मेरी समलिंगी सहपाठिनें - SexBaba
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मेरी समलिंगी सहपाठिनें

desiaks

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Aug 28, 2015
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हाय! अनल्पाई.नेट के पाठकों को नमस्कार! अपनी पिछली कहानी "पापा के दोस्तों ने चोदा- 1" में आपने पढ़ा कि किस प्रकार पापा के दो दोस्तों ने सीमा हमारे घर में ही चोदा। वो अलग बात है कि इसके लिये उन्हें कोई विशेष कोशिश नहीं करनी पड़ी। सीमा तो वैसे ही चुदने के लिये मरी जा रही थी। उसी कड़ी में पेश आगे की कहानी ...

यह कहानी भी मैं सीमा की ओर से ही पेश कर रहा हूं ...

उस रात गुरुबचन अंकल और अकील अंकल ने जो कमरतोड़ चुदाई की उसका असर दूसरे दिन तक रहा। तीसरे दिन अकील का फोन आया, मैं घर में अकेली थी ...

हैलो ...

हाय रानी!!! कैसी है ... ?

कौन बोल रहा है ... मैं चौंक गई।

आय! हाय! दो दिन में ही लन्ड पच गया ...

ओह! अकील अंकल ... ... मैं आवाज पहचानते ही बोली। अनायास ही मेरा हाथ चूत पर पहुँच गया।

अब अंकल तो मत कह रानी ... क्या कर रही थी ... अकेली ही है ना?

हाँ ... क्यों ... क्या करना है ... मैं शोखी से बोली।

चोदना है तेरी प्यारी चूत को ...

ना बाबा ना ... अब तक नहीं सम्भल पाई हूँ ... ...

अरे जान ... वो तो मौका प्रोपर नहीं था ... वर्ना एक हफ़्ते तक बिस्तर से नहीं उठती ...

तभी तो कह रही हूं ... मुझे मरना नहीं है ...

अच्छा! देख शनिवार को तेरे पापा टूर पे जा रहे हैं और गुरु की वाइफ़ भी बाहर है तो उस दिन गुरू के घर पे प्रोग्राम रखेंगे ...

और फ़िर शनिवार का इन्तजार होने लगा।

पापा सुबह 5 बजे की बस से चले गये। मैं एक बार फ़िर चूत चिकनी की और फ़िर तैयार होके 11 बजे गुरू के घर पहुंच गई। मेरे पहुंचते ही उन्होंने मेरा दिल खोलकर स्वागत किया और सीधे बैडरूम में ले गये जहाँ एक शानदार बैड था। पूरा कमरा इत्र की खुशबू से महक रहा था ... मैं रोमांचित हो रही थी ... ... गुरू ने नाश्ते का इन्तजाम किया हुआ था। नाश्ते के दौरान हम खूब गन्दी गन्दी बातें कर रहे थे मैं भी पूरी तरह खुल चुकी थी।

इस सब में एक घंटा गुजर गया तो ...

अकील बोला ... चल अब शुरू करें ...

और हम नंगे हो गये। अकील सोफ़े पर बैठ गया। मैंने जमीन पर कुतिया बनके उसके लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। गुरू मेरे पीछे आया और चूत चाटने लगा। जब अकील का लंड पूरी तरह तैयार हो गया तो मैं गुरू की ओर मुड़ी। गुरू घुटने के बल खड़ा हो गया तो मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और इधर अकील चूत चाटने लगा।

फ़िर अकील ने अपना लंड पीछे से ही चूत के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा तो गुरू का लंड मेरे गले तक घुस गया मेरी सांस रुकने लगी पर वे रुके नहीं और मैं दोनों तरफ़ से चुदने लगी ...

ले मादर चोद आज देख हमारे लंड का कमाल ... ... अकील दनादन ठोकते हुए बोला तो गुरू ने भी मेरे बाल पकड़ कर मुँह में ही अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। मुँह बन्द होने के बावजूद भी मैं कराह रही थी पर बहुत मजा आ रहा था। फ़िर उन्होंने साइट बदली और चालू हो गये। लगभग आधा घंटे की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद उन्होंने मुझे जमीन पर सीधा लिटाया और एक साथ अपने लंड मुँह डाल दिये, मैं लपालप चूसती रही। थोड़ी ही देर में वे मेरे मुँह में झड़ गये। उनके लंड से निकले गरम गरम वीर्य ने मेरा मुँह भर दिया। मेरी चूत भी झड़ चुकी थी। हम तीनों निढाल हो कर पड़ गये।

दूसरा राउंड 2 बजे शुरू हुआ और ये पहले से भी भारी था। मेरा रोम रोम दर्द करने लगा। ये मेरी जिन्दगी की सबसे यादगार चुदाई थी।
 
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