XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
02-27-2021, 12:44 PM,
#21
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 22

और फिर वो आराम से कार चलाने लगि, और हम एक घर के नजदीक ही एक मॉल में गए और वहाँ दीदी ने घर के लिए कुछ सामान लिया और फिर हम बाहर खाना खाने गये, और बाहर एक होटल में डिनर निपटा के घर पहुंचे तो उस वक़्त ९.३० हो रहे थे. हम दोनों घर में आते ही दोनों एक एक सोफ़े पर लेट गए और मैंने फैन ऑन कर दिया, फिर मैंने दीदी से कहा.दीदी....ह्म्मम्....सुबह तो बिगडी आप की पर शाम को मज़ा आया की नही... .ओह माय गॉड, रेशु, बहुत मज़ा आया, सच में इतना में कभी थाकि नही,लेकिन मज़्ज़ा बहुत आया. एक तो घुमने का मज़्ज़ा और ऊपर से तुम्हारे नाटक, दोनों ने सच में आज का दिन बना दिया.. दीदी की आवाज़ में एक किस्म की शान्ति थी. .नाटक.? मेरे कौन से नाटक.. नाटक तो आपने किया था बिमार पड़ने का.. बाय गॉड में कितना डर गया था. मैंने बात कंटिन्यू की.अच्छा किया, तुम इसी लायक हो. तुम जैसे लोग, वो बिचारा गधा, अपनी गधी के साथ कुछ कर रहा था तो तुमसे देखा नहीं गया और उसे देखने लगे.? शर्म नहीं आती. . हमारी कमैंट्स का दौर जारी रहा. अब मेरे पास कोई जवाब नहीं था में सोफ़े पर से खड़ा हुआ, एक अंगडाई ली और दीदी से कहा, दीदी में नहाने जा रहा हू. आज बहुत मज़ा करने में भागा-दौड़ी भी बहुत हुई हे. .हाँ रेशु वैसे भी तुम बहुत बद्बू मारते हो.. दीदी एक भी मौका नहीं चुक रही थी मुझे परेशान करने का.. पर मैंने भी कहा.अच्छा...तो तुम ही नहला दो.. में भी तो देखु अच्छे से कैसे नहाया जाता हे... अब दीदी की बारी थी, एक झटका खाने की, पर उन्होंने मना कर दिया.नही..नही अपने आप ही नहाऊ.. अपने बहन से ऐसे कहते शर्म नहीं आती. दीदी ने मना किया. .क्यूं बड़ी अब शर्म आ रही हे, तेज़ गाड़ियां दौड़ाते हुए, लड़की होने का पता नहीं चलता. मैंने भी और एक तीर जैसे लाइन कहि, अब दीदी की बारी थी चुप होने की, वो कुछ बोली नही, पर उठि और मेरे जैसे अंगडाई लेने लगी तभी मैंने दीदी से कहा.दीदी याद हे.. हम छोटी चाची के गाँव में कुए में नहाने जाते थे. और एक बार तो साँप भी देखा था.. मैंने पास्ट में से एक बात निकाली..हा, और तुम उस टाइम अंडरवेअर में भागे थे, घर के लिये.. .हाँ तुम भी तो टॉवल में भागि थी.. फिर से हमारे बीच नोक झोक होने लगी..हा..पर तब हम छोटे थे.. दीदी ने कहा और किचन में जाने लगि, तो मैंने दीदी को पीछे से पकड़ लिया और दीदी के कान में कहा..छोटे थे तो मज़ा आता था तो अब तो और भी मज़्ज़ा आएगा.. और दीदी को बाथरूम के लिए ढ़केलने लगा. दीदी ने थोड़ी सी कोशिश जरूर की चुतने की पर चुत नहीं पायी, इतने में तो में उन्हें बाथरूम तक ले आया और इससे पहले की दीदी कुछ कहे, में दीदी को लेकर बाथरूम में घुस गया.मै बाथरूम में तो गया पर हा, अंदर जाने के बाद पता नहीं पर में थोड़ा सा शर्मा गया या कुछ सोच रहा था यह भी याद नही, पर फिर दीदी ने कहा.रेशु..क्या तुम सही में चाहते हो कि मैं तुम्हे नहलाऊं”?.या फिर कुछ और सोच रहे हो.? दीदी एक दम नार्मल लग रही थी और मैंने भी कह दिया.ऑफ़ कोर्स दीदी.. “आई ऍम शुअर”

तो फिर कपडे पहन के नहाना चाहते हो क्य...? और वो अपने मुँह पर हाथ रख के मुस्कुरा पडी. मैने भी अब अपने कपडे उतारना शुरू किया और एक के बाद एक अपने शर्ट के सारे बटन खोल डाले और शर्ट उतार के साइड में रख दिया. तब दीदी ने भी बड़े सिडक्टिव अंदाज़ में मेरे सीने पर हाथ रक्खा और कहा
.ओहः.. रेशु, अब समझि तुमने आज वेस्ट नहीं पहनी थी, इसीलिए कब से पसीने से बद्बू मार रहे थे. दीदी ने मुझे चिड़ाने के लिए कहा और यह सुनकर मैंने भी वो किया जो वो चाहती थी, मैंने भी उन्हें खिंच कर अपनी बाँहों में भर लिया और उनसे सट के लिपट गया, और अपने दोनों हाथों में जैसे वो टूट रही हो वैसे जम चुकी थी, मैंने फिर दीद से कहा
.क्यों दीदी पसिना कैसे लग रहा हे..? “आई होप की मज़ा आ रहा होगा”.. मैंने भी फिर से नहले पे दहला मारते हुए कहा.फिर दीदी भी मेरे सिने से अपने फेस को उठाय और मेरी और देखा और कहा,
.”सच कहूं..रेशु मज़ा आ रहा हे”... और फिर से वो हंस पड़ी और में भी थोड़ा सा शॉक हो गया. और वो मेरे पकड़ से आज़ाद हो गयी, फिर उन्होंने कहा की चलो मेरा टाइम वेस्ट मत करो और अपना पैंट भी उतारो, तो मैंने दीदी से कहा की ठीक हे और में घूम कर दीवार की और मुँह कर के अपने पैंट का हुक खोलने लगा, तो दीदी ने पूछ ही लिया जो में चाहता था .अरे पीछे क्यों घूम गया...? तो मैंने कहा की “दीदी तुम्हे तो कोई शर्म नहीं पर मुझे तो शर्म आयेगी ना”..
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तो फिर कपडे पहन के नहाना चाहते हो क्य...? और वो अपने मुँह पर हाथ रख के मुस्कुरा पडी. मैने भी अब अपने कपडे उतारना शुरू किया और एक के बाद एक अपने शर्ट के सारे बटन खोल डाले और शर्ट उतार के साइड में रख दिया. तब दीदी ने भी बड़े सिडक्टिव अंदाज़ में मेरे सीने पर हाथ रक्खा और कहा
.ओहः.. रेशु, अब समझि तुमने आज वेस्ट नहीं पहनी थी, इसीलिए कब से पसीने से बद्बू मार रहे थे. दीदी ने मुझे चिड़ाने के लिए कहा और यह सुनकर मैंने भी वो किया जो वो चाहती थी, मैंने भी उन्हें खिंच कर अपनी बाँहों में भर लिया और उनसे सट के लिपट गया, और अपने दोनों हाथों में जैसे वो टूट रही हो वैसे जम चुकी थी, मैंने फिर दीद से कहा
.क्यों दीदी पसिना कैसे लग रहा हे..? “आई होप की मज़ा आ रहा होगा”.. मैंने भी फिर से नहले पे दहला मारते हुए कहा.फिर दीदी भी मेरे सिने से अपने फेस को उठाय और मेरी और देखा और कहा,
.”सच कहूं..रेशु मज़ा आ रहा हे”... और फिर से वो हंस पड़ी और में भी थोड़ा सा शॉक हो गया. और वो मेरे पकड़ से आज़ाद हो गयी, फिर उन्होंने कहा की चलो मेरा टाइम वेस्ट मत करो और अपना पैंट भी उतारो, तो मैंने दीदी से कहा की ठीक हे और में घूम कर दीवार की और मुँह कर के अपने पैंट का हुक खोलने लगा, तो दीदी ने पूछ ही लिया जो में चाहता था .अरे पीछे क्यों घूम गया...? तो मैंने कहा की “दीदी तुम्हे तो कोई शर्म नहीं पर मुझे तो शर्म आयेगी ना”..
.अच्छा इतना शर्माना था तो नहाने के लिए उतावला क्यों हो रहा थे..? “और वैसे भी इतना शरमायेगा तो पता नहीं आगे क्या करेगा”.? दीदी ने भी अपने साडी का पीछे रहने वाला खुला सिरा घुमा कर अपने नैवेल के पास साडी में फसा दिया और मैंने पैंट उतरना शुरू किया और जानबूझ कर पैंट को कमर से निचे उतार ते वक़्त एक साइड से अपना अंडरवेअर भी निचे कर दिया और अपने गांड चिक की एक झलक दीदी को दे दी और फिर से अंडरवेअर को अच्छे से पहन लिया, फिर मैंने पैंट को निचे ही रहने दिया ओर दीवार की तरफ मुँह कर के शावर ऑन कर दिया और खुद को भिगो लिया. फिर दीद से कहा की अब सोप लगाओ दीदी.
फ्रेंड्स, में इतना शर्मा तो नहीं रहा था पर एक बात थी की जब तक दीदी अपने मुँह से नहीं कहती तब तक उनके साथ सेक्स तो नहीं करुँगा और तब तक सिड्यूस करना हे जब तक वो अपने आप कहने पर टूट जाए, फिर दीदी ने कहा की
.अरे उधर मुँह कर के क्यों खड़ा हे.? इधर मेरी और घुम्.. दीद ऑफ़ कोर्स मेरे तने हुए लंड की और देखने चाहती थी.
.नही.. दीद पहले आप मेरी बैक पर साबून लगा दो.. मैंने भी दीदी को अपनी बैक थमा दी. वो भी ठीक हे बोल कर मेरी और साबून ले कर आई और मैंने शावर बंद कर दिया ता की वो भीग न जाये और वो आ कर पहले मेरे पीठ पर साबून लगया और जोर जोर स घिसा भी फिर मेरी नैक के पीछे और मेरी नैक पे भी साबून लगया और फिर खुद ही अपने आप मेरे पास आ कर मेरे पीछे से ही मेरे सीने पर सोप मसलने लगी और एक दो बार तो मेरे नीप्लेस पर जोर भी दि, फिर वो मेरे सीने से निचे उतर के मेरे पेट् पे साबून लगाई और पीछे कमर पे भी अपने हाथ रगड़ने लगी और फिरसे अपने हाथ आगे ले कर मेरे नैवल के साथ भी कुछ देर खेला और बाद में अपने हाथ मेरे नैवल से निचे लाने लागी, मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था मैंने अपनी आँखें बंद कर ली पर दीदी ने अपने हाथ फिर से कमर पर ले लिए और कहा
.अच्छा रेशु अब इसे भी खोल दो, साबून लगाना हे.. ऑफ़ कोर्स दीदी का इशारा मेरी अंडरवेअर की और था लेकिन मैंने कहा की दीदी वहा रहने दो में खुद लगा लूँगा आप बस पैर पर साबून लगा दो, फिर दो सेकंड तक उन्होंने कुछ बोला नहीं और मेरे पाँव पर साबून लगाने लगी, मुझे फिर अपने पर गुस्सा आया की में तो सोच रहा था की दीदी खुद ही मज़ाक़ में मेरा अंडरवेअर उतार देगी पर में गलत निकला और दीद मेरी जाँघ पे साबून लगाने के बाद निचे तक साबून लगा दिया और फिर अचानक से मेरा अंडरवेअर निचे खिंच लिया और में कुछ सोच भी नहीं पाया फिर मैंने दीदी की और देखा, कुछ कहा नहीं कहता भी क्य, कुछ कहने को अब था नही. फिर वो भी मेरी और देखने लगी और मेरी गांड पर उन्होंने अपना हाथ रक्खा और साबून लगाने लगी और बहुत ध्यान से देख भी रही थी, फिर दीदी के हाथ धीरे धीरे मेरे गांड क्रैक में घूसने लगे और उन्होंने एक दो बार मेरे गांड क्रैक को खोलने की कोशिश भी की पर ज्यादा हिम्मत नहीं कर पाई तो मैंने अपने आप ही अपने दोनों पाँव फैला दिए और दीदी के अक्शन का इंतज़ार करने लगा,

फिर दीदी ने भी अपने हाथ मेरे गांड होल से चिपका कर वहॉ खूब मसाज किया और बाद में मेरे दोनों लटकते बॉल्स को अपने हाथ में पकड़ लिया. अब मेरे से रहा नहीं गया, दीदी ने बहुत सिड्यूस कर लिया अब मेरी बरी थी. मैंने ऊपर एक मॉनिंग साउंड करते हुए दीदी से कहा
.आआ..हहह... दीदी प्लीज यहाँ कुछ मत करो... में दीदी की और नहीं देख रहा था कयूं..क्या हुआ रेशु? . दीदी ने मेरे मन की सिचुएशन जानते हुए भी मुझसे पूछा.
.ओह्हः.. कुछ हो रहा हे, स्ट्रेंज सा, पता नहीं क्या हो रहा हे.. पर अच्छा लग रहा हे.. दीदी के हाथ मेरी बातें सुनते वक़्त रुक गए पर फिर से उसे सेहलाने लगे और ऑफ़ कोर्स मेरा लंड अब खड़ा हो चुक्का था
.अच्छा लग रहा हे तो फिर रोकता क्यों हे...? और दीदी मस्ती में मेरे बॉल्स को सहलाने लगी, वो भी बहुत चाहती थी की उसे मुँह में लेकर चूसे पर शर्म नाम की भी कोई चीज़ होती हे, फिर दीदी ने आगे बढ़ते हुए मेरे लंड पर अपनी ऊंगलियां फेरी और फिर कहा
.रेशु.अब आगे घूम जाओ चलो.. दीदी अपनी नीज के बल पर बैठी थी और मेरे तने हुए लंड को देखने के लिए बेक़रार हो रही थी. पर मैंने कहा की दीदी नहीं शर्म आ रही हे, तो दीदी ने कह्, अरे अब तक तू शर्म की पूँछ पकड़ के बैठा हे और दीदी ने मुझे मेरे गांड को पकड़ते हुए घुमा दिया और मेरी गांड को नजदीक से देखने के चक्कर में वो मेरे नजदीक बैठी थी तो मेरा ताना हुआ लंड दीदी के सामने तो आ गया पर दीदी के ठीक राईट गाल को प्यार से टच भी किया और अब दीदी सब भूल गयी और मेरे लंड को ही देखने लगी, और में भी दीदी को डिस्टर्ब किये बिना उन्हें देख रहा था फिर कुछ देर बाद दीदी को होश आया और वो होश में आते हुए मेरी और देखि और में तो उन्हें ही देख रहा था जैसे ही दीदी ने मेरी और देखा तो मैंने दीदी को नॉटी सी स्माइल दी और दीदी भी अपने आप हँसते हुए फिर से मेरे लंड को देखने लगी और साबून ले कर उसे भी अपने हाथ में ले लिया और में फिर से मोअन कर पडा इस बार दीदी से आँख चुराने का सवाल नहीं था और दीदी ने मेरी और देखा पर मैंने नज़रें फेर ली और दीदी अब मेरे लंड को साबून लगाने के चक्कर में आगेपीछे करने लगी और में भी यही चाहता था फिर दीदी जब रुक गयी तो मैंने दीदी से कहा, प्लीज दीदी थोड़ा टाइम और करो ना.. और दीदी भी मेरे कहने के इंतज़ार में ही थी और में भी अपने वीर्य के झटकने का इंतज़ार करने लगा और दीदी भी जोश में ही हैंडजॉब कर रही थी. फिर दीदी ने और जोर लगा के आगे पीछे करना शुरू किया और में भी फकिंग के फंतासी में था फिर दीदी ने स्ट्रेंज सा किया, हलाकि स्ट्रेंज नहीं था बस वो अपने आप को रोक नहीं पाई होगी, उन्होंने मेरे लंड के आगे वाले टिप के पार्ट को एक किस दी और में झड पडा, मेरे लंड से वीर्य की धार निकलने लगी और शुक्रा की बात यह थी की सब धार दीदी के लिप्स, चिन और दीदी के क्लीवेज पर पड़ रही थी, दीदी यह सब देख रही थी पर कुछ बोली नही, और मैंने भी आखरी बूँदे जानबूझ कर दीदी के ब्लाउज पर ही गिरा दि, और जब झड़ना बंद हो गया तो दीदी ने बनावटी गुस्सा बनाते हुए मुझसे कहा
.उफ्फ्फ्.. रेशु, यह क्या किया तुमने.. शर्म नहीं आती? अपनी बहिन के साथ ऐसा करते हो.?
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02-27-2021, 12:44 PM,
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और वो खड़ी हो गयी, और फिर से कहा
.ऊफ. अब यह साफ़ भी नहीं होगा... दीदी के असली ग़ुस्से और नकली में बिलकुल पता चल रहा था मैंने भी दीदी के लेफ्ट हैंड को पकड़ा और दीदी को टोटली टर्न करते हुए अपनी बाँहों में भर लिया, अब दीदी मेरे आगे और में दीदी के पीछे था मेरे हाथ दीदी के पेट् पर थे, मैंने दीदी को पेट् से पकड़ा था इसिलिये. फिर दीदी ने पूछा,
.”रेशु.. अब तुम क्या कर रहे हो? छोडो मुझे”...
मैंने भी दीदी के काण में फुसफुसा कर कहा .बस.. दीदि, में अभी इसे साफ़ कर देता हू, प्लीज . और ऐसा कह कर मैंने दीदी का राईट हैंड अपने राईट हैंड से पकड़ा और दीदी के राईट हैंड को पेट से उठाते हुए मैंने दीदी के लिप्स पर रक्खा और फिर समझ कर दीदी की मिडिल फिंगर से दीदी के लिप्स पर गिरे अपने वीर्य ड्रॉप्स को साफ़ करने लगा और फिर फोरस्फुल्ली दीदी की मिडिल फिंगर को दीदी के मुँह में दाल दिया और दीदी के मुँह के अंदर बाहर करने लगा, दीदी भी बाय गॉड फुल सपोर्ट में थी, वो भी आँखें बंद कर के अपने ही मुँह में अपनी ऊँगली लेने का मज़ा ले रही थी, मेरा मानना था की शायद यह पहली बार कर रही थी वो या शायद उन्हें पहली बार इतना मज़ा आ रहा था इसीलिए वो अपनी ऊँगली को मुँह से बाहर नहीं निकालना चाहती थी, फिर मैंने दीदी के न चाहने के बावजूद दीदी के मुँह से ऊँगली निकाली और दीदी के फिर से राईट हैंड को पकड़ के दीदी के चिन से ड्रॉप्स साफ़ की और इस बार दीदी ने फोरस्फुल्ली अपने पूरे हाथ को उठाया और अपने मुँह में भी दाल दिया, अब वो पूरी तरह मेरे कण्ट्रोल में थी, मैंने फिर दीदी के हाथ को उनके मुँह से बाहर निकाला और अपने हाथ से उनके हाथ को पकड़ के दीदी के सीने पर रक्खा और अपने हाथ से उनका हाथ घुमाने लगा, फिर मैंने दीदी का पल्लो अपने लेफ्ट हैंड से जो की नैवल के पास बढ़ा था उसे छोड़ दिया और दीदी के काण में कहा,
.दीदी..यह पल्लू,बीच में आ रहा हे, हटा दू क्य...? जवाब पता था पर पूछ्ना जरूरी था,
.हटा दो. दीदी ने कह दिया, और मैंने लेफ्ट हैंड से दीद का पल्लू हटाया और राईट हैंड से दीदी के पूरे सीने पर दीदी का हाथ घुमाने लगा, या मनो दीदी के पूरे सीने पर में अपना वीर्य फैला रहा था फिर मैंने दीदी का हाथ दीदी के ब्लाउज के अंदर दाल दिया और साथ में अपना हाथ भी और फिर मैंने अपने हाथ को दीदी के हाथ पर रक्खा और स्लोवली और स्लोवली दबाने लगा, आह आह फ्रेंड्स कितना मज़ा आ रहा था आप भी शायद इमेजिन कर पाएंग़े.मैन कुछ देर दीदी के बॉब्स दबाने का मज़ा उठाने लगा और दीदी भी, अब वो पूरी तरह ढीली हो चुकी थी, दीदी का सारा बदन मुझ पर पड़ रहा था फिर मैंने दीदी के निप्पल को पकड़ा और उसे दबाया और दीदी के मुँह से मॉनिंग की स्लो आवाज़ें आने लगी फिर मैंने पीछे से स्लोवली कॉक ऑन कर के शावर चालू कर दिया था की दीदी तेज़ फव्वारे से खड़ी न हो जाये और अब हम दोनों भीगने लगे, में तो भीगा था ही पर में दीदी को भीगाना चाहता था दीदी को पता चला की वो भीग रही हे, पर मैंने दीदी को उठने नहीं दिया और दीदी के बॉब्स पर जोर दे कर फिर से अपने सीने से चिपका दिया और इससे पहले की दीद कुछ कहे, मैंने कहा की
.दीदी..कुछ नही, बस शावर ऑन हे, दाग धोने के लिये, आई होप यु डोंट माइंड. और दीदी ने भी कहै
.आई एम ओके, रेशु चाहो तो शावर बढा दो.. दीदी के ऐसा कहने का ही मानो इंतज़ार था और मैंने शावर बढा दिया और दीदी के बॉब्स से फिर खेल्ने लगा और मैंने फिर लेफ्ट हैंड से साड़ी जो नैवेल के पास लगयी होती ने वाहन हाथ दाल कर उसे धीरे धीरे खिंच कर बाहर निकाल दिया और अब दीदी की पूरी साडी खुल गयी, ऊपर से पल्लू तो पहले ही हटा दिया था और फिर इससे पूरी साडी निचे गिर गयी. अब मैंने दीदी के ब्लाउज के बटन पे अपना हाथ डाला और दोनों हाथो से पहला बटन खोलने लगा, मैंने अपना हाथ दीदी के ब्लाउज से बाहर निकाला पर अभी तक दीदी ने अपना हाथ अंदर ही रक्खा और खुद ही अपने बॉब्स को दबाये जा रही थी, मैंने धीरे से दीदी के सारे हुक खोल दिए और अब मैंने दीदी को आराम से हटाया और घुमा के अपने सीने से दीदी को चिपका दिया और फिर पीछे से दीदी के ब्लाउज को खींच लिया, अब दीदी मेरे सामने ब्रा और पेन्टी में ही थी. फिर आराम से मैंने दीदी की ब्रा का भी हुक खोला और दीदी से कहा
.दीदी प्लीज ब्रा भी उतार दिजिये ना...
.नहीं रेशु..तुम पागल तो नहीं हो रहे... दीदी के मुँह से यह जवाब सुनकर में हैरान रेह गया क्यों की मुझे लग रहा था की दीदी उस सिचुएशन में थी की वो मेरी हर बात मान जाती पर दीदी ने मना कर दीया.
.शीट.थिस इस नोट फैअर, आप मुझे न्यूड कर सकती हे और अपने आप होने से क्यों हिचकिचा रही हे.? और ऐसा कहते ही मैंने दीदी के कंधे से ब्रा के स्ट्राप खिंच डाले और दीदी के बॉब्स मेरे सामने नंगे हो गयी. मैं हल्का सा घबराया कीकहीं इस हलकी सी जबरदस्ती से दीदी गुस्सा नहीं हो जाये पर और कुछ न सोचते हुए मैंने दीदी को फिर से अपने पास खींच लिया और बाँहों में भर के दीदी को किस करने लगा, शोल्डर पर, चिकस्, काण पर पूरे मुँह पर किस कर दिए और इस तरह चूमने के बाद मैंने दीदी को अपने से अलग किया, अब वो शायद भूल चुकी थी की मैंने उनकी इजाज़त के बगैर उनकी ब्रा उतार दी हे, फिर मैंने दीदी को अलग करके कहा
.क्यों दीदि, इस नहले का कोई जवाब हैं क्या.? और नॉटी सा मुस्कराया. और दीदी भी मुस्कुराते हुए मेरे पास आई और मुझे कस के जोर से पकड़ा और अपनी बाँहों में भर लिया और फिर वो मेरे लिप्स तक नहीं पहुँचि तो वो मेरे ऊपर चढ़ गयी और अपने पाँव मेरे गांड के पास लप्पेट के मेरे ठीक सामने आ गयी और अपने हाथ मेरे नैक के पास ले लिये, फिर मैंने भी इस मौके को न छोड़ते हुए मैंने दीदी की बैक को पकड़ा और फिर दीदी ने रिलैक्स होते हुए मेरे गालो पे अपने हाथ रक्खे और मेरे लिप्स को अपने लिप्स से जकड लिया और चूसने लगी, यह मेरे लिए कोई शॉक नहीं था यह एक्सपेक्टेड था पर कभी कभी जो एक्सपेक्ट किया होता हे वो भी इतना हसीन होता हे की मज़्ज़ा आ जाए, अब तो कोई रुकना ही नहीं था मैंने भी दीदी के सर को पीछे से पकड़ा और अपने लिप्स से चिपका के रक्खा और मस्त चूसने लगा, फिर मैंने अपना सलीवा दीदी के मुँह में छोड़ दिया और दीदी ने आँखें खोल के मेरी और देखा, अब उन्हें पता था की हम दोनों के बीच में क्या हो रहा हे, इसीलिए उन्होंने अपने लिप्स को अलग किया और मुझे देखकर सोचने लगी, शायद यही सोच रही थी की जो भी हो रहा हे , सही हे या नही, इधर मेरा लंड फिर से खड़ा हो रहा था और दीदी की चुत को टच कर रहा था लेकिन दीदी ने मुझे छोड़ दिया और बाहर जाने लगी, तो में भी उनके पीछे दौड़ा और बाहर निकलते ही दीदी का रूम था मैंने दीदी के हाथ को पकड़ा और फिर से अपनी और घुमा के अपने से सटा लिया और फिर से किस करने लगा, दीदी ने भी रेस्पॉन्स किया पर अभी भी वो उल्झन में थी, फिर में उनके रूम में ही दाखिल हो गया और दीदी को बेड पर गिरा दिया और फिर से उन्हें किस करने लगा, और दोनों हाथों से उनके बॉब्स दबाने लगा, उनके निप्पल्स कड़क हो चुके द, लेकिन वो अभी भी मेरी जीभ को अपने मुँह में नहीं ले रही थी, मतलब अभी थोड़ी सी हिचकिचाहट बाकि थी, तो मैंने भी दीदी को छोड़ा और दीदी की और देख कर बड़े प्यार से प्लीज कहा
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02-27-2021, 12:44 PM,
#24
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अपडेट 25

दीदी ..प्लीज्. और वो फिर से सोच रही थी. मैं भी सोच में पड़ गया पर दीदी ने इस बार मुझे पकड़ा और अपने से लगा लिया और मुझे पलटा के मेरे ऊपर आ गयी और मेरे कान में कहा
.जस्ट किडिंग.. कितने परेशान हो रहे हो..? कोई बात नहीं लेट्स स्टार्ट अगेन. और मुझे अब वो प्यासी औरत की तरह किस करने लगी और में भी खुश होते हुए रेस्पोंड करने लगा. और अब मैंने भी दीदी को पलटा दिया और बॉब्स दबाने लगा. फिर मैंने दीदी के बॉब्स चूसे और मस्त दबाने लगा, ओह क्या मस्त मस्त बॉब्स थे, पिंकिस कड़क निप्पल और क्रीमी बूब्स, बाय गॉड मेरा लंड अब और भी तन रहा था फिर दीदी ने अपना एक हाथ मेरे निचे ले जाते हुए मेरे लंड को पकड़ लिया और में समझ गया की उनसे अब रहा नहीं जाता तो में भी उठ गया और दीदी के पास बैठ गया और दीदी मेरे लंड को सहलाने लागी, थोड़ी देर तक सहलाने के बाद मैंने उनके मुँह में ही लंड दाल दिया और वो भी इसी बात का इंतज़ार में थी उन्होंने भी मस्त इसे चूसना शुरु कर दिया और में भी फिर से इस नशे में खो रहा था मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था कभी इन्सेस्ट रिलेशन्स न मान ने वाला, आज अपनी ही चाची और बहन के साथ सेक्स कर रहा था पर एक बात तो सही हे, की आप किसी को पटा के उसके साथ सेक्स करें और अपने रिलेटिव जो आपको नजदीक से जानते हे, उसके साथ सेक्स करे उसमे बड़ा फर्क हे
दीदी अब कुछ सोचने के सिचुएशन में नहीं थी, और में अब कुछ सोचना नहीं चाहता था दीदी अब मस्ती से मेरे लंड को चूसे जा रही थी, और उन्हें मेरे दोनों लटकते बॉल्स को चूसने को भी बड़ा मज़ा आ रहा था में अपनी नीज पर बैठा था और दीदी के बालों को सहला रहा था फिर मैंने दीदी के मुँह पर प्रेशर देना शुरू किया और दीदी के मुँह को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे चोदने लगा, और धीरे धीरे अपना लंड उनके गले के अंदर बाहर करने लगा, वाह्ह्, कितना मज़ा आ रहा था दीदी की हालत से भी यह लग रहा था की वो पहली बार माउथ फूकिंग कर रही हे, और मैंने भी पहली बार में शांति से काम लेना चाहा. मस्ती से आराम से में दीदी के थ्रोट में अपना लंड जाने देता था और बाहर ला रहा था वाओ येल्लो रौशनी में दीदी का क्रीमी बदन और रेड लिप्स, क्या कॉम्बिनेशन था बाय गॉड. फिर मैंने धीरे धीरे अपनी स्पीड बधाई और दीदी के मुँह को स्पीड में चोदने लगा, दीदी के मुँह में से आवाज़ें आ तो रही थी, पर वो प्लेसर की लग रही थी, दर्द की नही, फिर मैंने दीदी के मुँह में अपना लंड फसा ही दिया, और दीदी के सर को पकड़ के अपना लंड दीदी के गले में फसा दिया, और सर को ठीक अपने बॉल्स तक चिपका दि, अब जा के दीदी को तकलीफ होने लगी और वो अपने हाथ से दर्द बयान कर रही थी. दोस्तों आप को लग रहा होग, की इसमें क्या पर एक बार ९ इंच गले में चिपक जाये तो सांस भी नहीं ले पोओगे, वैसा ही हाल दीदी का था फिर मैंने दीदी को ज्यादा परेशान न करते हुए, दीदी के सर को आज़ाद किया लेकिन लंड पूरा बाहर निकाल दिया. दीदी जो की अब तक डॉगी स्टाइल में मेरा लंड चूस रही थी, वो अब सीधी बेड पर गिर पड़ी और मेरी और देखने लगी, और कहा
.”ओह माय गॉड रेशु”. तुम तो मेरी जान ही ले लेते, पता हे, में सांस नहीं ले पा रही थी.. फिर उन्होंने अपने सीने पर हाथ रक्खा और तीन चक्कर गहरी साँसे ली और फिर मेरी और मुस्कुरा के कहा
.”लेकिन रेशु..एक बात हे, मज़ा बड़ा आया”.. और वो मुस्कुरा पडी और उनकी मुस्कराहट से उनकी अंदरूनी ख़ुशी और सटिस्फैक्शन साफ़ झलक रहा था
फिर में भी उन्हें स्माइल दे कर बेड से निचे अपनी नीज पर बैठ गया और दीदी की दोनों टांगे पकड़ के दीदी को अपने पास खिंच लिया और फिर मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी की कमर पकड़ी और दीदी को और भी अपने पास खिंचा और दीदी की पेन्टी में हाथ दाल कर दीदी की पेन्टी को उतार दिया और दीदी की चुत को देखने लगा. देखने के बाद मैंने अपने लिप्स उसके पास ले जा का उसे एक प्यार से किस दिया और फिर अपने हाथ से उसे सहलाने लगा, अपना हाथ चुत के ऊपर निचे फेरने लगा, और फिर से एक किस दि, क्या मस्त चुत थी, अभी भी गुलाबी थी, और टाइट भी. मैं बार बार उसे पहले तो किस करने लगा, और दीदी भी सीडक्शन फील कर रही थी. फिर मैंने अपनी जीभ से दीदी की चुत को निचे से ऊपर चाटा और अपनी जीभ फिरायी, और फिर फिर अपनी दो उँगलियों से दीदी की चुत को फ़ैलाया और खुलने के बाद मैंने अपनी जीभ से दीदी की चुत को चूसने लगा और अभी तो उनके चुत से हट्ने का मन नहीं हो रहा था क्या मज़ा आ रहा था क्या खुशबू थी बॉस, मज़ा आ गया. अब दीदी के चुत से फ्लूइड बहना शुरू हो गया था वो भी अब मदहोश हो रही थी और मेरे सर को अपनी चुत में और घूसा रही थी,
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02-27-2021, 12:45 PM,
#25
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अपडेट 28

फिर मैंने अपना मुँह चुत से निकाला, मेरा लंड तो कब का टाइट कर दिया था, दीदी ने और फिर मैंने अपनी दीदी के चुत पे अपना लंड घिसा और दीदी के चुत के निचे हिस्से पर अपना सुपाडा वाला पार्ट रक्खा और उसे ऊपर करने लगा, वहा तक जहाँ तक मेरे दोनों बॉल्स भी दीदी की चुत को महसूस हो, दीदी अब मेरा लंड अंदर लेने के लिया तड़प उठी थी, मेरा ऐसे तीन चार बार तडपाने से वो बोल उठी

”रेशु..प्लीज् ऐसे मत करो, प्लीज अंदर डालो ना, बहुत सही कर रहे हो”... दीदी की आवाज़ में तड़प थी.

मैने भी दीदी से कहा की दीदी आपके ऐसा बोलने का ही इंतज़ार था और मैंने अपना सूपाडा दीदी के चुत के ऊपर रक्खा और,

लेफ्ट हैंड से दीदी की चुत को फैला के चुत में लंड दाल दिया, पहले तो चुत में पूरा लंड गया नहीं और फिर मैंने दूसरी बार जोर लगा के पूरा लंड अंदर दाल दिया तो दीदी मेरा पूरा लंड अंदर पा के मचल उठी की बेड पे कमर मोड़ के उठने लगी और तडपने लगी,
बाद में मैंने दीदी को पकड़ लिया और दीदी को बेड पर ठीक से लिटा दिया और मैंने दीदी के लिप्स को फिर से अपने लिप्स में कैद कर लिया और चुस्सने लगा,
और निचे आराम से लंड अंदर बाहर करने लगा, अभी ऑफ़ कोर्स दीदी को मज़ा आने वाला था उन्हें दर्द नहीं हो रहा था में भी आराम से लिप् किस कर रहा था और आराम से दीदी को चोद रहा था
दीदी भी मज़े ले रही थी, फिर मैंने दीदी के लिप्स को आज़ाद करते हुए उनके बॉब्स को चूसने लगा और दबाने लगा,
क्या मस्त बॉब्स थे और मैंने फिर चोदने की स्पीड थोड़ी बधाई और बॉब्स को चूसने की स्पीड भी,

फिर मैंने दीदी अपने राईट साइड से एक तकिए उठाय और उसे दीदी के कामर के निचे रख दिया और दीदी फिर से अपनी वही पोजीशन में आ गई और दीदी के दोनों पाँव फैला लिये, अब दीदी समझ गयी थी की अब रियल पिक्चर स्टार्ट होने वाली हे,

और मैंने दीदी को चोदने की स्पीड और भी तेज़ कर दी और दीदी के मुँह में से अब “आह, ओह, यस, यस, “फ़क मि हार्डर”...याह की आवाज़ें भी तेज़ हो गयी,
और में उन्हें बिना रुके चोदता रह, फिर मैंने दीदी के लेफ्ट पाँव को अपने हाथ में उठा लिया और अपने कंधे पर रक्खा और चुदाई तो ज़री ही थी,
दीदी के आँखों में अब दर्द साफ़ हो रहा था और वो कह रही थी,
ओह.रेशु.प्लीज धीरे धीरे और उनसे अब बोला नहीं जा रहा था और लब्ज़ अब उनके लिप्स में टूटने लगे थे,

फिर मैंने दीदी को ऊपर थोड़ा सरका दिया और में भी उनके साइड में हो के चोदने लगा उस पोज में मुझे मज़ा नहीं आया तो मैंने दीदी को डॉगी स्टाइल बिठा दिया और दीदी को झटके मारने लगा,
बड़ा अच्छा लग रहा था और मेरे हर झटके पे दीदी आगे जाती और चिल्लाती थी,
फिर मैंने दीदी को फिर से मिशनरी पोजीशन में ले दिया और फिर अपने दोनों हाथ दीदी के कंधे पर रक्खे और दीदी को चोदना शुरू किया,
तक़रीबन एक घंटे से में चोद रहा था और दीदी भी इतनी लम्बी चुदाई से थोड़ी सी हैरान थी,
उनके सारे बाल भीग चुके थे, और उनके सारे बदन पर बिखर चुके थे,
इतनी लम्बी चुदाई उन्होंने शायद कभी सही नहीं थी,
और अब तो उनका चिल्लने में से आवाज़ भी कम हो चुकी थी,
फिर मैंने एक बार सट से झटका दिया की दीदी झड गयी और मुझसे उठ कर लिपट गयी,
दीदी पूरी पसीने से भीग चुकी थी, हम जब बाथरूम से आये थे,
तभी वो पाणी से भीगी हुई थी और थकावट से, मैंने भी उन्हें अपने बाहों में भर लिया,
पर अभी मेरा झड़ना बाकि था इसीलिए मैंने तो चुदाई जारी रक्खी और फिर से उन्हें लिटा दिया और अपनी स्पीड और भी बढा दि,
अब तो मेरी और दीदी की जांघे तकरने से जो आवाज़ होती थी वो अब एक आवाज़ हुई नहीं की दूसरी बार में दीदी को झटके से तकरा जाता था अब दीदी थक के बेहाल थी और वो अब रियेक्ट करना छोड़ चुकी थी,
फ्रेंड्स जब औरत स्याटिसफ़ाय हो जाती हे तो वो अपना शरीर एक दम ढीला छोड़ देती हे और वैसे ही दीदी का शरीर अब ढीला हो चुक्का था उनका हाथ अब रिस्पांस नहीं दे रहा था न ही अब आवाज़ आ रही थी, बस मुँह पर दर्द के एक्सप्रेशंस आ रहे थे.

अब फ्रेंड्स में भी अब थक गया था और एक्ससिटेमेंट से लगा की अब में भी झड़ने वाला हूँ तो मैंने और स्पीड बड़ाई और दीदी से कहा

”दीदी लगता हे अब में भी फिनिश करने वाला हू”...
.”अंदर ही कर दो.. रेशु, बहुत अच्छा लग रहा हे”.. दीदी ने थकन के मारे आँखें बंद से ही जवाब दिया.
पर दीदी प्रेगनेंसी..?
.सोचो मत. चिंता मत करो.. ओर मैंने दीदी के अंदर ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया और दीदी के ऊपर गिर पडा बॉस में भी बहुत थक गया था मैं. भी पसीने से तरबतर था और दीदी भी.
हम दोनों में से कोई भी अब कुछ बात करने के सिचुएशन में नहीं थे और मुझे बाद में पता ही नहीं की कब आँखें बंद हो गयी और कब सुबह के १० बज गये.
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02-27-2021, 12:45 PM,
#26
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 29

सूबह उठा और बीति हसीं रात के बारे में सोचने लगा,
अब दीदी क्या महसूस कर रही होगी,
कहीं वो भी अपनी माँ की तरह मुझ पर गुस्सा तो नहीं करेंगी.
सब सोच रहा था और सोचते सोचते में फ्रेश भी हो गया
और रूम से बाहर आया और दीदी को ढूँढ़ने लगा पर दीदी घर में कहीं मिली नही,
एक पल के लिए बुरा ख्याल आया,
पर इतने में मैंने दीदी को बाहर से अंदर आते देखा.
हम दोनों एक दूसरे के सामने खड़े थे पर कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या बात करू?
कल रात को इतने नजदीक थे और अभी पता नहीं इतनी दूरी क्यों लग रही थी.
दीदी भी शायद इसी सिचुएशन में थी, इसीलिए वो भी कुछ नहीं बोलि,
और चुपचाप किचन में चलि गयी.
मैं भी वहीँ ड्राइंग रूम में बैठकर टीवी देखने लगा.
बस १० मिनट में दीदी चाय बनाकर बाहर आई और मेरे पास आ कर मुझे एक कप दिया और मेरे सामने बैठकर चाय पीने लगी,

अभी भी हमारे बीच एकदम साइलेंस था ऐसा तो पहले कभी सोचा नहीं था
मै चाय अपने हाथ में पकड़ के कल रात की सोच में खो गया था
तभी मुझे पता नहीं चला कब दीदी सामने से उठकर मेरे पास में आ कर बैठ गयी
और मेरे कंधे पर अपने हाथ रक्खा और कहा

“क्या सोच रहे हो रेशु...?
दीदी ने कहा तब जा के मानो में नींद से जगा और दीदी को सामने देखा,
वो मेरे सामने देख रही थी और समझ भी रही थी.
मैंने दीदी की और से ध्यान हटा कर अपने कप की और देखा और कहा

”दीदी.शायद आप समझ रही हे,
में क्या सोच रहा हु..
मैंने कहा, उस वक़्त में बहुत टेंस लग रहा था और में भी नहीं जानता,
में उस वक़्त नाटक कर रहा था की सही मायनो में में टेंस था पर दीदी ने मेरे गाल पर किस किया और कहा .
समझ भी रही हूँ और उसके बारे में कुछ कहना भी नहीं चाहती.
तुम भी मत सोचो और एक काम करो,
उसके बारे में मत सोचो,
और हाँ अगर तुम मेरे बारे में सोच रहे हो तो एक बात सुनो
में कल रात के बारे में किसी से कोई जिक्र नहीं करूंग़ी,
और हाँ तुमसे भी यह उम्मीद रहेगी की तुम भी किसी से कुछ नहीं कहोगे..
दीदी ऐसा बोल के किचन में चलि गयी और लंच प्रेपर करने लागी.
मै अब भी पता नहीं इतना क्यों सोच रहा था
कल जिसके इतना करीब था की उसकी साँसे में महसूस कर रहा था उससे इतना क्यों अलग लग रहा था
लेकिन में फिर वहॉ से अपनी चाय ख़त्म कर के उठा और चाय का कप रखने किचन में गया और दीदी की बैक को देख.
दीदी ने मस्त ऑरेंज कलर की साडी पहनी थी और मैचिंग ब्लाउज था और वो भी बर्तन ही साफ़ कर रही थी.
मेरे अंदर आने की आहट उन्हें हो गयी थी और वो यह भी जान रही थी की में कल के बारे में सोच कर अपसेट सा हू.
वो मेरी और मूड़ी और मेरी और देखा,
बाय गॉड वो किसी milf हसीना से कम नहीं लग रही थी.
दीदी ने अपने बाल अपनी बैक से आगे की साइड किये और मेरी और देखा,
में अभी भी किचन के दरवाजे पर खड़ा रेहकर उन्हें ही देख रहा था
उन्होंने मुझे देखा और कहा
“रेशु. वहा क्या देख रहे हो..? इधर आओ..
दीदी के कहते ही मेरे कदम उनकी और उठने लगे, और में दीदी के पास आ कर खड़ा हो गया
और ठीक दीदी के पीछे खड़ा था में दीदी की बस खूबसूरती को देख रहा था
दीदी जानती थी पर वो भी बस अपने बर्तन ढ़ोने में लगी थी
और में उन्हें देख रहा था फिर एक आईडिया आया और मैंने अपना कप साइड में रक्खा
और दीदी को पीछे से गले लगा लिया और अपनी और खींच लिया और अपने से सटा लिया.
मेरे हाथियार में हरकत तो होने लगी थी पर में उसके बारे में सोच नहीं रहा था में बस दीदी के बारे में सोच रहा था
दीदी भी पूरी मुझ से एक दम चिपक गयी थी और वो कुछ कहे,
इससे पहले मैंने ही दीदी को कहना शुरू कर दिया.
.थैंक यु.. दीदि, में यही सोच रहा था की कहीं आप मुझसे कल रात के बारे में नाराज़ तो नहीं हे,
पर आपने कह कर मेरा सारा डर निकाल दिया..
और ऐसा कहते हुए मैंने दीदी के कान के निचे गाल के करीब एक मीठा किस किया
और दीदी के रिएक्शन का इंतजार करने लगा.
“रेशु. मुझे पता था की तुम इसी बात से परेशान थे इसीलिए मैंने तुम्हे पहले से ही कह दिया,
अब तो तुम ठीक हो ना”... दीदी ने पूछ,
और मैंने फिर से दीदी के गाल पर किस की और कहा,
में बिलकुल ठीक हूँ दीदी. और अपने एक हाथ से दीदी के पेट् पे प्रेशर दिया
और में बात यही ख़त्म नहीं करना चाहता था
इसीलिए मैंने दीदी से कहा
“दीदि, एक बात पुछु...?
“यह कोई पुछने वाली बात है”,
जो पूछना हे वो पुछौ”.. दीदी को इतना शांत और नार्मल देख कर मैंने भी पुछ लिया.
“दीदी.. कल रात की एक एक बात अभी भी मेरे जहन में हे और सच कहूं,
तो मुझे कल रात आपके साथ बड़ा मज़ा आया और .. में बोलते बोलते रुक गया.
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02-27-2021, 12:45 PM,
#27
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 30

मैं और..? दीदी भी नहीं चाहती थी, की इन बातों का सिलसिला रुक जाए.

.और. आप बहुत ख़ूबसूरत हे दीदी..सच में आप बहुत ख़ूबसूरत हे,
आप को कल रात छुआ तो समझ में आया की सही खुबसुरती किसे कहते हे?
और मैंने दीदी के नैवेल में एक ऊँगली दाल कर उसे घुमाया और दीदी को पीछे से अपने लंड से भी दबाव डाला.
दीदी अब तक प्लेट साफ़ कर रही थी पर अब उनके हाथ रुक गए थे और ऐसा लगता था की वो और भी सुनना चाहती थी,
इसीलिए उन्होंने कहा
“अच्छा.. इतनी दीदी पसंद आ गयी हे क्या.?
दीदी ने भी इस बात को कंटिन्यू किया
“सच्ची में बहोत मैंने रिप्लाई किया और तुरंत ही दीदी ने पूछ लिया.

.अच्छा, क्या पसंद आ गया, दीदी में जो इतना पसंद करने लगे हो”..
दीदी का यह सवाल तो क़ातिलाना था और अब मौका छोडना सही नहीं था इसीलिए मैंने अपना एक हाथ दीदी के नैवेल से ऊपर उठाय और दीदी के लिप्स पे रक्खा और कहा की
“दीदी यह लिप्स हैं ना,सच में बड़े अच्छे हे”,
हालाँकि दीदी भी यह जानती थी की में किस चीज़ पर मर मिटा हूँ
पर मैंने लिप्स से ही शुरू किया और अपनी एक ऊँगली दीदी के दोनों लिप्स के बीच में फिराई और दीदी के निचे के होठ को ऊँगली से प्रेस भी किया,
और दीदी ने मुँह खोल दिया,
बॉस क्या गरम साँसे चल रही थी.
फिर मैंने अपनी ऊँगली दीदी के होठो से हटा के दीदी के चिन पे से गुजारती हुई
दीदी के गले पर गोल गोल घुमायी और दीदी के गले पर से उसे दीदी के सीने पर रक्खा
और वहा घूमाते हुए मैंने दीदी के ब्लाउज के क्लीवेज में अपनी ऊँगली डाली
और जैसे ही मैंने अपनी ऊँगली दीदी के ब्लाउज में डाली की
दीदी ने मेरी ऊँगली को अपने हाथ से थाम लिया और में रूक गया,
दीदी पूरी तरह सिड्यूस हो चुको थी पर वो अभी शायद सेक्स करना नहीं चाहती थी,
इसीलिए वो न तो ऊँगली बाहर निकल रही थी की न ही मुझे अंदर हाथ डालने दे रही थी.
फिर इससे पहले की में कुछ करू, डरवाजे की घण्टी बजने लगी.
और हम दोनों होश में आए,
दीदी ने मेरी ऊँगली छोड़ि और अपनी साड़ी ठीक की,
और छूटने लगी पर मैंने छोड़ा नही,
तो उन्होंने मेरी और देखा और मैंने फट से दीदी के लिप्स पर अपने लिप्स रख के उन्हें चूम लिया और लिप्स मस्त चूसने लगा,
उधर घण्टी बज रही थी,
दीदी ने उन्हें छोड़ने के लिए मुझे धक्का दिया और मैंने भी उन्हें छोड़ दिया और डरवाजा खोलने के लिए भागा.
मैने जा कर देखा तो चाचा के नाम का कोई कूरियर था और मैंने उसे ५ मिनट में चलता कर दिया और फिर से किचन में गया
तो दीदी को फिर से पता चल गया की में आया हूँ तो
उन्होंने सामने से कहा की “अभी डिस्टर्ब मत करो,
बाद में बता देना क्या तुम्हे अच्छा लगा”.
मैं भी मन में खुश होते हुए,
बाहर आ गया. और उनके इंटेंशन से साफ़ पता चल रहा था की वो अब पूरी तरह से मेरी थी.
फिर मैंने लंच के बाद दीदी को उठा के बैडरूम में ले गया
हम बेडरूम जाते ही मैंने दीदी को अपनी बाहों में लिया और उसे चूमना चाटना शुरु किया दीदी भी अब पूरा मजा ले रही थी कुछ देर किस करने के बाद हम रुक गये मैने दीदी को कहा “दीदी मैं आपको ऐसे सेक्स करना चाहता हु, कि जैसे हमारे बीच पहली बार सेक्स हो रहा हो, जैसे रात को कुछ हुआ ही नही, मैं आपको नये तरीके से मजा देना चाहता हु, क्या आप इसके लिये तैयार है, बहुत मजा आयेगा थोड़ा अलग सेक्स करेंगें, बिल्कुल पहली बार जैसे करते है वैसे ही” दीदी बोली “वॉव मुझे क्या करना है,यह बता” मैंने कहा “हम सेक्स के साथ साथ गंदी गंदी बाते करेंगे एक दूसरे को गलियां देंगे” दीदी बोली “नही गालिया नही” मैंने कहा “कुछ नही होता मैंने सेक्सी मूवीज में देखा है बहुत मजा आता है” इससे सेक्स मे नयापन आता है और मैं आपको बहोत मजा देना चाहता हु, आई लव यू दीदी”
“मेरा भाई मुझे इतना पसंद करता है ये तो मुझे पता ही नहीं था…” कहते हुए आगे बढ़ कर मेरे होंठो पर एक जोरदार चुम्मा लिया और फिर दुबारा अपने होंठो को मेरे होंठो से सटा कर मेरे होंठो को अपने होंठो से दबोच कर अपनी जीभ मेरे मुंह में ठेलते हुए चूसने लगी.
उसके होंठ चूसने के अंदाज से लगा जैसे मेरे होंठो का पूरा रस दीदी चूस लेना चाहती हो.
होंठ चूसते चूसते वो मेरे लण्ड को अपनी हथेली के बीच दबोच कर मसल रही थी.
कुछ देर तक ऐसा करने के बाद जब दीदी ने अपने होंठ अलग किये तो हम दोनों की सांसे फुल गई थी.
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02-27-2021, 12:45 PM,
#28
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 31

मैं अपनी तेज बहकी हुई सांसो को काबू करता हुआ बोला “हाय दीदी आप बहुत अच्छी हो….”
अच्छा…बेटा मख्खन लगा रहा है….”
“नहीं दीदी…आप सच में बहुत अच्छी हो….और बहुत सुन्दर हो….” इस पर दीदी हंसते हुए बोली “मैं सब मख्खन बाजी समझती हूँ बड़ी बहन को पटाकर निचे लिटाने के चक्कर में…..है तू….”
मैं इस पर थोड़ा शर्माता हुआ बोला “हाय…नहीं दीदी….आप….” दीदी ने गाल पर एक प्यार भरा चपत लगाते हुए कहा
“हाँ…हाँ…बोल…..” मैं इस पर झिझकते हुए बोला” वो दीदी दीदी…आप बोल रही थी की मैं….दि…दि…दिखा दूंगी….”.
दीदी मुस्कुराते हुए बोली “दिखा दूंगी…क्या मतलब हुआ…क्या दिखा दूंगी….”
मैं हकलाता हुआ बोला ” वो….वो…दीदी आपने खुद बोला था”.
“खुलके बता ना रेशु….मैं तुझे कोई डांट रही हूँ जो ऐसे घबरा रहा है…. क्या देखना है”

“दीदी…वो…वो मुझे…चु….चु…”

“अच्छा तुझे चूची देखनी है….वो तो मैं तुझे दिखा दिया ना…यही तो है…ले देख…”
कहते हुए अपनी ब्रा में कसी दोनों चुचियों के निचे हाथ लगा उनको उठा कर उभारते हुए दिखाया.
छोटी सी नीले रंग की ब्रा में कसी दोनों गोरी गदराई बूब्स और ज्यादा उभर कर नजरो के सामने आई तो लण्ड ने एक उछाल मारी,
मगर दिल में करार नहीं आया.
एक तो बूब्स ब्रा में कसी थी, नंगी नहीं थी दूसरा मैं चुत दिखाने की बात कर रहा था और दीदी यहाँ चूची उभार कर दिखा रही थी.
होंठो पर जीभ फेरते हुए बोला “हाय…नहीं…दीदी आप समझ नहीं रही….वो वो दू…सरी वाली चीज़ चु…चु…चुत दिखाने….केलिए…”

“ओहहो…तो ये चक्कर है…
अपनी बड़ी बहन को बुर दिखाने को बोल रहा है….हाय कैसा बहन चोद भाई है मेरा….
मेरी चुत देखने के चक्कर में है…उफ्फ्फ….

ठीक है मतलब तुझे चुत देखनी है….अभी बाथरूम से आती हूँ तो तुझे अपनी बुर दिखाती हूँ”
कहती हुई बेड से निचे उतर ब्लाउज के बटन बंद करने लगी.
मेरी कुछ समझ में नहीं आया की दीदी अपना ब्लाउज क्यों बंद कर रही है मैं दीदी के चेहरे की तरफ देखने लगा तो दीदी आँख नचाते हुए बोली
“चुत ही तो देखनी है…वो तो मैं पेटिकोट उठाकर दिखा दूंगी…”
फिर तेजी से बाहर निकल बाथरूम चली गई.
मैं सोच में पड़ गया दीदी यह क्या कर रही है फिर सोचा देखते है दीदी करना क्या चाहति है
मैं दीदी को पूरा नंगा देखना चाहता था.
मैं उनकी चूची और चुत दोनों देखना चाहता था और साथ में उनको चोदना भी चाहता था,
दीदी जब वापस रूम में आकर अपने पेटिकोट को घुटनों के ऊपर तक चढा कर बिस्तर पर बैठने लगी तो मैं बोला ” दीदी….दीदी…मैं….चू…चू…चूची भी देखना…चाहता हूँ”.
दीदी इस पर चौंकने का नाटक करती बोली “क्या मतलब…चूची भी देखनी है….चुत भी देखनी है….मतलब तू तो मुझे पूरा नंगा देखना चाहता है….हाय….बड़ा बेशर्म है….अपनी बड़ी बहन को नंगा देखना चाहता है….क्यों मैं ठीक समझी ना…तू अपनी दीदी को नंगा देखना चाहता है…बोल,
…ठीक है ना….” मैं भी शरमाते हुए दिखाते बोला “हां दीदी….मुझे आप बहुत अच्छी लगती हो….मैं….मैं आपको पूरा…नंगा देखना….चाहता…हु”

“बड़ा अच्छा हिसाब है तेरा….अच्छी लगती हो…..अच्छी लगने का मतलब तुझे नंगी होकर दिखाऊ…कपड़ो में अच्छी नहीं लगती हूँ क्या….”

“हाय दीदी मेरा वो मतलब नहीं था ….वो तो आपने कहा था….फिर मैंने सोचा….सोचा….”

“हाय भाई…तुने जो भी सोचा सही सोचा….मैं अपने भाई को दुखी नहीं देख सकती….मुझे ख़ुशी है की मेरा भाई अपनी बड़ी बहन को इतना पसंद करता है की वो नंगा देखना चाहता है….हाय….रेशु मैं तुझे पूरा नंगा होकर दिखाउंगी…..फिर तुम मुझे बताना की तुम अपनी दीदी के साथ क्या-क्या करना चाहते हो….”.

मेरे चेहरे पर मुस्कान और आँखों में चमक वापस आ गई.
दीदी बिस्तर से उतर कर नीचे खड़ी हो गई और हंसते हुए बोली
“पहले पेटिको़ट ऊपर उठाऊ या ब्लाउज खोलू…” मैंने मुस्कुराते हुए कहा “हाय दीदी दोनों….खोलो….पेटिको़ट भी और ब्लाउज भी….”

“इश…स……स…बेशर्म पूरा नंगा करेगा….चल तेरे लिए मैं कुछ भी कर दूंगी….अपने भाई के लिए कुछ भी…पहले ब्लाउज खोल लेती हूँ
फिर पेटिको़ट खोलूंगी….चलेगा ना…” गर्दन हिला कर दीदी ने पूछा तो मैंने भी सहमती में गर्दन हिलाते हुए अपने गालो को शर्म से लाल कर दीदी को देखा.
दीदी ने चटाक-चटाक ब्लाउज के बटन खोले और फिर अपने ब्लाउज को खोल कर पीछे की तरफ घूम गई और मुझे अपनी ब्रा का हूक खोलने के लिए बोला
मैंने अपने हाथो से उनके ब्रा का हूक खोल दिया.
दीदी फिर सामने की तरफ घूम गई.
दीदी के घूमते ही मेरी आँखों के सामने दीदी की मदमस्त,
गदराई हुई मस्तानी कठोर चूचियां आ गई.
मैं दूसरी बार अपनी दीदी के इन गोरे गुब्बारों को पूरा नंगा देख रहा था.
इतने पास से देखने पर गोरी चूचियां और उनकी ऊपर की नीली नसे,
भूरापन लिए हुए गाढे गुलाबी रंग की उसकी निप्पले और उनके चारो तरफ का गुलाबी घेरा जिन पर छोटे-छोटे दाने जैसा उगा हुआ था सब नज़र आ रहा था.
मैं एक दम कूद कर हाय करते हुए उछला तो दीदी मुस्कुराती हुई बोली
“अरे, रे इतना उतावला मत बन अब तो नंगा कर दिया है आराम से देखना….ले…देख…”
कहती हुई मेरे पास आई.
मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और वो निचे खड़ी थी इसलिए मेरा चेहरा उनके चुचियों के पास आराम से पहुँच रहा था.

मैं चुचियों को ध्यान से से देखते हुए बोला “हाय…दीदी पकडु…”

“हाँ…हाँ….पकड़ले जकड़…ले अब जब नंगा करके दिखा रही हूँ तो…छूने क्यों नहीं दूंगी….ले आराम से पकड़कर मजा कर……अपनी बड़ी बहन की नंगी चुचियों से खेल….” दोस्तो दीदी के साथ आज बहुत मजा आरहा था दीदी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
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02-27-2021, 12:45 PM,
#29
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 32

”मैंने अपने दोनों हाथ बढा कर दोनों बॉब्स को आराम से दोनों हाथो में थाम लिया.
नंगी बॉब्स के स्पर्श ने ही मेरे होश उड़ाये.
उफ्फ्फ दीदी की बूब्स कितनी गठीली और गुदाज थी,
इसका अंदाजा मुझे इन मस्तानी बॉब्स को हाथ में पकड़ कर ही हुआ.
मेरा लण्ड फडफडाने लगा.
दोनों बॉब्स को दोनों हथेलीयो में कसकर हलके दबाब के साथ मसलते हुए चुटकी में निप्पल को पकड़के हलके से दबाया जैसे किशमिश के दाने को दबाते है.
दीदी के मुंह से एक हलकी सी आह निकल गई.
मैंने घबरा कर बॉब्स छोड़ी तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ फिर से अपनी बॉब्स पर रखते हुए दबाया
तो मैं समझ गया की दीदी को मेरा दबाना अच्छा लग रहा है और मैं जैसे चाहू इनकी बॉब्स के साथ खेल सकता हूँ.
गर्दन उचका कर बॉब्स के पास मुंह लगा कर एक हाथ से बॉब्स को पकड़ दबाते हुए दूसरी बॉब्स को जैसे ही अपने होंठो से छुआ मुझे लगा जैसे दीदी गनगना गई उनका बदन सिहर गया.
मेरे सर के पीछे हाथ लगा बालों में हाथ फेरते हुए मेरे सर को अपनी बॉब्स पर जोर से दबाया.
मैंने भी अपने होंठो को खोलते हुए उसकी बॉब्स के निप्पल सहित जितना हो सकता था उतना उसकी बॉब्स को अपने मुंह में भर लिया और चूसते हुए अपनी जीभ को निप्पल के चारो तरफ घुमाते हुए चुम लीया तो दीदी सिसयाते हुए बोली
“आह….आ…हा….सी…सी….ये क्या कर रहा है…उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़…..मार डाला….”
अब तो मैं जैसे भूखा शेर बन गया और दीदी की बॉब्स को मुंह में भर ऐसे चूसने लगा जैसे सही में उसमे से रस निकल कर खा जाऊंगा.
कभी बाई बॉब्स को कभी दाहिनी बॉब्स को मुंह में भर भर कर लेते हुए निप्पलों को अपने होंठो के बीच दबा दबा कर चूसते हुए रबर की तरह खींच रहा था.
बॉब्स के निप्पल के चारो तरफ के घेरे में जीभ चलाते हुए जब दुसरे हाथ से दीदी के बॉब्स को पकड़ कर
दबाते हुए निप्पल को चुटकी में पकड़ कर खींचा तो मस्ती में लहराते हुए दीदी लड़खड़ाती आवाज़ में बोली
“हाय रेशु….सीईई…ई…उफ्फ्फ्फ्फ्फ….चूसले…..पूरा रस चूस…..मजा आरहा है….तेरी दीदी को बहुत मजा आरहा है रेशु…..हाय तू तो बॉब्स को क्रिकेट की गेंद समझकर दबा रहा है….मेरे निप्पल क्या मुंह में ले चूस….तू बहुत अच्छा चूसता है….
हाय मजा आ गया रेशु….पर क्या तू बॉब्स ही चूसता रहेगा…..चुत नहीं देखेगा अपनी दीदी की चुत नही देखनी है तुझे…..हाय उस समय से मरा जा रहा था और अभी….जब बॉब्स मिल गई तो उसी में खो गया है….हाय चल बहुत दूध पीलिया…..अब बाद में पीना”
मेरा मन अभी भरा नहीं था इसलिए मैं अभी भी बॉब्स पर मुंह मारे जा रहा था.
दीदी पूरी तरह डुब गई थी और कुछ भी बोल रही थी जो अमूमन नॉर्मली नही बोलती पर कहते है ना सेक्स में हम अपना कैरेक्टर पूरी तरह भूल जाते है
कुछ याद नही रहता सिर्फ अपनी संतुष्टि किस तरह हो यही याद रहता है
मेरी दीदी जो वैसे तो पूरी शालीन है पर इस वक्त कोई उसे देखे जो अपने स्वभाव के एकदम विपरीत हरकते कर रही है
पूरी तरह सेक्स में डूबी हुई लग रही है मैंने सारी सोच को दिमाग से हटा कर दीदी के बूब्स पर ध्यान दिया
इस पर दीदी ने मेरे सर के बालों को पकड़ कर पीछे की तरफ खींचते हुए अपनी बॉब्स से मेरा मुंह अलग किया और बोली
“हाई रेशु….बॉब्स…छोड़….कितना दूध पिएगा….हाय.
दीदी लगता था अब गरम हो चूँकि थी और चुदवाना चाहती थी.
मैं पीछे हट गया और दीदी के पेट पर किस ले कर बोला
दीदी अब बचे हुए कपड़े तो निकालो दीदी बोली तू खुद ही निकाल ले तब मैंने पेटीकोट का नाडा खींच दिया
पेटिको़ट सरसराते हुए निचे गिरता चला गया
पैंटी तो पहनी नहीं थी इसलिए पेटिको़ट के निचे गिरते ही दीदी पूरी नंगी हो गई.
मेरी नजर उनके दोनों जन्घो के बीच चुत पर गई.
दोनों चिकनी एकदम सफेद गुलाबी टांगो के बीच में दीदी की चुत नज़र आ रहा थी.
दीदी की गोरी गुलाबी चुत बहुत प्यारी लग रही थी. दोनों जांघ थोडी अलग थी चुत के लिप्स अंदर की और थे दीदी की कमर को पकड़कर सर को झुकाते हुए चुत के पास ले जाकर देखने की कोशिश की
तो दीदी अपने आप को छुड़ाते हुए बोली
“हाय…रेशु ऐसे नहीं….ऐसे ठीक से नहीं देख पाओगे….दोनों पैर फैला कर अभी दिखाती हूँ…फिर आराम से बैठकर मेरी चुत को देखना …घबरा मत रेशु…मैं तुझे अपनी चुत पूरी खोल कर दिखाउंगी
…चल छोड़ कहते हुए पीछे मुड़ी.
पीछे मुड़ते ही दीदी की एप्पल शेप गांड मेरी आँखों के सामने नज़र आ गई.
दीदी चल रही थी और उसकी गांड थिरकते हुए हिल रही थी
और आपस में चिपके हुये दोनों पार्ट हिलते हुए ऐसे लग रहे थे जैसे आपस मे बात कर रहे हो
और मेरे लंड को पुकार रहे हो.
लंड दुबारा अपनी पूरी औकात पर आ चूका था और फनफना रहा था.
दीदी ड्रेसिंग टेबल के पास रखि गद्देदार सोफे वाली कुर्सी पर बैठ गई और हाथो के इशारे से मुझे अपने पास बुलाया और बोली
“हाय…रेशु…आजा तुझे मजे करवाती हूँ….देख रेशु मैं इस कुर्सी के दोनों हत्थों पर अपनी दोनों टांगो को रखकर जांघ टिकाकर फैलाऊंगी
ना तो मेरी चुत पूरी उभरकर सामने आ जायेगी
और फिर तुम उसके दोनों लिप्स को अपने हाथ से फैलाकर अन्दर चाटना….इस तरह से तुम्हारी जीभ पूरी चुतके अन्दर घुस जायेगी….
ठीक है रेशु…आजा….जल्दीकर…..” “यह मेरी फैंटसी थी पर तुम्हारे जीजाजी को चुत चाटना पसंद नही
” मैं जल्दी से बिस्तर छोर दीदी की कुर्सी के पास गया और जमींन पर बैठ गया.
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02-27-2021, 12:46 PM,
#30
RE: XXX Sex Stories डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका
अपडेट 33

दीदी ने अपने दोनों पैरो को कुर्सी के हत्थों के ऊपर चढा कर अपनी दोनों जांघो को फैला दिया.
टांगो के फैलाते ही दीदी की चुत उभर कर मेरी आँखों के सामने आ गई.
उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़….क्या खूबसूरत चुत थी.
गोरी गुलाबी….बिना बालो वाली एकदम सफाचट.
एक दम पावरोटी के जैसी फूली हुई चुत थी.
दोनों पैर कुर्सी के हत्थों के ऊपर चढा कर फैला देने के बाद भी चुत के दोनों होंठ अलग नहीं हुए थे. .
मैं जमीन पर बैठ कर दीदी के दोनों टांगो पर दोनों हाथ रख कर गर्दन झुका कर एक दम ध्यान से दीदी की चुत को देखने लगा.
चुत के दोनों फांको पर अपना हाथ लगा कर दोनों फांको को हल्का सा फैलाती हुई दीदी बोली “रेशु….ध्यान से देखले….अच्छी तरह से अपनी दीदी की चुत को देख …. ….….” दीदी के चुत के दोनों होंठ फ़ैल और सिकुड रहे थे.
मैंने अपनी गर्दन को झुका दिया और जीभ निकल कर सबसे पहले चुत के आस पास वाले भागो को चाटने लगा.
टांगों के जोड और जांघो को भी चाटा.
जांघो को हल्का हल्का काटा भी फिर जल्दी से दीदी की चुत पर अपने होंठो को रख कर एक किस लिया और जीभ निकाल कर पूरी दरार पर एक बार चलाया.
जीभ चलाते ही दीदी सिसया उठी और बोली
“सीईई….बहुत अच्छा रेशु…. ऐसेही….रेशु तुने शुरुआत बहुत अच्छी कीहै….अब पूरी चुत पर अपनी जीभ फिराते हुए…चाट मुझे बताने की जरुरत तो नहीं थी पर दीदी ने ये अच्छा किया था की मुझे बता दिया था की कहाँ से शुरुआत करनी है.
मैंने अपने होंठो को खोलते हुए टीट को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया.
टीट को होंठो के बीच दबा कर अपनी दांतों से हलके हलके काटते हुए मैं उस पर अपने होंठ रगड रहा था.
टीट और उसके आस पास ढेर सारा थूक लग गया था और एक पल के लिए जब मैंने वहा से अपना मुंह हटाया तो देखा की मेरी चुसाई के कारण टीट चमकने लगी है.
एक बार और जोर से टीट को पूरा मुंह में भर कर किस लेने के बाद मैंने अपनी जीभ को कडा करके पूरी चुत की दरार में ऊपर से निचे तक चलाई और फिर चुत के एक फांक को अपने दाहिने हाथ की उँगलियों से पकड कर हल्का सा फैलाया.
चुत की गुलाबी छेद मेरी आँखों के सामने थी.
जीभ को टेढा कर चुत के स्माल लिप्स को अपने होंठो के बीच दबा कर चूसने लगा.
फिर दूसरी लिप्स को अपने मुंह में भर कर चूसा उसके बाद दोनों लिप्स को आपस में सटा कर पूरी चुत को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा.
चुत से रिस रिस कर पानी निकल रहा था और मेरे मुंह में आ रहा था.
चुत का नमकीन पानी शुरू में तो उतना अच्छा नहीं लगा पर कुछ देर के बाद मुझे कोई फर्क नहीं पड रहा था और मैं दुगुने जोश के साथ पूरी चुत को मुंह में भर कर चाट रहा था.
दीदी को भी मजा आ रहा था और वही कुर्सी पर बैठे-बैठे अपने गांड को ऊपर
उछालते हुए वो जोश में आ कर मेरे सर को अपने दोनों हाथो से अपनी चुत पर दबाते हुए बोली
“हाय रेशु….बहुत अच्छा कर रहा है उछालते हुए वो जोश में आ कर मेरे सर को अपने दोनों हाथो से अपनी चुत पर दबाते हुए बोली
“हायरेशु….बहुत अच्छा कर रहा है….राजा…..हाय……सीईई….बड़ा मजा आर हा है….हाय मेरी चुत ….मेरे भैयां…..ऊऊऊउ…सीईईइ…..खाली ऊपर-ऊपर से चूस रहा है….….जीभ अन्दर घुसाकर चाटना…..चुत में जीभ पेल दे और अन्दर बाहर कर के जीभ से मेरी चुत चोदते हुए अच्छी तरह से चाट….अपनी बहन की चुत अच्छी तरह से चाट मेरे राजा…. ….लेले…..ऊऊऊऊ……इस्स्स्स्स्स…घुसा चुत में जीभ….चाट….दे…….” कोमल दीदी बहुत जोश में आ चुकी थी और लग रहा था की उनको काफी मजा आ रहा है.
उनके इतना बोलने पर मैंने दोनों हाथो की उँगलियों से दोनों लिप्स को अलग कर के अपनी जीभ को कड़ा करके चुत में पेल दिया.
जीभ को चुत के अन्दर बाहर करते हुए लिबलिबाने लगा और बीच बीच में चुत से चूत के रस को जीभ टेढा करके चूसने लगा.
दीदी की दोनों जांघे हिल रही थी और मैं दोनों जांघो को कस कर हाथ से पकड कर चुत में जीभ डाल रहा था.
जांघो को मसलते हुए बीच बीच में जीभ को आराम देने के लिए मैं जीभ निकाल कर जांघो और उसके आस-पास किस लेने लगता था.
मेरे ऐसा करने पर दीदी जोर से गुर्राती और फिर से मेरे बालों को पकर कर अपनी चुत के ऊपर मेरा मुंह लगा देती थी.
दीदी मेरी चुसने से बहुत खुश थी और चिल्लाती हुई बोल रही थी “हाय….रेशु…जीभ बाहर मत निकालो….हाय बहुत मजा आ रहा है…ऐसेही…..अपनी जीभ से अपनी दीदी की चुत चोद दे….हाय भैयां….बहुत मजा आया है…...तेरा लंड अपनी चुत में लुंगी….….अपनी चुत तेरे से मरवाऊगीं….मेरे रेशु…..मेरे सोनामोना….मन लगा कर दीदी की चुत चाट….मेरा पानी निकलेगा….तेरेमुंहमें….हाय जल्दी जल्दी चाट पुरी जीभ अन्दर डाल कर सीईई…..”.
दीदी को क्या पता मैं उसको ही नही उसकी माँ को भी चोद चूका हूँ पर जो मजा नादान बनने में है वह समझदार बनने में कहा
दीदी पानी छोडने वाली है ये जान कर मैंने अपनी पूरी जीभ चुत के अन्दर पेल दी
और अंगूठे को टीट के उ़पर रख कर रगडते हुए जोर जोर से जीभ अन्दर बाहर करने लगा.
दीदी अब और तेजी के साथ गांड उछल रही थी और मैं लप लप करते हुए जीभ को अन्दर बाहर कर रहा था.
कुत्ते की तरह से दीदी की चुत चाटते हुए टीट को रगडते हुए कभी कभी दीदी की चुत पर दांत भी गडा देता था,
मगर इन सब चीजों का दीदी के ऊपर कोई असर नहीं पड रहा था और वो मस्ती में अब गांड को हवा में लहराते हुए सिसीया रही थी “
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