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इनके बाद लखन वहासे चला गया ओर सीधा हवेलीपे आ गया.. ओर चारु रश्मी कुछ देरके लीये आराम करने वापस बेडपे चली गइ.. क्युकी लखनने दोनोके अेक...
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अेक दिन गांवमे पंचायतकी ओफीसमे अेक लेटर आया.. गांवका स्कुलतो शीक्षण समीतीके अंडरमे था.. लेकीन होस्पीटलके लीये सीर्फ जमीन ओर कुछ पेसे...
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भावीका : (देवायतकी ओर देखते) भैया.. हमने मशीनरीका ओर्डर बहुत पहेले करदीया हे.. सायद अगले हप्ते सब मशीनरी आजायेगी.. तो आप ध्यानसे उतरवा...
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पुनम : (मुस्कुराते) अ..ले..ले.. मेला बे..बी.. भाइ.. बीलकुल मेरे छोटे बच्चे जैसे लग रहे हो.. अेकदम मासुम.. कास मेने पहेलेही आका चुनाव...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २९९
देर रात खाना खाकर लखन सृती भावीका राधीका नीलम ओर दयाको लेकर अपनी अपनी कार लेकर सहेरकी ओर चले...
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लखन : (सामने देखते) हां श्रीधर.. बोल.. नया क्या चल रहा हे..? तेरी सासको मीलने जाता हेकी नही..?
श्रीधर : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या भाइ...
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फीर दुसरे दिन सबलोग चाइ नास्ता कर रहे थे तब दो दो बच्चे सम्हालनेमे तकलीफ ना हो इसीलीये पुनमने चंदाको भी कुछ दिन गांव आनेके लीये कहा.. तो...
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इसी बीच लखन भी दो बार ओर टीनाको उनके घरपे मीलकर आगया.. जब तीसरी बार वो टीनाकी चुदाइ करने गया तब टीनाने उसे कहाकी वो प्रेगनेन्ट हो चुकी...
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वृन्दा : (आस्चर्यसे) जीतु.. क्या हे ये सब.. सेक्सोलोजीस्ट..? तु कब गया था इनसे मीलने..? क्या हुआ हे तुजे..?
जीतुलाल : (नजरे चुराते...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २९८
इसी बीच साहील कइ बार सहेरमे सायराको मीलने चला जाता.. तो कभी कादीर ही उसे टुरकी वजहसे दो तीन...
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सृती : (धीरेसे फुसफुसाते) भाइ.. मुजे आपसे अेक बात कहेनी हे..
लखन : (होठको चुमते धीरेसे) हां दीदी.. बोलो.. इतनी रात..? जरुरी बात हे...
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दयाका तन कीसी कांचकी पुतलीकी तराह चमक रहा था.. दोनो इतने अतंगर होगये की दया अांख बंध करते फोरप्लेयका आनंद ले रही थी.. वो तब उछली जब उसे...
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रवीवार साम सब लोग वापस सहेर चले गये.. रजीया दयाके पास ही रुक गइ.. अब स्कुल कोलेज फीरसे खुलने लगे.. नीलमका अेडमीशन वही कोलेजमे होगया...
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दुसरे दीन सुबह हवेलीपे सभी इकठा होकर चाइ नास्ता कर रहे थे.. आज भावीका नइ नवेली दुल्हनकी तराह अब भी सरमा रही थी.. उसे तो पता ही नही थाकी...
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सरला काकीने सलमा ओर साहील दोनो मांबेटेकी आंख मीचोली देखली.. तो उनको दालमे कुछ काला लगा.. उनकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. जबसे देवायतने उनको...