बहनो की अदला बदली - 1 - SexBaba
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बहनो की अदला बदली - 1

desiaks

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बहनों की अदला-बदली - bahano ki adala badali hindi sex story - Part - 1

अलख और विजय दोनों बचपन के दोस्त थे, दोनों की दोस्ती आज भी उसी तरह से बरकरार थी.दोनों जवान होकर एक साथ जवानी की हवा कहा रहे थे. दोनों आवारा किस्म के लड़के थे. दोनों का परिवार आपस में काफी घुला-मिला था.विजय और अलख दोनों एक ही कालेज के स्टूडेंट थे. पढ़ाई-लिखाई में दोनों का मान नहीं लगता था कालेज के नाम पर दोनों ही लोफेरगिरी करते थे. दोनों अच्छे घर के थे इसलिए पैसों का कमी ना था. माल पाटकर दोनों एक साथ कहीं ले जाते और दोनों मिलकर छोड़कर मजा लेते थे. दोनों में से माल कोई पटए पर मजा दोनों साथ ही लेते थे, जो खर्चा आता दोनों आपस में आधा-2 कर लेते थे. दोनों को बुर् का मजा लग चुका था. ये दोनों 22 साल के मनचले नौजवान थे. आपस में जब भी मिलते तो बस मौज मस्ती की ही बात किया करते थे. अब तक उन दोनों ने 4बुरों को छोड़कर मजा लिया था. जिनमें से दो को विजय ने और दो को अलख ने पटाया था.दोनों को बुर् का नशा इस्कदर पागल बनाए हुए था. दोनों की दोस्ती इतनी पक्की थी की किसी भी माल को कोई अकेला सफाचट नहीं करता था, दोनों मिलकर मजा लेते थे. बुर् का मजा पकड़ दोनों का लंड बुर् का दीवाना बना हरदम फँफनाया रहता था और दोनों हमेशा बुर् चोदने की जुगाड़ में लगे रहते थे.

एक दिन कालेज के पार्क में दोनों साथ बैठे रंगीन बातों के ताने-बने बना बुर् वालियों से मिलनेवाले आनंद की बात-चित कर रहे थे तो अलख ने कहा "यार विजय! मेरे दिमाग में एक नया आइडिया आया है,अगर तुम तैयार हो जाओ तो मजा आ जाता और फास्टक्लास की कुँवारी छोकरियाँ हम दोनों के हाथ लग जाती","यार इधर महीनों से लंड ठनक रहा है, साली कोई पटा नहीं रही है.लगता है हम दोनों को रंडीवाली बुर् छोड़नी पड़ेगी." अलख अपने जवान शरीर को ऐंठते हुए बोला-"रंडी चोदने से अच्छा है सटका मर लिया जाए",मजा तो प्र्वेट को ही चोदने में है." "मेरे आइडिया पर चलो तो मजा आ जाता, भागदौड़ भी नहीं, ना पैसा खर्च और माल एक दम पूरे". अलख विजय के हाथ को दबाता हुआ बोला. इस समय दोनों की जवानी मदहोशी से भारी थी और दोनों के लंड पैंट में सुरसुरा रहे थे.दोनों के आँखों में बुर् की तस्वीर नाच रही थी."बताओ यार! क्या नया आइडिया है?" "हम लोग आपस में अदला बदली करके खूब मजा ले सकते है.""कैसा अदला-बदली?" "देखो यार विजय!

तुम्हारी बहन सयानी है और मेरी भी बहन खूबसूरत और कुँवारी है, ऐसी दमदार लौंडिया 1000-500 खर्च करने पर भी जल्दी नहीं पटेगी, एकबार पति फिर झांसा दे गयी, इसलिए मेरा आइडिया है के हम दोनों आपस में अदला-बदली करके मजा ले, उन दोनों को एकबार पटाने में थोड़ी दिक्कत होगी फिर तो मजा पाने के बाद दोनों खुद ही..." अपने आइडिया के साथ अलख अपने होठों हो चाटने लगा. एक पल के लिए विजय का मूंड़ खराब हुआ, पर दूसरे ही शण जब अलख की गड्रई बहन की कसी-कसी चूची का ध्यान आया तो मुस्कान के साथ कहा-"अगर तुम्हें हर्ज नहीं है तो अदला-बदली करने को तैयार हूँ." इस पर अलख खुशी से भर कर विजय के कंधे को थपथपा कर बोला-"यार तुम भी अजीब हो, आख़िर हम दोनों की बहनो पर भी तो जवानी चढ़ती हो गी, कोई ना कोई छोड़कर मजा लेगा ही, हामी लोग आपस में अदल-बदल कर मजा ले तो क्या हर्ज है, दोनों आपस में हम उमर की सहेलियाँ भी हैं किसी को शक भी नहीं होगा और कचक माल जब मान करेगा चोदने के लिए मिल जाएगा, दोनों की चूची देखते नहीं बिना ब्रा के हर वक्त कितना ताना ताना रहता है, चोदने लायक दोनों है." अलख के नये आइडिया से विजय के मुँह में पानी भर गया,उसके लंड का हलचल तेज हुआ और अलख की कुँवारी बहन की गड्रई जवानी आँखों में घूमने लगी.उधर इस नये विचार के साथ अलख की आँखों में विजय की स्यनी बहन का कोरा बदन नशा करने लगा.उसके बाद दोनों ने आपस में अपनी बहनों की अदला-बदली करने का प्रोग्राम बनाया और फिर चोख माल को लूटने के फिराक ने पूरी तरह से दोनों पर गये.

विजय की बहन भी गोरी-चिट्ठी थी और अलख की भी दोनों की उमर में बस एक-दो माह का अंतर था. दोनों 18 साल की स्यनी और समझदार लड़कियाँ थी. दोनों की चुचियों का साइज भी एक थी. विजय की बहन का नाम रानी था और अलख की बहन का रजनी.दोनों का आपस में काफी पटती थी.वैसे दोनों अलग-अलग कॉलेज में पड़ती थी.स्तनपान की मस्ती उन दोनों को भी कभी-कभी चुलबुलाहट में भरने लगी थी. दोनों को लौंडियपन का ज्ञान भी था. दोनों के बुर् पर स्तनपान के बाल उग चले थे. विजय की बहन रानी रजनी की अपेक्षा कुच्छ अधिक मोटी थी और साथ ही कुच्छ चालक भी थी.वैसे बुर् अभी दोनों की कुँवारी ही थी. रजनी की तो चूची भी कुँवारी थी, पर रानी चोरी च्चिपे दूधवाले से कभी-कभार छाती को दबाकर मजा भी ली थी.इस प्रकार रानी में थोड़ा बहुत अनुभव था, मजा पकड़ उसे स्तनपान काटने लग गयी थी.दोनों ही शहरी वातावरण की लड़कियाँ थी,इसलिए उनको अपने लड़कीपन के स्ने अंगों की कीमत का पता था. रजनी और रानी दोनों को पता था की टांगों के बीच जो बुर् है वो मर्द के लंड से छोड़ी जाती है, और जब बुर् को छोडवाया जाता है तो लड़कियों को अपर आनंद आता है. नये आइडिया के साथ अलक और विजय एक-दूसरे की कुँवारी बहनों से मजा लेने के चक्कर में पड़ गये. दोनों पहले अपनी-अपनी बहनो को एक दूसरे से बात करते हुए करीब लाए.इस प्रकार विजय की बहन रानी अलख से हँसने-बोलने लगी और अलख की बहन रजनी विजय के साथ हँसने-बोलने लगी. दोनों दोस्त तो आपस में साढ़े-बढ़े थे ही.

दोनों को दोनों लौंडिया में स्तनपान की भरपूर मस्ती नज़र आने लगी थी. दोनों आपस में मिलकर एक दूसरे की बहनों की जवानी रंगीन तारीफ करते.आगे उनको फँसा कर मौज-मस्ती करने की योजना बनाते. इस प्रकर दोनों बहनों की अदला-बदली से अपने लंड की प्यास भुझहने को पूरी तरह से तैयार थे. उधर दोनों एक दूसरे के भाइयों के करीब आकर अपने सायानेपन में गुदगुदी का अनुभव करने लगी थी. दोनों यार चोद थे. इसलिए उन दोनों ने देख-देख कर ही उन लड़कियों से अपनी इच्छा को जाहिर किया था. चूँकि रानी चूची का मजा दूधवाले से पा चुकी थी इसलिए अलख के पास जाकर बात-चित करने और अपने यौवानो को घूर-घूर का दिखवाने में बड़ा मजा आता था. पहले दोनों बात-चित और हाउ-भाव से एक दूसरे की स्यनी बहनों को अपने रंगीन ख्यालों से परिचित कराया और उसके बाद थोड़ा सा छू-छा करके उन दोनों की सोई जवानी को चिकोर कर जगाया. इस प्रकार रानी और रजनी दोनों को अहसास हो गया की दोनों के भाई एक दूसरे की बहनो को फिट करने के चक्कर में पड़े है. इसकी सूचना पहले रजनी को रानी ने उलाहने के रूप में गुदगुदाते मान से देती बोली-"रजनी! तुम्हारे भैया बारे वैसे है.आज तो मेरी छाती पाकरना चाहे.है""तुम्हारे भैया भी तो वही है..जब देखो तो मेरी छाती को घूरते है." रजनी भी सर से पाँव तक लहराती हुई बोली. इस तरह दोनों सहेलियां एक दूसरे की मस्ती के साथ ताने मारती एक दूसरे के भाइयों से मौज मस्ती के लिए ललचाने लगी.

मज़ेदार सेक्स कहानियाँ

- January 18, 2016- September 22, 2015- September 25, 2015- October 24, 2015- December 2, 2015

अब ये दोनों जवान लड़कियाँ भी आपस में मिलकर एक दूसरे के भाइयों के द्वारा की गयी हरकतों का वर्णन एक दूसरे से करती हुई मजा लेती. रजनी की अपेक्षा रानी की बुर् अधिक चूबूला रही थी. वो रजनी की तुलना में अलख के पास अधिक चुलबुली प्रतीत होती थी.दोनों दोस्त ने तो तय कर ही लिया था की उनकी खूबसूरत गड्रई उमर की बहनो को दूसरा चोदे, उससे अच्छा है की वो आपस में अदला-बदली कर खुद एक दूसरे की बहनों को चोद कर आनंद ले.अलख का नया आइडिया विजय को काफी पसंद आया और आल बात-बात में वो अलख की बहन रजनी के चूतड़ पर हाथ फेयर कर मजा लिया. चूतड़ पर हाथ का मजा पा रजनी थोड़ा शरमाई और रसीली आँखों से देख कर चली गयी, जिससे विजय का लौंडा उठक-बैठक करने लगा.इसे प्रकार अलख विजय की बहन रानी की एक चूची पर हाथ मर अब लाइन क्लीयर पा कर मस्त था. इसे प्रकार दोनों दोस्तों को इन कुंवारियों के शबाब को पीने की उम्मीद हो गयी थी. दोनों ने आपस में बात किया और खुले शब्दों में एक दूसरे की कुँवारी बहन का मजा लेने की योजना तैयार किया उसके बाद अब उन दोनों को केले का स्वाद कैसे दिया जाए ये तय किया.

अलख का कहना था-"दोनों कुँवारी और ऊंची है इसलिए एटमीनान के साथ ही चुदाई हो सकती है." विजय भी सहमत था. उसने मस्ती के साथ कहा-"यार देख लेना मेरी बहन में डालने के लिए तेल का प्रयोग करना पड़ेंगे. एक दम से तसी मालवली है.""देखना मेरी बहन को चोदने में भी पसीना आएगा प्यारे, अबतक जितनी भी छोड़ी है उसके आगे सब फीकी हो जाएगी.""मेरी बहन तुम्हारी बहन से किसी मैंने में डाउन नहीं है."विजय बोला"अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता चोदना जल्द ही है." कहते हुए अलख का लौंडा पैंट में झटका खाया. गंभीरता के साथ सोचने के बाद विजय बोला-"ऐसा नहीं हो सकता की तुम रजनी को साथ लेकर मेरे घर आ जाओ.""हो तो सकता है.""क्या तुम स्थान बना दोगे?" "एक तरीका है, मैं तुम्हें रात को अपने वहां भोजन पर रोकुंगा तुम रजनी के साथ रुक जाना. मेरी बहन तो घर में रहेगी ही, रात को हम दोनों अदला-बदली करके कम बना लेंगे.""ठीक है-अगर ऐसा कर सको तो ठीक है,पर तुम्हारे मम्मी-पापा.""मम्मी अंकल भोजन के बाद अपने बेडरूम में चले जाते है, प्रोग्राम रात 11 के बाद आराम से शुरू हो सकता है.""रानी के कमरे में तुम और रजनी के कमरे में हम, ये तो तय है की लड़कियाँ शोरगुल करने वाली नहीं, दोनों पर तो है बारे आराम से छोडवाएगी." "ओके विजय! तुम्हारा प्रोग्राम पसंद आया." "वेरी फाइन तो कल ही रखो पूरी तैयारी तुम्हारे जिम्मे, एक बोतल इंग्लिश रख लेना, नयी प्याली में डाल-2 कर पिया जाएगा, सब मस्त भी होगी और पीकर चोदने का मजा ही कुच्छ और होगा." अपने जीभ को चाटते हुए कहा. "ओके डियर कल शाम तुम रजनी को लेकर किसी बहाने से मेरे यहाँ आ जाओ.

एक दौड़ मेरे यहाँ और दूसरा दौड़ इसी तिकड़म से तुम्हारे वहाँ उसके बाद ईश्वर ने चाहा तो खूब दोनों हम लोगों के साथ इसे करने को जा करेगी. वैसे तो दोनों माल फिलहाल ऐसा है की रातभर डाले परे रहो फिर भी मान नहीं भरे."मान गये ना मुझको" "हां यार" और दोनों पालन बना कर अलग हुए. अब तो उन दोनों का मान अपनी-अपनी जवान खड़ी-खड़ी गड्रई चूची वाली बहनो को देख-देख कर पागल सा हो जा करता था. खुद दोनों अपनी ही बहनों में घुसेड़ने को तरसने लगे. दूसरे दिन प्लान के अनुसार अलख ने अपनी बहन रजनी की नोकदार चूची को देख अंदर से रानी की चूची की कल्पना से सर से पांव तक लहराते हुरे कहा "तुमको रानी बुलाई है उसके वहाँ हम लोगों की दावत है रात को रुकना होगा." इस समाचार से रजनी लहरा उठी. उसकी चूची में सनसनी दौड़ी और बुर् के फाँक में गुदगुदी. वो जानती थी की रानी के घर पर उसका भाई विजय मिलेगा तो भैया रानी के चक्कर में पर जाएँगे और रानी का भाई हम में. है! इस तरह तो खूब मजा आएगा.

वो सर से पांव तक लहराकार अपनी ऊंची बुर् को मोटी-2 चिकनी रनो के बीच दबा थोड़ा लाजति सी बोली. "ठीक है भैया चलूंगी." "फिर तैयार हो जाओ खाना वहीं खाना है." उसी बीच बदचलन अलख को कुँवारी बहन की खड़ी-2 नागपुरी संतरे के साइज की चूची का एक निप्पल पूरी तरह कपड़े के ऊपर दिख गया. उसका दिखना क्या था अलख की आँख लाल हो गयी. उस घुंडी को देख अलख पर वासना का काला बहुत सवार हुआ. उसका लंड एक बड़ी हे वोल्टेज से भर गया. उसकी पूरी जवानी कसमसा उठी. पहली बार उसके मान में दोस्ती के पार्टी गद्दारी का भाओ आया. उसे लगा की उसकी बहन रजनी विजय की बहन रानी से काफी मजेदार है. जब विजय रजनी को लेगा तो अधिक मजा आएगा. उसका माल विजय के माल से अधिक तगड़ा है. वो एक शण उस घुंडी को एकटक देखता रहा. फिर उसका मान अपनी मूहबोली बहन को उसी दम दो कर रख देने को तड़प गया. अलख के मान में पाप जन्मा और मान ही मान सोचा की ऐसे तगड़े माल की चुदाई तो पहले खुद ही कर देनी चाहिए. कोरी बहन के बजे उसे विजय के पास चुदी बहन ले जाना चाहिए. इस उम्र में चुदी और ऊंची बुर् को कोई तार थोड़े सकता है. असल में रजनी की घुंडी उसे बारे ही जालिम अंदाज़ में उसे दिखी एक बार में ही उसपर तो चढ़ गया था.

अलख पे तो चढ़ गया था और इस नये पाप के साथ अलख ने दोस्त के साथ गद्दारी करते हुए उसे चुदी और खुद उसकी ऊंची बहन के साथ अदला-बदली की योजना बना डाली. उसने इस नये विचार के साथ विजय को फोन से बताया की आज वो नहीं आएगा, रजनी ने लाल झंडी दे दिया है. इस पर विजय की सारी खुशी पर तो पाला मारा ही साथ-साथ रानी भी तिलमिला उठी. उसको भी तो इस प्लान में अपने लिए भरपूर फायदा दिख रहा था. रानी को लगा की उसे किसी ने पहाड़ पर से अचानक ज़मीन पर धकेल दिया हो. अलख के आने की खुशी से उसके बदन में चिंगारी सी फूटती नज़र आई थी. वो रजनी की अपेक्षा चालू तो थी ही. वो समझ गयी थी की आज रात भैया अलख को रुक कर उसकी बहन को छोड़ेगा, और अलख को उसकी चोदने का चान्स देगा. पर अलख के फोन से एक बारगी उसके खुशी को पाला मर गया था. उसकी चिकनी की गयी मस्त बुर् उदास हो गयी थी. उसने तो अपने बुर् के बालों को भी अलख के लिए क्रीम से साफ करके 13साल की कमसिन लोंडीयों की तरह कर लिया था. उसने रजनी की अपेक्षा सेक्स की भूख दुगुनी थी. कारण वही दूधवाला, जो मौका देखकर कभी-कभी उसकी चूची को दबाया करता था. इसी अवस्था में मस्त छोकरी के दिमाग को गहरा झटका लगा. वो तुनक कर अपने बिना बड़ी के जवानों को विजय के सामने तो में च्चालकती बोली."भैया, रजनी की तबीयत खराब है तो अलख भाई सब तो आ सकते थे, अब तो खाना

भी बेकार जाएगा, बारे वैसे है तुम्हारे दोस्त." विजय को रानी की मसल चूची का च्चालकाओ कसमसाहट से भर गया था. वो बहन की संतरे सी चूची को उसी समय पकड़ ने को बेताब हुआ, पर रिश्ते के कारण चुप रही गया. "फिर कभी प्रोग्राम रखेंगे." विजय भी अपने प्रोग्राम पर पानी फिरते देख उदासी के साथ रानी के उदास चेहरे को देखते बोला. भाई-बहन एक दूसरे की उदासी की वजह को तो अपने-आप में अच्छी तरह से समझ ही रहते. रानी की जवानी अलख के आने की खुशी में पूरी तरह से बंग दे रही थी. उसका कुँवारा मान स्तनपान की बाहर चखने के लिए एक प्रकर से उतावला था. जो मस्ती उधर अलख को बहन की जालिम घुंडीयों को देखकर सवार हुआ थे, वो ही मस्ती इधर रानी पर सवार थी. रानी ने अपने जवान भाई को मीठी नज़र से देखा. उस समय उसकी गोल चूची में अजीब सा दर्द उभरा हुआ था, जो किसी से मसलवाने से ही जा सकता था. रानी गुदगुदती वहाँ से उदास अपने कमरे में आई. उसे लग रहा था की उसकी चिकनी की गयी बुर् के फाँक में कोई बड़ा सा कीड़ा समा गया हो और रेंग रहा हो. उसकी बुर् चुदवाने के लिए आज बुरी तरह से तड़प रही थी. अलख ना आया तो वो मछली की तरह तरफारा उठी.
 
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