Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
03-19-2020, 11:56 AM,
#11
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
“हल्लो क्लास ..”

ऐसे लगा जैसे समय बहुत ही धीमा चल रहा हो ,मैं उसके होठो के हिलने को भी देख सकता था,फिर मेरी नजर उनकी बड़ी बड़ी आंखों पर गई जो नाचते हुए पूरे क्लास का मुआयना कर रही थी ,माथे में एक छोटी सी टिकली थी और अचानक मैंने उनके पूरे मुखड़े को एक साथ देखा ,

“वाह “

मेरे मुह से अनायास ही निकल गया था ,इतनी सुंदर औरत मैंने आज तक नही देखी थी ,पूरे क्लास के सभी लड़को का मुह मेरी ही तरह खुला हुआ था,तभी रश्मि ने मुझे कोहनी मारी ..

“कुछ तो शर्म करो ,कुत्तों जैसे मुह फाड़ के देख रहे हो “

उसकी बात सुनकर मैं अचानक ही होश में आया ..

“हल्लो क्लास आई आम काजल ,मैं आप लोगो की नई हिस्ट्री टीचर हु ..”

नजर घुमाते हुए उनकी नजर मुझपर पड़ी और मैंने एक आंख बंद करते हुए उन्हें आंख मार दी ,मेरी इस हरकत से वो थोड़ी चौकी लेकिन अपने को सम्हाल के सामान्य करते हुए क्लास से बात करने लगी …….

उनकी इस असहजता को देख कर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई थी


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03-19-2020, 11:56 AM,
#12
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 5

स्कूल के बाद रश्मि ने मुझे लिफ्ट आफर की ..

असल मेरा घर स्कूल से कुछ 2 किलो मीटर की दूरी पर ही था,निशा कार से स्कूल आया करती थी जबकि चंदू अपनी बाइक से ,वही मैं पैदल …

अब ऐसा क्यो था ये बताने की जरूरत नही ,ये मेरे बापू जी के वजह से था,उन्होंने मुझे कोई गाड़ी खरीदकर नही दी थी जबकि मेरे सभी बहनो के पास उनका खुद का कार था..

तो कभी कभी चंदू लिफ्ट दे देता था तो कभी रश्मि मुझे छोड़ दिया करती थी ,तो कभी हम पैदल ही निकल पड़ते थे…

लेकिन आज रश्मि का अपनी स्कूटी में मुझे लिफ्ट देने का एक खास रीजन था जो मुझे बाद में पता चला था..

पहले तो मैंने उसे इनकार कर दिया ..

“मैं बोल रही हु ना चलो ..”

उसने जोर दिया तो मैं मना नही कर पाया ..

मेरे घर और स्कूल के बीच एक सुनसान सी जगह पड़ती थी ,खाली पड़े सरकारी जमीन पर पेड़ पौधे उगाये गए थे जिससे एक छोटा जंगल जैसे बन गया था ,जब हम वंहा से गुजरे तो मैंने देखा सामने लकड़ो का झुंड था ,मुझे समझ आ गया था की रश्मि ने मुझे अपने साथ क्यो लाया है ,क्योकि झुंड में वही मोटा था जिसे मैंने स्कूल में पीटा था,वो अपने गैंग के साथ मेरे आने का इंतजार कर रहा था लेकिन जब उसकी नजर रश्मि पर पड़ी वो बस वही खड़ा रह गया,रश्मि ये बात जानती थी की मोटा उस पसंद करता है और उसके सामने वो कुछ ऐसी वैसी हरकत नही करेगा इसलिए मुझे बचाने के लिए वो मेरे साथ ही आ गई ..उसकी इन्ही बातो पर तो मुझे बेहद प्यार आता था ..

मेरी नजर मोटे पर पड़ी वो खिसियाई निगाहों से मुझे देख रहा था,मैंने उसे दिखाते हुए अपना हाथ रश्मि के कमर पर जकड़ दिया ,मोटे का चहरा और भी गुस्से से भर गया जब उसने मेरे होठो की वो मुस्कान देखी जो मैंने उसे जलाने के लिए अपने चहरे में लाई थी ,वही मेरी इस हरकत से रश्मि जैसे जड़वत हो गई थी ..

जब हम वंहा से निकले तो उसने थोड़ी राहत की सांस ली ..

“मैं जानती थी की ये लोग यंहा तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे”

“तुम पागल हो मुझे बचाने के लिए ये सब किया ,ऐसे बचने की जरूरत तो उन्हें थी ..”

वो मेरी बात सुनकर हंसी

“तुम ना ज्यादा हीरो गिरी मत दिखाओ अब,और ये मेरी कमर को ऐसे क्यो पकड़ कर रखे हो,उसे चिढाना था वो चिढा दिया अब तो छोड़ दो ..”

मैं उसकी कमर छोड़ने की बजाय उसे और जकड़ लिया और खुद को भी उससे चिपका लिया

“ये क्या कर रहे हो “

इस बार उसकी आवाज धीमी थी ..

“तुम जब मुझे ऐसे लोगो से बचाती हो ,मेरे लिए लड़ती ह तो तुमपर बहुत प्यार आता है ,कभी कहने की हिम्मत नही हुई लेकिन आज कह रहा हु “

गाड़ी चलते हुए भी रश्मि का शरीर थोड़ा झुक गया था ..

“सब आज ही कह डालोगे क्या “

रश्मि ने इतना ही कहा था की घर आ गया ..

मैंने उसकी स्कूटी से उतरते हुए उसे देखा

“चलो एक काफी हो जाए मेरी मम्मी बहुत अच्छी काफी बनाती है..”

उसने पहले मेरे चहरे का मुआइना किया फिर मुस्कुराती हुई स्कूटी से उतर गई …

मेरी माँ रश्मि को देखकर बहुत खुश हुई ..

और खूब खातिरदारी भी की ,वही निशा और चंदू का चहरा उसे देखकर उतर ही गया ..उन्होंने एक शब्द भी बात नही की ..

“बेटा घर आते रहा करो तुम्हारी मम्मी और चाची से तो मुलाकात होते ही रहती है लेकिन तुम हमारे घर पहली बार आ रही हो ..”

मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा

“आंटी जी आपके बेटे ने पहली बार तो मुझे अंदर बुलाया है वरना इसे छोड़ने तो आते ही रहती हु,तू बाइक क्यो नही ले लेते “

रश्मि की बात सुनकर मम्मी का चहरा थोड़ा उतर गया इसे सम्हालने के लिए मैं बीच में बोला

“यार अगर बाइक ले लिया तो तुम मुझे छोड़ने कैसे आ पाओगी ,और तुम्हारे पीछे बैठने का जो मजा है वो बाइक का कहा ..”

मैंने रश्मि को आंख भी मार दी जिससे वो थोड़ा झेंपी और आंखों से झूठा गुस्सा दिखाया ..

“बेटा अर्चना(रश्मि की माँ) और सुमन (उसकी चाची ) को कहना की मैं उन्हें याद कर रही थी ..”

माँ ने आखिरी में रश्मि से कहा ……..


रश्मि के जाते ही माँ मेरी तरफ देखते हुए बोली

“क्या इशारे कर रहा था उसे “

मैं हंस पड़ा

“कुछ नही माँ आप भी “

“ऐसे लड़की बहुत अच्छी है “माँ ने फिर से कहा

“आप से सुंदर थोड़ी ना है “

मैंने माँ को जकड़ लिया और उनके गालो में एक जोरदार किस किया

दो तीन किस करने के बाद माँ बोल उठी

“धत पागल कहि के ,छोड़ भी दे अब”

**************

मैं खुश था ,मैं बहुत ही खुश था ,खुशी स्वाभाविक ही आनी चाहिए और स्वाभाविक ही आ रही थी ……

दूसरे दिन मेरी नींद आदत के अनुसार 3 बजे ही खुल गया ,ये वही समय था जब हम जंगल में जाग जाया करते थे,ऐसे वंहा तो घड़ी नही थी लेकिन जब हम जागते थे तो अंधेरा घना रहता था और हमारे नदी में जाकर,एक्सरसाइज करके ,योग करके , नहा कर फल तोड़ने ,पानी भरने तक अंधेरा ही रहता था,वापस आते आते सूर्य की किरणे निकलनी शुरू होती थी ,तो शायद यही वो समय रहा होगा जब हम जाग जाते थे ,

लेकिन अब यंहा 3 बजे उठाकर मैं क्या करू मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,मेरे साथ साथ टॉमी भी उठ चुका था,मैं उसे लेकर घर से बाहर निकल गया और पास के ही एक मैदान में चला गया ,वो यूनिवर्सिटी का मैदान था जो बहुत बड़ा था और अधिकतर लोग यंहा ,दौड़ाने आते थे ,साथ ही बहुत से लोग यंहा फुटबॉल या क्रिकेट खेला करते थे..

मैं वंहा जाकर दौड़ाने लगा,टॉमी भी मेरे साथ दौड़ रहा था असल में हम दोनो खेल ही रहे थे वो मुझे पकड़ने की कोशिस कर रहा था और मैं इधर उधर दौड़ रहा था,बहुत देर तक हम ऐसे ही दौड़ाते रहे लेकिन सूर्य अभी भी नही निकला था ,मैंने लगे हाथो योग आसान और एक्सरसाइज भी कर लिए जो बाबा जी ने मुझे सिखाये थे,तब भी सूर्य नही निकला था तो मैं मैदान के किनारे हरे घास पर बैठकर ध्यान करने लगा …….

बाबा ने मुझे रोज 2 घंटे ध्यान करने को कहा था एक घण्टे सुबह और एक घंटे शाम ,इसके बाद जब भी समय मिले…

ना जाने मैं कितने देर तक बैठा रहा ,मेरा ध्यान खुला कुछ लोगो की आवाज से ..

“उठ साले क्या साधु बना बैठा है “

जब मैंने आंखे खोली तो सामने वही लड़का था जिसे मैंने मारा था और उसके साथ उसका पूरा गैंग था ,सभी के हाथो में कुछ ना कुछ तो था,किसी के हाथो में बैट था तो कोई स्टाम्प पकड़े था,तो कोई झड़ी को ही तोड़ कर ले आया था,असल में ये यंहा क्रिकेट खेलने आते है लेकिन गलती से मैं इन्हें यंहा दिख गया ..सूर्य की किरणे अपनी छटा फैला रही थी ,चिड़ियों की आवाज भी आ रही थी ,टॉमी दूर कुछ सुन्ध रहा था,ऐसे वो हमेशा ही कुछ ना कुछ सूंघता ही रहता था ,

और हल्की हल्की ठंडी हवाये चल रही थी ,जिसमे बड़ी ही प्यारी सुगंध थी शायद पास के ही बगीचे से होकर आ रही थी …

इतना मनोहर दृश्य था और ये साला मोटा इसे खराब कर रहा था …

मैंने उसे बड़े ही आराम से देखा ..

“मादरचोद कल तो तू रश्मि के पीछे छिप गया था ,लेकिन आज तू नही बचेगा ..”

वो गुर्राया ,लेकिन इससे अच्छा तो मेरा टॉमी गुर्राता है ..

मैं हंस पड़ा ,और धीरे से हँसते हुए खड़ा हुआ ,बहुत देर तक पद्मासन लगा कर बैठने के कारण मेरा पैर थोड़ा शून्य हो गया था ,मैं आराम से उठा मैं अभी भी हंस रहा था..

“साले अपने को बहुत बड़ा साना समझता है तू ,मारो इसे “

मेरे उठाते ही मोटा चिल्लाया और उसके बाजू में खड़ा दूसरा लड़का अपने हाथो में पकड़े हुए बैट को घुमाया ,मैं अभी अभी ध्यान से उठा था,जो लोग गहरे ध्यान में जाना जानते है वो समझ पाएंगे की 1-2 घण्टे गहरे ध्यान से उठने के बाद क्या स्तिथि होती है,सब कुछ बहुत ही शांत मालूम पड़ता है,जैसे समय रुक सा गया हो,हर चीज स्पष्ट दिखाई और सुनाई देती है,लेकिन दिल में कोई भी भाव नही आता सब कुछ बस शांत ..

मुझे बल्ला अपनी ओर आता दिखा,मैं बैठ गया और बल्ला मेरे सर के ऊपर से थोड़ी ही दूरी से गुजर गया,बैठते ही मेरा हाथ घुमा और सीधे उस लड़के के पेट से ऊपर पसलियों के जा लगा,मेरी मुठ्ठी का एंगल ऐसा था की पसली उंगलियो के जोड़ो से टकराई ,ऐसा लगा जैसे वो थोड़ा अंदर तक भेद गई …

“आह…”एक कर्णभेदी और दर्दनाक चीख निकली ,वो लड़का बौखला गया था,आंखे बाहर को हो गई थी और हाथो से बल्ला छूट गया था,उसकी इस हालत और मेरे इस एक्शन को देखकर सभी कुछ सेकंड के लिए बिल्कुल ही जम से गए ..

“साले ये क्या किया “

मोटे को भी विस्वास नही हो रहा था की मैंने आखिर ये क्या किया लेकिन असल में मैंने कुछ भी नही किया था जो मुझे सही लगा बस वही किया ,वो सभी मख्खिओ जैसे मुझपर टूट पड़े ,अब मेरे लिए मुश्किल होने लगी थी,मैंने अपने घुटने को सीधे मोटे के पेट में दे मारा ,लेकिन उसे कोई खास फर्क नही पड़ा ,मैं तुरन्त ही नीचे बैठा और कोहनी से उसके जांघो के बीच वार कर दिया,इस बार मोटे की फ़टी वो अपनी माँ को याद करता हुआ जमीन में बैठ गया था,

मुझे मजा आ रहा था लेकिन लड़को की संख्या ज्यादा ही थी ,और सभी एक साथ मुझपर टूट गए थे,मैं वंहा से भागा वो लोग मेरे पीछे भागे,

“टॉमी..”मैंने टॉमी को चिल्लाया और वो भी मेरे साथ भागने लगा,थोड़ी थोड़ी देर में मैं रुक जाता और एक दो लोगो को घायल करता और फिर दौड़ जाता,वो लोग थकने लगे थे,घायल थे लेकिन फिर भी जैसे तैसे मेरे पीछे दौड़ रहे थे,तभी मैंने उनके पीछे टॉमी को छोड़ दिया,वो लोग अब डर कर दौड़ रहे थे,इधर उधर भाग रहे थे,जैसे ही वो मुझसे दूर हुए मैंने टॉमी को अपने पास बुला लिया,और खुद थोड़ा आराम कर फिर से दौड़ाने लगा ,वो फिर से मेरे पीछे थे लेकिन मैं जानता था की इतना दौड़ाने के बाद उनकी हालत खराब हो गई होगी ,और उन्हें अब टॉमी से भी डर लग रहा होगा , मैं दौड़ाता हुआ यूनिवर्सिटी के पीछे वाले हिस्से में आया जो सुनसान सा था और वंहा आकर मैं रुक गया …….

मैं पीछे पलटा ,

“अब मैं यंहा तुमलोगो को अच्छे से मरूँगा ,साला वंहा बहुत भीड़ थी,”

मेरी बात सुनकर सबकी जैसे फट ही गई ,ऐसे भी जब वो मुझे मारने आये थे तो कोई 15-20 लोग थे जो की अब 10-15 ही बचे थे,वो भी दौड़ाने के कारण हांफ रहे थे,तो कोई चोट खाया हुआ था ..

‘साले अपने को बहुत बड़ा तीसमारखाँ समझता है “

मोटा ऐसे हाँफ रहा था जैसे अभी गिर कर मर जाएगा ,अपने जीवन में साला कभी इतना नही दौड़ा होगा ,वो इतना बोलकर वही बैठ गया

“क्या हुआ बे मोटे तू तो अभी से मर गया ‘

मैं उसकी हालत देखकर जोरो से हँसने लगा

“भाई ये साला बहुत कमीना है ,दौड़ा दौड़ा कर ही मार देगा,साले ने कुत्ता भी छोड़ दिया हमारे ऊपर ,छोड़ो ना भाई इसे हम चलते है आज तो क्रिकेट भी नही खेल पाएंगे “

उसके ग्रुप में एक लड़का बोल पड़ा ..

मोटे ने उसे अजीब निगाहों से देखा,फिर मुझे देखा

मुझे उसके चहरे को देखकर हंसी आ रही थी ,मोटा काला थुलथुला शरीर पसीने से पूरी तरह से भीगा हुआ था,ऐसे लग रहा था जैसे अभी रो देगा ..

“मैं तुझे देख लूंगा साले”वो हांफते हुए मुझे बोला

“टॉमी अटैक ..”

मैं चिल्लाया ,टॉमी गुर्राया ही था की

“नही नही भाई माफ कर दो अब और नही ..”

मोटा बैठे बैठे हाथ जोड़कर जैसे लेट ही गया था,

“अब और नही दौड़ सकता ,मुझे हार्ट अटैक आ जाएगा “

उसकी बात सुनकर मैं जोरो से हंस पड़ा ...और हंसते हंसते पेट को पकडलिया

“मोटे अब मुझसे पंगा नही लेना “

मैं वंहा से जाने लगा था की अचानक ..

“तेरे माँ की ..”धड़ाक

मेरे सर पर कोई चीज जोर से टकराई ,ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे पीछे से मेरे सर पर स्टंप दे मारा हो ,मेरे सर से खून बह रहा था और सर झन्ना गया था,मुझे चक्कर सा आ गया ,और वो लोग जो अभी हार कर बैठे थे मानो नए उत्साह से झूम उठे,सभी ने अपना अपना हथियार सम्हाला और मेरे ऊपर टूट पड़े कोई बल्ले से तो कोई स्टंप से जंहा चाहे वंहा मुझे मार रहा था ,

टॉमी मुझे बचाने को कूदा लेकिन सबने डंडा घुमा दिया था ,टॉमी को भी बुरी तरह से मारने लगे थे,मैं सम्हल ही नही पा रहा था तभी अचानक एक आवाज आयी ..

“छोड़ो उसे ..”

सभी ने आवाज की तरफ देखा लेकिन उसे इग्नोर कर दिया और धड़ाक धड़ाक …

मेरा तो सर घूम रहा था कुछ साफ नही दिख रहा था बस एक कुछ लोग दिखे जो इन लोगो को मार कर वंहा से भगा रहे थे ..

मेरी आंखे बन्द ही होने वाली थी की फिर से आवाज आयी ..

“इसे उठाओ और रूम में ले जाओ ‘

थोड़ी देर बाद मुझे कुछ लोग उठाकर कही ले गए ,रास्ते भर वो चहरा चिंता से भरा हुआ मेरे सामने आ जाता था जिसने उन लोगो से मुझे बचाया था ..

उसका चहरा बहुत ही जाना पहचाना लगा ,हा मैं स्पष्ट नही देख पा रहा था लेकिन फिर भी वो आवाज और वो चहरा कुछ पहचाना सा था ,अचानक मेरे दिमाग में उसका नाम आ गया ,और होठो में मुस्कान

“काजल मेडम …..”


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03-19-2020, 11:56 AM,
#13
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 6

“तुम पागल हो क्या जो उनसे भिड़ाने चले गए वो भी ऐसे सुनसान से इलाके में “

एक छोटे डिंडोर स्टेडियम की एक सीढ़ी में बैठे हुए काजल मेडम मेरे सर के चोट पर मरहमपट्टी कर रही थी वही कुछ लड़के टॉमी के घाव में मरहम लगा रहे थे…

वो बेहद ही चिंता में लग रही थी

“मैं कही नही गया था वो लोग मेरे पास आ गए थे मुझसे भिड़ने ..”

“अपने आप को बहुत स्मार्ट समझते हो ,कल क्लास में भी तुमने... खतरों से भिड़ने का बहुत शौक है तुम्हे ,”

उनकी बात से मैं मुस्कुरा पड़ा

“आप कोई खतरा थोड़े ही हो ,मैं तो आपको देखते ही आपका दीवाना हो गया ..”

मैं मुकुराया लेकिन मेडम नही ..

“ओ मजनू की औलाद ऐसे बहुत लड़के रहते है मेरे पीछे और ये देखो मैं रियाल खतरा हु “

उन्होंने अपने कमर में बंधी हुई ब्लैक बेल्ट की ओर इशारा किया ,उस इंडोर स्टेडियम में कराटे,कुंफ और मार्सल आर्ट सिखाया जाता था ,मेडम वंहा पर टीचर थी ,और जब वो लोग मैदान में दौड़ रहे थे तभी उन्होंने मुझे लड़को से लड़ते हुए देखा था,और फिर भागकर उन्हें थकाकर सुनसान इलाके में ले जाते …

“यकीन नही होता की आप कराटे टीचर है आपका हाथ तो बेहद ही मुलायम है “

इस बार मैंने बड़ी ही मासूमियत से कहा था,उनके होठो पर भी एक मुस्कान उभर आयी..

“अगर कभी पड़ेगा ना तब समझ आ जाएगा,ऐसे तुमने लड़ना कहा से सीखा ..?”

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा

“कही नही मैं तो जीवन में पहली बार लड़ रहा था..”

उनके होठो की मुस्कान और भी गहरी हो गई थी ..

“तुम सच में बहुत बड़े झूठे हो ,जैसा पंच तुमने उस लड़के को मारा था वो कराटे में ही सिखाते है ,और फिर वो कोहनियो का वार ..”

“मैं सच कह रहा हु मैंने कही से नही सीखा बस मन में आया तो घुमा दिया “

वो मुझे घूरने लगी …

“तब तो तुम्हे यंहा आकर सीखना चाहिए,मेरे ख्याल से तुम अच्छे फाइटर बनोगे,”

“आप सिखाएंगी “

मैंने मासूमियत भरे हुए कमीने पन से कहा

वो मुस्कुरा उठी …

“तुम कमीने हो..,हा मैं ही सिखाऊंगी ऐसे एक ग्रैंड मास्टर भी है लेकिन उनके अनुपस्थिति में हम लोगो ही सिखाते है जो की यंहा के पुराने स्टूडेंट्स है ,हमारे मास्टर देश विदेश में घूमते रहते है साल में एक दो बार ही आते है …….”

“अब लगता है की आपके सानिध्य में बहुत कुछ सिख जाऊंगा ,अच्छा लग रहा है”

उन्होंने मुस्कुराते हुए हल्की सी चपत मेरे गालो में मार दी ……

तभी मेरी नजर गेट पर पड़ी जंहा मुझे चन्दू और निशा खड़े हुए दिखाई दिए ,मेरे देखते ही उन्होंने अपनी निगाहे फेर ली …

***********

मैं घर आया तो मम्मी से ढेर सारी डांट खाई ,वो अपने प्यार के कारण मुझे डांट रही थी ,मैंने उन्हें बताया की मैं किसी भारी चीज से टकरा गया था,मेरे सर पर पट्टी बंधी हुई थी ,आज रश्मि मुझे लेने घर आयी और घर से निकलते ही मुझपर बरस पड़ी ..

“तुम आंटी से झूठ बोल सकते हो मुझसे नही ,सच सच बताओ उस मोटे ने तुम्हे मारा है ना “

मैं स्कूटी में पीछे बैठा हुआ था ,मैं जोरो से हंस पड़ा

“अरे वो मोटा मुझे क्या मरेगा मैंने ही उसे धोया था,ऐसी जगह मारा हु की साला अब लड़ने से पहले दो बार सोचेगा जरूर,लेकिन सालो ने पीछे से वार कर दिया ..”

“तुम जंगल से क्या आये हो पागल ही हो गए हो ,तुम्हे जरूरत क्या थी उनसे लड़ने की सॉरी बोलकर निकल जाते “

रश्मि चिंतित थी ,मैंने उसके कमर को जकड़ लिया ..

“हमेशा से तो यही करता आया हु,अब और नही ..”

मैंने अपना सर उसके कंधे में रख दिया वो कुछ भी नही बोल रही थी………

स्कूल में मुझे और मोटे को काजल मेडम ने टीचर्स स्टाफ रूम में बुलाया था..

“तुम्हारे जो भी गीले शिकवे है वो यही भुला दो और हाथ मिला लो ,हमारे स्कूल के बच्चे आवारा जैसे लड़ रहे थे ये बात अगर प्रिंसपल को पता चल गई तो तुम दोनो की खैर नही ..”

मोटे ने एक बार मुझे देखा मैंने उसे आंख मार दी ,वो कुछ बोला नही ….

“मेडम मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नही है ,लेकिन अगर इसने फिर से मुझे अपने लफंगे दोस्तो के साथ घेरा तो अभी तो चोट किया हु,अगले बार इसके दोनो बॉल्स फोड़ दूंगा ,निंजा टेक्निक से "

मेरी बात सुनकर मेडम हल्के से मुस्कुराई फिर झूठा गुस्सा दिखाते हुए मुझे डांटने लगी ..

“चुप करो तुम, तुम्हे निंजा टेक्निक आती है तो क्या तुम किसी को भी मरते फिरोगे..और तुम ...एक आदमी को मारने के लिए 20 लोगो को ले जाते हो “

मेडम की बात सुनकर मोटे ने बड़े ही अजीब निगाहों से मुझे देखा

“तूने कब निंजा टेक्निक सिख ली “

वो आश्चर्य से बोला ,मैंने बस उसे आंख मार दिया

“चलो बहुत हुआ हाथ मिलाओ और फिर मत लड़ना “

हम दोनो ने एक दूसरे से हाथ मिलाया ,मोटा वंहा से जा चुका था,मेडम उसके जाते ही मुह दबा कर हंस पड़ी

“ये क्या नया सगुफ़ा छोड़ दिया तुमने निंजा टेक्निक “

“अरे मेडम आप निकलोडियन नही देखती क्या ,हथोड़ी और शिन्जो एक निंजा है और सिसिमानो उनका कुत्ता वैसे ही मेरे पास है मेरा सीसीमानो टॉमी.”

“क्या????”

मेरी बात मेडम को समझ नही आयी,और जिन्हें अभी भी नही आयी उन्हें बता दु की निकिलोड़ियन एक टीवी का कार्टून चेनल है जिसमे निंजा हथोड़ी करके एक सीरियल चलता है और उसमे हथोड़ी एक निंजा है किसके पास कई तरह की निंजा टेक्निक होती है ……..

“छोड़िये जब आपके बच्चे हो जाएंगे तब मेरी बात समझ आ जायेगी.”

मेडम ने अपना सर हिलाया जैसे कह रही हो हे भगवान ..


*************

रात का समय था मैं अपने कमरे में बैठा हुआ मूवी देख रहा था,मूवी थी ‘नेवर बेक डाउन ‘

मारधाड़ और मार्सल आर्ट से भरपूर ..

तभी मेरे कमरे का दरवाजा खुला सामने निशा थी ..

“अब तुम्हारी चोट कैसी है “

उसने धीरे से कहा ,

मैंने उसे अजीब निगाहों से देखा

“तुम्हे कब से फर्क पड़ने लगा “

वो सर झुकाये खड़ी थी लेकिन वो सुबक रही थी ,मुझे ये अजीब बात लगी आज तक जो लड़की कभी मुझसे सीधे मुह बात भी नही करती थी आज वो मेरे सामने खड़ी सुबक रही है …

“तुम मुझे बहुत ही गलत समझते हो भाई “

आज उसने पहली बार मुझे भाई कहा था

“ओह भाई ...तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना ,कही दिमाग तो नही हिल गया है जो मुझे भाई कह रही हो “

वो और भी जोरो से रोने लगी थी

“अब यंहा खड़ी खड़ी रो क्यो रही हो जाओ यंहा से मुझे मूवी देखना है “

लेकिन वो नही गई

“मुझे तुमसे बात करनी है “

“बात और मुझसे ..जाओ अपने बॉयफ्रेंड से जाकर बात करो ,”

“वो मेरा बॉयफ्रेंड नही है ,बस अच्छा दोस्त है “

“अच्छे दोस्त जांघो को नही मसला करते ,बॉयफ्रेंड नही तो शायद फक बॉडी होगा ,”

“राज ..”

वो चिल्लाई

“तुम जाओ यार यंहा से तुम्हे जिससे मरवाना हो मरवाओ लेकिन मेरा दिमाग मत खाओ “

वो जोरो से रो पड़ी

“मेरे भाई होकर तुम मुझसे ऐसी बाते कर रहे हो “

अब मुझसे बर्दास्त नही हुआ,मैं खड़ा हुआ और उसके पास जाकर उसके गालो को अपने हाथो से दबा लिया ..

उसका चहरा लाल पड़ चुका था,उसके आंखे आंसुओ से गीली थी,होठ कांप रहे थे,बाल बिखरे हुए थे,और आंखों में मेरे कृत्य के कारण एक डर सा आ गया था…

“एक बात समझ लो की मैं तुम्हारा भाई नही हु,तुमने कब मुझे अपना भाई माना जो आज बहन होने की दुहाई दे रही हो ,तुमने हमेशा ही मुझे नीचा दिखाने की कोशिस की है ,कभी मुझे भाई कहकर या मेरे असली नाम से बुलाया है तुमने ,तुमने मुझे लूजर कहा ,कुत्ता कहा और वैसा ही बर्ताव किया ,और अब तुम मुझे अपना भाई कह रही हो “

मेरी आंखे गुस्से से लाल थी ,निशा के गुलाबी होठ फड़क रहे थे ,मैंने उसके गालो को छोड़ दिया,उसके गालो पर मेरे उंगलियो के निशान पड़ चुके थे,उसके गाल बहुत मुलायम और फुले हुए थे,रंग बेहद ही गोरा था ,थोड़ा अंग्रेजो जैसे इसलिए उंगलियो के निशान साफ साफ दिखाई दे रहे थे..

“हा मैं तुम्हे चिढ़ाती थी ,तुम्हे जलील करती थी क्योकि तुम वैसे थे..इसमे मेरी कोई गलती नही है,मुझे तो तुम्हे भाई बोलते हुए भी शर्म आती थी,और तुम ही बताओ की तुमने भाई वाला कौन सा काम किया है जो मैं तुम्हे भाई बोलू,तुम तो एक डरपोक इंसान थे ,तुम्हे क्या लगता है की उस दिन कार में तुम्हारे गुम जाने के बाद मुझे खुशी हुई,तुम्हारे लिए हम सभी बहने रोती थी लेकिन छिप छिपकर …...लेकिन तुम ...तुम तो थे ही ऐसे ,तुम आज ऐसे पेश आ रहे हो मुझे थोड़ा भी आश्चर्य नही हो रहा है,असल में तुमने कभी हमे अपनी बहन नही माना ,वरना तुम उस दिन चन्दू से भीड़ जाते ,तुम मार खाने से नही डरते ,लेकिन तुम डरपोक थे ,तुम्हारे लिए तुम्हारी बहन की इज्जत के भी कोई मोल नही थे..

क्लास में कई लड़के तुम्हारे सामने ही मुझे छेड़ दिया करते थे लेकिन तुमने आज तक क्या किया ,तुम बस सर झुकाये उस रश्मि के पल्लू से दबे रहे ,तो कैसे तुम्हे अपना भाई बोलती..

जानते हो रक्षाबंधन में बहन अपने भाई के कलाई पर राखी क्यो बंधती है ...ताकि वो भाई उसके इज्जत की रक्षा करे ना की नामर्दो जैसे सर झुककर अपनी बहन की बेज्जती होते देखता रहे ..तो तुम ही बताओ मैं क्या करती,कैसे तुम्हे अपना भाई कहती ……तुम्हारी ऐसी हालत को देखकर दिल में दुख होता था ,तकलीफ होती थी लेकिन ये मेरा तुम्हारे लिए गुस्सा था जिसके कारण में तुम्हे जलील करती थी,सोचती की कभी तो तुम्हारा जमीर जागेगा लेकिन नही ...तुम्हारा तो जमीर ही मर चुका था “

निशा की बात सुनकर मैं अवाक रह गया था,उसका गाल पूरे तरह से आंसुओ से भीग चुका था,वही मेरे आंखों से भी आंसू आने लगे थे,आज तक मैं कई बार जलील हुआ था,मुझे हमेशा ही लगता था की ये उन लोगो की गलती है जो मुझे जलील कर रहे है,मैंने कभी अपने कमियों के बारे में नही सोचा,मैने कभी अपनी गलतियों को नही देखा ,कभी उसे सुधारने की कोशिस नही की ,आज निशा की बातो ने मुझे एक नया नजरिया दिया था,आज मुझे अपने ही किये कामो पर ग्लानि सी महसूस हो रही थी ,आज मुझे अपनी गलतियों का आभास हो रहा था,ज्ञानियो ने सही कहा है ,आप की असफलता आपकी ही गलती होती है,...

“हम सभी बहने तुमसे बहुत प्यार करती है भाई,मैं भी तुम्हे भाई बोलने को तराशती थी लेकिन तुम...तुम्हारे हरकतों के कारण मैं खुद को रोक लिया करती थी ,आखिर तुम ही तो हमारे एकलौते भाई हो ,तुम्हे जलाया ,तुझे जलील किया की तुम्हे कुछ तो समझ आये लेकिन कभी नही आया और तुम सब छोड़कर भाग गए ,कभी हिम्मत करके हमारे ऊपर प्यार जताया ,नही..तुम्हे तो कभी हमे बहन कहने तक की हिम्मत नही जुटाई,जानते हो कैसा लगता है एक भाई के होते हुए भी उसका ना होना, ..जानते हो हमे कितना दुख हुआ तुम्हारे जाने से,हमे अपनी गलती का अहसास हुआ लेकिन बहुत देर हो चुकी थी ,जब तुम वापस आये तो ...तुम बाहर से पूरी तरह से बदले हुए थे,लेकिन अंदर से आज भी वैसे ही हो, आज भी तुम हमे अपनी बहन नही मानते ,आज भी तुम्हारे नजरो में रिश्तों के कोई मायने नही है,तुम आज भी वैसे ही हो .. ”

वो रोने लगी थी फुट फुट कर रो रही थी ,मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया …

“मुझे माफ कर दे बहन ...मुझे माफ कर दे ..”

मैं क्यो रो रहा था ???

मुझे नही पता लेकिन मुझे दुख था,ग्लानि से मेरा कलेजा जले जा रहा था ,निशा की बातें खंजर की तरह मेरे सीने को छलनी किये जा रही थी ,मैं उसे बहुत जोरो से जकड़े हुए था वही वो भी मुझे बहुत ही जोरो से जकड़े थी……

मैं उसके सर को उसके बालो के ऊपर से ही चुम रहा था,वो मेरे सीने से लगी सुबक रही थी …

“हमारा भी कोई चांस है क्या “

दरवाजे में खड़ी निकिता दीदी ने कहा,निकिता और नेहा दीदी दोनो ही अपने आंखों से आंसू पोछ रहे थे,मैंने अपनी बांहे फैला दी और वो दौड़ते हुए मुझसे लिपट गए …

मुझे समझ नही आ रहा था की ये क्या और क्यो हो रहा है,जो इतने सालो में नही हो रहा वो आज अचानक कैसे हो रहा है,क्या ये बाबा जी के ताबीज वाली लकड़ी का कमाल था ,या सच में बस एक ऐसी दीवार का टूटना जो दीवार हमने ही अपनी गलतियों से बना लिया था,जो भी हो मुझे लगा जैसे आज मेरा पुनर्जन्म हुआ है……

मेरी बहनो ने मुझे प्यार से भाई कहा था ,मुझे याद है बचपन में वो मुझे राखी बंधा करती थी ,मेरे गालो में चुम्मी लिया करती थी,सच में मेरी बहने मुझे कितना प्यार करती थी ,फिर क्या हुआ ??

फिर क्या ऐसा होने लगा की हम अलग होने लगे,निकिता और नेहा दीदी से बातचित ही बन्द होने लगी और निशा तो मुझसे नफरत करने लगी ….

शायद वक्त को यही मंजूर था,क्योकि जो चीजे आसानी से मिल जाती है उसकी लोग कद्र ही नही करते ……..

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03-19-2020, 11:57 AM,
#14
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
***************

आज मेरी बहनो के कहने पर डिनर टेबल में गया,वरना मैं कमरे में ही खाना खा लिया करता था क्योकि मुझे पापा का सामना नही करना था..

“ये चोट कैसे लगी “

मेरे सर पर पट्टी देखकर पापा ने पूछा ,उनके आवाज में वही रौब था जो हमेशा होता था लेकिन आज मुझे उससे डर नही लग रहा था..

“वो क्लास में एक लड़का निशा को छेड़ रहा था तो उससे लड़ाई हो गई “

मेरी बात सुनकर निशा खाँसने लगी ,उसने आश्चर्य में मुझे देखा और मैंने बस उसे आंख मार दिया ..

“तुमने लड़ाई की ,तुम तो बोल रहे थे कही टकरा गए थे “

अब बारी माँ की थी ..

“तो आपको क्या बताता की मैदान में लड़के मुझे घेर लिए थे ,आप को तो हार्टअटैक आ जाता “

मेरी बात सुनकर सभी हँसने लगे सिवाय पापा और मम्मी के ..

मम्मी ने बुरा सा मुह बनाया ,वही पापा मुझे घूरने लगे

“तुमने सच में निशा के लिए लड़ाई की “

“हा मेरी बहन को कोई मेरे सामने छेड़े तो मैं देखता रहूंगा “

पापा ने आश्चर्य से निशा की ओर देखा ,निशा ने मासूमियत से हा में सर हिला दिया

“शाबास ,ये तुमने मेरे बेटे वाला काम किया ..ज्यादा चोट तो नही आई “

मत पूछिये की कैसा लगा ,बस ऐसा लगा की जाकर अपने पिता के गले से लग जाऊ ,क्या पूरे जीवन वो मुझसे यही चाहते थे की मैं उनके तरह मर्द बनू,शायद ...शायद इसलिए वो मुझसे ऐसे रूखे रूखे पेश आया करते थे ,

“नही ,वो पीछे से मार दिया सालो ने वरना..”

“ठीक है ठीक है चलो खाना खा लो “

पापा खाना खाने लगे वही मेरी प्यारी माँ मेरे और मेरे बहनो की कैमेस्ट्री देखकर दंग थी उसके आंखों में आंसू थे..

पापा के जाते ही वो मेरे गले से लग गई ,

“मेरे बच्चे एक दूसरे से बात करने लगे है ,साथ शरारत करने लगे है ,मैं तो सोचती थी की मैं ये सब देखे बिना ही मर ना जाऊ “

मेरी माँ थोड़ी ज्यादा इमोशनल थी ..

सभी बहनो और मैंने आकर उन्हें जकड़ लिया और उनके गाल को चुम्मीया दे देकर भिगो दिया ….
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03-19-2020, 11:57 AM,
#15
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 7

सुबह फिर से मेरी नींद 3 बजे ही खुल गई ,मैंने वही किया जो मुझे करना था,मैदान में गया दौड़ा,योग किया,आसान किया और ध्यान लगाकर बैठ गया ,जब तक काजल मेडम ने आकर मुझे उठाया नही ,आज से मेरी लड़ाई की विद्या शुरू होने वाली थी ,मैंने भगवान का नाम लिया और मेरे गुरुजी बाबा जी को याद किया और इस नई कला में पारंगत होने के लिए भीड़ गया ….

आज स्कूल कुछ अलग था,चारो तरफ मेरे ही चर्चे थे,की कैसे मैंने मोटे एंड गैंग को सबक सिखाया और कैसे मैं जंगल से निंजा सिख कर आया,कुछ कहानिया तो ऐसी थी की मैं खुद हैरान रह गया ,लोग मुझे आकर पूछ रहे थे,केंटीन में मुझे लडकिया और लड़के घेरे बैठे थे…..

“भाई सुना है जंगल में तुझे कोई निंजा मास्टर मिला था जिसने तुझे जादुई विद्या दे दी “

मैंने हा में सर हिलाया,कारण था कारण ये था की जिस लड़के ने ये पूछा था उसने मुझे एक कोल्ड्रिंक भी लाकर दी थी जिसे मैं स्ट्रॉ की मदद से पी रहा था ,अब उस लड़के का दिल तो नही तोड़ सकता था और मुह में स्ट्रा भी थी तो बस सर हिला दिया ,

एक लड़की ने मेरी ओर पिज्जा का एक टुकड़ा सरकाया ..

“सच में तुम्हे निंजा मूव आती है ,यानी तुम तलवार भी चला लेते हो “

मैंने पिज्जा का टुकड़ा मुह में डाला और फिर से मासूमियत से हा में सर हिलाया ..

एक बंदा जो मेरे बाजू में बैठा सेन्डविच खा रहा था वो बोल उठा

“लेकिन मैं नही मानता की निंजा वगेरह होते है “उसने बेतकलुफी से कहा ,मैंने उसे घूर कर देखा और अपने पैरो से उसके घुटनो के पास मार दिया,आज ही काजल मेडम किसी लड़के को ये बता रही थी की यंहा पर की नर्व पर वार करने से एक करेंट सा झटका लगता है ,और वो ...वो उछल गया और मुझे आश्चर्य से देखने लगा ..

“ये कैसे किया ??”

वो हड़बड़ा गया था,मैंने उसके प्लेट में रखी सेन्डविच का एक टुकड़ा अपने मुह में भरा ..

“निंजा मूव..”

सभी बड़े ही इम्प्रेस होकर मुझे देख रहे थे …

तभी मेरी नजर दरवाजे की ओर पड़ी केंटीन में दो इंट्रेंस थे एक तरफ से रश्मि आ रही थी तो दूसरी ओर से निशा …

“चलो बाकी की बाते बाद में “

मैं इन लोगो को छोड़कर खड़ा हो गया लेकिन समझ नही आ रहा था किधर जाऊ तो मैं वही खड़ा हो गया और दोनो ही मेरे पास आ गई..

“हाय राज बड़े फेमस हो गए हो “रश्मि ने आते ही कहा

“हाय भैया आप तो पैदल ही आ गए “निशा भी वंहा आ गई थी

रश्मि ने निशा को अजीब निगाहों से देखा मुझे समझ आ गया था की क्यो…

“आज अपने भाई की याद कैसे आ गई तुम्हे “

रश्मि ने ताना मारा था …..

“याद उनकी आती है जिसे भूल जाया जाता है ,और ये तो मेरे भैया है इन्हें मैं कैसे भूल सकती हु ,भैया आज से क्लास में आप मेरे साथ बैठोगे..”निशा मेरे हाथो को पकड़कर मुझसे चिपक गई थी …

रश्मि की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था ,ये स्वाभाविक भी था क्योकि रश्मि ने मेरे लिए कई बार निशा से भी लड़ाई की थी और आज निशा मुझपर हक जता रही थी जो की रश्मि को बिल्कुल भी पसंद नही आया ..

“हा सही कहा ..तुम अपनी बहन के ही साथ रहो…”रश्मि गुस्से में पलटी और वंहा से जाने लगी ..

“रश्मि सुनो..”

मैं चिल्लाया लेकिन वो नही रुकी ..

“अरे जाने दो ना उसे “निशा ने मुझसे और ही चिपकते हुए कहा ..

“कैसे जाने दु वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त है पागल ,चल उसे मनाना पड़ेगा “

मैंने खुद को निशा से छुड़ाया और रश्मि के पीछे भागा वो स्कूल में बने एक गार्डन की ओर जा रही थी ……

“रश्मि कहा जा रही हो सुनो तो “

मैंने उसका हाथ थाम लिया था

“अब मेरे रहने या नही रहने से क्या फर्क पड़ता है राज ,अब तुम्हारे पास सब कुछ है,तुम्हारी इज्जत है,स्कूल में तुम्हारा रौब हो गया है,लडकिया तुम्हे घेरे बैठी है और तुमपर लाइन मार रही है,स्कूल की सबसे हॉट टीचर तुम्हारी दोस्त जैसी हो गई है ,और अब ...अब तो तुम्हारी बहन जो कल तक तुम्हे कुछ नही समझती थी वो आज तुमपर हक जमा रही है ,तुम्हे तो सब कुछ मिल गया ना राज अब मेरी क्या जरूरत है तुम्हे ..”

रश्मि का गाला भरा हुआ था ,उसके आंखों में आंसू की बूंदे नाच रही थी …

मैंने उसके हाथो को झटका दिया और उसे अपनी ओर खीच लिया वो सीधे मेरी बांहो में आ गई ..

“दुनिया की कोई भी दौलत ,दोस्त,नाम,रुतबा,शोहरत,शराब या शबाब कुछ भी मेरे लिए तुमसे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट नही है रश्मि….तुमने मेरी उस समय दोस्त बनी जब कोई मुझसे सीधे मुह बात भी नही करता था,तुम्हारी मेरे दिल में क्या अहमियत है मैं बता भी नही सकता,बस इतना कहता हु की पूरी दुनिया भी मिल जाए और तुम ना रहो तो सब मेरे लिए फुजूल है ,अगर तुम्हे लगता है की मुझे जो मिल रहा है उससे तुम मुझसे दूर हो रही हो तो सच कहता हु अभी सब छोड़ दूंगा ,अगर पहले वाला राज तुम्हे पसंद था तो मैं अभी वैसे ही बन जाऊंगा ,पूरी जिंदगी जिल्लत सह कर रहूंगा लेकिन उफ तक नही कहूंगा…”

रश्मि की नजर मुझपर ही टिक गई थी,हमारी आंखे मिली वो मेरे बांहो में जकड़ी हुई थी ,उसने मेरे होठो पर अपनी उंगली रख दी ..

“मुझे ये वाला राज ज्यादा पसंद है ...लेकिन डर लगता है की तुम्हे मुझसे कोई छीन ना ले “

अब मेरे होठो में एक मुस्कान थी

“मैं तो तुम्हारा ही हु ,और किसमे इतनी हिम्मत है की कोई हम दोनो को अलग कर दे “

रश्मि मेरे आंखों में देख रही थी मैं उसकी आंखों में देख रहा था,मेरा सर उसकी ओर झुक रहा था,और उसकी आंखे बंद हो रही थी ,हमारी सांसे एक दूसरे से मिल रही थी ,एक दूसरे को छू रही थी ,हमारे होठ मिलने ही वाले थे की ..

“ओ माय गॉड ..ये तो लैला मजनू वाला सीन चल रहा है …”उस आवाज से हम दोनो ही हड़बड़ाए सामने निशा खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी ,हम दोनो जल्दी से अलग हुए ..

“ह्म्म्म तो ये बात यंहा तक आ पहुची है ...देखो रश्मि हमारे बीच जो दूरिया थी वो अब खत्म हो गई है,और सच कहु की तुमसे भइया को कोई नही छीन सकता इसलिए तुम्हे किसी से भी डरने की जरूरत नही है ,जिस समय भाई अकेला था तुमने ही उसका साथ दिया था,तो तुम उसकी सच्ची दोस्त हो और अब तो …”

वो मुस्कुराई

“ऐसा कुछ नही है समझी ..मैं तो बस इसके आंख में गिरा हुआ कचड़ा निकाल रहा था ..”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा

“ओह तो लगता है की मैंने डिस्टर्ब कर दिया आप कचड़ा निकाल कर आइये मैं क्लास में मिलती हु “

निशा मुस्कुराते हुए चली गई वही उसकी बात को सुनकर रश्मि का सर शर्म से झुक गया था ,

“चलो क्लास चलते है ,”

“पहले कचड़ा तो निकालने दो “

“धत “उसने मेरे बाजुओ पर मुक्का मारा और मुस्कुराते हुए क्लास की ओर चल दी …

कसम से अभी तक मैंने उस रश्मि को जाना था जो की गरज कर बाते करती थी,अच्छे अच्छो की फाड़ कर रख देती थी लेकिन आज जब वो शरमाई तो लगा जैसे ……

खिलता गुलाब ,जैसे शायर का ख्वाब,जैसे उजली किरण,जैसे मन की अगन...etc etc……..

पूरे शायराना मुड़ में मैं क्लास पहुचा और वंहा नक्शा थोड़ा चेंज था,निशा अपना बस्ता लेकर मेरे ही बेंच में आ चुकी थी अब मेरे एक तरफ निशा थी तो दूसरी तरफ रश्मि और मैं बीच में चौड़ा हुआ चौधरी बना बैठा था……

स्कूल की दो सबसे हॉट और खुबसूरत लड़कियो के बीच मैं था,जलने वालो की (लाइक चन्दू ) जल कर राख हो रही थी ,मुझे लग रहा था की स्कूल के कुछ लड़को को कुछ ही दिनों में बबासीर होने वाला है वो भी खूनी…...
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03-19-2020, 11:57 AM,
#16
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
काजल मेडम मुझे कुंफू,कराटे,मार्शल आर्ट,और तवाईकवांडो में ट्रेन कर रही थी ,मैं उनकी उम्मीद से अच्छा प्रदर्शन कर रहा था,मैंने रश्मि और निशा को भी क्लास जॉइन करवा दिया था,दिन बीत रहे थे,मेरा और मेरी बहनो के प्यार में भी वृद्धि हो रही थी ,मेरे जलने वाले अब चुप थे क्योकि सभी को पता चल गया था की मैं कोई निंजा टेक्निक जानता हु ,और मैंने उसका इस्तमाल करने मोटे एंड गैंग की बैंड बजा दी थी,उसके साथ सभी ये भी जानते थे की मैं मेडम के सानिध्य में लड़ाई के गुर भी सिख रहा हु ….

रश्मि और मेरी दोस्ती प्यार में बदल चुकी थी ,लेकिन मैं कितना भी निडर और आकर्षक क्यो ना हो जाऊ और मैं उस प्यार के धीरे धीरे बढ़ने की फिलिंग को नही खोना चाहता था,मैं उसे एक ही बार में प्रपोज कर अपना नही बनाना चाहता था,क्योकि मैं उस मीठे पलो का मजा लेना चाहता था…

और ऐसे ही हमारा प्यार और भी गहरा होता जा रहा था,हमे पता था की हमारे बीच क्या चल रहा है,हमे क्या मेरी माँ और बहनो को भी पता था की हमारे बीच क्या चल रहा है और साथ ही आधे स्कूल को भी शक था ...लेकिन मैं रश्मि की हर अदा का लुफ्त उठाने में लगा हुआ था …….

अब निशा और रश्मि बेस्ट फ्रेंड बन चुके थे,चन्दू मुझसे ज्यादा बात नही करता था बस मतलब की ही बात करता लेकिन वो भी डरे हुए ,वही निशा से वो बाते किया करता था लेकिन जब मैं सामने आता तो वो थोड़ा झिझकता था,मुझे पता है की निशा और उसके बीच ऐसा कुछ नही है जिसकी मुझे चिंता करनी चाहिए …

फिर भी एक दिन ……

रात हो चुकी थी और मैं अपने बिस्तर में पड़ा था तभी निशा वंहा आयी और आकर टॉमी को बिस्तर से नीचे भेजकर खुद मेरे बाजू में सो गई ,

“भाई एक बात पुछु “

उसने अपना सर मेरे सीने पर रखा और मैं उसके बालो को सहलाने लगा

“आप रश्मि को प्रपोज कब करोगे,सभी को पता है की आप दोनो एक दूसरे से कितना प्यार करते हो लेकिन अभी तक उसे आई लव यु भी नही कहा अपने “

“रश्मि ने कुछ कहा “

“वो क्या कहेगी,ऐसे तो हमेशा बड़ी चौड़ी हो कर घूमती है लेकिन जैसे ही आपका नाम लो नई दुल्हन की तरह शर्माने लगती है ..”

मेरे होठो में मुस्कान आ गई

“क्या मुझे बोलने की जरूरत है “

“हाँ है ,ये हर लड़की के लिए एक स्पेशल मोमेंट होता है जब उसे प्यार करने वाला उसे प्रपोज करे ,और आप को भी वैसे ही प्रपोज करना है ,मैं कोई आईडिया दु क्या “

वो अब ऊपर उठकर मुझे देखने लगी ,उसकी भूरी और कोमल स्किन और काली आंखे मुझे किसी बिल्ली की याद दिला देती थी वो बेहद ही प्यारी थी….

मैं उसके गालो को सहलाने लगा जो की बेहद ही सुकून भरा था..

“वो छोड़ ये बता की चन्दू और तेरा कुछ चल तो नही रहा ना,देख अगर कुछ हो तो बता दे अगर दूसरे तरीके से पता चला तो …”

“आप भी ना टिपिकल भाइयो जैसे शक करना शुरू कर दिए,जब मुझे कोई लड़का पसंद आएगा तो आपको सबसे पहले बताउंगी ,वो मेरा अच्छा दोस्त है बस,वैसे भी जब आप नही थे तो वही तो था जो मुझे समझता था,हा वो कार वाली बात बस थोड़ी बढ़ गई थी लेकिन यकीन मानो मैं उससे आकर्षित नही हु ..”

“ह्म्म्म तो किससे है ..”

मेरे मुह से अनायास ही निकल गया ..

“आपसे ..”

मैं चौका ..

“क्या ??”

वो हंस पड़ी

“हमेशा से आप से ,लेकिन आप ही मुझसे दूर भागते थे,आप तो हमेशा से ही हेंडसम हो ,ताकतवर हो लेकिन कभी भी आपने खुद को नही समझा था,मैं तो हमेशा से ही आपसे आकर्षित रही हु ..”

“तू पागल हो गई है क्या ये क्या बक रही है .”

मैं थोड़ा झल्लाया क्योकि मुझे उसकी बात कुछ समझ नही आयी लेकिन वो मुस्कुरा रही थी जैसे उसने कहने में कोई भी गलती नही की हो ….

“सच कह रही हु और इसमे इतना चौकाने वाली कौन सी बात है ..”

“मैं तेरा भाई हु ..”

“हाँ तो मैंने कब कहा की नही हो “

“लेकिन ..”

वो उठ कर बैठ गई और अपना सर पकड़ लिया

“अरे यार तो क्या एक बहन अपने भाई से आकर्षित नही हो सकती क्या आप ना ज्यादा दिमाग मत लगाओ बस और जाकर रश्मि को प्रपोज करो मैं उसे ऑफिसियल भाभी बोलने को तरश रही हु..”

वो फिर से अपना सर मेरे छाती में छिपा कर सो गई थी,लेकिन उसने मेरे दिमाग में एक सवाल को जन्म दे दिया था की आखिर निशा ने कहा क्या था,क्या वो आकर्षण भाई बहन के रिश्तो की पवित्रता लिए हुए था या और कुछ ….

जैसे और जिस मासूमियत से उसने ये बात कहि थी मुझे दाल में कुछ काला तो नही दिखा,ये अगल बात हो सकती है की मैं काली दाल ही खा रहा था ……...


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03-19-2020, 11:58 AM,
#17
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 8

प्रेक्टिस के बाद मैं स्टेडियम से बाहर मैदान में एक कोने पर बैठा था…निशा ने जो कहा था उसने मेरे दिमाग में एक हलचल सा मचा कर रख दिया था ,कुछ समझ नही आ रहा था की आखिर मैं उसे क्या समझू,

मुझे सबसे बड़ा डर था की कही वो मेरे प्रति शाररिक रूप से आकर्षित तो नही हो गई थी,मुझे इन सबका कोई भी एक्सपेरिएंस नही था,और उससे भी ज्यादा डर ये था की कहि मैं उसके प्रति जिस्मानी आकर्षण से ना भर जाऊ,मेरी बहनो से जीवन में पहली बार अच्छे रिश्ते बने थे जिस्म की वासना उन्हें पूरी तरह से खराब कर सकती थी,

मुझे इस चीज की कोई समझ नही थी की आखिर ये आकर्षण जिस्मानी ,रूहानी है की बस रिश्तो के बीच रहने वाला एक सहज प्रेम …

निशा ने कुछ भी हिंट नही दिया था ,लेकिन वो स्वाभाविक जरूर थी ..

सबसे ज्यादा डर मुझे खुद से लग रहा था क्योकि बाबा जी ने कहा था की मैं किसी को भी आकर्षित कर सकता हु,लेकिन मैंने उन्हें ये नही पूछा था की ये आकर्षण असल में होता क्या है,उसके मायने क्या है,क्या ये केवल जिस्मानी आकर्षण होगा,या फिर किसी अन्य तरह का आकर्षण …

तो क्या निशा मेरे ताबीज के कारण मुझसे आकर्षित हो रही थी ,अगर ऐसा था तो वो आकर्षण आखिर किस तरह का था…..

“क्या हुआ राज आज मुड़ ऑफ दिख रहा है तुम्हारा .”

काजल मेडम मेरे बाजू में बैठते हुए बोली

“कुछ नही मेम..”

“तुम चाहो तो मुझे बता सकते हो .”एक बार उन्हें देखा उनके होठो में मुस्कान साफ साफ झलक रही थी

“मेडम ये आकर्षण क्या होता है क्यों होता है .”

इस बार मेडम मुझे भेद देने वाली निगाहों से घूरने लगी .

“रश्मि से झगड़ा हुआ क्या ??”

“नही तो क्यो..”

“क्योकि ऐसे प्रश्न इंसान के दिमाग में तभी आते है जब वो कोई दुख में होता है या फिर इतना सुख पा चुका होता है की उससे ऊबने लगता है ..”

“मेरे साथ दोनो ही नही है “

“तो फिर ये व्यर्थ के सवाल क्यो??”

“क्योकि मेरे लिये ये सवाल जीवन से जुड़े हुए है ..”

“हम्म्म्म आज पहली बार तुम्हे इतना सीरियस देख रही हु ,जरूर ये बेहद ही इम्पोर्टेन्ट सवाल होंगे तुम्हारे लिए ….”

वो कुछ देर तक चुप रही ..

“जीवन की महिमा और गरिमा दोनो ही अजीब है राज,जो चीजे आपको आगे बढ़ाती है वही आपको पीछे भी धकेल देती है,और वो है इंसान की चाहते,इच्छाए हसरते…..यही हमे आगे बढ़ाती है जीवन में एक मकसद देती है ,लेकिन जब ये अपने काबू से बाहर होने लगे तो ये ही हमारे पैरो की सबसे बड़ी जंजीर बन जाती है…….

तुम जानना चाहते हो की आकर्षण क्या है ,मेरे खयाल से ये बस एक अहसासो की अभिव्यक्ति है जो हसरतो से पैदा होती है,किसी चीज को पाने की हसरते हमे उनकी ओर आकर्षित करती है ..”

काजल मेडम की बातो को मैं ध्यान से सुन रहा था लेकिन मुझे समझ नही आया की निशा की बातो से मैं इसे कैसे लिंक करू..

“क्या जिस्म की हसरते और प्यार की हसरतो में कोई समानता हो सकती है “

मैंने फिर से प्रश्न किया ,इस बार काजल मेडम ने फिर से भेद देने वाली निगाहों से मुझे देखा लेकिन मेरे चहरे पर सब कुछ शून्य ही था……

“प्रेम और शरीर का संबंध बेहद ही गहरा है,जब इंसान प्रेम को अभिव्यक्त करता है तो जिस्म का सहारा लेता है,लेकिन लोग जिस्म की वासना को पूरा करने के लिए प्रेम शब्द का सहारा भी लेते है,तो जब ऐसा सिचुएशन आ जाए की तुम्हे समझ ना आये की ये प्रेम है या महज वासना के आंधी से उठा हुआ जलजला तो खुद की सुनना ,क्या पता तुम्हे क्या चाहिए,प्रेम और वासना कभी कभी एक दूसरे के अंदर इस हद तक छिपे होते है की उन्हें अलग कर पाना बेहद ही मुश्किल हो जाता है,तो तुम्हे फैसला करना है की तुम्हे प्रेम चाहिए की अपने जिस्म की वासना शांत करनी है .”

“लेकिन ये तो गलत होगा ना ,जिस्म की वासना ..”

मेडम ने मुझे मुस्कुराते हुए देखा

“गलत चीजे नही इंसान होते है राज,वासना का उदभव शरीर में हमारे विकास के लिए होता है लेकिन लोग इसे अपने मजे के लिए इस्तमाल करते है,जिस्म की वासना ही तो है जो संसार को आगे बढाती है,और प्रेम के हिलोरों में प्रेमी जवा दिलो को भटकाती है .प्रेम तो पूज्यनीय है लेकिन वासना के बिना प्रेम भी नही हो सकता,कभी सुना है की किसी नपुंसक को प्रेम हो गया,नही, नही होता…

प्रेम होता ही उन्हें है जो जिसके अंदर ताकत हो, जिस्म की ताकत ,वासना की ताकत……”

मैं काजल मेडम के चहरे को देख रहा था वो दीप्त था प्रकाशमय बिल्कुल शांत और निडर ,मुस्कुराता हुआ उनका चहरा मेरे दिल को सुकून देने के लिए काफी था….

“मेडम मुझे डर लग रहा है ….”

आखिर मैंने वो कह दिया जो मैं कहना चाहता था ,वो भी चौकी ..

“किससे …...किसी ने धमकी दी है “

उनकी बात से मैं मुस्कुरा उठा..

“इंसानो और परिस्थितियों से डरना तो मैंने कब का छोड़ दिया है मेडम ….लेकिन मुझे डर अपने आप से लग रहा है ,अपनी वासना से लग रहा है,शायद मैं उसका सामना नही कर पाऊंगा,शायद मैं उसके बहकावे में आ जाऊंगा,शायद वो मुझसे गलत काम करवा देगा…”

मेरे चहरे में सच में चिंता के भाव आ गए थे,मेडम ने मेरे सर पर अपना हाथ फेरा …

“मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ पता लगा की कैसे तुम पहले हुआ करते थे फिर जंगल में भटकने के बाद जब तुम वापस आये तो तुमने अपने डर को भी छोड़ दिया,जरूर वंहा तुमने उन डर का सामना किया था जिससे तुम जीवन भर भागते आ रहे थे,ये डर भी वैसा है राज ,तुम्हारी उम्र ही ऐसी है जब शाररिक वासना बेहद ही ताकतवर होती है,अगर तुम इसका सामना नही करोगे डर जाओगे तो वो तुम्हारे ऊपर हावी हो जाएगी,इसे दबाने की कोशिस करोगे तो ये और भी बढ़ने लगेगी,जिस्म की आग जिस्म को जालाये तब तक ठीक है लेकिन ये अगर मन की गहराइयों में पहुच जाए तो ये मन को भी जलाने लगती है,तुम्हारे विचारो को अश्लील कर देती है ,ये समय है राज जब तुम्हे सबसे ज्यादा हिम्मत दिखानी होगी,इनसे लड़ कर तुम इसे नही जीत सकते तुम इसे समझ कर ही इसे जीत सकते हो,तो डरना बंद करो और सामना करो ….”

मैं चुप था वो भी चुप थी ,थोड़ी देर हम यू ही चुप ही बैठे रहे ..

“एक पर्सनल सवाल है ,जवाब देना चाहो तो देना वरना किसी तरह की जबरदस्ती नही है,क्या तुमने कभी मास्टरबेशन (हस्तमैथून) किया है ..?”

मैं उनकी तरफ देख कर मुस्कुराया ,और ना में सर हिलाया

“झूठ मत बोलो सभी करते है “

मेडम भी मुस्कुरा रही थी

“पता नही क्यो करते है ,मुझे तो आज तक समझ नही आया ,जो चीज कही और जाने के लिए बनी है उसे खुद ही..”

मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ी ..

“अच्छा तो तुम ये सोचते हो ...तो कभी सेक्स किया है,ऐसे तुम्हारे पास एक हॉट गर्लफ्रैंड भी है..”

मैंने फिर ना में सर हिलाया

“क्यो..??”

“कभी माहौल ही नही बना ,और आप करती है मास्टरबेशन “

उन्होंने मुझे झूठे गुस्से से देखा

“नही जरूरत नही पड़ती “

“ओह तो आपका बॉयफ्रेंड है…मुझे लगा ही था आप इतनी हॉट जो हो “

वो फिर से हँसी

“नही मेरा कोई बॉयफ्रेंड नही है “

मैंने उन्हें आश्चर्य से देखा

“यानी आप शादीशुदा हो ??”

“नही वो भी नही “वो अब भी मुस्कुरा रही थी

“तो आपको क्यो जरूरत नही पड़ती,आप एलियन हो ..”

वो हँस पड़ी थी ..

“मेरे लिए मेरा आर्ट ही सब कुछ है ,ये कला और मेरा काम मैं इसमे ही इतनी व्यस्त रहती हु की मेरा ध्यान उधर जाता ही नही ..”

उन्होंने स्वाभाविक सा उत्तर दिया

“लेकिन अपने ही तो कहा की जिस्म की जरूरते और वासना की शक्ति के बारे में फिर आपको भी तो ये सताती होंगी ..”

“हा लेकिन जिस्म से ज्यादा ताकतवर तो मन है ना,अगर तुम्हे ख्याल ही ना आये तो क्या होगा ,तो जिस्म भी चुप हो जाता है ,मेरा मन अपने काम में समर्पित है तो मेरे मन में वासना का ख्याल भी नही आता “

“ओह...यानी मुझे देखकर भी नही “

वो थोड़ी देर तक मुझे आश्चर्य से देखने लगी फिर मुस्कराते हुए मेरे गालो में एक हल्की सी चपत लगा दी

“बदमाश कही के ,खुद को देखो और मुझे देखो मैं तुम्हे देखकर एक्साइट होऊँगी ..”

“क्यो क्या कमी है मुझमे जवान हु ,हेंडसम हु “

“हा तुम हो लेकिन अभी मेरे सामने बच्चे हो “

वो खिलखिलाने लगी ,क्या मुस्कान थी उनकी मेरा सारा भय ,तकलीफ ,चिंता सब जाती रही ,मन में चल रहा कौतूहल मानो शांत हो गया था ……

“अगर कभी आपके मन में जिस्म की भूख जागे और किसी की मदद की जरूरत पड़े तो मुझे याद कर लीजियेगा,मुझे खुशी होगी आपकी मदद करने में “

वो इस बार सीरियस तरीके से मुझे देखने लगी

“ये तुम्हारा मजाक है ??”

“नही प्रपोजल है “मैंने मुस्कुराते हुए कहा

वो भी मस्कुराते हुए उठी और वंहा से जाने लगी ,मैं उनके जिस्म को गौर से देख रहा था ,पूरा जिस्म गठीला था,हर हिस्सा कसा हुआ,और हॉट पेंट में वो और भी कयामत लग रही थी ,एक्सरसाइज करने के कारण वो पूरी तरह से शेप में थी …

और साथ ही उनकी अदाएं और सुंदर चहेरा ...वाह भगवान की इस कलाकारी पर मेरा दिल आ गया था …

“मेडम सुनिए बस एक सवाल “

मैंने थोड़े जोर से कहा वो रुकी और पीछे मुड़कर मुझे देखने लगी ..और मेरी ओर बढ़ी

“अगर मैं ऐसी सिचुएशन में फंस जाऊ की मुझे कुछ समझ ना आये,दिल और दिमाग अलग अलग बाते करने लगे तो मैं क्या करू…”

वो थोड़ी देर सोचती रही ..

“अपने दिल की सुनना ..”

“लेकिन विचार करना तो दिमाग का काम है ना ,सही गलत की समझ दिमाग को ही होती है ,कही दिल कुछ गलत ना करवा दे “

वो फिर से मुस्कराते हुए मुझे देखने लगी ..

“दिल की सुनो और दिल की करो ...लेकिन दिल की सच्ची आवाज को सुनना जरूरी है जो शांति में ही आती है विचारो की भीड़ में नही ...अब मिल गया तुम्हे जवाब “

मैंने हा में सर हिलाया ,वो फिर मुस्कराते हुए जाने लगी

“मेडम सुनिए ना “मैं फिर से चिल्लाया,वो पलटी तो मैं भी खड़ा हो कर उनके पास जाने लगा..

“मेरा दिल मुझसे कुछ बोल रहा है ..”

मैं उनके पास पहुच गया था ,उन्होंने आंखों से ही पूछा क्या

“की आप बहुत अच्छी है ,और शायद मैं आपके मोहोब्बत में गिरिफ्तार हो गया हु “

वो खिलखिला कर हंस पड़ी

“ओह ये बात है तुम नही सुधरोगे ..”

वो हसंते हुए जाने लगी

“आप सच में मुझे बच्चा समझती है कभी सीरियस ही नही लेती “

उन्होंने मेरे गालो को पकड़कर उसे खींच दिया “

“तुम तो हो ही बच्चे ..”

मैंने बुरा सा मुह बनाया तो उन्होंने मेरे गालो में एक किस ले दिया ,

“अब खुश “

सच कहु तो मैं खुशी से झूम गया था,ये कोई वासना नही थी ना ही किसी प्रकार का जमाने की नजर में होने वाला प्रेम नही ये बस एक अपनत्व था जो उन्होंने मुझपर दिखाया था ,,मैं नाच रहा था वही वो मेरी हरकतों को देखकर खिलखिलाने लगी थी ...और उनकी ये खिलखिलाहट ही मेरे लिए मेरा असली इनाम था …...
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03-19-2020, 11:58 AM,
#18
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 9

जंगल से आने के बाद से मैं अब्दुल काका और रामु काका के साथ बैठकर दारू नही पिया था,आजकल वो मुझसे थोड़ा डरे हुए बाते करते थे ,तो मैंने सोचा की क्यो ना आज उनके साथ बैठा जाए मैं 3 क्वाटर देशी के ले कर उनके पास चला गया,

“नही छोटे साहब मैं रामु के साथ बैठकर शराब नही पियूँगा “

अब्दुल काका की बात से मुझे थोडा अजीब लगा ऐसे भी मैं हमेशा किसी एक के साथ बैठकर पीता था लेकिन मैंने सोचा की दोनो को एक साथ बुला लू लेकिन दोनो ने इनकार कर दिया ..

“क्या बात है आखिर ..”

“जब हम दोनो साथ होते है तो एक दूसरे की बीबियों को गाली देने लगते है फिर हमारे बीच झगड़े हो जाते है उससे अच्छा है की हम साथ ना ही पिये …

अब मुझे पूरी कहानी समझ आ गई थी लेकिन अब मैं पीने के मूड में तो आ ही गया था तो अब क्या करू…

मैं हमारे बंगले के पीछे बने एक सर्विस क्वाटर में बैठा था जन्हा मैं अधिकतर बैठा शराब पीता था,वही अब्दुल और रामु काका वंहा से थोड़ी दूर पर ही रहते थे,चन्दू और सना के लिए पिता जी ने अलग अलग कमरे दे रखे थे जिसमे सना का कमर गेस्ट रूम और मा-पापा के कमरे के पास था वही चन्दू सामने के तरफ बने हुए सर्विस क्वाटर में रहता था …..

मैंने रामु काका से बात की तो उन्होंने भी यही बात कर दी ,तभी मुझे चन्दू दिखाई दिया ,मैंने उसे आवाज लगाई और वो मेरे पास आ गया ..

“चल दारू पीते है “

उसने मुझे अजीब निगाहों से देखा लेकिन कुछ बोला नही मैं उसे उसी सर्विस क्वाटर में ले गया और बोलता खोल ली ,हमने बिना बोले ही 2 पैक भी लगा लिए थे,अब हमे थोड़ा थोड़ा नशा चढ़ने लगा था,मुझे अहसास हुआ की पहले मुझे ज्यादा नशा होता था लेकिन अब मुझे इतने पर भी कुछ फर्क नही पड़ रहा था,शायद एक्सरसाइज ज्यादा करने की वजह से शरीर की कैपिसिटी बढ़ गई थी ……

“तुम आजकल मुझसे इतने दूर दूर क्यो रहते हो ..”

आखिर तीसरा पैक खत्म कर मैंने कहा ..

“नही ऐसा नही है …….”

उसने एक ही घुट में पूरा माल अंदर कर लिया था जरूर उसके अंदर कुछ तो उबल रहा था …

अब उसे भी नशा अपनी जकड़ में ले रहा था ,उसकी आंखे लाल हो गई थी मैंने तुरंत ही उसके लिए एक और पैक बना दिया उसने उसे भी एक ही सांस में अंदर कर लिया जैसे किसी बड़े दुख से गुजर रहा हो और उसे राहत चाहिए …..

“अब बोल भी दे ..”

उसने मुझे देखा उसकी आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था,लाल आंखों से जैसे खून टपक रहा था ……

“क्या बोलू ..?की तूने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी “

उसने अगला पैक भी तुरंत ही अपने अंदर उतार लिया ..

“मैंने???”

उसकी बातो से मुझे आश्चर्य हुआ की आखिर मैंने क्या किया है ..

“तू जंगल क्या गया साले वंहा से तोप बन कर आ गया,और मेरे पूरे अरमानो पर तूने पानी फेर दिया,जी चाहता है की तुझे यही मार दु “

उसकी आवाज में नफरत भरी थी…

लेकिन मैं अब भी शांत था मैं जानना चाहता था की आखिर उसके दिल में क्या है ….

“मुझसे इतनी नफरत ??? आखिर क्यो??”

“क्यो???”वो जोरो से हंसा चल मेरे साथ ,..

वो मेरा हाथ पकड़े हुए मुझे बंगले के मुख्य घर की ओर ले जाने लगा,फिर अंडरग्राउंड गैरेज/पार्किंग में ले गया,वंहा कई गाड़िया खड़ी थी वो मुझे दूसरी तरफ ले गया ,मुझे पता था की यंहा एक कमरा है ,कंट्रोल रूम जैसा लेकिन अब कंट्रोल रूम गार्ड के कमरे के पास बना दिया गया था तो ये कमरा अब खाली था,लेकिन कमरे की खिड़किया खुली हुई थी और अंदर से प्रकाश बाहर आ रहा था,मैं समझ गया था की यंहा कोई है लेकिन जैसे ही मैं खिड़की के पास पहुचा तो मेरी आंखे फ़टी की फ़टी रह गई …….

अंदर मेरे पिता शबीना काकी (अब्दुल की बीबी) के ऊपर चढ़े हुए थे और धक्के लगा रहे थे वही कांता काकी (चन्दू की मा और रामु की बीवी) नंगी उनके बाजू में सोई हुई थी लग रहा था की अभी अभी उसके साथ भी कुछ किया गया था…

सिसकियों की आवाजे बाहर तक आ रही थी और उनकी हिम्मत की खिड़की ही नही दरवाजा भी खुला हुआ था,सभी बेखोफ लग गए थे ,दुनिया की परवाह किये बिना अपने ही मजे में मगन थे..

पिता जी का ये रूप देखकर मैं दंग रह गया था,मैंने ये तो सुना था की वो ऐसा करते है लेकिन आज सामने देखकर मेरी सांसे ही रुक गई ,वही वो दृश्य बेहद ही उत्तेजक भी था,

शबीना काकी दूध जैसी गोरी थी और उन्होंने पापा के सर को जोरो से जकड़ लिया था ,वो आहे भर रही थी वही पिता जी की कमर किसी पिस्टन के जैसे अंदर बाहर हो रही थी ,वही सवाली सलोनी कांता काकी के भरे हुए शरीर को देखकर एक बार को मेरा लिंग भी तन गया था,उनके जांघो के बीच बालो की झड़िया उगी हुई थी और वो उन्हें अपने उंगली से सहला रही थी ,वो तेजी से उंगली चलाती फिर जब उंगली गीली हो जाती तो शबीना के मुह में उसे डाल देती,कभी वो शबीना के होठो में आपने होठ लगा देती ,

“दूर हट मादरचोद”जब कांता शबीना के होठो में होठ रखने वाली थी तो पापा ने उसके चहरे को पकड़ कर जोर से दूर फेक दिया ,ये देखकर चन्दू वंहा से तुरत ही हट गया था,मैं उसके रोने की आवाज सुन सकता था,वही कांता पापा के इस बर्ताव के बाद भी फिर से उनकी ओर जाती है और उनके पैरो को चाटने लगती है,

“मादरचोद तेरे चुद से ज्यादा पानी आ रहा है क्या “

कांता ने हा में सर हिला दिया ,पापा शबीना को छोड़ उसके बालो को खीचकर ऊपर ले आये और कांता के जांघो के जोड़ को शबीना के मुह में रख दिया…

“चूस इस रंडी की चुद को साली बहुत मचल रही है ..”

कांता हसने लगी थी ,वही पापा ने फिर से शबीना के योनि में अपना लिंग डाल दिया..

साफ लग रहा था की ये दोनो उनके लिए किसी सेक्स स्लेव जैसी ही है…

मेरी नजर वहां से हटी तो मुझे चन्दू दूर खड़ा रोता हुआ दिखा,मैं समझ सकता था की अपनी माँ को ऐसा देखकर उस बेचारे के दिल में क्या बीत रही होगी,उसे मेरे बाप से जलील होना पड़ता होगा क्या पता की पिता जी को चन्दू की उपस्थिति का पता हो ,हो भी सकता था क्योकि उन्हें दुसरो को जलील करने में बहुत मजा जो आता था,मुझे मेरे पुराने दिनों की याद आ गई लेकिन फिर भी मेरे साथ जो भी हुआ हो ये इससे बुरा तो नही था.

मैं चन्दू के पास पहुचा ,चन्दू फिर से मेरा हाथ पकड़ कर मुझे सर्विस क्वाटर में ले आया था ,और आते ही उसने बची हुई शराब को बोतल से ही निगल लिया …..

“चन्दू..”

मैं कुछ बोलता उससे पहले ही वो भड़क गया

“चुप कर मादरचोद,देखा ना तेरा बाप मेरी माँ के साथ क्या करता है,और तू पूछ रहा था की मैं तुझसे नफरत क्यो करता हु,मैं तो तेरे पूरे परिवार से नफरत करता हु और साथ ही अपने बाप से भी ,अब्दुल और मेरे बाप दोनो को पता है की उनकी बीबियां चंदानी की रंडिया है लेकिन साले नामर्द है ….किसी की हिम्मत नही की उन्हें रोक सके ,या बदला ले लेकिन मैं लूंगा ,मैं तेरे बाप से बदला लूंगा...जानता है वो मेरा भी बाप है ,हा राज मैं और सना दोनो ही उसकी नजायज औलादे है ,हमारे बाप तो बस नाम के ही बाप है ,साले नामर्द कहि के...ऐसे में मैं तेरा भाई हुआ ना ...लेकिन फिर भी देख तू क्या है और मैं क्या हु ,तेरा बाप मेरे और सना की अच्छी देखभाल करता है लेकिन क्या वो हमे वो दर्जा दे सकता है जो तुझे और तेरी बहनो को मिला है ...नही ..क्योकि हम नाजायज औलाद है उसकी…...हम उसके हवस की निशानी है राज …

लेकिन मेरे पास एक उम्मीद थी ,क्योकि उसका बेटा भी नामर्द ही निकल गया था ,एक डरपोक जिससे चंदानी नफरत करता था,मैंने इसका पूरा फायदा उठाया अपने को इस लायक बनाया की चंदानी की नजर में उठ सकू उठा भी ,उसे यही लगने लगा था की मैं ही उसका असली खून हु,मेरे अंदर ही उसके खून ने रंग दिखाया है,मैं निशा के करीब हो गया था,ताकि मैं उसे अपने प्यार में फंसा लू लेकिन ….

लेकिन तू जंगल से आया और चंदानी का असली खून बोल उठा,ताकत और आकर्षण...आज चंदानी के नजरो में मेरी कोई इज्जत नही रह गई निशा मुझसे अलग हो गई,सिर्फ तेरे कारण..साले मैं तो तुझे अभी मार देना चाहता हु ,लेकिन क्या करू मैं कुछ भी नही कर सकता ,लेकिन मेरा वादा है तुझसे की एक दिन आएगा जब मैं चंदानी और उसके परिवार को बर्बाद कर दूंगा ..”

वो रोने लगा था ,असल में ये सब सुनकर गुस्सा आना चाहिए था लेकिन जो मैंने देखा था उसे देखकर मुझे चन्दू पर दया आ रही थी ..

“और तेरी माँ ,उसे भी सब कुछ पता है की मैं और सना कौन है लेकिन वो भी साली ..”

चन्दू इतना ही बोला था की मैंने उसके जबड़े को पकड़ लिया,मेरी पकड़ इतनी मजबूत ही की वो हिल भी नही पा रहा था..

“मादरचोद माँ के बारे में कुछ नही बोलना “

मैंने जब उसे छोड़ा तो वो रोते हुए भी हसने लगा..

“हा कुछ नही बोलूंगा क्योकि वो तेरी माँ है ,और मेरी माँ का क्या जिसे चंदानी नंगी करके चोद रहा है,वो भी दरवाजा खोल कर ,कोई उसे देखे उसे कोई फर्क नही पड़ता,वो मादरचोद तो मेरे बाप के सामने भी उसे चोद देता है ...तेरी माँ की इज्जत है और मेरी माँ बस एक रंडी..?????”

इसे बार वो रोते रोते बैठ गया था ,मैं उसे क्या बोलू मेरे समझ के बाहर था,अपने पिता के इस रूप से मुझे घृणा सी आ रही थी ,और उससे ज्यादा गुस्सा अब्दुल और रामु काका पर जो अपनी ही बीबियों की अस्मिता की रक्षा नही कर पाते,लेकिन फिर मुझे याद आया की मैं भी तो ऐसा ही था,मेरा बाप सबको ऐसा ही बना देता है ,लोग उसे कमीना ऐसे ही नही कहते..

चन्दू अब मुझे देखने लगा..

“राज मैं जानता हु की तू अब ताकतवर हो गया है लेकिन चाहे जो हो जाए एक दिन मैं चंदानी को उसके किये की सजा जरूर दूंगा,तेरे परिवार को उनके किये की सजा मिलेगी ..”

“मेरे रहते तू मेरे परिवार का बाल भी बांका नही कर सकता चन्दू तो सोचना भी मत “

मैं पहली बार उसे धमकाया था लेकिन मेरा आवाज सामान्य ही था क्योकि मेरे दिल में उसके लिए एक सहानुभूति जाग गई थी ,

वो हंसा

“तुझे क्या लगता है की निशा और तेरा बाप तेरे साथ है ,नही राज वो लोग सिर्फ ताकत के साथ होते है ,जिसके पास मिल जाए वो उधर चले जाएंगे,आज निशा तुझसे चिपक कर तुझे भाई भाई बोल रही है ना,तेरी एक हार और वो फिर से तुझे देखना भी पसंद नही करेगी ,वो सेल्फीज़ है राज ,पहले मेरे साथ थी अब तेरे साथ है और कल किसी और के साथ हो जाएगी …”

“जबान सम्हाल चन्दू “

इस बार मैं चीखा था लेकिन चन्दू अभी भी हंस ही था..

“मुझे मरना है तुझे???मार ले और कर भी क्या सकता है तू लेकिन मैं उस दिन तुझपर फिर से हसूंगा जब निशा फिर से मेरे पास होगी हा हा हा..”

वो हसने लगा ,उसे देखकर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई थी ,मैं चाहता तो अभी इसकी हड्डी पसलियां तोड़ सकता था लेकिन मैंने ऐसा नही किया ,अगर ये खेलना चाहता था तो ठीक है आखिर देखूं तो चन्दू कौन सा खेल दिखाता है ..

“ऐसी बात है तो चल तुझे बेस्ट ऑफ लक,लेकिन याद रखना आज से हम दुश्मन है ,और मैं अपने दुश्मनो को नही छोड़ता “

मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराया

“राज तू तो जिस दिन पैदा हुआ उसी दिन से मेरा दुश्मन बन गया था ,हा पता तुझे आज चला है लेकिन पता तुझे अभी भी नही है कि तेरा किससे पाला पड़ा है और मैं क्या कर सकता हु"

उसकी बात सुनकर मैं हँस पड़ा था,लेकिन….

अजीब बात थी की हम दोनो के चहरे में कमीनी मुस्कान थी….
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03-19-2020, 11:58 AM,
#19
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 10

मेरे दिमाग में चन्दू की बात घूम रही थी ,हल्का दारू का नशा भी था और साथ ही साथ वो दृश्य भी जो मैंने देखा था,

वो जितना मुझे याद आता मेरा लिंग उतना ही कड़ा हो जाता,मैं परेशान होने लगा,मुझे काजल मेडम की बात याद आई जब उन्होंने पूछा था की मास्टरबेशन करते हो..

मैंने आज तक नही हिलाया था ,लेकिन वो दृश्य मेरे कोमल मन के लिए बहुत ज्यादा था,दो औरतो को इस हालत में देखने के बाद मेरा अकेले होने पर मेरा हाल बेहाल हो रहा था,मैं पागल हो रहा था,मैं शबीना काकी को पापा की तरह निचोड़ने के ख्याल से भर गया वही कांता का शरीर भी मेरे आंखों में घूम रहा था.वो सचमें भरी हुई माल थी,

“कास साली को लिटा कर ..”

मेरा हाथ मेरे लिंग में आ गया था तभी ..

“भौ भौ”

ओह नो,ये साल टॉमी ..

मैन जब टॉमी को देखा वो मुझे ही देख रहा था जैसे मुझे देखकर मुस्कुरा रहा हो ,पता नही क्यो खुश था शायद मेरे कमरे में आने के कारण ,मैं बिस्तर में गिरा लेकिन टॉमी मेरे बाजू में आकर सो गया,अब मैं उसके सामने तो हिला नही सकता था,कमीना मुझे ही देख रहा था ,मैंने उसे उठाकर नीचे कर दिया ..

अब मैं आराम से पूरे बिस्तर में अकेले था,मैंने आंखे बंद की तो सामने वही दृश्य था..

“आओ ये देखो…”ऐसे लगा जैसे कांता काकी मुझे टांगे खोलकर अपने योनि को दर्शन करवा रही हो,मैंने तुरंत ही चद्दर ओढ़ ली और अपने लिंग को अपने शार्ट से निकाल कर उसे मसाला..

“आह…”क्या मजा था साला,मैं इतने दिनों तक इस मजे से बेगाना रहा ..

मैं थोड़ा और मसल पाता की..

“आप कहा चले गए थे..”

निशा सीधे कमरे में घुसकर मेरे बिस्तर में आकर चादर के अंदर घुस गई,

मुझे उसकी आवाज से एक जोर का झटका लगा ,मैंने तुरंत ही अपने अकड़े लिंग को अपने शार्ट के अंदर कर लिया,लगा जैसे वो चोरी ना पकड़ ले,लेकिन वो बेखबर थी और सीधे वो मुझसे लिपट गई ,लिंग अभी भी अकड़ा हुआ ही था,और सांसे अभी भी बेहद तेज थी ,धड़कने भी तेज ही चल रही थी ..

“क्या हुआ ऐसे हांफ क्यो रहे हो ,अपकी हार्टबीट तो मुझे सुनाई दे रही है “

उसने अपना चहरा ऊपर किया ..

“कुछ नही वो दौड़ते दौड़ते ऊपर आया ना इसलिये..”

मैंने जैसे तैसे कहा

“दारू पी है आपने ,”

उसने अपने नाक सिकोड़े

“हा वो थोड़ी सी ..”

“कभी मुझे भी पिला दिया करो क्या अकेले अकेले पीते हो “

वो फिर से मेरे सीने से लग गई ..

मैं बिना कुछ बोले ही उसे अपने बांहो में भर लिया,मुझे उसकी बात याद आयी की वो मुझसे आकर्षित है…

ऐसे भी लिंग तो अकड़ा हुआ था ही दिमाग ने दौड़ाना शुरू कर दिया लेकिन फिर मैंने ग्लानि महसूस की …

‘साला मैं सच में उसी हवसी बाप का बेटा हु जो अपनी प्यारी सी बहन के बारे में ऐसा कुछ सोच रहा हु …’मैंने अपने दिमाग में ही कहा …

मेरे हाथ उसकी पीठ पर थे की निशा थोड़ी मचली,मुझे उसके उन्नत वक्षो का अहसास हुआ,अपनी ढीली टीशर्ट के अंदर उसने ब्रा नही पहनी थी,उसके वक्ष बड़े ही कोमल लग रहे थे मैं सोचना तो नही चाहता था लेकिन जिस्म मेरा भी मर्द का था और वो एक पूरी जवान लड़की थी,मेरे नाक में उसके शरीर का सुगंध भी भर रही थी जो की बेहद ही प्यारी थी,

तभी निशा ने अपना एक पैर मेरे कमर से क्रॉस करके दूसरी ओर रख दिया ..

‘है भगवान उसे पता ना चले ‘मैंने मन ही मन सोचा क्योकि उसकी जांघ मेरे लिंग के ऊपर थी और लिंग ….वो पूरे शबाब में था,

उसने अपना सर उठाकर मुझे देखा ..

मेरी फट कर चार हो चुकी थी …

“आपको क्या हुआ आज इतने उत्तेजित हो..”

मैं समझ गया था की उसे इस बात का अहसास हो गया ,लेकिन अब मैं क्या बोलता, मैं चुप ही था,

“क्या देख लिया अपने ,या रश्मि की याद आ रही है ,या फिर काजल मेडम की ...कही मेरे कारण तो नही “

वो शरारत से मुस्कुराई

“चुप कर कुछ भी बोलती है तेरे कारण क्यो होगा ..असल में वो पार्किंग में ..”

मैं कुछ बोलने वाला था की मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ ..

और मैं रुक गया ..

“ओह तो पापा की रासलीला देख ली अपने “

मैं बुरी तरह से चौक गया

“तुझे कैसे पता “

वो जोरो से हंसी

“आपके सिवा इस घर में सबको पता है ,ऐसे आज किसके साथ थे ..”

“किसके साथ होते है ..??”

मैंने तो सोचा था की शबीना और कांता के साथ ही हो सकते थे,

“उनका क्या भरोसा ,कभी शबीना काकी तो कभी कांता कभी देवकी(हमारी एक नॉकरानी) तो कभी एक साथ सभी ,या कोई दूसरी बाहर वाली कोई ..”

उसकी बात सुनकर मैं चुप हो गया था …

“कितना बड़ा कमीना है हमारा बाप “

मेरे मुह से घृणा से निकल गया ..

“और उसी के कमीनेपन को देखकर आप उत्तेजित हो रहे हो ,हा आप भी तो उसके ही बेटे हो मैं कैसे भूल गई ये “

उसके चहरे में अजीब से भाव आये ..

“मैंने ये पहली बार देखा इसलिए शायद बहक गया था,ऐसे तुझे उनपर गुस्सा नही आता “

“क्यो वो सभी औरते अपनी मर्जी से उनके साथ है,वो किसी पर कोई जबरदस्ती नही करते..”

“लेकिन माँ की तो सोच ..”

“ह्म्म्म माँ को सबकुछ पता है ,हमेशा से पता था वो बेचारी भोली भाली कभी पापा के सामने मुह नही खोलती ,हा उनके ऊपर दया आती है लेकिन पापा भी क्या करेंगे अगर माँ उनकी इच्छाओ को पूरा नही कर पाती होगी तो...उन्हें तो बाहर ही मुह मरना पड़ेगा ना “

अब क्या सही था और क्या गलत ये समझ पाना मेरे लिए मुश्किल था…..

“वो सब छोड़ो आप बताओ कैसा लगा देखकर “उसने फिर से शरारत से कहा

“चुप कर भाई से ऐसे बात करती है”

“क्यों नही अब तो मेरा भाई भी जवान हो गया है,और ये ...”

उसने अपनी जांघ को हल्के से हिलाया ,उसके नीचे मेरा लिंग तना हुआ था जो इस रगड़ से बुरी तरह से कांप गया..

मैंने झटके से उसके जांघ को अपनी कमर से हटा दिया ..

“कितनी बेशर्म है तू निशा...मैं तेरा भाई हुई और ये सब ..पाप है ..”

इस बार निशा ने अजीब निगाहों से मुझे देखा

“मैं जानती हु की ये सब पाप है लेकिन …”

वो चुप हो गई और उठकर जाने लगी ,उसका इस तरह उठकर जाना मुझे समझ नही आ रहा था मैंने तुरन्त ही उसका हाथ पकड़ लिया..

“”ए क्या हो गया तू उदास क्यो हो गई “

उसके आंखों में कुछ आंसू की बूंदे थी …

“कुछ नही भाई आप नही समझ पाओगे..”

उसकी आवाज में दर्द था एक अजीब सा दर्द …

“अरे बता तो सही ..”

“आई लव यू भाई…..”

“लव यू टू बेबी ..”

“लेकिन मेरा प्यार वैसा है जैसा आपके और रश्मि का ..”

इस बार मैं अवाक रह गया था ,आखिर ये क्या बात हो गई थी ,निशा जो हमेशा से मुझसे लड़ती रही वो अचानक कहती है की उसे मुझसे प्यार है वो भी भाई बहन वाला नही ,gf वाला …

मुझे लग रहा था की मुझे फिर से बाबा के पास जाकर इस लकड़ी के बारे में और अच्छे से जानना पड़ेगा वरना इसके ताकत के चक्कर में मैं ही फस जाऊंगा…

शक्ति के साथ प्रॉब्लम यही होती है की वो अच्छी या बुरी नही होती,उसका इस्माल करने वाला उसे अच्छा या बुरा बनाता है,और अगर आपके पास कोई जादुई शक्ति हो लेकिन आपको पता ही ना हो की उसका इस्तमाल कैसे करते है तो…...तो समझ लो आपकी लग गई …….

“तू कब से मुझे प्यार करने लगी ,हमेशा तो मुझसे लड़ती रहती थी मुझे नीचा दिखाने में लगी रहती थी “

उसने इस बार घूर कर मुझे देखा,उसका प्यार चहरा आंसुओ में और भी प्यार लग रहा था ,

“शायद मैं इसीलिए आपसे लड़ती थी की मैं आपसे बहुत प्यार करती थी,मैं आपसे कुछ नही मांग रही हु बस मुझे खुद से प्यार करने दीजिये ..”

“लेकिन तुझे कैसे पता की ये प्यार ही है ,महज आकर्षण नही ..”

वो थोड़ी देर तक चुप रही ..

“आपको मुझपर यकीन ना आये तो नेहा दीदी से पूछ लेना ,जब भी हमारी लड़ाई होती थी मैं अपने कमरे में आकर घण्टो तक रोती थी,उन्हें भी मेरे दिल की बात का पता है ,जब आप जंगल नही गए थे उससे पहले से पता है ,वो मुझे कुछ नही कहती और कभी कहती है तो मैं मना कर देती हु,लेकिन मुझे लगता है की वो जानती है की मैं आपसे कैसे वाला प्यार करती हु …”

“नेहा दीदी ??”

मैं कुछ और कह पाता उससे पहले निशा आकर मुझसे लिपट गई ..

“भाई यूज मि ...मैं जानती हु की आप रश्मि से प्यार करते हो ,मैं उससे आपको जुदा नही करूँगी ,जस्ट यूज मि भईया,मैं उसे ही अपना सौभाग्य मान लुंगी की मेरे कारण आपको कुछ मिला..प्लीज भइया प्लीज..”

निशा मेरे ऊपर जैसे टूट ही पड़ी थी वो मेरे होठो को चुम रही थी ,मैं उससे छूटने की कोशिस कर रहा था लेकिन मैं उसे चोट नही पहुचना चाहता था..

“निशा पागल हो गई है क्या ??ये सब क्या कर रही है तू …”

“भइया मैं जानती हु की आपके जिस्म को अभी एक लड़की की जरूरत है ,मैं वो लड़की क्यो नही हो सकती भइया,मुझे प्यार ना करो तो कम से कम मेरे जिस्म को ही भोग लो ,मुझे थोड़ा सुकून मिल जाएगा की मैं आपको कुछ दे पाई ..”

निशा के इस समर्पण से मैं भी पिघलने लगा था,मेरे मन में वासना तो पहले भी छलांग लगा रही थी लेकिन निशा ने जब खुद को मुझे सौप दिया तो उसके कोमल जिस्म की गर्माहट और उसके होठो की नर्माहट से मैं बेकाबू सा होने लगा था …

मेरा विरोध धीमा पड़ रहा था ,और हमारे होठ मिल गए पहले तो निशा ने ही अपने होठो को चलाया लेकिन फिर मैं भी उसका साथ देने लगा था …….

तभी मेरे फोन की घण्टी बजी ……

दूसरे बार काल करने आने पर मैंने उसे देखा कोई अननोन नंबर था ..

“हल्लो ..”

मेरी सांसे थोड़ी तेज हो गई थी निशा अब भी मेरे जिस्मो को चुम रही थी तो मैं वंहा से उठाकर उससे थोड़ी दूर चला गया ..

“राज ,मेरी बार ध्यान से सुनो कुछ भी मत बोलना जब तक बात पूरी ना हो जाए …….निशा के साथ अगर तुम कुछ करने वाले हो तो कुछ भी मत करना,ये सब एक जाल है तुम्हे फसाने के लिए,तुम मेरा फोन रोंग नंबर बोल कर काट दो और कल मुझे आकर मिलो मैंने अपना पता तुम्हे मेसेज कर रहा हु .. “

और काल कट गया ……

मैं बुरी तरह से परेशान था की ये क्या हुआ …

मेरी नजर निशा पर गई और चन्दू की कही बात मेरे दिमाग में घूमने लगी ,तो ये ताबीज का असर नही कोई चाल है..??
मैंने निशा की आंखों में देखा ...उसके आंखों में मुझे बस मासूमियत ही दिखाई दी ,..

आखिर क्या सच है और क्या गलत ,ये जाने बिना कुछ भी करना खुद किसी जाल में फसाना ही था…

“किसका फोन था “

निशा ने बड़े ही मासूमियत से कहा वही वो मुझे बड़ी अदा से अपने पास बुला रही थी ,

“रोंग नंबर था “

तभी मेरे मोबाइल में के मेसेज आया ..

“निशा प्लीज् ये सब मुझसे नही होगा तुम जाओ यंहा से “

उसका चहरा उतर गया लेकिन जाते जाते उसने मेरे गालो में एक जोर की पप्पी ले ली ..

“ठीक है लेकिन मैं आपकी हो चुकी हु मानो या ना मानो ..”

वो मुसकुराते हुए वंहा से निकल गई थी ..

मेरा ध्यान मेसेज पर गया उसमे के पता दिया गया था और साथ ही एक नाम ….

विवेक अग्निहोत्री ….
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03-19-2020, 11:59 AM,
#20
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
रविवार होने की वजह से बैक बंद था ,इसलिए मुझे वो पेपर्स नही मिल पाए थे,वही मेरे दिमाग में बार बार काजल मेडम का ख्याल आ रहा था की आखिर उन्हें कैसे पता चला की चन्दू किससे बात कर रहा था,और फिर उन्होंने सीधे मुझे काल क्यो नही किया बल्कि विवेक को कॉल कर मुझे आगाह करने क्यो कहा ,वही वो आखिर है कौन जो की इतने लोगो के साथ मेरी रक्षा का जिम्मा उठाये हुए है ???.......

घर में आज मैंने चन्दू को ढूंढने की कोशिस की लेकिन चन्दू और उसका बाप(रामु) दोनो ही गायब थे ,पूछने पर पता चला की रात से ही गायब है ,अब मेरा दिमाग और भी घुमा की साला आखिर हो क्या रहा है …….

शाम बैठा हुआ मैं बोर हो रहा था,tv का चैनल बदलते हुए अचानक एक न्यूज़ से मैं उछल पड़ा ……

‘शहर के जाने माने सीनियर वकील की अपने ऑफिस की छत से गिरकर मौत...पुलिस को है हत्या की आशंका, सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है वही उनके ऑफिस में काम करने वाले लोगो से बात भी की जा रही है ,आखिर ये आत्महत्या थी या सोची समझी हत्या …….’
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