Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
04-30-2022, 11:30 AM,
#1
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इंट्रोडक्शन

एक छोटे से लकड़ी का टुकड़ा आपकी जिंदगी सवार देगा ये सोचना थोडा मुश्किल सा काम है लेकिन अगर वो लड़की का टुकड़ा जादुई हो तो ..??
मे बी पॉसिबल राइट …

ये स्टोरी भी ऐसे ही लकड़ी के एक टुकड़े के बारे में जो मुझे किसी इत्तफाक से मिल गया,और मेरी जिंदगी को पूरी तरह से बदल कर रख दिया

मेरा नाम है राज,राज चंदानी ,जितना कमान मेरा नाम है उससे भी कामन मेरी जिंदगी थी ,कामन कहना थोड़ा गलत होगा क्योकि मेरी जिंदगी तो झंड थी …

मेरे पिता रतन चंदानी शहर के सबसे बड़े कपड़ा व्यपारी है ,समझो नाम चलता है,रुपये पैसे की कोई कमी नही थी,वो एक बेहद ही आकर्षक और रौबदार व्यक्तित्व के मालिक थे ,खुद के साड़ी के मिल और कई कपड़ो की दुकाने थी ,तो आप सोचोगे की ऐसे अमीरजादे की जिंदगी झंड कैसे हो गई …….

कारण भी मेरे पिता ही थे ,वो जितने रौबदार ,चार्मिंग,रसूखदार थे उतना ही मैं फट्टू,डरपोक,और मरियल था,इसका कारण भी मेरे पिता ही थे क्योकि उन्होंने बचपन से ही मुझे मर्द बनाने के चक्कर में इतना टार्चर किया की मैं डरपोक हो गया,वो मुझे सबके सामने जलील कर दिया करते थे,मेरी तुलना अपने से करते और फिर मुझे लूजर साबित कर देते,बचपन में ही उन्होंने मुझे इतना डराया धमकाया था की मेरे अंदर वो हीन भावना बहुत गहरे में घर कर गई थी ,मुझे लगता था की मैं कुछ भी नही हु ,

ऐसे ये बात नही थी की वो सबके लिए ऐसे ही थे,मेरी बहनों को वो राजकुमारियों जैसे रखते थे,वो तीनो निकिता,नेहा ,निशा उनकी लाडली थी,हमेशा उन्हें अपने सर में चढ़ाए रखते तो मुझे अपने जूते की धूल भी नही समझते थे,उनका एक ही मानना था की घर में एक ही मर्द है और वो है वो ,जैसे मेरा कोई वजूद ही नही था ….

निकिता और नेहा मुझसे बड़ी थी वही निशा मुझसे 1 साल की छोटी..

वो कितने बड़े चुददक्कड़ थे ये तो इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की 4 बच्चे उन्होंने 4 साल में ही पैदा कर दिए ,बेचारी मेरी माँ ..

मेरी माँ अनुराधा,भोली भाली सी ,वो इस घर में एक मात्रा इंसान थी जिसे मेरी थोड़ी फिक्र थी ,लेकिन वो संस्कारी ,भोली भाली बेचारी ही थी मेरे बाप के सामने बिल्कुल भीगी बिल्ली सी बन जाती,और मेरा बाप फिर मेरे गांड में सरिया घुसा घुसा कर मेरी मारता था……

लुसर...ये मेरे बाप का सबसे प्रिय शब्द था जब बात मुझपर आती ,यंहा तक की हमारे नॉकर के बेटे चंदू को भी मुझसे ज्यादा इज्जत दी जाती थी,क्योकि वो क्रिकेट और फुटबॉल का कैप्टन था,हम हमउम्र ही थे,उसकी बात बाद में करेंगे …

तो मेरा बाप जितना आकर्षक और रौबदार था उतना ही ज्यादा औरतो के मामले में कमीना भी था,कहते है की ऐसी कोई लड़की या औरत नही जिसे उन्होंने चाहा हो और ना पटा लिया हो ,वो लड़की पटाने के लिये साम दाम दंड भेद सब कुछ इस्तेमाल कर दिया करते थे,मेरी माँ को पता था की नही मुझे नही पता लेकिन अगर वो इस बारे में जानती तो भी मुझे यकीन था की वो कुछ ना कहती ,वो थी ही इतनी सीधी …

मेरे बाप के कारनामो का पता मुझे हमारे नॉकरो से चलता था ,

कभी कभी देशी चढ़ाने के बाद अकेले में अब्दुल काका जो हमारे पुराने नॉकरो में थे और पापा के उम्र के थे मुझे कहा करते थे

“साहब ने इतनी लडकिया चोदी है की मैं गईं नही सकता,और इस घर में काम करने वाले सभी लोगो की पत्नियों को भी चोद चुके है ,और सभी औरतो को भी ,रामु की बीवी कांता को तो मेरे सामने ही मुझे दिखा दिखा कर चोदा था ...हा हा हा..कभी कभी तो लगता है चंदू उनका ही बेटा है ..हा हा हा …”

वही जब रामु काका मेरे साथ अकेले शराब पी रहे होते तो कहते

“साहब ने इतनी लडकिया चोदी है की मैं गईं नही सकता,और इस घर में काम करने वाले सभी लोगो की पत्नियों को भी चोद चुके है ,और सभी औरतो को भी ,अब्दुल की बीवी शबीना को तो मेरे सामने ही मुझे दिखा दिखा कर चोदा था ...हा हा हा..कभी कभी तो लगता है सना उनकी ही बेटी है ..हा हा हा …”

कैसे गांडू लोग थे ,लेकिन क्या करोगे मेरा बाप था ही इतना खतरनाक ,दुनिया के लिए उसके मुह से शहद ही टपकता था,हर कोई उनका दीवाना था बस जब मेरी बड़ी आती तो उसे क्या हो जाता…

कभी कभी अकेले में जब मैं रोता था तो मेरी माँ मुझसे कहती थी की तेरा बाप तुझसे जलता है,क्योकि जब तेरा जन्म हुआ तो तू तेरी दो बहनों के बाद पहला लड़का था,मैं तुझे बहुत प्यार करती थी,पता नही लेकिन तेरे बाप को लगता था की तू उसकी जगह ना ले ले,वो बहुत ही महत्वाकांक्षी है और अपने चीज पर किसी दूसरे का अधिकार बर्दास्त नही कर सकते ,शायद इसीलिए वो तुम्हे नीचा दिखाने की कोशिस करते है ……

उनकी बात मुझे तब तक समझ नही आई जब तक मैंने फ्रायड की साइकोसेक्सुअल थ्योरी नही पढ़ ली ,लेकिन जो भी हो वो मेरे लिए मेरा सबसे बड़ा दुश्मन था……

उसकी वजह से मेरी बहनों ने कभी मुझे भाई वाला प्यार नही दिया,भाई तो छोड़ो वो तो शायद मुझे इंसान भी नही समझती थी,मेरा मुह देखती तो ऐसा मुह बनाती जैसे किसी मनहूस को देख लिया हो ,मेरी छोटी बहन निशा तो मुझे देखते ही कहती थी

“लुसर साला “

सच बाताऊ की दिल पर क्या बीतती थी लेकिन पता नही क्यो सब कुछ की आदत सी बन गई थी ,मेरा सर मेरे ही घर में झुका होता था,मैं नही चाहता था की मेरे घर में मेरा सामना किसी से हो,मेरा उठाना बैठना इस घर में नॉकरो के साथ ही था ,शायद यही मेरी औकात थी ,वो भी इसलिए मझसे अच्छे से बात कर लेते थे क्योकि मैं उनके मालिक का बेटा था और कभी कभी उन्हें दारू पिला दिया करता था…..

इस घर में मेरे दो ही चाहने वाले थे एक थी मेरी माँ जो पापा और बहनों के सामने शांत हो जाती थी,बस अकेले में थोड़ा दिलासा दिला देती थी,और दूसरा था टॉमी ,वो एक लेब्राडोर कुत्ता था उस बेचारे को इस बात से कोई फर्क नही पड़ता की कोई मुझे क्या कहता है,वही था जिसके साथ मैं समय बिताया करता था,बाते किया करता था और जिसके लिए मैं लुसर नही था..

कभी कभी उसे मेरे साथ देखकर मेरी बहने कह देती

‘पता नही पापा ने दो दो कुत्ते क्यो पाल के रखे है’

दिल में दर्द उठा ना ..???मेरे लिए रोज का था…….
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04-30-2022, 11:30 AM,
#2
RE: Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
अब जिस आदमी का घर में ये हाल था सोचिए उसका सामाजिक ओहदा क्या रहा होगा,स्कूल में भी मेरा सर नीचे ही रहता था,मैं नही चाहता था की कोई आकर मुझसे बत्तमीजी करे क्योकि ये आम सी बात थी,लड़के चिढ़ाया करते थे कुछ को पता नही क्यो बेवजह सी दुश्मनी थी मुझसे ,ऐसे पता था वो कारण था की एक तो मैं अमीर था और दूसरी थी रश्मि….अब ये रश्मि के बारे में बाद में बताता हु …

खैर मेरी हालत ये थी की स्कूल जाना किसी जहन्नुम जाने से कम नही था,लेकिन जाना तो होता था,एक प्रॉब्लम ये भी थी की मेरी छोटी बहन निशा मेरे ही क्लास में थी और वो एक बम्ब थी ,लड़के उसके पीछे लार टपकाते और वो उन्हें अपने इशारों पर चलाती,पूरे पापा पर गई थी ,वही उसका एक ऑब्सेशन था मुझे सबके सामने बेइज्जत करने का ,वो कोई मौका नही छोड़ती थी ..

तो कहने की जरूरत नही की स्कूल में मेरा कोई दोस्त भी नही था,बस दो लोग थे,एक था चंदू,रामु काका का बेटा वो भी मेरे ही क्लास में था और मुझसे इसलिए बात कर लिया करता था क्योकि वो मेरे बाप के पैसे में इस अच्छे स्कूल में पढ़ रहा था और दूसरा उसे जब पैसे की जरूरत होती तो मुझसे ही लिया करता था..

चंदू था तो महा कमीना,उसका काला चहरा और काला बदन ,जो की कसरती था और ऊंचा डीलडौल के कारण वो भयानक सा लगता था,असल में उससे बाकी लड़को की फटती भी थी ,जिसके कारण मुझे चिढ़ाने वाले या सताने वाले थोड़ा डरते थे,यंहा तक की निशा के आशिक जो उसे खुश करने के लिए मेरी मारने पर तुले रहते थे उनसे चंदू ही मुझे बचाता था लेकिन हमेशा नही ,लेकिन फिर भी चंदू मेरा दोस्त कम दुश्मन ही था,क्योकि वो जितना मुझे देता उससे ज्यादा मुझसे लेने की फिराक में रहता था,और सभी से तो मुझे बचा लेता लेकिन उससे मुझे कौन बचाता,मेरे सामने ही वो निशा को खा जाने वाली नजर से देखता था,निशा के सामने हमेशा मेरा मजाक उड़ाता ताकि वो दोनों मुझपर हँस सके ,और निशा कमीनी भी उसके सामने मुझे अक्सर कहती थी..

“मर्द तो तू ही चंदू,वरना यंहा तो चूतिये लूजर को भी भाई बोलना पड़ता है,”

बदले में चंदू हँसते हुए उसके जिस्म को घूरता और निशा उसे भी मुस्कुराकर उसे देखती ,कभी कभी तो लगता था की चंदू निशा की लेता होगा लेकिन अभी तक मुझे कोई प्रूफ नही मिला था …

साला चंदू मेरी भोली भाली मा को देखकर मेरे सामने ही अपना लौड़ा मसल देता था,जबकि मेरी माँ उसे अपने बेटे जैसे प्यार देती थी,ये देखकर मेरा सर बस नीचे हो जाता,क्योकि लड़ना मुझे आता नही था,मैं सीधा नही था चोदू था,डरपोक था ,फट्टू था जो मुझे मेरे बाप ने बनाया था…….

ऐसे स्कूल में एक और थी जिसे मैं सच्चे अर्थों में दोस्त कह सकता था वो थी रश्मि...रश्मि हाय मेरे स्कूल की सबसे फटाका माल कही जाती थी ,सारे स्कूल के लड़के उससे बात करने को तराशते ,यंहा तक की निशा भी उसके सामने कुछ नही थी ,लेकिन वो लड़को में सिर्फ मुझसे ही बात किया करती थी ,वो ही एक थी जो मेरे लिये किसी से भी लड़ जाती भीड़ जाती,यंहा तक की निशा और चंदू से भी ,किसी टीचर से भी ,वो शेरनी थी जो मेरी रक्षा करती थी लेकिन इस बात का मुझे दुख ही था,वो मेरे साथ ही इसलिए रहती थी की लोग मुझे परेशान किया करते थे और कोई मुझसे सीधे मुह बात नही किया करता था,रश्मि बेहद ही संदुर लड़की थी तन से भी और मन से भी ,उसने मुझे बहुत स्नेह दिया था,कहने की जरूरत नही की एक लूजर की तरह मैं उसे प्यार करता था लेकिन वो मुझे प्यार नही करती थी बल्कि मुझपर तरस खाती थी,और ये बात मुझे अच्छे से पता थी ,और उसी तरस वो कारण था जिसके कारण लड़के मेरे जान के दुश्मन बने हुए थे और निशा मुझसे इतना चिढ़ती थी ,रश्मि ही वो लड़की थी जिसके सामने निशा की भी नही चलती थी ,वही चंदू भी सालों से उसे पटाने की कोशिस कर रहा था लेकिन रश्मि अगर किसी से सीधे मुह बात करती थी वो था मैं उसके दया का पात्र...जो भी था मुझे उसका साथ अच्छा लगता था कम से कम वो ही एक कारण थी जिससे मुझे स्कूल जाने की हिम्मत मिल जाती ..

और चंदू मुझसे कहा करता

“इस रंडी को तो मैं एक दिन पटक कर चोदूंगा ,साली बहुत नखरे मरती है “

उसकी बात सुनकर मेरा……...मेरा सर फिर से नीचे हो जाता ….


तो दोस्तो ये थी मेरी झंड जिंदगी ,ये ऐसी ही रहती अगर मेरा बाप पूरे परिवार के साथ केदारनाथ जाने का प्लान नही बनाता,उन्हें एक बिजनेस डील करनी थी और अपनी प्रिंसेस(मेरी बहने) की रिक्वेस्ट पर वो पूरे परिवार को साथ ले जाने के लिए राजी हो गए ,और साथ थे सना (अब्दुल की बेटी), चंदू और टॉमी ………
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04-30-2022, 11:31 AM,
#3
RE: Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
अध्याय 1

केदारनाथ की यात्रा पर ऐसा लग रहा था जैसे पूरा परिवार एक साथ गया हो और मैं और टॉमी उनसे अलग,किसी को हम दोनों में कोई इंटरेस्ट ही नही था,बीच बीच में माँ मुझे खाने के लिए पूछ लिया करती ,तो खान खाना और किसी कोने में पड़े रहना यही हमारी नियति थी,पूरे मजे वो लोग कर रहे थे,सना और चंदू परिवार का हिस्सा ना होते हुए भी साथ थे,लेकिन मैं …..

खैर मैं तो आना भी नही चाहता था लेकिन पापा का ऑर्डर था तो आना पड़ा…

मंदिर के दर्शन के बाद माँ मेरे पास आयी और मेरे हाथो में बड़े प्यार से एक धागा बांध दिया,

“मैंने भगवान से दुवा की है की वो तेरी सारी तकलीफों को दूर करे,मेरा बेटा ,भगवान तेरी सुनेगा बेटा उसके घर देर है अंधेर नही “

उन्होंने बड़े ही प्यार से मेरे माथे को चूम लिया ,उनकी बात सुनकर मेरे आंखों में आंसू आ गए ,काश माँ की बात सच हो भगवान मेरी सुन ले …

लेकिन मुझे लगा की ये धागा किसी काम का नही क्योकि हम वंहा से गंगोत्री के लिए निकलने वाले थे 2 गाड़िया थी,एक गाड़ी जो की SUV थी उसमें 6 लोग और ड्राइवर आ चुके थे,मेरी बहन निशा ने अपना दिमाग लगाया और पापा के पास पहुची..

“पापा मैं चंदू और घर के दोनों कुत्तों के साथ कार में आती हु “

मैं वंहा पास ही खड़ा था और पापा के चहरे में आयी हुई मुस्कान को भी देख सकता था,पापा ने बस हा में सर हिला दिया…

सच में भगवान ने मेरी नही सुनी क्योकि उनके साथ आने का मतलब था की रास्ते भर वो मेरी खिंचाई करेंगे,और एक अजनबी ड्राइवर के सामने भी मुझे जलील करने को कोई कसर नही छोड़ेंगे..

निशा और चंदू पीछे की सीट में बैठ गए वही मैं और टॉमी ड्राइवर के साथ …

शाम का समय था,गाड़ी चल पड़ी SUV तेज चल रही थी और काफी आगे निकल गई थी,हमारी गाड़ी को चंदू ने आराम से ही चलने का आदेश दिया था,

और शुरू हो गया उनका फेवरेट काम ,मुझे जलील करना …

वो कमीना ड्राइवर भी इसके मजे ले रहा था और मुझे देख कर हँस रहा था,सच कहु तो मुझे रोना आने लगा था,मेरा गाला भरने लगा था …

“चंदू अगर कोई किसी की बहन के जिस्म से खेले तो वो भाई क्या करेगा “

जरूर निशा के होठो में कमीनी मुस्कान रही होगी जो मैं देख नही पाया

“क्या करेगा मुह तोड़ देगा ,अगर किसी ने उसके सामने उसकी बहन को कोई गैर मर्द छू भी ले तो “

“हा लेकिन लुजर्स को कोई फर्क नही पड़ता,तो मर्द ही कहा होते है “

दोनों जोरो से हंसे वही ड्राइवर इस बार तिरछी निगाहों से मिरर से पीछे देखने लगा जैसे उसे आभास था की कुछ होने वाला है

“यकीन नही आता तो ट्राय करके देख लो “

निशा की बात से जैसे चंदू को एक सुनहरा अवसर मिल गया हो

“राज सुन तो इधर देख “चंदू ने आवाज दी

मैं नही चाहता था की मैं मुड़कर उन्हें देखु लेकिन मेरे अंदर एक अनजान सा डर दौड़ गया था ..

मैं मुड़ा ,चंदू निशा के स्कर्ट के नीचे से हाथ घुसाकर उसके जांघो को मसल रहा था

“आह चंदू ,क्या करते हो,”

“थोड़ा और अंदर ले जाऊं क्या तेरा भाई कही मार ना दे मुझे “

दोनों जोरो से हंसे ,वही ड्राइवर के होठो में एक कमीनी मुस्कान आ गई क्योकि वो भी बेक मिरर से पीछे की ओर देख रहा था,

इतना जलील होना मुझे गवारा नही था,मेरे सब्र की इंतेहा हो गई थी और मैंने क्या किया,??

मैं सर मोड़कर रोने लगा,मेरी सुबकियां शायद सबको सुनाई दे रही थी

“देखो ऐसे होते है लुजर्स कुछ तो कर नही पाते बस औरतो जैसे रोते है या किसी औरत के पल्लू में जा छीपेंगे,कभी माँ के तो कभी उस बीच रश्मि के ..”

निशा की बातों में जैसे जहर था ,

मैं और नही सह पाया

“गाड़ी रोको …”

मैंने पहली बार कुछ बोला था लेकिन ड्राइवर ने मुझे बस देखा

“मुझे पेशाब जाना है “

मैंने फिर से ड्राइवर को देखा लेकिन वो जैसे किसी और की इजाजत का इंतजार कर रहा था ..

“ओह देखो लूजर को आंसू के साथ अब पेशाब भी निकल गया इसका “

निशा की बात सुनकर चंदू और निशा जोरो से हंसे लेकिन इस बार ड्राइवर नही हंसा शायद उसे मुझपर थोड़ी दया आ गई होगी ,उसने गाड़ी साइड में लगा दी और मैं टॉमी को लेकर वंहा उतर गया…

मैं गाड़ी से थोड़ी दूर जा खड़ा हुआ ,मैं दहाड़ मार कर रोना चाहता था लेकिन मैंने खुद को काबू में किया ..

“ओ लूजर जल्दी आ “

निशा ने आवाज लगाई ,मैं अपने आंसू पोछता हुआ फिर से गाड़ी की ओर चल दिया ,मैंने दरवाजा खोला ही था की ..

भरररर

गाड़ी थोड़ी दूर तक चलकर फिर से रुक गई ,इस बार निशा और चंदू के साथ ड्राइवर भी हंसा था ,मैं समझ गया की ये मेरे साथ क्या कर रहे है ..

मैं फिर के गाड़ी के पास पहुचा और फिर के उन्होंने दरवाजा खोलते ही गाड़ी चला दी ,मैं और टॉमी दोनों ही नही बैठ पाए ..

“अरे आओ आओ दोनों कुत्तों को गाड़ी में बैठने से पपरेशानी हो रही है क्या ..”

निशा ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा ,मैं खुद को सम्हालते हुए फिर से गाड़ी के पास पहुचा और फिर से भर्रर्रर गाली आगे चल दी ,रात हो चुकी थी दूर दूर तक कोई भी नही था बस हमारी ही गाड़ी की लाइट दिख रही थी ,हम घने जंगल के बीच में थे,जंगल और पहाड़ और रात का अंधियारा सब मिलाकर बेहद ही डरावने लग रहे थे,मैं फिर से गाड़ी की ओर बढ़ता की जोरदार बिजली चमकी और बदल गरजे,बहुत ही तेज बारिश शुरू हो गई थी ,मैंने टॉमी को उठा लिया तेजी से कर की तरफ बढ़ा,हम दोनों ही भीगने लगे थे कार का दरवाजा फिर से बंद कर दिया गया था,मैने तुरंत ही दरवाजा खोला और जैसे ही टॉमी को सीट में रखने की कोशिस की फिर से भरररर…

मैं बुरी तरह से झल्ला गया था,वो लोग जोरो से हँस रहे थे और कांच से बाहर झांक कर कमेंट दे रहे थे,कार फिर से थोड़ी दूर जाकर खड़ी हो गई थी ,फिर से तेज गर्जना हुई लेकिन इस बार ना जाने टॉमी को क्या हुआ ,वो मेरे गोद से उतर कर सड़क से बाहर की ओर दौड़ाने लगा उस ओर जंहा जंगल था,मैं उसे पकड़ने के लिए दौड़ पड़ा लेकिन वो तेज था,हम सड़क से उतर कर झाड़ियों में जा चुके थे,और जंगल के अंदर की ओर जा रहे थे..

“टॉमी बेटा रुक जा “मैं चिल्ला रहा था,बारिश बहुत ही तेज हो चली थी थोड़ी ही देर में जैसे कोई तूफान सा आ गया हो,मैं इन पहाड़ो की बारिश के बारे में सुन रखा था लेकिन टॉमी को मैं अकेले नही छोड़ सकता था,लेकिन टॉमी अंधेरे में कही खो गया था,इधर बारिश इतनी तेज थी की उसकी आवाज सभी आवाजों पर छा गई थी,मुझे हॉर्न बजने की आवाज सुनाई दी जो की बेहद ही जोरो से बजाई जा रही थी ,मैं उस ओर मुड़ा ..

“ओ लूजर जल्दी से यंहा आ जा वरना सोच ले तेरा क्या होगा “

ये आवाज चंदू की थी,मैं घबराकर उस ओर मुड़ा ही था की मुझे झड़ियो में एक हलचल सी महसूस हुई ,मैंने देखा की टॉमी झड़ियो से निकल कर आगे की ओर भाग रहा है ..

“टॉमी रुक जा यार तू मरवाएगा मुझे “मैं फिर से उसके पीछे भागा..थोड़ी ही देर हुए थे की मुझे लगा की मैं बहुत आगे आ गया हु ,अब पीछे से कोई आवाज नही आ रही थी,ऐसा जरूर लग रहा था जैसे दूर से कोई चिल्ला रहा हो ,शायद चंदू या वो ड्राइवर..

इधर टॉमी रुकने का नाम ही नही ले रहा था ना ही वो पकड़ में आ रहा था ,मैं बारिश में बुरी तरह से भीग चुका था ,ठंड से कांपने भी लगा था ..

मेरा दिमाग अब टॉमी के लिए खराब हो चुका था मैं पूरी ताकत लगा के उसके पीछे भागा,वो एक झड़ियो के झुंड में जा कूदा और मैं भी उसे पकड़ने के लिए छलांग लगा दी लेकिन …..

लेकिन ये क्या झड़ियो के पास चिकना पत्थर था जिसमे मैं और टॉमी दोनों फिसल गए थे,पास ही बहते झरने की आवाज से स्पष्ट था की हम उस झरने की ओर फिसल रहे है,पल भर के लिए ही मानो मेरे दिल की धड़कन ही रुक सी गई,सामने मौत साक्षात तांडव कर रहा था..

टॉमी फिसलता हुआ झरने में गिर गया..

“नही …”

मैं जोरो से चीखा लेकिन सब बेकार था मैंने हाथ पैर मारे लेकिन गीली काई की वजह से मैं रुक ही नही पाया और ..

“नही ….”झरने के गर्त में गिरता चला गया,डर के मारे ना जाने कब मैंने अपने होश खो दिए थे …………..
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04-30-2022, 11:32 AM,
#4
RE: Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
अध्याय 2

ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपने बिस्तर में सोया हुआ हु और टॉमी हमेशा की तरह मेरे गालों को चाट रहा है..

“अरे टॉमी सोने दे ना ‘

मैंने करवट ली लेकिन ..

छपाक

मैं पानी में गिर गया था,मैं अचानक होश में आया मेरे सामने कल के हादसे का पूरा चित्र ही घूम गया ,

“है भगवान हम लोग कहा है “

टॉमी को तो कोई भी फर्क नही पड़ रहा था,और हम नदी में बहते हुए ना जाने कहा आ पहुचे थे,अजीब बात थी की इतने उचाई से गिरने के बाद भी मुझे बस मामूली खरोंचे ही आयी थी वही टॉमी तो बिल्कुल ही स्वस्थ लग रहा था,हम नदी के किनारे में पड़े थे,मैं उठकर इधर उधर देखने लगा..

मेरे जैसा डरपोक इंसान आज एक पालतू कुत्ते के साथ घने जंगल में अकेला था ,दूर दूर तक कोई नही दिख रहा था,आज तक कभी मैं अपने शहर से बाहर अकेले नही गया था,ऐसे मेरी फट के चार हो जानी थी लेकिन पता नही वंहा की हवा में क्या था की मैंने उसे और भी गहरे अपने फेफड़ों में भर लिया ,मुझे बिल्कुल ही ताजा सा अहसास हुआ ..

मैंने अपने हाथो में बंधी मा के द्वारा दिए हुए उस धागे को देखा ,मैंने प्यार से उसे चूम लिया ,मुझे लगा की आज अगर मैं जिंदा बचा हु तो माँ के आशीर्वाद से और भगवान की कृपा से ही बच पाया हु ,वरना इतने उचाई से गिर कर कोई कैसे बच सकता था ..

मुझे आज भगवान और चमत्कार में यकीन हो गया था ..

और साथ ही मुझे एक अजीब से भाव का अहसास हुआ जैसे मैं आजाद हु ,बिल्कुल खुली हवा ,ना बाप का डर न बहनों के ताने सब से मुक्त…….

मैं ऐसे ही खुश ही रहता अगर मुझे भूख नही लगती ,लेकिन जोरो की भूख गई थी,टॉमी तो पता नही क्या सुन्ध रहा था ..

“दोस्त जोरो की भूख लगी आई क्या है आज ब्रेकफास्ट में “

टॉमी मुझे देख कर जैसे मुस्कुराया..

अब ये मुस्कुराए या रोये साला एक ही सा दिखता है ..

टॉमी कुछ सूंघता हुआ एक ओर बढ़ गया था ,मैं भी उसके पीछे पीछे चल दिया थोड़ी दूर जाने पर ही मुझे समझ आ गया की आज तो टॉमी की दावत थी यानी कोई जानवर मर गया था और उसके शरीर के सड़ने की बदबू फैल रही थी ,मै नाक बंद करके टॉमी के पीछे चल दिया ,टॉमी तो जैसे उस पर झपट पड़ा लेकिन जब मैंने उसे देखा तो ..

तो मेरी फट के चार हो गई ,क्योकि वो एक भालू का शरीर था,वो भी जंगली विशालकाय भालू..

अब मुझे फिर से याद आया की मैं कहा हु,मैं यंहा पिकनिक मनाने नही आया हु बल्कि खो गया हु ,मैंने अपने जेब तलाशे

“ओ सीट...साला मोबाइल तो गाड़ी में ही रह गई “

दूसरी जेब में पर्स था जिसमे कुछ पैसे भी थे लेकिन यंहा उन पैसों का मैं क्या करूंगा ..

मैंने मेन वर्सेस वाइल्ड देख रखी थी लेकिन यंहा मुझे कुछ झँटा समझ नही आ रहा था …….

मैं थोड़ी देर इधर उधर घुमता रहा फिर एक लकड़ी को तोड़कर उससे भाला जैसा कुछ बनाने की कोशिस में लग गया,घंटे भर की मेहनत के बाद मेरे पास एक हथियार था जिसकी नोक मैंने भालू के हड्डियों से बनाई थी ,ये शिकार के लिए वक्त पड़े तो बचाव के लिए था……

जब भूख तेज हुई तो मैंने पेड़ो की पत्तियों खाना स्टार्ट किया कुछ ठीक ठाक थी तो कुछ बहुत ही कड़वी ..

क्यो फल मिलने की कोई उम्मीद तो नही दिख रही थी लेकिन फिर भी मैं जंगल के अंदर जाने लगा,जो खाने के लायक दिखता उसे खा खा कर देखता जाता था ,मैंने सुना था की जंगल में भटक जाने पर नदी के सहारे चलते जाना चाहिए तो मैं नदी के किनारे किनारे चल रहा था ..

दिन तो जैसे तैसे कट ही गया लेकिन अब फिर से रात आने वाली थी ,टॉमी तो जैसे यंहा बेहद खुश था लेकिन मेरी तो फटने वाली थी,फिर से बदल गरजने लगे और हर गर्जना ऐसा लगती थी जैसे मेरा काल हो …..

मुझे एक ठिकाना चाहिए था ,ऐसा कुछ जिसमे मैं अपने को बारिश से बचा सकू …

मैंने एक समतल जगह ढूंढ ली और वंहा पेड़ो की टहनियां इकट्ठा करके पेड़ के सहारे एक छत बनाने की कोशिस करता रहा ,मैं इस हालात में था लेकिन फिर भी मेरे दिल में वो डर धीरे धीरे गायब हो रहा था,मैंने जीवन में पहली बार अपनी स्तिथियों को स्वीकार कर उनका सामना करने की ठानी थी और मेरे साथ था मेरे मा का दिया वो धागा जिसमे प्यार था आशीर्वाद था …

शायद मुझे अपने पर और उस धागे पर यकीन हो रहा था की मैं इस मुश्किल से निकल सकता हु ,

और रात भारी बारिश हुई ,टॉमी और मैं एक दूसरे से लिपटे हुए ठिठुरते हुए एक पेड़ के नीचे झड़ियो से बनाये गए आशियाने के नीचे बैठे रहे ,यंहा अंधेरा था घना अंधेरा,ये ऐसी रात थी जिसकी कल्पना भी किसी को डराने को काफी हो ……

ना जाने कौन सा जंगली जानवर कब हमारे ऊपर हमला कर दे,सांप,बिछु,जहरीले कीड़े मकोड़े हम किसी का भी शिकार हो सकते थे,आंखों से नींद तो गायब हो गई थी लेकिन आंखे बंद कर खुद को सम्हालने के अलावा मेरे पास कोई चारा भी तो नही था…

मैं टॉमी को ऐसे सहला रहा था जैसे कह रहा था की सब ठीक हो जाएगा,मैं जीवन में पहली बार किसी को हिम्मत दिला रहा था,सच में मुसीबत और तकलीफें इंसान को और भी मजबूत बना देती है ,मेरी आराम तलबी की जिंदगी और घरवालों के तानों ने मुझे बचपन से जितना कमजोर बनाया था आज इस मुसीबत ने मुझे एक ही दिन में इतना मजबूत बना दिया था,इस समय तक मुझे हार मान जाना था लेकिन मेरे हाथ में बंधा ये धागा ना मुझे हार मानने दे रहा था ना ही उम्मीद छोड़ने …………
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04-30-2022, 11:32 AM,
#5
RE: Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
अध्याय 3

जब नींद आती है तो नरम बिस्तर की परवाह नही रह जाती ,यही मेरे साथ हुआ मुश्किल घड़ी में भी ना जाने कब मैं नींद के आगोश में चला गया था,

मेरी नींद खुली टॉमी की गुर्राने से मैं तुरंत ही सतर्क हो गया ,टॉमी सामने देख कर गुर्रा रहा था,सामने देखा तो मानो मुझे सांप ही सूंघ लिया क्योकि सामने सच में सांप ही था ,फन फैलाये वो भी फुंकार मार रहा था,मैं घर में एक अदन छिपकली को भी देखकर भाग जाता हु और यंहा नागराज स्वयं पधारे थे ..

वही टॉमी लड़ने की पोजिशन ले चुका था वो उसे देख कर गुर्रा रहा था,दोनों की निगाहे एक दूसरे से मिली हुई थी ,मुझे पता नही था की एक पालतू कुत्ता इस तरह शिकारी भी हो सकता है,शायद ये उसके खून में हो ,कुछ चीजे जानवरो को कभी नही सीखनी पड़ी वो उसे जन्म से ही सीखकर पैदा होते है ,जैसे सेक्स करना ..

टॉमी ने अपना एक पंजा सांप की ओर किया और सांप ने उपसर झपट्टा मार दिया ,वही टॉमी ने दूसरे पंजे से सीधे सांप के गले पर वार किया और इससे पहले की सांप कुछ समझ पाए टॉमी ने अपने दांतो से उसके गर्दन को दबोच लिया और रामनाम सत्य….

टॉमी की इस बहादुरी पर मुझे थोड़ा आश्चर्य भी हो रहा था लेकिन आज उसने मेरी जान बचा ली थी …

अभी तो ये शुरुवात थी ना जाने मुझे इस जंगल में और क्या क्या देखना पड़ेगा ……..

रात भारी बारिश हुई थी और पास जिस नदी के साथ मैं चल रहा था उसे देखकर मेरा दिल ही भर आया था,कारण था की उसमें पानी लबालब भरा हुआ था,नदी का वेग तेज हो गया था साथ ही उसका पानी बारिश के कारण गंदा भी हो चुका था,मुझे रोना इसलिए भी आ रहा था क्योकि मैं घर में फिल्टर का पानी पिया करता था ,कल तक नदी का पानी साफ़ था लेकिन आज ,मुझे आग जलानी होगी..

जब पेट में चूहों ने कोहराम मचा दिया तो मेरे दिमाग में एक ही बात आयी की आग जलाओ और कुछ पका कर खाओ लेकिन क्या..??

टॉमी फिर से सूंघता हुआ अपने जुगाड़ में लग गया था मैं उसके पीछे पीछे चलता हुआ ना जाने कहा तक निकल गया बस मैं ध्यान ये रख रहा था की नदी की दिशा में ही चलता जाऊं ,रास्ते में जो खाने के लायक मिल जाता मैं उसे खा लेता था ,दो ही दिन में मैं सिख गया था की कौन सी चीज खाई जा सकती है ,इसे कहते है जीवन का संघर्ष ..

चलते चलते मैं थक कर बैठ चुका था ,कही कोई उम्मीद की किरण नही दिख रही थी लेकिन फिर भी मुझे चलते रहना था,तभी मानो कुछ हुआ मेरे कानो में शंख की गूंज सुनाई पड़ी ,मैं उछाल कर खड़ा हो गया मानो फिर से शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार हो गया हो..

“टॉमी तुमने सुना ,ये तो शंख की गूंज है यानी कोई इंसान आस पास ही होगा “

अब बेचारा टॉमी बोलता भी क्या वो बस मुझे ही देखे जा रहा था ..

मैं उस शंख की ध्वनि के सहारे आगे बड़ा और मैंने जो देखा उसे देखकर मेरा दिल बाग बाग हो गया था ,दूर पहाड़ पे मुझे एक मंदिर दिखाई दिया,मैंने अब देर नही की और उसी ओर बढ़ने लगा,मैं ठीक उस पहाड़ के नीचे था जिसके ऊपर मंदिर था,दोपहर से शाम होने को आई थी और मैं थक कर चूर था लेकिन फिर भी जब बात जीने मारने की हो तो कौन देखता है ,मैंने गहरी सांसे ली ..

“बस वंहा तक पहुच जा कोई ना कोई तो मिल ही जाएगा “

मैंने खुद से कहा और चलने ही वाला था की टॉमी की हरकत से मैं थोड़ा ठिठका …

वो पीछे किसी को देख रहा था ,जब मैं पीछे मुड़ा तो ……

तो लगा जैसे अब हार्ट अटैक आने वाला हो ..

एक बिल्कुल ही शार्प चीता मुझे लालची निगाहों से देख रहा था ,वो हमशे कुछ ही दूरी पर था ,मेरे हाथ पैर मानो शून्य पड़ गए थे,दिल ने धड़कना ही बंद कर दिया था,आज तक लोगो ने मुझे डरपोक कहा था लेकिन डर होता क्या है ये शायद आज मुझे पता चला,वो बड़े ही प्यार से मुझे निहार रहा था जैसे कोई भूखा व्यक्ति अपने खाने को निहारता है ..

कुछ पल के लिए लगा मानो सब कुछ थम सा गया हो ,मरे हाथो में वो भाला था जो मैंने जोड़ तोड़ कर बनाया था लेकिन उसपर भी मेरी पकड़ धीमी पड़ने लगी थी …

वो बहुत ही धीरे धीरे मेरी ओर बढ़ रहा था ,वही टॉमी की भी सिट्टी पिट्टी गुम थी ,वो भी बस उसे ही देख रहा था शायद मेरे जैसी स्तिथि उसकी भी थी ..

“है भगवान बचा ले ...माँ “

मेरे दिल से ये फरियाद निकली ,मानो मेरा पूरा प्राण बस उसे ही पुकार रहा हो ,अचानक मेरे अंदर ये भावना आयी की जब मरना ही है तो लड़ कर मारूंगा ..

मेरे चहरे का भाव बदलने लगा , ना जाने कहा से एक ऊर्जा सी मेरे भीतर उमड़ गई ,डर रोमांच में बदल गया ,हाथो में रखे भाले पर मेरी मुठ्ठी कसने लगी ,मैं पहली बार मेरे पैरों में मुझे जान आने की अनुभूति हुई ,मैं वैसे ही पोजिशन में आ गया जैसे की टॉमी आज सुबह सांप के सामने था ,शिकारी वाली पोजिशन में मैं उसके तरफ थोड़ा सा झुक गया था और भाले को अपने एक हाथ में पकड़ा हुआ अपने से पैरलर रखे हुए था,मुझे याद आया हॉलीवुड मूवी 300 का वो सीन जब स्पार्टा का युवराज लियोनार्डस एक अदमखोर जानवर का शिकार करता है……

मैं खुद को उसके ही जगह में पा रहा था,मेरे हाथो में भी भाला था,मैं भी अकेले था,बस वंहा बर्फ पड़ रही थी और यंहा धूप निकली हुई थी ,मुझे देखकर मानो चीता भी शिकारी मूड में आ गया था वो झपट्टा मारने को पूरी तरह से तैयार था ,और मैं भी उससे भिड़ने को तैयार हो गया था ..

तभी ..

शंख की ध्वनि फिर से पूरे माहौल में गूंज गई ,इस बार वो बहुत पास सी आती हुई प्रतीत हुई ,उसे सुनकर चीते को ना जाने क्या हुआ वो तुरंत ही सामान्य हुआ और वंहा से खिसक लिया ,मैं बड़े ही आश्चर्य से ध्वनि की ओर देखने लगा, सामने कुछ ही दूर पर पहाड़ के एक बड़े पत्थर पर खड़ा हुआ सन्यासी मुझे देख रहा था ,उसके हाथो में शंख था और हाथो में त्रिशूल ,पूर्ण नग्न था लेकिन पूरे शरीर में राख मले हुआ था ,बड़ी बड़ी जटाएं फैली हुई थी ,दुबला पतला ही था लेकिन मानो चहरे और शरीर से एक तेज सा निकल रहा हो,वो बस मुझे देखने लगा ,और मैं …….

मैं वही दंडवत हो गया…

******************

हम पहाड़ी के चोटी पर बने उस मंदिर में थे,मंदिर छोटा सा ही था लेकिन पहाड़ की चोटी पर होने के कारण दूर से दिखता था,शिव के उस मंदिर में एक शिव लिंग की स्थापना की गई थी ,वो मंदिर कम और इस बाबा जी का आश्रम ज्यादा थी …

पास की कुटिया में उन्होंने हमे बिठाया जो केवल एक झोपड़ी सा था ,मैं उनके सामने बैठा था मेरे बाजू में टॉमी बैठा हुआ था,

मेरे सामने एक अग्निकुंड था जो की अभी ठंडा था ..

“यंहा क्या कर रहे हो बच्चे ..”

उनकी बात सुनकर पता नही मुझे क्या हुआ मानो इतना सारा दुख जो मैं दो दिनों से अपने अंदर ही दबा कर रखा था वो बाहर फुट पड़ा मैं जोरो से रोया …

रोते रोते मैंने उन्हें पूरी बात बतला दी की कैसे मैं यंहा तक आया ,साथ ही मैंने ये भी बता दिया की कैसे निशा और चंदू ने मिलकर मेरा माजक उड़ाया और वो ऐसा क्यो करते है,सभी चीजे जो मेरे दिल में सालो से था……

वो काफी देर तक मुझे बिना टोके ही मेरी बात को सुनते रहे …..

जब मैं शांत हुआ तो उन्होंने मुझसे बस ये कहा

“भूख लगी है “

मैंने हा में सर हिलाया ,उनके होठो में एक मुस्कान आ गई

वो मेरे साथ झोपड़ी से बाहर आये और पहाड़ी से नीचे की ओर इशारा किया ,

“वंहा तुम्हे कुछ फल और कंदमूल मिल जाएंगे ,अपने लिए और मेरे लिए ले आओ “

मेरा तो चहरा ही उतर गया ,मुझे फिर से नीचे जाना था और इनके लिए भी फल लाने थे …

“लेकिन महाराज अगर कोई जानवर फिर से मुझपर आक्रमण कर दिया तो “

मेरी बात सुनकर वो जोरो से हंसे

“रुको ..”

वो झोपड़ी के अंदर गए और जब वो बाहर आये तो उनके हाथो में एक छोटी सी त्रिशूल थी उसे उन्होंने मुझे थमा दिया,साथ ही दूसरे हाथो में एक छोटा सा लकड़ी का टुकड़ा था कुछ एक उंगल जितना लंबा ,बेलनाकार ...उसे उन्होंने मुझे दिया

“ये कोई आम लड़की का टुकड़ा नही है ये जादुई लकड़ी का टुकड़ा है,अगर कोई मुसीबत आये तो इसे चाट लेना ,तुम्हारे अंदर इतनी ताकत आ जाएगी की तुम चीता ,शेर ,हाथी ,आदमी सभी तरह के जानवरो को पछाड़ दोगे…”

मैंने उन्हें आश्चर्य से देखा लेकिन वो मेरी बात सुनकर बस मुस्कुराए

“ये चंदन का एक छोटा सा टुकड़ा ही है जिसे मैंने अपने मंत्रों से सिद्ध किया है ,अब ये कोई सामान्य चीज नही है,मानो ये कोई मनी है,जिसे मिल जाए उसकी जिंदगी बना दे,वो हर चीज दिला दे जो वो चाहता है ,ताकत,हिम्मत ,हौशला,और जिसकी तुम्हारे अंदर बहुत कमी है आत्मविस्वास और आकर्षण ये जब तुम्हे सब कुछ देगा …….”

उनकी बात सुनकर मुझे माँ की बात याद आ गई मुझे लगा जैसे भगवान ने मेरी सुन ली और ये फरिश्ता मेरे पास भेज दिया ,मैं खुसी खुशी टॉमी को लेकर नीचे चला गया ….

शाम से रात हो गई थी जब मैं वापस आ रहा था ,लेकिन रात के उस अंधियारे में भी डर की कोई छोटी सी लकीर मेरे जेहन में नही थी ,जबकि ये रात का अंधियारा और ये अकेलापन भी मुझे बड़ा ही सुहा रहा था क्योकि मन में कोई डर नही था,मुझे हमेशा लग रहा था की कोई अदम्य शक्ति मेरे साथ है जो की वक्त पड़ने पर मुझे किसी भी मुसीबत से निकाल देगा,मैंने बहुत से फल टोकरी में भर लिए थे ,टॉमी तो अपना जुगाड़ खुद ही कर रहा था ,जीवन में पहली बात मुझे पता चला की बिना डर के जीना क्या होता है,निर्भीकता क्या होती है ,साहस और शांति क्या होती है……

मैं झूमता हुआ गुनगुनाता हुआ मस्ती में टॉमी के साथ बड़े ही मजे से पहाड़ी चढ़ कर फिर से आश्रम तक पहुच गया ,बाबा जी ध्यान में बैठे थे ,तब तक मैं ऊपर रखे एक पत्थर पर बैठा दूर देखने लगा ,दूर दूर तक बस जंगल ही जंगल था ,रात होने के साथ चांद की रोशनी में वो जगह किसी जन्नत से कम ना थी ,इसीलिए साधु सन्यासी जंगलों की ओर चले आते है,हवाओ में थोड़ी सी ठंड होने लगी थी ,कभी कभी थोड़ी कपकपी सी लग जाती ..

थोड़ी देर बाद ही बाबा जी बाहर आये और मुझे देखकर अपने पास बुला लिया,मैंने अपने साथ लाये हुए फल और कुछ कंदमूल उन्हें धो कर दिए ,और पास ही बैठकर मैं भी खाने लगा ….

“तुम मंदिर के अंदर ही सो जाना ,बाहर रात होने के साथ साथ ठंड और भी बढ़ेगी “

मैंने हा में सर हिलाया …….

सुबह होते ही मैं उनके साथ पास की नदी में नहाने और पानी लेने चला गया,आते आते उनके साथ कुछ लकड़ियां भी बीनते हुए ले आये,साथ ही कुछ फल और पत्ते और कंदमूल भी ,उन्होंने मुझे बताया की क्या खाते है क्या नही खाते,किस पेड़ की जड़ को खाया जाता है,और कुछ ऐसे पेड़ और पौधों के बारे में उन्होंने बताया की मैं सुनकर दंग ही रह गया,सच में प्रकृति हमे कितना कुछ देती है ……

ऊपर आते ही उन्होंने कहा की इतना पानी मेरे लिए ही काफी होता है तुम और पानी ले आओ ,नदी कुछ किलोमीटर दूर थी लेकिन मेरे पास समय ही समय था ..मैं खुसी खुसी फिर से नीचे चला गया मैं अपने पर खुद ही हैरान था की मेरे अंदर इतनी ऊर्जा कहा से आ रही है,मैं थक ही नही रहा था,वो लड़की अब भी मेरे पास थी,पानी लाकर मैं फिर से नीचे फल और कंदमूल की तलाश में निकल पड़ा और शाम होने से पहले तक लकड़ियो के साथ वापस भी आ गया …

हम शाम का भोजन कर रहे थे ..

“तो वो लकड़ी तुमने सम्हाल कर तो रखी है ना “

“जी महाराज ,ये तो कमाल है ,मुझे अपने जीवन में कभी इतनी ऊर्जा और शांति का अनुभव नही हुआ था,ना ही इतनी निडरता मेरे अंदर कभी भी थी ..”

वो मुस्कुराए

“अभी तो ये बस शुरवात है तुम सोच भी नही सकते की ये तुम्हारे लिए क्या कुछ नही कर देगी ,तुम जिसे चाहो अपना गुलाम बना लोगे तुम्हारी वाणी में वो तेज आ जाएगा ,जो चाहोगे वो पा लोगे तुम्हारे अंदर उतनी ऊर्जा और ताकत आ जाएगी ,शाररिक क्षमता मानसिक क्षमता जो भी तुम बढ़ाना चाहो सब इसके उपयोग से बढ़ा सकते हो ,बस तुम्हे शुरवात करनी होगी बाकी मदद ये कर देगा ,तुम इसे एक ताबीज की तरह बनाकर रख लो मैं तुम्हे रेशम का एक धागा दे देता हु,मेरी तरफ से ये तुम्हारे लिए उपहार है ...अभी तुम्हे कुछ दिन यही रहना होगा,जब गांव से कोई इधर आएगा या फारेस्ट वाले लोग इधर आएंगे तो तुम उनके साथ चले जाना “

उनकी बात सुनकर मुझे कैसा लगा ये तो मैं बता भी नही सकता,मैं उमंग से भर गया था ,मैं इतना खुश था की मेरे आंखों से कुछ आंसू गिर पड़े…

********************

मैं लगभग 10 दिन तक वही रहा,उस पहाड़ी में चढ़ना उतारना मेरे लिए बच्चों का खेल बन गया था,मैं अपने को बहुत ही ताजा और ताकतवर महसूस कर रहा था,मैं हमेशा ही उमंग में रहता था ,मैं टॉमी के साथ खेलता हुआ जंगल में दूर तक निकल जाता ,कई किलोमीटर यू ही दौड़ जाता जाता था मुझे ये जंगल ही अपना घर लग रहा था ,सच कहु तो मुझे यंहा से वापस जाने का भी मन नही कर रहा था लेकिन …

लेकिन वो दिन आ गया जब मुझे जाना था ,फारेस्ट डिपार्टमेंट के कुछ लोग पेट्रोलिंग करते हुए वंहा पहुच गए थे ,बाबा जी ने उन्हें मेरे बारे में बताया ..

“अच्छा तो ये लड़का है ,हमने इसे बहुत ढूंढने की कोशिस की लेकिन ये कही नही मिला,पुलिस वाले अब भी इसकी तलाश कर रहे है,हम इसे पुलिस के पास ले जाएंगे वंहा से इसे इसके घर पहुचा दिया जाएगा “

जाते वक्त बाबा ने मेरे सर पर हाथ फेरा ,उनके स्पर्श में बहुत ही स्नेह था ,मैं तो फफक कर रो ही पड़ा ऐसे लगा जैसे ये ही मेरा घर था और मुझे किसी अनजान जगह जाना पड़ रहा हो …

उन्होंने मुझे प्यार से समझाया

“अपने पर और मेरी विद्या पर भरोसा रखना तुम जितने के लिए ही पैदा हुए हो “

उन्होंने मेरे कानो में कहा और मैं आंसू पोछता हुआ उनके चरणों में गिर गया ..

“मैं यही रहना चाहता हु बाबा ..’

मैं उनके चरणों में पड़े हुए आखिर अपने दिल की बात कह ही दी

“बेटा के जगह तुम्हारे लिए नही है ,पहले जीवन को जी तो लो फिर सन्यास लेना ,मेरे दरवाजे तुम्हारे लिए हमेशा खुले रहेंगे लेकिन अभी समय नही आया है ,अभी तो तुम्हे इस जीवन को जीना है इससे भागना नही है ..”

उन्होंने क्या कहा मुझे उतना तो पल्ले नही पड़ा बस ये समझ आ गया की मुझे वापस जाना होगा …

***********

फारेस्ट वाले मुझे पुलिस के हवाले कर दिए जिन्होंने मेरे घर में फोन कर उन्हें बता दिया की मैं मिल गया हु और पुलिस के साथ वापस आ रहा हु …

मैं घर जा रहा था कुछ 12-13 दिन बाद ,लेकिन अब मैं वो राज नही था जो गलती से जंगलों में खो गया था ,मैं एक अलग ही इंसान था ,मैं वो था जिसने दो दिन तक अकेले घने जंगल में सरवाइव किया था,मैं वो था जिसने मौत को करीब से देखा था,मैं वो था जो एक ऊंचे झरने से गिरने के बाद भी जिंदा बचा था,मैं वो था जो एक जंगली चीते के सामने उससे लड़ने को तैयार खड़ा था,मैं वो था जो दिन में कई बार ऊंची पहाड़ी पर उतर और चढ़ सकता था वो भी सर में एक पूरी भरी मटकी ले कर ,और मैं वो था जिसके साथ एक तपस्वी ,योगी ,सिद्ध पुरुष का आशीर्वाद था ………
Reply
04-30-2022, 11:34 AM,
#6
RE: Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
अध्याय 4

सामने मेरा घर था जिसे मैं आज तक अपना घर कहता रहा था,लेकिन यकीन मानिए ये कभी मुझे अपना घर नही लगा,और वो 10 दिन जो मैंने उस पहाड़ी के मंदिर में बिताए थे ,मुझे लगने लगा था की यही मेरा असली घर है,आज मुझे लग रहा था की मैं अपने असली घर को छोड़कर किसी दूसरी जगह आ रहा हु…

सामने गेट था और अब मेरी नई दुनिया में प्रवेश करने का समय आ चुका था…..

पुलिस ने मेरे घर वालो को पहले ही मेरे आने की खबर दे दी थी तो मुझे यकीन था की सभी ,सभी ना सही कम से कम मेरी प्यारी माँ तो मेरे आने का इंतजार कर ही रही होगी ,ऐसे भी इस घर में मैं बस उन्हें ही देखना चाहता था और वो ही तो एक थी जिसे मुझसे प्यार था…….

दरवाजा खुला और मेरी मैं ने दौड़ाते हुए मुझे गले से लगा लिया .

“बेटा तू कहा चला गया था “

वो मेरे गालों को बेतहाशा चूमने लगी थी ,मेरी उम्मीद के विपरीत यंहा घर का हर सदस्य था और सारे नॉकर भी …

“ऐसे क्या लाड़ दिखा रही हो इसे, ये कोई जंग जीतकर नही आया है,अपनी गलती से खो गया था ,कहा भाग गया था तू ..”

मेरा बाप चिल्लाया ,मैंने इस बार नजर नीचे नही की बल्कि उसे एक बार घूर कर देखा और फिर अपनी माँ की तरफ देखने लगा,रो रो कर बेचारी के आंख सूज गए थे,मैं उसके गालों को प्यार से सहलाने लगा..

मेरा बाप फिर से भड़का

“कुछ पूछा जा रहा है तुमसे ,कहा भाग गए थे तुम “

“ये अभी तो आया है और आप ..”

माँ कुछ बोलने वाली थी की पापा ने अपना हाथ दिखा के रोक दिया आखिर मुझे बोलना ही पड़ा..

“मैं कही भागा नही था,आपकी प्यारी बेटी और उसके बॉयफ्रेंड ने मिलकर मुझे जंगल में भरी बारिश में अकेले छोड़ दिया था …”

मैंने घूरकर निशा की ओर देखा मेरी बातों से वो सकपका सीं गई थी ..

“कुछ भी मत बोल लूजर ,.”

वो भड़की लेकिन इस बार मेरा सर झुका नही बल्कि मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई ,मेरे इस एटीट्यूड को देखकर निशा मानो जल सी गई ..

“पापा ये ..”

पापा ने उसे फिर से रोका

“अपनी गलती को अपनी बहन पर मत डालो “

वो कुछ और बोलते की मैं बोल पड़ा

“बहन ….हा हा हा…”मैंने बड़े ही व्यंगात्मक अंदाज से निशा की ओर देखा ,पता नही मेरी आंखों में क्या था की वो घबरा सी गई और सहम गई,मुझे लगा की ये मेरे उस ताबीज वाली लकड़ी का कमाल है जो भी हो अब तो मैं राजा था …..

“पहले इससे तो पूछ लो की इसने कब मुझे अपना भाई माना है ..माँ मुझे बहुत जोरो की भूख लग रही है आपके हाथो का खाना खाये मानो बरसो हो गए ,जल्दी से खाना लगा दो मैं फ्रेश होकर आता हु ..”

मेरी बात और कांफिडेंस से मेरी माँ भी चकित थी ,मैं मुड़ा और पुलिस वालो को खुद ही धन्यवाद कहा और बिना किसी से कुछ कहे टॉमी की साथ अपने कमरे में आ गया …..

कितना सरल था …

जिन चीजों से मैं आज तक डरता रहा था उनका सामना करना इतना सरल होगा ये मैंने सोचा ही नही था …

मैंने अपने ताबीज को चूमा ,टॉमी को नहलाया और खुद भी नहा कर नीचे आ गया ,अब घर में कोई भी नही दिख रहा था ,मैं डायनिंग टेबल पर बैठा था मेरे पास ही माँ भी बैठी थी ..

“हो क्या गया है तुझे ,अपने पापा से ऐसे बात कर रहा था ,तू ठीक तो है ना बेटा ..”

उन्होंने मुझे खाना परोसते हुए कहा

मैं जोरो से हँस पड़ा

“हा माँ अब ही तो ठीक हुआ हु “

मेरे इस बात से माँ के आंखों में आंसू आ गए ,मैं समझ सकता था की क्यो,उन्होंने मुझे जीवन भर घुटते हुए देखा था,हमेशा ही दबकर रहते हुए देखा था ,उनके लिए इससे ज्यादा खुसी की बात और क्या हो सकती थी की उनका बेटा अपनी जिंदगी सर उठा कर जिये …

मैं खाना खाकर स्कूल के लिए निकलने लगा ,माँ ने फिर से मुझे रोक लिया

“बेटा आज भी स्कूल जाएगा,पहले तो स्कूल के नाम से तेरा चहरा उतर जाता था ..”

मैं बस मुस्कुरा कर रह गया ….


स्कूल में जैसे मैं एक खास अट्रेक्सन था ,क्लास में जाते ही चंदू मुझे मिल गया ..

“क्यो बे चुतिये कहा भाग गया था ..”

मैं अपने बेंच में बैठा ही था की वो मेरे सामने आकर खड़ा हो गया था,चंदू की बात का मैंने कोई जवाब नही दिया बल्कि बस उसको देख कर मुस्कुरा दिया,पता नही क्यो लेकिन मुझे लगा जैसे मेरे मुस्कान में वो ताकत है जो मेरी बातों में नही होगी ,सच था क्योकि चंदू थोड़ा झल्ला गया था,मैं उसके आंखों में आंखे मिलाकर उसके प्रश्न का जवाब दिए बिना बस मुस्कुरा रहा था जैसे उसके प्रश्न की मेरे लिए कोई अहमियत ही नही हो ..

निशा दूर खड़ी हम दोनों को देख रही थी वही जैसे ही रश्मि की नजर मुझपर पड़ी वो दौड़ाते हुए मेरे पास आ गई ..

“कहा थे तुम, ना जाने तुम्हारे बारे में कितनी कहानियां ये लोग फैला रहे थे,की तुम घर छोड़ कर भाग गए हो...“

उसने चंदू को घृणा की दृष्टि से देखा

“बस जंगल घूमने का मन किया तो निकल पड़ा ,ऐसे जंगल बेहद ही खूबसूरत था….. तुम्हारी तरह ..”

मैंने ये बात उसकी आंखों में देखकर कही थी ,और इससे उसके साथ साथ चंदू का भी मुह खुला का खुला रह गया था,रश्मि इतने दिनों से मेरी दोस्त थी लेकिन मैंने आजतक कभी उससे दोस्तो की तरह बात नही की थी ,और आज आते ही मैं उससे फ्लर्टिंग करने लगा था,मुझे नही पता था की ये मुझसे कैसे हो रहा है बस मुझे अब डर नही लग रहा था,मेरे साथ बाबा जी का आशीर्वाद जो था,तो मैं जो मुह में आये वो बोल रहा था दिल से बोल रहा था ,अपने दिमाग को मैंने थोड़ा साइड कर दिया था,क्योकि दिमाग सोचता बहुत है ,अच्छा- बुरा,ये- वो, दुनिया- दारी..

इतना सोचता है की हम जी ही नही पाते तो दिमाग को रिलेक्स रखो और अपनी जिंदगी जिओ ,बाबा ने मुझे यही सिखाया था ..

“तुम्हे क्या हो गया आज ,तुमने जिंदगी में पहली बार मेरी खूबसूरती की तारीफ की है ..कुछ बदले बदले लग रहे हो “

रश्मि की बात से मैं खुल कर हँस पड़ा था ,जिसे वो दोनों ऐसे देख रहे थे जैसे कोई भूत देख लिया हो मानो जो देखा उसपर यकीन ही नही आ रहा हो …

“अरे यार मैंने तो बस सच कहा है ,ऐसे तुम बहुत याद आई मुझे ,जंगल में मेरे अकेलेपन में, आखिर तुम ही तो एक दोस्त हो मेरी “

ऐसे ये बात पूरी तरह से गलत थी क्योकि मुझे उसकी बिल्कुल भी याद नही आयी थी लेकिन मेरी बात सुनकर वो मुस्कराई ,

“तुम सच में बहुत बदल गए हो ..”

उसने बस इतना ही कहा और अपने सीट पर चली गई ..

उसके जाते ही चंदू मेरी ओर हुआ

“क्यो बे साले बहुत हीरो बन रहा है तू ,रश्मि से फ्लर्ट करेगा “

उसने मुझे धमकाने वाले अंदाज में कहा ,

“क्यो तेरी बहन है क्या ..”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा ,

“तेरी तो ..”उसने मुक्का ताना लेकिन रुक गया ,मैं अब भी उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था,यकीन मानो मेरे दिमाग में उसके लिए कोई गुस्सा ही नही था वो तो मुझे बच्चे जैसा लग रहा था,

अर्ज किया है

मैं तो चीता से लड़ने वाला इंसान था ,ये तो मेरे लिए झांट समान था ..वाह वाह वाह वाह

जैसे ही मेरे मन में ये बात आयी मेरी मुस्कान और भी गहरा गई ..

“साले बहुत बोल रहा है तू,अपने को बड़ा तीसमार खान समझ रहा है ना,बहन की बात करता है पता है ना तेरी बहन के साथ क्या किया था कार में “

मुझे उसकी बात से गुस्सा या शर्म आना था लेकिन दोनों ही नही आया ,मैंने बस के अंगड़ाई ली ,मैंने देखा की निशा उसी ओर आ रही थी ...

“तुझे निशा को चोदना है ना ,चोद उसे, लेकिन उसे मेरी बहन बोलकर बहन शब्द को गाली मत दे ..”

मेरी बात निशा के भी कानो में गई होगी ,वो सन्न थी जबकि चंदू निरुत्तर, वो खिसियाया हुआ अपने सीट में चला गया ,वही निशा गुस्से से भरी हुई मुझे देख रही थी लेकिन मैंने उसको बिल्कुल ही इग्नोर कर दिया था ….

दो क्लास के बाद ब्रेक हुआ और एक मोटा लड़का मेरे सामने आकर खड़ा हो गया,ये लड़का रश्मि का दीवाना था इसलिए स्वाभाविक रूप से मुझसे जलता था और मुझे परेशान किया करता था ..

“क्यो बे चोदू कहा था इतने दिन “

उसने अपने दांत निकाले ,एक बार उसने रश्मि की ओर देखा की कही वो आ तो नही रही है लेकिन रश्मि अपनी एक सहेली से बातों में बिजी थी ..

“सामने से हट बे गैंडे मुझे मूतने जाना है “

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा चौका क्योकि उसे इस उत्तर की उम्मीद नही थी ,

“मादरचोद तेरी तो “

उसने अपना हाथ मेरे कॉलर को पकड़ने के लिए उठाया ही था की ..

चटाक ..

एक करारा झापड़ मैंने उसके गाल पर झड़ दिया ,

वो इतना जोर का था की उसका एक दांत टूट कर बाहर आ गया ,मुह से खून बह रहा था ,पूरी क्लास हमे ही देख रही थी ,मैंने उसे सामने से हटाया और पूरे एटीट्यूड के साथ क्लास से बाहर निकल गया ,वो अब भी अपना टूटा हुआ जबड़ा पकड़कर मुझे देख रहा था लेकिन वो क्या किसी की इतनी हिम्मत नही हुई की मुझे रोक सके …..

मुझे लगा था की वो प्रिंसपल के पास जाएगा फिर याद आया की ये तो स्कूल के बदमाशो के एक लोकल गैंग का मेम्बर है तो वो मेरी शिकायत नही करेगा बल्कि स्कूल के बाहर ही सबक सिखाने की सोचेगा...खैर मुझे क्या फर्क पड़ता है मेरे पास तो मेरी लकड़ी थी …

क्लास शुरू होने के बाद वो लड़का मुझे नही दिखा,शायद वो अपने गैंग के लोगो को इकठ्ठा कर रहा होगा ,लांग रिसेस के समय रश्मि मेरे साथ हो ली ,वो मेरे बदले हुए रूप को देखकर बहुत खुश हुई लेकिन वो थोड़ी घबराई हुई भी थी ..

“जानते हो ना जिस लड़के को तुमने मारा वो गुंडा टाइप का है उसका गैंग भी है ..”

रश्मि ने डरते हुए कहा

“हा तो क्या हुआ “

“तुम्हे डर नही लगता ,पहले तो सर झुकाए घूमते रहते थे,कोई भी डरा दिया करता था और अब आखिर हुआ क्या है तुम्हारे साथ जंगल में ..”

रश्मि बड़े ही आकर्षक अंदाज में मुझे देख रही थी ,मैं उसके साथ इतने सालो से था लेकिन मैंने कभी उसके चहरे को ध्यान से नही देखा था ,वो सच में बेहद ही सुंदर थी ..

“बस समझ लो मुझे कुछ ऐसा मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी ,मैंने मौत को इतने पास से देखा की मेरा पूरा डर ही जाता रहा,”

मैं कुछ देर के लिए चुप हो गया ,वो हादसे मेरे दिमाग में चल रहे थे..जबकि रश्मि मुझे ही घूर रही थी ..

“ऐसे क्या देख रही हो “

मैंने उसे खुद को देखता पाकर कहा

“ऐसे ही रहना ,हमेशा…”

हमारी आंखे मिली और मानो कुछ स्पार्क सा हुआ और उसने तुरंत ही नजर झुका ली ,मुझे पता था की क्या हुआ था ,बाबा जी ने कहा था की मेरे अंदर आकर्षण आ जाएगा ,शायद यही बजह थी की रश्मि मुझसे आकर्षित हो गई हो ,उसके चहरे में शर्म साफ दिख रही थी ,एक ही दिन में क्या क्या होने वाला था मेरे साथ ,मैंने मन ही मन बाबा जी को धन्यवाद दिया …

क्लास शुरू हुई तो रश्मि अपनी जगह को छोड़कर मेरे बाजू में आकर बैठ गई ,उसकी इस हरकत से सभी की निगाहे फिर से एक बार मुझपर टिक गई थी,निशा और चंदू का चहरा तो छोटा ही पड़ गया था ,शायद उन्हें अभी भी, घटित हो रही बातों पर विस्वास नही हो रहा हो ….

रश्मि ने मुझे बताया की आज एक नई टीचर हिस्ट्री पढ़ने के लिए आने वाली है ,

पहले जो हिस्ट्री के सर थे वो बड़े ही खड़ूस थे तो मुझे लगा की ये अच्छा ही हुआ ..

तभी एक साड़ी में लिपटी हुई औरत कमरे में आई ,उसके आने से पहले उसके पायलों की खन खन की आवाज मेरे कानो तक आ पहुची थी ,घने घुंघराले बाल लहराती हुई ,मेरी नजर पहले उसके पैरों में गई वो साड़ी पहने हुई थी,स्लेटी कलर की रेशमी पतली साड़ी,और मेरी नजर उसके कमर में जाकर रुक ही गई ,जैसे थूक गले में रुक गया हो ,गोरी चिकनी कमर पर एक चांदी का पतला करधन था,कमर पतले होने की वजह से उसके पिछवाड़े उभरे हुए लग रहे थे ,जब नजर थोड़ी ऊपर गई तो वक्षो की चोटिया दिखाई देने लगी ,और सुराहीदार गर्दन के ऊपर उसके होठ जो अभी मुझसे कुछ ही दूरी पर थे ..

वो हिले ..

“हल्लो क्लास ..”

ऐसे लगा जैसे समय बहुत ही धीमा चल रहा हो ,मैं उसके होठो के हिलने को भी देख सकता था,फिर मेरी नजर उनकी बड़ी बड़ी आंखों पर गई जो नाचते हुए पूरे क्लास का मुआयना कर रही थी ,माथे में एक छोटी सी टिकली थी और अचानक मैंने उनके पूरे मुखड़े को एक साथ देखा ,

“वाह “

मेरे मुह से अनायास ही निकल गया था ,इतनी सुंदर औरत मैंने आज तक नही देखी थी ,पूरे क्लास के सभी लड़को का मुह मेरी ही तरह खुला हुआ था,तभी रश्मि ने मुझे कोहनी मारी ..

“कुछ तो शर्म करो ,कुत्तों जैसे मुह फाड़ के देख रहे हो “

उसकी बात सुनकर मैं अचानक ही होश में आया ..

“हल्लो क्लास आई आम काजल ,मैं आप लोगो की नई हिस्ट्री टीचर हु ..”

नजर घुमाते हुए उनकी नजर मुझपर पड़ी और मैंने एक आंख बंद करते हुए उन्हें आंख मार दी ,मेरी इस हरकत से वो थोड़ी चौकी लेकिन अपने को सम्हाल के सामान्य करते हुए क्लास से बात करने लगी …….

उनकी इस असहजता को देख कर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई थी
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04-30-2022, 11:43 AM,
#7
RE: Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
अध्याय 5

स्कूल के बाद रश्मि ने मुझे लिफ्ट आफर की ..

असल मेरा घर स्कूल से कुछ 2 किलो मीटर की दूरी पर ही था,निशा कार से स्कूल आया करती थी जबकि चंदू अपनी बाइक से ,वही मैं पैदल …

अब ऐसा क्यो था ये बताने की जरूरत नही ,ये मेरे बापू जी के वजह से था,उन्होंने मुझे कोई गाड़ी खरीदकर नही दी थी जबकि मेरे सभी बहनो के पास उनका खुद का कार था..

तो कभी कभी चंदू लिफ्ट दे देता था तो कभी रश्मि मुझे छोड़ दिया करती थी ,तो कभी हम पैदल ही निकल पड़ते थे…

लेकिन आज रश्मि का अपनी स्कूटी में मुझे लिफ्ट देने का एक खास रीजन था जो मुझे बाद में पता चला था..

पहले तो मैंने उसे इनकार कर दिया ..

“मैं बोल रही हु ना चलो ..”

उसने जोर दिया तो मैं मना नही कर पाया ..

मेरे घर और स्कूल के बीच एक सुनसान सी जगह पड़ती थी ,खाली पड़े सरकारी जमीन पर पेड़ पौधे उगाये गए थे जिससे एक छोटा जंगल जैसे बन गया था ,जब हम वंहा से गुजरे तो मैंने देखा सामने लकड़ो का झुंड था ,मुझे समझ आ गया था की रश्मि ने मुझे अपने साथ क्यो लाया है ,क्योकि झुंड में वही मोटा था जिसे मैंने स्कूल में पीटा था,वो अपने गैंग के साथ मेरे आने का इंतजार कर रहा था लेकिन जब उसकी नजर रश्मि पर पड़ी वो बस वही खड़ा रह गया,रश्मि ये बात जानती थी की मोटा उस पसंद करता है और उसके सामने वो कुछ ऐसी वैसी हरकत नही करेगा इसलिए मुझे बचाने के लिए वो मेरे साथ ही आ गई ..उसकी इन्ही बातो पर तो मुझे बेहद प्यार आता था ..

मेरी नजर मोटे पर पड़ी वो खिसियाई निगाहों से मुझे देख रहा था,मैंने उसे दिखाते हुए अपना हाथ रश्मि के कमर पर जकड़ दिया ,मोटे का चहरा और भी गुस्से से भर गया जब उसने मेरे होठो की वो मुस्कान देखी जो मैंने उसे जलाने के लिए अपने चहरे में लाई थी ,वही मेरी इस हरकत से रश्मि जैसे जड़वत हो गई थी ..

जब हम वंहा से निकले तो उसने थोड़ी राहत की सांस ली ..

“मैं जानती थी की ये लोग यंहा तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे”

“तुम पागल हो मुझे बचाने के लिए ये सब किया ,ऐसे बचने की जरूरत तो उन्हें थी ..”

वो मेरी बात सुनकर हंसी

“तुम ना ज्यादा हीरो गिरी मत दिखाओ अब,और ये मेरी कमर को ऐसे क्यो पकड़ कर रखे हो,उसे चिढाना था वो चिढा दिया अब तो छोड़ दो ..”

मैं उसकी कमर छोड़ने की बजाय उसे और जकड़ लिया और खुद को भी उससे चिपका लिया

“ये क्या कर रहे हो “

इस बार उसकी आवाज धीमी थी ..

“तुम जब मुझे ऐसे लोगो से बचाती हो ,मेरे लिए लड़ती ह तो तुमपर बहुत प्यार आता है ,कभी कहने की हिम्मत नही हुई लेकिन आज कह रहा हु “

गाड़ी चलते हुए भी रश्मि का शरीर थोड़ा झुक गया था ..

“सब आज ही कह डालोगे क्या “

रश्मि ने इतना ही कहा था की घर आ गया ..

मैंने उसकी स्कूटी से उतरते हुए उसे देखा

“चलो एक काफी हो जाए मेरी मम्मी बहुत अच्छी काफी बनाती है..”

उसने पहले मेरे चहरे का मुआइना किया फिर मुस्कुराती हुई स्कूटी से उतर गई …

मेरी माँ रश्मि को देखकर बहुत खुश हुई ..

और खूब खातिरदारी भी की ,वही निशा और चंदू का चहरा उसे देखकर उतर ही गया ..उन्होंने एक शब्द भी बात नही की ..

“बेटा घर आते रहा करो तुम्हारी मम्मी और चाची से तो मुलाकात होते ही रहती है लेकिन तुम हमारे घर पहली बार आ रही हो ..”

मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा

“आंटी जी आपके बेटे ने पहली बार तो मुझे अंदर बुलाया है वरना इसे छोड़ने तो आते ही रहती हु,तू बाइक क्यो नही ले लेते “

रश्मि की बात सुनकर मम्मी का चहरा थोड़ा उतर गया इसे सम्हालने के लिए मैं बीच में बोला

“यार अगर बाइक ले लिया तो तुम मुझे छोड़ने कैसे आ पाओगी ,और तुम्हारे पीछे बैठने का जो मजा है वो बाइक का कहा ..”

मैंने रश्मि को आंख भी मार दी जिससे वो थोड़ा झेंपी और आंखों से झूठा गुस्सा दिखाया ..

“बेटा अर्चना(रश्मि की माँ) और सुमन (उसकी चाची ) को कहना की मैं उन्हें याद कर रही थी ..”

माँ ने आखिरी में रश्मि से कहा ……..


रश्मि के जाते ही माँ मेरी तरफ देखते हुए बोली

“क्या इशारे कर रहा था उसे “

मैं हंस पड़ा

“कुछ नही माँ आप भी “

“ऐसे लड़की बहुत अच्छी है “माँ ने फिर से कहा

“आप से सुंदर थोड़ी ना है “

मैंने माँ को जकड़ लिया और उनके गालो में एक जोरदार किस किया

दो तीन किस करने के बाद माँ बोल उठी

“धत पागल कहि के ,छोड़ भी दे अब”

**************

मैं खुश था ,मैं बहुत ही खुश था ,खुशी स्वाभाविक ही आनी चाहिए और स्वाभाविक ही आ रही थी ……

दूसरे दिन मेरी नींद आदत के अनुसार 3 बजे ही खुल गया ,ये वही समय था जब हम जंगल में जाग जाया करते थे,ऐसे वंहा तो घड़ी नही थी लेकिन जब हम जागते थे तो अंधेरा घना रहता था और हमारे नदी में जाकर,एक्सरसाइज करके ,योग करके , नहा कर फल तोड़ने ,पानी भरने तक अंधेरा ही रहता था,वापस आते आते सूर्य की किरणे निकलनी शुरू होती थी ,तो शायद यही वो समय रहा होगा जब हम जाग जाते थे ,

लेकिन अब यंहा 3 बजे उठाकर मैं क्या करू मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,मेरे साथ साथ टॉमी भी उठ चुका था,मैं उसे लेकर घर से बाहर निकल गया और पास के ही एक मैदान में चला गया ,वो यूनिवर्सिटी का मैदान था जो बहुत बड़ा था और अधिकतर लोग यंहा ,दौड़ाने आते थे ,साथ ही बहुत से लोग यंहा फुटबॉल या क्रिकेट खेला करते थे..

मैं वंहा जाकर दौड़ाने लगा,टॉमी भी मेरे साथ दौड़ रहा था असल में हम दोनो खेल ही रहे थे वो मुझे पकड़ने की कोशिस कर रहा था और मैं इधर उधर दौड़ रहा था,बहुत देर तक हम ऐसे ही दौड़ाते रहे लेकिन सूर्य अभी भी नही निकला था ,मैंने लगे हाथो योग आसान और एक्सरसाइज भी कर लिए जो बाबा जी ने मुझे सिखाये थे,तब भी सूर्य नही निकला था तो मैं मैदान के किनारे हरे घास पर बैठकर ध्यान करने लगा …….

बाबा ने मुझे रोज 2 घंटे ध्यान करने को कहा था एक घण्टे सुबह और एक घंटे शाम ,इसके बाद जब भी समय मिले…

ना जाने मैं कितने देर तक बैठा रहा ,मेरा ध्यान खुला कुछ लोगो की आवाज से ..

“उठ साले क्या साधु बना बैठा है “

जब मैंने आंखे खोली तो सामने वही लड़का था जिसे मैंने मारा था और उसके साथ उसका पूरा गैंग था ,सभी के हाथो में कुछ ना कुछ तो था,किसी के हाथो में बैट था तो कोई स्टाम्प पकड़े था,तो कोई झड़ी को ही तोड़ कर ले आया था,असल में ये यंहा क्रिकेट खेलने आते है लेकिन गलती से मैं इन्हें यंहा दिख गया ..सूर्य की किरणे अपनी छटा फैला रही थी ,चिड़ियों की आवाज भी आ रही थी ,टॉमी दूर कुछ सुन्ध रहा था,ऐसे वो हमेशा ही कुछ ना कुछ सूंघता ही रहता था ,

और हल्की हल्की ठंडी हवाये चल रही थी ,जिसमे बड़ी ही प्यारी सुगंध थी शायद पास के ही बगीचे से होकर आ रही थी …

इतना मनोहर दृश्य था और ये साला मोटा इसे खराब कर रहा था …

मैंने उसे बड़े ही आराम से देखा ..

“मादरचोद कल तो तू रश्मि के पीछे छिप गया था ,लेकिन आज तू नही बचेगा ..”

वो गुर्राया ,लेकिन इससे अच्छा तो मेरा टॉमी गुर्राता है ..

मैं हंस पड़ा ,और धीरे से हँसते हुए खड़ा हुआ ,बहुत देर तक पद्मासन लगा कर बैठने के कारण मेरा पैर थोड़ा शून्य हो गया था ,मैं आराम से उठा मैं अभी भी हंस रहा था..

“साले अपने को बहुत बड़ा साना समझता है तू ,मारो इसे “

मेरे उठाते ही मोटा चिल्लाया और उसके बाजू में खड़ा दूसरा लड़का अपने हाथो में पकड़े हुए बैट को घुमाया ,मैं अभी अभी ध्यान से उठा था,जो लोग गहरे ध्यान में जाना जानते है वो समझ पाएंगे की 1-2 घण्टे गहरे ध्यान से उठने के बाद क्या स्तिथि होती है,सब कुछ बहुत ही शांत मालूम पड़ता है,जैसे समय रुक सा गया हो,हर चीज स्पष्ट दिखाई और सुनाई देती है,लेकिन दिल में कोई भी भाव नही आता सब कुछ बस शांत ..

मुझे बल्ला अपनी ओर आता दिखा,मैं बैठ गया और बल्ला मेरे सर के ऊपर से थोड़ी ही दूरी से गुजर गया,बैठते ही मेरा हाथ घुमा और सीधे उस लड़के के पेट से ऊपर पसलियों के जा लगा,मेरी मुठ्ठी का एंगल ऐसा था की पसली उंगलियो के जोड़ो से टकराई ,ऐसा लगा जैसे वो थोड़ा अंदर तक भेद गई …

“आह…”एक कर्णभेदी और दर्दनाक चीख निकली ,वो लड़का बौखला गया था,आंखे बाहर को हो गई थी और हाथो से बल्ला छूट गया था,उसकी इस हालत और मेरे इस एक्शन को देखकर सभी कुछ सेकंड के लिए बिल्कुल ही जम से गए ..

“साले ये क्या किया “

मोटे को भी विस्वास नही हो रहा था की मैंने आखिर ये क्या किया लेकिन असल में मैंने कुछ भी नही किया था जो मुझे सही लगा बस वही किया ,वो सभी मख्खिओ जैसे मुझपर टूट पड़े ,अब मेरे लिए मुश्किल होने लगी थी,मैंने अपने घुटने को सीधे मोटे के पेट में दे मारा ,लेकिन उसे कोई खास फर्क नही पड़ा ,मैं तुरन्त ही नीचे बैठा और कोहनी से उसके जांघो के बीच वार कर दिया,इस बार मोटे की फ़टी वो अपनी माँ को याद करता हुआ जमीन में बैठ गया था,

मुझे मजा आ रहा था लेकिन लड़को की संख्या ज्यादा ही थी ,और सभी एक साथ मुझपर टूट गए थे,मैं वंहा से भागा वो लोग मेरे पीछे भागे,

“टॉमी..”मैंने टॉमी को चिल्लाया और वो भी मेरे साथ भागने लगा,थोड़ी थोड़ी देर में मैं रुक जाता और एक दो लोगो को घायल करता और फिर दौड़ जाता,वो लोग थकने लगे थे,घायल थे लेकिन फिर भी जैसे तैसे मेरे पीछे दौड़ रहे थे,तभी मैंने उनके पीछे टॉमी को छोड़ दिया,वो लोग अब डर कर दौड़ रहे थे,इधर उधर भाग रहे थे,जैसे ही वो मुझसे दूर हुए मैंने टॉमी को अपने पास बुला लिया,और खुद थोड़ा आराम कर फिर से दौड़ाने लगा ,वो फिर से मेरे पीछे थे लेकिन मैं जानता था की इतना दौड़ाने के बाद उनकी हालत खराब हो गई होगी ,और उन्हें अब टॉमी से भी डर लग रहा होगा , मैं दौड़ाता हुआ यूनिवर्सिटी के पीछे वाले हिस्से में आया जो सुनसान सा था और वंहा आकर मैं रुक गया …….

मैं पीछे पलटा ,

“अब मैं यंहा तुमलोगो को अच्छे से मरूँगा ,साला वंहा बहुत भीड़ थी,”

मेरी बात सुनकर सबकी जैसे फट ही गई ,ऐसे भी जब वो मुझे मारने आये थे तो कोई 15-20 लोग थे जो की अब 10-15 ही बचे थे,वो भी दौड़ाने के कारण हांफ रहे थे,तो कोई चोट खाया हुआ था ..

‘साले अपने को बहुत बड़ा तीसमारखाँ समझता है “

मोटा ऐसे हाँफ रहा था जैसे अभी गिर कर मर जाएगा ,अपने जीवन में साला कभी इतना नही दौड़ा होगा ,वो इतना बोलकर वही बैठ गया

“क्या हुआ बे मोटे तू तो अभी से मर गया ‘

मैं उसकी हालत देखकर जोरो से हँसने लगा

“भाई ये साला बहुत कमीना है ,दौड़ा दौड़ा कर ही मार देगा,साले ने कुत्ता भी छोड़ दिया हमारे ऊपर ,छोड़ो ना भाई इसे हम चलते है आज तो क्रिकेट भी नही खेल पाएंगे “

उसके ग्रुप में एक लड़का बोल पड़ा ..

मोटे ने उसे अजीब निगाहों से देखा,फिर मुझे देखा

मुझे उसके चहरे को देखकर हंसी आ रही थी ,मोटा काला थुलथुला शरीर पसीने से पूरी तरह से भीगा हुआ था,ऐसे लग रहा था जैसे अभी रो देगा ..

“मैं तुझे देख लूंगा साले”वो हांफते हुए मुझे बोला

“टॉमी अटैक ..”

मैं चिल्लाया ,टॉमी गुर्राया ही था की

“नही नही भाई माफ कर दो अब और नही ..”

मोटा बैठे बैठे हाथ जोड़कर जैसे लेट ही गया था,

“अब और नही दौड़ सकता ,मुझे हार्ट अटैक आ जाएगा “

उसकी बात सुनकर मैं जोरो से हंस पड़ा ...और हंसते हंसते पेट को पकडलिया

“मोटे अब मुझसे पंगा नही लेना “

मैं वंहा से जाने लगा था की अचानक ..

“तेरे माँ की ..”धड़ाक

मेरे सर पर कोई चीज जोर से टकराई ,ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे पीछे से मेरे सर पर स्टंप दे मारा हो ,मेरे सर से खून बह रहा था और सर झन्ना गया था,मुझे चक्कर सा आ गया ,और वो लोग जो अभी हार कर बैठे थे मानो नए उत्साह से झूम उठे,सभी ने अपना अपना हथियार सम्हाला और मेरे ऊपर टूट पड़े कोई बल्ले से तो कोई स्टंप से जंहा चाहे वंहा मुझे मार रहा था ,

टॉमी मुझे बचाने को कूदा लेकिन सबने डंडा घुमा दिया था ,टॉमी को भी बुरी तरह से मारने लगे थे,मैं सम्हल ही नही पा रहा था तभी अचानक एक आवाज आयी ..

“छोड़ो उसे ..”

सभी ने आवाज की तरफ देखा लेकिन उसे इग्नोर कर दिया और धड़ाक धड़ाक …

मेरा तो सर घूम रहा था कुछ साफ नही दिख रहा था बस एक कुछ लोग दिखे जो इन लोगो को मार कर वंहा से भगा रहे थे ..

मेरी आंखे बन्द ही होने वाली थी की फिर से आवाज आयी ..

“इसे उठाओ और रूम में ले जाओ ‘

थोड़ी देर बाद मुझे कुछ लोग उठाकर कही ले गए ,रास्ते भर वो चहरा चिंता से भरा हुआ मेरे सामने आ जाता था जिसने उन लोगो से मुझे बचाया था ..

उसका चहरा बहुत ही जाना पहचाना लगा ,हा मैं स्पष्ट नही देख पा रहा था लेकिन फिर भी वो आवाज और वो चहरा कुछ पहचाना सा था ,अचानक मेरे दिमाग में उसका नाम आ गया ,और होठो में मुस्कान

“काजल मेडम …..”
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04-30-2022, 11:44 AM,
#8
RE: Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
अध्याय 6

“तुम पागल हो क्या जो उनसे भिड़ाने चले गए वो भी ऐसे सुनसान से इलाके में “

एक छोटे डिंडोर स्टेडियम की एक सीढ़ी में बैठे हुए काजल मेडम मेरे सर के चोट पर मरहमपट्टी कर रही थी वही कुछ लड़के टॉमी के घाव में मरहम लगा रहे थे…

वो बेहद ही चिंता में लग रही थी

“मैं कही नही गया था वो लोग मेरे पास आ गए थे मुझसे भिड़ने ..”

“अपने आप को बहुत स्मार्ट समझते हो ,कल क्लास में भी तुमने... खतरों से भिड़ने का बहुत शौक है तुम्हे ,”

उनकी बात से मैं मुस्कुरा पड़ा

“आप कोई खतरा थोड़े ही हो ,मैं तो आपको देखते ही आपका दीवाना हो गया ..”

मैं मुकुराया लेकिन मेडम नही ..

“ओ मजनू की औलाद ऐसे बहुत लड़के रहते है मेरे पीछे और ये देखो मैं रियाल खतरा हु “

उन्होंने अपने कमर में बंधी हुई ब्लैक बेल्ट की ओर इशारा किया ,उस इंडोर स्टेडियम में कराटे,कुंफ और मार्सल आर्ट सिखाया जाता था ,मेडम वंहा पर टीचर थी ,और जब वो लोग मैदान में दौड़ रहे थे तभी उन्होंने मुझे लड़को से लड़ते हुए देखा था,और फिर भागकर उन्हें थकाकर सुनसान इलाके में ले जाते …

“यकीन नही होता की आप कराटे टीचर है आपका हाथ तो बेहद ही मुलायम है “

इस बार मैंने बड़ी ही मासूमियत से कहा था,उनके होठो पर भी एक मुस्कान उभर आयी..

“अगर कभी पड़ेगा ना तब समझ आ जाएगा,ऐसे तुमने लड़ना कहा से सीखा ..?”

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा

“कही नही मैं तो जीवन में पहली बार लड़ रहा था..”

उनके होठो की मुस्कान और भी गहरी हो गई थी ..

“तुम सच में बहुत बड़े झूठे हो ,जैसा पंच तुमने उस लड़के को मारा था वो कराटे में ही सिखाते है ,और फिर वो कोहनियो का वार ..”

“मैं सच कह रहा हु मैंने कही से नही सीखा बस मन में आया तो घुमा दिया “

वो मुझे घूरने लगी …

“तब तो तुम्हे यंहा आकर सीखना चाहिए,मेरे ख्याल से तुम अच्छे फाइटर बनोगे,”

“आप सिखाएंगी “

मैंने मासूमियत भरे हुए कमीने पन से कहा

वो मुस्कुरा उठी …

“तुम कमीने हो..,हा मैं ही सिखाऊंगी ऐसे एक ग्रैंड मास्टर भी है लेकिन उनके अनुपस्थिति में हम लोगो ही सिखाते है जो की यंहा के पुराने स्टूडेंट्स है ,हमारे मास्टर देश विदेश में घूमते रहते है साल में एक दो बार ही आते है …….”

“अब लगता है की आपके सानिध्य में बहुत कुछ सिख जाऊंगा ,अच्छा लग रहा है”

उन्होंने मुस्कुराते हुए हल्की सी चपत मेरे गालो में मार दी ……

तभी मेरी नजर गेट पर पड़ी जंहा मुझे चन्दू और निशा खड़े हुए दिखाई दिए ,मेरे देखते ही उन्होंने अपनी निगाहे फेर ली …

***********

मैं घर आया तो मम्मी से ढेर सारी डांट खाई ,वो अपने प्यार के कारण मुझे डांट रही थी ,मैंने उन्हें बताया की मैं किसी भारी चीज से टकरा गया था,मेरे सर पर पट्टी बंधी हुई थी ,आज रश्मि मुझे लेने घर आयी और घर से निकलते ही मुझपर बरस पड़ी ..

“तुम आंटी से झूठ बोल सकते हो मुझसे नही ,सच सच बताओ उस मोटे ने तुम्हे मारा है ना “

मैं स्कूटी में पीछे बैठा हुआ था ,मैं जोरो से हंस पड़ा

“अरे वो मोटा मुझे क्या मरेगा मैंने ही उसे धोया था,ऐसी जगह मारा हु की साला अब लड़ने से पहले दो बार सोचेगा जरूर,लेकिन सालो ने पीछे से वार कर दिया ..”

“तुम जंगल से क्या आये हो पागल ही हो गए हो ,तुम्हे जरूरत क्या थी उनसे लड़ने की सॉरी बोलकर निकल जाते “

रश्मि चिंतित थी ,मैंने उसके कमर को जकड़ लिया ..

“हमेशा से तो यही करता आया हु,अब और नही ..”

मैंने अपना सर उसके कंधे में रख दिया वो कुछ भी नही बोल रही थी………

स्कूल में मुझे और मोटे को काजल मेडम ने टीचर्स स्टाफ रूम में बुलाया था..

“तुम्हारे जो भी गीले शिकवे है वो यही भुला दो और हाथ मिला लो ,हमारे स्कूल के बच्चे आवारा जैसे लड़ रहे थे ये बात अगर प्रिंसपल को पता चल गई तो तुम दोनो की खैर नही ..”

मोटे ने एक बार मुझे देखा मैंने उसे आंख मार दी ,वो कुछ बोला नही ….

“मेडम मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नही है ,लेकिन अगर इसने फिर से मुझे अपने लफंगे दोस्तो के साथ घेरा तो अभी तो चोट किया हु,अगले बार इसके दोनो बॉल्स फोड़ दूंगा ,निंजा टेक्निक से "

मेरी बात सुनकर मेडम हल्के से मुस्कुराई फिर झूठा गुस्सा दिखाते हुए मुझे डांटने लगी ..

“चुप करो तुम, तुम्हे निंजा टेक्निक आती है तो क्या तुम किसी को भी मरते फिरोगे..और तुम ...एक आदमी को मारने के लिए 20 लोगो को ले जाते हो “

मेडम की बात सुनकर मोटे ने बड़े ही अजीब निगाहों से मुझे देखा

“तूने कब निंजा टेक्निक सिख ली “

वो आश्चर्य से बोला ,मैंने बस उसे आंख मार दिया

“चलो बहुत हुआ हाथ मिलाओ और फिर मत लड़ना “

हम दोनो ने एक दूसरे से हाथ मिलाया ,मोटा वंहा से जा चुका था,मेडम उसके जाते ही मुह दबा कर हंस पड़ी

“ये क्या नया सगुफ़ा छोड़ दिया तुमने निंजा टेक्निक “

“अरे मेडम आप निकलोडियन नही देखती क्या ,हथोड़ी और शिन्जो एक निंजा है और सिसिमानो उनका कुत्ता वैसे ही मेरे पास है मेरा सीसीमानो टॉमी.”

“क्या????”

मेरी बात मेडम को समझ नही आयी,और जिन्हें अभी भी नही आयी उन्हें बता दु की निकिलोड़ियन एक टीवी का कार्टून चेनल है जिसमे निंजा हथोड़ी करके एक सीरियल चलता है और उसमे हथोड़ी एक निंजा है किसके पास कई तरह की निंजा टेक्निक होती है ……..

“छोड़िये जब आपके बच्चे हो जाएंगे तब मेरी बात समझ आ जायेगी.”

मेडम ने अपना सर हिलाया जैसे कह रही हो हे भगवान ..


*************

रात का समय था मैं अपने कमरे में बैठा हुआ मूवी देख रहा था,मूवी थी ‘नेवर बेक डाउन ‘

मारधाड़ और मार्सल आर्ट से भरपूर ..

तभी मेरे कमरे का दरवाजा खुला सामने निशा थी ..

“अब तुम्हारी चोट कैसी है “

उसने धीरे से कहा ,

मैंने उसे अजीब निगाहों से देखा

“तुम्हे कब से फर्क पड़ने लगा “

वो सर झुकाये खड़ी थी लेकिन वो सुबक रही थी ,मुझे ये अजीब बात लगी आज तक जो लड़की कभी मुझसे सीधे मुह बात भी नही करती थी आज वो मेरे सामने खड़ी सुबक रही है …

“तुम मुझे बहुत ही गलत समझते हो भाई “

आज उसने पहली बार मुझे भाई कहा था

“ओह भाई ...तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना ,कही दिमाग तो नही हिल गया है जो मुझे भाई कह रही हो “

वो और भी जोरो से रोने लगी थी

“अब यंहा खड़ी खड़ी रो क्यो रही हो जाओ यंहा से मुझे मूवी देखना है “

लेकिन वो नही गई

“मुझे तुमसे बात करनी है “

“बात और मुझसे ..जाओ अपने बॉयफ्रेंड से जाकर बात करो ,”

“वो मेरा बॉयफ्रेंड नही है ,बस अच्छा दोस्त है “

“अच्छे दोस्त जांघो को नही मसला करते ,बॉयफ्रेंड नही तो शायद फक बॉडी होगा ,”

“राज ..”

वो चिल्लाई

“तुम जाओ यार यंहा से तुम्हे जिससे मरवाना हो मरवाओ लेकिन मेरा दिमाग मत खाओ “

वो जोरो से रो पड़ी

“मेरे भाई होकर तुम मुझसे ऐसी बाते कर रहे हो “

अब मुझसे बर्दास्त नही हुआ,मैं खड़ा हुआ और उसके पास जाकर उसके गालो को अपने हाथो से दबा लिया ..

उसका चहरा लाल पड़ चुका था,उसके आंखे आंसुओ से गीली थी,होठ कांप रहे थे,बाल बिखरे हुए थे,और आंखों में मेरे कृत्य के कारण एक डर सा आ गया था…

“एक बात समझ लो की मैं तुम्हारा भाई नही हु,तुमने कब मुझे अपना भाई माना जो आज बहन होने की दुहाई दे रही हो ,तुमने हमेशा ही मुझे नीचा दिखाने की कोशिस की है ,कभी मुझे भाई कहकर या मेरे असली नाम से बुलाया है तुमने ,तुमने मुझे लूजर कहा ,कुत्ता कहा और वैसा ही बर्ताव किया ,और अब तुम मुझे अपना भाई कह रही हो “

मेरी आंखे गुस्से से लाल थी ,निशा के गुलाबी होठ फड़क रहे थे ,मैंने उसके गालो को छोड़ दिया,उसके गालो पर मेरे उंगलियो के निशान पड़ चुके थे,उसके गाल बहुत मुलायम और फुले हुए थे,रंग बेहद ही गोरा था ,थोड़ा अंग्रेजो जैसे इसलिए उंगलियो के निशान साफ साफ दिखाई दे रहे थे..

“हा मैं तुम्हे चिढ़ाती थी ,तुम्हे जलील करती थी क्योकि तुम वैसे थे..इसमे मेरी कोई गलती नही है,मुझे तो तुम्हे भाई बोलते हुए भी शर्म आती थी,और तुम ही बताओ की तुमने भाई वाला कौन सा काम किया है जो मैं तुम्हे भाई बोलू,तुम तो एक डरपोक इंसान थे ,तुम्हे क्या लगता है की उस दिन कार में तुम्हारे गुम जाने के बाद मुझे खुशी हुई,तुम्हारे लिए हम सभी बहने रोती थी लेकिन छिप छिपकर …...लेकिन तुम ...तुम तो थे ही ऐसे ,तुम आज ऐसे पेश आ रहे हो मुझे थोड़ा भी आश्चर्य नही हो रहा है,असल में तुमने कभी हमे अपनी बहन नही माना ,वरना तुम उस दिन चन्दू से भीड़ जाते ,तुम मार खाने से नही डरते ,लेकिन तुम डरपोक थे ,तुम्हारे लिए तुम्हारी बहन की इज्जत के भी कोई मोल नही थे..

क्लास में कई लड़के तुम्हारे सामने ही मुझे छेड़ दिया करते थे लेकिन तुमने आज तक क्या किया ,तुम बस सर झुकाये उस रश्मि के पल्लू से दबे रहे ,तो कैसे तुम्हे अपना भाई बोलती..

जानते हो रक्षाबंधन में बहन अपने भाई के कलाई पर राखी क्यो बंधती है ...ताकि वो भाई उसके इज्जत की रक्षा करे ना की नामर्दो जैसे सर झुककर अपनी बहन की बेज्जती होते देखता रहे ..तो तुम ही बताओ मैं क्या करती,कैसे तुम्हे अपना भाई कहती ……तुम्हारी ऐसी हालत को देखकर दिल में दुख होता था ,तकलीफ होती थी लेकिन ये मेरा तुम्हारे लिए गुस्सा था जिसके कारण में तुम्हे जलील करती थी,सोचती की कभी तो तुम्हारा जमीर जागेगा लेकिन नही ...तुम्हारा तो जमीर ही मर चुका था “

निशा की बात सुनकर मैं अवाक रह गया था,उसका गाल पूरे तरह से आंसुओ से भीग चुका था,वही मेरे आंखों से भी आंसू आने लगे थे,आज तक मैं कई बार जलील हुआ था,मुझे हमेशा ही लगता था की ये उन लोगो की गलती है जो मुझे जलील कर रहे है,मैंने कभी अपने कमियों के बारे में नही सोचा,मैने कभी अपनी गलतियों को नही देखा ,कभी उसे सुधारने की कोशिस नही की ,आज निशा की बातो ने मुझे एक नया नजरिया दिया था,आज मुझे अपने ही किये कामो पर ग्लानि सी महसूस हो रही थी ,आज मुझे अपनी गलतियों का आभास हो रहा था,ज्ञानियो ने सही कहा है ,आप की असफलता आपकी ही गलती होती है,...

“हम सभी बहने तुमसे बहुत प्यार करती है भाई,मैं भी तुम्हे भाई बोलने को तराशती थी लेकिन तुम...तुम्हारे हरकतों के कारण मैं खुद को रोक लिया करती थी ,आखिर तुम ही तो हमारे एकलौते भाई हो ,तुम्हे जलाया ,तुझे जलील किया की तुम्हे कुछ तो समझ आये लेकिन कभी नही आया और तुम सब छोड़कर भाग गए ,कभी हिम्मत करके हमारे ऊपर प्यार जताया ,नही..तुम्हे तो कभी हमे बहन कहने तक की हिम्मत नही जुटाई,जानते हो कैसा लगता है एक भाई के होते हुए भी उसका ना होना, ..जानते हो हमे कितना दुख हुआ तुम्हारे जाने से,हमे अपनी गलती का अहसास हुआ लेकिन बहुत देर हो चुकी थी ,जब तुम वापस आये तो ...तुम बाहर से पूरी तरह से बदले हुए थे,लेकिन अंदर से आज भी वैसे ही हो, आज भी तुम हमे अपनी बहन नही मानते ,आज भी तुम्हारे नजरो में रिश्तों के कोई मायने नही है,तुम आज भी वैसे ही हो .. ”

वो रोने लगी थी फुट फुट कर रो रही थी ,मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया …

“मुझे माफ कर दे बहन ...मुझे माफ कर दे ..”

मैं क्यो रो रहा था ???

मुझे नही पता लेकिन मुझे दुख था,ग्लानि से मेरा कलेजा जले जा रहा था ,निशा की बातें खंजर की तरह मेरे सीने को छलनी किये जा रही थी ,मैं उसे बहुत जोरो से जकड़े हुए था वही वो भी मुझे बहुत ही जोरो से जकड़े थी……

मैं उसके सर को उसके बालो के ऊपर से ही चुम रहा था,वो मेरे सीने से लगी सुबक रही थी …

“हमारा भी कोई चांस है क्या “

दरवाजे में खड़ी निकिता दीदी ने कहा,निकिता और नेहा दीदी दोनो ही अपने आंखों से आंसू पोछ रहे थे,मैंने अपनी बांहे फैला दी और वो दौड़ते हुए मुझसे लिपट गए …

मुझे समझ नही आ रहा था की ये क्या और क्यो हो रहा है,जो इतने सालो में नही हो रहा वो आज अचानक कैसे हो रहा है,क्या ये बाबा जी के ताबीज वाली लकड़ी का कमाल था ,या सच में बस एक ऐसी दीवार का टूटना जो दीवार हमने ही अपनी गलतियों से बना लिया था,जो भी हो मुझे लगा जैसे आज मेरा पुनर्जन्म हुआ है……

मेरी बहनो ने मुझे प्यार से भाई कहा था ,मुझे याद है बचपन में वो मुझे राखी बंधा करती थी ,मेरे गालो में चुम्मी लिया करती थी,सच में मेरी बहने मुझे कितना प्यार करती थी ,फिर क्या हुआ ??

फिर क्या ऐसा होने लगा की हम अलग होने लगे,निकिता और नेहा दीदी से बातचित ही बन्द होने लगी और निशा तो मुझसे नफरत करने लगी ….

शायद वक्त को यही मंजूर था,क्योकि जो चीजे आसानी से मिल जाती है उसकी लोग कद्र ही नही करते ……..


***************

आज मेरी बहनो के कहने पर डिनर टेबल में गया,वरना मैं कमरे में ही खाना खा लिया करता था क्योकि मुझे पापा का सामना नही करना था..

“ये चोट कैसे लगी “

मेरे सर पर पट्टी देखकर पापा ने पूछा ,उनके आवाज में वही रौब था जो हमेशा होता था लेकिन आज मुझे उससे डर नही लग रहा था..

“वो क्लास में एक लड़का निशा को छेड़ रहा था तो उससे लड़ाई हो गई “

मेरी बात सुनकर निशा खाँसने लगी ,उसने आश्चर्य में मुझे देखा और मैंने बस उसे आंख मार दिया ..

“तुमने लड़ाई की ,तुम तो बोल रहे थे कही टकरा गए थे “

अब बारी माँ की थी ..

“तो आपको क्या बताता की मैदान में लड़के मुझे घेर लिए थे ,आप को तो हार्टअटैक आ जाता “

मेरी बात सुनकर सभी हँसने लगे सिवाय पापा और मम्मी के ..

मम्मी ने बुरा सा मुह बनाया ,वही पापा मुझे घूरने लगे

“तुमने सच में निशा के लिए लड़ाई की “

“हा मेरी बहन को कोई मेरे सामने छेड़े तो मैं देखता रहूंगा “

पापा ने आश्चर्य से निशा की ओर देखा ,निशा ने मासूमियत से हा में सर हिला दिया

“शाबास ,ये तुमने मेरे बेटे वाला काम किया ..ज्यादा चोट तो नही आई “

मत पूछिये की कैसा लगा ,बस ऐसा लगा की जाकर अपने पिता के गले से लग जाऊ ,क्या पूरे जीवन वो मुझसे यही चाहते थे की मैं उनके तरह मर्द बनू,शायद ...शायद इसलिए वो मुझसे ऐसे रूखे रूखे पेश आया करते थे ,

“नही ,वो पीछे से मार दिया सालो ने वरना..”

“ठीक है ठीक है चलो खाना खा लो “

पापा खाना खाने लगे वही मेरी प्यारी माँ मेरे और मेरे बहनो की कैमेस्ट्री देखकर दंग थी उसके आंखों में आंसू थे..

पापा के जाते ही वो मेरे गले से लग गई ,

“मेरे बच्चे एक दूसरे से बात करने लगे है ,साथ शरारत करने लगे है ,मैं तो सोचती थी की मैं ये सब देखे बिना ही मर ना जाऊ “

मेरी माँ थोड़ी ज्यादा इमोशनल थी ..

सभी बहनो और मैंने आकर उन्हें जकड़ लिया और उनके गाल को चुम्मीया दे देकर भिगो दिया ….
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04-30-2022, 11:45 AM,
#9
RE: Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
अध्याय 7

सुबह फिर से मेरी नींद 3 बजे ही खुल गई ,मैंने वही किया जो मुझे करना था,मैदान में गया दौड़ा,योग किया,आसान किया और ध्यान लगाकर बैठ गया ,जब तक काजल मेडम ने आकर मुझे उठाया नही ,आज से मेरी लड़ाई की विद्या शुरू होने वाली थी ,मैंने भगवान का नाम लिया और मेरे गुरुजी बाबा जी को याद किया और इस नई कला में पारंगत होने के लिए भीड़ गया ….

आज स्कूल कुछ अलग था,चारो तरफ मेरे ही चर्चे थे,की कैसे मैंने मोटे एंड गैंग को सबक सिखाया और कैसे मैं जंगल से निंजा सिख कर आया,कुछ कहानिया तो ऐसी थी की मैं खुद हैरान रह गया ,लोग मुझे आकर पूछ रहे थे,केंटीन में मुझे लडकिया और लड़के घेरे बैठे थे…..

“भाई सुना है जंगल में तुझे कोई निंजा मास्टर मिला था जिसने तुझे जादुई विद्या दे दी “

मैंने हा में सर हिलाया,कारण था कारण ये था की जिस लड़के ने ये पूछा था उसने मुझे एक कोल्ड्रिंक भी लाकर दी थी जिसे मैं स्ट्रॉ की मदद से पी रहा था ,अब उस लड़के का दिल तो नही तोड़ सकता था और मुह में स्ट्रा भी थी तो बस सर हिला दिया ,

एक लड़की ने मेरी ओर पिज्जा का एक टुकड़ा सरकाया ..

“सच में तुम्हे निंजा मूव आती है ,यानी तुम तलवार भी चला लेते हो “

मैंने पिज्जा का टुकड़ा मुह में डाला और फिर से मासूमियत से हा में सर हिलाया ..

एक बंदा जो मेरे बाजू में बैठा सेन्डविच खा रहा था वो बोल उठा

“लेकिन मैं नही मानता की निंजा वगेरह होते है “उसने बेतकलुफी से कहा ,मैंने उसे घूर कर देखा और अपने पैरो से उसके घुटनो के पास मार दिया,आज ही काजल मेडम किसी लड़के को ये बता रही थी की यंहा पर की नर्व पर वार करने से एक करेंट सा झटका लगता है ,और वो ...वो उछल गया और मुझे आश्चर्य से देखने लगा ..

“ये कैसे किया ??”

वो हड़बड़ा गया था,मैंने उसके प्लेट में रखी सेन्डविच का एक टुकड़ा अपने मुह में भरा ..

“निंजा मूव..”

सभी बड़े ही इम्प्रेस होकर मुझे देख रहे थे …

तभी मेरी नजर दरवाजे की ओर पड़ी केंटीन में दो इंट्रेंस थे एक तरफ से रश्मि आ रही थी तो दूसरी ओर से निशा …

“चलो बाकी की बाते बाद में “

मैं इन लोगो को छोड़कर खड़ा हो गया लेकिन समझ नही आ रहा था किधर जाऊ तो मैं वही खड़ा हो गया और दोनो ही मेरे पास आ गई..

“हाय राज बड़े फेमस हो गए हो “रश्मि ने आते ही कहा

“हाय भैया आप तो पैदल ही आ गए “निशा भी वंहा आ गई थी

रश्मि ने निशा को अजीब निगाहों से देखा मुझे समझ आ गया था की क्यो…

“आज अपने भाई की याद कैसे आ गई तुम्हे “

रश्मि ने ताना मारा था …..

“याद उनकी आती है जिसे भूल जाया जाता है ,और ये तो मेरे भैया है इन्हें मैं कैसे भूल सकती हु ,भैया आज से क्लास में आप मेरे साथ बैठोगे..”निशा मेरे हाथो को पकड़कर मुझसे चिपक गई थी …

रश्मि की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था ,ये स्वाभाविक भी था क्योकि रश्मि ने मेरे लिए कई बार निशा से भी लड़ाई की थी और आज निशा मुझपर हक जता रही थी जो की रश्मि को बिल्कुल भी पसंद नही आया ..

“हा सही कहा ..तुम अपनी बहन के ही साथ रहो…”रश्मि गुस्से में पलटी और वंहा से जाने लगी ..

“रश्मि सुनो..”

मैं चिल्लाया लेकिन वो नही रुकी ..

“अरे जाने दो ना उसे “निशा ने मुझसे और ही चिपकते हुए कहा ..

“कैसे जाने दु वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त है पागल ,चल उसे मनाना पड़ेगा “

मैंने खुद को निशा से छुड़ाया और रश्मि के पीछे भागा वो स्कूल में बने एक गार्डन की ओर जा रही थी ……

“रश्मि कहा जा रही हो सुनो तो “

मैंने उसका हाथ थाम लिया था

“अब मेरे रहने या नही रहने से क्या फर्क पड़ता है राज ,अब तुम्हारे पास सब कुछ है,तुम्हारी इज्जत है,स्कूल में तुम्हारा रौब हो गया है,लडकिया तुम्हे घेरे बैठी है और तुमपर लाइन मार रही है,स्कूल की सबसे हॉट टीचर तुम्हारी दोस्त जैसी हो गई है ,और अब ...अब तो तुम्हारी बहन जो कल तक तुम्हे कुछ नही समझती थी वो आज तुमपर हक जमा रही है ,तुम्हे तो सब कुछ मिल गया ना राज अब मेरी क्या जरूरत है तुम्हे ..”

रश्मि का गाला भरा हुआ था ,उसके आंखों में आंसू की बूंदे नाच रही थी …

मैंने उसके हाथो को झटका दिया और उसे अपनी ओर खीच लिया वो सीधे मेरी बांहो में आ गई ..

“दुनिया की कोई भी दौलत ,दोस्त,नाम,रुतबा,शोहरत,शराब या शबाब कुछ भी मेरे लिए तुमसे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट नही है रश्मि….तुमने मेरी उस समय दोस्त बनी जब कोई मुझसे सीधे मुह बात भी नही करता था,तुम्हारी मेरे दिल में क्या अहमियत है मैं बता भी नही सकता,बस इतना कहता हु की पूरी दुनिया भी मिल जाए और तुम ना रहो तो सब मेरे लिए फुजूल है ,अगर तुम्हे लगता है की मुझे जो मिल रहा है उससे तुम मुझसे दूर हो रही हो तो सच कहता हु अभी सब छोड़ दूंगा ,अगर पहले वाला राज तुम्हे पसंद था तो मैं अभी वैसे ही बन जाऊंगा ,पूरी जिंदगी जिल्लत सह कर रहूंगा लेकिन उफ तक नही कहूंगा…”

रश्मि की नजर मुझपर ही टिक गई थी,हमारी आंखे मिली वो मेरे बांहो में जकड़ी हुई थी ,उसने मेरे होठो पर अपनी उंगली रख दी ..

“मुझे ये वाला राज ज्यादा पसंद है ...लेकिन डर लगता है की तुम्हे मुझसे कोई छीन ना ले “

अब मेरे होठो में एक मुस्कान थी

“मैं तो तुम्हारा ही हु ,और किसमे इतनी हिम्मत है की कोई हम दोनो को अलग कर दे “

रश्मि मेरे आंखों में देख रही थी मैं उसकी आंखों में देख रहा था,मेरा सर उसकी ओर झुक रहा था,और उसकी आंखे बंद हो रही थी ,हमारी सांसे एक दूसरे से मिल रही थी ,एक दूसरे को छू रही थी ,हमारे होठ मिलने ही वाले थे की ..

“ओ माय गॉड ..ये तो लैला मजनू वाला सीन चल रहा है …”उस आवाज से हम दोनो ही हड़बड़ाए सामने निशा खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी ,हम दोनो जल्दी से अलग हुए ..

“ह्म्म्म तो ये बात यंहा तक आ पहुची है ...देखो रश्मि हमारे बीच जो दूरिया थी वो अब खत्म हो गई है,और सच कहु की तुमसे भइया को कोई नही छीन सकता इसलिए तुम्हे किसी से भी डरने की जरूरत नही है ,जिस समय भाई अकेला था तुमने ही उसका साथ दिया था,तो तुम उसकी सच्ची दोस्त हो और अब तो …”

वो मुस्कुराई

“ऐसा कुछ नही है समझी ..मैं तो बस इसके आंख में गिरा हुआ कचड़ा निकाल रहा था ..”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा

“ओह तो लगता है की मैंने डिस्टर्ब कर दिया आप कचड़ा निकाल कर आइये मैं क्लास में मिलती हु “

निशा मुस्कुराते हुए चली गई वही उसकी बात को सुनकर रश्मि का सर शर्म से झुक गया था ,

“चलो क्लास चलते है ,”

“पहले कचड़ा तो निकालने दो “

“धत “उसने मेरे बाजुओ पर मुक्का मारा और मुस्कुराते हुए क्लास की ओर चल दी …

कसम से अभी तक मैंने उस रश्मि को जाना था जो की गरज कर बाते करती थी,अच्छे अच्छो की फाड़ कर रख देती थी लेकिन आज जब वो शरमाई तो लगा जैसे ……

खिलता गुलाब ,जैसे शायर का ख्वाब,जैसे उजली किरण,जैसे मन की अगन...etc etc……..

पूरे शायराना मुड़ में मैं क्लास पहुचा और वंहा नक्शा थोड़ा चेंज था,निशा अपना बस्ता लेकर मेरे ही बेंच में आ चुकी थी अब मेरे एक तरफ निशा थी तो दूसरी तरफ रश्मि और मैं बीच में चौड़ा हुआ चौधरी बना बैठा था……

स्कूल की दो सबसे हॉट और खुबसूरत लड़कियो के बीच मैं था,जलने वालो की (लाइक चन्दू ) जल कर राख हो रही थी ,मुझे लग रहा था की स्कूल के कुछ लड़को को कुछ ही दिनों में बबासीर होने वाला है वो भी खूनी…...



काजल मेडम मुझे कुंफू,कराटे,मार्शल आर्ट,और तवाईकवांडो में ट्रेन कर रही थी ,मैं उनकी उम्मीद से अच्छा प्रदर्शन कर रहा था,मैंने रश्मि और निशा को भी क्लास जॉइन करवा दिया था,दिन बीत रहे थे,मेरा और मेरी बहनो के प्यार में भी वृद्धि हो रही थी ,मेरे जलने वाले अब चुप थे क्योकि सभी को पता चल गया था की मैं कोई निंजा टेक्निक जानता हु ,और मैंने उसका इस्तमाल करने मोटे एंड गैंग की बैंड बजा दी थी,उसके साथ सभी ये भी जानते थे की मैं मेडम के सानिध्य में लड़ाई के गुर भी सिख रहा हु ….

रश्मि और मेरी दोस्ती प्यार में बदल चुकी थी ,लेकिन मैं कितना भी निडर और आकर्षक क्यो ना हो जाऊ और मैं उस प्यार के धीरे धीरे बढ़ने की फिलिंग को नही खोना चाहता था,मैं उसे एक ही बार में प्रपोज कर अपना नही बनाना चाहता था,क्योकि मैं उस मीठे पलो का मजा लेना चाहता था…

और ऐसे ही हमारा प्यार और भी गहरा होता जा रहा था,हमे पता था की हमारे बीच क्या चल रहा है,हमे क्या मेरी माँ और बहनो को भी पता था की हमारे बीच क्या चल रहा है और साथ ही आधे स्कूल को भी शक था ...लेकिन मैं रश्मि की हर अदा का लुफ्त उठाने में लगा हुआ था …….

अब निशा और रश्मि बेस्ट फ्रेंड बन चुके थे,चन्दू मुझसे ज्यादा बात नही करता था बस मतलब की ही बात करता लेकिन वो भी डरे हुए ,वही निशा से वो बाते किया करता था लेकिन जब मैं सामने आता तो वो थोड़ा झिझकता था,मुझे पता है की निशा और उसके बीच ऐसा कुछ नही है जिसकी मुझे चिंता करनी चाहिए …

फिर भी एक दिन ……

रात हो चुकी थी और मैं अपने बिस्तर में पड़ा था तभी निशा वंहा आयी और आकर टॉमी को बिस्तर से नीचे भेजकर खुद मेरे बाजू में सो गई ,

“भाई एक बात पुछु “

उसने अपना सर मेरे सीने पर रखा और मैं उसके बालो को सहलाने लगा

“आप रश्मि को प्रपोज कब करोगे,सभी को पता है की आप दोनो एक दूसरे से कितना प्यार करते हो लेकिन अभी तक उसे आई लव यु भी नही कहा अपने “

“रश्मि ने कुछ कहा “

“वो क्या कहेगी,ऐसे तो हमेशा बड़ी चौड़ी हो कर घूमती है लेकिन जैसे ही आपका नाम लो नई दुल्हन की तरह शर्माने लगती है ..”

मेरे होठो में मुस्कान आ गई

“क्या मुझे बोलने की जरूरत है “

“हाँ है ,ये हर लड़की के लिए एक स्पेशल मोमेंट होता है जब उसे प्यार करने वाला उसे प्रपोज करे ,और आप को भी वैसे ही प्रपोज करना है ,मैं कोई आईडिया दु क्या “

वो अब ऊपर उठकर मुझे देखने लगी ,उसकी भूरी और कोमल स्किन और काली आंखे मुझे किसी बिल्ली की याद दिला देती थी वो बेहद ही प्यारी थी….

मैं उसके गालो को सहलाने लगा जो की बेहद ही सुकून भरा था..

“वो छोड़ ये बता की चन्दू और तेरा कुछ चल तो नही रहा ना,देख अगर कुछ हो तो बता दे अगर दूसरे तरीके से पता चला तो …”

“आप भी ना टिपिकल भाइयो जैसे शक करना शुरू कर दिए,जब मुझे कोई लड़का पसंद आएगा तो आपको सबसे पहले बताउंगी ,वो मेरा अच्छा दोस्त है बस,वैसे भी जब आप नही थे तो वही तो था जो मुझे समझता था,हा वो कार वाली बात बस थोड़ी बढ़ गई थी लेकिन यकीन मानो मैं उससे आकर्षित नही हु ..”

“ह्म्म्म तो किससे है ..”

मेरे मुह से अनायास ही निकल गया ..

“आपसे ..”

मैं चौका ..

“क्या ??”

वो हंस पड़ी

“हमेशा से आप से ,लेकिन आप ही मुझसे दूर भागते थे,आप तो हमेशा से ही हेंडसम हो ,ताकतवर हो लेकिन कभी भी आपने खुद को नही समझा था,मैं तो हमेशा से ही आपसे आकर्षित रही हु ..”

“तू पागल हो गई है क्या ये क्या बक रही है .”

मैं थोड़ा झल्लाया क्योकि मुझे उसकी बात कुछ समझ नही आयी लेकिन वो मुस्कुरा रही थी जैसे उसने कहने में कोई भी गलती नही की हो ….

“सच कह रही हु और इसमे इतना चौकाने वाली कौन सी बात है ..”

“मैं तेरा भाई हु ..”

“हाँ तो मैंने कब कहा की नही हो “

“लेकिन ..”

वो उठ कर बैठ गई और अपना सर पकड़ लिया

“अरे यार तो क्या एक बहन अपने भाई से आकर्षित नही हो सकती क्या आप ना ज्यादा दिमाग मत लगाओ बस और जाकर रश्मि को प्रपोज करो मैं उसे ऑफिसियल भाभी बोलने को तरश रही हु..”

वो फिर से अपना सर मेरे छाती में छिपा कर सो गई थी,लेकिन उसने मेरे दिमाग में एक सवाल को जन्म दे दिया था की आखिर निशा ने कहा क्या था,क्या वो आकर्षण भाई बहन के रिश्तो की पवित्रता लिए हुए था या और कुछ ….

जैसे और जिस मासूमियत से उसने ये बात कहि थी मुझे दाल में कुछ काला तो नही दिखा,ये अगल बात हो सकती है की मैं काली दाल ही खा रहा था ……...
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04-30-2022, 11:46 AM,
#10
RE: Antarvasna Sex Story - जादुई लकड़ी
अध्याय 8

प्रेक्टिस के बाद मैं स्टेडियम से बाहर मैदान में एक कोने पर बैठा था…निशा ने जो कहा था उसने मेरे दिमाग में एक हलचल सा मचा कर रख दिया था ,कुछ समझ नही आ रहा था की आखिर मैं उसे क्या समझू,

मुझे सबसे बड़ा डर था की कही वो मेरे प्रति शाररिक रूप से आकर्षित तो नही हो गई थी,मुझे इन सबका कोई भी एक्सपेरिएंस नही था,और उससे भी ज्यादा डर ये था की कहि मैं उसके प्रति जिस्मानी आकर्षण से ना भर जाऊ,मेरी बहनो से जीवन में पहली बार अच्छे रिश्ते बने थे जिस्म की वासना उन्हें पूरी तरह से खराब कर सकती थी,

मुझे इस चीज की कोई समझ नही थी की आखिर ये आकर्षण जिस्मानी ,रूहानी है की बस रिश्तो के बीच रहने वाला एक सहज प्रेम …

निशा ने कुछ भी हिंट नही दिया था ,लेकिन वो स्वाभाविक जरूर थी ..

सबसे ज्यादा डर मुझे खुद से लग रहा था क्योकि बाबा जी ने कहा था की मैं किसी को भी आकर्षित कर सकता हु,लेकिन मैंने उन्हें ये नही पूछा था की ये आकर्षण असल में होता क्या है,उसके मायने क्या है,क्या ये केवल जिस्मानी आकर्षण होगा,या फिर किसी अन्य तरह का आकर्षण …

तो क्या निशा मेरे ताबीज के कारण मुझसे आकर्षित हो रही थी ,अगर ऐसा था तो वो आकर्षण आखिर किस तरह का था…..

“क्या हुआ राज आज मुड़ ऑफ दिख रहा है तुम्हारा .”

काजल मेडम मेरे बाजू में बैठते हुए बोली

“कुछ नही मेम..”

“तुम चाहो तो मुझे बता सकते हो .”एक बार उन्हें देखा उनके होठो में मुस्कान साफ साफ झलक रही थी

“मेडम ये आकर्षण क्या होता है क्यों होता है .”

इस बार मेडम मुझे भेद देने वाली निगाहों से घूरने लगी .

“रश्मि से झगड़ा हुआ क्या ??”

“नही तो क्यो..”

“क्योकि ऐसे प्रश्न इंसान के दिमाग में तभी आते है जब वो कोई दुख में होता है या फिर इतना सुख पा चुका होता है की उससे ऊबने लगता है ..”

“मेरे साथ दोनो ही नही है “

“तो फिर ये व्यर्थ के सवाल क्यो??”

“क्योकि मेरे लिये ये सवाल जीवन से जुड़े हुए है ..”

“हम्म्म्म आज पहली बार तुम्हे इतना सीरियस देख रही हु ,जरूर ये बेहद ही इम्पोर्टेन्ट सवाल होंगे तुम्हारे लिए ….”

वो कुछ देर तक चुप रही ..

“जीवन की महिमा और गरिमा दोनो ही अजीब है राज,जो चीजे आपको आगे बढ़ाती है वही आपको पीछे भी धकेल देती है,और वो है इंसान की चाहते,इच्छाए हसरते…..यही हमे आगे बढ़ाती है जीवन में एक मकसद देती है ,लेकिन जब ये अपने काबू से बाहर होने लगे तो ये ही हमारे पैरो की सबसे बड़ी जंजीर बन जाती है…….

तुम जानना चाहते हो की आकर्षण क्या है ,मेरे खयाल से ये बस एक अहसासो की अभिव्यक्ति है जो हसरतो से पैदा होती है,किसी चीज को पाने की हसरते हमे उनकी ओर आकर्षित करती है ..”

काजल मेडम की बातो को मैं ध्यान से सुन रहा था लेकिन मुझे समझ नही आया की निशा की बातो से मैं इसे कैसे लिंक करू..

“क्या जिस्म की हसरते और प्यार की हसरतो में कोई समानता हो सकती है “

मैंने फिर से प्रश्न किया ,इस बार काजल मेडम ने फिर से भेद देने वाली निगाहों से मुझे देखा लेकिन मेरे चहरे पर सब कुछ शून्य ही था……

“प्रेम और शरीर का संबंध बेहद ही गहरा है,जब इंसान प्रेम को अभिव्यक्त करता है तो जिस्म का सहारा लेता है,लेकिन लोग जिस्म की वासना को पूरा करने के लिए प्रेम शब्द का सहारा भी लेते है,तो जब ऐसा सिचुएशन आ जाए की तुम्हे समझ ना आये की ये प्रेम है या महज वासना के आंधी से उठा हुआ जलजला तो खुद की सुनना ,क्या पता तुम्हे क्या चाहिए,प्रेम और वासना कभी कभी एक दूसरे के अंदर इस हद तक छिपे होते है की उन्हें अलग कर पाना बेहद ही मुश्किल हो जाता है,तो तुम्हे फैसला करना है की तुम्हे प्रेम चाहिए की अपने जिस्म की वासना शांत करनी है .”

“लेकिन ये तो गलत होगा ना ,जिस्म की वासना ..”

मेडम ने मुझे मुस्कुराते हुए देखा

“गलत चीजे नही इंसान होते है राज,वासना का उदभव शरीर में हमारे विकास के लिए होता है लेकिन लोग इसे अपने मजे के लिए इस्तमाल करते है,जिस्म की वासना ही तो है जो संसार को आगे बढाती है,और प्रेम के हिलोरों में प्रेमी जवा दिलो को भटकाती है .प्रेम तो पूज्यनीय है लेकिन वासना के बिना प्रेम भी नही हो सकता,कभी सुना है की किसी नपुंसक को प्रेम हो गया,नही, नही होता…

प्रेम होता ही उन्हें है जो जिसके अंदर ताकत हो, जिस्म की ताकत ,वासना की ताकत……”

मैं काजल मेडम के चहरे को देख रहा था वो दीप्त था प्रकाशमय बिल्कुल शांत और निडर ,मुस्कुराता हुआ उनका चहरा मेरे दिल को सुकून देने के लिए काफी था….

“मेडम मुझे डर लग रहा है ….”

आखिर मैंने वो कह दिया जो मैं कहना चाहता था ,वो भी चौकी ..

“किससे …...किसी ने धमकी दी है “

उनकी बात से मैं मुस्कुरा उठा..

“इंसानो और परिस्थितियों से डरना तो मैंने कब का छोड़ दिया है मेडम ….लेकिन मुझे डर अपने आप से लग रहा है ,अपनी वासना से लग रहा है,शायद मैं उसका सामना नही कर पाऊंगा,शायद मैं उसके बहकावे में आ जाऊंगा,शायद वो मुझसे गलत काम करवा देगा…”

मेरे चहरे में सच में चिंता के भाव आ गए थे,मेडम ने मेरे सर पर अपना हाथ फेरा …

“मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ पता लगा की कैसे तुम पहले हुआ करते थे फिर जंगल में भटकने के बाद जब तुम वापस आये तो तुमने अपने डर को भी छोड़ दिया,जरूर वंहा तुमने उन डर का सामना किया था जिससे तुम जीवन भर भागते आ रहे थे,ये डर भी वैसा है राज ,तुम्हारी उम्र ही ऐसी है जब शाररिक वासना बेहद ही ताकतवर होती है,अगर तुम इसका सामना नही करोगे डर जाओगे तो वो तुम्हारे ऊपर हावी हो जाएगी,इसे दबाने की कोशिस करोगे तो ये और भी बढ़ने लगेगी,जिस्म की आग जिस्म को जालाये तब तक ठीक है लेकिन ये अगर मन की गहराइयों में पहुच जाए तो ये मन को भी जलाने लगती है,तुम्हारे विचारो को अश्लील कर देती है ,ये समय है राज जब तुम्हे सबसे ज्यादा हिम्मत दिखानी होगी,इनसे लड़ कर तुम इसे नही जीत सकते तुम इसे समझ कर ही इसे जीत सकते हो,तो डरना बंद करो और सामना करो ….”

मैं चुप था वो भी चुप थी ,थोड़ी देर हम यू ही चुप ही बैठे रहे ..

“एक पर्सनल सवाल है ,जवाब देना चाहो तो देना वरना किसी तरह की जबरदस्ती नही है,क्या तुमने कभी मास्टरबेशन (हस्तमैथून) किया है ..?”

मैं उनकी तरफ देख कर मुस्कुराया ,और ना में सर हिलाया

“झूठ मत बोलो सभी करते है “

मेडम भी मुस्कुरा रही थी

“पता नही क्यो करते है ,मुझे तो आज तक समझ नही आया ,जो चीज कही और जाने के लिए बनी है उसे खुद ही..”

मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ी ..

“अच्छा तो तुम ये सोचते हो ...तो कभी सेक्स किया है,ऐसे तुम्हारे पास एक हॉट गर्लफ्रैंड भी है..”

मैंने फिर ना में सर हिलाया

“क्यो..??”

“कभी माहौल ही नही बना ,और आप करती है मास्टरबेशन “

उन्होंने मुझे झूठे गुस्से से देखा

“नही जरूरत नही पड़ती “

“ओह तो आपका बॉयफ्रेंड है…मुझे लगा ही था आप इतनी हॉट जो हो “

वो फिर से हँसी

“नही मेरा कोई बॉयफ्रेंड नही है “

मैंने उन्हें आश्चर्य से देखा

“यानी आप शादीशुदा हो ??”

“नही वो भी नही “वो अब भी मुस्कुरा रही थी

“तो आपको क्यो जरूरत नही पड़ती,आप एलियन हो ..”

वो हँस पड़ी थी ..

“मेरे लिए मेरा आर्ट ही सब कुछ है ,ये कला और मेरा काम मैं इसमे ही इतनी व्यस्त रहती हु की मेरा ध्यान उधर जाता ही नही ..”

उन्होंने स्वाभाविक सा उत्तर दिया

“लेकिन अपने ही तो कहा की जिस्म की जरूरते और वासना की शक्ति के बारे में फिर आपको भी तो ये सताती होंगी ..”

“हा लेकिन जिस्म से ज्यादा ताकतवर तो मन है ना,अगर तुम्हे ख्याल ही ना आये तो क्या होगा ,तो जिस्म भी चुप हो जाता है ,मेरा मन अपने काम में समर्पित है तो मेरे मन में वासना का ख्याल भी नही आता “

“ओह...यानी मुझे देखकर भी नही “

वो थोड़ी देर तक मुझे आश्चर्य से देखने लगी फिर मुस्कराते हुए मेरे गालो में एक हल्की सी चपत लगा दी

“बदमाश कही के ,खुद को देखो और मुझे देखो मैं तुम्हे देखकर एक्साइट होऊँगी ..”

“क्यो क्या कमी है मुझमे जवान हु ,हेंडसम हु “

“हा तुम हो लेकिन अभी मेरे सामने बच्चे हो “

वो खिलखिलाने लगी ,क्या मुस्कान थी उनकी मेरा सारा भय ,तकलीफ ,चिंता सब जाती रही ,मन में चल रहा कौतूहल मानो शांत हो गया था ……

“अगर कभी आपके मन में जिस्म की भूख जागे और किसी की मदद की जरूरत पड़े तो मुझे याद कर लीजियेगा,मुझे खुशी होगी आपकी मदद करने में “

वो इस बार सीरियस तरीके से मुझे देखने लगी

“ये तुम्हारा मजाक है ??”

“नही प्रपोजल है “मैंने मुस्कुराते हुए कहा

वो भी मस्कुराते हुए उठी और वंहा से जाने लगी ,मैं उनके जिस्म को गौर से देख रहा था ,पूरा जिस्म गठीला था,हर हिस्सा कसा हुआ,और हॉट पेंट में वो और भी कयामत लग रही थी ,एक्सरसाइज करने के कारण वो पूरी तरह से शेप में थी …

और साथ ही उनकी अदाएं और सुंदर चहेरा ...वाह भगवान की इस कलाकारी पर मेरा दिल आ गया था …

“मेडम सुनिए बस एक सवाल “

मैंने थोड़े जोर से कहा वो रुकी और पीछे मुड़कर मुझे देखने लगी ..और मेरी ओर बढ़ी

“अगर मैं ऐसी सिचुएशन में फंस जाऊ की मुझे कुछ समझ ना आये,दिल और दिमाग अलग अलग बाते करने लगे तो मैं क्या करू…”

वो थोड़ी देर सोचती रही ..

“अपने दिल की सुनना ..”

“लेकिन विचार करना तो दिमाग का काम है ना ,सही गलत की समझ दिमाग को ही होती है ,कही दिल कुछ गलत ना करवा दे “

वो फिर से मुस्कराते हुए मुझे देखने लगी ..

“दिल की सुनो और दिल की करो ...लेकिन दिल की सच्ची आवाज को सुनना जरूरी है जो शांति में ही आती है विचारो की भीड़ में नही ...अब मिल गया तुम्हे जवाब “

मैंने हा में सर हिलाया ,वो फिर मुस्कराते हुए जाने लगी

“मेडम सुनिए ना “मैं फिर से चिल्लाया,वो पलटी तो मैं भी खड़ा हो कर उनके पास जाने लगा..

“मेरा दिल मुझसे कुछ बोल रहा है ..”

मैं उनके पास पहुच गया था ,उन्होंने आंखों से ही पूछा क्या

“की आप बहुत अच्छी है ,और शायद मैं आपके मोहोब्बत में गिरिफ्तार हो गया हु “

वो खिलखिला कर हंस पड़ी

“ओह ये बात है तुम नही सुधरोगे ..”

वो हसंते हुए जाने लगी

“आप सच में मुझे बच्चा समझती है कभी सीरियस ही नही लेती “

उन्होंने मेरे गालो को पकड़कर उसे खींच दिया “

“तुम तो हो ही बच्चे ..”

मैंने बुरा सा मुह बनाया तो उन्होंने मेरे गालो में एक किस ले दिया ,

“अब खुश “

सच कहु तो मैं खुशी से झूम गया था,ये कोई वासना नही थी ना ही किसी प्रकार का जमाने की नजर में होने वाला प्रेम नही ये बस एक अपनत्व था जो उन्होंने मुझपर दिखाया था ,,मैं नाच रहा था वही वो मेरी हरकतों को देखकर खिलखिलाने लगी थी ...और उनकी ये खिलखिलाहट ही मेरे लिए मेरा असली इनाम था …...
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