Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
10-16-2019, 01:43 PM,
#21
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
20-25 मिनिट की धुआँधार चुदाई के बाद रंगीली को लगा कि उसकी चूत के अंदर का बाँध खुलने लगा है, उसके गले की नसें अकड़ने लगी, चेहरा लाल भभूका हो गया…

उसकी पीठ धनुष की तरह उपर उठ गयी, मूह खुल का खुला रह गया…



और उसने अपनी पतली-पतली टाँगें लाला की कमर के इर्द-गिर्द लपेट दी, वो गद्दी से आधार होकर लाला के बदन से जोंक की तरह चिपकते हुए चिल्लायईयी…

आआययययीी…म्म्माअलिकक्क…और ज़ॉर्सीई…काररूव…उूउउऊऊहह… मईए…आआययईीीई….गायईयीईईईई…..आअहह…,

वो बुरी तरह हान्फते हुए झड़ने लगी…

इधर लाला का भी नाग अपना जहर छोड़ने को तैयार था, सो एक भरपूर धक्का देकर अपने नाग का फन उसकी रस गागर के अंतिम सतह तक पहुँचकर अपने वीर्य की पिचकारियाँ मारने लगा…

दोनो की जांघों के बीच का भाग इस कदर एक दूसरे से चिपक गया, मानो फेविकोल का मजबूत जोड़ लगा दिया हो, जो कभी छूटेगा नही…

दो मिनिट तक रंगीली अपनी कमर उठाए लाला के लंड पर अपनी मुनिया को दबाए रही, फिर जब उसकी एक एक बूँद नीचूड़ गयी, तब उसकी पीठ बिस्तर से टच हुई…

वो बेसूध हो चुकी थी, उसे इतना भी होश नही रहा कि एक 80+ केजी का मर्द उसके नाज़ुक बदन के उपर पड़ा है…

उधर लाला भी ऐसी जानदार लगभग कोरी करारी चूत पाकर पूरी शक्ति लगाकर झड़े थे, सो वो भी उसके उपर पसर कर हाँफने लगे…..!

कुछ देर बाद लाला को होश आया, तो वो रंगीली के होंठों पर एक किस करके उसके बगल में लुढ़क गये…,

लंड के बाहर आते ही, ढेर सारा मसाला भल्भलाकर उसकी चूत से बाहर निकल पड़ा, और लाला की गद्दी उसे सोखती रही..

करवट से लेते लाला, अपने सर को एक हाथ का सहारा देकर, रंगीली के शांत पड़े मासूम चेहरे को बड़े प्यार से ताक रहे थे…!

वो इस समय अपनी जिंदगी के पहले ऐसे जबरदस्त स्खलन को पाकर एकदम शांत चित्त आँखें बंद किए हुए, इतनी मासूम किसी गुड़िया सी पड़ी हुई थी…!

उसके मासूम चेहरे पर नज़र गढ़ाए, एक बारगी लाला जैसे ठर्की आदमी के मन में भी आत्मग्लानि सी होने लगी.., उनके दिल ने कहा –

तूने इस मासूम को छल से पाया है धरम दास, अपने आप से वादा कर कि कभी इसे धोका नही देगा…!

उसने मन ही मन अपने आप से ये वादा किया कि अपने जीते जी, वो कभी भी इस मासूम को कोई दुख नही होने देगा…!

ये सोचकर उसने उसके गाल को सहला कर उसके माथे को चूम लिया, रंगीली की आँखें खुल गयी, जब उसने लाला को अपने उपर झुके हुए पाया, तो अपनी पतली-पतली बाहें उसके गले में डाल दी…

आगे से एक किस उनके होंठों पर लेकर बोली – धन्यवाद मालिक हमें एक संपूर्ण औरत होने का एहसास दिलाने के लिए…!

लाला ने उसके गाल चूमकर कहा – तुम्हें कोई दुख या ग्लानि तो नही हमारे साथ ये सब करके..?

वो उनके गले लगकर बोली – इन सब बातों का समय अब बीत चुका है मालिक…, अब मेरा सुख-दुख, जीना-मरना सब आपके हाथ में है..

लाला ने बड़े प्यार से उसके बदन को सहलाते हुए कहा – अब हम तुम्हें कोई दुख नही होने देंगे रंगीली, तुमने हमारा प्यार अपनाकर हमें अपना बना लिया है…

लेकिन अब तुम्हें हमारी एक बात माननी होगी…

उसने सवालिया निगाहों से उन्हें देखा…

लाला – अब तुम हमें मालिक कहना बंद करदो.., तुम्हारे मूह से अब ये शब्द हमें अच्छा नही लगता…

हम महसूस करते हैं, जैसे कोई गुलाम हमारे शरीर की ज़रूरतें पूरी कर रही हो…!

रंगीली – तो आप ही बताइए हम आपको क्या कहें..?

लाला – कुच्छ भी, जो तुम्हारा मन कहे…!

रंगीली – तो ठीक है, आज से हम अकेले में आपको धरमजी या लाला जी कहेंगे, लेकिन दूसरों के सामने मालिक ही कहना पड़ेगा, वरना लोगों को शक़ पैदा हो सकता है..

लाला – ठीक है, तुम्हारी ये बात हमें जायज़ लगी… और हां तुम्हारे मूह से धरमजी सुनना हमे अच्छा लगेगा…एक बार और बोलो ना.…!

ओह धरमजी… धन्यवाद.. ये कहकर वो उनकी चौड़ी छाती में समा गयी…!

कुच्छ देर बाद लाला के हाथ एक बार फिर शरारत पर उतर आए, और कुच्छ ही देर पहले गुजरा हुआ तूफान फिर से वापस आने लगा…!

लाला ने उसे अपने उपर ले लिया, और उसके होंठों को चूस्ते हुए उसकी पीठ सहलाते रहे, फिर उनके हाथ नीचे को उतरते हुए उसके गोल-गोल छोटे लेकिन सुडौल नितंबों पर पहुँच गये…

नितंबों को सहलाते हुए उन्होने उन्हें अपने हाथों में लेकर मसल दिया…!
आअहह…धराममजि…ज़ोर्से नहिी…राजाजी…..!
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10-16-2019, 01:43 PM,
#22
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
सेठ ने अपनी एक उंगली उसके नितंबों की दरार में रख कर उसे उपर नीचे करते हुए कहा – आअहह…रंगीली मेरी जान, तुम्हारे मूह से राजाजी…सुनकर हमें बहुत अच्छा लगा…एक बार फिर से कहो ना…

रंगीली ने एक कामुक अंदाज में उनकी तरफ देखा, और बोली – ऊओ राजाजी…कहकर वो उनके होंठों पर टूट पड़ी…

अब उसे भी थोड़ा-थोड़ा ज्ञान होने लगा था, कि मर्द औरत को ज़्यादा मज़ा कैसे लेना चाहिए सो वो कुच्छ देर उनके होंठ चुस्ती रही, और लाला जी उसकी गांद की दरार में उंगली घूमाते रहे…

फिर वो धीरे-धीरे नीचे को सरकने लगी, उसके छोटे-छोटे कठोर अमरूद लाला की छाती से रगड़ खाते हुए नीचे की तरफ बढ़ रहे थे…!

रगड़ने से उसके छोटे-छोटे निपल्स किस्मिस के दाने की तरह खड़े हो गये, जो लाला के बदन में सनसनी पैदा करने के लिए काफ़ी थे…!

आहिस्ता-आहिस्ता नीचे को सरकती रंगीली के तपते लज़ीज़ होंठ उनके सीने पर पहुँच गये…, फिर उसने लाला जी के मोटे-मोटे चुचकों को जीभ से चाट लिया…

अब आहें भरने की बारी लाला की थी…आअहह….मेरी जान…क्या कमाल करती हो..
ये कहकर उन्होने उन्माद में आकर अपनी एक उंगली उसकी गान्ड के संकरे कथयि छेद में डाल दी…!

रंगीली ने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर फ़ौरन उनकी कलाई थाम ली, अपनी मदभरी नसीली आँखों को उनके चेहरे पर गढ़ा कर बोली – वहाँ उंगली नही राजाजी…!

इधर लाला का लंड फिर से खड़ा होने लगा था, जो उसकी ताज़ा खुली चूत की रसीली फांकों के बीच लेटा पड़ा था…!

फिर वो उनको किस करती हुई उनकी जांघों के बीच आगयि, अब तक लाला का नाग पूरी तरह फन फैला चक्का था, वो उसे मुट्ठी में लेकर उलट पलट कर देखने लगी…!

लाला का गोरा, मोटा तगड़ा लंड हाथ में लेकर, वो अपनी पतली सी नाज़ुक कलाई उसके बराबर में रखा कर दोनो की तुलना करने लगी, उसको थोड़ा ही 19-20 का फ़र्क नज़र आया… वो अपने मूह पर हाथ रखकर बोली –
हाए दैयाअ….ये इतना तगड़ा, मेरी कलाई जितना, मेरी छोटी सी इसमें कैसे चला गया…?

लाला उसकी नादानी से भरी बात सुनकर बोले – अरे मेरी रानी, एक दिन इससे भी तगड़ा बच्चा भी इसमें से निकालोगी,

सच बताना, तुम्हें इसे लेकर ज़्यादा मज़ा आया कि नही…, उसने हां में अपनी गर्दन हिला दी, तो लाला फिर बोले –

औरत को जितना मोटा तगड़ा लंड जितनी ज़्यादा देर तक उसकी चूत की कुटाई कर सके उतना ही ज़्यादा मज़ा आता है.. समझी…

अब थोड़ा इसे अपने मूह में लेकर चूसो, तुम्हें और तरह का मज़ा आएगा…!

वो आश्चर्य से उनके लंड को देखते हुए बोली – इसे मूह में लेकर चूसा भी जाता है..?

लाला – हां रानी, जैसे मेने तुम्हारी चूत को चूसा था, तुम्हें मज़ा आया था ना.., ऐसे ही इसे चूसने में और मज़ा आएगा…!

रंगीली ने लाला की बात मानकर उसे एक बार पूरा सुपाडा खोलकर देखा, फिर उसके पीहोल पर हल्के से अपनी जीभ लगाकर टेस्ट किया,

उसकी जीभ को हाल के झड़े लंड और उसकी चूत के रस का मिला जुला कुच्छ अजीब सा स्वाद लगा…!

लेकिन उसमें से आरहि खुसबु से वो मस्त हो गयी, और उसपर अपनी नाक रगड़ कर एक ज़ोर की साँस खींची…

लंड की खुसबु से ही वो गन्गना गयी, उसने बिना देर किए उसे गडप्प कर लिया और उसे लॉलीपोप समझ कर चूसने लगी…!

आशीर्वाद की तरह लाला का हाथ उसके सर पर पहुँच गया, और वो मज़े में आहें भरते हुए बोले – आआहह….रानी ऐसे ही.. और ज़ोर्से चूसो…शाबास..

रंगीली कभी उसे चौथाई तक अंदर ले जाती, तो कभी आधा तक, कमाल की बात ये थी, कि वो लंड लाला का चूस रही थी, लेकिन पानी उसकी मुनिया से चुहुने लगा…

सो अपना एक हाथ वो अपनी जांघों के बीच ले गयी, और साथ में अपनी चूत को सहलाने लगी…!

उसके लंबे घने बाल उसकी पीठ से होकर उसके चेहरे के दोनो तरफ आ रहे थे, जिन्हें सेठ जी दूसरे हाथ से संवारते जा रहे थे…!

सेठ को अब सहन करना मुश्किल होता जा रहा था, सो उन्होने उसके दोनो कंधे पकड़ कर अपने उपर खींच लिया, और अपनी कमर पर बिठाकर बोले-

आहह.. रंगीली, अब तुम अपनी चूत खोलकर मेरे लंड के उपर बैठो…!

लाला की मनसा समझकर रंगीली के शरीर में सनसनी सी फैल गयी, वो उनके लंड पर बैठकर चुदने के एहसास से ही गीली हो उठी,

उसने एक बार लाला के लंड को पेट की तरफ किया और फिर अपनी चूत की फांकों को फैला कर उसकी लंबाई पर रख कर वो आगे पीछे सरकने लगी…!

मात्र दोनो के अंगों के मिलन से ही दोनो को इतना मज़ा आया कि उनकी आँखें बंद हो गयी, और दोनो एक साथ सिसकने लगे….आअहह….सस्सिईईई…राजाजीी…मज़ा..आअराहहाअ..हहाइईइ…

हाआन्न, मेरी राणिि…उउफ़फ्फ़…तुम तो कमाल पे कमाल..कर रही हूओ…

ऊहह…अब इसे जल्दी से अंदर लो…, वरना ये अपना जहर उगल देगा….!

रंगीली – आअहह….लाला जी..मुझे तो ऐसे ही बहुत मज़ा आरहा है…निकाल दो अपना जहर…!

लाला - नहिी..मेरी जान, वरना तुम प्यासी रह जाओगी….आअहह…अब बंद करो ऐसा…

प्यासी रह जाने के डर से रंगीली ने फ़ौरन उसे पकड़कर अपने छेद पर सेट किया, और धीरे से अपनी गान्ड का वजन डाला,

रस से लबालब भरी चूत में वो आधे तक अपने आप ही सरक गया, अपनी चूत में भरापन महसूस करते ही रंगीली की आहह…निकल गयी, और उसने अपने होंठ कस कर बंद कर लिए…

कुच्छ और कोशिश के बाद वो उनके मूसल को जड़ तक अपनी मुनिया में ले गयी…

चूत की अंतिम गहराई तक उनके मोटे दहक्ते सुपाडे को महसूस करके वो हाँफने लगी…, फिर आगे झुक कर उनके होंठों को चूम लिया,
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10-16-2019, 01:43 PM,
#23
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
लाला के बड़े-बड़े हाथों ने उसके दोनो कच्चे अनारों को ढक लिया, और वो उन्हें मसल्ने लगे…! रंगीली की कमर अपने आप आगे पीछे होने लगी…

कुछ देर वो बस लाला के उपर अपने गान्ड को रगड़ती रही, पीछे होने पर जैसे ही लंड की रगड़ उसके भग नासे को रगड़ती, वो मज़े की नयी उँचाइयों को पार कर जाती…

फिर लाला ने उसकी गान्ड को थाम कर थोड़ा उचकाया, और नीचे से अपनी कमर चलाने लगे, धीरे-धीरे नीचे से ही उनकी कमर चलाने की रफ़्तार इतनी तेज हो गयी, कि लंड की रगड़ से रंगीली की चूत की दीवारें सुन्न सी हो गयी..

उसकी सुरंग लगातार चूह रही थी, जिसका बूँद-बूँद रस लाला जी की झान्टो को गीला कर रहा था,

रंगीली अपने घुटनों पर होकर ताल से ताल मिलाती हुई उनका साथ दे रही थी, दोनो की ट्यूनिंग अपने आप मॅच हो गयी, लाला की कमर का उपर होना, सेम टाइम रंगीली की गान्ड का नीचे आना…,

फिर एक समय ऐसा आया कि लाला की हुंकार और रंगीली की सिसकी लयबद्ध होकर एक साथ ही झड़ने लगे...,

दो-तीन तगड़े धक्कों के बाद वो एक दूसरे से चिपक गये…….!

लाला जैसे बलिष्ठ और अनुभवी मर्द का शानदार लंड लेकर रंगीली के जिस्म की प्यास पूरी तरह बुझ गयी थी…!

चमेली के कहे हुए शब्द उसके कानों में गूँज रहे थे, और अब वो उसकी चुदाई की दास्तान से अपनी आज की चुदाई की तुलना करते हुए मुस्करा उठी…

वो मन ही मन बुद-बुदा उठी…, हम भी कुछ कम नही है मेरी सखी…!

उस रात सुबह भोर होने तक वो दोनो चुदाई का भरपूर अनद उठाते रहे, लाला के अनुभवों ने रंगीली के बदन का पोर-पोर हिला डाला था,

आख़िरी चुदाई के बाद वो गुसलखाने से बाहर आकर अपने कपड़े पहनते हुए बोली – अब में निकलती हूँ धरमजी, वरना लोग जाग जाएँगे, और हां आज मे काम पर नही आ पाउन्गि…

लाला ने बड़े प्यार से उसके होंठों को चूम लिया और बोले– अब तुम्हें किसी भी बात के लिए हमसे इज़ाज़त लेने की ज़रूरत नही है मेरी रानी, जो चाहो, जैसे चाहो वैसा ही करो, कोई तुम्हें रोकने-टोकने वाला नही है..

और वैसे भी तुम हमारे ही कामों के लिए हो, तो दूसरा कोई तुमसे कुछ भी बोलने से रहा..

इतना कह कर उन्होने एक दूसरे को पहले मिलन का विदाई किस किया, और रंगीली चुप-चाप पौ फटने से पहले अपने घर आगयि, जहाँ अभी भी सब लोग दवा के असर में खर्राटे लेते हुए सो रहे थे..

रंगीली का पूरा बदन अब पके फोड़े की तरह दुख रहा था, लाला ने उसे पूरा दम-खम लगाकर रौंदा था, वो भी उनका भरपूर साथ देती रही थी,

थकान से उसका बदन टूट रहा था, सो आते ही बिस्तर पर पड़ गयी.., और पड़ते ही दीन दुनिया से दूर गहरी नींद के आगोश में चली गयी..

सूरज काफ़ी उपर चढ़ आया था, उसका पति ना जाने कब अपने काम पर चला गया, एक बार उसने उसे उठाने की कोशिश भी की लेकिन वो हिली भी नही…

फिर जब उसकी सास ने बहुत कोशिश करके उठाया, तो वो तबीयत ठीक नही है का बहाना करके फिर से सो गयी, और सीधी दोपहर को ही उठी…!

वो कहावत हैं ना “आवश्यकता ही अविष्कार की जननी होती है”....!

सीधी-साधी गाओं की अल्हड़ नव यौवाना में ना जाने कहाँ से इतनी अकल आ गयी, कि उसने सोते-सोते ही ये बहाना गढ़ दिया…

उठने के बाद आज उसका जिस्म एकदम हल्का-फूलका और तरोताज़ा लग रहा था, हालाँकि एक मीठा सा दर्द ज़रूर था उसकी जांघों के बीच,

लेकिन आज ये दर्द भी उसे दवा से भी अधिक सुकून दे रहा था…, उठने के बाद उसने झट-पट से घर के सारे काम निपटाए…!

आज वो बहुत खुश थी, उसका मन कर रहा था, वो नाचे, सारे घर में झूमती फिरे, लेकिन फिलहाल उसे अपनी ये इच्छा दबानी पड़ेगी,

क्योंकि घर की नयी नवेली बहू जिसे ब्याह कर आए अभी कुछ महीने ही तो गुज़रे थे, भला अकेले-अकेले ऐसे ही नाचने लगे,

ना जाने लोग क्या सोचेंगे उसके बारे में, कैसी जवानी की मस्तानी बहू है, अकेले-अकेले ही नाच रही है…

लोक लाज के कारण उसे अपना मन मसोस के रहना पड़ा…, लेकिन अपनी बहू को इस तरह खुश देख कर उसकी सास बड़ी खुश थी,

उसको लगा कि शायद उसका बेटा काम पर जाने से पहले बहू की जम कर चुदाई करके गया होगा, तभी तो वो इतनी देर तक सोती रही है…!

सास अपने ही विचारों से खुस हो रही थी कि चलो अच्छा है, जल्दी ही एक पोते या पोती का मूह देखने को मिलेगा…!

बहरहाल घर की दोनो ही औरतें अपने-अपने ही विचारों की वजह से खुश थी…

दूसरे दिन से ही अब रंगीली ने लाला के नाश्ते से खाने तक की सारी ज़िम्मेदारियाँ अपने सिर ले ली, ये कहने की बात नही कि वो कैसे मिली…

अरे भाई ! लाला ने दे दी…, अब कोई और लाला की गद्दी पर आता ही नही था, सो लाला और रंगीली दोनो ही दिन में भी मौका निकालकर एक दूसरे में समा जाते…

कभी रात-रात भर तो कभी दिन में ही एक-दो राउंड वो भरपूर चुदाई करते, लाला उसे भी अपने साथ ही खाने के लिए बिठा लेते,

दूध- दही-घी का खाना, बादाम पिसता का हलवा, जो भी लाला खाते, वही रंगीली को खाने को मिलने लगा, उपर से लाला के लंड की भरपूर मलाई…

रंगीली की पाँचों उंगली घी में और सर कढ़ाई में था आजकल, नतीजा वो दिनो दिन गदराती जा रही थी,
सुन्दर तो वो पहले से ही थी, अच्छा खाने पीने के कारण शरीर में खून की मात्रा बढ़ने से बदन में और लाली बढ़ गयी…!

देखा जाए तो वो एक तरह से हवेली की मालकिन की तरह ही रह रही थी, दिन यूँही बड़े चैन से गुजर रहे थे…!
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10-16-2019, 01:44 PM,
#24
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
कभी-कभार जब उसके पति रामू का मन चल जाता, तो वो उसको भी खुश कर देती, लेकिन उससे उसकी मुनिया का भोग भी नही लग पाता…

कहाँ 7” लंबा और 2.5” मोटा लाला का खूँटे जैसा लंड और कहाँ उसके पति रामू की उंगली के बराबर की लुल्ली..,

उसे ऐसा लगता जैसे लाला जी उसकी चूत चाटते वक़्त उंगली कर रहे हों…!

खैर जो भी हो आख़िर वो उसका लाइसेन्स धारी पति था, जिसकी आड़ में वो लाला के लंड के मज़े ले पा रही थी, तो उसका भी फ़र्ज़ था उसको उसके हिस्से की खुशी देने का…

और जैसे भी हो वो ये दोहरी ज़िम्मेदारी बखूबी निभा रही थी, और साथ साथ में अपने लल्लू पति को थोड़े बहुत गुण भी सिखाने लगी,

जिससे वो कम से कम एक बारगी उसकी प्यास तो बुझा सके…, लेकिन ये अभी तक संभव नही हो पा रहा था…

ऐसे ही एक महीना जाने कब बीत गया, रंगीली को पता ही नही चला, वैसे भी सुख के 100 दिन भी कम लगते है, और दुख का एक पल भी भारी पड़ता है…

और यहाँ तो रंगीली के चारों तरफ सुख की गंगा बह रही थी, लाला ने अपने वादे के मुताबिक किसी दूसरी औरत की तरफ आँख उठा कर भी देखना बंद कर दिया था…

और देखे भी क्यों..? जब उसके आगोश में हर समय एक इंद्रालोक की अप्सरा जो रहती थी, उन दोनो का जब भी मन करता कुछ भी करके अपनी इच्छा पूरी कर ही लेते थे…

अब तो लाला ने बसूली का ज़्यादातर काम मुनीम को ही सौंप रखा था, वो अब खुद लोगों के पास कम ही जाते थे…!

दिन बड़े अमन चैन से कट रहे थे, कि तभी एक दिन वो हुआ जिसकी रंगीली को कोई आशा नही थी……….!

रंगीली अपनी मस्ती में अपने मासिकधर्म (पीरियड्स) को ही भूल गयी थी, भूल क्या गयी थी, बेचारी को कोई अंदाज़ा ही नही था, कि इस बार मासिकधर्म ना आने की क्या वजह है..?

वो तो ये समझ बैठी थी, कि इतनी रोज-रोज की चुदाई के बाद वैसे ही उसके बोर की सफाई हो रही है नही आया होगा, इसलिए उसने इस बात पर गहराई से ध्यान ही नही दिया…

लेकिन एक दिन सुबह ही सुबह उसका जी मिचलाने लगा, तो उसने कुछ घरेलू नुस्खे कर लिए, कुछ चूरन, अजवाइन वग़ैरह खाकर, लेकिन उससे भी कोई फ़ायदा नही हुआ और उल्टियाँ होने लगी,

एक-दो बार तो सोचा कि कब्ज वग़ैरह हो गयी होगी, लाला जी खिलाते भी तो बहुत हैं, सही से पाचन नही हुआ होगा…!

लेकिन वो लगातार हुए जा रही थी, जब ये बात उसकी सास को पता लगी, अनुभवी सास समझ गयी कि उसके बेटे की मेहनत जल्दी ही रंग ले आई… उसे अपने बेटे पर फक्र महसूस होने लगा..

बात पहुँचते-2 लाला के कानों तक भी चली गयी, उनको उसकी चिंता सताने लगी, आज वो काम पर भी तो नही आई थी…

सो उन्होने मुनीम से कहकर अपने काबिल हकीम जी को उसे चेक करने के लिए भेज दिया…!

नब्ज़ पकड़ते ही हकीम जी ने बता दिया कि बहू उम्मीद से (माँ बनने वाली) है..!

हकीम जी की बात सुनकर रंगीली के सर पर मानो गाज गिर पड़ी हो, उसकी आँखों के सामने अंधेरा सा छा गया, जैसे तैसे उसने अपने आपको संभाला…

वो अभी इसके लिए तैयार नही थी, एक तो इतनी कम उम्र में माँ बनना, कैसे निभा पाएगी वो इस ज़िम्मेदारी को…!

दूसरा उसका लाला जी के साथ रोज़ का जो खेल चल रहा था, उसमें रुकावट आ सकती थी..!

अब जो भी हो, लाला जी से बात करके ही वो कोई फ़ैसला लेगी…, सो थोड़ी सी तबीयत सही होते ही वो हवेली पहुँच गयी…!

मिलने को अधीर लाला ने उसे अपनी बाहों में लेकर पुछा - क्या हुआ था तुम्हें रंगीली…?

उसने उन्हें सारी बात बताई, तो वो थोड़े चिंतित होकर बोले – वैसे तुम्हें क्या लगता है, किसका अंश होगा ये…?

उसने चोंक कर लाला की तरफ देखा, उनकी बात उसे अच्छी नही लगी सो थोड़े तल्ख़ लहजे में बोली – क्या मतलव है आपका..?

क्या आप मुझे कोई रंडी या छिनाल समझते हैं, जिसे ये बताना पड़े कि उसके पेट में किसका अंश है…? इतना कहते-कहते उसकी आँखें नम हो गयी..!

लाला अपनी ग़लती का एहसास होते ही फ़ौरन बात संभालते हुए बोले – मेरा कहने का ये मतलव नही था रंगीली…!

तुम हमारे अलावा अपने पति के साथ भी तो सोती होगी, कभी-कभार वो भी तो चुदाई करता ही होगा ना, तो शायद उसका…!

लाला ने जानबूझकर अपना वाक्य अधूरा छ्चोड़ दिया, रंगीली उनकी बात सुनकर मुस्करा उठी और उनके हथियार को हाथ में लेकर बोली –

आपको क्या लगता है, जहाँ तक ये पहुँच जाता है, वहाँ उनकी वो उंगली के बराबर की लुल्ली पहुँच पाती होगी…?

और वैसे भी वो तो मुझे गरम भी नही कर पाते, उससे पहले ही टपक जाते हैं…!

लाला रंगीली की बात सुनकर हँसने लगे और फिर उसके गालों को सहला कर बोले – तो इसका मतलब ये हमारा ही अंश है तुम्हारे पेट में…!

लेकिन अभी तो हमें मिले हुए दो महीने भी नही हुए, इतना जल्दी…!

रंगीली लजा कर बोली – वो हम जब पहली बार आपसे मिले थे, उससे एक हफ्ते पहले ही हमारा मासिक धर्म आया था, शायद वोही ठहर गया…,

लेकिन अब क्या करें हमें तो बड़ा डर लग रहा है धरमजी…!

लाला – इसमें डरने की कोन्सि बात है, तुम किसी की व्यहता हो, तो माँ बनाने में कैसा डर…!

रंगीली – आप समझ नही रहे हैं, बात वो नही है.., अभी हमारी उमर ही क्या है, अभी से एक बच्चे की परवरिश हमसे नही हो पाएगी…

और फिर उसके चलते हम आपके साथ वो सब कैसे…..! शर्म से वो अपनी बात पूरी नही कर सकी…
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10-16-2019, 01:44 PM,
#25
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
लाला ने मुस्करा कर उसे अपने सीने से लगा लिया और उसके कूल्हे जो अब पहले से कुछ भारी होते जारहे थे उनको सहलाते हुए कहा –

तुमसे किसने कह दिया की बच्चे के पेट में रहते हुए चुदाई बंद करनी पड़ती है, बस कुछ दिन एहतियात बरतना होगा…

और एक राज की बात बताऊ, ऐसे समय में तो चुदाई करने में एक अलग सा ही मज़ा आता है…आअहह…पुछो मत…. लाला जी अपना लॉडा मसलकर बोले…

रंगीली खुश होते हुए बोली – सच ! वो सब कर सकते हैं.., बच्चे पर उसका कोई असर नही होगा…?

लाला – बिल्कुल नही.., मेने तो कल्लू के जन्म से एक दिन पहले भी सेठानी की जमकर चुदाई की थी, तो उल्टा उससे प्रसव में और आसानी हो गयी थी…, बस थोड़ा लंड को ज़्यादा अंदर तक नही डालना चाहिए, जिससे बच्चे के शरीर को कोई नुकसान पहुँचे….!

और रही बात हमारे बच्चे के लालन-पालन की, तो हम कुछ भी करके तुम्हें यहीं हवेली में ही रहने के लिए एक कमरा दिलवा देंगे, हम नही चाहते कि हमारे बच्चे की परवरिश उस झोपडे में हो…!

लाला जी की बात सुनकर वो गद-गद हो गयी, और वो उनसे और ज़ोर से कस कर लिपट गयी…, फिर कुछ सोच कर आगे बोली –
लेकिन लाला जी, बच्चे के जन्म के बाद कहीं आप हमें प्यार करना कम तो नही कर देंगे…?

रंगीली का इस तरह चिपकने से लाला जी का लंड अकड़ने लगा था, जो अब उसकी मुनिया के उपरी भाग पर ठोकर लगाने लगा था, लाला ने उसकी गान्ड के नीचे हाथ लगाकर उसे थोड़ा उपर को उचका दिया…

अब उनका नाग ठीक अपने बिल के दरवाजे पर दुस्तक दे रहा था…, उसको और दबाते हुए वो बोले – ऐसा क्यों सोच रही हो तुम, हम तुम्हें वचन दे चुके हैं..

तुम्हारा हमेशा ख़याल रखेंगे, और वैसे भी बच्चा होने के बाद तो औरत और ज़्यादा मस्त भर जाती है, चुदाई करने का मज़ा और दुगना हो जाता है,

अब तुम फालतू बातें सोचना बंद करदो, और आगे से अपनी सेहत के बारे में सोचो, अब जो भी तुम खाओगी, पीओगी, उसका कुछ अंश इस बच्चे को जाने वाला है समझी....

ये कहकर उन्होने उसे अपनी गोद में उठा लिया, और गद्दी पर लिटाकर उसके दिनो-दिन विकसित हो रहे अंगों से खेलने लगे…!

जल्दी ही उनके कपड़े शरीर से जुदा हो गये और वो दोनो अपने परम प्रिय खेल में जुट गये..!

लाला ने उसकी रस बहा रही मुनिया के मूह पर अपना मूह लगा दिया, और उसकी चासनी जो उसकी चूत की फांकों पर आकर जमा होगयि थी उसे अपने जीभ से कुत्ते की तरह चाटने लगे….!

रंगीली कामुक कराह भरते हुए बोली – सस्स्सिईईईईईईईईई…….आअहह… धरम जी…. अब पेलो अपना मूसल इसमें… बहुत खुजली हो रही है……

लाला जी भला अपनी प्रेयशि की बात क्यों टालने लगे, सो उन्होने अपने नाग का फन उसके बिल के द्वार पर रखकर अपनी कमर में एक झटका लगा दिया…

नाग सरसराता हुआ अपने बिल में समाने लगा…, मज़े में आँखें बंद किए रंग्गेली ने भी अपनी कमर को उचका दिया, जिससे रही सही गुंजाइश भी ख़तम हो गयी…

और धपक्क्क्क से लाला की चीकू जैसी गोलियाँ रंगीली की गान्ड से जा टकराई…!

रंगीली के मूह से एक मीठी सी आआहह……निकल गयी, और उसने लाला जी के कंधे में अपने दाँत गढ़ा दिए…!

कुछ देर में बैठक का माहौल ही बदल चुका था, अब वहाँ लोगों के सूद के हिसाब-किताब की जगह रंगीली और लाला के धक्कों की गिनती चालू थी…!

कुच्छ देर बाद लाला जी ने उसे अपने उपर बिठा लिया, और वो लाला जी की सवारी करते हुए उपर से हिचकोले खाती हुई, मस्ती भरी सिसकारियाँ ले रही थी…!

दोनो ही फुल मस्ती में अपने रोज़ के शुग़ल में लगे हुए थे, मानो एक दूसरे को पछाड़ने की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया हो…!

लेकिन दोनो में से कोई भी ये नही चाहता था, कि दूसरा उससे हार जाए…!
15-20 मिनिट के बाद दोनो ही एक दूसरे से हार कर जीत गये…

अब वहाँ पूर्ण शांति च्छा गयी, सिवाय उन दोनो की साँसों के और कुछ सुनाई नही दे रहा था…

दोनो प्रेमी एक दूसरे की बाहों में पड़े अपनी अपनी साँसों की गिनती का हिसाब किताब कर रहे थे…..!

रंगीली के सास ससुर, बहू को उम्मीद से देखकर बड़े ही खुश थे, इस खुशी में उन्होने अपने बेटे को भी शरीक कर लिया…

पहले तो वो ये सुनकर आश्चर्य में पड़ गया, तो उसने इस बात की तस्दीक़ रंगीली से की – उसने शरमाने की जबरदस्त आक्टिंग करते हुए सर हिलाकर हामी भर दी,

रामू को अभी भी विश्वास नही हो पा रहा था, उसको पता था कि वो जब रंगीली को चोदता है, तो उसके बाद के उसके मनोभावों से उसे महसूस होता है, कि वो उसे संतुष्ट नही कर पाया है…

फिर ये इतना जल्दी उम्मीद से कैसे हो सकती है…, लेकिन जो सच्चाई उसके सामने थी, उसे भी नज़र अंदाज नही किया जा सकता है…!

खैर हसी-खुशी सब अच्छा चल रहा था, लाला जी और रंगीली की नित्य की रासलीला निरंतर जारी थी…, वो अब उसको ऐसे आसनों से चोदने में परहेज़ करते जिनसे उसके बच्चे या उसके पेट पर कोई दुष्प्रभाव हो…!

खाने पीने की तो कोई समस्या ही नही थी, लाला जी उसे वो सब खिलाते जिससे उसका और उसके बच्चे दोनो का समान रूप से विकास हो सके…,

प्रेग्नेन्सी के कुछ महीनों में ही रंगीली के अंगों में अप्रत्याशित रूप से परिवर्तन दिखाई देने लगा, अब उसके कूल्हे जहाँ हाथ लगाने पर भी ब-मुश्किल से हिलते थे, वहीं अब उसके चलने से उनमें थिरकन पैदा होने लगी…

अपने कुल्हों की थिरकन वो खुद भी महसूस करती, और चलते हुए कुच्छ ज़्यादा ही गान्ड मटकाने की कोशिश करती, जिसे देखकर लाला जी का सोया हुआ नाग अंगड़ाई लेकर खड़ा होने लगता…!

चुचियाँ भी दिनो-दिन विकसित होती जा रही थी, और अब वो गदर दशहरी आम जैसी हो गयी थी, जिन्हे लाला जी अपने हाथों में लेकर बड़े प्यार से सहला देते थे..!

5 महीने में ही रंगीली का पेट बाहर निकल आया, लाला ने तिकड़म लगाकर उसे हवेली में ही एक कमरा देकर रहने का इंतेज़ाम कर दिया,

उसके सास-ससुर और पति को भला क्या तकलीफ़ हो सकती थी, जब दयालु हृदय लाला ही उसकी देख भाल करवा रहे हैं तो…

इसी बीच रवि की फसल की बसूली का समय भी आगया था, मुनीम के पुछ्ने पर कि बुधिया और राम लाल के खाते नही मिल रहे मालिक,

तो लाला ने कह दिया कि हमने उनका हिसाब किताब चेक किया था, और पाया कि उनके उपर हमारा अब कुछ वकाया नही रहा, सो हमने खाते बंद कर दिए हैं, अब तुम्हें उनसे बसूली करने की कोई ज़रूरत नही है…

चालू मुनीम फ़ौरन ताड़ गया कि असल माजरा क्या है, लेकिन अपने मालिक से बहस करने का उसकी गान्ड में दम नही था…!

रंगीली ने दरवाजे की ओट से दोनो की बातें सुनी थी, लाला जी की बातें सुनकर वो बहुत खुश हुई, और सोचने लगी कि लाला जी कितना मान रखते हैं उसकी बात का..

मुनीम के जाते ही, वो उनके पास आई, और आते ही उनकी गोद में बैठ गयी…!
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10-16-2019, 01:44 PM,
#26
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
लाला ने लपक कर उसे अपनी बाहों में समेटा, और उसके होंठों का रास्पान करते हुए बोले – तुम छिप्कर हमारी बातें सुन रही थी, है ना…

रंगीली ने उनके गले में अपनी मरमरी बाहें डाल दी, अपने रसीले अमरूदो को उनके बालों भरे सीने से रगड़ते हुए बोली –

हां ! और ये जानकार मुझे बड़ी खुशी हुई, कि आपने मुनीम जी को किस तरह से सब कुछ समझा दिया… उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद धरमजी…

रंगीली की गुदगुदी गान्ड के नीचे दबे उनके नाग को अपना फन फैलाने के लिए जगह नही मिल पा रही थी, सो वो रह-रहकर उसकी गान्ड पर ठोकरें मार रहा था…!

उसे जगह देने के लिए लाला जी ने उसे थोड़ा उचकाया, और अपने नाग को हाथ से अड्जस्ट करके उसकी मुनिया की फांकों के उपर रख कर बोले – हमने तुमसे किया हुआ अपना वादा निभाया है बस और कुछ नही…!

कमाने के लिए हमारे पास और बहुत से साधन हैं, तुम्हारे दो घरों के कर्जे माफ़ कर देने से हमें कोई फरक नही पड़ने वाला…!

हम तो बस तुम्हें खुश देखना चाहते हैं.., इतना कहकर लाला जी ने उसके अमरूदो को अपने हाथों में समेटकर मसल दिया…

आआहह…लाला जी, धीरे…दुख़्ते हैं…. रंगीली मादक भरी कराह के साथ बोली

लाला जी – तुम्हारे ये अमरूद इतने रसीले होते जा रहे हैं.., हमारा मन करता है इन्हें खा जायें, इनका रस निचोड़ लें, ज़रा बाहर तो निकालो इन्हें रानी…

रंगीली ने फ़ौरन अपनी चोली के पट खोल दिए, लाला उसके गोल-मटोल गेंद जैसी चुचियों पर भूके कुत्ते की तरह टूट पड़े, मूह में लेकर चूस्ते हुए एक हाथ से दूसरे को मीँजने लगे…

उत्तेजना में रंगीली ने अपने अमरूद लाला की ओर और आगे कर दिए, और और अपनी तरह गर्दन अकडाकर अपनी गान्ड को उनके लंड से घिसने लगी…!

उसकी मुनिया, रस से सराबोर होने लगी, उधर लाला जी का नाग भी घुटन्ने में झाग छोड़ रहा था…!

अब दोनो से सबर करना बहुत मुश्किल होने लगा था, सो आनन फानन में एक दूसरे के कपड़े नोच डाले,

लाला ने रंगीली को एक करवट से लिटाया, और उसकी टाँग उठाकर पीछे से अपना मूसल उसकी रसीली चूत के मूह पर रख कर अपनी गान्ड को आगे सरका दिया…

आअहह…धरमजी….कसम से बहुत मज़ा आरहा है, ऐसे ही और अंदर करो मोरे राजा जी…..,

लाला जी का लंड पूरा उसकी चूत में समा गया, उसकी चूत की फांकों ने उसको बुरी तरह से जकड कर भींच लिया, उसकी अंदर की परतें खुल-बंद होकर उनके लौडे की मसाज करने लगी…

लाला कुछ देर यौंही उसे अंदर डाले पड़े रहे, उनके लंड पर उसकी चूत की परतों की फूल-पिचकने के एहसास ने लाला का मज़ा दुगना कर दिया…!

आहह…रानी देखो तुम्हारी चूत ने मेरे लंड को कैसे जकड लिया है, और अंदर ही अंदर वो संकुचित होकर मानो उसकी मसाज कर रही हो, क्या तुम्हें भी ये एहसास हो रहा है…?

हां ! लाला जी, आअहह….कितना मज़ा आरहा है, बिना धक्कों के ही, ये कैसे हो रहा है…?

ससिईइ…रानी, ये सब तुम्हारे पेट में पल रहे बच्चे की वजह से तुम्हारी चूत अंदर ही अंदर गुदगुदाती है…! अब लंड के जाते ही, वो फुदकने लगी है…

रंगीली ने अपना सर पीछे को किया, और लाला ने थोड़ा उचक कर दोनो के होंठ आपस में जुड़ गये.., और इसी के साथ उन्होने हल्के हल्के धक्के देना शुरू कर दिया…

रंगीली की मदमाती गान्ड के पाटों को मसलते हुए लाला के धक्के निरंतर तेज़ी पकड़ने लगे…,



उन्होने उल्टे लेटे ही लेटे उसे भी अपने उपर ले लिया और उसकी दोनो टाँगों को चौड़ा कर नीचे से ढका-धक धक्कों की बरसात करदी…!

हइई….राजाजी….बहुत मज़ा आ रहा है…और ज़ोर्से…आआईयईई….मैयाअ… मोररीि…र्ररिइ…. गाइिईई….,

रंगीली अपना रस छोड़ कर शांत हो चुकी थी, लाला का भी अब निकलने ही वाला था, सो उन्होने उसे बाहर खींचकर रंगीली के मूह में डाल दिया, और इससे पहले कि वो कुछ समझे ….

दे-दनादन पिचाकरियाँ, उसके गले में उतार दी, आज पहली बार रंगीली लाला जी का माल चख रही थी, कुछ पल तो उसे घिंन सी लगी,

लेकिन जैसे ही उसकी जीभ को उसका स्वाद पता लगा… वो सामने से उनकी एक-एक बूँद चट कर गयी…!

अपने होंठों को जीभ से चाटते हुए बोली – इसका स्वाद तो बड़ा अचह्ा है धरम जी, पहले क्यों नही चखाया…!

लाला – और ये तुम्हें फ़ायदा भी करेगा…! अब तक तुम्हारी चूत प्यासी ना रह जाए इसलिए नही चखाया था..! अब जब तुम्हारी चुदने की इच्छा ना हुआ करे तो इसे चूस लिया करो…!

आज का नया ज्ञान रंगीली के लिए और भी मजेदार रहा, इसी तरह वो रोज नित नये आनद लाला जी से लेने लगी…!
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10-16-2019, 01:44 PM,
#27
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
उधर जब रंगीली के दोनो परिवारों को पता चला कि उनका सब वकाया चुकता हो गया है, और अब लाला को कुछ भी नही देना पड़ेगा, तो वो बड़े खुश हुए…!

रंगीली के माता-पिता अपनी बेटी के उम्मीद से होने की खबर सुनकर अती-प्रशन्न हुए, और वो खुद उसके ससुराल जाकर अपनी बेटी से मिलने पहुँचे, उसे सुखी देख कर उनकी खुशी और दुगनी हो गयी…

समय अपनी मन्थर गति से चल रहा था, रंगीली के प्रसव(डेलिवरी) के दिन नज़दीक आते जा रहे थे…!

रंगीली की सास दुलारी ने उसे अपने घर पर चलने के लिए कहा जिससे वो उसकी देख रेख कर सके…

लेकिन लाला ने उसकी सास को ही हवेली आकर उसकी देख रेख करने को बोल दिया, सो वो रोज़ आकर उसकी अच्छे से देखबाल करने लगी…!

आख़िर वो शुभ दिन आ ही गया, और रंगीली ने एक हृष्ट-पुष्ट और सुन्दर से बच्चे को जन्म दिया…, उसके घर भर में खुशियाँ छा गयी…

उनसे ज़्यादा खुश लाला जी थे, जिन्हें अपने सपनो की मेनका को माँ बनाने का शौभाग्य जो प्राप्त हुआ था…!

एक सुन्दर से बच्चे का बाप बनने की खुशी शायद रामू वरदस्त नही कर पाया, और वो अपने बेटे का मूह देखते ही गुम-सूम सा हो गया…!

पता नही क्यों, वो ये विश्वास नही कर पा रहा था, कि उसकी ढीली ढाली लुल्ली, ऐसा सुंदर बेटा पैदा करने की क्षमता रखती है…!

उसकी माँ ने इस तरह उसके गुम-सूम रहने का कारण पुछा – तो वो टाल गया, लेकिन अनुभवी माँ कुछ-कुछ समझ गयी और बोली….

बेटा कहीं तू ये तो नही सोच रहा कि इतना सुन्दर बेटा तेरा कैसे हो सकता है…?

उसने कोई जबाब नही दिया, लेकिन सवालिया नज़रों से अपनी माँ को अवश्य देखने लगा…!

माँ ने उसे समझाया… देख बेटा, बच्चा अपने माँ और बाप दोनो की छवि होता है..., अब तू खुद देख हमारी बहू लाखों में एक है कि नही, तो वो बच्चा भी तो सुन्दर ही जनेगि ना….

और ये कहते हैं कि अगर बेटा अपनी माँ की छवि लेकर पैदा हो, और बेटी बाप की तो वो बहुत भाग्यशाली होते हैं…

सो तू ये सब फितूर अपने दिमाग़ से निकाल दे और खुश हो जा, कि तू इतने सुन्दर से बेटे का बाप है… अरे तेरी छाति तो गर्व से फूलकर 56” की हो जानी चाहिए, और तू है कि मूह लटकाए हुए है…..!

जैसे तैसे करके रामू को माँ की बात समझ में आ ही गयी, और वो भी अपने बच्चे के पैदा होने की खुशी में खुशी से नाचने लगा…!

बहर हाल बेटे के पैदा होने की खुशियाँ मनाई गयी, बच्चे के नामकरण के लिए उसे वो अपने पति के घर लेकर आई…
नामकरण हुआ, और पंडितजी ने बच्चे का नाम शंकर रखा…जिसे प्यार से उसके दादा-दादी शंकर कहने लगे…

दो-चार महीने तक रंगीली की सास रोज़ आकर बच्चे की देखभाल कर जाती…, माँ-बेटे दोनो की मालिश, वग़ैरह…

फिर जब रंगीली पूरी तरह फिट हो गयी, तो अपनी सास को आने से मना कर दिया, अब वो खुद भी सब कुछ सीख और समझ गयी थी…!

और सबसे बड़ी बात कि अब उसकी मुनिया फिर से खुजलाने लगी थी, सो नही चाहती थी कि कोई उसके और लाला जी के मज़े के बीच रोड़ा अटकाए…!

इधर लाला के बच्चे भी बड़े हो रहे थे…

एक दिन लाला ने रंगीली से कहा – रानी, हम चाहते हैं, कि तुम कल्लू पर भी थोड़ा ध्यान देना शुरू कर दो, उसके ख़ान-पान का ध्यान रखा करो…

वो थोड़ा सा आलसी किस्म का लड़का है, तो तुम उसका ध्यान रखोगी तो वो कुछ सुधरेगा…!

रंगीली ने हामी भर ली, और वो उसके खाने पीने का ख्याल करने लगी…!

इसी तरह एक साल बीत गया, लाला और रंगीली की रासलीला बदस्तूर चलती रही…!

एक दिन जब वो अपने बेटे की मालिश कर रही थी, कि तभी मौका देखकर लाला जी भी वहाँ जा पहुँचे,

वो खड़े खड़े बच्चे के सौंदर्य में खो से गये, सोचने लगे कि काश उनका कल्लू भी इतना सुंदर होता… लेकिन वो तो अपने नाम के मुतविक ही है,

उन्हें सोच में डूबे देखकर रंगीली बोली – क्या सोच रहे हैं लाला जी…?

उसकी बात पर वो एकदम हड़बड़ा गये, फिर सम्भल कर बोले – कुछ नही बस ये देख रहे थे, कि तुम्हारा बेटा कितना सुन्दर है, तुम शुरू से ही उसकी कितनी देखभाल कर रही हो…

काश सेठानी ने भी ऐसे ही कल्लू की देखभाल की होती… खैर जाने दो जो बीत गया सो अब तो आने से रहा, पर अब तुम उसपर भी ध्यान दे रही हो ये अच्छी बात है…

रंगीली – पर धरमजी, ये भी तो आपका ही बेटा है ना, फिर इतना सोच विचार क्यों.., देखिए बिल्कुल आपकी ही छवि है इसमें…!

लाला जी – हां ! सो तो है, पर हम इसे अपना नाम तो नही दे सकते, ये कसक तो हमेशा ही रहेगी…! फिर कुछ सोच कर वो मुस्करा उठे…

रंगीली ने लाला को यूँ मुस्कराते हुए देख कर पुछा – अब क्या हुआ, ऐसे मुस्करा क्यों रहे हैं…?

लाला जी - कभी – कभी हमें ये सोच कर बड़ी हसी आती है, कि जब हमने तुम्हें पहली बार उपले बनाते हुए देखा था, तब यूँ ही तुम्हें पाने के लिए मौज- मौज में एक तरकीब हमने सोच ली…!

उस वक़्त नही पता था, कि वो तरकीब इतनी कामयाब हो जाएगी, कि तुम हमेशा के लिए हमारी हो जाओगी, और हमारे अंश से ऐसा सुन्देर सा बच्चा भी जनोगि…

ये कहकर लाला जी ने प्यार से रंगीली के बेटे के गाल को चूम लिया…!
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10-16-2019, 01:45 PM,
#28
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
जिग्यासा बस रंगीली ने पुछा – वो क्या तरकीब थी लाला जी…,

और फिर मज़े-मज़े में लाला जी ने सारी बात बता दी,

कैसे उन्होने उसके बाप को बातों में फँसाकर लालच देकर रामू जैसे ग़रीब और मरियल से आदमी के साथ उसका ब्याह कराया, फिर कैसे उन्होने रामू और उसके माँ-बाप को क़र्ज़ का डर दिखाकर उसे अपने यहाँ काम पर आने के लिए विवश किया…!

रंगीली, लाला के चेहरे पर टॅक-टॅकी लाए सारी दास्तान सुन रही थी, अंदर ही अंदर उनकी इस गंदी सोच के कारण उसका मन आत्म ग्लानि से भरता चला गया,

अपने जीवन के साथ हुए इतने घिनौने खिलवाड़ के कारण उसका दिल रो पड़ा.., वो तो अब तक इसे विधि का विधान समझ कर जी रही थी…

लेकिन ये सब लाला का बनाया हुआ विधान था, ये जानकार उसका मन खिन्न हो उठा..!

जो प्यार, जो मुहब्बत एक पल पहले तक लाला जी के लिए उसके मन में थी, वो अचानक से ही टूटती नज़र आने लगी, और उसका स्थान नफ़रत ने ले लिया…!

लेकिन वो अपनी स्थिति से भली भाँति परिचित थी, इसलिए उसने अपने मनोभावों पर नियंत्रण कर लिया, और ऐसा एक भी भाव अपने चेहरे पर आने नही दिया, जिससे लाला को लगे कि वो इस खुलासे से दुखी है…!

प्रत्यक्ष में अपने चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हुए बोली – आप तो बड़े चालबाज़ निकले धरमजी…! बताओ, मुझ बेचारी को ऐसे फँसाया आपने…?

लाला – तुम्हें ये सुनकर दुख तो नही हुआ…?

रंगीली – दुख कैसा, अब मेरा बाप कोई धन्ना सेठ तो था नही जो किसी राज घराने में मेरा ब्याह करता, वो तो भला हो आपका जो फोकट में ही मेरा ब्याह करवा दिया…!

और सबसे अच्छा तो यही हुआ कि मे आपके दिल के करीब हूँ, और जो सुख मुझे कभी नही मिल सकते थे, वो मिल रहे हैं…! और क्या चाहिए मुझे…!

उसकी बात सुनकर लाला को राहत पहुँची, क्योंकि कहीं ना कहीं वो खुद भी ये सोच रहे थे, कि ये सच्चाई जानकार रंगीली कहीं उनसे नाराज़ ना हो जाए…!

लेकिन रंगीली अब नाराज़ ही नही हुई बल्कि उसके कोमल मन में नफ़रत का वो बीज़ पनप चुका था, जो आने वाले भविश्य में लाला के खानदान पर बहुत भारी पड़ने वाला था…!

वो अब दिखा देना चाहती थी, कि नारी मात्र ऐसे धन्ना सेठों के इशारे पर चलने वाला खिलौना नही होती..!

वो अपनी पर आजाए तो अच्छे अच्छे राज पटों को मिट्टी में मिला सकती है…!

“त्रिया चरित्रम, पुरुशस्य भाग्यम”

जिससे विक्रमादित्या जैसे राजा भी पार नही पा सके…, तो फिर ये तुच्छ सा लाला क्या चीज़ है…

अब एक नफ़रत की चिंगारी उसके कोमल हृदय में सुलग चुकी थी, जिसके भड़कते ही लाला का सब कुछ तबाह हो जाने वाला था…………….!

समय गुज़रता गया, रंगीली और लाला जी के बीच का रिस्ता और दिनो-दिन प्रगाढ़ होता जा रहा था,

अब रंगीली ने लाला जी से कहकर अपने पति रामू को उनके कारोबार के कामों में ही लगवा दिया, और वो रेलवे यार्ड की पल्लेदारी छोड़ कर वहीं लाला के खेतों में काम करने लगा…

इधर रंगीली लाला और कल्लू की खुराक से बचा-बचा कर कुछ बादाम-पिसता और भी पौष्टिक चीज़ें जो लाला जी अपनी जवानी बरकरार रखने के लिए इस्तेमाल करते थे उन्हें अपने पति रामू को भी खिलाने लगी..जिससे धीरे-धीरे उसके अंदर भी पौरुष बढ़ने लगे…

अब धीरे-धीरे रामू भी अपनी पत्नी के साथ रति सुख का आनंद लेने लगा, उसे अब रंगीली के प्रयासों से अपने अंदर के पौरुष को बढ़ाने की ललक पैदा होने लगी…!

बिस्तर पर रंगीली उसे पूर्ण सुख देने का भरसक प्रयास करती, अपनी कामुक बातों से उसे दम लगाकर चोदने के लिए प्रेरित करती, अब रामू उस पर अटूट विश्वास करने लगा, और उसकी हर बात मानने लगा…!

रामू ने अपनी पत्नी के सुझाव से शहर जाकर एक ऐसे तेल का भी पता कर लिया था, जिससे उसकी लुल्ली, लंड में तब्दील हो सके, उसे लाकर उसने रंगीली को दिखाया..

अब वो चुदाई से पहले उसके लंड की जमकर मालिश करती जिससे अब उसकी लुल्ली, अच्छा-ख़ासा लंड बनती जा रही थी, जिसे रंगीली सही से एंजाय करने लगी…!

लाला के प्रति उसके दिल में नफ़रत, और अपने पति के लिए प्रेम में तब्दीली होती जा रही थी…! आख़िर कुरूप ही सही था तो वो उसका पति ही इस सार्वजनिक जीवन में.

इस सबके बावजूद भी रंगीली ने लाला जी को ये एहसास कभी नही होने दिया कि वो उनके साथ सच्चे मन से चुदाई का मज़ा नही ले रही…!

वो तो अब लाला को पहले से भी ज़्यादा मज़ा देने की कोशिश करती जिससे उसके मन में कोई शक़ पैदा ना हो…!
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10-16-2019, 01:45 PM,
#29
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
इसी श्रंखला में एक दिन लाला का मन रंगीली की गान्ड मारने का हुआ, वो इस समय रंगीली को घोड़ी बनाकर चोद रहे थे…!

दिनो-दिन मोटी होती जा रही उसकी गान्ड देखकर लाला का मन उसकी गान्ड चोदने का हो गया.., वो उसके कूल्हे को थप-थपाकर बोले…

आअहह…मेरी रानी, तुम्हारी ये गान्ड तो दीनो-दिन गदरती जा रही है, उउउफ़फ्फ़.. क्या मस्त मक्खन जैसे गोल-गोल चूतड़ हैं तुम्हारे. मन कर रहा है इसी में अपना लंड डालकर चोद डालूं…!

रंगीली अपनी गान्ड को उनके लंड पर पटकते हुए उनकी तरफ मूह मोड़ कर अपनी नशीली नज़र डालकर बोली – हाईए…लाला जी, ये भी कोई मारने की चीज़ है भला..,

आप भी ना दिनो-दिन नये-नये सुगल सीखते जा रहे हो…!

लाला जी ज़ोर्से धक्का लगाते हुए बोले – ससुउउ…आअहह…मेरी सोन चिरैया…ये कोई नया सुगल नही है…, सेठानी की भी मे कयि बार चोद चुका हूँ, इसको चोदने में बहुत मज़ा आता है…

एक बार डलवाके तो देख, रोज़ गान्ड मारने को ना कहे तो कहना…!

रंगीली मादकता से भरी हुई सिसकी लेकर बोली – सस्स्सिईईईई…आअहह…सही कह रहे हैं…?,

लाला जी – हां रानी !

ये कहकर उन्होने अपनी बीच की उंगली अपने मूह में डालकर लार से गीली की, और वो उसकी गान्ड के भूरे रंग के छेद जिसके आस-पास कत्थयि रंग का फूलनुमा घेरा था में धीरे से डाल दी…

गान्ड में उंगली जाने से रंगीली चिंहूक पड़ी, और उसने अपनी गान्ड के छेद को लाला की उंगली पर ज़ोर्से कस दिया…!

साथ ही उसकी चूत में और ज़ोर्से चींटियाँ सी काटने लगी, और वो और ज़ोर्से सिसकियाँ मारते हुए अपनी चूत को लाला के लंड पर पटकने लगी…!

वो सिसकते हुए बोली – हाए लाला जी ये क्या किया आपने, मेरी चूत में खुजली और बढ़ गयी, चोदो राजा, और ज़ोर से फाडो मेरी चूत…आअहह…हाईए…मईए…तो गयी री…ईईईईई…..!

रंगीली लाला जी से पहले झड चुकी थी, और ये कमाल था, लाला की मोटी उंगली का उसकी गान्ड में डालना…!

लाला ने चुतरस से सना हुआ अपना लंड बाहर खींच लिया, और वो उसे उसी मुद्रा में किए हुए उसकी गान्ड के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगे…!

रंगीली को अपनी गान्ड में गुद-गुदि सी होने लगी, उसे लाला की जीभ अपनी गान्ड के छेद पर बहुत अच्छी लग रही थी,

धीरे-धीरे उसका मन होने लगा कि लाला की जीभ किसी तरह उसके गान्ड के अंदर जाकर चाटे…!

सो वो आअहह…भरते हुए बोली – हाईए…लाला जी, अपनी जीभ को थोड़ा अंदर करो ना…!

अनुभवी लाला समझ गया, कि इसे गान्ड में मज़ा आरहा है, अतः उसने उसे चाटना बंद कर दिया, और अपनी उंगली फिर से उसकी गान्ड में डालते हुए बोले –

रानी , जीभ तो जीभ होती है, अंदर तो लंड ही जा पाएगा, तुम कहो तो डाल दूँ…

रंगीली कराह कर बोली – हाए राजाजी, दर्द तो नही होगा ना,..?

लाला – नही दर्द नही होने दूँगा, तुम देखती जाओ..

रंगीली – हाए तो डालो ना..,

उसकी रज़ामंदी पाकर लाला खुश हो गया, और पीन्शोप से एक दिया लाकर उसका तेल उसकी गान्ड के छेद पर डाला, उंगली डालकर अंदर तक उसे चिकना किया…

फिर थोड़ा सा तेल अपने मूसल पर चुपड कर उसे गान्ड के छेद पर टिकाया, और एक तगड़ा सा धक्का दे मारा…..!
आआईयईई….मैयाअ रीि…..लाला जी फट गयी…मेरी गान्ड….हाईए…दैयाआ…. निकालो ईसीए…

लाला ने उसके कूल्हे को सहला कर कहा – बस रानी आधा तो चला गया, अब थोड़ा सा और सहन कर ले, फिर मज़े ही मज़े…हैं…!

रंगीली कराहते हुए बोली – उउउफफफ्फ़… तो थोड़ा रूको, मुझे साँस लेने दो..!

लाला रुक कर उसकी पीठ चाटते हुए, एक हाथ से उसकी चुचियों को मसल्ते रहे..फिर जब उसे कुछ राहत हुई, तो उन्होने अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा,

तुम थोड़ा अपनी गान्ड को ढीला रखना रानी, ये कहकर लाला ने अपनी साँस रोक कर एक तगड़ा सा धक्का देकर पूरा लंड उसकी संकरी गान्ड में फिट कर दिया…,

रंगीली के फरिस्ते कून्च कर गये, उसे अपनी गान्ड चीरती हुई सी लगी…

वो रोते हुए बोली – बड़े निर्दयी हो लाला जी, फाड़ ही दी मेरी गान्ड, हाए मैयाअ मोरी, अब तो निकाल लो..., कहीं मज़ा नही है इसमें.. झूठ बोलकर डाल दिया…!

बस इतना ही प्यार करते हैं हमसे, अपने मज़े के लिए दूसरे को दर्द देना, क्या यही प्रेम है.. रंगीली ने रोते हुए ढेर सारी शिकायत कर डाली…!

लाला जी उसकी पीठ चूमकर बोले – ऐसा बिल्कुल नही है मेरी रानी, तुमने खुद ही तो कहा था, कि डाल दो…!

रंगीली – तो हमें क्या पता था, कि इतना दर्द होगा, अब डाले क्यों पड़े हो, अब तो निकालो अपने खूँटे को…, या दम लेकर ही मानोगे…!

लाला ने अपने खूँटे को ज्यों का त्यों गान्ड में गाढ़े रखा, लेकिन उनके हाथ अब उसके मादक बदन पर फिरने लगे थे, कभी वो उसकी पीठ चूमते, कभी चुचियाँ सहलाते…, कभी चूत सहलाते…

नतीजा, रंगीली अपना दर्द भूल गयी, और उसपर चुदाई की खुमारी छाने लगी, उसकी गान्ड हिलने लगी,

लाला ने छोटे-छोटे धक्के देना शुरू किया, अब उसकी गान्ड की अन्द्रुनि दीवारें सेन्सेशन के कारण कुछ ढीली होकर चिकनाने लगी, और उसे भी मज़ा आने लगा…!

लाला अब उसकी चूत सहलाते हुए ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगे, कुछ देर में ही लाला का लंड जबाब दे गया, और उन्होने उसकी कसी हुई गान्ड के सुराख में अपनी पिचकारी छोड़ दी…

अपनी गान्ड में गरम गरम वीर्य की बौछार से रंगीली की चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया, और वो बिस्तर पर औंधे मूह पसर कर हाँफने लगी…!

उसके उपर लाला पड़े हुए अपनी साँसों को इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे थे…!

रंगीली की गान्ड का उद्घाटन करके लाला आज बड़े खुश थे, उन्हें ऐसा लग रहा था, मानो उन्होने कोई बहुत बड़ा अभेद्य क़िल्ला फ़तह कर लिया हो….!
...................

रो-धोकर कल्लू 12वी कक्षा में पहुँच गया था, लाला की बड़ी बेटी प्रिया अब उससे मात्र एक क्लास पीछे यानी 11वी में थी, और छोटी सुप्रिया 9थ में पहुँच गयी…

साथ ही जहाँ कल्लू थोड़ा सावला था वहीं दोनो बेटियाँ 18 साल की होने के बाद ही भरे हुवे बदन की मालकिन बन गयी थी...

इधर रंगीली का बेटा शंकर, दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रहा था, उसे भी उसने गाओं के स्कूल में पढ़ने डाल दिया था...

इस उमर में ही वो इतना सुंदर और तेज दिमाग़ था, कि हर कोई उसको प्यार करने लगता..!

रंगीली उसे सबकी नज़रों से बचाकर उसकी मालिश करना, मेहनत करना, खाने पीने का पूरा ख़याल रखना इस तरह से करती जैसे उसे वो किसी बहुत बड़े मकसद के लिए तैयार कर रही हो…!

इसी बीच उसने अपने पति से एक बेटी को भी जन्म दिया, जिसे शुरू से ही उसने अपने दादा दादी के और पिता के पास छोड़ दिया.., और जब भी उसे मौका मिलता वो शंकर को लेकर अपनी बेटी के पास चली आती…!

ऐसा नही था कि वो उसे प्यार नही करती, हल्के से साँवले रंग की सलौनी उसकी बिटिया भी सुंदर सी गुड़िया थी, बिल्कुल अपनी माँ की छवि,

लेकिन शकरा के लालन पालन में कोई बाधा ना पड़े इसके लिए वो उसे अपने साथ हवेली में नही रखती थी, वरना लाला को भी एतराज हो सकता था…!

शंकर अपनी छोटी बेहन को बेहद प्यार करता था, उसका बस चलता तो वो उसे हर समय अपनी गोद में लिए खेलता रहता, लेकिन रंगीली उसे इसका ज़्यादा मौका नही देती.

उसने शंकर को अभी से इतना अनुशासित बना दिया था, सुबह उठते ही वो शौच इत्यादि से निपट कर उसकी तेल मैलिश करती,

शरीर का ऐसा कोई अंग शेष नही छोड़ती, जहाँ वो मालिश ना करती हो, ख़ासकर उसकी छोटी सी लुल्ली (सू-सू) को अच्छे से मसल-मसल कर मालिश करती, उसके बाद उससे डंड, और बैठक लगवाती…!

शुरू शुरू में वो ना नुकुर करता था, तो वो दो चार डंडे भी फटकार देती..

फिर वो उसे प्यार भी उतना ही करती, जिससे वो उसकी हर बात मानने को तैयार रहता था…!
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10-16-2019, 01:45 PM,
#30
RE: Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक
इधर रंगीली ने कल्लू की खुराक से कटौती करना शुरू कर दिया, और बादाम पिसता के पेस्ट की जगह वो धीरे-धीरे उसे दूध के साथ केले की जड़ का पेस्ट मिलाकर पिलाने लगी…!

इसी बीच कल्लू कुछ ग़लत लड़कों की संगत में भी पड़ गया, वो स्कूल से पढ़ने के बहाने शहर जाता, अपने दोस्तों के साथ पिक्चर देखना, शराब पीना…

पैसों की उसको कोई कमी नही थी, जितना माँगता उसकी माँ उसे पकड़ा देती, धीरे-धीरे उसने ग़लत औरतों के साथ भी संबंध बना लिए, जो अपने शरीर का इस्तेमाल करके उससे पैसे ऐंठती रहती थी..

कुल मिलकर कल्लू वो सारे काम करने लगा, जिन्हें करने की सलाह कोई भला मानुष कभी अपनी औलाद को नही दे सकता…

समय धीरे-धीरे आगे बढ़ता जा रहा था, दो साल 12थ में बिताने के बाद कल्लू ले दे कर 12वी पास कर ही गया, और उसी के साथ लाला की बड़ी बेटी प्रिया ने भी 12वी पास कर ली…,

कल्लू की बुरी आदतों के बारे में इधर उधर से लाला के कान में भनक पड़ ही गयी, वो उसे लेकर चिंतित होने लगे….

अब लाला को कल्लू से कोई नौकरी तो करानी नही थी, इसलिए उसे ग़लत रास्ते पर चलने से रोकने के लिए अपने ही टक्कर के अपने इलाक़े के एक दूसरे सेठ की लड़की के साथ उसकी शादी करदी…!

और वैसे भी वो 22 साल का हो गया था, शादी लायक तो हो ही गया था…

कल्लू की दुल्हन सुषमा 19 साल की, सुंदर गोरी चिटी, छर्हरे बदन की लड़की थी, कुल मिलकर कल्लू के भाग ही खुल गये एक सुंदर सी पत्नी पाकर..!

प्रिया ने आगे की पढ़ाई करने के लिए शहर के कॉलेज में अड्मिशन ले लिया और वहीं हॉस्टिल में रहकर पढ़ाई करने लगी,

वो भी अब एक कमसिन जवानी से भरपूर सुंदर माल हो चुकी थी, आच्छे ख़ान-पान की वजह से उसके अंगों में कुछ ज़्यादा ही जवानी आ चुकी थी…!

इधर शंकर भी अगली क्लास में पहुँच गया था, वो स्कूल के सभी तरह के खेल कूद और पढ़ाई में हमेशा अब्बल ही आता था,

रंगीली अपने बेटे की सफलताओं पर मन ही मन खुश होती, लेकिन उसने अपनी ये खुशी कभी अपने बेटे तक को भी जाहिर नही होने दी…!

वो बस उसे और आगे बढ़ने की ही प्रेरणा देती रहती थी…!

कल्लू ने शादी के बाद इधर-उधर मुँह मारना कम कर दिया, अब घर में रस मलाई के होते हुए कोई सड़े हुए खाने पर मुँह क्यों मारेगा…

जल्दी ही कल्लू की पत्नी गर्भवती हो गयी, और दो साल के भीतर-भीतर उसने एक सुंदर सी कन्या को जन्म दिया…, जिसका नाम गौरी रखा गया…!

देखते ही देखते 3 साल और बीत गये, लाला ने अपनी दोनो बेटियों का ब्याह कर दिया, अच्छे ख़ासे दहेज के कारण दोनो बेटियाँ शहर के अच्छे कारोबारियों के यहाँ पहुँच गयी थी…!

लेकिन बेटी के जन्म के 3 साल के बाद भी कल्लू की पत्नी को कोई दूसरा बच्चा नही हुआ, तो सेठ और सेठानी दोनो बैचैन हो उठे…!

अब उन्हें दिनो-रात ये चिंता सताए रहती कि क्या वो कभी अपने पोते का मुँह देख पाएँगे या नही, उनकी जयदाद संभालने वाला वारिश पैदा होगा या नही…!

उन्हें कहीं ना कहीं ये लगने लगा कि हो ना हो, कहीं बहू में बेटा पैदा करने के गुण नही है, सेठानी तो कल्लू का दूसरा ब्याह करने की सोचने लगी…!

उनको अपने वारिश को पाने की चाह इतनी बल्बति हो गयी कि आनन फानन में उन्होने मध्यम परिवार की एक लड़की से कल्लू की दूसरी शादी करा दी…!

कल्लू की दूसरी पत्नी इतनी सुंदर तो नही थी, एक ग़रीब बनिया की बेटी, मध्यम कद काठी और रंग रूप वाली एक साधारण सी लड़की नाम था लाजो,

आनन फानन में कल्लू को घर में ही नयी चूत चोदने को मिल गयी, शराब के जाम चढ़कर उसने लाजो के साथ भी सुहागरात मना डाली….!

खेली खाई लाजो, कल्लू के 4 इंच के लंड से उसकी चूत भी गीली नही हो पाई, वो जैसे ही गरम हुई, कल्लू का लंड अपनी लार टपका चुका था,…!

लाजो कल्लू के उपेर चढ़ दौड़ी और अपनी वासना की आग में ये भी भूल गयी कि आज उसकी सुहागरात उसके पति के साथ है, कहीं खेतों में अपने यार से नही चुद रही..

लाजो चिल्लाते हुए बोली – ये क्या है पति देव… तुम तो अभी से हाँफने लगे, ऐसे ही बेटा पैदा करोगे..?

अरे अब ये भैसे की तरह हाँफना बंद करो, और चोदो मुझे, बहुत खुजली हो रही है मेरी चूत में…!

बाजू के कमरे में अपनी बच्ची को दूध पिलाती कल्लू की पहली बीवी सुषमा ये सब सुन रही थी, और मन ही मन सेठ सेठानी को गालियाँ दे रही थी…

साली नीच छिनाल कुतिया, अपने बेटे को तो बब्बर शेर समझ रही थी, उन्न्नह बहू में बेटा पैदा करने वाले गुण नही हैं…

और करवा दे दो चार ब्याह अपने हिजड़े बेटे के, खिलाती रहना पोता…!

अच्छा हुआ ये लाजो आ गई, ये तुम्हारी असलियत दिखाएगी अब…ऐसे ही कुछ बड़बड़ाती हुई सुषमा अपनी बच्ची के सिर पर हाथ फेरती अपना दूध पिलाती रही…

उधर लाजो की खीज़ का कल्लू के उपर कोई असर नही था, वो तो कब का नींद में डूब गया, और लाजो उसकी लुल्ली से खेलते खेलते इस आस में कि शायद ये फिर कुछ कमाल दिखा दे,

लेकिन कल्लू का करेंट तो शराब और नींद से कबका ख़तम हो चुका था, इसलिए लाजो की सारी कोशिशें बेकार थी…

थक कर वो अपनी चूत में दो-दो उंगलियाँ पेल कर अपनी चुचियों को मसल्ते हुए कल्लू को हज़ार गालियाँ सुनाती हुई अपना पानी निकालने की कोशिश करने लगी…!
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