Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
02-12-2022, 01:18 PM,
#31
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
पायल की बात समझते हुए रहेश झट से उर्मिला को ज़मीन पर बिठा देता है और एक पैर रसोई के शेल्फ पर रख कर दुसरे पिअर का घुटना मोड़ के लंड उसके मुहँ में डाल देता है. रमेश अपनी कमर हिलाते हुए उर्मिला के मुहँ को जोर जोर से चोदने लगता है जैसे उसकी बूर चोद रहा हो.

उधर सोनू पायल की चूतड़ों के बीच मुहँ डाले पहले तो अच्छे से सुन्घ्ता है फिर पायल के गांड के छेद को चूसने लगता है. अपनी जीभ छेद में लगा कर वो धीरे से अन्दर ठेलता है तो जीभ का उपरी हिस्सा अन्दर चले जाता है.

पायल : उफ़ सोनू...!!

सोनू अब अपनी जीभ को पायल के गांड के छेद में अन्दर बाहर कर रहा है. जीभ का उपरी हिस्सा फिसलता हुआ अन्दर जाता है और फिर बाहर आ जाता है. बीच बीच में सोनू पायल की चूतड़ों के निचे जीभ रख कर ऊपर तक चाट लेता है. पायल को ऐसा मज़ा ज़िन्दगी में पहली बार मिल रहा था और वो भी अपने सगे छोटे भाई से. वो तो मानो किसी और ही दुनिया की सैर कर रही थी. पायल पेट के बल नंगी लेती है और पीछे से सोनू उसकी गांड चाट रहा है. कुछ देर बाद सोनू अपने होश खो कर झट से अपनी टी-शर्ट और शॉर्ट्स उतार कर पायल के ऊपर नंगा लेट जाता है. उसका लंड का टोपा पायल की गांड के छेद पर अटक जाता है. वो पायल पर लेट कर उसकी गर्दन चूमने लगता है और तभी उसकी कमर एक झटका लेती है और सोनू के लंड का टोपा थूक से भरे पायल की गांड के छेद में हल्का सा घुस जाता है. पायल दर्द से चिल्ला उठती है...

पायल : हाय रे बहनचोद.....ये क्या कर रहा है?

सोनू पायल के मुहँ से पहली बार ऐसी गाली सुन कर डर जाता है और उठ कर बैठ जाता है. पायल एक बार अपनी गांड पर हाथ रख कर अपने दर्द को कम करने की कोशिश करती है. पायल का वो दर्द भरा चेहरा देख कर सोनू और भी ज्यादा डर जाता है. कुछ ही देर में पायल का दर्द कम होता हिया तो वो सोनू को देख कर कहती है.

पायल : ऐसे कोई भाई अपनी बहन की गांड में लंड देता है क्या?

सोनू : (डरता हुआ) अ..अ...आई एम सॉरी दीदी....अब नहीं करूँगा...

पायल : (मुस्कुराते हुए) मैंने कब कहा की दोबारा मत करना? मैं तो ये कह रही हूँ की ऐसे अचानक मत कर देना...दर्द होता है...

पायल अब सीधा हो कर लेट जाती है...

पायल : अब अपनी दीदी को ऐसे क्या देख रहा है? दीदी का खुला हुआ मुहँ और उसके गुलाबी ओंठ नहीं दिख रहे है क्या? इसमें क्या अब कोई पराया मर्द लंड डालेगा? बोलो ना मेरे ..."भैया" ?

पायल के मुहँ से "भैया" सुन कर सोनू का लंड झटके के साथ खड़ा हो जाता है.

सोनू : ओह दीदी...मेरी प्यारी दीदी.... (बोलता हुआ पायल के मुहँ पर कमर लाते हुए लंड मुहँ में डाल देता है)

अपने दोनों हाथों को सोनू बिस्तर पर रख कर, एक पैर पायल के सर के पास और दूसरा लम्बा किये हुए पायल की कमर के पास रख कर सोनू अपनी कमर निचे कर लंड उसके मुहँ में दे रहा है. पायल सोनू के लंड को अपने मुह में खींचते हुए चूस रही है. कभी सोनू अपनी कमर जोर से हिला देता तो कभी धीरे. सोनू बूर जैसा मजा पायल के मुहँ में पा रहा था.

उधर बाबूजी उर्मिला के मुहँ में अपना मोटा लंड सटा-सट अन्दर बाहर कर रहे है. ऐसा तो शायद बाबूजी ने कभी किसी बूर की भी चुदाई नहीं की होगी जैसी आज वो उर्मिला के मुहँ की कर रहे थे. बाबूजी की कमर को पकडे उर्मिला भी उनके लंड से अपना मुहँ चुदवा रही थी.

रमेश : हाय बहुरानी...!! तेरा मुहँ बहुत मज़ा दे रहा है. बीच बीच में जो तू मेरे टोपे पर अपनी जीभ घुमा देती है ...वाह...!! दिल करता है की अपनी बहूँ को यहीं पटक के उसकी बूर चोद दूँ...

उर्मिला : (लंड से मुहँ हटा के)हाँ बाबूजी...जरुर चोदीयेगा ..... (फिर से लंड मुहँ में ले कर चुदवाना शुरू कर देती है)

रमेश : हाँ बहु....और वो पायल भी खूब चुदेगी एक दिन मुझसे....अपने बड़े-बड़े दूध लिए घर में जो "पापा-पापा" करते हुए घुमती है ना....एक दिन पापा पकड़ के उसकी बूर चोद लेंगे...

रमेश अपने होश खो कर अनाप-शनाप बोले जा रहा था जिसका मजा उर्मिला पूरा उठा रही थी.

उर्मिला : (लंड निकल कर) हाँ बाबूजी...एक दम कसी हुई बूर है पायल की....लंड डालोगे तो कसावट के साथ धीरे-धीरे जायेगा अन्दर....

उर्मिला की उस बात ने रमेश के लंड में जोश भर दिया. वो अब पूरे जोश में उर्मिला का मुहँ चोदने लगता है.

रमेश : अरे...मेरी पायल की बूर....आह्ह्ह....!! कितनी भी...आह...कसी हुई...हो..! पापा का मोटा...लंड...पूरी फैला देगा...आह्ह्ह्ह....!!!

इतना कहते ही रमेश के लंड से गाड़े सफ़ेद पानी की पिचकारिया उर्मिला के मुहँ के अन्दर छुटने लगती है. उर्मिला एक ही सांस में सारा पानी पीने लगती है. बाबूजी अपने लंड को पकडे सारा पानी उर्मिला के मुहँ में निचोड़ने लगते है. कुछ ही क्षण में एक-एक बूँद उर्मिला के मुहँ में गिराने के बाद बाबूजी अपना लंड बाहर निकाल लेते है.

रमेश : बहु...बहहुत मज़ा आया. अब बताओ अपनी बूर कब दे रही हो?

उर्मिला : जल्द ही दूंगी बाबूजी. जब कोई रोकने-टोकने वाला ना हो तो आप मेरी बूर में अच्छे से लंड पेल देना. अब आप जाइये बाबूजी...मम्मी जी कभी भी उठ सकती है.

रमेश : हाँ बहु...अब मुझे चलना चाहिए...

अपनी धोती ठीक करते हुए बाबूजी वहां से चल जाते है और उर्मिला भी अपना मुहँ पोंछ कर काम में लग जाती है.

उधर सोनू पायल के मुहँ की जम के चुदाई कर रहा है. उसकी कमर कभी राजधानी की रफ़्तार पकड़ लेती तो कभी पेसेंजेर की. बीच में जैसे ही सोनू ना अपना लंड पायल के मुहँ से निकाला तो पायल ने धीरे से कह दिया, "ओह मेरे भैया". इस बात पर सोनू ने अपना लंड जोर से पायल के मुहँ में जड़ तक ठूँस दिया और उसके मुहँ से "ओह मेरी बहना" निकल गया. अब इस खेल में दोनों भाई-बहन को मजा आने लगा था. सोनू अपना लंड पायल के मुहँ से बाहर निकालता तो पायल "ओह मेरे भैया" कह देती और जब सोनू उसके मुहँ में लंड वापस जड़ तक ठूँस देता तो वो "ओह मेरी बहना" कह देता. ६-७ बार दोनों इस "भैया" और "बहना" के खेल को खेलते है तभी सोनू जैसे ही "ओह मेरी बहना" कह कर लंड ठूंसता है, पायल दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ लेती है. सोनू अब अपने आप को रोक नहीं पाटा और लंड से मोटी सफ़ेद पिचकारिया उसके मुहँ में छोड़ने लगता है. पायल की साँसे रुक रही है है पर ये सफ़ेद गाढ़ा पानी उसके अपने सगे भाई का था जिसकी वो एक बूँद भी बर्बाद नहीं होने दे सकती थी. सोनू की कमर पकड़े पायल उसके लंड की एक एक बूँद अपने मुहँ में झडवा लेती है. कुछ देर बाद सोनू अपना लंड बाहर निकालता है तो टोपे पर एक बूँद मानो गिरने को तरस रही है. पायल उस बूँद को गौर से देखती है और अपने एक हाथ से लंड पकडती है और दुसरे हाथ से उसके अन्डकोशों को धीरे से दबा देती है. वो बूँद टोपे पर से फिसलती हुई सीधे पायल के मुहँ में आ गिरती है जिसे वो प्यार से गटक लेती है.

दोनों भाई-बहन एक दुसरे को देख रहे है. सोनू की आखों में देखते हुए पायल धीरे से कहती है, "भैया मेरे....राखी के बंधन को निभाना". सोनू भी पायल को प्यार से देखने लगता है. दोनों एक दुसरे की तरफ मुस्कुराते हुए देख रहे है और आने वाले रक्षाबंधन के भाई-बहन के प्यार के सपनो को संजोने लगते है.

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02-12-2022, 01:19 PM,
#32
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
अपडेट २१:

सुबह के ७ बज रहे है. पायल बिस्तर में अंगडाई लेते हुए ऑंखें खोलती है. कल सोनू के साथ हुई घटना ने उसके बदन में एक अजीब सी मस्ती भर दी थी. अपने ही परिवार के दो मोटे-मोटे लंड को याद कर पायल मुस्कुरा देती है. ये मुस्कराहट लंड से ज्यादा उन रिश्तों की वजह से थी जो पायल और दोनों लंड के मालिकों के बीच था. एक बाप तो दूसरा भाई. बिस्तर से उतर कर पायल आईने के सामने खड़ी हो जाती है और अपनी स्कर्ट उठा के अपनी बालोवाली बूर को धीरे-धीरे सहलाने लगती है. बूर के गुलाबी ओंठों को अपनी दो उँगलियों से खोलते हुए पायल कहती है, "किसका पहले लेगी, बोल..? पापा का या सोनू का?". अपनी बूर से बातें करते हुए पायल को हंसी आ जाती है. दोनों हाथों को उठा के अपने बाल बनाते हुए वो धीरे से अपनी बगल को सूंघती है. अपने बगल की तेज़ गंद पर गर्व महसूस करते हुए पायल बाथरूम जाती है और फिर धीरे-धीरे रसोई की तरफ बढ़ने लगती है.

रसोई में उर्मिला हमेशा की तरह अपना काम कर रही है. पायल उर्मिला को देखती है तो पीछे से लिपट जाती है.

पायल : ह्म्म्म...!! भाभी...!!

उर्मिला : अरे पायल..!! उठा गई तू? और सुबह सुबह तू भाभी के पीठ पर अपनी भरी-भरी चुचिया क्यूँ दबा रही है?

पायल : (उर्मिला से वैसे ही लिपटे हुए) उम्म..भाभी...!! जी कर रहा है ऐसे ही आपकी पीठ पर फिर से सो जाऊ...

उर्मिला : मेरी पीठ पर क्यूँ सोएगी? जा...अपने पापा के पास जा और उनके निचे टाँगे खोल के सोजा...

पायल : (उर्मिला से लिपटे और आँखे बंद किये हुए) उम्म्म....!! मम्मी नहीं होती तो चली जाती...

उर्मिला : नहीं है तेरी मम्मी....!! भूल गई? आज शनिवार है. मंदिर गई है...सोनू के साथ.

उर्मिला की बात सुनते ही पायल की आँखे खुल जाती है. वो कूद कर भाभी के सामने पहुँच जाती है.

पायल : सच भाभी? मम्मी मंदिर गई है सोनू के साथ?

उर्मिला : तो क्या मैं झूठ बोल रही हूँ?

पायल : अरे नहीं भाभी वो बात नहीं है....मतलब अभी घर में पापा अकेले है? मेरा मतलब है की पापा, मैं और आप?

उर्मिला : हाँ मेरी लाडो...पापा, तू और मैं...बस्स....!!

पायल : बापरे भाभी....!! आज कहीं पापा जोश में आ गए तो?

उर्मिला : तो तेरी बूर अच्छे से पेली जाएगी और क्या?

पायल : धत भाभी...आप भी ना...

तभी वहां रमेश टहलते हुए पहुँच जाते है...

रमेश : अरे भाई क्या बाते हो रही है भाभी और ननद में?

उर्मिला : कुछ नहीं बाबूजी...वो मम्मी जी सोनू के साथ मंदिर गई है ना तो पायल पूछ रही थी की वो लोग कब तक घर आयेंगे...

रमेश पायल के पास जाते है. पायल उसके बड़े-बड़े दूध पर नज़र डालते हुए पाया से बालों में हाथ घुमाते हुए कहते है.

रमेश : १:३० - २ घंटे तो लगेगे ही बेटी. मंदिर भी दूर है और तेरी मम्मी आज भजन-कीर्तन में भी भाग लेती है. तुझे तो कही नहीं जाना है ना आज?

पायल : (शर्माते हुए) नहीं पापा...मैं तो घर पर ही हूँ....

पायल को देख कर रमेश मुस्कुरा देते है. फिर उर्मिला को देख कर धीरे से इशारा करते हुए कहते है.

रमेश : अरे बहु....जरा छत से मेरा टॉवेल ले आना तो. अब लगे हाथ नहा भी लूँगा.

उर्मिला : जी बाबूजी....

उर्मिला मुस्कुराते हुए छत की सीढ़ियों की तरफ बढ़ जाती है. उसके जाते ही बाबूजी पायल की चूतड़ों को दबोच के उसे अपने बदन से चिपका लेते है.

रमेश : आह... मेरी गुडिया रानी...अब कहाँ जाएगी अपने पापा से बच के...

पायल : (हँसते हुए) उम्म्म...!! पापा...छोड़िये ना....

रमेश : (धोती पर से अपना लंड पायल की पैन्टी पर दबाते हुए) ऐसी जवान बेटी को कौनसा बाप छोड़ता है पायल...बोल ना? देगी अपनी बूर पापा को?

पायल : (शर्माते हुए) आप बड़े गंदे हो पापा....

रमेश : इसमें गन्दा क्या है बेटी? बेटी अपने पापा से बूर नहीं खुलवाएगी तो फिर शादी के बाद पहली ही रात में पति का कैसे लेगी? बोल ?

पायल : (शर्माते हुए) आपका बहुत मोटा है पापा. आप मेरी बूर खोलोगे थोड़ी ना...आप तो मेरी बूर पूरी फैला दोगे.....

पायल की बात सुन के रमेश पायल के दोनों चुचियों को दबोच लेते है.

रमेश : पापा अपनी बिटिया रानी को पटक-पटक के चोदेंगे तो बूर तो फैलेगी ही ना....बोल ना पायल...चुदवायेगी ना अपने पापा से?

पायल नखरे करते हुए पापा से दूर हो जाती है और सामने खड़े हो कर एक ऊँगली दाँतों के बीच दबाते हुए कहती है.

पायल : नहीं पापा...आपको मेरी बूर नहीं मिलेगी....

पायल की बात सुन कर रमेश धोती से अपना लंड बाहर निकाल लेते है और उसकी चमड़ी पूरी पीछे खींच कर मोटा टोपा पायल को दिखाते हुए कहते है.

रमेश : देख पायल....कैसे तड़प रहा है पापा का अपनी बेटी की बूर के लिए...देगी ना अपने पापा को?

पायल रमेश के लंड को आँखे फाड़-फाड़ के देखने लगती है. उसके ओंठ अपने आप ही दांतों के निचे आ जाते है. फिर पापा को देख कर वो मुस्कुराते हुए मस्ती में कहती है.

पायल : नहीं दूंगी...नहीं दूंगी...नहीं दूंगी.....!!!

तभी उर्मिला अपनी चौड़ी चुतड मटकाते हुए वहां पहुँच जाती है. रमेश के पीछे खड़ी हो कर वो कहती है.

उर्मिला : क्या नहीं देगी मेरी ननद रानी?

रमेश उर्मिला को मुड़ के देखते है. रमेश के चेहरे पर वैसे ही भाव है जैसे किसी भिखारी के चेहरे पर भीख मांगते वक़्त होते है.

रमेश : देखो ना बहु...कैसे जिद कर रही है. मैं यहाँ अपना लंड खड़ा किये हूँ और ये बोल रही है की बूर नहीं दूंगी...

उर्मिला चलते हुए बाबूजी के पास आती है. ११ इंच का मोटा लंड देख कर उर्मिला के मुहँ और बूर, दोनों में पानी आ जाता है. वो पायल के पास जाती है और उसके सर पर प्यार से हाथ फेरने लगती है.

उर्मिला : क्यूँ रे पायल? अपने पापा को कोई बेटी ऐसे परेशान करती है क्या?

पायल : क्या करूँ भाभी? इतना मोटा लंड है पापा का...मेरी बूर पूरी फ़ैल गई तो?

उर्मिला : धत पगली..!! बूर क्या सिर्फ पेशाब करने के लिए होती है? बूर का तो काम ही है मोटे-मोटे लंड लेना और फ़ैल जाना....और बेटियां सबसे पहला लंड अपने पापा का ही तो लेती है. ठीक कहा ना बाबूजी?

रमेश : हाँ..हाँ.. बहु...बिलकुल ठीक कहा तुमने. बाप जिस लंड से बेटी को पैदा करता है, बड़ी हो कर वो बेटी उसी लंड से तो अपनी बूर खुलवाती है....

उर्मिला : और नहीं तो क्या? और इसे देखो...कैसे नखरे कर रही है. आप नहाने जाइये बाबूजी...इसे मैं समझाती हूँ....

बाबूजी टॉवेल ले कर धीरे-धीरे बाथरूम में चले जाते है. बाबूजी के जाते ही उर्मिला हँसते हुए पायल से कहती है.

उर्मिला : क्यूँ री? इतने नखरे क्यूँ कर रही थी?

पायल : (हँसते हुए) भाभी आपको पापा का चेहरा देखना था...जब मैंने मना किया तो कितना छोटा सा हो गया था....

उर्मिला : हाँ ...तुने छोटा मुहँ तो देख लिया लेकिन उनका बड़ा लंड नहीं देखा क्या? अगर मैं ना आती तो बाबूजी तुझे पटक के तेरी बूर फाड़ ही देते....अभी दांत दिखा के जो हँस रही है ना फिर रोती फिरती सारे घर में अपनी फटी बूर ले कर ....

पायल : सच भाभी? बहुत दर्द होता है क्या?

उर्मिला : हाँ पायल...पहली बार तो होता ही है. और बाबूजी का तो बहुत लम्बा और मोटा है. दर्द तो होगा. १-२ बार ले लेगी ना फिर देख कैसे मजा आता है. फिर तो मेरी पायल रानी उच्छल-उच्छल के पापा का लंड अपनी बूर में लेगी.

पायल : (खुश हो कर) सच भाभी?

उर्मिला : हाँ मेरी बन्नो...!! अच्छा अब सुन. मेरे पास कुछ शोर्ट बिना बाहं की नाईटी है जो मैंने अपने हनीमून के वक़्त खरीदी थी. बाबूजी नाहा के आयेंगे तो तू उसे पहन के बाबूजी के पास चली जाना...

पायल : मैं अकेले नहीं जाउंगी भाभी...आप भी साथ चलियेगा ना....

उर्मिला : अरे पागल...बूर तुझे खुलवानी है, मुझे नहीं....

पायल : भाभी प्लीज...आप ही तो कहती थी ना की बाबूजी आपकी भी लेना चाहते है. और आप भी तो इतने दिनों से लंड के लिए तरस रही हो ना? प्लीज भाभी...आप भी चलिए ना...

उर्मिला : अच्छा बाबा ठीक है. हम दोनों चलेंगे...अब ठीक?

पायल : (खुश होते हुए) हाँ भाभी....

उर्मिला : अच्छा अब चल...मैं वो शोर्ट नाईटी निकाल लूँ हम दोनों के लिए...

पायल : हाँ भाभी....

उर्मिला पायल के साथ अपने कमरे में चली जाती है और शोर्ट नाईटी के इंतज़ाम में लग जाती है. इधर बाबूजी कुछ देर बाद नाहा के निकलते है. सिर्फ टॉवेल कमर पर लपेटे हुए बाबूजी रसोई में नज़र डालते है तो वहां कोई नहीं है. वो धेरे धीरे अपने कमरे में चले जाते है. कमरे में बैठ कर वो कुछ सोचते है फिर पायल को आवाज़ लगते है.

रमेश : पायल...!! पायल बेटी..!!

तभी दरवाज़े पर पायल नज़रे झुकाए खड़ी हो जाती है. पायल ने बिना बाहं वाली एक लाल रंग की शोर्ट नाईटी पहनी हुई है जो पारदर्शी है. देखने मैं साफ़ पता चल रहा है की पायल ने अन्दर ब्रा नहीं पहनी है. रमेश पायल को आँखे फाड़े ऊपर से निचे देखने लगते है. पारदर्शी नाईटी में उठे हुए गोल गोल दूध जिसपर हलके से निप्प्लेस भी प्रतीत हो रहे है. पायल के शरीर की वो रेत घड़ी (hourglass) सी बनावट उस पारदर्शी नाईटी में साफ़ दिखाई पड़ रही थी. नाईटी जांघो तक थी और पायल की जांघो के बीच का हिस्सा अन्दर था. लेकिन नाईटी के पारदर्शी होने की वजह से पायल की जांघो के बीच घने बाल नाईटी में बाहर से भी प्रतीत हो रहे थे. पायल का वो संगेमरमर सा बदन और वो रूप देख कर रमेश के टॉवेल में बड़ा सा उभार आ जाता है.

तभी पायल के कन्धों पर हाथ रखे, उर्मिला उसे धीरे धीरे अन्दर लाने लगती है. रमेश की नज़र उर्मिला पर पड़ती है तो उर्मिला ने भी वैसी ही नाईटी पहनी हुई थी. उर्मिला के भी बड़ेबड़े दूध और निप्प्लेस पारदर्शी नाईटी से साफ़ दिखाई दे रहे थे. जांघो के बीच घने बाल भी प्रतीत हो रहे थे. दोनों को इस हाल में देख रमेश के होश उड़ जाते है.

उर्मिला : लीजिये बाबूजी...आ गई आपकी लाड़ली बेटी....

उर्मिला पायल को बाबूजी के सामने खड़ा कर देती है. पायल अब भी नज़रे झुकाए खड़ी है और धीरे-धीरे मुस्कुरा रही है. रमेश भी पायल को मुस्कुरा कर देखते है फिर अपने हाथ से उसकी ठोड़ी पकड़ के ऊपर करते हुए कहते है.

रमेश : इधर देख बेटी....(पायल पापा की आँखों में देखती है)....बहुत खूबसूरत लग रही है मेरी पायल इस कपडे में.

पायल एक बार पापा की आँखों में देखती है फिर ओठों को दाँतों टेल दबाते हुए नज़रे झुका लेती है. उर्मिला रमेश से कहती है.

उर्मिला : बाबूजी ये आपके सामने इतना शर्मा रही है. अभी कुछ देर पहले मुझ से कह रही थी की आज पापा को पूरा मजा दूंगी...

उर्मिला की बात सुन के पायल बड़ी-बड़ी आँखों से भाभी को देखते हुए कहती है....

पायल : धत भाभी...चुप रहिये ना....!!

रमेश : (मुस्कुराते हुए) सच पायल? जरा बता तो...कैसे मजा देगी पापा को...

पायल फिर से शर्मा जाती है. उर्मिला उसके पास आती है और कहती है.

उर्मिला : अब भी शर्मा रही है. मम्मी के आने तक शर्माती ही रहेगी क्या?. (फिर रमेश को देखते हुए) बाबूजी आप अपना लंड दिखाइए तो इसे. तभी इसकी शर्म दूर होगी...

रमेश अपना टॉवेल आगे से खोल देते है तो उनका ११ इंच का लम्बा मोटा लंड पायल के सामने लहराने लगता है. पायल की नज़र पापा के लंड पर पड़ती है तो उसके बदन में मस्ती चड़ने लगती है. वो एक बार पापा को देखती है और फिर उर्मिला को. उर्मिला उसे आँख मार देती है. पायल पापा को देखती है और पापा की नजरो से नज़रे मिलाते हुए एक जोर का झटका दे कर अपने बड़े-बड़े दूध उच्छाल देती है. रमेश की आँखों के सामने पायल के दूध उच्छल जाते है. अपनी बेटी के उच्छालते दूध को देख कर रमेश का लंड भी एक झटका मार देता है. पायल ३-४ बार ऐसे ही झटके दे कर अपने दूध उच्छल देती है और हर बार रमेश का लंड भी झटके खता है. फिर पायल उर्मिला को देखती है तो उर्मिला आँखों के इशारे से उसे बेशर्मी दिखाने कहती है. पायल फिर से पापा को देखते हुए अपनी नाईटी ऊपर से खोल कर कमर तक उतार देती है. उसके बड़े-बड़े नंगे दूध पापा के सामने खुले हुए है. पायल पापा को देखते हुए फिर से झटके देते हुए ३-४ बार अपने दूध उच्छाल देती है. रमेश से अब रहा नहीं जा रहा है. वो पायल से कहता है.

रमेश : पायल बेटी...इधर आ...बैठ अपने पापा की गोद में...

पायल धीरे-धीरे पापा के पास जाती है. पापा का ११ इंच का लंड खड़े हो कर हिचकोले ले रहा है. पायल पापा के पास जा कर, पीठ उनके तरफ करते हुए, अपनी चौड़ी चूतड़ों को पापा की गोद में रखने जाती है तभी उर्मिला झट से आ कर पीछे से पायल की नाईटी ऊपर कर देती है.

उर्मिला : (पीछे से पायल की नाईटी ऊपर करते हुए) अरे अरे पायल....!! नाईटी निचे कर के बैठेगी अपने पापा की गोद में? बेटी अपने पापा की गोद में हमेशा कपडे उठा कर बैठती है....

पायल उर्मिला को देख कर मुस्कुराते हुए अपनी भरी हुई चुतड पापा की गोद में जैसे ही रखती है, पापा का मोटा लंड उसके गांड के छेद पर टकरा कर फिसलता हुए बूर पर आता है और बूर से फिसलता हुआ पायल के नंगे पेट पर रगड़ता हुआ आगे से उसकी नाईटी उठा देता है. उर्मिला झुक कर देखती है तो बाबूजी का मोटा लंड पायल की बूर पर चिपका हुआ है और लंड का टोपा नाईटी को अपने सर पर लिए उसकी नाभि के पास खड़ा है. पायल की बालोवाली बूर के ओंठ फैलकर पापा के मोटे लंड पर चिपके हुए है. रमेश एक बार धीरे से अपनी कमर ऊपर निचे करते है तो लंड पायल के बूर के दाने पर रगड़ खा जाता है. पायल के मुहँ से सिस्कारियां निकलने लगती है.

पायल : सीईईईईईईईई.....!! पापा......!!!

पायल की सिसकारी सुनते ही रमेश अपने दोनों हाथो से पायल के दोनों दूध दबोच लेते है और मसलने लगते है. पायल मस्ती में अपना सर पीछे कर के पापा के कन्धों पर रख लेती है और आँखे बंद किये सिस्कारिया लेने लगती है. रमेश भी धीरे-धीरे अपना लंड पायल के बूर के दाने पर रगड़ने लगते है. रमेश को अपनी बेटी के बूर पर लंड रगड़ते हुए देख उर्मिला भी एक हाथ से अपनी बूर रगड़ने लगती है.

उर्मिला : बाबूजी...बहुत गरम है आपकी बेटी. इसके बदन में बहुत गर्मी है....

रमेश : हाँ बहु...बहुत गर्मी है इसके बदन में... इसकी गर्मी तो आज...(जोर से दूध मसल देते है और लंड बूर के दाने पर रगड़ देते है)...इसके पापा उतरेंगे.....

पायल : सीईईईईइ....पापा...!!!

रमेश : (दूध मसलते हुए अपने लंड को जोर से पायल की बूर पर रगड़ देते है) पापा...पापा....हाँ...?? जब घर में पापा के सामने बड़े-बड़े दूध उठा कर घुमती थी, तब पापा की याद नहीं आई? आज जब नंगी हो कर पापा के लंड पर बैठी है तो पापा की याद आ रही है? ...क्यूँ पायल? ...बोल?

पायल : (आँखें बंद और तेज़ साँसे लेते हुए) आह...!! पापा...!! आपके मोटे लंड पर नंगी हो कर बैठना चाहती थी, तभी तो आपके सामने बड़े-बड़े दूध लिए घुमती थी....आह...!!

रमेश : हाय मेरी बिटिया रानी..!! इतना तड़पती थी अपने पापा के लंड के लिए....उफ्फ्फ....!!!

क्रमश :
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02-12-2022, 01:19 PM,
#33
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
अपडेट २१.५:

पायल : हाँ पापा...बहुत तड़पी हूँ आपके लंड के लिए....

रमेश : (फिर से पायल के दूध मसल देते हैं और लंड बूर में रगड़ देते है) ओह पायल...!!

तभी उर्मिला, जो वहां कड़ी बाप-बेटी की मस्ती देख रही थी, कहती है...

उर्मिला :बाबूजी...मैं बस २ मिनट में पेशाब कर के आती हूँ....

रमेश : कहाँ जोगी बहु....यहीं बाथरूम में कर लो...

उर्मिला धीरे-धीरे बाथरूम की और बढ़ने लगती है जिसका दरवाज़ा उसी कमरे के एक कोने है. तभी बाबूजी पायल के कान में धीरे से कहते है.

रमेश : (पायल के कान में धीरे से) मेरी पायल भी पेशाब करेगी?

पायल धीरे से सर हिला कर हामी भर देती है. रमेश उर्मिला को पीछे से आवाज़ देते है.

रमेश : बहु...पायल भी पेशाब करेगी...इसे भी साथ ले जा...

उर्मिला मुस्कुराते हुए पायल के पास आती है और उसका हाथ पकड़ के धीरे से उसे उठाती है. पायल धीरे-धीरे खड़ी होती है तो उसकी बूर पापा के लंड पर रगड़ खाते हुए ऊपर की और जाती है. जैसे हे बूर टोपे से चिपक कर ऊपर होती है तो पापा का एक झटका लेता है और चिप-चिपे पानी की कुछ बूंदे हवा में उड़ जाती है. उर्मिला और पायल पापा को देख कर एक बार मुस्कुराती है और धीरे-धीरे बाथरूम की तरफ बढ़ने लगती है. रमेश दोनों की हिलती हुई चुतड देख कर खड़ा होता है और उनके पीछे-पीछे चल देता है. पायल बाथरूम में घुस कर जैसे ही निचे बैठने जाती है, उर्मिला उसके कंधे पर हाथ रखते हुए रोक लेती है.

उर्मिला : अरे अरे पायल? इस तरफ मुहँ कर के कहाँ बैठ रही है? दरवाज़े की तरफ मुहँ कर के बैठ....

पायल दीवार की तरफ मुहँ कर के घुटने मोडे हुए बस बैठने को ही थी की उर्मिला ने उसे रोक दिया था. वो वैसे ही उर्मिला को दखती है फिर धीरे से खड़ी होती है और दरवाज़े की तरफ घूम जाती है. जैसे ही उसका मुहँ दरवाज़े की तरफ होता है, सामने दरवाज़े पर पापा अपने मोटे लंड को हाथ में लिए खड़े है. पापा को देखते ही पायल शर्मा जाती है.

उर्मिला : ऐसे क्या शर्मा रही है लाडो. बैठ जा पापा के सामने पेशाब करने...

रमेश : बहु...तुम भी बैठ जाओ. दोनों भाभी-ननद साथ में पेशाब कर ले तो और भी अच्छा है.

उर्मिला : (मुस्कुराते हुए) जी बाबूजी....

पायल और उर्मिला एक दुसरे को देख कर मुस्कुरा देती है. फिर अपनी-अपनी नाईटी कमर तक उठाये दोनों धीरे-धीरे टाँगे खोलते हुए निचे बैठने लगती है. बाबूजी की नज़र दोनों की खुलती हुई बालोवाली बुरों पर ही टिकी हुई है. दोनों पेशाब करने निचे टाँगे खोले बैठ जाती है. दोनों की जांघे फैली हुई है और बीच में बालो से भरी बूर के ओंठ भी हलके से खुल गए है. बाबूजी दोनों की बुरों को ओंठ पर जीभ फेरते हुए देख रहे है. पायल और उर्मिला फिर एक बार एक दुसरे को देख कर मुस्कुरा देती है और फिर बाबूजी को देखने लगती है. निचे दोनों की बुरों के ओंठ एक बार आपस में भींच जाते है और जब वो खुलते है तो पेशाब की एक मोटी धार दोनों की बुरों से सुर्र्रर्र्र्रर्र्र की आवाज़ करती हुई गिरने लगती है. बाबूजी ये नज़ारा देख कर एक बार जोर से लंड मुठिया देते है. फिर बाबूजी निचे बैठ जाते है और अपना सर ज़मीन के साथ रख कर निचे से दोनों की बुरों से पेशाब की मोटी धार को निकलते देखने लगते है. पायल जब पापा को इस तरह से निचे झुके हुए देखती है तो वो भी मस्ती में अपनी टाँगे और ज्यादा खोल देती है. पायल की बूर के ओंठ खुल जाते है और पेशाब की धार और ज्यादा तेज़ हो जाती है. ये देख कर रमेश भी अपने लंड को पकडे कमर आगे कर देते है जिस से लंड की चमड़ी हाथ में सिमट जाती है और टोपा खुल के सामने दिखने लग जाता है. रमेश पायल की बूर को को देखते हुए अपने लंड को उस दिशा में करते है और एक जोर का झटका देते है. पायल पापा के लंड को अपनी बूर की तरफ झटका खाता देखती है तो वो भी अपनी टाँगे खोल के कमर को झटका देती है. उर्मिला को बाप-बेटी की यह जुगलबंदी बहुत पसंद आती है.

पेशाब करने के बाद पायल और उर्मिला खड़ी होती है और अपनी नाईटी निचे कर के मुस्कुराते हुए बाथरूम से बाहर आती है. एक दुसरे की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए दोनों रमेश के सामने से जाने लगती है. रमेश निचे बैठे हुए दोनों की आधी नंगी मटकती हुई चुतड देखते है. पायल की गोरी-गोरी चौड़ी, हिलती हुई चुतड देख कर रमेश से रहा नहीं जाता. वो पायल को पीछे से उसकी जांघो के बीच हाथ डाल कर उठा लेते है. पायल की पीठ रमेश की मजबूर छाती पर चिपक जाती है. रमेश पायल को हवा में उठाये हुए उसकी जांघे खोल देते है और सामने दीवार पर टंगे बड़े से आईने की तरफ घूम जाते है. आईने में पायल की बूर के बालों के बीच खुले हुए ओठों से लाल छेद साफ़ दिख रहा है जो थोडा अन्दर जा कर बंद है. बूर के ओंठों से लार बह रही है जो धीरे-धीरे फिसलती हुई पायल की चूतड़ों की तरफ बढ़ रही है. रमेश पायल की कसी हुई बूर देख कर उर्मिला से कहते है.

रमेश : बहु....जरा देखो तो मेरी बिटिया रानी की बूर...कैसी कसी हुई है....

उर्मिला : हाँ बाबूजी...बहुत मजा देगी. आपका मोटा लंड पूरा कसा हुआ जायेगा अन्दर....

रमेश : जरा अपनी बूर भी तो दिखाओ बहु....देखूं तो कैसी बूर है मेरी बहु की....

बाबूजी की बात सुन कर उर्मिला मुस्कुराते हुए सामने आती है और बाबूजी के पास खड़ी हो कर अपना एक पैर पास रखी कुर्सी पर रख देती है. कमर आगे करते हुए उर्मिला दोनों हाथों से अपनी बालोवाली बूर के ओंठों को फैला देती है. ओंठ फैलते ही उर्मिला की बूर का लाल छेद दिखने लगता है जो गहरा है. रमेश पायल और उर्मिला की बूर को गौर से देखते है. एक कुवांरी बूर और चूदी हुई बूर का अंतर वो साफ़ देख रहें है.

रमेश : बहु...तुम्हारी बूर भी बहुत रसीली और चोदने लायक है. मजा आ जायेगा तुम्हारी बूर में लंड दे कर...

उर्मिला : हाँ बाबूजी...आपका ऐसा मोटा तगड़ा लंड ले कर तो किसी भी लड़की के भाग खुल जायेंगे...

रमेश पायल को धीरे से निचे उतार देते है और बिस्तर की तरफ चल देते है. वो बिस्तर पर पीठ के बल लेट जाते है. दोनों पैर घुटने से मुड़े हुए है और टाँगे ज़मीन पर है. जांघो के बीच रमेश का ११ इंच लम्बा और मोटा लंड आसमान की तरफ देखता हुआ सीना ताने खड़ा है. पायल और उर्मिला की नज़र रमेश के लंड पर टिक जाती है. रमेश पायल को मुस्कुराते हुए देखते है.

रमेश : आज मेरी प्यारी रानी बेटी पापा का गन्ना नहीं चूसेगी?

रमेश की बात सुन कर पायल धीरे-धीरे बिस्तर की तरफ बढ़ने लगती है. उसकी साँसे तेज़ है और शरीर उत्तेजना से गर्म हो रखा है. धीरे-धीरे चलते हुए वो रमेश की टांगो के बीच पहुँच जाती है. अपने दोनों घुटनों को मोड़ कर को रमेश की टांगो के बीच बैठ जाती है. उसकी नज़रों के सामने रमेश का मोटा लंड उसे बुला रहा है. पायल जीभ बाहर निकल कर अपना सर आगे करने लगती है. पायल का मुहँ अभी लंड पर कास जायेगा ये सोच कर रमेश आँखे बंद कर लेते है. अपनी जाँघों के बीच वो पायल की गर्म साँसे महसूस करते है. तभी कुछ ऐसा होता है की रमेश हडबडा के अपनी आँखे खोल देते है और सर उठा के अपनी जांघो के बीच देखने लगते है.

वो ये देख कर हैरान हो जाते है की पायल की जीभ का निशाना उनका मोटा लंड नहीं बल्कि लंड के निचे लटकते उनके दो बड़े बड़े अंडकोष थे जिन पर पायल बड़े प्यार से अपनी जीभ घुमा रही थी. रमेश हैरान इस बात से थे की उनके काले-सफ़ेद बालों से भरे अन्डकोशों को शायद ही किसीने कभी छुआ भी हो. आज उनकी अपनी बेटी, जो इतनी खूबसूरत है, जो एक इशारा कर दे तो अच्छे-अच्छों की लाइन लग जाए, वो उनके अन्डकोशों को अपनी जीभ से चाट रही थी.

पायल पापा के अन्दोकोशों को बड़े प्यार से चाट रही थी. दोनों पर बारी बारी जीभ घुमाते हुए वो ऊपर निचे से ऊपर तक चाट जाती. रमेश पायल की इस हरकत को बड़े गौर से देख रहे थे. तभी पायल ने एक बॉल को चाटते हुए अपने मुहँ में भर लिया और किसी लोलीपोप की तरह चूसने लगी. रमेश के मुहँ से "आह्ह्ह्ह...!!" निकल गई और उनकी आँखे बंद हो गई. अपने पैरों को ज़मीन से उठा कर रमेश उन्हें घुटनों से पकड़ कर अपनी छाती के पास ले आते है. अब रमेश के दोनों अंडकोष पायल के सामने अच्छी तरह से आ जाते है. पायल दुसरे बॉल को भी उसी तरह से मुहँ में भर कर चूसने लगती है. चूसते हुए पायल धीरे से बॉल को मुहँ में भर कर खींच देती है तो रमेश के चेहरे पर दर्द और आनंद के भाव एक साथ दिखाई पड़ जाते.

कुछ देर इसी तरह से अंडकोष को चूसने के बाद पायल की नज़र किसी चीज़ पर ठहर जाती है. कुछ क्षण गौर से उस चीज़ को देखने के बाद पायल धीरे से अपना सर रमेश की जांघो के बीच फिर से ले जाती है. इस बार पायल जो करती है वो रमेश ने कभी अपने सपने में भी नहीं सोचा था. पायल ने अपनी जीभ रमेश की गुदा (गांड का छेद) पर रख दी थी और धीरे-धीरे जीभ उसके इर्द-गिर्द घुमाने लगी थी. ये देख कर रमेश "आह्ह्ह..!!" करते हुए बिस्तर पर अपना सर रख देते है और आँखे बंद किये उस अविश्वसनीय घटना का आनंद लेने लगते है.

ये द्रिश्य उर्मिला भी बड़ी ही हैरानी के साथ देख रही थी. उर्मिला को हमेशा से ही अपने आप पर बड़ा गुमान था. वो अपने आप को कामदेवी का रूप समझती थी. इस घर में वो एक संस्कारी बहु होने का किरदार निभा रही रही थी. जैसे ही घर में रिश्ते लंड और बूर के रिश्तों में बदलने लगे, उर्मिला ने फिर से कामदेवी का रूप ले लिया. लेकिन आज पायल जैसी एक खूबसूरत और जवान लड़की को अपने ५२ साल के पिता की गुदा को इस तरह से चाटता हुआ देख उसका कामदेवी होने का अहंकार टूट चूका था. आज उर्मिला को अपनी शिष्या पर गर्व महसूस हो रहा था. आज उसने अपने पिता को वो सुख दिया था जो शायद उन्हें किसी कुवांरी बूर को चोद कर भी न मिला था.

पायल रमेश की गुदा को चाटते हुए अपनी जीभ अन्दर गुसने की कोशिश करने लगती. कभी वो अपनी जीभ गुदा पर रख कर निचे से ऊपर अन्डकोशो तक चाट जाती. इस परमानंद में डूबा हुआ रमेश एक हाथ पायल के सर पर फेरते हुए अपना प्यार जाता रहा था. कुछ देर रमेश को वो परमसुख की अनुभूति कराने के बाद पायल अपना सर ऊपर उठा देती है और रमेश की जांघो पर हाथ रख कर अपने ओठों को लंड के टोपे पर रख देती है. पायल के ओंठ फिसलते हुए रमेश के लंड को आधा मुहँ में भर लेते है. पायल की जीभ मुहँ के अन्दर लंड के टोपे पर घुमने और फिसलने लगती है. रमेश भी अपनी कमर को निचे से उठा के पायल के मुहँ में पूरा लंड भरने की कोशिश करने लगते है. बीच-बीच में पायल अपना सर स्थिर कर देती तो रमेश ४-५ जोदार लंड के झटके पायल के मुहँ में मार देते.

रमेश जब देखते हैं की उनके लंड की नसे पूरी तरह से फूल गई है और अब वो बूर में घुसने के लिए तैयार है तो वो बिस्तर पर बैठ जाते है. पायल के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए वो उसे उठाते है. उसकी नज़रों में नज़रें मिलाते हुए रमेश पायल के कंधो को पकड़ के धीरे-धीरे बिस्तर पर लेटा देते है. पायल की साँसे अब बहुत तेज़ हो गई है. आगे होने वाली घटना को सोच कर ही उसका दिल धड़कने लगा है. उर्मिला भी अब पायल के सर के पास बैठ जाती है और अपना हाथ उसके सर पर फेरने लगती है. रमेश पायल की टांगो के बीच बैठ जाते है और धीरे-धीरे पायल पर चढ़ते हुए उसके दोनों दूध को हाथों से दबाते चूसने लगते है. पायल मस्ती में अपनी आँखे बंद किये अपने शरीर को रमेश के हवाले कर देती है.

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02-12-2022, 01:19 PM,
#34
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
अपडेट २२:

रमेश अपने लंड के टोपे को पायल की गीली बूर पर रगड़ रहे है. रमेश अपनी कमर धीरे से ऊपर की ओर करते है तो लंड बूर पर निचे से ऊपर रगड़ खा जाता है. जब कमर निचे की ओर करते हैं तो लंड ऊपर से निचे की ओर रगड़ खा जाता है. लंड का मोटा टोपा जब भी पायल की बुर पर रगड़ खाता, उसकी बूर काँप सी जाती, कमर हल्का झटका लेती और मुहँ से सिसकारी निकल जाती. बीच-बीच में जब भी पायल आँखे खोल कर पापा को देखती तो तेज़ साँसे लेते हुए अपने ओंठ काट लेती और फिर से आँखे बंद कर दूसरी तरफ सर घुमा लेती. पायल का नंगा बदन और उस पर ये अदा, रमेश के लंड को और ज्यादा गरमा रहे थे.

रमेश ने पायल की बूर पर एक नज़र डाली तो उसमे से धीरे-धीरे पानी बह रहा था. बूर किसी डबल रोटी की तरह फूल गई थी और बूर के ओंठ खुल गए थे. रमेश को ऐसा लगा मानो पायल की बूर उनके लंड को अपने अन्दर समां लेने के लिए बेताब है. अपने दोनों हांथों को पायल की पीठ के निचे से ले जाते हुए रमेश उसके कन्धों को कस लेते है. अपने ओठों को पायल के गुलाबी ओठों पर रख कर रमेश अपने मोटे लंड के टोपे को पायल की बूर पर टिकाते है तो पायल का बदन सिहर उठता है. पायल के दोनों हाथ रमेश की पीठ पर कस जाते है. पायल के ओंठ रमेश के ओंठों से रगड़ खाते हुए अलग होते है और पायल आँखे बंद किये अपने सर को पीछे की और धीरे-धीरे गिराने लगती है. उसकी ठोढ़ी ऊपर उठती चली जाती है और सुराही जैसी गोरी गर्दन रमेश के सामने आ जाती है. रमेश पायल की गर्दन पर जैसे ही अपने ओंठ रखते हैं, पायल अपने नाख़ून रमेश की पीठ पर गड़ा देती है.

एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह रमेश अपनी कमर को धीरे से निचे करते हुए लंड के टोपे का दबाव पायल की बूर के छेद पर डालते है. अपनी बूर पर टोपे का दबाव महसूस कर पायल आँखे बंद किये सिसकारी ले लेती है. रमेश थोडा और दबाव डालते है तो उनका लंड गीली बूर पर से फिसलता हुआ पायल के पेट पर पहुँच जाता है. रमेश के लंड से थोडा पानी निकल कर पायल की नाभि में जमा हो जाता है. रमेश फिर से अपने लंड को पकड़ कर पायल की बूर के मुहँ पर रखते है. हल्का सा दबाव डालते हुए वो जैसे ही कमर आगे करते है, उनका लंड इस बार बूर पर से फिसलता हुआ निचे पायल की चूतड़ों के बीच घुस जाता है. ये देख कर उर्मिला बाबूजी से कहती है.

उर्मिला : बाबूजी...पायल की बूर बहुत कसी हुई है. जरा ध्यान से खोलियेगा....

रमेश : हाँ बहु....बहुत कसी हुई बूर है मेरी बेटी की. लंड फिसल जा रहा है.

रमेश इस बार लंड को हाथ से पकड़ते है और पायल की बूर के मुहँ पर रख देते है. हाथ से लंड पकडे हुए रमेश जोर लगाते है तो लंड का टोपा बूर में घुसा जाता है और पायल रमेश की पीठ पर अपने नाख़ून गडाते हुए चिल्ला देती है.

पायल : आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह......!! पापा....!! निकालीये इसे....प्लीज पापा....!!

रमेश पायल को इस तरह से चिल्लाता देख सहम जाते है. वो अपनी कमर पीछे कर लेते है. उर्मिला भी पायल के सर पर हाथ फेरने लगती है.

रमेश : क्या हुआ पायल बेटी? दर्द हो रहा है क्या?

पायल : हाँ पापा...!! बहुत दर्द हो रहा है. आपका लंड बहुत मोटा है. मैं इसे नहीं ले पाऊँगी पापा...!!

रमेश प्यार से पायल के गालों पर हाथ फेरने लगते है.

रमेश : मेरी प्यारी गुडिया रानी. थोडा तो दर्द होगा ना बेटी. कोई बात नहीं...अब पापा धीरे से डालेंगे...अपनी बिटिया को जरा सा भी दर्द नहीं होने देंगे.

पापा की बात सुन कर पायल को थोड़ी हिम्मत मिलती है. वो फिर से एक बार अपने आप को पापा के गधे जैसे लंड के लिए तैयार कर लेती है. रमेश फिर से लंड को पकड़ कर पायल की बूर के मुगन पर रखते है और धीरे से दबाते है. लंड का टोपा फिर एक बार फिसल कर बूर में घुस जाता है. पायल इस बार और भी ज्यादा जोर से चिल्ला उठती है.

पायल : नहीं पापा....!!! मैं नहीं ले पाऊँगी....बहुत मोटा है...प्लीज पापा...!! प्लीज इसे निकाल लीजिये.....

इस बार पायल की आँखों में हलके आंसू भी आ जाते है. पायल के आंसू देखकर रमेश का दिल पिघल जाता है. उनके अन्दर का बाप का प्यार उनकी हवस पर भारी पड़ जाता है. अपनी कमर को पीछे करते हुए रमेश अपने लंड को पायल की बूर पर से हटा लेते है. पायल के माथे को चूम कर रमेश कहते है

रमेश : ठीक है पायल बेटी. अगर तुम्हे लग रहा है की तुम मेरा लंड नहीं ले पाओगी तो मैं जबरदस्ती नहीं करूँगा. बाप हूँ मैं तुम्हारा , बहुत प्यार करता हूँ अपनी पायल बेटी से...

पापा की बात सुन कर पायल को रमेश की बेटी होने पर गर्व महसूस होता है. वो जानती है की पापा चाहते तो एक झटके में उसकी बूर में लंड ठूँस देते. लेकिन पापा ने ऐसा नहीं किया. अपने लिए पापा का प्यार और वो इज्ज़त देख कर पायल अपने आप को रमेश से लिपटने से नहीं रोक पाती है. अपनी बाहें रमेश के गले में डाले वो रमेश से लिपट जाती है. अपने ओठों को रमेश के ओंठों पर रख कर पायल रमेश को चुम्मी देती है. उस चुम्मी में एक बेटी के प्यार के साथ-साथ एक २१ साल की लड़की का भी प्यार था जो अपने पापा का लंड लेना चाहती थी.

पायल : (रमेश की आँखों में देखते हुए) आई एम सॉरी पापा...!! मैंने आपको निराश कर दिया...

रमेश : (मुस्कुराते हुए) कोई बात नहीं बेटा...आज नहीं तो फिर कभी...जब मेरी पायल बिटिया तैयार हो जाएगी तब पापा से अपनी बूर खुलवा लेना...

पायल रमेश को बड़े ही प्यार से देखती है. पापा का लंड अब भी पूरा का पूरा तन कर खड़ा है. पायल एक नज़र पापा के लंड पर डालती है और कहती है.

पायल : पापा आज आप मेरी बूर नहीं ले पाए तो क्या हुआ? भाभी की बूर तो ले ही सकते हो ना?

पायल की बात सुनते ही रमेश की नज़र उर्मिला पर जाती है. बाबूजी को देखते ही उर्मिला शर्म से नज़रे झुका लेती है फिर धीरे-धीरे नज़रें उठा कर बाबूजी को देखने लगती है.

रमेश : ऐसे क्या शर्मा रही हो बहु? क्या मेरा तुम पर इतना भी हक नहीं है?

उर्मिला : ये आप क्या कह रहे हैं बाबूजी? मैं आपकी बहु हूँ. आपका हक तो मुझ पर रौनक से भी कहीं ज्यादा है. और फिर आपने तो अपने लंड के पानी से मेरी मांग भी भरी है. मेरा बदन, मेरा हर अंग, मेरा रोम-रोम आपका है बाबूजी....

उर्मिला की बात सुन कर रमेश को अपनी बहु पर गर्व महसूस होता है. उसे लगता है की ऐसी बहु पाकर वो धन्य हो गया.

रमेश : तुम सच में एक आदर्श बहु हो उर्मिला. भगवान करे तुम्हारी जैसी बहु सबको मिले.

पायल ससुर-बहु की बातें बड़े ध्यान से सुन रही थी. उसे इस बात की ख़ुशी थी की भाभी सच में कितनी अच्छी है. घर में सभी को प्यार और सम्मान देती है. पायल रमेश और उर्मिला के बीच से उठ कर बिस्तर के निचे खड़ी हो जाती है. बाबूजी की बात सुन कर उर्मिला उनके पैरों को पकड़ लेती है.

उर्मिला : (बाबूजी के पैर पर सर रखते हुए) ओह बाबूजी..!! आपने एक पराई लड़की को अपने घर की बहु बनाकर सम्मान दिया, इतना प्यार दिया. मैं भगवान से प्रार्थना करुँगी की वो आप जैसे बाबूजी हर बहु को दे....

रमेश उर्मिला के सर पर हाथ फेरने लगते है. फिर धीरे-धीरे उसे उठाने लगते है. उर्मिला अपना सर धीरे-धीरे ऊपर करने लगती है. उसकी नज़रों के सामने बाबूजी का मोटा लंड तन के खड़ा है. उर्मिला लंड को देखती है फिर बाबूजी को देखते हुए कहती है.

उर्मिला : मुझे आशीर्वाद दीजिये बाबूजी...

रमेश : (उर्मिला को देख कर मुस्कुराते हुए) अपना मुहँ खोलो बहु....
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02-12-2022, 01:19 PM,
#35
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
उर्मिला बाबूजी की आँखों में देखती है, फिर नज़रे नीची कर के उनके लंड को. कुछ क्षण लंड को निहारने के बाद, उर्मिला नज़रे उठा के बाबूजी को देखती है और धीरे-धीरे अपना मुहँ खोल देती है. बाबूजी अपना एक हाथ उर्मिला के सर के पीछे ले जा कर पकड़ लेते है और दुसरे हाथ से लंड की जड़ को पकड़ कर लंड का टोपा उर्मिला के मुहँ में डाल देते है. अपने हाथ से उर्मिला के सर को पीछे से पकडे रमेश अपनी कमर को आगे झटका देते हुए लंड उर्मिला के मुहँ में ठूँस देते है.

रमेश : (लंड उर्मिला के मुहँ में ठूँसते हुए) सदा सुहागन रहो बहु.....आह...!!

फिर रमेश अपनी कमर को पीछे करते हुए लंड उर्मिला के मुहँ से बाहर निकाल लेते है. उर्मिला वैसे ही मुहँ खोले बैठी है. रमेश फिर से अपनी कमर को झटका देते हुए लंड को उर्मिला के मुहँ में ठूँस देते है.

रमेश : (लंड उर्मिला के मुहँ में ठूँसते हुए) दूधो नहाओ पूतो फलो....आह....!!

फिर रमेश अपनी कमर को पीछे करते हुए लंड उर्मिला के मुहँ से बाहर निकाल लेते है और फिर से अपनी कमर को झटका देते हुए लंड को उर्मिला के मुहँ में ठूँस देते है.

रमेश : (लंड उर्मिला के मुहँ में ठूँसते हुए) जल्द ही खुशखबरी दो बहु....ओह......!!

रमेश की इस बात पर पायल झट से बोल पड़ती है...

पायल : पापा..!! आप ही भर दीजिये ना भाभी की गोद...रौनक भैया तो १ साल से कुछ कर ही नहीं पाए.

पायल की बात सुन कर रमेश उर्मिला को मुस्कुराते हुए देखते है. पायल की बात और बाबूजी का इस तरह से देखना, उर्मिला तो शर्म से लाल हो जाती है. रमेश अपने हाथ से उसकी ठोड़ी पकड़ के ऊपर करते है और उर्मिला की आँखों में देखते हुए कहते है.

रमेश : बोलो बहु...!! अपने बाबूजी का बच्चा पेट में लोगी? माँ बनोगी अपने ससुर के बच्चे की?

उर्मिला : (बाबूजी को देखते हुए, तेज़ साँसों से) हाँ बाबूजी...!! मेरी कोंख मैं अपना बच्चा दे दीजिये. बना दीजिये मुझे अपने बच्चे की माँ....

उर्मिला की बात सुनते ही बाबूजी जोश में आ जाते है. उर्मिला की जाँघों को पकड़ कर वो अपनी तरफ खींच लेते है. उर्मिला बिस्तर पर रमेश के ठीक सामने टाँगे फैलाए गिर जाती है. रमेश झट से उर्मिला पर छलांग लगा देते है और उसे चूमने-चाटने लगते है.

रमेश : ओह मेरी बहु....!! कितनी सुन्दर, सुशील और पूरी जवान गदराई हुई.

उर्मिला : ओह बाबूजी....!! लूट लीजिये अपनी बहु की जवानी....देखिये ना आपकी बहु कैसे अपनी टाँगे खोले आपके मोटे लंड के लिए तरस रही है....

उर्मिला की बात सुन कर रमेश अपने लंड के टोपे को उसकी गीली बूर के मुहँ पर रख देते है और कमर को एक झटका देते ही टोपा बूर में घुस जाता है. उर्मिली की चीख निकल जाती है.

उर्मिला : आह्ह्ह्हह्ह....!!! बाबूजी.....!!!

उर्मिला रमेश को कास के पकड़ लेती है. उसके बड़े-बड़े दूध रमेश के कसे हुए सीने पर चिपक जाते है. रमेश अपनी कमर को स्थिर किये उर्मिला की बूर पर लंड का दबाव बनाते है तो लंड धीरे-धीरे बूर में धसने लगता है. पायल पापा के लंड को उर्मिला की बूर में धीरे-धीरे घुसता देख आश्चर्यचकित हो जाती है. उसकी आँखे बड़ी और मुहँ खुल जाता है. ऐसा लग रहा है की मानो उसने दुनिया का आँठवा अजूबा देख लिया हो. उसे यकीन नहीं हो रहा था की अभी-अभी जिस लंड ने उसकी जान निकाल दी थी उस लंड को उर्मिला अपनी बूर में कैसे ले रही है.

रमेश जोर लगते हुए अपना लंड उर्मिला की बूर में ठेलते चले जाते है और कुछ ही क्षण में उनका पूरा लंड जड़ तक उर्मिला के बूर में समां जाता है. उर्मिला रमेश को कस कर पकडे हुए है. पापा का पूरा का पूरा लंड उर्मिला की बूर में जड़ तक धंसा देख पायल को चक्कर आने लगता है. रमेश अपनी कमर को पीछे करते है तो उनका लंड बूर से बाहर आ जाता है. फिर वो लंड को उर्मिला की बूर पर रख कर एक जोर का धक्का लगाते है तो लंड एक झटके में उर्मिला की बूर में फिर से पूरा धंस जाता है. रमेश के बड़े-बड़े गोटे जैसे ही उर्मिला की चूतड़ों से टकराते है तो सारा कमरा 'ठप्प' की जोरदार आवाज़ से गूंज उठता है. 'ठप्प' की आवाज़ इतनी तेज़ होती है की पास खड़ी पायल डर के उच्चल सी जाती है.

उर्मिला : आह्ह्हह्ह....बाबूजी..!! बहुत मोटा है आपका....

रमेश : तुम्हारी बूर भी कमाल की है बहु. कसी हुई है फिर भी पूरा अन्दर तक ले रही है....बहुत मजा देगी....

क्रमश:

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Reply
02-12-2022, 01:19 PM,
#36
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
अपडेट २२.५:

उर्मिला : आह्ह्हह्ह....बाबूजी..!! बहुत मोटा है आपका....

रमेश : तुम्हारी बूर भी कमाल की है बहु. कसी हुई है फिर भी पूरा अन्दर तक ले रही है....बहुत मजा देगी....

उर्मिला : (कसमसाते हुए) आह्ह्हह्ह...!! और अन्दर डालिए बाबूजी....उई माँ.....!!

रमेश : उफ़ बहु....!! मेरा बस चले तो मैं लंड के साथ-साथ अपनी दोनों गोटियाँ भी अन्दर डाल दूँ बहु....पर फिलहाल मेरे लंड से ही काम चला लो....

रमेश उर्मिला की दोनों टांगों को पकड़ कर मोड़ देते है और उर्मिला के सीना पर लगा देते है. उर्मिला की बूर अब बाबूजी के लंड के निचे अच्छी तरह से आ जाती है. बाबूजी लंड निकाल कर, उर्मिला की टाँगे पकडे हुए अपने घुटनों को मोड़ कर उसकी चुतड के पास बैठ जाते है. कमर उठा के बाबूजी अपना मोटा लंड उर्मिला की बूर पर रखते है. उर्मिला भी अब अपने पैरों को पकड़ के अपनी छाती से चिपका लेती है. बाबूजी भी थोडा सामने आते हुए उर्मिला की बूर के ठीक ऊपर अपने लंड को निचे किये हुए उसकी बूर पर रख देते है. एक हाथ उर्मिला की जांघ पर और दूसरा हाथ अपनी कमर पर रख कर रमेश अपनी कमर निचे करते है तो उनका लंड उर्मिला की बूर की गहराई में फिसलता हुआ घुस जाता है. २-३ बार रमेश ऐसे ही उर्मिला की बूर में धीरे-धीरे लंड घुसाते है फिर तेज़ रफ़्तार पकड़ लेते है. रमेश का लंड उर्मिला की बूर में तेज़ी से अन्दर-बाहर होने लगता है.

पायल इस द्रिश्य को बड़े ध्यान से देख रही है. उसे देखने में ऐसा लग रहा है की उर्मिला बिस्तर अपर अपनी टाँगे मोड़ कर छाती से लगाए लेटी है और उसकी बूर पर बाबूजी जोर-जोर से दंड पेल रहे हैं. हर दंड पर एक जोरो की 'ठप्प' की आवाज़ आ रही है और कभी-कभी तो वो आवाज़ इतनी तेज़ हो जाती की पायल अपने सीने पर हाथ रख कर दिल की धडकनों को काबू करने की कोशिश करने लगती. उर्मिला की ऐसी घमासान चुदाई देख कर पायल सोचने लगी की कहीं भाभी को तकलीफ तो नहीं हो रही है? पापा जिस तरह से अपने गधे जैसे मोटे लंड को भाभी की बूर में पेल रहे है, कहीं भाभी को दर्द तो नहीं हो रहा है? तभी उर्मिला की आवाज़ ने उसके सारे सवालों के जवाब दे दिए....

उर्मिला : आह्ह्ह्ह.....!! बाबूजी...और जोर से चोदीये मेरी बूर....!! आपको देख कर बहुत पानी छोड़ती थी ये कामिनी....अच्छे से सबक सिखाइए इसे...आह...!!

उर्मिला द्वारा बाबूजी को दी गई इस ललकार ने तो मानो पायल को दिन में तारे ही दिखा दिए. "इतने मोटे तगड़े लंड को बूर में ले कर भाभी मजा ले रही है? दर्द का तो नामोनिशान भी नहीं है भाभी के चेहरे पर. उफ़ पापा..!! मैंने क्यूँ मन कर दिया आपका लंड लेने से....", पायल को अब अपने उस फैसले पर तरस आ रहा था. लेकिन इस बात की ख़ुशी भी थी की भाभी को पापा पूरा मजा दे रहे थे.

रमेश : हाँ बहु...आज तेरी बूर को अच्छे से सबक सिखाऊंगा. बहुत खुजली होती है ना इसे? आज इसकी सारी खुलजी मिटा दूंगा.

उर्मिला : हाँ बाबूजी...आह..!! सारी खुलजी मिटा दीजिये इसकी....

रमेश उर्मिला की बूर में सटा-सटा लंड पेलता हुआ....

रमेश : तुम्हे याद है बहु...जब हम पहली बार तुम्हे देखने तुम्हारे घर आये थे..?

उर्मिला : आह्ह्ह..!! हाँ बाबूजी याद है....आपने उस दिन गेरुयें रंग का कुरता और धोती पहनी हुई थी....अहह...!!

रमेश : हाँ बहु....!! जब तुम्हे पहली बार देखा था तब ही सोच लिया था की यही मेरे घर की बहु बनेगी...और जब तुम मुझे चाय देने के लिए झुकी थी और मैंने तुम्हारे बड़े-बड़े दूध के बीच की गहराई देख ली थी तब मेरा इरादा और भी पक्का हो गया था.

उर्मिला : याद है मुझे बाबूजी...आप कैसे मेरी गहराई में घूरे जा रहे थे और मैं शर्म से पानी-पानी हो गई थी. आपकी धोती में वो हलचल देख कर ही मैं समझ गई थी की ससुराल में पति का सुख मिले ना मिले, ससुर का सुख एक दिन जरूर मिलेगा....आह्ह्ह्ह...!!

रमेश : हाँ बहु...उस दिन घर आने के बाद मैंने तुम्हारी याद में अपना लंड बहुत मुठीआया था...

उर्मिला : ओह बाबूजी....सच कहूँ तो उस रात मैंने भी आपको याद कर अपनी बूर में मोटा बैगन खूब चलाया था....

उर्मिला की बात सुन कर रमेश के लंड एकदम से फड़फड़ाने लगता है. एक बार उनके मुहँ से, "ओह...बहु..!!", निकलता है और उनका का लंड उर्मिला की बूर में और भी तेज़ी से अन्दर-बाहर होने लगता है. देखने में ऐसा लग रहा है जैसे किसी कपडे पर सिलाई की मशीन चल रही हो, जिसकी सुई लगातार कपडे में छेद करती हुई अन्दर-बाहर हो रही है. पायल धीरे से बाबूजी के पीछे जा कर बैठ जाती है. निचे झुक कर जब वो रमेश के लंड को इतनी तेज़ी से उर्मिला की बूर में अन्दर-बाहर होते हुए देखती है तो उसकी साँसे ही रुक जाती है. पास जा कर वो बड़े ध्यान से ये नज़ारा देखने लगती है. रमेश के मोटे लंड से उर्मिला के बूर के ओंठ पूरे फ़ैल चुके थे. बूर के फैले हुए ओंठों ने रमेश के लंड को गोलाई में जकड़ा हुआ था. रमेश का मोटा लंड जब भी उर्मिला की बूर में जाता, सफ़ेद झाग के साथ कुछ छोटे-छोटे बुलबुले बूर के ओंठो पर उभर आते. पायल देखती है की बीच-बीच में पापा की गांड के दोनों पट आपस में भींच जाते और उनका पिछवाड़ा कस जाता. अपनी गांड को भींचे और पिछवाड़े को कसे हुए रमेश अपनी कमर को उर्मिला की जाँघों के बीच जोर से दबा देते और वैसे ही दबाव बनाये रखते. तब उनका लंड उर्मिला की बूर में पूरा जड़ तक घुस जाता. बूर के फैले हुए ओंठों पर रमेश की गोटियाँ दब कर चिपक जाती और बूर से सफ़ेद चिपचिपा पानी झाग के साथ बहने लगता. कुछ क्षण रमेश वैसे ही अपने लंड को दबाये रखते और फिर कमर उठा के एक जोर की ठाप बूर पर मार देते.

ऐसी घमासान चुदाई देखना तो दूर, पायल ने कभी किसी से सुनी भी नहीं थी. आज उसके अपने पापा घर की बहु को पटक-पटक कर बुरी तरह से उसकी चुदाई कर रहे थे. उसकी अपनी भाभी ससुर का लंड बूर में ठूँसवा के मजे ले रही थी. अपने ही परिवार में लंड और बूर का ये संगम देख कर पायल से अब रहा नहीं जा रहा था. वो धीरे से खड़ी होती है और बाबूजी के सामने जा कर अपने दोनों पैरो को उर्मिला के सर के दोनों तरफ रख कर खड़ी हो जाती है. बाबूजी नज़रे आगे करते है तो सामने पायल के जांघो के बीच उसकी बालोवाली बूर पानी छोड़ते हुए दिखाई देती है. रमेश नज़रे उठा कर पायल को देखते है तो वो अपने ओठों को काटते हुए खड़ी है. बाबूजी पायल को देखते हुए एक बार अपनी जीभ निकाल कर हवा में घुमा देते है तो पायल झट से अपने घुटनों को मोडे पीछे की तरफ झुक जाती है और दोनों हाथों को उर्मिला के सर के इर्द-गिर्द रख कर बाबूजी के सामने अपनी टाँगे खोल देती है. बाबूजी भी बिना कोई समय गवाएँ अपनी मोटी जीभ पायल की बूर में ठूँस देते है. रमेश जब अपनी जीभ पायल की बूर में गोल-गोल गुमाने शुरू करते है तो पायल आँखे बंद किये अपनी कमर को धीरे-धीरे ऊपर निचे करने लगती है.

उर्मिला भी बाबूजी का लंड अपनी बूर में पेलवाते हुए हुए पायल को देखती है तो धीरे से एक ऊँगली में थूक लगा कर उसकी चूतड़ों के बीच घुसा देती है जो पायल के छेद में हलकी सी घुस जाती है. पायल के मुहँ से , "उई माँ भाभी...!!", निकल जाता है. आगे रमेश उसकी बूर में जीभ ठूँस रहे है और निचे से भाभी चुतड के छेद में ऊँगली. इस नए अनुभव से पायल के तन बदन में आग लग जाती है.

पायल : उई माँ....सीईई....!!

उर्मिला : क्या हुआ पायल रानी? शादी हो कर ससुराल जाएगी तो वहां भी ऐसे ही 'डबल ड्यूटी' करनी पड़ेगी....

रमेश : ये क्या कह रही हो उर्मिला? मेरी प्यारी बिटिया ससुराल में 'डबल ड्यूटी' करेगी? तुमने मेरी पायल को ऐसी-वैसी समझ रखा है? ये तो ससुराल में 'चौकड़ी ड्यूटी' करेगी, 'चौकड़ी'...!!

और रमेश अपनी जीभ पायल की बूर में जोर से घुमा देते है. उर्मिला और पापा की बात से पायल पूरे जोश में आ जाती है. अपनी कमर को धीरे-धीरे गोल गोल घुमाते हुए पायल कहती है..

पायल : हाँ पापा...!! मैं 'चौकड़ी ड्यूटी' करुँगी ससुराल में.....आह्ह्ह...!!

उर्मिला : कैसे करेगी मेरी बन्नो 'चौकड़ी ड्यूटी' जरा वो भी तो बता...

पायल : (मस्ती में) एक आगे, एक पीछे...आह...!! और दो मेरे मुहँ पर...आह्ह्ह्हह्ह....!!

अपनी बेटी के मुहँ से ऐसी बात सुन कर रमेश को जोश आ जाता है. वो एक बार अच्छे से पायल की बूर को चाट लेते है फिर उर्मिला को उठ कर उनसे चिपक जाने का इशारा करते है. पायल भी वो इशारा समझ जाती है और एक तरफ खड़ी हो जाती है. उर्मिला अपने दोनों पैरों से बाबूजी की कमर को कास लेती है और अपनी दोनों बाहें उनके गले में डाल देती है. रमेश वैसे ही उर्मिला को जकड़े हुए बिस्तर पर खड़े हो जाते है. रमेश का लंड अब भी उर्मिला की बूर में धंसा हुआ है और उर्मिला उनसे लिपटी हुई है. अपने कमर को हिलाते हुए रमेश उर्मिला को गोद में उठाये उसकी की बूर की चुदाई करते हुए पास की खिड़की तक जाते है. खुली हुई खिड़की से बाहार देखते हुए रमेश कहते है.

रमेश : बहु...जरा बाहर देखो तो...कोई हट्टा-कट्ठा मर्द दिख रहा है?

उर्मिला बाबूजी का इशारा समझ जाती है. वो सर घुमा के खिड़की से बाहर देखने लगती है. सड़क के उस पार उसे ३-४ हट्टे-कट्ठे मर्द दिखाई देते है जो एक छोटी सी दूकान पर चाय की चुस्की ले रहे है. उर्मिला एक बार अच्छे से उन मर्दों को देखती है फिर सर बाबूजी की तरफ घुमा के अपने ओंठ काट लेती है. बाबूजी उर्मिला का इशारा समझ जाते है. अपने लंड को जोर के झटके से उर्मिला की बूर में ठेलते हुए बाबूजी कहते है.

रमेश : आह्ह्ह...!! तो मेरी बहु को ३-४ मोटे लंड चाहिए वो भी एक साथ...बहुत गरम है मेरी बहुरानी...

रमेश उर्मिला को वैसे ही गोद में उठाये कमरे में चलते हुए चोदने लगते है. उर्मिला भी अपनी टाँगे बाबूजी की कमर में लपेटे हुए और बाहों को उनके गले में डाले लंड पर उच्छल रही है. पायल ये नज़ारा आँखे फाड़-फाड़ के देख रही है. भाभी की वो 'डबल ड्यूटी', पापा की वो 'चौकड़ी ड्यूटी' और '३-४' मर्दों से चुदवाने वाली बात ने पायल की बूर में आग लगा थी. जिस लड़की ने अब तक एक भी लंड नहीं लिया था वो ३-४ लंड के सपने देखने लगी थी. अपने सपनो की दुनिया में खोई पायल की नज़र जैसे ही खिड़की पर जाती है, सामने एक गाड़ी आती हुई दिखाई देती है. उस गाड़ी को पहचानते ही वो चिल्ला उठती है...

पायल : पापा...!! भाभी...!! मम्मी और सोनू आ गए...!!

रमेश और उर्मिला दोनों ही पायल की बात सुन कर उच्छल जाते है. रमेश झट से उर्मिला को बिस्तर पर पटक देते है और उर्मिला अपनी टाँगे खोल देती है. रमेश उसकी बूर में लंड ठूँस कर उसकी जम कर चुदाई करने लगते है. एक मिनट से भी कम समय में ५०-६० धाके मारने के बाद रमेश अपनी कमर कस कर उर्मिला की जन्घो के बीच दबा देते है. उनके लंड से गाड़ा सफ़ेद पानी किसी बाढ़ की तरह उर्मिला की बच्चेदानी में बहने लगता है. अपनी टाँगे बाबूजी की कमर पर कसे हुए उर्मिला दोनों हाथों से बाबूजी की गांड को दबा देती है. लंड की एक-एक बूँद उर्मिला की बूर की गहराई में गिरने लगती है. अपना पूरा लंड उर्मिला की बूर में खाली कर रमेश झट से उठते है और कुरता पहनने लगते है. उर्मिला और पायल झट से अपनी-अपनी छोटी सी नाईटी हाथ में लिए जल्दी-जल्दी कमरे से बाहर जाने लगती है.

धोती पहनते हुए रमेश पायल की हिलती हुई चुतड को पीछे से देखते है. बेटी का नंगा बदन, हाथ में छोटी सी नाईटी और वो हिलती हुई चुतड देख कर रमेश मन में सोचते है, "हाय पायल...!! एक दिन तेरी भी ऐसी ही चुदाई करूँगा. एक दिन तू मेरे मोटे लंड पर 'पापा...पापा' कहती हुई उच्छालेगी".

तभी रमेश को घर का गेट खुलने की आवाज़ आती है और वो धीरे-धीरे बाहर की जाने लगते है.

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Reply
02-12-2022, 01:19 PM,
#37
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
अपडेट २३:

"अरे भाई जल्दी करो...जा कर फिर लौटना भी है" - हाथों में ५ किलो मोतीचूर के लड्डू की टोकरी लिए रमेश ने आवाज़ दी. शाम के ६ बज रहे थे और रमेश उर्मिला और पायल का दरवाज़े पर इंतज़ार कर रहा था. उमा और सोनू दिन में मंदिर गए थे पर लड्डू ना चढ़ा पाए थे. हलवाई की बीवी को आज बच्चा हुआ था और उसे जल्दबाजी में अस्पताल जाना पड़ा. उमा और सोनू मंदिर से लौटते हुए लड्डू घर ले कर आ गए थे. मंदिर में चढ़ावा चढ़ाना जरुरी था इसलिए ये तय किया गया की शाम में रमेश के साथ उर्मिला और पायल मंदिर में जा कर लड्डू का चढ़ावा चढ़ा देंगे.

उमा सोफे पर बैठी थी और सामने सोनू भी सोफे पर लेटे हुए अपने फ़ोन में लगा हुआ था. उर्मिला और पायल तैयार हो कर वहां आते है. उर्मिला ने नीले रंग की एक बहुत ही सुन्दर साड़ी पहन रखी है और वो बहुत ही खूबसूरत लग रही है. गोर बदन पर नीला रंग उभर के दिख रहा है. पायल ने लाल रंग की एक छोटे बाहं की टॉप और निचे काले रंग की घुटनों तक लम्बी स्कर्ट पहन रखी है. खुले हुए काले और लंबे बाल उसके गोरे और सुन्दर चेहरे पर चार चाँद लगा रहे थे. दोनों को देखते ही उमा कहती है.

उमा : बाबूजी कब से तुम दोनों की राह देख रहे हैं बेटा. चलो जल्दी करो. और हाँ..!! संभाल के जाना. बहु...दोनों का ख्याल रखना बेटी...

उर्मिला : जी मम्मी जी...

उमा : और जी आप....!! गाड़ी जरा देख कर चलाइएगा. शनिवार को काफी भीड़ होती है मंदिर वाले रास्ते में.

रमेश : हाँ बाबा ठीक है, समझ गया. और तुम दोनों फिर खड़ी हो गई? चलो भाई, बैठो गाड़ी में...

पायल झट से सामने वाली सीट पर बैठ जाती है. रमेश पीछे वाली सीट पर टोकरी रख देते है और टोकरी के साथ उर्मिला भी पीछे बैठ जाती है. रमेश अपनी सीट पर बैठ कर गाड़ी शुरू करते है और गाड़ी धीरे-धीरे गेट से बाहर जाने लगती है. गाड़ी जब पक्की सड़क पर जाते ही दायें लेती है, उमा भी गेट बंद कर घर में आ जाती है. सोफे पर पेट के बल लेटे सोनू के सर पर हाथ फेरते हुए उमा कहती है.

उमा : अच्छा लल्ला. मैं अब नहाने जा रही हूँ. तुझे चाय बिस्कुट खाना हो तो रसोई से ले लेना.

सोनू : हाँ मम्मी...!

उमा अपने कमरे में जाती है और साड़ी उतार के ब्लाउज और पेटीकोट में, कंधे पर टॉवेल लिए बाहर आती है. सोफे पर लेटा सोनू , अपने फ़ोन पर गेम खेलते हुए नज़रे उठाकर उमा को देखता है. ४८ साल की होने पर भी उमा के बदन में कसावट थी. उसकी चूचियां भले ही थोड़ी लटकी हुई थी लेकिन गोल और सक्त थी. पेट हल्का सा बाहर निकला हुआ और चुतड फैली हुई. उमा झुक कर सामने रखी बाल्टी उठाने लगती है. पीछे सोफे पर लेटे हुए सोनू उमा की चूतड़ों को घुर रहा है. उमा की बड़ी-बड़ी चूतड़ों के बीच पेटीकोट सिमट कर घुस गयी है जिससे चूतड़ों का आकर खुल के दिख रहा है. सोनू उन चूतड़ों के बीच की फाक में घुसी हुए पेटीकोट को बड़े गौर से देख रहा है. पेटीकोट कितनी अन्दर घुसी है ये देख कर सोनू उमा की चूतड़ों के बीच की गहराई नाप रहा था. गहराई को समझते ही सोनू अपनी कमर को निचे करते हुए लंड को शॉर्ट्स के अन्दर से ही सोफे पर दबा देता है. उमा बाल्टी उठा कर बाथरूम की ओर जाने लगती है. चलते वक़्त उमा की थिरकती हुई बड़ी-बड़ी चूतड़ों को देखते हुए सोनू लंड को सोफे पर दबा रहा है. उमा की चुतड जब बाएं को होती तो सोनू अपना लंड सोफे पर जोर से दबा देता, जब दायें होती तो कमर पटक कर लंड की ठाप सोफे पर मार देता. उमा बाथरूम में घुस जाती है और दरवाज़ा बंद कर लेती है. कुछ देर सोनू वैसे ही सोफे पर लेटे हुए बाथरूम के दरवाज़े को देखता रहता है. जैसे ही उसे बाथरूम से बाल्टी में पानी गिरने की आवाज़ आती है, वो झट से सोफे से कूद जाता है और धीमे क़दमों से बाथरूम के दरवाज़े के पास पहुँच जाता है. झुक कर वो दरवाज़े पर अपनी आँख लगता है.

ये खेल सोनू के लिए नया नहीं था. ये खेल वो काफी समय से खेलता आ रहा था. हालाँकि बाथरूम के दरवाज़े पर छेद उसे अपनी दीदी पायल को दखने के लिए बनाया था लेकिन कभी देख नहीं पाया. पायल के मामले में उसकी किस्मत फूटी थी. जब भी पायल नहाने जाती, घर में कोई ना कोई होता था और डर के मारे सोनू दरवाज़े के पास तक जाने की हिम्मत नहीं जूटा पाता था. एक दिन उमा नहाने गई और घर में किसी को ना पाकर सोनू ने जब उस छेद से अन्दर झाँका, तो अन्दर का नज़ारा देख सोनू के लंड ने दरवाज़े को सफ़ेद रंग से भिगो दिया था. उमा को उस छेद से देख कर सोनू का लंड बाथरूम के दरवाज़े के साथ न जाने कितनी बार होली खेल चूका था. और आज फिर एक बार सोनू का लंड दरवाज़े के साथ होली खेलने के लिए तैयार था.

झुक कर सोनू उस छेद से अन्दर देखता है तो उमा ब्लाउज उतार चुकी थी. अपने दोनों हाथो को पीछे कर वो जैसे ही ब्रा के हुक खोलती है, दोनों बड़ी-बड़ी चूचियां उच्चल के बाहर आती है और झूलने लगती है. उमा के दोनों उठे हुए निप्प्लेस को देख कर सोनू अपनी जीभ बाहर निकाल के घुमाने लगता है जैसे उमा के निप्प्लेस पर घुमा रहा हो. उमा अपने ब्लाउज और ब्रा को निचे डाल देती है तो सोनू भी इत्मीनान से खड़ा होता है और अपना शॉर्ट्स निकाल के पास रखी कुर्सी पर डाल देता है. अपने लंड को हाथ में पकडे सोनू अराम से टाँगे खोले निचे बैठ जाता है और फिर से होल से अन्दर देखने लगता है. उमा की पीठ सोनू की तरफ है और वो अपने पेटीकोट का नाडा खोल रही है. नाडा खुलते ही पेटीकोट उमा की कमर से फिसलते हुए निचे गिर जाती है. अपने पैरों को ज़मीन पर पड़े पेटीकोट से निकाल कर उमा जैसे ही पेटीकोट उठाने झुकती है, सोनू की आखों के सामने उमा की नंगी चुतड और निचे बालो से भरी उसकी बूर आ जाती है. अपनी नज़रे चुतड और बालोवाली बुर पर गड़ाए सोनू लंड को पकडे हुए कमर को २ बार झटके देता है. निचे गिरी ब्लाउज, ब्रा और पेटीकोट पर उमा मग से पानी डालती है और पास के रैक से साबुन उठाने लगती है. साबुन उमा के हाथ से फिसल कर निचे रखे प्लास्टिक के छोटे से ड्रम के निचे घुस जाता है. उमा धीरे से निचे बैठती है और घोड़ी बन के ड्रम के निचे हाथ डाले साबुन खोजने लगती है. पीछे बैठा सोनू उमा की खुली हुई चूतड़ों का मजा ले रहा है. उमा की खुली हुई चूतड़ों के बीच बड़ी सी गुदा (गांड का छेद) और उसके आसपास की काली चमड़ी रमेश द्वारा कई सालों तक की गई दुर्गति की कहानी बता रहे थे. साबुन हाथ लगते ही उमा पास पड़े लकड़ी के छोटे से स्टूल को बीच में रख देती है और दरवाज़े की तरफ मुहँ कर के उस पर बैठ जाती है. स्टूल पर बैठते ही उमा अपनी टाँगे खोले कपड़ों पर साबुन रगड़ने लगती है. ऊपर उमा की बड़ी बड़ी चूचियां हिल रही है और निचे उसकी बालोवाली बूर अपने ओठों को खोले सोनू को पूरा नज़ारा दिखा रहीं है. उमा के बूर के ओंठ पूरे फैले हुए है और चमड़ी काली पड़ चुकी है. रमेश के मोटे लंड ने न जाने कितनी ही बार उमा की बूर की दुर्गति की होगी इस बात का अंदाज़ा उसकी बूर देख कर ही पता चल रहा था.

अपनी मम्मी की फैली हुई बूर देख कर सोनू जीभ निकाल कर घुमाने लगता है. फिर अपने दोनों हाथों को एक साथ मिला कर वो उँगलियों से गोल आकर बनता है और मम्मी की बूर को देखते हुए अपना लंड उसमे घुसा देता है. अन्दर कपडे धोते हुए उमा की बूर कमर के साथ हिल रही है और बाहर सोनू का लंड दोनों हाथों की उँगलियों से बने छल्लों के बीच अन्दर-बाहर हो रहा है. बीच-बीच में सोनू उमा की बूर को घूरते हुए अपनी कमर पूरी आगे कर देता जिस से उसका लंड उँगलियों के छल्लों से होता हुआ दूसरी तरफ निकल जाता और लंड का टोपा खुल के बाहर आ जाता. लंड के टोपे से २-३ बूँद टपका के सोनू फिर से अपनी कमर हिलाते हुए उँगलियों के छल्लों में लंड को अन्दर-बाहर करने लगता. अपनी मम्मी के नंगे बदन के हर एक अंग को घूरते हुए सोनू कभी जीभ निकाल के घुमा देता तो कभी कमर हिला कर लंड को झटका दे देता. २०-३० झटके लगाते ही सोनू का बदन अकड़ जाता है और अपने लंड को पकडे वो दरवाज़े पर सफ़ेद गाढ़े पानी की पिचकारियाँ छोड़ने लगता है. अपने लंड का सारा पानी दरवाज़े पर फेंक कर सोनू धीरे से खड़ा होता है और अपना शॉर्ट्स पहन कर चुप-चाप अपने कमरे में चला जाता है.

इधर सोनू ने उमा के नंगे बदन को देखते हुए अपने लंड की शांति कर ली थी और उधर रमेश, उर्मिला और पायल गाड़ी में बैठे शहर से बाहर निकल चुके थे. पायल, जो रमेश के साथ वाली सीट पर बैठी थी न जाने क्या सोच कर बार बार मुस्कुरा रही थी. पीछे बैठी उर्मिला बड़ी देर से पायल को गौर से देख रही थी. गाड़ी शहर से बाहर निकल चुकी थी और सड़क पर भीड़ भी काफी कम हो गई थी. उर्मिला मौका देख कर पायल के कंधे पर एक चपत लगते हुए कहती है.

उर्मिला : ये क्या बात हुई पायल? दिन में तो टाँगे खोल कर बाबूजी से अपनी बूर चुसवा रही थी और अब अपनी जांघ पर जांघ चढ़ाये बैठी है.

रमेश : हाँ पायल...!! अपने पापा के सामने कोई ऐसे बैठता है क्या? अराम से बैठो...

पायल उर्मिला और रमेश की बात सुन कर मुस्कुराते हुए अपनी स्कर्ट को घुटनों पर से उठा कर कमर के ऊपर कर लेती है और टाँगे सीट पर रख कर खोल देती है. बूर पर कसी हुई गुलाबी पैन्टी दिखने लगती है. रमेश बूर पर कसी गुलाबी पैन्टी को घुर कर देखते है फिर धीरे से हाथ बढ़ा कर पैन्टी को एक तरफ कर देते है. पैन्टी के एक तरफ होते ही पायल की बालोवाली बूर खुल के दिखने लगती है. बूर के ओंठ आपस में चिपके हुए है. रमेश एक बार सामने सड़क को देखते है और फिर पायल की बूर को देखते हुए अपनी मोटी जीभ निकाल कर निचे से ऊपर हवा में घुमा देते है. उर्मिला पायल की चुतड पर चुंटी काट कर आँखों से पैन्टी को उतार देने का इशारा करती है तो पायल धीरे-धीरे अपनी पैन्टी को टांगो से खीच कर निकाल देती है. पैन्टी के निकलते ही पायल फिर से अपनी टाँगे सीट पर रख कर खोल देती है तो उसकी बूर पूरी फ़ैल जाती है. बूर के ओंठ खुल जाते है और बाबूजी के सामने पायल की बूर का लाल छेद दिखने लगता है. रमेश अपना हाथ बढ़ा के दो उँगलियों से बूर के ओंठों को फैला देते है और अन्दर के लाल छेद को गौर से देखने लगते है. अपनी बेटी की बूर का अच्छे से निरक्षण करते हुए रमेश अंगूठे से बूर के दाने को धीरे से रगड़ देते है तो पायल की बूर काँप जाती है. रमेश बूर से हाथ हटा कर अंगूठे को मुहँ में दाल कर चूस लेते है. पायल की बूर का स्वाद लेते ही रमेश का लंड धोती में खड़ा हो जाता है. उर्मिला जब ये देखती है तो वो कहती है.

उर्मिला : देख पायल...!! गाड़ी का गियर तो बाबूजी बदल रहे है. पर बाबूजी के धोती में जो गियर है वो कौन बदलेगा?

उर्मिला की बात सुन कर पायल मुस्कुराते हुए धीरे से अपनी सीट से उतर कर निचे बैठ जाती है और किसी शेरनी की तरह चलती हुई रमेश की जांघो के पास पहुँच जाती है. धोती को हटाकर पायल रमेश के मोटे लंड को बाहर निकाल लेती है. एक हाथ से लंड की चमड़ी को खींच कर निचे करती है और गौर से मोटे टोपे को देखने लगती है. कुछ क्षण वैसे ही टोपे को देखने के बाद पायल अपना सर लंड पर झुका देती है और टोपे को मुहँ में भर लेती है. पायल की इस हरकत से रमेश किसी तरह अपने आप को संभालता है और गाड़ी की स्टीयरिंग को पकडे सही दिशा देता है. पायल अपना सर निचे कर लंड के टोपे को निगलने लगती है. अपने ओठों को खोलते और सर को लंड पर दबाते हुए पायल आधा लंड मुहँ में भर लेती है. धीरे-धीरे लंड को चूसते हुए वो ऊपर जाने लगती है. लंड के मुहँ से निकलते ही पायल अपनी जीभ से २-३ बार टोपे को चाट लेती है और फिर से लंड पर ओठों को फैलाए अन्दर भरने लगती है. रमेश भी पूरी मस्ती में अपना एक हाथ पायल की गोरी-गोरी चूतड़ों पर ले जाता है और घुमाने लगता है. बारी-बारी वो पायल की दोनों चूतड़ों को अपने पंजों में भर कर दबोच लेता है. अपने हाथों को पायल की नंगी चूतड़ों पर घुमाते हुए रमेश एक चपत चुतड पर जड़ देता है, "चट्ट". फिर हाथ घुमाते हुए दुसरे चुतड पर चपत जड़ देता है, "चट्ट". पापा के हाथो से अपनी चूतड़ों पर चपत खा कर पायल और भी ज्यादा मस्ती में आ जाती है. वो रमेश के लंड को और ज्यादा जोश में चूसने लगती है. अब रमेश पायल की चूतड़ों के बीच अपना हाथ फेरने लगता है. पायल की गांड के छेद पर हाथ जाते ही रमेश अपनी एक ऊँगली उस पर रगड़ने लगते है. रमेश की ऊँगली जब भी पायल की गांड के छेद पर रगड़ खा जाती, उसकी चुतड उच्छल सी जाती. ऊँगली रगडते हुए रमेश बीच-बीच में उसे छेद में घुसाने की कोशिश करता. ऊँगली के ऊपर का हिस्सा थोडा अन्दर जाता और रुक जाता तो रमेश उसे बाहर निकाल कर फिर से छेद पर रगड़ने लगता. कुछ देर ऐसे ही पायल की गांड के छेद पर रगड़ने के बाद रमेश ऊँगली अपने नाक के पास लाता है और सांस अन्दर खीचता हुआ सूंघ लेता है. ऊँगली से आती पायल की गांड की वो खुशबू रमेश को मदहोश कर देती है. रमेश अपनी कमर उठा कर पायल के मुहँ में लंड का एक झटका देता है. ये रमेश का अपना तरीका था पायल को बतलाने का की उसकी गांड के महक कितनी लाजवाब है. तभी रमेश को सड़क पर भीड़ बढती हुई दिखाई देती है. वो सामने देखता है तो कुछ दूर पर मंदिर दिखाई देता है. पायल के सर पर हाथ फेरते हुए रमेश उसे अपनी सीट पर बैठने का इशारा करता है. पायल सर उठा के देखती है तो समझ जाती है. अपनी सीट पर बैठ कर पायल पैन्टी पहन लेती है. कुछ क्षण की ख़ामोशी के बाद रमेश, उर्मिला और पायल एक दुसरे को देखते है और जोरो से हँस देते है.

गाड़ी में हंसी की फुहार सी छुट पड़ती है और तीनो सामने अपनी मंजिल की ओर देखते हुए आगे बढ़ने लगते है.

उधर सोनू अपने बिस्तर पर लेटा अराम कर रहा है. कुछ देर पहले ही वो अपनी मम्मी को नंगा देख कर लंड हल्का कर आया था. बदन की थकावट को दूर करने के लिए वो बिस्तर पर चारों खाने चीत हो कर पड़ा था. एक झपकी लेने के लये जैसे ही वो आँखे बंद करता है, उसे मम्मी की चीख सुनाई देती है.

उमा : हाय राम...!! मर गई रे.....!!!

सोनू झट से बिस्तर से कूदता है और दौड़ता हुआ ड्राइंग रूम में जाता है. सामने बाथरूम के दरवाज़े पर उमा दोनों टाँगे उठाये ज़मीन पर पड़ी है. उसका पेटीकोट जाँघों तक उठा हुआ है और टांगो के बीच उसकी बालोवाली बूर की झलक साफ़ दिख रही है. अपनी माँ की बूर की झलक पाते ही सोनू का लंड फिर से हरकत में आने लगता है. सोनू आँखे फाड़े हुए उमा की टांगो के बीच देखे जा रहा था.

उमा : अरे लल्ला...!! कहाँ ध्यान है रे तेरा? अब मुझे उठाएगा भी की नहीं?

उमा की बात सुन कर सोनू होश में आता है. झट से उमा के पास पहुँच कर वो एक हाथ से कंधे पर सहारा देता है और दूसरा हाथ उमा की बगल में डाले उठाने लगता है.

सोनू : पर मम्मी आप गिरी कैसे?

उमा : पता नहीं किसने दरवाज़े पर पानी गिरा दिया था. मैं जसी ही बाहर निकली, पैर फिसल गया.

सोनू सर घुमा कर दरवाज़े के निचे देखता है कुछ सफ़ेद-सफ़ेद सा दिखाई पड़ता है. उसे समझने में देर नहीं लगती की ये उसके ही लंड के पानी की करामात है. वो झेंप जाता है और उमा को सहारा देते हुए उसके कमरे की और ले जाने लगता है.

सोनू : जयादा चोट तो नहीं लगी मम्मी?

उमा : नहीं रे...!! ज्यादा चोट नहीं लगी...बस कमर में हल्का सा दर्द हो रहा है.

सोनू उमा को कमरे में ले जाता है और बिस्तर पर लेटा देता है. उमा बिस्तर पर लेट जाती है. उसके भीगे ब्लाउज में बड़े-बड़े भारी दूध उठ के दिखने लगते है. सोनू वैसे ही खड़े उमा के दूधों को देखने लगता है. उसके शॉर्ट्स में फिर से हलचल होने लगती है. अपने विचारों में सोनू उमा के बड़े-बड़े दूधों को दोनों हाथों से पकडे दबा रहा था की अचानक उसके कानो में उमा की आवाज़ आती है.

उमा : हाय राम...!! उफ़...!!

सोनू होश में आ कर उमा को देखता है तो वो एक तरफ पलते हुए अपनी कमर को हाथ से दबा रही है. सोनू की नज़र उमा की चूतड़ों से चिपकी पेटीकोट पर जाती है तो उसकी हवा खराब हो जाती है. पीछे पेटीकोट पर सोने के लंड का चिप-चिपा पानी लगा हुआ था. सोनू के लंड के पानी से फिसल कर उमा उस पर ही गिर पड़ी थी. सोनू को डर था की कहीं उमा ने थोडा सा भी हाथ पीछे किया तो उसके हाथ में वो चिप-चिपा पानी लग जायेगा और जब वो देखेगी तो समझ जाएगी की ये सब क्या माज़रा है. सोनू झट से उमा का हाथ पकड़ लेता है.

सोनू : रुक जाओ मम्मी....!!!!!!

उमा : (आश्चर्य हो कर) क्या हुआ लल्ला? ऐसे क्यूँ बोल रहा है?

सोनू : (हडबडाता हुआ) वो...वो...मम्मी...वो..आप क्यूँ तकलीफ करती है? मैं आपकी कमर दबा देता हूँ...

सोनू की इस बात पर उमा बहुत खुश होती है. सोनू का हाथ पकडे हुए वो कहती है.

उमा : अरे मेरा लल्ला...!! इतना बड़ा हो गया है की अब अपनी मम्मी की सेवा करेगा? आजा...दबा दे मेरी कमर...

सोनू उमा के पास जाता है और उसकी कमर पर हाथ रखने लगता है. तभी उमा बोल पड़ती है.

उमा : खड़े-खड़े दबाएगा क्या? बिस्तर पर आजा और मेरे पीछे अराम से बैठ कर दबा.

सोनू बिस्तर पर चढ़ जाता है और उमा की चुतड के ठीक पीछे बैठ जाता है. अपने दोनों हाथों को वो उमा की कमर पर रख देता है. सोनू जैसे ही कमर दबाना शुरू करता है उसे पटल चलता है की उमा की कमर कितनी भरी हुई है. भरी हुई कमर को वो धीरे-धीरे दबा रहा है और दबाते हुए सोनू हलके से उमा की करा को पंजों में दबोच सा लेता. सोनू के इस तरह से कमर दबाने पर उमा को बड़ी रहात मिल रही है. कमरे में हलकी-हलकी हवा चल रही है और उमा के कपडे थोड़े भीगे भी है. सारे बदन में ठंडक का अहसास होते ही उमा की आँखे बंद हो जाती है और नींद हावी होने लगती है. सोनू मम्मी की कमर और चूतड़ों को घूरते हुए धीरे-धीरे नंगी कमर का मजा लेते हुए दबाये जा रहा था. कुछ देर दबाने के बाद वो उमा से पूछता है.

सोनू : अब कैसा लग रहा है मम्मी?

उमा के तरफ से कोई जवाब ना पाकर वो फिर से पूछता है.

सोनू : मम्मी....अब ठीक लगा रहा है तो मैं जाऊ अपने कमरे में?

उमा नींद के आगोश में जा चुकी थी. सोनू क्या अब तो उसे दुनिया की भी कोई खबर न थी. सोनू इस बार उमा की कमर को हिलाते हुए पूछता है.

सोनू : (कमर हिलाते हुए) मम्मी...!! मम्मी...!! सो गई क्या?

इस बार भी उमा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न पाकर सोनू थोडा आगे झुक कर उमा के चेहरे को देखता है. उमा की आँखे बंद है, धीरे-धीरे उसका उठा हुआ सीना ऊपर-निचे हो रहा है. सोनू को समझते देर नही लगती की उमा गहरी नींद में सो चुकी है. उमा के नींद में होने का फायेदा उठा कर सोनू अपनी माँ के बदन को बड़े गौर से देखता है. अपनी माँ के बदन को इस तरह से अपने इतने करीब देख कर सोनू का लंड फिर से शॉर्ट्स में खड़ा हो जाता है. अपने लंड को धीरे से शॉर्ट्स से बाहर निकाल कर वो ४-५ बार धीरे से हिला देता है फिर दोनों हाथों को उमा की कमर पर रख कर धीरे-धीरे दबाने लगता है. कमर दबाते हुए उसके हाथ धीरे-धीरे उमा की पेटीकोट की तरफ बढ़ने लगते है. पेटीकोट कमर पर ढीली बंधी हुई है. उमा के गिरने से पेटीकोट का नाडा पहले ही ढीला हो चूका था और उमा के बिस्तर पर इधर-उधर घुमने से पेटीकोट और भी ढीली हो गई थी. सोनू अपने एक हाथ को धीरे से उमा की कमर पर चिपके पेटीकोट के अन्दर घुसाने लगता है. सोनू का दूसरा हाथ अब भी उमा की कमर को धीरे-धीरे दबा रहा था. पेटीकोट के अन्दर हाथ डाल कर सोनू बड़ी ही सावधानी के साथ अपने हाथ को धीरे-धीरे उमा के पेट के निचले हिस्से पर ले जाने लगता है. फिर वो अपने हाथ को नाभि के सीध में, उमा की जांघो के बीच बढ़ाने लगता है. हाथ के बस थोडा निचे जाते ही उमा का पेट एक हल्का सा झटका खाता है और फिर स्थीर हो जाता है. सोनू की तो मानो दिल की धड़कन ही रुक जाती है. कुछ क्षण वैसे ही रुके हुए सोनू उमा को देखता है तो वो अब भी गहरी नींद में सो रही है. फिर से हिम्मत जूता कर सोनू अपना हाथ और निचे ले जाता है. तभी उसके हाथ में कुछ बालों को छु जाते है. सोनू समझ जाता है की उसका हाथ अब मम्मी की बालोंवाली बूर तक पहुँच गया है. बालो पर से अपने हाथ को धीरे-धीरे निचे ले जाते हुए सोनू उमा की बूर तक पहुँच जाता है. अपनी एक ऊँगली जैसे ही वो बूर के खुले हुए ओंठों पर रखता है तो उमा फिर से चुहंक जाती है. सोनू की साँसे थम सी जाती है. धीरे से नींद में कसमसाते हुए अपने एक उठा के टांग मोड़ देती है तो पेटीकोट टांगो से फिसलते हुए उसकी कमर पर आ कर सिमट जाती है. उमा की टांगो के बीच से सोनू का हाथ दिखने लगता है. अब सोनू धीरे से अपना हाथ पेटीकोट के अन्दर से बाहर निकाल लेता है और फिर बैठे हुए ऊपर से हाथ ले जा कर उमा की बूर पर रख देता है. पहले से ही खुली हुई बूर में सोनू की ऊँगली बड़े अराम से फिसलने लगती है. बूर में ऊँगली डाले सोनू अपनी माँ का छेद ढूँढने लगता है. छेद के मिलते ही धीरे-धीरे अपनी ऊँगली अन्दर घुसाने लागता है. सोनू की ऊँगली उमा की बूर में धीरे-धीरे पूरी समां जाती है. सोनू अपनी ऊँगली को निकालता है और नाक के पास ले जा कर सूंघ लेता है. अपनी माँ की बूर की खुशबू पाते ही उसका लंड खड़ा हो कर हिचकोले खाने लगता है. सोनू अब अपने होश खो बैठा था. उसका जोश अपनी चरम सीमा पर पहुँच चूका था. अब उसे इस बात का भी डर नहीं था की अगर उमा की नींद खुल गई तो क्या होगा?.

सोनू धीरे से पीछे बिस्तर पर लेट जाता है और उमा की तरफ घूम जाता है. उसकी आँखों के सामने उमा की आधी नंगी पीठ है जो ब्लाउज से दिख रही है. अपना सर आगे बढ़ा कर सोनू उमा की नंगी पीठ की एक चुम्मी ले लेता है. फिर धीरे से अपने लंड को पेटीकोट के ऊपर से उमा की चूतड़ों के बीच रख कर दबा डेट है. उसका लंड पेटीकोट के साथ चूतड़ों के बीच घुस जाता है. लगभग आधा लंड घुसाने के बाद सोनू अपना लंड बाहर खींच लेता है. पेटीकोट उमा की चूतड़ों के बीच ही फासी रह जाती है. इस नज़रे को सोनू बड़े ही ध्यान से देखता है. सोनू चूतड़ों में फसी पेटीकोट को धीरे से निकाल देता है. फिर पेटीकोट को उमा की कमर तक ऊपर कर वो उसकी चूतड़ों को नंगा कर देता है. उमा की चूतड़ों के पट आपस में चिपके हुए है. बीच की दरार इतनी बड़ी है की उसमें सोनू जैसे ३-४ लंड अराम से समां जाएँ. अपने लंड को पटों के बीच रख कर सोनू हल्का सा दबाव लगता है. उसका लंड धीरे-धीरे उमा की चूतड़ों के बीच घुसता चला जाता है. एक जगह जा कर लंड थम सा जाता है. सोनू समझ जाता है की ये उसकी मम्मी के गांड का छेद है. सोनू के लंड का टोपा किसी कटोरे जैसे गड्ढे में जा फसा था. सोनू थोडा और जोर लगता है तो लंड का टोपा उस गड्ढे में पूरा घुस जाता है. उमा की कमर में एक हक्ली सी हरकत होती है और फिर वो शांत हो जाती है. सोनू अपने जोश में उस हारकर पर ध्यान तक नहीं देता है. थोडा और जोर लगाने पर सोनू का लंड उस गड्ढे में एक चौथाई घुस जाता है. एक बार सोनू का दिल करता है की झटका दे कर अपना पूरा लंड मम्मी की गांड के छेद में घुसा दे लेकिन उसे इस बात का डर भी है की मम्मी उठा ना जाए. वो अपने लंड को धीरे से बाहर निकालता है और धीरे से फिर अन्दर घुसा देता है. अपनी मम्मी की गांड में लंड जाता देख सोनू के बदन में गर्मी आ जाती है. अपनी कमर को धीरे-धीरे हिलाते हुए सोनू उमा की चूतड़ों के बीच लंड अन्दर-बाहर करने लगता है. हालांकि उसका लंड अब भी उमा की गांड में पूरी तरह से नहीं गया था लेकिन उमा की बड़ी और भारी चुतड उसके लंड को पूरा मजा दे रही थी.अपनी ही मस्ती में खोया हुआ सोनू मन में सोचता है, "हाय मम्मी...!! क्या चुतड है आपकी...!! अपनी गांड में पूरा ले लो ना मम्मी...!! एक बार अपनी बूर दे दो ना मम्मी..!!". अपनी ही सोची गई इस बेहद गन्दी बात पर सोनू का लंड झटके लेने लगता है. अपने लंड को झट से उमा की चूतड़ों के बीच से निकाल सोनू बिस्तर पर खड़ा हो जाता है. एक हाथ से लंड को हिलाते हुए दुसरे हाथ की हथेली की अंजुली बना कर वो लंड के टोपे के ठीक निचे कर देता है. कुछ ही क्षण में सोनू के लंड से सफ़ेद गाढ़े पानी की बौछार निकल कर निचे उसकी हाथों की अंजुली में गिरने लगती है. लंड को दबा दबा कर सोनू सारा पानी अंजुली में गिरा देता है. दुसरे हाथ की अंजुली पूरी तरह से सोनू के लंड के पानी से भर जाती है. कुछ क्षण सोनू वैसे ही खड़े अपनी सांसो पर काबू पाटा है और फिर धीरे से बिस्तर से निचे उतर कर बाथरूम की तरफ चल देता है.

बथ्र्रोम में अपने हाथों को साफ़ करते हुए अचानक सोनू के दिमाग में करंट सा लगता है. उसे याद आता है की मम्मी का पेटीकोट तो अब भी उसकी कमर के ऊपर ही है. अपने तेज़ी से धडकते दिल को लिए सोनू दौड़ता हुआ मम्मी के कमरे के दरवाज़े पर पहुँचता है. सामने उमा सो रही है और उसका पेटीकोट अब कमर के ऊपर नहीं बल्कि घुटनों के निचे था. सोनू वैसे ही खड़ा बात को समझने की कोशिश करता है. "ये पेटीकोट मैंने निचे किया था या मम्मी ने खुद कर लिया?". बात उसकी समझ में नहीं आ रही है. वो सोचते हुए घूमता है और धीरे-धीरे अपने कमरे की तरफ बढ़ने लगता है.

सोनू के जाते ही बिस्तर पर लेटी उमा करवट लेते हुए सीधी लेट जाती है. उसकी आँखे अब भी बंद है और चेहरे पर हलकी सी मुस्कान.

क्रमश:

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02-12-2022, 01:20 PM,
#38
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
अपडेट २३.५ :

शाम के ७:४५ बज रहे थे. मोतीचूर के लड्डू का चढ़ावा चढ़ा कर रमेश, उर्मिला और पायल मंदिर से निकल कर गाड़ी के पास जा रहे है.

रमेश : ७:४५ हो गए है बहु. घर पहुँचते-पहुँचते ९ तो हो ही जायेंगे.

उर्मिला : हाँ बाबूजी...अब तो रास्ते में ज्यादा भीड़ भी नहीं होगी. हो सकता है और भी जल्दी पहुँच जाये...

पायल : हाँ पापा...रास्ता खाली होगा तो आप गाड़ी तेज़ चलाइयेगा...

उर्मला : हाँ बाबूजी...! पायल रहेगी ना आगे वाली सीट पर आपका 'गियर' बदलने के लिए...

उर्मिला की बात सुनकर पायल शर्मा जाती है, रमेश और उर्मिला जोर-जोर से हँसने लगते है. तीनो गाड़ी के पास पहुँचते है तभी कुछ देख कर रमेश का दिमाग घूम जाता है.

रमेश : धत्त तेरी की..!! इसे भी अभी ही होना था...

पायल : क्या हुआ पापा?

रमेश : (गाड़ी के पहिये की तरफ इशारा करते हुए) ये देखो बेटी....गाड़ी का टायर पंक्चर हुआ पड़ा है.

उर्मिला : हे भगवान बाबूजी...!! अब क्या करें?

रमेश : गाड़ी में स्टेपनी भी नहीं है बहु. सोनू को कितनी बार कहा था की जब कभी भी गाड़ी निकाले पंक्चर वाले के यहाँ से स्टेपनी उठा लेना. गधा किसी की सुने तब तो...

पायल : पर पापा अब क्या करेंगे हम लोग?

रमेश : रुको बेटा...मैं देखता हूँ. शायद कोई पंक्चर वाला मिल जाए. तुम दोनों यहीं रुको, मैं अभी आता हूँ.

रमेश पंक्चर वाले को देखने निकल पड़ते है. गाड़ी के पास उर्मिला और पायल खड़े है. एक दुसरे का उतरा हुआ चेहरा देखते हुए दोनों उस पंक्चर हुए टायर को कोसने लगते है.

उर्मिला : इस मुए की भी हवा अभी ही निकालनी थी.

उर्मिला की इस बात पर पायल को हंसी आ जाती है. तभी एक मनचला घूमता हुआ वहां से गुजरता है. उर्मिला और पायल को अकेला देख कर वो धीरे-धीरे उनके करीब आता है. थोड़ी दूर पर खड़े हो कर वो दोनों की मदमस्त जवानी को ऊपर से निचे तक निहारने लगता है. उर्मिला जब उसे देखती है तो अपनी कोहिनी पायल के हाथ पर मारते हुए उस मनचले की तरफ इशारा करती है. उर्मिला के इशारे पर पायल सामने देखती है तो एक सावंला सा दुबला पतला आदमी, जिसकी उम्र २८-३० साल तक होगी, गले में रुमाल डाले और मुहँ में पतली सी लकड़ी फ़साये मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देख रहा है. पायल जैसे ही उस आदमी की तरफ देखती है वो झट से अपना हाथ छाती पर रख कर दिल थामने के अंदाज़ में राजेश खन्ना की स्टाइल में सर हिलाने लगता है. पायल उर्मिला की तरफ घुमती है और दोनों मुहँ पर हाथ रखे हँसने लगती है. वो आदमी दोनों के हँसने से प्रोत्साहीत हो जाता है और उनके पास आ कर खड़ा हो जाता है. पास खड़ी गाड़ी पर अराम से हाथ रख कर और एक पैर को मोड़े हुए इस बार वो देव आनंद की तरह मुहँ बनाते हुए कहता है.

छेदी : बन्दे को लोग प्यार से...छेदी कहते है...

पायल थोडा उर्मिला के पीछे खड़ी हो जाती है और उर्मिला उस आदमी को बड़ी-बड़ी आँखे और मुहँ बनाते हुए कहती है.

उर्मिला : छेदी ??. क्यूँ? तुम्हारी चड्डी में कुछ ज्यादा ही छेद है क्या?

उर्मिला की बात सुन कर पायल को जोरो की हंसी आ जाती है. वो उर्मिला के कंधे पर सर रख कर हँसने लगती है. पहली ही बार में अपनी बेज्ज़ती होता देख वो आदमी सकपका जाता है. फिर संभलते हुए कहता है.

छेदी : हमारी चड्डी में ज्यादा छेद नहीं है मैडम जी...लोग तो हमें छेदी इसलिए कहते है क्यूंकि हम छेद भरने में माहिर हैं...

उर्मिला : ओह...अच्छा-अच्छा...!! तो मिस्त्री हो...दीवारों के छेद भरते हो...

उर्मिला की इस बात पर पायल अपने आप को रोक ही नहीं पाती है और अपने पेट पर हाथ रख कर हँसने लगती है. अपनी दूसरी बेज्ज़ती पर वो आदमी थोडा सहम जाता है. फिर संभलकर जवाब देता है.

छेदी : हम दीवारों के नहीं मैडम जी...खुबसूरत बलाओं के छेद भरते है....

उर्मिला : ओह अच्छा..!! तो आप यहाँ हमारे छेद भरने के इरादे से आयें है...

छेदी : (उर्मिला को ऊपर से निचे देखता हुआ) अब आपने सही समझा मैडम जी...

उर्मिला : चलो अच्छा है, कोई तो मिला. मेरे पति तो कभी मेरे छेद की तरफ देखते भी नहीं है. अब आप आ गए हो तो लग रहा है की मेरे छेद की भराई हो ही जाएगी.

उर्मिला की बात सुन कर पायल बड़े ही हैरानी से उसे देखने लगती है. उसे समझ नहीं आ रहा है की उर्मिला करना क्या चाहती है. उर्मिला की बात सुन कर वो आदमी मुस्कुराते हुए अपने गले के रुमाल में गाँठ मारते हुए कहता है.

छेदी : (मुस्कुराते हुए) तो बताइए मैडम जी...कब भरा जाए आपका छेद...

उर्मिला : नेकी और पूछ-पूछ. अभी ही चलते है...लेकिन........

छेदी : (उत्सुकता से) लेकिन क्या मैडम जी ?

उर्मिला : मेरे पति अभी आते ही होंगे. थोडा इंतज़ार करना होगा...

छेदी : (थोडा सहमते हुए) आपके पति का इंतज़ार? वो क्या करेंगे? वो भी आपका छेद भरेंगे क्या?

उर्मिला : नहीं नहीं...वो तो मेरे छेद को देखेंगे तक नहीं. मेरा छेद तो आप ही भरोगे. वो तो बस आपका छेद भरेंगे...दरअसल उन्हें मर्दों के छेद जो पसंद है....

उर्मिला की बात सुन कर वो आदमी लड़खड़ा जाता है. पायल फिर से अपने मुहँ पर हाथ रख कर हँसने लगती है. अपने आप को सँभालते हुए वो आदमी फिर से सीधा खड़ा हो जाता है.

छेदी : ये...ये आप क्या कह रही है मैडम ?

उर्मिला : वही जो आपने सुना. बस ५ मिनट रुकिए, वो आते ही होंगे.

तभी उर्मिला की नज़र सामने से आते हुए एक हट्टे-कट्ठे आदमी पर पड़ती है. देखते ही पता चल रहा था को वो जरुर जीम जाता है. उसके साथ एक और हट्टा-कट्ठा आदमी है और उसका बदन भी किसी जीम में बना हुआ लग रहा है. उर्मिला झट से उन दोनों की तरफ इशारा करते हुए कहती है.

उर्मिला : वो देखिये...मेरे पति आ रहे है. साथ में उनका साथी भी है. चलिए इसी बहाने से दोनों को आज छेद मिल जायेगा भरने के लिए.

वो आदमी मुड़ के दोनों को देखता है तो उसकी हवा निकल जाती है. उर्मिला भी गरम लोहे पर हतौड़ा मारते हुए उन दो आदमियों की तरफ हाथ उठा के हिला देती है. उनमें से एक उर्मिला को हाथ हिलाता देख अपना हाथ भी दिखा देता है. छेदी जब ये देखता है तो उसे यकीन हो जाता है की ये औरत सही कह रही है. वो तेज़ क़दमों से उन दो आदमियों को देखता हुआ जाने लगता है. पीछे से उर्मिला आवाज़ देती है.

उर्मिला : अरे छेदी जी...कहाँ चल दिए....अब मेरे छेद का क्या होगा ?

छेदी : (लगभग भागते हुए) अरे भाड़ में जाए आपका छेद. यहाँ मेरे छेद की जान पर बन आई है और वहां आपको अपने छेद की पड़ी है.
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02-12-2022, 01:20 PM,
#39
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
छेदी वहां से भाग निकलता है. उसके जाते ही उर्मिला और पायल एक दुसरे का हाथ पकडे जोर-जोर से हंसने लगती है.

पायल : बहुत अच्छा मज़ा चखाया आपने उस आदमी को भाभी. बड़ा राजेश खन्ना बना फिर रहा था. अब देखो कैसे दुम दबा कर भाग रहा है.

उर्मिला : और नहीं तो क्या? ऐसे बहुत से मनचलों को मैं स्कूल के वक़्त से ही ठीक करती आ रही हूँ...

पायल : सच भाभी...आपका भी जवाब नहीं...

पायल और उर्मिला छेदी का मजाक उड़ाती हँसे जा रही थी की तभी एक आवाज़ ने उनका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया. "एक्सक्यूज़ मी...!!". दोनों उस आवाज़ की दिशा में देखते है तो सामने वही दो हट्टे-कट्ठे मर्द खड़े हैं जिन्हें अभी-अभी उर्मिला ने हाथ दिखाया था. उर्मिला और पायल बिना कुछ कहे दोनों के शरीर की बनावट देखने में मगन हो जाती है. बड़ी और चौड़ी बाहें, चौड़ा निकला हुआ फौलादी सीना, मजबूत कंधे. उर्मिला दोनों को ऊपर से निचे तक देखने लगती है. पायल दोनों के गठीले शरीर को देखते हुए धीरे से उर्मिला के पीछे चुप जाती है और अपने ओंठ काटते हुए दोनों के बदन को निहारने लगती है.

पहला आदमी : जी मैंने कहा एक्स्क्युस मी....

उस आदमी के दोबारा कहने पर उर्मिला होश में आती है फिर संभलते हुए जवाब देती है.

उर्मिला : अ..जी..जी बोलिए...

पहला आदमी : आपने अभी-अभी हमे हाथ दिखाया था. क्या आप हमे जानती है.

उर्मिला : नहीं नहीं. मांफ करियेगा. दरअसल मैंने तो किसी और को हाथ दिखाया था. आपको जरुर कोई ग़लतफ़हमी हो गई है.

दूसरा आदमी : हो सकता है. वैसे आप लोगों को किस प्रकार की कोई मदद चाहिए तो आप बता सकती है.

उर्मिला : जी ऐसी कोई बात नहीं है. धन्यवाद...!

दूसरा आदमी : चलिए ठीक है......

दोनों आदमी पायल और उर्मिला को एक बार अच्छे से ऊपर से निचे देखते है और फिर मुस्कुराते हुए जाने लगते है. उनके जाते ही पायल अपने हाथ से चेहरे पर हवा करती हुई उर्मिला के सामने आती है.

पायल : बापरे भाभी....!! कितने हट्टे-कट्ठे थे ये दोनों. लगता है खूब कसरत करते हैं दोनों.

उर्मिला : (मुस्कुराते हुए) अच्छा? बुला लूँ उन्हें कसरत करवाने? एक तेरे निचे कसरत करेगा और दूसरा तेरे ऊपर.

पायल : धत्त भाभी. आप कुछ भी बोल देते हो. अभी तक तो बाबूजी भी ठीक से कसरत नहीं कर पाए हैं और आप तो दो-दो लोगों की एक साथ कसरत करवाने की बात कर रहीं है.

उर्मिला : (प्यार से पायल का गाल सहलाते हुए) ओह हो..!! तो अगर बाबूजी ने कसरत कर ली तो मेरी ननद एक साथ दो मर्दों से कसरत करवा लेगी....हैं ना?

पायल : (शर्माते हुए नज़रें झुका कर) तब की तब देखेंगे....

तभी रमेश आते दिखाई देते है तो दोनों उन्हें देख कर खुश हो जाते है. रमेश के साथ एक और आदमी चला आ रहा था जो देखने में ही कोई टायर ठीक करने वाला लग रहा था. दोनों गाड़ी के पास आते है.

रमेश : लो भाई. ये है गाड़ी. जरा जल्दी से टायर ठीक कर दो. बहुत देर हो चुकी है. (फिर उर्मिला और पायल को देख कर) तुम दोनों को कोई परेशानी तो नहीं हुई ना?

उर्मिला : जी नहीं बाबूजी. हम दोनों तो बस बातें करते हुए वक़्त बिता रहे थे.

वो आदमी निचे बैठ कर टायर का निरक्षण करता है. कुछ देर निरक्षण करने के बाद वो खड़ा होता है और रमेश को एक बड़ी सी कील दिखाते हुए कहता है.

मेकानिक: बाउजी ... इसका ट्यूब तो गया. इस कील ने ट्यूब का काम तमाम कर दिया है. बदलनी पड़ेगी.

रमेश : अरे कोई बात नहीं भाई. बदलो दो. पर जो करना है जरा जल्दी करो.

मेकानिक : बाउजी जल्दी तो नहीं हो पायेगा. इसकी ट्यूब यहाँ मिलेगी नहीं. ४-५ किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा. मेरे पास तो साइकिल है. वक़्त लगेगा.

रमेश : (चिंतित होते हुए) कितना वक़्त?

मेकानिक : (सोचते हुए) उम्म... मान के चलिए कुल मिलकर १.३० से २ घंटे तो लग जायेंगे...

रमेश : अरे नहीं भाई...ऐसा मत बोलो...२ घंटे तो बहुत होते है. इतनी देर तो हम रुक नहीं पाएंगे. ८:१५ तो हो चुके, तुम कब टायर ठीक करोगे और कब हम घर पहुचेंगे....

मेकानिक : बाउजी इसके अलवा तो और कोई रास्ता नहीं है.

रमेश : कोई तो रास्ता होगा भाई. इतनी देर तो नहीं रुक पाएंगे.

मेकानिक : देखिये बाउजी ... आप भले लोग लग रहे है. और आपके साथ दो लेडीज़ भी है. अगर आपको इस गरीब पर विशवास है तो बस पकड़ के घर चले जाईये. ५००/- रुपये और अपना पता दे दीजिये. गाड़ी आज रात तक आपके घर पहुँच जाएगी.

रमेश उस आदमी की बात सुन कर कुछ सोचते है फिर पायल और उर्मिला की तरफ देखते है. उनके चेहरे पर भी परेशानी के भाव है. रमेश फिर उस आदमी से कहते है.

रमेश : भाई पर गाड़ी तो सही सलामत पहुँच जाएगी ना?

मेकानिक : आप उसकी चिंता मत करिए बाउजी. बस जो भी गाड़ी ले कर आये उसे २००/- रूपये दे देना वापस आने के लिए.

रमेश : ठीक है भाई. ये ही सही. और ये बस कहाँ से मिलेगी?

मेकानिक : वो सामने बाउजी...चाय की दूकान के दूसरी तरफ.

रमेश उस आदमी को अपना पता और ५००/- देते है. तीनो चलते हुए बस स्टॉप पर पहुँचते है. ८-९ लोग बस के इंतज़ार में खड़े है. रमेश भी पायल और उर्मिला के साथ एक कोने में खड़े हो जाते है और बस का इंतज़ार करने लगते है. कुछ ही देर में एक बस आती दिखाई पड़ती है तो रमेश, उर्मिला और पायल सड़क के किनार जा कर खड़े हो जाते है. बस आ कर रूकती है तो भीड़ के साथ तीनो धक्का-मुक्की करते हुए बस में घुस जाते है. बस के बीच वाले हिस्से में वो तीनो पहुँच जाते है. वहां सिर्फ एक सीट खाली है. उसके साथ वाली सीट पर एक औरत बैठी हुई है. रमेश झट से उस खाली सीट को घेर लेते है.

रमेश : आओ बहु...जल्दी से बैठ जाओ...

उर्मिला : नहीं बाबूजी...आप बैठ जाईये. आप तो इतना चले भी है और आपके घुटनों में भी दर्द रहता है.

पायल : हाँ पापा...आप बैठ जाईये. मैं और भाभी यहीं पर आपके पास ही खड़े हो जाते है.

पायल और उर्मिला की बात मान कर रमेश उस सीट पर बैठ जाते है. उर्मिला रमेश के बगल में उनके कंधे के पास खड़ी हो जाती है और पायल उनके सामने पैरो की तरफ. रमेश अपने साथ बैठी महिला से पूछते है.

रमेश : आप कहाँ तक जायेंगी?

महिला : जी बस दुसरे स्टॉप पर ही उतरना है.

रमेश : (पायल और उर्मिला को देख कर) इनका स्टॉप आएगा तो तुम दोनों में से कोई यहाँ बैठ जाना.

उर्मिला : पायल तू बाबूजी के साथ बैठ जाना. इतनी देर खड़े हो कर सफ़र करेगी तो परेशान हो जाएगी.
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02-12-2022, 01:20 PM,
#40
RE: Vasna Sex Kahani घरेलू चुते और मोटे लंड
पायल भी सर हिला कर उर्मिला की बात मान लेती है. बस अगले स्टॉप की ओर बढती है. सामने बस स्टॉप का नज़ारा देखते ही उर्मिला और पायल की हालत खराब हो जाती है. बस स्टॉप पर बहुत सारे लोग बस का इंतज़ार कर रहे है. पायल और उर्मिला एक दुसरे को मुहँ उतार कर देखते है. आने वाली भीड़ से निपटने की तैयारी करते हुए उर्मिला अपनी कमर रमेश की सीट पर टिका देती है और एक हाथ उठा के ऊपर लगे लोहे के रॉड को पकड़ लेती है. पायल भी रमेश की सामने वाली सीट पर अपनी कमर लगा कर ऊपर वाली रॉड को पकड़ लेती है. स्टॉप पर बस जैसे ही रूकती है, भीड़ जानवरों की तरह बस के दोनों दरवाजों से अन्दर घुसने लगती है. कुछ ही पल में पूरी बस भीड़ से खचा-खच भर जाती है. पायल और उर्मिला के तीनो तरफ लोग आपस में एक दुसरे से चिपके खड़े है. चौथी तरफ बाबूजी सीट पर बैठे है. रमेश भीड़ में उर्मिला और पायल की हालत देखते है पर वो कुछ भी नहीं कर पाते है. भीड़ को देखते हुए उर्मिला मुहँ बनती है. तभी उसकी नज़र पायल के पीछे खड़े एक आदमी पर जाती है तो उसकी आँखे बड़ी हो जाती है. वो वही दो हट्टे-कट्ठे आदमियों में से एक था जिसे उर्मिला ने मंदिर के बाहर हाथ दिखाया था. वो मुस्कुराता हुआ उर्मला को देखते हुए पायल के ठीक पीछे खड़ा था. उर्मिला भी उसे देख कर बनावटी मुस्कान दे देती है. तभी भीड़ में से उसका दूसरा साथी किसी तरह जगह बनता हुआ उर्मिला और पायल के ठीक पास आ कर खड़ा हो जाता है. वो भी उर्मिला को देख कर मुस्कुरा रहा था. उर्मिला की समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे. पायल भी दोनों को पहचान लेती है और आँखे बड़ी कर के उर्मिला को देखने लगती है. तभी उर्मिला के ठीक पीछे खड़ा एक आदमी कहता है. "और भाई...कैसे हो?". उर्मिला के कानो में जब वो आवाज़ पड़ती है तो उसके दिल की धड़कन बढ़ जाती है. ये आवाज़ उसने पहले भी सुन रखी थी. वो धीरे से अपनी गर्दन घुमा कर तिरछी नज़रों से पीछे देखती है तो उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है. वो आदमी कोई और नहीं, बल्कि वही दुबला पतला मनचला छेदी थे. पायल देखती है तो छेदी उसे देख कर मुस्कुरा रहा है. छेदी की बात का जवाब देते हुए दूसरा हट्टा-कट्ठा मर्द कहता है. "बस भाई...सब बढियां है".

छेदी : भाई कमाल है. इतनी बढियाँ बाडी-शाडी बना राखी है आप दोनों ने और अब तक शादी नहीं हुई ?

दूसरा आदमी : (हँसते हुए) बस लड़की देख रहे है जी...

छेदी की बात सुन कर उर्मिला समझ जाती है की कुछ देर पहले जो उसने झूठ बोल कर छेदी को बेवक़ूफ़ बनाया था, अब वो चोरी पकड़ी गई है. वो चुप-चाप उनकी बाते सुनते हुए खड़ी हो जाती है. येही हाल पायल का भी था. छेदी आगे कहत है.

छेदी : (दोनों हट्टे-कट्ठे आदमियों से) भाई आप दोनों से बस स्टॉप पर बात-चीत करके बड़ा मजा आया. (पायल को घूरते हुए) कुछ लोगों को आपके बारें में गलतफहमी हो गई है. कोई बात नहीं...ठीक है...हो जाता है.

उर्मिला सारी बातें चुप-चाप खड़ी हो कर सुन रही थी. उसकी सारी होशियारी निकल कर हवा हो चुकी थी. पायल भी डरे हुए उर्मिला को देखने लगती है. इन सारी बातों से बेखबर रमेश चुप-चाप सीट पर बैठा है. उसे इस बात की जरा भी भनक नहीं थी की ये सब चल क्या रहा है.

तभी दूसरा बस स्टॉप आ जाता है और बस का ड्राईवर जोरो से ब्रेक लगा देता है. बस एक झटके से रुक जाती है तो उर्मिला के पीछे खड़ा छेदी, उर्मिला से पीछे से चिपक जाता है. पायल भी झटका खा कर पीछे खड़े तगड़े आदमी से टकरा जाती है. छेदी धीरे-धीरे उर्मिला से अलग होता हुआ कहता है.

छेदी : बहुत भीड़ है भाई...बहुत भीड़ है...

रमेश इस घटना को देख लेते है. जिस तरह से एक अनजान आदमी उर्मिला के पीछे से चिपक गया था और जिस तरह से पायल एक अनजान आदमी से पीछे हो कर चिपक गई थी, रमेश को इन बातों पर गुस्सा नहीं आ रहा था. बल्कि रमेश की धोती में सोये हुए लंड में एक हरकत सी होने लगी थी. अपनी ही बहु और बेटी को किसी अनजान मर्दों से चिपकता देख कर रमेश को मजा आया था. इस बात से उर्मिला और पायल दोनों ही अनजान थे.

उस स्टॉप पर भी कुछ लोग बस में घुस जाते है तो बस के अन्दर बुरा हाल हो जाता है. दोनों दरवाजों से घुसती भीड़ की वजह से बस के बीच की जगह का बुरा हाल हो जाता है. लोग एक दुसरे से चिपक जाते है और हिलने डुलने की भी जगह मुश्किल हो जाती है. इस बात का फ़ायदा उठा कर छेदी उर्मिला की बड़ी-बड़ी चुतड पर अपने आगे का हिस्सा चिपका कर खड़े हो जाता है. पायल के पीछे खड़ा तगड़ा आदमी भी पायल की चुतड से चिपक जाता है. दूसरा तगड़ा आदमी अब उर्मिला और पायल के बीच खड़ा हो जाता है और अपना चेहरा उर्मिला की तरफ कर देता है. उर्मिला के पीछे छेदी चिपका खड़ा है और आगे दूसरा तगड़ा आदमी. उर्मिला दोनों के बीच 'सैंडविच' बनी हुई है. पायल के सामने दुसरे तगड़े आदमी की पीठ है और पीछे पहला तगड़ा आदमी. वो भी दोनों के बीच 'सैंडविच' बनी हुई है.

रमेश जब उर्मिला और पायल को इस तरह मर्दों के के बीच फंसा देखते है तो उनके लंड में तनाव आने लगता है. वो बिना कुछ कहे चुप-चाप इस नज़ारे का मज़ा लेने लगते हैं. बस निकल पड़ती है और छेदी उर्मिला के पीछे अपना काम शुरू कर देता है. बस काफी पुरानी है और चलते हुए हिल रही है. बस के इस तरह से हिलने का पूरा फायेदा उठाते हुए छेदी उर्मिला की बड़ी चूतड़ों के बीच अपनी पैंट में बने बड़े से उभार को दबा देता है. अपनी चूतड़ों के बीच किसी मोटे और सक्त चीज़ का अहसास होते ही उर्मिला समझ जाती है की ये छेदी का लंड ही है. वो सोचती है की एक दुबले पतले आदमी का ऐसा मोटा लंड कैसे हो सकता है. लंड को परखने के लिए उर्मिला अपनी चुतड हल्का सा पीछे कर देती है. उर्मिला को इस तरह से चुतड पीछे करते देख छेदी भी अपनी कमर आगे कर देता है और उर्मिला की चूतड़ों के बीच दबाव बना देता है. अब उर्मिला को यकीन हो जाता है की ये छेदी का लंड ही है जो मोटा होने के साथ-साथ लम्बा भी है.

सामने पायल का भी वैसा ही हाल था. उसके पीछे खड़ा तगड़ा आदमी पायल की चूतड़ों के बीच अपना लंड पैंट के अन्दर से चिपकाए खड़ा था. जब भी बस हिल जाती तो वो अपना लंड पायल की स्कर्ट के ऊपर से चूतड़ों पर रगड़ देता. रमेश अब उर्मिला और पायल के साथ हो रही इस घटना का पूरा मजा लेने लगा था. ये सब देख कर उसके लंड में हलचल हो रही थी. तभी बस के सामने एक गाय आ जाती है और ड्राईवर जोर से ब्रेक लगा देता है. ब्रेक लगने से उर्मिला पहले आगे होती है तो उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां सामने वाले तगड़े आदमी के सीने पर पूरी तरह से दब जाती है. पीछे छेदी भी अपनी कमर आगे कर उर्मिला की चूतड़ों के बीच दबा देता है. जैसे ही बस रूकती है तो उर्मिला झटका खाते हुए पीछे हो जाती है. पीछे छेदी अपने लंड का उभार लिए खड़ा था. जैसे ही उर्मिला पीछे हुई, छेदी ने अपने लंड का उभार उर्मिला की चूतड़ों के बीच झटके से घुसा दिया. झटका इतने जोर का था की लंड का उभार उर्मिला की साड़ी के साथ उसकी चूतड़ों के बीच घुस जाता है. अब छेदी का लंड उर्मिला की चूतड़ों में घुसी साड़ी के साथ अन्दर फस हुआ था. उर्मिला भी छेदी के लंड की मोटाई अच्छे से महसूस कर पा रही थी. अब उर्मिला भी मजा लेने लगी थी. छेदी अपने लंड को हल्का सा झटका देता तो उर्मिला भी अपनी चुतड भींच के उसके लंड को पकड़ सी लेती. छेदी भी समझ गया था की अब आगे का रास्ता असान हो गया है.

सामने पायल भी अब उसके साथ होने वाली मस्ती का मजा लेने लगी थी. तगड़े आदमी ने अब अपनी कमर पायल की चुतड से चिपकाए, एक हाथ से उसकी कमर को सहलाना भी शुरू कर दिया था. पैंट के अन्दर से अपने लंड को पायल की स्कर्ट में कैद चूतड़ों पर रगड़ते हुए वो अपने हाथ को कमर से उसके पेट पर लाने लगा था. धीरे-धीरे पायल का पेट सहलाते हुए वो अपनी कमर को पायल की चूतड़ों पर हिलाए जा रहा था. तभी बस के अन्दर जल रही तीन बत्तियों में से पीछे और बीच की बत्तियाँ बुझ जाती है और बस में लगभग अँधेरा सा छा जाता है. एक बत्ती जो ड्राईवर की सीट के पास है, वही जल रही है. बस में अँधेरा होने से रमेश अपनी आँखों पर जोर डालते हुए उर्मिला और पायल के साथ क्या हो रहा है वो देखने लगते है.

अँधेरे का फायेदा उठा के छेदी अब उर्मिला से पूरा चिपक गया था. उर्मिला की कमर में हाथ डाले वो उसके की पिछवाड़े पर निचे से ऊपर अपनी कमर रगड़े जा रहा था. उर्मिला के सामने वाले तगड़े मर्द ने थोडा झुक कर अपना मुहँ उर्मिला की बगल में घुसा दिया था. उर्मिला हाथ उठाये ऊपर रॉड पकडे खड़ी थी और वो मर्द अपना मुहँ उसकी बगल में घुसाए बाहं के निचे ब्लाउज के गीले हिस्से हो सूंघे जा रहा था. उर्मिला के ब्लाउज की बांह छोटी और हाथ ऊपर होने की वजह से उसकी बगल लगभग आधी बाहर दिख रही थी. वो आदमी बगल सूंघते हुए बीच-बीच में छोटी बाहं में जीभ घुसा कर उर्मिला की बालोवाली बगल चाट लेता. पीछे छेदी और आगे तगड़ा आदमी उर्मिला को पूरा मजा दे रहे थे.

सामने पायल की टॉप में तगड़े आदमी ने अपना हाथ घुसा दिया था. टॉप के अन्दर हाथ घुसा के वो पायल के एक दूध को दबोच कर मसले जा रहा था. पायल आँखे बंद किये अपना दूध उस अनजान मर्द से मसलवा रही थी. तेज़ साँसों के साथ पायल मस्ती में मजा ले रही थी की अचानक उसकी नज़र रमेश पर पड़ी. रमेश ये सब घुर के देख रहा था. पायल को सबसे ज्यादा हैरानी तब हुई जब उसने देखा की पापा का एक हाथ धोती के अन्दर है और वो ये सब देखते हुए अपना लंड मसल रहें है. पायल इस बात से हैरान तो हुई लेकिन ना जाने क्यूँ उसे भी इसमें मजा आ रहा था. अपने ही पापा के सामने किसी अनजान मर्द से दूध दबवाने में उसे अब मजा आने लगा था और ये मजा दुगना हो गया था जब खुद उसके पापा भी अपना लंड मसल कर मजा ले रहे थे. पायल का बदन मस्ती में झूम उठा था. रमेश लंड मसलते हुए पायल को देख रहे थे और पायल अपना दूध पराये मर्द से दबवाते हुए पापा को. तभी पापा को देखते हुए पायल ने एक हाथ से अपनी टॉप आगे से थोड़ी ऊपर कर दी तो नीचे सीट पर बैठे रमेश को हलकी सी रौशनी में पायल के बड़े दूध पर एक हाथ घूमता हुआ दिख गया जो बीच-बीच में पायल के दूध को दबोच ले रहा था तो कभी निप्पल मसल दे रहा था. ये नज़ारा देख कर रमेश ने धोती के अन्दर अपने हाथ की गति बढ़ा दी.

तभी अगला बस स्टॉप आ गया और रमेश के साथ बैठी महिला ने चिल्ला कर कहा, "बस रोको भाई. मुझे उतरना है". उस महिला की आवाज़ से छेदी और तगड़े मर्द संभल जाते है और अपना काम छोड़ कर सीधे खड़े हो जाते है. फिर वो महिला रमेश से कहती है. "भाई साहब जरा हटिये. मेरा स्टॉप आ गया है". रमेश उठ जाते है तो वो वहां से बाहर निकलती है. उसके निकलते ही रमेश पायल को इशारा करते है तो पायल झट से अन्दर घुस कर खिड़की वाली सीट पर बैठ जाती है और रमेश अपनी सीट पर बैठ जाते है. पायल को सीट पर बैठता देख तगादा मर्द निराश हो जाता है लेकिन फिर सामने उर्मिला को देख कर मुस्कुराते हुए उसकी दूसरी तरफ खड़ा हो जाता है. अब उर्मिला के पीछे छेदी है, सामने और दूसरी तरफ तगड़े मर्द और एक तरफ बाबूजी बैठे है.

उर्मिला अपने आप को किसी चक्रव्यूह में फंसा हुआ पाती है. उस चक्रव्यूह में कोई तलवार, तीर-कमान या भाले जैसे हथियार नहीं थे, बल्कि लंड और हाथ जैसे हथियार थे जो उर्मिला के बदन को घायल कर रहे थे. लंड और हाथ रुपी इन हथियारों के घाव उर्मिला को पीड़ा नहीं बल्कि उत्तेजना और आनंद से भर दे रहे थे. उसे इस चक्रव्यूह से निकालने वाले अभिमन्यु रुपी बाबूजी खुद इस का एक हिस्सा बने मजा ले रहे थे. जब उर्मिला बाबूजी की तरफ देखती है तो वो आँखे फाड़े धोती में अपना लंड मसलते हुए उसे देख रहे थे. उर्मिला बाबूजी को देखते हुए अपने ओंठ काट लेती है और आँखे बंद किये अपने शरीर को उस चक्रव्यूह के रचेता, छेदी और उन दो तगड़े आदमियों के सामने आत्मसमर्पित कर देती है.

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