Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
07-18-2019, 12:53 PM,
#83
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
'बहुत आसानी से डॅड ने हुकुम दे दिया.... बहुत आसानी से समर ने माँ को मेरी तरफ ठेल दिया.... बहुत आसानी से ये भी आगे बढ़ गयी....... और मैं .... क्या हूँ मैं.... क्या समझती हो मुझे .... क्या ग़लत किया मैने'

सन्नाटा छा गया कमरे में बस तीन लोगो के साँस लेने की आवाज़ आ रही थी.

जाने कॉन सी ताक़त सविता को सुनील के करीब ले गयी. सविता ने उसके दोनो हाथ थाम लिए -- सुनील ने झटकने की कोशिश करी पर सविता ने मजबूती से थाम रखे थे '

'क्या है ... क्यूँ हाथ ... छुड़ा रहे हो... साली अपने जीजा का हाथ पकड़ सकती है'

सुनील भोचक्का सा उसे देखने लगा --- सविता के चेहरे पे आँसू थे जो शायद अब सूख रहे थे एक मनचली मुस्कान उसके चेहरे पे आने लगी थी.

सुमन के चेहरे पे मुस्कान आ गयी - एक बाधा को उसने पार कर लिया था.

सविता ने अपने दोनो कान पकड़ लिए ' सॉरी जीजू बहुत बड़ी ग़लती होई गयी - तुम्हें दुख नही देना चाहती थी - पर जो देखा उसे सहन नही कर पाई - जो मुँह में आया बोलती चली गयी'

'अच्छा जीजू 1+1 की स्कीम अच्छी लगेगी क्या - बीवी के साथ साली फ्री' सविता बड़े कातिलाना अंदाज में मुस्कुरा रही थी

सुनील को करेंट लग गया एक दम उठ खड़ा हुआ.

सुमन खिलखिला पड़ी --- सुनील की शकल ही ऐसी बन गयी थी.

'चुप कर शैतान की खाला -- फिर तंग करना शुरू कर दिया'

'ये तो मेरा जनम सिद्ध अधिकार है -- क्यूँ जीजा जी'

रिश्तों के बीच - होती चुहल बाजी आज सुनील के सामने आ रही थी - एक और रिश्ता खुद को बदलने को तयार हो गया था - मासी --साली का रूप ले चुकी थी.

सविता जितना महॉल को हल्का करने की कोशिश कर रही थी - सुनील उतना ही सीरीयस होता जा रहा था - क्या हो रहा है ये - क्या हर रिश्ते की मर्यादा को ताक पे रखना पड़ेगा----आँधिया चल रही थी उसके दिमाग़ में.


'क्यूँ री - कैसा जीजू ढूँढा तूने मेरे लिए - बड़ा शर्मिला है --- कोई और होता तो अब तक दो-तीन चूमियाँ तो ले ही चुका होता'

'चुप कर वो ऐसा नही है' सुमन अपनी मुस्कान दबाते हुए बोली.

'मैं ट्रेन कर दूँगी' सविता खिलखिला पड़ी पर जब सुनील के चेहरे को देखा तो चुप हो गयी.

'साली के साथ हसी मज़ाक चलता रहता है जीजू - क्यूँ इतना सीरीयस हो रहे हो - एंजाय दा लाइफ डियर'

'अरे इस तुफ्फान के चक्कर में कॉफी तो ठंडी हो गयी --- मैं और ले के आती हूँ'

'तू बैठ आज मैं पिलाउन्गि दूध वाली कॉफी अपने जीजा को' सविता जान भुज कर अपने खुल्हेी मटकाती हुई कमरे से बाहर चली गयी.

तब सुमन को ध्यान आया अभी तक बाथरोब में है ' उउउइइ माँ मैं कपड़े बदल के आई' भाग गयी वो बाथरूम में कुछ कपड़े वॉर्डरोब से निकाल कर.

जब तक सविता कॉफी ले के आई सुमन तयार हो चुकी थी - उसने एक डीप गले वाला कुर्ता और सलवार पहनी थी - घर में थी तो चुन्नी नही डाली थी. ये सूट बिल्कुल नया था - जो उसने बड़े चाव से सिलवाया था पर सागर का हादसा होने के बाद ऐसे का ऐसा पड़ा रह गया था. बहुत सुंदर लग रही थी वो इस सूट में.

तीनो कॉफी पीने लगे - सविता मस्त के मूड में थी पर सुमन ने इशारे से रोक लिया - अभी सुनील तयार नही था - नये रिश्तों को झेलने के लिए .

कॉफी के बाद - सविता ने सुमन को बिस्तर की हालत की तरफ इशारा किया.

'क्या करती सुबह साहब जी ने मूड ऑफ कर दिया फिर तेरा ड्रामा शुरू हो गया. बिस्तर कहाँ से ठीक करती. '

'चल तू बिस्तर वगेरह ठीक कर मैं जीजा जी को ले कर जा रही हूँ थोड़ी देर के लिए.'

'कहाँ? '

'तुझ से मतलब - मुझे कुछ काम है - प्राइवेट'

सुनील - मैं कहीं नही जा रहा.

सविता : आई हाई जोरू के गुलाम - देखती हूँ कैसे नही चलोगे --- तुम्हारा ही फ़ायदा होगा

सुमन : अच्छा चल ले जा अपने जीजा को पर कुछ शरारत मत करना.

सविता : काश मेरी इतनी अच्छी किस्मत होती.

सविता उठ खड़ी हुई मजबूरन सुनील भी खड़ा हो गया.

सुमन : दरवाजे को बाहर से लॉक कर देना.

दोनो बाहर से दरवाजा लॉक कर चले गये. सविता सुनील को शॉपिंग माल ले गयी - असल में वो चाहती थी कि सुनील कुछ अच्छी ड्रेसस सुमन को ले कर दे.

सुमन पीछे घर संभालने में लग गयी - मैड को तो उसने छुट्टी दे दी थी 10 दिनो के लिए.

सविता एक मॉडर्न लाइनाये की शॉप में घुस्स गयी - सुमन का साइज़ उसे पता था इसलिए ये प्राब्लम नही होनेवाली थी - पर सुनील को प्राब्लम हो रही थी - अपनी मासी कम साली के साथ ऐसी शॉप में जाते हुए उसका बुरा हाल हो रहा था - शर्म आ रही थी उसे - जिंदगी का ये एक्सपीरियेन्स वो भी मासी के साथ ----- बोखला रहा था - कुछ समझ नही आ रहा था - पहले तो वो रेडी ही नही था अंदर जाने को - पर सविता चाहती थी कि वो अपनी पसंद की ड्रेसस ले.

जब सविता ने देखा वो बहुत हिचकिचा रहा है - तो सविता उसके कान में बोली ' ये शरमाना छोड़ो और जल्दी से कुछ ड्रेसस पसंद करो - बीवी को कैसे खुश रखते हैं सीख लो'

मरता क्या ना करता सुनील ड्रेसस पसंद करने लग गया और अब सविता की हालत खराब होने लगी - सुनील की चाय्सस देख उसे अपनी किस्मत पे रंज आने लगा --- वक़्त ने सुमन की जिंदगी को किनारा दे दिया था और वो समर को छोड़ने के बाद किनारे की तलाश में थी.

सुनील ने कुछ ऐसी ड्रेसस पसंद करी थी जिन्हें देख और सुमन को वो ड्रेसस को पहने हुए की कल्पना करने मात्र से ही सविता के जिस्म में हलचल शुरू हो गयी थी.

सुनील ने ज़यादा वक़्त नही लगाया था --- काउंटर गर्ल तक हैरान थी कि क्या फटाफट ड्रेसस चूज़ करी वरना लोग तो चाय्स करने में आधा दिन लगा देते हैं और ड्रेसस भी क्या पसंद करी थी - एक से बढ़ कर एक.

इसके बाद दोनो घर आ गये और सविता लंच तयार करने लगी.
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RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - by sexstories - 07-18-2019, 12:53 PM

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