Antarvasna kahani वक्त का तमाशा
07-03-2019, 04:50 PM,
RE: Antarvasna kahani वक्त का तमाशा
"यार..." रिकी ने अपना पसीना पोछते हुए कहा और खड़े खड़े सोचने लगा कि अब वो क्या करे ...




"यार यह तो ..." रिकी ने मोबाइल निकाला और शीना को कॉल किया लेकिन उसने भी कोई जवाब नहीं दिया




"आज कोई फोन नहीं उठा रहा साला, अब मैं..." रिकी खुद से बातें ही कर रहा था कि पीछे से दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई जिससे रिकी जैसे ही पीछे मुड़ा तो उसकी आँखें बाहर निकलने को हो गयी और लंड... खैर उसका तो हाल कब्से खराब हो रखा था




सामने स्नेहा एक कॅंडल लिए हुए खड़ी थी, खुले काले बालों के साथ और चेहरे पे वोही कॅटिली मुस्कान.. कुछ फरक था तो वो यह के अब वो ब्रा भी उतार के आई थी और नीचे उसने पैंटी के बदले थॉंग पहना था ... रिकी के हाथ से मोबाइल गिर गया और दिमाग़ ... वो तो कब का काम करना बंद हो चुका था




"वो क्या है ना देवर जी.... कि इतनी देर ब्रा पहनने से भी स्किन पे निशान बनने लगते हैं , तो इसलिए ..." कहते कहते स्नेहा रिकी के एक दम पास आई जो पूरा का पूरा पसीने से भीग चुका था, पसीने से उसकी ब्लॅक शर्ट पूरी की पूरी भीग चुकी थी और उसकी साँसें काफ़ी तेज़ चल रही थी, जैसे मानो ओलिंपिक में 800 मीटर की रेस दौड़ आया था, दिल की धड़कन पे उसका कोई काबू नहीं था, पल में धीमी, पल में तेज़..




"आप तो पसीना पसीना हो रहे हैं देवर जी.." स्नेहा ने रिकी की शर्ट के बटन पे हाथ रख कहा और उसे खोलने लगी, लेकिन रिकी ने उसके हाथों को पकड़ लिया




"भाभिईिइ... दिस ईज़ नोट राइट.." रिकी ना कांपति आवाज़ और टूटी हुई साँसों में कहा




"ओफफ़फो.... आप भी ना देवर जी.. डरो मत, मैं शीना से नहीं कहूँगी कुछ भी.. देवर का ख़याल रखना तो भाभी का फ़र्ज़ है ना.. देखिए, आप कितना पसीना पसीना हो रहे हैं, अब ऐसे मैं अगर मैं ख़याल नहीं रखूँगी तो और कौन रखेगा..." स्नेहा ने रिकी के हाथ को साइड में किया और उसकी शर्ट के दो उपरी बटन खोल के उसके सीने पे नाख़ून फिराने लगी




"उफफफ्फ़.... यही तो चीज़ भाती है मुझे आपकी, चोटी से लेके एडी तक, एक दम चिकने हो.. लंडन में काफ़ी रंगरेली मनाई, अब ज़रा इधर भी तो कुछ बूँदें गिराए अपने प्रेम रस की... मेरे प्यारे देवर जी..." कहते कहते स्नेहा ने उसकी पूरी शर्ट खोल दी




"भाभी.... प्लस्सस्स्सस्स... आपको भैया का वास्ता..." रिकी की आँखें कुछ और कह रही थी और शरीर कुछ और.. मन में शीना समाई हुई थी जिसका असर उसकी आँखों में दिख रहा था, लेकिन सामने स्नेहा उसपे चढ़ि हुई थी तो उसका असर रिकी के शरीर पे दिख रहा था




"अरे रे देवर जी.. आपके भैया की कमी ही पूरी करनी है आपको, क्या इतना भी नहीं करेंगे आप उनके लिए..." स्नेहा ने अपने हाथ आगे किए और रिकी के जिस्म से उसकी शर्ट उतार फेंकी... रिकी के सीने पे बहती पसीने की बूँदें एहसास दिला रही थी इस बात का के स्नेहा की गर्मी कितनी तेज़ थी. स्नेहा आगे झुकी और रिकी के सीने पे अपनी तेज़ लबाबदार गीली ज़बान फेरने लगी.. रिकी की आँखें बंद हो चुकी थी और खुद को मक्कम करने के लिए अपने हाथ की मुट्ठी बंद कर ली.. स्नेहा भी मज़े से अपनी आँखें बंद करे अपनी जीभ को रिकी के सीने से लेके उसके पेट तक ले जाने लगी... रिकी की नाभि पे आते ही स्नेहा ने अपनी जीभ उधर गोल गोल घुमाना चालू की और मज़े से उसे सक करने लगी..




"फूऊऊऊ...." रिकी के मूह से बस यही निकला और धीरे धीरे उसके सब्र का बाँध टूटने लगा जिससे उसके हाथ की मुट्ठी भी हल्की होके खुलने लगी...




"उूउउम्म्म्म........" स्नेहा ने फिर नीचे से उपर तक अपनी जीभ घुमाई और रिकी के चेहरे तक पहुँची... रिकी के चेहरे पे आके जब उसने देखा के रिकी की आँखें बंद है, तो स्नेहा के चेहरे पे तुरंत एक विजयी मुस्कान तैर गयी और थोड़ा सा उसके चेहरे पे झुक के उसके होंठों के ठीक नीचे, उसकी चिन पे अपनी जीभ घूमने लगी..




"ससलसुर्र्ररप्प्प्प्प्प्प्प्प्प... आआहहह....." स्नेहा चिन से लेके गालों तक अपनी जीभ घुमाने लगी और इसी दौरान अपने हाथ उसने रिकी के मज़बूत कंधों पे रखे जिससे उसने भाँपा कि रिकी का शरीर भी उतना ही गरम है जितनी वो खुद थी उस वक़्त.. चिन से लेके पहले राइट और फिर लेफ्ट जाके स्नेहा रिकी के गालों को गीला करके धीरे धीरे रिकी के होंठों के पास पहुँची और अपने होंठों की तेज़ गरम साँसें उसके होंठों पे छोड़ने लगी...





"पफीएववव.व...... देवर जी.... मानना पड़ेगा उफफफफ्फ़.... क्या प्यार है भाई बेहन का... अब तक टस से मस नहीं हो रहे आप....." स्नेहा ने यह कहके अपनी आँखें बंद की और अपने होंठ आगे बढ़ा के रिकी के होंठों पे रख दिए.. रिकी के होंठ अब तक बंद थे, इसलिए स्नेहा ने भी ज़्यादा कुछ नहीं किया, बस अपनी जीभ उसके होंठों पे फेर के उसके होंठों का ज़ायक़ा लेने लगी..




"उम्म्म्म आअहह.... स्वादिष्ट हैं आप मेरे प्यारे देवर जी...." स्नेहा ने फिर अपनी तेज़ गरम साँसों को छोड़ते हुए कहा और फिर से रिकी के होंठों पे अपनी जीभ घुमाने लगी..

स्नेहा की ऐसी गर्मी में तो उस वक़्त बरफ भी पिघल जाती, तो रिकी क्या चीज़ था.. जैसे जैसे स्नेहा की गरम जीभ का असर बढ़ता, वैसे वैसे रिकी के होंठ भी धीरे धीरे खुलने लगते, और जैसे जैसे रिकी के होंठ खुलने लगते, वैसे वैसे स्नेहा भी अपनी जीभ उसके अंदर डालती चली गयी.. स्नेहा के गरम होंठों ने जैसे ही रिकी के गरम होंठों को छुआ, मानो कुदरत भी इसके आगे पिघलने लगी और बाहर बहती तेज़ बारिश हल्की सी होने लगी...




"उम्म्म्मम......... आहहहूंम्म्मममम....." रिकी ने सिसकी ली और अपने हाथ स्नेहा की कमर से लेके धीरे धीरे उसके चेहरे पे लाया और साइड से पकड़ के हल्के हल्के उसका चुंबन लेने लगा..



"आआहाहहूंम्म्ममममम भाभहिईीईई....... सस्सिईईईईईईईईई..." रिकी ने किस तोड़ स्नेहा को देखा और फिर से अपनी आँखें भी बंद कर उसको चूमने लग गया




"आआहाहहह देवर्र जीई.... उम्म्म्ममम एआहह अहहहौमम्म्म... सक मईए आअहह......उम्म्म्ममम उम्म्म्मम...... हाआंन्नानणणन् अपने भैईई हाहहूंम्म्मममम की कमी आआहौमम्म्म पूरीआहह उफफफफफ्फ़ कीजिए नाहह..." स्नेहा अपने हाथों को रिकी के जिस्म पे घुमाने लगी और धीरे धीरे नीचे बढ़ने लगी और रिकी की जीन्स पर आके उसके बटन को खोलने
लगी...




"उउम्म्म्ममम आहहहः ईसस्सस्स भाआभिईीईईईई उम्म्म्मम......." रिकी होंठ चूस्ते चूस्ते बोलने लगा... स्नेहा ने जैसे ही रिकी के बटन को खोला, वो होंठ छुड़वा के फिर से रिकी के जिस्म पे जीभ घुमाती हुई नीचे बढ़ी और उसके लंड के पास मूह करके रिकी के चेहरे को देखने लगी, जिसे देख सॉफ पता चल रहा था कि रिकी अभी उसके वश में ही है... स्नेहा एक बार मुस्कुराइ और जीन्स के साथ बॉक्सर को भी पकड़ के उसको धीरे धीरे नीचे करने लगी.. जीन्स के नीचे होते ही स्नेहा की आँखों में वासना का नशा सर चढ़ कर बोलने लगा.. रिकी के लंड को यूँ देख उससे रहा नहीं गया और एक ही पल में एक हाथ से लंड को पकड़ा और दूसरे से रिकी के टट्टों को सहलाने लगी, और धीरे धीरे कर अपनी जीभ को रिकी के लंड के सुपाडे पे घुमाने लगी और तिरछी नज़रों से रिकी के चेहरे को देखने लगी




"आअहह फ़फफुऊऊुऊउक्ककककककककक...." रिकी ने बंद आँखों से कहा और स्नेहा के सर पे हाथ फेरने लगा और हल्का हल्का ज़ोर देने लगा.. लंड के सुपाडे से आगे बढ़ स्नेहा धीरे धीरे रिकी के लंड को अपने मूह के अंदर निगलने लगी और फिर एक ही बार में पूरा का पूरा बाहर निकल लेती... पूरा अंदर, फिर पूरा बाहर.. ऐसे तीन से चार बार कर रिकी का
लंड स्नेहा की थूक से सन चुका था और स्नेहा अपने मज़े में बढ़ोतरी करने के लिए रिकी के टट्टों को निचोड़ने लगती और फिर उसे छोड़ देती
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