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हाँ विश्व को प्रतिभा की वचन ने बाँध रखा था l जैसे ही वचन का बंधन हटा भैरव सिंह की नियति तय हो गई
आप याद कीजिए
जब विश्व जैल से छुटा था तब प्रतिभा के घर एक पार्सल आया था जिसे डैनी ने भेजा था उसी पार्सल में वह मूठ था जिसे डैनी ने कलकत्ता में एक ऑक्शन में खरीदा था




भाई अनु और वीर की मिलन को ईश्वर ने इस तरह से तैयार किया l यह बस उनकी नियति पर छोड़ देते हैं l क्यूँकी कहानी का सुखांत इस तरह से ही हो सकता था l
हाँ इस बार उनके प्रेम में कोई बाधा नहीं आएगी
आप याद कीजिए
जब विश्व जैल से छुटा था तब प्रतिभा के घर एक पार्सल आया था जिसे डैनी ने भेजा था उसी पार्सल में वह मूठ था जिसे डैनी ने कलकत्ता में एक ऑक्शन में खरीदा था
भाई अनु और वीर की मिलन को ईश्वर ने इस तरह से तैयार किया l यह बस उनकी नियति पर छोड़ देते हैं l क्यूँकी कहानी का सुखांत इस तरह से ही हो सकता था l
हाँ इस बार उनके प्रेम में कोई बाधा नहीं आएगी