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लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) कमीने.. तुजे तो घरमे ही दो दो चुत मील गइ.. ओर तेरे चाचासे सबानाकी सादीकी बात भी करली.. बहुत अच्छा हे.. आगे...
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चंदा : (सरमाते धीरेसे) लखन.. प्लीज.. मुजसे बात क्यु नही करते..? मुजसे नाराज हे क्या..?
लखन : (धीरेसे) नही भाभी.. मुजे लगा.. मेरा गीफ्ट...
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तो दुसरी ओर साहील सलमाको जोरोसे चोद रहा था.. ओर सलमा भी कामुक्तासे साहीलको दुसरी बार जेल रही थी.. फीर दोनो साथमे जडकर सांत होगये.. ओर...
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जरीना : (मुस्कुराते) पहेली बात.. अब ये हमारा साहील नही हे.. मतलब.. हमारा बेटा.. अब वो हमारा भतीजा हे.. बडे भाइसाहबने उसे बाकायदा गोद...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २७८
फीर कुछ देर बात करते श्रीधर चाइ नास्ता करके वापस गांव चला गया.. ओर जैसे ही घरमे आया.. दरवाजा लोक...
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श्रीधर : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) नही मौसी.. अभी नही.. अंदर जयश्री हे.. हमारा ये पहेली बार होगा तो आपको थोडी मुस्कील होगी.. हमे ये सबके...
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दुसरे दीन जयश्रीकी गोद भराइकी रशम हुइ.. वृन्दा ज्यादासे ज्यादा श्रीधरके पास ही रहेती.. जब भी उनको मौका मीलता श्रीधरका हाथ थाम लेती.. तो...
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चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे) लखन.. क्या आप अपनी भाभीके दोस्त बनोगे..?
लखन : (हीचकीचाते पीठपे हाथ रखते) भाभी.. कौन मुर्ख होगा जो आप जैसी...
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चंदा : (जोरोसे हसते हाथ थामते) क्या..? ओर आजतक बीसीको पता नही चला..?
लखन : (मुस्कुराते) नही.. फीर कोलेज खत्म होते ही दोनोने यहा कीसी...
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लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अब हम दोनो यहा आयेगे.. बार बार.. बस आप अपनी लाइफ खुलकर जीयो.. यहा कोइ पाबंधी नही कोइ देखने वाला नही.. कोइ...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २७७
वृन्दा बहुत ही कामुक ओरत थी.. उसे हर रात प्यार चाहीये था.. मानो उनको चुदाइकी आदत लग चुकी थी.. ओर...
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अेक हप्तेके बाद मुनाने अपने पीता वीभुका सभी कार्य समाप्त करलीया था.. उस दीन लखन रजीयाको लेकर गांव आया था.. क्युकी अब पुनमको...
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सलमा : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते धीरेसे) सुन.. दुसरी सर्त.. तेरे लीये.. अगर मे फीरोज भाइसे सादी करलु.. तो सीर्फ मे ही नही.. तुजे भी...
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जरीना : (जटसे) अरे नही नही.. (नजरे चुराते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो खुद आपसे सादी करना चाहते हे..
सलमा : (चोंकनेका नाटक करते) क्या..? नही...
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सलमा : (मुस्कुराते) जरीना.. तुम तो जानती हो.. साहील बहुत छोटा था ओर तेरे जेठजी थे तबसे ही साहील मेरे साथ सोता हे.. फीर तेरे जेठजी चल...