Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
10-16-2019, 01:52 PM,
#69
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
इतनी गंदी बात सुनकर सलौनी उसे मारने दौड़ पड़ी…, लल्ली भागते हुए सामने से आ रहे शंकर के पीछे छिप्ने लगी, और इसी बहाने से वो उसके बदन से चिपक गयी…!

उसके बिना ब्रा के कच्चे कच्चे अमरूद शंकर की कठोर पीठ में गढ़ गये, जिनका मखमली स्पर्श पाकर दोनो के ही शरीर में करेंट की लहर दौड़ गयी…

सामने से उसके पीछे-पीछे भाग कर आती सलौनी ने शंकर के सामने से ही अपने हाथ बढाकर लल्ली को पकड़ना चाहा…

इस चक्कर में वो शंकर से सट गयी, उपर को चढ़ा हुआ उसका खूँटा सलौनी के पेट पर लगा.., पहले तो वो ये समझ नही पाई कि ये रोड जैसी चीज़ भाई ने यहाँ क्यों लगा रखी है…

लेकिन फिर जैसे ही उसके दिमाग़ ने काम करना शुरू किया, वो फ़ौरन समझ गयी कि ये भाई का हथियार है,

ये समझते ही वो उत्तेजना से भर उठी, और जान बूझकर और ज़्यादा लल्ली को पकड़ने की कोशिश करने लगी,

उधर लल्ली ने भी शंकर को पीछे से कस कर जकड़ा हुआ था, और वो उपर नीचे, इधर-उधर होकर अपनी कुँवारी कच्ची चुचियों को उसकी कठोर पीठ से रगड़ने लगी…

शंकर को पक्का लगने लगा, कि ये दोनो कच्ची कलियाँ उसके साथ मज़ा ले रही हैं.., वो जल्दी ही इन दोनो से अलग होना चाहता था,

क्योंकि उसके लंड का टेंपरेचर तो पहले से ही हाइ लेवेल पर था, अब ये दोनो… उउउफ़फ्फ़… भेन्चोद कहीं फट ही ना जाए,
सो उसने दोनो के बाजू पकड़ कर अपने से अलग किया और सलौनी से बोला – क्या हुआ सलौनी, क्यों उधम मचा रही हो तुम दोनो..? क्यों पीटना चाहती है इसे..?

अब सलौनी बेचारी अपने भाई को क्या जबाब दे कि वो उसे क्यों मारने भागी थी..?

वो अपनी गीली हो चुकी मुनिया को टाँगों से भींचकर नज़र झुकाए बोली –

कुछ नही भाई, बस ऐसे ही हम खेल रहे थे, तू बता कैसे आया इधर..?

शंकर – चल ! अब खेलना बंद कर, चलकर पढ़ाई करते हैं कुछ देर…!

चौक में दोनो भाई-बेहन एक चारपाई डालकर पढ़ने बैठ गये, बीच-बीच में शंकर का ध्यान कुछ देर पहले की गयी सुषमा की चुदाई पर चला जाता था, ना चाहते हुए ही उसका लंड पाजामा के अंदर तुनकने लगता…

सामने बैठी सलौनी की नज़र जब उसके तूनकते तंबू पर पड़ती तो उसकी मुनिया भी सुर-सुराने लगती, अब बेचारी भाई के सामने खुजा भी तो नही सकती थी, सो उसने अपनी जांघों को कस कर दबा लिया…

उधर शंकर की नज़र अपनी बेहन की नज़रों का पीछा करते हुए अपने तंबू पर पड़ी, वो बुरी तरह सकपका गया, और उसने भी अपने तंबू को अपनी टाँगों के बीच छुपाने की कोशिश की…!

अपनी झेंप मिटाने के लिए उसने सलौनी से बात करना मुनासिब समझा, सो बोला –
ये लल्ली के साथ ऐसी क्या बातें हो रही थी, सो तू उसे मारने दौड़ पड़ी…?

सलौनी ने जब भाई को अपना तंबू छुपाकर बात शुरू करते देखा तो उसने अपनी नज़रें झुका ली और बोली – कुछ नही भैया वो..हम..वो..आपस में ऐसी ही कुछ बातें कर रहे थे…!

शंकर – वोही तो बता, आख़िर ऐसी क्या बात हुई जो तू उसे मारने दौड़ी.., ?

सलौनी – छोड़ ना भाई, क्या करेगा जानकार, हम लड़कियों की भी अपनी अलग ही बातें होती हैं…!

शंकर- अच्छा मे भी तो सुनू, ऐसी क्या अलग तरह की बातें होती हैं, जो आपस में मार-पीट तक की नौबत आ जाती है…!

सलौनी – वो..ना..वो..तेरे बारे में गंदी-सन्दि बातें कर रही थी…!

शंकर – मेरे बारे में..? क्या गंदी बातें कर रही थी..?

सलौनी – मे नही बता सकती.., तू चुप चाप मेरा ये सवाल हाल कर्दे वरना मे चली दादी के पास…!

शंकर समझ गया, कि कुछ तो ये लोग उसी के बारे में बातें कर रही होंगी, जो सलौनी को अच्छी नही लगी होगी, और वो उसे मारने दौड़ी..,

लेकिन अब वो उन बातों से ध्यान हटाकर उसका सम सॉल्व करने लगा…! कुछ देर उसे पढ़ाकर दिन छिप्ते ही वो अपनी माँ के पास वापस लौट आया…!

रात को खाने के बाद दोनो माँ-बेटे सोने की तैयारी में थे, एक ही बिस्तेर पर शंकर अपने ही विचारों में गुम सोने की कोशिश कर रहा था, तभी
रंगीली ने अपना हाथ उसके गाल पर रखा और उसका मुँह अपनी तरफ करके बोली-

तो आज सुषमा भाभी के साथ क्या-क्या किया मेरे लाल ने…?

शंकर ने एक नज़र अपनी माँ के चेहरे पर डाली, उसकी चेहरे की मुस्कराहट और आँखों की चंचलता देखकर वो समझ गया, क़ि माँ मज़े लेने के मूड में है…

सो उसकी एक चुचि सहलाते हुए बोला – गौरी तुझे बुलाने आई थी, फिर तू कहाँ चली गयी थी, पता है सुषमा भाभी को कितना दर्द था पीठ में…!

रंगीली ने उसकी गान्ड पर हाथ लगाकर उसने अपनी ओर खींचकर अपने से सटा लिया और अपनी एक टाँग उसके उपर रख कर बोली – अच्छा, मुझे तो ऐसा कुछ भी नही लगा कि उसे कहीं दर्द हो…?

शंकर ने मुस्कराते हुए अपनी माँ की चोली के बटन खोलते हुए कहा – वो तो मेने ही फिर मूव की मालिश कर दी थी,

रंगीली ने अपनी चूत को उसके लंड से चिपकते हुए कहा – वोही तो पुच्छ रही हूँ, मूव की मालिश कैसे की..!

शंकर उसे शुरू से सारी बातें बताने लगा…, वो जैसे जैसे बताता जा रहा था, दोनो के शरीरों में गर्मी बढ़ने लगी, हाथ अपना काम करने में लगे थे, और देखते देखते दोनो के बदन से कपड़े अलग हो चुके थे…!
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