vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डकैत
05-13-2019, 12:31 PM,
#11
RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
तभी कुछ लोग वँहा आये आश्चर्य की बात थी की उनके हाथो में बड़े बड़े लाठियां थी कोई खुलेआम रिवाल्वर को अपने हाथो में घुमा रहा था लेकिन किसी ने उन्हें रोकने की हिम्मत नही की ,वो लगभग 10-15 की संख्या में थे ,एक लड़का उनके सामने चल रहा था और एक जैकेट पहने हुए था,सभी लोग उन्हें शक और डर की नजर से देख रहे थे ..वो लोग सीधे आये और लड़के ने चम्पा के सर पर गन टिका दी ,चम्पा और अजय दोनो के लिए के बिल्कुल ही अप्रत्याशित था ,बाकी के लड़के उन्हें घेर कर खड़े हो गए ,पूरी तरह से शांति पूरे माहौल में छा गई थी …
“ये क्या बतमीजी है “
अजय गुस्से से चीखा 
“तुम्हारा खेल खत्म हुआ मोंगरा बाई “लड़के के चहरे में क्रोध साफ दिख रहा था ..
लेकिन उसकी इस बात पर अजय बस जोरो से हँस दिया लकड़ा उसे अजीब निगाहों से घूरा ..
“मुझे अभी तक इस बात पर शक हो रहा था की किसी ने इसे देखकर मोंगरा क्यो नही कहा ..लेकिन अब समझ आया की अभी तक क्यो नही कहा क्योकि जमीदार साहब को खबर करना था...और फिक्र मत करो ये मोंगरा नही उसकी बहन चम्पा है”
लड़के के चहरे में अविश्वास के भाव आये 
“मैं तुम्हारे इलाके का नया इंस्पेक्टर हु अजय ...जमीदार साहब मुझे पहचानते है “
अजय ने उसे कांफिडेंस में लाने के लिए कहा ..
लेकिन उस लड़के ने अभी भी वो गन नही हटाया था चम्पा खामोश सी बैठी थी जैसे उसे पता था की ये होने वाला है …
लड़के ने एक फोन किया
“पिता जी ये तो चम्पा है ,और वो नए इंस्पेक्टर के साथ है ..”
उधर से भी कुछ कहा गया और लड़के ने फोन अजय को दे दिया लेकिन इस दौरान भी चम्पा के सर से किसी ने भी गन नही हटाई थी …
अजय वँहा से उठा और थोड़ी दूर जाकर बात करने लगा 
“हम ठाकुर प्राण बोल रहे है “
:जी ठाकुर साहब “
“ये क्या है इंसपेक्टर हमने तुम्हे मोंगरा को पकड़ने के लिए भेजा था लेकिन तुम उसकी हमशक्ल के साथ रंगरलियां मना रहे हो “
“ठाकुर साहब ये ही मेरे काम का ही हिस्सा है ,आप भी जानते है की दोनो ही बहने हमशक्ल है,लेकिन पता नही की अभी तक जितने भी लोग यंहा उसे पकड़ने आये वो इस बात का फायदा क्यो नही उठा पाये ,मैं इस बात का फायदा उठाकर उसे पकडूँगा, ये मेरे प्रेम जाल में पूरी तरह से फंस चुकी हैं, इसके जरिए ही इसकी बहन तक पहुचा जा सकता हैं”
ठाकुर ने शाबासी के कई वाक्य कह डाले
“बहुत बढ़िया अजय ,तुम बस उस कुतिया को हमारे हवाले करो और मुह मांगा इनाम तुम्हारा …और चम्पा को फसाने में जितनी भी मदद लगे हम देंगे “ 
अजय के चहरे में कुटिल मुस्कान खिल गई
“फिलहाल तो 1 लाख ही भेज दो ,साली को पटाने में बहुत पैसा खर्च होगा….”
दोनो तरफ से हँसी गूंज गई …..

मोंगरा के जिस्म में लगे हुए घाव को देखकर बलवीर के मन में अजीब सी तिलमिलाहट हो रही थी,लेकिन वो कर भी क्या सकता था आखिर मोंगरा थी तो उसकी सरदार …
बलवीर बड़े ही प्यार से उस जख्म को छुआ..
“आउच “मोंगरा के चहरे में एक दर्द की लहर आने की बजाए खुसी झलकने लगी,आंखों में मस्ती के बादल थे और होठो में हल्की सी मुसकान….
बलवीर की चिढ़ इसे देखकर और भी बढ़ गई थी …
अचानक ही चम्पा की नींद खुली और अब भी उसके होठो में वही मुस्कान थी और थोड़ी शर्म भी …
“लगता है की चम्पा सरदार पर भारी पड़ रही है,सरदार भूलिए मत की आप चम्पा नही मोंगरा है,शायद उस इंस्पेक्टर ने आपके अंदर वो सारे अरमान जगा दिए है जो एक साधारण लड़कियों के अंदर होते है और आज तो हद ही कर दी आपने अपना मिशन भूलकर उसके साथ ……”
वो चुप था ,लेकिन मोंगरा के होठो में अभी भी वही मुस्कान थी,
बलवीर और भी बुरी तरह से झल्ला गया 
“जिस्म की हवस मिटाने तक तो ठीक था सरदार लेकिन तुम तो ...तुम तो ऐसा लग रहा है जैसे तुम उसके प्यार में पड़ गई हो “
बलवीर का चहरा रूवासु हो गया जिसे देखकर मोंगरा खिलखिला कर हँस पड़ी …
“वाह बलवीर बहुत बड़ी बड़ी बाते करने लगा है तू तो ...लगता है की तु भी हमसे प्यार करने लगा है …”
मोंगरा की बात सुनकर बलवीर थोड़ा घबरा सा गया लेकिन कुछ भी नही कहा ..
“घबरा क्यो रहे हो ,बलवीर मैं हमेशा से जानती हु और तुमसे मैं सिर्फ अपने जिस्म की प्यास ही बुझती थी लेकिन फिर भी तुम्हारे प्यार के कारण मेरे अंदर भी प्यार की लहरे उठानी शुरू हो गई मैं तुम्हे चाहती हु लेकिन अपने बेटे की तरह …”
बलवीर की आंखों में पानी था,
“तुम ये क्या कह रही हो सरदार “
“सच ही कह रही हु ,”मोंगरा के आंखों में भी आंसू आ गए थे वो बलवीर के बालो पर प्यार से हाथ फेर रही थी
“सरदार उस अजय का कोई भी भरोसा करना ठिक नही है हो सकता है की वो आपको जमीदार के हवाले कर दे ,क्या पता सरकारी आदमी है हम उसके बारे में जानते भी नही है और वो हो सकता है की जमीदार से मिला हुआ होगा “
मोंगरा के होठो में एक मुस्कान आ गई 
“नही बलवीर मेरा अजय ऐसा नही है “
बलवीर को मोंगरा का अजय के प्रति इतना अपनापन चुभ सा गया ..
“क्या पता की आपके अजय के मन में क्या चल रहा होगा “
अचानक ही बलवीर उठ खड़ा हुआ और मोंगरा के हाथो को अपने सर पर लगा लिया 
“आपको मेरी कसम है की अपनी असलियत उसे नही बताओगी “
मोंगरा थोड़ी मचल गई 
“सुनो सरदार तुमने ये नाटक किया था क्योकि तुम उस अजय को फंसा कर जमीदार तक पहुचना चाहती थी लेकिन अब तो हद हो गई है आप तो खुद ही उसके प्यार में फंसती जा रही है ...क्या आप वो सब भूल गई जो उस हरामजादे जमीदार ने आपके और आपके परिवार के साथ किया था ...याद करो सरदार उस दर्द को जो उसने आपको दिया है…”
बलवीर के चहरे की नशे खिंच गई थी ,लेकिन मोंगरा के आंखों में बस दर्द ही था…
“वी दर्द मैं कैसे भूल सकती हु ...लेकिन पता नही क्यो अजय के प्यार के आगे लगता है की वो सब चीजों को भूल कर बस उसकी बांहो में झूलती रहूं ……….”
अब शायद बलवीर से ये असहनीय हो चुका था वो उठ खड़ा हुआ ..
“आप वो सरदार नही रही जो अपने लोगो के लिए जिया मरा करती थी “
बलवीर उठकर जाने लगा था,मोंगरा ने उसका हाथ पकड़ लिया..
“रुको …मैं जानती हु की तुम क्या चाहते हो ,और फिक्र मत करो तुम्हारी सरदार में अभी भी इतनी ताकत है की वो अपने लक्ष्य के सामने अपने प्यार को आने नही देगी ...लेकिन तुम जो सोच रहे हो वो भी सच है की मैं अजय के प्यार में बौरा सी गई हु ...उसमे मुझे मेरा भविष्य दिखाई देता है,लेकिन अपने भविष्य के लिए मैं तुम लोगो की भावनाओ से नही खेल सकती …”
मोंगरा अब भी बलवीर को किसी आशा से देख रही थी ऐसे तो उसका हुक्म ही इस गुट का नियम था लेकिन फिर भी मोंगरा अपने सभी सदस्य साथियों का समान सम्मान करती थी……
“चम्पा को अपने प्यार से प्यार करने दो इस बात पर मुझे मत रोको लेकिन मोंगरा अपना इंतकाम लेगी ...और क्या पता शायद अजय भी हमारे किसी काम आ जाए …”
मोंगरा की बात सुनकर बलवीर ने एक गहरी सांस ली ,उसके चहरे में संतोष के भाव तो अभी भी नही आये थे लेकिन फिर भी वो थोड़ा शांत जरूर दिख रहा था…….
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05-13-2019, 12:31 PM,
#12
RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
अजय के हाथो में रुमाल में लिपटी हुई नोट की दो गड्डिया थी ,वो उसे अपने हाथ में झूला रहा था,मन बिल्कुल शांत ऐसा लग रहा था जैसे वो इसे तौल रहा हो …

मन में कई विचार एक साथ चल रहे थे ,

“साहब साहब “

तिवारी की आवाज से जैसे वो चौका और फिर तुरंत ही उन गड्डियो को एक दराज में डालकर बाहर आया …

“अरे पंडित जी आप यंहा “

“साहब आप कल से दिखे नही तो सोचा की चलो हलचल पूछ आऊ ,तबियत तो ठीक है ना “

“ओह वो हा मैं ठीक हु ,”

वो थोड़ी देर तक सोचता ही रहा

“अच्छा तिवारी जी एक बात बताइये की क्या आपको चम्पा का घर पता है “

तिवारी एक गहरी मुस्कान में मुस्कुराया 

“क्या बात है साहब बड़ी बेताबी हो रही है उससे मिलने की ..”

अजय अपनी ही बात को सम्हालता हुआ बोला 

“ऐसा तो कुछ नही बस ...बस सोचा की जो लड़की खतरनाक डाकू की बहन हो उसे अपनी नजर में रखना ही चाहिए “

तिवारी जैसे उसके मन के दशा को समझ गया था 

“अच्छा चलिए लिए चलता हु आपको भी ,आप भी इस शक को दूर कर ही लो की वो दोनो एक नही दो है “

अजय थोड़ा झेंपा जरूर लेकिन वो उसके पीछे हो चला,दोनो ही अजय के बुलेट से जा रहे थे,एक समय के बाद रास्ता भी बंद हो गया था ,इतना घना जंगल देख कर तो अजय को थोड़ा डर भी लगा ,गाड़ी वही खड़ा कर वो दोनो ही एक बड़े बड़े पेड़ो के बीच से होते हुए उबड़ खाबड़ रास्तों पर चलने लगे ,और थोड़ी ही देर में उन्हें कुछ झोपड़ियां दिखाई दो ,मुश्किल से 7-8 झोपड़ियां थी ..

वँहा पहुचते ही लोग उन्हें अजीब निगाहो से देखने लगे ,वो अजय को ऐसे देख रहे थे जैसे की वो किसी दूसरे ग्रह से आया हुआ हो,तिवारी उनके लिए नया नही लग रहा था …

हर घर बड़ी दूर दूर में बसा हुआ था ,और बड़ी ही शांति पसरी हुई थी ,

अजय और तिवारी दूसरे छोर तक पहुचे एक छोटी सी झोपडी थी जो की अन्य घरों के मुकाबले थोड़ी और अलग थलग थी ,घर के बाहर एक बुड्डा बैठे हुए बीड़ी पी रहा था ,चारो ओर अथाह शांति फैली थी बस झींगुरों की आवाजे फैली थी या तो पत्तो की सरसराहट,कभी कभी कुछ बच्चों की हँसी भी सुनाई दे जाती थी ,

बरामदे में घुसते ही एक मादक सी गंध अजय के नाक में पड़ी जिसने उसे मदहोश सा कर दिया था,ये गंध थी महुए ही ,महुआ जो की आदिवासियों के द्वारा बनाया गई शराब थी जो की वो लोग खुद ही बनाते है ,बिल्कुल ही शुद्ध..

तिवारी जाकर बुजुर्ग के पैर पड़ता है 

“चम्पा दिखाई नही देती ,हमारे नए साहब है महुआ पीने आये है ..”

बुजुर्ग ने थोड़ी देर तक अजय को घूरा फिर अदंर चला गया ,अजय को उसका व्यवहार थोडा अजीब लगा लेकिन वो बुजुर्ग थोड़ी ही देर में एक मटकी जैसे पात्र लिए कोई पेय लेकर उपस्तिथ हुआ ,

अजय के नाक में वही गंध फिर से फैल गई लेकिन इस बार वो थोड़ी ज्यादा ही थी ,

फिर उस बुजुर्ग ने 3 ग्लास लाये और पूरी तरह से महुए से भर दिया ,तिवारी ने तिरछी निगाहों से अजय की ओर देखा और मुस्कराया ,

तीनो ने ही ग्लास थाम लिया ये अजय के जीवन में पहली बार था जब वो हाथ से बनी हुई शराब चख रहा था,उसे लगा जैसे आजतक उसने जो महंगी से महंगी शराब पी है वो भी इसकी मादकता और पवित्रता के सामने फीकी है ,बिल्कुल ही ओरिजनल और साफ …

पहला ही ग्लास अजय के दिमाग में एक सुरुर पैदा कर चुका था …….. 

दूसरे के बाद से उसकी आंखे बंद होनी शुरू हो गई ,

“चम्पा कहा है “

उसने अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में कहा 

“वो अभी जंगल में महुआ बीनने गई है ,लकड़ी वगेरह इकठ्ठा करके ही आएगी…”

बुड्ढे ने पहली बार कुछ सही कहा था ,तीसरा ग्लास भी भर दिया गया था लेकिन अजय समझदार व्यक्ति था उसने उसे प्यार से मना कर दिया वो जो पता करने आया था वो नशे में समझ ही नही सकता था,

थोड़ी ही देर में एक लड़की एक साड़ी पहने आती हुई दिखाई दी,बस सूती साड़ी का एक कपड़ा और वही तराशा हुआ जिस्म जिसे देख कर अजय जैसा मर्द भी मदहोश हो गया था ,अजय की आंखों में चमक आ गई क्योकि सामने से आने वाली लड़की उसकी चम्पा थी,,,

चम्पा पास आयी और बड़े सलीके से उसने दोनो के सामने हाथ जोड़े और कमरे में चली गई ,

“लो मिल लो यही है चम्पा “

तिवारी अच्छे नशे की हालत में आ चुका था ,थोड़ी ही देर में चम्पा बाहर आयी और अजय को देखकर मुस्कुराने लगी ,

अजय को इस नशे की हालत में चम्पा और भी हसीन दिखाई देने लगी थी ,चम्पा भी उसे यू देखता हुआ देखकर मुस्कुराई,साथ ही उसके चहरे में नारी सुलभ शर्म फैल गया,

“अरे सर एक और हो जाए अब तो देख ही लिया ना अपने “

तिवारी की बात सुनकर अजय ने एक ग्लास और ले ही लिया ,लेकिन इससे वो पूरी तरह से घूम चुका था और आखिर में तिवारी ने ही उसे उठाकर वँहा से उसके घर छोड़ा ….

शाम जब उसकी आंखे खुली तो होठो के एक मुस्कान थी वो चम्पा से मिलना चाहता था और फिर से वो उसके घर के ओर चल दिया ,

वँहा चम्पा उसे बच्चों के साथ खेलते हुए मिली शाम ढलने को थी और चम्पा उसे देखकर भागते हुए अपने घर के अंदर घुस गई ..

“अरे रुको तो सही “

वो उसके पीछे ही भागा था लेकिन बाहर उसके बाप को देखकर वो वही रुक गया ,लेकिन देखा की वो चिलम जला कर रखा था और पूरे नशे में था,

अजय जाकर उसके पैर छुवे 

“फिर से पीने चले आये”

बुजुर्ग की बात सुनकर वो थोड़ा मुस्कुराया 

और मन में सोचा

‘पीने तो आया हु लेकिन शराब नही शबाब ‘

थोड़ी ही देर हुई थी की चम्पा अपने हाथो में एक मटकी लेकर आ गई ,और एक ग्लास में शराब भर कर अजय की ओर बड़ा देती है ,उसके चहरे में शर्म की मुस्कान थी अजय भी उसे घूरे जा रहा था ,

“ऐसे क्या देख रहे हो “

उसकी प्यारी आवाज से अजय जैसे फिर से होशं में आया 

“बहुत प्यारी लग रही हो “

वो और शर्मा गई 

“खाना खा के जाना आपके लिए देशी मुर्गा बना देती हु “

चम्पा ने हल्के से कहा

“ओह पति देव की इतनी सेवा “

“चुप रहो”

चम्पा घबराकर अपने बापू की ओर देखी लेकिन वो तो नशे में धुत पड़ा था और फिर हल्के से मुस्कुराई और अजय के कंधे पर एक चपत मार दी ,

“चलो जल्दी से इसे खत्म करो जल्दी से खाना बना देती हुई बापू तो लगता है आज ऐसे ही रहेंगे “

“वाओ तो आज रात में …”

अजय इतना ही बोलकर रुक गया लेकिन चम्पा के चहरे में मुस्कराहट और भी बढ़ गई लेकिन साथ ही शर्म भी ,वो भागते हुए वँहा से अंदर चली गई लेकिन उसकी अदा से ही अजय के दिल में गुदगुदी उठ गई,और वो बेख़ौफ़ ही उठा और कमरे के अंदर चला गया ,उसे देखते ही चम्पा घबराई और थोड़ी पीछे हो गई ,अजय उसके करीब जा खड़ा हो गया था दोनो की ही सांसे तेज थी और एक दूसरे के चहरे से टकरा रही थी ,

चम्पा एक दम से शांत हो गई थी और अपनी नजर नीचे किये हुई थी ,वही अजय की भी नजर बस उसके चहरे में जा टिकी थी ..

“ऐसे क्या देख रहे हो ,बाहर बापू बैठे है”

चम्पा की बात को जैसे अजय ने अनसुना कर दिया और अपने चहरे को उसके पास लाते हुए उसके गालो को चूमने की कोशिस की लेकिन चम्पा ने अपना चहरा सरका लिया ,उसके होठो में मुस्कुराहट थी लेकिन दिल जोरो से धड़क रहा था …

अजय ने अपने हाथो से उसके चहरे को अपनी ओर किया अब चम्पा के माथे पर पसीना था ,वो कोई विरोध नही कर रही थी उसकी आंखे बंद थी ,अजय ने अपने होठो को चम्पा के होठो के पास लाया और चम्पा की सांसे और भी तेज होने लगी उसके होठो भी फड़फड़ाने लगे लेकिन,वो जड़वत बस वही खड़ी रही और अजय ने बड़े ही इत्मीनान से उसके होठो को अपने होठो में ले लिया ..

चम्पा की तो जैसे सांसे ही रुक गई थी उसे लगा जैसे उसके शरीर में कोई भी ताकत बाकी नही है और वो गिर जाएगी उसने खुद को अजय के बांहो में डाल दिया ,अजय भी प्यार से उसके बदन को सहलाते हुए फिर से उसके चहरे को उठाया और उसके चहरे को ध्यान से देखने लगा,

इतना मोहक रूप अजय ने देखा ही नही था,वो फिर से अनायास ही उसके होठो में खुद के होठो को भिड़ा दिया ,इस बार चम्पा के हाथ अजय के सर पर जा टिके थे और वो उसके बालो को सहला रही थी वही अजय भी अपने जज़बातों की तूफान को होठो के जरिये चम्पा के अंदर धकेल रहा था …..

चम्पा का कसा हुआ बदन अजय के बदन से मिल चुका था ,चम्पा की गोल उभरी छतियो का मुलायम अहसास अजय के सीने में हो रहा था,अजय ने चम्पा की साड़ी हो उसके कंधे से हटाया और अपने होठो को उसके कंधे पर लगा दिया ,

लेकिन अजय को एक और आश्चर्य हुआ की वो सब घाव कहा गए जो उसने कल चम्पा को दिए थे ,जबकि चम्पा के दांतो के निशान अब भी अजय के कंधे पर जिंदा थे…

लेकिन अजय ने अभी ये सभी चीजे सोचने की फिक्र ही नही की और अजय ने फिर से चम्पा के कंधों को चूमना शुरू कर दिया ,चम्पा भी अपने अस्तित्व को अजय को सौपने लगी थी दोनो के जिस्म की गर्मी एक दूसरे में मिल रही थी …

और दोनो ही एक दूसरे में खोना चाहते थे …

लेकिन तभी …

गोली की आवाज पूरे वातावरण में गूंज गई …
अजय तुरंत ही सतर्क हो उठा वही चम्पा के चहरे में ख़ौफ़ साफ साफ दिख रहा था ……...
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05-13-2019, 12:31 PM,
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RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
“ये क्या था “चम्पा बुरी तरह से चौकी 
अजय तुरंत ही उठा और झोपड़े से बाहर की ओर गोली की दिशा में जाने लगा ,पहले तो चम्पा ने उसका हाथ पकड़ लिया था लेकिन फिर अजय ने उसे शांत किया,अजय तो चम्पा को बहुत ही निडर लड़की समझ रहा था लेकिन चम्पा का इस तरह से घबराना उसे दुखी कर गया …
वो भागता हुआ जंगल में पहुच चुका था किसी के दौड़ाने की आवाज का पीछा करने लगा उसे कुछ लोग दिखाई दिए …
“रुको “अजय जोर से चिल्लाया जिसे सुनकर सभी रुक गए और अजय की ओर देखने लगे…
“तुम कौन हो और जंगल में क्या कर रहे हो “उस रौबदार आदमी ने अजय से सवाल किया ,उसके साथ 2 लोग और थे सभी के हाथो में बड़ी बन्दूखे थी …
“मैं इंस्पेक्टर अजय हु ,यंहा का इंचार्ज …”अजय अपने सांसों को काबू में करता हुआ बोला 
“ओह इंस्पेक्टर साहब ,मैं यंहा का रेंजर हु ,पता लगा था की कुछ लोग यंहा पर शिकार कर रहे है तो उन्हें पकड़ने चले आया था ,लेकिन सालो ने गोली चला दी,उन्ही का पीछा कर रहे थे …”
तो ये भी सरकारी आदमी था अजय को सुकून मिला 
“कौन लोग थे मैं कुछ मदद करू “
“कहा सर वो लोग तो अब निकल चुके ….मोंगरा गैंग के लोग होंगे नही तो यंहा किसके पास बन्दूखे होती है “
“ओह”
अजय बस इतना ही बोल पाया था 
“नाक में दम कर रखा है सालो ने ऊपर से भी प्रेशर रहता है ,क्या क्या देखे “
रेंजर तिलमिला गया था 
“काम ही ऐसा है सर ,मेरी कोई मदद लगे तो बेहिचक कहिएगा ,मुझे भी उन्हें पकड़ना है ,आप की भी मदद लगेगी”
“बिल्कुल बिल्कुल और आप तो इसी लिए बुलाये गए है,जमीदार साहब ने तो आपको ऊपर बात करके बुलवाया है...चलिए आज आपसे मुलाकात भी हो गई “
दोनो ने हाथ मिलाया अजय फिर से चम्पा के झोपड़े की ओर चल पड़ा ,शांत जंगल में बस झींगुरों की आवाजे आ रही थी वो दौड़ाता हुआ दूर निकल गया था ,अब वो बिल्कुल ही अकेला था और रात के अंधेरे में सरसराता जंगल ,लेकिन फिर भी उसे डर नही लग रहा था,बल्कि वो तो चम्पा से मिलने को रोमांचित हुआ जा रहा था,
वो थोड़ी दूर ही आया था की उसे फिर से किसी के कदमो की आहत सुनाई दी ,वो सतर्क हो गया था ,और बड़े ही धीरे धीरे कदम बड़ा रहा था ,चांद के मध्यम प्रकाश में उसे रास्ते का इल्म तो हो रहा था लेकिन फिर भी दूर तक दिखाई नही दे रहा था…
“मेरे जानू …”
एक बहुत ही मदभरी और मीठी आवाज ने उसे चौका दिया वो इस आवाज को अच्छे से पहचान सकता था,वो चम्पा की आवाज थी …
वो इधर उधर देखने लगा लेकिन जंगल के बड़े बड़े पेड़ो में उसे कोई दिखाई नही दिया ,तभी उसे खिलखिलाने की आवाज आई ,वो समझ चुका था की चम्पा ही उसके साथ मस्ती कर रही है..
“कहा छुपी हो तूम सामने आओ ना “
अजय बेचैन होकर बोला 
“तुम ढूंढो मुझे “
चम्पा फिर से खिलखिलाई ,अजय के चहरे में भी मुसकान आ गई ,
’कहा ये लड़की अभी इतना डर रही थी और कहा ये मेरे पीछे पीछे आ गई ,ना जाने ये क्या क्या खेल दिखाएगी ‘
वो हसंते हुए उस आवाज का पीछा करने लगा ,चम्पा के भागने से उसके पायलों की आवाज से पूरा जंगल ही गूंज उठा था ,छम छम की आवाज के पीछे अजय भी भागा जा रहा था लेकिन चम्पा को वो पकड़ ही नही पाया ..
भागते भागते उसकी सांसे फूल गई थी और आखिर वो उस झील के पास पहुच गया था जंहा चम्पा उसे पहली बार और फिर कई बार मिली थी …
चम्पा झील के किनारे ही एक बड़े पत्थर पर बैठी हुई थी ,उसके शरीर पर अब भी वही एक साड़ी थी जिसे उसने थोड़ी देर पहले पहना था लेकिन हाथो में बोतल थी जिसे वो अपने मुह से लगा रही थी,ये भी चम्पा का एक अलग ही रूप था ,उसके पैरो में पायल थे जो काले रंग के थे जैसा यंहा की आदिवासी महिलाएं पहनती है ,उसका गोरा और खिला हुआ रूप चांद की रौशनी में चमक रहा था,वो इठला रही थी बलखा रही थी और इतरा रही थी…
अजय उसके अदांओ में मोहित होकर उसके ओर खिंचा चला जा रहा था,जैसे एक चुम्बक दूसरे चुम्बक की ओर खिंचा चला जाता है ,उसे शराब का नशा फिर से मदहोश कर रहा था जिसे वो कुछ देर से भुला हुआ था ,
अजय पत्थर के पास पहुच गया और चम्पा के पैरो को पकड़ कर उसे चूमने लगा जिससे चम्पा खिलखिलाई ,
लेकिन फिर उसे प्यार से देखने लगी ,अजय ने ही अपना सर उठाया और उसे देखने लगा ,दोनो की नजर मिली और चम्पा थोड़ी शर्मा गई ,और नजर नीचे कर लिया …
अजय अपने स्थान से उठकर चम्पा की कमर को पकड़ कर उसे पत्थर से नीचे ले आया ,अब वो अजय के सामने खड़ी थी लेकिन उसका शरीर अब भी पत्थर से ठिका हुआ था ,दोनो के ही जिस्म आपस में सटे हुए थे ,चम्पा के हाथो से अजय ने शराब की बोतल को ले कर अपने मुह से लगाया ,उससे वही महुवे की खुश बू आ रही थी ,वो एक ही बार में आधी बोतल पी गया क्योकि आधी तो चम्पा ने ही खत्म कर दी थी,बोलत फेकने के बाद अजय फिर से चम्पा को देखने लगा जो की उसे ही देख कर मुस्कुरा रही थी ,
“क्या हुआ “
उसने बस अपना सर ना में हिलाया और अजय के पास थोड़ी और सरक गई ,ऐसे दोनो के बीच कोई जगह तो नही बची थी लेकिन फिर भी चम्पा जितना हो सके उतना अजय को अपने से सटाकर रखना चाहती थी ,दोनो के जिस्म उस हल्की ठंड में भी गर्म थे और एक दूसरे को अपनी गर्मी पहुचा रहे थे ,चम्पा का चहरा अजय के सीने के पास था ,अजय ने थोड़ा झुककर चम्पा एक होठो के पास अपने होठो को लाया ,दोनो की सांसे एक दूसरे से टकराने लगी और होठो हल्के हल्के ही एक दूसरे को छू रहे थे ,दोनो के ही होठो में फड़फड़ाहट थी ,
अजय हल्के से अपने सर को आगे करके चम्पा के होठो को अपने होठो में भर लिया ,
चम्पा का भी हाथ अजय के बालो में कस चुका था ,दोनो के जिस्म मिल चुके थे और एक दूसरे में सामने का पूरा प्रयास कर रहे थे ,
चम्पा की सुडौल भरी हुई दूध की थैलियां अजय के सीने में धंस रही थी और अजय उसके बालो को पकड़ कर उसे अपने मुह में सामने की कोशिस कर रहा था ,
अजय उसके होठो से निकल कर उसके चहरे और कंधे तक आ गया ,उसने चम्पा के एक मात्रा वस्त्र का पल्लू उसके सीने से सरका दिया,अब चम्पा का जिस्म ऊपर से पूरी तरह से नग्न था,अजय अपने एक हाथ से उसके उजोरो को सहलाने में लग गया ,
“आह……आह ....”
चम्पा हल्के हल्के से सिसकियां ले रही थी अजय उसके गले को चूमता हुआ उसके कंधे तक पहुचा और उसके जीभ ने कुछ खुरदुरा सा महसूस किया ,जिससे चम्पा की आह ही निकल गई ..
अजय थोड़ा रुक कर उस जख्म को देखने लगा ,जो उसके कंधे पर था …
“ये ..”अजय की आंखे आश्चर्य से बड़ी हो गई थी क्योकि कुछ देर पहले जब उसने चम्पा के कंधे पर अपने होठ फेरे थे तक ये जख्म नही थे,वो दांतो के गढ़ने से बने हुए जख्म थे जो उसके कंधे पर भी थे …
अजय की बात पर चम्पा हल्के से हँसी ..
“कल की बात भूल गए क्या ,जानवरो की तरह कई जगह पर काट लिया था और अब ऐसे मासूम बन रहे हो ..”
अजय का सर घुमा ,मतलब साफ था की वो मोंगरा और चम्पा दोनो के साथ रह चुका था इन दो लड़कियों में से एक मोंगरा थी और दूसरी चम्पा ….
लेकिन ……..
लेकिन दोनो में भेद कैसे किया जाए ???
दिखते एक जैसे है ,बाते एक जैसी,अदाएं भी एक जैसी ,और जो के मात्रा पहचान तिवारी ने उनके अलग होने की बताई थी वो भी दोनो में था …
शायद यही मोंगरा है ...अजय के दिमाग ने कहा,क्योकि इस लड़की में वो शर्म नही थी जो की दूसरे के अंदर थी …
लेकिन ..???
लेकिन ये भी हो सकता था की शर्म बस दिखावा हो ,
अजय के दिमाग ने फिर से कहा ,वो बेचैन हो गया लेकिन अपनी बेचैनी भर जाहिर नही किया और अपने होठो से चम्पा/मोंगरा के कंधे को चूमता रहा ,
‘अगर ये मोंगरा है तो इसका मतलब की मैं एक डाकू के साथ जिसे मैं पकड़ने आया हु ,उसके साथ रात बिताई है ,लेकिन मैंने इसकी आंखों में भी तो वही प्यार देखा था जो मैंने उस दूसरी लड़की के आंखों में देखा था ‘
अजय बुरी तरह से घबरा गया था,और उसकी घबराहट चम्पा से ज्यादा देर तक छुपी नही रह पाई ..
“क्या हुआ ??आप थोड़े बेचैन लग रहे हो “
“कुछ नही कुछ भी तो नही “अजय हड़बड़ाया 
“बताइये ना “
अजय ने उसके चहरे को देखा ,चांद की रोशनी में अब भी उसका चहरा चमक रहा था,वही प्यारा चहरा और आंखों में अजय के लिए वही प्यार ,अजय के दिल ने कहा यही चम्पा है ,कोई भी लड़की झूट बोल सकती है लेकिन किसी की आंखे नही ,वो प्यार से भारी आंखे जो अजय को निहार रही थी वो कैसे झूट बोल सकती है ….
अजय का दिमाग तो कहता था की यही मोंगरा है लेकिन दिल उसे चम्पा ही समझ रहा था ,अजय ने दिल की सुनने की ठान ली और चम्पा के गालो में एक चुम्बन झड़ दिया ..
“चम्पा मैं एक परेशानी में हु “
अजय ने एक दाव खेलने की सोच ली 
“क्या “
“यही की तुम और मोंगरा एक ही तरह दिखती हु ,अगर कभी मोंगरा मेरे सामने आ गई तो मैं तुम दोनो में से तुम्हे कैसे पहचान पाऊंगा “
चम्पा थोड़ी गंभीर हो गई थी …
“उसका नाम मेरे सामने मत लो ,और उसे पहचानना कोई मुश्किल काम भी नही है ,बस उसकी आंखों में देखना,मेरी आंखों में आपके लिए बेपनाह प्यार दिखेगा और उसकी आंखों में बस शैतानियत ,वो किसी से प्यार नही कर सकती वो तो बस खून की प्यासी है “
चम्पा का चहरा तमतमा गया था 
“तो तुम उसे पसंद नही करती “
“बिल्कुल नही ..कहने को तो हम दोनो ही बहने है लेकिन मेरे लिए तो वो कब की मर चुकी है ..”
“फिर भी अगर वो मेरे सामने आयी तो कैसे ..”
चम्पा थोड़ी देर तक उसे देखती है और मुस्कुराती है ..
“बहुत ही आसान है ,उसके ठोड़ी पर ये गोदना नही है ,इसे बापू ने मेरे ठोड़ी में तब गुदवाया था जब उन्होंने मुझे गोद लिया “
चम्पा अपने ठोड़ी में बने हुए गोदने को अजय को दिखाने लगी 
लेकिन अजय को पता था की दोनो ही लड़कियों के चहरे पर उसी जगह पर वैसा ही गोदना है 
“लेकिन अगर मोंगरा ने भी पोलिश से बचने के लिए यही पर ऐसा ही गोदना गुदवा लिया हो तो “
चम्पा के चहरे पर बहुत ही नैसर्गिक चिंता आ गई ,कोई देखकर कह ही नही सकता था की ये झूट बोल रही है या सच …
“तब क्या करेंगे “चम्पा ने मासूमियत से कहा 
“मेरे पास एक तरकीब है शायद यही अच्छा रहे “
अजय उसे देखने लगा लेकिन उसके चहरे का कोई भी भाव नही पढ़ पाया ..
“बोलिये “
“मैं तुम्हे एक गुप्त कोड बताऊंगा ,जिसे बस तुम्हे ही पता हो ,इसे तुम किसी और को मत बताना ,जब जब हम मिलेंगे तो तुम उस कोड को मुझे बता देना ,मुझे पता चल जाएगा की ये तुम हो वो नही “
चम्पा मानो खुसी से उछाल गई 
“हा यही सही रहेगा “
“तो तुम्हारा गुप्त कोड है 7745 “
चम्पा कुछ देर तक उसे बार बार बोलकर उसे याद कर लेती है 
“चलो बहुत रात हो गई अब घर चलते है “अजय की बात से चम्पा का मुह छोटा हो गया 
“अभी तो आये है और कुछ किया भी तो नही है “
अजय के चहरे में मुस्कुराहट आ गई थी ..
करना तो वो भी बहुत कुछ चाहता था लेकिन दोनो के पहचान के कन्फ्यूसन में उसकी सारी उत्तेजना और प्यार जाता रहा ...वो मोंगरा के साथ कुछ भी नही करना चाहता था और अभी उसे बस यही पता करना था की आखिर कौन मोंगरा है और कौन चम्पा ,7745 से उसे ये तो पता चल ही जाएगा की ये वो लड़की है जिसके साथ उसने जिस्मानी रिश्ते बनाये थे,...
अजय ने उसके सर पर छोटा से चुम्मन दिया…
“अभी मैं थक चुका हु ,फिर कभी “
चम्पा मायूस तो थी लेकिन फिर भी उसने अजय को पहले अपने बांहो में भर लिया और फिर उसके होठो में हल्का से चुम्मन दिया …..
“मैं तो हमेशा के लिए आपकी हो चुकी हु कब चाहे जो चाहे कर लेना …”
अजय उसे प्यार से देखता है और अपने घर की ओर निकल जाता है …….
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05-13-2019, 12:31 PM,
#14
RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
अजय के दिल में जोरदार हलचल चल रही थी ,एक तरफ भोली भाली चम्पा थी जिससे वो दिलोजान से मोहोब्बत करता था तो दुसर्री तरफ थी खतरनाक और चालक मोंगरा….

दोनो के बाद उसे सरकार और ठाकुर का भी प्रेशर था की वो जल्द से जल्द ही मोंगरा को पकड़ने की दिशा में काम करे,दिन भर वो उसी उधेड़ बन में लगा रहा था ..

रात में वो तिवारी के साथ बैठा हुआ शराब पी रहा था …

“सर जी कोई मुखबिर कोई भी सूचना नही दे रहा है और s.p. साहब और ठाकुर रोज ही फोन करके पूछते है की आखिर क्या क्या काम कर लिया मोंगरा को पकड़ने के लिए ,क्या करे सर जी ऐसे हाथ पर हाथ तो धरे बैठे नही रह सकते कुछ तो करना ही होगा …”

तिवारी की बात से अजय के माथे पर चिंता की सिलवटे पड़ गई 

“हम्म्म्म तिवारी जी समझ तो मुझे भी कुछ नही आ रहा है ,लेकिन अगर हमे मोंगरा को पकड़ना है तो उसकी कहानी शुरू से जाननी होगी की आखिर मोंगरा ,डाकू मोंगरा कैसे बनी …”

अजय की बात सुनकर तिवारी के होठो में मुस्कान आ गई और उसने पूरा ग्लास एक ही बार में हलक के अंदर धकेल दिया ..

“अब की ना सर अपने सही बात ,मैं इसी इलाके में पैदा हुआ हु और मैंने मोंगरा के बचपन को भी देखा है ,और उसके इस रूप को भी ,जमीदार साहब के मोंगरा के परिवार पर किये हुए जुल्म को भी ,और फिर मोंगरा के विद्रोह को भी लेकिन आज तक किसी ने इसपर कोई भी दिलचस्पी नही दिखाई बस मोंगरा को पकड़ने के अंधी दौड़ में लग गए,ऐसे भी यंहा उसे कोई पकड़ने में दिलचस्पी नही रखता सभी बस उसे मार कर ठाकुर से मुँहमाँगा इनाम पाना चाहते है …”

“लेकिन मुझे सब कुछ जानना है और पूरे डिटेल से जानना है ,मोंगरा में मुझे खासी दिलचस्पी जाग गई है “

अजय की बात सुनकर तिवारी फिर से मुस्कुराया ..

“मोंगरा पे या चम्पा पे “

अजय बुरी तरह से झेंप गया और तिवारी खिलखिलाकर हँस पड़ा ..

“इसमें आपका कुसूर नही है साहब,कुसूर तो आपकी उम्र और चम्पा की जवानी का है ,इस उम्र में अगर ऐसी जवान मदमस्त लड़की सामने हो तो कोई भी फिसल जाए या प्यार में पड़ जाए “

तिवारी अब भी हल्के हल्के मुस्कुराते हुए मजे ले रहा था …

“वो सब छोड़िए तिवारी जी आप मुझे वो बतलाइए जो की जरूरी है ,आखिर मोंगरा डाकू कैसे बनी ..”

तिवारी का चहरा गंभीर होने लगा ….

“बात तब की है जब मैं नया नया पोलिस में लगा था और पास ही के गांव में मेरी पोस्टिंग थी ,देखने को तो यंहा पर सभी कुछ ठीक था लेकिन असल में ऐसा नही था जमीदार का यंहा पर एकछत्र राज हुआ करता था,यंहा के निवासी भी इस बात को स्वीकार कर चुके थे की न्याय और कानून से ऊपर ठाकुर है और उसकी बात है आसपास के 20-25 गांव का कानून था ,सभी कुछ अच्छा था जब तक बड़े ठाकुर यानी प्राण सिंह के पिता का देहात ना हो गया ,लेकिन प्राण सिंह के हाथो में ताकत आते ही उसने इसका गलत उपयोग करना शुरू कर दिया ,उसे बस दो ही नशे थे एक तो शराब का और दूसरा लड़की का ,और इसका शिकार गांव की कई औरते हुई ………….”



यंहा से कहानी फेलशबेक में चलेगी 

प्राण सिंह का आतंक इतना था की लडकिया घर से निकलना ही छोड़ चुकी थी ,ना जाने किस मनहूस घड़ी में ठाकुर की नजर उसपर पड़ जाए और वो उसे उठा कर ले जाए ,किसी के पास इतनी हिम्मत भी तो नही थी की उसके खिलाफ कुछ कह सके …

प्राण सिंह आतंक का दूसरा पर्याय बन चुका था ,जो भी उसके खिलाफ बोलता या कोशिस भी करता तो उसकी एक ही सजा होती थी उसकी और उसके घर वालो की मौत………..

आखिर कुछ गांव के सरपंच मिलकर पोलिश के पास जाने की सोचते है …



पुलिस स्टेशन में 

“साहब, ठाकुर के लोग जब चाहे किसी के भी घर घुसकर लड़कियों को उठा लेते है ,हमारे घर की बहु बेटियों का जीना मुहाल कर रखा है ,गांव छोड़कर जाना चाहते है तो भी नही जा सकते ठाकुर के लोग फिर से गांव में लाकर पटक देते है ,इनकी ही मजदूरी करते है और इनके ही गुलाम बन गए है ,साहब हमारी भी कुछ इज्जत है ,लकड़ियों को तालाब में ही नंगा कर देते है ,वही पर ……”

एक बुजुर्ग बोलते बोलते ही फफक कर रो पड़ा …

टेबल में इंस्पेक्टर बैठा था वही सभी सरपंच हाथ जोड़े जमीन में बैठे थे ,पास ही तिवारी खड़ा था जिसके माथे पर ये सब सुनकर पसीना आ चुका था ,इंस्पेक्टर अभी पान खाने के बाद अपने दांतो को लकड़ी से साफ कर रहा था ,

“ह्म्म्म तो इसमें क्या हो गया कोई नई बात थोड़ी है ,और तुम्हारी बहु बेटियों को कभी ना कभी तो चुदवाना ही है ,लडकिया है तो कोई ना कोई तो चोदेगा,फिर ठाकुर साहब या उसके किसी आदमी ने चोद लिया तो क्या फर्क पड़ गया …”

इंस्पेक्टर के इस बयान से वो सभी बस एक दूसरे के चहरे को देखने लगे ….

तभी भर कार आने की आवज आई ,एक साथ ही कई कार आकर रुकते गए ..

इंस्पेक्टर हड़बड़ाया और तुरत ही अपने को सीधा किया और खड़ा हो गया ,इधर प्राण ठाकुर रौब से आ रहा था ,उसे देखकर सभी खड़े हो गए और हाथ जोड़ लिए वही सभी के चहरे पर पसीना भी था …

“क्यो बे मादरचोदों तुमलोग यंहा क्या कर रहे हो,इस मादरचोद से मेरी शिकायत करने आये हो ..”

उसने इंस्पेक्टर की तरफ उंगली की ,इंस्पेक्टर ने गली सुनकर भी अपने दांत दिखाए ..

लेकिन प्राण सिंह भड़का 

“तुम सालो की बेटियां ,बहुये,हमारी रखैल है ये बात समझ लो जिसे जब चाहे तब उठाकर लाएंगे और रोक सको तो रोक लेना “

वो बुजुर्ग जो उस समझ इंस्पेक्टर से बात कर रहा था वो फिर से ठाकुर की बात सुनकर फफक कर रो पड़ा ..

“ठाकुर साहब रहम ,हम आपकी बात पर सहमत है लेकिन हमारी लड़कियों के साथ यू मारपीट ना किया जाए ,जो आपको पसंद है वो आपके हवेली भेज देंगे इस तरह घर को उजाड़ा ना जाए बस यही विनती है …”

एक दूसरा सरपंच हाथ जोड़े बोला ..

ठाकुर कुछ देर सोचता रहा 

“ह्म्म्म ठीक है लेकिन तुम्हारे गांव की हर लड़की को एक बार सबसे पहले मुझसे फिर मेरे सभी आदमियों से चुदना होगा,फिर अगर ठिक लगे तो उसे रखेंगे या भेज देंगे ,लेकिन हमारे बिना कोई लड़की जवान नही होगी ना ही कोई बहु यंहा हमारे हवेली में आये बिना अपने पति के घर जाएगी ...बोलो मंजूर ………”

मजबूरी की हद हो चुकी थी लेकिन फिर भी उसे सहने के अलावा उनके पास कोई चारा भी तो नही था ...सरपंचों ने एक साथ हा में सर हिलाया …
प्राण सिंह के होठो में एक शैतानी हँसी नाच गई ….
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05-13-2019, 12:31 PM,
#15
RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
इधर गांव में सरपंचों की बात आग की तरह फैल गई,पुरुष जमीदार के घर के नॉकर थे और महिलाये उनकी रखैल, ये ही उनकी नियति बन गई थी,
लेकिन इसे सभी तो स्वीकार नही कर सकते थे,बुराई जब अपने चरम में होती है तभी न्याय के लिए भी आवाज उठाई जाती है,विद्रोह के स्वर बुलंद होने लगे थे जिसमें सबसे ऊपर नाम था कालिया का…
सभी सरपंच जब सर गड़ाए बैठे थे तब कालिया दहाड़ रहा था,
“शर्म आती है मुझे तुम जैसे नपुंसको को अपना बुजुर्ग कहते हुए,उससे अच्छा अपनी बेटियों को मार ही डालो और साथ मे तुम लोग भी मर जाओ,यू नपुंसको की तरह जीने से तो कही अच्छा होगा कि तुम सभी मर जाओ,मुझे तुम्हारा फैसला स्वीकार नही है,तुम लोगो के हाथो में चूड़ियां होंगी लेकिन मैंने अपनी माँ का दूध पिया है और उसी दूध की कसम है मुझे किसी भी लड़की की ओर अगर ठाकुर या उसके आदमीयो ने छुआ भी तो उनके हाथ उखाड़ देंगे ,हम उनके खेतो में मजदूरी करते है उनके लिए फसल उगाते है,हमारी मेहनत से वो अमीर है और उसी पैसे के जोर पर हमारी ही इज्जत से खेल रहे है,कौन कौन मेरे साथ है हाथ उठाओ या नपुंसको की तरह अपनी जिंदगी चलाओ ,मेरे साथ आने पर तुम्हे अपना खून बहना पड़ेगा लेकिन मौत भी तुम्हारी शानदार होगी,”
कालिया के काले चहरे पर पसीने की बरसात हो रही थी,पूरा तन भीग चुका था,उसके एक एक शब्द मानो शोलो की तरह धधक रहे थे,गांव के कुछ नवजवान अपना हाथ उठाते है और उठकर कालिया के साथ हो जाते है,वँहा बैठे हुए बुजुर्ग बस देखते ही रहते है कि कैसे उनके बच्चे अपने हाथों में टंगिया भाले पकड़ कर ठाकुर के पिस्तौल का सामना करने निकल पड़े है,
महिलाएं जिन्होंने इन्हें दूध पिलाया था वो अपने बच्चों की बहादुरी पर अपना सीना फुलाये बैठे उन्हें दुवा दे रही थी लेकिन दिल के किसी कोने में वो डरी हुई भी थी,लगभग पूरे 3-4 गांव के कुछ जवान लड़के आगे आये ,
“उनके हाथो में बंदूख है और तुम्हारे हाथो में कुल्हाड़ी “
वही बुजुर्ग जो पुलिस स्टेशन में रोया था आंखों में पानी लाकर कालिया को देख रहा था
“बापू अब नही बहुत डर लिए हम लोग अब और नही ,उस ठाकुर ने तो हैवानियत पर उतर आया है,मैं मर जाना पसंद करूंगा लेकिन अपनी बहन और बीवी को उसके सामने नही परोसूंगा….”
कालिया की आंखे लाल थी लेकिन उसकी बात से घर के अंदर से झांकती उसकी बहन और बीवी की आंखों में भी पानी आ गया और दिल में कालिया के लिए सम्मान और भी बढ़ गया …
सभी युवक जो भी हथियार मिला उसे इकठ्ठा कर अपने अपने घरों में चले गए थे,लगभग सभी नवजवान कालिया के बात से सहमत था लेकिन वँहा कितने ही बचे थे ,सभी तो ठाकुर के पास बंधुआ मजदूर थे ,कुछ थोड़े से युवक गांव में थे …
रात की शांति में घोड़ो की आवाज ने सभी के कान खड़े कर दिए ,ठाकुर के हवस मिटाने के लिए उसके आदमी लड़की लेने आ चुके थे,आते ही उन्होंने दो तीन गोली आसमान में चला दी ,वो अभी सरपंच के ही घर के सामने थे जो की कालिया का पिता था ,
“अबे सरपंच निकल बाहर ,ठाकुर के पास कोई भी लड़की अभी तक क्यों नही पहुची …”
गरजती हुई आवाज से पूरा गांव ही गूंज गया ,नवजवानों ने पहले ही घात लगा लिया था ,वो बस इसी इंतजार में थे की कब वो लोग आये और उनपर हमला किया जाए ,20 युवक अपने हथियार के साथ कोई 10 बन्दूकधारी गुंडों का मुकाबला करने को तैयार थे ,कालिया ने एक पेड़ के ऊपर से अपने साथी को संकेत किया और उसके साथी जहर में अपने तीर को डूबा कर सीधे उस हट्टे कट्टे गुंडे के ऊपर निशाना साधा लेकिन चलाया नही ,तब तक बाकी के तीरंदाज भी अपने अपने जगह पर तीर कमान सम्हाले खड़े हो चुके थे ,कालिया के एक इशारे पर वँहा तीरों की बारिश को गई ,चीखे गूंजने लगी थी की कुछ युवक कुल्हाड़ी और लोहे के रॉड लेकर गुंडों के ऊपर टूट पड़े ,सभी इतने गुस्से में थे की उनके धड़ो से सर अलग कर भले की नोक मे लगा दिया गया था ,उत्साह उन्माद में बदल गया था और अपनी पहली जीत पर कालिया खून को अपने चहरे में मल रहा था ,,
सालो की दासता का अंत और आजादी की शुरुवात का जश्न मनाया जा रहा था ,घोड़े और बंदुखों को अपने पास रख लिया गया और एक घोड़े पर उसी गुंडे के सर को बांधकर ठाकुर के हवेली की ओर भेज दिया गया ……
पूरे गांव में मानो खुसी की लहर दौड़ गई थी ,लेकिन एक बूढ़ी आंख अभी भी चिंतित थी ,वो कालिया के पिता और गांव के सरपंच थे और कालिया के इस विद्रोह से उठाने वाली कत्लेआम को सोच कर सिहर जा रहे थे ………..
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05-13-2019, 12:32 PM,
#16
RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
कालिया की एक हरकत ने आग की ज्वाला भड़का दी थी ,रातों रात ये चर्चा आम हो चुकी थी कि किसी गांव के नवजवानों ने ठाकुर के लोगो को मार डाला ,और ना सिर्फ मारा बल्कि एक गाला काट कर ठाकुर को भी भेज दिया ,
इस हरकत से बाकी के सभी गांव के उन युवकों में जो की अभी ठाकुर की मजदूरी करते थे अब वो भी अपनी कायरता का अहसास करने लगे थे,
उन्हें भी लगने लगा था की वो अपने घर की औरतो की इज्जत को बचने के लिए अपनी जान भी दे देंगे ,और ठाकुर के बंधवा मजदूरों ने रातों रात ही विद्रोह कर दिया ,ठाकुर के कई लोग मारे गए वही ठाकुर ने भी अपना जोर लगाना शुरू कर दिया था ,उसने पुलिस की भी मदद ली और पुलिस ने आकर मजदूरों पर गोलियां चला दी जिससे कुल्हाड़ी और तीर कमान रखे कई लोग मारे गए ,खूनी खेल को वही दबा दिया गया और सरकारी तंत्र को पैसा और ख़ौफ़ के बल में ठाकुर ने खरीद लिया ,एक जीत से ठाकुर भी अहंकारी हो गया था और अब वो पुलिस की सहायता से कालिया और गांव वालो को सबक सिखाना चाहता था …….
इधर 
“कालिया हमारी देखा देखी ठाकुर के पास रह रहे मजदूरों भाइयों ने भी ठाकुर के लोगो पर हमला कर दिया लेकिन सभी मारे गए ,ठाकुर के 20 लोगो को मार दिया था लेकिन ठाकुर ने पुलिस बुला दी और हमारे भाइयों को गोलियों से छल्ली कर दिया गया ,लगभग 50 मजदूर मारे गए …...कई घायल भी है ,एक ही रात में सब हो गया ,और आज इंस्पेक्टर और ठाकुर के लोग हमारे ऊपर टूटने वाले है ,हमारे एक फैसले से तबाही ही तबाही मचने वाली है ……”
कालिया अपने साथी की बात से गंभीर हो गया था ,अभी 3 घंटे ही हुए थे उसे ठाकुर के लोगो को मारे हुए रात अभी भी बाकी थी और उनके पास सिर्फ 10 बन्दूखे थी ,वही ठाकुर के पास पूरी फ़ौज थी ,अब कत्लेआम होना स्वाभाविक था ,साथ ही उसे अपने परिवार का भी डर था ,गांव की और भी लड़कियों का भी डर था ,लेकिन वो अपने फैसले से मुकर भी तो नही सकता था ,ना ही डरने का समय था ,अब तो उसे मासूम जिंदगियों को लूटने से बचना था ……..
वो उठा 
“इससे पहले की वो हमपर हमला करे हमे उनपर कर देना चाहिए ,उन्हें मौका ही नही देना है सम्हालने का …”
कालिया ने अपने दोस्तो को तुरंत ही इकठ्ठा किया जिनकी संख्या अब और भी बढ़ गई थी ,वो 20 से 50 हो चुके थे आसपास के गांव के लोग भी उनके साथ हो चुके थे ,वो कुछ को गांव में छोड़कर अपने बाकी साथियों के साथ निकल गया ,उसका अगला मुकाम था पुलिस स्टेशन …
इंस्पेक्टर ने पहले ही पास की बटालियन से सिपाही बुला लिया थे …
“कालिया आज तो खून की होली खेलने वाले है ये लोग,देखो पुलिस के कितने लोग है सभी तैयारी कर रहे है साथ ही ठाकुर के भी आदमी है ,सभी हमारे गाँव की ओर जाने वाले है …”
कालिया के साथी की बात से सभी थोड़े डर गए थे ,लेकिन कालिया के चहरे में शिकन तक नही थी ,उन जैसे पुलिस के लोगो में से एक को पहचान कर अपने दोस्तो से कहा ,
“ये तो तिवारी भैया है ना ...पास के गांव वाले ,इन्हें कैसे भी करके मेरे पास लाओ “
“कालिया वो भी अब पुलिस वाला है “
“तो क्या हुआ है तो हमारे ही बीच के हमारी बात को समझ पाएंगे ,आखिर इनकी भी तो बहु बेटी,मा होगी जिनकी इन्हें फिक्र हो “
थोड़े देर में ही एक कंकड़ से तिवारी का ध्यान आकर्षित किया गया और जैसे ही तिवारी ने गांव के लोगो को देखा वो किसी बहाने से झड़ियो के पास आ गया 
“भइया गांव वालो की जिंदगी आपके हाथो में है “
तिवारी कालिया को बेहद ही गुस्से से घूर रहा था 
“ये सब कुछ तुम्हारे कारण हो रहा है और मैं क्या कर सकता हु मैं एक छोटा सा सिपाही ही तो हु “
“आप ही सोचो की अगर आपके बहन पर ये बात आती तो आप क्या करते ,भैया साथ दीजिये आप बहुत कुछ कर सकते हो “
तिवारी सोच में पड़ गया था 
“मुझे बस इंस्पेक्टर तक पहुचाइए,ये इंस्पेक्टर ही है जो की ठाकुर का कुत्ता है अगर वो ही खत्म हो जाए तो पुलिस भले ही हमे ढूंढेगी लेकिन यंहा तुरंत ही बड़े अधिकारी जरूर आ जाएंगे और ठाकुर कुछ भी नही कर पायेगा ,”
तिवारी जैसे आग बबूला हो गया 
“सालो तुम अपने को समझते क्या हो ,बड़े अधिकारी को क्या ठाकुर नही खरीद सकता गांव के गांव तुम्हारे कारण खत्म कर दिए जाएंगे “
“हा लेकिन अगर उन्हें पता हो की मैं कहा हु तो वो मुझे ढूंढेंगे ना की गांव वालो को परेशान करेंगे ,और अगर साथ में अखबार वाले भी हो जाए तो सब कुछ ठिक हो जाएगा “
तिवारी सोच में पड़ गया था 
“अगर आज रात तक इन्हें गांव में जाने से रोक लिया जाए तो एक आदमी है जो की हमारी मदद कर सकता है ..”
तिवारी को जैसे कुछ याद आ गया था 
“कौन है एक सनकी लेकिन काम का आदमी मैं उसे शहर में मिला था वो तुम्हरी मदद जरूर कर सकता है ,वो अगर आ जाए हमारे साथ तो पुलिस गांव में जाकर तबाही नही करेगी लेकिन हा तुम्हे जरूर यंहा से कही दूर भागना पड़ेगा “
सभी मिलकर एक प्लान बनाते है 

*************
“हजूर इतनी रात को ठाकुर का काम हद हो गई …”तिवारी इंस्पेक्टर के पास आकर कहता है 
“क्या करे इस साले की नॉकरी भी बजानी पड़ती है ,पैसा तो यही देता है…चलो गांव में धावा बोलने की तैयारी करो आज तो मजा आ जाएगा ,गांव की हर औरत को नंगा करूंगा वो भी अपने हाथो से “
इंस्पेक्टर की हैवानियत भरी हँसी सुनकर तिवारी को ऐसा लगा की अभी उसे जान से मार दे लेकिन फिर भी उसने खुद को काबू में कर लिया था……..
“हजूर वो सब तो ठिक है लेकिन गांव के लोग भड़क गए तो हमारी खैर नही”
तिवारी की बात सुनकर इंस्पेक्टर को जोरो से हँसी आयी 
“वो साले गवार हमारा क्या कर लेंगे ,हमारे पास ताकत है और ठाकुर के आदमी भी तो हमारे साथ है “
तिवारी जबरदस्ती हंसा 
“वो तो है ,क्यो ना जाने से पहले थोड़ा सा जश्न मना लिया जाय ,साले गांव वाले रातों रात गांव छोड़कर जाने के फिराक में थे हमने पकड़ लिया ,एक मस्त लौंडिया हाथ आ गई है “
तिवारी की बात सुनकर इंस्पेक्टर की आंखों में चमक आ गई 
“कहा है “
“खास हुजूर के लिए छिपा के थाने के पीछे झड़ियो में रखी है ,अगर इन लोगो के हाथो में आ गई तो सोच लो क्या हाल होगा “
इंस्पेक्टर ने तिवारी की तारीफ की और एक शराब की बोलत से दो घुट पीकर सीधे ही झड़ियो की तरफ सब से नजर बचा कर चल दिया ,...
“उह उह “इंस्पेक्टर कुछ बोलना चाहता था लेकिन उसके मुह से कुछ भी नही निकल पा रहा था ,कालिया ने उसके मुह को जोरो से दबोच लिया था ..
‘खचाक ‘
चाकू की नोक इंस्पेक्टर के पेट में घुसी और पूरी अंतड़ियों के साथ बाहर आ गई ,साथ ही एक जोर का वार उसके गले में किया गया और लहू की धार का एक फुहारा सा फुट गया …
इंस्पेक्टर तड़फता हुआ जमीन में गिर पड़ा …….
घोड़ो के आवाज से सबका ध्यान उस ओर गया ..
“वो देखो साले भाग रहे है”
तिवारी ने जोरो की आवाज लगा दी ,ठाकुर के आदमी के साथ साथ पुलिस वाले भी उस ओर देखने लगे ,
“ये साले है कौन और यंहा क्या कर रहे है …”
एक हफते हुए पुलिस वाले ने पूछा ..
तिवारी अपने चहरे की मुस्कान को बड़ी ही मुश्किल से रोक पाया था ..
“क्या पता ऐसे इंस्पेक्टर साहब कहा है …”तिवारी ने जोरो से कहा ,सभी लोग इंस्पेक्टर को ढ़ंढने लगे कुछ ही देर में उसकी लाश भी मिल गई ,तिवारी ने जल्दी से हेडक्वार्टर को फोन लगा दिया ,इससे पहले कोई कुछ समझ पता तिवारी फिर से चिल्लाया 
“सालो तुम लोग कर क्या रहे हो पीछा करो उसका “
कालिया अपने घोड़े में बहुत दूर निकल चुका था ,घने जंगल में जो घोड़े ठाकुर के आदमियों के पास थे वो उनमे ही भाग पड़े,अब बस पुलिस वाले बच गए थे ,इंस्पेक्टर की इस तरह से मौत की खबर से महकमे में हड़कंप मचा दिया था और SP खुद हाल जानने के लिए निकल पड़ा था ,ठाकुर भी ये सुनकर चिंतित हो गया था क्योकि उसे गाँव को तबाह करना था और उसके सारे आदमी किसी अनजान व्यक्ति के पीछे भाग रहे थे ……
***********
घने जंगलों में ठाकुर के आदमी कालिया का पीछा करते हुए खो से गए थे दूर दूर तक कही भी उसका कोई निशान नही दिख रहा था ,बस घोड़ो की आवाज आ रही थी ,बड़े बड़े पेड़ और अंधेरे में वो जैसे रास्ता ही भटक गए हो ,अब घोड़े धीरे हो चुके थे और वो वापस जाने की सोच रहे थे लेकिन उन्हें नही पता था की वो एक जाल में फंस चुके है जिसे कालिया और तिवारी ने मिलकर बनाया है …
अचानक एक रस्सी से लटकता हुआ पत्थर का गोला आया और सीधे एक घुड़सवार के सर को चकनाचूर कर दिया …
वो चीख भी नही पाया था की उसका शरीर धड़ाम से गिर गया …
सभी लोग पलटे और उसकी ये दशा देख कर अंधाधुन गोलियां चलाने लगे …
कुछ देर में ही वँहा शांति थी …
“मुझे तो लगता है की कोई हमे फंसा रहा है “
एक आदमी धीरे से दूसरे से बोला कि अचानक ही कई तीर आकर सीधे लोगो के सरो के आरपार होने लगे ,बस तीरों की आवाजे आ रही थी जो की बेहद वेग से और पास से चलाई जा रही थी ,घने जंगल के सन्नाटे को चीख जैसे चिर रहे थे ……
फिर से गोलियां चलाई गई लेकिन सब बेकार ……
बचे हुए लोग अपने घोड़े से उतर कर जमीन में आ गए थे ख़ौफ़ से उनका जिस्म और मन कांप रहा था ,
“कौन है कौन है …”
एक हट्टा कट्टा आदमी जो कभी ठाकुर के संरक्षण में गरजता था आज किसी चूहे की तरह बोल रहा था ,
कालिया गरजा 
“तेरा और ठाकुर का काल हु मैं मादरचोद …”
‘धाय ‘उसने पहली बार गोली चलाई और सीधे उसका सर उड़ा दिया फिर से तीर चलने लगे और बाकी के लोग भी कीड़े मकोड़े की तरह उस जाल में मर गए …………
सभी बन्दूखे और घोड़े उठा ली गई ,अब कालिया के पास अच्छे खासे हथियार थे और घोड़े भी ,लेकिन उसका सबसे बड़ा हथियार था जो की आज ही उसे पता चला था वो था ये जंगल …
जंगली होने का जो फायदा उसे आज मिला था उसे वो अच्छे से समझता था जंगल के अंदर उसे हराना किसी के लिए भी बहुत मुश्किल होने वाला था क्योकि वो सभी इस जंगल में ही बड़े हुए थे ,अब वक्त था ठाकुर की सत्ता को गिरने का लेकिन उससे पहले कालिया को अपने परिवार को भी बचाना था ………..
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05-13-2019, 12:32 PM,
#17
RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
तिवारी की बात सुनकर अजय जैसे नींद से जागा …
वो अभी शराब के नशे में था लेकिन इतना भी नही की उसे कुछ समझ ना आ रहा हो वही तिवारी नशे में कुछ ऐसा कह गया था जो उसे नही कहना चाहिए था …
“तो तिवारी जी अपने कालिया की मदद की जो बाद में सब के सर का दर्द बना था ,कालिया डाकू ,,,मोंगरा का गुरु कालिया ????”
तिवारी को अपनी गलती का अहसास तो हुआ लेकिन फिर भी बोले हुए शब्द तो वापस नही लिए जाते …
“हा साहेब लेकिन आप ही सोचो की उस समय मैं कर भी क्या सकता था वो इंस्पेक्टर भी कमीना था और ठाकुर तो है ही कमीना अगर कालिया ने हथियार नही उठा लिया होता तो वो गांव की सभी औरतो को धंधे वाली बना देता …”
तिवारी की बात से अजय के दिल में ठाकुर के लिए एक बहुत ही तेज नफरत का भाव जागा लेकिन उसे पता था की उसकी ड्यूटी क्या है और अब उसे ये भी पता चल गया था की डाकुओं को पुलिस की तरफ से मदद करने वाला कौन है …
“हम्म तो तिवारी जी अपने जो किया सही ही किया शायद आपकी जगह मैं होता तो मैं भी यही करता ….”
अजय ने एक घुट अंदर किया ..वो तिवारी से सच उगलवाना चाहता था और सच तभी बाहर आता जब तिवारी को लगता की उसकी बात का अजय पर सही असर हो रहा है …
“तो तिवारी जी वो शख्स कौन था जिसने गांववालो की पुलिस से बचने में मदद की और क्या इसके बाद भी ठाकुर ने गांव में दहसत फैलाने की कोशिस की “
तिवारी एक गहरी सांस लेता है और पास रखे बोतल से एक जाम बना कर अपने हलक के अंदर करता है …
“ह्म्म्म साहब वो शख्स तो उसी दिन आ गया ,sp साहब और ठाकुर भी पधारे ठाकुर ने अपना रंडी रोना रोया और कुछ पैसे sp की झोली में डाल दिए ,लेकिन डॉ चुतिया जी तब तक पधार चुके थे …”
“डॉ चुतिया ?????? वो जो की आजकल प्रेस खोलकर बैठे है ”
अजय की आंखे बड़ी हो गई थी …
“हा वही पहले तो युवा दल के नेता हुआ करते थे ,मेडिकल की पढ़ाई हो चुकी थी लेकिन फिर भी छात्र संघ में बड़ा दबदबा था ,मैं उन्हें पहले ही मिल चुका था ,उन्हें एक फोन करने की देरी थी की वो खुद भी पधार गए और साथ ही अखबार के लोगो को भी ले आये ,बेचारे sp चाहते हुए भी कुछ नही कर पाए लेकिन फिर भी कई गांव वालो से पूछताछ की गई और जो सामने आया वो सब अखबारों की हेडलाइन बन गई ठाकुर के सारे कारनामो का भांडा फुट गया,ठाकुर जैसे गांव के लोगो को भूल ही गया था क्योकि केंद्र से भी उसके ऊपर प्रेसर आने लगा था,वो खुद को बचने में ही लगा रहा लेकिन फिर भी उसकी दहसत कम नही हो रही थी आखिर पुलिस भी तो उसकी ही थी ,लेकिन फिर भी वो चुप ही था,”
अजय तिवारी की बातो को ध्यान से सुन रहा था ,की दिन की पहली किरण ने खिड़की से दस्तक दी …….
दोनो के सर भारी हो रहे थे और आंखे बंद होने लगी थी…


*************
दोपहर जब अजय उठा तो तिवारी जी जा चुके थे ,अजय के मन में रात की सब बाते गूंज गई थी …
आखिर कालिया और मोंगरा का संबंध क्या है ???
वो इसी सोच में डूबा हुआ तैयार हुआ और पुलिस स्टेशन चला गया ,तिवारी जी आज नजर नही आ रहे थे …
“तिवारी जी कहा है ..??”
अजय ने एक दूसरे कांस्टेबल से पूछा 
“क्या पता सर कह के गए है की अगर सर आये तो उन्हें बोल देना की चम्पा ने याद किया है घर आयी थी लेकिन सोए थे …”
जैसे अजय के लिए इस थाने में दो ही केस थे एक ही चम्पा और दूसरी मोंगरा ,,लेकिन वो बेचारा तो अब खुल कर प्यार भी नही कर सकता था क्योकि उसे ये भी नही पता था की आखिर चम्पा कौन है और मोंगरा कौन है ……….
वो वही झरने के किनारे पहुचा ,
दोपहर का समय था और बहुत ही गहरी शांति वँहा फैली हुई थी ..
वँहा उस समय कोई भी नही था वो जाने को पलटा ही था की उसे चिरपरिचित झम झम की आवाज आनी शुरू हो गई उसके चहरे में एक मुस्कान खिल गई ,वही जंगल के लिवास में आयी हुई वो परी उसके सामने थी ,अजय के मन की हर शंका जाने कहा भाग चुकी थी वो जो भी हो लेकिन अजय उससे बस वैसे ही प्यार करना चाहता था ,उसके नशीले आंखों की मस्तियो में खो जाना चाहता था,उसके उन्नत वक्षो से दूध चखना चाहता था ,उसके भरे हुए होठो के मदमस्त प्यालों से झलकती हुई शराब को पीना चाहता था ,उसके रेशमी लहराते हुए केशुओ में उलझना चाहता था ,उसके कमर के नीचे और जांघो के बीच की छोटी सी सुराही को सोच कर अजय के तन मन में एक आग दौड़ गई ,वो मन ही मन सोचने लगा 
‘मा चुदाये वो कोई भी हो मुझे क्या दोनो ही तो मुझे कितना प्यार देती है और दोनो का ही प्यार तो मुझे सच्चा लगता है क्यो ना मैं दोनो के साथ हो लू ,और साथ रहकर ही जानने की कोशिस करू की वो कौन है …’
अजय की वासना उसपर हावी थी ??? नही सिर्फ वासना नही बल्कि वो प्यार जो उसे इन लड़कियों से मिला था ,जो उसे जमाने में कही नही मिल पाया था ,वो सिर्फ जिस्म का सुख नही था जिस्म के ऊपर भी मन के ऊपर भी वो रूह तक की संतुष्टि उसे मिली थी वो इसे यू ही नही खोना चाहता था सिर्फ इसलिए की उसे नही पता की वो कौन थी …
वो उसे प्यार भरी निगाहों से आते हुए देखता रहा ..
वो मचलते हुए उसके पास आ रही थी उसके कमर की हर लचक में अजय का दिल भी मचल जाता था,वो पास आई इतना की दोनो की सांसे ही टकराने लगी और 
चटाक …
एक जोरदार तमाचा अजय के गालो में पड़ा ,चम्पा के आंखों में आंसू थे ..
अजय चम्पा के इस कारनामे से हड़बड़ा ही गया था …
“क्या क्या हुआ तुम्हे “
“क्या हुआ पूछते हो शर्म नही आती तुम्हे मेरी बहन के साथ ...छि ..वो भी उस नागिन के साथ जिसे पकड़ने तुम आये हो मैने रात में ही तुम्हे उसके साथ देखा था ,तुम और वो छि …”
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05-13-2019, 12:32 PM,
#18
RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
अजय का दिल जोरो से धड़कने लगा ..
वो झल्ला गया था 
“क्या छि कह रही हो मुझे कैसे पता चलेगा की कौन मोंगरा है और कौन चम्पा तुम दोनो ही तो एक जैसी दिखती हो तो क्या इसमें भी मेरा ही दोष है ..”
अजय जोरो से बोला था जिससे चम्पा दहाड़ मार कर रोने लगी ..
“वो कुतिया कभी नही चाहती की हमारा मिलन हो इसलिए उसने कल गोली चलवाई थी मुझे तो पहले ही शक था लेकिन तुम्हे उसके साथ देखकर ….”
“अरे पगली तो तुमने उसी समय क्यो नही बतलाया “
“कैसे बताती तुम्हे उसके साथ देखकर मेरा तो खून ही जल गया था ,”
चम्पा ने इतनी मासूमियत से कहा की अजय का दिल उसके लिए पिघल गया और वो उसे अपने आगोश में खिंच लिया 
“कुछ कहने की जरूरत ही नही तुम्हे सोच रहा हु की तुम्हे एक ऐसी चीज दे दु जो सिर्फ तुम्हारे पास रहे “
अजय की बात से चम्पा के चहरे में शर्म के भाव गहरा गए ,और वो दबी हुई हँसी में हँसने लगी 
“ऐसे क्यो शर्मा रही हो “
अजय को भी थोड़ा आश्चर्य हुआ की आखिर उसने ऐसा क्या कह दिया था ,
“क्यो ना शरमाऊं तुम बात ही ऐसा कर रहे हो ,”अजय फिर से चकरा गया 
“और अभी मैं मां नही बनूंगी वो सब शादी के बाद “
ओह तो ये पगली ये चीज सोच कर बैठ गई थी ,अजय को चम्पा की बात और सोच पर हँसी आयी लेकिन साथ ही साथ बहुत सारा प्यार भी आया ,उसने चम्पा को और भी जोरो से जकड़ लिया 
“अरे पगली मैं बच्चे की बात नही कर रहा कोई ऐसी चीज जो तुम मुझे बोलो तो मुझे पता लग जाए की वो तुम हो कोई और नही “
चम्पा का चहरा जैसे मुरझा गया जिसे अजय समझ भी गया 
“तो मेरी रानी को बच्चा चाहिए “
चम्पा ने हाथों से उसे मारा 
“हर लड़की चाहती है की वो मां बने खासकर जिसे मा बाप का प्यार नसीब नही हुआ हो ,...”उसकी आंखों में आंसू आ गए थे 
“ओह मेरी जान ...मैं तुम्हे दुनिया की हर खुसी दूंगा बस पहले वो तुम्हारी बहन मेरे हाथ लग जाए ,बहुत सर दर्द कर रखा है उसने “
“हा जब उसे चूम रहे थे तब तो सर दर्द नही दे रहा था तुम्हारा “
चम्पा का मुह फिर से फूल गया था ,अजय को उसपर हँसी आ गई और उसने उसके होठो पर अपने होठो को रख दिया जिसे धीरे धीरे करके ही सही लेकिन चम्पा भी चूमने लगी थी …
“जान 4577 “
“ये क्या है ..”
“जब तुम ये बोलोगी तो मैं समझ जाऊंगा की ये तुम ही हो मोंगरा नही “
चम्पा के चहरे में मुस्कान आ गई और उसने अजय के सर को जोरो से पकड़ कर उसे अपनी ओर खिंच लिया ,दोनो के होठो मिल गए थे जो की बहुत देर तक मिले ही रहे ,लार एक दूसरे से लिपटने लगी थी और चम्पा के जिस्म के एक मात्रा कपड़े को अजय उतारने लगा था ,देखते ही देखते दोनो के जिस्म नंगे हो चुके थे और दोपहर के सही भी दोनो नंगे जिस्म दुनिया की परवाह किये बिना ही झील में उतर गए थे……….
सांसे तेज हो रही थी और जिस्म की तड़फन बढ़ने लगी थी …
अजय ने चम्पा के गले में किस किया चम्पा के शरीर में जैसे कोई करेंट दौड़ गया था ,वो अजय को और भी जोरो से जकड़ने लगी थी ….
चम्पा के कमर के नीचे की गोल गोल चूतड़ों में हाथ फेरते हुए उसके कोमलता के अहसास से अजय की आंखे बंद हो रही थी ,वही हाल चम्पा का भी था,
वो भी मदहोश सी हो रही थी,आंखे तो दोनों की ही बंद थी और सांसे तेज ,धडकनों की शहनाईयां भी तेजी से बज रही थी,चम्पा को भी अजय के लिंग का अहसास हो रहा था जो उसके उन्नत कुलहो पर हलके हलके चोट कर रहा था,इस घिसाई का मजा लेते हुए दोनों ही भूल गए थे की वो झील में गले तक चले आये है ,दोनों ही जिस्म नंगे थे और पानी के ठंडक में भी गर्म हो रहे थे ,दोनों के ही पाँव गहराई की और जा रहे थे,पानी उन्हें सर तक डुबो गया था लेकिन हाय रे उस मोहोब्बत का नशा की किसी को होश भी नही था ,दोनों के होठ एक दूजे से मिल चुके थे और एक दूजे की जीभ को लपेटते हुए वो मुह की गहराई में जा रहे थे,सांसे बंद होने लगी तो वो एक दूजे के मुह से साँस लेने लगे थे ,चम्पा पलती और अजय के सीने में दबती चली गई ,एक दुसरे को उन्होंने मजबूती से जकड़ रखा था ,पानी के अंदर होने से साँस लेने में दिक्कत आने लगी थी लेकिन कोई भी दुसरे को छोड़ने को तैयार नही था ,और अजय ने अपने लिंग को चम्पा के योनी में धसाना शुरू किया और चम्पा का मुह खुल गया झील का ताजा पानी उसके मुह में भर चूका था जिसे उसने अगले ही पल अजय के मुह में धकेल दिया था ,
दोनों ही थोड़े बहार आये ताकि साँस ले सके ,जिस्म एक दुसरे में गड़े जा रहे थे ,कमर हलके हलके ही चल रही थी लेकिन स्वर्ग का सुख दे रही थी ,लिंग और योनी का घर्षण अभी भी पानी के अंदर ही हो रहा था,अजय ने चम्पा के कुलहो को दबोच रखा था वही चम्पा भी अपने हाथो से अजय के कुलहो को अपनी ओर और भी ज्यदा सटा रही थी ,
जब कमर ने रफ़्तार पकड़ी तो अजय चम्पा को गोद में उठा कर किनारे में ले आया और रेत में लिटा कर उसके उपर छा गया…
“आह मेरी जान ओह जान ओह “
चम्पा के मुह से सिस्कारिया निकलने लगी थी ,अजय भी उसके गालो को अपने दांतों से खा रहा था उसके वक्षो को अपने मुह में भरे जा रहा था और अपने कमर की गति को तेज और तेज किये जा रहा था ,दोनों के जिस्म भीगे हुए थे लेकिन फिर भी जिस्म की घर्षण से उत्पन्न पसीने से भी भीगे जा रहे थे …
होठो से लार बह कर एक दुसरे के जिस्म को और भी चिपचिपा कर रहे थे,सांसे जैसे अटकने को थी और दिल की धड़कने मानो रुकने को हो गई थी ,
दोनों ही अपने चरम पर आ चुके थे और बस झरने ही वाले थे ,
“मुझे भीगा दो मेरे राजा ,अन्दर तक भीगा दो मई आपकी गुलाम बन कर जीना चाहती हु”
चम्पा अपने चरम में पहुच कर अजय से आग्रह करने लगी जिससे अजय के जिस्म ने भी अपना बांध तोड़ दिया और तेज धारा के साथ चम्पा की योनी में बहता चला गया …………….
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05-13-2019, 12:32 PM,
#19
RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
अजय और चम्पा किसी मनोहर सपने में खोए से झरने के किनारे गीले रेत में लेटे हुए थे ,एक दूसरे के जिस्म को सहला रहे थे मानो दुनिया में बस यही एक चीज है जो उनके लिये हो..
लेकिन सपना तो आखिर सपना ही होता है ,कभी ना कभी तो उसे टूटना ही होता है ,
दोनो के जिस्म अभी भी पानी में थोड़े डूबे हुए थे और थोड़े बाहर ,,अजय के तेज धक्के के कारण वो फिसलते हुए पानी में आ गए थे …
दोपहर का समय था और धूप की तेजी अब बदन को जलाने लगी थी ,अजय चम्पा को उठाकर एक पेड़ के नीचे ले आया साथ ही अपने कपड़ो को भी ,ऐसे तो चम्पा बदन में एक ही कपड़ा पहनती थी वो उसकी कुछ मीटर की साड़ी ..
अब अजय चम्पा की गोद में लेटा हुआ था और चम्पा उसके बालो को सहला रही थी ….दोनो ही किसी दुनिया में खोए हुए थे की अजय बोल पड़ा ..
“चम्पा आखिर ऐसा क्या हुआ था मोंगरा एक डाकू बन गई और तुम यंहा आ गई “
उसकी बात सुनकर चम्पा थोड़े देर के लिए चुप हो गई …
और अजय के बालो में उंगलियां फसाये सहलाती रही ,अजय के गालो में उसके आंखों का पानी आ टपका ,अजय उठ खड़ा हुआ और चम्पा के गालो को दोनो हाथो से पकड़ लिया और उसके गालो में अपने होठ लगा कर उसके आंखों से झरते हुए खारे पानी को अपने होठो से अंदर कर लिया …
“मेरी जान अगर तुम्हे इस बारे में बात नही करना है तो मैं तुमसे कुछ भी नही पूछूंगा “
अजय ने गंभीरता से कहा जिससे चम्पा के होठो में भी एक मुस्कान आ गई और वो उससे लिपट गई ..
“क्या बताऊँ यही तो समझ नही आता ,ठाकुर की ज्यादतियों के बारे में बतलाऊ या फिर मोंगरा के जिस्म की भूख के बारे में,या मेरे पिता के बदले के बारे में या मेरी माँ की फूटी हुई किस्मत के बारे में क्या क्या बतलाऊ तुम्हे कुछ समझ नही आता ……”
इतना कह कर चम्पा तो चुप हो गई लेकिन अजय को जैसे एक बहुत ही बड़ा शॉक लग गया ,ये चम्पा क्या कह रही थी ..
वो चम्पा की आंखों में झांकने लगा 
“मुझे सब कुछ ही जानना है …..”
इस बार चम्पा अजय के गोद में लेट गई और अजय उसके बालो को सहलाने लगा ..
चम्पा ने बोलना शुरू किया 

चम्पा की जुबानी आगे की कहानी 

ठाकुर के आतंक की सीमा बढ़ने लगी थी वो हमारे गांव और आसपास के गांव की बहु बेटियों को अपने हवस का शिकार बनाने पर तुला हुआ था ,पुलिस भी उसके साथ थी वो ज्यादती पर उतर आया था तभी मेरे पिता ने ठाकुर के खिलाफ हथियार उठा लिया ..
मेरे पिता गांव के सरपंच के बेटे थे और बहुत ही बहादुर और गुस्सेल थे उनका नाम था कालिया जो की बाद में कालिया डाकू के नाम से प्रसिद्ध हुए …
वो जब गांव छोड़कर जंगलों में गए तब उनकी नई नई शादी हुई थी,मेरी माँ देखने में बहुत ही सुंदर थी पिता जी उससे बहुत प्यार करते थे लेकिन ठाकुर से विरोध करने पर उन्हें गांव छोड़कर जंगल में जाकर रहना पड़ा था ,वो वही से ठाकुर के खिलाफ साजिश रचा करते थे ,उन्होंने ठाकुर को फंसा दिया था उनका साथ कांस्टेबल तिवारी और डॉ चुतिया दे रहे थे……

फ़्लैशबैक स्टार्ट 
कालिया के विद्रोह से ठाकुर की मानो रीढ़ ही टूट गई थी ,जो लोग उसके वफादार थे कालिया उन्हें ढूंढ ढूंढ कर मारता था ,ठाकुर बौखला गया था और कालिया के परिवार पर हमला करना चाहता था लेकिन कालिया को मानो पहले से पता था की वो उसके परिवार को निशाना बनाएगा इसलिए उसने अपने परिवार को अपने पास बुला लिया था ,लेकिन जंगल की भागादौड़ी और भयानक माहौल में वो अपने परिवार को नही रख सकता था,खासकर उसकी फूल सी पत्नी और बहन दोनो जवान लडकिया जिसे कालिया सबसे ज्यादा प्यार करता था लेकिन ये ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी थे, इनके इज्जत की रक्षा करना उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती भी थी ,वो उन्हें एक आदिवासी काबिले के सरदार के पास रख कर अपना काम किया करता था ,..
इधर 
ठाकुर ने कई नए लोगो को अपने साथ शामिल करना शुरू कर दिया ताकि वो कालिया का मुकाबला कर सके और उसमे सबसे खास था परमिंदर ..
परमिंदर बहुत ही सुलझा हुआ व्यक्ति था जो की ताकत में किसी से कम नही था ,वो ठाकुर के एक दोस्त के पास काम किया करता था वो शादीशुदा था और उसका एक बेटा भी था जिसका नाम बलवीर था (जो बाद में मोंगरा के गिरोह में जा मिला ) परमिंदर के पास ताकत के साथ साथ दिमाग भी तेज था इसलिए ठाकुर उसे पसंद करने लगा था ,परमिंदर की सूझ बुझ ने ठाकुर को कारोबार में बहुत फायदा पहुचाया था लेकिन उसकी असली परेशानी थी कालिया ……
“ठाकुर साहब मेरी बात मानो तो कालिया के बारे में सोचना छोड़कर आप उसके बीवी और बहन को ढूंढो “
परमिंदर ठाकुर के लिए जाम बना रहा था ,
“लेकिन कैसे साले ने ना जाने कहा उन्हें छिपा कर रखा है मिलती ही नही “
“तो कोई मुखबिर कालिया के गिरोह में क्यो नही भेज देते आप ऐसे लोगो की कमी तो नही जो पैसे के लिए अपने गांव से दगा करेंगे “
ठाकुर ने एक नजर परमिंदर की ओर देखा 
“तुम्हे क्या लगता है की मैं गांव वालो को तकलीफ देता हु “
परमिंदर जोरो से हँस पड़ा 
“मैं स्वामिभक्त हु ठाकुर साहब जो बोलोगे करूंगा चाहे वो सही हो या गलत लेकिन मुझे पता है की कालिया क्यो डाकू बना है ,आप किसी डाकू से नही लड़ रहे हो आप अपने अहंकार से पैदा हुए हैवान के कारण मिले श्राप से लड़ रहे हो …”
परमिंदर की बात सुनकर ठाकुर कुछ देर के लिये बस उसे देखता रहा लेकिन कुछ भी ना कह सका क्योकि वो जानता था की परमिंदर सही कह रहा है और साथ ही ये भी जानता था की उससे ज्यादा खुलकर कहने वाला और सही सलाह देने वाला साहसी आदमी उसे नही मिलेगा ….
परमिंदर की सलाह मानकर ठाकुर ने एक आदमी ढूंढ ही लिया और कालिया के गिरोह में उसे शामिल भी करवा दिया ..
और वही हुआ जो की ठाकुर चाहता था कालिया की कमजोरी का पता ठाकुर को चल गया था ……….
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05-13-2019, 12:32 PM,
#20
RE: vasna story जंगल की देवी या खूबसूरत डक�...
“हम कहा है तुम लोग कौन हो ,और हमारे कपड़े ...ये किसने बदले ”
डरे हुए आवाज में कनक(कालिया की बहन ) कह रही थी..
पास ही बैठी रोशनी (कालिया की बीवी) भी डरी हुई थी लेकिन उसे सब कुछ समझ आ रहा था की आखिर उनके साथ क्या हुआ है ,वो एक बड़े से कमरे में थे जंहा बीचों बीच फूलों से भरा हुआ बड़ा सा बिस्तर था,पास ही सेविका के रूप में खड़ी हुए कुछ 5 लडकिया थी ,
कनक और रोशनी दोनो के ही आदिवासी महिलाओं के कपड़े निकाल दिए गए थे उन्हें नई महंगी और रेशमि पारदर्शी साड़ी पहनाई गई थी लेकिन वो भी बस साड़ी ही थी उसके अलावा और कुछ भी नही ..
उस साड़ी में भी उनका यौवन पूरे का पूरा दिख रहा था,वो दोनो ही काम की देवियां लग रही थी लेकिन डरी हुई ,भविष्य के खतरे का आभास उन्हें हो गया था वो सहमी हुई थी लेकिन उन सेविकाओं को देख कर उन्हें लगा की ये भी उनकी ही तरह जबरदस्ती यंहा लायी गई होंगी …
“आप ठाकुर साहब की हवेली में है ,कल रात ही आपलोगो को यंहा लाया गया था,ठाकुर साहब ने कहा है की अपदोनो हमारी मेहमान है और दोनो की खूब जतन की जाए ..”
एक बहुत ही सुंदर सी लड़की ने बड़े ही प्यारे शब्दो में कहा ,उसकी नजर नीची थी मानो वो उनकी ही दासी हो ,ठाकुर उनके साथ ऐसा व्यवहार करेगा ये तो दोनो ने ही नही सोचा था उन्हें तो लगा था की अगर ठाकुर के हाथो में आ गए तो फिर जिस्म को नोच कर खा दिया जाएगा…
लेकिन ठाकुर जिस्म को नोचने ही वाला था भले ही इस तरह ही क्यो ना हो ….
“आप लोग कुछ लेंगे “
फिर से उसी लड़की ने कहा 
“हमे अपने घर जाना है “
कनक बोल उठी ,सभी के सर पहले से ज्यादा झुक गए लेकिन किसी ने कुछ भी नही कहा ..
रोशनी ने कनक को समझाया की वो मुसीबत में फंस चुके है और अभी उन्हें सम्हल कर कदम उठाना पड़ेगा ताकि यंहा से निकल जाए और अब तक ये बात कालिया को पता चल गई होगी वो हमे बचा लेगा ……
दोनो को ही कालिया की उम्मीद थी लेकिन ना जाने आगे क्या होने वाला था …..
“मालकिन आप दोनो नहा लीजिए ठाकुर जी आते ही होंगे”
उस लड़की की बात सुन कर दोनो ही दंग रह गए 
“हम तुम्हारी मालकिन नही है “
रोशनी ने जोरो से कहा 
“हमे आपको मालकिन कहने और गुलाम की तरह रहने का ही हुक्म मिला है ,आप कृपया नहा ले वरना ठाकुर साहब हमारे ऊपर गुस्सा होगें”
ठाकुर ये क्या कर रहा था या क्या करना चाह रहा था ,रोशनी समझने की कोशिस कर रही थी लेकिन गरीबी में रही कनक को ये वैभव बहुत ही भा रहा था ,उसकी ललचाई नजर रोशनी से बच नही सकी .
“ये तुम्हारे भाई के बैरी का घर है ,ये सभी सुख हमारे लिए मिट्टी जैसे है “
रोशनी ने कनक को झटकते हुए कहा ,वो भी हड़बड़ाई 
“लेकिन भाभी सुख तो है ना …”कनक के सपाट बोल से रोशनी भी असमंजस में पड़ गई ,ना ही पिता ने ना ही पति ने सुख के नाम पर दिया ही क्या था उसे ,जीवन एक काटे की तरह ही बिता था ..ऐसा नही था की रोशनी कालिया से प्रेम नही करती थी लेकिन फिर भी ना ही वो उसके साथ ज्यादा वक्त बिता पाई थी ना ही सांसारिक जरूरतों को ही वो पूरा कर पाया था,लेकिन वो कालिया का बेहद सम्मान करती थी उसकी ही इज्जत की रक्षा के लिए कालिया ने हथियार उठाया अपने परिवार और जान की भी नही सोची …
“तेरे भइया ने हमारी इज्जत की रक्षा के लिए अपने जान की भी नही सोची …”
रोशनी के मन में चल रही बात उसने कह ही डाली …
“लेकिन ठाकुर तो अब भी हमारी इज्जत उतरेगा ना ...भाभी मैं नही कहती की भइया गलत है लेकिन सोचो क्या सचमे वो हमे बचा पाएंगे,और क्या ठाकुर हमे ऐसे ही जाने देगा,तो क्यो ना हम इन सुखों का ही मजा ले ले जब तक हम यंहा है ...क्योकि फिर तो जीवन में हमे ये कभी देखने भी नही मिलेगा “
कनक की बात से रोशनी के आंखों में आंसू छलक गए थे ,कनक का गला भी बैठ गया था लेकिन वो खुद को सम्हालते हुए बोली 
“भाभी मैं अपना बलात्कार करवाना नही चाहती,हा अगर कुछ होगा तो मैं भी उसका मजा लुंगी “
इतना ही कहकर कनक स्नानगृह की ओर चली गई ,और रोशनी अब भी अपने आंखों में आंसू लिए हुए अपनी ननद की बातो को सोचती रही ,सच में उनकी किस्मत ही थी की ठाकुर उनसे ऐसे पेश आ रहा था वरना वो उन्हें किसी रंडी से ज्यादा अहमियत नही देता वो भी बस जिस्म की भूख मिटाने के लिए ……

इधर 
कालिया अपने माता पिता के लाश के सामने घुटने के बल बैठा था ,
“कालिया हरिया का कही भी पता नही लगा “
एक आदमी हफते के उसतक पहुचा 
“सरदार वो अपने ईमान का सौदा करके भाग गया है ,उसके घर में भी बीवी और बहन है उन्हें उठा कर लाता हु साले से उसके करनी का बदला लेंगे “
एक दूसरा आदमी गरजा 
“मैं किसी का सरदार नही हु मैं कालिया हु तुम्हारा कालिया ,और हरिया की बहन मेरी भी बहन है ,वो मेरे गांव की बेटी है ,उसकी बीवी मेरे गांव की बहु है और मेरी भी बहु है ,किसी ने उनको छूने की कोशिस भी की तो मैं उसके हाथो को काट दूंगा
कालिया गरजा और सभी चुप हो गए 
“हरिया ने जो किया है उसकी सजा उसे मिलेगी ,और ठाकुर ने जो किया है उसकी भी उसे सजा जरूर मिलेगी …”
“लेकिन कालिया पहले हमे भाभी और कनक को बचने की सोचना चाहिए ना जाने वो उनके साथ कैसा सलूक करेगा “
कालिय ने एक गहरी सांस ली ,
और कुछ सोचने लगा ,
“आज ही धावा बोलेंगे उसके हवेली में “
कालिया बोल उठा 
“लेकिन कलिया वँहा जाना अपने हाथो से अपनी जान को दाव पर लगाना है तुम तो जानते हो ठाकुर की हवेली हवेली नही किला है ,कोई नही बच पायेगा “
कालिया फिर से सोच में पड़ गया क्योकि बात तो सही ही थी 
“तो सिर्फ मैं जाऊंगा …”
“तुम पागल हो गए हो क्या वँहा तुम अकेले ...तुम्हारी जान हम सबके लिए बहुत ही जरूरी है कालिया सिर्फ तुम्हरी बहन और बीवी नही इतने लोगो के घर की बहु बेटियां आज तुम्हारे ही कारण सलामत है …”
“अगर मैं ना रहा तो तुम इस गिरोह को सम्हालोगे, ये गिरोह टूटना नही चाहिए शम्भू ,“
उसने शम्भू के कंधे पर हाथ रखा,शम्भू रो ही पड़ा था ,कालिया अपने जिद पर अडिग था और ये बात सभी को पता थी ……
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