Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
08-18-2019, 01:18 PM,
#11
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
आज के दिन कॉलेज मे कोई ऐसी आने वाली थी, जिसे नही आना चाहिए था, उस दिन भी मैं और अरुण कॉलेज के पीछे वाले गेट से अंदर गये और सीधे अपनी क्लास के अंदर दस्तक दी....नवीन पहले से ही आ चुका था...
"चल बाहर से आते है..."मैं अपनी सीट पर बैठा ही था कि नवीन ने अपने बॅग मे कुछ टटोलते हुए मुझसे बोला....
"क्यूँ....क्या हुआ ? "
"लगता है, बाइक की चाबी बाइक मे ही लगी रह गयी..."उसने घबराहट मे जवाब दिया...
मैने सोचा,अरुण को इसके साथ भेज दूं, लेकिन अरुण तो पीछे किसी से जान पहचान बना रहा था इसलिए मुझे ही उसके साथ जाना पड़ा....
"बाइक मे लगी है चाबी..."बाइक मे चाबी लगी देखकर नवीन ने राहत की साँस ली...
हम दोनो अभी बाइक स्टॅंड पर ही खड़े थे कि एक तेज़ी से आती हुई एक कार ने वहाँ खड़े सभी लोगो का ध्यान खींचा....कार देखकर ही अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि अंदर बैठे हुए शक्स की हसियत कितनी ज़्यादा है....
"कोई रहीस बाप का लौंडा होगा..."मैने सोचा, लेकिन मेरी सोच मुझे तब धोका दे गयी, जब उस चमचमाती कार से लड़के की जगह एक लड़की बाहर आई,...लड़की क्या पूरी मॉडर्न अप्सरा थी वो, इयररिंग से लेकर उसके सॅंडल तक उसकी रहिसी और उसकी मॉडर्न जमाने के रंग मे रंगी उसकी शक्सियत की पहचान करा रही थी....पहले तो मैने उस लड़की को पूरा उपर से लेकर नीचे तक देखा और बाद मे मेरे नज़र अपने आप उस जगह पर अटक गयी, जो एक लड़की मे मुझे सबसे अधिक पसंद था,...और ऐसी हरकत करने वाला मैं वहाँ अकेला नही था, वहाँ खड़े लगभग सभी लड़कों का यही हाल था, सब अपनी पसंदीदा जगह देख कर ललचा रहे थे.....
"ये कौन है..."मैने नवीन से पुछा तो उसने जवाब मे कंधे उचका कर मना कर दिया....
वैसे तो उस कॉलेज मे बहुत सारी खूबसूरत लड़किया थी,लेकिन वो लड़की जो अभी-अभी कार से बाहर आई थी ,वो उनमे से सबसे अलग लगी मुझे...ऐसा मुझे क्यूँ लगा इसका रीज़न आज तक मैं नही जान पाया......उसे देखकर मैं और नवीन वही खड़े रह गये, हमारे कदम ज़मीन पर और आँखे उस लड़की पर ही जमी हुई थी....उसके साथ कार से एक और भी लड़की बाहर निकली, जो उसकी करीबी फ्रेंड होगी, ऐसा मैने मान लिया....
"एश...."उस लड़की की फ्रेंड ने पहली बार उस मॉडर्न अप्सरा का नाम पुकारा.....

"एश...."उस लड़की की फ्रेंड ने पहली बार उस मॉडर्न अप्सरा का नाम पुकारा.....
"एश...."मैने भी दिल ही दिल मे ये नाम लिया, और बहुत खुश भी हुआ और मेरे अरमान उसे देखकर बाहर आए
"इसको तो पटाना पड़ेगा..."
"क्या...?"नवीन बोला...
"कुछ नही, चल क्लास शुरू हो गयी होगी..."
बरसो से कुछ लफ्ज़ , कुछ अल्फ़ाज़ बड़ी मुश्किल और शिद्दत से लिख रखे थे मैने किसी के लिए, जो मेरे लिए खास हो और आज एसा को देखकर वो अल्फ़ाज़ मेरे दिल से बाहर आने के लिए मचल रहे थे......
"व्हेनएवेर आइ क्लोज़ माइ आइज़ , आइ सॉ मेनी फेसस इन माइ माइंड बट वन फेस ऑल्वेज़ रिमेन सेम इन माइ माइंड, इन माइ हार्ट......"


दट फेस ईज़ माइ लव........


"व्हेनएवेर आइ हियर एनी सॉंग , आइ फील हर इन एवेरी वर्ड ऑफ दट सॉंग, आइ हियर ,.हर वाय्स इन एवेरी बीट्स ऑफ दा सॉंग......"


दट वाय्स ईज़ माइ लव........


"व्हेनएवेर आइ फील एंपटिनेस इन माइ लाइफ, आइ सॉ आ ड्रीम वित माइ ओपन आइज़,

इन विच आन एंजल कम्ज़ इन माइ ड्रीम......"


दट एंजल ईज़ माइ लव........
.
"बाहर...बाहर, बिल्कुल बाहर..."दमयंती मॅम ने मुझसे कहा, जब मैने उनसे अंदर आने की पर्मिशन माँगी तो"ये क्या तुम्हारा घर है..."
"सॉरी मॅम..."नज़रें झुका कर मासूम बनने का नाटक करते हुए मैं बोला...
लेकिन मेरी उस मासूमियत का दम्मो रानी पर कोई असर नही हुआ, और उपर से उसने धमकी भी दे डाली कि यदि मैने उससे बहस की तो वो आने वाले 3 दिन तक अटेंडेन्स नही देगी
कल से ये सब कुछ मेरे साथ पहली बार हो रहा था, पहले कभी भी किसी ने क्लास से बाहर नही भगाया था, इसलिए मुझे मालूम तक नही था कि , टाइम पास कैसे करूँ ,उस समय कॉलेज मे घूम भी नही सकता था, क्या पता कोई सीनियर पकड़ कर रॅगिंग ले ले....दिल कर रहा था कि दमयंती के बाल पकडू और घसीट कर उसे क्लास से बाहर कर दूं....
"अंदर आ जाओ, और अगली बार से समय का ख़याल रखना..."दम्मो रानी ने मेरी तरफ देखा ,शायद मेरी झूठी मासूमियत और भोलेपन को उसने असली समझ लिया था....जब क्लास के अंदर आया तो एक बार फिर पूरी क्लास मुझे घूर रही थी, कुछ मुझपर हंस भी रहे थे और कलेजा तब जल गया तब देखा कि अरुण भी हंस रहा है....

"और बेटा, कहाँ घूम रहा थे तुम दोनो..."मैं अरुण के लेफ्ट साइड मे बैठा और नवीन राइट साइड मे बैठ गया...

"कहीं नही यार, बाइक स्टॅंड तक गये थे..."नवीन बोला"टाइम से वापस भी आ जाते यदि वो लड़की नही दिखी होती तो...."

"कौन लड़की बे, जल्दी बता..."

मॅम को शक़ ना हो इसलिए हम तीनो अपनी कॉपी मे सामने बोर्ड पर लिखा हुआ सब कुछ छाप रहे थे, और धीमी आवाज़ मे गप्पे भी लड़ा रहे थे.....

"मालूम नही कौन है, लेकिन है एकदम करारी आइटम....उसके सामने तो दीपिका भी कम है..."सामने बोर्ड की तरफ देखकर मैं बोला,...

एक दो बार दम्मो रानी से मेरी नज़र भी मिली, तब मैने अपना सर उपर नीचे करके उसे अहसास दिलाया कि मुझे सब कुछ समझ आ रहा है , जबकि ऐसा कुछ भी नही था, मैं तो उस वक़्त सिर्फ़ और सिर्फ़ एश के बारे मे सोच रहा था, उस वक़्त मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ एश के बारे मे बात करना चाहता था....

"कितना अच्छा हो , यदि इस दम्मो की जगह वो अप्सरा हमे मेद्स पढ़ाए...."दिल के अरमानो ने एक बार फिर घंटिया बजाई, और इन घंटियो को किसी ने बहुत ज़ोर से बजाया....

"मॅम..."क्लास के गेट की तरफ से किसी की आवाज़ आई....और जब नज़ारे उस तरफ मूडी तो बस वही जमकर रह गयी, गेट पर एसा खड़ी थी...

"यस..."मैथ वाली मॅम ने एश से कहा...

"ये भी इसी क्लास मे पढ़ेगी ,"खुश तो बहुत हुआ था , बेंच पर कूद कूद कर डॅन्स करना चाहता था, अरुण और नवीन से कहना चाहता था कि"तुम लोग यहाँ से उठ जाओ बे, वो यहाँ बैठेगी..."लेकिन अफ़सोस तब हुआ जब वो बोली कि....
"मॅम सीएस ब्रांच की क्लास कौन सी है..."
" "
कॉरिडर मे सबसे पहला क्लास हमारा ही था, इसलिए वो शायद हमारे क्लास मे अपनी क्लास पुछने आई थी, सोचा कि रो रो कर उसे इस बात का अहसास दिलाऊ कि मैं कितना दुखी हूँ, उसके यूँ जाने से , अरुण मेरे अंदर की बेचैनी को समझ गया और बोला...
"ओये, ये नाटक बंद कर, नाउ कॉन्सेंट्रेट ओन्ली ऑन दीपिका मॅम"

एश तो अपनी क्लास मे चली गयी, लेकिन उसकी छाप मेरे दिल पर वो छोड़ गयी थी, और एश की छाप केवल मुझपर ही नही पड़ी थी, और बहुत से लोग थे, जिनका दिल एश के इस तरह से जाने के कारण उदास था....अरुण और नवीन भी इसी लिस्ट मे थे.....

"वो मेरी माल है, उसको देखना भी मत..."एश के जाने के बाद मैने फिर से बोर्ड पर नज़र गढ़ाई और जो कुछ भी दम्मो रानी लिख रही थी, मैं उसे अपनी नोटबुक मे छापते हुए उन दोनो से बोला....

"सेट तो मुझसे ही होगी..."नवीन ने कहा...

"गान्ड मे भर लो सब लड़कियो को, दीपिका को देखोगे तब भी यही बोलॉगे कि ये मेरी माल है, एश को देखोगे तब भी यही बोलोगे कि ये मेरी माल है, किसी और लड़की को भी देखोगे तो वो भी तुम दोनो की ही आइटम है, मैं यहाँ हिलाने आया हूँ है ना "

मैं और नवीन हंस पड़े, और एक बार फिर दमयंती मॅम अपनी ज्वालामुखी नज़रों से हम दोनो को घूर्ने लगी, दमयंती के इस तरह से देखने के कारण मैं और नवीन चुप हो गये और एकदम सीरीयस स्टूडेंट बनकर सामने डेस्क पर रखी बुक्स के पन्ने उलटने लगे.....

"चल आजा कॅंटीन से आते है..."रिसेस मे अरुण ने मुझसे कॅंटीन चलने के लिए कहा, और मेरी आँखो के सामने वो नज़ारा छा गया जब वरुण की आइटम मेरे चेहरे से प्यार कर रही थी....मैने अरुण को सॉफ मना कर दिया कि मैं कॅंटीन की तरफ नही जाउन्गा,और फिर मैं अपने ही क्लास के सामने आकर खड़ा हो गया, जहाँ कुछ लड़के खड़े होकर बात कर रहे थे, मैं खड़ा तो अपने क्लास मे था लेकिन आँखे सीएस ब्रांच की क्लास की तरफ टिकी हुई थी,...मैं उस वक़्त वहाँ खड़ा उस वक़्त का इंतेजार कर रहा था कि कब वो मॉडर्न अप्सरा अपने क्लास से बाहर निकल कर आए और मेरी आँखो को सुकून मिले....उपरवाले ने जैसे मेरी मन की बात सुन ली हो, एश अपने उसी फ्रेंड के साथ क्लास से बाहर निकली और बाहर खड़े सभी लोग मचल उठे, सभी एश को देख रहे थे.....हमारी क्लासस फर्स्ट फ्लोर पे थी और कॉरिडर के दोनो तरफ से नीचे जाने के लिए सीढ़िया बनी हुई थी....एश अपने फ्रेंड के साथ हमारी तरफ आने लगी,...मैं ये जानता था कि वो मेरे लिए तो इस तरफ नही आ रही है, लेकिन फिर भी धड़कने तेज हो गयी, और वो जब मेरे सामने से गुज़री तो मेरी ज़ुबान लड़खड़ाई
"आइ....."बस इतना ही बोल पाया मैं एश को देखकर , और आवाज़ भी इतनी धीमी थी कि मेरे साथ खड़े मेरे क्लास वाले भी उस आवाज़ का ना सुन पाए....
.
मैं पहले भी हैरान हुआ करता था और अब भी हैरान हुआ करता हूँ, कि अरुण कैसे जान जाता है कि दूसरे क्या सोच रहे है....
"मतलब...."ज़मीन पर औधा लेटा वरुण सिगरेट के छल्ले उड़ाते हुए मुझसे पुछा...

"मतलब की.."मैने अरुण की तरफ देखा, साला दारू की बोतल लिए बाथरूम से बाहर आ रहा था"अरुण की एक ख़ासियत है, वो किसी का भी शकल देखकर ये बता देता है कि उसके अंदर क्या चल रहा है ,वो बंदा किस सोच मे डूबा हुआ है...."
"ऐश है क्या..."
"हाँ बे,.."
"फिर तो..."ये बोलते हुए वरुण ज़मीन पर बैठ गया और अरुण की तरफ देखा....

"ये साला बाथरूम मे बोतल लेकर क्यूँ गया था ?"

"अपनी आदत है..."मेरे पास बैठते हुए वरुण की तरफ देखकर अरुण ने जवाब दिया...

"बड़ी अजीब आदत है बे, अच्छा हुआ खाने की प्लेट लेकर बाथरूम जाने की आदत नही है ,वरना एक तरफ से मेटीरियल बाहर निकलता तो दूसरी तरफ से अंदर जाता...."वरुण ज़ोर-ज़ोर से ठहाके लगाने लगा और मुझसे बोला"तू क्यूँ रुक गया बे, आगे बता क्या हुआ...."
.
उस दिन रिसेस मे जब मैने धीमी आवाज़ मे "आइ"बोला था , तब अरुण मेरे बगल मे ही खड़ा था, और जब एश हमारी आँखो के सामने से गुज़री तो वहाँ एक अरुण ही ऐसा लड़का था जो एश की जगह मुझे देख रहा था और मेरे चेहरे के बदलते रंग को देखकर वो समझ गया था कि मेरे अंदर अभी क्या चल रहा है......
"चल आजा..."मेरा हाथ पकड़ कर अरुण बोला...
"अबे कहाँ आजा..."
"चल एश से तेरी बात कराता हूँ..."
ये सुनते ही मैने तुरंत उसका हाथ दूर किया और बोला"तुझे ऐसा क्यूँ लगा कि मैं एश से बात करना चाहता हूँ ?"
"अब बेटा हम को गिनती गिनना ना ही सिख़ाओ...जब से तूने उसे देखा है, तेरे फेस पर लाली छाइ हुई है..."
"अबे हट....ऐसी दर्जनो लड़कियो को मैं रोज देखता हूँ, तो इसका मतलब ये तो नही कि मैं उससे बात करू...."
"अभी उन दर्जनो लड़कियो को छोड़ और बाई तरफ देख..."
दूसरी तरफ से एश अपनी जुल्फे लहराती हुए आ रही थी, उस वक़्त दिल मे अरमान उठे कि काश एश सीधे मेरे पास आए और मुझे बोले कि "हे हॅंडसम, व्हाट ईज़ युवर नेम..."
दिल मे अरमान जागे कि वो मुझे देखे और मुझे देखते ही उसे मुझसे प्यार हो जाए,
वो करीब आती गयी और मेरे मूह से "आइ......"वर्ड एक बार फिर बाहर आया, लेकिन जब वो अपने क्लास की तरफ घूमी तो ये "आइ...."वर्ड वापस अंदर चला गया....
"दिल तोड़ दिया उसने उस तरफ घूमकर..."अपने सीने मे हाथ रखकर सहलाते हुए मज़किया अंदाज़ मे मैं बोला...."यार, अरुण कुछ जुगाड़ करना....उसे एक बार सही से देखना चाहता हूँ...."
"चल आजा फिर..."अरुण ने एक बार फिर मेरा हाथ पकड़ा...
"अबे कुत्ते हाथ छोड़, छोटा बच्चा हूँ क्या, जो बात-बात पर हाथ पकड़ लेता है..."
"प्यार है पगले..."
"इस प्यार को थोड़ा कम ही रहने दियो "
सीएस ब्रांच मे अरुण का एक दोस्त था,जिसके पास जाकर मैं और अरुण बैठ गये....जहा अरुण अपने दोस्त से बात करने लगा वही मैं चुपके से एश को तकने लगा....
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