पंजाब दियां रंगीन जट्टीयां - पार्ट - 1 - SexBaba
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पंजाब दियां रंगीन जट्टीयां - पार्ट - 1

hotaks444

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Nov 15, 2016
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हेल्लो दोस्तो मेरा नाम गौरव कुमार है। मैं पंजाब का रहने वाला हूँ। हमारा आड़त का काम है यानी हम किसान और सरकार मे बीच मे फसल का लेंन देंन का काम करते है। अब मे पंजाब से हूँ तो बता दूं के यहा की दो चीजें बहुत मशहूर है, एक पटियाला पेग ओर दुसरी पंजाबन जट्टीयां। हमारा किसानो के साथ आना जाना लगा रहता है तो किसी ना किसी जट्टी के साथ भी बात बन जाती है। आज एसी ही कहानी लेकर आया हूँ। तो कहानी आरंभ करते है।<br/>पंजाब के गांव सोन्गांव मे मलकीतसिंह रेह्ता था। उसकी उमर 70साल थी। मलकीत की बीवी का नाम अमरजीत कौर है उमर 65साल। मलकीत और अमरजीत दोनो बुढे होने के कारण ज्यादा काम न्ही कार पाते थे इसलिये घर ओर खेत के काम की जिमेवारी उन्के बेटे और बहू पर है। इनके बेटे का नाम सुखा है जिसकी उमर27 साल है। सुखे की पत्नी का नाम सरब्जीत कौर उमर 24साल है। सब उसे सरबी कहते है। सरबी का फिगर 343236था। कहानी के बाकी पात्र एक एक करके सामने आएगे। सरबी और सुखे के वियाह को 2साल हो ग्ये थे लेकिन कोई औलाद न्ही थी इसलिये सरबी सुखे से लडती रह्ती थी। सुखा खेती के काम मे जित्ना ताकतवर था हिसाब मे उत्ना कमजोर। इसलिये फसल और घर का सारा हिसाब उसकी पत्नी ही करती थी। सुखा अपनी फसल सहर के सेठ बनवारी लाल के पस बेच्ता है। बनवारी लाल की उमर 45साल है और गठीला बदन जवाँ लड़को को मात देता है। फसल का हिसाब करने सुखा ओर सरबी दोंनो आते है। पिछ्ले एक साल से बनवारी सरबी को देखता आ रहा है ओर उसके गोरे रन्ग ओर उबरे मुम्मो ओर चुत्डो का दीवाना है। वह बातो बातो मे सरबी को छेड़ता रेह्ता था। बनवारी लाल ने सुखे से पांच लाख रुपए लेंने थे जिन पर हर साल ब्याज लग जाताथा। एस बार सुखा गेहूंकी फसल का हिसाब करने लाला जी के पास आया था। ""ले बई सुखे तेरी पूरी फसल का हिसाब काट के मेरे पांच लाख रुपए बढ ग्ये तुमपर"। लाले ने अपना बही खाता देखकर बोला।<br/>सुखा-"लेकिन लाला जी धान की फसल के वक़्त भी तो अपने यही कहा था, क्या अब भी उसमे से कुछकम न्ही हुआ"। "अरे ब्याज भी तो लगता है सुखे और फिर ड़ेढ़लाख तू और ले गया था मुज्से धान की फसल के बाद"। लाले ने कहा। "हा सेठ जी मगर कुछ तो कम होता होगा ना 2साल से पांचलाख ही खडा है"। सुल्हे ने जवाब दिया। "देख भाई सुखे मेरा दिमाग मत चाट, हिसाब करना तो तूमे आता न्ही, एसा कर अपनी बीवी को ले आईओ कल उसे सम्जा दुगा मे"। लाले ने दो टुक सुना दी। सुखा निराश होकर घर लौटा। सुखे को आता देख सरबी मे पानी का गिलास देते हुए पुछा, "कित्ना रह ज्ञा सेठ जी का"। "अरे कित्ना<br/>क्या, पांच का पांच ही खडा है अबी भी"। सुखे ने निराश होकर बोला। "लेकिन कुछ तो कम होगा ना आखिर धान की फसल मे से भी कटवाया था कुछ करज"। सरबी बोली। "हमारी तो कुछ समझ मे न्ही आया, सेठ जी ने बोले के तुमे साथ ले के आओ तो वो हिसाब करे"। सुखे ने बोला। "हा तो हम चले जयेगे कल"। सरबी ने जवाब दिया। "अरे न्ही तुमे अकेली ही जाना पड़ेगा कल, हमे चारे को पानी लगाना है और जमीन भी तैयार करना है"। सुखे ने कहा। "कोई बात नही हम चले जायेगे"। सरबी ने जवाब दिया और खाना बनने चली गयी। दुसरे दिन सुखा रोटी खाकर खेत चला गया ओर सरबी तैयार होकर शहर चली गयी।<br/>बनवारी लाल की दुकान पर जाकर सरबी ने लालाजी को राम राम बुलाई। अवाज सुनकर जेसे ही सेठ ने आंखे उपर उठाई तो साम्ने सरबी खडी थी। जट्टी को देखकर लाला के मुह से लार टपकने लगी। "अरे राम राम सरबी, व्हा क्यो खडी हो य्हा आकर बेठो"। सरबी के जिस्म पर नज़र घुमाते हुए लाला बोला। सरबी अन्दर जाकर चटाई पर बेठगयी। "और बताओ सरबी सब ठीक, केसे आना हुआ आज"। लाला जट्टी के चुचो को देख्ते हुए बोला। "सेठ जी आप्ने कल सुखे को बोला था ना हिसाब के लिये तो आयी हू मे"। सरबी ने जवाब दिया। "अरे हा मे तो भुल ही गया था, "। सेठ ने अपना बही खाता निकल्ते हुए जवाब दिया। "हा तो सरबी पांच लाख रुपए बाकी है अबी इस फसल के बाद भी"।<br/>सरबी-"लेकिन सेठ जी धान की फसल के बाद भी आपने यही बोला था, कुच कम न्ही हुआ क्या"।<br/>"तो ब्याज भी तो लगा ना, अब देखो पांच लाख तो एक के हिसाब से सांठ हज़ार का तो ब्याज बन ग्य और ड़ेढ़लाख फिर लिया तुमने, तो कुल 2लाख10हज़ार हुए, और फसल हुई2लाख, अब 10हज़ार तो फर भी लिहाज से छोड रहा हू"। लाले ने सरबी को देल्ह्ते हुए कहा। सरबी थोडा निराश हो कर बोली-"एसे तो हम पूरी जिन्दगी कर्जे मे र्हेगे सेठ जी"।<br/>"मेने तुमे कहा था सर्बी के सुखे को मेरे पास कम पे लगा दो, कुच कर्जा तो मे उसके वेतन से थोदा थोडा करके काट लेता"। लाले ने जवाब दिया। "लेकिन फिर खेतो का क्या होगा सेठ जी उसके इलावा हमरे पास कुछ है भी तो नही"। सरबी निराश होकर बोली।<br/>"है तो तुमरे पास बहुत कुछ सरबी"। लाला सरबी की जवानी को निहारते हुए बोला। "कुछ कहा सेठ जी आपने"। सरबी बोली। "अह्ह अरे मे तो कह रहा था के अब भी सोच लो ओर सुखे को य्हा कम पे लगा दो और साथ तुमे भी मे कोई कम दिलवा देता हूँ, रही बात खेतो की तो उन्हे आगे ठेके पर देदो"। बनवारी लाला बोला। '"बात तो आपकी सही है सेठ जी, मै सोचुगी सेठ जी इस बारे मे"। सरबी ने जवाब दिया।<br/>"हा जरुर सोचो सरबी, अरे बई दोनो मिलकर 20हज़ार तो महिने का कमा ही लोगे उसमे से थोडे थोड़े कटवाते रहना"। सेठ बोला। "हा सेठ जी मे इस बारे मे सुखे से बात करूगी, अच्छा सेठ जी मे चलती हू"। सरबी इत्ना कह कर जाने लगी। सेठ बनवारी लाल सरबी को जाते हुए देख रहा था और जट्टी के चुतड़ देख अपना लण्ड मस्लने लगा।<br/>हेलो दोस्तो मेरा नाम गौरव कुमार है। मैं पंजाब का रहने वाला हूँ। हमारा आड़त का काम है यानी हम किसान और सरकार मे बीच मे फसल का लेंन देंन का काम करते है। अब मे पंजाब से हूँ तो बता दूं के यहा की दो चीजें बहुत मशहूर है, एक पटियाला पेग ओर दुसरी पंजाबन जट्टीयां। हमारा किसानो के साथ आना जाना लगा रहता है तो किसी ना किसी जट्टी के साथ भी बात बन जाती है। आज एसी ही कहानी लेकर आया हूँ। तो कहानी आरंभ करते है।<br/>पंजाब के गांव सोन्गांव मे मलकीतसिंह रेह्ता था। उसकी उमर 70साल थी। मलकीत की बीवी का नाम अमरजीत कौर है उमर 65साल। मलकीत और अमरजीत दोनो बुढे होने के कारण ज्यादा काम न्ही कार पाते थे इसलिये घर ओर खेत के काम की जिमेवारी उन्के बेटे और बहू पर है। इनके बेटे का नाम सुखा है जिसकी उमर27 साल है। सुखे की पत्नी का नाम सरब्जीत कौर उमर 24साल है। सब उसे सरबी कहते है। सरबी का फिगर 343236था। कहानी के बाकी पात्र एक एक करके सामने आएगे। सरबी और सुखे के वियाह को 2साल हो ग्ये थे लेकिन कोई औलाद न्ही थी इसलिये सरबी सुखे से लडती रह्ती थी। सुखा खेती के काम मे जित्ना ताकतवर था हिसाब मे उत्ना कमजोर। इसलिये फसल और घर का सारा हिसाब उसकी पत्नी ही करती थी। सुखा अपनी फसल सहर के सेठ बनवारी लाल के पस बेच्ता है। बनवारी लाल की उमर 45साल है और गठीला बदन जवाँ लड़को को मात देता है। फसल का हिसाब करने सुखा ओर सरबी दोंनो आते है। पिछ्ले एक साल से बनवारी सरबी को देखता आ रहा है ओर उसके गोरे रन्ग ओर उबरे मुम्मो ओर चुत्डो का दीवाना है। वह बातो बातो मे सरबी को छेड़ता रेह्ता था। बनवारी लाल ने सुखे से पांच लाख रुपए लेंने थे जिन पर हर साल ब्याज लग जाताथा। एस बार सुखा गेहूंकी फसल का हिसाब करने लाला जी के पास आया था। ""ले बई सुखे तेरी पूरी फसल का हिसाब काट के मेरे पांच लाख रुपए बढ ग्ये तुमपर"। लाले ने अपना बही खाता देखकर बोला।<br/>सुखा-"लेकिन लाला जी धान की फसल के वक़्त भी तो अपने यही कहा था, क्या अब भी उसमे से कुछकम न्ही हुआ"। "अरे ब्याज भी तो लगता है सुखे और फिर ड़ेढ़लाख तू और ले गया था मुज्से धान की फसल के बाद"। लाले ने कहा। "हा सेठ जी मगर कुछ तो कम होता होगा ना 2साल से पांचलाख ही खडा है"। सुल्हे ने जवाब दिया। "देख भाई सुखे मेरा दिमाग मत चाट, हिसाब करना तो तूमे आता न्ही, एसा कर अपनी बीवी को ले आईओ कल उसे सम्जा दुगा मे"। लाले ने दो टुक सुना दी। सुखा निराश होकर घर लौटा। सुखे को आता देख सरबी मे पानी का गिलास देते हुए पुछा, "कित्ना रह ज्ञा सेठ जी का"। "अरे कित्ना क्या, पांच का पांच ही खडा है अबी भी"। सुखे ने निराश होकर बोला। "लेकिन कुछ तो कम होगा ना आखिर धान की फसल मे से भी कटवाया था कुछ करज"। सरबी बोली। "हमारी तो कुछ समझ मे न्ही आया, सेठ जी ने बोले के तुमे साथ ले के आओ तो वो हिसाब करे"। सुखे ने बोला। "हा तो हम चले जयेगे कल"। सरबी ने जवाब दिया। "अरे न्ही तुमे अकेली ही जाना पड़ेगा कल, हमे चारे को पानी लगाना है और जमीन भी तैयार करना है"। सुखे ने कहा। "कोई बात नही हम चले जायेगे"। सरबी ने जवाब दिया और खाना बनने चली गयी। दुसरे दिन सुखा रोटी खाकर खेत चला गया ओर सरबी तैयार होकर शहर चली गयी।<br/>बनवारी लाल की दुकान प्र आ सरबी ने सेठ को राम राम कहा। अवाज सुनकर जेसे ही सेठ ने आ आंखे उपर उठाई तो सामने सरबी खडी थी। जट्टी को देखकर लाले की आंखो मे चमक आ गयी। "अरे राम राम सरबी, आओ यहा बेठो"। लाले ने राम राम का जवाब देते हुए सरबी को बेठ्ने को कहा। सरबी अन्दर जाकर चटाई पर बेठ गयी। "हा बोलो सरबी केसे आना हुआ आज"। लाले ने जट्टी के चुचो पर नज़र घुमाते हुए पुछा। "सेठ जी कल अप्ने सुखे को कहा था ना हिसाब के लिये तो इस्लिये मे आयी हू, उन्हे थोडा काम था"। सरबी ने जवाब दिया। "अरे हा हिसाब, मे तो भुल ही गया था"। लाले ने अपना बही खाता देखते हुए बोला। "हा, सरबी पांच लाख बनता है तुमरी तरफ"। लाले ने सरबी को देखते हुए बोला। "लेकिन सेठ जी धान की फसल के वक़्त भी आपने इत्ना ही बताया था, उसमे से कुछभी कम न्ही हुआ"। सरबी ने पुछा। "अरे ब्याज भी तो लगा ना सरबी, अब देखो पांच को एक के हिसाब से सांठ हज़ार तो ब्याज हो गया और ड़ेढ़लाख तुमने फिर लिया तो कुल 2लाख 10हज़ार हुए और फसल हुई 2लाख की, तो 10हज़ार तो वो भी मे लिहाज से छोड रहा हू"। लाले ने सरबी की तरफ देखकर बोला। लाले की बात सुनकर सरबी थोडी निराश हो गयी। "एसे तो फिर हम जिंदगी भर आपके करजई र्हेगे सेठ जी"। सरबी बोली।<br/>"अरे मेने तो बोला था तुमे सरबी के सुखे को मेरे पास काम पे लगा दो, कुछ कर्ज तो उसके वेतन से थोडा थोडा करके काट लेता मे"। लाले ने बोला। "लेकिन फिर खेतो का क्या होगा सेठ जी, उन्के इलावा हमरे पास कुच है भी नही"। सरबी निराश्ता से बोली। "है तो तेरे पास बहुत कुछ जट्टी"। लाले ने ललचाई नज़रो से सरबी को देखकर बोला। "कुछ कहा सेठ जी आपने"। सरबी बोली।<br/>"अह्ह अरे मे तो यही कह रहा हूँ के सुखे को मेरे पास काम पे लगा दो, ओर तुमरे लिये भी मै कोई काम ढूंड देता, दोनो मिलकर महिने 20हज़ार तो कमा ही लोगे, फिर उसमे से थ्प्दा थोदा करके मेरा कर्जा कटवाते रहना"। लाला बोला। "बात तो आपकी सही है सेठ जी, मै सुखे से बात करूगी इस बारे मे"। सरबी मे जवाब दिया। "हा जरुर करो उस्से बात लेकिन कुछ ही दिनो मे बता देना मुझे"। सेठ बोला। "हा सेठ जी 5-6दिनो तक बता दुगी मे आपको, अच्छा सेठ जी मे चलती"। इत्ना कहते ही सरबी जने लगी। बनवारी लाल सरबी को जाते हुए देखने लगा और जट्टी के चुतड़ देख लण्ड मस्लने लगा।
 
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