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फीर लखन सबको बाय कहेके वहासे नीकल गया.. पुनम मनमे बहुत खुस हो रही थी.. क्युकी आखीर उनको लखन मील ही गया.. वो अपने आपको लखनको समपीर्त...
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मंजुला : (मुस्कुराते) देवु.. पुनो भावु ओर दया बहेन लखनके साथ सादीकी खरीदारी करने सहेर जा रही हे.. आपके कपडे भी लेले क्या..? लखनको आपके...
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मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. पुनो ओर भावु रेडी हे.. लता नही आ रही.. इसके बदले हमारी दया बहेन आ रही हे.. उसने तो सादीकी खरीदी भी नहीकी...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २५३
कहा तो नीर्मला भी खुस होगइ.. ओर आंख गीली करते वो भी आगइ.. क्युकी आज लखनने उसे नानीमां कहेकर...
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तो होर्नकी आवाज सुनतेही मंजु बहार देखने आइ तो पुनम लताने भी होर्न सुन लीया.. तो दोनो समज गइ की लखन आगया हे.. क्युकी आज पुनम सुबहसे ही...
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रमा : (जल्दीसे पास आते धीरेसे) लखनजी.. रुकीये जरा.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..
लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. क्या आप...
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लखन : (मुस्कुराते) काकी.. छोडो ये बात.. मुजे दुख नही हे.. क्युकी भाभीमांने भी कुछ फैसले लीये हे.. खैर.. ओर बताइअे.. यहा आपको कोइ तकलीफ...
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मुना : (हाथ मीलाते) हाइ लखन.. अच्छा हुआ इधर ही मील गया.. क्या गांव जा रहा हे..?
लखन : (हसते) हां मुना.. वो पुनो दीदीको लेने ओर इसे...
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नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हां जीजु.. कल पुनो दीदीसे फोनपे बात हुइ.. पुनो दीदीने मुजे कुछ नही कहा.. उल्टा वोतो मुजे बहेन मानके प्यार कर...
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रजीया : (थोडे जुठे गुस्सेसे) लखन.. दोनो ही सुबह सुबह सुरु होगये.. अरे बाबा कमसे कम दरवाजा तो बंध कर लेते.. लगता हे तुम दोनोको हमारी छोटी...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २५२
फीर चाइ नास्ता खतम हो गया तो भानु खेतोकी ओर चला गया ओर रमा घरका काम करने लगी.. ओर सरला खटीयापे...
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सरला : (धीरेसे हसते) रमा.. तुम अेक बार सहेर जाकर सृती बेटीको दीखादे.. मेरी तजुर्बेकार आंखे कभी धोखा नही खा सकती.. तुम पका प्रेगनेन्ट...
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सृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. जबतक मेरा पैर ठीक नही हो जाता मे अपने आप कुछ नही करपाउगी.. जो भी करना हो आपको ही करना पडेगा.. भाइ सोरी.. मे...
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रजीया : (मुस्कुराते) लखन.. आप दीदीको हमारे रुममे ही लेकर आइअे.. आजसे वो वही सोयेगी..
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) रजु दीदी.. रहेने...
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लखन : (होठोपे कीस करते) हाइ बेबी.. अब कैसी हे तबीयत..?
सृती : (सरमाते धीरेसे) बहुत मस्त.. सब नोर्मल.. भाइ.. आज मम्मीका फोन आया था...