kamukta जंगल की देवी या खूबसूरत डकैत
02-04-2020, 12:24 PM,
#29
RE: kamukta जंगल की देवी या खूबसूरत डकैत
रोशनदान के ढक जाने से आने वाला प्रकाश कम हो चुका था और उस मध्यम रोशनी में कालिया ने रोशनी के नंगे बदन को अपने बांहो में भर लिया,दोनो के होठ मिल चुके थे और एक दूसरे में गुम हो जाने की पूरी तैयारी उन्होंने कर ली थी ,दोनो नंगे जिस्म एक दूसरे में घुल रहे थे,कालिया को समझ आ चुका था की आखिर कनक और रोशनी ये नाटक क्यो कर रही है ,उन्हें पैसा नही चाहिए ना ही ये सुख सुविधाये वो तो बस विक्रांत को फंसा रही थी ताकि विक्रांत और प्राण के बीच में दरार पैदा हो जाए ……
कालिया का मन हल्का हो चुका था और दोनो ही एक दूसरे में समाने लगे,इतने दिनों के बाद वो एक दूसरे में मिल रहे थे वो भी इस आलीशान से कमरे में ,कालिया ने ठाकुर को धन्यवाद दिया की उसके कारण आज वो अपनी बीवी के साथ इतने अच्छे से मिल पा रहा था,इत्र की खसुबु से पूरा कमरा महक रहा था और साथ ही रोशनी के जिस्म से गुलाब की खुश्बू आ रही थी,कालिया कभी अपनी बीवी को ऐसी सुविधाये नही दे सकता था जो ठाकुर ने उसे दिया था,लेकिन इसका लाभ आज कालिया उठा रहा था …….

इधर
विक्रांत अपने कमरे में बैठा शराब पी रहा था,नशा उसके आंखों में उतरने लगा था,और साथ ही रोशनी का चहरा भी ,रोशनी ही रोशनी उसके आंखों में झूम रही थी ,उसके ईगो को ठेस पहुची थी और वो अब बस रोशनी को पाने को बेताब हो चुका था लेकिन कैसे ??
प्राण पहले से उसके ऊपर घात लगाए बैठा था ,और रोशनी ने तो सीधे ही कह दिया था की जो उसे जीत ले वो उसकी हो जाएगी ,रोशनदान से उसने पूरी बात सुन ली थी और अब वो बस रोशनी को किसी भी कीमत में पाने की चाह रखता था..उसके अंदर का ईगो उसे चैन से सांस भी लेने नही दे रहा था ..
विक्रांत के कमरे का दरवाजा खुलता है और उसका ध्यान छम छम की आवाज की ओर जाता है …
बिल्कुल नए दुल्हन सी सजी हुई परी उसके पास आ गई,
विक्रांत उसके चहरे को देखकर थोड़ा हड़बड़ाया ..
“भाभी आप ..?”
पुनम के चहरे में मुस्कान फैल गई
“क्यो मैं अपने देवर से मिलने नही आ सकती क्या “
“नही नही लेकिन आजतक तो कभी आप मेरे कमरे में नही आयी ..”
“हम्म आज आना पड़ा काम ही ऐसा था ..”
इतना बोलकर पूनम रो पड़ी ,विक्रांत उसे देखकर थोड़ा घबराया ,वो उसके पास ही जाकर बैठ गई ,विक्रांत उससे थोड़ा अलग हुआ ,और थोड़ा दूर खिसक गया...पूनम उसके चहरे को देखती रही ..
“क्या हुआ है आपको आप रो क्यो रही है ..”
“आप भी मुझसे दूर जा रहे है ना ,ऐसी क्या खराबी है मुझमें की सभी मुझसे दूर जा रहे है “
पूनम सिसकती हुई बोली
“कौन दूर जा रहा है..”
“आपके भइया..जब से वो डायन रोशनी हमारे घर आयी है बस उसी का नाम उनके जुबान पर है ,मेरी ओर तो पहले भी नही देखते थे ,बस अपना पानी निकालने मेरे पास आते है ,मैं उसे ही पति का सुख समझकर अपना मन मार लेती थी लेकिन अब ...जब से उसको देखा है तब से मेरी ओर देखते भी नही ..मेरी शादी को बचा लो देवर जी “
पूनम खिसक कर विक्रांत से सट गई,विक्रांत बुरी तरह से हड़बड़ाया,पूनम ने कभी उससे नजर भी नही मिलाई थी और आज वो उससे ऐसी बाते कर रही थी ,और साथ ही रोशनी का नाम लेकर पूनम ने विक्रांत को और भी भड़का दिया था..
“मैं ..मैं क्या कर सकता हु इसमें ,वो तो ठाकुर है जो चाहे कर सकते है,कई पत्नी रख सकते है ..”
विक्रांत की लड़खड़ा रही थी ,पूनम ने अपने साड़ी का पल्लू गिरा दिया,उसके उन्नत वक्ष विक्रांत के आंखों के ठीक सामने थे ,पूनम भी कम खूबसूरत नही थी हर अंग में कसाव लिए थी,और यही कारण था की प्राण ने उसे देखते ही पसंद कर लिया था..
“मुझमें क्या कमी है जो मैं तुम्हारे भाई को पसदं नही ..क्या मेरे पास उसके जैसे वक्ष नही है ,”
विक्रांत की नजर पूनम के वक्ष पर पड़ी ,एक सनसनी उसके शरीर में फैल गई,
पूनम ने अपने बालो को खोल फेका और ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खोल दिए ,और विक्रांत का हाथ पकड़ कर अपने वक्षो के ऊपर लगा दिया
“कहिए ना क्या ये किसी से कम है ..”
विक्रांत अपनी भाभी की इस अदा को समझ ही नही पा रहा था की पूनम ने उसका हाथ अपने ब्लाउज में घुसा लिया,
“आह देवर जी आप सच्चे मर्द लगते हो मुझे आपके भइया तो बस फुस्सी बम है”
विक्रांत अपनी तारीफ सुनकर थोड़ा मचला लेकिन अपने भाई की पत्नी पर वो हाथ नही डालना चाहता था ,वो झट से उठकर खड़ा हो गया
“नही भाभी नही ..ये आप क्या कर रही हो “
पूनम गुस्से से उठ गई ,क्यो जब तुम्हारा भाई मुझे शांत नही कर सकता तो तुम क्यो नही मुझे शांत करते ,हर लड़की को तो वो अपने पास रख लेता है,मुझे कम उम्र में अपनी रखैल बना लिया ,और अब बस नाम की पत्नी,अब रोशनी को अपनी रखैल बनाएगा,कुछ करने का दम नही है तो फिर क्यो लड़कियों की जिंदगी से खेलता है,तुम्हें दे देता तुम कम से कम उन्हें संतुष्ट तो करते लेकिन नही तुम्हे देगा कनक जैसी रांड को जो पैसा देखकर खुद ही किसी के भी ऊपर खुद सकती है …
“भाभी “एक झन्नाटेदार झापड़ पूनम के गालो में पड़ा,लेकिन इससे पूनम को दर्द कम और मजा ज्यादा आया क्योकि वो जानती थी की विक्रांत पर जो तीर उसने फेका था वो सही जगह पर जाकर लगा है……...

कालिया वँहा से जा चुका था और आगे का प्लान कर रहा था,
इधर
प्राण ठाकुर इस चिंता में था की आखिर अभी तक कालिया आया क्यो नही ,वो जानता था की कालिया ऐसा आदमी ही नही है जो आसानी से चुप बैठ जाए ,उसे लगा की शायद वो हवेली की सुरक्षा को देखकर डर गया होगा,लेकिन प्राण को पता था की कालिया डरने वालो में से नही है …
यही बात उसने परमिंदर के कही ,
“आप हवेली की सुरक्षा थोड़ी कम कर दो और उसे अंदर जाने का मौका दो ,कुछ लोग चुपकर उस जगह पर रहेंगे जंहा से अंदर आया जा सकता है …”
“हम्म और अगर वो आया तो “
“तो उसे जाने देना “
पर्मिदंर की बात सुनकर प्राण सकते में आ गया
“हा सही कहा उसे जाने देना,अगर वो अपनी बीवी को लेकर नही जाता तो ...मुझे लगता है की इस हवेली में कई ऐसे लोग भी है जो आपके खिलाफ है,हवेली के बाहर के दुश्मन से तो हम निपट सकते है लेकिन हवेली के अंदर के दुश्मनों का क्या करेंगे ,इसका एक अच्छा उपाय है मेरे पास ,कालिया को अंदर जाने दो और देखो की कौन कौन उसकी मदद करता है ...और आखिर हवेली में ऐसा क्या चल रहा है जिसके कारण आपको कालिया जैसे इंसान से लड़ने में इतनी दिक्कतें हो रही है..”
प्राण परमिंदर के दिमाग की दाद देता नही थका….
और आखिर कालिया उसके जाल में फंस ही गया,कालिया वही से अंदर गया जंहा से प्राण चाहता था ,लेकिन प्राण को नई बात का पता चला की उसकी खुद की बीवी ही उसके खिलाफ है ,वो कालिया को जितना हो सके उतना सहयोग करता है ताकि वो हवेली के अंदर तक घुस सके ,परमिंदर ने ही पहरा हटवाकर उसे खिड़की तक पहुचाया लेकिन पता चला की कालिया की बीवी अभी उसने जाल में नही फसी है और प्राण की बीवी कालिया का लंड लेने में खुस है ,प्राण का खून ही खोल गया था लेकिन परमिंदर ने उसे चुप रहने की सलाह दी ………
उन्हें अब ये भी पता था की पूनम की एक दासी कनक से बात करती है और उसके साथ मिलकर उन्होंने प्राण और विक्रांत के बीच फुट डालने की तरकीब भी निकाल ली है ,कालिया के हवेली से जाने तक उन्होंने कालिया पर नजर रखी …
“हा हा हा साले मेरे और मेरे भाई के संबंधों में फुट डलवायेगे ,परमिंदर खेल का मजा तो अब आएगा “प्राण हँसते हंसते पागल सा हो गया था,शराब की एक पूरी बोलत उसने अपने अदंर कर रखी थी ..
जवाब में परमिंदर बस मुस्कुरा रहा था ……..
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