Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
02-12-2022, 01:38 PM,
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
छेदी भी ऊपर चढ़ जाता है. बैग को सिरहाने रख कर खुशबू अंदर की ओर, उस तरफ पलट कर लेट जाती है. छेदी बैग से एक चादर निकाल कर खुशबू को ओढा देता है और फिर खुद भी वही चादर ओढ़ कर खुशबू के पीछे चिपक कर लेट जाता है. छेदी धीरे-धीरे अपना हाथ खुशबू की जांघों पर फेरने लगता है. तभी कोई कम्पार्टमेंट की एकमात्र बत्ती भी बुझा देता है और अन्दर अँधेरा छा जाता है. अँधेरा होते ही छेदी अपना हाथ खुशबू की टॉप में घुसा कर उसके मोटे दूध पकड़ लेता है और दबाने लगता है.तभी ट्रेन भी चल पड़ती है.

खुशबू: (धीमी आवाज़ में) सीईई....!! भैया. बहुत जोर से दबाते हो आप मेरे दूध.

छेदी: (धीमी आवाज़ में) बहनों के दूध दबाने में ही तो भाइयों को सबसे ज्यादा मजा आता है बहना (और छेदी अपनी कमर खुशबू की चूतड़ों में सटा देता है )

खुशबू: (धीमी आवाज़ में) उफ़ भैया...!!

छेदी खुशबू के गाल पर हाथ रखकर अपनी तरफ घुमा देता है और सर उठाकर उसके रसीले ओंठों को अपने मुहँ में भर कर चूसने लगता है. खुशबू भी छेदी के मुहँ में अपनी जीभ निकाल कर घुमाने लगती है तो छेदी भी अपनी जीभ खुशबू की जीभ से लड़ाने लगता है. कुछ देर दोनों भाई-बहन एक दुसरे के ओंठों का जी भर के रसपान करते है. फिर छेदी अपनी पैंट खोलकर निचे कर लेता है और खुशबू की स्कर्ट पीछे से उठाकर अपना मोटा लंड उसकी चूतड़ों के बीच रख देता है. खुशबू भी अपना एक पैर हल्का सा ऊपर उठा देती है तो छेदी लंड पकड़ कर उसकी बूर में घुसा देता है. कमर को एक झटका देते ही छेदी का लंड खुशबू की बूर में समां जाता है. ट्रेन तेज़ गति पकड़ चुकी थी और पटरी की तेज़ आवाज़ के साथ डिब्बा जोर-जोर से हिल रहा था. डब्बे के हिलने के साथ छेदी भी अपनी कमर जोर-जोर से हिलाने लगता है. उसका लंड खुशबू की बूर में तेज़ी से अन्दर बाहर होने लगता है. छेदी खुशबू की टॉप में हाथ डाले, उसके दूध दबाते हुए उसकी चुदाई कर रहा था. ट्रेन का डब्बा जितना ज्यादा हिलता, छेदी भी उतनी ही जोर से खुशबू की चुदाई कर देता. ३० मिनट तक खुशबू की अच्छी तरह से चुदाई करने के बाद छेदी अपना पानी उसकी बूर में गिरा देता है. दोनों भाई-बहन थक कर आँखे बंद कर लेते है. चादर ओढ़े धीरे-धीरे दोनों की आँख लग जाती है.

शाम के ५ बज रहे थे. अपने प्लान के मुताबीक उर्मिला सोनू और पायल के साथ माखनपुर से गोलू और कम्मो को साथ ले कर अपने भाई के घर की और निकल पड़ती है. सोनू गाड़ी चला रहा था और उसके साथ गोलू बैठा हुआ था. पीछे उर्मिला, पायल और कम्मो हंसी मजाक कर रहे थे. तीनों में कुछ इशारे होते है और फिर उर्मिला पायल से कहती है.

उर्मिला: अरे वाह पायल. आज तो तुने लाल रंग की कच्छी पहनी है.

पायल दीदी की लाल रंग की कच्छी का नाम सुनते ही सोनू झट से पीछे मुड़ कर देखता है. पायल अपने दोनों पैरों को सीट पर रखे हुए थी और उसकी उठी हुई स्कर्ट और जाँघों के बीच लाल रंग की पैन्टी दिख रही थी. सोनू आँखे फाड़े अपनी दीदी की बूर पर कसी हुई लाल पैन्टी को देखने लगता है. तभी उर्मिला चिल्ला पड़ती है.

उर्मिला: अरे सोनू...!! वो सामने गाड़ी देख...!!

सोनू हडबडा के आगे देखता है तो सड़क खाली होती है. पीछे उर्मिला, कम्मो और पायल खिलखिला कर हँसने लगती है.

उर्मिला: (हँसते हुए) बुद्धू...!! नज़रे अपनी दीदी की पैन्टी पर नहीं, आगे सड़क पर रख, नहीं तो एक्सीडेंट हो जायेगा.

पायल: वैसे भाभी, लाल कपड़ा देखकर तो सांड पागल हो जाता है ना? (तीनो फिर से हँसने लगते है)

उर्मिला: हाँ पायल, और अपने मोटे-मोटे सिंग खड़ा करके दौड़ा चला आता है.

तीनो फिर से खिलखिलाकर हंसने लगते है
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02-12-2022, 01:38 PM,
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
तीनो फिर से खिलखिलाकर हंसने लगते है. गोलू जो चुपचाप सब सुन रहा था बोल पड़ता है.

गोलू: वो तो ठीक है भाभी. पर जब सांड अपने मोटे सिंग लिए दौड़कर आता है तो लाल कपडे को फाड़ देता है और फिर अपना मोटा सिंग अन्दर भी घुसा देता है.

गोलू की इस बात पर सोनू जोर-जोर से हंसने लगता है. सोनू को हँसता देख गोलू को भी हंसी आ जाती है. उर्मिला, पायल और कम्मो का मुहँ उतर जाता है. पायल अपनी स्कर्ट ठीक करती है और एक चपात गोलू के कंधे पर मारते हुए कहती है.

पायल: चुप कर गोलू....!! बड़ा आया सोनू की तरफदारी करने वाला. कम्मो भी अपने सांड को सफ़ेद कपडा दिखाने वाली थी पर अब कुछ नहीं देखने मिलेगा.

पायल की बात सुनकर गोलू का मुहँ उतर जाता है. वो पीछे घूमकर धीरे से कहता है.

गोलू: अरे वो तो मैं ऐसे ही बोल गया था पायल दीदी. मुझे माफ़ कर दो. (कम्मो की तरफ देखकर) कम्मो दीदी, एक बार दिखा दो ना सफ़ेद कपडा.
कम्मो: तू बहुत बोलता है ना. अब कुछ नहीं देखने को मिलेगा.

गोलू का मुहँ पूरा उतर जाता है और वो आगे देखने लगता है. गोलू की हालत देखकर तीनो फिर से हंसने लगती है. हंसी मज़ाक करते हुए गाड़ी अपनी मंजिल तक पहुँच जाती है. उर्मिला के भाई का बड़ा सा फार्महाउस था जो शहर से दूर था. गाड़ी फार्महाउस में आ कर रूकती है. सभी सामान ले कर निचे उतारते है. फार्महाउस ऊँची दीवार से घीरा हुआ था. आसपास बड़े-बड़े पेड़ थे और जगह काफी सुनसान और हरिभरी थी.

उर्मिला दरवाज़े की घंटी बजाती है तो कोई दरवाज़ा खोलता है. "अरे दीदी, आ गए आप लोग...!!"

पायल और सोनू उस आदमी को देखते है तो उनके होश उड़ जाते है.

पायल: भाभी...!! ये...ये तो आपके सगे भाई राजू भैया है....!
उर्मिला: (हँसते हुए) हाँ पायल, ये मेरा छोटा भाई राजू है.
पायल: पर आपने तो कहा था की वो ...जिसके साथ आप रक्षाबंधन में....वो...वो आपका चचेरा भाई था.
उर्मिला: (हँसते हुए) मेरा कोई चचेरा भाई नहीं है. मेरा एक ही भाई है और वो ये है, राजू. कभी-कभी कुछ पत्ते आखरी चाल के लिए छुपा कर रखने पड़ते है.
पायल: (हँसते हुए) आप बड़ी वो हो भाभी...

राजू: अरे आप लोग बाहर ही रहोगे या अन्दर भी आओगे.

सभी अन्दर चले जाते है. फार्महाउस काफी विशाल था जिसमे कई कमरे थे. सभी सामान एक तरफ रख कर हॉल में सोफे पर बैठ जाते है. उर्मिला राजू के पास जाती है.

उर्मिला: इसे तो सभी पहचान ही गए होगे? ये मेरा छोटा भाई है, राजू.
सोनू: हाँ भाभी याद है. आपकी शादी में ही तो मुलाकात हुई थी राजू भैया से.
उर्मिला: हाँ. हम दोनों हर रक्षाबंधन में साथ रहे है. शादी के बाद पिछले रक्षाबंधन में हमने एक दुसरे को बहुत मिस किया था. इस बार हम दोनों फिर से साथ है.

उर्मिला और राजू एक दुसरे को आहें भरते देखने लगते है. कुछ हे क्षण बाद पायल जोर से खांस देती है. पायल की खांसी सुनकर उर्मिला और राजू चौकन्ने हो जाते है.

पायल: लगता है दो बिछड़े भाई-बहन का प्यार उमड़ रहा है.
उर्मिला: क्यूँ? इसमें बुराई ही क्या है? दो भाई-बहन जब सालो बाद मिलते है तो भावुक तो होते ही हैं.
सोनू: हाँ भाभी. और दिल में कई अरमान भी तो होते है ना.
उर्मिला: हाँ हाँ, तू तो रहने ही दे सोनू. तेरे दिल के अरमान मैं अच्छी तरह से जानती हूँ.

उर्मिला की इस बात पर सभी लोग हँस पड़ते है. तभी उन्हें किसी गाड़ी की आवाज़ सुनाई पड़ती है. खिड़की से देखने पर उन्हें छेदी और खुशबू गाड़ी में बैठे दिखाई पड़ते है. उर्मिला दरवाज़ा खोलती है तो दोनों भी अन्दर आ जाते है. उर्मिला दोनों का परिचय राजू से करवाती है. सभी हाल में बैठकर हंसी मजाक करने लगते है. उर्मिला, पायल, कम्मो और खुशबू की आपस में खूब जमने लगती है. दूसरी तरफ राजू, सोनू, गोलू और छेदी भी अच्छी तरह से घुल-मिल जाते है जैसे पुराने यार हों. कुछ ही देर में वहाँ दो गुट बन जाते है. एक गुट - उर्मिला, पायल, कम्मो और खुशबू - यानी बहनों का और दूसरा गुट - राजू, सोनू, गोलू और छेदी - यानी भाइयों का. हंसी मजाक करते हुए ६ बज जाते है.

उर्मिला: अच्छा अब बहुत हंसी मज़ाक हुआ. अब हमे मार्किट जाना है.
सोनू: (उठते हुए) हाँ चलिए भाभी. मैं गाड़ी निकालता हूँ.
उर्मिला: (सोनू को रोकते हुए) आप कहाँ चल दिय सोनू जी? आप बैठिये अपने भाइयों वाले गुट में. ये काम हम बहनों का है.
राजू: क्या हुआ उर्मिला दीदी? कहाँ जा रही है ये बहनों की टोली.
उर्मिला: (अकड़ते हुए) ये बहनों की टोली रक्षाबंधन की शौपिंग करने जा रही है. वहां तुम भाइयों का कोई काम नहीं. ओके गर्ल्स...फॉलो में...!!
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02-12-2022, 01:38 PM,
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
उर्मिला जान बुझकर मुहँ बनाये, राजू के सामने अपने दूध उठाकर इठलाते हुए जाने लगती है. उसके पीछे सभी लड़कियां अपना सीना उठाये, अपने-अपने भाई को देखकर मुहँ बनाते हुए चल देती है. सोफे पर बैठे सभी भाई अपनी-अपनी बहनों के टॉप में उठे हुए दूध देखकर लंड मसल देते है. उनके जाते ही सभी एक दुसरे को देखकर हँस पड़ते है. रक्षाबंधन कल था पर उस पर रंग अभी से चड़ने लगा था. सारे भाई जानते थे की ये रक्षाबंधन बड़ा ही रंगीला, रसीला और धमाकेदार होने वाला है.

(कहानी जारी है. अब तक कैसी लगी कृपया कर के बतायें )
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02-12-2022, 01:38 PM,
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
ऑटो में बैठकर उर्मिला, पायल, कम्मो और खुशबू एक छोटे से बाज़ार में पहुँच जाते है जहाँ छोटी-छोटी दुकानों में बहुत सी औरतें और लडकियां अपने भाइयों के लिए राखी खरीद रहीं थी. ऑटो से उतरकर सभी एक दूकान के पास पहुँच जातीं है. दूकान में बहुत सी रंग-बिरंगी, बड़ी-छोटी राखियाँ और रेशमी धागे लटक रहे थे. सभी एक नज़र आस-पास डालते है तो लडकियां अपने हाथ में राखी ले कर देख रही थी और उनके चेहरे पर हलकी मुस्कान भी थी. उनकी मुस्कान के पीछे का रहस्य समझते ही उर्मिला, पायल और खुशबू एक दुसरे की ओर देखकर मुस्कुरा देती है. कम्मो उनके चेहरे की मुस्कान को देखकर समझने का प्रयत्न करती है पर कुछ समझ नहीं पाती है.

उर्मिला: अच्छा चलो, अब अपने-अपने भाइयों के लिए सभी राखी और रेशमी धागे पसंद कर लो.

सभी राखी और रेशमी धागे देखने में व्यस्थ हो जाते हैं. कम्मो दूकान में टंगी राखियाँ और धागे देखते हुए आस-पास भी नज़र दौड़ा रही थी. तभी उसकी नज़र कुछ दूर खड़ी एक २०-२१ साल की लड़की पर पड़ती है जो किसी १८-१९ साल के लड़के के साथ खड़ी थी और राखियाँ देख रही थी. वो लड़का देखने में उसका छोटा भाई लग रहा था. कम्मो गौर से देखती है तो वो लड़की एक बड़ी सी राखी उठाती है, कुछ सोचती है और फिर दुकानदार से उसका दाम पूछती है. कम्मो उस बड़ी सी राखी को देखती है और जोर-जोर से हँसने लगती है. साथ खड़ी उर्मिला, पायल और खुशबू जब उसे इस तरह से हँसते हुए देखती है तो वो सभी हैरान हो जाती है.

उर्मिला: क्या हुआ री कम्मो? ऐसे क्यूँ हँस रही है?
कम्मो: (अपनी हँसी पर काबू पाते हुए, धीरे से) भाभी, वो पास वाली लड़की को देख रहे हो? वही जो पीले रंग की सलवार में है.
उर्मिला: (देखते हुए) हाँ देख रही हूँ. तो क्या हुआ?
कम्मो: भाभी वो पतला सा लड़का जो उसके साथ खड़ा है वो शायद उसका भाई है.
उर्मिला: हाँ तो होगा उसका भाई. तुझे क्या हुआ?
कम्मो: भाभी, उस लड़की ने अपने भाई के लिए देखिये कितनी बड़ी राखी ली है, और उसके भाई की कलाई देखिये कितनी पतली है.

ये कहकर कम्मो फिर से अपने मुहँ पर हाथ रखे जोर-जोर से हँसने लगती है. उसकी बात सुनकर उर्मिला, पायल और खुशबू एक दुसरे की तरफ देखकर धीरे से मुस्कुरा देते है. उर्मिला कम्मो के कान में धीरे से कहती है.

उर्मिला: (धीमी आवाज़ में) तुझे कैसे पता की वो लड़की उस बड़ी राखी को अपने भाई की पतली कलाई में ही बाँधेगी?
कम्मो: (हँसना बंद कर देती है और आश्चर्य के साथ उर्मिला को देखते हुए) राखी भाई की कलाई पर नहीं तो और कहाँ बाँधते है भाभी?
उर्मिला: होती है कुछ बहने तेरे जैसे बेवकूफ जो रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के पवित्र त्यौहार पर राखी भाइयों की कलाई पर बाँधती है.
कम्मो: (आँखे और भी ज्यादा बड़ी करते हुए) तो फिर राखी कहाँ बाँधनी चाहिए भाभी?
उर्मिला: (धीरे से कम्मो के कान में) भाइयों के लंड पर....!!

उर्मिला की बात सुनकर कम्मो सट्टे में आ जाती है. हालाकीं वो कई सालों से गोलू के साथ रक्षाबंधन का त्यौहार मना रही थी पर लंड पर राखी बाँधना ये वो पहली बार सुन रही थी.

कम्मो: (धीमी आवाज़ में) ये आप क्या कह रहे हो भाभी? भाई के लंड पर भला कोई बहन राखी बाँधती है क्या?
उर्मिला: (धीरे से कम्मो के कान में) क्यूँ? जब बहन दो भाइयों का लंड अपनी बूर और गांड में एक साथ ले सकती है तो लंड पर राखी बाँधने में क्या हर्ज़ है?

उर्मिला की बात सुनकर कम्मो शर्मा जाती है. कम्मो को शर्माता देख सभी हँस पड़ते है.

उर्मिला: चल अब जल्दी से गोलू के मोटे लंड को याद कर और एक अच्छी सी राखी देख.

सभी अपने-अपने भाइयों के लिए राखी और रेशम की डोर खरीद लेते है. दूकान वाले को पैसे दे कर सभी थोडा आगे जाते है. उर्मिला उन्हें एक रेडीमेड कपड़ो की दूकान में ले जाती है. उर्मिला ने पहले से ही सब कुछ सोच रखा था. अपने प्लान के मुताबीक सभी कपडे खरीद लेते है. दूकान से निकलकर सभी कुल्फी लेते है और पास ही एक पेड़ की छाओं में बैठ जाते है. सभी आपस में बातें करने लगती है.
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02-21-2022, 04:13 PM,
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
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उर्मिला: अच्छा चलो, अब अपने-अपने भाइयों के लिए सभी राखी और रेशमी धागे पसंद कर लो.

सभी राखी और रेशमी धागे देखने में व्यस्थ हो जाते हैं. कम्मो दूकान में टंगी राखियाँ और धागे देखते हुए आस-पास भी नज़र दौड़ा रही थी. तभी उसकी नज़र कुछ दूर खड़ी एक २०-२१ साल की लड़की पर पड़ती है जो किसी १८-१९ साल के लड़के के साथ खड़ी थी और राखियाँ देख रही थी. वो लड़का देखने में उसका छोटा भाई लग रहा था. कम्मो गौर से देखती है तो वो लड़की एक बड़ी सी राखी उठाती है, कुछ सोचती है और फिर दुकानदार से उसका दाम पूछती है. कम्मो उस बड़ी सी राखी को देखती है और जोर-जोर से हँसने लगती है. साथ खड़ी उर्मिला, पायल और खुशबू जब उसे इस तरह से हँसते हुए देखती है तो वो सभी हैरान हो जाती है.
Bhai  Story 
[/quote]
 bhai Story to puri karo
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02-21-2022, 04:15 PM,
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
Story to puri karo
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03-10-2022, 04:38 PM,
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
(02-12-2022, 01:35 PM)desiaks Wrote: सोनू उर्मिला की बूर को ध्यान से देखता है. उसकी आँखों के सामने पायल की बूर नज़र आने लगती है. सोनू का लंड एक हुंकार मारता है और वो उर्मिला पर छलांग लगा देता है. सोनू का लंड सीधे उर्मिला की खुली हुई गीली बूर में अन्दर तक घुस जाता है और ऊपर सोनू उसके बड़े-बड़े दूध को पीने लगता है. उर्मिला भी अपनी टाँगे सोनू की कमर के इर्द-गिर्द लपेट लेती है. सोनू पायल को याद करता हुआ, उर्मिला के दूध पीता हुआ, अपने मोटे लंड को उर्मिला की बूर में ठूंसने लगता है.

सोनू: आह्ह्ह...!! पायल दीदी....मेरी प्यारी दीदी.....अपने भाई को बूर देदे दीदी...!!

सोनू के पागलपन का पूरा फ़ायदा उर्मिला उठाने लगती है. अपनी दीदी के लिए उसका ये जूनून उर्मिला के लिए किसी वरदान से कम नहीं था. सोनू उर्मिला की बूर को पायल की बूर समझ कर पेले जा रहा था और उर्मिला आँखे बंद किये पायल को मन ही मन दुआएँ दे रही थी.

उधर झोपड़े में गोलू कम्मो को अपने भारी शरीर के निचे दबाये अपना मोटा लंड उसकी बूर में झटके देते हुए पेल रहा था. कम्मो पूरी मदहोश हो चुकी थी.

गोलू: आह....!! कम्मो दीदी....म..मैं आपकी रोज चुदाई करूँगा....आह्ह्ह....!! अपनी प्यारी दीदी की बूर में रोज लंड पेलूँगा.....
कम्मो: ह..हाँ गोलू....अब मैं भी कभी भुट्टा अपनी बूर में नहीं लुंगी. बस तेरा मोटा लंड ही मेरी बूर में जायेगा....आह.....!!

करहाते हुए कम्मो अपने हाथों को सर के पीछे कर लेती है. उसकी हलके बालोवाली दोनों पसीने से भरी बगले गोलू की आँखों के सामने खुल जाती है. अपनी दीदी के बगल की पसीने की महक आग में घी का काम करती है और गोलू अपना मुहँ कम्मो की बगल में घुसा देता है.

गोलू: आह....!! दीदी....(जोर से सांस लेते हुए) हुम्म्म्मम्म्म्म.....!!! आह्ह्हह्ह्ह्ह.....!!

कम्मो के बगल की महक लेते ही गोलू के कमर की रफ़्तार और भी ज्यादा बढ़ जाती है. उसका लंड कम्मो की बूर के अन्दर-बाहर जोर-जोर से होने लगता है. कामो जोश में अपनी टाँगे गोलू की कमर में बाँध लेती है और हाथों को उसके गले में. गोलू भी कम्मो की जाँघों को दोनों हाथो से मजबूती से पकड़ लेता है और एक ही झटके में कम्मो का शरीर गोलू के शरीर से चिपका हुआ हवा में उठ जाता है. अब गोलू खड़ा है और कम्मो अपनी टाँगे और हाथो को गोलू के शरीर से लपेटे हुए है. गोलू का लंड कम्मो की बूर में घुसा हुआ है और गोलू के हाथ पीछे से कम्मो की मोटी जाँघों को पकडे हुए है. गोलू जैसे ही अपने लंड को कम्मो की बूर में झटका देता है, कम्मो उच्छल के फिर से गोलू के लंड पर आ बैठती है. गोलू अपने लंड को उठा-उठा के कम्मो की बूर में देने लगता है और कम्मो गोलू के शरीर से लिपटे हुए उच्छल-उच्छल कर लंड लेने लगती है. ये आसन गोलू कई बार सरपंच के तालाब के पास छुप कर अपने दोस्तों के साथ गन्दी किताबों में देख चूका था. उसी ज्ञान का इस्तेमाल गोलू आज अपनी दीदी की चुदाई में कर रहा था. कम्मो, जिसके के लिए ये सब कुछ नया था, उसे बड़ा ही आनंद दे रहा था. गोलू, जो उसका अपना सगा छोटा भाई था, उससे चुदने में उसे अलग ही मजा आ रहा था. इस रिश्ते में इतनी गन्दगी भी हो सकती ही ये कम्मो ने कभी सोचा भी नहीं था. उसके लिए तो हमेशा से ही ये एक पाप से कम नहीं था. पर आज जब गोलू उसकी बूर में अपना मोटा लंड पेल रहा था तो कम्मो को पता चला की भाई-बहन के बीच का पापी रिश्ता इतना आनंदपूर्ण और उत्साहपूर्ण भी हो सकता है. आक की रात कम्मो गोलू से अलग नहीं होना चाहती थी. वो गोलू को मजबूती से पकडे उसके लंड पर उच्छले जा रही थी.

यहाँ उर्मिला, सोनू, गोलू और कम्मो के बीच चुदाई समारोह चल रहा था और वहाँ दूर, रामपुर, पायल के कमरे में, अलग ही तूफ़ान आया हुआ था. ज़मीन पर शीलाजीत की ३-४ खाली शीशियाँ, माल-डी की गोलियों की पत्ती और पायल की भीगी हुई पैन्टी पड़ी हुई थी. बिस्तर पर पसीने से लथपथ पायल तेज़ साँसे ले रही थी और रमेश जो पसीने से भीगे हुए थे, पायल पर चढ़कर अपना लम्बा और मोटा लंड उसकी बूर में पेले जा रहे थे.

पायल: आह्ह्ह...!! पापाssss....!! और कितना चोदीयेगा मुझे?
रमेश: तेरी जवानी में बड़ी आग है पायल. आज तेरी सारी गर्मी निकाल दूंगा....आह्ह्ह्ह....!!
पायल: ६ घंटे हो गए पापा मेरी चुदाई करते हुए....आह्ह्ह...!! शीलाजीत की ४ शीशियाँ आप खाली कर चुके हो......५ बार आप मेरी बूर में पानी गिरा चुके हो....अब तो रुक जाईये.....!
रमेश: शाम को तो रुक ही गया था ना बेटी. तुझे अपने बड़े-बड़े दूध उठा के किसने कहा था मेरे सामने आने? और फिर मेरे सामने अपनी बालोवाली बूर खोल के क्यूँ बैठ गई थी तू? बोल...?
पायल: बूर में बहुत खुजली हो रही थी पापा....इसलिए आपके सामने चली आई.....
रमेश: अब पापा तेरी बूर की खुजली मिटा रहे है तो क्यूँ चिल्ला रही है?

ये कहकर रमेश अपनी कमर जोर-जोर से पायल की जाँघों के बीच पटकने लगते है. पायल भी मस्ती में अपने हाथ रमेश के गले में डाल देती है और निचे से अपनी कमर उठा-उठा के पापा का लंड बूर में लेने लगती है. पायल की चुदाई करते हुए रमेश अपना चेहरा पायल के पास ले जा कर जीभ निकाल देते है तो पायल भी अपना सर उठा के उनकी जीभ मुहँ में भर के चूसने लगती है. कुछ देर बेटी से जीभ चुस्वाने के बाद रमेश उठकर बैठ जाते है और अपने हाथों को पायल की कमर के निचे ले जा कर उठा देते है. पायल की कमर ऊपर उठ जाती है और उसकी गीली, फैली हुई बालोवाली बूर रमेश के ठीक आँखों के सामने आ जाती है. सर आगे बढ़ाके रमेश पायल की बूर चाट लेते है और फिर अपनी लम्बी जीभ अन्दर घुसा के घुमाने लगते है. बिस्तर पर लेटी पायल पापा की इस हरकत से तड़प उठती है.

पायल: आह्ह्ह्ह....!! पापाssss.....!! मत चूसिये ना ऐसे मेरी बूर को.....मैं मर जाउंगी पापा....आह्ह्हह्ह....!!
रमेश: दिन भर तेरी बूर चुदी है पायल बेटी. तेरी फैली हुई बूर से रस पीने में बड़ा मजा आ रहा है.....उम्म्मम्म्म्म......!!

पायल की बूर का अच्छे से रसपान करने के बाद रमेश एक बार फिर अपने लंड को पायल की बूर में अन्दर तक ठूंस देते है और उसे अपने आलिंगन में ले कर चुदाई शुरू कर देते है. ६ घंटे लगातार चुदने के बाद भी पायल की गर्मी शांत नहीं हुई थी. अपने पापा से चुदाई में वो पूरा साथ देने लगती है. रमेश भी पूरे जोश में पायल की बूर चुदाई करने लगते है.

रमेश: आह्ह्हह्ह...पायल बेटी...पापा झड़ने वाले हैं बेटी....आह्ह्हह्ह्ह्ह.....!!
पापा की बात सुनते ही पायल अपनी टांगो का घेरा रमेश की कमर पर मजबूत कर लेती है और पैरो से पापा की कमर को अपनी तरफ दबा देती है. रमेश भी अब जोर-जोर से झटके देने लगते है. १५-२० जोरदार झटको के बाद रमेश के लंड से पानी निकलकर पायल की बच्चेदानी में गिरने लगता है. अपने पापा को पैरो से पकडे हुए पायल अपनी बूर को कास देती है तो रमेश का लंड झटके लेता हुआ अपना बचा हुआ पानी भी अन्दर गिरा देता है. कुछ देर रमेश वैसे ही पायल के ऊपर पड़े रहते है और फिर धीरे से अपना लंड उसकी बूर से निकाल लेते है. पायल भी आँखे बंद किये बिस्तर पर कुछ देर वैसे ही पड़ी रहती है. रमेश की नज़र पायल की बूर पर पड़ती है. पायल की बूर के ओंठ पूरे फैलकर जुदा हो चुके थे. बूर के अन्दर के लाल भाग में एक बड़ा सा छेद बंद चूका था जो एक घमासान चुदाई की गाथा सुना रहा था. बूर से गाड़ा सफ़ेद पानी धीरे-धीरे बह रहा था.



रमेश एक बार पायल के चेहरे को देखते है और फिर उसकी फैली हुई बूर को. रमेश को अपनी कही बात याद आती है जो उन्होंने पायल की चुदाई के पहले कही थी, "बेटी, आज तेरी इतनी बूर चुदाई करूँगा की तेरे बूर के ओंठ फ़ैल जायेंगे और आपस में चिपक ही नहीं पायेंगे". इस बात को याद करते ही रमेश के चेहरे पर एक मुस्कराहट आ जाती है.

(कहानी जारी है. अब तक कैसी लगी कृपया कर के बतायें )
कहानी तो सही है पर पायल की बुर मे सिर्फ रमेश पापा और सोनू भाई का लंड जा रहा ऐसी बहन बेटी को तो पारोसी शर्मा जी और सोनू के दोस्तो के साथ भी चुदाई होनी चाहिए
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03-10-2022, 04:47 PM,
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
(02-12-2022, 01:36 PM)desiaks Wrote: अपने होशो-हवास खोई कम्मो सोनू के लेटते ही उसके लंड पर बैठ जाती है और आगे झुक जाती है. उसके बड़े-बड़े दूध सोनू के मुहँ पर आ जाते है जिसे सोनू अपने मुहँ में भर कर चूसने लगता है. निचे उसका लंड कम्मो की बूर की जम कर चुदाई कर रहा था. गोलू की नज़र कम्मो की चूतड़ों पर ही टिकी हुई थी. कुछ देर गौर से देखने के बाद गोलू आगे बढ़ता है और अपने दोनों पैरों को कम्मो की चूतड़ों के इर्द-गिर्द करते हुए अपना लंड उसके गांड के छेद पर रख देता है. कम्मो को जैसे ही इसकी भनक पड़ती है, वो अपने ओंठ काटते हुए आँखे बंद कर लेती है. गोलू अपने लंड को कम्मो के गांड के छेद के अन्दर घुसता चला जाता है, और एक ही झटके में पूरा लंड कम्मो की गांड में प्रवेश कर जाता है. निचे सोनू का लंड कम्मो की बूर में घुसा हुआ था और ऊपर गोलू का लंड उसकी गांड के छेद में. कम्मो एक साथ दो लंड लेकर सातवें आसमान में जा चुकी थी. उसे ऐसा लग रहा था की किसी ने दो भुट्टे उसकी बूर और गांड में एकसाथ दाल दिए हों.

कम्मो: आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह...गोलू....! उई माँ सोनू...!! बहुत गंदे हो तुम दोनों. उफ़.....!! अपनी दीदी के साथ कोई ऐसा करता है क्या?

गोलू कम्मो की गांड में लंड पेलता हुआ कहता है.

गोलू: सच बताना दीदी....आपको भी मजा आ रहा है ना अपने दोनों भाइयों का लंड एकसाथ लेते हुए.....सच बताना दीदी...आपको मेरी कसम.

गोलू की कसम को कम्मो झुटला नहीं सकती थी. उसके मुहँ से सच निकल ही जाता है.

कम्मो: हाँ गोलूsss.....!! सच ...! बहुत मजा आ रहा है दोनों का लंड एक साथ ले कर. ऐसा लग रहा है की मैं दो भुट्टों को एक साथ अपनी बूर और पिछवाड़े में ले रही हूँ.

कम्मो की बात सुनकर गोलू और सोनू पूरे जोश में अपना लंड कम्मो की गांड और बूर में ठुसने लगते है. दोनों के शरीर के बीच दबी कम्मो भी मजा लेने लगती है. जहाँ सोनू कम्मो के दूध को अपने सीने पर दबाये निचे से उसकी बूर चोद रहा था वहीँ गोलू कम्मो की नंगी पीठ पर झुके हुए, उसके ओंठों को चूसते हुए लंड उसकी गांड में पेले जा रहा था.

सोनू: दीदी....इसे शहर में 'सैंडविच' कहते है.

कम्मो: 'सैंडविच'...? ये क्या होता है सोनू?

सोनू: दीदी जब हम किसी चीज़ को दो दूसरी दो चीज़ों के बीच दबा देते है तो उसे 'सैंडविच' कहते है. जैसे दो ब्रेडों के बीच आमलेट.....

कम्मो: मुझे समझ नहीं आया सोनू. ब्रेड और आमलेट....?

गोलू: मैं समझ गया दीदी. इस वक़्त आप आमलेट हो और मैं और सोनू ब्रेड. आप हम दोनों के बीच ठीक उसी तरह से दबी हुई हो जैसे किसी 'सैंडविच' में ब्रेडों के बीच आमलेट दबा होता है.

कम्मो: ओह...!! इसका मतलब तुम दोनों ने मुझे आलेत की तरह 'सैंडविच' बना दिया है?

सोनू: हाँ दीदी....अब आपने सही समझा....

कम्मो: तो क्या सोनू शहर में जिस बहन के दो भाई होते है वो अक्सर अपनी बहन को 'सैंडविच' बना देते है?

कम्मो की इस बात पर गोलू और सोनू जोश में अपने लंड जोरदार ठाप के साथ कम्मो की गांड और बूर में एकसाथ ठूँस देते है. कम्मो की चीख निकल जाती है, "उईईई माँssssssss....!!!"

सोनू: हाँ दीदी. शहर में तो मम्मी-पापा के सोने के बाद जो भाई होते है वो अपनी बहन के कमरे में जाते है और रात भर उसे 'सैंडविच' बनाये रखते.

कम्मो: जैसे अभी तुम दोनों ने मुझे बना रखा है, ठीक कहा ना मैंने?

सोनू: हाँ दीदी....अब आप ने ठीक समझा....

कम्मो: तुम दोनों मुझे ऐसे ही 'सैंडविच' बना दिया करना. मैं रात में तुम दोनों के कमरे में आ जाया करुँगी 'सैंडविच' बनने.....

दीदी को तो हर भाई सैंडविच बनाना चाहता है भाई से या बाहर के मर्दो से दीदी की बुर मे लंड देखने की इच्छा हर जवान भाई को होता है
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08-20-2022, 10:13 AM, (This post was last modified: 08-20-2022, 10:14 AM by Burchatu.)
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
HeartAah bahut hi mast kahani hai khas kar jab Payal apne papa ke muh me pesab karti hai uff ye scene mujhe bahut pasand Aya kyuki Mai bhi bur me muh laga kar pesab Pina bahut pasand karta hu Heart
Reply

09-10-2022, 01:46 PM,
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
Uuuufffff aajkal har bhai apni bhn ko logo se maslwate hi dekhna chahta h
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