Sex Kahani मेरी चार ममिया
06-30-2017, 11:41 AM,
#11
RE: Sex Kahani मेरी चार ममिया
मेरी चार मामियां --6

गतान्क से आगे...................................

मैने उनके दोनो हाथों को पकड़ उनकी पीठ के पीछे कर दिया और

जोरों से उन्हे चूमने लगा. में उनके चेहरे को हर तरह चूम रहा

था. मैं एक बात देख कर चौंका, अगर हम किसी के साथ ज़बरदस्ती

करते हैं तो वो चिल्लाति है और विरोध करती है पर यहाँ सिमरन

मामी सिर्फ़ विरोध कर रही थी चिल्ला नही रही थी.

पर तभी वो चिल्लाने लगी...."प्लीस जाने दो मुझे.. छोड़ दो मुझे."

मामी को चिल्लाते देख मे मेने मामी को बिस्तर पर पेट के बल गिरा

दिया, अगर पीठ के बल गिराता तो वो मुझे लात मार अपने से दूर कर

सकती थी. मैं उनकी पीठ पर चढ़ गया, उनके हाथ अभी मेने पीठ

से लगा रखे थे. मामी काफ़ी प्रयत्न कर रही थी अपने आप को

छुड़ाने की किंतु तभी मेने बिस्तर पर पड़ी चादर को उठाया और

उनके दोनो हाथ बाँध दिए.

"ओ दीदी...... देखो राज क्या कर रहा है.... जल्दी से आआओ......"

अब वो जोरों से चिल्लाने लगी.

उनके हाथ बाँधने के बाद में उन्हे पलट कर सीधा कर दिया. वो

मुझे देखते हुए वो फिर चिल्लाने लगी.

"प्लीज़ मत करो ना में तुम्हारे हाथ........" वो अपना वाक़्या पूरा

करती उसके पहले ही मेने तकिये का गिलाफ निकाला और उनके मुँह मे

ठूंस दिया... अब वो सिर्फ़ 'गूऊ गूओ' कर के रह गयी.

में अभी उनके पेट पर ही बैठा था. मैने अपनी टी-शर्ट अपने सिर के

उपर कर निकाल दी. में मामी के शरीर पर थोड़ा नीचे खिसका और

उनके एक पैर को पलंग के सहारे अपनी टी-शर्ट से बाँध दिया.

मामी अब भी हिल डुल कर और उछाल कर अपने आपको बचाने की कोशिश

कर रही थी. पर वो कुछ नही कर पाई. फिर मैं अपनी शॉर्ट्स उतार

नंगा हो गया. अपनी शॉर्ट्स से मेने मामी की दूसरी टांग भी बिस्तर के

किनारे से बाँध दी. मामी अब भी मछली की तरह तड़प्ते हुए आज़ाद

होने की कोशिश कर रही थी. मामी की टाँगे पूरी तरह फैल गयी

थी, पर हिला दूली मे मेने देखा की हाथो पर फँसी टी-शर्ट ढीली

होती जा रही थी. मुझे मामी के हाथो को भी अच्छी तरह बांधना

था पर बाँधने के लिए मेरे पास कुछ नही था.

तभी मेरी बाकी की तीनो मामियाँ कमरे मे आ गयी. वो सिमरन मामी

की हालत देख पहले तो चौंकी फिर देखा कि सब कुछ ठीक है तो

खड़ी हो कर मुस्कुराने लगी.

सिमरन मामी 'गूऊव.....गूऊ' करके उन्हे मदद के लिए पुकार रही

थी, और मामियाँ थी कि हंस रही थी.

"क्यों नखरे दीखा रही हो सिमरन.... मज़े लो तुम्हे भी मज़ा

आएगा..." मोना मामी ने हंसते हुए कहा.

"मुझे कोई रस्सी चाहिए... " मेने कंगन मामी से कहा, "मुझे इनके

हाथ बाँधने है.

कंगन मामी बाहर से पतली डोरी ले आई और मुझे दे दी. मेने उस

डोरी से सिमरन मामी के हाथ बाँध दिए.

हम सभी ने देखा कि अब सिमरन मामी की आँखों मे आँसू आ गये

थे.

"क्या हम इसके करीब आ सकते है?" मोना ने मुजसे पूछा.

"हां मगर इसे खोलने की कोशिश नही करना." इतना कहकर मेने मोना

को चूम लिया.

मोना ने भी मेरे नंगे बदन को अपनी बाहों मे भर चूम लिया,

"ओह तो जनाब काफ़ी लंबे और मोटे हो रहे है." उसने मेरे खड़े

लंड को अपने हाथ मे पकड़ते हुए कहा.

"मोना..... इसे छोड़ दो..... अभी तुम्हारी बारी नही है." कंगन ने

कहा. फिर वो तीनो सिमरन के करीब आ गयी और उसके बगल मे बैठ

गयी. अनिता मामी अभी भी पेटिकोट पहने हुए थी. उन्होने उसके आँसू

पौन्छे और उसे समझाया कि वो मान जाए. पर सिमरन मामी थी कि

मान ही नही रही थी.

"अब सभी कोई पीछे हट जाओ." मेने तीनो ममियों से कहा.

पीछे हटते हुए कंगन मे मेरे होठों को चूम लिया और वो तीनो

ज़मीन पर एक चादर बिछा कर बैठ गयी.

"अब.... में इसके साथ क्या करूँ?" मेने आँख मारते हुए मोना से पूछा.

"जो तुम चाहो वो करो... अब तो ये पूरी तरह से तुम्हारी है," कंगन

कह रही थी... "पहले इसे इसकी बदतमीज़ी की सज़ा दो...पूछो इससे कि

अब ये ठीक से बात मानेगी कि नही."

माइयन सिमरन के पेट पर ही बैठा था और मेरा खड़ा लंड उसकी नाभि

को छू रहा था. मैने उसके मुँह से तकिया की खिलाफ हटाया और पूछा

क्या वो ठीक से बात मानेगी कि नही.

"हरामी हटो मेरे उपर से...." उसने मुझे हटाने की कोशिश की.

"आज तो में तुझे अपनी रंडी बना कर रहूँगा." मेने कहा और उसके

गाल पर ज़ोर का झापड़ रसीद कर दिया.

वैसे तो औरतों को ये सब पसंद नही है, पर कुछ औरतों है जिन्हे

रंडी बनना पसंद भी है और ऐसा व्यवहार भी.

"अगर ज़्यादा चिल्लाई तो और मार पड़ेगी." मेने उसके दोनो गालों पर

झापड़ मारते हुए कहा.

मगर वो मानी नही और फिर चिल्लाने लगी, मेने उसे फिर थप्पड़

मारा तब जाकर वो शांत हुई. अब वो चिल्लाने की बजाय मुझसे धीरे

से उसे छोड़ने को कहने लगी.

मैने उसके चेहरे को अपने दोनो हाथों मे लिया और उसके होठों को

चूसने लगा. उसके होठों को चूस्ते हुए मेने उसकी थोडी को चूमा

फिर उसकी गर्दन को. फिर नीचे होते हुए मैं उसकी मुलायम मगर

कठोर चुचियों पर आ गया.

उसके निपल को अपनी मुँह मे ले में उसे चूसने लगा और चुचियों को

धीरे धीरे मसल्ने लगा. बड़ी अच्छी गोल गोल चुचियाँ थी सिमरन

मामी की. थोड़ी देर चूची चूसने के बाद मे नीचे उसके पेट को

चूमा और और अपनी जीब उसकी नाभि मे घूमाने लगा.

नाभि मे जीब लगते ही वो थोड़ा कसमसाई शायद उसे गुदगुदी हुई थी.

फिर में नीचे को खिसका और उसकी चूत को चूमते हुए अपनी ज़ुबान

उसकी जाँघो के अन्द्रुनि हिस्सों पर फिराने लगा.

अनिता, कंगन और मोना ये सब देख सिसकने लगी. उनके भी शरीर

गरमा गये थे. तीनो अब एक दूसरे के कपड़े खोलने लगे. थोड़ी ही

देर मे तीनो नंगी हो गयी थी. मोना ने कंगन के होठों पर अपने

होंठ रख दिए और साथ ही उसकी चुचियों को भींचने लगी. वही

अनिता मोना की चूत पर हाथ फिराने लगी.

में सिमरन मामी की जाँघो को चूमते हुए और नीचे खिसका और उनके

पंजो को चूमने लगा. सिमरन मामी का बदन मेरी इस हरकत से कांप

उठा लेकिन अभी शायद उनकी चूत की प्यास जागी नही थी.

अब में उनकी जाँघो के बीच आ गया और उनकी चूत को अपने मुँह मे

भर लिया. मैने अपनी उंगलियों से चूत को थोड़ा फैलाया और अपनी

जीब को त्रिकोण के आकार मे कर सीधा अंदर घुसा दिया. अब में अपनी

जीब को उनकी चूत के अंदर घुमा रहा था. साथ ही अपने होठों से

उनकी चूत की पंखुरियों को चूस्ता जा रहा था.

जैसे ही मेरी जीब उनकी चूत की दीवारों से टकराई उनका बदन हल्के

से कांप उठा और खुद बा खुद उनकी कमर उपर को उठ गयी और उनके

मुँह से एक कराह सी निकल गयी..."उईईई माआआअ."

अब में और जोरों से उनकी चूत को चूसने लगा, साथ ही मैं अपनी

दो उंगलियाँ उनकी चूत मे घुसा अंदर बाहर करने लगा. सिमरन मामी

का बदन थरथरा रहा था. मेने देखा कि सिमरन के माथे पर

पसीने की बूंदे आ गयी थी और उन्हे मज़ा आने लगा था.

मेने एक बार फिर उनसे पूछा कि क्या वो साथ देगी तो फिर उसने अपनी

गर्दन ना मे हिला दी. मैने फिर उनके गाल पर थप्पड़ मारा और

जानवरों की तरह उनकी चुचियों पर टूट पड़ा. में जोरों से उनकी

चुचियों को किसी जानवर की तरह मसल्ने और चूसने लगा.

वो अब भी रो रही थी और मेरी तीनो मामियों को मदद के लिए पुकार

रही थी.

पर मेरी तीनो मामियाँ उसकी फरियाद कहाँ सुनती. वो तीनो तो अपनी

मस्ती मे खोई हुई थी. मेने देखा कि कंगन मामी अनिता मामी के

उपर 69 की पोज़िशन मे थी और एक दूसरे की चूत चूस रही थी.

वहीं मोना मामी अनिता मामी के सिर की तरफ से अनिता की जीब के साथ

साथ अपनी जीब भी कंगन की चूत मे घूसा रही थी, साथ ही अपनी

चूत मे अपनी उंगली अंदर बाहर कर रही थी.

"उन्हे मत पुकारो, वो तुम्हारी मदद के लिए नही आएँगी..." कहकर

मेने ज़ोर से उनके निपल को अपने दन्तो से काट लिया और अपने दांतो

का निशान उसके निपल पर छोड़ दिया.

सिमरन मामी एक बार फिर चिल्लाई पर आवाज़ मे उतना जोश नही था

शायद वो थक गयी थी और दूसरी बात पहले दर्द फिर मज़ा और फिर

दर्द.

मैं उनकी जाँघो के बीच आया और उनकी चूत की पंखुरी को भी

अपने दांतो से कुरेद दिया. फिर उनकी टाँगो को खोला और दोनो टॅंगो को

मोड़ उनकी छाती से चिपका दिया.

सिमरन के दोनो हाथ अभी भी बढ़े हुए थे इसलिए मेने उसकी टाँगो

को थोड़ा उँचा किया और उसकी जाँघो के बीच खुद की जगह बनाते हुए

अपना खड़ा लंड ठीक उसकी चूत के मुँह पर रख दिया. फिर धीरे

धीरे अपना लंड उसकी चूत के अंदर घूसाने लगा.

"प्लीज़ मुझे छोड़ दो ...... जानो दो मुझे...." सिमरन अभी भी रो

रही थी.

इस तरह उसका गिड़गिडाना मुझे अच्छा लगा और में जोरों से उसे चोद्ने

लगा. में इतनी जोरों से धक्के मार रहा था कि पूरा पलंग हिल रहा

था और कमरे मे 'ठप ठप ठप' की आवाज़ गूँज रही थी.

वो अभी भी अपनी चूत की मांसपेशियों को जकड़े मेरे लंड को अपनी

चूत मे जाने से रोक रही थी, इससे में और उत्तेजित हो गया और ज़ोर

लगाकर अपना लंड उसकी चूत मे घूसाने लगा. आधे घंटे तक में

उसे ऐसे ही बेदर्दी से चोद्ता रहा. आख़िर मेरे लंड ने उबाल खा उसकी

चूत मे पानी छोड़ दिया.

जब उसकी छूट मेरे पानी से भर गयी तो मेने देखा कि उसका चेहरा

गुलाबी हो चुका था. वो रो तो नही रही थी लेकिन हां सूबक ज़रूर

रही थी.

मैं उस के उपर से उठा और उसे खोल दिया.

हाथ खुलते ही वो मेरी छाती पर घूँसे मार कर मुझे कोसने लगी कि

मेने उसके साथ ज़बरदस्ती क्यों की. मैने देखा कि तीनो मामियाँ

खलास हो अपनी साँसे दुरुस्त कर रही थी.

तभी तीनो उठ कर हमारे पास आई.

"सिमरन देख अब चिल्लाने से कोई फ़ायदा नही... जो होना था वो हो

गया... पर सच सच बता तुझे मज़ा आया कि नही,,,, देख झूठ

मत बोलना...." अनिता मामी ने उसकी चुचियों को सहलाते हुए कहा.

सिमरन कुछ देर तक सोचती रही फिर धीरे से बोली.." मज़ा तो आया

दीदी पर क्या कोई किसी को इतनी बेरहमी से चोद्ता है, इसने तो मेरी

जान ही निकाल दी थी."

"अरे इसमे भी मज़ा आता है क्यों है ना...." कंगन ने उसकी चूत को

सहलाते हुए कहा.

"कंगन दीदी आता है तो लेकिन देखो ना कितनी बेरहमी से मेरे चुचि

को काटा है राज ने....अभी भी दर्द हो रहा है" वो अपनी चुचि जिस

निपल पर मेने काटा था दिखाते हुए बोली.
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06-30-2017, 11:41 AM,
#12
RE: Sex Kahani मेरी चार ममिया
मैं झुक कर उस निपल को अपने मुँह मे ले धीरे धीरे चूसने

लगा. शायद उनका दर्द कम हो गया था इसलिए वो सिसकने लगी.

सिमरन मेरी तीनो मामियों को नंगा देख समझ गयी थी कि में

तीनो को चोद चुका हूँ.

"दीदी क्या ये तुम तीनो को अभी ऐसे ही चोद्ता है.... बाप रे कितना

बड़ा लंड है इसका पूरा मूसल है... फाड़ ही दिया इसने मेरी चूत

को...." सिमरन ने पूछा.

"अरे नही रे...... ये तो बड़े प्यार से चोदता है..... हमारा तो दिल

करता है कि इसका लंड चूत मे लिए पड़े रहें." अनिता ने उसकी

चुचि को मसल्ते हुए कहा.

"और दीदी इसके लंड का स्वाद भी बड़ा प्यारा है... मेरा तो दिल करता

है कि इसके लंड को लॉली पोप समझ चूस्ति रहूं." मोना मेरे लंड

से खेलती हुई बोली.

"होगा इसके लंड का स्वाद अच्छा और चोद्ता होगा तुम तीनो को प्यार से

मुझे तो इसने जानवरों से भी गए गुज़रे तरीके से चोदा है...."

सिमरन थोड़ा सा नाराज़ होते हुए बोली.

"अरे गुस्सा क्यों दिखाती हो मामी.... प्यार से सभी चोद्ते है और

चुड़वाते है.....कसम खाकर कहो क्या इस तरह चुद्वाने मे मज़ा

आया कि नही." मैने सिमरन मामी की चूत मे अपनी उंगली डालते हुए

कहा.

"सच कहूँ तो बहोत मज़ा आया.... बरसों से मेरी तंमना थी कि

कोई मुझे इस बेरहमी से चोदे....सच." कहकर सिमरन मामी ने

मुझे गले लगा लिया.

हम सब तक कर लेटे हुए थे. अब जब कि सिमरन मामी को में चोद

चुका था हम सभी की कल्पनाए पूरी हो चुकी थी सिवाय कंगन

मामी के.

"मामी क्यों ना आपकी कल्पना भी पूर की जाए." मेने कंगन मामी

से कहा.

"अभी जल्दी भी क्या है पूरा दिन पड़ा है पहले कुछ चाइ नाश्ता हो

जाए तब तक." कंगन मामी ने कहा.

"मामी आप सब के लिए नाश्ता बनाए में तब तक अपनी चाय यहीं

पी लेता हूँ." कहकर में सिमरन मामी की टाँगो के बीच आ गया

और उनकी चूत को चूसने लगा.

"राज ये तो तुम्हारा चाय नाश्ता हुआ मेरा क्या होगा?' सिमरन मामी

हंसते हुए बोली.

"वाह मामी अभी थोड़ी देर पहले तो मुझे गालिया दे रही थी और

मुझे भगा रही थी अब नाश्ता चाहिए." मेने अपनी उंगली उनकी

चूत मे घूसाते हुए कहा.

"वो तो राजा अलग बात थी अब तो नाश्ता भी चाहिए और मीठा

भी." कहकर मामी ने मुझे अपने उपर खींच 69 की अवस्था मे लेटा

लिया.

मामी ने मेरे लंड को पहले तो थोड़ी देर सहलाया और फिर उसे अपने

मुँह मे ले चूसने लगी. मैने भी उनकी चूत को फैला अपनी जीब

अंदर डाल दी.

अनिता और कंगन मामी रसोई मे चाय नाश्ता बनाने चली गयी.

हम दोनो को इस तरह देख मोना मामी से भी नही रहा गया. वो

सिमरन मामी के सिर की तरफ आई और अपनी जीभ उनकी जीभ से मिला

मेरे लंड को चाटने लगी.

अपने लंड पर दो दो जीभ का मज़ा पा में जोश मे आ गया और ज़ोर

ज़ोर से सिमरन की चूत को चूसने लगा. अब ये आलम था कि कभी

सिमरन मेरे लंड को मुँह मे लेती और कभी मोना मेरे लंड को मुँह मे

लेती.

अगर सिमरन लंड को मुँह मे लेती तो मोना मेरी गोलियों को मुँह मे ले

चूस्ति और अगर मोना लंड को मुँह मे लेती तो सिमरन मेरी गोलियों

को चाटने लगती. में भी अपनी जीभ को सिमरन की चूत के अंदर

तक घुसा इधर उधर घूमाता और कभी उसकी पंखुरियों को मुँह मे

भर चूस्ता या फिर दांतो से काट लेता. सिमरन को भी मज़ा आ

रहा था वो नीचे से अपनी कमर उछाल अपनी चूत को मेरे मुँह पर

दबा देती.

हम तीनो के बदन उत्तेजना मे काँप रहे थे.

"राज अब नही रहा जाता प्लीज़ अपने लंड को मेरी चूत मे डाल मुझे

चोदो ना....." सिमरन मामी सिसक पड़ी.

"नही दीदी राज पहले मुझे चोदेगा.....आप तो अभी अभी चुदी हैं

मुझे तो कितनी देर हो गयी चुदे हुए...... देखो मेरी चूत कैसे

तड़प रही है....." मोना बोल पड़ी.

दोनो पर इस बात पर बहस होने लगी कि कौन पहले चुदेगा. तभी

मेरे मन मे एक ख़याल आया, "अरे मेरी प्यारी प्यारी मामियो झगड़

क्यों रही हो, में दोनो को साथ साथ चोदुन्गा."

"दोनो को साथ साथ कैसे चोदेगा, क्या तुम्हारे पास दो लंड है?"

मोना मेरे लंड को भींचते हुए बोली.

"अरे आप लोग देखो तो में कैसे चोद्ता हूँ अपनी प्यारी मामियों

को." मेने कहा.

"ठीक है तो फिर चोदो.' सिमरन ने अपनी टाँगे फैलाते हुए

कहा.

"अच्छा एक काम करो सिमरन तुम उठो और मोना को पहले बिस्तर

पर लेट जाने दो." मेने कहा.

सिमरन बिस्तर से उठ गयी और उसकी जगह मोना अपनी टाँगे फैलाए लेट

गयी.

"अब सिमरन मामी आप मोना पर इस तरह लेटो कि आपकी चूत मोना

मामी की चूत से थोड़ी ही उपर हो." मेने उन्हे समझाते हुए कहा.

"अरे मोना मामी अपनी टाँगो को बिस्तर के नीचे लटका दो इससे सिमरन

मामी को थोड़ी आसानी होगी," मेने उन्हे टोकते हुए कहा.

मोना मामी बिस्तर के किनारे पर आकर अपनी टाँगे नीचे लटका पूरी

तरह फैला दी. अब सिमरन मामी मोना के उपर आ अपनी पीठ के बल

उसपर लेट गयी और उन्होने अपनी चूत ठीक मोना के पेट पर इस तरह

रखी कि वो मोना की चूत से थोड़ी ही दूरी पर थी.

अब मेने मोना की टाँगो के बीच आया और पहले अपने लंड को सिमरन

की चूत पर घिसने लगा. जब मेरा लंड सिमरन की चूत से निकले

रस से गीला हो गया तो मेने अपना लंड मोना की चूत पर रख ज़ोर

का धक्का मारा.

"ओह मर गयी...." मोना चिल्ला पड़ी.

मेने एक ज़ोर का धक्का फिर मारा, "मोना तुम एक काम करो अपने दोनो

हाथ आगे को कर सिमरन मामी की चुचियों को मसलो."

मोना मामी सिमरन मामी की चुचियों को मसल रही थी और मैं मोना

मामी की चूत मे धक्के मार रहा था. फिर मेने अपने लंड को मोना

की चूत से निकाला और थोड़ा उँचा होते हुए अपना लंड सिमरन की

चूत मे घूसा दिया.
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06-30-2017, 11:41 AM,
#13
RE: Sex Kahani मेरी चार ममिया
मेरी चार मामियां --7

गतान्क से आगे...................................

लंड चूत मे घूस्ते ही सिमरन अपनी कमर को उठा मेरे धक्कों का

साथ देने लगी. सिमरन को डबल माज़ा मिल रहा था, में उसकी चूत

की धुनाई कर रहा था और मोना उसकी चुचियों को मसल रही थी.

"वाह राज क्या आसन चुना है तुमने हम दोनो को चोद्ने का..... ऐसे

ही चोद्ते जाओ मेरे राजा....ओह अयाया......." सिमरन मामी बड़बड़ा

रही थी.

अब में कभी मोना को चोद्ता और कभी सिमरन को. दोनो की चूत पानी

छोड़ने को तय्यार थी.

में ज़ोर ज़ोर के धक्के मोना की चूत मे मार रहा था कि मोना

की चिल्ला पड़ी, ' ओह राज हाया चोदो और ज़ोर से चोदो मेरा

तो छूटने वाला है....ओह" और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

जब मोना निढाल हो गयी तो मेने अपना लंड उसकी चूत से निकाल

सिमरन की चूत मे डाल दिया और उसे चोद्ने लगा. थोड़ी देर मे उसकी

चूत ने भी पानी छोड़ दिया. लेकिन मेरा पानी अभी छूटा नही था.

मेने सिमरन मामी को अपने पास खींचा और अपना लंड उनके मुँह पर

रखते हुए कहा, "लो मामी अब मिठाई भी खा लो कसम से बड़ी

मज़ेदार राबड़ी मिलेगी खाने को."

सिमरन मामी मेरे लंड को अपने मुँह मे ले ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी.

मैं भी उनके सिर को पकड़ धक्के पे धक्के मार रहा था.

मेरे लंड मे उबाल आने लगा मेने सिमरन के सिर को पकड़ा और

धक्के लगाते हुए बड़बड़ाने लगा, "ओह मामी लो और अंदर तक ले

लो और चूसो ज़ोर से ओह हाआँ लो मेरी मलाई खालो मामी."

कहकर मेने अपने वीर्य की पिचकारी उनके मुँह मे छोड़ दी और मामी

चटकारे लेकर मेरे लंड से छूटे पानी को पीने लगी.

हम तीनो थक कर फिर निढाल पड़े थे. तभी दोनो मामी ने हमे

नाश्ते के लिए आवाज़ दी.

हम तीनो हाल मे नाश्ता करने पहुँचे. नाश्ते के दौरान सिमरन ने

पूछा, "राज तुम किस कल्पना के बारे मे बात कर रहे थे."

तब मैने सिमरन मामी को बताया कि किस तरह मेने पहले कंगन

मामी को चोदा और उन्होने मुझे चोद्ना सिखाया फिर अनिता मामी की

और फिर मोना मामी की चुदाई की कहानी सुनाई साथ ही बताया कि कैसे

हम चारों अपनी कल्पना पूरी कर रहे है.

"अच्छा तो ये बात थी, इसलिए मुझे यहाँ बुलाया गया था और

पहले से तय कार्यक्रम के तहत मुझे चोदा गया." सिमरन हंसते हुए

बोली.

"वो तो है सिमरन लेकिन सच बताना क्या राज का लंड तुम्हे पसंद

नही आया." कनगन ने पूछा.

"दीदी पसंद तो बहोत आया और दिल कर रहा है कि इससे चुदति ही

रहूं, इसका लंड है ही ऐसा." सिमरन मेरे लंड से खेलती हुई बोली.

"अच्छा सिमरन मामी आपकी भी कोई कल्पना हो तो बताओ हम सब मिलकर

उसे पूरी करेंगे." मेने सिमरन की चूत पर हाथ फेरते हुए कहा.

"कल्पन भी है इच्छा भी, लेकिन पहले कंगन दीदी की कल्पना पूरी

करो में बाद मे बताउन्गि." सिमरन ने कहा.

"ठीक है, कंगन मामी आप तय्यार हो जाइए. बोलिए कहाँ नहाना

पसंद करेंगी रसोई घर मे या फिर आँगन मे.?" मेने पूछा.

"मैं तो खुले आसमान के नीचे आँगन मे नहाना पसंद करूँगी."

कंगन ने कहा.

"कंगन तो फिर एक काम करो, अपने सारे कपड़े पहन ले और फिर

उनपर पानी डाल गीला कर ले और फिर धीरे धीरे अपने गीले

कपड़ों को उतार सही मे मज़ा आ जाएगा." अनिता ने कहा.

"ठीक है दीदी जैसा आप कहें." कहकर कंगन मामी कपड़े पहनने

बेडरूम मे चली गयी.

हम सब ने मिलकर आँगन मे कुर्सियाँ बिछा दी जैसे कि हम सब लाइव

शो देखने वाले है. अनिता मामी ने दो तीन पानी की बाल्टी लाकर बीच

मे रख दी.

थोड़ी देर मे कंगन मामी आ गयी. हमने देखा कि उन्होने बहोत ही

झीने कपड़े का ब्लाउस और बहोत ही छोटी ब्रा पहन रखी थी. हल्के

आसमानी रंग की सारी और उसके नीचे उससे भी हल्के रंग का

पेटिकोट. नीचे पॅंटी पहनी थी कि नही ये अभी दीखाई नही दे

रही थी.
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06-30-2017, 11:41 AM,
#14
RE: Sex Kahani मेरी चार ममिया
मैं हॉल मे गया और सीडी प्लेयर पर हल्का हल्का म्यूज़िक लगा दिया.

हम सब कुर्सी पर बैठ गये. मेरी एक तरफ मोना बैठी थी और

दूसरी तरफ सिमरन फिर अनिता मामी. कंगन मामी बीच मे खड़ी हो

अपने उपर पानी डालने लगी. जैसे जैसे उनकी सारी भीगति और फिर

पेटिकोट भीगता उनकी नीचे का बदन दीखाई देने लगा.

सबने देखा कि मामी ने नीचे कुछ नही पहना था. जब उनके वस्त्र

शरीर से एक दम चिपक गये तो मामी उठ कर खड़ी हो गयी.

अब मामी एक एक कर के अपने कपड़े खोलने लगी. पहले तो उन्होने अपनी

सारी उतारी और फिर ब्लाउस खोल कर उतार दिया. अब मामी सिर्फ़

पेटिकोट और ब्रा मे खड़ी थी. पेटिकोट के अंदर से उनकी चूत का

कटाव सॉफ नज़र आ रहा म्यूज़िक की धुन सॉफ सुनाई दे रही थी.

मेने मामी से कहा, "मामी ऐसे नही थोड़ा नाचते नाचते कपड़े

उतारो तो मज़ा आ जाए."

मेरी बात सुनकर मामी ठुमके लगाकर नाचने लगी. हम सब भी

तालियाँ बजा उनका साथ दे रहे थे. मामी ठीक किसी रंडी की तरह

नाच रही थी. कभी अपना पेटिकोट उठा हमे अपनी चूत की झलक

दिखाती और फिर से उसे नीचे करती. फिर उन्हने ब्रा के हुक खोले

और अपनी छातियों को थोड़ा सा बाहर निकाल हमे चिढ़ाने लगी,

जैसे की उसके ग्राहक बैठे हो. नाचते नाचते मामी ने अपनी ब्रा

और पेटिकोट उतार कर फैंक दीए.

इतने मे मोना उठी और साबुन की टिकिया ले कंगन मामी के शरीर पर

मलने लगी. सिमरन से भी नही रहा गया और वो भी उनके पास पहुँच

गयी अब तो क्या था हम सब मामी को वहीं ज़मीन पर लीटा उसके

शरीर पर साबुन लगाने के बहाने खेलने लगे. अनिता मामी अपनी

तीन उंगलियों उनकी चूत मे डाल अंदर बाहर करने लगी. आख़िर हम

सबने मिलकर मामी को पानी से अच्छी तरह नहलाया.

सच कहूँ तो इस खेल मे बहोत मज़ा आया. चार चार नंगी औरतें

जब कमरे मे इधर से उधर फुदक्ति फिर रही थी तो सच कहूँ किसी

हिंजड़े का भी लंड खड़ा हो सकता था. आख़िर मे हम सब फिर हॉल मे

बैठे टीवी. देख रहे थे.

"सिमरन मामी अब बताओ कि आपकी कल्पना क्या है?" मेने पूछा.

"राज शायद मेरी कल्पना तुम सब को अजीब लगे, लेकिन मेने

किताबो मे और ब्लू फ़िल्मो मे बहोत बार देखा है कि लड़का औरत की

गान्ड मारता है, मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी गान्ड मारो और मेरी

चूत की झांतो की सफाई भी करो." सिमरन मामी ने कहा.

"वाह मामी मज़ा आ गया..... आपकी चूत का उधगटन करने का मौका

तो नही मिला लेकिन हां आपकी गंद का उद्घाटन मैं ज़रूर

करूँगा...... और ऐसा करूँगा कि आप इसे बरसों नही भूल

पाएँगी." मैने कहा.

समाप्त
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07-17-2021, 06:17 PM,
#15
RE: Sex Kahani मेरी चार ममिया
[color=rgba(0, 0, 0, 0.87)]दादी के साथ बहु और बेटी की चुदाई[/color]

[color=rgba(0, 0, 0, 0.87)]हैल्लो दोस्तों, में दीनू आप लोगों के सामने अपनी एक सच्ची कहानी पेश कर रहा हूँ. एक बार मेरा ट्रान्सफर बिहार के एक छोटे से गाँव में हुआ था, जहाँ पर मेरे एक सह कर्मचारी की मदद से मुझे किराए पर एक मकान मिल गया था.
उस मकान में कुल 4 सदस्य थे, एक तो धर्मपाल जो कि दुबला पतला 32 वर्षीय मकान मालिक था और रिक्शा चलाकर घर का गुजारा करता था और वो अक्सर रात को देशी शराब पीकर नशे में धुत रहता था. उसकी बीवी 28 वर्षीय सुंदर और आकर्षक भरे बदन वाली महिला थी, उसका नाम धन्नो है और घर में धन्नो की सास जो कि करीब 45 वर्षीय महिला थी और वो भी काफ़ी आकर्षक, कामुकता से भरी महिला थी. में उसे दादी कहकर बुलाता था और धर्मपाल के एक बहन थी, जिसका नाम राधिका है, वो करीब 25 वर्षीय सुंदर और भारी कद-काटी की महिला थी, उसकी शादी नहीं हुई थी, वो एक स्कूल में टीचर का काम करती थी.
उस दिन उनके घर में धर्मपाल की चचेरी बहनें और बच्चे आए हुए थे और हम सब गर्मी के कारण आँगन में एक साथ सोते थे, वो जून के महीने की पहली तारीख थी और समय रात के करीब 12 बजे थे. फिर अचानक से मेरी नींद खुल गयी और में अपने चारो तरफ देखने लगा तो मुझे चाँद की रोशनी में सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था. अब में अपने चारो तरफ अपनी आँखें घुमा-घुमाकर देख रहा था तो मैंने देखा कि कुछ जवान लडकियाँ (चचेरी बहनें) अपनी जाँघे और बदन खोले सो रही है, उन लड़कियों में से दो लड़कियों की चूचीयाँ काफ़ी बड़ी-बड़ी थी और उनकी चूचीयाँ उनकी सांसो के साथ-साथ ऊपर नीचे हो रही थी.
फिर मैंने अपने दूसरी तरफ देखा तो मैंने देखा कि दादी मेरे बगल में करवट लेकर सो रही थी और दादी की साड़ी और उनका पेटीकोट उनके चूतड़ तक सरके हुए थे और उनकी टाँगे पूरी तरफ से नंगी हो गयी थी और कुछ कपड़ा उनकी जांघो के बीच में पड़ा था. अब मेरे दिमाग में उनको नंगी देखने की इच्छा जाग उठी थी.
फिर में दादी के और करीब हो गया और थोड़ा नीचे की तरफ सरक गया, जिससे की मेरा हाथ उनकी जांघो के बीच में जा सके. फिर में उनकी तरफ पलटकर लेट गया और धीरे-धीरे अपना एक हाथ दादी की दोनों जांघो के बीच में बढ़ाया और उनकी साड़ी और पेटीकोट को पकड़कर धीरे-धीरे खींचने लगा था.
फिर मैंने अपना सिर उठाकर देखा तो दादी की जांघे पूरी तरफ से नंगी हो गयी थी, तो में उनके कपड़ो को और खींचने लगा और उनके कपड़ो को थोड़ा सा और खींचने के बाद मुझे उनकी चूत दिखाई दी. दादी की चूत पूरी तरफ से बालों से भरी हुई थी.
फिर में अपना सिर तकिए पर रखकर लेट गया और अपना एक हाथ दादी की एक जाँघ पर रखकर उनकी जाँघ पर ऊपर से नीचे तक फैरकर सहलाने लगा था. फिर मैंने अपना एक हाथ धीरे से उनकी चूत पर रख दिया और उनकी चूत को हल्के-हल्के हाथ से फैरते हुए सहलाने लगा, लेकिन मेरी इस हरकत से दादी नहीं जगी और ना ही हिली इसलिए मेरी हिम्मत और बढ़ गयी.
अब मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा था तो मैंने अपने दूसरे हाथ से अपनी लुंगी के अंदर से अपना लंड बाहर निकाल लिया. अब में उनकी चूत को और ज़ोर से मसलने लगा था और फिर मैंने अपना लंड दादी के हाथ पर रख दिया, पता नहीं में कितनी देर तक उनकी चूत को मसलता रहा? लेकिन जब मैंने उनकी तरफ देखा तो मेरी गांड फट गयी क्योंकि अब दादी की आँख खुली थी और वो जाग रही थी.
अब में उनको जागते हुए देखकर चौंक गया और झट से अपना हाथ उनकी चूत पर से हटा लिया, लेकिन तभी मुझे महसूस हुआ की दादी अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़े हुए थी और अपनी हथेली से मसल रही थी.
फिर दादी मेरे पास आई और मेरे पास आकर बैठ गयी और मुझसे उनके साथ चलाने के लिए फुसफुसाकर बोली, तो में भी चुपचाप उठकर उनके पीछे-पीछे चल पड़ा. फिर दादी मुझको अपने कमरे में ले गयी और कमरे में ले जाकर कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और खुद ज़मीन पर बिछे बिस्तर लेट गयी और जमीन पर बिछे बिस्तर पर लेटते ही दादी ने अपनी साड़ी और पेटीकोट खींचकर अपनी कमर तक उठा दिया.
अब उनकी खुली चूत मुझको दावत दे रही थी. फिर दादी अपना ब्लाउज उतारने लगी और थोड़ी देर के बाद उनकी दो छोटी-छोटी ढीली-ढीली चूचीयाँ बाहर आ गयी. अब मुझे उस समय उनकी खुली चूचीयाँ और चूत मेरे लिए दुनिया की सबसे सुंदर चीज़ लग रही थी.
फिर दादी ने अपने दोनों हाथ उठाकर मुझको उनके पास बुलाया और खुद उठकर बैठ गयी और मुझको नंगा कर दिया. फिर उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया और सहलाने लगी और फिर मेरे लंड के सुपाड़े का घूँघट निकालकर अपनी मुट्ठी में भरकर मुठ मारने लगी और मेरे लंड को अपनी चूची से सटाकर रगड़ने लगी और अपने हाथों से मेरे अंडो को दबाने लगी थी.
अब उनकी इस हरकत से मेरा लंड खड़ा हो गया था. फिर दादी ने बिस्तर पर लेटाकर मुझको अपने ऊपर खींच लिया और अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के छेद से रगड़ना शुरू किया.
फिर मैंने उनकी दोनों टांगो को फैलाकर अपने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के मुँह पर रखकर एक करारा झटका मारकर अपना आधे से ज्याद लंड उनकी ढीली चूत में उतार दिया और अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए फिर से एक ज़ोरदार शॉट मारा तो मेरा पूरा का पूरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ गहरी घाटी में समा गया, तो वो बोली कि दीनू वाकई में तुम्हारा लंड जानदार है, काफ़ी दिनों से इस चूत को लंड का मज़ा नहीं मिला, चोद मेरे राजा चोद, उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ और में उनकी चूत की चुदाई करता रहा.
कुछ देर के बाद वो भी अपनी कमर उछाल-उछालकर मेरे लंड को अपनी चूत में लेने लगी और में भी जोश में आकर ज़ोर-जोर से उनकी चूत में अपने लंड से धक्का मारने लगा. अब मुझे उनकी चूत जन्नत का मज़ा दे रही थी.
फिर करीब 15 मिनट तक में अपनी दादी की चूत में अपना लंड पेलता रहा, तो इसी दरमियाँ उनकी चूत 2 बार सिकुड़न पैदा करते हुए झड़ चुकी थी और अब में भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था और फिर मैंने उनकी चूत के अंदर झड़ते हुए उनकी चूत को मेरे लंड रस से लबालब भर दिया.
फिर थोड़ी देर तक हम लोग शांत पड़े रहे और जब हम लोगों की सांसे ठीक हुई तो तब दादी ने मुझे बताया कि करीब 8 साल के बाद उनकी चूत ने आज मेरा लंड खाया है.
फिर थोड़ी देर के बाद दादी की चूत फिर से मेरा लंड खाने के लिए तैयार हो गयी और वो मुझसे बोली कि क्यों फिर से अपनी दादी को चोदेगा? तो यह सुनते ही में फिर से उनसे लिपट गया और उनके ऊपर चढ़कर फिर से उनकी चूत में अपना लंड डालकर उनको चोदने लगा. उस रत हम लोगों ने करीब 4 बार चुदाई का आनंद लिया.
फिर आख़री बार वो अपने हाथ और पैर के बल झुककर उल्टी लेट गयी और मुझसे उनको पीछे से चोदने के लिए बोली, तो मैंने भी उनके पीछे जाकर उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया और कभी उनकी चूची तो कभी उनके चूतड़ों को सहलाते हुए उनको चोदता रहा.
फिर यह चुदाई का सिलसिला 10 दिन तक ऐसे ही चलता रहा और में रोज़ रात को अपनी दादी को चोदता रहा और वो मुझसे चुदवाती रही. फिर वो हर रात को मुझसे 3-4 बार अपनी चूत में मेरा लंड डलवाती रही और में उनको पेलता रहा.
फिर दसवीं रात को जब में अपनी दादी को 4 बार चोद चुका था, तो में उनकी चूची से खेलते हुए उनसे बोला कि क्या आप अपनी बहू धन्नो को चुदवाओगी? तो वो मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर बोली कि में तेरी सब कुछ बातें धन्नो से कह चुकी हूँ और तेरी धन्नो ने मुझसे वादा किया है कि वो तेरा हर तरह से ध्यान रखेगी और तू जो चाहेगा, वो तू उनके साथ कर सकता है, अब तुझको धन्नो की चूत चोदने से मेरी चूत से ज़्यादा मज़ा मिलेगा.
उसका बदन भरा हुआ है और उसकी चूची और चूत भी अभी तक टाईट है, धन्नो की चूचीयाँ बड़ी-बड़ी है और उनको दबाने से तुझको बहुत मज़ा मिलेगा और जब तू उसकी चूचीयों को चूसेगा और उसकी चूत में अपना लंड पेलेगा, तो तुझको बहुत मज़ा मिलेगा, लेकिन तू मुझको भूल ना जाना, इस बुढ़िया की चूत को ज़रूर चोदना और चोद-चोदकर मेरी चूत की प्यास बुझाना.
फिर तारीख 11 जून को मेरी दादी अपने एक रिश्तेदार के यहाँ धर्मापाल की चचेरी बहनों को लेकर दूसरे गाँव चली गयी, तो में राधिका दीदी के साथ बात करने में समय बिताने लगा, लेकिन धन्नो जब भी मेरे बगल से गुजरती थी तो वो अपनी चूचीयाँ मेरे कंधों या मेरी पीठ को टच कर जाती थी, वो ऐसा 2-3 बार किया करती थी.
अब जब भी धन्नो अपनी चूचीयाँ मेरी पीठ या कंधों से छूती तो मुझे उनकी चूचीयों का आकर और बड़े होने का एहसास हो रहा था. उनकी चूचीयाँ वाकई में बहुत भारी और बड़ी- बड़ी थी और वो काफ़ी टाईट थी. फिर अगले दिन सुबह और रात को कुछ नहीं हुआ, अब मुझे और धन्नो को अकेले होने का मौका नहीं मिल पा रहा था. अब में काफ़ी परेशान हो रहा था और धन्नो भी मेरे अकेले होने के लिए परेशान हो रही थी.
तारीख 12 जून सुबह जब धर्मपाल बाथरूम में नहा रहे थे और राधिका रसोई में कुछ काम कर रही थी, तो तभी धन्नो मेरे कमरे में घुसी और अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया तो में सोने का नाटक करते हुए उनको चोर निगाहों से देख रहा था.
अब उनके ब्लाउज के ऊपर के 2-3 बटन खुले हुए थे और उनकी चूचीयों का आधा भाग साफ़-साफ़ दिख रहा था, यहाँ तक की मुझको उनकी निप्पल भी साफ़-साफ़ दिख रही थी.
फिर उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए और किचन में चली गयी. आज में बहुत परेशान था, अब में रात को अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था कि अचानक से मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मेरे एक तरफ धर्मपाल लेटा हुआ था और दूसरी तरफ राधिक लेटी हुई थी और राधिका के बगल में धन्नो लेटी हुई थी, जब राधिका सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए थी और राधिका का पेटीकोट उसके घुटनों के ऊपर तक चढ़ा हुआ था और उसकी एक टांग जाँघ तक नंगी थी.
फिर में हिम्मत करते हुए राधिका के करीब सरक गया और अपना एक हाथ आहिस्ता से उसकी चूचीयों पर रखा और धीरे-धीरे उसकी चूचीयों को दबाने लगा.
अब मेरी इस क्रिया से वो कुछ भी नहीं बोली, लेकिन मैंने महसूस किया कि वो जाग चुकी थी और सोने का नाटक कर रही थी. फिर में अपना एक हाथ राधिका दीदी की नंगी टांग पर रखकर उनकी नंगी जाँघ को सहलाने लगा.
फिर राधिका दीदी ने लेटे-लेटे ही अपने ब्लाउज का बटन खोलकर अपना ब्लाउज उतार दिया. राधिका दीदी ने अपने ब्लाउज के नीचे सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी और जब उनको ब्लाउज उतारते देखकर में गर्म हो गया, लेकिन मैंने अपने आप पर काबू रखा. अब में राधिका दीदी के पीछे से मेरा हाथ दीदी की पीठ से होकर उनके चूतड़ तक पहुँचा चुका था. फिर मैंने अपने हाथों से दीदी का पेटीकोट उनके चूतड़ के ऊपर तक खींच दिया और इस समय मेरा हाथ उनकी जाँघ और उनके चूतड़ों को सहला रहा था.
तब राधिका दीदी ने अपने हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा के हुक खोल दिए और अपनी ब्रा उतार दी. फिर में राधिका दीदी की चूचीयों को दबाने लगा, उनकी चूचीयाँ बहुत कड़क-कड़क और खड़ी थी, इस समय जब वो मेरी तरफ करवट लेकर लेटी थी तो उनकी चूचीयाँ अपने वजन से नीचे की तरह लुढ़क गयी थी.
राधिका दीदी की चूचीयाँ तो बड़ी-बड़ी थी, लेकिन उनके निप्पल छोटे-छोटे थे. फिर मैंने उनके निप्पल को अपनी दोनों उँगलियों के बीच में लेकर ज़ोर से दबा दिया, तो वो धीरे से मेरे कान में फुसफुसा कर बोली कि आउच, दीनू दर्द करता है, धीरे-धीरे सहलाओ. फिर में उनकी बात मानकर उनकी निप्पल को धीरे-धीरे से सहलाने लगा और फिर उनकी पूरी चूची को अपने हाथ में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगा.
फिर मैंने उनकी चूची को सहलाते हुए उनसे पूछा कि पहले किसी ने ऐसे चूची दबाई है? मज़ा आ रहा है ना? तो वो सिसकारी भरते हुए बोली कि बहुत मज़ा आ रहा है, पहले कुछ लड़को ने मेरे कपड़ो के ऊपर से मेरी चूची दबाई थी, लेकिन उसमें मुझे मज़ा नहीं आया था, आज बहुत अच्छा लग रहा है, दबाते रहो. फिर में अपने पेट के बल लेट गया और उनकी दोनों चूचीयों को अपने हाथों में लेकर धीरे- धीरे दबाने और सहलाने लगा.
फिर वो अपनी चूची दबवाते हुए मुझसे बोली कि उूउउफफफफफ्फ़ तुमने तो मुझे पागल ही कर दिया है, मेरे पूरे बदन में चीटियाँ चल रही है, अब मेरी गर्मी और बढ़ गई है, तो मैंने अपने दोनों हाथों को उनके कंधों के नीचे ले जाकर उनको अपने आपसे लिपटा लिया, तो उसने भी अपने बदन से मुझको लिपटा लिया. अब उनकी दोनों चूचीयाँ मेरी छाती से दब रही थी और मुझको उनकी गर्मी का एहसास हो रहा था.
फिर मैंने उनके होंठो को अपने होंठो से लगाकर खूब कसकर चूमा और अपने एक हाथ से उनकी एक चूची को पकड़कर सहलाते हुए अपने दूसरे हाथ को उनके शरीर पर फैरने लगा, उनका बदन बहुत चिकना था. फिर मैंने धीरे से उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उनके पेटीकोट के नाड़े को खोलकर उसको उनकी जांघों के नीचे सरका दिया.
अब मेरा हाथ उनकी कोरी बिन चुदी गर्म चूत के ऊपर था. राधिका दीदी की चूत पर झांटे थी, लेकिन वो मेरे हाथों को रोक नहीं पा रही थी और मेरा हाथ उनकी चूत के होंठो को छूते हुए उनकी चूत के दरवाजे में घुस गया और फिर जैसे ही मेरी उंगली उनकी चूत के अंदर गयी तो उनकी जांघे अपने आप खुल गयी. अब मेरी उंगली ठीक तरीके से उनकी चूत में अंदर बाहर होने लगी थी.
अब उन्होंने मेरे मुँह को अपनी चूची पर कसकर दबा लिया और अपनी जांघों से मेरे हाथ को दबा लिया और छटपटा कर बोलने लगी कि उूउउफफफ्फ़ उसको मत छुओ, नहीं तो में संभाल नहीं पाऊँगी, मेरी जाँघो और चूतड़ों को सहलाओ, लेकिन अपना हाथ वहाँ से हटा लो, लेकिन फिर भी में अपना हाथ उनकी चूत पर फैरता रहा और वो मुझको अपने आपसे लिपटाकर मुझको ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगी और अपना एक हाथ मेरी लुंगी में डालकर मेरे लंड को बाहर निकालकर सहलाने लगी, उसकी चूत हल्के भूरे रंग की झांटो से ढकी हुई थी. अब वो अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी थी और अब वो धीरे-धीरे मेरे लंड को अपनी चूत पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर की तरफ रगड़ रही थी.
अब पहले तो वो मेरे लंड को अपनी चूत पर धीरे-धीरे रगड़ रही थी और फिर अचानक से उनकी रगड़ने की स्पीड बढ़ गयी और उनके मुँह से सिसकारी निकलने लगी. फिर थोड़ी देर के बाद मुझे उनकी चूत की चिकनाई मेरे लंड के ऊपर होने का एहसास हुआ तो मैंने नीचे की तरफ देखा तो मैंने पाया कि मेरा लंड करीब आधे से ज़्यादा उनकी चूत में घुसा हुआ था.
फिर मैंने जोश में आकर अपनी कमर का दबाव थोड़ा और डाला तो मेरा पूरा का पूरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ उनकी बच्चेदानी से टकरा गया. अब उनके मुँह से सिसकारी निकल रही थी और वो बोल रही थी अहह ओह में मर गयी, अहह बहुत मजाआाआआ, अहह में गयी और फिर उनकी चूत सिकुड़न पैदा करते हुए झड़ गयी और में भी करीब 15-20 धक्को के बाद उनकी चूत में ही झड़ गया. फिर हम दोनों कुछ देर तक ऐसे ही शांत पड़े रहे.
फिर वो मुझको चूमते हुए बोली कि थैंक यू दीनू जी, मुझे ऐसा मज़ा कभी नहीं मिला, तुम बहुत मस्त हो और तुम्हारा लंड खाकर कोई भी लड़की या औरत मस्त हो जाएगी और फिर हमने अपने-अपने कपड़े ठीक किए और अपनी-अपनी जगह पर सो गये, लेकिन बेचारी राधिका को यह बात नहीं मालूम थी कि उसकी भाभी धन्नो मेरे लंड को अपनी चूत से खाने के लिए तड़प रही है. फिर तारीख 15 जून को दिनभर में कई बार धन्नो आते जाते मेरे शरीर से अपनी चूची रगड़कर निकली, लेकिन में उन चूचीयों को पकड़कर दबाने का मौका नहीं पा पाया, लेकिन उस दिन एक घटना घटी, अब पहले तो धन्नो मेरे दफ़्तर जाने के बाद नहाती थी, लेकिन आज शनिवार था और मेरी छुट्टी थी. अब धर्मपाल और राधिका अपने-अपने काम पर निकल चुके थे, तो तब धन्नो मेरे बाथरूम में जाने से ठीक पहले बाथरूम में घुस गयी.
अब में रोज़ की तरह तोलिया लपेटे था और वो सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुई थी, तो बाथरूम में जाने से पहले उन्होंने पीछे मुड़कर मुझको इशारा किया कि में भी बाथरूम में घुस जाऊं. इस समय उनके शरीर पर सिर्फ़ पेटीकोट था, जिसको उन्होंने अपनी चूची के ऊपर से बाँध रखा था.
फिर में जल्दी से बाथरूम की तरफ गया और बाथरूम का दरवाजे को धक्का देकर खोल दिया, तो बाथरूम में धन्नो नंगी होकर अपने पैरों को फैलाए हुए खड़ी थी और उनकी चूत के ऊपर कोई भी बाल नहीं था. फिर उन्होंने जल्दी से मुझको अपने पास खींच लिया और मुझको अपने आपसे लिपटा लिया और मेरे कान में फुसफुसा कर बोली कि जल्दी से मौका निकालकर मुझे चोदो, मेरी चूत बहुत प्यासी है. फिर उन्होंने मेरे ऊपर से तौलिया खींचा और जल्दी से मेरा लंड अपने हाथों से पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी, तो तब उन्होंने अपनी एक टांग को ऊपर उठाकर एक बाल्टी के ऊपर रख लिया और मेरे खड़े लंड को पकड़कर अपनी चूत से सटा दिया.
फिर मैंने भी अपने लंड को धन्नो की चूत से सटा दिया और अपनी कमर हिलाकर एक ही झटके में अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया और अपनी कमर हिला- हिलाकर उसको खड़े-खड़े चोदने लगा.
अब में उनकी चिकनी बगैर झांटो वाली गर्म चूत को चोद रहा था, तो वो मुझसे लिपटे हुए बोली कि ओह बहुत अच्छे, साले, मादरचोद चोदो, मेरी खुली चूत को चोद साले, तेरा लंड बहुत मस्त है, मारो धक्का ज़ोर से मारो, ऊऊ ऐसे ही मारते रहो, ऊओ आआआहह बसस्स्स्स्सस्स अब में झड़ने वाली हूँ, तू धक्का मार और ज़ोर-ज़ोर से मार.
फिर थोड़ी देर के बाद वो झड़कर चुपचाप हो गयी, लेकिन मेरा अभी तक पानी नहीं निकला था तो में उसकी चूत के अंदर मेरा लंड पेलता रहा और उनकी दोनों चूचीयों को पकड़कर उनकी चूत के अंदर अपना लंड दनादन पेल रहा था, वो इस समय मेरे साथ अपनी चूत चुदवाकर बहुत खुश थी और फिर मैंने भी कुछ पलों में ही उसकी चूत को अपने लंड रस से भर दिया, आज वो काफ़ी संतुष्ट थी. फिर में जब तक वहाँ रहा मैंने उन तीनों के खूब मजे लिए और उनकी खूब चुदाई की.
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