Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
02-05-2020, 12:48 PM,
#31
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
हम 60-70 किमी निकल आए थे, भैया ने जो जगह घूमने के लिए बताई थी, वो आने वाली थी…

आगे एक छोटे से गाओं के बाहर सड़क के किनारे चाय नाश्ते की टपरी सी थी, मेने उसके पास पहुँचकर अपनी बाइक रोकी और कुच्छ नाश्ते के लिए पुछा,

वो गरमा-गरम पालक-मेथी के पकोडे तल रहा था..

हमने उससे पकोडे लिए और खाने लगे… उसके बाद एक-एक चाइ ली जो कुच्छ ज़्यादा सही नही लगी.. अब ले ली थी तो पीनी पड़ी…

चाय पीते-2 मेने उस टपरी वाले से उस जगह के बारे में पुछा..
तो उसने बताया कि यहाँ से आधे किमी के बाद अपने ही हाथ पर एक कच्चा पत्तरीला रास्ता आएगा, उसी से वहाँ पहुँचा जा सकता है…

वो जगह रोड से करीब एक फरलॉंग ही अंदर को है…उसे चाय पकोडे के पैसे देकर हम फिर आगे बढ़ गये..

वो जगह वाकई में रोमांटिक थी.. घने उँचे पेड़ों के बीच एक छ्होटी सी झील जैसी थी, जिसका पानी एक सिरे पर स्थित कोई 15-20 फीट उँची पहाड़ियों से निकल रहा था, और झील में जमा हो रहा था… !

ओवरफ्लो होकर झील का पानी सबसे निचले किनारे से निकल कर जंगलों के बीच जा रहा था…

झील के दोनो किनारों पर उसके समानांतर तकरीबन 30-40 मीटर की चौड़ाई के हरी-हरी घास के मैदान थे… कुल मिलाकर प्रेमी जोड़ों के मज़े करने के लिए ये उत्तम जगह थी.

जब हम वहाँ पहुँचे तो दोपहर के 12-12:30 का समय था, इस वजह से और कोई वहाँ नही था, एक-दो जोड़े थे, वो भी निकलने की तैयारी में थे..

मेने बाइक पेड़ों के बीच खड़ी की और अपने बॅग उठाकर झील के किनारे की तरफ चल दिए… दीदी तो उस जगह को देख कर बहुत एक्शिटेड हो रही थी.

वाउ ! छोटू क्या मस्त जगह है यार ! मेरा तो मन कर रहा है, दो-चार दिन यहाँ से हिलू भी ना…

हमने झील के किनारे घास पर अपने बॅग रख दिए और कुच्छ दूर झील के किनारे-2 घूमने लगे…

रंग बिरंगी छोटी-बड़ी मछलिया.. हमें देख कर किनारे से और गहराई को तैरती हुई भाग जाती.. जो झील के साफ नीले पानी में काफ़ी दूर तक दिखाई देती..

वो एक जगह बैठ कर पानी में हाथ डालकर मछलियो से खेलने लगी…
वो कुच्छ देर दीदी के हाथ से दूर भाग जाती.. और एक जगह ठहर कर उसकी ओर देखने लगती, और फिर पुंछ हिला-हिलाकर इधर-उधर भाग लेती…

जुलाइ-अगुस्त के महीने में भी झील का पानी ठंडा था… कुच्छ देर मछलियो से खेलने के बाद दीदी बोली – भाई मेरा तो इसमें नहाने का मान कर रहा है..

मे – लेकिन दीदी हमें तैरना तो आता नही, अगर पानी गहरा हुआ तो..?

वो – लगता तो नही की ज़्यादा गहरा होगा.. चल धीरे-2 आगे बढ़ते हैं.. ज़्यादा अंदर तक नही जाएँगे.. और वो धीरे-2 पानी में उतरने लगी..

मे अभी भी किनारे पर खड़ा उसे पानी के अंदर जाते हुए देख रहा था..
दीदी काफ़ी अंदर तक चली गयी, फिर भी पानी उसके पेट से थोड़ा उपर तक ही था..

मेने कहा दीदी बस यहीं नहा लो, और आयेज मत जाना.. वो बोली- तू भी आजा ना यार ! साथ मे नहाते हैं.. मज़ा आएगा…

मेने कहा – नही तुम ही नहाओ, मे ऐसे ही ठीक हूँ, तो वो वहीं डुबकी लगाने लगी..

अब वो पूरी तरह भीग गयी थी, डुबकी लगाकर जैसे ही वो खड़ी हुई, उसकी झीने से कपड़े की टीशर्ट उसके शरीर से चिपक गयी और उसकी ब्रा साफ-साफ दिखाई देने लगी..

ब्रा से बाहर झलकते हुए उसके अमरूदो की छटा उसकी टीशर्ट से नुमाया हो रही थी..

उसे देखकर मेरा पप्पू भी मन चलाने लगा…मानो कह रहा हो- अरे यार क्या देखता ही रहेगा भेन्चोद ! कूद पड़ तू भी और ले ले मज़े… मौका है…

मे उसके भीगे बदन के मज़े ले ही रहा था कि उसने फिरसे डुबकी लगाई.. इस बार वो कुच्छ देर तक बाहर नही आई..

साफ पानी में उसका शरीर तो दिख रहा था लेकिन वो उपर नही आ रही थी…. मेरे मन में आशंका सी उठने लगी….

आधे मिनिट से भी उपर हो गया फिर भी वो बाहर नही आई तो मुझे कुच्छ गड़बड़ सी लगने लगी…

तभी दीदी झटके से उपर आई और एक लंबी साँस भरके…अपना एक हाथ उपर करके सिर्फ़ छोटू ही बोल पाई और फिरसे अंदर डूबती चली गयी………

मेने इधर उधर नज़र दौड़ाई, शायद कोई मदद करने वाला हो…लेकिन वहाँ दूर दूर तक ना इंसान ना इंसान की जात, कोई भी नही था…

जब कोई और सहारा ना दिखा, तो मेने ले उपर वाले का नाम, आव ना देख ताव.. अपनी टीशर्ट और पाजामा उतार किनारे पर फेंका और पानी में छलान्ग लगा दी…,

मे तेज़ी से दीदी की ओर बढ़ा…! और जैसे ही उसके पास पहुँचा.., झटके से वो उपर आई, और खिल-खिलाकर मेरे सामने पानी में खड़ी होकर हँसने लगी..

यहाँ पानी उसके गले से थोड़ा नीचे था, माने उसके बूब पानी के अंदर थे…
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02-05-2020, 12:48 PM,
#32
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मे डर और झुंझलाहट के मारे काँप रहा था, उसके उपर गुस्सा होते हुए बोला –
दीदी ये क्या हिमाकत है.. पता है मे कितना डर गया था, और तुम्हें मज़ाक सूझ रहा है..

वो – अरे बुद्धू ! मे तो तुझे भी पाने में बुलाने के लिए नाटक कर रही थी… और खिल-खिलाकर हँसते हुए मेरे उपर पानी उछाल कर मुझे भिगोने लगी..

मे – अच्छा ! तुम्हें मस्ती सूझ रही है रूको अभी बताता हूँ, और मे भी हाथों में पानी भर-भर कर उसकी ओर उच्छालने लगा…

वो बोली – अब तो डुबकी लगाएगा या अभी भी नही..? तो मेने भी सोच लिया कि अब इसको अच्छे से मज़ा चखा ही दिया जाए…

सो मेने पानी में डुबकी लगाई और अंदर ही अंदर उसके पीछे पहुँचा, अपना सर उसकी टाँगों के बीच डाला, उसको अपने कंधे पर उठाकर खड़ा हो गया…

पहले तो वो शॉक लगने से चीख पड़ी, फिर मज़ा लेते हुए मेरे कंधे पर बैठी हवा में अपनी बाहें फैला कर याहू…याहू..हूऊ….. करके चिल्लाने लगी..

जंगल के शांत वातावरण में उसकी कोयल जैसी मीठी आवाज़ पेड़ों और पानी के बीच गूँजकर वापस हमारे कानों से टकरा रही थी..

रामा दीदी तो मस्ती में जैसे पागल ही हो उठी.. और ना जाने कब उसने मेरे कंधे पर बैठे हुए ही अपनी टीशर्ट उतार कर किनारे की तरफ उच्छाल दी..

लेकिन वो किनारे से पहले ही पानी में गिरी और बहकर हमसे दूर जाने लगी…

मे उसको कंधे पर उठाए हुए ही पानी में पीछे की तरफ पलट गया.. च्चपाक्क….

कुच्छ देर हम पानी के अंदर डूबे रहे, लेकिन फिर बाहर आते ही वो मेरी पीठ पर सवार हो गयी और मेरे कंधे पर अपने दाँत गढ़ा दिए…

मेरी चीख निकल गयी, मेने अपना हाथ पीछे ले जाकर उसे पकड़ने की कोशिश की,… तो वो हस्ती हुई किसी मछलि की तरह मेरे हाथ से फिसलकर मेरे से दूर जाने लगी..

मे जब उसे पकड़ने के लिए पलटा, तब पता लगा कि वो मात्र ब्रा में ही थी…

उसके उभार किसी टेनिस की बॉल की तरह एकदम गोल-गोल उसके ब्रा में क़ैद मुझे बुला रहे थे, मानो कह रहे हों कि, आजा बेटा….. गांद में दम है तो हमें मसल के दिखा..

मेरी झान्टे सुलग उठी, और मेने खड़े-खड़े ही उसके उपर जंप लगा दी और उसे पानी के अंदर दबोच लिया…

मेरे जंप मारते ही वो भी बचने के लिए पीछे हटी, जिससे मेरे दोनो हाथ उसकी कमर पर जम गये, मेरी उंगलिया उसके लोवर की एलास्टिक में फँस गयी..

उसने जैसे ही पीछे को तैरने के लिए अपने शरीर को झटका दिया, उसका लोवर उतर कर मेरे हाथों में आ गया… अब वो मात्र अपनी ब्रा और पेंटी में थी…

मेने उसके लोवर को हवा में गोल-2 घूमाकर उसको चिढ़ाया, लेकिन उसपर कोई असर नही हुआ, और हँसती हुई अपनी जीब चिढ़ा कर अंगूठा दिखाने लगी..

मे फिर एक बार उसको पकड़ने झपटा, तो वो किसी मछलि की तरह मेरे हाथों से फिसल गयी…

हम दोनो पानी में नहाते हुए अधखेलियाँ कर रहे थे… पानी में तैरती मछलिया भी जैसे हमारे खेल में शामिल हो गयी थी,

और वो भी हमारे आस-पास जमा होकर इधर-से-उधर अपनी पुंछ हिला-हिला कर तैर रही थी…

फिर अचानक दीदी उछल्कर मेरी गोद में आ गई, अपनी पतली-2 लंबी बाहें मेरे गले में लपेट दी और पैरों से मेरी कमर को लपेट कर मेरे सीने से लिपट गयी…

स्वतः ही हम दोनो के होठ एक दूसरे से पहली बार जुड़ गये.. और हम दोनो एक लंबी स्मूच में खो गये..

दीदी मेरे होठों को बुरी तरह से झींझोड़ने लगी, मानो वो उन्हें जल्दी से जल्दी खा जाने की फिराक में हो..

मेने भी उसके निचले होठ को अपने मूह में भर लिया और उसके मूह में अपनी जीभ डालने की कोशिश करने लगा…

कुच्छ देर तो उसके मोतियों जैसे दाँतों की दीवार मेरी जीभ को रोकती रही, फिर वो खुल गयी और मेरी जीभ उसके मूह में घुसकर अपनी सहेली के साथ खेलने लगी..

मेरे हाथ उसके 33 के साइज़ के गोल-मटोल सुडौल नितंबों को मसलने लगे… दीदी की आँखें मस्ती में डूबकर लाल सुर्ख हो गयी, और उनमें अब सिर्फ़ वासना ही दिख रही थी…

मेरे हाथ उसके कुल्हों से हटकर उसकी पीठ पर आ गये और जैसे ही मेरी उंगलियों ने उसकी ब्रा के एकमात्र हुक को टच किया, वो शरारत कर बैठी, और उसकी ब्रा भी पानी में तैरती नज़र आने लगी…
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02-05-2020, 12:49 PM,
#33
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मेरे हाथ उसके कुल्हों से हटकर उसकी पीठ पर आ गये और जैसे ही मेरी उंगलियों ने उसकी ब्रा के एकमात्र हुक को टच किया, वो शरारत कर बैठी, और उसकी ब्रा भी पानी में तैरती नज़र आने लगी…

नीचे मेरा डंडा फुल फ्लश में अकड़ चुका था और इस समय उसकी गांद और चूत के होठों को सहारा दिए हुए था…

दीदी लगातार उसपर अपनी गांद और चूत के होठों को घिस रही थी… अब उसे अपनी पेंटी भी किसी सौतन की तरह अखरने लगी..

वो मेरी बाहों में पीछे को पलट गयी और अपने नंगे अल्लहड़ कच्चे अमरूद जो पकने के लिए तैयार थे मेरी आँखों के सामने कर दिए…

मेरा मन भी उन्हें खाने के लिए मचलने लगा…

मस्ती के जोरेसे उसके अंगूर के दाने जैसे निपल कड़क होकर मुझे निमंत्रण दे रहे थे…

मेरी चटोरी जीभ कहाँ मानने वाली थी.. और उसके एक अंगूर को बड़े प्यार से बड़ी शालीनता से चाट लिया…………….

ईईईीीइसस्स्स्स्स्स्स्शह………..भाईईईईईईईईईईईई………….आआआहह…..

जोरेसीईए…..चतत्त….ना………प्लेआस्ीईईईईई…………

मे भी उसे तड़पाना चाहता था… सो उसी तरह धीरे से दूसरे अंगूर को भी अपनी जीभ की नोक से जस्ट टच कर दिया…….

ज़ॉर्सीईईईई……….चातत्तत्त…ना.. भेन्चोद्द्द्द्द्द्द्द्द्द……..

दीदी की सहनशक्ति जबाब दे गयी… और उसके मूह से गाली निकल गाइिईई….

मे उसके मूह की तरफ देखता रह गया… और शरारती लहजे में कहा – दीदी अभी कहाँ हुआ हूँ मे भेन्चोद..?

वो – तो जल्दी बन जा ना….! और उसने अपने एक हाथ को मेरे गले से हटा कर, अपनी एक चुचि पकड़ कर मेरे मूह में ठूंस दी..

उसकी चुचि को चूस्ते हुए मे उसकी गांद की गोलाईयों को भी नाप-जोख रहा था…

उसकी पेंटी में कुच्छ चिप-चिपाहट मेरे पेट पर महसूस हो रही थी…उसकी गर्दन पीछे को लटक गयी..

वो तो अच्छा था कि उसके पैरों ने मेरी कमर को कस रखा था…

जल्दी कुच्छ कर ना मेरे भाई… सिसकते हुए कहा उसने…

मे बोला – क्या करूँ दीदी.. कर तो रहा हूँ.. जो तुमने कहा वो…

वो - इसके आगे का… ! अब नही रहा जाता… आअहह… प्लीज़ छोटू… जल्दी से कुच्छ कर वरना मेरी जान ही ना निकल जाए कहीं…

मे उसको उसी पोज़िशन में झील के किनारे पर ले आया वो मेरे गले से लटक कर खड़ी हो गयी..

तो मेने उसकी पेंटी नीचे खिसका दी.. और उसकी जांघों के बीच बैठ गया…

पहली बार मेने उसकी प्यारी मुनिया के दर्शन किए, जो अपने बंद होठ किये हल्के बलों के बीच सूरज की तेज रोशनी में किसी कली की तरह चमक रही थी..

मेने दीदी की गोल-सुडौल जांघों जो अभी तक ज़्यादा मांसल नही हुई थी, और उन दोनो के बीच थोड़ा सा गॅप था..

हल्की उभरी हुई उसकी मुनिया को देखते हुए चूम लिया.. और उसके होठों को खोलकर, अंदरूनी हिस्से को चाटने लगा…

वो अपनी आँखें बंद किए खड़ी मेरे बालों को अपनी उंगलियों से सहला रही थी…

खुले आसमान के नीचे हम दोनो बिना किसी परवाह के अपनी वासना के वशीभूत एक दूसरे के उन्माद को शांत करने के प्रयास में लगे थे..

हमें ये भी डर नही था कि कोई इधर आ भी सकता है…

हालाँकि जुलाइ की उमस भरी दोपहरी में इस बात के कम ही चान्स थे.. फिर भी एक आशंका मन में ज़रूर थी.. सो मेने अपना सर उठाकर दीदी से कहा-

दीदी ! यहाँ कोई आ गया तो…

वो जैसे सपने से जागी हो.. और झल्लाकर बोली – तू मार खाएगा अब मेरे हाथ से..

साले कुत्ते… मे मरी जा रही हूँ.. और तुझे ऐसी गान्ड फट बातें सूझ रही हैं…

उसके मूह से ऐसी बातें सुन मुझे हँसी आ गई और मेने जीभ निकाल कर उसकी रस से भरी कुप्पी के उपर फिराई…

सस्स्स्स्स्स्स्स्सिईईईईईईईईईई…….आआआआआअहह…..आआनन्नह…चत्ले आक्चीई…सीए…हाईए…रीई.. थोड़ा खोल लीयी… उसीए… आहह.. आईसीई…हिी…उईई…माआअ….हांननगज्गग…..

मेने उसकी मुनिया की फांकों को खोल कर उसकी अन्द्रुनि दीवार से जीभ लगा कर रगड़ दी…

मेरी खुरदूरी जीभ के घर्षण से वो बिल-बिला उठी… और उसने मेरा सर कसकर अपनी मुनिया के मूह से सटा दिया और अपने पंजों पर खड़ी हो गयी..

मेरी जीभ की नोक जैसे ही उसके छोटे से छेद में घुसने की कोशिश करती, वैसे ही वो वापस आजाती…

उत्तेजना के कारण उसकी क्लिट निकल कर बाहर आ गया… जिसे मेने जीभ से चाट कर अपने होठों से दबा लिया…और अपनी एक उंगली से उसके छेद के उपर मसल्ने लगा….

उफफफफफफफफ्फ़….कचूततुउउ…म्मेरीए…भाइईइ….मईए….आअहह….गाइिईईई…

और किल्कारी मारते हुई वो झड़ने लगी…मे उसकी कोरी गागर का सारा पानी पी गया, जो किसी अमृत से कम नही था… मेरे लिए…

अपनी बड़ी बेहन का अमृत पीकर मे धनी हो गया…. वो खड़ी खड़ी हाँफ रही थी… उसकी टाँगें काँपने लगी थी…

फिर वो बोली- मुझे कहीं छाया में ले चल… अब मुझसे धूप में खड़ा होना मुश्किल हो रहा है…

मेने उसे गोद में उठाया और पेड़ों की छाया की तरफ ले चला………

मेने एक घने पेड़ की छाया के नीचे उसे घास पर उतार दिया… और अपना अंडरवेर नीचे करके बोला – दीदी ! तुम भी थोड़ा इसे प्यार करो ना !

उसने भी आज पहली बार उसे बिना कपड़ों के देखा था, वो अपने पंजों पर मेरे सामने बैठ गयी और मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाते हुए बोली- छोटू.. ये तो बहुत बड़ा और मोटा भी ….!

मे – तुम्हें अच्छा नही लगा ? तो वो तपाक से बोली – अच्छा तो है.. पर …. ये मेरी उसमें घुस पाएगा…?

मेने कहा – किस्में घुसने की बात कर रही हो..? तो वो सकपका गयी.. और झिझकते कुए बोली – मेरी उसमें…

तुम लोग क्या कहते हो उसको.. जिससे हम लड़कियाँ सू सू करती हैं…

मे – मुझे क्या पता.. तुम किससे सू सू करती हो…?

वो – तू बहुत बदमाश होता जा रहा है… अरे भाई.. वो..सी.च.चुत…बस अब बता.. घुस जाएगा…

मे – मुझे क्या मालूम.. मेने कभी घुसाया है क्या तुम्हारी चूत में जो मुझे पता हो…? और अगर तुम्हें डाउट हो तो रहने दो…

उसने मेरे कूल्हे पर एक ज़ोर की चपत मारी.. और मेरे लंड को मसल कर बोली – अब तो चाहे जो भी हो… इसे तो मे आज लेकेर ही रहूंगी अपनी चूत में.. भले ही साली फट ही क्यों ना जाए…!

और उसे आगे-पीछे करने लगी, मेरा लंड तो उसके कोमल हाथ में आते ही ठुमके लगा रहा था,
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02-05-2020, 12:49 PM,
#34
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
अब तो उसके धैर्य की सीमा ही ख़तम होती जारही थी, जिसके चलते उसने एक बूँद अपने रस की सॅंपल के तौर पर उसको पेश करदी…

सफेद मोटी जैसी बूँद को देख कर दीदी ने उसे अपनी उंगली के पोरे पर रख लिया और उसे देखने लगी…

मे – क्या देख रही हो, जैसे मेने तुम्हारे रस को पीया है अमृत समझ कर वैसे ही ये तुम्हारे लिए अमृत है, चख कर देखो…

उसने झेन्प्ते हुए उसे अपनी जीभ से टच किया.. और उसका स्वाद लेने की कोशिश करती रही… फिर उसने अपनी पूरी उंगली को मूह में ले लिया..

मे – कैसा है… ? तो उसने आँखों के इशारे से ही हामी भरी और फिर अपनी उंगली मूह से निकाल कर बोली – टेस्टी है..

तो मेने कहा.. फिर देख क्या रही हो इसे मूह में लेकर प्यार करो… चूसो इसे.. जिससे ये तुम्हारी राम दुलारी को अच्छे से प्यार दे सके..

मेरी बात मान मुस्कुराते हुए उसने मेरे गरम सुपाडे को अपने होठों में क़ैद कर लिया और चूसने लगी.. और फिर धीरे-2 उसने उसे आधी लंबाई तक अपने मूह में कर लिया..

मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी… लंड एकदम कड़क हो चुका था, उसकी नसें फूलने लगी.. मेने उसका मूह अपने लंड से अलग हटाया तो वो मुझे नाराज़गी वाले भाव लाकर देखने लगी…

मेने कहा, अब इसको अपनी प्यारी-2 मुनिया में लेने का समय आ गया है.. और उसको वहीं हरी-हरी घास पर लिटा कर उसके घुटनो को मोड़ कर उसके पेट से लगा दिया,

मेने अपने घुटने ज़मीन पर टिकाए… फिर उसके कुल्हों को अपनी जांघों के उपर रखा…

अब उसकी छोटी सी कुँवारी चूत उपर को उभर आई, जिसे मेने एक बार फिरसे अपनी जीभ से चाट लिया, और उसकी मुनिया के होठ खोलकर अपना मोटा टमाटर जैसा सुपाडा उसके छोटे से छेद पर भिड़ा दिया…

मेरे सुपाडे से उसकी छोटी सी चूत एकदम ढक सी गयी थी… मेने अपनी कमर को हल्का सा पुश किया, जिससे वो उसकी गीली चूत में सेट होगया…

इतने से ही दीदी के शरीर में झुरजुरी सी दौड़ गयी और उसने अपनी आँखें कस कर बंद कर ली..

मेने एक हल्का सा धक्का अपनी कमर को लगाया.. तो मेरा सुपाडा आधे से थोड़ा ज़्यादा अंदर समा गया और वो किसी दीवार जैसी परत पर जाकर अटक गया.. जो शायद उसकी झिल्ली थी..

रामा के मूह से एक हल्की सी चीख निकल गयी…. और उसकी आँखों में पानी आगया…

मेने दीदी को एनकरेज करते हुए कहा – दीदी थोड़ा मॅनेज करना पड़ेगा… और फिर एक लंबी साँस लेकर एक जोरदार धक्का लगा दिया….

आआयययययययययययीीईईईईईई……..माआआआअ…………मररर्र्र्ररर………गाइिईईईईईईईईई……….रीईईईईईईईई……..आआआआअहह…….

एक फ़च की आवाज़ के साथ उसकी झिल्ली फट गयी.. और एक खून की धार मेरे लंड की साइड से निकली….

मेरा लंड भी दर्द करने लगा था… शायद उसकी चूत की झिल्ली से वो भी रगड़ गया था…

5-7 मिनिट मे यूँ ही पड़ा रहा… उसके उपर, और इस दौरान मे उसके आँसू पोंछता रहा, उसको ढाढ़स देता रहा…

फिर उसको चुप कराकर.. उसके होंठो को चूसा… उसकी चुचियों को सहलाया… तब जाकर वो नॉर्मल हुई… और मेरा भी दर्द कम हुआ..

कुच्छ देर बाद मेने उसको पुछा – दीदी अब दर्द तो नही है.. तो उसने ना में सर हिलाया और बोली – पूरा चला गया कि नही…

मे – हां ! लगभग… बस थोड़ा और वाकी है.. जबकि अभी मेरा आधा लंड ही गया था..,

अब मेने आधे लंड को थोड़ा बाहर को निकाला… लंड के साथ उसकी चूत की अन्द्रुनि परत भी बाहर तक आई…और साथ ही उसकी कराह भी निकल गयी…

मे थोड़ा रुका और फिर से उतना अंदर कर दिया… तो वो फिर कराही… ऐसे ही बड़े ध्यान से… आराम से मेने अपने आधे लंड को अंदर-बाहर किया..

कोई 20-25 बार में ही उसकी चूत फिरसे गीली होने लगी और उसको दर्द होना बंद हो गया..

अब वो भी मेरे साथ सहयोग देने लगी.. उसकी चूत से लाल लाल रस निकल रहा था.. मेने मौका देख एक और भरपूर धक्का मार दिया और पूरा लंड उसकी चूत में डालकर रुक गया…

ऊ…माआ…मार दलाअ… रीए.. भेह्न्चोद… साले… और कितना डालेगा… तेरा ये खूँटा मेरे पेट तक तो पहुँच गया…

मे – बस ये एंड होगया.. दीदी.. अब तेरी चूत ही इतनी छोटी है.. तो इसमें बेचारे मेरे खूँटे का क्या दोष..

और उसकी चुचियों को मसल्ते हुए उसके होठों को चूम लिया…

थोड़ी देर के बाद मेने फिरसे धीरे-2 धक्के लगाना शुरू कर दिया.. कोई 5 मिनिट बाद ही दीदी भी नीचे से अपनी कमर उचकाने लगी और मेरे धक्कों का साथ देना शुरू कर दिया…

आहह… छोटुऊ…जल्दी-जल्दी कर.. बहुत मज़ाअ.. आरहाआ.. है..सस्सिईईईई…हान्न्न…और ज़ॉर्सईए….हाईए…रीए…कितनाअ…मज़ाअ..आट्टाअ…चूड़नीई..मीईंन….शाबास और..टीज़्जज……उफफफ्फ़.. मे..गाइिईईईई…रीई….ओह…गोद्ड़द्ड…

वो जोरेसे मेरी कमर में अपने पैर लपेट कर चिपक गयी.. और इतनी ज़ोर्से झड़ी… कि.. तमाम गाढ़ा-गाढ़ा रस मेरे लंड की साइड से बहने लगा…

मेरे धक्कों की गति धीमी पड़ गयी थी क्योंकि उसने मुझे ज़ोर्से कस रखा था…. लेकिन मेरा होना अभी वाकी था तो धक्के लगाता रहा…

जब वो थोड़ा होश में आई तो बोली- भाई.. घास से मेरी पीठ छिल्ने लगी है.. तो मे उसे लेकर खड़ा हो गया,

मेरा डंडा इस समय 60 डिग्री खड़ा था, जो अकड़कर किसी शख्त रोड की तरह लग रहा था.

मेने उसकी जाँघो के नीचे से हाथ डाल कर उठा लिया, और अपने सुपाडे को उसकी ताज़ी फटी चूत के छेद पर फिट कर दिया.


उसने अपनी बाहें मेरे गले में लपेट ली थी, जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में सेट हुआ,

मेने उसके शरीर के भार को नीचे की ओर आने दिया… नतीजा… धीरे-2 पूरा लंड उसकी चूत में समा गया...

दीदी एक बार फिर दर्द से बिलबिला उठी, क्योंकि अभी कुच्छ पल पहले ही उसकी मुनिया घायल हुई थी.. और अब एक साथ मेरा पूरा मूसल एक ही साथ समाकर उसके पेट तक ठोकर मारने लगा था.

हम दोनो के प्रयास से वो दो-चार बार आराम से उपर नीचे हुई, लंड किसी पिस्टन की तरह अंदर जाता, बाहर आता.. जिसे वो अपनी खुली आँखों से देख भी रही थी.

वो फिरसे गरम होने लगी और मेरे लंड पर कूदने लगी.. मिझे इतना मज़ा आरहा था जिसे शब्दों में बयान नही किया जा सकता…

10 मिनिट खड़े –खड़े चोदने के बाद हम दोनो एक साथ झड़ने लगे, वो मेरे सीने से ऐसी चिपक गयी, जैसे कि कभी अलग ही ना होना हो…

हम दोनो एक बार फिर झील में उतार कर नहाए, एक दूसरे के बदन को साफ किया…
और फिर बाहर आकर अपने अपने कपड़े पहने, बुलेट में किक लगाई और अपने घर को चल दिए…

रास्ते मे मेने उसे पुछा – दीदी अब तो खुश हो ना ! ये सुनते ही उसने मुझे पीछे से अपनी बाहों में कस लिया और मेरी गर्दन को चूमते हुए बोली –

थॅंक्स भाई… आज तूने मेरा वर्षों का सपना पूरा कर दिया…

मे – तो क्या तुम वर्षों से मेरे साथ ये सब करने का सोच रही थी..?

वो – सच कहूँ तो हां !... हर लड़की अपने जीवन में इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतेज़ार करती है, जब वो एक कली से फूल बनना चाहती है.., वो एक लड़की से औरत बनती है…

लेकिन मुझे पता नही क्यों बाहर के लड़कों पर कभी भरोसा नही हुआ.. इसलिए मे तेरे साथ वो सब करती रहती थी कि शायद तू मेरी फीलिंग्स को समझे..

लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी तू मेरी भावनाओं को, मेरे इशारों को नही समझा, तब मेने तेरे उपर नज़र रखना शुरू कर दिया,

और मुझे तेरे और भाभी के बारे में कुच्छ-2 शक़ होने लगा…

जब भाभी तेरी मालिस करती थीं, तो छुप-2 कर मे वो सब देखा करती थी… वो भी जिस दिन भाभी ने पहली बार तेरा कॉक मूह में लिया था…

मे उसकी बातें सुन कर झटका खा गया… फिर संभलते हुए बोला…

मे – तो क्या तुम्हें भाभी और मेरे संबंध से एतराज है…

वो – बिल्कुल नही…! सच कहूँ तो भाभी को उनका हक़ मिला है.. उन्होने ही तुझे ऐसा बनाया है, तुझे सवारने में अपने इतने साल गँवाए हैं…

तेरी हर तकलीफ़ उन्होने अपने उपर झेली है…, तो तेरे उपर पहला हक़ तो उनका ही है..

सच कहूँ तो मे उनके लिए बहुत खुश हूँ.

और अब तो तूने मुझे भी उस खुशी में शामिल कर लिया है…इसके लिए मे हमेशा तेरी अहसानमंद रहूंगी मेरे प्यारे भाई…

ये कहते हुए उसने उचक कर मेरे गाल को चूम लिया…

रामा की भावनाए आज खुलकर सामने आ गयी थी…और उसने जो चाहा वो आज उसे मिल भी गया था..

बुलेट की आवाज़ सुनकर आस-पास के भी लोग हमारे दरवाजे पर आगये थे, मेरी पर्सनॅलिटी के हिसाब से बुलेट एकदम मेरे लिए सही बाइक थी, जो शायद भाभी का ही सपना हो मुझे बुलेट चलाते देखना…

मेने अपने दरवाजे पर पहुँचकर जैसे ही बाइक खड़ी की, भाभी दौड़ कर बाहर आगयि, उनके हाथ में आरती की थाली थी,

मे उतरने को हुआ तो उन्होने हाथ के इशारे से रुकने को कहा और मेरे सीट पर बैठे-2 ही मेरी आरती उतारी, अपने दोनो हाथों को मेरे सर के दोनो ओर से उवार कर मेरी बालायें ली, फिर मेरे माथे को चूमकर बोली- अब आ जाओ…

ये सब बाबूजी दूर बैठे देख रहे थे, उनकी आँखों में पानी था… फिर वो हमारे पास चले आए,

भाभी ने जैसे ही उनके पैर छुये, वो गद गद होगये और उन्हें ढेरों आशीर्वाद दिए.

दीदी मेरे पीछे से उतर कर बॅग हाथ में लिए घर के अंदर जा रही थी, उसकी चाल कुच्छ बदली-2 सी देख भाभी को कुच्छ शक़ हुआ लेकिन उन्होने कुच्छ कहा नही..
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02-05-2020, 12:49 PM,
#35
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
दीदी मेरे पीछे से उतर कर बॅग हाथ में लिए घर के अंदर जा रही थी, उसकी चाल कुच्छ बदली-2 सी देख भाभी को कुच्छ शक़ हुआ लेकिन उन्होने कुच्छ कहा नही..

हमें घर पहुँचते-2 शाम के 4 बज गये थे, तो भाभी ने हमें चाय नाश्ता दिया, क्योंकि खाने का तो ये समय ही नही था..

दीदी नाश्ता करके अपने कमरे में आराम करने चली गयी… वो बहुत थकान महसूस कर रही थी…

अब मे और भाभी ही रह गये तो वो मुझे अपने कमरे में ले गयी, और हम दोनो पलंग पर लेटे-लेटे बात करने लगे…

भाभी – और सूनाओ लल्ला… कैसा रहा तुम्हारा शहर का सफ़र… बड़े देवर्जी ने कुच्छ खातिर-वातिर की अपने छोटे भाई बेहन की या ऐसे ही टरका दिया…

मे – अरे भाभी ! पुछो मत ! क्या रूतवा है भैया का… पोलीस वाले उनके आगे-पीछे घूमते हैं…

और फिर मेने वहाँ भैया के साथ जो-जो खरीदारी की वो सब बताया, फिर दूसरे दिन मूवी देखी..

भाभी – अच्छा लल्लाजी ! अब मे जो पुच्छू.. उसका सच-सच जबाब दोगे..?

मे – क्या भाभी ! आपको लगता है कि मे आपसे कभी झूठ भी बोल सकता हूँ..?

वो – नही ! ऐसा अब तक तो नही हुआ है… पर ये सवाल ही ऐसा है कि शायद इसका तुम जबाब ही ना देना चाहो…!

मे – आप निश्चिंत रहो भाभी.. मेरे जीवन में आपसे बढ़कर ऐसी कोई बात नही है जो मे आपसे शेयर ना कर पाउ…आप पुछिये क्या पुच्छना है…

वो – मुझे शक़ है कि तुम्हारे और रामा के बीच ऐसा कुच्छ हुआ है, जो मुझे पता नही है…

आज जब वो बाइक से उतरकर अंदर आ रही थी, तो उसकी चाल कुच्छ बदली-2 सी लग रही थी… ये कहकर वो मुझे स्वालिया नज़रों से घूर्ने लगी..

मे कुच्छ देर चुप रहा और फिर नज़रें नीची करके बोला - सॉरी भाभी ! आज से पहले तो ऐसा कुच्छ नही था हम दोनो के बीच पर आज ही………..

वो – हां बोलो ! आज ही क्या…? बताओ मुझे.. वो मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर बोली…

मे – आज से पहले हम दोनो के बीच बस कुच्छ बराबर के लड़को-लड़कियों जैसी थोड़ी बहुत छेड़-छाड़ होती रहती थी, जो मेरे लिए तो बस एक नॉर्मल भाई-बेहन वाली ही छेड़-छाड़ जैसी थी, लेकिन दीदी की भावना कुच्छ अलग ही थी मेरे लिए…

कल जब हम मूवी देख रहे थे तब….और फिर मेने जो भी हम दोनो के बीच हुआ, और फिर दीदी ने जो बताया वो सब मेने भाभी को बता दिया… जिसे सुनकर वो एकदम सकते में आ गयी….

फिर मेने आज जो कुच्छ हम दोनो के बीच हुआ वो भी सब बता दिया…उसके बाद रास्ते में जो हमारी बातें हुई वो भी बता दी…. तब जाकर उनको थोड़ा तसल्ली हुई..

मे – अब आप ही बताओ भाभी इसमें मेने कुच्छ ग़लत किया…?

कुच्छ देर वो चुप-चाप मेरे चेहरे को देखती रही… फिर कुच्छ सोच कर बोली – वैसे एक तरह से देखा जाए, तो रामा भी अपनी जगह सही है…

आख़िर उसकी भी उम्र ये सब करने की है ही, और ज़्यादातर लड़के लड़कियाँ इस उम्र में बहक कर ग़लत-सलत कदम उठा लेते हैं.. जिससे कभी-2 बदनामी का भी डर पैदा हो जाता है..

लेकिन अब तुम दोनो एक लिमिट में रह कर ही ये सब आगे करना, वैसे मे उससे भी बात करूँगी… पर तुम भी ये बात ध्यान रखना… कि अब अपना वीर्य उसके अंदर कभी मत छोड़ना… ठीक है..

फिर उन्होने मेरे होठों पर एक किस करके कहा – अब तुम थोड़ा अपने कॉलेज पर ध्यान दो, कल से रेग्युलर क्लास अटेंड करना…

फिर थोड़ा स्माइल करते हुए बोली - और हां ! समय निकाल कर थोड़ा छोटी चाची के पास चले जाया करो..

मे – क्यों ? उनको मुझसे क्या काम है.. मेने आपको बताया था ना, उनके बारे में..

वो – इसी लिए तो कह रही हूँ… मेरे अनाड़ी बलम… उन्हें तुम्हारी ज़रूरत है..शादी के इतने सालों बाद भी वो माँ नही बन पाई.. बेचारी अधूरी सी हैं…तो तुम थोड़ा कोशिश करो…प्लीज़… उन्हें भी खुशी होगी.

मे – क्या आप भी यही चाहती हैं..?

वो – मे भी यही चाहती हूँ… इसलिए तो कह रही हूँ… बोलो ! दोगे ना उन्हें ये खुशी…
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02-05-2020, 12:49 PM,
#36
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
वो – मे भी यही चाहती हूँ… इसलिए तो कह रही हूँ… बोलो ! दोगे ना उन्हें ये खुशी…

मे – मेरी भाभी का हुकुम सर आँखों पर… फिर मेने उनको अपनी बाहों में कस लिया और बोला –

पहले अपनी डार्लिंग भाभी को तो खुशी दे दूं, ये बोलकर उनके होठ चूसने लगा……!

फिर हम दोनो ही अपना आपा खोते चले गये, दीं दुनिया से बेख़बर एक दूसरे में समाते चले गये..… !

दूसरे दिन मे अपनी बुलेट से कॉलेज पहुँचा… कॉलेज की नयी बिल्डिंग भी हमारे पुराने स्कूल से ही सटी हुई थी… बस गेट ही अलग था…

कॉलेज का ये पहला ही साल था… और ज़्यादातर हमारे स्कूल से पास हुए बच्चे ही थे.. तो सभी जानते ही थे…

मुझे बुलेट पर देख कर सारे फ्रेंड्स ने मुझे घेर लिया, और गाड़ी की खुशी में पार्टी माँगने लगे.. तो मुझे सभी को चाय नाश्ता कराना पड़ा…

अभी भी अड्मिशन चल ही रहे थे.. कॉलेज के प्रिन्सिपल मेरे पिताजी के मित्र थे.. और उपर से मे अपने स्कूल का टॉपर था…

तो उन्होने मुझे अपने ऑफीस में बुलाया और मुझसे थोड़ा कॉलेज के कामों में मदद करते रहने के लिए कहा..

क्लास तो अभी लगने नही थे, तो टीचर्स के साथ इंटरॅक्षन वग़ैरह कर-करके मे जल्दी ही वापस घर लौट आया….

अभी गाड़ी स्टॅंड की ही थी, कि भाभी बोली – लल्लाजी.. थोड़ा छोटी चाची के यहाँ चले जाओ.. उनको कुच्छ काम है.. शायद बाज़ार जाना है उनको..

मे उल्टे पैर चाची के घर पहुँचा… वो नहा धोकर तैयार हो रही थी.. थोड़ा सा मेक-अप भी किया हुआ था, जैसा गाओं में नॉर्मली औरतें करती हैं..

जैसे क्रीम, पाउडर.. हल्की सी लाली होठों पर, बारीक आँखों में काजल..

इतने में ही चाची चमक रही थी, साड़ी भी थोड़ा कसकर लपेटे हुई थी, जिसमें उनके उभरे हुए कूल्हे कुच्छ ज़्यादा ही मादक लग रहे थे.

मेने जाकर चाची को आवाज़ दी, तो वो अपने कमरे से बाहर आई.. सीने पर साड़ी का पल्लू कस कर कंधे पर पिन किया हुया था.. मेरी नज़र में वो एकदम माल लग रही थी, जिसे अगर मिल जाए तो कोई भी चोदने को तैयार हो जाए..

वो – आगये लल्ला…

मे – जी चाची ! क्या काम था.. बोलिए…?

वो – मुझे थोड़ा बाज़ार जाना था, अब तुम्हारे चाचा तो समय देते नही हैं.. सुबह स्कूल, फिर खेत….

हो सके तो मेरे साथ थोड़ा बाज़ार तक चलो ना..! इसी बहाने तुम्हारी बुलेट रानी पर बैठने का मौका मिल जाएगा मुझे भी… इतना कह कर वो हँसने लगी..

मे – अरे क्यों नही चाची..! वैसे लगता है आप बाज़ार में आज बिजलियाँ गिराने वाली हो… क्या लग रही हो…, मेने अपने उंगली और अंगूठे को मिलाकर टंच माल का इशारा किया.

वो शर्मा कर सर झुककर मुस्कराते हुए बोली – क्या लल्ला तुम भी कैसी मज़ाक करते हो.. मे ऐसी भी सुंदर नही लग रही…

मे – नही.. चाची सच में आज आप एकदम मस्त माल लग रही हो…

वो – हाए दियाय्ाआ…. लल्ला ! अपनी चाची को ही माल बोल रहे हो… बहुत बिगड़ते जा रहे हो…. लगता है जेठ जी को बोल कर जल्दी ही फेरे करवाने पड़ेंगे तुम्हारे…

मे – अब यहीं खड़े-2 फेरे करवाएँगी मेरे, या बाज़ार भी चलना है….

वो – हां चलो… मे तो एकदम रेडी हूँ… तुम अपनी फट-फटी तो लाओ…

चाची मेरे पीछे एक तरफ को दोनो पैर करके बैठ गयी, और बोली- लल्ला ये तुम्हारी हथिनी जैसी गाड़ी है, थोड़ा संभाल कर च्लना... मुझे तो डर लगता है..

मे – आप चिंता ना करो.. बस आप मुझे पकड़े रहना.. तो उन्होने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया. और थोड़ी तिर्छि सी होकर बैठ गयी…, मेने गाड़ी बाज़ार की तरफ बढ़ा दी…

अभी गाओं से निकले ही थे, चौथा गियर डाला ही था, कि एक गाय सामने आगयि.., मुझे एक साथ ब्रेक लगाने पड़े, और चाची का वजन मेरे उपर…

उनकी 36” की चुचि जो अभी तक कोई बच्चा ना होने की वजह से अभी भी मस्त ठोस बनी हुई थी मेरी पीठ से दब गयी….

चाची एक साथ डर गयी… और बोली – हाए लल्ला… लगता है मारोगे मुझे आज.. मेने तुम्हारे साथ आकर ग़लती करदी ..

मे – चाची आप डरती बहुत हो… अब ये साइकल तो है नही जो धीरे -2 चलेगी.. ब्रेक तो लगाने ही पड़ते हैं.. आप एक काम करो, मेरी कमर पकड़ लो कस्के..

तो उन्होने मेरी कमर में अपनी बाजू लपेट दी,., और सट कर बैठ गयी.. उनकी चुचियों की चुभन मे अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था, जिससे मेरा मूसल चन्द पॅंट में खड़ा होने लगा.

कस्बे का बाज़ार थोड़ी दूर ही था, सो 10 मिनिट में ही बाज़ार पहुँच गये…

चाची अपना समान खरीदने लगी.. सारा समान लेने के बाद वो अंडर गारमेंट की एक छोटी सी दुकान पर पहुँची. चाची की ही उमर का दुकानदार देखते ही बोला..

आइए .. आइए बेहन जी इस बार तो आप काफ़ी दिनों के बाद आई हैं… बोलिए क्या दिखाऊ..?

चाची ने अपनी पुरानी ब्रा बॅग से निकाली… और बोली – भैया मुझे अपने लिए अंगिया और कच्छि लेनी थी…ये अंगिया छोटी हो गयी है, इससे बड़ा साइज़ का दीजिए..
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02-05-2020, 12:49 PM,
#37
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
दुकानदार ने एक बार मेरी ओर देखा, और बोला – अब बहनजी ऐसे अंदाज़े से तो कैसे पता लगेगा.. आप अपना नंबर तो बताइए..

ये पुरानी तो 34 की है… और इसके उपर 36 की ही आती अब वो अगर ढीली, टाइट हुई तो…?

चाची – नही होगी वोही दे दो आप… , एक बार उसने चाची के पल्लू से ढके पपीतों पर नज़र डालते हुए बोला – ठीक है, मुझे क्या है.. मे दे देता हूँ 36 नंबर की ब्रा..

फिर वो दो टाइप की ब्रा निकाल के लाया… एक जो बड़े कप वाली, जिससे चुचियों का अधिकतर हिस्सा ढक सके, और एक ऐसी जिसमें से चुचकों के साथ-साथ उनका निचला हिस्सा ही ढक पाता…

चाची ने बड़े कप वाली ब्रा सेलेक्ट कर ली… जब वो दुकानदार पेंटी लेने अंदर गया.. तो मेने चाची के कान में फुसफुसा कर कहा…

चाची ये दूसरी वाली ब्रा आपको ज़्यादा अच्छी लगेगी… चाची ने मुझे गहरी नज़र से घूरा.. और स्माइल करते हुए बोली – च्चिि.. लल्ला ! इसमें तो कुच्छ ढकेगा ही नही.. उल्टा दिखेगा ज़्यादा..

मे – अरे चाची ! थोड़ा मॉर्डन बनके चाचा के सामने जाओंगी तो उन्हें ज़्यादा अच्छा लगेगा और आपको ज़्यादा प्यार करेंगे ना!

चाची – अरे लल्ला ! उन्हें तो मे बिना कपड़ों के भी…… इतना फ्लो में बोल तो दिया.. फिर शर्मा कर चुप हो गयी.., फिर ना जाने क्या सोच कर उन्होने एक छोटे कप वाली ब्रा भी ले ली…

अबतक दुकानदार दो-तीन तरह की पैंटी लेकर आया, और मेरे इशारे पर उन्होने एक माइक्रो पेंटी भी लेली…

लौटते में चाची ने मुझसे पुछा – लल्ला तुमने किसी को पहले ऐसी कच्छी और अंगिया पहने देखा है..?

चाची का सवाल सुनकर मुझे झटका सा लगा--- मेने हड़बड़ा कर कहा..न.न.नही तो चाची.. मेने तो किसी को नही देखा..

वो – तो फिर तुम्हें कैसे पता कि वो मुझपर अच्छी लगेगी…?

मे –व.वऊू..तो बस ऐसे ही कहा था… छोटे कपड़ों में शरीर ज़्यादा सेक्सी लगता ही है…

उन्होने मेरी पीठ पर हौले से एक थप्पड़ लगाया.. और शायद हँसते हुए… हूंम्म.. करके चुप हो गयी..

मेने उन्हें उनके घर उतारा…जब मे चलने लगा तो वो बोली – लल्ला ! थोड़ा रूको.. कुच्छ खा-पीक चले जाना…

मे – अरे नही चाची.. मे अब घर जाके खाना ही खा लूँगा.. !

वो – हां भाई ! अब घर में इतनी लाड करने वाली भाभी हो तो चाची के हाथ का खाना क्यों अच्छा लगेगा…

मे – ऐसी बात नही है चाची… अच्छा ठीक है, आप चलो.. मे कपड़े चेंज करके 10 मिनिट में आता हूँ, फिर देखता हूँ आप क्या खिलाती हैं.. मुझे..

वो हँसते हुए अपने घर के अंदर चली गयी, और मे अपने घर की तरफ…

घर आकर मेने अपने कपड़े चेंज किए और एक हल्की से टीशर्ट और बिना अंडरवेर के एक हल्का सा होजेरी का लोवर पहन लिया, जिससे गर्मियों की चिप-चिप में थोड़ा कंफर्टबल फील हो..

टाइट जीन्स में सुबह से ही मेरा घोड़ा जो कयि बार टाइट हुआ था उसको भी राहत हुई, और वो अब खुला-खुला फील कर रहा था.

भाभी ने खाने के लिए बोला, क्योंकि अभी लंच का समय था.. मेने कहा मे चाची के यहाँ जा रहा हूँ, उन्होने खाने के लिए बुलाया है.. अब देखते हैं क्या खिलाती हैं..?

भाभी ने मुझे गहरी नज़र से देखा.. लेकिन मेरे चेहरे से उन्हें ऐसा-वैसा कुच्छ नज़र नही आया.. तो फिर हँसती हुई बोली..ठ.हीककक…है, जाओ… आज अपनी चाची का लाड भी देख लो…

मे उनको एक स्माइल देकर घर से निकल आया और चाची के यहाँ पहुँचा…!

चाचा भी स्कूल से आ गये थे, और खाना खा रहे थे, चाची ने मुझे भी बिताया और खाना दे दिया.. हम दोनो ने साथ-साथ खाना खाया..

कुच्छ देर इधर-उधर की बातें हुई.. फिर चाचा अपने खेतों की ओर चले गये..
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02-05-2020, 12:49 PM,
#38
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
चाचा भी स्कूल से आ गये थे, और खाना खा रहे थे, चाची ने मुझे भी बिताया और खाना दे दिया.. हम दोनो ने साथ-साथ खाना खाया..

कुच्छ देर इधर-उधर की बातें हुई.. फिर चाचा अपने खेतों की ओर चले गये..


तब तक चाची भी खाना खा चुकी थी.. चाचा के जाने के बाद मेने भी चाची से कहा – चाची मे भी निकलता हूँ.. तो वो बोली –

तुम रूको तुमसे अभी एक ज़रूरी काम है…

मे फिर से उनके पलंग पर बैठ गया…और बोला- हां चाची बताइए, क्या काम है…?

वो मेरे पास बैठ गयी.. और कुच्छ देर मेरी ओर देखती रही…फिर उनकी नज़र नीचे को हो गयी और अपनी सारी के पल्लू को अपनी उंगली में लपेटे हुए बोली..

वो – लल्ला मे वो ना ! वो जो कपड़े तुमने पसंद किए थे ना ! उनके बारे में बात करनी थी तुमसे…

मे – उनके बारे में मुझसे क्या बात करनी है चाची..?

वो – अब ऐसे कपड़े मेने कभी लिए तो नही थे, ना जाने कैसे लगेंगे.. ?

मे – अरे तो इसमें क्या है, एक बार पहन कर देख लीजिए ना ! पता चल जाएगा..

वो – लेकिन मे खुद कैसे देख पाउन्गि..?

मे – पहन कर शीशे के सामने खड़ी होकर देख लेना और कैसे…

वो – इतना बड़ा शीशा होना भी तो चाहिए ना… और मेरे पास मोहिनी बहू जैसी वो क्या कहते हैं, हां वो.. दर.दर्शन्णन्न् टेबल तो है नही..

मे – ओह ! ड्रेसिंग टेबल….

वो – हां ! वही… ! तो अब कैसे देखूं..? क्या तुम मुझे देखकर बता दोगे..?

मे ? मे…मे कैसे देख सकता हूँ.. आपको उन कपड़ों में..? आप एक काम करिए, भाभी या रामा दीदी को दिखा दीजिए… वो आपको बता देंगी कैसे लगते हैं आप पर…

वो – कैसी बातें करते हो लल्ला… मे भला ऐसे कपड़ों को मोहिनी बहू या रामा बिटिया को कैसे दिखा सकती हूँ..?

वो क्या सोचेंगी मेरे बारे में..? की देखो चाची को इस उमर में ऐसे कपड़ों की क्या ज़रूरत पड़ गयी…

सच में तुमने तो मुझे फँसा दिया लल्ला…! अब तुम्हें ही देखकर बताना पड़ेगा हां ! और वैसे भी तुम हमारे घर में सबसे छोटे हो, उपर से तुमने एक दिन मुझे वैसी हालत में देख भी लिया था.. तो तुम्हारे सामने मुझे झिझक थोड़ी कम होगी….!

मे – ओह चाची ! तो आप चाचा को ही क्यों नही दिखा देती…

वो – वो तो देखते ही मारखाने बैल्ल की तरह भड़क उठेंगे, .. छूटते ही कहेंगे ये क्या रंडियों जैसे कपड़े ले आई हो..

फिर वो मेरे हाथ अपने हाथों में लेकर बोली – अब अगर तुम भी नही देखना चाहते तो कल उन कपड़ों को वापस कर देना, जब कॉलेज जाओ तब…

मे - ओह चाची ! अच्छा चलो अब !.. ठीक है आप पहनो मे देख लेता हूँ कि आप कैसी लगती हो उन कपड़ों में…

वो – तुम एक काम करो.. दो मिनिट बाहर चले जाओ, मे तब तक वो पहन लेती हूँ, फिर तुम्हें आवाज़ दे लूँगी..

मे उठकर बाहर उनके आँगन में चला गया… फिर कोई 10-15 मिनिट के बाद चाची ने मुझे आवाज़ देकर अंदर बुलाया…

वो गले तक एक चादर ओढ़े हुए पलंग के पास खड़ी थी.. मुझे देखते ही उन्होने नज़रें झुका ली.. मेने पुचछा – हां चाची वो कपड़े पहने या नही…दिखाओ..!

तो उन्होने झेन्प्ते हुए.. धीरे-2 अपने बदन से चादर अलग की और अपनी नज़रें नीची किए पैर के अंगूठे से फर्श को कुरेदने लगी….....

एक मिनी ब्रा और छोटी सी पेंटी में कसे उनके मादक गदराए.. गोरे बदन की सुंदरता में मे तो खो सा गया.. वो इन कपड़ों में मियाँ खलीफा को भी मात दे रही थी…

बड़े-बड़े पपीते जैसे उनके कठोरे वक्ष, जो अब भी अपनी कठोरता बरकरार रखे हुए थे, जिनका निपल से उपर का पूरा हिस्सा खुला हुआ था,

ब्रा के कप की चौड़ाई भी मात्र 3” से ज़्यादा नही थी, जिससे दोनो चुचियों की पुश्टता एकदम साफ-2 दिखाई दे रही थी.

30 की उमर में भी उनका पेट ज़रा भी बाहर नही निकला था, हां हल्की सी मासलता ज़रूर थी, जो उनके हुश्न में और चार चाँद लगा रही थी,

खूब गहरी नाभि, जो थोड़ी सी नीचे की तरफ झुकी हुई… उनकी सेक्स अपील को डरसा रही थी.

मांसल केले के तने जैसी जांघों के बीच, दुनिया का अनमोल खजाना.. माइक्रो बिकनी में सही से ढक भी नही रहा था, साइड से उनकी झान्टो के बाल निकल कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे, शायद महीने भर से साफ नही किए होंगे..

कसी हुई पेंटी में उनकी रसीली के होंठ अपनी पुश्टता दिखाने से बाज़ नही आए.. और उनका उठान, फिर उनके बीच की दरार साफ-साफ अपना इंप्रेशन दे रही थी.

जब बहुत देर तक मेने कुच्छ नही कहा, बस यूँ ही खड़ा उनके रूप लावण्य में खोया रहा, तो चाची ने अपनी नज़र उठाकर एक बार मेरी ओर देखा, और मुझे अपने बदन को निहारते पाकर, एक बार फिरसे उनकी नज़र शर्म से झुक गयी…

बताओ ना लल्ला..! कैसी लग रही हूँ मे इन कपड़ों में…?

आंनन्ज्ग…हां…! मे जैसे नींद से जागा… थोड़ा पलटना चाची… मे एक बार पीछे से भी तो देख लूँ.. तब बताउन्गा…!

वो जब पलटी तो….तो…उनके कुल्हों की पुश्टता देखकर मेरा मूह खुला का खुला रह गया…उनके 38” की गान्ड पर वो छोटी सी पेंटी की पट्टी सिर्फ़ उनकी दरार को ही ढक पा रही थी…

ढक भी नही पारही थी, बस उसमें फँसाने से अपने आप को किसी तरह बचाए हुए थी..
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02-05-2020, 12:49 PM,
#39
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मेरे सब्र का बाँध टूटने लगा था, मे ठीक उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया, मेरा लंड लोवर में एक दम सतर होकर नाग की तरह अपना फन फैलाए खड़ा हो गया…

लोवर का सॉफ्ट कपड़ा उसे संभालने में असमर्थ दिखाई दे रहा था…मेरे लंड और चाची की गान्ड की खाई के बीच मात्र 1” का ही फासला बचा था…

मेने अपना मूह थोड़ा आगे करके चाची के कान के पास लेजा कर कहा – चाची आप सच में बहुत सुंदर हो…

मेरी आवाज़ अचानक अपने इतने नज़दीक सुनकर वो हड़बड़ा गयी… इसी हड़बड़ाहट में वो और थोड़ा सा पीछे को हटी…. मेरा खड़ा लंड उनकी पतली सी पेंटी के उपर से उनकी गान्ड की दरार से अड़ गया….

चाची को इसका अंदाज़ा नही था… उनके मूह से सस्स्सिईईईईईईईईई….. करके एक मादक सिसकी निकल गयी… और वो झट से मेरी ओर पलट गयी…, मेरी आँखों में देखकर बोली…

तुम सच कह रहे हो लल्ला… मे सुंदर दिख रही हूँ ना इनमें…!चाची की आवाज़ में कंपन साफ-2 झलक रहा था…

मे थोड़ा और आगे बढ़ा और उनके कंधों पर अपने हाथ रख कर उनकी आँखों में देखते हुए बोला – स्वर्ग से उतरी हुई किसी अप्सरा जैसी…..!

चाची के होंठ थरथरा उठे…और कंम्पकपाते हुए बोली - ओह…लल्ला…. थॅंक यू… तुमने मेरी तारीफ़ की… इतना कह कर वो मेरे सीने से लग गयी…

अब तो ग़ज़ब ही होगया………. साला मुसलचंद उनकी ठीक चूत के उपर जा टिका…

चाची अपने पंजों पर खड़ी होकर उसे और अच्छे से अपनी मुनिया पर फील करना चाहती थी… कि मेरे दिमाग़ ने झटका खाया, फिर मेने उनसे अलग होकर कहा..

अब तो आप खुश हो ना ! मेने आपके कपड़े देख लिए, अब मे चलता हूँ… और ये बोलकर मे उनके कमरे से बाहर को चल दिया……

अभी मे उनके रूम के गेट पर ही पहुँचा था कि…

पीछे से चाची की रुआंसी सी आवाज़ आई - तुम्हें अपनी मोहिनी भाभी की सौगंध है लल्ला, जो यहाँ से कदम बाहर रखा तो…

मेरा एक पैर कमरे के दरवाजे से बाहर था, और दूसरा अभी कमरे में ही था…

भाभी मेरे लिए सब कुच्छ थी, माँ, दोस्त, महबूबा… सब कुच्छ.. जिसने मुझे हाथ पकड़ कर खड़ा किया था… वरना माँ के बाद मेरा क्या होता..? ईश्वर जाने.

भाभी की कसम सुनते ही मेरे पैर जहाँ के तहाँ जम गये.., मे मूक्वत वहीं खड़ा रह गया…

चाची दौड़ती हुई आई और मुझे पीछे से अपनी बाहों में कस लिया…

मुझे यूँ छोड़ कर ना जाओ छोटे लल्ला… मुझे तुम्हारी बाहों का सहारा चाहिए…उनकी मोटी-2 मुलायम लेकिन ठोस चुचियाँ मेरी पीठ पर दबी हुई थी, अपने गाल को मेरी गर्दन से सहलाती हुई वो बोली.

मे – चाची प्लीज़ छोड़िए मुझे… ये ठीक नही है… हमारे रिश्ते का तो ख्याल करिए…आप मेरी माँ समान हैं…

वो – तो क्या तुम अपनी माँ को दुखी देख सकते थे..?

मे – आपको क्या दुख है… सब कुच्छ तो दे रहे हैं चाचा आपको…

वो – औरत के लिए बांझ शब्द एक बहुत बड़ी गाली होती है… लल्ला, जब पीठ पीछे लोग मुझे बांझ बोलते हैं,

सोचो मेरे दिल पर क्या बीतती होगी… जबकि मे अच्छी तरह से जानती हूँ कि मे बांझ नही हूँ.

मुझे भाभी के कहे हुए शब्द याद आ गये… (समय निकाल कर चाची के पास चले जाया करो, उन्हें तुम्हारी ज़रूरत है..) इन शब्दों का मतलव अब मेरी समझ में आरहा था.. फिर भी मे थोड़ा सेफ होने के लिए बोला…

मे – लेकिन मे चाचा के साथ धोका नही कर सकता चाची…

चाची बिफर पड़ी.. और बोली – धोका…? जानते हो धोका किसे कहते हैं..?

एक नमार्द को मेरे गले में बाँध दिया.. धोका इसे कहते हैं.. अपने घर की इज़्ज़त की खातिर मे चुप बनी रही, और अपने आप को बहकने से रोकती रही…

और उससे बड़ा धोका, अब तुम मेरे साथ कर रहे हो… मुझे इस हालत में अकेला छोड़ कर…

कई मौके ऐसे आए जिनमें मुझे लगा कि तुम मेरी भावनाओं को समझने लगे हो.. लेकिन में ग़लत थी.. तुम्हें तो अपने चाचा ही दिखाई दिए..

उन्होने अपनी बाहों का बंधन मेरे शरीर से हटा लिया और सुबक्ते हुए बोली – जाओ लल्ला तुम भी जाओ, मे हूँ ही अभागी, तो इसमें तुम्हारा भी क्या दोष…

इतना बोल कर वो फफक-फफक कर रो पड़ी, और पलट कर पलंग पर पड़ी अपनी साड़ी पहनने के लिए उठा ली…

मेने पीछे से जाकर उनके हाथ पर अपना हाथ रख दिया, और बोला – मत पहनो ये कपड़े चाची… वरना मुझे फिरसे उतारने में समय बर्बाद करना पड़ेगा…

वो मेरी ओर पलटी और मेरे चेहरे पर नज़र गढ़ा कर बोली – सच ! तुम सच कह रहे..? या अभी भी मज़ाक तो नही कर रहे…

मे – नही ये एकदम सच है चाची… कोई मेरी चाची को बांझ होने की गाली दे, ये मुझसे बर्दास्त नही होगा…

ओह्ह्ह्ह…..मेरे लल्लाआअ… तुम कितने अच्छे हो.. और वो मेरे सीने से लिपट कर आँसू बहाने लगी..

मेने उनकी थोड़ी के नीचे उंगली लगा कर उनका चेहरा उपर किया और आँसू पोन्छ्ते हुए कहा…

प्लीज़ अब आप रोइए नही.. मे आपकी आँखों में आँसू नही देख सकता.., इतना कहा कर मेने अपने होठ उनके लरजते होठों पर रख दिए…

चाची मुझसे कसकर लिपट गयी… मेने उनके नितंबों को अपने हाथों में लेकर कस दिया.. तो वो और ज़ोर्से अपनी जांघों को मेरी जांघों से सटाने लगी…

मेरा लंड जो कुच्छ इस दौरान ढीला पड़ गया था.. वो फिरसे अकड़ने लगा और चाची की नाभि में अपना ठिकाना ढूँढने लगा…

चाची ने उसे अपनी मुट्ठी में कस लिया और उसे मसल्ते हुए बोली – लल्ला ये तुम्हारा मूसल ग़लत रास्ते को ढूंड रहा है.. इसे सम्भालो, नही तो मेरे पेट में ही घुस जाएगा…!

मे – ये अब आपके हवाले है, इसे सही रास्ता दिखना आपका काम है… फिर चाची ने मेरी टीशर्ट निकाल दी और मेरी मजबूत कसरती छाती, जिसपर बाल घने होते जा रहे थे, को सहलाते हुए बोली –

पूरे मर्द हो गये हो लल्ला.. क्या मजबूत बना लिया तुमने अपने शरीर को…

एक औरत को ऐसी ही मजबूत छाती चाहिए अपना सर रखने के लिए… बहुत खुश नसीब होगी वो, जिसे ब्याह कर लाओगे…

मे – अभी तो ये आपके लिए है.. और.. और इस सबकी ज़िम्मेदार मेरी भाभी हैं, उनकी मेहनत और लगन का नतीजा है, जो आज मे हूँ..

चाची – सच में बहुत समझदार और सुशील है हमारी मोहिनी बहू.. भगवान ऐसी बहू सबको दे…

ये कह कर चाची ने मेरे सीने को चूम लिया… फिर वो मेरे छोटे-2 निप्पलो को चूमने, चाटने लगी…

मेरे शरीर में सुरसुरी सी होने लगी… और मेने उनको अलग करके उनके दोनो खरबूजों को ज़ोर्से मसल दिया…

आअहह……लल्ला.एयाया… इतने ज़ोर्से नही रजीईई… हान्ं…प्यार से सहलाते रहो… उफफफफ्फ़…. सीईईईई…ऊहह… वो अपनी कमर को मेरे लंड के चारों ओर घूमने लगी…
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02-05-2020, 12:50 PM,
#40
RE: Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2
मेरे शरीर में सुरसुरी सी होने लगी… और मेने उनको अलग करके उनके दोनो खरबूजों को ज़ोर्से मसल दिया…

आअहह……लल्ला.एयाया… इतने ज़ोर्से नही रजीईई… हान्ं…प्यार से सहलाते रहो… उफफफफ्फ़…. सीईईईई…ऊहह… वो अपनी कमर को मेरे लंड के चारों ओर घूमने लगी…

उनकी पीठ पर हाथ ले जाकर मेने उनकी ब्रा को निकाल दिया….. आअहह… क्या मस्त खरबूजे थे चाची के… एकदम गोल-मटोल… बड़े-बड़े, लेकिन सुडौल… जिनपर एक-एक काले अंगूर के दाने जैसे ब्राउन कलर के निपल जो अब खड़े होकर 1” बड़े हो चुके थे…

मेने उन दोनो को अपनी उंगली और अंगूठे में दबाकर मसल दिया…. चाची अपने पंजों पर खड़ी होगयि… और एक लंबी से अह्ह्ह्ह…. उनके मूह से निकल गयी..

अब मेने उनकी चुचियों को चूसना, चाटना शुरू कर दिया था, और एक हाथ से मसलने लगा.. चाची मादक सिसकिया लेते हुए… कुच्छ ना कुच्छ बड़बड़ा रही थी…

चूस-चूस कर, मसल-मसल कर मेने उनके दोनो कबूतरों को लाल कर दिया…

जब मेने एक हाथ उनकी छोटी सी पेंटी के उपर रखा तो वो पूरी तरह कमरस से तर को चुकी थी… मे उनके पेट को चूमते हुए… उनकी जांघों के बीच बैठ गया..

एक बार पेंटी के उपर से उसकी चूत को सहला कर किस कर लिया….

हइई….लल्ला.. ये क्या करते हो… भला वहाँ भी कोई मूह लगाता है…
मेने झिड़कते हुए कहा… आपको मज़ा आरहा है ना… तो उन्होने हां में मंडी हिला दी…

मेने फिर कहा – तो बस चुप चाप मज़ा लीजिए… मुझे कहाँ क्या करना है वो मुझे करने दीजिए..

वो सहम कर चुप हो गयी.. और आने वाले मज़े की कल्पना में खोने लगी..

मेने उनकी उस 4 अंगुल चौड़ी पट्टी वाली पेंटी को भी उतार दिया… उनकी झान्टो के बालों को अपनी मुट्ठी में लेकर हल्के से खींच दिया…

हइई… लल्ला… खींच क्यों रहे हो…? मेने कहा – तो ये जंगल सॉफ क्यों नही किया..?

वो – हाईए.. लल्ला… बस आज माफ़ करदो, आज के बाद ये कभी तुम्हें नही दिखेंगे…

मे उनकी चूत चाटना चाहता था, लेकिन झान्टो की वजह से मन नही किया.. और अपनी उंगलियों से ही उसके साथ थोड़ी देर खेला…

उनकी चूत लगातार रस छोड़ रही थी, जिसकी वजह से उनकी झान्टे और जंघें चिपचिपा रही थी…

और मत तडपाओ लल्ला… नही तो मेरी जान निकल जाएगी… चाची मिन्नत सी करते हुए बोली… तो मेने उन्हें पलंग पर लिटा दिया, और अपना लोवर निकाल कर, लंड को सहलाते हुए उनकी जांघों के बीच आगया..

चाची अपनी टाँगों को मोड हुए जंघें फैलाकर लेटी थी… मेरे मूसल जैसे 8” लंबे और सोते जैसे लंड को देखकर उन्होने झुरजुरी सी ली और बोली – लल्ला आराम से करना.. तुम्हारा हथियार बहुत बड़ा है…

मे – क्यों ऐसा पहले नही लिया क्या..?

वो – लेने की बात करते हो लल्ला… मेने तो देखा भी नही है अब तक ऐसा.. मेरी इसमें अभी तक तुम्हारे चाचा की लुल्ली या फिर मेरी उंगलियों के अलावा और कुच्छ गया ही नही है..

मेने चाची की झान्टो को इधर-उधर करके, उनकी चूत को खोला, सच में उनका छेद अभीतक बहुत छोटा सा था…

मेने एक बार उनकी चूत के लाल-लाल अन्द्रुनि हिस्से को चाटा… चाची की कमर लहराई… और मूह से आससीईईईईईईई… जैसी आवाज़ निकल गयी…

अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाकर मेने सुपाडा चाची के छेद में फिट किया और एक हल्का सा झटका अपनी कमर में लगा दिया…



आहह… धीरीए…. सीईईईईईई.. बहुत मोटा है… तुम्हारा.. लल्ला…

लंड आधा भी नही गया.. कि चाची कराहने लगी थी…

मेने उनके होठों को चूमते हुए कहा.. बहुत कसी हुई चूत है चाची तेरी.. मेरे लंड को अंदर जाने ही नही दे रही…

मेरे मूह से ऐसे शब्द सुनकर चाची मेरे मूह को देखने लगी.. मेने कहा.. खुलकर बोलने में ही ज़्यादा मज़ा है.. आप भी बोलो…

मेने फिर एक और धक्का मार दिया और मेरा 3/4 लंड उनकी कसी हुई चूत में चला गया, चाची एक बार फिर कराहने लगी… मेने धीरे-2 लंड को अंदर बाहर किया…

चाची की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी.. मेने धक्के तेज कर दिए… चाची आह..ससिईहह.. करके मज़े लेने लगी, और कमर उठा-2 कर चुदाई का लुफ्त लूटने लगी, हमें पता ही नही चला कब लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया..

आअहह…चाची क्या चूत है.. तेरी.. बहुत पानी छोड़ रही है…

ओह्ह्ह.. मेरे चोदु राजा… तेरा मूसल भी तो कितनी ज़ोर्से कुटाई कर रहा है मेरी ओखली में… पानी ना दे बेचारी तो और क्या करेगी…

अब चाची भी खुलकर मज़े ले रही थी…और मनचाहे शब्द बोल रही थी…

मेरे मोटे डंडे की मार उनकी रामदुलारी ज़्यादा देर नही झेल पाई और जल्दी ही पानी फेंकने लगी..

चाची एक बार झड चुकी थी, मे उनकी बगल में लेट गया और उनको अपने उपर खींच लिया…

चाची मेरे उपर आकर मेरे होठ चूसने लगी, मेने उनकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा… चाची मेरे लंड को अपनी चूत में लो ना…

वो – अह्ह्ह्ह.. थोड़ा तो सबर करो… मेरे सोना.. फिर उन्होने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर मेरे लंड को मुट्ठी में जकड़कर उसे अपनी गीली चूत के होठों पर रगड़ने लगी, जिससे वो फिरसे गरम होने लगी..

मेरे सुपाडे को चूत के मूह से सटा कर धीरे-2 वो उसके उपर बैठने लगी…

जैसे जैसे लंड अंदर होता जा रहा था… साथ साथ चाची का मूह भी खुलता जा रहा था, साथ में कराह भी, आँखें मूंद गयी थी उनकी.

पूरा लंड अंदर लेने के बाद वो हाँफने सी लगी और बोली ….

हाईए… राम.. लल्ला… कितना बड़ा लंड है तुम्हारा… मेरी बच्चेदानी के अंदर ही घुस गया ये तो….

और अपने पेडू पर हाथ रख कर बोली - उफफफफ्फ़… देखो… मेरे पेट तक चला गया… फिर धीरे-2 से वो उसपर उठने बैठने लगी…

हइई… मॉरीइ… मैय्ाआ…. अबतक ये मुझे क्यों नही मिला… अब मे माँ बनूँगी… इसी मूसल से… उउफफफ्फ़.. मेरे सोने राजा… मेरे लल्लाअ.. के बीज़ से…
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