You are using an out of date browser. It may not display this or other websites correctly.
You should upgrade or use an
alternative browser.
-
अपडेट-138
पिछली रात भर मेघा दीदी जिस ानिब से दर्द से तदपि थी आज रवि ने दुबारा से अपना खड़ा लुंड उनकी गांड से चिपका कर उस दर्द का दुबारा...
-
अपडेट-137
मल्टी के अंदर शक की चिंगारी को भड़कता बुआ रवि घर के अंदर की और जाने लगता है
रवि के चेहरे पर एक मुस्कान थी मनो उसे पता था की...
-
अपडेट-136
रामलाल का लुंड अब तक जो का त्यों खड़ा था
उसने नीलम की गले की गर्मी अपने लुंड पर महसूस तो की पर अपने लुंड के पानी से उसका गाला...
-
अपडेट-135
एक साथ नीलम के तीनो छेड़ो में एक से बढ़ कर एक लुंड घुस रहे थे
अब रामलाल भी अपनी पूरी ताक़त के साथ नीलम को मल्टी समझते हुए...
-
अपडेट-134
दोस्तों देरी के लिए माफ़ी कहूंगा
उम्मीद है कहानी में आपलोगो को आगे भी उतना hi मजा ए जैसे पहले था
नीलम अपने दोनों हाथो से...
-
अपडेट-133
रामलाल के दिल की धड़कने लगातार बढ़ती hi जा रही थी
उसकी आँखों के सामने hi एक बाप अपनी hi बेटी के कपड़ो को एक एक करके उसके...
-
अपडेट-132
कम्मो को आज आखिर वो मिल hi गया था जिसके लिए वो न जाने कबसे तड़प रही थी
आज पहली बार उसने अपने छोटे भाई के लुंड को अपने हाथो...
-
अपडेट-131
करीब आधी रत हो चुकी थी घर का लगभग हर्र सदस्य सो चूका था
सिवाय रवि के
रवि की आँखों से नींद कोशो दूर थी
अच्चानक से रवि उठ...
-
अपडेट-130
नीलम आज रवि से छुड़वा कर धन्या हो चुकी थी
वो अपने बाप के साथ घर की और निकल चुकी थी
हां नीलम की चल जरूर बदल गयी थी पर अपनी...
-
अपडेट-129
रवि अपने विशाल लुंड को नीलम के गुलाबी होठो पर रख चुका था
इधर हरिया को अपनी बेटी पारर दया भी आ रही थी और उसके साथ जो हो रहा...
-
अपडेट-128
झोपडी के अंदर का नजारा देख कर मल्टी की सांसे ऊपर निचे होने लगी थी क्योंकि न तो वो नीलम को जानती थी और न hi हरिया को और जिस...
-
दोस्तों एक बार फिरर से माफ़ी मांगता हु आधे अधूरे अपडेट के लिए
टाइम hi नहीं मिल पा रहा है
पर वडा है जितना जल्दी हो सखे उतना जल्दी...
-
अपडेट-127
आज सुबह से hi मल्टी रवि की रात वाली हरकत के बारे में सोच रही थी
पता नहीं क्यों रह रह कर उसका मैं रवि के पास जाने का कर रहा...
-
भाई तू मेरे ऊपर एक अहसान कर और ये कहानी पढ़ना छोड़ दे
क्यों की अपडेट तो तभी आएगा जब मेरे पास टाइम होगा
किसी. Hi समय अपडेट लिखना मुमकिन...
-
अपडेट-126
रेखा अपनी झोपडी के अंदर जाकर आराम से अपनी टंगे फैलाये अपना पसीना सूखा रही थी
इधर हरिया नीलम को लिए उसी झोपडी की और बढ़ा चला...