Free Sex Kahani स्पेशल करवाचौथ
04-14-2021, 12:22 PM,
#2
RE: Free Sex Kahani स्पेशल करवाचौथ
रूबी को घर के काम में लगे लगे दोपहर हो गई और शांता तब तक खाना बना चुकी थी। शांता ने खाना टेबल पर लगा दिया और रूबी को आवाज लगाई

" अरे रूबी बेटी अा जाओ खाना खा लो, खाना तैयार हो गया हैं।

रूबी का मन खाने का बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वो कमरे में से ही बोली:"

" ताई जी आप खा लीजिए मुझे भूख नहीं हैं, जब मन होगा मैं खा लुंगी।

शांता समझ गई कि रूबी अनूप का गुस्सा खाने पर निकाल रही हैं इसलिए उसने एक थाली में खाना रखा और रूबी के कमरे में पहुंच गई तो देखा कि रूबी उदास होकर आंखे बंद किए हुए लेटी हुई है और उसके चेहरे पर उभरी हुई दर्द भरी रेखाएं बिना बोले ही उसका सब दर्द बयान कर रही है।

रूबी अपने विचारो में ही इतना ज्यादा खो गई थी कि उसे शांता के अंदर आने का एहसास ही नहीं हुआ।
शांता ने थाली को टेबल पर रख दिया और रूबी का प्यार से गाल सहलाते हुए बोली:"

" चलो बेटी उठो और खाना खा लो देखो मैंने कितनी मेहनत से तुम्हारे लिए बनाया हैं।

शांता ताई के हाथो के स्पर्श से और उनकी आवाज़ से रूबी की आंखे खुल गई। रूबी जानती थी कि शांता बहुत जिद्दी हैं और आज मैं फिर से उसकी जिद के आगे हार जाऊंगी इसलिए वो अपने सारे दर्द और गम छुपाते हुए अपने चेहरे पर स्माइल ले आई और बोली:"

" ठीक हैं ताई जब आप इतना जिद कर रही हो तो थोड़ा सा तो खाना ही पड़ेगा मुझे।

शांता की इच्छा थी कि रूबी उसे मा कहकर पुकारें क्योंकि शांता की कोई संतान नहीं थी और वो रूबी को बिल्कुल अपनी बेटी की तरह मानती थी लेकिन कभी अपनी जुबान से नहीं कह पाई।

रूबी द्वारा ताई बुलाए जाने की पीड़ा शांता के चेहरे पर उभरी लेकिन हमेशा की तरह उसने आज भी अपनी पीड़ा को स्माइल के पीछे छुपा लिया और बोली:"

" थोड़ा सा क्यों पेट भर खिलाऊंगी तुझे, एक तू ही तो मेरी प्यारी बिटिया हैं रूबी।

शांता ने खाने का निवाला बनाया और रूबी की तरफ बढ़ा दिया तो रूबी ने अपना मुंह खोलते हुए निवाला खा लिया और खुशी के मारे उसकी आंखे भर आई और बोली:"

" शांता ताई आप मेरा इतना ध्यान क्यों रखती हैं? जरूर आपका और मेरा कोई पिछले जन्म का रिश्ता रहा होगा

शांता के होंठो पर मुस्कान अा गई और दूसरा निवाला बनाते हुए बोली:" बेटी मैं तो अपना फ़र्ज़ निभा रही हूं, अगर आज मेरी बेटी ज़िंदा होती तो मैं बिल्कुल इसी तरह उसका खयाल रखती।

ये बात कहते कहते शांता का गला भर्रा गया और उसने बड़ी मुश्किल से रूबी को निवाला खिलाया और रूबी खाना खाते हुए उसकी आंखे साफ करने लगी और बोली:

" आप अपनी बेटी को बहुत प्यार करती थी ना ताई ?

अपनी बेटी को याद करके शांता के हाथ कांपने लगे और उससे निवाला नहीं बन पा रहा था तो रूबी बोली:"

" ताई आप रहने दीजिए मैं खुद खा लूंगी और रोज आप मुझे खाना खिलाती हैं चलो आज मैं आपको खिलाती हूं।

इतना कहकर रूबी ने निवाला बनाया और शांता के मुंह से लगा दिया तो शांता ने रूबी की तरफ हैरत से देखते हुए अपना मुंह खोल दिया और शांता खाना खाने लगीं।

दोनो एक दूसरे को खाना खिलाने लगी तभी एक शैतान की तरह अनूप की घर में एंट्री हुई और गुस्से से बोला:"

" रूबी तुम जाहिल की जाहिल ही रहोगी तुम अपने मान सम्मान और प्रतिष्ठा की जरा भी कद्र नहीं है, एक नौकरानी के हाथ से खाना खाते हुए तुम्हे शर्म नहीं आती ?

शांता डर के मारे बेड से उतर गई और रोटी हुई धीरे धीरे कमरे से बाहर जाने लगी तो रूबी का खून खौल उठा और वो गुस्से से बोली:"

" अनूप जिसे आज तुम नौकरानी कह रहे हो मत भूलो कि तुम उसकी ही गोद में खेलकर बड़े हुए हो।

अनूप अपनी आधी अधूरी मुंछो पर ताव देते हुए बोला:"

" जब बच्चा छोटा होता हैं तो एक कुत्ते का पिल्ला भी उसका मुंह चूमकर भाग जाता हैं इसका मतलब ये नहीं कि बड़ा होने पर हम उसे सिर पर बिठाए।

रूबी शांता ताई की तुलना कुत्ते के पिल्ले से किया जाने पर एकदम से आग बबूला हो गई और बोली:"

" बस अपनी जुबान को लगाम दे अनूप, अगर एक बुरा शब्द शांता ताई के बारे में और बोला तो मैं ये घर हमेशा हमेशा के लिए छोड़कर चली जाऊंगी।

अनूप की सिटी पित्ती घूम हो गई और जुबान को जैसे लकवा मार गया क्योंकि वो जानता था मरते वक़्त उसकी मा की ये अंतिम इच्छा थी कि जो भी लड़की इस घर में बहू बनकर आए ये घर उसके नाम कर दिया जाए क्योंकि वो अपने पति के ज़ुल्म सह चुकी थी और जानती थी कि उसकी नस्ल उससे भी ज्यादा कमीनी होगी।

अनूप के मुंह धीरे से खुला और इस बार उसके शब्दो में शहद जैसी मिठास थी

" रूबी मेरा मकसद शांता ताई को नीचा दिखाना नहीं था, मैं तो बस ये चाह रहा था कि तुम अपने स्टैंडर्ड का ध्यान रखो।

रूबी:" मैं कोई दूध पीती बच्ची नहीं हूं अनूप, सब समझती हूं, तुम पहले अपना खुद का स्टैंडर्ड देखो और फिर मुझसे स्टैंडर्ड की बात करना।

अनूप रूबी से ज्यादा बहस नहीं करना चाहता था इसलिए वो फाइल ढूंढने लगा जिसे लेने के लिए आज वो अचानक से अा गया था। आमतौर पर वो रात को 8 बजे तक ही आता था। अनूप ने अपनी अलमारी से फाइल निकाली और एक तेज नजर रूबी पर डालते हुए चला गया। थोड़ी देर बाद ही उसकी गाड़ी स्टार्ट होने की आवाज आईं और रूबी सीमा को ढूंढने में लग गई। शांता ऊपर छत पर जाने वाली सीढ़ियों के पास बैठ कर रो रही थी। ये देखकर रूबी का दिल भर आया और वो बोली:"

" अरे ताई आप यहां बैठी हुई है और मैं आपको सारे घर में ढूंढ रही थी, अा चलो।
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RE: Free Sex Kahani स्पेशल करवाचौथ - by desiaks - 04-14-2021, 12:22 PM

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