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धृव : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) मोम.. ये आप क्या बोल रही हे..? मे कुछ समजा नही.. मतलब..?
धृवकी मम्मी (फीकी मुस्कानसे) बेटा.. तु इतना भी...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २५८
उसी देर रात धृवकी मम्मी हल्कासा शींगार करते अपना सेक्सी नाइट गाउन पहेनकर बीन्दास्त धृवके कमरेमे...
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
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पुजा : (खुस होते गले लगते) ओह मोम.. यु आर ग्रेट.. क्या रास्ता नीकाला हे आपने.. भाइ सुनेगातो खुस होजायेगे.. मोम.. प्ली..ज.. मे ये बच्चा...
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पुजा : फीर..?
पुजाकी मम्मी : (मुस्कुराते) फीर क्या..? समजोना वो तीन दिन ओर तीन राते हमारा छोटासा हनीमुन था.. फीर तो मेभी खुलकर मेरे...
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पुजाकी मम्मी : (सामने देखते) पुजा.. बेटी क्या हुआ..? तबीयत खराब नही हे क्या..? डोक्टरको बुलालु..?
पुजा : (जटसे थोडी गभराते) अरे नही...
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घरपे सीर्फ दो नोकरानी ओर उनकी मम्मी ही थी.. पुजा अपनी मम्मीको हाय हेलो बोलकर सीधे उपरकी मंजीलपे अपने रुमपे चली गइ.. उनको नही पताथा की...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २५७
फीर दोनो चेन्ज करके नीचे लंचके लीये चले गये.. धृवने पुजासे छुपकर होटेलके मेनेजरको बेड सजानेके...
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धृवने रुमके अंदर ही डीनरका ओर्डर दे दीया.. डीनर फीनीस कीया तब तक बहार भी अंधेरा छा चुका था.. तो दोनो डीनर करके पैदल घुमने चले गये.. ताकी...
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धृव : (भारी आवाजमे धीरेसे) भाइ.. सच कहा तुने.. लेकीन तुमसे अेक खबर देना चाहता हु.. उनका भी अपने पतीसे डीवोर्स हो गया हे.. तो मम्मी...
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सृती : (जोरोसे) भावु.. तुम..?
भावीका : (हसते गले लगते) अरे सृती.. तुम यहा..? ओर ये पैरमे क्या हुआ..?
सृती : (अपने पास बीठाते) यार कुछ...
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पुजा : (आस्चर्यसे सामने देखते) भाइ.. आर यु सीरीयस..? ये पोसीबल नही हे.. पापाकी रेप्युटेशनका तो खयाल करो.. उनकी समाजमे क्या इजत रेह...
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क्युकी पुजाने दोनोके प्यारकी नीशानीको मीटा दीया था.. धृव उनकी पीठ सहेलाते उनको हिंमत देता रहा.. ओर पुजा धृवकी माफी मांगती रही.. फीर तो...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २५६
पुजाको बहार बैठनेके लीये बोला गया.. आधे घंटे तक पुजा वही बैटी रही.. लेकीन जब उनका पती बहार नीकला...
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ओर धीरे धीरे करते घमासान चुदाइ होने लगी.. पुजाको अैसा लगाकी वो हवामे उड रही हे.. धृवने उसे दो बार जडा दीया.. ओर आखीर कुछ देरकी घमासान...