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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २७१
इसी बीच धिरेन ओर नीलमकी कोर्टकी तारीख नजदीक आगइ.. नीलमने लखनसे बात करली.. तो लखनने बहाना बनाकर...
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बसंती : (सरमाते हसते अेक मुका मारते) कमीनी तेरे चकरमे मेरी हालत खराब करदेते हे वो..?
बरखा : (हसते धीरेसे) मोम.. येतो प्रेगनेन्ट हु...
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फीर सबाना ट्रेनमे बैठ गइ ओर सबको बाय बोलके चली गइ.. सबलोग वापस घरपे आगये.. जरीना बार बार साहीलकी ओर देखकर सरमा जाती.. क्युकी वो अब...
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बाबा : पुनम बेटा.. अब सबकुछ तुजे ओर लखनको ही सब सम्हालना हे.. देवु ओर मंजुका कार्य यही खतम होगया.. अब कोइ दुनीयाको छोडके चले जाये सौक मत...
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घरपे सीर्फ चंपाकाकी ही रेह गइ.. दो बडी कारमे सबलोग अेडजेस्ट होकर बैठ गये.. पुनम आज बहुत सरमा रही थी.. आखीर वो अपने ससुराल जो जा रही...
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तो लखन हसते हुअे जटसे बाथरुममे घुस गया.. ओर सृती अपनी चुत साफ करते कामुक नजरोसे उनकी ओर देखते हसती रही.. फीर अपनी सारी सही करते पुनमके...
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पुनम समज गइ.. ओर उसने वही पडी रजाइको अपने मुहमे ठुस दीया.. ताकी उनकी चीख बहार ना नीकले.. लखनने धरेसे लंडको पुस कीया ओर पुनमकी गांडमे...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २७०
फीर सबलोग प्लानींग करते खडे होगये.. लता ओर पुनमको अपने अपने रुममे भेज दीया.. ओर भावना सृती नीलम...
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तो बाकीके लोग भी मंजुकी इजाजत लेकर जाने लगे.. घरपे सीर्फ घरके लोग ही रेह गये.. सब होलमे बैठे थे.. भावना रजीया दया ओर सृती सब मीलकर लता...
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मंजुला : (मुस्कुराते) यही सोच रही हेनां.. मुजे सब ग्यात हो जाता हे.. तो इस बारेमे कैसे पता नही चला..?
पुनम : (अवाचक होते धीरेसे) येस...
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दुसरे दीन सुबह साहील सबानाको लेकर अपने खेत दीखाने लेगया.. वहा मजदुर काम कर रहे थे.. साहीलने सबानाको खेतोमे घुमाया ओर वापस मीली जमीन भी...
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लेकीन दोनोको नही पता थाकी सलमा खीडकीसे दोनोकी चुदाइ देख रही थी.. ओर अपनी चुतको सहेला रही थी.. आज साहीलके बीस्तरपे उनकी जगह सबाना थी...
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सबानाके तनमे अेक आगसी लगी हुइ थी.. वो मदहोसीमे आंधी आंख चडाते साहीलका साथ देने लगी.. दोनो वासनामे इतने अंधे होगये की अेक अेक करते कब...
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सबाना बार बार साहीलको चोर नजरसे देखते मुस्कुरा रही थी.. तभी सलमाने सबानासे नजर बचाते साहीलको आंखोसे रुमकी ओर इसारा कीया.. ओर कातील...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २६९
तो साहील सबानाके होंठ चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. सबानाने साहीलका हाथ हटानेकी कोइ कोसीस नही...