Incest Lawaaris - SexBaba
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Incest Lawaaris

लड़का -अड़े के करे है राम तेरी तै ार चची आवाज़ मारे है

राम- क्यों के कहवे थी की ो मनहूस कीट गया

Ladka-tu इतना कड़वा क्यों से रे मानु हु की तेरी गइल बुरा हुआ सा है पैर तू तो कटी लावारिश सा माने है खुद ने

राम- हाहाहाहा तैंने के बेरा सुमित के घर में के के झेलू करा सु में ार रही बात लावारिश की तो वही तो हु में सब कुछ मेरा और कुछ भी मेरा नहीं

आअह्ह्ह बच्चओऊ कोई तो मा मेरी

आदमी - ः यहाँ कोई भी ऐसा नहीं जो तुझे ठाकुर विक्रम सिंह से बचा सके आआआह्ह्ह्हह्ह

सुमित - राम छोड़ इसे ये ठाकुर के आदमी है

राम - आज नहीं रे आज तो हद तोड़ दी ठाकुर के अधमियो ने एक बच्ची को उठा कर वो भी चौधरिओ के गड्ड में आ कर मगर में मनहूष सही पैर हु तो राजवंश का लावारिश hi तो कहानी भी शुरू मुझसे hi होगी

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इंट्रो:-

राम के माता पिता एक हादसे में चल बेस थे जिस के बाद से सिर्फ कहने को राम का परिवार था मगर सच मानो तो वो अपनों के बिच एक लावारिश की ज़िन्दगी जी रहा था जिस का जयदा समय अखाड़े या नदी पैर hi गुज़रता था अखाड़े में म्हणत कर के राम ने अपने जिस्म को इतना कठोर बना लिया था की एक बार को तो चाक़ू भी मुद जाये 6 फुट का राम यु तो अभी अभी जवान हुआ था पैर घर के हालत ने उसे एक युवा मर्द समय से पहले hi बना दिया था अब जरा आप सबको राम के परिवार से मिला देता हु

किशोर- राम के ताऊ जो उसके पिता से बहुत स्नेह रखते और बहुत दुखी भी हुए थे अपने भाई के यु अचानक दुनिया छोड़ जाने से जिस के बाद इनका जायदा तर समय घर से बहार अपने काम में hi बीत ने लगा जिस वजह से इन बीवी काय राम से और भी चीड़ ने लगी

काय- राम की तै जो दिख ने में तो एक काम देवी सवरूप है पैर दिल की बहुत कठोर है हमेशा राम को जाली कटी सुनाती रहती है क्युकी इसके सिर्फ लड़किया hi है 2 जो रंग रूप में अपनी माँ पैर hi गयी

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प्रिय- काय की बड़ी बेटी अपनी माँ से बिलकुल अलग नेचर है इस का बिलकुल शांत रहती है जितनी जरुरत उतनी बात फ़ालतू किसी से कोई मतलब नहीं राम को देख कर इन्हे बहुत दया आती है पैर अपनी माँ का गुस्सा जानती है इसलिए चुप रहती है

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पीहू- काय की छोटी बेटी अपनी माँ पैर गयी है गुस्सा तो इसकी नाक पैर चढ़ा रहता है ये भी राम से बड़ी है तो पूरा हुकुम चालती है बाकि कामुकता इस के जिस्म में भी अपनी की तरह कूट कूट के भरी है

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विनोद- राम के चाचा शाम होते hi शराब में धुत हो जाते है जिसकी वजह से शादी के 8 साल बाद भी इनकी कोई संतान नहीं है इनका काम खेतीबारी संभाल न जिसे ये राम से hi करवाते है धमका के

शांति- विनोद की बीवी और राम की चची बिलकुल अपने नाम की तरह शांत नेचर और बच्चे न होने के कारन को राम को अपने बेटे की तरह प्यार करती है एक यही है जो राम करीब है जिसकी कोई भी बात राम कभी नहीं टालता फिर अंजाम चाहे जो हो

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कजरी- सुमित की बहिन जो की रंग में थोड़ी सवाली पैर नैन और नक्श ऊऊफफफ गज़ब के है पैर रंग चलते इस की शादी नहीं हो प् रही मगर ये भी एक ख़ास किरदार है कहानी में

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सुमित को आप जानते hi हो राम का एकलौता दोस्त जो उसे भाई से भी बढ़कर मानता है और हर सतिहिति में उसके साथ रहता है

इनके गांव से लगता hi एक और गाँव है जिस में ठाकुरो की हुकूमत चलती है पैर एक बात जो इन दोनों गाओं को जोड़ती है वो है माँ काली का मंदिर जिस में हर साल मैला लगता है जहा दोनों गाओं की और से खुलती में पहलवान अपना पूरा जोर दिखते है जिसे कभी राम के दादा जी ने शुरू करवाया था जिसे आगे बढ़ाया था राम की पिता रमेश जिसकी मौत के बाद हमेशा ठाकुर hi जीत ते आये है जिस के चलते उनके कदम अब इन गाओं की और बढ़ ने लगे जिसके चलते क्सक्सक्स गाओं के लोग परेशान होने लगे थे पैर जाए भी तो किसके पास राम के ताऊ अपनी सरकारी नौकरी में और चाचा शराब के नशे में अब ऐसे में भला कोण रक्षा करे इनकी अब तो इनकी ज़िन्दगी के मालिक श्री राम hi है

राम

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कहानी स्लो चलेगी दोस्तों हफ्ते 2 अपडेट hi दे पाउँगा इस लिए गुस्सा न हो न

शुक्रिया🙏🙏🙏
 
अपडेट -1

सुमित की आवाज़ को दिरकिनार करता हुआ राम उन दहशतगर्दो की बिच पहुंच कर बोलै

राम- अरे वो छोड़ बच्चे को और तुम्हे पता नहीं ये तुम्हारा गाओं नहीं है यहाँ चौधरी रहते है

आदमी- ोये बच्चे अपने काम से काम रख वर्ण यही काट के फैक दूंगा समझा और कोण चौधरी जो हर साल मु की खाते है हमारे साब से

अभी राम कुछ कहे की सुमित उसके पास आ कर बोलै

सुमित- के करे है मंद बुद्धि एक तो वैसे hi तै तेरे पे छड़ी रेहवे है और जे यो बवाल करेगा तो खून पिजावेगी तेरा चल अड्डे ते

Admi-tere से समझदार तो तेरा ये दोस्त है चल निकल वर्ण तेरे साथ तेरी तै पे भी छड्ड जाऊंगा वैसे भी साली बड़ी मस्त है

राम- हे प्रभु माफ़ करना पैर अब तो दिमाग हैंग हो hi गया है( सर पैर हाथो से मारते हुए बोलै)

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आदमी- अरे यो तो बिना पिटे hi बावला हो गया रीई aaaahhhhhhhhhhh

क्या हुआ क्यों हुआ और कैसे हुआ सबकी समझ से बहार था बस देख ने वालो ने उन दहसत गार्डो को गोल गोल घूम कर ज़मीन पैर गिरते देखा जिन में दोबारा उठ ने का सहस और हिम्मत दोनों नहीं बची थी

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राम- दोबारा इस गाओं में दिखे न तो दुनिया में नहीं दिखोगे समझे

सुमित- हां सब समझ गए मेरे बाप अब जल्दी से निकल अड्डे ते कड़े तै के किसी मुखबिर ने देख लिया तो यहाँ से जायदा बवाल होगा जिस में हालत तेरी hi ख़राब होगी समझा

राम- फत्तो है तो सच में तै मेरी है ार गांड तेरी फटी जारी से चल देखु के कहवे है जो बुलावा भेजा से

सुमित राम को उसके घर छोड़ के अपने घर की और खिसक ये कहते हुए की उसे घर में काम है तो राम वह से सीधा अपनी तै के कमरे की तरफ बढ़ गया जहा काय पीठ किये अपने ब्लाउज का हक़ लगा रही थी

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राम जैसे hi भीतर घुसा सामने का नज़ारा देख कर वापस बहार आ गया और आवाज़ लगा कर बोलै

राम- तै जी कुछ काम था के जो बुलावा भेज के बुलाया से

राम की आवाज़ सुनते hi काय गुस्से में चिल्लाते हुए बहार आयी

काया- हां आरती उतारनी थी तेरी

राम- तो उतार लो खड़ा हु आप के सामने

काया- जायदा जुबान चला रहा है तुझे कहा था खेत से सब्ज़ी लेकर आना कहा है सब्ज़ी

राम- सब्ज़ी सुबह hi ले आया था रसोईघर में राखी है पैर आप को दिखी नहीं होगी क्युकी जब तक आप चार सुना न लो आप के दिल को ठंडक नहीं मिलती

काया- क्या कहा तूने में बेमतलब बोलती हु पागल हो में देख आज में तेरा क्या हाल करती हु मनहूस कही के माँ- बाप मर गए और इसे हमारी छाती पे छोड़ गए

राम- आखिर आप की परेशानी क्या है तै क्यों चिढ़ती हो आप मुझसे क्या बिगाड़ा है मैंने आप का अपने माँ- बाप का दिया खता हु म्हणत कर के

काया- बड़ा आया माँ- बाप वाला उन्हें तो पहले खा गया अगर तेरा नाम न लिखा होता बुड्ढे ने वसीयत में तो कब का बहार निकाल फेकती तुझे इस घर अब जा मेरी नज़रो से दूर हो जा

राम- जा रहा हु मुझे भी कोई शोक नहीं है आप की जाली कटी सुन का

राम के जाते hi काय बड़बड़ाने लगी अपने कमरे में

काया- मनहूष कही मेरी खुसियो को खा गया माता पिता इस के मरे और पति मेरा सदमे में ऐसा खोया की हाथ भी नहीं लगता जिस्म जैसे की में बुद्धि हो गयी हु क्या मेरी कोई जरुरत नहीं पैर उन्हें तो कुछ दीखता hi नहीं हुऊ

राम अपने कमरे में जा कर लेत गया और अपने माँ बाप के बारे में सोच ने लगा की अगर उसके माँ बाप ज़िंदा होते तो ज़िन्दगी कितनी सरल और सुखी होती वो ये सब सोच hi रहा था की शांति कमरे में आयी

शांति- क्या हुआ मुँह क्यों लटकाया हुआ है जनाब

शांति की आवाज़ सुनकर राम की नज़र अपनी चची पैर पड़ी तो गोरी खायी दिखी जिसे एक टूक देख ने लगा तो शांति ने उसकी नज़र का पीछा किया और पाया की झुक ने की वजह से उसका पल्लू सरक गया था जिस से उसकी गोरी चूचियों की झलक दिख रही थी जिसे सही करते हुए बोली

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शांति- ो राम बाबू चाय पिलो जायदा ध्यान न भटकाओ

ऐसी हलकी फुलकी झाकिया तो दिख जाती थी राम को जिसकी खबर शांति को भी थी तभी दोनों में लगाव भी था

राम- ऐसा कुछ नहीं चची वो अनजाने में माफ़ कर दो( चाय का कप उठा ते हुए बोलै)

शांति- मैंने कुछ कहा तुम्हे अगर देख भी लिया तो क्या हुआ तुम तो मेरे प्यारे बाबू हो न

यही प्यार था जिस के चलते कई बार राम घर छोड़ ने की सोच कर भी नहीं छोड़ पता था

राम- मुझे पता है चची आप बहुत दुलार करती हो तभी तो में भी यहाँ रुका हुआ हु वर्ण कब का भाग जाता यहाँ से

शांति - पता है जनाब और इस के लिए हम आप के शुक्रगुज़ार है वर्ण आपको भी पता है दीवारों के इस मकान है hi क्या

राम- एक तो न चची तुम सत्य मत हो जाया करो हस्ती हुई अछि लगती हो आप

शांति- हस्ती हुई या झुकी हुई बदमाश कही के ( झुक कर चाय का कप उठाते हुए बोली )

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हसी हसी में शांति इस बार कुछ जायदा hi झुक गयी जिसे देख ऐसा लगा मनो अभी बहार आ जाएँगी ब्लाउज को फाड़ के जिन्हे न चाहते हुए भी राम उन में खो सा गया तो शांति उसे छेड़ते हुए बोली

शांति- अगर दिल भर गया हो तो में जाऊ या और देख ने का मैं है

राम- क्या है चची क्यों तंग कर रही हो मैंने थोड़ी कहा की आप ऐसे दिखाओ मुझे

शांति- ाचा जी आंखें भी शेक ली जनाब ने और इलज़ाम भी हुई पैर

राम- कोई आंखें नहीं शैंकी मैंने वो तो आप सामने झुकेगी तो नज़र तो जाएगी hi इस में में क्या करू फिर सॉरी

शांति- बड़ा प्यारा है रे तू तभी तो तेरे साथ वक़्त बिताना ाचा लगता है मुझे चल अब तू आराम कर में भी जाती हु

चची की बात सुनकर राम भी मुस्कुराता हुआ वैसे hi आंखें बंद कर के लेत गया जबकि उसकी तै कमरे में जाते hi उलटी लेत गयी और रोनी सीई शकल बना कर सोच ने लगी

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काया- क्या करू में इस बेचैनी का जो काम होने का नाम hi नहीं ले रही दिन बा दिन बढ़ती जा रही है

काया के जिस्म की गर्मी आज कल उसे बहुत परेशान कर ने लगी थी जिसकी गर्मी में बेसूद सीई काय के हाथ कब उसकी नंगी छूट पैर पहुंचे उसे पता भी न चला वो तो बस उसे छेड़ती रही की शायद कुछ सकूं मिल जाये

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काय चाहे जैसी भी थी पैर इस वक़्त कोई उसकी गुलाबी छूट देख ले तो पागल हो जाता आखिर वो थी hi इतनी कामुक वो भी उम्र के इस पड़ाव में

छूट से खेलती काया की सिसकिया निकल ने लगी थी जिस में खोटी वो छूट के अंदर ऊँगली कर ने लगी और मैं hi मैं बाद बड़ा ने लगी

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काया- आअह्ह्ह मम्माआआ सस्शह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह कितना आराम मिल रहा है काश वो होते तो उनका पूरा लुंड घुसवा के खुद जोर जोर से चुदती आआह्ह्ह्ह सससआहहह कहा हो तुम आ जाओ ना देखो तुम्हारी काया कैसे तड़प रही है आआह्ह्ह्हह आआआहहहहह मममममाआआह्ह्ह्हस्स्शह्ह्हह्ह्ह्ह

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आज कई दिनों बाद काया ने अपनी छूट को सहलाया था जिस वजह एक अलग hi सकूं मिल रहा था उसे जिस में खोटी वो न जाने कितनी देर यही अपनी छूट को जोर जोर से मसलती रही और आखिर कार उसकी छूट ने आँशु टपका hi दिए

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अपडेट - 2

राम अपने कमरे मस्त सोया हुआ था की उसे कुछ आवाज़ सुनाई दी तो वो निचे आया और आवाज़ की तरफ बढ़ ने लगा निचे कुछ लोग खड़े थे जिन्हे पीहू धमका रही थी

पीहू- जायदा नखरे कर ने की जरुरत नहीं जाओ और खेत पैर काम करो कोई छुट्टी नहीं मिलेगी समझे तुम सब

औरत- मगर छोटी मालकिन मेरी बहु का आखिरी महीना चल रहा है उसे सेहर लेके जाना है हमारी मज़बूरी तो समझिये आप

राम इनकी बात सुनता हुआ इंटक पंहुचा तो उस औरत को कुछ उम्मीद नज़र आयी जिस के पास पहुंच कर राम बोलै

राम - क्या हुआ काकी क्या बात है आप सब यहाँ और छुट्टी चाहिए थी तो चाचा जी बोल देती वो खेत पैर hi तो है

पीहू- तुझे बिच में बोल ने के लिए किस ने कहा मनहूस कही के

राम- में आप से बात नहीं कर रहा पीहू दी मैंने काकी से पूछा है वैसे भी खेतो के बारे में आप कुछ नहीं जानती हां तो काकी बोलिये आप ने चाचा जी से क्यों नहीं बोलै

औरत- बड़े साहब तो आज सुबह से hi पीकर पड़े है राम बाबू

राम- कोई नहीं आप जाओ में संभल लूंगा

पीहू- बहुत जुबान चला रहा है रुक अभी माँ को बुला कर लाती हु तब पता चलेगा तुझे

गुस्से में पाँव पटकती हुई पीहू अपनी माँ के कमरे की तरफ भागी जो अपनी छूट की गर्मी निकाल ने के बाद बेसुध अपनी मोती गांड आंधी करे सोई पड़ी थी

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पीहू- माँ ो माँ उठ देख राम क्या कर रहा है

काय ने तो उसकी आवाज़ नहीं सुनी पैर प्रिय के कानो में उसकी आवाज़ पड़ी तो वो अपने कमरे से hi उसकी तरफ देखते हुए बोली

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प्रिय- माँ सोई है क्यों चिल्ला रही है जब उठेगी तब बात कर लियो

पीहू प्रिय की आवाज़ सुनकर उसकी तरफ पलट कर देखते हुए बोली

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पीहू- आप को तो कोई फ़िक्र है नहीं घर की अब किसी को तो करनी पड़ेगी न

प्रिय- ऐसी क्या फ़िक्र कर रही हो जरा में भी तो सुनु

पीहू- वो मनहूस घर का मालिक बन ने की कोशिश कर रहा है चाचा और माँ से बिना पूछे मजदूरों को छुट्टी बात ता फिर रहा है

Priya-pehli बात वो भी इस घर का सद्श्ये है न की मनहूष समझी थोड़ा तमीज से बात कर न भी सीखो और दूसरी बात जो शायद तुम्हे पता न हो तो में बता देती हु दादा जी ने उसे hi वारिस बनाया है अपना कागज़ो में जिसे तुम सब लावारिश की तरह ट्रीट करते हो

पीहू- ओह बहुत बहुत शुक्रिया इतना ज्ञान देने की लिए वैसे आप क्यों इतना साइड ले रही हो उस मनहूस की कही प्यार तो नहीं हो गया उस से ( कामिनी मुस्कान देते हुए बोली )

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प्रिय- शट उप बतमीज़ कही की वो भाई है हमारा चाहे मानो या मत मानो और दोबारा मुझसे ऐसे बात की न तो मुँह तोड़ दूंगी मुझे राम मत समझना जो सब कुछ चुप चाप सेह लेता समझी अब निकल यहाँ से

प्रिय का गुस्सा देख कर पीहू से कुछ कहते न बना तो वो अपने कमरे में चली गयी डाट पिस्टे हुए जब की राम वह से सीधा सुमित के घर पंहुचा पैर जैसे hi घर का दरवाज़ा अंदर को दबाया तो सामने का नज़ारा देख कर आंखे बड़ी हो गयी क्युकी सामने कजरी पूरी नग्नावस्था में मुँह पैर ऊँगली रखे एक हाथ अपनी चुकी छुपाये राम को देख रही थी पैर राम की नज़र तो उसकी काली कुंवारी दो फाको के बिच लकीर सी खींची हुई छूट पैर तिकी हुई थी

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राम को यु अपनी छूट को निहारता देख कजरी अंदर कमरे में घुस गयी उसे बैठ ने का बोल कर मगर राम तो हैंग सा हुआ पड़ा था हलकी फुलकी चूचियों की झलक तो उसे अक्सर शांति के साथ मिल जाती थी पैर आज उस ने वो चीज़ देख ली थी जहा समस्त जहां समै जाना चाहता है उसकी निन्द्र टूटी जब कजरी कपडे पहन कर बहार आयी और उसे देखते हुए बोली

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कजरी- क्या हुआ राम कहा खोये हुए हो

राम- का कही नहीं में तो सुमित को बुलाने आया था माफ़ करना मुझे नहीं पता था आप अंदर ऐसी हालत में हो

कजरी- ाचा जी तभी मुझे खा जाने वाली नज़रो से देख रहे थे पैर मुझ काली में ऐसी कोई ख़ास बात नहीं है राम बाबू

राम- नहीं नहीं वो बस एक दम से आपको ऐसे देखा तो समझ नहीं पाया की क्या हो गया और हर इंसान अपने आप में ख़ास होता है वैसे hi आप भी हो

कजरी- ाचा तो में भी जानू मुझ में क्या ख़ास है जो मुझे भी नहीं पता चला आज तक ( राम की आँखों में देखते हुए बोली )

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राम- आप की गहरी मोती मोती आंखे और आप के ये पतले होठ

कजरी- झूट मत बोलो तुमने मेरी आंखे और होठ कहा देखे तुम तो मेरी मुनिया को देख रहे थे हां वैसे चाहो तो अब मेरे होठ छू कर भी देख सकते हो में किसी को नहीं बोलूँगी

कजरी भी जवानी की आग में जल रही काले रंग की वजह से एक तो शादी नहीं हो रही थी ऊपर से चढ़ती जवानी उसे रोज़ उक्षा रही थी की कुछ तो कर कब तक जलती रहेगी इसलिए आज घर में किसी के न हो ने से उसे राम में उसकी गर्मी को ठंडा कर ने का जरिया दिख रहा था

राम- नहीं मुझे नहीं छू ने आप के होठ में चलता हु सुमित आये तो बोल देना

राम से इस जवाब की उम्मीद नहीं थी कजरी को पैर वो ये मौका भी गवाना नहीं चाहती थी इसलिए ेमोस्टिओनल कार्ड खेलते हुए उदास चेहरा बना कर राम को देखते हुए बोली

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कजरी- देखा तुम भी मेरे काले जिस्म को छू ने से गहहिं कर रहे हो जाओ मुझे पता है सब मुझसे गहहिं करते है तुम भी वैसे hi निकले मुनिया को बड़े घर कर देख रहे तब घिन नहीं आयी

राम- ऐसा नहीं आप गलत सोच रहे हो आप सुमित की बड़ी बहिन हो तो मेरे लिए भी बड़ी बहिन हुई न

कजरी- तो में कोण सा कुछ गलत कर ने को बोल रही हु सिर्फ होठ छू ने को hi तो बोलै न

राम दुविधा में फास गया और न चाहते हुए भी कजरी के पतले होठ पैर अंगूठा फेरते हुए बोलै

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राम- देखो कितने सॉफ्ट है अब खुश अब तो छू लिया मैंने आप के होठो

बात यही ख़तम हो जाती तो क्या बात होती राम का छू न कजरी के पुरे जिस्म चीटिया सी रेंग ने लगी राम कुछ समझता या कहे की कुछ कहता कजरी झटके से उसका चेहरा अपने हाथो में थाम लिया और अपने होठ राम के होठो पैर छोटा सा चुम्बन जड़ दिया और उसकी आँखों में देखते हुए बोली

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कजरी- लड़की के होठो ऐसे छुआ जाता है राम क्या तुम फिर से छू न चाहोगे मुझे सच में कुछ नहीं कहूँगी तुम्हारा जहा मैं हो छू लो

राम- आप पागल हो गयी है आप को पता भी आप क्या करना छह रही है क्या होगा जब सुमित को पता चलेगा क्या सोचेगा वो मेरे बारे में छी मुझे तो सोच कर hi घिन आ रही है हटिये मुझे जाना है

इतना कहते hi राम वह से चला गया कजरी की बात सुने बिना hi जबकि कजरी के होठो पैर एक अलग hi मुस्कान आ गयी

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अपडेट-3

हो गयी तसल्ली नहीं मन न वो मैंने पहले hi मना किया था पैर आप हो की ज़िद करती हु घर के अंदर से बहार के हॉल में आते हुए सुमित बोलै

(कुछ वक़्त पहले)

दरसल कजरी ने जब राम को उनके घर की तरफ आया देखा तो ये सब प्लान किया था पैर अफ़सोस कुछ हो नहीं पाया

अब आगे

कजरी - जायदा ज्ञान मत दे समझा न अगर तू किसी काम का होता न तो मुझे ये सब कुछ कर ने की जरुरत न पड़ती और वैसे भी तूने वो नहीं देखा जो मैंने महसूस किया समझा

सुमित- ऐसा क्या महसूस कर लिया जरा मुझे भी तो बताओ और आप हर उसी बात का ताना क्यों देती हो कभी दोबारा मौका दिया आप ने मुझे

कजरी- वही महसूस किया जो तेरे पास नहीं अभी भी नहीं समझा तो सुन जो उसके पास है न उसे लुंड कहते है वो भी तगड़े वाला न की तेरे जैसी मूंगफली और क्या मौका दू तुझे कच्ची तक पहुंचते hi तो तू जड़ जाता है ढीले कही के हैट मुझे नाहा ने दे बड़ा आया मौका दो

सच hi तो कह रही थी कजरी राम बेशक दोस्ती के नाते या फिर शर्म से यहाँ से चला बेशक गया था पैर कजरी के जिस्म और फिर उसके चुम्बन से उसके उस अंग कड़क पैन तो जरूर आया था जिसकी दस्तक कजरी को अपनी ुंचुड़ी कुंवारी छूट पैर महसूस हुई तभी तो उसके होठो पैर वो कातिल मुस्कान आयी थी की आज न सही फिर कभी पैर राम का लुंड उसे मिलेगा जरूर

वही राम सुमित के घर से निकल अखाड़े की तरफ चल दिया जिस्म में भड़ती गर्मी लिए उसके दिमाग अभी भी कजरी का नंगा जिस्म और उसके मुलायम होठो की मिठास घूम रही थी उसे समझ hi नहीं आ रहा था की आखिर आज पहली बार क्यों उसके लिंग में इतना तनाव आया यही सब सोचता हुआ बो अखाड़े में पंहुचा पता भी न चला जिसे यु गम शूम देख उसका उस्ताद उसके कंधे पैर हाथ मरते हुए बोलै

उस्ताद- के बात चोरे घाना चिंतित लग रा सा

राम- कुछ नई उस्ताद जी ठीक सु बस गर्मी घनी लाग ऋ से आज ( अपनी सोच से बहार आते हुए बोलै )

उस्ताद- आ फेर तेरी गर्मी का इलाज करे ( हाथ पकड़ के अखाड़े में ले जाते हुए बोलै )

राम चुप चाप उस्ताद के साथ अखाड़े में चला गया जहा न जाने कितनी देर जोर आजमाइश कर ने के बाद वो घर की और चल दिया घर पहुंचते hi वो सीधा आंगन से होता हुआ बाथरूम की तरफ गया और अपनी शर्ट खोल कर नल चालू कर के पेण्ट उतार ने hi लगा था की गुस्से भिनभिनाती हुई काय वह आयी वो उसे कुछ कह ने hi वाली थी की उसकी नज़र उसकी छोड़ी छाती और गठीले बदन पैर पड़ी तो वो एक तुक उसे देख ने लगी जो अपनी सोच में गम सा खड़ा हुआ था

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राम को नहीं पता था की काय उसे देख रही है वो तो अभी कजरी के जिस्म में खोया अपने कपडे उतार ने में लगा हुआ था जब की काय आज पहली बार उसके नंगे जिस्म को देख रही जिसे देख कर न जाने क्यों उसका हाथ अपनी छूट तक जा पंहुचा की तभी राम ने पेण्ट उतार दी जिसके उतारते hi काय के सामने कच्चे में बंद वो मुसल नज़र आया जिसका आकार देख कर उसके पाँव काँप ने लगे और छूट में गीलापन आने लगा

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उसे देख ने के बाद काय का सारा गुस्सा हवा हो गया और वो घबराती हुई से वह से भाग कर अपने कमरे में गयी जहा पीहू उसका इंतज़ार कर रही थी जो अपनी माँ के आते hi बोली

पीहू- क्या हुआ माँ तुम्हे इतना पसेना क्यों आ रहा है

काय- हां क्या नहीं कुछ नहीं तू जा में ठीक हु

पीहू- आप ने उस मनहूस राम को झाड़ लगायी या नहीं

राम का नाम सुनते hi एक बार फिर काय की नज़रो में वो मुसल घूम ने लगा जिसे देख ने मात्र से उसकी छूट रोने लगी थी

पीहू- माँ क्या हुआ आपको क्या सोच रही हो में कुछ पूछ रही हु आप से

काय- क्या है हर वक़्त क्यों पीछे पड़ी रहती है उसके बाद में में समझा दूंगी में उसे वो अभी नाहा रहा है

पीहू को अपनी की बात सुन कर झटका सा लगा और वो काय को एक टूक देखते हुए बोली

Pihu-ye क्या बोल रही है आप कही उसने आप से भी तो हां पक्का यही हुआ उसे तो न में बताती हु अभी उसकी इतनी हिम्मत की वो मेरी माँ से ( अभी कुछ और कहती की काय बोली )

काय- अरे उसने कुछ नहीं कहा तू शांत रह बस मेरी थोड़ी तबियत ख़राब है इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा बाद में बताती हु उसे ठीक है अब तू जा मुझे खाना बनाना है

पीहू- तो ऐसे बोलो न आप ने तो द्र hi दिया था वैसे माँ में क्या कह रही थी क्यों न हम उसका नाम मेले में हो ने वाली खुलती में लिखवा दे फिर हमेशा के लिए उस मनहूस से छुटकारा मिल जायेगा क्युकी उस खुलती में तो जो भी लड़ता है वो पक्का मरता hi है

छाडट्ट्टाक्कककककक एक जोरदार थप्पड़ पीहू के गाल पैर पड़ता है जो किसी और ने नहीं खुद काय ने मारा था

काय- चुप कर कामिनी तूने ऐसा सोचा भी कैसे मन में उसे पसंद नहीं करती उसे जाली कटी सुनती हु पैर ये भी सच है की वो इस खानदान का आखिरी वारिश है और तू उसे hi मरवाने की बात कर रही है ख़बरदार अगर ऐसा कुछ सोचा तो अब जा यहाँ से

पीहू को यकीन hi नहीं हुआ की उसकी माँ ने राम के लिए उसका गाल लाल कर दिया पैर कुछ कह ने की हिम्मत भी न कर पायी अपनी माँ गुस्सा देख कर इसलिए गाल को सहलाती वो अपने कमरे में चली गयी जिसके जाते hi काय खुद से बड़बड़ा ने लगी

काय- करम जाली जान से मरवाने की बात कर रही है मानती हु नफरत करती हु उस से क्यों की उसे देखते hi मुझे वो मनहूष दिन याद आ जाता है जब उसके माँ बाप की मौत की खबर आयी थी जिसके बाद से उन्होंने कभी मुझे हाथ नहीं लगाया तनहा छोड़ दिया एक दम से वर्ण आज में ऐसी न होती पैर इस का मतलब ये तो नहीं की में उसकी जान ले लू क्या में इतनी पापी हु ( खुद से बाते करते हुए बुदबुदाने लगी )

रात हो चुकी थी राम का चाचा आज भी घर नहीं आया था पाइक टुन्न पड़ा था खेतो पैर जिसका खाना मजदूर आ कर ले गया था और राम खाना खाने के बाद अकेला छत्त पैर खड़ा सामने देखते हुए अपनी सोच में गम था

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तो वही निचे शांति दूध गरम कर रही थी की वह काय आ गयी जिसे देख कर शांति बोली

शांति - आप क्यों तंग हुए दीदी में बस ला hi रही थी

काय- अरे कोई बात नहीं में जाग रही थी तो आ गयी तू बता खाना खा लिया ना

शांति- जी दीदी खा लिया वैसे आप से कुछ बोलो आप गुस्सा तो नहीं करेंगी

काय - नहीं बोल गुस्सा क्यों करूंगी

शांति- में आप से हमेशा पूछती हु आप राम पैर इतना गुस्सा क्यों करती हो वो तो पहले hi खुद को अनाथ सा महसूस करता है

काय- में क्या करू शांति उसे देखते hi मुझे वो मनहूष दिन याद आ जाता है और फिर में खुद पैर काबू नहीं कर पाती पैर तू तो उसे प्यार करती है तो वो अनाथ क्यों महसूस करता है

शांति- में कुछ सालो से हु उसके साथ आप तो उसके पैदा होने से साथ हो शायद आप का प्यार न मिल पाने की वजह से वो ऐसा सोचता हो इसलिए दीदी गुस्सा काम किया कीजिये कही ऐसा न हो किसी दिन कुछ कर बैठे खुद के साथ कई बार तो घर छोड़ कर जाने की बात करता है कहता में रहूँगा hi नहीं तो तै को तकलीफ hi नहीं होगी

आज पहली बार शांति ने बहुत प्यार से हिम्मत कर के काय को समझने की कोशिश की थी वर्ण वो भी काय से दरी हुई सीई रहती थी पैर आज उसने जब पीहू के गाल पे थप्पड़ रसीद होते देखा तो उसे लगा की शायद दीदी को समझाया जा सकता है

काय- कही नहीं जाने वाला वो आज से नहीं बचपन से झाड़ती आ रही हु उसे तुम फ़िक्र मत करो वैसे तुम्हे याद है कल उस का 18 व जन्मदिन है

शांति - इतनी नफरत के बाद भी उसका जन्मदिन याद है आप को पैर उसे कभी बधाई तक नहीं देती सच में आप मेरी समझ में तो नहीं आती

काय- समझ जाएगी धीरे धीरे ला दूध दे वर्ण प्रिय दूध पिए बिना hi सू जाएगी

शांति से दूध लेकर काय चली गयी तो शांति राम के लिए दूध लेकर उसके कमरे में गयी जहा उसे न पा कर उसने दूध को वही टेबल पैर रख दिया और छत्त की और चल दी जहा राम अकेला खड़ा हुआ किसी सोच में गम था जिसे शांति के आने का भी आभास न हुआ

शांति- क्या बात राम बाबू किन खयालो में खोये हो जो मेरे आने तक का पता न चला ( प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए)

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राम- अरे चची आप नहीं कुछ नहीं बस वैसे hi आ गया था ( सोच से बहार आते हुए बोलै)

शांति- ाचा तो अब अपनी चची से भी झूट बोलोगे सच बताओ मुझे सिर्फ सच सुन्ना है समझे तुम

राम- वो चची अब कैसे बताऊ आप को

शांति - मुँह से बोलकर और कैसे

राम - वो चची आज में सुमित के घर गया था और वह( सब कुछ एक सांस में बोल कर सर घुमा कर खड़ा हो गया)

शांति- बस इतनी सी बात पैर इतनी देर से गुमसुम से थे पागल मुझसे पूछ लेते देखो अब तुम जवान हो रहे हो इसलिए तुम्हे ये सब महसूस हुआ जो की सुवाभिक भी है इस उम्र क्युकी ये जिस्म की जरुरत है

राम- इतना भी नादान नहीं हु चची पैर खली देख ने मात्र से ऐसा क्यों हुआ वो समझ नहीं आ रहा ऐसे तो आप भी छेड़ते रहते हो मुझे कभी कभी तब तो ऐसे नहीं हुआ

शांति- वो इस लिए हुआ क्युकी तुमने उसके उस हिस्से देख लिया जो की तुमसे विपरीत है इसलिए उसे देख कर तुम्हारे मैं में उत्सुकता जाएगी उसे छू ने की पैर तुम बहुत नेक हो इसलिए बिना कुछ किये आ गए वर्ण कोई और होता तो उसे वही पटक कर च......( आगे के शब्द नहीं बोल पायी शांति भी )

राम- क्या च चची क्या करता बताओ न

शांति- कुछ नहीं निचे चलो बहुत रात हो गयी है कल मंदिर भी जाना है न पूजा के लिए
 
अपडेट -4

राम को सोने का बोल कर शांति भी अपने कमरे में जा कर सू गयी आज ये रात अपने साथ कई बदलाव लेकर जिसका असर सभी की ज़िन्दगी पैर पद ने वाला था

सुबह की पहली किरण के साथ hi राम की आंख खुली और वो नियम अनुसार अखाड़े की तरफ निकल गया म्हणत कर ने के लिए जहा उसका उस्ताद कुछ गंभीर मुद्रा में बैठा हुआ था जिसे देख कर राम उसके पास चला और चरण स्पर्श करते हुए बोलै

राम- क्या हुआ उस्ताद जी सुबह सुबह किस सोच में गम हो

उस्ताद- तुमसे क्या छुपाऊ राम सच तो ये है की मेला आने वाला है और कोई भी पहलवान इस बार खुलती नहीं लड़ना चाहता सब को दर है की इस बार भी ठाकुर जान से मरने के इरादे से hi अखाड़े में उतरेगा बस यही चिंता शता रही है की अब की बार हम बिना लाडे hi हार जायेंगे जिस से ठाकुर का दबदबा बढ़ जायेगा गाओं पैर जो किसी भी नज़रिये से गाओं के हिट में सही नहीं होगा

राम- बस इतनी सी बात उस्ताद जी मेरे नाम का एलान करवा दो

उस्ताद- नहीं मेरे बच्चे तुझे कैसे उन राक्षशो के आगे कर दू तू मेरा लाडला सहगिर्द है अगर तुझे कुछ हो गया तो में खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाउँगा

राम- जब प्यार करते हो तो भरोषा रखो उस्ताद जी सर नहीं झुक ने दूंगा आप का बस आप मेरे नाम का एलान करो आप को मेरी कसम और अब इस बात पैर कोई बहस नहीं में चलता हु मुझे चची के साथ मंदिर जाना है

उस्ताद- कसम देने की क्या जरुरत थी पगले क्यों तू हमेशा ऐसी ज़िद्द करके मुझे मजबूर कर देता है जा अब

राम हस्ते हुए जाने लगता है है तो उस्ताद उर्फ़ (शमशेर) उसे वापस आवाज़ देकर बुलाता है

उस्ताद- जन्मदिन की बधाई हो मेरे बच्चे माँ काली सदैव तुझे पे कृपा बनाये रखे

राम- शुक्रिया उस्ताद जी

शमशेर का शक्रिया ऐडा कर राम वह से घर की और निकल जाता है जहा काय अपने कमरे में कड़ी खुद के जिस्म को निहार रही थी

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काम देवी सा सवरूप काय को और भी कामुक बना रहा था जिसे कोई भी देखे ले तो उसके जिस्म के हर आंग को चुम ने की कोशिश करे जिसे धीरे धीरे काय कपड़ो से ढकती जा रही थी और मैं hi मैं मुस्कराती हुई वो आज खुद खूब सवार रही थी

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कुछ hi पालो में वो गदराया जिस्म कद्दू की चादर में धक् चूका था जिसके बाद काय ने हार श्रृंगार किया और अपने कमरे की बालकनी पैर कड़ी हो गयी क्युकी ये समय राम के वापस आने का था और वो बस एक झलक राम को देख न चाहती थी आज उसके अंदर कदुर भाव न जाने कहा खो गए थे वो तो बस नज़र गड़ाए राह देख रही थी जिस से उसकी भर भरकम गांड और भी उभर कर क़हर ध रही थी जिसे देख के हर मर्द का हाथ खुद बा खुद लुंड पैर चला जाये और दिल से एक hi आआह्ह्ह उउउउउफफ्फ क्या गांड है

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काय का इंतज़ार ख़तम हुआ और राम उसे घर वाले रस्ते पैर दिख गया जिसे देख कर काय को कल वाला मंज़र याद आ गया जिस से उसकी छूट में गीलापन आने लगा और वो न चाहते हुए भी वह से हैट गयी और बीएड पैर बैठ के तेज़ तेज़ सांसें लेते हुए बड़बड़ा ने लगी

काय- ये सब क्या हो रहा है मेरे साथ क्यों में उसे देख कर कण्ट्रोल नहीं कर पा रही जब की उसे देखते hi मुझे गुस्सा आता था आखिर क्या हो गया अगर मैंने उसे इस हालत में देख लिया आखिर है तो वो अभी बच्चा hi

दिल- बच्चा कह रही है देखा नहीं था या याद नहीं है जिसे तू बच्चा समझ रही अगर वो बच्चा तुझ पैर चढ़ गया न तो तेरी चीखे निकलवा देगा समझी

काय- हूँ बड़ा आया. चीखे निकलवा ने वाला मुझे देखते hi हवा टाइट हो जाती है उसकी

दिल- फिलहाल तो तेरी छूट की हवा निकल रही है उसे संभाल

काय अपनी सोचो में गम थी जबकि राम इतनी देर में नाहा धोकर तैयार हो चूका था और अब वो अपनी चची के साथ मंदिर जाने वाला था की तभी एक काला कोट पहने बुजुर्ग सा व्यक्ति हवेली में दाखिल हुए बोलै जिसकी आवाज़ सुनकर काय भी निचे दौड़ी आयी

आदमी - परनाम छोटे चौधरी में ( मदन ) आपके पिता जी का वकील

अभी कोई कुछ कहता की काय बिच में बोल पड़ी

काय - परनाम कहिये क्या काम है आपको

मदन- जी वो राम जी के पिता जी ने इनके नाम कुछ जायदा की थी जो इन्हे 18 होने पैर मिलनी थी और आज ये 18 के हो गए है तो वही में लेकर आया हु इसलिए मुझे इनसे कुछ बात कर नई है अकेले में अगर आप सब इज़ाज़त दे तो

अकेले में बात कर ने का सुन्न कर काय और शांति का चेहरा उतर गया और वो वापस जाने लगी तो राम आगे बढ़ कर बोलै

राम- ये कोई पराये नहीं है जो भी बात कर नई है इनके सामने hi कहिये तै जी आप बैठिये यही आज तक सरे फैसले आप ने किये है तो ये क्यों अधूरा छोड़ कर जा रही है

राम की बात सुनकर आज काय को खुद पैर बहुत गुस्सा आ रहा था की जिस के साथ वो परयो जैसा बर्ताव कर रही थी आज वो उसे सब के सामने प्यार और इज़्ज़त दे रहा है तो चुप चाप बैठ गयी तो राम ने वकील को आगे बता ने का इशारा किया

मदन- ठीक है जैसी आपकी मर्ज़ी तो सुनिए आप के पिता को ये एहसास था की उनके कोई दुर्घटना हो सकती है इस लिए उन्होंने आप के नाम सेहर एक खता खुलवाया था जिस में उन्होंने आप के नाम 1.5 करोड़ की फड़ करवाई थी जिसकी कीमत अब 3 करोड़ है जिस के साथ hi उन्होंने एक घर भी लिया था सेहर में आप के लिए जिसके वारिश भी आप hi हो ये सब मुझे संभल कर रखने को कहा था तो आज में आपको आपकी ज़िम्मेदारी सप्त हु और ये चिट्ठी भी

सब कुछ राम को देकर वो वकील वह से चला गया जिसके बाद राम ने वो चिट्ठी खोली और पढ़ ने लगा

चिट्ठी में - मेरे बच्चे राम शायद जब ये चिट्ठी तुम्हे मिले तब तक तुम अपने पापा को भूल भी गए हो पैर में तुम्हे तुम्हारा हक़ सौपे जा रहा हु चाहत तो तो थी की तुम्हे बड़ा होते देखु पैर शायद ये मेरे नसीब में नहीं क्युकी कुछ अज्ञात लोग मेरे पीछे है इसलिए मुझे दर है की कभी भी कुछ गलत हो सकता है इसलिए मेरे बच्चे अपना ख्याल रख न और हां रोना तो बिलकुल भी नहीं आज मेरे शेर का जन्मदिन है तो ख़ुशी-2 मानना और हो सके तो क्सक्सक्सपुर का भी ख्याल रख न क्युकी जब रखवाला न हो तो गिद्ध हमला करते रहते है इसलिए सदीव चीते की तरह चौककना रहना तुम्हारा लाचार पिता ( अशोक )

चिट्ठी पढ़ते हुए राम उदास हुआ तो शांति जो उसके पीछे कड़ी चिट्ठी को पढ़ चुकी थी वो उसके कंधे को सहलाते हुए बोली

शांति- भाईसाब ने कसम दी है न की अपना ये जन्मदिन ख़ुशी से मानना तो फिर ये उदास चेहरा क्यों मेरे लाल चल अब मंदिर चल

वो दोनों जाने लगे तो काय आगे बढ़ कर बोली

काय - शांति क्या में भी चल सकती हु तुम्हारे साथ

शांति - हां दीदी क्यों नहीं बिलकुल ये तो और भी ख़ुशी की बात है क्यों राम

राम- हम्म्म( राम के मुँह से सिर्फ हम्म सुन कर काय बोली )

काय- शायद राम को ाचा नहीं लगा ऐसा करो तुम hi जाओ में घर में खाना बनवाती हु ाचा सा

काय जाने लगी तो राम उसका हाथ पकड़ते हुए बोलै

राम- ाचा आप को नहीं लगता तै जी इसलिए कुछ नहीं बोलै वर्ण चची से पहले तो आप ने hi देख भाल की है मेरी में तो हमेशा आप के अंदर अपनी माँ को देखता आया हु पैर आप ने कभी वो प्यार जातने hi नहीं दिया

राम की बातें सुनकर काय को अपने किये हुए शितम याद आने लगे और वो भीगी आंखें लिए राम की तरफ बढ़ी और उसे सीने से लगाया तो उसे बचपन का वो राम याद आया जो हमेशा उसके पास रहता था छोटा सा मासूम राम जिसे वो भी बहुत प्यार करती थी अपने गले से लगा कर वो सब याद करते hi उसकी आँखों से झरना बह ने लगा

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राम- बस माँ अब मत रोईए प्ल्ज़ चुप हो जाइये नई तो के केहवे माहरी भासा इत्ती बड़ी लुगाई ार झाकत तरिया रोवे है

राम की बात सुनकर उन दोनों की हसी छूट गयी तो राम भी हसने लगा और न जाने कितने दिनों बाद हँसा था

शांति- अब चले अगर भारत मिलाप हो गया हो आप दोनों का

काय - भारत मापूत मिलाप शांति मापूत

राम- माँ प्रिय और पीहू दी को भी बुला ले

काय - पीहू को छोड़ प्रिय को बुलाती हु पीहू कुछ समय लगेगा जैसे मुझे लगा है न प्रिय ो प्रिय निचे आए बीटा( काय की आवाज़ सुनकर प्रिय निचे आयी और तीनो को साथ खड़ा देख हैरानी से देखते हुए बोली )

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प्रिय- जी माँ कहिये किस लिए बुलाया आप ने

काय- मंदिर चल तेरे भाई का जन्मदिन है न आज तो पूजा करने जाना है

प्रिय- भाई क्या जो मैंने सुना वो सच है माँ या मेरे कान बज रहे है

काय - सब सच है मेरी बच्ची अब चले

प्रिय- पैर ये सब हुआ कैसे ो माय गॉड मुझे तो यकीन hi नहीं हो रहा पैर जैसा भी हुआ हो मुझे ख़ुशी है की अब आप इसे कुछ नहीं कहेंगी मुझे बहुत बुरा लगता था इसके लिए सच में

काय - जानती हु मुझसे भूल हुई जो इसे इतने साल तादाति रही तुम भी मुझे माफ़ कर दो मेरी गुड़िया

प्रिय - कोई नई माँ गलती इंसान से hi होती है खैर जन्मदिन मुबारक हो छोटे भाई पैर ये मुबारक बाद ऐसे नहीं मिलेगी आज तो स्पेसल दिन है और तुम्हे माँ भी मिली है तो जश्न तो बनता है

राम - जो माँ कहेंगी कर देंगे वैसे भी इनसे बिना पूछे तो आज तक भी कुछ नहीं किया फिर चाहे डाट खा के hi किया हो😜😜

काय- राम रुक तुझे में बताती हु

ऐसे hi हसी मज़ाक करते हुए चारो घर से निकल गए जिन्हे कोई बहुत गुस्से से देख रहा था जाते हुए

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अपडेट - 5

चारो मंदिर में पूजा कर ने के बाद जैसे hi मंदिर की सीढ़ियों से निचे उतर ने लगे तो सामने का नज़ारा देख कर चौक गए सामने पूरा गाओं इक्क्ठा था जो राम को देखते hi एक साथ उसके नाम के नारे लगाने लगे

राम बाबू ज़िंदाबाद छोटे मालिक ज़िंदाबाद

ये सब देख कर काय ने हाथ से सब को शांत रहने का इशारा तो सब शांत हो गए जिनके शांत होते hi शांति ने मुस्कुरा कर राम की तरफ देखा जैसे पूछ रही हो की ये सब क्या है

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काय- क्या बात है अब सब राम के नाम के नारे क्यों लगा रहे हो

आदमी- अरे बहुरानी आपको नहीं पता राम बाबू ने क्या किया है अरे उन्होंने अपने पिता चौधरी अशोक के नाम को आगे बढ़ाते हुए कुश्ती की लालकर दी है जिसे वो दिया करते थे जिसे सुनकर पुरे गाओं में खुसी की लहर दाऊद उठी है बड़ी बहुरानी हमारा मसीहा लौट आया अब ठाकुर के आदमी यहाँ अपनी दादागिरी नहीं चला पाएंगे अब कोई लड़की शानजह ढले घर में नहीं छुपेगी जय हो छोटे मालिक आप की सदा जय हो

इतना सुन न था की काय का मुँह खुला का खुला रह गया उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वो क्या कहे वो तो बस एक टुक्क राम को देखे जा रही थी

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जिसे यु सोच में डूबा देख राम hi उसे होश में लाते हुए बोलै

राम- माँ क्या हुआ आप ऐसे क्या देख रही है चलिए घर चलते है

काय- ये क्या किया तुम ने राम क्या तुम्हे नहीं पता वो लोग अखाड़े में खुश्ती नहीं हत्या कर ने आते है और तुम ने उन्हें hi लालकार दिया अगर तुम्हे कुछ हो गया नहीं नहीं तुम अभी अपना नाम वापस लो इस सब से में तुम्हे नहीं खो सकती

राम- मुझे कुछ नहीं होगा माँ आप बेकार में दर रही हो और फिर अब तो आपकी दुआ भी मेरे साथ होगी तो फिर दर कैसा

ये दोनों बात कर hi रहे थे की शांति मंदिर की और इशारा करके बोली

शांति- देखो दीदी प्रिय राम के लिए दिया जला रही है और फिर ें गाओं वालो को देखो जो कितने खुश है और दिल से राम को दुआए दे रहे है तो सोचो जिसके लिए इतने लोग दुआ कर रहे है उसे क्या hi होगा

काय का दिल तो नहीं मान रहा था पैर एक नज़र प्रिय को देखा जो अभी भी दिए को जलाये भगवान से प्राथना कर रही थी जिसे देख कर काय ने एक लम्बी सांस ली और राम का हाथ पकड़ कर घर की और चल दी

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वही दूसरी तरफ क्सक्सक्स गाओं में भी ये बात आग की तरह फ़ैल गयी की इस बार चौधरी घराने से ललकार आयी है जो बहुत सालो बाद हुआ था

इंट्रो :-

क्सक्सक्सक्सगाओं

ठाकुर वीर भान

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शकल से hi दरिन्दगी झलकती है आखिरी बार इसे hi हराया था अशोक ने ( राम के पिता ) जिस के बाद ये अखाड़े में तो नहीं उतरा पैर राम के पिता मारे गए और फिर ये तानासाही करते हुए क्सक्सक्सक्स गाओं को हारता आ रहा है एक नंबर का हरामी है जिसका असर इस के बेटे में भी झलकता है जो दिन भर दारु और लड़कीबाजी करता रहता है

मालती

वीरभान की पत्नी बहुत hi गरम औरत है ये और अय्याश भी

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सुहानी

वीरभान की बड़ी बेटी देखते hi पता चलता है की ये अपनी माँ से काम गरम नहीं है बस अभी तक लुंड नहीं ले पायी वर्ण ऊँगली करना तो इस का रोज़ का काम है

और छाती ऐसी की बस अभी बहार निकल आएँगी कई बार तो वीरभान भी ललचायी नज़रो से देख चूका है पैर बेटी समझ कर आगे नहीं बढ़ा

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विजय

वीरभान का लड़का दारू सिग्रेटे और लड़की बस यही काम आता है इसे

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सुरीली

वीरभान की बहिन जो विधवा है और इनके साथ hi रहती है गर्मी इस के जिस्म में भी काम नहीं है पूरी छुडासी है दिन में कई कई बार नदी के ठन्डे पानी में डुबकी मार के अपनी काम वासना को ठंडा कर ने की नाकाम कोशिश करती रहती है

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अब आएगी

जैसे hi ये खबर वीरभान तक पहुंची वो मुस्कुराते हुए बोलै

वीरभान- हम्म तो पिल्ला इतना बड़ा हो गया की काट ने को मचल रहा है तो ठीक है पिल्लै को कुत्ते की मौत दे दो बुलावा भेजो अशरफ को की इस बार वो लड़ेगा खुश्ती हमारे गाओं की तरफ से समझे जाओ अब यहाँ से

अशरफ

वीरभान का सबसे पुराण और वफादार आदमी जो न जाने कितने लोगो को मार चूका है आदमी तो नहीं कह सकते हां दरिंदा कह सकते हो आप

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वही राम और बाकि सब घर पहुंचे तो काय अपने कमरे में चली गयी वो बेचैन थी उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वो क्या करे जिस से की राम ये खुश्ती न लाडे यही सोचती बो जब अपने कमरे में पहुंची तो सामने पीहू कड़ी थी जो एक कुटिल मुस्कान देते हुए बोली

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पीहू- ओह्ह्ह माँ ये में क्या सुन रही हु आप नया नया लाडला बीटा खुश्ती लड़ने वाला है भगवान् उसकी आत्मा को शांति दे वैसे आप ने रोका नहीं उसे

पीहू की जाली कटी बाते सुनकर एक बार तो काय के मैं में आया की उसका मुँह नोच ले पैर खुद को काबू करती वो बोली

काय- तू अपना सोच समझी उसके लिए बहुत है दुआ कर ने को और अब जाए यहाँ से मुझे आराम कर न है

पीहू- हां आप आराम करो फिर न जाने कितने रोना पड़े ऊऊह्ह्ह( टॉन्ट मारते हुए बोली)

काय ने कुछ नहीं कहा क्युकी वो बात बड़हन नहीं चाहती थी इसलिए चुप अपने बीएड पैर लेत गयी आंखे बंद कर के वही राम के कमरे में शांति दाखिल हुई और प्यार से उसका गाल चुम कर बोली

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शांति- राम तुम्हे पता है न तुम क्या कर ने जा रहे हो में वह नहीं बोली क्युकी मैंने आज पहली बार दीदी की आँखों में तुम्हे खोने का दर देखा आज सच में वो घबराई हुई लगी मुझे

राम- वो बेवजह दर रही है चची अभी उन्हें नहीं पता की राम कोई मामूली चीज़ नहीं है हां मानता हु ताकत मुझसे जायदा भी हो सकती है जो सामने आएगा पैर में कमजोर भी तो नहीं हु न देख न आप आपका राम जीत का परचम लहरा कर hi आएगा वैसे ये सब छोडो पहले ये बताओ की मेरा तोहफा कहा है

शांति- हम्म्म तो साहब को तोहफा चाहिए हां तो बोलो क्या चाहिए मेरे राम को अपनी चची से

राम- चची में वो में ये कह रहा था की छोडो जो आप का मैं हो वो दे देना

शांति- नहीं बोलो जो बोलना छह रहे थे वर्ण में गुस्सा हो जाउंगी सोच लो

राम- नहीं नहीं गुस्सा नहीं प्ल्ज़ आप बुरा मत मान न वो क्या है न जब से कजरी ने मेरे होठो चूमा है तब से मेरा मैं वैसा कर ने को कर रहा है तो क्या आप मेरे होठो को चुम सकते हो माफ़ करना अगर बुरा लगा हो

शांति- ाचा जी तो अब आप को होठो वाली चुम्मी चाहिए वो भी चची से कोई नहीं आज आप का जन्मदिन है तो आप का तोहफा बनता है तो हम जरूर देंगे आप को

राम का तो हां सुनकर hi हाल बुरा होने लगा जबकि शांति उसके करीब जा कर उसकी आँखों में देखते हुए बोली

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शांति- क्या हुआ बाबू तुम इतना दर क्यों रहे हो तुम्हे तोहफा देने जा रही हु मार ने नहीं मेरे भोले राम

राम तो कुछ बोल hi नहीं पा रहा था उसकी सासें किसी ट्रैन के इंजन की तरह दाऊद रही थी की तभी शांति ने राम के होठो को मुँह में भर लिया और धीरे धीरे चूसने लगी

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राम जिस्म में खून ट्रैन की रफ़्तार से दाऊद रहा था जिस का एहसास उसके मुसल होने लगा था जिस में डूबा वो कब शांति के पुरे जिस्म पैर हाथ फेरता हुआ उसकी कठोर चूचियों को दबा ने लगा पता hi न चला

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पैर जैसे hi शांति को महसूस हुआ तो जिस से उसके जिस्म में चीटिया सीई रेंग ने लगी और वो खुद को राम से छुड़ा कर अपने कमरे में भाग गयी
 
अपडेट- 6

शांति यु एक दम से चले जाने से राम को लगा की शांति नाराज़ हो गयी है शायद पैर तभी उसका ध्यान अपने लुंड पैर गया जो पूरा आकार लिए खड़ा था उस से सेहन नहीं हुआ तो उस ने एक hi झटके में अपनी पेण्ट अंडरवियर समेत निचे सरका दी जिसके सरकते hi उसका लुंड उफनता हुआ बहार आ गया

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जिसके बहार आते hi राम का हाथ उसे सहलाने लगा पहले तो उसे अजीब लग रहा था मगर धीरे धीरे उसे मजा आने लगा तो वो थोड़ा तेज़ हाथ को आगे पीछे कर ने लगा जिसे उसका मजा दुगना हो गया अब तो उसके हाथ और तेज़ी से चलने लगे

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ये पहला अनुभव उसे बड़ा hi सुखद एहसास करवा रहा था जिस में दोबा वो आंख बंद किये बस सिसकिया भरता रहा ऐसा करते हुए उसे बहुत देर हो चुकी थी मगर अभी भी उसका माल नहीं निकला था जिस से उसका हाथ भी दर्द कर रहा था मगर फिर भी वो रुका नहीं और आखिरकार थोड़ी देर बाद उसका लावा फूटा तो राम के मुँह से एक मिट्ठी आआह्ह्ह्ह निकल गयी और उसका गधा रास उसके पेट पैर गिरने लगा

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आज उसे अनुभव हुआ की जिसे चुदाई कहते है वो कितनी सुखद होती होगी जब हाथ से करने में इतना आनंद मिला है यही सब सोचता हुआ वो कब नींद के आगोश में चला गया उसे पता hi न चला जब की दूसरी और शांति अपने कमरे में जाते hi जोर जोर से सांसें लेते हुए सोच ने लगी

शांति - हे भगवान् ये में क्या पाप कर ने चली थी वो मेरे बेटे जैसा है पैर में भी क्या करती वो इतना प्यारा है की में उसे मना hi नहीं कर पाती वो भी तो कितना चालाक निकला बात तो चुम ने की कर रहा था और फिर कैसे मेरी छाती दबा ने लगा वो भी इतनी जोर से अभी ऐसा लग रहा है जैसे उसके hi हाथ में हो

शांति खयालो में खोयी हुई खुद hi अपनी चुकी को सहलाते हुए मुस्कुराने लगी जाने क्या सोच कर ये मुस्कान काफी समय बाद उसके चेहरे पैर आयी थी जिसे अब और खिल न था फिर चाहे जैसे भी हो

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दोनों चची भतीजे खयालो में डूबे डूबे hi अपने कमरे में सो चुके थे जबकि राम की खुलती की बात किशोर तक पहुंच गयी जिसे सुनते hi वो घर की और निकल पड़ा आज न जाने कितने महीनो बाद वो घर आ रहा था जिसकी खबर फिलहाल तो किसी को न थी तो दूसरी तरफ प्रिय अपने कमरे में बैठी पढाई कर रही थी की उसके मैं में की वो राम के पास जाए यही सोच कर वो अपने कमरे से निकल कर राम के कमरे की तरफ गयी पैर गेट पैर पहुंचते hi उसके कदम वही रुक गए अंदर राम का नंगा लुंड देख कर

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उसे समझ hi नहीं आया की वो क्या करे पैर जल्द hi उसे होश आया और वो राम का दरवाज़ा धीरे से बंद कर के वापस अपने रूम में भाग गयी और दरवाज़ा से लग कर जोर जोर से सांसें लेते हुए सोच ने लगी

प्रिय - हे भगवान् कितना बड़ा था वो और कितना लाल जो भी लेगी वो तो मर hi जाएगी छी में क्या सोच ने लगी वो मेरा छोटा भाई है और वो उसका रूम मेरी hi गलती है पहले मुझे नॉक कर न चाहिए था

दिमाग झटक कर प्रिय फिर से पढ़ ने बैठ गयी पैर उसके दिमाग से वो सन निकल hi नहीं रहा था तो वो बिस्टेर पैर लेत गयी और सोने की कोशिश कर ने लगी जिसके बाद शाम को hi उठी और फ्रेश हो कर निचे चली आयी जहा आज किशोर भी था और तभी वह राम बाबू आते हुए नज़र आये जिसे देखते hi किशोर खड़ा हुआ और दाऊद कर राम को सीने से लगा लिया ये पहली बार था की उसने राम को गले लगाया या उसको प्यार किया हो पैर राम के लिए तो बहुत ख़ुशी का पल था तो उसने भी अपने ताऊ तिघ्टलय हुग किया जिसे महसूस करता किशोर भावुक हो कर उसे गले से लगाए हुए बोलै

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किशोर- शाबाश मेरे बच्चे शाबाश तूने उन ठाकरे के खिलाफ खड़ा हो कर मुझे मेरा अशोक वापस कर दिया मुझे ज़िंदा कर दिया तू नहीं जानता आज में कितना खुश हु जन्मदिन तेरा है पैर तोहफा मुझे मिला है तू देख न अब तेरा ये ताऊ तेरे साथ खड़ा रहेगा उन ज़ालिमों के खिलाफ

राम की आँखे भी नुम हो गयी थी इतना प्रेम पा कर तो वो भी अपने ताऊ से बोलै

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राम- ताऊ नहीं आप मेरे बड़े पापा हो और मुझे पता होता की मेरे ऐसा कर ने से मुझे मेरे पापा वापस मिल जायेंगे तो में बहुत पहले ये कर देता आज मेरी ज़िन्दगी का सबसे लकी दिन इसे में ज़िन्दगी भर याद रखूँगा आज मुझे मेरा परिवार मिल गया अब कोई मुझे लावारिश नहीं कह सकेगा

किशोर - हां में तेरा पापा हु मेरे लाल मुझे माफ़ कर दे मैंने ये सोचा hi नहीं की अशोक नहीं तो क्या हुआ उसका अंश तो मेरे पास था मुझे तुझ में उसे देख न चाहिए था पैर नहीं में अंधेरो में खो गया और अपने परिवार से भी दूर हो गया मगर अब और नहीं अब में अपने परिवार संग रहूँगा

किशोर ये बोलते हुए रुक गया जब उसकी नज़र सामने कड़ी काय और प्रिय पैर पड़ी तो वो राम से अलग हो कर उन्हें भी गले से लगा कर बोलै

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किशोर- मुझे माफ़ कर न काय में तुम्हारा भी दोषी हु जब तुम्हे मेरी जरुरत थी में तुम्हारे पास नहीं था अपने बच्चो के साथ नहीं था

काय- चुप हो जाइये आप आज खुसियो भरा दिन है आज मेरे बेटे का जन्मदिन है जिसे में धूम धाम से मनाऊंगी आज ये परिवार पूरा हो गया वो भी सब मेरे इस बच्चे की वजह जिसे में भी न समझ पायी पैर अब ये इस घर का असली वारिश है जिसे हम बहुत प्यार denge(Ram के गाल को चूमते हुए बोली)

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थोड़ा टाइम मिला तो एक और नज़राना आप सब की खिदमत में हाजिर कर दिया उम्मीद है पसंद आएगा🙏🙏🙏🙏🙏❤️
 
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