bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
02-02-2019, 01:12 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
आशना ने वीरेंदर का लिंग मुँह से निकाले बिना अपने आप को वीरेंदर की छाती पर घुमाया और अपनी दोनो टाँगे उसकी कमर के इर्द गिर्द कर दी. खुमारी के कारण वीरेंदर की आँखें बंद थी. जैसे ही आशना की योनि की खुश्बू उसके नथुनो मे समाई उसने धड़कते दिल से आँखें खोली. सामने के नज़ारे को देख कर उसके लिंग ने एक झटका खाया जिसे आशना ने अपने मुँह के अंदर महसूस किया. 

इस एहसास से कि उसकी यह अदा वीर के मन को रोमांचित कर गयी, आशना के जिस्म मे एक चिंगारी उठी और उसे भुजाने के लिए उसने अपनी योनि वीरेंदर के तपते होंठो के हवाले कर दी. जैसे ही वीरेंदर के होंठो का स्पर्श उसे अपनी योनि पर महसोस हुआ, आशना की कमर ने एक झटका खाया और खुद ब खुद उसकी कमर वीरेंदर की छाती पर रगड़ खाने लगी. 

करीब 5 मिनट तक एक दूसरे को मुख मैथुन का सुख देने के बाद वीरेंदर ने अपने हाथों से आशना के नितंबों को उपर की तरफ उठाया. आशना ने वीरेंदर के संकेत को समझा और उसके उपर से हट कर एक ओर लूड़क गयी. उसकी साँसों की गति बहुत ही संवेदनशील हो चुकी थी. 

वीरेंदर( मदहोशी मे): इस बार तुम उपर आओ गुड़िया. 

आशना: मुझे शरम आती है वीर. 

वीरेंदर: मैं तुम्हारे उभारों से खेलना चाहता हूँ जब तुम तुम मेरी सवारी करो. 

वीरेंदर के दिल की चाहत को जान कर आशना ने कोई विरोध नही किया और पलट कर वीरेंदर के उपर आ गयी. एक हाथ से वीरेंदर के लिंग को दिशा देकर वो लिंग को अपनी योनि मे उतारने लगी. आशना के चेहरे पर आई पीड़ा के भाव देख कर वीरेंदर के दिल मे उसके लिए अपार प्रेम उमड़ आया. 

आशना के समर्पित भाव को देख कर उसे आशना पर और भी प्यार आने लगा. वीरेंदर ने अपने लिंग को थोड़ा सा सिकोड कर उसे फिर से फुलाया तो आशना ने हैरानी से वीरेंदर की तरफ देखा. 

वीरेंदर: आइ कॅन डू दट. 

आशना ने बिना कोई जवाब दिए अपनी योनि के मसल्स को फ्लेक्स किया तो वीरेंदर के गले से एक मधुर आह निकल गयी. 

इस बार वीरेंदर ने आशना की तरफ हैरानी से देखा तो आशना बोली " आपकी ही बेहन हूँ, यह तो मैं भी कर सकती हूँ". 

आशना के ऐसा कहते ही वीरेंदर ने आशना के उभारों को पकड़ लिया और उसे अपने पास खींच लिया. ऐसा करने से वीरेंदर का लिंग आशना की योनि मे और भी समा गया. आशना ने अपने घुटनों के बल होकर वीरेंदर के लिंग को जड तक जाने से रोक दिया. 

वीरेंदर: क्या हुआ???

आशना: अंदर दर्द होता है जब आपका यह सारा जाता है. प्लीज़ इतना ही रहने दीजिए. 

वीरेंदर ने मुस्कुरा कर आशना को गले से लगा लिया. 

वीरेंदर: तुम मेरे लिए इतना कर रही हो तो क्या मैं तुम्हारे लिए इतना भी नहीं कर सकता. 

आशना ने वीरेंदर की बात पूरी होते ही अपनी योनि को संकुचित करकरे ढीला छोड़ दिया. 

वीरेंदर: उूवो, अया मज़ा आ गया जान. 

वीरेंदर ने भी अपने लिंग को संकुचित किया तो फिर तो जैसे उन दोनो मे होड़ सी लग गयी. बिना किसी धक्के के उनमे उत्तेजना बढ़ने लगी और बिना किसी शारीरिक परिश्रम के वो दोनो मंज़िल के करीब पहुँचने लगे. सखलन करीब आते ही आशना ने वीरेंदर के लिंग पर तेज़ी से उछलना शुरू कर दिया. वीरेंदर का लिंग जड तक आशना की योनि मे जाकर चोट कर रहा था. खुमारी मे किसी को भी यह एहसास नहीं हुआ कि वीरेंदर का लिंग आशना की योनि की अंदुरूनी दीवारों की धज्जियाँ उड़ा चुका है. 

शायद, प्यार का खुमार इसे ही कहते हैं. सखलन होने तक दोनो की स्पीड इस कदर बढ़ चुकी थी कि बेड भी उनके साथ हिलने लगा था. सखलन होते ही आशना, वीरेंदर पर झुक गयी और वीरेंदर ने उसका एक वक्ष पकड़ कर आवेश मे आकर उसे अपने दाँतों से काट लिया. आशना ने प्रेमावेश मे आकर उफ्फ तक ना की. 

अपनी अपनी मंज़िल पर एक साथ पहुँच कर उनके शरीर स्थिर हो गये. रह रह कर आशना के जिस्म मे तरगे चलती तो उसका सारा बदन हिल जाता. इस बार भी वीरेंदर के लिंग ने आशना की योनि का साथ नहीं छोड़ा और मुँह लटकाए उसी मे छुपा रहा. 

होश मे आते ही आशना दर्द से बिलख कर बोली: आह वीर, आपने तो मुझे बहाल कर दिया है. टाँगे तो पहले से ही जवाब दे चुकी थी और अब यहाँ पर काट कर तो आपने अपने जंगली होने का प्रमाण भी दे दिया.

वीर ने देखा के उसने आशना के वक्ष पर दाँत गढ़ा दिया है जिस कारण वहाँ पर खून जमा हो गया है.

वीरेंदर: सॉरी गुड़िया, मैं पागल हो गया था. 

आशना, वीरेंदर की घबराहट देख कर मुस्कुराइ और बोली: थॅंक्स फॉर दा सौविनीएर माइ लव.

वीरेंदर ने आशना की बात सुनकर उसे कंधे से पकड़ कर अपने उपर से उठाया और उसके दूसरे वक्ष को भी काट लिया. 

इस बार आशना तड़प उठी. आशना की आँखो मे आँसू आ गये. आँखो मे नमी लिए आशना बोली: यह किस लिए????

वीरेंदर: मैं किसी के साथ अन्याय नहीं करता. एक बेचारा मेरी निशानी पाकर फूला नहीं समा रहा था तो भला दूसरे को दुखी कैसे कर सकता था. 

आशना ने बुरा सा मुँह बनाते हुए कहा: और इस बच्ची के साथ जो अन्याय हुआ है उसका क्या?????
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02-02-2019, 01:12 AM,
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वीरेंदर ने आशना को कस कर गले लगाते हुए कहा: उसके साथ तो अब हर रात ऐसे ही अन्याय होता रहेगा. वो मुझसे रहम की अभिलाषा ना ही करे तो अच्छा. 

आशना ने भी वीरेंदर को कस लिया और बोली: आपका यह अन्याय तो मैं हमेशा सहने तो तैयार हूँ. वीरेंदर ने आशना को अपनी बगल मे लिटाया और उसे चद्दर ओढ़ा कर अपने से सटा लिया. 

आशना: आपको ठंड नहीं लगती क्या???

वीरेंदर( धीरे से मुस्कुराते हुए): लगती तो है लेकिन अभी तो मेरी हॉट हॉट बीवी मेरी बाहों मे है तो भला चद्दर क्यूँ ओढूं. ज़रूरत पड़ी तो उसे ही ओढ़ लूँगा. 

आशना(चीखते हुए): नहियीईईईई.......... और वीरेंदर खिलखिलाकर हंस दिया.

वीरेंदर, आशना को अपनी बाहों मे लेकर सुकून की नींद सो रहा था. वीरेंदर के सेल पर मेसेज बीप बजी. आशना ने अल्साते हुए वीरेंदर को जगाया लेकिन वीरेंदर तो घोड़े बेच कर सो रहा था.
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02-02-2019, 01:12 AM,
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आशना ने टाइम देखा तो सुबह के 6:30 बज रहे थे. वीरेंदर को गहरी नींद मैं देखकर आशना के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गयी. वीरेंदर के मासूम चेहरे को धीरे से चूम कर सबसे पहले तो उसने वीरेंदर की बाज़ू को अपने सीने से हटाया और फिर उसकी टाँग को अपनी कमर से नीचे उतारा. 

वीरेंदर की पकड़ से आज़ाद होकर वो जैसे ही उठने को हुई उसके बदन में दर्द की एक लहर उठी और उसके मुँह से हल्की सी आह निकल गयी.

आशना(मन मे): मेरी यह हालत बनाकर जनाब चैन की नींद सो रहे हैं और फिर चेहरे पर प्यार भरे भाव लाकर धीरे से बोली: आपका दिया हुआ हर दर्द एक मीठा अहसास दे रहा है वीर. भगवान आपके सारे दुख मेरे हिस्से में दे दे. 

दर्द सहते हुए आशना बेड से टाँगें लटका कर बैठ गयी. आशना को अपनी जांघे के जोड़ मे जकड़न महसूस हो रही थी और उसकी आँखो मे बार बार अंधेरा छा रहा था. थोड़ी देर इसी तरह बैठने पर उसे दर्द मे राहत महसूस हुई. अपने बदन को आगे की तरफ झुका कर उसने धीरे से उठना शुरू किया लेकिन उसकी आँखो के आगे अंधेरा छा गया और वो एकदम से बेड पर बैठ गयी. 

बेख़बर सो रहे वीरेंदर की तरफ मुँह करके उसने असहाय नज़रों से देखा और फिर जैसे उसके दिल मे वीरेंदर के लिए कुछ करने का जुनून एक बार फिर से सवार हो उठा. जुनून मे आकर इंसान वो सब कर देता है जो उसके वस मे नही होता. 

आशना ने भी दिल में जुनून भर कर उठने का भरसक प्रयास किया और इस बार वो अपने प्रयास मे कामयाब रही. धीरे धीरे चल कर वो वॉशरूम तक पहुँची और अंदर आते ही उसने वॉशरूम का दरवाज़ा लॉक किया और एक बार फिर से हॉट वॉटर ट्रीटमेंट लिया. करीब 15-20 मिनट की सिकाई के बाद आशना ने अपने शरीर को सॉफ किया और बाथ ली. नहाने के बाद वो काफ़ी तरोताज़ा फील करने लगी. धीरे धीरे उसका दर्द भी जाता रहा.

आशना ने बॅग(जो के रात को वॉशरूम में ही रह गया था) से एक शाइनी रेड कलर की ब्रा-पैंटी निकाली और उसे पहन लिया. कमर पर एक क्रीम कलर की छोटी सी स्कर्ट पहन कर उसने डार्क ब्राउन कलर का टॉप पहनने के लिए जैसे ही उठाया तो एकदम से अपने माइंड को चेंज करते हुए उसने टॉप को वापिस बॅग मे डाल दिया. 

अपने गील बालों को एक झटका देकर आगे की तरफ करके आशना शीशे मे अपने आप को देखने लगी. अपने चेहरे पर आए नूवर को देख कर वो खुद से ही शरमा गयी. जानती थी कि यह सब वीरेंदर के प्यार का असर है.वॉशरूम का दरवाज़ा खोल कर आशना ने वीरेंदर की तरफ देखा. वीरेंदर अभी भी उसी अवस्था मे सो रहा था. 

आशना: मेरा चैन चुराकर, चैन की नींद सो रहे हैं जनाब. अभी देखती हूँ कि मेरे हुस्न के वार से कैसे बच पाते हैं. 

अपने तरो-ताज़ा महकते अधनंगे जिस्म के साथ आशना वीरेंदर के पास पहुँची. आशना के किस्म का दर्द एक दम गायब हो चुका था. दर्द की जगह अब मीठी मीठी मदहोशी उसपर हावी हो रही थी. आशना ने देखा कि 7:15 बाज चुके हैं. धीरे से बिस्तर पर लेट कर आशना ने अपने शरीर को चद्दर से कवर कर लिया और वीरेंदर की बाज़ू उठाकर आराम से उसे फिर से अपने उपर रख लिया. 

अपनी तरफ से आश्वस्त होकर आशना ने आँखें बंद की और सोने का नाटक करने लगी. आशना ने अपने शरीर को एक झटका दिया जिस से वीरेंदर का शरीर मे भी हलचल हुई मगर वीरेंदर की नींद नहीं टूटी. धड़कते दिल से आशना ने आँखें बंद कर रखी थी और वीरेंदर की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करने लगी लेकिन वीरेंदर तो अभी भी गहरी नींद मैं था. आशना ने अपनी टाँग उठा कर वीरेंदर के पेट पर रखी और उसे दबा दिया. 

वीरेंदर की नींद अचानक टूटी और आशना के चेहरे पर उसकी नज़र सबसे पहले पड़ी. आशना के बदन को चद्दर मे लिपटा देख कर वीरेंदर के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. आशना के दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. उसने चोर नज़रों से वीरेंदर को जागते हुए देख लिया था. वीरेंदर ने धीरे से अपना हाथ आशना के बदन से उठाया और फिर आराम से उसकी टाँग अपने पेट से नीचे उतारी. 

बेड से उठकर वीरेंदर सबसे पहले वॉशरूम गया और अपने ब्लॅडर को हल्का करके फिर से बेड की तरफ आ गया. आशना को निसचिंत सोया हुआ पाकर उसने आशना के उपर पड़ी हुई चद्दर को पकड़ा और एक झटके मे उसे खींच दिया. 

आशना को हैरान करने की गर्ज से वीरेंदर ने यह हरकत की लेकिन चद्दर हटते ही वीरेंदर के सामने आशना के जिस्म का जो नज़ारा आया उसे देख कर वीरेंदर की हैरानी का कोई ठिकाना ना रहा. आशना की हँसी छूट गयी और वो उठ कर बेड पर बैठ कर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी. 

वीरेंदर ने अपने सर के पीछे की तरफ अपना हाथ मार कर कहा: मैं तो सच मे बहुत ही बुद्धू हूँ यार, हर बार मेरा पोपट हो जाता है. 

आशना ने मदहोशी भरी आँखो से वीरेंदर की तरफ देखा और बोली: आपके पोपट ने तो मुझे आपकी गुलाम बना दिया है. 

वीरेंदर अभी भी बिल्कुल नंगा था. आशना की मदहोश आवाज़ सुनकर उसने एक झटका खाया. आशना ने झट से डॉगी पोज़िशन ले ली और वीरेंदर की तरफ अपना चेहरा घूमाकर बोली: कम आंड टेक युवर गिफ्ट माइ मॅन. 

वीरेंदर के बदन मे खून का परवाह अचानक तेज़ हो गया. आशना की मांसल लहराती हुई गान्ड उसकी आँखो के समये एक छोटी सी स्कर्ट और पैंटी से धकि उसे अपनी तरफ आमंत्रित कर रही थी. वीरेंदर झट से बिस्तर पर आ गया और एक झटके मे उसकी पैंटी और स्कर्ट उसके घुटनों पर कर दी. आशना ने एक एक करके उसे अपनी टाँगो से निकाला और फिर से डॉगी पोज़िशन मे आकर वीरेंदर की नज़रों के सामने अपनी गान्ड को लहराने लगी. 

वीरेंदर की लिए यह मंज़र बहुत ही सुखदायक था. आशना के पीछे घुटनों के बल बैठ कर उसने अपने लिंग को हाथ मे लिया और उसे आशना की योनि से भिड़ा दिया. 

आशना के गले से एक आह निकली. अभी आशना पूरी तरह से संतुलित भी नहीं हो पाई थी कि वीरेंदर ने अपने हाथ आशना के नितंब पर कसकर एक ज़ोरदार प्रहार कर दिया. खच्छक से वीरेंदर का लिंग आधे से ज़्यादा आशना की गहराई मे उतर गया. आशना ने अपनी कमर को नीचे की तरफ करके अपने सर को उपर की तरफ उठा लिया. 
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02-02-2019, 01:12 AM,
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वीरेंदर ने ताबड़तोड़ धक्कों के साथ अपने पुर लिंग को आशना की योनि मे उतार दिया. इस बार वीरेंदर ने वाइल्ड रूप इकतियार कर लिया और बिना रुके ताबड़तोड़ धक्कों के साथ आशना की योनि का मंथन करने लगा. आशना के गले से आवाज़ निकलना बंद हो चुका था. वो बिना किसी आवाज़ के अपने होंठ हिलाए जा रही थी. करीब 10 मिनट की तबाद तोड़ चुदाई के बाद आशना और वीरेंदर सखलित हुए. 

वीरेंदर ने आशना की कमर को कस कर पकड़े हुए अपने लिंग से सारा लावा आशना की कोख मे उगल दिया और इस ज़ोरदार चुदाई से आशना बहाल हो उठी. जैसे ही आशना आगे की तरफ गिरी, वीरेंदर भी उसके साथ उसके उपर गिर पड़ा जिसे से वीरेंदर का लिंग और भी गहराई मे उतर गया . निढाल होकर दोनो बेड पर पड़े रहे. 

कल रात से पहली बार ऐसा हुआ कि वीरेंदर का लिंग सिकुड कर आशना की योनि से बाहर निकल गया जिस कारण आशना को एक अपने अंदर ख़ालीपन का अहसास हुआ. आशना के जिस्म से उतार कर वीरेंदर एक तरफ गिर पड़ा और आशना की तरफ देख कर बोला: तुम ठीक तो हो???

आशना ने मुस्कुरा कर उसे बस होंठ हिलाकर एक किस दी और अपनी आँखें बंद कर ली. दोपहर करीब 11:00 बजे दोनो की नींद खुली जब वीरेंदर के सेल पर एक कॉल आई. वीरेंदर ने कॉल पिक की और थोड़ी देर सामने वाले की बात सुनकर बोला: आइ विल कॉल यू लेटर. 

आशना ने सवालिया नज़रों से वीरेंदर की तरफ देखा. 

वीरेंदर: विल टेल यू लेटर, फर्स्ट आइ हॅव टू गो टू रिलीव माइसेल्फ. 

आशना: पहले एक बात का जवाब दीजिए. 

वीरेंदर: बोलिए. 

आशना(मासूमियत से): क्या आपको मेरा दूसरा गिफ्ट पसंद नहीं है क्या????

वीरेंदर: व्हाट??????

आशना: तो फिर आपने दूसरा गिफ्ट लिया क्यूँ नही?????

वीरेंदर: शादी की पहली रात के लिए संभाल रखा है. आख़िर हनीमून पर भी एक ब्रांड न्यू गिफ्ट तो बनता ही है. तब तक इस फटे हुए गिफ्ट से ही काम चलाउन्गा. 

यह कहकर वीरेंदर वॉशरूम की तरफ भागा. 

आशना उसे मारने के लिए उसके पीछे दौड़ी लेकिन उस से पहले वीरेंदर वॉशरूम मे घुस चुका था. 

आशना: बदतमीज़्ज़्ज़्ज़.......... . देख लेना बच्चू अब तो शादी के बाद भी तरसते रह जाओगे. 

वीरेंदर: नो टेन्षन बेब, मैं तुम्हारी कमज़ोरी जान गया हूँ. मेरे हाथ लगते ही तुम पागल हो जाती हो. देखता हूँ कब तक बचोगी. 

आशना के होंठ मुस्कुरा उठे हैं लेकिन झूठा गुस्सा दिखाते हुए वो बोलती है: बेशरम कहीं के, जाओ मैं आपसे बात नहीं करती.

वीरेंदर वॉशरूम से गुनगुनाने लगा: तू लड़की पपपा, मैं लड़का पपप्पा. हम दोनो मिले पपपप्प्पाााआआअ. 

वीरेंदर का गाना सुनकर आशना की हँसी छूट गयी.

फ्रेश होकर आशना ने ब्रेकफास्ट तैयार कर दिया( वीरेंदर रात को ही ब्रेकफास्ट का समान ले आया था). 

ब्रेकफास्ट के बाद वीरेंदर आशना से बोला: आशना, मुझे तुम से एक ज़रूरी बात करनी है. 

कल रात से पहली बार वीरेंदर के मुँह से "आशना" नाम सुनकर आशना ने नज़रें उठा कर वीरेंदर की तरफ देखा. 

वीरेंदर ने उसकी आँखो मे उठ रहे सवाल को पड़ते हुए कहा: "गुड़िया" सिर्फ़ रात को बिस्तर पर. 

बेडरूम से बाहर तुम आशना और मैं वीरेंदर. 

आशना ने नज़रें झुककर कहा: जी भैया और ज़ोर से हंस दी. 

वीरेंदर भी उसकी इस हरकत पर हंस दिया. 

वीरेंदर: गुड़िया ज़रा यहाँ मेरी गोद मे आकर बैठो तुमसे एक ज़रूरी काम है. 

आशना: मैं जानती हूँ कि आपको क्या काम है लेकिन मैं अभी फ्री नहीं हूँ. 

वीरेंदर: ओह हो तो अब पॉइंटमेंट लेनी पड़ेगी????

आशना: जी हां और मिन्नतें भी करनी पड़ेगी. 

वीरेंदर: यह लो हाथ जोड़ कर तुमसे आग्रह करता हूँ कि मेरे पास आओ गुड़िया. 

वीरेंदर के ऐसा करने से आशना झट से अपनी जगह से खड़ी हुई और वीरेंदर की गोद मे बैठ कर उस से चिपक गयी. 

आशना: प्लीज़ ऐसा मत कीजिए, मैं तो मज़ाक कर रही थी. 

वीरेंदर: यह लो, हो गया ना सेम पिंच. 

आशना(हैरानी से): मतलब????

वीरेंदर: मतलब यह कि मैं भी तो मज़ाक कर रहा था. तुम्हे अपनी गोद मैं बिठाना तो मेरे लिए दो मिनट का काम है भला इस काम के लिए मिन्नतें क्या करनी. 

आशना ने बुरा सा मुँह बनाते हुए वीरेंदर की पीठ पर मुक्का मारा और बोली: आप बहुत सताते हो मुझे. 

आशना को अपने गले से अलग कर कर वीरेंदर ने उसकी आँखो मे देख कर बोला: आशना मैं तुम से कुछ शेयर करना चाहता हूँ. वीरेंदर का संजीदा रूप देख कर आशना के दिल की धड़कने बढ़ गयी. 

आशना: क्या बात है वीरेंदर, बताइए आप मुझसे क्या कहना चाहते हो?

वीरेंदर(आशना की आँखो मे देखते हुए): समझ नहीं आ रहा कि कहाँ से शुरू करूँ???

आशना: आप शुरू से शुरू कीजिए जानू, मैं आपके दिल की हर बात सुनना चाहती हूँ.

वीरेंदर ने चेहरे पर कठोरता लाते हुआ कहा: जानती हो हमारा रिश्ता शायद नियती की उपज नहीं बल्कि यह एक सोची समझी साज़िश का नतीजा है.

इतना सुनते ही आशना की आँखो के आगे अंधेरा छा गया. वीरेंदर ने आशना को कंधे से पकड़ा और उसे अपने सीने से चिपकाते हुए बोला " आज हम जिस अटूट रिश्ते में बँधे हैं उस रिश्ते को अंजाम देने का सिलसिला काफ़ी पहले शुरू हो गया था और इसे अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि हमारा ही वफ़ादार नौकर बिहारी है".
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02-02-2019, 01:12 AM,
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आशना ने झट से अपना चेहरा वीरेंदर की तरफ करके उसकी आँखों मे देखा और बोली: तो क्या आप मुझसे रिश्ता नहीं जोड़ना चाहते थे????

वीरेंदर(आशना की आँखों मे देखते हुए): मैं मानता हूँ कि कल रात हमारे बीच जो कुछ हुआ वो हम दोनो की मर्ज़ी से हुआ और अगर यह सब ना होता तो ना तो मैं चैन से जी पाता और ना तुम ही कहीं खुश रह पाती.

आशना के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गयी. 

आशना: तो फिर यह सब बाते करने से क्या फ़ायदा?

वीरेंदर: सच ही कहा है किसी महापुरुष ने. 

आशना ने मुस्कुराते हुए वीरेंदर की तरफ सवालिया नज़रों से देखा. 

वीरेंदर: यही कि लड़कियों की अकल घुटनो मे होती है. 

आशना ने बुरा सा मुँह बनाकर वीरेंदर की तरफ देखा और बोली: तो आपके कहने का मतलब यह है कि मैं दिमाग़ से नहीं सोचती. 

वीरेंदर: मैने तो लड़कियों के लिए कहा था यार तुम तो मेरी होने वाली बीवी हो. 

आशना: अच्छा??? अब बात तो पलटो मत और बताओ कि यह सब आपको कैसे पता और बिहारी काका ने ऐसा क्यूँ किया?

वीरेंदर: सारा सच तो मैं भी नहीं जानता, जितना जानता हूँ वो मैं तुम्हे बता दूँगा, लेकिन सबसे पहले तुम यह बताओ कि तुम्हारे डॉक्युमेंट्स और आइडी कार्ड्स तुमने कहाँ रखे हैं. 

आशना के बदन मे एक दम से एक सिहरन दौड़ गयी वीरेंदर के इस सवाल से. 

आशना: वो तो मिसप्लेस हो गये है. पता नहीं लेकिन जब मैं शर्मा निवास मे पहली बार आपके साथ आई थी उसके बाद से वो डॉक्युमेंट्स मुझे मिले ही नहीं. 

वीरेंदर: क्यूंकी वो सब बिहारी ने चुरा लिए थे. 

आशना एकदम से चौंक कर वीरेंदर की तरफ देखती है. 

आशना: बिहारी काका ने चुराए थे???लेकिन क्यूँ????

वीरेंदर: बताता हूँ पहले आराम से बैठ जाओ. 

आशना ने वीरेंदर के साथ वाली कुर्सी को सरका कर वीरेंदर के सामने किया और उस पर बैठ गयी. वीरेंदर ने भी अपना रुख़ आशना की तरफ किया. 

आशना: लेकिन यह सब अगर आप को पता था तो आपने उन्हे पूछा क्यूँ नहीं??

वीरेंदर: यह सब तो मुझे उस रात पता लगा जिस रात तुम मुझे मेरे कमरे मे सोता हुआ छोड़ कर अपने कमरे मे चली गयी थी. याद है ना तुम्हे वो रात जब हम लॉन मे बैठे थे और तुम त्रिवेणी से फोन पर बात कर रही थी.

आशना को जब उस रात की याद आई तो वो बोली: आप एकदम घोड़े बेच कर सो रहे थे तो आपको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा. अगर आप उस दिन नींद मे नहीं होते तो मैं तो उस दिन ही आपसे मिलन के लिए बेकरार हो उठी थी. 

वीरेंदर: उस दिन मैं नींद मे था और तुम बेकरार थी, उसका भी एक कारण है. मैं तुम्हे शुरू से सब बताता हूँ. 

आशना, कन्फ्यूज़्ड सी वीरेंदर की तरफ देख रही थी. 

वीरेंदर: उस रात जब तुम अपने रूम मे चली गयी तो कुछ देर बाद अचानक से मेरी नींद खुली. आक्च्युयली मुझे रात को सोते हुए कपड़े पहन कर सोने की आदत नहीं है. घुटन होने के कारण मेरी नींद खुली तो मैं पसीने से भीगा हुआ था. पानी पीने की इच्छा हुई तो देखा कि जग मे पानी ही नहीं है. पहले तो मैने बिना पानी पिए ही सोने का फ़ैसला कर लिया लेकिन गला एकदम सूख चुका था तो जग लेकर नीचे किचन की तरफ आ गया. 

किचन के पास पहुँच कर देखा कि रागिनी के कमरे का दरवाज़ा आधा खुला है और लाइट भी जल रही थी. मैं उस तरफ बढ़ा लेकिन फिर ना जाने क्या सोच कर वापिस मुड़ने ही वाला था कि मुझे उसके कमरे से सिसकने की आवाज़ आई. मैं अनायास ही उसके कमरे की तरफ बढ़ गया. कमरे तक पहुँचते पहुँचते मैं समझ गया था कि रागिनी की सिसकियों की वजह क्या थी. 

आशना ने सवालिया निगाहों से वीरेंदर को देखा. शायद अंदाज़ा वो भी लगा चुकी थी मगर वो यह सब वीरेंदर के मुँह से सुनना चाहती थी. 

वीरेंदर: हल्के कदमों से कमरे के दरवाज़े के पास जाकर देखा तो जो नज़ारा देखा उसे देख कर तो मेरे होश ही उड़ गये. रागिनी बिल्कुल नग्न अवस्था मे किसी आदमी के नीचे पड़ी हुई थी और वो आदमी उसपे सवार होकर उसे रौंद रहा था. तभी अचानक रागिनी की हल्की सी नज़र दरवाज़े पर पड़ी तो मैं झट से वहाँ से भागा. 

पकड़े जाने के डर से मैं पास पड़े सोफे के पीछे जाकर छुप गया जहाँ से वो मुझे नहीं देख सकते थे. 

आशना: लेकिन वो आदमी कॉन था?

वीरेंदर ने उसके सवाल को अनसुना करते हुए कहा: थोड़ी देर तक कोई कमरे से बाहर ना निकला मगर उसके बाद रागिनी की सिसकियाँ तो बंद हो गयी लेकिन उस आदमी और रागिनी की आवाज़ें आना शुरू हो गयी. जिस जगह पर मैं था वहाँ से दोनो को सॉफ नहीं सुन सकता था. 

आशना: आख़िर कॉन था वो आदमी? 

वीरेंदर ने आशना की आँखों मे देखा और फिर चेहरे पर गुस्से के भाव लाते हुए कहा: "बिहारी काका". 

आशना: व्हाट?????ल.....लेक......लेकिन काका अपनी ही भतीजी के साथ यह सब???? ओह माइ गॉड. यह कह कर आशना ने अपने मुँह पर हाथ रख लिया.

वीरेंदर: भतीजी नहीं बल्कि रागिनी, बिहारी की बीवी है. 

इस बार आशना की आँखें फटी की फटी रह गयी. अपने सिर पर हाथ रख कर उसने कहा: यह सब क्या हो रहा है वीर, मैं पागल हो रही हूँ, मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा. 

वीरेंदर: अभी कुछ मत सोचो बस सुनती जाओ. 

आशना ने लंबी लंबी साँसें लेकर अपने आप को नॉर्मल करने की कोशिश की.

वीरेंदर: कुछ ही देर मे मुझे रागिनी और बिहारी के झगड़ने की आवाज़ सॉफ आने लगी. वजह क्या थी मैं नहीं जानता था लेकिन वो दोनो ही एक दूसरे पर ऐसे गरज रहे थे जैसे वो एक दूसरे से काफ़ी नाराज़ हो. हिम्मत करके मैं फिर से उनके कमरे के पास पहुँचा और दरवाज़े की आड़ मे खड़ा होकर उनकी बातें और ध्यान से सुनने लगा.

आशना: आख़िर यह सब हो क्या रहा है??
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02-02-2019, 01:13 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
वीरेंदर ने अपने होंठो पर उंगली रख कर आशना को शांत रहने का इशारा किया. 

वीरेंदर: काफ़ी देर तक मैं उनकी बहस सुनता रहा और उन बातों से जो निचोड़ निकला वो यह था कि बीना आंटी ने ही रागिनी की शादी बिहारी काका से करवाई थी और फिर बिहारी, रागिनी की मदद से मुझे फसा कर प्रॉपर्टी के काग़ज़ अपने नाम पर करवाना चाहता था. 

आशना: डॉक्टर. बीना?? लेकिन वो तो मुझे फोर्स करती थी कि मैं तुम्हे अपनी सच्चाई ना बताऊ और बातों ही बातों मे वो मुझे तुमसे संबंध बनाने के लिए भी एनकरेज करती थी. हालाँकि वो जानती थी कि आप मेरे भाई हो लेकिन उन्होने ही मुझे अपना राज़ आपके सामने खोलने से मना किया था क्यूंकी आप शायद इस बात से और परेशान हो जाते जिस से आपकी सेहत को नुकसान पहुँचता. 

वीरेंदर: तो मेरा शक सही निकला??

आशना: शक???कैसा शक???

वीरेंदर: यही कि बिहारी जैसा आदमी इतनी बड़ी प्लॅनिंग नहीं कर सकता. बीना पर तो हम बाद मे डिसकस करेंगे पहले मैं तुम्हे बता दूं कि उसी बहस में बिहारी के मुँह से यह बात निकली कि अगर रागिनी उसका साथ नहीं भी देती है तो उसके पास कुछ ऐसे सबूत हैं जिस से वो तुम्हे ब्लॅकमेल करके प्रॉपर्टी के पेपर्स पर साइन करवा सकता था. 

आशना: सबूत???? और भला पेपर्स पर मेरे साइन करने से क्या हो जाता???

वीरेंदर: क्यूंकी बीना के कहने पर मैने अपनी सारी प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दी थी. उसने मेरे आगे शर्त रखी थी कि अगर मैं तुम्हे यूज़ करके छोड़ दूं और तुमसे शादी ना करूँ तो................ 

आशना: शी बिच??? अच्छा हुआ वो कमीनी मर ही गयी. प्रिया ने कहा भी था कि बीना बिच है(प्रिया, आशना की बॅंगलॉर वाली एयिर्हसटेस्स फ्रेंड). उसे तो पहले ही दिन से बीना पर शक हो गया था जब मैने उसे बीना के बारे मे बताया था. 

वीरेंदर: यह सब मिली भगत बिहारी और बीना की थी तभी तो बिहारी को यह बात पता थी कि मैने प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दी है जबकि मुझे, बीना और आड्वोकेट के अलावा यह राज़ किसी और को पता ही नहीं था. 

आशना: बिहारी के पास ऐसे कॉन से सबूत थे जो वो मेरे खिलाफ इस्तेमाल कर सकता था?

वीरेंदर: उसकी बात सुनकर तो मुझे भी बड़ी हैरानी हुई थी. जैसे ही बिहारी ने यह बात कही मैं दौड़ता हुआ उसके कमरे मे घुसा क्यूंकी उस वक्त तक तो मैं भी तुम्हारी असलियत नहीं जानता था तो एक पल के लिए मुझे तुमपर भी शक हुआ. 

आशना ने आँखो की स्वीकृति से जताया कि " आइ कॅन अंडरस्टॅंड". 

वीरेंदर: बिहारी के कमरे मैं जाकर मैने हर कोना छान मारा लेकिन वहाँ कुछ ना मिला. निराश होकर मैं जैसे ही अलमारी की तरफ बढ़ा तो वो लॉक थी. एक कपड़ों की अलमारी को लॉक्ड पाकर मुझे कुछ शक हुआ. 

वीरेंदर: बिहारी की एक अच्छी आदत यह है कि वो सारी चाबियाँ अपने कमरे मे लगी एक हुक मे टाँग कर रखता है और उसकी यही आदत उसके लिए मुसीबत बन गयी. मैने झट से अलमारी की चाबी लेकर अलमारी खोली और फिर अलमारी मे बने सेफ को खोला तो वहाँ मुझे एक सिम कार्ड, कुछ मेमोरी कार्ड्स और एक पाउच मिला. जैसे ही मैने पाउच खोला उनके अंदर के डॉक्युमेंट्स देख कर मैं हडबडा गया. 

तुम्हारी असलियत मेरे सामने ज़ाहिर करने के लिए वो डॉक्युमेंट्स काफ़ी थे मगर मेरे दिल ने फिर भी इस बात पर यकीन नहीं किया. मेरा दिल यह मानने को तैयार नहीं था कि तुम मुझे धोखा दे सकती हो. 

किसी और का धोखा तो मैं बर्दास्त भी कर लूँ मगर मेरी आशना मुझे धोखा दे यह बर्दाश्त कर पाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था. मेरा सर चकराने लगा, दिमाग़ फटने लगा लेकिन मेरे दिल ने मुझे भरोसा दिलाया कि इस सब के पीछे तुम्हारा कोई स्वार्थ नहीं बल्कि एक त्याग था जो तुमने मेरी जान बचाने के लिए किया था. सच ही तो था मेरे दिल का कहना, भला कॉन इंसान किसी के लिए इतना सब कुछ करता है?

आशना ने झट से वीरेंदर के होंठों पर अपना हाथ रख दिया और नम आँखों से उसे कुछ ना कहने का इशारा किया. 

वीरेंदर: मैं जानता हूँ जिस वक्त तुम्हे मेरे सहारे की ज़रूरत थी उस वक्त मैं तुम्हारा हाथ ना थाम सका बल्कि उस घटना से मैं खुद इतना गर्दिश मे डूबा था कि तुम्हारी हालत समझ ना सका. 

आशना(वीरेंदर के हाथ पर हाथ रखते हुए): उस वक्त मैं भी तुम्हारी हालत समझने के काबिल नहीं थी लेकिन आज तुम्हारी हर सोच हर धड़कन को पढ़ सकती हूँ और मुझे गरूर है कि तुम मेरे जीवन साथी हो. समर्पण की जो भावना मैने तुम्हारे संपर्क मे आकर सीखी है वो मैं शायद ही कभी सीख पाती या समझ पाती मगर तुम्हारी चाहत और तुम्हारे प्यार ने तो मेरे जीने का अंदाज़ ही बदल दिया है वीर. 

वीरेंदर ने अपना सर आशना के कंधे पर रख दिया और बोला.

वीरेंदर: उस रात मैं काफ़ी परेशान हो गया था. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो गया. आख़िर ज़िंदगी ने यह दिन क्यूँ दिखाया लेकिन फिर एकदम से मन मे ख़याल आया कि अगर तुम मेरी ज़िंदगी मे ना आती तो शायद आज मैं ज़िंदा ही ना..............
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02-02-2019, 01:14 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
इस से पहले कि वीरेंदर अपनी बात पूरी कर पाता, आशना ने अपने होंठ उसके होंठों पर रखकर उसकी आवाज़ दबा दी. वीरेंदर ने भी आशना की कमर मे हाथ डालकर उसका सहयोग किया और दोनो एक दूसरे के होंठों का रस चूसने लगे. 

थोड़ी देर बाद जब दोनो के होंठ अलग हुए तो आशना ने वीरेंदर को गले लगाते हुए कहा "आइ लव यू मोर दॅन एनितिंग इन माइ लाइफ वीर, यू आर माइ पॅशन. यू आर दा फर्स्ट मॅन इन माइ लाइफ हू गिव्स थ्रिल टू माइ बॉडी, माइ सौल". 

वीरेंदर: माइ फीलिंग आर नो डिफरेंट दॅन यू. ई स्टिल अडॉर दा फर्स्ट टच ऑफ यू आंड नाउ यू आर कंप्लीट्ली माइन बट स्टिल आइ लॉंगंग्ड फॉर मोर ऑफ यू. 

यह बात कहते हुए वीरेंदर का हाथ आशना के नितंब पर घूमने लगा. वीरेंदर के फेतेरिक टच से आशना भी पिघलने लगी.

आशना: मुझे लगता है कि आपका मूड कुछ शरारत करने को हो रहा है. 

वीरेंदर: शरारत? कैसी शरारत? मैं तो बिल्कुल कूल मोड़ मे हूँ. 

आशना:अच्छा??? तो फिर आपके हाथ गुस्ताख़ी क्यूँ कर रहे हैं. 

यह कहकर आशना वीरेंदर से डोर भागने लगी लेकिन दो कदम पीछे हटते ही उसकी योनि मे पीड़ा की एक लहर उठी और आशना वहीं दोहरी हो गयी. 

आशना: आउच. 

वीरेंदर झट से उसके पास जाकर बैठ जाता है. वीरेंदर के चेहरे पर परेशानी के भाव सॉफ देखे जा सकते थे. 

वीरेंदर: क्या हुआ? पैर मे मोच आ गयी क्या? दिखाओ, मुझे दिखाओ. 

आशना, वीरेंदर की बातों से शरमा जाती है. आशना के चेहरे के बदलते रंग को देखकर वीरेंदर हैरान हो जाता है. उसे कुछ समझ नहीं आता. 

वीरेंदर: मुझे बताओगी अब इस मे शरमाने वाली क्या बात है?

आशना खामोश रही. 

वीरेंदर: कम ऑन, टेल मी. 

आशना, वीरेंदर की आँखों मे देखती है और फिर नज़रें झुकाकर बोलती है:आपका ही दिया हुआ दर्द है वीर. आप नहीं समझोगे तो कॉन समझेगा?

वीरेंदर एकदम से सारी बात समझ जाता है. 

वीरेंदर: अभी तक दर्द है? लेकिन सुबह तो तुम बिल्कुल ठीक चल रही थी? 

आशना: पता नहीं अंदर कितने ज़ख़्म कर दिया है. अगर आपके साथ ऐसा होता ना तो आपको पता चलता. 

वीरेंदर: वैसे आइडिया अच्छा है. एक काम करो, एक मोमबत्ती लेकर मेरे भी अंदर घुसा दो ताकि मुझे भी तुम्हारे दर्द का अहसास हो सके. 

वीरेंदर की बात सुनकर आशना शरमा गयी और वीरेंदर हँसने लगा. 

आशना ने सम्भल कर उठते हुए अपने कपड़े झाडे और पैर पटकते हुए किचन मे जाने लगी. 

आशना को जाता हुआ देख कर वीरेंदर उसके नितंबो की थिरकन मे खो गया. जैसे ही आशना किचन मे घुसी और वीरेंदर की आँखों से मनमोहक दृश्य लुप्त हुआ वो ज़मीन से उठा और चिल्लाकर बोला: अगर ज़्यादा दर्द हो तो आज पीछे का महूरत करें?

आशना हाथ मे बेलन लेकर वीरेंदर पर झपटी लेकिन अचानक से उसे अपनी हालत का आभास होते ही वो एकदम रुक गयी. वीरेंदर हंसते हुए बाहर निकला गया. 

आशना किचन मैं काम कर रही थी जब उसे अपने नितंब पर हल्का सा दबाव महसूस हुआ. उसने झट से पीछे मुड़कर देखा तो वीरेंदर उसके पीछे खड़ा था. आशना ने नीचे की तरफ देखा तो वीरेंदर ने अपने लिंग को पॅंट से बाहर निकाल रखा था और उसे आशना के नितंब पर रगड़ रहा था. आशना के चहरे पर हैरानी और शरम के मिले झूले भाव आने लगे. 

आशना: क्या है यह सब? 

वीरेंदर: वोही तो मैं जानना चाहता हूँ कि क्या है यह सब? तुम्हारा पति बेचारा तड़प रहा है और तुम हो कि उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दे रही. 

आशना: मेरे श्रीमान जी, अगर खाना नहीं बना तो आप भूक के मारे तड़पोगे. भला बीवी के होते हुए पति भूखा रहे यह कहाँ का इंसाफ़ हुआ?.

वीरेंदर: तुम्हारे साथ तो पेट की भूख का अहसास ही नहीं होता बस जिस्मानी भूख हावी हो जाती है.

आशना: थोड़ा बहुत प्यार बुडापे के लिए भी बचा कर रखिए जनाब. सारा प्यार अभी जवानी मे लूटा देंगे तो बुडापे मे क्या करेंगे आप. 

वीरेंदर: बुढ़ापे का अभी से क्या सोचना. अभी तो जवानी खर्च करना शुरू की है और यह कहकर वो आशना को अपने कंधे पर उठाकर रूम मे ले जाने लगा. 
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02-02-2019, 01:14 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
आशना छटपटाती रही लेकिन वीरेंदर के आगे उसकी एक ना चली. आशना को बिस्तर पर लिटाकर वीरेंदर ने अपनी पॅंट उतारी और आशना पर कूद पड़ा. 

आशना: क्या खाते हैं आप वीर, जो हमेशा इस कदर बैचैन रहते हैं?

वीरेंदर: खाने को थोड़ी देर साइड मे ही रखो और जल्दी से मुझे दूध पिला दो, बहुत भूख लगी है. 

आशना ने शरमाकर अपने चेहरे पर हाथ रख लिया. 

वीरेंदर: हे भगवान यह लड़की कितना शरमाती है. लगता है मुझे खुद ही मेहनत करनी पड़ेगी. 

आशना ने झट से अपने हाथ चेहरे से हटा लिए. 

आशना: अच्छा बाबा रुकिये, प्लीज़ पहले दरवाज़ा बंद कर दीजिए. 

वीरेंदर: मैं दरवाज़ा बंद करने जाउन्गा तो तुम वॉशरूम मे घुस जाओगी. मुझे उल्लू समझ रखा है क्या? 

आशना: उल्लू??? आप तो पूरे घोड़े हो घोड़े. किस तरह से मुझ बेचारी पर ज़ुल्म ढा रहे हो. अगर मेरी जगह कोई और होती तो सुहागरात पर ही तलाक़ दे देती. 

वीरेंदर: तलाक़? तलाक़ क्यूँ? 

आशना: क्यूंकी अगर मेरी जगह कोई और होती तो मैं उसे एक पल भी चैन से जीने नहीं देती और वो बेचारी तो डर के मारे तलाक़ देने मे ही बेहतरी समझती. 

आशण की बात ख़तम होते ही दोनो की नज़रें आपस मे मिली और आशना मुस्कुरा दी.

वीरेंदर: नखरे दिखाती है मुझे. ठहर तू, अभी दिखाता हूँ मुझे तड़पने की क्या सज़ा देता हूँ. 
वीरेंदर आशना पर टूट पड़ता है और आशना अपनी बाहों का हार उसकी कमर मे पिरोकर अपने प्यार का आहवान करती है. 

प्रेमी युगल के बीच प्रेम-द्वंद्व परवान चढ़ने लगता है और फिर जल्द ही आशना के हलक से एक आनंदकारी चीख निकलती है जो इस बात का प्रमाण थी कि अपने जीवन साथी को उसने अपने जिस्म मे समेट लिया है. वीरेंदर ने अपने होंठ आशना के दुग्ध कलशो से लगाकर अपनी दूध पीने की इच्छा को जताते हुए उन्हे ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. वीरेंदर की इस हरकत से आशना के दिल मे एक टीस उठी कि काश "एक बूँद भी निकल जाय तो मेरे प्रेमी को मेरे आगोश मे स्वर्ग का आनंद आ जाए"

कुछ देर आराम करने के बाद, आशना वीरेंदर की छाती से सर उठाते हुए बोलती है- ओह गॉड कितना लेट कर दिया आपने, अभी लंच भी तैयार करना है. चलिए उठिए और मेरी हेल्प कीजिए. 

आशना जैसे ही उठने को उपर होती है, वीरेंदर उसकी बाज़ू पकड़ कर उसे अपने साथ लिटा देता है. 

वीरेंदर: यार, जब देखो तुम खाने की ही बातें करती रहती हो. 

आशना: श्रीमान जी अगर खाओगे नहीं तो मुझे प्यार करने की एनर्जी कहाँ से लाओगे?

वीरेंदर: ऐसा क्या? 

आशना: जी हां, बिल्कुल ऐसा ही है. अब शरारत छोड़िए और मुझे किचन मे हेल्प कीजिए. 

वीरेंदर: लेकिन जो थोड़ी बहुत एनर्जी बची है पहले वो तो ख़तम कर लूँ. 

यह कहकर वीरेंदर आशना पर एक बार फिर से सवार हो गया और आशना छटपटाती रही. 

वीरेंदर के बाहुबल के आगे उसकी एक ना चली और एक बार फिर से आशना की कोख को अपने प्यार से सराबोर कर वीरेंदर ने उसे बाहों मे कस लिया. 

साँसों को नियंत्रित करके वीरेंदर उठा और वॉशरूम चला गया. आशना भी बिस्तर से उठी. उसकी योनि की टीस बढ़ गयी थी लेकिन इस टीस की उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी बल्कि एक हल्का सा गुलाबीपन लिए अद्भुत निखर था जो इस बात का प्रमाण था के उसके पति ने उसे भरपूर सुख दिया है. 

फ्रेश होकर वीरेंदर ने आशना को जल्दी से तैयार होने के लिए कहा. 

वीरेंदर: हम लंच बाहर करेंगे. हमारी श्रीमती जी कुछ दिन किचन नहीं संभालेगी. उसके बाद तो सारी उमर किचन और बच्चों को ही संभालना है. 

आशना ने शरम से आँखें बंद कर ली और मुस्कुराते हुए बोली: हमारे हर अंश को संभालने की ज़िम्मेदारी मेरी और मुझे संभालने की ज़िम्मेदारी आपकी. 

वीरेंदर: तो फिर मुझे कॉन संभालेगा?

आशना: आपको संभालने की नहीं बल्कि संभलने की ज़रूरत है. अभी भी वक्त है संभल जाइए वरना आपकी यह प्यार करने कि फ्रीक्वेन्सी मेरी जान ना निकला दे.

वीरेंदर: अभी से बस कर दी, अभी तो दूसरा गिफ्ट बाकी है. 

आशना ने झट से अपने कपड़े उठाए और वॉशरूम की तरफ तेज़ी से बढ़ चली.

वीरेंदर: हाहहाहा, कब तक बचोगी मेरी जान, धीरे धीरे पूरे करूँगा सारे अरमान. 

वीरेंदर की बात सुनकर, आशना बस मन ही मन मुस्कुरा दी.

थोड़ी देर बाद आशना वॉश रूम से बाहर निकली. आशना ने इस वक्त ग्रीन कलर का टॉप और डार्क ग्रे क्लर की स्ट्रिचबल जींस पहनी हुई थी जो कि उसके बॉडी की लोवर्स कुवर्व्स को और भी निखार रही थी. 

वीरेंदर: हाए जानम, आज पता नहीं कितने दिलों पर छुरियाँ चलने वाली हैं. 

आशना का दिल वीरेंदर की तारीफ से झूम उठा. आशना ने बालों को खुला छोड़ा और वीरेंदर से बोली- चलें? 

वीरेंदर: मंगलसूत्र तो छिप गया लेकिन इस चूड़े का क्या करोगी.?

आशना: वीरेंदर इसी के बारे मे मैं भी सोच रही हूँ. सच पूछो तो इसे उतारने का मेरा बिल्कुल मन नहीं है मगर इसे पहन कर बाहर भी तो नहीं जा सकती. 

वीरेंदर: अरे यार इतनी एमोशनल मत हो. शादी के बाद सारी उमर पहन लेना इसे . 

आशना ने भुजे हुए मन से चूड़ा निकाला. 

आशना(शीशे मे देखते हुए): अब तो कोई भी नहीं पहचान सकता कि मैं शादी शुदा हूँ. 

वीरेंदर: मेडम यह आपकी चंचल आँखों का धोखा है. 

सामने वाला तो आपकी बिगड़ी हुई चाल देख कर ही पहचान लेगा कि लड़की ने सुहागरात तो ताज़ी ताज़ी मनाई है लेकिन शादी शुदा नहीं लगती. 

वीरेंदर की बात सुनकर आशना शरमा दी. 
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02-02-2019, 01:19 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
आशना: जाओ मैं नहीं जाती आपके साथ लंच पर. 

वीरेंदर(हंसते हुए); अरे यार मैं तो मज़ाक कर रहा हूँ. तुम तो एकदम परफ़ेक्ट लग रही हो, डर लग रहा है कहीं कोई मनचला तुम्हे प्रपोज़ ही ना कर दे. 

आशना: मेरा दिल रखने के लिए बोल रहे हो ना यह सब? मैं जानती हूँ मेरी चाल मे थोड़ी लड़खड़ाहट है. इतनी सूजन जो हो गयी है. सिकाई का भी मोका नहीं दिया सुबह से. 

वीरेंदर: तुम चाहो तो मैं अपनी गरम साँसों से इसकी सिकाई किए देता हूँ. 

आशना: जी नहीं, आप चलिए. जिसको जो समझना है समझ ले. बीवी हूँ आपकी मेरी रक्षा करना आपका धरम है. लोगों की नज़रों से अब मुझे क्या डर. आप मेरा कवच बनकर मेरे साथ जो होंगे. 

दोनो घर को लॉक करके, होटेल की तरफ चल देते हैं. वीरेंदर उसे एक 5-स्टार होटेल मे ले जाता है. अंदर एंटर करते ही जो सबसे पहला टेबल खाली दिखा, आशना ने उसपर क़ब्ज़ा कर लिया. वो अपनी टेडी-मेडी चाल के कारण लोगो मे शर्मिंदा नहीं होना चाहती थी. वीरेंदर भी उसके पास बैठ गया. लंच के बाद दोनो मूवी देखने चले गये. 

वीरेंदर: याद है तुम्हे कुछ दिन पहले भी हम मूवी देखने आए थे?

आशना: उस दिन को मैं कैसे भूल सकती हूँ. 

वीरेंदर: क्या आज भी कुछ वैसा करने का इरादा है?

आशना: अगर आपने आज भी लास्ट दोनो रोस की बुकिंग करवा ली है तो आपका यह शौक भी पूरा कर देती हूँ. 

वीरेंदर: तुम हुकुम तो करो जानू, मैं थियेटर ही खरीद लूँ. 

आशना: जी नहीं, मुझे किसी चीज़ की कोई ज़रूरत नहीं है. इस वक्त आपको घर ना लेजाकर मैं यहाँ आपको इस लिए लाई हूँ ताकि हम कुछ देर बात तो कर सके. अकेले मे तो आप बात करने से रहे. अब तो अकेले मे आपसे डर लगने लगा है. पता नहीं क्या हशर कर दो मेरा.

वीरेंदर: ह्म्म्म इंटेलिजेंट. बोलो क्या बात करनी है?

आशना: मुझे सुबह वाली अधूरी बात जाननी है. 

वीरेंदर ने उसे हर वो वाक़या बता दिया जो वो जानता था और आशना ने भी जब उसे हर उस बात से अवगत करवाया जो उसे मालूम थी तो उनके रौगते खड़े हो चुके थे. वो बिहारी और बीना की चाल समझ चुके थे. 

आशना के पूछने पर वीरेंदर ने बताया कि जिस रात उसने आशना के डॉक्युमेंट्स, सिमकार्ड और मेमोरी कार्ड्स बिहारी की अलमारी से निकाले थे उस रात उसने वो मेमोरी कार्ड्स अपने लॅपटॉप पर प्ले करके देखे थे. 

आशना को जब यह पता चला कि बिहारी के बीना के साथ संबंध थे और फिर बिहारी ने रागिनी के साथ मनाई सुहागरात भी रेकॉर्ड कर रखी थी तो उसे बिहारी से घिंन आने लगी. कोई इंसान अपनी पत्नी के साथ ऐसा कैसे कर सकता है. आशना की हैरानी की कोई सीमा ना रही जब वीरेंदर ने उसे बताया कि रागिनी ने आशना की ड्रेस पहन कर आशना का रॉल्प्ले करके बिहारी के साथ सेक्स किया था तो आशना ने वीरेंदर को कस कर जकड लिया. वो थर थर काँपने लगी. वीरेंदर ने उसे आश्वस्त किया कि उसके होते कोई उसे हाथ भी नहीं लगा सकता. 

सबसे चौंका देने वाली बात जो वीरेंदर ने आशना को बताई वो यह थी कि एक मूवी मे बीना-बिहारी सेक्स करते हुए आशना की पॅंटीस की बात कर रहे थे. 

वीरेंदर: उस रात, मैं तुम्हारे कमरे मे आया था और तुम्हे बेसूध पड़ा देखकर तुम्हारी अलमारी से वो पैंटी निकल कर पाउच मे डाल कर दोबारा उसे बिहारी की अलमारी मे रख दिया था ताकि बिहारी जब भी यह पाउच खोले तो उसके दिल मे यह डर बैठ जाए कि उसकी चोरी पकड़ी जा चुकी है. इस बात से वो यह तो जान लेता कि उसके प्लान का भंडा फुट चुका है और उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं बचा जिस से वो तुमपर कोई दबाव डाल सकता. ऐसी सिचुयेशन पर वो मुझ पर सामने से वार करता और. बिहारी आवेश मे आकर कोई कदम उठाता है तो या तो वो कोई ग़लती करता या चुप-चाप घर छोड़ कर भाग जाता. 

इतना सब जान लेने के बाद आशना का सर घूमने लगा. 

आशना- वो पैंटी तो मैने इस लिए संभाल रखी थी क्यूंकी मुँझे लगा कि आप मेरे कमरे मे आते थे और आपने मेरी पॅंटीस......... 

आशना खामोश हो गयी. 

सारी बात वीरेंदर और आशना के सामने सॉफ हो चुकी थी लेकिन अभी बिहारी के गिरेबान मे हाथ डालना मतलब अपने रिश्ते की सच्चाई को दुनिया के सामने नंगा करना हो जाता.

वीरेंदर: अब हमे उसे उसकी हे चाल से मॅट देनी है. 

आशना: मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा वीरेंदर. बिहारी तो आस्तीन का साँप निकला. वो कब से तुम्हारे जिस्म मे ज़हर घोल रहा था और हमे इस बात की भनक भी नहीं हुई. 

वीरेंदर: तुम उसकी चिंता मत करो, मैं सब संभाल लूँगा. बस मेरे साथ बने रहना क्यूंकी तुम्हारे साथ और हॉंसले के बिना मैं कुछ नहीं कर पाउन्गा. इस वक्त हमारे लिए सबसे ज़रूरी बीना के ऐक्सीडेंट के सच का पता लगाना है और साथ ही साथ रागिनी का विश्वास जीतना. 

आशना: आपको क्या लगता है कि बीना का सच मे कत्ल हुआ है? 

वीरेंदर: लगता नहीं बल्कि पूरा यकीन है. मेरा एक डीटेक्टिव दोस्त है. इस केस मे मैं उस से मदद ले रहा हूँ. 

आशना: लेकिन वीरेंदर अगर आपके उस डीटेक्टिव दोस्त को हमारी सच्चाई का पता चल गया तो? 

वीरेंदर: तुम बस देखती जाओ कि मैं क्या करता हूँ. अब जो भी करूँगा मैं करूँगा और बिहारी अपने ही बनाए हुए जाल मे फँस जाएगा. सबसे पहले हमे रागिनी को बिहारी के चंगुल से छुड़ाना होगा और उसे अपने साथ मिलना होगा. आख़िर बिहारी उसका भी तो गुनहगार है और हम से ज़्यादा गहरा सदमा तो उसे लगा होगा बिहारी की सच्चाई जानकर. 

आशना: लेकिन रागिनी तो अपने घर गयी हुई है तो फिर वो बिहारी के चंगुल मे कैसे......?. 

वीरेंदर आशना की तरफ देख कर मुस्कुराया और बोला: तुम्हे अभी भी बिहारी की बात पर यकीन है?

आशना: क्या मतलब?

वीरेंदर: रागिनी कहीं नहीं गयी बल्कि बिहारी ने उसे घर मे ही क़ैद कर रखा है. 

आशना हैरानी से बिहारी की तरफ देखने लगी. 

वीरेंदर: रागिनी को बिहारी ने सर्वेंट्स क्वॉर्टर मे बाँध रखा है. यह बात तो मुझे उसी वक्त पता चल चुकी थी जिस वक्त बिहारी ने हम से झूठ बोला था कि रागिनी अपने घर चली गयी है लेकिन उस वक्त मैं आवेश मे आकर कोई भी कदम उठाता तो पछताने के सिवा कुछ नहीं मिलता. बिहारी ताव मे आकर हमारे रिश्ते को दुनिया वालों के सामने उच्छालने से बाज़ नहीं आता और फिर हमे ज़िंदगी भर मुँह छुपाये फिरना पड़ता. 
जिस रात मुझे बिहारी के कारनामो का पता चला, उसके अगले दिन से ही डीटेक्टिव एजेन्सी का एक आदमी 24 घंटे बिहारी पर नज़र रखे हुए है. वो लगातार मेरे कॉंटॅक्ट मे है और पल पल की जानकारी मुझे दे रहा है. 

आशना, वीरेंदर से लिपट गयी. 

आशना: वीरेंदर मुझे बहुत डर लग रहा है. पता नहीं इस मुसीबत से हम कैसे निकल पाएँगे? बिहारी के खिलाफ सारे सबूत होते हुए भी हम उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते. 

वीरेंदर: उन सबूतो को सामने लाने से पहले हमे बिहारी के दिमाग़ से कुछ सबूत मिटाने होंगे. 

आशना ने चौंक कर वीरेंदर की आँखों मे देखा. 

वीरेंदर: कुछ मत सोचो बस देखती जाओ अपने वीर का कमाल. 

मूवी ख़तम होते ही दोनो घर के लिए निकल पड़े. रात के लिए हल्का सा डिन्नर पॅक करवा कर वो घर पहुँचे.
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02-02-2019, 01:19 AM,
RE: bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी
शाम के 7:30 बज रहे थे. सूरज अपनी लालिमा बिखेरते हुए यमुना मे समा रहा था.टेरेस पर खड़े आशना और वीरेंदर हल्की हल्की ठंडी हवा का लुफ्त ले रहे थे. इस दौरान वीरेंदर के सेल पर मेसेजस लगातार जारी थे. वीरेंदर मेसेज पढ़कर सेल फिर से पॉकेट मे डाल देता. 

आशना: आख़िर यह है कॉन जो आपको बार बार डिस्टर्ब कर रही है?

वीरेंदर ने आशना की तरफ स्माइल करते हुए देखा और बोला: एक ही तो लड़की है मेरी ज़िंदगी मे जिसे पूरा हक है मुझे डिस्टर्ब करने का. उसके अलावा किसी और को इसकी पार्मिशन नहीं. 

आशना: तो फिर यह बार बार आपको मेसेज कॉन कर रहा है?

वीरेंदर: वोही आदमी जो बिहारी की हरकतों पर नज़र रखे हुए है. 

वो मुझे हर सिचुयेशन की खबर दे रहा है. 

आशना: तो इस वक्त रागिनी का क्या हाल है? 

वीरेंदर: अभी कुछ देर पहले बिहारी उसके कमरे मे खाना लेकर गया है. 

आशना(खुशी से): तो इसका मतलब रागिनी ठीक है और बिहारी ने उसके साथ कुछ बुरा नहीं किया.

वीरेंदर: हो सकता है लेकिन मुझे तो इस बात की हैरानी है कि इतना सब होने के बाद भी रागिनी चुप क्यूँ है और अगर चुप ही है तो फिर बिहारी ने उसे वहाँ क्यूँ छुपा रखा है? कुछ तो गड़बड़ है. 

वीरेंदर का तर्क सुनकर, आशना भी कन्फ्यूज़्ड हो गयी. रागिनी ने उनके साथ जो भी किया हो लेकिन आशना ईश्वर से यही प्रार्थना कर रही थी कि वो सुरक्षित हो. 

आशना: अब हमारा पहला कदम क्या होगा? मेरा मतलब के हम वापिस अपने घर कब जाएँगे?

वीरेंदर ने आशना की तरफ देखा और फिर स्माइल करते हुए उसे गले से लगा लिया. 

वीरेंदर: अपने घर तो तुम्हे ले ही जाउन्गा पर पहले हनिमून तो पूरा मना लूँ. 

यह कहकर वीरेंदर ने आशना को कंधे पर उठा लिया और टेरेस से नीचे आने लगा. आशना, वीरेंदर के कंधे पर पड़ी छूटने की भरसक कोशिश कर रही थी मगर वो इस मे सफल ना हो सकी. रूम मे लाकर वीरेंदर ने आशना को बिस्तर पर लिटा दिया. 

आशना: वीर, टाइम तो देखो क्या हो रहा है? आप अपने अरमान डिन्नर के बाद पुर कर लीजिएगा. अभी प्लीज़ छोड़ दीजिए.

वीरेंदर: इस वक्त जो जिस्म की भूख है पहले उसे तो शांत कर लूँ, पेट की भूख तो बाद मे भी ठंडी हो सकती है. वैसे भी हमारी साली साहिबा ने स्पेशल हिदायत दी थी कि खाली पैट प्यार करने से उन्माद ज़्यादा आता है. चलो आज साली साहिबा की बात पर अमल करके देख ही लेते हैं.

आशना: आप उसकी बातों मे कहाँ आ गये. वो तो है ही ऐसी. सेक्स से रिलेटेड तो उस से कोई भी टिप्स ले लो. वो तो जो मन मे आ जाए कह देती है, आप उसकी बात मत सुनो. 

वीरेंदर: अब एक ही तो साली दी है भगवान ने, भला उसकी हिदायत को नज़र-अंदाज़ कैसे कर सकता हूँ. 

आशना: बीवी भी तो एक ही है. इतना सताओगे तो कहीं आपसे डर के भाग ना जाए. 

वीरेंदर: तभी तो उसे अपने साथ कनेक्ट करके रख रहा हूँ कि उसे भागने का मोका ना मिले. 

यह कहकर वीरेंदर आशना पर चढ़ गया. कुछ ही पलों मे फर्श पर कपड़ों का ढेर लग गया था. कमरे मे मदहोश वातावरण अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया था. इस बार वीरेंदर ने बिना किसी औपचारिकता के अपने लिंग को आशना की योनि पर रखा और दबाव बढ़ाते हुए उसमे सामने लगा. 

वीरेंदर ने हैरानी से आशना की तरफ देखा और बोला: होंठों पर तो ना ही रहती है लेकिन अपने वीर के लिए तैयार हरदम रहती हो. 

आशना ने शरमा कर आँखें बंद कर ली और वीरेंदर के इर्द-गिर्द अपनी बाहें कस ली. 

आशना: आपको क्या लगता है, मेरे सीने मे हनिमून को लेकर कोई उमंग नहीं है. 

आशना मे समा जाने के बाद वीरेंदर ने आशना को कुछ वक्त दिया और फिर दोनो मिलकर चल पड़े सेक्स के समुंदर मे गोते लगाने. तूफान काफ़ी देर तक चला और इस बीच आशना ना जाने कितनी बार एक किनारे से दूसरे छोर तक पहुँची. आख़िरकार वीरेंदर ने अपने प्यार की बूँदो से उसके तपते सेहरा को सींचा और फिर उसे बाहों मे लेकर उन पलों की सुनहरी याद मे खो गया. 

डिन्नर के बाद एक बार फिर से प्यार का एक दौर शुरू हुआ. आशना की योनि की टीस उसे और ना मथने की दुहाई देती रही मगर वीरेंदर की छुअन से वो फिर से पागल हो जाती और एक बार फिर से वो नयी उमंग के साथ वीरेंदर के सहयोग मे जुट जाती. सारी रात एक दूसरे की नींद चुराने के बाद अगले दिन वो दोपहर के दो बजे तक सोते रहे. उठते ही प्यार का एक दौर और हुआ और फिर फ्रेश होकर आशना ने खाने के लिए कुछ बना दिया. 

जब तक आशना किचन मे काम मे लगी थी तब तक वीरेंदर ने कुछ ज़रूरी फोन कॉल्स कर ली और आगे के बारे मे सोचते हुए बिहारी से किस तरह निपटना है उसके लिए एक छोटा सा प्लान भी बना लिया. पेट की भूख शांत करने के बाद जिस्म की भूख शांत करने का एक और दौर हुआ और उसके बाद वीरेंदर ने आशना को अपने प्लान की रूप रेखा समझाई. हालाँकि प्लान मे काफ़ी दिक्कतें थी लेकिन बहुत जल्द कुछ ना तो कुछ तो करना ही था. 

इस प्लान से बिहारी को अपने किए की सज़ा भी मिलती और आशना-वीरेंदर की सच्चाई को भी दुनिया के सामने लाने से बचाया जा सकता था. उस शाम उन दोनो ने बिहारी की अलमारी से मिले मेमोरी कार्ड्स मे जो कुछ क़ैद था उसे बड़ी बारीकी से देखा. हर मेमोरी कार्ड मे दफ़न मूवी बिहारी और बीना की रास-लीला की गवाही दे रही थी. हर मूवी मे उन दोनो के बीच वीरेंदर की प्रॉपर्टी को हथियाने का प्लान बनता और फिर उस पर अमल करने के लिए एक नयी साज़िश रची जाती. यह सबूत काफ़ी थे बिहारी को जैल तक पहुँचाने के लिए लेकिन आशना और वीरेंदर के लिए सबसे ज़रूरी अपने बीच बने रिश्ते को दुनिया की नज़रों से बचाना था.
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