antervasna चीख उठा हिमालय
03-25-2020, 01:19 PM,
#41
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
" क्या मतलब ?" चौका विकास ।



" मतलब एकदम साफ है ।" अलफांसे ने बताया ----" हैरी मेरे मेकअप में वतन से मिला है । वतन, धनुषटंकार और अपोलो उसे अलफांसे ही समझते हैं । तुम समझ सकते हो कि यह सब कुछ वह --वेवज एम-- का फर्मुला प्राप्त करने के लिये कररहा है ।"



“ओह ।" विकास का चेहरा गंभीर हो गया----" तो हैरी पहुंच चूका है यहां ।"



"उधर वह अपनी बात चाल रहा है और इधर हम अपनी अलफासे ने बताया ।



"कैसी चाल ?"

"वह्र सब कुछ बाद में संमझना ।" अलफांसे ने कहा--"पहले जरा यह समझ लो कि यहां कैसे क्या हो रहा है के अखबार में वतन का स्टेटमेंट पढकर ही मैं और पिशाचनाथ यहां पहुंचे हैं । पहुंचते ही चौके, क्योंकि पता लगा कि पहले ही एक अलफांसे यहां पहुंच चका है । यह पता लगाने की तरकीब सोच ही रहे थे कि वह कौन है कि अचानक हमारे गले में पड़ा ये लॉकेट रुपी ट्रासमीटर स्पार्क करने लगा । ओपिन करके बातें की तो पता लगा कि दूसरी ओर से विजय दी ग्रेट बोल रहे थे ।
उन्होंने पूछा कि, हम कहां से बोल रहे है ? हमने शराफत से बता दिया । दूसरों तरफ से कहा गया कि वतन के पास जो अलफासें पहुचा है वो हैरी है । हमने हमने पूछा कि यह चक्कर क्या है ? वह कहां से बोल रहा है ? जवाब आया--चीन से ।। हम चौकें । चौकने की वजह भी थी । चीन का बच्चा बच्चा विजय, का दुश्मन है और उसी, चीन से विजय बोल रहा था । साथ ही चीन में बैठे बैठे उसे यह भी मालूम था कि चमन में वतन के पास जो अलकांसे पहुँचा है, वह हैरी है । बहुत-से सवाल हमारे दिमाग में चकराने लगे जिनका जबाब हमने विजय से मांगा ।।


उत्तर में विजय से कहा कि 'जब तक सारा चक्कर हमें नहीं बतायेगा, हमारी समझ हैं … कुछ नहीं आयेगा । अत: विजय ने ट्रांसमीटर पर ही हमें पूरा चक्कर समझायां ।।
बताया कि किस-किस प्रकार विभिन्न राष्ट्र के जासूस 'वेवज एम' का फामू'ला प्राप्त करने के लिये चमन की ओर चले हैं । यह भी बताया कि सभी राष्ट्रों के जासूसों को नाकाम करने केलिये उसने भारतीय जासूसों का जाल किस प्रकार बिछाया है ।। उसने बताया कि अमेरिका में अशरफ ने सूचना भेजी है कि हैरी ने ट्रांसमीटर द्वारा अपने चीफ को रिपोर्ट भेजी है कि वह अलफांसे के मेकअप में वतन तक पहुंच चुकां है । यही खबर उसने मुझे दी ।। यह भी बताया कि आज किसी समय एक सरदार के भेष में तुम यहाँ पहुंचने बाले हो । बस-उसी सूचना पर हमने तुम्हें एयरपोर्ट पर पकड़ा और किस मजे से तुम्हें यहां तक ले आये ।"


" लेकिन गुरु, जब आपको मालूम है कि वह है तो ---?"



"तो क्या ?"



“क्यों नहीं राष्ट्रपति भवन में पहुंचकर, वतन से मिलकर उसकी असलियत खोल देते'"



"उससे क्या, होगा ?"

"होंना क्या है, 'वैवज एम' का फार्मुला प्राप्त करने के उसके इरादों पर पानी फिर जायेगा ।"' विकास ने कहा ----" इसके अतिरिक्त चमन में आने का हमारा मकसद भी क्या है ?"
"'मामला अगर सिंर्फ हैरी तक ही सीमित हो विकासं प्यारे, तो तुम्हारा बताया हुआ रास्ता सही था । अलफांसे ने कहा--"लेकिन यहाँ किस्सा सिर्फ हैरी का नहीं वल्कि बागरोफ, जेम्स बाण्ड तुगलक अली नुसरत खान, सांगपौक , हवानची और सिंगसी इत्यादि का है ।"



"क्याआपको मालूम है कि ये सब लोग कहां है और क्या कर रहे हैं ?"





" यही तो मालूम करना है ।" अलफासे ने कहा----"यह बातें तो स्पष्ट है कि ये सभी अलग अलग फार्मुला प्राप्त करने के लिये अपना-अपना मोर्चा जमा चूके है लेकिन कौन कहां किस ताक में है, यही पता लगाना है ।"'



" लेकिन यह पता कैसे लगेगा ?"


…"चुपचाप यहां बैठे तमाशा देखते रहो स्वयं ही पता ला जायेगा ।" अलफासे ने कंहा…अगऱ हम मैंदान में पहले कूद पड़े तो वे सभी हमारे प्रति सतर्क हो जायेंगे । अपने से पहले मैदान में कूदने को अवसर हमें उन्हें देना ।"



"'मैं समझ नही रहा हुं गुरु, कि आप कहना क्या चाहते हैं:' जै"



-"वह साला जासूस की दुम ठीक कहता है तुम्हारी खोपड़ी में अक्ल की बात नहीं घुस पाती है" अलफांसे ने कहा-"अबे हमारा सीधासा मतलब यह है कि हमें उस समय मैदान में कूदना है जब सब की स्थिति का, ज्ञान हो जाये ।
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03-25-2020, 01:19 PM,
#42
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
" हम वह ज्ञान प्राप्त करते ही रह जायेंगें अौर हैरी फार्मुला प्राप्त कर लेगा ।" विकास ने कहां ।



हल्के से मुस्कराया अलफांसे । वही मुस्कान् जो अक्सर ऐसे समय उसके होंठों पर उभंरा करती है । ।।
" फार्मुला प्राप्त करना उतना आसान नहीं है बैटे, जितना तुम समझ रहे हों । पहली बात तो वतन ने उसे इतनी लापऱवाही से नहीं रखा होगा की कोई उसे आसानी से प्राप्त कर ले और दूसरी बात यह कि सांगगोक, बागारोफ और जेम्स बाण्ड इतनी सरलता से उसे फार्मुले के साथ अमेरिका नहीं पहुंचने देंगें । माना कि हैरी फार्मुला निकालने में सफल हो
जाता है । बीच में विभिन्न देश के जासूस उसका मार्ग अबरूध करेंगे --बस -हमें विदित हो जायेगा कि किसने कहां क्या मोर्चा लगाया है ? यह पता लगते ही हम स्वयं भी मैदान में कूद पड़ेंगे ।"



" क्या अाप स्पष्ट शब्दों में मुझे अपनी योजना नहीं बता सकते गुरु ?"



" बता तो दी है ।" अलफासे ने कहा…"इससे स्पष्ट अौर क्या -बताऊं ? तुम एयरपोर्ट से सीधे राष्ट्रपति भवन पहुंचकर हमारी सारी योजना पर पानी- न फेर दो यही सोचकर तो हम तुम्हें सीधे यहाँ ले आये । वैसे तुम्हें एक बात बता दें और वह, यह कि सब कुछ करने के लिये ट्रांसमीटर पर जासूसं प्यारे े ही हमसे कहा था । यह भी कहा था कि तुम्हारे यहां पहुंचते ही हम ट्रांसमीटर पर उससे सम्बन्ध स्थापित करें ।।"



विकास चुप ही रहा न जाने क्या सोच रहा था वह ?


अलफांसे ने अपने गले से लोंकेट-रूपी ट्रांसमीटर निकाला और सम्बन्ध स्थापित किया ।




"'चमगादड़ की मम्मी स्पीकिंग ।" दूसरी तरफ से विजय का स्वर उभरा ।


"'मैं चमगांदड़ का बाप बोल रहा हूं ।" हल्के से मुस्कराकर अलफासे ने कहा ।

" हांय ।" दूसरी तरफ से कहा गया है-""चमगादड़ के बापू , कहां हो तुम ? मैं चीन की दीवार पर उल्टी
तुम्हारी विरहाग्नि’ का स्वाद चख रही हूँ ।। मैंने जो अाम का अचार तुम्हारे पास भेजा था, वह पहुंचा या नहीं
।"

"पहुंच गया है ।" अलकांसे ने कहा-"स्बाद चखो ।"



कहते हुए अलफांसे ने ट्रांसमीटर विकास को पकड़ा दिया ।



विकास ने कहा…"पांव लागूं गुरु ।"



" जल्दी से हो जाओं शुरु ।" विजय की आवाज ।



" गुरू ये सब चक्कर क्या चल रहा है हैं"



"ये ज्ञान की बातें हैं प्यारे दिलजले । तुम समझने की कोशिश करोगे तो हमारी तरह चमगादड़ बनकर उल्टे लटक जाओगे ।" दूसरी ओर से विजयं कह रहा था… मुझे तुमसे सिर्फ इतना ही कहना है कि तुमसे अपने लूमड़ भाई -जो कहे, आँख, कान, नाक, मुंह बन्द करके वह करते चले जावो ।"


" क्या मतलब गुरु ?"



"मतलव कल्लो कहारी के मंजे हुए बर्तनों कौ तरह एकदम साफ है प्यारे दिलजले । दिमाग और धैर् यसे काम लोगे तो कामयाब हो जाओगे, वरना प्यारे, अन्तरोंष्ट्रीय जासूसों के चक्रव्यूह में फंसकर अभिमन्यु ही कहलावोगे
"

"आपके ढंग से काम करना मेरे बस का नहीं है गुरु ।"



"तुम क्या करना चाहते हो ?"



" मैं तमाशा घुसकर देखना चाहता हूं । "विकास ने कहा-मैं डरपोक नहीं जो जासूसों के चक्रव्यूह से डरुं ।"

" मुझे बहादुर आदमियों से डर लगता है प्यारे ।" विजय की आवाज-अच्छा है कि ट्रांसमीटर तुम अपने लूमड़ भाई के हाथ में दे दो ।"




" मैं कुछ करने की इजाजत चाहता हूँ गुरु !"


" क्या करने की ?"
"अभी मैं स्वयं भी नहीं जानता कि क्या करना है मुझे ?" विकास का स्वर निरन्तर गम्भीर होता चला जा
'रहा था…"इस अभियान को शुरू से ही आपने मुझे अपनी योजनाओं के चक्कर में बांध रखा है । इस तरह काम करना से मुझे बोरियत आती है । मैं खुलकर कुछ करना चाहता हूँ । अच्छा है कि आप अपनी योजनाओं के अँकुश मुझ पर न लगायें ।। मुझे अपने ढ़ग से काम करने दे । मुझे सिर्फ इतना विदित है किं हैरी गुरु का मेकअप करके वतन के पास चला गया है । मैं हैरी को इस ह्ररकत का सबक देना चाहता हूं ।"




"जिस आदमी को यह नहीं पता कि वह करना क्या चाहता है वह करेगा क्या ?"

"प्यारे लूमड़ भाई, अपने साले दिलजले का तो है दिमाग खराब है !" विजय ने कहा--- "उसे कोई ऐसी हरकत करने को रोकना तुम्हारा काम है जिससे हमारी योजना पर पानी न फिर जाये, मैं कहता था न --- असली जासूसी नहीं जानता वह । साला मारधाड़ में विश्वास करता है अौर इस समय उसके हाथ खुजला रहेॉ है कहीं ऐसा न हो कि हैरी से ही जाकर लिपट जाये । अगर ऐसा हो गया प्यारे लूमड़ भाई, तो तुम स्वयं समझ सकते हो कि हमारी सारी योजना का कचूमर निकल जायेगा ।"



"उसकी तुम चिंता मत करो जासूस प्यारे ।" अलफांसे ने कहा -" विकास मेरे पास है और इसे मैं देख लूगा तुम बताओं कि नई बात है क्या कुछ ?"


--"हां है" विजय ने बताया, अलफांसे के साथ विकास भी ध्यानपूर्वक सुन रहा थां-"कुछ ही देर पहले अमेरिका से अपने झानझरोखे ने खबर भेजी है कि हैरी ने ट्रांसमीटर पर अमेरिकन सीक्रेट सर्विस के चीफ को एक रिपोर्ट भेजी है ।"'



"क्या ?"




"यह कि अलफासे के भेष से वह प्रयोगशाला के अंन्दर पहुंच गया है ।" विजय ने कहना प्रारम्भ किया---"हैरी ने वतन की प्रयोगशाला के अन्दर स्थान-स्थान पर अपनी योजनानुसार टाइम बम फिक्स कर दिये प्रयोगशाला से फार्मुला निकालने की न उसने सिर्फ पूरी योजना वना ली है वल्कि उसे कार्यान्वित भी करना प्रारम्भ कर दिया है हैरी ने अपने चीफ को बता दिया है कि अपनी योजना के अनुमान टाइमिंग सैट करके उसने प्रयोगशाला के अंदर कई बम फिट कर दिये हैं वह प्रयोगशाला से बाहर निकलेगा।। वतन, धनुषर्टकार और अपोलो के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचेगा भवन से चमन घूमने के बहाने वह ठीक शाम को छ: बजे बाहर निकलेगा--
इस समय में बह प्रेयोगशाला की चारों सर्चलाइटें फोड़ने का प्रबन्ध कर आयेगा ।ये चारों सर्चलाइटें रात के ठीक बारह बजे फूटगी । उस समय अलफांसे बना हैरी वतन इत्यादि के पास ही सौया होगा इत्यादि ।" दूसरी तरफ से विजय ने ट्रांसमीटर पर हैरी की सारी योजना बता दी अन्त में बोला----" इस प्रकार वह फार्मूला लेकर चमन से बाहर जाने वाली सडक पर ठीक वहां पहुंचेगा, जहाँ मील का वह पत्थर लगा होगा, जिस पर बारह लिखा होगा । हैरी ने यह भी बताया है कि उस समय वंतन के मेकअप में होगा ।"

-"हूँ ।" अलफासे सुनता रहा ।



" इधर अमेरिकन सीक्रेट सर्विस चीफ ने हैरी से कहा है कि वह हैलीकॉप्टर लेकर जैकी को भेजेगा, इत्यादि ।"





"निश्चय ही बडी सुन्दर योजना बनाई है हैरी ने ।" अलफांसे ने कहा---"हैरी क्या कुछ करने जा रहा है यह तुम जान चुके हो लूमड़ भाई ।" विजयं ने कहर-"बदले में तुम्हें क्या करना है; यह बात तुम जैसे समझदार आदमी को समझामे की आवश्यकता नहीं है है ।"





" हम सब सम्हाल लेंगे है"



"ओ - के ।" विजय ने कहा जरा दिलजले की लगाम खींचकर रखना यह ऐसा घोडा है कि बेलगाम होते ही सरपट दौड़ना शुरू कर देता है । फिर ऐस गिरता है सम्हालने गुरुयों को ही जाना पड़ता है ।। ध्यान रहे वह कोई ऐसाा कदम न उठा पाये जिससे सारा गुड़ गोबर हो जाये । "


इन शब्दों के साथ ही दूसरी तरफ से विजय ने सम्बन्ध विच्छेद कर दिया ।। ट्रांसमीटर आँफ करके लाकेट गले में पहनता हुआ अलफांसे विकास की तरफ देखकर बोला ---" सुना तुमने ? क्या कहा तुम्हारे अंकल ने ?"
"मैं तो ये सुनना चाहता हूं गुरु, कि आप क्या कहते हैं ।"



"किस विषय में ?"

" क्या मुझे गुरुयोॉ की कैद में रहकर काम करना पडेगा ?"



"साफ-साफ कहो ।" अलफांसे का गम्भीर स्वर ---" क्या कहना चाहते हो ! "



""यह कि शुरू से ही इस केस पर खुलकर काम करने का मौका नहीं दिया जा रहा है ।" विकासं का लहजा अलफासे से भी कहीं अधिक गंभीर था…"मै चमन के लिये रवाना होने बाला था, जवं मैंने अखबार में वतन का स्टेटमेंट पढा, किन्तु विजय गुरु ने यह कहकर रोक दिया कि सारा काम एक योजनाबद्ध तरीके से होगा । मैं रुक गया ।। उनकी बात मान ली । उनकीं योजना के अनुसार ही सरदार के मेकअप में मैं यहाँ पहुंचा । यहां पहुंचते ही आपने मुझे आनी कैद में ले लिया । फिर वही बन्दिश कि मैं कुछ न करु---सांरा काम योजनानुसार होगा ।"




" क्या सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है ?"



"खाक ठीक-चल रहा है !" गुर्रा उठा बिकास… "हैरी ने वतन की प्रयोगशाला में बम फिट कर दिये यह ठीक चल रहा है ?"



"ठीक न चलता तो यह खबर हम तक न पहुंचती । "




" जो कुछ चल रहा है, उसे आप ही ठीक समझे गुरु ।" विकास ने कहां…"मेरी दृष्टि में तो यह सब कुछ
गलत हो रहा है । योजना के नाम पर मैं आपकी तरह यहाँ चुपचाप बैठकर सव कुछ नहीं देख सकता ।"

" तुम करना क्या चाहते हो ?"
"हैरी की गर्दन तोड़ना चाहता हूं ।" विकास गुर्राया---"उसने वतन की प्रयोगशाला में वम फिट करने की जरूरत कैसे की ?"



" तुम मैदान में अाये तो सांगपोक, बागरोफ, तुगलक और जेम्सवाण्ड में से कोई तुम्हारी गर्दन तोड़ देगा ।"




" देखा जायेगा गुरु ।" बिकास गुर्रा उठा था---"इतना बुजदिल नहीं है आपका चेता कि उन कुतों के डर से इस बिल में छुपा रहे । "




-"सवाल बुजदिली का नहीं बेटे, सवाल है बुद्धिमानी का ।" अलफांसे ने कहा-"तुम स्वयं समझ सकते हो मैदान में सिर्फ हैरी उतरा है,.वह भी मेरे मेकअप में । जिस मकसद से हैरी यहाँ पहुंचा है, उसी मकसद से बाण्ड, बागरोफ, नुसरत खान और सांगपोक इत्यादी अपने-अपने देशों से चले हैं । जरा सोचो सोचो कि वे सब कहाँ गयै क्या कर रहे ?"



" आपकी तरह छूपे बैठे होंगे किसी विल में" ।



"क्यों ? " ।।


" हैरी फामुँला प्राप्त करे और वे उससे छीन लें ।"'




" मतलब सोंचने का पुरा दिमाग है तुम पर, किन्तु उसे कष्ट नहीं देते हो ।" हल्के से मुस्कराकर अलफांसे ने कहा--" निश्चय ही

अपना-अपना मोर्चा लगाये घात में बैठे है कि जैसे ही वह फार्मुला निकालकर प्रयोशाला से बाहर लाये और अपनेअपने ढंग से वे उस पर झपट पड़े ।। उनके बीच जमकर युद्ध होगा और जो भी उनमें अंतिम विजेता होगा, वह हमारा शिकार बनेगा ।"


" अगर सब यहीं सोचे बैठे रहे तो हैरी सफालतापूर्वक फार्मूला लेकर अमेरिका पंहुंच जायेगा ।"



" वहां उसे रोकने के लिए अशरफ मौजूद है ।"
"आवश्यक तो नहीं कि अशरफ अंकल उसे रोक ही लें ? " विकास ने कहा----"हम इस उम्मीद पर यहां क्यों बैठे रहें कि प्रयोगशाला से निकलकर अन्त में फार्मूला हमारे ही हाथ लगेगा । जब हम यह कर सकते हैं कि फार्मूले को वतन की प्रयोगशाला से बाहर ही न निकलने दे तो क्यों न ऐसा ही करें ? क्यों यह रिस्क उठाये कि हैरी फामुँला बाहर लाये ? अन्य जासूस उस पर झपटें ?"
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03-25-2020, 01:20 PM,
#43
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
-"मानते हैं कि अगर हम चाहें तो फार्मूले को प्रयोगशाला से बाहर ही न निकलने दें ।" अलकांसे ने कहा… "'लेकिन दिमाग लगाकर जरा यह सोचने की कोशिश करो..कि अगर हम ऐसा करें तो क्या होगा ?"




"फामू'ला सुरक्षित रहेगा और क्या 'होगा ?"




" बिल्कुल ठीक ।" अलफांसे ने कहा-"यह बात बिल्कुल सच है कि फार्मूला प्रयोगशाला में बिल्कुल सुरक्षित रहेगा, किन्तु याद रहे, जब तक वह प्रयोगशाला में सुरक्षित रहेगा तब तक किसी भी देश का जासूस चमन से नहीं टलेगा और इस प्रकार चमन न जाने कब तक अन्तर्राष्ट्रीय जासूसों का केन्द्र बना रहेगा, जो न चमन के लिए उचित है, न -वतन के लिए है"



-"तो आप यह चाहते है कि फार्मूला प्रयोगशाला से बाहर आये ।"

-"ठीक समझे ।"




" ठीक है ।'"विकास ने कहा…"फार्मूला प्रयोगशाला से बाहर तो अवश्य आयेगा, किन्तु उस तरह जिस तरह मैं चाहता हूँ ।"



"तुम किस तरह चाहते हो ?"


चुप रह गयो बिकास है उसने कोई जवाब नहीं दिया ।



इस बीच न जाने वह क्या… सोच रहा था । अलकांसे के साथ साथ पिशाचनाथ 'भी विंचित्र-सी दृष्टि से उसकी तरफ़ देख रहा था ।।।
जब काफी देर की खामोशी के पश्चात भी विकास 'कुछ न बोला, चुप ही रहा तो----



" क्या सोच रहे हो बेटे ?" अलफासे ने उसकी विचार श्रृंखला भंग की ।



एकाएक ही अलफांसे की ओर देखकर चुटकी बजाई बिकास ने, बोला-"दिमाग में आइडिया आ गया गुरु ।"



" क्या ?"

" ---सचमुच अलफांसे बना हैरी प्रयोगशाला से फार्मूला गायब करेगा ।



" ये कौन-सा नया आइडिया ? "




" सचमुच आपकी और विजय अंकल की स्कीम बहुत अच्छी है गुरु ।" अपनी रिस्टवाच में समय देखते हुए विकास ने कहा--- लेकिन मेरे दिमाग में जो आइडिया आया है अगर यह इस स्कीम में फिट कर दिया जाये तो सच, खतरे की कोई बात ही न रहे ।"




-"कुछ बताओगे भी या ऐसे ही पहेलियां ही बुझाते रहोगे ?"



"सुनिये ।" कहने के उपरान्त विकास धीरे-धीरे उन्हें कोई बात बताने लगा । उसकी बातें सुनने के लिए पिशाचसाथ भी करीब खिसक आया था और कान लगाकर उनकी बातें सुन रहा था । सवं कुछ सुनने के पश्चात उसके मुंह से वरबस ही निकल पडा-"सच महाराज । यह आइडिया फिट रहेगा ।"



किंतु, अलफांसे ने कहा…"यह क्या गारन्टी है कि जो तुम कह रहे हो, वह हो ही जायेगा ।"


" क्या अपने शिष्य पर भरोसा नहीं रहा गुरु ?"



" मेरा मतलब हैं कि बातं उल्टी भी तो पड़ सकती है ।"


" यह कार्य मेरे अधीन है गुरु और इस कार्य की आप चिन्ता न करें !" विकास ने कहा…"अगर आप मुझे सिर्फ यह इजाजत दें कि मैं यह सव कर डालूं ।"

हल्के से मुस्कराया अलाफांसे बौला-"जानता हूँ बेटे कि अगर में इजाजत न भी दूं तो जो तुम करना चाहते हो , बह करने से बाज नहीं आओगे ।। अत: इजाजत देकर अपना सम्मान बचाये रखना ही उचित हैै तुम वही करोगे जो कह रहे हो, इसके अतिरिक्त कुछ नहीं करोगे ।। "



"'जियो गुरु, हजारों साल तक जियो !" कहते हुए विकास ने अलफांसे के चेहरे-पर चुम्बनों की झडी लगा दी ।।।
रात के आठ बज रहे थे है चमन की इमारतें, सड़क, बाजार और दुकानें विद्युत बल्वों एवं रोंंडों से चमक रही थी है कि अलफांसे बने हैरी के होंठों इस समय विजयात्मक मुस्कान थी ।




वह प्रयोगशाला के चारों और फैली छावनी से लौट रहा था । किसी प्रकार वह चार सैनिकों को मारकर उनकी गर्ने प्रयोगशाला की चारों सर्चलाइटों के निशाने पर इस प्रकार फिट कर आया था कि वे चारों गनें एक-एक…मिनट के अन्त-राल ठीक वारह बजे गर्जनी थीं ।।



वह जानता था कि जो प्रबन्ध वह करने आया है उसके अनुसार बारह बजे चारों सर्चलाइटैं फूट जायेंगी ।




चारों मृत सैनिको के शरीरों को वह मजबूत रेशम की डोरी की सहायता से खाई में लटका आया था ।।


इस समय टेक्सी में वह राष्ट्रपति भवन की और लोट रहा था ।



टैस्सी की गति से कहीं अधिक तीव्रता के साथ उसके मस्तिष्क में विचारों का आवागमन हो रहा था ।

वह एक बार पुनः मस्तिष्क में निर्धारित कर रहा था कि अपनी योजना अनुसार उसे अागे क्या करना है ।।




एक झटके के साथ टेक्सी रुक जाने से अचानक उसकी विचार श्रृंखला भंग हो गई ।।



उसने चौंककर देखा टैक्सी एक सुनसान इलाके में सड़क के किनारे रुकी थी ।।



हैरी एकदम स्तर्क हो गया जेब के बाहर से ही हाथ रिबाँल्वर पर जमाकर बोला---"क्या बात है ड्राइवर ?"

"ड्राइवर नहीं, तुम्हारा शिष्य है गुरु ।” ड्राइवर के मुख से विकास का स्वर निकला --' त--तुम ?" हैरी हकला-सा गया ।



."क्यों गुरु, मुझे यहाँ देखकर चकरा क्युं गए ।।



सचमुच हैरी का मस्तिष्क बुरी तरह चकरा उठा । झनाहट-सी हो रही थी उसके दिमाग में !



इस बात की तो उसने कल्पना भी नहीं की थी कि इस तरह अचानक-से उसका सामना विकास से हो जाएगा ।


एक बार को तो उसके दिमाग में विचार जमा कि वह रिवॉल्वर निकालकर फौरन विकास पर फायर कर दे, किंतु--ठहर गया । उसने ऐसा नहीं किया'। ऐसा करते ही यह स्पष्ट हो जाना था फि वह अलफांसे नहीं, कोई अन्य है विकास के उपर्युक्त वाक्यों से उसने जाना था कि विकास उसे अलफांसे ही समझ रहा है ।

यह जानना भी उसके लिए बहुत आवश्यक था कि विकासं यहां क्या कर रहा है ?


अत: सम्भलकर अलफांसे के स्वर में ही बोला---" चकराने का तो कोई प्रशन् ही नहीं, किन्तु...... !"



"किन्तु क्या गुरु ?"



--"तुम यहाँ क्या कंर रहे हो ?"


" जो आप कर रहे है !"


" यानी ?'"

"मैं वतन और उसकी हिफाजत के लिए चमन में आया हुं ।" विकास ने कहा ।
" उसके स्टेटमेंट का तो परिणाम है कि आप जैसी हस्ती चमन में घूम रहीं है ।" कहता हुआ विकास कार का देरवाजा खोलकर बाहर आ गया ।



हैरी भी पूर्णतया सतर्क और अपनी सतर्कता का परिचय देता हुआ वह भी दरवाजा खोलकर तुरन्त ही बाहर आ गया था है किन्तु-----विकास ने आगे बढकर उसके पैर छू लिए, बोला----" यह जानना चाहता हूँ गुरु कि आप चमन में क्या कर रहे है ?"






"जिस लिए तुम आए हो, उसी मकसद से मैं भी चमन-आया हूँ ।" अलफासे के ही स्वर में हैरी ने उत्तर दिया, यहाँ तक मेरा ख्याल है, सभी देश अपने-अपने जासूसों को यह फार्मूला प्राप्त करने के लिए चमन में भेंजेंगे ।"

" और आप उन सबसे पहले फार्मूला प्राप्त करने यहां पहुँच गये । "


" क्या बकते हो ?"



"फार्मूला प्राप्त करने के उपरान्त आप अपनी पुरानी आदतानुसार उसकी कीमत लगा सकें ।" विकास ने कहा… "जो देश आपको उसकी सर्वाधिक कीमत दें, उसे आप वह फार्मूला वेच सकें,, बोलिए-चमन में आपके अाने का यही मकसद है ना ?"




""क्या बात कर रहे हो विकास ?" अलफांसे ने कहा ----"हकीकत यह है कि से यहाँ उस फार्मूले की हिफाजत के लिए आया हूँ । यह सोचकर आया हूँ कि किसी भी राष्ट्र के जासूस को यह… फार्मुला प्राप्त नहीं करने दूंगा । क्या तुम समझते थे कि मैं वतन के साथ ऐसी हरकत करूंगा ?"



" -वतन के साथ ही क्या--- आप किसी के साथ भी यहीं हरकत कर सकते है ।"



" यह भी तो सम्भव है कि भारतीय सरकार ने तुम्हें चमन में वतन का यह फार्मूला प्राप्त करने भेजा हो ?"



"'यह आप कह रहे हैं ?"



.मुस्कराया वह, बोला, "'क्यों क्यों यह नहीं हो सकता? अन्य देशों की भांति भारत को भी तो यह फार्मूला प्राप्त करने का लालच हो सकता है और जहाँ तक मैं समझता हूं भारत के पास कम-से-कम इस काम के लिए तुमसे बेहतर जासूस नहीं है !"

सुर्ख हो गया विकास का चेहरा सारा जिस्म क्रोध से कांपने लगा ।
विकास गुर्रा उठा----"मेरा देश अमेरिका की भांति जलील और कमीना नहीं है ।"



" क्या मतलब?" हैरी एकदम सतर्क हुआ--" अमेरिका से क्या मतलब ..?"



"यह भ्रम अपने दिमाग से निकाल दो हैरी बेटे, कि विकास तुम्हें अलफांसे समझ रहा है ।" किसी खूनी भेड़िये की भाँति गुर्राता ही चला गया" विकास-----" जानता हूं कि तुम हैरी हो और यह भी जानता हूँ कि गुरु का यह मास्क पहनकर तुम क्या कुछ कर चुके हों ।"
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03-25-2020, 01:20 PM,
#44
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
एक क्षण के लिये तो झनझना उठा हैरी का दिमाग । उसके जिस्म की समस्त नसों में एक विचित्र-सी जकड़न स्थापित हो गयी । बोला---"अगर यह जानते हो विकास बेटेे कि मैं हैरी हूं, तो यह भी अवश्य जानते होगे कि मैं चीनी जासूसों की तरह तुमसे डरता नहीं हूं ।"


उधर हैरी और इधर विकास ।।



दोनों ही एकदूसरे के किसी भी हमले के प्रति सतर्क हो गयेे ।




" छः महीने पहले ही तो वतन ने तुम्हें इस देश से मार-मारकर भगाया था ।" विकास गुर्राया…"लेकिंन तुम कुत्ते की दुम हो न-वारह वर्ष भी नलकी में रही तो भी सीधे नहीं होगेै यहांआकर फार्मूला प्राप्त करने की कोशिश करने से पूर्व यह तो सोच लेते कि वतन किसका दोस्त है ?"

उपर्युक्त शब्दों के साथ ही विकास ने जो तीव्र हरकत की थी उसे भाँप कर अगर हैरी फुर्ती का प्रदर्शन न करता
तो निश्चित रूपं से उंसकी एक आँख जाती 'रहती ।


हुआ यूं कि विकास ने अपना आलपिन चला दिया था ।


हैरी--किसी जमाने का विकास का दोस्त ।
वह जानता था कि विकास का आलपिन क्या रंग लाता है ।



भयानक फुर्ती के साथ वह स्वयं को बचा गया है किंतु--फिर भी आलपिन उसकी आंख में तो नहीं----गाल पर अवश्य लगा , गाल पर लगा आलपिन क्या करता ? एक सुईसी चुभकर रह गई हैरी को ।


असली करामात तो आलपिन आंख में लगकर बताता है ।



फटाक से आंख फूट जाती है ।


विकास के आलपिन से अपनी आंख तो बचा गया हैरी किंतु विकास के उस जबरदस्त घुंसे से न बच सका जो फौलाद की ,भांति उसके चेहरे पर पड़ा था ।


एक क्षण केलिये तो उसे ऐसा लगा की उसका जबड़ा हिल उठा है ।


न चाहते हुये भी हवा में उछलकर वह "धडाम" से फर्श पर गिरा ।


विकास ने किसी गोरिल्ले की भाँति उसपर जम्प लगाई ।


किन्तु---- लोमड़ी जैसी चालाकी के साथ हेैरी सड़क पर दौ-तीन करवटें बदल गया ।



विकास मुंह के बल गिरा । तुरन्त ही खडा हुअा तो---- हैरी की एक् फलाईंग किक उसके सीने पर पडी ।


वह पुन लडखड़ाकर सड़क पर आ गिरा और अभी उठने ही वाला था कि हवा में लहराता हैरी का जिस्म उसके ऊपर आ पड़ा ।


विकास ने अपनी टांगो पर रख कर उसे उछालना चाहा, किंतु उसी समय हैरी के सिर की एक तेज टक्कर विकास चेहरे पर पड़ी ।



विकास के मुख से चीख निकल गयी ।।


हवा में सिर घुमाकर हैरी ने अपने -सिंर का बार पहले से भी अधिक तीव्रता के साथ विकास के चेहरे किया तो ----इस बार चिकनी मछली की भांति फिसलकर उसके नीचे से विकास निकल गया ।।
हैरी का सिर बहुत् जोर से सड़क पर टकराया------- रंग बिरंगे तारे नाच उठे उसकी आँखों के सामने ।


अभी वह उनसे मुक्त हो भी नहीं पाया था कि विकास के उसकी पसली में इतनी जोर से अपने बूट का वार किया कि हैरी दर्द से तिलमिला उठा ।




झुककर विकास ने हैरी के बाल पकड़े ।

बेरहमी से बालों को एक तीव्र झटका देते हुये उसने हैरी कों ऊपर उठाया । उठाते ही, अपने सिर की एक टक्कर हैरी के चेहरे पर मारी ।



इधर उसेके सिर की टक्कर हैेरी के चेहरे पर पड़ी, उधर हैरी के दाहिने पैर का गुटना दोनों टागों के बीच में ।।




" एक साथ दोंनों के कंठ से मार्मिक चीख निकली ।

चीखने के पश्चात भी दोनों में से कोई भी एक-दूसरे से अलग न हुआ ।


एक-दूसरे से बुरी तरह लिपट गये ।


किसी जमाने में एक-दूसरे के गहरे दोस्त थे वे। एक-दूसरे की ताकत का उन्हें पूरा अन्दाजा था ।


हैरी जानता था कि वह हल्का सा चूका और विकास उस पर हावी हुआ है विकास जानता था कि हैरी किसी भी प्रकार उससे कम नहीं है ।।


मगर वह क्षण मात्र के लिये भी ढीला पड़ा तो हैरी उस पर इस प्रकार हावी ही जयेगा कि फिर कभी सम्भाल में नहीं आयेगा ।



एक-दूसरे से गुंधे हुये दोनों ही सडक पर आ गिरे ।


न जाने कैसे दोनों के हाथों की उंगलियां अापस में फस -गयी ।


हथेलियाँ एक-दूसरे से सटी हुयी थीं । दोनों ही हाथ मोड़कर, एक-दूसरे की उगलियाँ तोडने का प्रयास कर रहे थे ।।

इतनी ताकत लंगानी पड़ रही थी दोनों को कि दोनों के ही चेहरे सुर्ख पड़ गये थे । लोहे की सलाखों की भांति उंगलियां फंसी थीं । उसी तरह हाथ फंसाये वे खड्डे हो गये ।



एकायक हैरी हाथ फंसाये ही घूम गया । पलक झपकते ही उसने विकास को अपनी पीठ पर लिया और झूक कर सड़क पर दे मारा ।।
यह दूसरी बात है कि सड़क पर चारों खाने चित गिरते ही विकास के कंठ से चीख निकल गयी मगर तुरन्त पलटकर उसने अपनी टांगे हैरी की गर्दन में फंसाई अौर हैरी को भी उसने सड़क पर दे मारा । हैरी के कंठ से भी चीख निकल गई ।


दोनों कलयुगी लड़कों के बीच जबरदस्त मल्लयुद्ध हुआ ।।


हैरी शैतान तो विकास महाशैतान ! विकास खतरनाक तो हैरी महाखतरनाक ।


करीब पन्द्रह मिनट तक उनके बीच युद्ध चला ।


पन्द्रह निबटे पश्चात् भले ही विकास ने हैरी की बेहोश कर दिया , पर इस कार्य में सफलंता अर्जित-करते-करते विकास कों दांतों पसीना अा गया ।



हैरी के बेहोश होते ही बहीं सड़क पर लेट गया था विकास लम्बी-लम्बी सांस लेता रहा ।।


कोई पांच मिनट बाद वह स्वय को सामान्य' स्थिति में ला पाया ।


वह उठा।



हैरी के बहाश शरीर को उठाकर कार, में डाला और कार तीव्र वेग पर सड़क पर दौडा दी ।

अधिक नहीं, सिर्फ दस मिनट पश्चात् विकास अलफांसे और पिशाचनाथ के पास बैठा था । वे तीनों एक दूसरे के अामने-सामने सोफों पैर बैठे थे और हैरी का बेहोश शरीर कमरे के फर्श पड़ा था ।


अलफांसे कह रहा था--"लगता है विकास वेंटे कि हैरी भारी पड़ा?"



" भारी तो पड़ना ही था गुरु । "' बिकास ने कहा----" वे सभी गुर इसे मालूम हैं, जो मैं जानता हूँ "


" खैर ।" अलफांसे ने कहा…"अब क्या इरादा है ?"

" इरादा ही क्या है ?" विकास ने पिशाचनाथ की और देखते हुये कहा-----" वही करना है, जों मैं बता चुका हूं । वह तैयार कर लिया ?"
" जी महाराज ।" कहते हुये पिशाचनाथ ने अपने बटुये में हाथ डाला है प्लास्टिक का बना एक ताजा फैसमास्क उसमे से निकालता हुआ बोला…" लिजिये आप देख सकते हैं । इसमें और हैरी के चेहरे में लेशमात्र भी अन्तर न होगा ।"




"अभी तो इसी के चेहरे पर गुरु का मास्क है ।" कहते हुये विकास ने हैरी के चेहरे पर से मास्क हटा दिया ।



इसके पश्वात्-विकास ने स्वयं वे कपडे जो हैरी के शरीर पर पहने थे ।अपने चेहरे पर पहले, हैरी का फेसमास्क चढ़ाया फिर अलफांसे का और हैरी को अलफांसे और पिशाचनाथ के हवाले करके स्वयं वहाँ से चल दिया है जिस अलफासे ने वतन के पास जाकर यह कहा था कि वह चमन घूमने गया था, वह हैरी था न अलकांसे बल्कि विकास था ।।


अलफांसे बना बिकास ही वतन की प्रयोगशाला तक पहुंचा था ।।


वह भी विकास ही था, जो प्रयोगशाला से फिल्म निकाल लाया ।

वह भी विकास ही था, जो फिल्म सहित हैलीकॉप्टर में जैकी से मिला ।


जैकी जिसे हैरी समझ रहा था असल में वह विकास था ।

असल में वह हैरी नहीं, विकास था , जौ जैकी के मुंह से एक अन्य आवाज सुनकर चौक पड़ा ।।



यह सब कुछ आप
"जला हुआ वतन" में पढ़ आये हैं । "
"हैरी हमारे पास है प्यारे जासूस !" ट्रांसमीटर पर झूका हुआ अलफांसे कह रहा था----" वतन की दृष्टि में अलफांसे और जैकी की नजरों में हैरी बनकर विकास सफलता अर्जित करता चला जायेगा । मेरा ख्याल है कि अव तक तो जैकी के साथ हैलीकॉप्टर में बैठ भी चुका होगा ।"


"आखिर तुम उस साले दिलजले को रोक नहीं पाये लूमड़ भाई ?" दूसरी ओर से विजय ने कहा ।



" रोकना चाहता तो रोक लेता, किंतु उसने योजना ही ऐसी बनाई कि जिसमें कहीं भी लोच नहीं था । " अलफांसे ने कहा…"तुम यह चाहते थे अन्तर्राष्ट्रीय जासूसों ही जासूसी का केन्द्र चमन न बन सके । । यहीं तो करण था नि तुम यह चाहते थे कि हैरी प्रयोगशाला से फार्मुला चुरा ले ।
और बाहर निकलने पर उसे हम छीन लें ।। विकास ने उस योजना को और निखार दिया है जितने भी जासूस इस चक्कर में लगे हुये हैं, वे ये समझते होगें कि हैरी फार्मूला ले गया ।
जबकि फार्मूला विकासं पर है ।अब, अन्तर्राष्ट्रीय जासूसी का केन्द्र अमेरिका बनेगा जबकि फार्मूला अशरफ लेकर अमेरिका से चुपचाप निकल अायेगा ।"




"खैर ।" विजय ने कहा…"जो हो चुका, वह ठीक है लेकिन आगे की योजना क्या है ?"

" तुम अमेरिका में स्थित अशरफ से कहोकि वह विकास से वाशिंगटन के लाजिक होटल में मिले । हेरी को तो अशरफ पहचानता ही है । किसी भी दिन शाम को सात बजे हैरी उस होटल के हाँल में आयेगा । तुम अशरफ कों सामझा सकते हो कि वह हैरी नहीं विकास होगा ।। दोनों फिल्में वह अशरफ की सौप देगा । बस, अशरफ को चुपचाप भारत के लिये रवाना हो जाना है ।"



" लेकिन लगता है लूमड़ भाई कि अमेरिका में अपने झानझरोखे के साथ कोई गड़बड़ हो गई है ।"




"क्यों ------? क्या मतलब ?" अलफासे चौंका ।



" कई बार उससे ट्रांसमीटर पर सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयास कर चुके हैं, किन्तु सफलता नहीं मिली ।"
विजय ने कहा ---" खैर मैं विक्रम, नाहर परवेज और अाशा कों अमेरिका पहुंचने के आदेश दे चुका हूं ।। उनका काम अशरफ का पता लगाना होगा । साथ ही लाजिक होटल विकास से उनमें से कोई मिल लेगा ।'"




"हूँ ।" अलफांसे ने, कहा, "अव तुम्हारा क्या इरादा है ?"



"जब तक फार्मूला सुरक्षित भारत नहीं पहुंच जाता , तव तक चीन की दीवार पर ही लटके रहेंगे ।"





"और मैं यहाँ क्या करू ?"

"तुम वहाँ रहकर वतन प्यारे की हिफाजत करो लूमड़ भाई ।।" विजय ने कहा---"वतन चाहे कुछ भी सही " किन्तु इस समय वतन वैज्ञानिक है और जिन जासूसों के हाथ फार्मूला नहीं लगेगा वे वतन को किडनैप करने का प्रयास करेंगे ।"


अभी अलफासे कुछ कहने ही वाला था -----

"चचा से कह दो कि वतन का किडनैप करना छोटे मौटे जासूसों के बस का रोग नहीं है ।" इस आबाज को सुनते ही अलफांसे और पिशाचनाथ उछल पडे । बुरी तरह चौंककर उन्होंने कमरे के दरवाजे की देखा ।


"वतन ------ वतन ।" अलग--अलग दोनों के मुंहसे निकल पड़ा ।



सचमुच वतन ही कंमंरे में प्रविष्ट हुआ या । ऊपर से नीचे तक दुध जैसे बेदाग सफेद कपडे, आँखों पर सुनहरे फ्रेम का चश्मा । हाथ में छड़ी लिये वह खट-खट करता उनके समीप आया रहा ।। चेहरे पर हमेशा रहने वाली गम्भीरता विराजमान थी ।




उसे यहां देखकर सकते की सी हालत से रह गये थे अलफांसे और पिशाचनाथ ।।।।।।।
अलफांसे ने तो स्वप्नमें भी कल्पना नहीं की थी की वतन वहां आ पहुंचेगा । इतना अवाक-सा वतन कौ देखकर रह गयां वह कि जुबान तालू से चिपक गई । कुछ कहना चाहा भी कह न सका है ।



"प्रणाम चचा ।" कहकर लम्बा वतन अलफांसे के चरणों में झुक गया ।"
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03-25-2020, 01:20 PM,
#45
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
अलफांसे इतना ही कह सका---"तुम यहां ?"

किन्तु अलफांसे के प्रश्न का कोई भी उत्तर न :देकर वतन ने उसके हाथ में से ट्रांसमीटर ले लिया ।



दूसरी तरफ से ट्रांसमीटर पर विजय की यहीं आवाज गूंज रही थी---" अबे मियां लूमड़ प्यारे क्या हो गया है यार हमारे ? वतन --- वतन कहकर क्यों कहकर चुप क्यों हो गये ?"





"'प्रणाम चचा ?" वतन ने कहा---"मुझे यहां देखकर लूमड़ चचा हैरान रह गये ।"



"हांय ।" दूसरी तरफ से विजयं चौका----बटन प्यारे तुम साले राष्ट्रपति भवन की कमीज से टूटकर यहां कहाँ पहुंच गये ।।"





'" आप भूल गये चचा कि कम से-कम चमन में वतन वहीं पहुच जाता है, जहां उसकी आवश्यकता होती है ।" वतन ने गम्भीर स्वर में कहा-----"रही यह बात कि वतन का कोई किडनैप न कर ले तो क्या आप जवाब देंगे कि --- क्या महान सिंगही वैज्ञानिक नहीं है ?"



"विल्कुल है बटन प्यारे । " विजय की आबाज ----" रूपये में सत्रह आनें है !"


"क्या कभी किसी ने उन्हें क्रिडनैप किया ?"




'"किसी को मरना है क्या ?"

" तो यह समझिये उनके शिष्य को भी किडनैप करने का प्रयास करेगा तो वह अपनी मौत को ही दावत देगा ।"
"लेकिम मियाँ बटन प्यारे तुम यहाँ पहूंच कैसे गए?"बिजय ने पूछा।




"आपने महान सिंगही के शिष्य को मूर्ख समझकर बहुत बड़ी भूल की है चचा ।" वतन ने कहा- आप समझते हैं कि अखबार में स्टेटमेंट देना मेरी मूर्खता थी । हकीकतं है तो यह है कि वह स्टेटमै'ट एक बहुत बड़ी साजिश थी मेरी । उसमें आप भी फंस गये ।"






"क्या मतलब ?"




"मेरी बातों के मतलब उस समय तक समझे मैं नहीं आयेंगे चचा, जव तक कि मैं स्वयं आपको नहीं समझा दूंगा ।" वतन ने कहा-----" बहुत जल्दी ही आपसे मिलूंगा मैं । आपसे बातें करुगा ।"



" -लेकिन यह मामला क्या है वटन प्यारे ?"




"मामला सिर्फ यह है चचा कि कुछ दिनों के लिये दुनिया के इन महान जासूसों के बीच घूम रहा हूं मैं ।" अतन्त गम्भीर स्वर में वतन कह रहा था-----दोस्त और दुश्मन को पहचान चूका हूँ मैं । ऐलान कर दो चचा-दुनिया के महान जासूसों में ऐलान करार दो कि वतन आ रहा है । ढंके की चोट से मदान में आ रह हूँ । किसी में ताकत हो तो पूछ ले मुझसे वेवज एम का फार्मूला ।"

"तुम क्या चाहते हो ?"



यह कि जिस दिन से अखबार में मैंने स्टैटमेंट दिया है, उसी दिन से मेरी और सिर्फ मेरी ही जीत होती चली आई है ।" वतन ने कहा-"कौई भी इस भ्रममें न पड़े कि वह जीत गया है । आप, विकास, लूमड़ अंकल सभी हारे हैं । क्यों-कैसे? इन सब प्रश्नो के उत्तर मैं बाद दुगा ।"




कहने के साथ ही वतन ने सम्बन्ध बिच्छेद कर दिया ।



पलटकऱ अलफांसे और पिशाचऩाथ की ओर देखा ।
वतन बोला--" इस तरह क्यों खड़े हैं चचा , बैठ जाइये ।"



इस बीच अलफासे स्वयं को नियन्त्रित कर चुका था । बोला------"तुम यहाँ कैसे पहुंच गए ।"
Reply
03-25-2020, 01:20 PM,
#46
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
"'क्या आपको भी यह बात अलग से बतानी पडेगी की चमन में जहाँ वतंन की जरूरत होती है, वहीं पहुच जाता
है । "



" तो-----तो आज तुम्हारे साथ अपोलो नहीं है ?"

" आज उससे छुपकर आया हूं यहां " वतन ने बताया--विकास ने समझा कि प्रयोगशाला के प्रयोग-कक्ष में लड़ता-लड़ता मैं बेहोश हो गया था । वह बेचारा तो इस भुलावे में भी रहाँ कि मैं उसे आपको समझ रहा हूँ । मुझे राष्ट्रपति भवन में बंधा छोड़कर वह अपोलो और धनुषटंकार से यह वहाना बनाकर चला गया कि वह फिल्मों को सुरक्षित रखने जा रहा है । उसके जाने के बाद जब धनुषटकांर ने अलफांसे समझकर मेरी तलाशी ली तो जाना कि मैं वतन और वह अलफांसे था, जो वतन बनकर निकल गया । अपोलो और धनुषटंकार जो सचमुच मुझसे असीम प्रेम करते हैं, पागल से होकर कथित अलफांसे की तलाश में गए और अपने बन्धन खोलकर मैं यहाँ आ गया हूं ।।"





" तो तुम्हें यह भी मालूम है कि वह विकास था ?"



" ये पूछिए कि क्या नहीं मालूम मुझे ?" वतन का लहजा गम्भीर ही था--"मुझे,तो यह भी मालूम है कि शाम को घूमकर आने से पूर्व अापके मेकअप में हैरी था और तब जबकि हैरी मेरी प्रयोगशाला की चारों सर्चलाइटों का प्रबंध करके लौट रहा था तो टेक्सी ड्राइवर के रूपमें विकास ने उसे पकड़ लिया, उनका टकराव हुआ । हैरी को बेहोश करके विकास उसे यहाँ आपके पास ले आया और यंहां से हैरी और आपका फैसमास्क पहनकर मेरे पास पहुंचा ।"
हैरत से आँखें' फैल गई अलफांसे की । पिशाच की भी बूद्धि चकराकर रह गई ।



"तुम्हें सब कुछ मालूम था तो तुमने वह सव कुछ होने क्यों दिया, जो हुआ ।" अलफांसे ने पूछा ।।


"--क्योंकि मैं चाहता था कि वह सब कुछ हो ।"



" क्या कह रहे हो तुम ।"

’"मैं ठीक कह रहा हूँ लूमड़ चचा । जो भी कुछ हुया है, वह मेरी एक योजना थी ।"




"लेकिन क्यों ? यह सबकुछ तुमने क्यों होने दिया ?" अलफांसे ने पूछा---" यह सब कुछ करवाने के पीछे तुम्हारा मकसद क्या है ?"





-"'सुनिए, मैं बताता हूँ आपको ।" सदा की भांति गंभीर स्वर में कहना शुरू किया वतन ने…"यह सच है किं मैंने पहले वेवज एम और फिर उसके बाद डॉक्टर आवा की आवाज कैच करके 'अणुनाशकों किरणे बनाई । मगर प्रश्न यह हैकि मैंने यह घोषणा विश्वभर के अखबारों में क्यों की। आपने, विकास और विजय चचा ने मेरी इस हरकत को मूर्खतापूर्ण ही कहा । सचमुच, यह मूर्खता ही होती- किन्तु तब जबकि मुझे यह विदित न होता कि मेरी इस घोषणा को पढ़ते ही मेरे दुश्मन इस फार्मूले को प्राप्त करने है कि के लिए दौड पड़ेगे है मुझे मालूम था यह सब और मैं चाहता था कि मेरे दुश्मन चमन की तरफ दौड पड़े । यह चाहकर ही तो मैंने वह स्टेटमेट दिया था ।"



"लेकिन प्रश्न यह है कि तुमने ऐसी विचित्र बात चाही क्यों ?"
"चचा !" धीरे से कहा वतन ने…"यह पता लगाना मेरे लिए बहुत आवश्यक था कि विश्व की कौन-सी हस्ती मेरी दुश्मन है और कौन-सी, दोस्त है सम्पूर्ण विश्व अनेक राष्ट्रोंका एक समूह है ।" इस समूह में मेरा एक राष्ट्र है जो सिर्फ छ: मंहीने पहले ही आजाद हुआ है 'दुनिया के सभी ' राष्ट्र चमन-को अपना मित्र कहते थे, मेरी तरफ दोस्ती का हाथ बढाते थे, मेरे लिए उनमें से यह पहचानना कठिन था कि कौन मुझसे सच्ची दोस्ती चाहता है और कौन बगल में छुरी दबाए हुए है । यही जानने के लिए मैंने एकं तरीका निकाला' और वह तंरीका था-विश्वभर के अखबारों ये अपना स्टेटमेंट छपवा देना । वस…अ्सली चेहरे मेर सामने अा गए। दुश्मन फार्मू'ला गायब करने के केलिए दौड पडे । दोस्त मेरी मदद करने दौड़ पडे । ओर जिन्होंने कुछ नहीं किया वह न मेरे दोस्त हैं न दुश्मन । उन्हें दोस्त भी बनाया जा सकता है ।"

" बेशक ।"अलफांसे प्रशंसा कर उठा----" विश्व राजनीति को झटका देने के लिए तुम्हारा तरीका अच्छा था किन्तु' ....... ।"




"किंन्तु वया ?"



" यहां तक तो बात ठीक थी ।” अलफासे ने कहा ---- " अब तुम जान गए होने कि कौन दुश्मन और कौन दोस्त है फिर तुमने प्रयोगशाला से फामू"ला क्यों निकल जाने दिया ? हैरी को पकड़कर बैठा कयों नहीं लिया?"



जब से वतन यहां आया था, प्रथम बार हल्ले से मुस्काराया वह । वाणी में वहीं गम्भीरता---"जान लेना ही तो काफी नहीं कि कौन दुश्मन, कौन दोस्त है । उस समय तक दुश्मनों के विषय में जानने से ही क्या लाभ जव के उनसे बदला न लिया जाये ? वेचारे अकेले हैरी से मैं क्या बदला लेता ? बदला किसी व्यक्ति से नहीं, पांच राष्ट्र से लेना है ।। रूस, अमेरिका, चीन, इंगलैण्ड और पकिस्तान । सिंगही गुरु का शिष्य हूँ न चचा, जो करता हूँ, डंके की चोट पर करता हूं । स्वयं ही अपनी प्रयोगशाला से फार्मुला निकलवा दिया मैने , न न न यह ना समझना कि वह फार्मूला नकली है । "
जब से वतन यहां आया था, प्रथम बार हल्ले से मुस्काराया वह । वाणी में वहीं गम्भीरता---"जान लेना ही तो काफी नहीं कि कौन दुश्मन, कौन दोस्त है । उस समय तक दुश्मनों के विषय में जानने से ही क्या लाभ जव के उनसे बदला न लिया जाये ? वेचारे अकेले हैरी से मैं क्या बदला लेता ? बदला किसी व्यक्ति से नहीं, पांच राष्ट्र से लेना है ।। रूस, अमेरिका, चीन, इंगलैण्ड और पकिस्तान । सिंगही गुरु का शिष्य हूँ न चचा, जो करता हूँ, डंके की चोट पर करता हूं । स्वयं ही अपनी प्रयोगशाला से फार्मुला निकलवा दिया मैने , न न न यह ना समझना कि वह फार्मूला नकली है । "



"तुम कहना क्या चाहते हो ?"-



"प्रमाणितं करना चाहता हूँ की महान सिंगही का असली शिष्य हूं मैं !"

"हम फिर नहीं समझे ।"



"वे फिल्में अपनी प्रयोगशाला से निकालकर पांच राष्ट्रों को चुनौती दी है मैंने कि जिसमें ताकत है, वह प्राप्त कर ले उन्हें । अपनी फिल्मों के पीछे-पीछे मैं आरहा हूँ मेरा दावा है कि किसी के पास भी वे फिल्में सुरक्षित नहीं छोडूंगा । जिसमें ताकत हो मुझे रोके ले । अन्त में चाहे किसी के पास भी चली जायें मैं उन्हें निकालकर लाऊंगा । हां, भारत को तो वह फार्मूला देना ही चाहता हूं में ।"





"'वडी विचित्र-सी बात है !" अलफांसे ने कहा--"स्वयं ही अपनी प्रयोगशाला से फिल्में चोरी होने देते ,हो और फिर उन्हें प्राप्त करने के निकल पडते हो है तुम्हारी इस ऊटपटांग हरकत का मतलब ही क्या है ?"


एक बार पुन: हल्ले -से मुस्कराया बतन----" मतलब यह है कि दुश्मनों को चमन की शक्ति का पता लग जाए और वतन को पता लग जाए कि महान शक्ति कहलाने वाले ये राष्ट्र आखिर हैं कितने पानी में है ।"



" अजीब आदमी हो ।" अलफांसे ने कहा--"यह भी कौई बात हुई भला ?" "




"चचा !" वतन की वही गंभीर वाणी-------बहुत-सी बातें होती हैं जो पहले पहल ऊपर से देखने पर बडी विचित्र सी लगती हैं, किन्तु जब उन बातों को ध्यान से सोचा जाता है तो पता लगता है कि उनकी गहराई में क्या है ? यह समझिए कि यह लडाई मेरे द्वारा पैदा की गई है । "
आज न लड़ता तो के कल किंसी-न-किंसी ढ़ग से मुझ पर आक्रमण करते । ऐसे महत्त्वपूर्ण लोग भी दुनिया में कम ही होंगे जो अपनी इतनी महत्वपूण चीज को दांव पर लगाकर लडने चला है । मैं स्वयं दुश्मन की शक्ति का अन्दाजा करके उन्हें अपनी शक्ति दिखाना चाहता हूँ ।"

" मैं तुम्हारा मेकसद मकसद समझ गया हूँ" । .अलफांसे ने कहा…"किन्तु फिर भी बात है बिचित्र-सी ही !"





"मुझे अदृश्वर्य है को आपकी मेरी बात विचित्र लग रही है ।" वतन ने' कहा-"जवकि मैंने सुना यह है की आपराध की दुनियाँ में आप एकमात्र ऐसे अपराधी हैं, जिसका अपराध करने का मकसद आज तक कोई नहीं जान सका

"खैर !" अलकांसे ने कहा---" क्या मैँ जान सकता हूं कि तुम आगे क्या करना चाहते हो ?"

" जो भी कुछ करना चाहता हूं, उसमें आपकी और विशेष रूप से पिशाचनाथ की थोडी-सी आवश्यकता है । वतन ने कहा----"अखबारों में स्टेटमेंट के पश्चात् मैंने जाना है कि आप लोग मेरे दोस्त और हमददों में से है । सोचा कि आप मेरी थोडी-सी सहायता अवश्य करेंगे ।"



" बोलौ-क्या सहायता चाहते हो ?"



मैं जो कुछ करूंगा, उसे सारी दुनिया जानेगी ।" वतन ने कहा…"सभी जानेंगे कि वतन क्या कर रहा है । इतना सब कुछ करने के बावजुद भी मैं अन्तर्राष्ट्ररैय अदालत के शिकंजे हैं नहीं फंसनां चाहता । मैं यह चाहता हूँ कि सारी दुनिया यंह तो जाने कि वतन ने क्या किया है, किंतु वह सब कुछ वतन ने ही किया है, यह प्रमाणित करने हैं लिए किसी के पास प्रमाण न हो !"


" हम हर प्रकार से तुम्हारी सहायता करने के लिए तैयार हैं ।"



" मुझे आपसे ऐसी ही आशा थी ।" कहने के बाद वतन धीरे धीरे उन्हें सब कुछ समाझाने लगा ।।
हैरी के मेकअप में हैलीकॉप्टर ड्राईव करता हुआ विकास अपने बराबर में बैठे जैकी के मुंह से निकलने बाली आबाज को सुनकर बुरी तरह चौक पड़ा़ ।। उसका मस्तिष्क सन्ना उठै ।। स्वयं मानो अन्तरिक्ष में चकरा रहा था । उसकेे मुंह से निकंला---"'बाण्ड अकंलं ।"

"'ठीक पहचाना वेटे ।" जेम्स बाण्ड की आवाज---"लेकिन देर से पहचाना याद रहे हमारी रिवॉल्वर, का रूख तुम्हारी तरफ है । कोई भी हरकत करने से पूर्व यह याद रखना कि मैं गोली मारने में एक क्षण का भी विलम्व न कुंरूंगा ।"




एक क्षण स्थिर से नेत्रों से विकास ने बाण्ड को धूरा ।



बाण्ड कहे जा रहा था----मुझे दुख हैं हैरी बेटे कि फार्मूला प्राप्त करने के लिये तुमने जो मेहनत की थी वह------------बेकार हो गई !"




-"'अंकल ।" हरी के ही लह्रजे में विकास ने कहा ----"जो आपने किया, अपने हित में अच्छा नहीं-किया ।"



" मेरा नाम बाण्ड है बेटे ।" अपने रिवॉल्वर का दबाव हल्के से उसकी कनपटी रर बड़ाता हुया बोला-----तुम पैदा भी नहीं हुए थे तब से में अपना _हित और अहित समझता हूँ ।तुमने इस जासूसी के क्षेत्र में अभी कदम रखा है । बेशक इस बात के लिये तुम्हारी प्रर्शसां करनी होगी कि 'तुमने वतन की सुदृढ प्रयोगशाला से खुबसुरती के साथ फिल्में गायब की किंतु इसका यह मतलब नहीं कि उतनी ही खूबसूऱती से तुम इन्हें अमेरिका ले जाने में भी कामयाब हो जाते ।। न-न-कौई चालाकी नहीं, हैलीकॉप्टर चलाते रहो ।"


इस प्रकार, उन कुछ क्षणों के लिये विवश था, विकास ।



उसने जेम्ज बाण्ड पर यह भेद भी नहीं खोला कि वह हैरी नही विकास है । इस विचार से भी उसकां मस्तिष्क सन्ना रहा था कि 'बाण्ड' ने वे फिल्में जंगल में क्यों फेंक दीं ? अब स्वयं उन फिल्मों को कैसे ढूंढ पायेगा ?"

"हैरी वेटे !" अचानक बाण्ड ने उसकी बिचार श्रृंखला भंग की---" मुझे विदित था कि बही होगा, जो हो रहा है, अत: मैं पूरी तैयारी करके अाया था । इस हेलीकॉप्टर में सिर्फ एक पैराशूट है ।" कहते हुये वास्तव में बाण्ड ने सीट के नीचे से एक पैराशट निकाल लिया ।


विकास चुप था ।



-तुम जिस प्रकार; हैलीकाँप्टर चला रहे हो, उसी प्रकार चलाते रहोगे।" बाण्ड ने कंहा----"मैं कूद रहा हूँ ।"



''याद रहे---अगर तुमने भूमि से हैलीकॉप्टर की ऊंचाई लेश मात्र भी कम करने की चेष्ठा की तो अंजाम--ये हैलीकॉप्टर तुम्हारी चिता बन् जायेगा ।"
चुप ही या विकासं ।


"ये न समझना कि हैलीकॉप्टर को उडाने को धमकी अपने रिवॉल्वर के आधार पर दे रहा हूँ ।" बाण्ड ने पुन: कहा----"मेरे पास गन है और किसी भी क्षण तुम्हारा हैलीकॉप्टर मेरी गन की रेंज से बाहर नहीं होगा ।"




एकदम, किसी गूंगे की भाँति चुप था विकास उसका चेहरा सुर्ख हो चुका था-कनपटियों तक सुर्ख ।। नेत्रों में कठोरता । उसी प्रकार सीट पर -वैठा वह हैलीकॉप्टर ड्राईव किये जा रहा था ।।।



' विभिन्न प्रकार की चेतावनियां देता हुया बाण्ड पैराशूट इत्यादि बाँधकर तैयार, हो गया । अन्त में बोला--, "बहुत गुस्से में लग रहे हो हैरी बेटे लेकिन असलियत ये है कि इसमें गुस्से जैसी कोई बात नहीं है । कभी तुम्हारा दांव लगता है, कमी हमारा । अगर तुम बचकर निकलना चाहो तो हैलीकाप्टर वाशिंगटन की ही धरती छुए ।'"

कहकर हैलीकॉप्टर से बाहर अंधकार में कूद गया ।


विकास तो जैसे पहले ही सौचे बैठा था कि उसे कब कहाँ क्या हरकत करनी है । अभी तक वह जैसे सिर्फ समय का प्रतीक्षक था ।


उधर, बाण्ड कूदा ।।।

इधर विकास दूसरी दिशा बाली खिड़की से बाहर कूद गया ।


हैलीकाप्टर चालक रहित रहित हो गया । कूदते ही विकास कुछ दूर तक भूमि की तरफ प्रबल बेग से गिरा, फिर-एक झटका लगा ।


उसकी गति हवा में तैरते-से किसी इन्सान जैसी हो गई । हवा में तैरता विकास बुदबुदा रहा था ---" मैं भी जानता था बाण्ड बेटे कि ऐसा कुछ हो सकता है ।"
सचमुच एक पैराशूट की डोरियों में बंधा विकास हवा में तैर रहा था । उसका पैराशूट न जाने कौन से ऱंग का था कि वातावरण के स्याहीदार अंधेरे में उसका कोई अस्तित्व नजर नहीं आ रहा था ।


उसके ठीक विपरीत बाण्ड का पैरामूट नजर आ रहा था बिकास से थोड़ी ही दूरी पर हबा में तैरता बाण्ड भुमि की तरफ उतर रहा था ।



उधर-चालक रहित हैलीकॉप्टर हवा में लड़खडाया ।



उसी पल--बाण्ड की गन की गर्जना से वातावरण दहल उठा ।।


एक साथ गन की अनेक गोलियां हैलीकॉप्टर के जिस्म से टकराई । कोई गोली शायद टकीं को फाड़कर अंदर भी पहुंच गई थी है उसी के कारणवश सम्पूर्ण हैलीकॉप्टर आग की लपटों में घिर गया ।

विकास ने जलते हुए हैलीकॉप्टर को किसी परकटे पक्षी की भांति हवा में लहराते और अन्त में दूर किसी वृक्ष की चोटी से टकरा कर नष्ट होते देखा ।


न जाने किस विचार के परिणामस्वरूप उसके-होठों पर मुस्कराहट उभर आई ।



दुर-बृक्ष की शाखों में उलझा हैलीकॉप्टर जल रहा था ।


उसके साथ ही जल रंहा था वृक्ष का वह भागं जिसने हैलीकाप्टर को सम्हाल रखा था । पहले बाण्ड और उसके पांच मिनट पश्चात ही विकास भूमी पर पहुंच गया । बाण्ड का पैराशूट क्योंकि अंधेरे में स्पष्ट चमक रहा था , इसलिये विकास सरलता से प्रत्येक पत उस पर नजर रख सकता था ' मृ ३' क्रिन्तु बाण्ड को शायद स्वप्न मैं भी उम्मीद नहीं थी कि विकास भी उसके आसपास कहीं है ।



विकासं बाण्ड से करीब पचास गज दूर था । पैराशूट को लपेटकर सुरक्षित रखने की विकास ने कोई कोशिश की ।
विकास स्वयं को अंधेरे में रखता हुआ धीरे धीरे बाण्ड की तरफ बड़ा । अभी वह अपने और वाण्ड के बीच की दूरी ही तय कर सका था कि-----



बाण्ड की दिशा में एक टार्च चमकी ।।



विकास ठिठक गया ।।


ठिठककर गौर से देखने लगा ।
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03-25-2020, 01:21 PM,
#47
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
टार्च से बाण्ड हाथ में मौजूद किसी चीज को देख रहा था ।

विकास यह न देख सका कि टार्च की रोशनी में बाण्ड ने क्या देखा है ।



फिर --- रोशन टार्च हाथ में लिये बाण्ड एक तरफ को बड़ गया ।।




जिसने की आवश्यकता, नहीं कि स्वयं को अंधेरे में रखकर विकास उसके पीछेे लपका । इतना तो विकास समझ ही चुका था कि जंगल के इस अंधेरे में बाण्ड ने फिल्में यूं ही नहीं फेंक दी ।


खोजने के लिये बाण्ड के पास कोई-न-कोई साधन अवश्य होगा । यह साधन क्या है ? जब तक विकास को यह पता न लग जाये, तब तक वह वाण्ड के सामने अाना उपयुत्त नहीं समझता था ।।


बाण्ड के हाथ में क्योंकि रोशन टॉर्च थीं इसलिये विकास को निरन्तर उसका पीछ् करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही थी ।। बीच बीच में बाण्ड टॉर्च का प्रकाश अपनी हथेली में दबी किसी चीज पर डालकर देख लेता और फिर आगे बढ़ जाता ।


कठिनता से पन्द्रह कदम की दूरी का अन्तराल रखता हुआ विकास उसका पीछा कर रहा था ।


कोई तीस मिनट तक यही सिलसिला जारी रहा।


फिर, एकाएक बाण्ड उस समय ठिठका ।
जब टार्च के प्रकाश में अपनी हथेली दबी चीज को देख रहा था ।
कुछ देर तक बाण्ड गौर से उस चीज को देखता रहा ।

उस समय विकास एक पेड के पीछे उससे सिर्फ इतनी दूर पर था कि बाण्ड की बुदबुदाहट भी उसने सुन ली । बाण्ड बुदबुदाया था----"इसका मतलब फिल्में किसी के हाथ लग गयी है ।"

विकांस ने उसका यह वाक्य सुना और समझ लिया कि मामला क्या है । टार्च के प्रकाश में वह बार-बार किस चीज कों देखता है ।। कई प्रकार के विचार तेजी से विकास के दिमाग में चकरा उठे । यह समझने में उसे की प्रकार की कंठिनाई नही हुई की बाण्ड बार बार दिशा और दूरी बताने वाली विरामघड़ी देखता है ।
यह समझने में भी उसे देर न लगी कि विरामघड़ी का सम्बन्ध उस पर्स से होगा । पर्स में कोई ऐसा ट्रांसमीटर होगा जिसकी दिशा और दूरी बाण्ड के बायें हाथ में दबी वह विरामंधडी बता रही होगी ।


घडी की सुइयों को गतिमान देखकर ही बाण्ड इस नतीजे पर पहुंचा होगा कि पर्स किसी के हाथ लग गया है ।



उधर बाण्ड पहले से अधिक तेजी के साथ एक तरफ को बड़ गया ।।




सावधानीवश बाण्ड ने टार्च बुझा दी थी । परिणामस्वरुप, विकास को अब उसका पीछा करने से मुश्किल हो रही थी ।।
हालांकि विकास काफी सतर्कता से आगे बढ़ रहा था मगर यह बात बाण्ड से अधिक देर न छूप सकी कि कोई उसका पीछा कर रहा है ।

एकाएक गजब की तीव्रता के साथ बाण्ड पलट पड़ा ।। झनाक से टार्च की रोशनी विकास की तरफ लपकी ।




साथ ही बाण्ड की आवाज-" कौन है ?"




किन्तु उससे अधिक तेजी के साथ हवा में सन्नाया विकास का आलपिन।


सूं--सूं की हल्की सी ध्वनि के साथ आलपिन जेम्स बाण्ड की कलाई में घूस गया । बौखलाहट में टॉर्च उसके हाथ से गिर गई ।


अभी वह उसे पुन: उठाने के लिये फुर्ती से झुका ही था कि----" नहीं अंकल, टार्च उठाने की कोशिश न करना, वर्ना मैं फायर कर दूंगा ।

ठिठक गया बाण्ड, मुंह से निकला----"हैरी ।"



आप क्या समझते है अंकल, कि मैं इतनी सरलता से हैलीकॉप्टर में जलकर राख हो जाऊंगा ?"



"तुम विकास हों-विकास ।। तुम हैरी नहीं हो सकते ।"


"जानता हूं अंकल , आपको विदित है कि आलापिन को हथियार के रूप में सिर्फ विकास इस्तेमाल करता है ।"


इस बार विकास अपनी वास्तविक स्वर में बोला था----" पहचाना तो ठीक अंकल लेकिन काफी देर से पहचाना ।"



" त-----तुम----लड़खड़ा गई बाण्ड की जुबान----"हैरी में भेष में ?"



"क्यों---जब आप जैकी के रुप में हो सकते है तो क्या में हैरी के रुप में नहीं हो सकता ?"



" किन्तु....."
बाण्ड अभी कुछ कहना ही चाहता था कि विकास की आवाज गूजीं --" किन्तु -विन्तु कुछ नहीं अंकलं------------------ कोई भी हरकत की तो भेजा फोड़ दूगां ।"

जेम्स बाण्ड ने देखा -----


उपर्युक्त शब्दों के साथ ही लम्बा लड़का उसके ठीक सामने खड़ा हो गया था । बाण्ड के समीप ही जमीन पर रोशन टार्च पड़ी हुई थी । उसका प्रकाश ना बाण्ड पर पड़ रहा था ना विकास पर , किन्तु उसके प्रकाश में एक--दूसरे को साये को भली भातीं देख सकते थे ! बाण्ड ने विकास के हाथ में दबी रिवॉ्ल्वर का साया भी देख लिया था ।




" अंकल ।" विकास ने कहा ---" जब तुम्हारे गंजे "एम" ने तुम्हें काम सौंपा था तो वह भूल गया कि वतन यार है विकास का ?"



" विकास !" गुर्रा उठा बाण्ड ---" चीफ के बिषय में जुबान संभालकर बात करो ।"



" छोड़ो चीफ की बात ।" विकास हंसा ----" अंकल क्या तुम भी भूल गये थे कि विकास की जान दोस्तों के लिये है ? क्या ---तुमने नहीं सोचा था कि उन फिल्मों को प्राप्त करने जाओगे तो तुम्हारा टकराब विकास से भी होगा ?"



" जानता था ----फिर ....?"



" फिर भी इस अभियान में कूदने की हिम्मत हो गई तुम्हारी ?"



अन्दर ही अन्दर कांप उठा बाण्ड ।


दुनिया में विकास ही ऐसा लड़का था जिसका सामना करने में बाण्ड स्वयं को नर्वस समझा करता था ।।

ना जाने क्यों विकास के सामने आते ही वह घबराहट सी महसूस करता था , किन्तु उस घबराहट को उसने कभी प्रकट नहीं कीया ।



तभी तो बोला ----" क्यों , क्या तुमसे कुछ डरता हूं मैं ?"



" मैं जानता हूं अंकल , जो दिल में है , उसे प्रश्न बनाकर पुछ रहे हो मुझसे ।"
ह्रदय भले ही कांप रहा हो बाण्ड का, किन्तु ऊपर से मुस्कराया , बाण्ड बोला ----" अपने बारे मे तुम्हें बहुत बड़ी गलती होगयी है विकास बेटे ! जिस दिन बाण्ड को तुम जैसे छोकरों से डरना पडा, उस दिन बाण्ड जीवित रहने से वेहतर आत्महत्या करना समझेगा ।'"



" आत्महत्या करोगे कैसे अंकल , मौत तो तुरूहारी विकास के हाथों लिखी है ।"




-“यह तो वक्त वतायेगा बटे कि किसकी मौत किसके हाथ लिखी है ।" बाण्ड गुर्राया---"काम की बात करो ।"



" वह विरामधड़ी मेरे हबाले कर दो ।"




" कौन-सी बिरामघड़ी ?"



"वंही जिसके आधार पर उस पर्स तक पहुंचना चाहते है जिसमे......"



किन्तु--पूर्ण न हो सका विकास का वाक्य ।।

उससे पूर्व ही ऐसी हरकत कर दी बाण्ड ने जिसकी विकास ने आशा नहीं की थीं । अपने कदमों में पड़ी रोशन टार्च कों उसने एक ठोकर मारकर विकास की तरफ उछाल दिया ।।


निशाना इतना सटीक कि सन्नाती हुई टॉर्च विकास के हाथ में दबे रिवॉल्बर से जाकर टकराई ।


उस अप्रत्याशित हमले के प्रति विकास सतर्क न था और यही कारण था कि एक पल केलिये उस से चूक होगई ।



रिबाँल्वर जाके हाथ से छिटकर कहीं अंधेंरे में दुर जा गिरा।


अभी वह संभलने ही वाला था की हवा में सन्नाता हुअा जेम्स बाण्ड का शरीर उसके-ऊपर आ गिरा ।।



विकास अभी स्वयं की बाण्ड के मुकाबला करने हेतु तैयार भी नहीं कर पाया था कि-----" ये जो विरामंधडी ।"


बाण्ड के इस बाक्य के साथ ही एक जबरदस्त घूंसा बिकास की कनपटी पर पडा ।।


घूंसा इतना शक्तिशाली था की फिरकनी की भांति घूमकर विकास धड़ांम से जमीन पर गिरा ।।
भयानक फुर्ती के साथ वह उछल कर खड़ा हो गया । इस कार्य में अगर उसे एक क्षण का भी बिलम्ब हो जाता तो बाण्ड के बूट की ठोकर पूरी शक्ति से उसके चेहरे पर टकराती ।

किन्तु अब----अब वह हबा में घूमकर रह गयी बाण्ड की टांग ।


उसी पल विकास के सिर की एक जोऱदार टक्कर उसके चेहरे पर पडी है न चाहते हुए भी बाण्ड के कण्ठ से चीख निकल गई ।


टक्कर सीधी उसकी नांक पर बैठी थी और नाक से खून किसी टूटे हुए बांध की भाति बहने लगा था । बाण्ड पहली चोट के कारण ही अपने दिमाग को नियन्त्रित न कर पाया था कि विकास की लम्बी टांग धूम गई ।


बूट की जौरदार ठोकर बाण्ड के पेट में पडी ।


कराहकर बाण्ड पेट पकड़कर दुहरा हो गया । उसी समय बाण्ड की गुद्दी पऱ विकास का दुहत्तड़ पड़ा ।


मुंह के बल विकास के कृदमो में जा गिरा बाण्ड । इससे पूर्व कि विकास उस पर अपना कोई अगला बार करता, बाण्ड ने उसकी दोनों टांगे पकड़कर एक झटके के सांथ खीच दीं ।



विकास के पैर धरती से हटे और वह बिचित्र से ढंग से चकराकर जमीन पर गिरा ।


गिरा अौर गिरने के उपरान्त भयानक फुर्ती के साथ वह उठकर खड़ा भी हो गया , किन्तु---इस बार जब उसने बाण्ड पर जम्प लगानी चाहीं तो एकाएक ठिठक गया ।।


टार्च की रोशनी में उसे चमक रहा था-अपने सामने खड़ा बाण्ड का साया, साथ ही उसने बाण्ड के हाथ में चमचमाता हुआ एक चाकू देख लिया था । उस चाकू को देखकर ही ठिठका था, वह गुर्राया-----"क्यों अंकल, उतर अाये बुजदिली पर ?"

-'"रिवॉल्वर मेरी तरफ तानकर खड़े रहना बुजदिली नहीं है ?" कहने के साथ हीं बाण्ड ने विजली की गति से झपटकर विकास पर चाकू का बार किया ।
विकास ने हबा में ही बाण्ड की चाकू वाली कलाई थाम ली और बोला---" शेर का कलेजा है अंकल तो मुझे भी एक चाकू ......."


उसका वाक्य पूरा होने से पूर्व ही बाण्ड का घूटना उसकी टांगों के जोड पर पडा ।।



निश्चय ही दर्द से तिलमिला उठा विकासं, किन्तु उसके चक्कर में वाण्ड की चाकू बाली कलाई कों छोड़ने के स्थान पर इतनी जौर से मरोडा कि बाण्ड के कंठ से चीख निकल गई । मुंह से चीख निकालता हुआ वाण्ड विकास की कमर पर से होता हुआ जमीन-पर गिरा ।

इलना सव कुछ करने के बावजूद भी उसने बाण्ड की चाकू वाली कलाई नहीं छोड़ी । एक टांग उस कलाई के जोड़ पर रखी अौर इस तरह कलाई की खींचने लगा मानौ उसे बाण्ड के जिस्म से तोड़कर अलग फेंक देने का इरादा रखता हो । इधर विकास इस प्रयास में था और उधर बाण्ड ने अपनी दोनों टांगे उठाकर विकास की गर्दन में फंसा दी।



बड़ा विचित्र-सा दांव फंसा था ।



विकास उसकी कलाई नहीं छोड़ रहा था और बाण्ड उसकी गर्दन । बाण्ड उसे गिराने के लिये झटका देता तो दर्द उसकी कलाई में होता । काफी देर तक दौनो उसी स्थिति में रहे । फिर------------



जैसे एकसाथ दोंनों ने निश्चय किया ।
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03-25-2020, 01:22 PM,
#48
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
बाण्ड का मूट विकास के चेहरे से टकराया और विकास का बाण्ड के चेहरे से । एक साथ दोनों के कंठ से चीख निकल गई । छिटककर दोनों एक साथ दूसरे अलग होगये ।

विकास उछल कर खड़ा होगया।


उससे पहले खडा हो गया था जेम्स बाण्ड ।


विकास किसी चिते की तरह उस पर झपटा । बिजली की सी गति से बाण्ड का चाकू बाला हाथ चला ।
एक भयानक चीख विकास के मुंह से निकल गई ।


हुआ यूं था कि बाण्ड का चाकू विकास के दायें कन्धे में एक गहरा घाव करता हुआ निकल गया ।


कन्धे से बुरी तरह खून वहने लगा । बायें हाथ से उस घाव को दबाकर पीछे हटा विकास ।


पहले जैसी फूर्ती के साथ बाण्ड ने उस पर दूसरा वार किया ।


किन्तु अब ----- अब विकास भेड़िया बन चुका था ।


जेम्स बाण्ड से अधिक फूर्ती का परिचय देकर वह न सिर्फ स्वयं को वचा गया , बल्कि साथ ही उसकी लम्बी टांग भी चल गई । इस बार बूट की ठोकर बाण्ड के उस पंजे पर पड़ी , जिसमें चाकू दबा था ।


हाथ से चाकू निकल कर न जाने कहां गिरा ?


अभी चाकू के चक्कर में ही था बाण्ड कि विकास के एक जबरदस्त घूंसे ने उसके जबड़े पर लगकर उसे आतिशबाजी का कमाल दिखा दिया । पलक झपकते ही लम्बे विकास की ठोकर घुमकर उसके चेहरे पर पड़ी ।


गर्म गर्म खून से बाण्ड का मुंह भर गया ।

दो दांत भी टूट गये उसके ।


खून का कुल्ला किया तो टूटे दांत भी गिर गये ।


इधर वह कुल्ली कर रहा था कि विकास की एक और ठोकर ने उसकी पसलियों को चरमराकर रख दिया ।


चाकू लगते ही न जाने क्या हुआ था विकास को कि बिजली के पुतले की भांति उसके जिस्म का हरेक अंग काम करने लगा ।


इस फूर्ती के साथ उसके हाथ पैर चल रहे थे कि बाण्ड को सम्भलने के लिये एक क्षण भी तो ना दिया जालिम ने ।


वार ----वार पर वार । चोट पर चोट ।



अन्त यह कि जेम्स बाण्ड बेहोश हो गया ।


सरलता से विकास ने यह भी नहीं माना कि वह बेहोश होगया ।


चैक करने के उपरान्त जब उसे विश्बास होगया कि वह बेहोश होगया है तो बाण्ड के कपड़ो की तलाशी ली उसने ।


जेव से विरामंधडी़ निकाल ली ।


टार्च के प्रकाश में उसने समीप की झाड़ीयों में पड़ी बाण्ड की वह गन भी उठा ली , जिससे उसने हैलीकॉप्टर नष्ट कीया था ।


फिर ---- विरामंधडी़ की सुईयों को ध्यान से देखा । देखकर हल्के से मुस्कराया विकास ।

बाण्ड के बेहोश जिस्म को कन्धे पर डाला और लम्बे-लम्बे कदमों के साथ एक तरफ को बढ़ गया ।।।।।
" तुगलक अली ।"


" हां मेरी भाभी के प्यारे नुसरत-खान ।"


."जहां से इस समय हम गुजर रहे हैं यह एक भयानक जंगल है ।"




" वेशक है ।"


"'रात का समय है ।" नुसरत खान कह रहा था---" करीब बारंह बजे है ।"




अपने हाथ में बंधी रिस्टवांच देखी तुगलक ने, रेडियम डायल चमक रहा था ---बोला ---" पूरा डेढ़ बजा है ।"




"चारों तरफ अधेंरा है ।"


" सन्नाटा भी ।"




" ऐसे मौसम में मुझे एक बात याद आ रही है ।"

" उगल' दो ।"



"ऐसा ही मौसम था जब मेरे अब्बा अम्मी की आँखों से वनी चाट खा गये ।" नुसरत अली कहने लगा---" मेरी अम्मी की आखों से बनी वह चाट अब्बा को इतनी पसन्द आई कि वे उसे बार-बार खाने लगे । वियावान जंगल था रात का समय था, चारों तरफ सन्नाटा । जानवंर बोल रहे थे ।

ऐसे में मेरी अम्मी और अब्बा के ताशे बज गये । एक-दूसरे के प्यार में बजरबटटू बनेे तो अम्मी कहने लगी-'" मेरे दिल के शरबत, मुझे इश्क की कोई ऐसी निशानी दे कि जो हमेशा मुझे तुम्हारी याद दिलाया करे ।


और अब्बा ने एक ऐसी निशानी दे दी ।




" क्या निशानी दी तुम्हारे अम्बा ने ?" तुगलक ने पुछा ।



"तू ही बता सोच कर----" इश्क की सबसे बढ़िया निशानी क्या ही सकती है ।"


तुगलक बताने लगा ।


बहुत-सी निशानियों के नाम ले डाले उसने, किन्तु नुसरत था कि इंकार में ही गर्दन हिलाये जा रहा था ।


स्थिति ऐसी आ गयी कि तुगलक इश्क की निशानियां बताता बताता थक गया ।। अतः तुगलक बोला-"अबे तो और क्या भिण्डी का मुरब्बा देदिया ?"



"हां ।" नुसरत ने एकदम कहा…"अब पहुंचे तुम असली निशानी पर ।"

चौका तुगलक, बोला --"क्या कहते हो ?"


"भिण्डी के मुरब्बे जैसा ही तो हू मैं ।"



" क्या मतलब ?"



"अबे मैं ही तो हूं प्यार की निशानी जो मेरे अब्बा ने मेरी अम्मी को दी ।"



" ओह ।" तुगलक ने कहा ---" तो तुम उसी रात की औलाद हो ?"


" अबे तू कौन सा सुबह की औलाद है ?" नुसरत ने कहा --- " मुझे तेरी सारी हिस्ट्री मालुम है मुझे । तू दोपहर के समय शहतूत के पेड़ से टपका था ।"


इस प्रकार ऊटपटांग बातें करते चले जा रहे थे नुसरत ओर तुगलक ।


पोशाक से जासूस कम पाकिस्तानी शायर ज्यादा लगते थे ।


चूड़ीदार पजामा, पैरों में जूती । घुटनों तक बन्द गले का कोट । सिरों पर काली टोपी । मुंह में पान थे । बात करते हुए बीच-बीच में पान का पीक थूक देते थे ।।


" भाई नुसरत ।"

" हां बहन तुगलक बानो !" नुसरत ने लपककर कहा ।
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03-25-2020, 01:22 PM,
#49
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
" थक गये यार ये साला चमन अभी कितनी दूर और है ?"


बस सुबह होते होते हम चमन के ही किसी बाग में एक दूसरे की बेगमों की कमी को पूरी कर रहे होंगे ।


" यार तुझे चमन में इस तरह जंगल के रास्ते से पैदल जाने की क्या सूझी ?"


अचानक दोनों रूक गये । दोनों के कान कुछ सुनने की चेष्टा कर रहे थे ।


आकाश की ओर देखता हुआ तुगलक बोला ---" लगता है आसमान से साला कोई हबाई जहाज गुजर रहा है ।"


" हबाई जहाज नही मूर्ख आबाज हेलीकॉप्टर की है ।" नुसरत ने कहा ।


अड़ा नहीं तुगलक , बोला---" तू ठीक कहता है । लेकिन यार साला कहीं नजर नहीं आ रहा है ।"



अचानक ..............



हबा में लहराकर आकाश से नीचे गिरती हुई कोई चीज फटाक से नुसरत के चेहरे पर आ पड़ी।


" अबे तेरी की......!"

" क्या हुआ ---- क्या था ?" तुगलक ने पुछा ।


" मुझे लगता है कि हेलीकॉप्टर का पुर्जा टूटकर मेरे चेहरे पर गिरा है , उसे ढूंढों --- हो सकता है कि उसे देखकर हम यह जान सकें कि वह हैलीकॉप्टर कौन से सन् में बना था ?"


दोनों ही उस चीज को तलाश करने लगे , जो ऊपर से गिरी थी ।


" अबे !" तुगलक के मुंह से निकला--------" ये साला पर्स किसका पड़ा है ?"



तुगलक ने झुककर पर्स उठा लिया ।।


" इसमें माल होगा ।" कहते हुए तुगलक ने पर्स की चेन खोल दी ।


" अबे इस में तो फिल्में हैं --- दो रील ।"


तुगलक ने आईडिया फिट किया ---" लगता है को प्रोडयूसर इस जंगल में अपनी किसी जासूसी फिल्म की शूटिंग करने आया होगा । उस बेचारे ने फिल्में अपने पर्स में रखी होंगी और पर्स यहां गिर गया ।।


" मुझे तो कुछ और ही लगता है । "


" क्या ?"


" किसी जेबकतरे ने किसी बहुत ही अमीर आदमी की जेब काट ली होगी ।" नुसरत खान ने राय प्रकट की ---" पर्स से पैसे निकाल कर उसने पर्स यहां फैंक दिया होगा ।"

तुगलक ने राय प्रकट की ----" अबे कहीं ये पर्स ही तो वह चीज नहीं जो मेरे चेहरे पर आकर लगी थी ?"




" हां ।" खिल्ली उड़ाने वाले भाव से तुगलक ने कहा , " कोई चील ईसे अपनी चोंच में दबाकर उड़ी चली जा रही होगी , अन्धेरें में तेरी शक्ल देखी तो फिदा हो गई । अपनी मोहब्बत के इकरानामे पर दसतख्त कराने के उसने चोंच खोली होगी और ये पर्स ......"






" तुझे कभी अक्ल नहीं आयेगी साले जामुन की औलाद ।" नुसरत ने कहा ---" अबे क्या ये नहीं हो सकता कि यह पर्स उस हैलीकॉप्टर में बैठे किसी आदमी की जेब से गिरा हो ? इत्तफाक से हमें मिल गया ।"


" तो फिर तेरे विचार से इस फिल्म में क्या होगा ?"



" यह तो इन्हें देखने से ही पता लगेगा!" कहकर तुगलक फिल्मों को टार्च की रोशनी में देखने का प्रयास करने लगा ।।।।।
अभी फिल्में निकालकर टार्च की रोशनी से चेक कर ही रहे थे कि ----

--- उसी समय --- वातावरण किसी गन के गर्जने से कांप उठा ।।

वे दोंनो ही सहमकर एक दूसरे से लिपट गये । बस गन की इस गर्जना के बाद वे किसी प्रकार की कोई आवाज न सुन सके ।

पहले वे एक दूसरे से चिपके थर थर कांपते रहे , फिर नुसरत बोला ---" तुगलक ।"

" हां नुसरत ।"

" साले , लगता है कोई पागल जासूस इस जंगल में आ गया है ---" भागो ।"

" सचमुच --- जासूस अगर अक्लमंद होता तो , इस तरह संगीत बजा कर हमें सतर्क न करता बल्कि चुपचाप हमें इस तरह दबोच लेता जैसे बिल्ली चूहे को दबोच लेती है ।" तुगलक कहे चला जा रहा था ----" महान जासूस तो बिना मारधाड़ के काम करते हैं ।"

" बिल्कुल ।" नुसरत ने कहा ----" हमें बेवकूफ जासूसों की जासूसी से फायदा उठाना चाहिए ।"

" भागो ।" तुगलक ने नारा लगाया और आपस में हाथ पकड़ कर दोनों ही भाग लिये ।

पर्स सहित दोंनों फिल्में तुगलक के हाथों में सही सलामत थी ।

वे अंधेरे जंगल में वेतहाशा भागे चले जा रहे थे । इस प्रकार मानों भूतों कोइ टोली उनका पीछा कर रही हो ।

अन्धेरें में कई स्थान पर ठोकर खाकर गिरे भी , किन्तु उठ कर फिर दौड़ने लगते ।

अन्त में जंगल के बीच वनी एक इमारत को देखकर वे रूक गये ।।।।



बुरी तरह फूली हुई सांसें लेकर उन्होंने एक-दूसरे को देखा, फिर इमारत को और फिर एक-दूसरे को ।।

दोनों डी आखें एक--दूसरे से पूछ रही थीं कि जंगल के बीच यह इमारत कैसी है ? अपनी फूली हुई सांस पर पहले संयम पाया । नुसरत ने बेला कौन बेवकूफ है, जो इस जंगम में रहता है ।।

" बेवकूफ तुम हो जो तुमने यह सवाल किया ।"

खा जाने वाली नजरों से नुसरत ने तुगलक को घूरा बेले---" क्या मतलब।"

" अबे यही सवाल तो मैं तुमसे करने बाला था ।"

" जरा सोचने दे ।" कहने के उपरान्त तुगलक ने ऐसा पोज बना लिया मानो वह दुनिया का सवोंत्तम विचारक हो । कोई प्रेमी बात सोचने में तल्लीन हो होगया हो जो मानव जाति को नया मार्ग दिया सके । फिर उसने अपनी समाधि तोड़ी बोला ---" सोच लिया ।"

" क्या सोचा ?" नुसरत ने पुछा ।

" निश्चित रूप किसी लकड़वग्घे ने यह इमारत अपनी लकड़वग्घी केलिये बनाई है ।" अपने दीम्ग का मलीदा निकालते हुए तुगलक ने बतीया-"उसे अपनी लकड़वग्घी से उतनी ही मोहब्बत होगी जितनी मेरे अब्बा को अम्मी से ...."

"अबे चुप देगची के ।"

"गाली देता है ।"
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03-25-2020, 01:22 PM,
#50
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
किन्तु तुगलक पर लेशमात्र भी तो असर न हुआ । वह कहता हीं चला गया-"तुझे नहीं पता ये, पुराने जमाने के राजा-महाराजा शेर का शिकार किया भी करते थे । बार-बार पड़ाब डालते की किल्लत' से बचने के लिये वो जंगल में इमारत बनवा लिया कंरते थे । ये सब बातें मुझे एक दिन ख्बाब में चमकी थीं । यह ही चमका था कि इमारत को शिकारगाह कहते हैं ।"

"सच ।" नुसरत बोला-"ऐसा ख्बाब तो मुझे मी चमका था ।"

-"ये शिकारगाह ही है ।"

"अबे सुन तो सही, मुझे क्या ख्वाब चमका था ।" नुसरत कहता चला गया---" मुझे चमका था कि अम्मी की बजाय अब्बा के पेट से पैदा......."

"नुसरत ।" उसकी बात बीच में ही काटकर तुगलक ने कहा ----" ख्बाब की बात छोड यार, तू ये क्यों भूल रहा है कि हम जासूस हैं-और जासूस भी छोटे मोटे नहीं-दुनिया के सबसे महान जासूस है ।"

"इस हकीकत को मैं कभी नहीं भूलता ।"

" तो फिर इस शिकारगाह में छुप जायें । तुगलक ने राय दी----"साला कितना भी बड़ा जासूस आ जाये किसी को शक नहीं होगा कि हम यहां हैं । तू वीं सोच कभी कोई ये सोच सकता है कि शेर की मांद मे चुहा होगा? "


" कभी नहीं ।"

" तो आ फिर ।" तुगलक ने कहा ----" अन्दर इन फिल्मों का जोड़ घटाना देंखेंगें ।"

इस प्रकार----ये हमारे दोनों महान जासूस शिकारगाह के अंदर चले गये ।" सचमुच बहुत पहुच किसी राजा द्वारा बनाया गया शिकारगाह ही था ।

घूमते घूमते वे एक कमरे में पहुंचे । कमरे में अंधेरा था, जिसे पहले तो उन्होंने' टार्च की रोशनी से दूर किया, फिर कमरे की एक दीबांर में लगी मशाल जला कर , प्रकाश हो गया ।

कमरा देखने से ही आभास होता था कि कम-से-कम एक वर्ष से किसी इन्सान ने यहां कदम नहीं रखा है ।

-"'अब हम जानी पाकिस्तानं के बीर सपूत सुरक्षित है ।"

" तुम कुछ सुरक्षित नहीं हो चमगदड़ के बच्चो !" एक अन्य आवाज गूंजी ।!।!!!!!
पलक झपकते ही दोंनों ने रिवॉ्ल्वर निकाल ली थी ।

"कौन है बे ?" नुसरत गुर्राया --" किस भिण्डी की औलाद ने हम जैसे महान जासूसों को गाली देने की हिम्मत की है ?सामने आ साले----मुसल्लम बनाकर हलम कर जायेंगे ।"

"तुम दोनों का सिर मुंडवाकर चुटिया एक साथ बांध दूंगा ।" कमरे के बाहर से आवाज अाई ।

बौखलाकर तुगलक ने अपने शायरों जैसे लम्बे बालों पे हाथ फिराया । नुसरत की परेशानी यह थी कि वे प्रकाश मे-थे और कमरे के बाहर था अंधेरा ।इस वात की वह भलीभांति समझ रहा था कि बाहर बाला उन्हें आसानी से देख रहा होगा और. वे उसे नही देख पा रहे हैं, तभी तो उसमे तुरन्त कहा--"मेरा अब्बा साला उल्लू का गोश्त खाता था, तभी तो मुझे अंधेरे में भी दिखता है ।"

अभी वह कह हीं रहा था कि दरवाजे के बाहर किसी कै जूतों की आवाज गूंजने लगी "टक्…टक्-टक् !"

" अा जा बेटा ।" नुसरत ने कहा तो तुगलग बोल पड़ा---"बनायेगे लोटन!"

.स्थिर और' सन्तुलित कदमों से कोई चल रहा था ।

दरवाजे पर एक परछाई उभरी-लम्बी तगडी है दोनों के पंजों की पकड़ रिवॉल्बर पर मजबूत हो गई ।।

कमरे से प्रविष्ट होकर वह परछाई मशाल के प्रकाश मे… आ गई ।

साथ ही उसने कहा--" तुम्हें बाल्टी जरूर वना दूंगा उल्लू के पट्ठो !"

-"रूसी चचा ?" एक साथ दोनों क मुहं से निकला ।

बोगारोफ ही था वह,बोला --“चचा नहीं बाप कहो ।

दोनों की नजरे मिली । रिवॉल्बर झुक गये । नुसरत ने कहा----" हमारी गलती कों क्षमा की टोकरी में फेंक दो चचा हमें क्या पता था तुम भी जंगल में तुम कवड्डी खेलने आये हो, वर्ना कसम मियां भुट्टो की ---हम कभी......"

" तुम्हारी कवड्डी बहुत देर से देख रहा हूं मैं ।" बागरोफ ने कहा--- "
पाकिस्तान के ढक्कनों वह फिल्म मुझे दे दो जो तुम्हारे हाथ लगी है ।"

" हम तो तुम्हारे ताबेदार हैं चचा---------" कहकर एक साथ दोनों ही वागारोंफ की तरंफ बढे । समीप पहुचे । चरणों में झुक ग्रये । अन्तर्राष्ट्रीय जासूस मण्डली में सर्वाधिक उम्र का जासूस बगारोफ ही था । हर राष्ट्र का जासूस चचा कहता था । उसे सम्मान करता था । पैर छूता था ।

नुसरत तुगलक ने भी परम्परा निभाई ।

एक मुस्कान बामारोफ के होंठों पर उभरी दोनों के सिर पर हाथ फेरकर बोला-----"जीते रहो कबूतर के बच्चे........."

औरं हद करदी उन्होंने ।

बागारोफ का वाक्य बीच में ही रह गया अौऱ वह धड़ाम से चारों खाने चित गिरा ।

हुआ यूं कि दोंनों' महान जासूसों ने एकसाथ, झटके से बागारोफ़ की दोनों टांगें खीच ली ।

स्वप्न में भी बागरोफ को ऐसी उम्मीद न थी । तभी वह मात खा गया । सिर का पिछला हिस्सा फर्श से इतनी जोर से टक्कराया कि सन्नाकर रह गया बागारोफ ।

दोनों बागरोफ के ऊपर सवार थे, तुगलक कह रहा था---"देखा नुसरत भाई. कैसी धोड़ी पछाड मारी है ?।"

" बुढ़ापे में चचा, फिल्म देखना चाहते थे ।" नुसरत हँसा ।

" देखी चचा !" नुसरत ने बागारोफ से कहा----"कितनी बढिया फिल्म दिखाई । इसे कहते हैं दुलती मार ।"

उसकी इस हरकत पर बुरी तरह बौखलागया था बागरोफ बोला----"तुम्हें छोडुंगा नहीं मच्छर के अण्डों ।"

" छोड़ने का सवाल तुम्हारे लिये नहीं चचा हमारे लिए है।" नुसरत ने कहा----" जामुन के पेड़ पर से टपका था मैं । जब कोई जामून खाता है तो उसकी जीभ नीली हो जाती है । जब मै किसी का किर्या कर्म करता हूं तो उसका शरीर नीला पड़ जाता है ।"

बागरोफ कसमसाया ।।।

कसमसा कर उनके बंन्धन से मुक्त होने हेतु बागरोफ ने अपनी सम्पूर्ण शक्ति का प्रयोग किया , किन्तु टस से मस न हो सका वह ।

"पिछले जन्म में अंगद का पैर था मैं ।" नुसरत ने कहा ।

" मैं था वह धनुष जिसे सीता ही उठा सकती थी । " तुगलक ने तान लगाई ।

और सचमुच-ऐसा ही लगा था बागारोफ को । पहले कभी ऐसा मौका नहीं आया था कि वह नुसरत-तुगलक है भिड़ा हो । हमेशा उन्हें मूर्खतापूर्ण बाते करते ही पाया था । उस समय बागारोफ सोचा करता था कि न जाने पाकिस्तान ने अपनी सीक्रेट सर्विस में कैसे-कैसे रंगरूटों को भर्ती कर लिया है, किन्तु अब जबकि वह अपनी सम्पूर्ण शक्ति का उपयोग करने के उपरान्त भी उनके वह वन्धनें से मुक्त नहीं हो पा रहा था, उसे सोचनां पड़ा कि नुसंरत और तुगलक में कोई विशेष बात अवश्य है जो इन्हें पाकिस्तान ने इस अभियान पर है भेजा है ।

" चचा !"अपने शिकंजे जैसे बन्धन् में जकड़े नुसरत बोला---"अव मैं तुम्हें अपनी बेगम का किस्सा सुनाता हूं । "
" चुप वे जामुन की औलाद ! " बागारोफ को जकड़े तुगलक ने नुसरत को डांटा-"पहले मैं चचा को अपनी लाल छडी का हाल ......!"
"अवे मुझे छोडो़ तो सही हरामी के पिल्लो" बागरोफ दहाड़ा-…"सालो मेरा गजरवत ।"

कहते कहते ही बागारोफ ने एक-एक उंगली दोनों कों आंख में मारी ।

" मर गया नुसरत ।"

"बचा तुगलक ।"

चीखते हुए दोनों ने बागारीफ को छोड़ दिया ।

उछलकर खडा हो गया बागारोफ । देखा-सामने वे दोनों खडे़ है ।

बागारोफ ने जिस आंख में उँगली मारी थी, बागारोफ की अोर देखते हुये उसी आंख को बार-वार: दबा रहे थे।

नुसरत कह रहा था… ये तुमने क्या किया चचा, मैं तो तुम्हें अपनी बेगम का किस्सा सुना रहा था ।

--"अव मैं तुम्हारी उडनतस्तरी बना दूंगा भूतनी वालों-बागारोफ दहाड़ा----"तुमने मुझे समझ क्या रखा है !"

"दूध का वीज ।" तुगलक बोला ।

नुसरत ने कहा--"कुत्ते का अण्डा !"

' होश काबू में न रख सका वागारोफ । वह झपट पड़ा । परन्तु इस बार लेशमात्र भी लापरवाह नहीं था वह ।

जान चुका था कि नुसरत और तुगलक के शरीरों में अपरिमित शक्ति है । उसका एक जवंरदस्त घुंसा नुसरत के चेहरे पर पड़ा । गजब की फुर्ती के साथ तुगलक की तरफ घूमा
किन्तु तुगलक-" नंहीं--नहीं,.....चचा !" कहता हुआ चेहरे पर हाथ रखे इस तरह पीछे हट रहा था मानो बागरोफ का घुसा नुसरत के नहीं, उसके चेहरे पर लगा----"चचा मुझे मत मारो । मैं बचा हूं तुम्हारा, नादान हूं-नासमझ हूँ ।"

पूरी सतर्कता के साथ बागारोक तुगलक की तरफ व्रढ़ रहा था, किन्तु 'नुसरत की तरफ से आवाज' आई------" तुझसे पहले ही कहा था साले, प्यार के हथगोले कि चचा को मत छेड़ चचा बहुत खतरनाक हैं, लेकिन नहीं माना चल, माफी मांग लें ।"

एक क्षण-सिर्फ एक क्षण के लिये बागारोफ की दृष्टि तुगलक से हटकर नुसरत पंर गयी कि----

कमाल कर दिया तुगलक ने ।

उस एक ही क्षण में बागरोफ के चेहरे पर ऐसा घूंसा पड़ा कि उसकी आंखों के-सामने लाल-पीले तारे नाच उठे । एक फूट हवा में उछलकर वह धड़ांम से फर्श पर जाकर गिरा ।

जबरदस्त फुर्ती के साथ उठकर खड़ा हो गया था बागारोफ ।

बागारोफ का दिमाग बुरी तरह झन्ना रहा था ।

एक नजर उसने दोंनों को देखा।।

नुसरत हाथ जोडे़ खडा़ था । कह रहा था--------"इस नालायक की तरफ से ने माफी मांग रहा हूँ ! चचा ये नादान है, 'तुम्हारा बच्चा है। इसे माफ कर दो ।।।

इस बार बागरोफ ने उनमें से किसी पर जम्प लगाने की मूर्खता नहीं की।

अपनी एक आंख से वह नुसरत की देख रहा था तो दूसरी तुगलक पर स्थिर थी ।

" अबे नुसरत ।" बागरोफ पर दृष्टी जमाये तुगलक कह रहा था ---" ये क्या होगया चचा को , ये तो भैंगें होगये ।"

मैँने पहले ही कह था न तुझसे चंचा से मजाक मत कर ।" तुगलक की वात को जबाव अवश्य दे रहा या वह, किन्तु दृष्टि बागारोफ पर ही स्थिर थी-----"अवे देख ले, चचा की आँखें घूम गयी हैं । यहां जंगल में साला डॉक्टर भी नहीं मिलेगा ।"


" मैं तुम्हारा---डमरू बजा दूंगा सालो हुकम के इक्कों ।" उसी तरह एक-एक आंख से दोनों को देखता हुआ बागारोफ बोला----"


थोड़ी देर में पता लग जायेगा कि तुममें से किसकी आंख घुमती है, और किसकी नाक । किसके दांत टूटते हैं और किसकी आँत ?"

" नही चचा, ऐसा मत करना ।" तुगलक गिड़गिड़ा उठा ।
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