Hindi Porn Kahani अदला बदली
10-21-2018, 11:48 AM,
#11
RE: Hindi Porn Kahani अदला बदली
राज भारी शरीर का आदमी था, दोनों लड़कियाँ उसकी गोद में समा गयीं।फिर उसने सरिता के भी होंठ चूसे।शालू बोली- दीदी आपने मुझे ये क्यों नहीं बताया की आपके पापा से सम्बंध हैं? सरिता बोली-तुमने अपने पापा को अपने और मेरे सम्बंध के बारे में बताया क्या? राज ने दोनों के कंधों से हाथ नीचे लाकर दोनों को एक एक चुचि हाथ मेंलेकर दबाते हुए पूछा- तुम दोनों का कैसा सम्बंध? अब शालू शर्माकर सरिता की तरफ़ देखी, पर सरिता ने मुस्कुराते हुए कहा- आपसे पहले मैं शालू के साथ सेक्स का मज़ा ले चुकी हूँ। अब राज हैरान हो कर बोला- ओह इसका मतलब तुम लोग बहुत चालू हो? बताओ तुम दोनों ने क्या क्या किया? अब राज उन दोनों की छातियाँ मस्ती से मसलने लगा था। सरिता बोली- हमने वैसे ही मज़ा लिया जैसे लंड के बिना लड़कियाँ लेती हैं। हमने एक दूसरे की चूचियाँ दबायीं और चूसीं और चूत चाटी , बस यही किया। राज का लंड अब खड़ा हो रहा था, वो बोला-तो तुम दोनों झड़ीं थीं क्या? ऐसा बोलते हुए उसने अपने हाथ को सरिता की सलवार के ऊपर से उसकी चूत पर रखा और मसलने लगा। शालू बोली- जी पापा हम दोनों झंडी थीं, दीदी तो इतना मस्त चूसी मेरी छातियाँ और चूत , मैं तो बहुत जल्दी ही झड़ गई थी।सरिता के मुँह से आह निकल गयी, क्योंकि राज ने उसकी चूत में कपड़े के ऊपर से २ उँगली डाल दी थी। शालू ने भी देखा की पापा क्या कर रहे है, तभी राज ने शालू की स्कर्ट ऊपर की और उसकी चूत को भी पैंटी के ऊपर से सहलाने लगा।राज का लंड सरिता के चूतरों में चुभ रहा था। फिर राज ने सरिता से पूछा- तुम नहाकर आयी हो? वो बोली- नहीं , मैं तो यहाँ ही नहाती हूँ, खाना बनाने के बाद। राज ने कहा - चलो आज हम नाश्ता करके तीनों एक साथ नहाएँगे , क्यों शालू ठीक हैं ना? शालू की चूत राज के हाथ लगने से मस्त हो रही थी, वो आह करके बोली- ठीक है पापा, जैसा आप बोलो। सरिता फिर उठी और बोली- मैं नाश्ता बनती हूँ आप लोग फ़्रेश हो जाओ। और वो चूतरों को मटकाते हुए किचन में चली गई। शालू भी पापा की गोद से उठकर खड़ी हुई, तो उसके पापा ने उसकी स्कर्ट उठाकर उसके गोल चूतरों पर अपने होंठ रख दिए और उन गोलायीयों को हल्के से काटने लगे। शालू पापा का हाथ हटाकर वहाँ से भाग गई ।थोड़ी देर बाद जब वो फ़्रेश होकर नाश्ते की टेबल पर बैठे तब शालू का फ़ोन बजा। शालू ने फ़ोन उठाया और बोली- हाँ निलू , बोलो, कैसी हो? फिर वो बोली- हाँ आज मैं कॉलेज नहीं आ पाऊँगी, मेरे पैर में दर्द है। ये सुनकर उसके पापा धीरे से पूछे , सच में पैर में दर्द है या कहीं और? शालू ने पापा को हाथ मारते हुए चुप रहने को बोला और बोली- अच्छा, आज तू भी नहीं जा रही , क्या हुआ? फिर बोली, अच्छा , वाह , कब है तुम्हारा जन्म दिन? ४ दिन बाद ? ओह , अच्छा मैं पापा से पूछूँगी अगर वो हाँ बोलेंगे तो आ जाऊँगी। फिर निलू उधर से कुछ बोली, तो शालू बोली- तेरे पापा मेरे पापा से बात करेंगे, अच्छा तो मैं फ़ोन पापा को देती हूँ।तभी लाइन में निलू के पापा आ गए, और बोले- हाय शालू बेटा, कैसी हो? तुम्हें निलू के जन्म दिन पर आना है ओके? हाँ अपने पापा को दो। राज ने फ़ोन पर कहा- हेलो, मैं राज बोल रहा हूँ। उधर से वो बोला- जी मैं शेखर बोल रहा हूँ, निलू का पापा। मैंने आपको इस लिए फ़ोन किया है कि, निलू का जन्मदिन ४ दिन बाद शुक्रवार को है, तो उसमें आपको और आपकी बेटी को आना होगा। निलू की सिर्फ़ दो हीख़ास सहेलियाँ हैं, आपकी बेटी और नेहा, वो राजेश जी की बेटी है। अब नेहा तो अपने पापा के साथ गोवा गयी है, वो तो यहाँ नहीं रहेंगे पर आपको आना पड़ेगा , इसी बहाने मैं भी आपसे और शालू से मिल लूँगा।राज ने भी बर्थ्डे के लिए हामी भर दी और रात के खाने का आमंत्रण भी स्वीकार कर लिया। फ़ोन रखने के बाद शालू बहुत ख़ुश हो गई और बोली- पापा थैंक्स, आपने निमंत्रण स्वीकार करके बहुत अच्छा किया। फिर वो सब नाश्ता करने लगे।सरिता ने शालू को पूछा की ये निलू वोहि लड़की है ना जो अपने पापा के साथ मस्ती करती है? शालू ने हाँ में सर हिलाया।तब राज ने पूछा- कैसी मस्ती? सरिता बोली- ये जो निलू है ना, ये भी अपने पापा से चूदवा रही है, बहुत समय से, और शालू का कहना है कि निलू और नेहा के पापा ने एक दूसरे की बेटियों भी चोदा है। राज का मुँह खुला का खुला रह गया । वो बोला- मैंने बीवियों की अदला बदली का सुना था, पर बेटियों की भी अदला बदली हो सकती है , ये मैंने नहीं सोचा था। फिर कुछ सोच कर बोला- कहीं ये हमें भी तो इसी लिए नहीं बुला रहा है? जन्मदिन के बहाने से? सरिता - हो सकता है, ऐसा ही हो, पर आप क्या ऐसा करेंगे? राज का लंड ये सुन कर खड़ा हो गया कि उसे एक और जवान लडकी चोदने को मिल सकती है, अगर वो शालू को भी शेखर से चूदवा दे??? उसने कोई जवाब नहीं दिया और बोला- ये सब शालू पर भी निर्भर है की वो क्या चाहती है , और अभी उसमें चार दिन हैं , हमारे पास सोचने को।ठीक है ना , शालू? वो थोड़ी सी परेशान होकर बोली- जी पापा इसकी बाद में सोचेंगे। सरिता बोली- मुझे तो लगता है कि दोनों बाप बेटी मरे जा रहे हैं, इस नए अनुभव के लिए। शालू उसे मारने दौड़ी और वो भाग गयी , किचन में।
थोड़ी देर बाद राज बोला- चलें सामूहिक स्नान किया जाए? और सब हँसने लगे और बाथरूम के लिए चल पड़े।
राज, सरिता और शालू राज के बेडरूम से जुड़े बाथरूम के सामने पहुँचे,वहाँ राज ने दोनों को बाहों में लेकर चूम लिया बारी बारी से।फ़ी वो बोला, चलो हम कपड़े उतारते हैं, और उसने अपनी शर्ट उतार दी, वो बनयान नहीं पहनता था, उसकी मस्कूलर छाती जो थोड़े बालों से भरी थी, सामने आयी,तभी सरिता ने भी अपना कुर्ता उतार दिया, और ब्रा में उसके बड़े दूध छलक उठे।शालू अभी भी शर्मा रही थी।तभी राज ने अपनी हाफ़ पैंट उतार दी, उसका गठा शरीर , पुष्ट बालों से भरी जाँघें और उसकी चड्डी में फँसा लंड आधा खड़ा दिख रहा था।तभी सरिता ने सलवार खोल दी, और उसको टांगों से निकालकर अलग किया, अब ब्रा पैंटी में वो मस्त मांसल जवानी से भरपूर गदरॉइ औरत दिख रही थी, उसकी पैंटी से उसकी फुली हुई चूत का उभार और बीच की दरार अलग se दिख रही थी।तभी दोनों ने देखा, शालू मुँह फाड़े इन दोनों के अर्ध नग्न बदन को देख रही थी, और उसने अभी कपड़े नहीं खोले थे।राज बोला- क्या हुआ शालू, कपड़े उतारो ना,शर्म आ रही है ? शालू ने शर्माते हुए अपनी टॉप उतार दी और उसका विकसित होता बदन बहुत ही मस्त लग था था, ब्रा में छिपी छातियाँ बड़े अनार सी सख़्त दिख रही थीं, जो आकर में सरिता से छोटी थीं।उसका निपल भी लम्बाई में सरिता से आधे आकर का था।तब तक राज ने अपनी चड्डी उतार दी थी, और उसका मोटा लम्बा लंड उत्तेजना ke कारण ऊपर नीचे होकर दोनों जवानियों को सलामी दे रहा था।सरिता ने भी अपनी ब्रा खोलके निकाल दी,अब उसके बड़े दूध नंगे होकर अपनी छटा बिखेर रहे थे।तभी शालू ने भी अपना स्कर्ट उतार दिया, और ब्रा पैंटी में वो अप्सरा या परी लग रही थी, उसका विकसित हो रहा शरीर बहुत मस्त लग रहा था। सरिता ने अपनी पैंटी खोल दी,उसकी बाल रहित चूत फ़ुली हुई मस्त दिख रही थी।तभी शालू ने भी अपनी ब्रा खोल दी,और उसके दूधिया अनार सामने आए,सरिता और राज दोनों की आँखों में चमक आ गई,ऐसी छातियों को देखकर।फिर wo पैंटी bhi उतार द और उसकी जाँघों की बीच थोड़े से बाल वाली चूत सामने थी, और राज अपने खड़े लंड को हाथ से सहलाने लगा।फिर राज उनको फ़ैशन शो की तरह कमरे में चल कर दिखाने को कहा।दोनों हसने लगी,पर राज के ज़ोर देने के बाद वो मान गयीं।सरिता ने हाथ बढ़ाकर शालू का हाथ पकड़ लिया और मुड़कर चल कर दिखाने लगी।राज का लंड अब उन दोनों का मस्त पिछवाड़ा देखकर झटके मारने लगा।सरिता के बड़े चूतरों की थिरकन और शालू के थोड़े छोटे गोल चूतरों की मादकता देखते ही बनती थी।जब वो दोनों पलटकर वापस आयीं तो उनके हिलते दूध और सपाट पेट गहरी नाभि, और रसिलि चूत देखके राज बहुत मस्ती से भर गया।उसका हाथ अपने लंड से हट ही नहीं पा रहा था, वो उसको हिलाए जा रहा था।सरिता और शालू जब उसके पास पहुँचे तो वो उन दोनों को अपनी बाहों मैं खींच लिया,और दोनों को बारी से चूमने लगा।और अपने हाथ को उनके नितम्बों पर दबा रहा था, सरिता के बड़े बड़े नरम और शालू के थोड़े छोटे सख़्त और चिकने नितम्ब और उसका लंड सरिता की पेट में घुसने की कोशिश कर रहा था।सरिता ने राज ka लंड अपनी मुट्ठी में लेकर सहलाना शुरू किया और शालू ने भी राज ke बॉल्ज़ पर अपनी हथेली रख दी और उनको प्यार se उनको अपनी हथेली में लेकर सहला रही थी।राज के एक एक नितम्ब दोनों लड़कियों ke हाथ में थे।अब राज बारी बारी से दोनों के होंठ चूस रहा था।थोड़ी देर बाद सरिता अपनी फूलती हुई साँसों पर क़ाबू पाकर बोली, नहाना नहीं है क्या? वो तीनों अलग हुए और हँसते हुए बाथरूम में घुस गए।
राज ने शोवर चालू किया और तीनों उसके नीचे खड़े हो गए,राज और शालू आमने सामने थे और सरिता राज के पीछे खड़ी थी।राज ने शालू को अपने सीने से सटा लिया और उसके बालों पर हाथ फेरने लगा, सरिता भी राज के नितम्बों से सटकर उसके पीठ को सहलाने लगी।फिर राज ने झुक के शालू को कहा, मज़ा आ रहा है, पापा के साथ नहाने में, आख़री बार जब नहायी होगी मेरे साथ तो ४/५ साल की रही होगी। और उस समय भी हम दोनों चड्डी पहने थे। आज तो पूरा नंगा नहाने का मज़ा ही कुछ और ही है।शालू हँसती हुई अपने पापा के लंड से खेलने लगी, और बॉल्ज़ पर भी हाथ फेरने लगी।तभी सरिता बोली- जान , मैं आपकी पीठ में साबुन लगाती हूँ, शालू तू सामने लगा दे। राज- वाह मेरे तो मज़े हो गए, दो दो सेवा करनी वाली मिल गयीं।फिर सरिता ने साबुन राज की गर्दन पर लगाया और फिर पीठ से होती हुई उसके नितम्बों पर लगाया और नीचे पैरों तक पहुँच गईं।उधर शालू ने भी उसकी छाती से लेकर पेट और नाभि में साबुन लगाया, फिर नीचे आयी और जाँघों से लेकर पैरों तक साबुन लगाया।सरिता ने अब नितम्बों की दरार में साबुनवाला हाथ डाला और बोली- अरे यहाँ तो आपके बहुत बाल उग आए है, आप साफ़ नहीं करते। राज- अरे वहाँ मेरा हाथ ही नहीं जाता, कैसे सफ़ाई करूँ। सरिता- मैं कर दूँ? राज- हाँ कर दो ना, देखी सामने मेरा सब साफ़ हैं, लंड और बॉल्ज़ के आसपास, वहीं बाल छूट गए हैं।उधर शालू ने उसके लंड पर साबुन लगाया और उसके सुपारे को भी अछेसे साफ़ कर रही थी।फिर उसके बॉल्ज़ को भी साफ़ करने लगी, अब लंड पूरा खड़ा था, शालू के मुँह के पास।इधर सरिता ने शेल्फ़ से एक शेवर निकला और शालू को पिच्छे बुलाया और राज को दीवाल पड़कर आगे को झुकने को बोली।राज आगे को झुका दीवाल का सहारा लेके और अपने चूतरों को ऊपर उठा दिया। फिर उसने शालू को कहा की वो राज के नितम्बों को फैलाये। शालू ने वैसा ही किया, अब शालू और सरिता को राज का भूरा गाँड़ का छेद दिख रहा था, जो बालों से भरा था। सरिता ने अब शेवर से उसकी गाँड़ के आसपास के बाल निकालने शुरू किया। शालू उसके दोनों नितम्बों को फैलाकर खड़ी थी।सरिता बड़ी सावधानी से सफ़ाई कर रही थी। थोड़ी देर में पूरे बाल साफ़ हो गए और सरिता ने हाथ डाल के राज की गाँड़ के आसपास ऊँगली फिरायी और शालू को बोली- देख कैसी चिकनी हो गई है तेरे पापा की गाँड़ । शालू ने भी ऊँगली फिरायी और बोली- हाय पापा आप की गाँड़ तो मक्खन सी चिकनी हो गयी है।सरिता बोली- ठहर मुझे इसकी सफ़ाई कर लेने दे, कहते हुए उसने साबुन और पानी से उसके नितम्बों की दरार और गाँड़ के छेद को अच्छी तरह से साफ़ किया,फिर उसको चूमकर बोली - आह बड़ी स्वाद है जान,और फिर उसने अपनी जीभ पूरी दरार में घुमाना शुरू किया और जीभ से उसके छेद को सहलाने लगी।राज आह आह कर रहा था, उसे बड़ी मस्ती चढ़ रही थी। फिर सरिता को हटाकर शालू ने अपना मुँह अपने पापा की गाँड़ में डाल दिया और उसके पूरे चूतरों के अंदरूनी भाग को जीभ से चाटने लगी। राज इस नए आक्रमण का मज़ा ले रहा था, तभी सरिता ने उसकी छाती के मर्दाने निपल्ज़ पर अपने होंठ रख दिए और उनको दाँतों से काटने लगी और बाद में उसके लंड को चूसने लगी।राज को लगा की वो झड़ जाएगा, आगे से सरिता लंड को चूस रही थी और पीछे से शालू उसकी गाँड़ चाट रही थी। वो मस्ती के सागर में गोते लगा रहा था।फिर जब वो झड़ने के क़रीब आ गया तो उसने दोनों को हटा दिया, और अपने आप को क़ाबू में किया। फिर वो बोला- चलो अब मैं तुम दोनों को साबुन लगाता हूँ।अब वो सरिता के सामने से साबुन लगाने लगा तो शालू ने पिच्छे जाकर सरिता की पीठ पर साबुन लगाने लगी।राज के हाथ सरिता के चूचियों को साबुन लगाने के साथ मसल भी रहे थे।उधर शालू अब पीठ से नीचे आती हुई सरिता की चूतरों को साबुन लगा रही थी, और मसल भी रही थी।शालू ने भी सरिता की गाँड़ की दरार में उँगलियाँ डाल दी और उसके गाँड़ को भी साफ़ करने के बहाने ऊँगली से छेद रगड़ने लगी।उधर राज अब पेट और नाभि को मसल रहा था और फिर बैठकर सरिता की चूत में साबुन की घिसाई करने लगा। 
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10-21-2018, 11:49 AM,
#12
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सरिता मज़े से सरोबार होकर हाय मरी ऊफ़्फ़ करने लगी।तभी सरिता चीख़ मारकर झड़ने लगी।फिर शालू को साबुन लगाने का कार्यक्रम चालू हुआ।शालू के दूध और उसकी चूत और गाँड़ में जब साबुन लगा और वहाँ मालिश हुई तो वो भी बहुत गरम हो गयी।फिर तीनों शॉवर लेकर और तौलिए से सुखाकर वो बाहर आए और बेड पर लेट गए।राज बीच में अपना खड़ा लंड लेकर के लेटा थाऔर उसके अग़ल बग़ल दोनों लेटी थीं।दोनों राज पर साइड से चढ़कर उसके होंठ उसके निपल्ज़ और फिर उसके लंड और बॉल्ज़ को चूसने लगी।उधर राज शालू और सरिता की चूचियाँ दबा रहा था और उनको चूस रहा था।वो दोनों भी उसके शरीर से मज़ा ले रही थी।फिर राज ने शालू को कहा - चलो मेरे मुँह पर बैठ जाओ।वो हैरान होके बोली- क्या मतलब पापा? राज ने उसकी बोला- तुम्हारी चूत चाटूँगा बेबी। बैठो तो और देखो मज़ा। सरिता ने उसे बैठने को कहा- ऐसे बैठो अपने पापा के मुँह में जैसे सु सु कर रही हो।शालू शर्माते हुए उठकर राज के मुँह ओर पलंग को पकड़कर बैठ गयी। अब राज ने उसके चूतरों को दबाते हुए उसकी चूत की पप्पियाँ लेने लगा और फिर जीभ से उसकी चूत चाटने लगा।शालू आह आह करने लगी।उधर सरिता ने राज का लंड चूसना शुरू किया , और मस्ती से भरने लगी।अब शालू भी मस्ती से अपनी कमर हिला कर अपनी चूत उसके मुँह पर रगड़ने लगी।राज ने अब अपना मुँह थोड़ा आगे बढ़ाया और उसकी गाँड़ चाटने लगा।अब शालू मस्त हो गयी थी।फिर राज ने शालू को doggie पज़िशन में लाया और उसकी चूत में अपना लंड पेल दिया और झटके से उसे चोदने लगा।सरिता ने नीचे आकर शालू की चूचियाँ दबाईं।अब दुगुने हमले से शालू बहुत जल्दी आह ऊफ़्फ़ करके चिल्लायी - पापाऽऽ मैं झाड़ीइइइइइइइइ । फिर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।अब राज ने उसकी चूत से अपना लंड निकाल लिया और सरिता को पीठ के बल लिटाकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया।सरिता भी मज़े से अपनी कमर उछालने लगी और मज़े से चूदवा रही थी।क़रीब १५ मिनट की चूदाइ में पलंग में जैसा तूफ़ान आ गया था।राज उसकी छातियाँ दबाते हुए उसके होंठ चूस रहा था। फिर राज ज़ोर से धक्का मारते हुए और वो दोनों झड़ने लगे।
तीनों बाथरूम से फ़्रेश होकर आए और ऐसे ही नंगे बिस्तर पर लेट गए, राज बीच में था, और शालू उसके ऊपर आ गयी , सरिता उसके बग़ल में लेट गयी।शालू अपने पापा के होंठ चूम रही थी और राज उसके पीठ और चूतरों को सहला रहा था।सरिता ने शालू की चुचि दबा दी, और वो आह कर उठी, उसने भी सरिता की चुचि दबा दी। राज ने सरिता से कहा- देखी सरिता , ये शालू तो एक रात में ही मस्त चुदक्कड बन गई है।सरिता बोली- हान जान, ये तो हमसे भी आगे निकल गयी है, मैं तो पहली बार की चूदाइ के बाद एक दिन बिस्तर से उठ ही नहीं पायी थी, और इसको देखो रात से लगातार चूदवा रही है। शालू - दीदी तुमको पहली बार किसने किया? सरिता- धत्त , एसा सवाल भी कोई पूछता है? राज- अरे अब हममें आपस में कुछ भी छिपा नहीं है, चलो ना बता भी दो। सरिता- आप लोग किसी को नहीं बताना, वरना मेरी बड़ी बदनामी होगी। शालू- दीदी हम किसको क्यूँ बताएँगे? चलो बताओ ना प्लीज़। सरिता- शालू मेरी पहली चूदाइ भी अपने घर में ही हुई थी।

फिर सरिता ने अपनी कहानी शुरू की , -----------
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10-21-2018, 11:49 AM,
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RE: Hindi Porn Kahani अदला बदली
फिर सरिता ने अपनी कहानी शुरू की , -----------

सरिता एक पास के गाँव में अपने बाबूजी, माँ और छोटे भाई के साथ रहती थी, सामान्य माध्यम वर्ग ka परिवार था,और पिता की किराने की दुकान थी।सब कुछ बढ़िया चल रहा था।एक बार उनके घर मैं बाबूजी के बड़े भाई आए यानी तायाज़ी और फिर वो उसी समय स्कूल से आयी थी और सलवार कुर्ते में थी, तब वो १२ th में थी ,और उसका बदन अभी जवान हो रहा थी। तायाज़ी को उसने नमस्ते की और पैर छुए , तायाज़ी ने उसकी पीठ में हाथ फेरते हुए उसे आशीर्वाद दिया।सरिता को लगा कीं वो उसकी ब्रा के स्ट्रैप पर हाथ फेर रहे हैं, उसे कुछ अजीब लगा।फिर वो अंदर गयी, घर में माँ नहीं थी, और भाई दुकान पर था। वो दो ग्लास पानी लायी और बोली- बाबूजी माँ कहाँ गयी, वो बोले, मंदिर गयी है, जा तू चाय बना ला। सरिता अंदर गयी और उसको लगा की तायाज़ी की नज़रें उसकी चूचियों और नितम्बों पर थी।वो अंदर गयी और थोड़ी परेशान हो गई।
सरिता अंदर से चाय बना कर लायी और बरामदे में बाबूजी और तायाज़ी को दी।तायाज़ी चाय लेते हुए सरिता की चूचींयों को घूर रहे थे। फिर सरिता अंदर गयी और बरामदे के पास वाली खिड़की पर खड़ी हो गयी।उसने बातें सुनने की कोशिश की , धीरे से पर्दा हटाया और वो दोनों दिखने भी लगे, क्योंकि उनकी साइड थी इसलिए वो सरिता को नहीं देख सके।तायाज़ी बोल रहे थे- अरे शंकर , ये सरिता तो कड़क जवान हो गई है, कुछ मज़ा वजा लिया की नहीं? बाबूजी हैरानी से उनको देखते हुए बोले- कैसा मज़ा भाई जी ? तायाज़ी-अरे वही उसकी गदरायी जवानी का मज़ा और क्या? बाबूजी- अरे भाई जी क्या बोलते हो, मेरी बेटी है, हाँ अब जवान हो रही है, इसके लिए लड़का ढूँढना शुरू करना चाहिए।तायाजी- अरे शंकर, तू भी पागल है, इतनी मेहनत से बेटी को बड़ा किया है, अब माल तय्यार होने के बाद उसको किसी और को दे देगा मज़े लेने के लिए? बाबूजी- लेकिन दुनिया की यही तो रीत है भाई जी।ताया-अरे , मैं जस रीत को नहीं मानता, हमारी बेटी नमिता जैसी ही जवान हुई, मैंने उसको अपना बना लिया, मैंने तो उसकी सील २ साल पहले ही तोड़ दी थीऔर फिर १ साल तक मज़ा लेने के बाद मैंने उसकी शादी अपने ही शहर में एक सेल्ज़ एंजिनीयर से कर दी।अब वो रोज़ दिन में जब उसका पति ऑफ़िस में होता है, घर आकर मुझसे चूदवा लेती है।बाक़ी टाइम अपने पति से मज़ा करती है।बाबूजी का हाथ ये सुनकर अपनी धोती में चला गया और वो अपना उभार जो तंबू सा तन गया था, अजस्ट करने लगे।तभी तायाजी बोले-वैसे एक और अच्छी बात हुई ,मेरे बेटे को ३ महीने के लिए उसकी कम्पनी ने अमेरिका भेजा है , और क्योंकि बहु की अपनी सौतेली माँ से नहीं पटती , इसलिए वो बहु को मेरे पास छोड़ गया है और मैंने बहु को भी ५/६ दिन में ही सेट कर लिया और अब वो रात को मेरे बेडरूम में ही सोती है।ऐसा कहते हुए अब तायाजी ने भी अपनी धोती का तंबू ठीक किया।सरिता आँखें फाड़ी दो दो तने तंबू देख रही थी, और उसकी पैंटी भी गीली होने लगी थी ये सब सुनकर।फिर ताऊजी बोले-तू ऐसा कर एक दिन आ जा हमारे घर मैं तुम्हें दोनों माल का मज़ा कराऊँगा।वो भी ख़ुश हो जाएँगी वेरायटी पाकर। बाबूजी- हाँ भाई अब तो आना ही पड़ेगा, नमिता और बहु दोनों को चोदनेके लिए अब मैं भी बेक़रार हूँ। तायाजी बोले- लेकिन एक शर्त है, जब तुम सरिता को पटा लोगे तो मुझे भी उसकी चूत का मज़ा दिलवा देना।बाबूजी हँसते हुए बोले- ये भी कोई पूछने की बात है।थोड़ी देर और इधर उधर की बात करके ताऊजी खड़े हो गए जाने के लिए,उनकी धोती का आगे का हिस्सा अभी भी फूला हुआ था, वो बोले- ज़रा एक बार सरिता को बुला दे ना, जाने के पहले एक बार उसको अच्छी तरह से देख लूँ, और आशीर्वाद दे दूँ।ऐसा कहते ही अपनी धोती में हाथ डाल कर उभार को दबाने लगे। तब बाबूजी ने सरिता को आवाज़ दी और वो बाहर आइ ,बाबूजी बोले- चल, ताऊजी जा रहे हैं, इनसे आशीर्वाद ले ले, सरिता झुकी तो ताऊजी ने उसके कंधों को पकड़ कर उठा दिया और ऐसा करते हुए उसकी चूचियों को साइड से छू लिया, सरिता काँप उठी।फिर वो उसकी पीठ सहलाकर बोले- बेटी अब हमारे घर आना नमिता तुमको याद करती है।और कहते हुए उसकी कमर का हिस्सा सहला दिए। बाबूजी सब देख रहे थे,मुस्कुराते हुए।फिर बाबूजी ताऊजी को बाहर तक तक छोड़ने गए।वापस आकर बाबूजी अपने कमरे में गए और सरिता को आवाज़ दी । सरिता ने उनके कमरे में जाके पूछा - क्या काम है बाबूजी? बाबूजी ने उसको एक भरपूर नज़र से देखा,सरिता काँप उठी, उसे लगा कि ताऊ जी की बातों का लगता है इन पर असर हो गया है।बाबूजी बोले- बेटी ज़रा पैर दबा दे बहुत दर्द हो रहा है , तेरी माँ भी मंदिर गयी है, वो पलंग पर जगह बना कर बोले- आओ यहाँ बैठ जाओ।सरिता बाबूजी के पैरों की तरफ़ बैठ गयी।बाबूजी ने देखा की बैठते उसके कुल्हे बाहर को निकल आए, उनकी धोती में क़ैद नाग ने फिर सर उठाया।फिर बाबूजी ने अपनी धोती घुटनों से ऊपर कर दिया और उनके बालों से भरे पैरों को सरिता दबाने लगी।इसके पहले भी सरिता ने कई बार उनके पैर दबाए थे, पर आज उसके मन में शांति नहीं थी। बार बार ताऊजी की बातें उसके दिमाग़ में आ रही थी।तभी बाबूजी ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और बोले- सरिता,पढ़ाई कैसी चल रही है? सरिता- ठीक चल रही है बाबूजी।फिर उसने सरिता की कुर्ती के सिरे को हाथ में लेकर बोले- बेटी, ये कुर्ती तो बहुत पुरानी हो गयी है, मैं कल तुम्हें नए कपड़े दिलाऊँगा।मेरे साथ बाज़ार चलना।सरिता-ठीक है बाबूजी माँ को भी ले चलेंगे। बाबूजी- अरे वो जाके क्या करेगी,उसको मंदिर से ही फ़ुर्सत नहीं रहती और वो क्या जाने नए फ़ैशन के बारे में।हम दोनों चलेंगे और तुम अपनी पसंद के कपड़े ले लेना।सरिता ने ख़ुश हो कर हाँ में सर हिला दिया।फिर बाबूजी ने धोती और ऊपर करके बोला- बेटी आज तो जाँघों में भी दर्द हो रहा है, ज़रा यहाँ भी दबा दो। सरिता अब पास आकर साइड में बैठ गयी और बाबूजी की mascular बालों से भरी जाँघों को दबाने लगी, अचानक उसने ऊपर देखा तो वहाँ एक ज़बरदस्त उभार था, जिसको इतने पास देखकर उसकी पैंटी फिर से गीली होने लगी।फिर बाबूजी ने सरिता के कमर को सहलाते हुए कहा-बेटी, तुम कई दिनों से मोबाइल माँग रही हो ना? चलो कल तुमको वो भी दिला देंगे।सरिता ख़ुशी से बोली- सच पापा, आप बहुत अच्छे हो। बाबूजी ने उसे खिंच के अपनी छाती से चिपका लिया और बोले- बेटी, तुम भी तो बहुत प्यारी हो, ऐसा कहते हुए उसके गाल चूम लिए। तभी दरवाज़े में आवाज़ आइ और सरिता की माँ अंदर आकर सरिता को आवाज़ दी और पानी माँगी।बाबूजी ने सरिता को अपने से अलग किया और अपनी धोती ठीक की और लंड को भी अजस्ट किया और बाहर आ गए। सरिता तो पहले ही किचन जाकर पानी ले के आयी थी।
उस दिन बस यही हुआ और बाबूजी दुकान चले गए और सरिता अपनी माँ के साथ घर का काम करने लगी।
अगले दिन शनिवार था, और सरिता की स्कूल की छुट्टी थी।बाबूजी ने अपनी पत्नी से कहा-चलो बाज़ार चलते हैं। उसने माना कर सिया क्योंकि मंदिर में वक सत्संग था, जहाँ उसको जाना ही था। फिर बाबूजी बोले- चलो मैं सरिता को के जाता हूँ , उसे कुछ कपड़े ख़रीदने हैं।सरिता की माँ ठीक है कहकर मंदिर चली गई, और बाबूजी अपने कमरे में तय्यार होने गए, आज उन्होंने जींस पैंट और टी शर्ट पहनी थी, और स्मार्ट लग रहे थे।उधर सरिता ने भी टॉप और जींस पहनी।उसने अपनी माँ की लिप्स्टिक भी लगा ली।जब वो तय्यार होके आइ तो बाबूजी उसको देखते ही रह गए।टाइट टॉप में कसी उसकी छातियाँ किसिका भी लंड खड़ा कर सकतीं थीं। बाबूजी का लंड जींस के अंदर अँगड़ायी लेने लगा।फिर बाबूजी बोले-पास के शहर चलेंगे ना , यहाँ तो अच्छे कपड़े मिलेंगे नहीं अपनी बस्ती में।सरिता ने सर हाँ में हिला दिया।बाबूजी और सरिता बाहर आए, और बाहर रखी मोटर साइकल यानी बाइक में बैठ गए, सरिता अपने दोनों पैर एक तरफ़ रखकर साइड से बैठी ताकि उसका कंधा बाबूजी की पीठ की तरफ़ था। बाइक जब बस्ती से दूर हो गई, तब बाबूजी बोले- बेटी, तेरे ऐसे बैठने से बाइक एक तरफ़ को झुक रही है,चल दोनों तरफ़ पैर करके बैठ जा।बाइक रुकने पर सरिता दोनों तरफ़ एक एक पैर रखके बैठ गयी,अब उसकी छातियाँ बाबूजी की पीठ के सामने थी और उसने बाबूजी के कंधे पर हाथ रख दिया।बाबू जी ने थोड़ी देर बाद ब्रेक मारी और सरिता की छातियाँ उनके कंधे पर दबने लगी, और उनका लंड खड़ा हो गया।फिर वो सरिता से बोले- बेटी, मेरा कंधा दुःख रहा है, तुम अपना हाथ मेरी कमर पर रख लो।सरिता ने हाथ उनकी कमर पर रख दिया और थोड़ा आगे आकर बैठी।अब थोड़ा भी झटका लगता तो उसका सीना बाबूजी की पीठ से टकराता था।सरिता का हाथ बाबूजी के कमर से खसक कर उनकी जाँघों पर आ गया।इधर बाबूजी का लंबालंड जींस के अंदर एक जाँघ पर रखा था अकड़ा हुआ, और उसका स्पर्श जैसे ही सरिता को हुआ , उसके शरीर में जैसे बिजली दौड़ गयी।उसने एकदम से हाथ हटा लिया और उधर बाबूजी मन ही मन बहुत ख़ुश हो रहे थे, की चलो शुरुआत तो हुई।थोड़ी देर में वो दोनों शहर पहुँच गए,और एक बड़े कपड़े की दुकान में वो अंदर पहुँचे।दुकान में अलग अलग काउंटर थे,और काफ़ी भीड़ थी।दोनों लेडीज़ काउंटर पर पहुँचे तब वहाँ काफ़ी भीड़ थी।सरिता को आगे करके बाबूजी उसके पीछे हो गए।सरिता ने भीड़ में आगे जाकर अपने लिए टॉप और जींस दिखाने को कहा।बाबूजी भी आगे बढ़कर उससे सटकर खड़े हो गए।सरिता टॉप देख रही थी, तभी भीड़ का फ़ायदा उठाकर उन्होंने अपना लंड सरिता की गाँड़ से लागा दिया।सरिता को लगा की कोई उसके चूतरों पर ऊँगलीलगा रहा है, वो थोड़ा मुड़कर देखी तो किसी का हाथ नहीं दिखा,लेकिन बाबूजी की सटी हुई जाँघ से उसको समझ आ गया की ये ऊँगली नहीं कुछ और है, अब १८ साल की उम्र में इतना तो समझती थी कि ये क्या हो सकता है! तभी बाबूजी ने कहा- बेटी ये रंग ठीक नहीं, कोई दूसरा रंग का लो।सरिता दूसरे रंग के कपड़े देखने लगी।सरिता ने एक टॉप बाबूजी को दिखाया और बोली- ये कैसा है?आपको पसंद है? बाबूजी धीरे से उसके कान में फुसफुसाए- बेटी, ये तो बहुत छोटा टॉप है, फिर उसके पीछे से झाँकते हुए उसकी छातियों को देखते हुए बोले- तुम्हारे अब काफ़ी बड़े हो गए हैं, ये तुमको छोटा होगा।सरिता लाल हो गयी शर्म से और बोली- हमको अपना साइज़ पता है, ये आ जाएगी।सेल्ज़ मैन बोला- आप वहाँ ट्राइयल ले लो।सरिता भीड़ में मुड़ी और उसकी छाती बाबूजी के सीने से टकराई।फिर trial room में जाकर टॉप पहनकर बाबूजी को दिखाया और बोली- देखिए फ़िट हैं ना? बाबूजी उसकी छातियों को घूरते हुए कहा-हाँ सच में ऐसा लगता नहीं था की इतना छोटा टॉप तुम्हारे इन बड़ी बड़ी -- मतलब छा- मतलब शरीर में आ जाएगा।वो हकलाने से लगे।सरिता हँसती हुई बोली- चलिये अब जींस ले लूँ। और दिर दोनों भीड़ में घुसे।इस बार बाबूजी ने अपना लंड थोड़ा सामने की ओर किया और उसको सीधे उसकी गाँड़ से चिपका दिया।सरिता चिहुंक उठी, उसे साफ़ साफ़ लंड का अहसास हो रहा था अपनी गाँड़ में।उधर बाबूजी ने उसके टॉप को छूते हुए बोले- कपड़ा अच्छा है और फिर टॉप को थोड़ा हटाकर उसकी नंगी कमर पर हाथ फेरने लगे। सरिता का शरीर काँप उठा।एक तरफ़ लंड का अहसास और दूसरी तरफ़ बाबूजी का कडे हाथ का स्पर्श, उसकी पैंटी गीली हो उठी।अब वो जींस लेकर trial room में घुसी।बाहर आकर पूछी - बाबूजी ठीक है? बाबूजी ललचायी आँखों से उसकी गदराई जाँघों को देखते हुए बोले- हाँ मस्त है और पीछे की भी फ़िटिंग मस्त है। उसके चूतरों पर चिपकी जींस देखकर उनका लंड बहुत कड़ा हो गया था।फिर बाबूजी बोके- बेटी, ब्रा पैंटी भी ले लो।मैंने तुम्हारी ब्रा और पैंटी को धुलने के बाद सूखते देखा है, सब पुरानी हो गई हैं, पैंटी तो फट भी रही हैं, सही बोला ना? सरिता के गाल गुलाबी हो गए। वो बोली- जी बाबूजी दिलवा दीजिए।तब वो दोनों उसी दुकान के दूसरे काउंटर पर पहुँचे, वहाँ भीड़ कम थी।सरिता- बाबूजी आप यहाँ मत अयिए, आपके सामने हमको शर्म आएगी। बाबूजी- अरे इसमें शर्म कैसी। 
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10-21-2018, 11:49 AM,
#14
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सरिता मजबूर होकर बाबूजी के साथ ही हो ली और उसने कहा- ३४ साइज़ की ब्रा दिखाइए। बाबूजी उसके कान में फुसफुसाए- तुम्हारा साइज़ तो ३६ होना चाहिए,इतने छोटे तो नहीं है तुम्हारे।सरिता- बाबूजी आप चुप रहिए प्लीज़।सरिता कुछ ब्रा देखी और पूछी -बाबूजी दो ले लूँ? बाबूजी उसके कान में बोले- अरे , दो ३४ की ले लो और दो ३६ की भी ले लो,क्योंकि अब तुमको बहुत जल्दी ३६ के साइज़ की लगेगी।सरिता ने बाबूजी के हाथ में चिमटी काटी और बोली- धत्त आप कुछ भी बोल रहे हो।फिर वो पैंटी देखने लगी।बाबूजी ने एक पैंटी हाथ में ली जिसमें पीछे एक सिर्फ़ रस्सी थी, और सामने एक पतली सी पट्टी।वो बोले-बेटी,ये ले लो, तुम पर बहुत अच्छी लगेगी।सरिता ने बाबूजी को बोला- क्या बाबूजी , आप भी मरवाओगे, माँ घर से निकाल देगी।फिर उसने दो नोर्मल सी पैंटी ले ली, पर बाबूजी को कहाँ शांति थी,वो एक लेस वाली जालीदार सेक्सी ब्रा और पैंटी ज़बरदस्ती उसको दिलवा दिए।सरिता का मन धड़कने लगा था, वो समझ गई थी की बाबूजी ये उसको पहनाएँगे और यह सोचकर वो शर्म से लाल हो गई।फिर बाबूजी बोले- चलो खाना खा लेते हैं और उसके बाद तुमको मोबाइल भी दिला देंगे।सरिता बहुत ख़ुश हो गई ,आज उसका मोबाइल का सपना जो पूरा होने वाला था।फिर वो एक रेस्टरोंट में पहुँचे, वहाँ बाबूजी ने कोने की सीट पसंद की, और वो दोनों सोफ़े पर अग़ल बग़ल बैठ गए।बाबूजी ने उसका हाथ सहलाया और बोले-हमारी बेटी क्या खाएगी?और उसके जाँघ पर हाथ रखकर बोले-शहर में मज़ा आ रहा है ना? सरिता ने सर हिलाकर कहा- जी बहुत।बाबूजी ने अब अपना हाथ जाँघ पर घुटने से लेकर ऊपर तक फेरना शुरू किया, सरिता की तो पैंटी फिर से गीली होने लगी।तभी वेटर आया और बाबूजी ने हाथ हटा लिया, पर शायद वेटर ने देख लिया था, उसने ऑर्डर लिया और जाते हुए बोला-सर,मैं ये पर्दा खिंच दूँ, ताकि आप प्राइवसी से खाना खा सकते हैं।बाबूजी ने हाँ कह दिया और उसने पर्दा खिंच दिया।अब बाबूजी सरिता के पास खिसक आए और उसके कमर में हाथ डाल कर बोले-तुम्हारे तायाजी बोल रहे थे कि तुम बहुत सुंदर और जवान हो गयी हो।मैंने तो आज जब तुमको जींस और टॉप में पहली बार देखा तब समझ में आया की तुम सच में जवान हो गयी हो।सरिता को समझ में नहीं आ रहा था की क्या बोले।वो चुप रही।बाबूजी फिर उसकी कमर सहलाते हुए बोले-बेटी,तुम्हारा कोई boy friend है क्या? सरिता- नहीं बाबूजी, कोई नहीं है।वो ख़ुश होकर उसकी जाँघ पर हाथ रखकर बोले-ऐसा क्यों, तुमको कभी इच्छा नहीं हुई, आख़िर अब तुम पूरी जवान हो गयी हो? और ये बोलते हुए उन्होंने उसकी छातियों को घूरा और उसकी जाँघ के ऊपर का हिस्सा जो चूत सेथोड़ा पहले था की दबा दिया।सरिता का बदन भी ऐसी बातों से गरम होना शुरू हो गया।बाबूजी-अच्छा सच सच बताओ किसी ने आजतक तुम्हारी छातियों को दबाया है? सरिता तो हैरान हो गयी, ये कैसा प्रश्न है? वो बोली-नननहीं। बाबूजी- अरे छूपाओ मत, सच बता दो, मैं मॉ से थोड़े बोलूँगा।सरिता डरते डरते बोली- जी दो बार दबाया है दो लोगों ने।बाबूजी का लंड इतना कड़ा हो गया था की उनको दुखने लगा।वो बोले-कौन दबाया? सरिता-पहली बार आपके एक दोस्त असलम अंकल आए थे ना, जब आप बाथरूम गए तो मैं उनको पानी दी तो वो अकेले देखकर मुझे अपनी गोद में खिंच लिए थे और मेरे होंठ चूसते हुए मेरी छातियों को दबाए थे,दूसरे दिन तक मुझे दुखा था।बाबूजी हैरान हो गए वो असलम को शरीफ़ समझते थे।वो अपने लंड को दबाते हुए बोले-क्या वो जब तुमको अपनी गोद में बिठाए थे तो तुमको अपने चूतरों में कुछ चुभा था? सरिता- जी बाबूजी, बहुत ज़ोर से चुभा था।बाबूजी-फिर क्या हुआ? सरिता- कुछ नहीं, फिर आप आ गए और उसने मुझे जल्दी से छोड़ दिया।बाबूजी- दूसरा कौन था?सरिता-हमारे पड़ोसी श्याम अंकल! वो दुकान में आए थे,मैं अकेली थी क्योंकि आप और भाई खाना खाने आए थे,वो अंदर आए समान देखने के बहाने और मुझे एक दम से अंदर साइड में खिंच लिया और मेरे होंठ चूसते हुए मेरी छातियों को दबाने लगे , उन्होंने तो नीचे भी हाथ डाला था, मैं स्कर्ट में थी।मैं चिल्लाना चाहती थी, पर तभी एक ग्राहक और आ गया और वो भी भाग गए।बाबूजी बहुत गरम हो गए थे, उन्होंने उसको प्यार से अपनी गोद में खिंच लिया और उसको चूमते हुए बोले- बेटी तुमने मुझे उसी समय बताया क्यों नहीं, मैं उन सबकी पिटायी कर देता।सरिता बोली- बाबूजी मैं डर गयी थी।बाबूजी ने अपना हाथ सरिता की चूत पर पैंट के ऊपर से रखते हुए कहा- क्या वो कमीना श्याम यहाँ हाथ लगाया था? सरिता की चूत अब पानी छोड़ने लगी , वो हाँ में सर हिला दी। सरिता ने महसूस किया की उसके पिछवाड़े में बाबूजी का डंडा वैसे ही चुभ रहा है जैसे उस दिन असलम अंकल का चुभा था।फिर बाबूजी ने उसकी एक चूची पर हल्के से हाथ रखा और धीरे से सहलाते हुए बोले-इसको ऐसे प्यार से सहलाते हैं, उन्होंने ज़ोर से दबाया था ना? सरिता बाबूजी की हरकत से हैरान थी पर उसको बड़ा मज़ा आ रहा था, वो बोली- नहीं बाबूजी ऐसे नहीं, वो बहुत ज़ोर से दबाए थे, और हमको दुखा था।बाबूजी बोले- अरे ये तो ऐसे प्यार से सहलाने की चीज़ है, कोई हॉर्न थोड़े है जो ज़ोर से दबा दिया।फिर उन्होंने दूसरी चूची भी सहलाने लगे।अब सरिता मस्त हो गई थी। बाबूजी एक हाथ से उसकी एक चुचि, एक हाथ उसकी चूत को दबा रहे थे, और उनका लंड उसकी गाँड़ में धँसा जा रहा थ।सरिता को लगा उसकी पेशाब निकल जाएगी, तभी वेटर खाना ले आया, और वो दोनों अलग अलग होकर बैठ गए, और खाना खाने लगे।बाबूजी ने अपने हाथ से सरिता को कई कौर खिलाए और फिर सरिता ने भी उनको कौर खिलाए।बाबूजी उसकी उँगलियों को काटने का नाटक भी करते थे।खाना खाने के बाद , बाबूजी ने सरिता की सभी उँगलियों को चाटकर साफ़ किया।सरिता की तो जैसे आनंद की अधिकता से आँखें बंद होने लगी। तभी वेटर आया और बिल देकर वो बाहर आए।फिर वो एक पास के दुकान मेंमोबाइल लेने को घुसे।वहाँ बाबूजी ने उसको उसकी पसंद का मोबाइल ले दिए।सरिता की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था।उसका बस चलता तो बाबूजी का मुँह चूम लेती।
फिर वो दोनों बाइक से वापसी के लिए निकल पड़े। इस बार सरिता अपने आप बाइक के दोनों ओर पाँव रखकर बैठी और अपने बाबूजी से चिपक गई ।उसकी छतियाँ अब बाबूजी की पीठ से सट गयीथीं।और उसने अपने हाथ बाबूजी के पेट पर रख दिया।
सरिता बाबूजी से चिपक कर बैठी थी।बाबूजी भी मस्ती मेंउसकी चूचियों के दबाव का मज़ा ले रहे थे,, और उनका लंड कड़क हो गया था।थोड़ी देर जाने के बाद एक सुनसान जगह पर बाबूजी ने बाइक रोक दी और बोले-बेटी मुझे पेशाब आयी है।चलो उधर झाड़ियों के पीछे चलते हैं। सरिता बोली- बाबूजी आप हो आओ , हम यहीं खड़े हैं।बाबूजी ने कहा-तुम भी चलो , यहाँ अकेले खड़ी रहोगी, वो सुरक्षित नहीं है।वो दोनों थोड़ी दूर जाते हैं और वहाँ घने पेड़ रहते हैं , जिनके पीछे वो दोनों आ जाते हैं।अब बाबूजी बोले- चलो ये ठीक जगह है, यहाँ कोई देख नहीं सकता , मैं तो पेशाब करूँगा, तुमने करनी हो तो तुम भी कर लो।ऐसा कहकर बाबूजी ने अपने जींस कि जीप खोने लगे सरिता को लगा कि कहीं उनके सामने ही नंगे ना हो जाएँ , पर फिर उन्होंने उसकी तरफ़ पीठ की और पेशाब करने लगे, सरिता ने देखा की उनकी पेशाब की धार बहुत दूर तक जा रही थी, वो हैरानी से उनकी धार को देख रही थी, तभी बाबूजी अपने सर को घुमाए सरिता को देखते हुए बोले- ओह देख रही हो? चलो और ठीक से देखो।और ऐसा बोलते हुए वो थोड़ा सा सरिता की तरफ़ घूम गए और अब सरिता आँखें फाड़े उनके लम्बे लंड से निकलती पेशाब की धार देख रही थी।वो तो जैसे अपने स्थान पर जड़वत खड़ी रह गई,फिर जब बाबूजी उसको देखते हुए लंड होलकर पेशाब की आख़री बूँदें निकालने लगे,तो उसने शर्मा कर मुँह घुमा लिया। उसकी पैंटी अब पूरी गीली हो गयी थी, और उसको भी अब ज़ोर से पेशाब लगी थी।तभी बाबूजी अपनी जीप बन्द करते हुए आए और बोले- बेटी तुमको भी लगी होगी , तुम उस पेड़ के पीछे जाकर कर लो। सरिता पेड़ के पीछे जाकर अपनी जींस खोली और पैंटी को नीचे करके मुतने बैठी,और उसकी चूत से पेशाब की धार एक सिटी की आवाज़ के साथ निकलने लगी, बाबूजी धीरे से गोल घूमकर उसको एक पेड़ के पीछे से देखने लगे, उसकी मस्त चूत और पेशाब की धार को देखकर वो अपने आप को संभाल नहीं पाए और ठीक सरिता के सामने आके बैठ गए और उसकी चूत को एकटक देखने लगी। सरिता तो बिलकुल झटके में आ गयी, पेशाब का दबाव इतना था की वो उठ भी नहीं सकी और शर्माकर उसने अपनी आँखें ढक ली फिर वो ख़त्म करके उठी, और अपनी पैंटी ऊपर की और पैंट को भी ऊपर खिंचने लगी, तभी बाबूजी बैठे बैठे ही आगे आए और उसकी पैंट खिंचकर नीचे गिरा दी। अब उसकी ज़ालिम जवानी सिर्फ़ पैंटी में क़ैद बाबूजी के सामने थी।उसकी पैंटी उसके कामरस और पेशाब की बूँदों से गीली थी।बाबूजी ने उसकी पैंटी पर अपनी नाक रख दी और उसकी चूत को सूँघने लगे। सरिता को समझ नहीं आ रहा था की क्या करे? तभी बाबूजी ने उसकी पैंटी नीचे खिंच दी और उसकी मस्त चूत उनके आँखों के सामने थी। उन्होंने अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाया और उसके मादक स्पर्श से वो दोनों ही सिहर उठे।फिर वो अपना मुँह उसकी जाँघों के बीच घुसेड़कर उसकी मस्त चूत को चूमने लगे।अब सरिता के पागल होने की बारी थी, वो इस अनजाने सुख से बिलकुल अनजान थी, बाबूजी ने उसकी चूत मी पंखुड़ियों को खोलकर उसने अपनी जीभ डालके उसको अंदर बाहर और ऊपर नीचे करने लगे।सरिता ने मज़े में आकर बाबूजी का सर अपने हाथों में लेकर उसकी अपनी चूत पर दबा दिया, और मज़े से आऽऽहहह मर्रर्र गाइइइइइइ , चिल्लाने लगी।बाबूजी ने एक हाथ टॉप के अंदर डालकर उसकी चुचि तक ले गए और ब्रा के ऊपर से उसको दबाने लगे और निप्पल को भी छेड़ने लगे।सरिता का मज़ा दुगुना हो गया,और वो अपनी कमर आगे पीछे करके बाबूजी के मुँह पर अपनी चूत रगड़ने लगी।जल्द ही वो झड़ने लगी और चिल्लाई उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बाबुउउउउजीइइइइइ और बाबूजी के मुँह में उसने अपनी पिचकारी छोड़ दी। बाबूजी मज़े से पूरा रस पी गए।फिर सरिता के पाँव काँपने लगे और वी पीछे होकर पेड़ का सहारा के कर खड़ी हो गई।बाबूजी भी खड़े हुए और उसकी चूत को अपने रुमाल से बड़े प्यार से पोंछा और फिर पैंटी ऊपर करके उसको पहना दिए और फिर पैंट भी पहना दिए। फिर उन्होंने उसको बहिन में लेकर पूछा- बेटी, कैसा लगा, मज़ा आया? सरिता शर्माके उनके सीने में घुस गई और बोल- जी बाबूजी बहुत अच्छा लगा।फिर वो उसको प्यार करते हुए बोले- बेटी तुमने तो मज़ा ले लिया अब मुझे भी थोड़ा मज़ा दे दो।सरिता ने सवालिया नज़रों से बाबूजी को देखा, मानो पूछ रही हो मुझे क्या करना है। बाबूजी ने अपनी पैंट की तरफ़ इशारा किया और बोले- थोड़ा इसे सहला दो ना।सरिता शर्मा गयी और धत्त बोलकर बाऊजी के सीने में चिपक गयी।फिर बाबूजी ने उसको अलग किया और अपनी जींस खोलकर नीचे गिरा दिए, उनकी चड्डी में एक तंबू सा तना लंड देखकर वो सिहर उठी। फिर बाबूजी ने अपनी चड्डी भी उतार दी और उनका लम्बा मोटा लंड हवा में उछलने लगा।सरिता उसको हैरत से देख रही थी, तभी बाबूजी ने उसका हाथ अपने तने लंड पर रख दिया और उसको हिलाने को बोला। सरिता उनका लंड हिलाने लगी, मुट्ठी में लेकर।बाबूजी की आँखें बंद थीं और वो अपनी बेटी के हाथ से मूठ मरवाकर मज़े में आकर उसकी चूचियाँ दबाने लगे और जल्दी ही झड़ने लगे।बाबूजी का लंड का रस बहुत दूर तक गिर रहा था और सरिता के हाथ में भी वीर्य लग गया था।बाबूजी ने सरिता को बोला- ये वीर्य है इसे चाट के देखो, तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा।सरिता ने बाबूजी के कहने पर वीर्य को चाट लिया, और बुरा सा मुँह बनाया।बाबूजी-बेटी बहुत जल्दी इसका स्वाद तुम्हें पसंद आएगा।अब तुम मेरे लंड को चाट के साफ़ कर दो।सरिता हिचकते हुए नीचे बैठ गयी,और जीभ से उनका लंड चाटने लगी।बाबूजी मस्त हो गए ये। देखकर की उनकी बेटी उनके रंग में ढल रही है।फिर वो सरिता को खड़ा करके उसको चूमने लगे।फिर वो अपने लंड को अंदर किए और बोके- बेटी आज रात को हम तुम्हारी प्यास बुझाएँगे।सरिता- घर में माँ भी होंगी। बाबूजी- तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारी माँ को नीद की गोली खिला दूँगा, फिर रात भर हम मौज करेंगे।ठीक है ना? सरिता ने कहा- जी बाबूजी।टी फिर चलें, ये कहकर इन्होंने सरिता के नितम्बों पर थपकी मारी और दबा दिया,और दोनों बाइक में बैठकर वापस बस्ती की ओर चल पड़े।इस बार सरिता बाबूजी से छाती सटा कर बैठी थी और उसने उनके जाँघ पर हाथ रखा था, उसको बाबूजी ने उठाकर अपने लंड पर रख दिया।उसने मज़े से बाबूजी का लंड दबाना शुरू किया।जैसे ही कोई गाड़ी आती, वो हाथ हटा लेती और बाद में फिर अपना हाथ वापस उनके लंड पर रख देती।इस तरह वो दोनों घर पहुँच गए।
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#15
RE: Hindi Porn Kahani अदला बदली
घर पहुँचकर बाबूजी ने सरिता से कहा- वो सेक्सी वाली ब्रा पैंटी माँ को मत दिखना,नहीं तो वो ग़ुस्सा करेगी।सरिता ने हाँ में सर हिलाया और फिर अपने कमरे में जाकर उसको छिपा दिया और बाक़ी के कपड़े लाकर माँ को दिखाने लगी।मोबाइल देखकर माँ बोली- इसको इतना महगा मोबाइल क्यों ले दिया,तो बाबूजी हँसे और बोले-अरे तो क्या हुआ,हमारी तो एक ही बेटी है,और उसकी भी एक साल में शादी कर देंगे।उसकी हर इच्छा हमको पूरी करनी चाहिए।माँ हँसकर बोली- वो तो है।फिर वो किचन चली गयी,और बाबूजी ने सरिता को चूमा और उसकी गाँड़ दबाए और दुकान चले गए।शाम को सरिता को मोबाइल पर फ़ोन किए और बोले-कैसा काम कर रहा है मोबाइल?वो बोली- बहुत अच्छा बाबूजी, थैंक यू । बाबूजी-अरे बेटी तुम तो मेरी जान हो, और कुछ भी चाइए तो बता देना।हाँ एक बात कहनी थी,हमारे बाथरूम में एक बाल साफ़ करने की क्रीम है,जिससे तेरी माँ अपने नीचे के और बग़ल के बाल साफ़ करती है, बेटी ज़रा वो लेके तुम भी अपने बाल साफ़ कर लेना,तेरी एकदम चिकनी चूत चूमने और चोदने मैं मुझे बहुत मज़ा आएगा।वो बोली- छी बाबूजी आप भी ना, क्या गंदी बातें बोलते हो! बाबूजी- अरे अब चूत को और क्या बोलूँ? और चोदना तो बहुत सामान्य शब्द है, सभी लड़कियाँ भी समझती हैं इसका मतलब।सरिता-पर बाबूजी मुझे एक बात का डर सटा रहा है,की आपका इतना मोटा और बड़ा है, वो मेरी छोटे से छेद में कैसे जाएगा,मुझे लगता है कि मेरा सब कुछ फट जाएगा।बाबूजी-अरे बच्ची ,ऐसा कुछ नहीं होगा,हाँ पहली बार दर्द तो होता है,पर सब लड़कियाँ उसको सह लेती हैं,तुम भी सह लोगी, फिर उसके बाद तो मज़ा ही मज़ा।ठीक है ना? सरिता-जी बाऊजी, पर आप आराम से करिएगा, ज़्यादा मत दुखाइएगा ।बाबूजी-ज़रूर मेरी बच्ची, पर बाल साफ़ करना नहीं भूलना।सरिता- जी बाबूजी अभी कर लेती हूँ।बाबूजी का लंड ये बात करते हुए पूरा खड़ा हो गया था,वो उसको मसलते हुए बोले- ठीक है बेटी,रखता हूँ।
तभी दुकान में श्याम आया और बोला-क्या हाल है? बाबूजी को याद आया की इसी साले ने सरिता को पकड़ा था और उसको दबाया था,तो वो बोले-मुझे सरिता ने बताया की तुमने उससे बदतमीज़ी की थी? तुम मेरे पड़ोसी होकर मेरी बेटी पर बुरी नज़र रखते हो?श्याम हँसते हुए बोला-यार क्या फ़ालतू बात बोल रहा है, जवान लड़की तो होती ही हैं मज़े करने के लिए,इस काम में उनको भी मज़ा आता है, हाँ उस दिन मैंने थोड़ी जल्दबादी कर दी,थोड़े आराम से करता तो बच्ची हड़बड़ाती नहीं।बाबूजी हैरान रह गए की इस आदमी को कोई पछतावा है ही नहीं।वो बोले- लेकिन तुम्हें ये तो सोचना था कि वो मेरी बेटी है। श्याम-अरे उससे क्या हुआ,मैंने जब अपनी बेटी को नहीं छोड़ा तो तुम्हारी को कैसे छोड़ दूँगा।बाबूजी का मुँह खुला रह गया,वो सोचे तो ये भी वही कर रहा है।श्याम- मेरी बेटी अभी दुकान में बैठी है, अभी उसको बुलाता हूँ, और तुम देखो कैसे मैंने उसको तय्यार किया हुआ है।फिर वो लंड मसलता हुआ बग़ल की अपनी दुकान में गया और कविता को बोला-बेटी चलो ज़रा बग़ल वाले अंकल बुला रहे हैं।वो एक जवानी की दहलीज़ पर खड़ी एक भरे बदन की लड़की थी,वो नौकर को दुकान देखने को बोल अपने पिता के साथ आइ और बाबूजी को नमस्ते की।श्याम ने दुकान के एक कोने की तरफ़ इशारा किया जहाँ थोड़ी आड़ सी थी और बोला -जा उधर जा कर खड़ी हो जा।कविता वहाँ खड़ी हो गई, अब उसको दुकान में बाहर से कोई नहीं देख सकता था।श्याम बोला-बेटी ज़रा अपनी कुर्ती और ब्रा उठाकर अंकल को अपनी चूचियाँ दिखा दे।वो बिना झिझके अपनी कुर्ती और ब्रा उठाकर अपनी चूचियाँ नंगी कर दी।उसकी गोल गोल चूचियाँ और उसकी गुलाबी घूँदियाँ देखकर बाबूजी अपना लंड दबाने लगे।फिर श्याम बोला- बेटी अपनी सलवार खोल दे।कविता ने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और उसको नीचे गिरा दी, फिर अपनी कुर्ती उठा दी, उसकी बाल रहित चिकनी चूत सामने आ गई थी।श्याम- मैंने कविता को पैंटी पहन्ने से मना किया है, जब स्कूल जाती है, तभी पहनती है।बेटी ज़रा गाँड़ दिखाओ अंकल को, वो घूम गयी और नीचे उकड़ूँ होकर अपने चूतरों को ऊपर उठायी और उसके गोल गोल चिकने चूतर और गाँड़ का छेद और चूत देखकर बाबूजी पागल से हो गए।फिर श्याम को बोले- मैं थोड़ा सा इसको छू लूँ? वो हँसकर बोला- जो चाहो कर लो यार अपना माल है। बाबूजी अब कविता के पास पहुँचकर नीचे बैठ गए और उसकी चूतरों को दबाते हुए उसकी गाँड़ और चूत सहलाया।फिर उसको खड़ाकर के उसकी चूचियाँ दबाई।कविता की चूचियाँ सरिता से बड़ी थीं, शायद वो लगातार चूदाइ के कारण होगा।तभी श्याम बोला- बाहर आ जाओ, कोई आ रहा है, तो बाबूजी बाहर आ गए।फिर श्याम कविता को बोला - जाओ तुम अभी दुकान पर जाओ।उसके जाने के बाद श्याम ने बाबूजी को बताया की वो ६ महीने से इसको चोद रहा है और अब वो चाहता है की बाबूजी भी इसको चोद लें पर बदले में वो भी सरिता को चोदे।बाबूजी सोच में पड़ गए और बोले- चलो बाद में देखते हैं।कुछ प्लान बनाएँगे।फिर बाबूजी पूछे- तुम अब तक कितनों से चूदवा चुके हो इस बच्ची को? श्याम हँसकर बोला- आप तीसरे होगे , अब तक असलम और मैंने ही चोदा है। बाबूजी असलम के नाम से चौंक गए, ये वोहि है जिसने मेरे घर में सरिता को दबाया था, वो बोले- असलम से भी अदला बदली की क्या? श्याम मुस्कुराते हुए बोला-हाँ उसने अपनी बहु को मुझसे चूदवाया बदले में , मस्त माल है वी भी १९ साल की।बाबूजी समझ गए की शायद वो भी जल्दी ही इस ग्रूप में शामिल हो जाएँगे।फिर श्याम अपना लंड सहलाते हुए चला गया ।
रात को दुकान बंद करने के बाद बाबूजी दवाई की दुकान से नींद की गोली और गर्भ रोकने की गोली भी ले आए।
घर पहुँचकर बाबूजी अपने कमरे में और और नहाकर बाहर आकर सरिता से पानी माँगा और अपनी लूँगी बाँध ली, आज उन्होंने इसके नीचे कछा भी नहीं पहना था। सरिता पानी लाई तो बाबूजी ने उसको बाहों में लेकर चूम लिया और बोले- चूत के बाल साफ़ कर लिए? वो शर्मा कर बोली- जी।तो बाबूजी बोले- दिखाओ ना। सरिता ने धत्त करके बाबूजी के सीने में अपना मुँह छिपा लिया।फिर बाबूजी ने अपनी लूँगी के साइड से अपना लंड निकालकर उसके हाथ में दे दिया,और बोले-बेटी इसको थोड़ा प्यार कर दो ना।सरिता हँसते हुए नीचे झुकी और बाबूजी का लंड चूमने और चूसने लगी।बाबूजी ने थोड़ी देर मज़ा लेकर उसको उठया और उसकी चूचियाँ दबाते हुए बोले- चलो अब बाक़ी का मज़ा रात में लेंगे।सरिता हँसते हुए भाग गयी।
फिर सब खाना खाने बैठे,तो बाबूजी सरिता के बग़ल में बैठ गए और उसका भाई और उसकी माँ सामने बैठ थे।वो सरिता को प्यार से देख रहे थे और उनका लंड झटके मार रहा था।सरिता भी चोरी से उनकी ओर देख रही थी।तभी बाबूजी को लगा की उनकी लूँगी में कुछ छू रहा है, वो धीरे से नीचे देखे तो मस्त हो गए, सरिता उनके लूँगी में हाथ डालकर उनके लंड को पकड़ ली और उसको दबाने लगी।बाबूजी सोचे ये तो मस्त चुदक्कड माल बनेगी।फिर बाबूजी ने भी उसकी जाँघ को सहलाना शुरू किया और उसकी सलवार के ऊपर से चूत को दबाने लगे।इसी तरह मस्ती करते हुए सबने खाना ख़त्म किया एर उठ गए।
रात को सोने के पहले सब दूध पीते थे, उसी का फ़ायदा उठाकर बाबूजी ने पत्नी के दूध में नींद की दवाई डाल दी।उनका बेटा भी उनके साथ कमरे में ही सोता था।फिर जब सब सो गए, तो वो चुपके से उठे और कमरे को बाहर से बंद करके वो सरिता के कमरे में पहुँचे, कमरे का दरवाज़ा खुला हुआ था, और सरिता बिस्तर पर सीधे लेटी हुई थी, एक गाउन में।बाबूजी थोड़ी देर तक उसको देखते रहे,फिर वो उसके बग़ल में लेट गए, वो एक बनयान और लूँगी में थे।फिर उन्होंने सरिता का मुँह चूमना शुरू किया,सरिता एकदम से चौंक कर उठ गयी फिर बाबूजी को देखकर शर्मा गई।बाबूजी-तो बेटी अपने बाबूजी के साथ सुहाग रात मनाने के लिए तय्यार हो ना? और उसके गाल चूमने लगे।वो बोली- जी बाबूजी। बाबूजी-देखो ये सब तुम अपनी मर्ज़ी से कर रही हो ना?मेरी तरफ़ से कोई दबाव नहीं है।ऐसा बोलते हुए वो उसकी छाती पर हाथ फेरने लगे,और उनको बारी बारी से दबाने लगे।सरिता- आऽऽह , नहीं बाबूजी मैं अपनी मर्ज़ी से आपके साथ हूँ और आप मेरे ऊपर कभी ज़बरदस्ती थोड़े ही करेंगे।बाबूजी उसकी गाउन को ऊपर उठाते हुए बोले- बेटी इसके बारे में कभी किसी से बात नहीं करना,क्योंकि हमारा समाज इसकी इजाज़त नहीं देता।और ऐसा कहते हुए उसके गाउन को कमर से ऊपर तक उठा देते हैं और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को दबाते हैं और जाँघों पर हाथ फेरते हैं।सरिता-उफ़्फ़्फ़्फ बाबूजी ,मैं किसी को क्यों बताऊँगी,आह क्या कर रहे हैं! बाबूजी उसकी चूत दबाते हुए उसके होंठ चूसने लगते हैं,और वो बहुत गरम हो जाती है।बाबूजी-सरिता तुमने कभी किसी की चूदाइ देखी है? ऐसा कहते हुए वो उसको उठाकर उसका गाउन उतार देते हैं।अब वो ब्रा और पैंटी में रहती है,और उसने वही जालीवाली सेक्सी ब्रा पैंटी पहनी थी।सरिता-बाबूजी,बस एक बार आपको और माँ को देखा था, जब हम शादी में गए थे मामा की, तो हम चरो एक कमरे में सोए थे, 
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10-21-2018, 11:49 AM,
#16
RE: Hindi Porn Kahani अदला बदली
उस रात आपने माँ के साथ ये किया था, वो हम सोने का नाटक करते हुए पूरा देखे थे।बाबूजी ने उसकी ब्रा खोल दी और उसके मस्त चूचियों को चूसते हुए बोले-वाह,ये तो हमें पता ही नहीं था,तो कैसी लगी थी हमारी चूदाइ?

सरिता- सीइइइइइ ,हाय बाबूजी बड़ा अच्छा लगा था, हमको तो मन किया था की माँ को हटाकर हम ही नीचे आ जाएँ आपके नीचे उस दिन।

बाबूजी बे उसकी पैंटी उतारी और बोले- हमने उस दिन तुम्हारी माँ को कैसे चोदा था,याद है तुम्हें?

सरिता की चूत में बाबूजी की एक ऊँगली अंदर बाहर हो रही थी, और वो उउइउउफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बाबूजी, हाऽऽऽय्यय करके बोली- आप पहले माँ को सीधे लिटाकर किए थे, और ,

बाबूजी ने उसको टोकते हुए कहा-क्या किया था, साफ़ साफ़ बोलो बिटिया। 

सरिता- ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आप चोदे थे माँ को,उउउइइइइइ! 

बाबूजी ने उसकी clit को सहला दिया था।

बाबूजी-माँ भी ऐसे चिल्ला रही थी?

सरिता- नहीं हम लोग वहीं थे ना तो वो ज़्यादा नहीं चिल्लायीं पर जब आप उनको चौपाया बनाकर पीछे से किए, मतलब चोदे थे तब वो चिल्लाना नहीं रोक पायीं थीं।

बाबूजी मुस्कुराते हुए बोले- लेकिन हम तुमको बड़े प्यार से चोदेंगे,तुम्हारा पहला बार है ना।फिर बाबूजी ने उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू की,और वो मज़े से पागल हो गई।अब सरिता ने बाबूजी की लूँगी में हाथ डालकर उनका लंड पकड़कर सहलाने लगी।बाबूजी ने उसकी चूत पर अपना मुँह लगा दिया और उसको ज़ोर से चाटने लगे।अब सरिता अपनी कमर उठाकर अपने बाबूजी के मुँह पर दबाने की कोशिश कर रही थी।फिर बाबूजी ने उसके चूतरों में नीचे दो तकिए रखे और उसकी उभर आइ चूत पर पास रखी क्रीम लगाई और और अपने लंड पर भी क्रीम लगाए और फिर उसकी चूत पर अपने लंड का सुपारा रखकर धीरे से दबाए।जैसे ही लंड चूत की झिल्ली के पास पहुँचा, बाबूजी ने थोड़ा ज़ोर से धक्का लगाया और सरिता के होंठों पर अपने होंठ रख दिए, इससे उसकी घटी हुई चीख़ की आवाज़ दब गई और लंड झिल्ली फाड़ते हुए अंदर घुस गया।फिर बाबूजी रुके और उसकी चूचियाँ चूसने लगे , थोड़ी देर में सरिता का दर्द काम हुआ और अब बाबूजी ने फिर से लंड निकालकर नीचे वापस पेल दिया, और इस बार उसको थोड़ा मज़ा आया और फिर बाबूजी ने चूदाइ का सिलसिला चालू किया।अब तो सरिता का भी दर्द काम हो गया था,और वो भी बाऊजी के चूचियाँ चूसने और लंड के धक्कों का मज़ा ले रही थी।अब उसके मुँह से मज़े की सिसकारियाँ ले रही थी, और जल्द ही अपनी कमर हिलाने लगी और बाबूजी के धक्कों का जवाब देने लगी,बाबूजी भी हैरान हो गए की पहली चूदाइ में ही ये एक्स्पर्ट की तरह चूदवा रही थी।वो समझ गए की ये मस्त रंडि की तरह चुदक्कड निकलेगी, ये सोचकर बाबूजी गरम हो गए,और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगे।

फिर सरिता चिल्लाई , हाय बाबूजी मैं तो गाइइइइइइइइ आऽऽऽहहह उक्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ , और उसने पानी छोड़ दिया, 

तभी बाबूजी भी ओह्ह्ह्ह्ह्ह मेरी जाऽऽन्न्न्न्न कहकर झड़ने लगे और अपना वीर्य अपनी बेटी की कुँवारी चूत में छोड़ दिए।फिर वो उसकी साइड में लेट गए।थोड़ी देर बाद जब वो दोनों सामान्य हुए तो सरिता उठी और उसने चादर में ख़ून देखा और फिर बाबूजी के लंड में भी ख़ून देखा और झुक कर अपनी चूत में हाथ लगाया और उसका हाथ भी वीर्य और ख़ून से लाल था। 

वो बोली- बाबूजी देखिए, आपने मेरी चूत फाड़ दी।

वो मुस्कुराते हुए बोले - बेटी ये तो सब लड़कियों के साथ होता है।बधाई हो अब तुम औरत बन गई हो, कहकर उसको चूम लिए।फिर वो सरिता को लेकर बाथरूम में गए और मुतने लगे,सरिता उनको देख रही थी,फिर सरिता उनके कहने पर मुतने बैठी,वो ध्यान से उसकी चूत देख रहे थे।फिर सरिता को खड़े कर वो साबुन पानी से उसकी चूत को बड़े प्यार से धोए फिर उसको घूमाकर उसके चूतरों को भी धोए और उसकी गाँड़ के छेद और उसके आसपास की जगह को भी साफ़ किया।फिर तौलिए से गाँड़ को पोछा और फिर उसके गाँड़ के छेद को चूम लिया ,

सरिता बोली- छी बाबूजी वहाँ भी कोई चूमता है? 

बाबूजी-अरे लड़की का जिस्म सब जगह चूमने लायक होता है।फिर वो जीभ से गाँड़ रगड़ने लगे।फिर उसको घूमकर उसकी चूत चूम लिए।वो पूरी लाल हो रही थी,वो बोले- बेटी इसने कुछ क्रीम लगा लेना,ज़्यादा ही लाल हो गई है।

सरिता- आपने इतनी बेरहमी से चोदा है, लाल तो होगी ही।बाबूजी- अरे कहाँ मैंने तो बहुत धीरे से चोदा है,पहली बार थोड़ा दुखता तो है ही।कल तक ठीक हो जाएगा सब दर्द।फिर खड़े होकर वो अपना लंड धोने के लिए पानी निकाले, तभी सरिता बोली-बाबूजी मैं धो देती हूँ, कहकर वो नीचे बैठ गयी,और उनके लंड और बॉल्ज़ में बड़े प्यार से साबुन लगा कर अछ्चि तरह से साफ़ किया।बाबूजी का लंड अपनी बेटी का इतना दूलार पाकर खड़ा होने लगा।
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10-21-2018, 11:49 AM,
#17
RE: Hindi Porn Kahani अदला बदली
सरिता ने अपनी ज़िंदगी मैं नरम लंड को पहली बार अपनी आँखों के सामने बड़ा और कड़ा होते हैरत से देख रहती थी।फिर बाबूजी ने उसको कहा-आह बेटी अब इसको प्यार नहीं करोगी।देखो कैसे तुम्हें देख रहा है?

सरिता का मुँह अपने आप ही खुल दिया और उसके सुपारे को चूमने लैविश्ट बहुत शीघ्र उसको मुँह में लेकर चूसने लगी।बाबूजी ने भी मस्ती से उसके मुँह को चोदने लगे।फिर थोड़ी देर बाद वो उसके मुँह से अपना लंड निकाल लिए और सरिता को बोले-चलो अब बिस्तर में चलते हैं, वहाँ मजे से लेटकर चूसना। फिर वो सरिता को अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर लिटाया और साथ में ही लेट गए,और उसको चूमने लगे और उसकी चुचि मसलने लगे,और निपल्ज़ को जीभ से दबाने लगे।फिर वो सरिता को बोले- चल बेटी,मैं लेट रहा हूँ और तुम अपनी कमर मेरे मुँह पर रखकर लेट जाओ। बाबूजी लेट गए और सरिता उनके ऊपर उलटा लेट गयी।सरिता ने फिर से उनका लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।उधर बाबूजी ने सरिता की फटी हुई चूत को सामने देखा, फिर अपनी बेटी के चूतरों को चूमते हुए उसको फैलाया और उसकी दरार में अपना मुँह डाल दिए और उसकी गाँड़ चाटने लगे।सरिता मज़े से काँप उठी,और ज़ोर से लंड को चूसने लगी। उधर बाबूजी ने अपनी जीभ उसके चूत के दाने पर रख दी और उसको जीभ से रगड़ने लगे,सरिता मज़े से पागल होने लगी।और उधर बाबूजी उसके चूतरों को मसलते हुए उसकी चूत के दाने को रगड़ रहे थे जीभ से।थोड़ी देर में ही बाबूजी मज़े से अपना वीर्य उसके मुँह में छोड़ने लगे,और बोले- बेटी पी लो ये सब आऽऽहहहह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह पीइइइओ लोओओओओ ।और सरिता ने बाबूजी का पूरा रस पीने लगी।उधर बाबूजी की छेड़छाड़ से सरिता का भी पानी छूट गया और बाबूजी ने भी उसका पूरा पानी पी लिया।फिर वो उसको अपनी तरफ़ खिंच लिए और उसको प्यार से चूमने लगे।सरिता ने बाबूजी के सीने में अपना सर रख दिया, और दोनों सो गए।


सुबह उठकर बाबूजी ने अपनी प्यारी बेटी से बहुत प्यार किया ,उसको बहुत चूमा और बहुत देर तक उसके शरीर को अपने शरीर से लिपटा कर रखा,फिर उसके बालों को सहलाते हुए बोले- बेटी, अब भी चूत में दर्द हो रहा है क्या?

सरिता- हाँ बाबूजी, पर ज़्यादा नहीं। पर आज मैं स्कूल नहीं जाऊँगी,मैं ठीक से शायद चल नहीं पाऊँगी। 

बाबूजी- ठीक है, मत जाना, कोई बात नहीं। अच्छा बताओ रात को मज़ा आया ना, जानती हो तुम कल चूतरों को उठा उठा कर चूदवा रही थी,ऐसे चूदवाना तो तेरी मॉ क़रीब साल भर बाद सीखी थी,और तुम एक बार में ही सीख गयी।

सरिता- बाबूजी, हमने माँ को ऐसे ही कमर उठा उठा कर आपसे चूदवाते देखा था,उसी से सीखा था।

बाबूजी-लाओ बेटी, तुम्हारी चूत देख लेता हूँ,अब कैसी है, कल रात को तो एकदम लाल दिख रही थी। ऐसा कहते हुए बाबूजी उठे और उसकी जाँघों को फैलाकर उसकी चूत का निरीक्षण करने लगे। बाबूजी- बेटी, अब तो काफ़ी ठीक दिख रही है,लाली कम हो गयी है।फिर उन्होंने चूत की फाँकों को फैलाया और अंदर झाँका और कहा, बेटी अब कोई परेशानी नहीं होगी , आगे तुम बिन किसी परेशानी के चूदवा सकती हो।ऐसा कहकर वो उसकी चूत को चूम लेते हैं। फिर धीरे से उसकी चूत पर हाथ फेरा और फिर उठकर सरिता को बोले- चलो अब कपड़े पहन लो ,मॉ उठने वाली होगी। ख़ुद लूँगी पहनकर कमरे से बाहर चले गए।

सरिता को लँगड़ा के चलते देख माँ ने पूछा क्या हुआ, बेटी, ऐसे क्यों चल रही हो? 

सरिता- माँ, वो बाथरूम में फिसल कर गिर गई थी। आज मैं स्कूल नहीं जाऊँगी। 

मॉ- चल ठीक है, आराम कर ले आज। बाबूजी तय्यार होके अपनी दुकान चले गए। दुकान में उसको बग़लवाले दुकान का मालिक उसका दोस्त श्याम दिखा।बाबूजी ( उनका नाम सुरेश है) श्याम से बातें करने लगे ,जबवो दोनों अकेले हो गए, तो वो श्याम से बोले- कविता कहाँ है? 

श्याम- स्कूल गयी है, क्या बात है, उसकी बड़ी याद आ रही है? 

बाबूजी- अरे कल से जबसे तुमने उसको नंगी दिखाया है , मन उसकी चूचियों, चूत और गाँड़ में अटक गया है। देखो कल का दृश्य याद करके लंड खड़ा हो गया, कहकर उन्होंने अपने पैंट के ऊपर लंड को दबा दिया। 

श्याम- यार सुरेश,सरिता का कुछ हुआ क्या? या तुम उसको चोदने में एक साल लगा दोगे। 

सुरेश(बाबूजी)- अरे यार कल रात काम हो गया, उसकी सील तोड़ दी, भाई। 

श्याम बहुत ख़ुश होकर बोला- ये हुई ना ख़ुशख़बरी ,चलो अब इस माल का हम दोस्त लोग भी मज़ा लेंगे, है ना? 

सुरेश- यार ये भी कोई पूछने वाली बात है,हम सब एक दूसरे की बेटियों और बहुओं के मज़े लेंगे। फिर दोनों अपने लंड मसलते हुए अपने काम में लग गए।

दोपहर को खाना खाने के समय सुरेश ने सरिता को फ़ोन किया, वो बोली- जी बाबूजी!कैसे हैं आप? 

बाबूजी- बेटी भाई को बोल यहाँ आ जाए फिर मैं खाना खाने आऊँगा। 

सरिता- जी बाबूजी, अभी भेजती हूँ।बाबूजी, आपको मेरी याद आयी क्या? मुझे तो हर समय आपकी याद आ रही है।

बाबूजी- क्या तुम्हारी चूत अब भी दुःख रही है? 

सरिता- नहीं बाबूजी अब ठीक है।

बाबूजी- तो अभी गीली हो गई क्या चूदाने के लिए।

सरिता हँसते बोली- क्या माँ के सामने चोदेंगे?

बाबूजी- अरे माँ को कहीं भेज दो ना, अभी मस्त चूदाइ का मूड बन रहा है।

सरिता-बाबूजी आप भी ना, रात को कर लीजिएगा।
बाबूजी बेटे को दुकान में बैठकर घर जाते हैं, सरिता और उसकी माँ शीला उनको खाना खिलाती हैं।जब शीला किचन में जाती है, बाबूजी हाथ बढ़ाकर सरिता की छाती दबा देते हैं,और वो भी मस्ती में उनका लंड पैंट के ऊपर से दबा देती है।शीला के आते ही दोनों अपना हाथ हटा लेते हैं।शीला आकर बोलती है,मुझे मंदिर जाना है,बाबा का सत्संग है,२ घंटों में आ जाएँगे।बाबूजी और सरिता को मानो मन माँगी मुराद मिल गइ। शीला के जाने के बाद सरिता ने दरवाज़ा बंद किया और वापस आकर बाबूजी कि गोद में आकर बैठ गईं।बाबूजी ने उसको अपने से लिपटाकर कहा-हाय बेटी आज सुबह से तुमको याद करके लंड बार बार झटके के रहा है।कहते हुए बाबूजी सरिता के होंठ चूसने लगे।सरिता भी मज़े से उनके चुम्बन का जवाब देनी लगी।बाबूजी उसकी छातियों को बड़े मज़े से दबाने लगे।वो गरम हो गए और उनका लंड सरिता की गाँड़ में हुल्लअड़ कर रहा था।फिर बाबूजी बोले- बेटी, दो घंटों में हम क्या करेंगे, अकेले?

सरिता- भजन करेंगे। 

बाबूजी- अरे वो तो तुम्हारी मा कर लेगी,बताओ ना हम क्या करेंगे? 

सरिता-हम चूदाइ करेंगे, ठीक? यही सुनना था आपको?

बाबूजी- हाँ बेटी, अब चूत लंड और चूदाइ की बात तुम्हारे मुँह से सुनना अच्छा लगता है।कहते हुए उसकी कुर्ती उतार दिए और ब्रा के ऊपर से बाई उसकी मस्त चूचियों पर टूट पड़े,पहले दबाए और फिर उभारों के ब्रा के बाहर से चूचियाँ चूम रहे थे और उनका हाथ उसके पेट और नाभि को सहला रहे थे।फिर उन्होंने उसके पेट और नाभि को चूमा और चाटा।सलवार खोलकर बाबूजी सरिता की पैंटी में क़ैद चूत को देखे जा रहे थे, उसकी गदराई जाँघों को सहलाकर बहुत आनंद उठा रहे थे।तभी सरिता को घूमकर उसकी नितम्बों को पैंटी में देख वो बहुत उत्तेजित होकर उन गोल गोल मांसल चूतरों को दबा दबा कर उनकी थपकी लेने लगे।अब सरिता को गोद में उठाकर वो बेडरूम में लेज़ाकर बिस्तर पर लिटा दिया।फिर ख़ुद नंगा होकर अपने मस्त लंड को हाथ से मसलकर वो सरिता के ऊपर आ गए और उसकी ब्रा खोल दिए।अब वो उन अनारों पर अपना मुँह रखा दिए और उनको चूसने लगी, सरिता ने भी उनके मुँह को अपनी छाती पर दबा दिया।उनके दाँतों के बीच उसकी निपल्ज़ को लेकर वो सरिता को पागल कर रहे थे।फिर वो सरिता को बोले- आओ मेरे ऊपर आ जाओ और अपनी चूत को मेरे मुँह में रखकर बैठ जाओ , जैसे पेशाब करते हैं।वो शर्माकर खड़ी हुई,और अपनी पैंटी उतार दी और अपने बाबूजी के मुँह पर उकड़ूँ बैठ गई।अब बाबूजी ने उसकी चूत पर अपना मुँह डाल दिया।अब वो जीभ डालकर उसकी चूत चाटने लगे और फिर वो उसकी गाँड़ भी चूमने और चाटने लागे। अब सरिता की मज़े से बुरी हालत हो गई थी।वो अपनी कमर हिलाकर मज़ा ले रही थी।फिर बाबूजी ने उसको उलटा कर ६९ की पज़िशन में आ गई।अब वो लंड चूस रही थी और बाबूजी चूत चाट फ़ाहे थे।फिर थोड़ी सी बाद बाबूजी सरिता को ऊपर बैठकर अपना लंड अंदर करने को बोले,सरिता ने लंड पकड़कर अपनी चूत मेंकर लिया। फिर बाबूजी ने नीचे से धक्का मारा और लंड सरिता की टाइट चूत में पेल दिया।उधर सरिता भी ऊपर नीचे होकर लंड अंदर बाहर करने लगे।बाबूजी ने सरिता के बड़े अनारों को दबाते हुए उसको चूस भी रहे थे।थोड़ी देर बाद वो उसको नीचे ले आए और उसकी चूदाइ करने लगे।दस मिनट के बाद वो दोनों झड़ने लगे,और शांत होकर पड़े रहे।
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10-21-2018, 11:50 AM,
#18
RE: Hindi Porn Kahani अदला बदली
सरिता ने अपनी कहानी समाप्त की और राज और शालू पूरे ध्यान से कहानी सुन रहे थे, ये सब जानकार हक्के बक्के रह गए। 

राज ने पूछा-फिर क्या तुमको श्याम और असलम ने नहीं चोदा? 

सरिता- वो सब बाद में फिर कभी बताऊँगी। अभी मुझे घर जाना है, कहकर वो तय्यार होकर अपने घर चली गई, और राज और शालू भी कपड़े पहनकर हॉल में आ गए और शालू राज की गोद में आकर बैठ गई, और अपने पापा के सीने से लग गई। 

शालू बोली-पापा क्या हम लोग निलू के बर्थडे में जाएँगे, शेखर अंकल ने आपको फ़ोन किया था ना? राज ने शालू के नंगे पेट को सहलाकर कहा, अगर तुम जाना चाहती तो चलेंगे मैं तो शेखर को जानता नहीं, निलू तो तुम्हारी ही सहेली है। फिर वो उसके टॉप को और ऊपर करके उसके पूरे पेट और नाभि को सहलाने लगे।शालू ने भी पापा के गाउन में हाथ डालकर उनकी छाती के बालों से खेलने लगी।
निलू घर पहुँची और अपने पापा को देखके उनसे लिपट गई और बोली- आप कब आए? शेखर किचन में जाकर उसके लिए पानी लाया और बोला - बस थोड़ी देर हुए।कैसा रहा स्कूल? निलू-स्कूल तो ठीक था,पर आज एक गड़बड़ हो गई,वो शालू है ना मेरी सहेली, उसको सब पता चल गया था हमारे और नेहा और उसके पापा के बारे में। शेखर- वो कैसे हुआ? निलू-उसने मेरी और नेहा की आपसे हुई बातें सुन ली थी,जब हम मस्ती में उलटी सीधी बातें कर रहे थे।शेखर-ओह बेड़ा गरक, अब क्या होगा? निलू-फ़िक्र मत करिए पापा,मैंने उसे हमारे और नेहा के बारे में सब बता दिया है, और उसको भी अपनी पापा से चूदवाना है।मुझे लगता है कि वो आज ही चूद जाएगी।पापा उसको हम अपने ग्रूप में शामिल कर लेंगे।शेखर-तब तो ठीक है, ऐसा करते हैं की उन दोनों को हम तुम्हारे जन्म दिन पर बुलाते हैं।उस दिन ही हम कोशिश करेंगे कि वो हमारे ग्रूप में शामिल हो जाए।फिर दोनों हँसने लगे।फिर वो नेहा को गोद में खींचकर उसको चूमते हुए बोले- चलो अपनी सहेली को फ़ोन लगाओ और हम दोनों बात करते हैं और उनको जन्म दिन का निमंत्रण देते हैं।फिर निलू फ़ोन लगा रही थी और शेखर ने निलू की चुचि दबाना शुरू किया और उसके गालों को चूमने लगे।फिर निलू और शेखर ने शालू और राज को निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। शेखर ने निलू को चूमते हुए कहा, लो तुम्हारा काम तो हो गया। फिर बोले-मूड है? निलू ने बनावटी भोलेपन से पूछा- किस चीज़ का मूड? शेखर ने कपड़ों के ऊपर से उसकी चूत दबाते हुए बोले-इसके मनोरंजन का मूड। और दोनों हँसने लगे और उठकर बेडरूम की ओर चल दिए।

कॉलेज के ब्रेक में शालू और निलू बग़ीचे के एक कोने में जाकर बैठ गयीं।

निलू-कल तुम्हारे पापा और तुमने मेरे जन्मदिन में आने का निमंत्रण स्वीकार करके बहुत अच्छा किया, अब हम पार्टी में सब मज़ा करेंगे।

शालू-अरे तुम्हारि पार्टी में तो आना ही है।पापा थोड़ा झिझक रहे थे क्योंकि वो अंकल को नहीं जानते, पर जब मैं बोली की अंकल तुम्हारे पापा हैं, तो वो माँ गए।

निलू-थैंक्स यार, नेहा भी नहीं है यहाँ, और तू भी नहीं आती तो बिलकुल मज़ा नहीं आता। 

शालू-हम आएँगे यार, मैंने भी तेरा घर नहीं देखा है।इसी बहाने तेरा घर भी देख लूँगी।हाँ एक बात तूझे बतानी थी कि परसों मैं भी अपने पापा से चुद गई।

निलू ने ख़ुश होकर उसको गले से लगा लिया और बोली- वाह, ये तो कमाल हो गया। अब तू भी हमारे ग्रूप की मेम्बर बन गई।ज़्यादा दुखा तो नहीं? 

शालू- शुरू में दर्द हुआ था, पर पापा ने बड़े प्यार से और धीरे से किया,इसलिए ज़्यादा दर्द नहीं हुआ, पर बाद में बहुत मज़ा आया।निलू- तेरे पापा का तो बड़ा होगा ना, और मोटा भी होगा?

शालू-हाँ उनका बहुत बड़ा और मोटा है, वो बता रहे थे की ७इंच लम्बा है।मेरा तो ख़ून भी निकला।

निलू- अरे पहली बार में सील टूटने पर ख़ून तो निकलता है,पर जल्द ही आदत पड़ जाती है, और फिर उसके बिन रहा नहीं जाता।

शालू- कल इसलिए तो मैं कॉलेज नहीं आयी क्योंकि मैं ठीक से चल ही नहीं पा रही थी।

निलू- अब भी दर्द है क्या? 

शालू- नहीं अब नोर्मल है।अच्छा एक बात बता, पापा कल मेरी गाँड़ भी चाट रहे थे,और बोले थे की बेबी ये तुम्हारी मस्त गाँड़ में भी जल्द लंड पेलूँगा।क्या तू भी गाँड़ मरवाइ है?

निलू- अरे पापा ने तो चूत चूदाइ के ४/५ दिन बाद ही मेरी गाँड़ मार ली थी।सच में बहुत दुखा था, पर अब ये हाल है की २/३दिन भी गाँड़ ना मरवाऊँ तो तेज़ खुजली होती है।

शालू-पर उस गंदी जगह को पापा चाटे थे, ऐसा करना चाहिए क्या? 

निलू-अरे पगली कोई जगह गंदी नहीं होती, बस हमें अपना शरीर साफ़ रखना चाहिए, अब मैं तेरे को बताती हूँ की पापा तो मेरी गाँड़ चाटते हैं ही मारने के पहले, मुझे भी उनकी गाँड़ चाटने में बहुत मज़ा आता है।मैं तो उनकी गाँड़ में ऊँगली भी डालती हूँ।

शालू- हे भगवान! तू तो बड़ी कमिनी चीज़ है।
उसी समय शालू के पापा का फ़ोन आता है, वो बोलते हैं-हाय , बेटी क्या हाल है,क्या कर रही हो? 

शालू- बस पापा निलू के साथ गप मार रही हूँ अभी ब्रेक है ना! 

राज- ओह निलू तुम्हारे साथ है,उसे कुछ बताया तो नहीं! 

शालू- पापा वो मेरी पक्की सहेली है, हमारा एक दूसरे से कुछ छुपा नहीं है। 

राज- ओह, देख लो कहीं बात फैल ना जाए।

शालू-अरे पापा ऐसा कुछ नहीं होगा।

राज-चलतीं ध्यान रखना।फिर उन्होंने फ़ोन बंद कर दिया।

शालू-मैं तो तेरे जन्मदिन पर तेरे घर आ ही रही हूँ, तू मेरे घर कब आएगी? 

निलू-अरे इस में क्या है, मैं आज कॉलेज के बाद आ सकती हूँ, बस एक बार पापा से पूछना पड़ेगा।शालू ख़ुश होकर बोली- तो पूछ ले ना फ़ोन पर। निलू अपने पापा को फ़ोन करती है और बोलती है-पापा,शालू मुझे अपना घर देखने को बोल रही है, मैं एक घंटे के लिए उसके घर चली जाऊँ? 

शेखर-अरे एकदम से कैसे प्रोग्राम बना लिया? जाओ पर जल्दी घर आ जाना, तुम जानती हो ना मेरा मन शाम को तुम्हारे बिना नहीं लगता।

निलू- (हँसती हुई) जी हाँ पता है मन नहीं लगता या और कोई आपको तंग करता है! 

शेखर(अपना लंड मसलते हुए)-तुम सही कह रही मेरा मन खड़ा हो गया है, हाहा। हाँ, एक बात सुनो,आज शालू के घर में राज को अपनी जवानी की झलक दिखा देना,इससे अपना प्लान पूरा करने में मदद मिलेगी।

निलू(हँसते हुए)- पापा आप भी ना बड़े बदमाश हो , बिचारे अंकल को अभी से तड़पाने को बोल रहे हो, हाहाहा। फिर वो बोली- हाँ पापा शालू भी यहीं है,उससे बात करेंगे? फिर उसने फ़ोन शालू को पकड़ा दिया।

शालू- हैलो अंकल नमस्ते।

शालू की मीठी आवाज़ सुनकर शेखर का लंड कड़ा हो गया, वो उसको दबाते हुए बोला-हाय बेटी, कैसी हो,जन्म दिन पर ज़रूर आना और अपने पापा को भी लाना।

शालू-जी अंकल हम दोनों पक्का आएँगे।

शेखर-तुम और निलू एक फ़ोटो ले लो, मैंने तो अभी तक तुमको देखा ही नहीं, फ़ोटो देखूँगा तो उस दिन पहचान लूँगा, हीहीही।

शालू- ठीक है अंकल निलू अभी मेरी फ़ोटो लेगी और आपको दिखा देगी। फ़ोन रखने के बाद निलू ने शालू की कई पोस में फ़ोटो खिंची और उसके ख़ास उभारों पर ध्यान दिया, ताकि उसके पापा मस्त हो जाएँ।फिर उसने फ़ोटो उनको वाट्सअप पर भेज दीं।
Reply
10-21-2018, 11:50 AM,
#19
RE: Hindi Porn Kahani अदला बदली
कॉलेज के बाद वो दोनों शालू के घर गयीं,सरिता ने उन दोनों को बैठाया और चाय दी।थोड़ी देर बाद राज आ गया, और शालू ने निलू का परिचय कराया। शालू और निलू सामने के सोफ़े पर बैठी थीं और राज उनके सामने बैठा था।दोनों ने स्कर्ट टॉप पहना था।शालू की स्कर्ट उसके घुटने के नीचे थी, पर निलू को अपनी पापा की बात याद आयि और उसने अपनी स्कर्ट बैठते हुए ऐसे अजस्ट की, की वो घुटनों के काफ़ी ऊपर तक आ गयी।अब राज की नज़र उसकी मांसल गोरी जाँघों पर पड़ी, तो वो मस्त होने लगा।तभी उसने उसकी चूचियों को ग़ौर से देखा,अब तो उसका लंड टाइट होने लगा।उसने सोचा ये तो सच में मस्त माल है, ये तो पका फल है, शालू तो अभी कली है।उसका लंड इस मस्त जवानी को देखकर अँगड़ायी लेने लगा।

राज की आँखें निलू के जवान जिस्म पर थी,और वो सोच रहा था कि शायद शालू भी साल भर में मेरी चूदाइ से ऐसी ही मस्त भर जाएगी। फिर इधर उधर की बातें करके दोनों सहेलियाँ शालू के कमरे में चली गयीं, जाते समय निलू अपनी कमर मटका रही थी, राज का शरीर और हरम हो गया। 

शालू ने सरिता को आवाज़ दी और पानी माँगा। सरिता उनको पानी देकर वापस आइ और सीधा राज के पास आइ और बोली- चलो आप भी मज़ा लो, देखो दोनों माल क्या कर रही हैं,और कैसी दिख रही हैं।

सरिता राज को लेकर खिड़की पास आयी और पर्दा हटाया,राज ने अंदर झाँका,दोनों पेट के बल लेती हुई थीं,और उनके स्कर्ट ऊपर उठ गए थे,उन दोनों की पैंटी में क़ैद उनके मस्त गोरे गोल गोल चूतर अपनी छटा बिखेर रहे थे।राज के लंड ने बहुत ज़ोर का झटका मारा और उसने सरिता की गाँड़ दबानी शुरू कर दिया। उधर निलू अपने पापा को फ़ोन लगायी थी,वो बोली- पापा शालू की फ़ोटो देखे, कैसी लगी हमारी सहेली? निलू ने अपने फ़ोन को स्पीकर मोड़ में डाल दिया था। शेखर बोल रहा था-अरे तुम्हारी सहेली तो बहुत सुंदर है, अभी तो लगता है पूरी तरह जवान भी नहीं हुई है।निलू हँसते हुए बोली- आपने उसकी शक्ल भी देखी या उसकी जवानी ही देख रहे हैं? शेखर झेंपती हुए बोला- अरे ऐसा नहीं है, चेहरा भी एक भोली बच्ची की तरह सुंदर है। शालू और निलू हँसने लगे, और उनके गोल गोल नितम्ब भी हिलने लगे, राज ये देखकर बहुत उत्तेजित होकर सरिता के दूध दबाने लगा, और सरिता भी उसके लंड को दबाने लगी। पैंटी में से निलू की उभरी चूत भी दिख रही थी,उसकी सेक्सी पैंटी दिखा ज़्यादा रही थी छिपा कम रही थी। 

उधर शेखर बोला-निलू ,सच में तुम्हारी सहेली बहुत सुंदर और प्यारी है, इनसे परसों तुम्हारे जन्म दिन पर मिलने में बहुत मज़ा आएगा।

निलू- चलो, पापा मैं अब फ़ोन रखती हूँ। फिर निलू ने शालू की छाती मसलते हुए बोली- पापा तो तुमपर फ़िदा हो गए, अब उनको भी मज़ा दे देना । 

तभी शालू उसकी छाती मसलती हुई हँसने लगी और बोली- मेरे पापा भी आज आँखें फाड़कर तुमको देख रहे थे,मैंने देखा था उनका लंड भी खड़ा हो गया थ। और फिर दोनों हँसने लगी।

फिर निलू बोली- अब मैं चलती हूँ,कल कॉलेज में मिलते हैं, आज अच्छे से चूदवा लेना अंकल से। ऐसा कहते हुए उसने शालू की चूत को पैंटी के ऊपर से दबा दिया।

जवाब में शालू ने भी निलू की चूत को दबा दिया, फिर दोनों कपड़े ठीक करके हँसते हुए बाहर आयीं।टेब तक राज और सरिता वहाँ से हट गए थे।फिर निलू, अंकल चलती हूँ, बाई करके चली गयी, राज उसके मटकते नितम्बों को देखता रह गया।
निलू के जाने के बाद सरिता भी खाना लगाकर चली गई।शालू ने थोड़ी देर पढ़ाई की फिर हाल में आइ और आकर पापा के गोद में बैठ गई और उनके हाथ से TV का रिमोट लेकर उसे बंदकर दिया और पापा के गाल को चूमकर बोली- मुझे भूक लगी है।

उसके पापा ने उसको चूमते हुए कहा - चलो खाते हैं।फिर दिनों ने खाना खाया , और थोड़ी देर TV देखकर बेडरूम में आ गए।शालू-पापा आपको निलू कैसी लगी? 

राज- अच्छी है, प्यारी बच्ची है।

शालू- आपका तो लंड खड़ा हो गया था उसको देखकर।

राज-क्या तुम हर समय मेरे लंड को ही देखती रहती हो की वो खड़ा है या नहीं। 

शालू हँसते हुए बोली- ऐसा ही समझ लीजिए।

राज उसको कपड़े उतारने को बोलता है और ख़ुद भी कपड़े उतार कर नंगा हो जाता है।राज नंगा बिस्तर पर लेट जाता है, उसका लंड अभी आधा खड़ा है।शालू भी कपड़े उतारकर ब्रा और पैंटी में आ जाती है,और फिर अपनी ब्रा खोलकर अपने अनारों का दर्शन राज को कराती है। फिर पैंटी उतारकर वो पूरी नंगी हो जाती है।राज उसको अपने पेट पर बैठने को बोलता है।वो बैठ जाती है,फिर राज उसको ख़ुद अपनी चूचियाँ दबाने को बोलता है और उसको अपने निपल्ज़ को भी अंगूठे और ऊँगली से मसलने को बोलता है, शालू वैसा ही करती है और राज बहुत गरम हो जाता है, फिर वो उसको ख़ुद अपनी चूची चूसने को कहता है, शालू हँसते हुए अपनी ही चूची चूसती है, और मस्त होती जाती है।राज का लंड फनफ़ना उठता है।उसके पेट पर बैठी शालू अपनी चुचि दबाए हुए और चूसते हुए किसी ब्लू फ़िल्म की रंडि लग रही थी।फिर वो उसको अपनी ओर खिंच कर उसके होंठ चूसता हैं।फिर उसकी चूचियों को दबता और चूसता है।शालू मस्ती में आकर आह पापा आह करने लगती है।तब वी शालू को ६९ पोज़ में लता है, शालू मज़े से उसका लंड चूसती है और वो उसकी चूत और गाँड़ चूसता है, और उसके गोल नितम्बों को दबाते हुए चूमता है और हल्के से काटता भी है।फिर वो उसको लिटाकर उसकी टांगों को उठाकर फैलाते हुए उसके कंधों पर रखकर उसकी चूत में दो ऊँगली डालता है और उसको अंदर बाहर करता है,फिर वी अपने लंड में ढेर सा थूक लगाके अपना लंड उसकी चूत में डालने लगता है एक एक इंच करके पूरा अंदर कर देता है।शालू आऽऽह पापापाऽऽ करके मज़े से चिल्लाती है और राज उत्तेजित होकर उसके होंठ चूसते हुए और उसकी छातियाँ मसलते हुए उसे मस्ती से चोदने लगता है।

शालू हहहहाऽऽय्यय कहकर नीचे से कमर उठाकर चूदवा रही थी,और राज की स्पीड बढ़ती जा रही थी।राज के द्वारा निपल्ज़ मसले जाने से वो मस्त हो कर प्पापापापा मैं गाइइइइइइइइ चिल्लाने लगी और अपनी टांगों को भीचके झड़ने लगी,और राज भी अपना पूरा रस शालू के अंदर डाल दिया।फिर वो उसके ऊपर से हटकर लेट गया। थोड़ी देर बाद उसने पूछा- बेटी ठीक हो ना? 

शालू- जी पापा बिलकुल ठीक

।राज ने उसके मोटे नितम्बों को सहलाया और बोला-गोली तो खा रही हो ना, वो गर्भ ना ठहरने की।

शालू अपने पापा की छाती चूमते हुए बोली-जी खा रही हूँ

।राज- शाबाश, अच्छा बताओ मज़ा आया ना? 

शालू- जी पापा बहुत बहुत मज़ा आया।

फिर राज ने उसकी गाँड़ में एक ऊँगली डाली थोड़ी सी, वो आह कर उठी।फिर वो बोला- ये कब दोगी मेरी रानी बिटिया? 

शालू- ओह पापा आपका इतना बड़ा इस छोटे से टाइट छेद में कैसे जाएगा? मेरी गाँड़ तो फट ही जाएगी। 

वो हँसकर बोला- अरे बस एक बार का दर्द फिर हमेशा का मज़ा।
फिर दोनों सो गए।
अगले दिन कालेज में शालू और निलू ब्रेक में मिले और दोनों ने एक दूसरे की पढ़ाई का पूछा,और फिर बग़ीचे के एक कोने में खड़ी हो गयीं।फिर निलू ने रात को पापा की हालत के बारे में बताया और बोली-अरे मेरे पापा तो तेरी फ़ोटो से ही पागल हो गए हैं। जब तू सच में उनको मिलेगी,तो पता नहीं वो क्या करेंगे?

शालू हँसते हुए बोली- सच में?ऐसा क्या है मेरे मैं। हम दोनों तो एक जैसी हैं यार।

निलू बोली-मर्द की नज़र में तू ज़्यादा मस्त माल है ना, अभी जवानी पूरी आयी कहाँ है? कहते हुए उसने आँख मार दी।फिर वो बोली- रात में पापा ने ज़बरदस्त चूदाइ की, मैं तो मस्त हो गई थी।

शालू भी बोल पड़ी-कल पापा ने मुझे भी बहुत मज़ा दिया, और बोलते हुए शर्मा गई।अब दोनों चूदाइ की बातें करने लगीं, और कैसी चूदाइ हुई ये सब एक दूसरे को बताने लगीं।

तभी निलू का फ़ोन बजा,वो बोली-पापा का है, फिर फ़ोन में बोली-हैलो पापा, हाँ बोलिए ना,मूवी कौन सी इंग्लिश ओह,कौन सा शो, अभी १० से १२ बजे का, पर कॉलेज का क्या होगा?पापा आप भी बेटी को बंक मारने को बोल रहे हो,हाँ शालू भी है, अच्छा पूछती हूँ, शालू तुम चलोगी? पापा अभी मूवी देखने को बोल रहे हैं।शालू- पर मैं कैसे, मेरा मतलब मैंने पापा से तो पूछना पड़ेगा ना?

निलू-अरे चल ना मेरे पापा और मैं भी तो हूँ फिर हम टाइम ओर घर पहुँच जाएँगे।बाद में सोच लेना की पापा को बताना है की नहीं।शालू ने झिझकते हुए हामी भर दी।

क़रीब९:४५ पर शेखर अपनी कर लेकर कॉलेज के सामने आया और शालू और निलू दोनों पीछे बैठ गयीं। 

शेखर- निलू तुम्हारी सहेली तो बहुत सुंदर है।

निलू- पापा मैं सुंदर नहीं हूँ क्या? 

शेखर हँसते हुए -अरे बाबा तुम भी सुंदर हो।सच में तुम दोनों अभी बहुत प्यारी लग रही हो।शेखर का लंड अब अकड़ने लगा, उसने रीयर मिरर में शालू की चूचियों को घूरा और अपना लंड अजस्ट किया।थोड़ी देर में सिनमा हॉल पहुँचकर टिकट लिया उसने एक कोने की।हाल के अंदर पहुँचकर वो तीनों कोने की सीट पर पहुँचे,हॉल क़रीब ख़ाली था,कुछ जोड़े बैठे थे, सब एक दूसरे से थोड़ी दूरी पर।शेखर कोने की सीट पर निलू को बैठाया और ख़ुद बीच में बैठा और शालू उसके दूसरी तरफ़ बैठी।शालू की सीट से ३ सीट छोड़कर एक जवान जोड़ा बैठा था पहले लड़की फिर लड़का।

थोड़ी देर में अंधेर हो गया और मूवी चालू हो गयी,A सर्टिफ़िकेट की मूवी थी, उसने शुरू में एक बेडरूम सीन था, जिसे देखकर सबकी सांसें गरम होने लगी।थोड़ी देर बाद शालू ने देखा की उसकी पास वाली लड़की के गले में लड़के ने हाथ रखा और उसकी चुचि दबाने लगा। शालू का ये पहला अनुभव था, उसे अजीब से मज़ा आने लगा,वो ध्यान से देखने लगी।फिर उस लड़के ने उसके होंठ चूमने शुरू किया।फिर बहुत जल्दी उसने लड़की की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसके अंदर हाथ डाल दिया, तभी उस लड़की ने भी हाथ बढ़ाकर उसका लंड पैंट के ऊपर से दबाना शुरू किया।थोड़ी देर बाद लड़के ने अपनी जीप खोलके अपना लंड बाहर किया।उसका गोरा लेकिन पतला लंड को उस लड़की ने हाथ से सहलाया और फिर लड़के के इशारा करने पर झुक कर मुँह में लेकर चूसने लगी।शालू की बुर में चिटियाँ चलने लगीं।तभी उसने देखा कि अंकल ने उसकी जाँघ पर स्कर्ट के ऊपर से हाथ रख दिया।दरअसल शेखर ने देख लिया था की शालू उस जोड़े को मज़ा लेते देखकर गरम हो गयी है, इसका फ़ायदा उठाते हुए उसने अपना हाथ उसकी जाँघ पर रखा।

तभी शालू की नज़र निलू पर पड़ी और वो सन्न रह गई।निलू की स्कर्ट ऊपर तक उठी हुई थी और अंकल का हाथ उसकी पैंटी में घुसा हुआ था,उसकी एक चुचि भी नंगी ब्रा और टॉप के बाहर थी,वो समझ गयी की अंकल अपनी बेटी से मज़ा ले रहे हैं।अब शालू की चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया था, और उसके निपल्ज़ उत्तेजना में तन गए थे।शेखर ने उसकी जाँघों को दबाया और वो मस्ती से आँखें बंद कर ली।जब शेखर ने शालू के चेहरे पर मस्ती देखी,तो उसने धीरे से स्कर्ट ऊपर करके उसकी नंगी जाँघों को सहलाने लगे।शेखर ने निलू को इशारा किया और उसने उसकी जीप खोलकर उसका लंड बाहर निकाल दिया, और उसको सहलाने लगी।

फिर शेखर का हाथ अब शालू की पैंटी तक आ गया और उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से सहलाने लगा।शालू का शरीर काँपने लगा।उसकी चूत गीली हो रही थी।तभी शालू ने आँख खोली और उसके सामने शेखर का लंड था जिसको निलू सहला रही थी।और इधर शेखर का हाथ उसकी पैंटी को साइड सा हटाकर उसकी चूत को सहलाने लगा।उसकी चूत का स्पर्श शेखर को पागल कर गया और वो उसकी चूत को ऊपर से नीचे तक सहलाने लगा।फिर उसने निलू को इशारा किया की उसका लंड चूसे।वो झुकी और उसका लंड चूसने लगी। अब शालू का बुरा हाल था, इधर निलू और उधर वो लड़की दोनों लंड चूस रहीं थीं।और इधर उसकी चूत में अंकल ऊँगली डालकर आग लगा रहे थे। थोड़ी देर बाद अंकल ने उसकी चुचि भी पकड़ ली और दबाते हुए उसको मस्त कर दिए।फिर वो उसके टॉप को उठाए और ब्रा भी नीचे करके उसकी चुचि को नंगी कर दिए।उसकी सुंदरता पर मुग्ध होकर वो उसको दबाए और फिर चूसने लगे।शालू आऽऽह अंकल कहकर फुसफुसायी।उधर अंकल की ऊँगली उसको चोदने मस्त थे।तभी अंकल ने निलू का सर पकड़के उसको उठाया।और उसका गीला लंड फनफ़ना रहा था।फिर शेखर ने शालू को इशारा किया और पूछा- शालू बेटी, चूसोगी? शालू ने अंकल के विशाल लंड को देखा और अपने आप ही उसका मुँह झुक गया उसके लंड पर,और उसने अंकल का लंड चूसना सुरु कर दिया।अब शेखर भी उसकी चुचि दबाते हुए अपनी ऊँगली ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत में चलाने लगा।और उधर शालू भी अपना मुँह ज़ोर से ऊपर नीचे करने लगी।तभी शालू ने अपना पानी छोड़ दिया।तभी शेखर का भी झड़ने लगा और उसका लिंद भी वीर्य छोड़ दिया।जैसे ही शालू के मुँह में पहल फ़व्वारा छूटा,वो मुँह ऊपर कर ली, उसका मुँह वीर्य से भर गया था।

तभी निलू ने जल्दी से अपने पापा का लंड अपने मुँह में के लिया और बचा हुआ वीर्य पी लिया।शालू ने भी मुँह का वीर्य गटक लिया।शेखर और शालू शांत हो गए थे।पर निलू प्यासी थी, उसके पापा को पता था की उसको भी शांत करना होगा।इसलिए वो निलू को बोले-बेटी तुम झुक कर खड़ी हो जाओ , मैं पीछे से तुम्हारी चूत चाटकर तुमको भी शांत कर देता हूँ।निलू ने ऐसा ही किया और आगे को झुक गईं, शेखर ने उसकी चूत में अपना मुँह डाल दिया और उसकी चूत और गाँड़ चाटने लगा।पाँच मिनट मैंने ही वो भी झड़ गयी।फिर सब कपड़े ठीक करके बैठ गए।निलू बोली-पापा चलो ना कहीं चलकर कुछ खाएँगे मूवी तो ऐसी ही बकवास है। तीनों उठकर एक होटेल पहुँचे और चाय नाश्ता करते हुए बातें करने लगे।

निलू-बता शालू, मेरे पापा कैसे लगे?

शालू शर्माकर बोली-बहुत अच्छे।

निलू-और पापा आपको मेरी सहेली कैसी लगी? शेखर-तुम दोनों बहुत प्यारी हो।मैं इतना ही बोल सकता हूँ कि तुम दोनों बहुत सेक्सी हो।निलू- अच्छा शालू , तुमको पापा का वो पसंद आया ना? तुम्हारे पापा के जैसा है ना? शालू शर्मा कर बोली- हाँ उनका भी ऐसा ही मस्त है , जैसे अंकल का है। ये सुनकर सब हँसने लगे।

शेखर निलू को लेकर घर चला गया और शालू अपने घर आ गयी।शालू ने मन ही मन निश्चय किया कि वो मूवी वाली बात पापा और सरिता को नहीं बताएगी।घर पर पापा अकेले थे,और लैप्टॉप पर काम कर रहे थे।मुझे देखकर ख़ुश हो गए और शालू को प्यार करते हुए बोले-सब ठीक है कॉलेज में?

शालू-जी सब बढीया।फिर वो राज को बोली- मैं बाथरूम से आती हूँ।वहाँ जाकर उसने अपनी चूत की सफ़ाई की, कपड़े बदले और ब्रा और पैंटी भी बदली और फिर वापस हाल में आयी।फिर दोनों खाना खाने बैठे।

राज-निलू मिली थी आज? 

शालू- क्यों आपको बहुत याद आ रही है उसकी? 

राज- अरे ऐसा कुछ नहीं, मैंने तो बस यूँ ही पूछा था।

शालू- हाँ वो मिली थी, वो भी आपके बारे में पूछ रही थी।

राज- अच्छा क्या पूछा? 

शालू-पूछ रही थी कि आपका कितना बड़ा है? और फ़ोर खि खि करके हँसने लगी।

राज- बड़ी शैतान हो गई है तू! 

खाना खाने के बाद शालू बोली- पापा आप अपने और मम्मी का कुछः हॉट क़िस्सा सुनाओ ना।
राज ने शालू को अपनी गोद में बैठा लिया और उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी नंगी जाँघों पर हाथ फेरते हुए बोलना शुरू किया-
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तुम्हारी माँ (रानी) एक बहुत ख़ूबसूरत औरत थी, हम दोनों बहुत ख़ुश थे।हमारी सेक्स लाइफ़ भी बढ़िया चल रही थी,अभी तुम पैदा नहीं हुई थी।में उस समय २६का था और वो २४ की थी,शादी को २ साल हो चुके थे।तभी एक दिन मेरे पापा का फ़ोन आया कि वो हमारे यहाँ कुछ दिन के लिए आ रहे हैं।क्योंकि मैं अपने पापा का इकलौता बेटा था और मेरी एक शादीशुदा बहन भी थी तो मैंने बहुत प्यार से उनका स्वागत किया।मेरी माँ का देहांत २ साल पहले ही हुआ था, और पापा उससे काफ़ी दुखी रहते थे।पापा के पास बहुत पैसा था, जो उन्होंने अपनी मेहनत से कमाया था,वो काफ़ी शान से रहते थे।उन्होंने अपनी बिज़नेस की एक ब्रांच मुझे यहाँ चलाने को दी थी।इस तरह एक तरह से मैं अब भी उनपर निर्भर था।जब वो घर पर आए तो रानी ने उनके पैर छूये और मैं भी उनसे गले मिला।फिर काम की बातें होती रहीं और फिर खाना खाकर हम सो गए।अगले दिन मैं और पापा बैठे थे, 

तभी रानी चाय लायी, उसने एक गाउन पहना था,जो थोड़ा टाइट था।उसने से उसकी चूचियाँ काफ़ी बड़ी दिख रही थीं और ऊपर की छाती का हिस्सा भी नज़र आ रहा था।जब वो चाय देने झुकी तो उसकी गोलायीं हम दोनों को दिखायी दीं।फिर वो मुड़कर वापस किचन में जाने लगी तब उसके नितम्बों का मटकना देख कर मेरा लंड भी हरकत करने लगा।तभी मैंने देखा कि पापा भी अपने पजामा के उभार को छुपा रहे हैं।मुझे बड़ा धक्का लगा की पापा अपनी ही बहू को ऐसी नज़रों से देख रहे हैं।पर ये सोचकर की रानी इतनी सेक्सी है की पापा भी उसको भूकी नज़र से देख रहें हैं,मेरा लंड और कड़ा हो गया।फिर मैंने पापा से कहा की आप नहा लो,ऑफ़िस साथ ही चलेंगे,तो वो बोले- तुम जाओ मैं आराम से आऊँगा।मैं तय्यार होकर चला गया। अब मेरे जाने के बाद क्या हुआ ये मुझे सब कुछ रानी ने बताया था तो मैं ऐसे बताऊँगा जैसे मैं वहाँ था, ठीक है? राज ने ये बोलते हुए शालू का टॉप ऊपर किया और उसकी ब्रा के कप को नीचे करके उसके अनारों को बाहर निकाल करके सहलाना शुरू किया।शालू भी उसके खड़े लंड पर अपनी गाँड़ टिकाते ही बोली- ठीक है, मैं समझ गयी, बताओ फिर क्या हुआ?
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10-21-2018, 11:50 AM,
#20
RE: Hindi Porn Kahani अदला बदली
राज ने कहना जारी रखा- मेरे जाने के बाद पापा बाथरूम में नहाने गए, और थोड़ी देर बाद ज़ोर से आवाज़ आयी, रानी भागते हुए दरवाज़े तक पहुँची और पूछी-पापा आप ठीक हो ना? पापा- अरे बेटा मैं गिर गया, आह बहुत दुःख रहा है।रानी- पापा दरवाज़ा खोलो ना तभी तो मैं आपकी मदद करूँगी। पापा- आह, कोशिश करता हूँ।फिर थोड़ी सी कराहने की आवाज़ में साथ दरवाज़े की लैच खुली।रानी ने दरवाज़े को खोला, तो पाया कि पापा पूरे नंगे बाथरूम में गिरे पड़े है।वो अपने ससुर को ऐसी हालत में देखकर डर गयी और शर्मा भी गयी,क्योंकि उनका लम्बा मोटा लंड जो अभी उत्तेजित भी नहीं था काफ़ी बड़ा दिख रहा था, और उसके नीचे बड़े बड़े बालस भी नज़र आ रहे थे।वो शरीर से भी तगड़े थे और इसलिए बहुत भारी भी थे।उनके पूरे बदन में साबुन भी लगा हुआ था।पापा कराहते हुए बोले-बेटी हमको सहारा दो और उठाओ।रानी-जी पापा कोशिश करती हूँ, कहते हुए वो उनको कंधे के नीचे हाथ डालकर उठाने की कोशिश की ,पापा ने भी उठने का प्रयास किया और इस खींच तान में रानी का गाउन सामने से खुल गया और उसकी ब्रा में क़ैद बड़े आम दिखने लगे।नीचे पेटीकोट भी दिख रहा था।रानी का ध्यान इस पर नहीं गया, और साबुन के कारण उसका हाथ फिसल गया। पापा ने उसको बोला- बेटी पहले साबुन निकालना होगा तभी तुम उठा पाओगी। रानी ने कहा ठीक है, मैं पानी डालती हूँ, आप साबुन निकालिए।फिर रानी ने पानी डालना शुरू किया और वो एक हाथ से कराहते हुए साबुन धोने लगे। पहले सर का साबुन धोया फिर छाती का , उसके बाद पेट का,फिर उसने नीचे उनकी लंड पर पानी डाला और ग़ौर से उसको देखा , उफ़्फ़ कितना बड़ा और कितना ताक़तवर लग रहा था, पापा का लंड,उसकी आँखों को वहाँ गड़ा देखकर पापा को मज़ा आया और उनकी आँखें रानी की गाउन से झाँकती छातियों को देखकर उनका लंड खड़ा होने लगा।अब रानी की आँखों के सामने उनका लंड तनता जा रहा था।पापा ने शर्मा कर कहा- सॉरी बेटी, अब ये देखो इसको क्या हो रहा है? मैं इतनी तकलीफ़ में हूँ पर ये तुम्हें देखकर अपना आपा खो रहा है, कहते हुए उन्होंने अपने लंड को एक चपत मार दी, और उनका लंड और ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगा।रानी को तो काटो ख़ून नहीं था,उसकी नज़रें जैसे उनके लंड से ही चिपक गई थी।फिर पापा ने अपने लंड और बॉल्ज़ का साबुन निकला और लंड को ख़ूब मसला।अब वो पूरा ८ इंच का मोटा डंडा बन गया था।तभी रानी को लगा की उसकी चूत गीली हो रही है। उसे अपने आप पर शर्म आइ।फिर वो उनकी जाँघों पर पानी डाली।फिर पापा बोले-बेटी मेरी पीठ को भी धो दो। फिर रानी ने ख़ुद ही उनकी पीठ में पानी डाला और क्योंकि उनका हाथ वहाँ तक नहीं जा रहा था।फिर उनके चूतरों को धोने के बाद मैं उनकी जाँघों पर और पैरों पर भी पानी डाला और साफ़ किया।फिर पापा बोले- बेटा अब मुझे उठाओ। रानी फिर सामने आइ और पापा का खड़ा लंड देखकर फिर से सहम गई।फिर उसने पापा के कंधों पर हाथ रखकर उनको खड़ा करने की कोशिश की और इस बार वो खड़े भी हो गए।फिर वो बोले- बेटी ज़रा तौलिए से पोंछ सो ना। रानी ने तौलिए से उनके सर , छाती,पेट,जाँघों और पैर को पोछा।गीला लंड खड़ा हुआ पोंछे जाने का इंतज़ार कर रहा था।फिर वो पीठ और चूतरों और पैर को पोछा ।पकाने कहा -बेटा इसको भी पोंछ दो।रानी ने शर्माते हुए पापा के लंड और बॉल्ज़ भी पोछा और उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू किया।फिर पापा बोले- मुझे कमरे में ले चलो।क्या दृश्य था, नंगा ससुर अपना खड़ा लंड लेकर बहु को लपेटे हुए बेडरूम में पहुँचा।वहाँ पहुँचकर बिस्तर पर बैठ गया और उसका लंड उत्तेजना से ऊपर नीचे हो रहा था|रानी को लगा वहाँ एक मिनट खड़ी रही तो वो इस मस्त लंड को चूसने लग जाएगी।वो अभी आती हूँ कहके वहाँ से हट गयी।फिर उसने मुझे फ़ोन लगाया और बोली-पापा बाथरूम में गिर गए हैं, आप घर आ जाओ।मैं बोला- पापा से मेरी बात कराओ। रानी फ़ोन लेकर पापा के पास आइ , और फ़ोन पापा को दिया।पापा अपना लंड हाथ से धीरे से सहला रहे थे।वो बोले- अरे राज मैं बिलकुल ठीक हूँ,रानी मेरी मालिश कर देगी मैं ठीक हो जाऊँगा।कहते हुए पापा ने अपने लंड के सुपारे की चमड़ी खींचकर अपना मोटा गुलाबी सुपारा बाहर कर दिया।रानी की हालत ख़राब हो रही थी,फिर वो बोले-नहीं नहीं तुम अपना काम करो, रानी बहु मेरा ख़याल रख लेगी।और फिर अपना लंड हिला दिए।
रानी जल्दी से तौलिया लायी और उसके गोद पर रख दिया। ताकि लंड छुप जाए।पर लंड का उभार इतना बड़ा था की तौलिया में तंबू बन गया।फिर मैंने फ़ोन काट दिया।फिर पापा बोले- मेरी कमर में तेल लगा दो।
राज ने कहना जारी रखा, शालू ने हाथ बढ़ाकर उसका लंड अपने हाथ में ले लिया और उसको सहलाने लगी और राज भी थोड़ी देर उसकी चुचि चूसा,फिर शालू मचलके बोली- फिर क्या हुआ पापा, क्या दादाजी ने माँ को चोदा! राज ने कहना जारी रखा --------------

पापा ने कहा - बेटी, कमर में तेल लगा दो, moch आ गयी है। रानी -जी अभी लायी, कहकर तेल लेने किचन गयी, उसकी साँस फूल रही थी, उत्तेजना से, आख़िर पापा का हिलता हुआ लंड उसकी आँखों की सामने बार बार आ raha था।उसने राज को फ़ोन लगाया, और बोली- जी, मुझे बहुत घबराहट हो रही है, आप घर जाओ। राज- क्या हुआ बोलो, पापा ठीक है ना? रानी- हाँ वैसे तो ठीक हैं , पर वो बहुत ज़्यादा उत्ते---- मतलब बहुत अजीब , यानी की उनकी स्तिथि अब कैसे बोलूँ ? राज- अरे तुम क्या बोल रही हो, मुझे कुछ समझ नहीं रहा है। पापा ठीक है ना? रानी- हाँ वैसे तो ठीक हैं, पर - राज- चलो फिर ठीक है,अब मुझे तंग मत करो, बहुत काम है। और राज ने फ़ोन काट दिया। अब रानी अपनेआप पर झूज्झला उठी कि वो क्यूँ राज को पापा की वासना के बारे में नहीं बता पाई। उसको लग रहा था, की अगर तेल लगाने के बहाने पापा ने उसको पकड़ने की कोशिश की तो उनके उस मस्ताने लंड के सामने वो हथियार डाल ना बैठे।आज उसे अपने पर विश्वास नहीं रहा था। उसकी चूत का गीलापन उसको तंग कर रहा था। उसने पैंटी को ऊपर से दबाकर अपनी चूत को सुखाने की कोशिश की। उसके मन में यह आ रहा था कि आज तक उसने कभी भी अपने पति के साथ धोखा कभी नहीं किया था और आज उसको अपने पर विश्वास नहीं था, पापा का लंड उसकी फिर आँखों के सामने झूलने लगा, ओह भगवान, कितना मोटा फूला हुआ गुलाबी सूपाड़ा था। फिर उसको अपने निपल्ज़ कड़े होते महसूस होने लगे। उसने आह भरी और वो तेल को गरम करके उसे लेकर बेडरूम में पहुँची, वहाँ पापा लंड ke ऊपर तौलिया रखे बैठे थे। रानी को देखकर बोले- बहु , बड़ी देर कर दी? वो बोली- तेल गरम कर रही थी,इसलिए देर हुई। फिर वो बोले- चल अब लगा दे, काफ़ी दर्द हो रहा है। रानी ने हकलाते हुए पूछा- कहाँ दर्द हो रहा है? और तीरछी निगाह से देखा की वो उभार कम हुआ कि नहीं,पर वो देखकर हैरान रह गयी कि वो उभार वैसा ही था। उसे फिर se अपने शरीर में जैसे करेंट दौड़ता हुआ महसूस हुआ। तभी पापा ने अपनी कमर की ओर इशारा करके कहा की पूरा कमर ही दुःख रहा है, प्लीज़ अब तेल लगा दो।रानी बोली- ठीक है आप लेट जयिये, मैं लगा देती हूँ। पापा लेट गए और लेटते हुए तौलिया हट गया और फिर से उनका नंगा लंड उसके सामने था।लेटने के बाद उन्होंने तौलिए को फिर लंड पर रख दिया। अब रानी बोली- आप करवट ले लीजिए, तो वो दीवार की तरफ़ होकर लेट गए। अब उनके मोटे भारी चूतर बालों से भरे हुए उनके सामने नंगे थे। उसने उनकी कमर पर तेल मलना शुरू किया, पीठ के निचले हिस्से से लेकर उनके कमर तक, उसने मालिश की।उसके नरम हाथों के स्पर्श से वो मस्त होने लगे, और बोले- थोड़ा ज़ोर से दबाओ। अब रानी उनकी मालिश करने लगी। फिर वो बोली- आप उलटा हो जाओ, और वो पेट के बल लेट गए।अब उनकी पूरी पीठ और बालों से चूतरों का दर्शन रानी को हो रहा था।उसने पूरे कमर की अछी तरह से मालिश की।अब उसकी अग्नि परीक्षा थी, क्योंकि अब सामने से मालिश करनी थी। उसे लगा कि अब उसकी चूत उत्तेजना से कहीं पानी ना छोड़ दे। उधर पापा ka लंड उनके पेट के नीचे दबा हुआ एक दो बंद कामरस छोड़ रहा था। फिर वो धीरे बोली- आप अब सीधे हो जयिये। वो सीधे हुए और उनका लंड फाँफनाता सामने था, और उत्तेजना से नीचे हो रहा था। रानी ने उसके ऊपर फिर तौलिया डाल दिया। अब वो उनके साइड में बैठकर उनकी कमर पर साइड से मालिश करने लगी, जैसे ही उसका हाथ तौलिए के अंदर वाले हिस्से में पहुँचा, उसका हाथ उनके लंड से टकराया और वो काँप उठी। उधर पापा की आँखें उसकी मस्त ऊपर नीचे हो रही छातियों को देख रहे थे, और उनको उसके shareer से आती पसीने की ख़ुशबू ने उसको गरम कर दिया और उसका लंड अब कड़ा होकर दुखने लगा।तभी उनको अपने लंड पर उसके नरम हाथ ka स्पर्श हुआ, और वो मज़े से भर गए।
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