XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
12-08-2021, 02:39 PM,
#31
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
“करीब-करीब सभी प्यार करने वाले अपनी प्रेमिकाओं के बारे में ऐसे ही दावे करते हैं, जो मेरे ख्याल में हकीकत से बहुत दूर होते हैं। लेकिन वक्त के अनुभवों से साबित हैं कि बड़े से बड़ा आशिक भी अपनी प्रेमिका के मर जाने पर उसके साथ खुदकशी करके नहीं मरता। और दुनिया के अरबों मर्दो में से जिन दस-पांच लोगों मे ऐसा किया भी, तो बाद में तहकीकात से पता चला था कि वो दिमागी तौर पर कुछ खिसके हुए थे।

"तो फिर आप मुझें भी उन नेक लोगों में से समझ सकते हैं। मेरा यह दावा सिर्फ कहने भर को नहीं है। यह हकीकत हैं कि में अपनी प्रेमिका के बगैर एक दिन भी जिन्दा नहीं रह सकता।

"हालांकि आपकी प्रेमिका किसी दूसरे की पत्नी हैं,जिस पर आपका कोई हक नही है।"

"वां अलग बात हैं। हम से कम मुझें इतनी तसल्ली तो हैं कि मै जब चाहूं उसे देख सकता हूं और मौका हो तो उसे प्यार भी कर सकता हूं। प्यार मोहब्बत में उस वक्त तक मजा ही नहीं आता, जब तक कि प्रेमिका पर पहरे न हो। प्रेमिका की शादी किसी दूसरे से हो जाने पर न तो मेरी सेहत पर कोई फर्क पड़ा हैं, न ही मुझें कोई दिक्कत हुई हैं, बल्कि मुझें उसके प्यार में अब पहले से भी ज्यादा मजा आने लगा है।

"और यही विचार आपकों दूसरों से अलग करते हैं। क्योंकि आम इन्सान अपनी प्रेमिका को कभी भी दूसरे की बाहों में देखना पसन्द नही करते । यह जानते हुए भी कि शादी , प्यार का अंत होती हैं, हर शख्स अपने सपनों की रानी को हमेशा के लिए कब्जे में रखना चाहता हैं"

“इसे ही आप विचारों का मतभेद कह सकते हैं। इस बात से मेरे मिजाज में कोई फर्क नहीं पड़ता, विचारों को भिन्नता से यह मत सोचिये कि मैं इन्सान ही नहीं हूं।"

इसी बीच चाय आ गई। डॉक्टर जय ने चाय बनाकर कप राज की तरफ बढ़ाते हुए शीमें स्वर में सरगोशी की

“और आपकों शायद यह सुनकर भी ताज्जुब होगा कि मैं अपनी प्रेमिका के सिर्फ होंठों को ही चूमना पसन्द करता हूं। आज तक मैने कभी उसकी गालों को छुआ तक नहीं ।

"वो क्यों ?" राज ने पूछा

“इसका मेरे पास कोई जवाब नही। मेरा दिल ही नहीं करता। या मेरे ख्याल में प्रेमिका की सुन्दरता ओर यौवन का सारा रस उसक होंठों में ही होता हैं। इसलिए कोठों के अलावा किसी भी दूसरी चीज को चूमना पत्थर को चूमने के बराबर होता है।

“आपका यह नजरिया भी हैरतअंगेज हैं डाक्टर जय ओर आम इन्सानों की फितरत के विरूद्ध-क्योंकि आम आदमी तो प्रेमिका के जिस्म के हर हिस्से को प्यार करना चाहता है।

"इसके बावजूद मैं फिर कहूंगा कि मैं एक आम इन्सान नही

"इसका मतलब यह कि दो अलग-अलग फितरते आपके अन्दर मौजूद है।

“यह आपका नजरिया है। आप अपने शब्दों में यो भी कह सकते है।"

उसने गर्म चाय का एक लम्बा सा यूंट भरते हुए कहा। फिर राज से पूछा

, “क्या आपने कभी किसी से प्यार नही किया ?"

'अभी तक तो ऐसा इत्तेफाक नही हुआ।" राज ने जवाब दिया।
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12-08-2021, 02:39 PM,
#32
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
“तो फिर श्रीमान, आप आम इन्सानों से अलग हैं क्योंकि प्यार मोहब्बत तो इन्सानों के खून में रची-बची होती है। बस उसे बाहर आने का जरा सा मौका मिलना चाहिए।

राज ने हंस कर जवाब दिया

“कहते हैं इश्क जिसकों, खलल हैं दिमाग का।"

डॉक्टर जय भी हंस पड़ा
"शायद गालिब का हैं ?"

“जी हों।" राज मुस्कराया।

फिर दोनों ठहाके लगा कर हंस पड़ें और बात आई गई हो गई। बातें क्योंकि एक बिलकुल ही बेकार से विषय पर छिड़ गई थी इसलिए उसमें काफी वक्त लग या था। चाय खत्म होते ही राज ने एक जरूरी काम का बहाना किया और जाने की इजाजत मांग ली। और चल पड़ा।

वापस लौटकर राज ने महसूस किया कि वो पहले की तरह घोर अन्धेरे में ही रह गया है। इस भयानक अन्धेरे में उम्मीद की जो हल्की सी किरण दिखाई दी थी, वो फिर उसकी निगाहों से ओझल हो गई थी।

अब उसे अहसास हो रहा था कि सिर्फ कुछ आम सी घटनाओं के आधार पर उसने जो रास्ता चुना था, वो गलत था। अब उसे बढ़ती हुई उलझनों के खिलाफ नए सिरे से संघर्ष करना पड़ेगा। जबकि एक-एक क्षण कीमती था। गुजरने वाला हर क्षण सतीश को मौत के और करीब ले जा रहा था। राज की पूरी कोशिश के बावजूद रहस्य की गुत्थी सुलझने के बजाया ज्यादा उलझती जा रही थी।

एक महीना और गुजर गया और स्थिति ज्यों की ज्यों रही। इस मामले में एक खास बात यह थी कि सतीश के सामने राज ने अपने सन्देह प्रकट नहीं किए थे, क्योकि अगर वो सतीश से जिक्र भी करता तो उसे यकीन न आता, उसकी बातों पर सतीश ज्योति के खिलाफ एक शब्द भी सुनने को तैयार नहीं था। उसे कभी यकीन न आता कि उसके दिल की रानी ज्योति एक शातिर कातिला भी हो सकती हैं, जो अपने पांच पूर्व पतियों को मौत के घाट उतार देने के बाद अब उसे भी ठिकाने लगा देने की फिक्र में है।

सतीश के आसपास ज्योति ने अपने रूम का जाल इस तरह फैला रखा था कि वो ज्योति के ऊपरी रूप और दिखावटी मोहब्त से आगे कुछ नही देख सकता था ओर अपने भोलेपन की वजह से बड़ी आसानी के साथ ज्योति के फरेब का शिकार होता जा रहा था। ये राज का विचार था।

हालांकि ज्योति और डॉक्टर जय के खिलाफ राज के पास कोई सबूत नहीं था, लेकिन एक बात का उसे यकीन था कि सतीश कि खिलाफ वो दोनो एक खतरनाक साजिश रच रहे हैं।

राज की खोजबीन और विचार के मुताबिक सतीश की दुश्मन दो चीजे हो सकती थी, या तो ज्योति का वो रहस्यमय नेकलेस, जिसे वो हर गले में पहने रखती थी, और किसी दुसरू शख्स को हाथ तक नहीं लगाने देती थी, या फिर डॉक्टर जय का कोई जहर।

सोचते-सोचते एक दिन राज को ख्याल आया कि किसी तरह ज्योति के नेकलेस का राज मालूम करने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन नेकलेस हासिल करना भी अपनी जगह एक बड़ी समस्या थी। ज्योति उसे अपनी गर्दन से आसानी से अलग नहीं करने वाली थी।
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12-08-2021, 02:39 PM,
#33
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
आखिर नेकलेस का ख्याल जब जनून की हद तक पहुंच गया तो, नतीजे से लापरवाह होकर राज ने एक दिन रात के खाने में सतीश और ज्योति को दो-दो नींद की गोलियां खिला दी। उसका ख्याल था कि दोनो सुबह से पहले नही जाग सकेगे।

और उसका ख्याल था कि दोनों सुबह से पहले नही जाग सकेंगें। और वो रात को ज्योति के गले से नेकलेस उतारकर आराम से उसकी जांच कर सकेगा कि आखिर उसमें ऐसी क्या खास बात हैं कि ज्योति उसे अपने जिस्म से अलग ही नही करती।

अपेक्षानुसार नींद की गोलियों ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया, नौ बजे से ही दोनों की आंखों में भारीपन दिखाई देने लगा, हालांकि दोनो रोजाना ग्यारह बजे से पहले नहीं सोया करते थे। लेकिन उस दिन वो जल्दी ही सोने के लिए अपने बेडरूमें में चले गए।

ठीक दस बजे राज ज्योति के बेडरूम में गया तो दोनो 'गहरी नींद सोए पडें थे। राज जानता था कि उस वक्त ज्योति हिल भी नहीं पाएगी, फिर भी किसी अनजाने खौफ और दहशत से उसके रोंगेट खडे हो गए थे।

ज्योति अपने बिस्तर पर अर्धनग्न अवस्था में पड़ी थी। बेखबरी की नीद मैं उसकी नाईट ड्रेस कई जगह से इस तरह खुली गई थी कि उसका गोरा, गुलाबी जिस्म झांक रहा था, उसके स्वच्छ उरोज दो सुडौल कबूतरों की तरह बिल्कुल नग्न, गर्दन उठाए खड़ें थे। हल्की नीली रोशनी मे वो अपने बेड पर सोई हुई कोई अजन्ता की मूरत लग रही थी।

राज उसे उस अवस्था में सोए देख कर कुछ क्षण के लिए स्तब्ध रह गया। फिर अचानक उसकी नजर ज्योति की सुराहीदार गर्दन पर पड़ी, जहां वो रहस्यमय चांदी का सांप बल खाए पड़ा हुआ था। सांप की आंखों की जगह जड़े हुए दोनों नीलम हल्की नीली रोशनी में नीली चिंगारियों की तरह चमक रहे थे।

सांस के उतार-चढ़ाव के साथ कभी-कभी तो राज को ऐसा महसूस होता था जैसे वों सांप जिन्दा होकर हिल रहा हो।

पांच मिनट तक राज हैरत में खड़ा ज्योति को देखता रहा। उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वो आग बढ़कर उस हसीन जादूगरनी की गर्दन से नेकलेस उतार सके।

काफी देर तक पेरशान खड़ें रहने के बाद राज ने एक बार जुर्रत करके नेकलेस अतारने के लिए हाथ बढ़ाया, डरते-डरते। लेकिन ठण्डा-ठण्डा नेकलेस हाथ से छूते ही उसने फौरन हाथ खींच लिया। उसे बिल्कुल ऐसा महसूस हुआ था जैसे नेकलेस के सांप ने उसे डस लिया हो।

उसके पूरे जिस्म में खौफ और दहशत की कंपकपी दौड़ गई। नसों में तेज ठण्डक सी दौड गईं घबराहट में पहले तो उसे सन्देह हुआ कि शायद सांप ने उसकी अंगलियों में इस लिया हैं । लेकिन कुछ देर में जब वो सम्भला तो उसे मालूम हुआ कि यह उसका वहम ही था। उसकी अंगुलियां बिल्कुल ठीक थी । कुछ देर में जब वो सम्भला तो उसे मालूम हुआ था कि यह उसका वहम ही था। उसकी अंगुलियां बिल्कुल ठीक थी।

आखिर उसने हिम्मत जुटाकर फिर कोशिश की और इस बार नेकलेस ज्योति की गर्दन से उतार लिया।

नेकलेस काफी भारी था। आज पहली बार राज को मालूम हुआ था कि नेकलेस लचकदार था और किसी अजीब तरीके से बनाया गया था, उसे किसी भी तरफ आसानी से मोड़ा जा सकता था। उसी तरह जैसे स्प्रिंगदार टेबल कैम्प के स्टैंड को मोड़ा जा सकता था।

अपने कमने में आकर राज को ऐसी खुशी महसूस हुई जैसे कोई जंग जीत कर आया हो या किसी खतरनाक दुश्मन से जान बचाकर आया हों नेकलेस लाकर उसने मेज पर डाल दिया और कुसी खींच कर खुद भी उसके करीब ही बैठ गया, ताकि तेज रोशनी में उसका अच्छी तरह मुआयना कर सकें

राज ने कई बार नेकलेस को घुमा-फिरा कर, तोड़-मरोड़ कर और उलट-पुलट कर देखा, लेकिन उसे नेकलेस में ऐसी कोई भी चीज नही दिखाई दी जिसे संदिग्ध समझा सकता । पहली नजर में वे सिर्फ एक नेकलेस ही था, हकीकत में भगवन जाने क्या चीज था।

आखिर में अपनी तसल्ली के लिए मैग्नीफाईग ग्लास निकला कर नेकलेस को देखना शुरू कर दिया कि शायद कोई ऐसी निशान मिल जाए जो इसमें किसी जोड़ या दूसरी किसी कमी का पता दे सके। लेकिन एक घंटे की उसकी यह जांच-पड़ताल बेकार ही रही उसे नेकलेस में कोई गड़बड़ नही नजर आई।

नेकलेस बिल्कुल साफ था, उस पर कोई निशान नहीं था। अगर उसमें कोई जादू भी था तो मुमकिन हैं किसी वक्त उस पर कोई मंत्र वगैरह लिखा गया हो,जो निरंतर पहने रहने से घिस-घिस कर मिट गया हों इस वक्त राज को महसूस हुआ कि नेकलेस
नेकलेस से मायूस हो जाने के बाद राज को बड़ी झुंझलाहट सी हुई थी, आखिर क्यों अपना इतना कीमती वक्त एक फिजल वहम के पीछे खराब कर रहा हैं? उसे अपनी तहरीक किसी और कोण से शुरू करनी चाहिए थीं उसे यह भी ख्याल आया कि इस मॉडर्न जमाने में जादू मंत्र कहां रखे हैं, अब तो हर काम साइंटिफिक तरीकों से किया जाता है।

गुस्से में आकर राज ने नेकलेस मेज पर दे पटका और खुद एक सिगरेट सुलगाकर सोचने लगा। सोचते-सोचते राज की निगाह अचानक उस सांप जैसे नेकलेस की नीलम जड़ी आंखों पर जा पड़ी जो तेज रोशनी में अजीब तरीके से चमक रही थी।

और बड़ी खौफनाक लग रही थी। एक बार फिर उसका ध्यान इस सांप-जैसे नेकलेस की तरफ आकर्षित हो गया।

जिस माचिस की तीली से राज ने सिगरेट सुलगाया था, वो बुझी हुई ताली अभी तक उसके हाथ में थी-देखते-देखते बगैर किसी इरादे कें, यो ही सांप की नीली-नीली चमकती हुई आंखों को तीली से छेड़ने लगा।
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12-08-2021, 02:40 PM,
#34
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
माजिचस की तीली कई बार सांप के मुंह पर भी फिर गई। एक दो बार उसकी आंखों से भी रगड़ खा गईं। एक दो बार बेध्यानी में उसकी आंखों पर ज्यादा दबाव पड़ गया और उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई।
"हे भगवान......"

और राज कुर्सी से उठ खड़ा हो गया। वो खौफनाक दृश्य देखकर अपनी आंखों पर यकीन नही आ रहा था। उसने कई बार आंखों मल-मल कर देखा कि क्या जो कुछ वो देख रहा हैं वो कहीं उसका वहम तो नहीं ? लेकिन हर बार आंखें मलने के बाद हकीकत उसके सामने आ जाती थी। वो अपनी जिन्दगी में कभी इतना भयभीत नहीं हुआ था, जितना उस वक्त हुआ।

सांप जैसे नेकलेस की आंख पर तीली का दबाव पड़ते ही सांप का मुंह किसी मैकलेस से खुल गया था , जैसे असली सांप मुह फाड़ लेता हैं, उसकी जान तब सूख गई थी जब बालिश्त भर का सांप आधा उस नेकलेस के मुंह से बाहर निकल आया।

यह सांप बिल्कुल वैसा ही था जैसा कि राज ने डॉक्टर जय की लेब्रॉटरी मे देखा था। वो उस छोटे से मिस्त्री सांप से बहुत ज्यादा मिलता-जुलता था।

राज में ऐसा खतरनाक सांप रखती होगी। मजे की बात यह थी कि ऐसे घातक जीव को उसने गले से चिपका रखा था।

बड़ी मुश्किल से राज ने खुद पर काबू पाया और फौरन मेज की दराज से छोटे-छोटे, सांप पकड़ने के काम आने वाली चिमटियां और चुटकियां निकाल कर उस सांप को पकड़ लिया।

सांप को काबू करने के बाद राज ने प्लास्टिक की चिमटी से उसका मुंह खोल कर मुंह के अन्दर झांका, इस सांप के दांत नहीं थी।

सांप देख कर पहली नजर में राज को सन्देह हुआ था कि शायद यह उसी नस्म का सांप हैं जो डॉक्टर जय की लेब्रॉटरी में रखा हुआ हैं और जिस नस्ल के दात भी होते है।

सांप देख कर पहली नजर में राज को सन्देह हुआ था कि शायद यह उसी नस्ल का सांप हैं जो डाक्टर जय की लेब्रॉटरी में रखा हुआ हैं और जिस नस्ल के दांत भी होते है। जिसका काटा तीन मिनट से ज्यादा जिन्दा नही रह सकता। इस सांप के मुंह मे दांत ने देखकर राज को यकीन हो गया कि यह वहीं मिस्त्री नस्ल का सांप हैं जिसके बारे मे डॉक्टर जय न बताया था कि वो लापरवाही से उसके जूत तले आकर कुचल गया था।

और तसल्ली के लिए राज ने सांप के मुह पर चिमटी से हल्की सी चोट लगाई, ताकि वो गुस्से में आ जाए। जब सांप ने गुस्से से फन फैलाया तो राज ने उसके सामने एक यंत्र कर दिया। सांप यन्त्र पर दांत गड़ाने या मुंह मारने के बजाया अपनी जबान से उस यन्त्र को चाटने लगा।

सांप की इस हरकत ने राज को पूरा यकीन दिला दिया कि यह वही मिस्त्र सांप हैं जो उस मिस्त्र डॉक्टर जय के हाथ बेच दिया होगा।

यह मालूम हो जाने के बाद कि यह वही मिस्त्री सांप हैं, राज के सामने कई सवाल उठ खड़ें हुई थे। पहला यह कि डॉक्टर जय ने उससे झूठ क्यों बोला था? दूसरा यह कि उसने इतना कीमती और दुयिा भर में दुर्लभ सांप ज्योति को क्यों दे दिया था ? क्योंकि वो अगर सतीश को जहर से ही मारना चाहता था तो अपना कोई भी जहर ज्योति को दे सकता था।

तीसरी और सबसे अहम सवाल यह था कि अगर ज्योति इसी सांप का जहर सतीश पर इस्तेमाल कर रही हैं तो फिर ऐसा वो किस तरह कर रही हैं ? इन सवालों के बाद सवाल यह था कि अब तक वो कितनी मात्र में जहर सतीश को दे चुकी हैं ? क्या सतीश अभी इलाज के काबिल हैं ? अगर वो मिल के डॉक्टर द्वारा बताए गए तरीके से इस सांप के जहर को तोड़ तेयार करे तो क्या वो सतीश पर असर करेगा।

देखने में तो ये सारे सवाल बहुत मामूली लगते थे, लेकिन जब राज ने इस सवालों पर सोचना शुरू किया तो एक घंटे बाद इस नतीजे पर पहुंचा कि इन सवालों के जवाब तलाश करना बड़ी टेढ़ी खीर है।

यह मालूम हो जाने के बाद कि यह वही मिस्त्री सांप हैं, इस सवाल का जवाब दृढने में सिर खपाने की जरूरते नहीं थी कि डॉक्टर जय की शादीशुदा प्रेमिका कौन है। क्योंकि बिना मतलब के इतना कीमती सांप उसे दे देना साधारण सम्बंधों को निशानी नही थी । बल्कि किसी गहरी साजिश की तरफ संकेत था यह।

अब वो रूमाल और लिपस्टिक वाला मामला भी साफ हो गया था। दरअसल डॉक्टर संजर ने राज को चमका दिया था कि रूमाल ज्योति गलती से उसके यहां छोड़ आई थी। हकीकत यह थी कि रूमाल उस शाम दिया गया था जब राज ज्योति के साथ पिक्चार जाने के लिए कपड़ें बदलने अपने कमरे में गया था, जो तभी वहां डॉक्टर जय पहुंच गया होगा और मैदान साफ पाकर उसने जल्दी से ज्योति को दबोच कर उसके होंठों पर होंठे रखकर गहरा चुम्बन ले लिया होगा और उसी वक्त ज्योति ने उसे लिपस्टिक पौंछने के लिए रूमाल दिया होगा। इसी वक्त राज पहुंच गया था और डॉक्टर ने जल्दबाजी मे रूमाल अपनी जेब में डाल लिया था।

ये सारी बातें राज सोच गया था।

लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि आखिर ज्योति किस तरह इस सांप का जहर सतीश को दे रही हैं? और कितना जहर सतीश के शरीर में पहुच चुका है। ?'' ।

उस रात करीब चार बजे तक राज इन्ही सवालों में उलझा सोचता रहा, लेकिन कोई जवाब उसके दिमाग में नहीं आया। जब सुबह होने लगी तो उसे ख्याल आया कि अब नेकलेस को बंद करके उसी तरह ज्योति के गले में डाल देना चाहिए, ऐसा न हो कि उसकी आंख खुल जाए और नेकलेस गले में न पाकर वो हंगामा खड़ा कर दे और उसके सारे किए कराए पर पानी फिर जाए। सबसे बड़ा खौफ राज को यह था कि अपना राज फाश होता पाकर ज्योति न जाने क्या कुछ कर गुजरे।

राज में सांप को दोबारा नेकलेस में बंद किया, लेकिन अब दिक्कत यह थी कि नेकलेस का मुंह किस तरह बन्द किया जाए? खैर........थोडा सा दिमाग लगाने पर उसकी समझ में आ गया ओर उसने नेकलेस के सांप की दूसरी आंख दबाई तो सांप का मुंह बंद हो गया।
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12-08-2021, 02:40 PM,
#35
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
नेकलेस को बंद करके राज ने उसी तरह ज्योति के गले में पहना दिया, जो अभी तक गहरी नींद सो रही थी और शायद कोई अच्छा सपना देखती हुई ही नींद में ही मुस्करा रही थी।
……………………..
अब राज सोच रहा था कि किस तरह उस मिस्त्री सांप का जहर हासिल करके उसके उसी का तोड़ बनाया जाए जिसका तरीका उसके मिस्त्री डॉक्टर दोस्त ने उसे मिस्त्र में बताया था। उसके बाद सतीश का इजाल शुरू किया जाए, मुमकिन हैं वो अभी इलाज की सीमा से बाहर न गया हो।

लेकिन समस्या यह थी कि उस सांप का जहर किस तरह हासिल किया जाए ? सांप जब तक कम से कम एक हफ्ता उसके पास न रहता, उसका जहर हासिल करना मुमकिन नहीं था। एक रात के लिए तो सांप पहले की तरह ही हासिल किया जा सकता था, लेकिन पूरे एक हफ्ते के लिये सांप को ज्योति की जानकारी के बिना गायब रखना मुश्किल था।

कई दिन तक यह समस्या भी राज को परेशान करती रही । फिर आखिर एक दिन उसके जेहन में एक तरकीब आ ही गई।

उसने सोचा कि किसी तरह डॉक्टर जय के यहां से इसी साईज और इसी रंग-रूप वाला वो दूसरा सांप चुरा लिया जाए ओर सांप चुरा लाने के बाद इसी तरह ज्योति और सतीश को नीद की गोलियां खिला कर गहरी नींद सुलाकर दोबारा नेकलेस ज्योति के गले में उतारकर उसमें से मिस्त्री सांप निकाल लिया जाए और उसकी जगह दूसरा सांप रख दिया जाए। उसके बाद नेकलेस फिर से ज्योति की सुराहीदार गर्दन मे डाल दिया, जाए।

इस तरह राज आसानी से मिस्त्री सांप की आठ-दस दिन अपने पास रखकर उसका जहर निकाल सकता था। मजें की बात यह थी कि राज के ख्याल में इस तरह ज्योति को कोई शक भी नही हो सकता था कि उसके नेकलेस में सांप बदल दिया गया हैं । काम सिर्फ इतना था कि जल्दी ही किसी दिन और किसी वक्त बड़ी सफाई से राज डॉक्टर जय की लेब्रॉटरी में से दो दूसरा सांप चुरा लाता।

लेकिन जब राज ने सांप चुराने को स्कीमों पर सोचा तो उसे पता चला कि अभी इस स्कीम में एक बड़ी अड़चन को दूर करना बाकी है। सांप की चोरी के वक्त यह भी जरूरी था कि उसकी जगह भी कोई दूसरा सांप उस शीशे के बॉक्स में रखा जाता, ताकि डाक्टर जय को सांप चोरी हो जाने का शक न हो सके।

अब यह समस्या था कि वैसा सांप कहां से मिलेगा ? लेकिन फौरन ही उसे ख्याल आ गया कि इस तरह का उसी नस्ल और रंग का सांप डॉक्टर नरेन्द्र गुप्ता की लेबॉटरी में मिल सकता है। एक कामयाबी के बाद राज का दिमाग अब बड़ी तेजी से काम करने लगा था।

उसी दिन डॉक्टर की लेब्रॉटरी से राज एक भारतीय नस्ल का छोटा सा सांप ले आया, जिसका आकार तो वैसा ही था,
लेकिन रंग अलग था। उसका रंग बदल देने की तरकीब राज पहले से सोच बैठा था।

यह काम सफलतापूर्वक कर लेने के बाद राज ने अगले दिन के लिए प्रोग्राम सैट करना शुरू कर दियां । प्रोग्राम यह था। कि चोरों की वारदात से पहले किसी तरह डॉक्टर जय को उसकी लेब्रॉटरी से चार-पांच घंटे दूर रखा जाए, ताकि सांप चोरी की स्कीम पर बड़ें आराम और शांति से अमल किया जा सके।

लेकिन इस समस्या से राज ज्यादा परेशान इसलिए नही हुआ, क्योंकि सोचने के लिए उसके पास पूरी रात पड़ी हुई थी।

अब उसे अपने दिमाग पर भरोसा भी होने लगा था कि उसके दिमाग में जासूसी की बहुत सी योग्यताएं मौजूद हैं। वही हुआ भी। सुबह जब वो नींद से जागा तो इसके लिए राज के दिमाग में एक लाजवाब तरकीब तैयार हो चुकी थी।

सुबह दस बजे राज ने एक पी.सी.ओ. से डॉक्र जय को फोन किया। धंटी बजने के करीब आधा मिनट बाद डॉक्टर जय ने खुद रिसीवर उठाया था।
"हैलो, कौन साहब बोल रहे हैं ?"

राज ने बिगड़ी हुई आवाज में जवाब दिया

"माफ कीजिएगा साहब, अगर आप डॉक्टर जय बोल रहे हैं तो तेरा नाम अरविन्द है।"

"अरविन्द साहब........?" डॉक्टर जय की उलझन मे डूबी आवाज आई-मैंने पहचान नहीं आपकों.........।"

“जी हां। वाकई आप मुझें नही जानते, लेकिन मैं आपकों अच्छी तरह जानता हूं। दरअसल इस वक्त मैंने आपकों इसलिए कष्ट दिया हैं क्योकि मैने अपने दोस्त से सुना हैं कि आपकों सांपों के जहरों का काफी अनुभव है। अभी-अभी मेरे रिश्तेदार को एक जहरीले सांप ने डस लिया है। अगर आप कृपा करके यहां तशरीफ लाए तो हमारे परिवार पर एहसान करने के साथ-साथ एक बाल-बच्च्दार आदमी की जान बचाने का पुण्य भी कमा सकते हैं।"

“ओहों, जहरीले सांप ने काट लिया हैं।" डॉक्टर जय की आवाज में दिलचस्पी भर आई,"बहुत अच्छा, मैं आ जाऊंगा। अपना पता बता दीजिए।

“पता तो मैं बता देता हूं, लेकिन आपकों हमारी कोठी ढूढ़ने में थोड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि कोठी शहर से दूर देहाती इलाके में हैं" राज ने शर्मिन्दा से लहजे में कहा।

“कोई बात नही अरंविद साहब, मैं तलाश कर लूंगा।” डॉक्टर जय ने कहा था।

"अगर आप कहे तो मैं अपनी गाड़ी भेज दूं......।" राज ने हवाई छोड़ी
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12-08-2021, 02:40 PM,
#36
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
"अगर आप कहे तो मैं अपनी गाड़ी भेज दूं......।" राज ने हवाई छोड़ी

"नही-नहीं, इसकी जरूरत नहीं है।" डॉक्टर जय ने जल्दी से कहा, “ मैं अपनी कार से आ जाता हूं। आपकी कार आने और जाने में दोगुना टाइम खराब होगा।

राज ने पता बता दिया। ऐसा पता कि अगर डॉक्टर जय दिल्ली देहात में जिन्दगी भर भी तलाश करता रहता तो उसे कोठी ने मिल पाती । क्योंकि कोठी कहीं थी ही नहीं। इसके अलावा जगह जो उसने बताई थी, वो डॉक्टर जय के घर से इतनी दूर थी कि अगर वो जल्दी ही वहां से मायूस होकर लौटने लगे, तब भी उसे कम से कम दो घंटे वापिस आने में लग जाते , जो नीकलण्ठ के काम के लिए काफी थे।

फोन करने के आधे घंटे बाद ही राज पूरे कील-कांटे से लैस होकर डॉक्टर जय की कोठी पर जा पहुंचा, तब तक डॉक्टर जय को कोठी से गए पन्द्रह-बीस मिनट गुजर चुके थे।

राज हमेशा की तरह सीधा जाकर ड्राईग रूम में बैठ गया

और उसने नौकर को बुलाकर उससे पूछा-“डाक्टर जय कहां है। ?

“किसी मरीज को देखने गए हैं साहब।" उसने जवाब दिया, “आप बैठिए किसी चीज की जरूरत हो तो हुक्म करें।"

"ठीक हैं, जब जरूरत होगी , कह दूंगा।"राज ने कहा।

नौकर सिर झुकाकर वापस चला गया।

नौकर के जाने के बाद कुछ देर राज वक्त गुजारने के लिए अखबार देखता रहां जब उसे यकीन हो गया कि अब कुछ दूर तक कमरे में किसी के आने की आशंका नहीं हैं, तो राज चुपचाप उठा और लेब्रॉटरी की तरफ चल पड़ा।

ड्राईंग रूम और लेब्रॉटरी में तीन दरवाजों वाला एक बरामदा था, जिनमें से एक दरवाजा कोठी के अन्दरूनी हिस्से में खुलता था। बरामदे से गुजरते हुए नीकण्ठ ने सावधानी वश वो दरवाजा भी बंद कर दिया।

लेब्रॉटरी में पहुच कर राज ने वो दूसरा सांप शीशे के बॉक्स में से निकाल कर एक थैली में बन्द करके जब में डाल लिया

और आपने साथ लाए हुए मरे हुए सांप को मेज पर डाल दिया और शीशे का बॉक्स तोड़ दिया। उसके बाद पत्थर का एक भारी जार, जिसमें तेजाब भरा हुआ था, उठा कर मरे हुए सांप पर डाल दिया और तेजाब को अच्छी तरह सांप पर सांप पर उलट दिया।

वो पत्थर का जार शीशे के सांप वाले उस बॉक्स के ऊपर एक ताक में इस तरह रखा हुआ था किसी भी वक्त बॉक्स पर गिर सकता था।

तेजाब पड़ते ही मरे सांप का रंग एकदम काला पडश्न गया। अब इस सैटअप को देख कर कोई भी शख्स यही सोचता कि भारी जार गिरने की वजह से शीशे का बॉक्स टूट गया और सांप कुचला गया और तेजाब से जल भी गया, इसी वजह से उसका रंग भी बदल गया होगा।

राज की सारी कठिनाइयां एक पत्थर के जार ने हल कर दी थी। यह तरकीब भी राज के जेहन में इसलिए आ गई थी कि वो इस जार को पहले दिन ही शीशे के बाक्स के ऊपर ताक में रखे देख चुका था, तभी उसे लगा था कि जरा सा हिलने से ही जार नीचे आ गिरेगा। उसने जय ने कहा भी था कि यह जार गिर गया तो आपका एक सांप और मारा जाएगा, उस जार को यहां से हटा दीजिये , या फिर बॉक्स को।

जय उस वक्त हंस कर बात टाल गया था और जार वहीं का वहीं रखा रह गया जो आज उसके काम आ गया ह। इस पूरे काम नमें राज को मुश्किल से सात-आठ मिनट लगे होंगे। उसके बाद हर चीज को वैसे का वैसा छोड़कर वो वापस ड्राईगरूम में आकर बैठ गया था।

बरामदे का अन्दर की तरफ खुलने वाला दरवाजा अभी तक बन्द था। ड्राईगरूम में पहुंचकर राज ने इत्मीनान की सांस ली और नौकर को बुलाकर चाय की फरमाईश की।
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12-08-2021, 02:41 PM,
#37
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
थोड़ी देर में ही चाय आ गई थीं जब उसके बाद नौकर चाय के बर्तन लेने आया था तो राज ने कहा

"अच्छा भाई, मैं चलता हूं। जय आए तो उनसे कह देना कि मैं आया था और इन्तजार करके चला गया। इस तरह करीब एक घंटे में ही राज एक अहम काम निबटा कर वापस भी लौट आया था।

यह उसकी दूसरी बड़ी कामयाबी थी। इसके बार राज को यकीन हो गया था कि वो अपने दोस्त की जान जरूर बचा लेगा।

उस दिन पहली बार नलीकण्ठ को अहसास हुआ कि फरेब चाहे किसी भी रूम में और कितने भी पर्यों में रह कर किया जा रहा हो एक दिन उसका भेद खुल ही जाता हैं

सांप चुराने के बाद उस दिन राज ने फिर रात के खाने में सतीश और ज्योति दोनों को ही नींद की दवा खिला दी नतीजा यह हुआ कि पहले की तरह दोनों वक्त से पहले ही सो गइ।

बारह बजे के करीब जब किसी भी नौकर के आवागमन की आशंका न रही तो राज चोरों की तरह ज्योति के बेडरूम में जा घुसा। लेकिन उस रात उसके दिल में खौफ और आंतक का निशान मात्र भी नही था। बड़ी लापरवाही से वहा उस खौफनाक नेकलेस को ज्योति की गर्दन से निकाल लाया, जिसे देखकर कभी उसके रोंगटे खड़े हो जाया करते थे।

अपने कमरे में आकर राज ने इत्मीनान से अपने यन्न निकाले और नेकलेस से वो मिस्त्र सांप निकलाकर आज ही
चुराया हुआ सांप उसकी जगह रख दियां

उसके बाद उसके नेकलेस दोबारा ज्योति की सुराहीदार गोली गर्दन में पहना दियां
अब ज्योति के नेकलेस का सांप राज के पास सुरक्षित था

और डॉक्टर जय की लेब्रॉटरी वाला खतरनाक जहरीले दांतों वाला सांप ज्योति के नेकलेस में बन्द था। इस तरह राज को उम्मीद थी कि राज जल्दी से नही खुल सकता । इसलिए राज ने सोचा कि पांच-छः दिन में इत्मीनान से उस सांप का जहर निकालकर सांप को दोबारा ज्योति के नेकलेस मे डाल देगा।

सांप बदलने के इस हम काम से निबटने के बाद राज के दिल को चैन आ गया था और दिमाग को बड़ी राहत मिली थी, तीन-चार महीने के लम्बे अर्से के बाद उस राज पहली बार उसे सुख की नींद आई थी।

दूसरे दिन वो फिर डॉक्टर जय की कोठी पर गया, ताकि जान सके कि उसकी चोरी का भेद तो नही खुल गया। और बेचारा जय कब तक खेतों की खाक छानता रहा था फर्जी कोठी की तलाश में ।

कार पोर्च में रोककर वो ड्राईंग रूम की तरफ बढ़ा तो लेब्रॉटरी मे से उसे डॉक्टर जय की आवाज आती सुनाई दी

"राज , इधर ही आ जाओं, मैं यहां लेब्रॉटरी में हु"

शायद उसने खिड़की में से राज को कार से उतर कर अन्दर की तरफ बढ़ते देख लिया था। नीकण्ठ उसकी आवाज सुन कर पलट पड़ा और लेब्रॉटरी में पहुच गया। वहा डॉक्टर जय एक भयानक छिपकली को प्लास्टिक के नाजुम से यन्त्र में दबाए खड़ा था।

"हैलों डॉक्टर जय! तुम इसके साथ क्या करने जा रहे हों ?" राज ने उसके हाथ में दबी छिपकली की तरफ इशारा करते हुए पूछा।

"कुछ नही यार.......।" डॉक्टर जय ने छिपकली को शीशे के एक बड़े से जार में डालते हुए कहा, “इसका थोड़ा सा जहर निकला रहा हूं।'

"यह छिपकली आम छिपकलियों से बड़ी नहीं हैं ?" राज ने हैरत से पूछा।

"जरा नहीं, काफी बड़ी हैं । यह नस्ल श्रीलंका के पहाड़ी इलाके में पाई जाती है। अरे हां, सुनो.....।'

उसने अचानक छिपकली की बात छोड़कर अपना हाथ राज के कंधे पर रख कर कहा-“यार, कल बहुत बड़ा नुकसान हो गया.............।"

“क्या हुआ था ?"

"वो मिस्त्री सांप था..जिसका जहर बहुत तेज और घातक होता हैं, कल वो........।'

"वही , जिसके बारे में तुमने कहा था कि उसका काटा तीन मिनट से ज्यादा जिन्दा नहीं रह सकता ?" राज ने उसकी
बात काटकर जल्दी से कहा।

'हां हां,वहीं। उसने गर्दन हिलाई-"वो कल मर गया।;

"मर गया.......कैसे मर गया ?" राज ने हैरत की एक्टिंग की।

"कुछ न पूछा यार।" डॉक्टर जय ने अफसोस भरे लहले में कहा-'मैं कल एक काम से बाहर चला गया था, वापिस आकर देखा तो पत्थर का वो भरी मर्तबान नीचे गिरा पड़ा था और । उसके नीचे वो सांप कुचला हुआ पड़ा था। तुमने ठीक कहा था कि अगर मर्तबान गिर पड़ा तो वो कीमती सांप मारा जाएगी। वही हुआ! अपनी लापरवाही से मैं एक अनमोल और दुर्लभ सांप से हाथ धो बैठा......."
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12-08-2021, 02:41 PM,
#38
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
“ओह........'' राज ने भी झूठा अफसोस जताते हुए कहा-“वाकई एक कीमती और दुर्लभ चीज नष्ट हो गई। लेकिन यार जय, कल तुम गए कहां थे?' मैं आया था कल यहां, मगर इन्तजार से उकता कर वापस चला गया था, तुम देर तक लौटे ही नहीं थे।

"में जानता हूं कि तुम कल आए थे। नौकर ने मुझें आते ही सूचना दी थी। क्या बताऊं यार कल.......।"

उसके बाद जय ने कल फोन आने और फिर कोठी की तलाश में निकलने का किस्सा सुना दिया। फिर उसने कहा- “या तो उसने पता दिया , या फिर मुझें समझने में ही गलती हो गई। करीब ढाई घंटे तक भटकने के बाद वापस लौअ आया था।"

बड़ा बेवकूफ होगा कोई, खामखा तुम्हें परेशान कर दिया!" राज ने हंसी दबातें हुए कहा।

'हां, बेवकूफ ही होगा। लेकिन भगवान जाने उस बेचारे मरीज का क्या बना होगा, जिसे सांप ने काट लिया था। खैर छोड़ों चलो, कुछ चाय वगैरह पीते है।

"क्या तुम यहां का काम खत्म कर चुके हो ?" राज ने पूछा।

"हां ,खत्म ही समझों।" वो यन्त्र को सावधानी से एक तरफ रखते हुए बोला, "आओ चलते हैं।'

वो दोनों ड्राईगरूप में आकर बैइ गए। राज मन ही न खुशा था कि सभी काम अपेक्षानुसार पूरे हो रहे थे, जय को चोरी का सन्देह तक नहीं हो पाया थां

चाय के बाद वो थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करते रहे। बातचीत के दौरान वो पूरे समय में मरने वाले सांप के गुण गिनवाता रहा था और अफसोस प्रकट करता रहा था डॉक्टर जय।

यह घटना सांप बदले जाने के दो दिन बाद की हैं तीसरे पहर सतीश , ज्योति और राज बैठे ताश खेल रहे थे। मौसम हालांकि अभी बदला नहीं था और सर्दी पूरी तरह कम नही हुई थी, फिर भी दोपहर को चहल-पहल कम हो जाने से सन्नाटा सा रहने लगा था।

उस दिन भी ढलती दोपहरी में वो ताश से दिल बहला रहे थे कि ज्योति ने अचानक अपने पत्ते फेंकते हुए कहा-“उफ्फ.....तुम लोग भी कैसे लापरवाह होते जा रहे हो ?" याद नहीं हैं, शाम कों पांच बजे हमें राकेश के यहां चाय पर जाना हैं।'?"

"ओह....... मैं तो भूल ही गया था।" सतीश ने भी पत्ते फेंक दिए। फिर राज की तरफ देख कर बोला-“यह चाय की दावते भी कभी-कभी बुरी तरह बोर करती है। हमारा जीतने का वक्त आया तो यह दावत बीच में आ कूदी! खैर मालिक साहिब की मर्जी .....।"

सतीश कुर्सी छोड़कर खड़ा हो गया। अब राज को भी याद आया कि वाकई सतीश के दोस्त राकेश ने उन्हें शाम की चाय की दावत दे रखी हैं। उन दोनों को उठता देखकर सतीश ने भी पत्ते फेंक दिए।

ज्योति ने सतीश से कहा
“जरा जल्दी से तैयार हो जाना। अपनी आदत के अनुसार बाथरूम में ही गाने गाने मत बैठ जाना या यही पर बैठ गप्पे लड़ाते रह जाओं....।'

“पहले तुम जाकर जल्दी से नहा लो।" सतीश हंसा-“मर्दो की तैयारी का क्या हैं, दो मिनट में तैयार हो लूंगा।

“मुझें तो तैयार होने में कम से कम एक धंटा लगेगा।" ज्योति ने मधुर मुस्कान के साथ कहा- लीजिए सर, मैं तो चल पड़ी।

वो अपने कमरे की तरफ चली गई।

ज्योति को गए हुए करीब पन्द्रह मिनट हुए होंगे, राज और सतीश मजे से तैयार हो रहे थे कि अचानक ज्योति के कमरे से एक भयानक, दर्दनाक चीख उभरी। चीख ज्योति की थी।

राज और सतीश चीख की आवाज सुनकर उछल पड़ें । उन्होंने हैरत से एक-दूसरे की तरफ देखा और कुछ कहे-सुने बगैर ज्योति के कमरे की तरफ दौड़ पड़े।
कमरे के अन्दर से ज्योति के कराहने की आवाज आ रही थी।

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“आह........हाय.......बचाओं सतीश...........मनो..........जा........म.....नो............ज।" संज...............धोखा.........धोखा.....।" वो दोनों दरवाजा खोलने की कोशिश करते रहे और ज्योति के दर्द भरे शब्द धीरे-धीरे डूबते चले गए। यहां तक कि उसकी आवाज आनी बन्द हो गई। कमरे में खामोशी छा गई।

राज और सतीश, दोनों ही घबराए हुए थे और दरवाजा खोलने की कोई तरकीब उनकी समझ में नहीं आ रही थी। इस दौरान ज्योति की चीखें सुकन सारे नौकर भी उनके गिर्द आ जमा हुए थे। जब किसी तरह दोनों से दरवाजा न खुला तो सतीश ने नौकरी को इशारा किया। सभी मिलकर दरवाजे पर जोर लगाने लगे।

तब अन्दर की चिटकनी टूट गई और दरवाजा जोरदार आवाज के साथ खुल गया। राज दरवाजे पर अपना जोर लगाए होने की वजह से अन्दर जा गिरा। लेकिन फौरन ही वो सम्भल गए।

सम्भलते ही राज की निगाह सबसे पहले ज्योति पर पड़ी, लेकिन अन्दर का नजारा देखकर उसके जिस्म में खौफ से झुरझरी दौड़ गई।

सतीश तो वा नजारा देखते ही चीख कर दो कदम पीछे हट गया, राज हैरत और खौफ से स्तब्ध रह गया। जैसे फर्श न उसके पांव जकड़ लिए हो। एक मिनट के अन्दर-अन्दर राज खड़ा-खड़ा पसीने से भीग गया, उसके रोंगटे खड़े हो गए थे।

वो सांप जैसा चांदी का नेकलसे उसकी मी में था ओर वो सांप जो दो दिन पहले राज ने उसके नेकलेस में डाला था, ज्योति के सिरहाने रेंग रहा था।

दो क्षण में ह जब राज सम्भला तो उसने सबसे पहले बढ़ कर उसे जहरीले दोते वाले सांप को मार दिया। अब तक सतीश भी अपनी होशो-हवास पर काबू पा चुका था, उसने जल्दी से एक चादर उठाकर ज्योति के नंगे जिस्म पर डाल दी

सारे नौकर कमरे से बाहर हैरत से मुंह फाड़ें खड़ें अन्दर का दृश्य देख रहे थे। जरूरी कामों से निपटकर राज ने नौकरों से कुछ-न-कुछ काम बता कर वहां से टाल दिया।

तन्हाई होते ही वो ज्योति का मुआयना करने लगा। उसने नब्ज देखी तो बिल्कुल बंद थी। चेहरे को गौर से देखा तो उसे ज्योति के दाए गाल पर एक छोटा सा जख्म नजर आया, जैसे किसी तेज नोकीली चीज की रगड़ लगी हो। इसका मतलब साफ था कि ज्योति के दाए गाल पर उस सांप ने डस लिया था।

ज्योति के गाल पर सांप का काटे का जख्म देखकर राज एब बार फिर चीख कर खड़ा हो गया ओर उसके जेहन में अपने दोस्त उस मिस्त्री डॉक्टर की बातें गूजने लगी।

“वो सांप अगर आपको अपनी जबान से काटता भी रहे तो आपकों कोई फर्क नही पडेगा। कोई नुकसान नही पहुंचेगा। लेकिन अगर किसी तरह इसका जहर आपके खून में दाखिल हो जाए तो दुनिया की कोई ताकत आपकों मौत के मुंह में जाने से नहीं बचा सकती..... । एक ऐसी मौत से, जिसे कोई डॉक्टर अस्वभाविक मौत नहीं कह सकेगा।

ये शब्द थे, राज के उस मिस्त्री डॉक्टर दोस्त के उस सांप के बारे मे, जिसके मुंह में दांत नहीं होते थे और जिसको अभी दो दिन पहले राज ने ज्योति के नेकलेस से निकालकर उसका जहर हासिल करने के लिए अपने बॉक्स मे रख लिया था।

अब ज्योति के गाल पर सांप के काटें का जख्म देख कर राज को पहली बार अहसास हुआ था कि वो सारा मामला समझ चुका है। ज्योति मिस्त्री सांप का जहर सतीश पर किस तरह इस्तेमाल करती थी।

आज उसे यह भी समझ में आ गया था कि डॉक्टर जय ने उस दिन यह दावा क्यों किया था कि वो हमेशा अपनी प्रेमिका के होंठ ही चूमता हैं, गोलों को छुआ तक नही है।
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12-08-2021, 02:42 PM,
#39
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
आज उसे यह भी समझ में आ गया था कि डॉक्टर जय ने उस दिन यह दावा क्यों किया था कि वो हमेशा अपनी प्रेमिका के होंठ ही चूमता हैं, गोलों को छुआ तक नही है।

बात दरअसल यह थी कि ज्योति अपने गाल रात-दिन मिस्त्र जहर से जहरीला रखती थी। मिस्त्री सांप का मुंह वो दिन में दो तीन बार अपने गालों से लगा लिया करती थी और वो ज्योति के गाल चाट लिया करता था और उसकी जुबान का जहर ज्योति के गालों पर लगा जाता था।

उसके बाद जाहिर हैं, सतीश प्यार के जोश में उसके रसीले होंठों को चूमता हो, मदभरी आंखों को चूमता होगा तो गोलों का नम्बर भी आता ही होगा।

जब वो गालों को चूमा होगा तो वह जहर उसके मुंह के जरिये उसके जिस्म में चला जाता होगा। लेकिन इतनी कम मात्र में की शरी पर एकदम से घातक असर न डाले, धीरे-धीरे असर दिखाता रहे और सतीश को मौत की तरफ धकेलता जाए।

अब ज्योति खुद जहर का ही शिकार हो गई थी, जो चालाकी से काल लेकर अपने पांच पतियों की जान ले चुकी थी, और उनकी दौलत पर कब्जा कर चुकी थीं अब सतीश को धीमी मौत मार कर उसकी दौलत पर भी कब्जा जमा लेना चाहती थी।

उस दिन भी वो नहाने के बाद उसी सांप का जहर लगाना चाहती थी, मगर उसे मालूम नही था कि नेकलेस बाला बिना दांतों का सांप बदल चुका हैं और उसकी जगह एक निहायत खतरनाक और दांता वाला सांप नेकलेस में बन्द हैं। इसलिए , ज्योति ने जैसे ही नेकलेस खोलकर सांप को गाल से लगाया होगा, अपनी आदत के अनुसार सांप ने उसके गुलाबी गालों पर डस लिया होगा और डॉक्टर सजय के कहे मुताबिक, तीन मिनट के अन्दर-अन्दर वो बेहद हसीन जादूगरनी मर गई थीं
मरते-मरते उसने जय.........धोखा शब्द कहे थे। इसका मतलब ज्योति ने यह समझा होगा कि डॉक्टर जय ने उसे धोखा दिया है। यादि असली सांप अपने पास रख कर दांतो वाला सांप उसे दे दिया था। उसे मारने के लिए। लेकिन डॉक्टर जय के बारे में उसने यही दो शब्द टूटे-फूटे ढंग से कहे थे, इसलिए राज के सिवा कोई न समझ पाया कि उन शब्दों का मतलब क्या है।

आनन-फानन ज्योति की मौत की खबर सारे शहर में फैल गई थी, क्योंकि सतीश और ज्योति दोनों ही हाई सोसाइटी में बहुत लोकप्रिय थे, इसलिए एक घंटे बाद ही शोक प्रकट करने वालों को तांता लग गया।

ज्योति की लाश उठा कर उन लोगों ने उसके कमरे में रख दी थी, सतीश सफेद कपड़े पहने उसके सिरहाने सिर झुकाए बिलकुल खामोश बैठा हुआ था।

सतीश के दुख का अन्दाजा नही लगाया जा सकता था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो गया। उसकी प्रेमिका, उसकी प्यारी बीवी अचानक मर क्यों गई हैं? गम की अधिकता से उसके आंसू सूख गए थे। ऐसा लग रहा था जैसे उसे लकवा मार गया हों, कभी वो घर आने-जाने वालों को पागलों की तरह घूरने लगता था ओर कभी फिर गर्दन झुका लेता था।

रात को भी काफी देर तक शोक प्रकट करने वाले आते-जाते रहे। लेकिन हैरत की बात थी कि ज्योति का आधिक आखिरी बार अपनी प्रेमिका का मुंह देखने भी नही आया।

घटना के थोड़ी देर बार ही राज ने डॉक्टर जय को भी फोन कर दिया था, ताकि कम से कम उसे सूचना ही दे दे। लेकिन उसके नौकर ने बताया था कि डॉक्टर जय घर पर नही है। तब राज ने कहा कि डॉक्टर जय आए तो नौकर तुरत उसे इस दुर्घटना की खबर दे दे। इसके बावजूद डॉक्टर जय ज्योति को देखने या सतीश को तसल्ली देने अभी तक नहीं पहुंचा था।

पहले राज ने डॉक्टर जय के प्यार में मर मिटने के दावे सुन कर यही समझा था कि इस आदमी के बारे में कुछ नही कहा जा सकता था कि यह कब क्या कर गुजरे।

लेकिन अब नीकलण्ठ को महसूस हो रहा था कि उसके दावे भी आम आशिकों की तरह सिर्फ दावे ही थे। जिसमें हकीकत नाममात्र भी नही पाई जाती । वर्ना यह कैसे हो सकता था कि प्यार के नाम पर मर मिटने के दावे करने वाला अपनी प्रेमिका के मरने पर भी उसकी सूरत देखने ने पहुंचे ?"

सतीश अभी तक सारे घटनाक्रम से अनजान था। वो यही समझ रहा था कि जब ज्योति नहाने के लिए कपड़े उतार कर बाथरूम जा रही थी, या नहाकर आ रही थी तो कहीं से उस सांप ने निकल कर उसे डस लिया था। राज ने भी फिलहाल उसे सब कुछ बताना उचित नहीं समझा।

वो पूरी रात राज और सतीश ने कमरे में बैठकर जागते हुए गुजारी। सारी रात राज उसे तसल्लियां देता रहा,उसका दिल बहलाने की कोशिश करता रहा, और सतीश एक शब्द भी बोले बगैर चुपचाप राज की बातें सुनता रहा।

सुबह चार बजे जब सोफे पर बैठे-बैठे सतीश को झपकी आ गई थी, तब अचानक फोन की घंटी बज उठी थी ।राज ने फौरन रिसीवर उठाया

"हैलों, कौन साहब ?' उसने धीरे से पूछा, ताकि सतीश की आंख न खुल जाए।

लेकिन दूसरी तरफ का जवाब सुनकर वो चौक उठा, हैरत और खौफ से रिसीवर उसके हाथ से गिरते-गिरते रह गया। दूसरी तरफ से सतीश का नौकर कह रहा था

“क्यों........अचानक क्या हो गया उन्हें ?"
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12-08-2021, 02:42 PM,
#40
RE: XXX Kahani नागिन के कारनामें (इच्छाधारी नागिन )
“पताा नहीं क्या हो गया हैं साब.......।' नौकर ने जवाब दिया-'रात को दो बजे के करीब वो घर वापस लौटेथे, आते ही मैंने उनकों आपका सन्देशा सुना दिया था। हादसे की खबर सुनकर वो थोड़ी देर तो गुमसुम बैठे रह गए थे, फिर उन्होंने अपने कमरे में जाकर कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया था। मैंने समझा, वो शायद सो गए हैं, लेकिन तीन बजे उन्होनें फिर मुझे बुलाया था और चाय मांगी थी।

कुछ देर बाद जब मैं चाय लेकर गया था तो वो कुछ लिख रहे थे। चाय मेज पर रखकर मैं कमरे से निकल आया था । करीब बीस मिनट बाद जब मैं बर्तन लेने गया था तो डॉक्टर साहब बिस्तर पर बेहोश पड़े हुए थे। उस वक्त से वो बेहोश ही पड़ें हुए है। हम लोग उन्हें होश में लाने के कई जतर कर चुके हैं........कृपया आप जल्दी आ जाइए और उन्हें देख लीजिए।"

“ठीक हैं, मैं अभी आ रहा हूं।'

नीकलण्ठ ने फोन बन्द कर दिया और नौकरी को सतीश की देखभाल के लिए निर्देश देकर कार में बैठे कर डॉक्टर जय के घर की तरफ चल पड़ा।

रात का वक्त था, सड़के खाली पड़ी था, बहुत जल्दी वो डॉक्टर जय की कोठी पर पहुंच गया।

नौकर बाहर ही खड़ा उसका इन्तजार कर रहा था।
'क्यों, अब कैसी हालत हैं उनकी ?" उसने जवाब दियां

राज कार से उतर कर जय के कमरे की तरफ चल पड़ा।

लेकिन कमरे की दहलीज पर कदम रखते ही वो ठिठक गया। उसकी नजर डॉक्टर जय पर जम कर रह गई, जो बिस्तर पर निश्चय पड़ा हुआ था। राज ने आगे बढ़ कर डॉक्टर जय की नब्ज टटोली।

लेकिन जय की कलाई हाथ में लेते ही राज को झुरझुरी दौड़ गई। डॉक्टर सजय की कलाई बर्फ की तरह ठण्डी थी और नब्ज बिल्कुल गायब।

राज ने उसके दिल पर हाथ रखा, डॉक्टर जय के वो शब्द गूंज गए।

“यकीन कीजिए......मैं अपनी प्रेमिका के बगैर एक दिन भी जिन्दा नहीं रह गया।

तो क्या डॉक्टर जय ने ज्योति की मौत की खबर सुनकर खुदकशी कर ली थी ? राज सोचने लगा। क्या वाकईउसे ज्योति से इतना ही प्यार था ? वो चकरा गयां

जय.......ज्योति......... सतीश । ये तीन शब्द तेजी से राज के दिमाग मे घूम रहे थे। तेजी से बदलते हालात और इतने कम वक्त में अपनी दो करीबी जानकारी की मौत ने उसके होश उड़ दिए थे। वो चकराकर गिर ही पड़ता अगर उसने जल्दी से सोफे का सहारा न ले लिया होता। वो सिर थाम कर सोफे पर बैठे गया।

"कैसी तबीयत है डॉक्टर साहब इनकी ?"

“नौकर ने राज को परेशान देखा तो घबरा कर पूछा था-"कुछ नहीं, ठीक हैं......... । एक गिलास पानी जाओं" राज ने फंसी-फसी आवाज में कहा।

पानी का गिलास एक ही सांस में गटक कर राज थोड़ा सम्मला तो उसने फिर से डॉक्टर का मुआयना किया। लेकिन डॉक्टर जय मर ही चुका था।

“अफसोस कि ये भी स्वर्ग सिधार चुके हैं........।” राज ने नोकर की तरफ पलटकर मायूसी से कहा।

“मर गए ?” नौकर का मुंह हैरत से खला और फिर वो चीखने लगा।

नीककण्ठ ने डॉक्टर जय की लाश को सीधा किया और उस पर एक चादर डाल दी। उसके सिरे के नीचे से तकिया निकालते हुए राज की निगाह उस बन्द लिफाफे पर पड़ी जो पहले तकिये के नीचे दबा हुआ था । राज ने उसे उठाकर देखा उस पर उसी का नाम लिया हुआ था।

राज ने उसे जल्दी से खोलकर पढ़ा, लिखा था
डियर राज अलविदा!
तुम्हें याद होगा कि मैंने तुमसे कहा था, मैं अपनी प्रेमिका के बगैर एक दिन भी जिन्दा नहीं रह सकता। आज में उस बात को साबित कर रहा हूं। मैंने पत्र लिखने से पहले एक बहुत घातक जहर अपने पास रख लिया हैं, जिसके असर से मुझें डेढ़ मिनट के अन्दर-अन्दर मौत आ जाएगी।

ज्योति की मौत की खबर पाकर और यह मालूम होने बाद कि उसे एक छोटे से मगर निहायत खतरनाक सांप ने काट लिया था, मुझें पर भेद खुल गए। तुम्ही वो शख्स हो जो इस सारे फसाद की जड़ है। तुमने मुझें झूठी फोन कॉल करके मुझें मेरे घर से हटाया और मेरा सांप चुरा कर ले गए, मेरे सांप की जगह तुमने कोई दूसरा सांप रखकर उस पर तेजाब का मर्तबान गिरा दिया, वो मर्तबान इतने सालों से वहां रखा थां, मगर गिरा नहीं था, वो गिरा भी तो बिल्कुल उसी सांप पर।
तुम्हें किसी तरह ज्योति के नेकलेसे का राज जालूम हो गया था

ओर तुम किसी भी तरह अपने दोस्त सतीश का बचाना चाहते थे। तुमने उसे बचा लिया।

काशः मुझे तुम्हारे बारे में कुछ दिन पहले शक हो जाता तो सतीश के साथ मैं तुम्हें भी ज्योति के पहले पांच पतियों के पास पहुंचा देता।

लेकिन अफसोस........वक्त गुजर चुका है। ज्योति की मौत के बाद में अपने अन्दर तुमसे बदला लेने की शक्ति भी नही महसूस कर रहा हूं। बहरहाल तुम आज के विजेता हो, मेरी बधाई स्वीकार करो, क्योंकि आखिर हम दिखावे के दोस्त तो थे ही!
अलविदा
-जय

पत्र पढ़कर राज ने चाय का कप उठाकर उसे सूघा, उसमें से अजीब सी गंध आ रही थी। वो समझ गया कि जहर चाय के कप में डालकर पिया गया है।

सतीश को उसने वापिस लौटकर डॉक्टर जय की मौत की सूचना दी, लेकिन पत्र की बात गोल कर गया। सतीश को यही बताया था लीलकण्ठ ने कि अचानक हार्ट फेल हो जाने से डॉक्टर जय मर गया है।

सतीश के दिलों-दिमाग पर ज्योति की मौत का सदमा ही ऐसा छाया हुआ था कि उस पर दूसरी मौत का कोई असर ही नही हुआ था। वो सिर्फ एक बार चौंका था, हैरत से राज को देखा और फिर गर्दन झुकाकर बैठा गया था।
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