XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा
02-04-2021, 01:03 PM,
#11
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

लोकेशन: अब्दुल की सोडा-शॉप

रात के नौ बजे है, गोकुलधाम सोसायटी के सारे मर्द खड़े है. बातों ही बातों में सेक्स की बात निकलती है.

अय्यर: यस महेतासाब I also do anal sex with Babita regularly. And she also enjoys it.
महेता: Oh yes same case here between me and Anjali.
जेठा को कुछ अंग्रेजी समज नही आ रहा.

जेठालाल: कृपया हिंदी में बात कीजिए, हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है.
महेता: ओह हाँ हाँ..जेठालाल, अय्यर ये बोल रहा है की वो बबिताजी के साथ नियमित रूप से एनल-सेक्स करता है और बबिताजी उसे इंजॉय भी करती है. तो मैने बोला, की मेरा और अंजली का भी ये ही केस है.
जेठा: एंजल-सेक्स मतलब ?
महेता: एंजल-सेक्स नही भाई एनल-सेक्स माने गुदामैथुन
जेठा: मतलब
अब्दुल: अरे जेठाभाई गांडमराई की बात चल रही है!

ये सुन के जेठालाल के तो सर से पैर तक जेसे २२० वोल्ट का करंट लगता है. क्योकि आजतक दयाबेन ने कभी उसे गांड को टच भी करने नही दिया, और ये अय्यर स्वर्ग की अप्सरा बबिताजी की नियमित गांड चुदाई करता है??? ये सोच के ही जेठा के तो पुरे बदन में आग लग जाती है.

हाथी: ये तो गलत बात है. कोमल के तो कुल्ले इतने मोटे है मेरे लंड गांड तो क्या, गांड के छेद तक भी नही पहोंच पाता अब्दुल अब मेरा गम मिटाने के लिए एक सोडा ओर बनाओ.

सोढ़ी: इस मामले में रोशन एंड रोशन की कम्पनी में कोई टेंशन नही है जी! मै और रोशन भी भरपूर एनल-सेक्स करते है. महीने में कम से कम तीन-चार बार जब अपनी गड्डी रोशन की गांड में पार्क करता ही हू.
भिडे: (कोलर को ऊँचा करके) और मै और माधवी भी नियमित रूप से गुदामैथुन का अप्रतिम आनंद उठाते है....और हमारे जमाने में तो ...

जेठालाल: भिडे तुम्हारे जमाने के सेक्स के रिती-रिवाजो के बारे में हम अलग से सेमिनार रखेंगे. ठीक है?

जेठालाल के टोकने पर भिडे नाराज हो जाता है, इसलिए जेठा पर व्यंग-बाण चलाता है.

भिडे: हाँ हाँ जरूर सेमिनार रखेंगे, लेकिन मुझे नही लगता तुम हिस्सा ले पाओगे, गांड-चुदाई तो दूर तुमने तो कभी मुख-मैथुन का मजा भी लिया हो ऐसा लगता नही!! तुम सेमिनार में आओगे तो जेसे गणित में कमजोर विद्यार्थी की तरह पिछली बेंच पे बेठे बेठे सो जाओगे!!

(भिडे की ये टिप्पणी बंदूक की गोली की तरह जेठा के आत्म-सम्मान को चीरती हुई निकल जाती है. घायल जेठा अपने आपको सेक्स में माहिर है ऐसा दिखाने हेतु डींगे हांकना शुरू करता है..)

जेठालाल: अरे चल जा जा...तू क्या जाने मेरे बेडरूम के जलवे? मै और दया ...हमलोग तो केवल गांड चुदाई ही करते है. आखरी बार टप्पू को पैदा करने वास्ते ही मेने उसकी चुत मारी थी. बाकी मै अपना लंड उसकी गांड के अलावा कहीं टच ही नही करता. और मै तो वेपारी आदमी हू तो क्या है की कंडोम, माला-डी या नसबंदी का खर्चा कोन ले, इसलिए हम तो देशी-गर्भनिरोधक उपाय ही आजमाते है-माने गांड-चुदाई: एक पैसे का खर्चा नही बोलो! और आज का नही मुझे तो बरसो से गांड चुदाई का अनुभव है. सालो पहेले जब गांव में मै पहेली बार चढा था तो गांड-चुदाई ही की थी, और गांव की आधे से ज्यादा लड़कियों और ओरतो की तो मैंने अपने इक्कीसवें जनमदिन से पहेले ही गांड मार ली थी. आज भी जब गांव जाता हू तो वो सब मुझे देख के शरमा जाती है, घर से बाहर नही निकलती. ऐसा रुआब है मेरा. पता है लोग मुझे गुजरात में किस नाम से बुलाते है? "जेठा ध बर्निंग ट्रेन" क्योंकी मेरा लंड 'बर्निंग ट्रेन' की तरह गांड जलाके रख दे, ऐसी कसकर चुदाई करता है.

मेहता: (जेठा के कान के पास आके एकदम धीमी आवाज में) बस जेठालाल कुछ ज्यादा हो रहा है.
भिडे: रहेने तो महेतासाब ये जेठालाल एक नम्बर का फेंकू है हम सब जानते है.
जेठालाल: मेरी एक एक बात सोलाह आने सच है.
भिडे: मै नही मानता.
सोढ़ी: और मै भी नही मानता. सोरी जेठा प्रा रबजी मुंह न खुलवाए लेकिन डींगे थोड़ी औकात में रहेके हांकनी चाहिए.

जेठालाल: सोढ़ी तू तो भिडे का खास दोस्त है, उसका ही पक्ष लेगा, और भिडे तो मै स्टेम्प पेपर पे लिख के दू, तब भी मेरी कोई बात नही मानेगा.
भिडे: नही स्टेम्पपेपर पे लिखके देने की कोई जरूरत नही, तुम बस एक बार साबित कर दो की तुमने दयाबेन की गांड मारी है. तो हम मान जाएंगे.
जेठा: हाँ तो आ जाना कल सुबह, और खुद दया के मुंह से सून लेना. (जेठा सोचता है, की क्योकि दया एक पतिव्रता नारी है इसलीए पति की इज्जत दांव पे लगी है, ऐसा बोल उसको मना लूँगा की जूठ-मुठ ही सोसायटी के मर्दों के सामने कबूले की वे गुदा-मैथुन करते है)

भिडे: अब दयाभाभी से क्या पूछना, वो तो तुम उन्हें पहेले से ही पट्टी पढा दोगे तो तुम्हारी हाँ में हाँ ही मिलाएगी न? अगर हिम्मत है तो एक अपनी बीवी के साथ, दोनों का चहेरा दीखता हो ऐसा गांड-चुदाई का MMS बनाओ, फिर हम लोग मानेंगे और तुम्हे गांड-चुदाई के सरताज का ख़िताब देंगे, तुम्हारी शोभायात्रा पूरे मुम्बई में निकालेंगे. आये बड़े 'जेठा ध बर्निंग ट्रेन' ..हमको क्या जोनपुर से आयेला समजा है?

जेठालाल का पूरा बदन गुस्से से तप रहा है. एक तो अय्यर बबिताजी की गांड मारता है वो दर्द उपर से भिडे मास्टर के ये व्यंग बाण. अपने दिमाग पे काबू नही रहा, जेठा तिलमिला के बोल उठता है,

जेठालाल: ठीक है....आज गोकुलधाम सोसायटी के सभी मर्दों के सामने मै जेठालाल चम्पकलाल घड़ा, ये चेलेंज कुबूल करता हू की मै अपनी बीवी दया जेठालाल घड़ा की गांड मराई का MMS बनाऊंगा, आप सबको दिखाऊंगा.
फिर जेठा पैर पटक कर, बिना सोडा खत्म किये, अब्दुल की दूकान से चला जाता है.

लोकेशन: जेठालाल का बेडरूम
जेठालाल: दया, मै कोन हू?
दयाबेन: आप टप्पू के पापा हो.
जेठालाल: उसके अलावा?
दयाबेन: आप मेरे पति हो!

जेठालाल: नही मै तुम्हारा पति नही पति-परमेश्वर हू. और आज ये पति-परमेश्वर हुक्म करता है, की तुम उसे अपनी गांड मारने दो.

दयाबेन: हें माँ, माताजी, आप मुझे केसे धर्मसंकट में डाल रहे है. गुदा-मैथुन प्रकृति के नियमों के विरुध्ध है. जानवर भी नही करते ऐसा तो, और आप..आप टप्पू के पापा मेरे पति-परमेश्वर होके भी ऐसा पाप करने की बात कर रहे हो.

जेठालाल: ये सब पूरानी दकियानूसी बाते है दया. आज जमाना कितना बदल गया है. अरे सब पढे-लिखे लोग ऐसा ही करते है. उसको क्या बोलते है...हाँ 'एंजल सेक्स' करते है. और बिना एंजल सेक्स के पति-पत्नी का मिलन अधूरा है...हाँ सच्ची, अभी सोडा की दूकान पे अय्यर और महेतासाब ने खुद बोला, वे भी एसा ही करते है और बबिताजी और अंजलीभाभी को बड़ा मजा भी आता है. चलो न प्लीज़ हम भी ट्राय मारते है.

दयाबेन: तो कोई खड्डे में गिरे तो हमे भी खड्डे में गिरना चाहिए? वो सब ऐसा पाप करके नर्क में जांएगे तो क्या हमे भी वहाँ जाना चाहिए?

जेठालाल: अरे तू क्या नॉनसेन्स बात कर रही है...दया, जब मियाँ बीवी राजी तो क्या करेगा काजी. हम दोनों को आपस में जो करना है वो कर सकते है, इस में धर्म-अधर्म, पाप-पुण्य बिच में क्यों लाती हो. चलो न बस एकबार, ट्राय तो करे. तुमको मजा आएगा.
दयाबेन: नही नही, अमदावाद में मेरी माँ को पता चलेगा तो वो क्या सोचेगी?
जेठालाल: क्या? सासुमा को केसे पता चलेगा.
दयाबेन: क्यों की मै अपने वैवाहिक जीवन की कोई भी बात माँ से नही छिपाती..क्योकि वो माँ है!!
जेठा (मन में) हें राम ये किस बला से शादी कर ली.
जेठालाल: दया, देख अगर तू आज-अभी-इसी वक्त मेरे साथ गांड चुदाई नही करेगी तो तो...तो. मै कल से दिल्ली पे जंतर-मंतर या रामलीला मैदान- जहां भी पुलिस परमिशन देगी वहाँ पे आमरण-अनशन पे उतर जाऊँगा!
दया: हाँ तो कीजिए ना? आपको उपवास करने की बेहद जरूरत है, देखिये पूरा पेट बाहर आ गया है.थोड़े दिन उपवास करेंगे तो आपकी सेहत के लिए अच्छा होगा.
जेठा सोचता है (मन में) बातों से दया को नही मना पाऊंगा. आइडिया...भोस-चुदाई की बहाना करके चढता हूँ और अचानक ही बिना चेतावनी दिए, अपना ये भचाऊ का 'भायडा' उसकी गांड में पेल दूंगा.

जेठा: ठीक है तू जीती बस. नही करते गांड चुदाई. लेकिन मुझे अब भोस-चुदाई तो करनी है, तू तो जानती है बिना चोदे मुझे नींद नही आती.
दया: हाँ हाँ तो कीजिए न, किसने मना किया है. आप जब चाहे, जहाँ चाहे, जेसे चाहे मेरी चुत मार सकते है, आपका हक बनता है.
दयाबेन अपनी पीठ के बल, बिस्तर पे लेट जाती है. साडी और घाघरा उपर करती है, पेंटी तो वो वैसे भी रोज रात को सोने से पहेले ही निकाल देती है ताकि जेठा का टाइम बर्बाद न हो और तुरंत अपनी टाँगे पसार देती है.
जेठा: (मन में) यदि ये पीठ के बल लेटेगी तो गुदा-प्रवेश करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. गुदा मैथुन के लिए तो कुतिया-स्टाइल ही सबसे उपयुक्त और आसान रहेगी.
जेठा:नही दया, ये मिशनरी नही आज हम डोगी-स्टाइल में करते है.
दया: मतलब?
जेठा:मतलब तू कुत्तिया की तरह चार पैरों पे हो जा, मै कुत्ते की तरह उपर चढ़ जाता हू.
दया: है माँ - माताजी, आप ये क्या बोल रहे हो? हम इंसान से कुत्ते-कुत्ती बन जाएँ? आत्म-सम्मान जेसी चीज है की नही?
जेठा: ओफ्फो...दया तू संगम के राजेन्द्र कुमार की तरह सोचती बहोत है, करती कम है. ठीक है भाई कुत्ता कुत्ती नही बनते तो घोडा-घोड़ी तो बन सकते है न? उसमे तो कोई बुराई नही.
दया(थोडा सोच कर): हाँ घोडा-घोड़ी बनने में कोई बुराई नही.
दया पलंग पे अपने दो हाथ और दो घुटनों के बल, एक घोड़ी की माफक पोजिशन लेती है. और जेसे कोई नर पशु, मिलन से पहेले मादा को मुड में लाने के लिए, उसकी योनी पीछे से सूंघता-चाटता है, वैसे जेठालाल भी चार पैरों पे होके, पीछे से आकर दया की भोस सूंघने-चाटने लगते है.

दयाबेन: उई..माँ, टप्पू के पापा, जिस खूबी से आप जीभ चलाते है, अगर हमारे क्रिकेटर अपना बल्ला चलाते तो वर्ल्ड कप आठ साल पहेले ही जित गए होते!

जेठालाल: हाहाहा..मानती है न की ये जेठा की जीभ का कोई मुकाबला नही!!

दयाबेन: हाँ बाबा हाँ!

कुछ मिनटों तक ओर भोस-चटाई के बाद, दयाबेन स्खलित हो जाती है, लेकिन जेठालाल बखूबी जानते है, की हर चुदाई सेशन में दया कम से कम ४ ऑर्गेजम लिए बिना संतुष्ट नही होती, इसलिए ये तो केवल शुरुआती दस ओवर थी, अभी लम्बी पारी खेलनी होगी.

जेठालाल: सेठानीजी अब रेडी हो, ये मजदूर टेम्पो लेके आ रहा है आपके गोडाउन में!

दयाबेन: क्या टप्पू के पापा आप भी!

जेठालाल एक ही धक्के में पूरा टेम्पो चुत के अंदर जमा देता है, और फिर धीरे धीरे आगे पीछे कमर हिलाने लगता है.

जेठालाल (मन में) धीरे धीरे दया तैयार हो रही है, थोड़ी ओर मस्ती में आने दो, बाद में गांड में डालूँगा तो उसे मजा भी आएगा और विरोध भी न करेगी.
जेठालाल १०-१५ धक्के ओर लगाते है...अब दयाबेन के पूरे बदन में मस्ती छा रही है, शर्म-संकोच सब गायब हो गया, खुद ही अपनी कमर हिला के जेठा के लंड को वो आगे से धक्का दे रही है.

जेठालाल (मन में) हाँ अब लौहा गरम है, मार दो हथोड़ा!

जेठा अचानक से अपना लंड दया की मदमस्त चुत में से निकाल के गांड के छेद पे रख देता है, ओर कसकर धक्का देने की कोशिश करता है, लेकिन दयाबेन की गांड एक अक्षतकुँवारी कन्या की माफिक एक दम टाईट है, उसमे नटराज पेन्सिल बी मुश्किल से जा सकती है जेठालाल के मोटे लंड का कोई चांस ही नही.

दयाबेन: हाय राम..आप क्या कर रहे हो?

जेठालाल दया की बात को सुना-अनसुना करके, थोडा ओर जोर लगाते है. मुश्किल से शिन्श्नाग्र का आधा इंच ही अंदर जा पाता है... फिर की कोशिश अभी जारी है.

टप्पू के पापा..बाहर निकलिए अभी के अभी..

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02-04-2021, 01:03 PM,
#12
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा
जेठालाल आगे मुड के अपने दोनों हांथो से दया की निपल्स मसलने लगता है, और कान के पास आके कहेता है....दया प्लीज़ एक बार करने दो ना!!

दयाबेन: नही टप्पू के पापा, मेरी माँ के संस्कार मुझे गुदा-मैथुन करने की अनुमति नही देते!

वो तुरंत जेठालाल को धक्का देकर एकतरफ हटा देती है और कसकर रजाई ओढकर सो जाती है. जेठालाल को लगता है गलती से बड़ा मिस्टेक हो गया, गांड-चुदाई एकतरफ इधर तो भोस-चुदाई का भी मौका चला जाएगा. वो वापस दया के पास आते है.

जेठालाल:दया..दया....सोरी मुझसे गलती हो गयी, बस बाबा अभी गांड-चुदाई के लिए नही कहूँगा कभी भी. प्लीज़ ..

जेठालाल दया के बदन से रजाई हठाने की कोशिश करते है. लेकिन दया पीठ फेर के दूसरी ओर सो जाती है.

जेठालाल: चल ना.....देख मेरा तो माल भी नही गिरा...काम तो पूरा कर लेने दे. आज से तुमको हो पसंद उसी तरह करेंगे बस!

लेकिन जेठा की मिन्नतो का कोई असर नही, दया कोई रिस्पोंस नही देती. जेठालाल अपनी किस्मत को कोसता सो जाता है.

दुसरे दिन सुबह: डाइनिंग टेबल पे.

दया चाय रख के जाती है, जेठा उसका हाथ पकड़ लेता है...दया अभी भी नाराज हो, बोलाना सोरी, अभी पूरानी बाते भूल जाओ.

लेकिन दयाबेन अपना हाथ छुडवा के किचन में चली जाती है.

उसी शाम,

जेठालाल मनमे: अगर सोडा शॉप पे गया तो वापस भिडे की बाते सुननी होंगी की किधर है MMS. इसलिए अभी एकाध हफ्ता सोडा का उपवास रखना पडेगा.

दो दिन हो जाते है.

जेठा लाख कोशिश करता है, दया को मनाने की लेकिन दयाबेन तो मौनव्रत पर है.

चौथे दिन सुबह:

जेठालाल: ऐसे नही जी सकता, बिना चुदाई के मुझे तो नींद ही नही आती. क्या करू, केसे मनाऊ दया को? आइडिया, फायर ब्रिगेड महेता साहब.

लोकेशन : तारक महेता का घर

अंजली बाजार में करेले और लौकी की शोपिंग करने गयी है. तारक अकेला अकेला अपने लेपटोप में exbii.com पर वखारियाभाई रचित वेळअम्मा कोमिक्स का गुजराती संस्करण देखने में व्यस्त है.

तभी डोरबेल बजी---
मेहता: बोलो जेठालाल क्या मुसीबत आ पड़ी?

बेकग्राउंड म्यूजिक: जेठालाल पूरा किस्सा बयाँ करता है की केसे उसकी दया को बेवकूफ बनाके गांड-चुदाई करने की ट्रिक असफल रही और अब दया ने रुठ के बात तक करना छोड़ दिया है. और अब लाख मिन्नतो के बाद भी दयाबेन उन्हें माफ नही कर रही.

मेहता: ओफ्फो जेठालाल, इतनी सी बात, अरे भाई दयाबेन को मै अच्छी तरह से जानता हू, बड़ी मासूम और भोली है. चिंता मत करो, ज्यादा से ज्यादा दो हफ्ता....फिर वो तुम्हे माफ कर ही देंगी, और गाड़ी वापस पटरी पे आ जाएगी..
जेठालाल: लेकिन महेतासाहब तब तक मै सोऊ केसे? बिना चुदाई के मुझे नींद ही नही आती. आप नही मानोगे, पिछले ४ दिन से मै सोया ही नही.

महेता: तो यार सोने से पहेले, बाथरूम में जाके मुठ मार लो ना उसमे क्या है?
जेठालाल: वो भी करके देखा, लेकिन माल गिर ही नही रहा. मेरे लंड को हस्तमैथुन की आदत नही.
महेता: क्या? तुमने हमको भी जोनपुर से आएला समजा है? तुमको हस्तमैथुन की आदत नही? अरे मै दावे के साथ कहे सकता हू, तुम बबिताजी के नाम की मुठ हफ्ते में कमसे कम तीन बार तो मारते ही हो. आये बड़े संत जेठादास 'मुठ की आदत नही'!
जेठालाल: आपका अंदाजा गलत है.
मै मुठ नही मारता,
मै केवल दया की चुत मारता हू,
लेकिन हा, उस वक्त आँखे बंद करके कल्पना तो ये ही करता हू की वो बबिताजी ही है!!!!

महेता: हाँ तो जाके दया, I mean दया भाभी की मारो ना...
जेठालाल: अरे भाई ये ही तो टेंशन है, वो मारने ही नही दे रही.
महेता: यार मुझे confuse मत करो, तुम्हारा प्रॉब्लम क्या है?
A. मुठबाजी से माल नही गिर रहा, या
B. की दयाबेन दाव नही दे रही वो?

जेठालाल: कमाल है, अरे आपका ध्यान किधर है. देखिये क्या हुआ की....
(बेकग्राउंड म्युजिक के साथ जेठालाल फिर से पूरी स्टोरी विस्तार से समजता है)
महेता: ओह हम्म...यस...देखो जेठालाल, ये तो कोमनसेन्स की बात है, बीवी को नाराज करना किसी भी ठरकी बंदे के लिए नुकसान का धंधा है. वापस जाके जरा और दिल से, जरा और नरमी से, जरा और इमोशनल होके दयाभाभी से माफ़ी मांगो. वैसे भी वो तो बड़े नरम दिल की है, आसानी से तुमको माफ़ कर देंगी, और फिर अपना 'काम' तमाम कर लो.

जेठालाल: ठीक है आप बोलते है तो.

जेठालाल वापस घर जाता है, दया को फिर से मिन्नते करता है, माफ़ी मांगता है, sad romantic songs गाता है......कोई असर नही.

जेसे तेसे करके वो रात तो निकल जाती है, लेकिन अगले पन्द्रह दिनों तक दयाभाभी का मुंह चिढा का चिढा ही रहेता है, ना वो जेठिया से बात करती है, ना दाव देती है.

जेठालाल : हें भगवान, किस जनम का बदला ले रहे हो. महेतासाहब ने तो बोला था, दो हफ्ते में दया गुस्सा थूंक देगी इधर पन्द्रह दिन होने आये.. वापस फायर-ब्रिगेड को कंसल्ट करता हू.
महेता: आओ जेठालाल इस बार क्या हुआ भाई?
जेठालाल: वो अभी पहेले वाला प्रॉब्लम सोल्व ही नही हुआ. दया अभी भी दाव नही दे रही. वैसे कभी आपके और अंजलीभाभी के बिच ऐसा हुआ है क्या?
महेता: अंजली....अरे उसको केवल शक भी हो जाए न की मैंने ऑफिस में कुछ चटकीला-मसालेदार खाया है, तो भी दाव नही देती बोलो. और ऐसा शक तो उसे महीने के २० दिन रोज शाम को होता है!!! इसलिए ये लेखक केवल कलम का नही मुठबाजी का भी बेताज-बादशाह है.
जेठालाल: क्यों उस दिन तो अय्यर के सामने बड़ी फेंक रहे थे की मै और अंजली भी 'एंजल सेक्स' इंजॉय करते है!?
महेता: जेठालाल वो एनल-सेक्स की बात बिलकुल सच्ची है, लेकिन हम लोग सेक्स बहोत कम ही बार करते है, ये बात भी उतनी ही सच्ची है.
जेठालाल: खेर आप केसे मनाते हो अंजलीभाभी को?
महेता: अरे भाई मेने तो केस ही छोड़ दिया है. कमसे कम चार घंटे मिन्नते करो तब जाके वो महारानी पन्द्र मिनट हाथ लगाने देती है, अब रोज-रोज कोन इतनी मिन्नते करे, मै तो ऐसे ही सो जाता हू. तुम्हे क्या बताऊं में, मेरे लंड एक धधकता ज्वालामुखी है, और उसे ठंडा कर सके .....
जेठालाल: ठीक है ठीक है, मै समज गया, मै तो अपनी रामायण ले के आया था, आपने तो अपनी महाभारत शुरू कर दी. अरे भाई हमारा प्रॉब्लम सोल्व कीजिए, कोई उपाय बताइए मुनिवर!!
महेता: मेरे केस में तो जब अंजली का सेक्स का मुड होता है, वो अपने आप पुराने गिलेशिक्वे भुला के चली आती है और मुजसे लिपट जाती है.
जेठालाल: लेकिन दया तो पिछले पन्द्रह दिनों से मुझे हाथ भी नही लगाया, वैसे तो वो बड़ी चुदासी है, मेरी तरह वो भी एक दिन से ज्यादा अनचुदे रहे नही सकती, मै भी ये देख के हैरान हू वो पन्द्रह दिनों तक बिना चुदाई के केसे रहे पाई ...जरूर छिप छिप के ऊँगली डालती होगी या फिर केला या फिर बेंगन.
महेता: बेंगन से याद आया, बड़े दिनों से बेंगन का भरथा खाने की इच्छा हो रही है, चलों वो गुजराती लोज में आज..
जेठालाल: महेतासाहब मेरी पोब्लेम सोल्व कीजिए, वादा करता हू, बेंगन का भरथा क्या, पुरे बत्तीस पकवान खिलाऊंगा.
महेता: सच बोलू जेठालाल, ये रूठी बीवी दाव नही देती: ये तो 'कहानी घर घर की है" तुम एक काम करो, तुम आत्माराम से मिलो. ऐसे केस में वो क्या करता है उसे पूछो.
जेठालाल: नही नही, मेरा भिडे का छत्तीस का आंकड़ा है. मै जाऊँगा तो पहेले बोलेगा MMS क्लिप दिखाओ. उसी के कारण तो ये सारी बवाल हुई है. और वैसे भी भिडे तो एक नम्बर का भोस-चटोरा है. पूरा दिन माधवीभाभी की सेवा में लगा रहेता है, मुझे नही लगता माधवीभाभी कभी भी उस से नाराज हुई होंगी.

महेता: हाँ ये भी सोचनेवाली बात है, तो एक काम करो-रोशनसिंह सोढ़ी को मिलो. उसकी भी पार्टी-शार्टी की आदतों के कारण, आयेदिन रोशनभाभी उसको चोदने नही देती होगी, वो क्या ट्रिक लगाता है, तुम उसी से जान के आओ.
जेठालाल: ओके. आज दुकान जाते वक्त, उसके गेरेज से होके जाऊँगा.

जेठालाल, सोढ़ी के गेरेज में
सोढ़ी: आओ जी आओ. बड़े दिनों बाद हमारी याद आई. ओय बिल्लू दो चाय बोलके आ.
जेठालाल: नही चाय बाय की जफा मत करो, मै एक खास काम से आया हू.
सोढ़ी: ओ हुक्म करो मालिक, जान हाजिर है.
बेकग्राउंड म्यूजिक: जेठालाल पूरी कहानी विस्तार से बताता है, सोढ़ी सर हिलाता है, जेठा अपना मुंह

सोढ़ी:ओह्हो ओजी ये बात है.
जेठालाल: हाँ तो बोल क्या इलाज है.
सोढ़ी: अब यारो से क्या छिपाना. ये मेरी वोट्टी रोशन...उसकी खासमखास सहेली शर्ली रहेती है अमरीका. और वहाँ से वो रोशन को एक से एक लाजवाब डिल्डो, वायब्रेटर और न जाने कितने उलजुलूल सेक्स टॉय, गिफ्ट में आये दिन भेजती रहेती है. ओ सच बोलू, रोशन को मेरे बेडरूम में होने न होने से कोई फर्क नही पड़ता. वो तो आखिर मेरे को ही मिन्नते कर कर के, कान पकड़ पकड़ माफ़ी मांगनी पड़ती है, तब जाके रोशन मेंन्नू लिप्टम-चिप्टम करने देती है.
जेठालाल: माफ़ी और मिन्नते तो मेने भी दया को बहोत की, लेकिन कोई असर नही.

जेठा उदास चहेरे के साथ दूकान जाता है, नटुकाका देख के ही भांप जाते है की मामला गडबड है.

लोकेशन: घड़ा इलेक्ट्रनिकस

नटुकाका: सेठजी is there anything wrong? why are you so sad?
जेठा: हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, कृपया हिंदी का प्रयोग करे.
नटुकाका: सेठजी, कोई टेंशन है क्या? आप इतने उदास क्यों है?

बेकग्राउंड म्यूजिक: जेठालाल पूरी कहानी विस्तार से बताता है, नटुकाका अपना सर हिलाते है, जेठा अपना मुंह

जेठा: बोलो ऐसा हुआ.
नटुकाका: मेरे साथ तो ऐसा टेंशन ही नही!!
जेठा: क्यों?
नटुकाका: क्योंकी मेरी बीवी मंगला तो गुजरात में वापी के पास आये उन्धाई गांव में रहेती है. और मै इधर. झगड़ा तो तब होगा न जब मियाँ-बीवी एक ही छत के नीचे रहेते हो!
जेठालाल: तो फिर, महीने में कितनी बार मुठ मारते है आप नटुकाका?
नटुकाका: वैसे तो मैने कमाठीपुरा में एक शबनम बाई के यहाँ अपना monthly account खुलवा दिया है. फिर भी हमारी पद्मावती भोजनालय की मालकिन पद्माबेन के नाम की मुठ, महीने में ५-६ बार मार ही लेता हू.

जेठालाल: monthly account मतलब?
नटुकाका: मतलब मै किसी रोज भी जाके चढ़ सकता हू, रोज रोज अलग से पेमेंट नही देना, पगार की तारीख पे एक साथ हिसाब करते है.
जेठालाल: कितना खर्चा
नटुकाका: ३०० रूपये.
जेठालाल: बस? केवल तिनसो. माने बहोत सस्ती वाली घटिया बम-भोसड़ा आंटी टाइप रांड के यहाँ जाते हो ?
नटुकाका: हाँ तो सेठजी आप मेरी पगार जो नही बढाते!! जितना पगार आप देते हो, उसमे तो ये ३०० भी जेसे तेसे ही परवडते है. महीने में ४ दिन पद्मावती भोजनालय नही जाके पैसे बचाता हू, तब बजेट बेलेंस होता है. वैसे आपको चलना है तो बोलो, एकदम रापचिक आइटम भी मिलती है उधर.
जेठालाल: नही नही नटुकाका, वैसे मै एक नम्बर का ठरकी जरूर हूँ. पडोस की शादीशुदा ओरत पे नजरे भी बिगाड़ता हू, लेकिन मै अपने बापूजी का इकलौता शरीफ और इज्जतदार बेटा, और अपनी बीवी का वफादार पति हू. मुजे नही करनी रंडी-चुदाई. thanks for your offer but I'm not interested.
बाघा: वो तो अब जेसी जिसकी सोच!!
जेठालाल: क्या??? ये बाघा कब किधर से आया?
बाघा: जब आपका नटु-काका की सेक्स-पुराण सुनने में लिन थे तब. वैसे सेठजी, नटुकाका का सजेशन एकदम सही है.
जेठालाल: क्या सही सजेशन है?? ये नटुकाका मेरे वडील, मेरे पिता समान होके मुझे रंडीखाने की उल्टी पटरी पे चढा रहे है? कल उठके दया को पता चल गया तो? मेरा तो सुखी संसार ही बर्बाद हो जाएगा. और बापूजी मुझे घर से लात मारके निकाल देंगे वो अलग. नही नही ये रिक्स में नही ले सकता.
नटुकाका: सेठजी आप रणदीप हुडा की उस फ्लॉप फिल्म का टाइटल सोंग भूल गए: रिस्क ना लिया तो क्या किया?...लाखो करोडो में कोई लेता है...रिस्क!!
जेठालाल: मेरी मति मारी गयी थी जो मैंने अपनी समस्या आपको बताई. अब आप चुपचाप दूकान सम्भालिए.
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02-04-2021, 01:04 PM,
#13
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा
उधर आइयर भाई अपने घर के सोफे पे बैठ के कॉफी पी रहे होते हैं...और न्यूसपेपर पढ़ रहे होते हैं.......उधर से आती है उनकी हॉट सेक्स बॉम्ब बीवी बबिता...जो कि बहुत गुस्से में होती है...और आते ही आइयर से बोलती है.....

बबिता :- गुस्से मे आइयर...तुम बिल्कुल बेकार हो ... किसी काम के नही हो...

इएर :- चौंकते हुए.... क्या हुआ डार्लिंग...मेने ऐसा क्या कर दिया जो तुम इतना नाराज़ हो मुझसे...

बबिता :- अच्छा तो तुम्हे नही पता ... नाटक मत करो आइयर....कल रात तुमने कितना ग़लत किया तुम्हे पता भी है...

इएर :- सोच मे पड़ जाता है....और बोलता है...ऐसा क्या ग़लत कर दिया कल रात में मेने बबिता...??

बबिता :- ओफू आइयर...कल रात मुझे इतना गरम करके खुद सो गये...तुम्हे पता भी है कल मेरी चूत आग बाबूला हो रही थी...तुमने तो अपना लंड मुझसे चुस्वा के अपनी शांति कर ली...और खुद झड्ते ही सो गये....और में वहाँ अपनी गरम चूत को लेके करवटें बदलती रही...बड़ी मुश्किल से उंगली कर के मेने अपने आप को शांत करने की कॉसिश की....और बोलते हो मैने क्या किया...हुह.....!!!

आइयर :- घबरते हुए...सॉरी डियर...वो मुझे थकान की वजह से नींद आ गई थी....और कुछ सोचते हुए बोलता है...बबिता अपना हाथ मुझे दो..

बबिता :- सवालिया नज़रों से देखते हुए दे देती है....और जैसे ही वो हाथ देती है वो चिहुन्क जाती है...

आइयर बबिता का हाथ लेकर अपनी पॅंट के उपर से उसके लंड पे रख देती है..

बबिता :- आइयर ये क्या है??

आइयर :- बबिता वो तुम्हारी बात सुनके मेरा लंड कब खड़ा हो गया पता ही नही चला....और अब जब तक ये झड़ेगा नही तब तक में लॅब नही जा पाउन्गा..

बबिता :- नही आइयर में नही करूँगी...खुद तो मुझे शांत नही करते और खुद रिलॅक्स हो के चले जाते हो...

इएर :- डियर बबिता आज ऐसा नही होगा प्लस्स करो ना.....

बबिता :- सोचते हुए ...... ठीक है.....

और बबिता धीरे धीरे पॅंट के उपर से आइयर के लंड को उपर नीचे करती रहती है...

आइयर :- आआहह बबिता डार्लिंग...वाहह आईईयूऊ...... आ रहा है .....लंड को बाहर निकाल के चूसो ना...

और बबिता आइयर के लंड को बाहर निकलती है....आइयर का लंड ज़्यादा बड़ा तो था नही....पर बबिता काम चला लेती थी उससे....

अब बबिता आइयर के लंड को मूह में लेके चूसना शुरू कर देती है....सबसे पहले बबिता आइयर के लंड के सुपाडे को चाटती है...उसके बाद जीभ से पूरे लंड को चाट्ती है...और बॉल्स को भी चूस्ति है...इससे आइयर मचल उठता है...और ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ भरता है....अहह ओह मज़ा आ गया....ओह उउउउउउउउउउउउ.....अब बबिता पूरा लंड मूह में लेके ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर देती है...पूरे कमरे में अजीब सी आवाज़ें गूँजनी शुरू हो जाती है.....अब बबिता स्पीड बढ़ा देती है और तेज़ी से लंड चूसना शुरू कर देती है....आइयर इस हमले को संभाल नही पाता और मूह में ही अपना पानी छोड़ देता है.....और बबिता एक अच्छी बिच( कुतिया ) की तरह सारा पानी गटक जाती है....

बबिता :- हान्फते हुए..चलो आइयर अब तुम्हारी बारी....

आइयर :- हाँ डार्लिंग बिल्कुल..... और जैसे ही आइयर बबिता की चूत की तरफ बढ़ता है...... वैसे ही...

आइयर का फोन बज उठता है.....

आइयर :- हेलो.....हाँ हर्रिहरन ... अच्छा अच्छा....हाँ बस अभी पहुँचता हूँ...और फोन कॉल कट कर देता है....
सॉरी बबिता डार्लिंग मुझे ऑफीस जाना पड़ेगा बहुत ज़रूरी मीटिंग है..

बबिता :- चिल्लाते हुए......आइयैयर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र....चले जाओ यहाँ से और कुछ मत कहना....और बेंगाली में आइयर को गाली देते हुए कमरे के अंदर चली जाती है...

और आइयर भी सोचता है रात में मना लूँगा और वो भी वहाँ से ऑफीस के लिए निकल जाता है....
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02-04-2021, 01:04 PM,
#14
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा
उधर पोपटलाल.....तैयार हो के ..सोफे पे बैठे हुए..मेगजीन पढ़ रहे थे....बेचारा कुँवारा है ना तो कोई है तो नही जो उसका ख्याल रखा करे या फिर उसके लंड का ख्याल रखा करे ... तो उसे खुद ही अपना ख्याल रखना पड़ता है.....मेग्ज़ीन पढ़ते पढ़ते धीरे धीरे अपने लंड को घिसता रहता है....क्यूँ कि वो मेग्ज़ीन न्यूड फोटोस से भरी हुई थी...

पोपटलाल अक्सर अपनी शांति के लिए ऐसी मेग्ज़ीन पढ़ता रहता है...

अब पोपटलाल एक एक करके न्यूड गर्ल्स को देख कर लंड हिलाए जा रहा था...अब लंड बिल्कुल तन कर पूरी तरह खड़ा हो चुका था..वैसे बता दूं पोपटलाल का लंड उसी की तरह पतला सा है पर लंबा बड़ा है अपने छाते की तरह....8.5 इंच का......

तेज़ी से अपने लंड हो हिलाते हुए....पोपटलाल एक एक करके पन्ने बदल रहा था....अब वो लंड को बहुत तेज़ी से उपर नीचे कर रहा था...उसकी साँस अब फूलने लगी थी....ऐसा लग रहा था कुछ ही पलों में वो झड जाएगा...और कुछ 2 मिनट ऐसे ही तेज़ी से हिलाने के बाद उसके लंड से एक तेज़ धारा बाहर निकली और वो झड गया...

पोपटलाल :- हांफता हुआ.....आअहह...उफफफ्फ़....मज़ा आ गया....लेकिन कुछ पलों में अपने आप से बोलते हुए...क्या खाक मज़ा आ गया...हर रोज़ मुझे ऐसे ही शांत होना पड़ता है....कब मेरा ये लंड कोई और पकड़ के मूठ मारेगा..आख़िर कब मेरी शादी होगी...कबतक में ऐसे ही नंगी लड़कियों की फोटो को देखता रहूँगा.... और झल्लाता हुआ ... अपने ऑफीस की ओर निकल पड़ता है.....

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02-04-2021, 01:06 PM,
#15
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा
उधर डॉक्टर.हाथी अपने क्लिनिक में पेशेंट को देख रहे होते हैं....उनकी बीवी कोमल भी उन्ही के साथ होती है....

पेशेंट :- डॉक्टर. साहब मुझे एक प्राब्लम हो गई है...

डॉक्टर.हाथी :- क्या हुआ भाई बोलो?

पेशेंट :- डॉक्टर. मेरे लंड में से कम पानी निकलता है....पहली बार करने के बाद ...दूसरी बार में तो एक बूँद भी नही टपकती..कुछ करिए ना डॉक्टर.साहब...

डॉक्टर.हाथी :- ओह्ह्ह अच्छा तो ये प्राब्लम है...जी ये तो बहुत गंभीर बात है..देखिए वैसे तो में सेक्स का डॉक्टर नही हूँ .... लेकिन आपको एक दवाई दे देता हूँ...और एक अच्छे से सेक्स डॉक्टर का नंबर. भी...अगर दवाई काम ना करे तो आप इन डॉक्टर से जाके मिल लेना....

पेशेंट :- थॅंक यू डॉक्टर...

इधर कोमल ज़रा सी बात सुनकर ही गरम हो जाती है....क्यूँ कि इसे कम चुदने को मिलता है...और वो बोलती है...

कोमल :- हंस .... कुछ करो ना...में गरम हो गई..

डॉक्टर.हाथी :- हँसते हुए...क्या कोमल तुम भी इतनी सी बात पे गरम हो गई...और इस वक़्त में कुछ नही कर सकता ..मेरे पेशेंट बाहर हैं...

कोमल :- झिल्लाते हुए...कोई नही है बाहर जल्दी से कर दो ना मुझसे अब रहा नही जा रहा..

डॉक्टर.हाथी :- कोमल तुम्हे पता है ना मेरा जल्दी खड़ा नही होता ..इससे बहुत टाइम ल्गता है....इतनी जल्दी में खड़ा होगा पर जरा सा..और वो तो तुम्हे दिखेगा भी नही...

देखिए डॉक्टर.हाथी की एक अनोखी बात है...उनका लंड खड़ा तो होता है मगर उनका पेट इतना बड़ा है कि लंड दिखता नही है...इसलिए वो एक स्पेशल दवाई लेते हैं जिसे खाते ही उनका लंड हाथी जैसा हो जाता है...तभी वो चुदाई करते हैं...

कोमल :- सोचते हुए...हंस ठीक बोल रहे है..लेकिन अब में क्या करूँ मुझसे तो रहा भी नही जा रहा...फिर उसके दिमाग़ में आइडिया आता है...हंस तुम मुझे लंड से तो नही चोद सकते ...मगर अपनी ये बड़ी बड़ी उंगलियो से तो ज़रूर कर सकते हो ना..

डॉक्टर.हाथी :- सही बात है.............

इतना सुनते ही...अपनी पॅंट उतार देती है और पेंटी भी.....चूत बिकुल सॉफ होती है कोई भी बाल नही होता...चूत बहुत ज़्यादा गीली होती है...और हाँ बता दूं कि कोमल ने उंगलियों से चुदने की बात क्यूँ की ...क्यूँ कि डॉक्टर.हाथी की उंगलियाँ कुछ कम नही है...साली इतनी बड़ी है कि लंड को भी मात दे दें...

डॉक्टर.हाथी :- कोमल तुम्हारी चूत तो बहुत पानी छोड़ रही है....

कोमल :- हंस कुछ बोलो मत अब जल्दी करो...

और डॉक्टर.हाथी अपनी एक उंगली अंदर चूत मे डाल देते हैं जिसकी वजह से कोमल हल्की सी सिसक उठी है..अहह...और अब डॉक्टर.हाथी कोमल की चूत में उंगली अंदर बाहर करना शुरू कर देता है....कोमल को बहुत मज़ा आने लगता है...वो डॉक्टर.हाथी के शोल्डर पे हाथ रख कर खड़ी हो जाती है...क्यूँ कि उसके लिए खड़ा होना मुश्किल हो जाता है....अब डॉक्टर.हाथी..2 उंगलियाँ अंदर डाल की चूत को मारने लगते हैं.....जैसे ही दूसरी उंगली अंदर जाती है कोमल ज़ोर से चिल्ला उठती है.....हन्ंननन्न्न्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स अहह...........ओह.....मर् गयी......बहुत मज़ा आ रहा है.... .उईईईईईईईईईईईईईईईईई.... ..ओह....उफफफफफफफफफफफफ्फ़....और तेज़ करो.....अब डॉक्टर हाथी स्पीड बढ़ा देता है...और कमरे में पच पच की आवाज़ें शुरू हो जाती है....कोमल हान्फते हुए बोलती है..हंस में झड़ने वाली हूँ...और तेज़ करो.....अब डॉक्टर. हाथी पूरी ताक़त से चूत मारने लगते हैं....जिससे कोमल से अब सहन नही हो पाता और चिल्लाते हुए............अहहओह..माआआआआआआआआआअ....में तो गयी....और अपना कामरस छोड़ देती है....और उस रस को डॉक्टर. हाथी अपनी जीभ से सारा चाट लेते हैं..

कोमल :- पॅंट उपर करते हुए...थॅंक यू हंस...तुमने ने तो मुझे स्वर्ग की सैर करा डी थी...

डॉक्टर.हाथी :- यूआर वेलकम कोमल..मगर इतनी मेहनत करने के बाद बहुत भूक लगी है कुछ खाने को दो ना...

कोमल...हंसते हुए....हंस तुम भी ना....

कोमल को हंसता देख डॉक्टर .हाथी भी हंस देता है और फिर कोमल किचन में चली जाती है.............!!!!!!

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02-04-2021, 01:07 PM,
#16
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा
सेक्रेटरी आत्माराम भिड़े अपने घर पे बैठे स्टूडेंट्स के टेस्ट पेपर चेक कर रहे थे...

भिड़े :- पेपर चेक करते हुए माधवी को आवाज़ लगाते हैं...माधवी चाई..कितनी देर हो गई है

माधवी :- जी लाई..

और माधवी चाइ लेके आती है...हर रोज़ की तरह माधवी मराठी साड़ी और स्लेवलेशस ब्लाउस में आती है...बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रही थी..

भिड़े :- क्या बात है माधवी जी आज तो तुम बहुत सेक्सी लग रही हो..

माधवी :- क्या आप भी..सुबह सुबह शुरू हो जाते हैं..

भिड़े :- क्या करूँ माधवी तुम्हे जब भी देखता हूँ .. मेरा ये तंबू खड़ा हो जाता है...और भिड़े अपने लंड की तरफ़ इशारा करते हुए कहता है..

माधवी :- भिड़े के इशारे की ओर देखती हुई उसके लंड पे नज़र डाल के बोलती है...क्या आप ना ..कल रात को ही तो मारी थी मेरी इतनी ... और सुबह सुबह फिर शुरू हो गये...और मूड के जाने लगती है ..तभी उसके मूह से हल्की सी आह निकल जाती है...

क्यूंकी भिड़े ने माधवी की गान्ड को पीछे से दबा देता है...

माधवी :- ये क्या कर रहे हैं ... छोड़िए ना मुझे आचार पापड बनाने है..

भिड़े :- माधवी अच्छा पापड बनते रहेंगे...लेकिन अब जो ये गरम महॉल बना है उसे तो पहले पूरा कर लो...

और फिर भिड़े माधवी को खीच के अपने उपर बिठा लेते हैं...इसकी वजह से भिड़े का लंड माधवी की गान्ड पे चुभने लगता है....और भिड़े माधवी के पूरे फेस पर चुम्मों की बारिश सी कर देता है...माधवी पूरी तरह मदहोश हो जाती है...और वैसे ही बैठे बैठे लंड पे उपर नीचे होने लगती है ..जिससे भिड़े और पागल सा हो जाता है....और अब वो माधवी के होंठो का रस पान करना शुरू कर देता है...माधवी का पूरा चेहरा एक चुडकड़ औरत जैसा लगने लगता है.....भिड़े माधवी का पल्लू नीचे गिरा देता है...और ब्लाउस के उपर से ही माधवी के चुचे दबाना शुरू कर देता है....और होंठो को चूमता रहता है....फिर धीरे धीरे वो अपनी जीभ माधवी के मूह में डाल के उसके मूह के रस को चूसने लगता है...इधर माधवी की चूत पूरी तरह गीली हो जाती है जिसकी वजह से उसकी पेंटी चिपक जाती है....और वो वैसे ही भिड़े के लंड पे उपर नीचे होने लगती है....

फिर भिड़े माधवी के ब्लाउस और ब्रा को खोल के माधवी के बड़े बड़े और नरम चुचों को अपने हाथों से मसलना शुरू कर देता है....भिड़े के ठंडे हाथों का स्पर्श अपने चुचो पे पड़ने की वजह से माधवी पागल हो जाती है और वो भिड़े के और ज़्यादा होंठो को चूसना शुरू कर देती है....2 मिनट बाद भिड़े होंठो को छोड़ देता है....और माधवी के चुचों को मूह में लेकर चूसना शुरू कर देता है....

ऐसा करते ही माधवी के मूह से सिसकी निकल जाती है.....ओह.....हन्णन्न्... बहुत अच्छा लग रहा है सोनू के पापा और चूसिए ...

और भिड़े बारी बारी माधवी के दोनो चूचो को चूस्ता है....और निपल्स को भी चूस्ता रहता है...जिससे माधवी के सबर का बाँध टूट जाता है और वो खड़ी हो जाती है....और भिड़े के लंड को बाहर निकालने लगती है कि तभी...

नीचे से सोढी की आवाज़ आती है ऊओ भिड़ुउऊ जल्दी नीचे आ....

सोढी की आवाज़ सुन कर दोनो को बहुत गुस्सा आता है...फिर भिड़े अपना गुस्सा शांत कर के अपनी बाल्कनी में सोढी से बात करने चले जाता..

भिड़े :- क्या बात है सोढी..क्या हुआ??

सोढी :- ओये भिड़े यार तूने आज बॉरड पर कोई सुविचार नही लिखा इसलिए तुझे आवाज़ लगाई..

भिड़े :- मन में सोढी को गाली देते हुए....आता हूँ भाई अभी लिखता हूँ..

और इतना कह कर वो चला जाता है...सुविचार लिखने.......!!!

दोस्तों आप सोच रहे होंगे कि अभी तक सेक्स क्यूँ नही हुआ किसी का...आप सब चिंता मत करिए ये तो बस एक शुरुआत है...बस आप मुझसे जुड़े रहें आगे देखिए अभी बहुत कुछ बाकी है ........
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02-04-2021, 01:07 PM,
#17
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा

इधर जेठालाल नहा धो कर चाय पी रहा था.....तभी दया और बोली अरे टप्पू के पापा आपने अभी तक चाइ नही पी...दुकान नही जाना क्या.

जेठालाल :- हाँ भाई बस पी ने जा रहा हूँ...चलो जै जिनेन्द्र..

दया :- जय जिनेन्द्र...

और जेठालाल अपनी विंग की सीढ़ियों से नीचे कॉंपाउंड में आता है...और जैसे उसकी नज़र सोसाइटी के गेट पे पड़ती है उसका मूह खुला का खुला रह जाता है...क्यूँ कि उसकी फेव चीज़ वहाँ खड़ी थी...बिल्कुल सही समझे आप वहाँ बबिता खड़ी थी...और जेठालाल बबिता को देख कर खुश हो जाता है और उसके पास चला जाता है...

जेठालाल :- गुड मॉर्निंग बबिता जी..

बबिता :- स्माइल देते हुए...गुड मॉर्निंग जेठा जी...क्या हाल चाल है आपके??

जेठालाल :- बस अब आपको देख लिया मेरे हाल चाल बिल्कुल ठीक हो गये हैं..

बबिता :- थोड़ा ब्लश होते हुए...आप भी ना जेठा जी हमेशा मेरी तारीफ ही करते रहते हैं....

जेठालाल :- अरे आप हैं ही इतनी तारीफ के काबिल तो तारीफ तो करूँगा....वैसे एक बात कहूँ बबिता जी अगर आप बुरा ना माने तो..

बबिता :- अरे बिल्कुल बोलिए ना ... आपकी बात का बुरा क्यूँ मानूँगी..

जेठालाल :- वैसे आज आप बहुत ही ज़्यादा .... मतलब बहुत ही ज़्यादा सुंदर...और ग़ज़ब लग रही है...बस इतनी सेक्सी लग रही हो कि क्या बताऊ..

बबिता :- थोड़ा चौन्कते हुए और थोड़ा ब्लश होते हुए.....जेठा जी आपने मुझे सेक्सी कहा??

जेठालाल :- मन में...लगता है बबिता जी को बुरा लग गया....सॉरी सॉरी बबिता जी वो आप आज इतनी सेक्सी लग रही थी ना इसलिए बोल दिया....ओह्ह सॉरी मेने दुबारा बोल दिया सॉरी बबिता जी...

बबिता :- हंसते हुए.....अरे जेठा जी आप सॉरी क्यूँ बोल रहे हैं ...मुझे बुरा नही लगा..वो तो मेने आपसे इसलिए पूछा क्यूंकी में इतनी भी सेक्सी नही हूँ ठीक ठाक हूँ...

जेठालाल :- हिम्मत बढ़ाते हुए....अरे नही बबिता जी आप बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रहे हो..मन कर रहा है आपको देखता रहूं...

बबिता :- फिर से ब्लश होते हो...थॅंक यू जेठा जी...और मन में सोचते हुए...ये जेठा जी की तारीफ की वजह से मेरी चूत गीली हो गई है....

जेठालाल :- मन में सोचते हुए....क्या ग़ज़ब माल लग रही है बबिता जी...मेरा लंड खड़ा हो गया है...अब इसे कैसे छुपाऊ..कहीं बबिता जी ने देख लिया तो क्या सोचेंगी वो..

दोनो एक दूसरे की नज़रों से अपने गुप्त अंगो को छुपाने की कोशिश में लगे हुए थे....वैसे बता दूं...जेठालाल का क्या ..अगर कोई और भी होता तो उसका भी लंड खड़ा हो जाता बबिता को देख कर....

बबिता ने एक टाइट टॉप..इतना टाइट कि उसके चुचे बाहर आने के लिए बेताब है....बहुत की सेक्सी शेप दे रहे थे..और नीचे एक छोटी सी शॉर्ट्स पहन रखी थी जिससे उसकी गोरी गोरी जाँघ दिखाई दे रही थी....और गान्ड तो बिल्कुल ऐसी लग रही थी...कि कोई भी वहाँ नज़र टिकाए तो हटा ना पाए..

जेठालाल चुप्पी तोड़ते हुए..

जेठालाल :- बबिता जी वैसे आप सुबह सुबह कहाँ जा रहे हैं??

बबिता :- हाँ वो में दया भाभी से मिलने जा रही थी कुछ काम था उनसे..

जेठालाल :- ओह्ह पहले पता होता तो में घर पे और थोड़ी देर रुक जाता आपसे बात करने के लिए....

जेठालाल पूरी लाइन मार रहा था उस वक़्त बबिता पर..

बबिता :- ओह्ह जेठा जी उसके लिए ये ज़रूरी थोड़े ही है कि में जब आपके घर आउन्गि तभी आप मुझसे बात करेंगे...आप मेरे घर कभी भी आ सकते हैं...किसी भी टाइम..

उधर बबिता कम थोड़ी ही थी..वो भी तो चाहती थी जेठालाल के साथ वक़्त बिताने को..

जेठालाल :- खुश होते हुए...थॅंक यू बबिता जी.....वैसे में क्या बोल रहा थी कि क्यूँ ना आज....और तभी जेठालाल का फोन बज जाता है.....फोन नाट्टू काका का होता है....

दोस्तों में आपको बता दूं कि नाट्टू काका..गाड़ा एलेक्ट्रॉनिक्स के मॅनेजर हैं....

नाट्टू काका :- सेठ जी कहाँ तक पहुँचे ... आपको पता है ना पार्टी कभी भी आ सकती है मीटिंग के लिए.

जेठालाल :- हाँ भाई बस थोड़ी देर में आता हूँ शांत रहो ..परेशान मत होइए..

और फोन काट देता है..

बबिता :- जेठा जी आप कुछ कह रहे थे उस वक़्त....बबिता को पता था कि जेठालाल क्या कहना चाहता है फिर भी वो उसके मूह से बुलवाना चाहती है..

जेठालाल :- सोचते हुए....भूल गया बबिता जी अभी तो याद नही आ रहा..मगर याद आया तो में आपको फोन कर दूँगा...अभी में थोड़ा जल्दी में हूँ दुकान पे थोड़ा काम है...अच्छा ओके बबिता जी बाइ..

बबिता :- जी बिल्कुल जेठा जी फोन कर दीजिएगा..बाइ...

और जेठालाल दुकान की तरफ चला जाता है और बबिता दया के घर..

बबिता दया के घर पे आते ही दया को आवाज़ लगाती है...

बबिता :- दया भाभी...दया भाभी..

और दया किचन में से बाहर आती है और बबिता को देख के मुस्कुरा के बोलती है..

दया :- अरे बबिता जी बैठिए ना खड़ी क्यूँ है आप...

और दोनो बैठ जाती हैं...

दया :- हाँ तो बबिता जी बोलिए क्या लेंगी आप चाइ या कॉफी...

बबिता :- नही दया भाभी कुछ नही चाहिए...मुझे आपसे कुछ काम था.

दया :- हाँ बोलिए ना..

बबिता :- मुझे आपसे ये पूछना था कि आप वो ब्लू वाली साड़ी काहन से लाई थी जो आपने कल पहनी थी...

दया साड़ी जहाँ से लाई थी वो जगह बता देती है......और वो दोनो इधर उधर की बातें करने लगती हैं...फिर बबिता दया से पूछती है..

बबिता :- क्या बात है दया भाभी आज आप बहुत खुश लग रही हैं?

दया :- हाँ बबिता जी आज में बहुत खुश हूँ....वो सुबह सुबह टप्पू के पापा ने..और शर्मा जाती है...

बबिता :- बताइए ना क्या किया आज जेठा जी ने..

दया :- वैसे तो वो हमेशा रात में ही करते हैं...लेकिन आज उन्होने सुबह सुबह ही मुझे बहुत सुकून पहुचा दिया..

बबिता :- उत्सुकता से..बताइए ना...दया भाभी प्लस्सस्स...

दया :- उन्होने आज सुबह सुबह मेरी चूत चाट के मुझे मज़ा ही दे दिया...

बबिता :- वाऊ दया भाभी आप तो बहुत लकी हैं..काश में भी लकी होती...

दया :- क्यूँ क्या हुआ बबिता जी ... आइयर भाई नही करते क्या??

बबिता :- गुस्से में...आप आइयर का नाम तो लीजये ही मत...जब भी में उससे कुछ करने को कहती हूँ...उसको ज़रूरी मीटिंग के लिए जाना पड़ता है..या फिर वो इतना तका हुआ होता है कि वो सो जाता है....में तो परेशान हो गई हूँ....इतने दिन हो गये मेरी चूत की प्यास ही नही भुज पाती...

दया :- उदास मत हुए बबिता जी...सब ठीक हो जाएगा...

बबिता मन में सोचते हुए....काश में और जेठा जी साथ होते..तो मेरे तो मज़े ही आ जाते...

और फिर बबिता अपने घर चली जाती है...और दया अपने किचन के काम में लग जाती है....
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02-04-2021, 01:17 PM,
#18
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा
उधर भिड़े सोसायटी बोर्ड पे कुछ सूचना लिख रहा था....और आज मेहता साहब ऑफीस नही गये थे तो वो बाहर चेर पे बैठे थे...जैसे ही उन्होने देखा कि भिड़े कुछ लिख रहा है तो वो चले गये वहाँ उसे पढ़ने....और बोर्ड पे कुछ इस प्रकार लिखा था...

आज सोसाइटी में ठीक 10 बजे मीटिंग है..और आप सभी को सही समय पर उपस्थित होना है...ये मीटिंग कल के होने वाले प्रोग्राम के लिए रखी गई है..

तभी तारक भिड़े से पूछता है...

तारक :- भाई भिड़े किस चीज़ का प्रोग्राम करना है सोसाइटी में??

भिड़े :- मेहता साहब आप कैसे भूल गये ... कल सोसाइटी में दही हाँडी है...

तारक :- हाँ वो तो में भूल ही गया था....अच्छा है तुम जैसे सेक्रेटरी हमारे सोसाइटी में है तुमको याद नही रहता तो कोई प्रोग्राम हो ही नही पता...

भिड़े :- थॅंक यू मेहता साहब..वैसे ये मेरा फ़र्ज़ है...

उसके बाद तारक अपने घर चला जाता है....और भिड़े अब्दुल की दुकान की तरफ निकल पड़ता है...

भिड़े अब्दुल की दुकान पे जाके अब्दुल को एक काम देता है.......

भिड़े :- देख भाई अब्दुल ... में तुझे एक सर्क्युलर दे रहा हूँ..सबके घर पे दे आना...वैसे मेने सोसायटी बोर्ड तो लिख दिया है लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं सोसाइटी मे जो उसे पढ़ेंगे नही...

अब्दुल :- ठीक है भिड़े भाई में दे आउन्गा...आप टेन्षन मत लो..

फिर भिड़े बाहर निकल जाता है...और अब्दुल अपनी दुकान पे किसी को बिठा के सर्क्युलर बाटने निकल जाता है........
................................

उधर बबिता बैचैन हो रही थी सुबह दया की बातों को सुन कर...वो बार बार ये सोच कर परेशान थी कि आइयर तो कुछ करता ही नही है..और जेठाजी को देखो कितने मज़े से दया भाभी के साथ करते हैं...वो सोच ही रही थी की उसके घर की कोई घंटी बजाता है...

बबिता :- गेट खोल कर........अरे अब्दुल भाई आप...आइए ना अंदर आइए..

अब्दुल :- नही नही बबिता जी...आप बस इस सर्क्युलर को पढ़ कर साइन कर दी जिए..

बबिता सर्क्युलर लेके पढ़ती है...आज सोसाइटी की मीटिंग है कल के दही हाँडी के प्रोग्राम के लिए...और फिर बबिता उसे पढ़ कर साइन करके अब्दुल को देके गेट बंद कर देती है....

और फिर से उसी सोच में डूब जाती है....तभी उसके फोन की घंटी बजती है...दूसरी तरफ दया का फोन होता है..

दया :- हेलो बबिता जी....मेरे घर पे सारी महिला इकट्ठी हो रही है तो आप भी आजाइयेगा आधे घंटे में..

बबिता :- पहले सोचती है मना कर दूं...फिर भी वो हाँ कर के फोन काट देती है....

आधे घंटे बाद.....

दया के घर में सब हँसी मज़ाक कर रहे थे और चाइ नाश्ता कर रहे थे...सब हंस रहे थे.....और आपस में बात कर रहे थे...बस एक को छोड़ के...जी हाँ बबिता को छोड़ के....वो अभी भी उसी बात से परेशान रहती है...और तभी अंजलि की नज़र उस पर पड़ती है...और वो बबिता से पूछती है...

अंजलि :- बबिता जी क्या बात है..आप बड़े चुप चुप लग रहे हो...कोई बात हुई है क्या??

जब सब अंजलि की बात सुनते हैं तब सब उसकी तरफ देखते हैं..मगर दया समझ जाती है कि क्या बात है और बोलती है...

दया :- अंजलि भाभी मुझे पता है कि बबिता जी क्यूँ परेशान है..

सब दया से पूछते हैं क्या बात है दया भाभी...

दया :- वो बात ये है...कि आइयर भाई बबिता जी का ख़याल नही रखते..

सब लोग कुछ समझ नही पाते..और बोलते हैं दया भाभी सॉफ सॉफ बताइए ना..

दया :- हाँ बताती हूँ....वो क्या है आइयर भाई बबिता जी को संतुष्ट नही करते...हमेशा काम में ही लगे रहते हैं....उनको बबिता जी के साथ सॅक्स करने का टाइम नही मिलता...

सब दया की बात सुन के चौंक जाते है...और बबिता की तरफ देखते हैं..सबसे पहले अंजलि बबिता से बोलती है..

अंजलि :- देखिए बबिता जी...आप ऐसा मत सोचिए आइयर भाई आपसे बहुत प्यार करते हैं..कुछ काम में बिज़ी होंगे इसलिए नही कर पा रहे होंगे..

बबिता :- ऐसा नही है अंजलि भाभी.....आइयर अब वैसा नही रहा..उसको बस अपनी ही पड़ी है...वो बस यही चाहता है कि में उसका चूस के शांत कर दूं....वो खुद तो कुछ करता ही नही है...काफ़ी टाइम हो गया अंजलि भाभी हम दोनो ने सेक्स नही किया..में परेशान हो चुकी हूँ...आप ही बताइए कब तक में अपनी उंगली से काम चलाउन्गी...

दया :- हाँ सही बात है अंजलि भाभी..बबिता जी बिल्कुल ठीक बोल रहे हैं...आइयर भाई को ध्यान रखना पड़ेगा...

अंजलि :- वो बात तो ठीक है दया भाभी...बबिता जी अब सभार रखिए सब ठीक हो जाएगा..

कोमल :- हाँ बबिता...तुम्हारी तरह मेरा भी यही हाल है तुम तो जानती हो ना डॉक्टर हाथी को वो तो सेक्स कर ही नही पाते बहुत कम ही करते हैं...उनका लंड खड़ा ही बहुत कम होता है....पर हाँ वो मुझे अपनी उंगलियों से संतुष्ट कर देते हैं...आपको पता है कि उनकी उंगलियाँ इतनी मोटी है कि लंड की कमी ज़्यादा महसूस नही होती और वो हंस पड़ती है...

बाकी सब भी कोमल की बात सुनके हंस पड़ते है....और इस बार बबिता भी हंस पड़ती है..

उधर रोशन भी बोलने लगती है..

रोशन :- अब में क्या बताऊ इस मामले में इसलिए परेशान हूँ कि इस रोशन (यानी सोढी) को हमेशा मेरी चूत मारने को लगा रहता है.....और जिस दिन पार्टी शार्टी कर के आता है..उस दिन तो रात भर नही सोने देता ...एक तो पूरी रात मेरी मारता रहेगा...और दूसरी इतनी ज़ोर ज़ोर से मारता है कि क्या बताऊ जान निकाल देता है मेरी...

रोशन की बात सुनके सब हंस पड़ते हैं और बोलते हैं...कि रोशन भाभी आप तो बहुत लकी हैं....

फिर थोड़ी देर और ऐसे ही बात करने के बाद...सब बोल के चले जाते हैं कि शाम को मीटिंग में मिलते हैं.........................

अब देखते हैं शाम की मीटिंग में क्या डिसाइड होता है.......!!!!!!!

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02-04-2021, 01:22 PM,
#19
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा
गोकुलधाम सोसायटी में दहीहांड़ी का कार्यक्रम


शाम को सब मीटिंग के लिए इकट्ठा होते हैं..लेकिन हमेशा की तरह जेठालाल वक़्त पे नही आया था...उधर भिड़े और पोपटलाल कोँमिटी मेंबर के तौर पे सामने खड़े थे .... तभी भिड़े ने मेहता साहब से कहा..

भिड़े :- देखा मेहता साहब अपने आज जेठालाल फिर से लेट हो गया..कभी नही सुधरेगा ये..

तभी उधर से आवाज़ आती है..ओ पंचायती..ज़रा कम बोला कर...जी हाँ जेठालाल क्लब हाउस के गेट पे खड़े थे...

तारक :- छोड़ो ना भिड़े आ गया ना जेठालाल क्यूँ बेकार में पंगे लेते हो तुम...

उधर जेठालाल अंदर आते है..

जेठालाल :- भाई भिड़े...में दुकान से आता हूँ..टाइम लगता है भाई..ग्राहकी छोड़ के थोड़ी आउन्गा...और मुझे तो बड़ा बोल रहा है अभी तक आइयर भाई भी नही आए हैं..

भिड़े :- इधर उधर देखते हुए..और फिर जेठालाल को सॉरी बोलता है.और फिर आइयर को फोन लगाने लगता है लेकिन..

तभी बबिता खड़ी होती है और बोलती है..

बबिता :- भिड़े भाई आइयर को कुछ काम से 2 दिनो के लिए बाहर जाना पड़ा..इसलिए वो नही आएँगे..

ये सुनते ही जेठालाल के ख़ुसी का ठिकाना नही होता .... वो सोचता है इससे बढ़िया मौका नही मिलेगा बबिता जी के साथ कुछ करने का..लेकिन कैसे करूँ..कुछ तो सोचना पड़ेगा..

तभी भिड़े कल के प्रोग्राम के बारे में बताता है...कि कल सुबह ठीक 9 बजे सबको कॉंपाउंड में मिलना है...दही हाँडी के प्रोग्राम के लिए..और प्लीज़ सब टाइम पे आ जाना...और हाँ सबसे इंपॉर्टेंट बात...कल की दही हाँडी में कोई भी सोसाइटी का मेम्बर हिस्सा नही लेगा क्यूँ कि पिछली बार दया भाभी को बहुत चोट आई थी...

सभी भिड़े की बात पे सहमति देते हैं...बस एक इंसान नही देता वो है जेठालाल..क्यूँ कि वो कल के लिए सोच रहा था..कि कैसे बबिता जी के साथ कुछ किया जाए......उसने अब ठान ली थी कि वो बबिता जी के साथ कुछ कर के ही रहेगा...

उधर बबिता काफ़ी दिन से परेशान तो वैसे ही थी क्यूंकी उसने काफ़ी दिन से सेक्स नही किया है और अब 2 दिन और नही कर सकती ....

ये दोनो अपने ही ख़यालों में खोए हुए थे .... और मीटिंग का एंड भी हो गया और इन्हे पता भी नही चला..जब मेहता साहब ने जेठालाल को हिलाया तब वो अपनी गहरी सोच से बाहर निकला..उधर बबिता जो दया के बगल में बैठी थी वो बबिता को हिलाती है और बबिया भी गहरी सोच से बाहर आती है...सब कॉंपाउंड में आ जाते हैं..

और अपने अपने घर की तरफ निकल जाते हैं...घर जाते ही जेठालाल खाना खाने के बाद अपने कमरे में में सोने चला जाता है .. और बैठ के कल के लिए कुछ आइडिया सोचने ने लगता है...तभी दया आती है और जेठालाल को इतनी गहरी सोच में देख के पूछती है..

दया :- टप्पू के पापा क्या हुआ..कुछ टॅन्षन है??

जेठालाल :- सोच में से बाहर आते हुए...बोलता है...ये आइयर भाई को कोई परवाह ही नही है...ऐसे अकेला छोड़ के निकल जाते हैं..

दया :- हाँ ये तो है..वैसे भी बबिता जी परेशान है कुछ दिनो से..

जेठालाल :- ये सुन के चौंक जाता है...दया तूने मुझे पहले क्यूँ नही बताया कि बबिता जी परेशान है..में अभी उन्हे फोन करता हूँ..

दया :- जेठालाल को रोकते हुए...नही टप्पू के पापा वो आपको नही बता पाएँगी अपनी परेशानी..

जेठालाल :- तो तू बता दे..उसमे क्या है..

दया :- नही बता सकती कुछ प्राइवेट बात है..

जेठालाल :- वो सोचता है..अगर दया से बात निकलवानी है तो दया को एमोशनल ब्लॅकमेल करना पड़ेगा...और बोलता है...ठीक है दया तू मुझे नही बताना चाहती तो ठीक है..आज से में तुझे कोई भी बात नही बताउन्गा...और अपनी रूठने जैसी शकल बनाता है..

दया :- हे माँ माताजी..ये कैसा धरम संकट है..और कुछ सोचने के बाद बोलती है...वो ऐसा है कि आइयर भाई बबिता जी के साथ सॅक्स नही करते..वो इतनी तेज़ बोलती है कि जेठालाल को कुछ समझ नही आता..

जेठालाल :- क्या क्या...अरी डोबी आराम से बोल कुछ स्मझ नही आया..

दया :- इस बार आराम से...वो क्या है कि आइयर भाई बबिता जी के साथ सॅक्स नही करते...और वो इस बात से काफ़ी परेशान है..

जेठालाल :- ये सुनते ही..मन में खुशी से झूम उठता है..मगर बाहर से अपना रोंदों सा सेहरा बनाते हुए दया को बोलता है...दया आइयर भाई को काम रहता है ना इसलिए वो नही कर पा रहे होंगे..तू चिंता मत कर सब ठीक हो जाएगा और बोलता है जल्दी सो जाओ कल सुबह जल्दी उठना है...

इतना सुनते ही दया अपनी मुन्डी हाँ में हिलाती है और सो जाती है..इधर जेठालाल लेट के मन ही मन खुशी में डूब जाता है क्यूँ कि उसका कल का प्लान अब बन चुका था...और ग़लती से बोल पड़ता है...मज़ा आएगा कल...ये सुन के दया जाग जाती है और पूछती है..कि क्या मज़ा आएगा कल...जेठालाल थोड़ा घबरा जाता है लेकिन वो बात को सम्भहाल कर कहता है.....अरे डोबी कल दही हंडी का प्रोग्राम है ना इसलिए बोल रहा हूँ...और दया बोलती है ...अरे हाँ ...और दोनो सो जाते हैं...

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02-04-2021, 01:23 PM,
#20
RE: XXX Kahani Fantasy तारक मेहता का नंगा चश्मा
और अगले दिन का सूरज उग जाता है...सब अपने कमरों में तैयार होने लगते हैं...उधर सोढी अपनी बीवी को तैयार होता देख के अपने लंड पे हाथ फेरता रहता है...रोशन उसे ये करता हुआ देख लेती है..और बोलती है..

रोशन :- ये क्या बाबा सुबह सुबह तू चालू हो गया..और हमे नीचे भी जाना है.....

लेकिन सोढी रोशन के करीब आते हुए...

सोढी :- क्या रोशन तू भी आज तू इतनी हॉट लग रही है कि में बता नही स्कता....और अगर थोड़ी देर हो जाएगी नीचे जाने में तो उससे कोई फरक नही पड़ेगा....

और उसे कसकर अपनी बाहों में जकड लेता है....रोशन हटने के लिए कॉसिश करती है मगर सोढी ने इतनी कसकर पकड़ा हुआ होता है कि वो उससे छुड़ा नही पाती...

सोढी :- देख रोशन अब में बहुत गरम हो चुका हूँ अब जब तक में तेरे साथ कर ना लूँ में और तू नीचे नही जा सकते..

रोशन :- सोचती हुई..ये कमीना बिना करे नही जाने देगा..तो इससे तो अच्छा है कि आराम से और मज़े लेके करूँ..

इतना सोच ही रही होती है कि..सोढी अपने होठ रोशन के होंठो से मिला देता है और रोशन के होंठो को चूमने लगता है...उधर रोशन तैयार नही होती इसलिए कुछ नही कर पाती...सोढी बहुत बुरी तरह होंठो को चूस रहा था...रोशन हान्फते हुए...क्या कर रहे है सोढी आराम से कर ना मना थोड़ी कर रही हूँ..बाबा तू तो बिल्कुल गलीज है गलीज...लेकिन सोढी तो बहुत ही ज़्यादा उतावला होता है....और सोढी रोशन को गोदी में उठा के फिर से उसके होंठो को चूमने लगता है..इस बार रोशन भी उसका साथ देनी लगती है....

सोढी बुरी तरह से उसके होंठो को चूमने लगता है..और अपनी जीभ रोशन के मूह के अंदर डाल देता है और रोशन भी अपनी जीभ निकाल के सोढी की जीभ को काटने लगता है..और दोनो एक जबरदस्त फ्रेंच किस में लगे रहते हैं....

किस करते करते सोढी रोशन को टेबल पे बिठा देता है...और नीचे से उसका पाजाम निकाल के फेंक देता है...और अपना पाजामा अभी उतार देता है..लेकिन दोनो फिर भी किस में लगे हुए होते हैं...दोनो के चारों तरफ एक दूसरे का थूक लग जाता है लेकिन उन दोनो को तो बस एक दूसरों के मूह का रस चाहिए उनको किसी की कोई परवाह नही है....और रोशन सोढी को धक्का दे देती है और बुरी तरह से हाँफने लगती है...और बोलती है..

रोशन :- तू तो एक दम पागल है हान्फते हुए...जंगली कहीं का..जान निकाल दी थी तूने तो...

मगर सोढी बातों के मूड में नही था...और अपना कुर्ता उतार चुका होता है..और रोशन के पास आके झट से उसका कुर्ता भी निकाल देता है...सोढी तो अपने सार कपड़े उतार के नंगा हो जाता है..उसका लंड एक दम तना हुआ होता है...जोकि 9 इंच का हो जाता है....इधर सोढी का लंड देख के रोशन की गीली चूत और ज़्यादा भड़क जाती है....

इधर सोढी रोशन के पास आके उसकी ब्रा को पकड़ के फाड़ देता है...और रोशन बोलती है ए पागल रोशन(सोढी) क्या कर रहा है मेरी ब्रा क्यूँ फाड़ दी...लेकिन सोढी ने कुछ सुना नही...और उसके चुचों पे टूट पड़ता है....और अब रोशन सब कुछ भूल के मज़े लेने लगती है..इधर सोढी एक चुचि मूह में लेके बुरी तरह से चूसे जा रहा था और दूसरी चुचि को दबा रहा था...

रोशन:- अहह ओह सोढी....औचह थोड़ा धीरे....मगर चूस्ते रहो........बहुत मज़ा आ रहा है बाबा......और चूसो इसे...अहह

इधर सोढी अब दूसरी चुचि को मूह में लेके पहले वाली को दबाने लगता है...और बीच बीच में निपल को ज़ोर ज़ोर से चूस देता है जिससे रोशन और पागल हो जाती है...और चीख पड़ती है....आयइईई सोढी आहह.....ऐसे ही करते रहो....

कुछ 2 मिनट ऐसा करने के बाद वो उसकी चुचि को छोड़ देता है...रोशन की चुचि पूरी लाल हो जाती है...लेकिन सोढी अभी भी पागल ही रहता है.....आज वो रोशन की जम कर ठोकने के इरादे में होता है....और एक दम से वो रोशन की चूत को कस के दबा देता है..जिससे रोशन फिर से चीख उठी है...ओह आज्ज्झहह औछ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सोढी आराम से अहह मार दिया तूने तो....और सोढी एक ही झटके में पेंटी भी फाड़ देता है....रोशन की गीली चूत को देखकर सोढी की लार टपकने लगती है....और वो किसी पागल कुत्ते की तरह उसपे टूट पड़ता है...और उसे ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर देता है.....इधर रोशन का बुरा हाल हो जाता है सोढी के चूत चाटने पर...वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेती रहती है....अहहुईईईईई सोढी आहह ओह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है....

फिर सोढी चूत की दोनो फाँक को खोल कर अपनी जीभ अंदर डाल देता है और अपनी जीभ से चूत की चुदाई चालू कर देता है....जिससे रोशन से रहा नही जाता और उसको बर्दाश्त नही होता और वो अपना काम रस सोढी के मूह में ही झाड़ देती है और झटके खाने लगती है...और धीरे धीरे सारा पानी ख़तम हो जाता है...सोढी खड़ा होता है और एक एक बूँद पी जाता है....और बोलता है..

सोढी :- रोशन मेरी जान तेरा पानी तो तेरी ही तरह मीठा है...लेकिन मेरी जान तू इतनी जल्दी क्यूँ झड गई अभी तो बहुत कुछ बाकी है मेरी जान...

रोशन :- अरे बावा तूने तो मेरी जान निकाल दी...अब बस में और नही करूँगी..

सोढी :- मेरी रोशन तुझे पता है में तुझे जाने नही दूँगा...और अपने हाथ से रोशन का हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख के बोलता है...अरे अब ज़रा मेरा लंड पकड़ के चूस मेरी जान....

और रोशन बिना कुछ कहे सोढी का लंड मूह में लेके चूसने लगती है..अब मज़ा लेनी की बारी सोढी की थी...वो सिसकियाँ भरते हुए..आह रोशन डार्लिंग कमाल कर दिया तुस्सी बहुत मज़ा आ रहा है....और चूस्ति जा..फिर रोशन लंड के सुपाडे को चाटती है और लंड को मूह में लेके ज़ोर ज़ोर से चूसने लगती है...और अपने हाथ से सोढी के टट्टों को ज़ोर से दबा देती है..जिससे सोढी पागल हो जाता है और ज़ोर से अहह ओह रोशन कमाल कर दिया तूने.....और सोढी रोशन को रोक देता है....क्यूँ कि अब वो पूरी तरह तैयार हो जाता है आज रोशन की चूत को फाड़ने के लिए...

सोढी रोशन को फिर से टेबल पे बिठा के उसकी टॅंगो को अपने दोनो हाथों में उठा लेता है और लंड चूत पे सैट करके बोलता है ..तैयार हो जा रोशन आज तेरी चूत का कचूमर बना दूँगा..इससे पहले रोशन कुछ बोल पाती ....सोढी एक ज़ोर दार धक्का मारता है...और पूरा का पूरा 9 इंच का लंड रोशन की चूत में उतार देता है.....

रोशन :- चिल्लाती हुई......अहह...ओह माआआआआआआआआआआअ मर् गयइ.....ये क्या किया सोढी तूने पूरा एक बार में डाल दिया...घेलोझ कहीं का....

सोढी ने अंदर घुसाते ही ...धक्के मारने शुरू कर दिए....धक्के इतने तेज़ थे कि रोशन बुरी तरह टेबल पे हिल रही थी...अगर सोढी ने उसे पकड़ा ना होता तो वो गिर जाती...सोढी जबरदस्त चूत के अंदर लंड अंदर बाहर करने लगता है....

और इधर रोशन ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेती है...अह्ह्ह्ह सोढी मज़ा आविग्यो...और मार ज़ोर ज़ोर से मार मेरी इस चूत का भोसड़ा बना दे.....और मररर आआहह ओह....माँ...उईईई......अह्होहओजू....और ज़ोर ज़ोर से चीखे जा रही थी...इधर सिसकियो की आवाज़ के साथ लंड अंदर बाहर होने की आवाज़ भी आ रही थी क्यूँ की चूत इतनी गीली थी कि उसने लंड को इतना चिकना बना दिया था कि पच पुच की आवाज़ें आ रही थी....सोढी पूरी ताक़त के साथ लंड को पूरा अंदर तक पहुचा रहा था....वो तो झड़ने का नाम ही नही ली रहा था...

इधर रोशन का बुरा हाल था वो दुबारा झड़ने के करीब थी...वो बहुत तेज़ सांस ले रही थी..और बोल रही थी...सोढी जल्दी करो में तुम्हारे साथ ही झड़ना चाहती हूँ बावा....

और सोढी और तेज़ धक्के लगाने लगता है....अब सोढी का भी उबल कर आने को होता है... और तेज़ धक्के लगाना शुरू कर देता है...टेबल भी बुरी तरह हिलने लगती है...आज तो रोशन की चूत का सच मुच कचूमर बन गया है...

रोशन :- सोढी आज तो तूने मार ही दिया है..थोड़ा आराम से आहह ओह....में बस झड़ने वाली हूँ मुझसे अब कंट्रोल नही हो रहा...

सोढी :- मेरी जान में बसस्स गया....अहह ओह.....ले मेरा पानी अपनी चूत में....और सोढी अपना गरम गरम पानी रोशन की चूत के अंदर उडेल देता है...

सोढी का पानी रोशन के अंदर जाते ही वो भी कंट्रोल नही कर पाती और चीखती हुई......अहह.....में भी गई..और अपना पानी छोड़ देती है....दोनो एक दूसरे के गले लग कर हाँफने लगते हैं...फिर सोढी अपना लंड बाहर निकालता है..और जब रोशन अपनी चूत की तरफ देखती है तो वो हैरान हो जाती है...क्यूँ कि रोशन की चूत किसी होल की तरह खुली होती है...और मन में सोचती है..कि आज तो सच में इस घेलोच ने मेरी चूत फाड़ दी....और अपने हाथों से धीरे धीरे उसे सहलाती है...तब तक सोढी कपड़े पहन चुका होता है....

अचानक नीचे से आवाज़ आती है सोढी.....सोढी....सोढी बाहर जाके देखता है तो सब उसे बुला रहे होते हैं...वो सबको बोलता है कि 2 मिनट में आ रहे हैं..और वापिस अंदर आ जाता है....और रोशन को बोलता है..

सोढी :- जल्दी कर रोशन सब बुला रहे हैं ...

रोशन :- रुक 2 मिनट ...तूने मेरी ब्रा पेंटी फाड़ दी है ना...अभी दूसरी लेके आती हूँ..

सोढी :- अरे उसका टाइम नही है तू ऐसे ही कपड़े पहन ले..

रोशन :- पागल है क्या...इतना ही बोल पाती है..

क्यूँ कि सोढी उसे फटाफट करने को कहता है..इसलिए रोशन बिना ब्रा और पेंटी के ही कपड़े पहन लेती है....और फिर दोनो नीचे चले जाते हैं....
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