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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
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साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या जानेकी तैयारीया कर रही हो..?
सबाना : (सरमाते मुस्कुराते) हां भाइ.. मे थोडा थोडा सामान पेक करलु.. ताकी...
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साहील : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. तुम लखन ओर सृती भाभीकी बातका बुरा मत मानना.. वो हमारी मस्ती कर रहे थे..
सबाना : (साथ चलते...
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सबाना : (कुछ सोचते धीरेसे) दीदी.. सायद आप सही केह रही हे.. आइ होप ये बात मेरे पापा जानते.. तो आज कादीरभाइ ओर सायरादीदी हमारे साथ होते...
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लखन : (जटसे अलग होते) बस दीदी.. वरना मे बहेक जाउगा.. तो फीरसे गलत होजायेगा..
सृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. होजानेदो.. अब मुजे कीसीकी...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४३
फीर साहील सबानाको लेकर वहासे नीकल जाता हे.. तो जरीना दोनोको जाते हुअे देखती हे.. ओर मनमे खुस...
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
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साहील : (मुस्कुराते) हां.. अब सब ठीक हे.. दुसरे दिन बडेभैया उनको समजाने आयेथे.. तो मान गया.. भाइ.. अब वो भी उनकी बहेनसे सादी कर रहा हे...
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लखन : (मुस्कुराते) साहील.. बुरा मत मानना.. तु जीतना कादीर भाइको सीधा समज रहा हे.. वो उतना हे नही.. मुजे तो बात कुछ ओर ही लग रही हे...
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तो अेक दिन साहील अकेला ही सीधा लखनके पास आगया.. साहीलने लखनको उनके भाइ कादीर ओर सायराको ढुंढनेकी बातकी.. तो साहीलने फोनसे बात करते...
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फीर देवायत थोडी देर वहा बैठकर चाइ पीकर अपने खेतोकी ओर नीकल गया.. तो मंजुने चारुको सरंपच बननेकी बात कही.. जो चारुने बातको स्वीकार...
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तो गांवमे भी जबसे जीतुलाल ब्रीन्दाको डीवोर्स देकर चला गयाथा तबसे ब्रीन्दा जयश्री ओर श्रीधर भी बीन्दास्त हो चुके थे.. अब श्रीधर...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४२
कहेते लखन सृतीके होठोको चुमते वहासे नीकल गया तो सृती बहुत ही सरमाइ.. ओर मनमे बहुत खुस होते फोन...
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सृतीने अपनी दोनो आंखे बंध करली.. ओर लखनने सृतीके होठोपे अपना होंठ रखदीया.. तो सृती सरसे पांव तक हील गइ.. उनके तनमे अेक बीजलीसी लहेर...