकाल रही थी, बाथरूम में मेरे चुदने की और लण्ड के चूत पे और गीले जिस्म से गीले जिस्म के टकराने की पट पट पट पट की आवाज गूंज रही थी। मुझे दूसरी बार चुद के बहुत मजा आ रहा था।
फिर उसने बोला- घूम जाओ।
तो मैं दीवार की तरफ घूम गयी और उसने पीछे से चूत में लण्ड डाल के मुझे चोदना शुरू कर दिया।
लगभग 15 मिनट चोदने के बाद फिर मैं कम्पकापती हुई तेज़ आह के साथ झड़ गयी।
पर वो चोदता रहा और थोड़ी देर बाद वो भी चूत में ही झड़ गया।
हम दोनों फिर शावर में एक साथ नहाये, नहा के बाहर आए।
उसने कहा- अभी कपड़े मत पहन ना!
मैंने कहा- अब क्या तीसरी बार भी चोदोगे आज ही?
उसने बोला- अच्छा ठीक, अगली बार चोद लूँगा पर नंगी ही रहो।
मैं मुस्कुरा दी और फिर हम शाम तक नंगे ही रहे उसके फ्लैट में।
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08-25-2020, 01:03 PM,
#6
RE: Sex kahani मासूमियत का अंत
मैं मुस्कुरा दी और फिर हम शाम तक नंगे ही रहे उसके फ्लैट में।
फिर शाम को मैंने और उसने अपने कपड़े पहने और मैं वापस हॉस्टल जाने के लिए तैयार हो गयी। इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद मुझे चलने तक में भी दिक्कत हो रही थी।
तब हर्षिल ने खाना ऑर्डर किया और हमने खाना खाया।
थोड़ी देर बात की, मैंने हर्षिल से कहा- प्लीज, इस बारे में कॉलेज में किसी को न बताना, वरना मेरी क्यूट और मासूम लड़की वाली इमेज खराब हो जाएगी।
उसने कहा- चिंता मत करो, यह राज हमारे बीच ही रहेगा।
फिर हमने एक दूसरे को एक लंबी किस दी। हर्षिल ने मोबाइल से कैब बुलवायी.
थोड़ी देर में कैब आ गयी और मैं चुपचाप हॉस्टल आ गयी।
अपने रूम पे पहुँच कर मैंने गेट खटकटाया, तन्वी ने दरवाजा खोला और मैं अंदर कमरे में चली गयी।
तन्वी ने पूछा- इतना लड़खड़ा के क्यूँ चल रही है? लगता है आज ये कच्ची कली फूल बन के आयी है और खूब अच्छे से चुदी है आज।
तो मैंने कहा- पूछ मत यार … मेरी चूत की कली को उस साले ने चोद चोद के फूल ही नहीं भोसडा बना दिया और सब कुछ दुख रहा है, पर मजा भी बहुत आया, ऐसा मजा तो कभी नहीं आया आज तक।
फिर हम दोनों सहेलियां हंसने लगी और थोड़ी देर बाद सो गई। मैंने अगले दिन भी कॉलेज बँक मारा क्योंकि ठीक से चला नहीं जा रहा था।
अगले दो दिन तक मैं दर्द की वजह से कॉलेज नहीं गयी थी। सिर्फ तन्वी कॉलेज गयी थी।
अगले दिन संडे था, कुछ खास काम था नहीं तो तन्वी ने बोला- चलो आज शॉपिंग चलते हैं।
मैं जानती थी कि तन्वी के पापा गरीब है और मैं भी मिडल क्लास फॅमिली से हूँ तो मैंने कहा- पैसे कहाँ से आएंगे? हम इतने अमीर थोड़े ही हैं कि इतनी महंगी शॉपिंग कर सकें।
तन्वी बोली- तू चल न … खर्चा मैं कर लूँगी।
मैंने कहा- तेरे पास पैसे कहाँ से आए इतने?
उसने बोला- छोड़ न वो सब … और तैयार हो जा।
हम दोनों तैयार होके शॉपिंग के लिए चली गई। हमने खूब खाया पिया और मेरी पहली चुदाई सेलीब्रेट की। फिर हम कपड़े खरीदने चले गए।
वहाँ तन्वी ने मुझे एक सेक्सी सी रेड टॉप और ब्लाक स्कर्ट वाली ड्रेस ट्राई करने को कहा।
मैं ड्रेस पहन के आई तो उसने कहा- तुझपे बहुत जँच रही है, तू ले ले।
मैंने पूछा- कितने की है?
तो उसने कहा- तू पैक करवा … मैं पैसे दे रही हूँ।
फिर हम काफी सारी शॉपिंग कर के हॉस्टल आ गए।
मुझे जानना था कि ड्रेस कितने की है तो मैंने तन्वी के पर्स में से बिल निकाल लिया चुपके से।
मैं हैरान रह गयी, ड्रेस 7500 रुपए की थी, मैंने तन्वी से पूछा- अब सच सच बता कि तेरे पास इतने पैसे आए कहाँ से?
तन्वी समझ गयी कि मैं जान के ही रहूँगी।
उसने बताया- अरे वो एक फ्रेंड पे उधार थे तो उसने वापस किए थे।
मैं समझ गयी कि वो झूठ बोल रही है; मैंने उसे उसकी मम्मी की कसम दी और कहा- सच बोल!
उसने जो बताया, वो सुनके तो मैं हैरान रह गयी। उसने बताया कि हर्षिल ने उसको दिये थे, उनकी 2 हफ़्तों पहले डील हुई थी 35000 रुपए की, डील ये थी कि तन्वी मुझे हर्षिल से चुदवाएगी, और अगर मैं सच में सील पैक निकली तो हर्षिल तन्वी को 35000 रुपए देगा वरना सिर्फ 20000 रुपए। तो चुदाई के अगले दिन हर्षिल ने तन्वी को 35000 रुपए दिये थे।
मेरी आँखों में आँसू आ गए थे, मेरी बेस्ट फ्रेंड ने मेरी जवानी की, मेरी चूत की डील की थी। मैं रोने लगी।
तन्वी ने मुझे चुप कराते हुए कहा- सॉरी यार, पर तू किसी से सेटिंग नहीं कर रही थी तो मुझे तुझे बहला फुसला के चुदवाना पड़ा।
पहले तो मैं बहुत गुस्सा थी पर फिर मैं नॉर्मल हो गयी। मैंने सोचा कि तन्वी सही कहती है, जब तक पकड़े न जाओ सब शरीफ होते हैं, और मैं तो शक्ल से वैसे भी शरीफ और मासूम लगती हूँ। मैंने कहा- मैं एक शर्त पे माफ करूंगी।
उसने पूछा- क्या?
तो मैंने कहा- अगली बार से 60-40 हिस्सा होगा पैसों का, 60 मेरा 40 तेरा, अगर मेहनत मेरी तो ज्यादा हिस्सा भी मेरा।
वो हंसने लगी और बोली- पक्का।
फिर तन्वी बोली- वैसे अगला ऑफर 20000 का है हर्षिल का, उसका बाप बहुत अमीर है।
मैंने बोला- तूने फिर डील की मेरी?
उसने बोला- नहीं यार … उसका मेसेज आया था। तू बोल?
मैंने कहा- यार हम गलत तो नहीं कर रहे? ये तो धंधा हो गया।
उसने कहा- पागल है क्या? तू सड़क पे जा के थोड़े ही ग्राहक लगा रही है, ये सिर्फ अपनी जरूरत पूरी करने के लिए साइड इन्कम है।
मैंने सोचा कि ‘ठीक ही तो है’ तो मैंने हाँ कर दी और कहा- ये बात किसी और को न पता चले।
वो हंस दी और बोली- हर्षिल की डिमांड है कि अब जब जाए तो वैसे ही सेक्सी बन के जइयो और वैसे ही मासूम और शर्मीली सी बन के रहीयो। उसे बहुत मजा आया था तुझे ऐसे चोदने में।
मैंने कहा- ठीक है।
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08-25-2020, 01:03 PM,
#7
RE: Sex kahani मासूमियत का अंत
अगली सेक्स डेट फिक्स हुई बुधवार की, मैं सुबह उठी और नहा धो के तैयार होने लगी। मैंने वही सेक्सी रेड टॉप और ब्लाक स्कर्ट वाली ड्रेस पहनी। तन्वी ने मेरा मेकअप किया, रेड लिपस्टिक और रेड नेल पोलिश लगाई और बाल भी स्टाइल किए, अब मैं एकदम रेड हॉट लग रही थी।
फिर कैब वाले का फोन आया- मैडम, मैं हॉस्टल के बाहर खड़ा हूँ।
तन्वी ने देखा कि रास्ता साफ है तो मैंने ऊपर एक लॉन्ग जाकेट डाली और सिर नीचे कर के निकल गयी हॉस्टल से और कैब में आकर बैठ गयी।
मैं उसके फ्लॅट की बिल्डिंग के बाहर पहुँच गयी तो ड्राईवर ने गाड़ी अंदर ही ले ली, हर्षिल ने पहले ही गेट पे बोल रखा था।
मैं लिफ्ट से आठवें फ्लोर पे पहुंची तो हर्षिल लिफ्ट के बाहर ही खड़ा था और इंतज़ार कर रहा था मुसकुराते हुए।
मैंने उसे देखा तो मुस्कुराने लगी और हाय बोला। फिर हम दोनों उसके रूम में आ गए।
उसने मुझसे कहा- अब अंदर आ गयी हो अपनी जाकेट तो उतार दो।
मैंने जैकेट उतार के साइड में टांग दी।
अब हर्षिल में सामने एक क्यूट और शरीफ सी लड़की खड़ी थी वो भी पूरे सेक्सी अवतार में।
मैंने कहा- तन्वी ने पैसे के बारे में बताया, पर काम 20000 में नहीं होगा, 25000 रुपए लगेंगे।
हर्षिल हंसने लगा, बोला- सब तो तुझे बड़ी शरीफ और मासूम समझते हैं पर तू तो रंडियों की तरह मोल भाव कर रही है।
मैंने कहा- अच्छी सर्विस चाहिए अच्छे दाम भी देने पड़ेंगे।
उसने कहा- दे दूंगा, मर मत … पर कम से कम 3 बार चोदूँगा।
मैंने बोला- ठीक है, तो शुरू करें?
हर्षिल बोला- कर रहे हैं यार, और भी कहीं ग्राहक लगाने हैं क्या जो इतनी जल्दी में है?
मैं हंसने लगी। फिर उसने मुझे जूस पिलाया और कहा- ले पी आज बहुत दर्द होगा।
मैंने बोला- तुम भी पियो, अपने 25000 रुपए वसूल करने हैं या नहीं?
मैं अब सच में रंडियों की तरह बात कर रही थी, उसका जोश बढ़ रहा था।
उसने कहा- तो शुरू करते हैं. आओ मेरे बेडरूम में।
हम दोनों बेडरूम में चले गए। उसने सॉफ्ट म्यूजिक लगा दिया और माहौल बनने लगा।
हम दोनों बेड पे बैठे थे और एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। मैं बोली- आज सिर्फ देखते रहने का इरादा है क्या?
हर्षिल बोला- यार तुम इतनी स्वीट और प्यारी हो, बिल्कुल दिया मिर्ज़ा की तरह, हमेशा ऐसे ही रहना।
मैं मुस्कुराने लगी और बोली- तुम्हें प्यार व्यार तो नहीं हो गया मुझसे?
उसने बोला- अभी तक तो नहीं … पर हो भी सकता है।
मैं समझ गयी कि बंदा इमोश्नल हो रहा है।
मैं उसके पास आयी और उसके होंठों पे अपने लाल रसीले होंठ रख दिये और किस करने लगी। हम दोनों की आँखें बंद हो गयी और लगभग 2 मिनट तक हम किस ही करते रहे। मैंने उसके हाथ अपने बूब्स पे रख दिये और अपने हाथ से उसका लंड सहलाने लगी; उसके पाजामे में हलचल होने लगी। हर्षिल मेरे बूब्स प्यार से मसल रहा था और मैं उसके लंड को सहला रही थी, हम दोनों जोश में होश खोते जा रहे थे।
हम किस कर के हटे तब तक जोश चढ़ चुका था। मैंने कहा- आज कपड़े नहीं उतरोगे मेरे?
उसने कहा- आज तुम डांस करो और नृत्य करते करते कपड़े उतारो!
फिर वो तकिया ले के साइड के बल लेट गया जैसे मुज़रा देखने आया हो।
मैं भी उस पल को एंजॉय कर रही थी, मैंने उम्म्हह उम्म्ह की अश्लील आवाज के साथ डांस करना शुरू कर दिया।
वो मेरा ऐसा रूप देख के खुश भी था और हैरान भी। मैं लहरा लहरा के डांस कर रही थी और वो देखे जा रहा था। मैंने अपना रेड टॉप उतार दिया पर ब्रा नहीं उतारी, मैं उसके पास आई और उसका चेहरा अपने वक्ष उभारों के बीच दे दिया और ज़ोर जोर से आहें भरने लगी।
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08-25-2020, 01:04 PM,
#8
RE: Sex kahani मासूमियत का अंत
थोड़ी देर तक वो ऐसे ही मेरे बूब्स के बीच चुम्मा चाटी करता रहा और आहें भरता रहा। फिर मैं अलग हो गयी और उसके कपड़े उतार दिये, फिर उसका कच्छा भी उतार के फेंक दिया।
उसका लंड ठीक से खड़ा नहीं हुआ था तो मैं उसे उत्तेजित करने के लिए थोड़ा और सेक्सी डांस करने लगी। मैंने अपनी स्कर्ट भी उतार दी।
अब कमरे में एक पूरे नंगे लड़के के आगे एक सेक्सी लड़की काली बिकनी में सेक्सी डांस कर रही थी। शायद हर्षिल मूड में नहीं आ पा रहा था क्योंकि उसका लंड अब भी ढीला सा ही था।
मैंने उसको कहा- पैर लटका के बैठ जाओ बेड पर! वो बैठ गया।
मैं डांस करते हुए उसके पास आई और उसके लंड को सहलाने लगी; पर जल्दी ही समझ गयी आज तो मुंह से चूस के ही खड़ा होगा. तो मैंने उसके लंड के टोपे को किस किया और अपने हाथ से पकड़ से हल्की हल्की मुठ लगाने लगी।
मैंने फिर आधे से ज्यादा लंड मुंह में लेके चूसना शुरू किया जैसे कुल्फी चूसते हैं। हर्षिल ज़ोर ज़ोर से आहें भरने लगा; उसका लंड अब अपने उफान पे आ गया और पूरा तन गया किसी मोटे डंडे की तरह।
उसने कहा- प्लीज सुहानी, ऐसे ही चूसती रहो, बहुत मजा आ रहा है।
मैं और लगन से चूसने लगी, हर्षिल सातवें आसमान पे था, उसका मुंह छत के पंखे की तरफ था और आँखें बंद … मेरा ऐसा चूसना उसे बहुत उत्तेजित किए जा रहा था। पर मुझे ये डर भी था कि कहीं ये ऐसे ही चूसते हुए न झड़ जाये, वरना मेरी चुदाई नहीं हो पाती।
मैंने कहा- अब काफी हुआ, ये अब तुम मेरी चूत चाटो जीभ से।
और मैंने ब्रा पैंटी भी उतार दी।
मेरी चिकनी गोरी टाँगें देख के हर्षिल का जोश बढ़ता जा रहा था। मैं खड़ी हो गयी और उसके मुंह के पास अपनी चूत ले जा के टिका दी और उसका मुंह अपनी टाँगों के बीच दबा दिया। मुझे बड़ा सुख मिला, वो मेरी चूत जीभ से चाटने लगा किसी कुत्ते की तरह।
उसके बाद उसने मुझे बेड से लटका के बिठाया और मेरी चूत का द्वार खोल के जीभ से ही अंदर बाहर करने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं आआ आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआआह करके साँसें भरने लगी और वो जीभ फिराये जा रहा था।
मेरी चूत गीली और चिकनी हो चली थी, मैं उसका 7 इंच का मोटा लंड लेने को तैयार थी, मैंने कहा- अब डाल दो जान … बर्दाश्त नहीं हो रहा!
वो मेरे सामने खड़ा हो गया और लंड मेरी चूत के द्वार पे रख के डालने की कोशिश करने लगा। हालांकि मैंने पिछले हफ्ते ही सील तुड़वाई थी और उस दिन चुदवा चुदवा के चूत थोड़ी बड़ी हो भी गयी थी पर एक हफ्ते के गैप की वजह से फिर से टाइट हो गयी थी। उसके लंड का मुंह बड़ा था तो एकदम से जा नहीं पा रहा था।
उसने कहा- उफ़्फ़ … तेरी चूत बड़ी शैतान है, इतनी टाइट है कि लोडा आसानी से नहीं जाता।
मैंने कहा- कोई बात नहीं जानू … तुमसे 8-10 बार चुद के खुल जाएगी।
उसने कहा- ऐसे नहीं खुलेगी, उसके लिए रोज़ कम से कम एक बार या तो चुद लिया कर या फिर नकली लंड मंगा ले ऑनलाइन, उससे चुदा कर हॉस्टल में।
मैंने कहा- बाद की बाद में देखेंगे, अभी तुम ही चोदो।
उसने कहा- ठीक है, थोड़ा दर्द बर्दाश्त करना।
मैंने कहा- ऐसा करो, एकदम से डाल दो उस दिन की तरह, धीरे धीरे दर्द सहने से अच्छा है एक झटके में ही सारा दर्द दे दो।
उसने कहा- आज तेल नहीं लगाया है तो मुश्किल से जा रहा है। चलो कोशिश करता हूँ।
उसने कहा- ऐसे नहीं खुलेगी, उसके लिए रोज़ कम से कम एक बार या तो चुद लिया कर या फिर नकली लंड मंगा ले ऑनलाइन, उससे चुदा कर हॉस्टल में।
मैंने कहा- बाद की बाद में देखेंगे, अभी तुम ही चोदो।
उसने कहा- ठीक है, थोड़ा दर्द बर्दाश्त करना।
मैंने कहा- ऐसा करो, एकदम से डाल दो उस दिन की तरह, धीरे धीरे दर्द सहने से अच्छा है एक झटके में ही सारा दर्द दे दो।
उसने कहा- आज तेल नहीं लगाया है तो मुश्किल से जा रहा है। चलो कोशिश करता हूँ।
मैंने अपनी कमर के नीचे तकिया लगाया और टाँगें खोल के चूत चौड़ी कर ली लंड लेने के लिए।
हर्षिल मेरे ऊपर आया और मेरी बगल में हाथ रख के लंड लो चुत के छेद पे रखा और कहा- तैयार हो?
मैंने हाँ में सिर हिलाया।
फिर एकदम से एक झटके में हर्षिल ने अपनी पूरी ताकत से अपना गर्म लंड मेरी चूत में उतार दिया। मेरा मुंह दर्द से खुला रह गया और ज़ोर की आआ आआआह की सिसकारी निकली, मेरी आँखों में दर्द के कारण आँसू आ गए, मैंने होंठ दाँतों से दबा लिए थे।
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08-25-2020, 01:04 PM,
#9
RE: Sex kahani मासूमियत का अंत
हर्षिल को भी दर्द हुआ था, वो भी आआआह कर के ऊपर देख रहा था। फिर थोड़ा शांत होने के बाद उसने मेरी आँखों में देखा और कहा- सॉरी यार, पर तूने ही कहा था कि एकदम से घुसेड़ दो।
मैंने कहा- हम्म .. कोई नहीं, अभी ऐसे ही रहो, दर्द कम हो जाने दो थोड़ा सा।
फिर लगभग आधे मिनट बाद मैंने कहा- अब ठीक है, अब लगाओ धक्के।
उसने अपना लंड बिना पूरा बाहर निकाले ही धक्के मारना शुरू किया और इधर मुझे मजा आना शुरू हुआ। मैं और हर्षिल एक दूसरे की आँखों में देखे जा रहे थे और मैं ‘आआह आआआह …’ कर के सिसकारियाँ ले रही थी। हर्षिल भी हम्म हम्म कर रहा था। मेरे खुले बाल भी ज़ोर ज़ोर के हिल रहे थे और वो मेरे चेहरे के पास आ के उम्म उम्म साँसें ले रहा था।
उसके चेहरे पे मुस्कुराहट आ गयी थी हालांकि मैं हल्के दर्द के साथ चुद रही थी।
मैंने कहा- हंस क्यों रहे हो?
उसने कहा- यार, मैं कितना लकी हूँ कॉलेज में जो तुम्हें सच में चोद रहा हूँ।
मैंने कहा- तो लकी मैन, थोड़ी स्पीड बढ़ा दो। लगाओ धक्के ज़ोर से … और ज़ोर से!
और हर्षिल ने ‘ऊम्म ऊन्ह उन्ह ऊन्ह …’ कर के धक्के तेज़ कर दिये, पूरा बेड हिलने लगा और मैं सुख के आसमान में उड़ने लगी। मैं कामुक आवाजें निकाल रही थी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह अह अहह हर्षिल और ज़ोर से … येस येस और तेज़ और तेज़!
हर्षिल तेज़ी से चोदे जा रहा था; न वो झड़ने का नाम ले रहा था, न मैं।
फिर वो थकने लगा, उसकी और मेरी भी साँस फूल गयी थी। वो कुछ देर के लिए रुक गया पर उसका लौड़ा मेरी चूत के अंदर ही पड़ा रहा।
मैंने आह भरे स्वर में पूछा- आह हर्षिल, क्या हुआ?
तो हर्षिल चिढ़ के बोला- साली रांड, इंसान हूँ मशीन नहीं। सांस फूल गयी है, थोड़ा तो रहम कर।
मैंने बोला- ठीक है कर लो, लंड निकाल के साइड में लेट जाओ।
वो मेरे साइड में गिर गया और हम दोनों हाँफते हुए साँसें काबू में करने लगे।
लेटे लेटे ही उसने मेरी तरफ देखा और कहा- इतनी आग है तुझमें चुदने की … मैं सोच भी नहीं सकता था।
मैंने कहा- तुमने ही मेरी जवानी की चिंगारी को हवा दी है, अब आग तो भड़केगी ही! और हंसने लगी।
वो भी हंसने लगा और ऊपर देखने लगा।
हम नंगे ही एक दूसरे के बगल में पड़े रहे लगभग 5 मिनट तक। मैं उसके लंड को प्यार से सहलाती रही और हम इधर उधर की बातें करते रहे।
मैंने कहा- चलो फिर शुरू करें!
वो मुस्कुराया और बोला- अब तुम मेरे लंड पे आ के बैठो और उछल कूद करो।
मैंने उसके लंड को अपने मुंह में लिया और थोड़ा सा चूसा ताकि वो चिकना हो जाए। फिर लंड के ऊपर बैठी और चुत में ले लिया। हर्षिल की तरफ मुंह करके उसकी छाती पे हाथ रख लिए और लंड पे ऊपर नीचे होने लगी। हर्षिल का लंड काफी लंबा था और काफी अंदर तक जाता था। मुझे तब अहसास हुआ कि कितनी मेहनत लगती है धक्के मारने में। मैं लंड पे कूद रही थी और हर्षिल की आँखों में देख रही थी, मैं ज़ोर ज़ोर से आह आह आहह आहह चिल्ला रही थी और हर्षिल मुझे बड़ी हवस भरी नजरों से देखे जा रहा था।
हम दोनों एक दूसरे को देख के शैतानी हंसी हंस रहे थे।
लगभग ऐसे ही 5-6 मिनट चुदने के बाद मैं हर्षिल की छाती पे लेट गयी अपने बूब्स सटा के। कुछ देर मैं चुत में लंड लिए शांति से उसकी बांहों में पड़ी रही। फिर हर्षिल ने मुझे उसकी हालत में अपनी बांहों में भर के लंड अंदर बाहर करना शुरू किया और मैं फिर उसपे पड़े पड़े चुदती रही, चुदाई का सुख लेती रही, मेरे बाल बिखर गए थे और वो उनमें हाथ हाथ फिरा के प्यार से देख रहा था।
तकरीबन 7-8 मिनट ऐसे ही चोदने के बाद उसने मुझे कहा- अब उल्टी लेट जा!
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08-25-2020, 01:04 PM,
#10
RE: Sex kahani मासूमियत का अंत
मैं उल्टी हो के लेट गयी और हर्षिल ने मेरी चुत को ऊपर करने के लिए मेरी कमर में हाथ देकर ऊपर उठाया और पेट उसके नीचे एक तकिया रख दिया। अब मेरी चुत उसके सामने थी और मैं शीशे में खुद को और उसे देख पा रही थी।
वो मेरे पीछे आया तो अपने लंड को मेरी चुत और गांड के छेद पे रगड़ने लगा.
मैंने कहा- ओये … थप्पड़ मारूँगी अगर उसमें डाला तो!
वो हंसने लगा, बोला- अभी नहीं डाल रहा, डर मत!
और उसने अपने हाथ से लंड पकड़ के मेरी चुत के छेद पे रखा और आगे हाथ रख के झुक गया।
अब उसने लंड को मेरी चूत में धकेलना शुरू किया। मेरे मुंह से बस लंबी सी आआआऊऊऊ निकली और लंड चूत में चला गया। उसने फिर लंड ज़ोर ज़ोर के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और मैं आगे पीछे हिलने लगी उसके बेड के सॉफ्ट गद्दे में। मुझे बहुत मजा आ रहा था इस पोजीशन में, मैं शीशे में उसको देख रही थी और खुद को धक्के खाते हुए।
मैंने चुदते हुए उससे पूछा- इस बेड पे कितनी लड़कियों को चोदा है?
वो मुस्कुराने लगा और कहा- तुम्हें मिला के 14 लड़कियां।
मैंने कहा- हम्म … तभी इतनी देर तक चोदते हो।
उसने कहा- हाँ! और अपनी स्पीड बढ़ा दी।
मेरी चुत गीली हो रही थी इसलिए फ़च फ़च फ़च की आवाज आ रही थी। मैं आह आहह आह कर रही थी, साँसें तेज़ होने लगी थी और मैं झड़ने वाली थी। मैंने कहा- बस लगे रहो … अब मैं झड़ने वाली हूँ.
उसने कहा- मैं भी!
और धकाधक धक्के मारता रहा.
हम दोनों हाँफ रहे थे और मैं सेक्स के चरम सुख पे पहुँचने वाली थी, मेरी सिसकारियाँ तेज़ हो गयी थी और फिर मेरा बदन अकड़ने लगा, हर्षिल को महसूस हो गया; और फिर उसने रुक रुक के तेज़ झटके मारने शुरू कर दिये और पूरा लंड हर झटके में निकालता और डालता, मेरे आनंद की सीमा नहीं रह गयी थी। पूरा कमरे में मेरी आह आह और उसकी जांघें मेरे चूतड़ों से टकराने के कारण पट पट पट की आवाज आ रही थी।
आखिरकार एक लंबी ‘आआहह …’ के साथ मेरी चूत से पानी फच्च कर के छूट गया, उसके एक दो झटके बाद ही हर्षिल का वीर्य भी झड़ गया, उसने अपना लंड बाहर नहीं निकाला और सारा वीर्य मेरी चूत के अंदर ही गिरा दिया और वो मेरी कमर पे आ गिरा एक ज़ोर की आह के साथ।
हम दोनों के चेहरे पे एक दूसरे को संतुष्ट करने की खुशी थी.
हम लोग तकरीबन 20 मिनट तक ऐसे है पड़े रहे, फिर मैं बोली- उठो यार!
वो उठा तब तक उसका थोड़ा सा वीर्य सूख चुका था और हमारे शरीर के बीच चिपक गया था।
चुदाई पूरी होने के बाद मैंने अपनी चुत का जायजा लिया, तो फिर से वो काफी खुल चुकी थी।
हर्षिल ने कहा- देखा, रोज़ एक बार चुदवा लिया कर! तभी तेरी चुत खुली रहेगी. वरना इतने दिनों बाद चोदने में तेरे को भी दर्द होता है और मुझे भी लंड डालने में दिक्कत आती है।
मैंने कहा- ठीक है यार … चुदवा लिया करूंगी।
फिर मैं उठ के बाथरूम में चली गयी और अपना शरीर पानी से साफ किया।
मैं बाहर आ गयी फिर हर्षिल बाथरूम चला गया अपने आपको साफ करने! मैंने कपड़े नहीं पहने और नंगी ही हाल में आ के बैठ गयी।
हर्षिल आया और बोला- क्या बात है? मेरे घर में नंगी ही घूमती रहती हो।
मैंने हंस के कहा- थोड़ी देर में फिर उतारने पड़ेंगे. इससे अच्छा तो अभी पहनूँ ही न।
वो मुस्कुराया और मेरे पास आ कर बैठ गया।
फिर उसने कहा- एक बात कहूँ?
मैंने बोला- बोलो न?
उसने कहा- मैं तेरी गांड में चोदना चाहता हूँ इस बार।
मैंने कहा- बिल्कुल नहीं, गांड में कौन चोदता है?
हर्षिल बोला- कोई मूर्ख ही होगा जो नहीं चोदता होगा.
मैंने जवाब दिया- सॉरी पर नहीं।
उसने बोला- प्लीज।
मैं भी अड़ी रही और मना करती रही।
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