Maa Sex Kahani माँ का आशिक
10-08-2020, 12:57 PM,
#11
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शादाब अपनी अम्मी के गाल चूम कर बोला:"

" अम्मी आप सच में बहुत खूबसूरत है, आपके गाल एक दम मीठे हैं बिल्कुल शहद की तरह।

अपने बेटे की बात सुनकर वो पूरी तरह से शर्मा कहीं गई और हाथ से निकल कर बोली:

" बेशर्म कहीं का, कोई अपनी अम्मी से ऐसे बात करता हैं !

ऐसा कहकर वो कमरे से बाहर निकल गई। अपने कमरे में जाकर शहनाज़ अपनी सांसे दुरुस्त करने लगी। पता नहीं मुझे क्या हो जाता हैं जब भी मैं अपने बेटे के पास जाती हूं। उफ्फ जैसे ही वो मुझे छूता हैं तो जिस्म का रोम रोम अपने आप महकने लगता हैं जिसके उसके लिए ही बना हो। और वो भी तो मेरी कितनी तारीफ कर रहा था मानो मैं उसकी मा नहीं महबूबा हो। तभी उसकी नज़र फिर से शीशे पर पड़ी तो तो उसने अपने गाल को देखा जहां उसके बेटे ने चूमा था वो जगह लाल हो गई थी। जैसे ही शहनाज़ ने अपने गाल पर उस जगह हाथ रखा तो उसकी आंखे अपने आप मस्ती से बंद हो गई। वो अपने गाल को सहलाने लगी मानो उसका उसका गाल शादाब के होंठो से छूकर धन्य हो गया हो। उसके मुंह से अपने आप हल्की हल्की गर्म गर्म सांसे निकल कर उसके हाथ पर पड़ रही थी जिससे वो और ज्यादा मदहोश होने लगी और गाल पर लगी अपनी उंगली जो कि उसके बेटे के जीभ से निकले रस से हल्की सी गीली थी उसे बहुत ही कामुक दर्शक में अपने होंठो पर फिराने लगी। उसकी चूचियां एक बार फिर से अकड़ गई और उसने अपनी टांगो को एक दूसरे से रगड़ना शुरू कर दिया। तभी उसके कानों में अपने बेटे की आवाज गूंज उठी

" अम्मी नीचे आपको दादा बुला रहे हैं, उनकी जैकेट दे दो।

शहनाज जैसे होश में अाई और बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू पाते हुए ससुर की जैकेट उठा कर नीचे की तरफ चल पड़ी। उसने शुक्र मनाया कि उसके बेटे ने उसे अपने रूम से ही आवाज लगाई और अंदर नहीं आया। अगर उसका बेटा उसे ये सब करते देख लेता तो क्या सोचता मेरे बारे में!
उस बेचारी को क्या मालूम कि रात उसका बेटा उसकी फिल्म देख चुका था। वो नीचे अाई और देखा कि उसके सास ससुर उसके बेटे की बड़ी तारीफ कर रहे थे और दुनिया की हर मा की तरह वो भी अपने बेटे की तारीफ सुनकर फूली नहीं समाई।

शादाब:" अच्छा दादा जी मैं जाकर सब काम देखता हूं। कोई कमी तो नहीं है ।

इतना कहकर वो बाहर निकल गया और काम में लगे लोगों से मिला और हलवाई से बात करी, सजावट का काम देखा और सारी प्लानिंग करने लगा। दिन के 10 बज चुके थे और मेहमान आना शुरू हो गए। सबसे पहले उसकी बुआ रेशमा अाई जिसके मुंह पर नकाब लगा हुआ था तो उसने शादाब को नहीं पहचाना लेकिन उसकी सुन्दरता को देख कर लालच भरी निगाहों से घर में चली गई। वहां वो अपने मा बाप से मिली और शहनाज़ से मिली और उसे गले लगा लिया।

रेशमा:" भाभी कैसे हो आप? शादाब कहां है बहुत सालों से नहीं देखा उसे !!

शहनाज़:" मैं ठीक हूं बाज़ी, शादाब यहीं हैं, बाहर काम में लगा होगा, मैं आपके लिए पानी लाती हूं।

शहनाज पानी लेकर अा गई और रेशमा की तरफ ग्लास बढ़ा दिया तो रेशमा पानी पीकर बोली;"

" पहले शादाब से मिलती हू, फिर सबसे बात करूंगी।

इतना कहकर वो बाहर की तरफ अाई और एक छोटे बच्चे को बुला कर कहा:"..

" बाहर से शादाब को बुला लाओ, बोलना उसकी बुआ रेशमा अाई हैं

लड़का बाहर गया तो शादाब खुशी के मारे दौड़ता हुआ घर के अंदर घुस गया और अपनी बुआ के पास अा गया जो अब नकाब उतार चुकी थी।

शहनाज़:" बेटा ये तुम्हारी बुआ हैं रेशमा, बचपन में तू उनके साथ ही सबसे ज्यादा खेलता था और ये भी तुझे बहुत प्यार करती थी।

शादाब को एक के बाद एक बाते याद आने अपने बचपन की और वो खुशी से दौड़ता हुआ अपनी बुआ से लिपट गया तो रेशमा ने भी उसे अपने गले लगा लिया।

रेशमा: मेरे बच्चे तुझे मैंने बहुत याद किया, तेरी बहुत फिक्र होती थी मुझे , बेटा तो बड़ा खूबसूरत जवान बन गया है।

शहनाज को अपने बेटे का अपनी बुआ से यूं चिपकना और रेशमा की ऐसे तारीफ करना अच्छा नहीं लगा और उसे जलन महसूस होने लगी। उसका खूबसूरत चेहरा गुस्से से लाल होने लगा और वहां से उपर की तरफ चली गई।

रेशमा ने आगे बढ़कर शादाब का गाल चूम लिया और बोली:"

" बेटा मुझे बहुत खुशी हुई तुझसे मिलकर, कुछ दिन के लिए मेरे साथ चलना शहर में!!
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10-08-2020, 12:57 PM,
#12
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शहनाज उपर छत से सब देख और सुन रही थी। जैसे ही रेशमा ने उसके बेटे का गाल चूमा था तो उसका मन किया था कि उसका मुंह तोड़ दे। कमीनी कहीं की मेरे बेटे पर डोरे डाल रही हैं, हद हो गई उसको अपने साथ शहर के जाने के लिए भी बोल रही है। मेरे बेटे को बिगाड़ ना दे ये कमीनी। मुझे ध्यान रखना होगा। ।

तभी बाहर से एक आदमी आया और शादाब को अपने साथ ले गया तो शहनाज़ ने राहत की सांस ली।खैर 12 बजे तक मेहमान अा चुके थे और पार्टी शुरू हो गई। सबने शादाब से मिलकर उसे दुआ दी और उससे अपना प्यार प्रकट किया।

रेशमा ने शादाब को एक बहुत ही अच्छी सोने की अंगूठी गिफ्ट में दी तो शादाब खुश हो गया। पार्टी में कुछ ऐसे परिवार भी आए जो शादाब के दादा को जानते थे जबकि शहनाज़ के बारे में उन्हें नहीं पता था कि ये शादाब की अम्मी हैं।

ऐसे ही परिवार से कुछ औरतें अाई तो जो शादाब को पागलों की तरह घुरे जा रही थी। शहनाज़ को बुरा लगा और उन्हें बोलने के लिए उनके पास जाने लगी की तभी उनकी आवाज उसके कानों में पड़ी।

एक औरत:" हाय देख ना क्या दूध सा गोरा चित्ता लड़का हैं, एक दम चॉकलेटी

दूसरी:" कमीनी चुप कर, मेरी तो जीभ में पानी अा रहा है उसके ये नाजुक होंठ देखकर, मन करता हैं कि अभी जाकर चूस लू!!

पहली औरत:" हाय तेरे बस जीभ में पानी अा रहा हैं, मैं तो नीचे से भ पूरी भीग चुकी हूं।पेंटी से रस बाहर टपक रहा है।

दूसरी:' क्या बात करती है तू, मेरी भी हालत खराब होने लगी है, उफ्फ देख ना कितनी चौड़ी छाती हैं, हाय मेरा तो जीभ से चाटने को मन कर रहा है।

इतना कहकर वो अपनी जीभ अपने होंठो पर शादाब की तरफ देखते हुए फिराने लगी।दोनो की हंसी छूट गई जबकि शहनाज़ का खून जल रहा था, लेकिन वो अपनी ही पार्टी में हल्ला नहीं करना चाहती थी।

पहली:" उसका तो सारा बदन ही गोरा हैं, लगता हैं इसका तो घोड़ा भी गोरा ही होगा।

दूसरी:" हान तू ठीक कहती हैं मैंने आज तक जितने भी लंड देखे सब काले ही थे, गोरे गोरे मर्दों के भी लंड काले होते है, शायद ये पहला होगा जिसका लंड गोरा होगा।

अपने बेटे के बारे में ऐसी बाते सुनकर शहनाज़ का दिल बैठने लगा और उसकी आंखो में आंसू छलक पड़े।

पहली:" हाय गोरा लंड चूसने में कितना मजा आता होगा, अब तक तो सिर्फ काले ही मिले हैं चूसने के लिए।

दूसरी:" चुप कर कमीनी, कोई सन लेगा तो क्या कहेगा। तेरी बात सुनकर तो मेरे मुंह में भी पानी अा गया।

शहनाज को आज पहली बार पता चला कि लंड चूसा भी जाता है, उसे सुनकर बड़ा बुरा लगा, लंड भी कोई चूसने की चीज होती हैं, कितनी जाहिल हैं है औरतें।

दूसरी:" सच यार, मर्द एकदम से काबू में रहते हैं लंड चूसने से, अगर एक बार इसका नंबर मिल जाए तो घोड़ी बन जाऊ इसके लिए और लंड चूस लू।

पहली:" हान तू ठीक कहती है एक बार मेरा पति दूसरी औरत के चक्कर में पड़ गया था क्योंकि मैं उसका लंड नहीं चूसती थी। लेकिन जबसे चूसना शुरू किया सब ठीक हैं, कुत्ते की तरह दम हिलाए मेरे आगे पीछे घूमता रहता हैं।
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10-08-2020, 12:57 PM,
#13
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
दूसरी:" हान सच कहा बहन तूने, किसी तरह से तू इस लड़के का नंबर निकाल, फिर तू बाकी सब मुझ पर छोड़ दें।

पहली:" ठीक हैं, मैं अपने बेटे की पढ़ाई के बहाने से बात करके इसके दादा से नंबर ले लूंगी।

शहनाज का दिल पूरी तरह से तड़प उठा। उसने फैसला किया कि वो अपने बेटे को इन सबसे बचा कर रखेगी। तभी उसके कानों में रेशमा की आवाज पड़ी जो तो वो उसकी तरफ जाने लगीं। शहनाज़ ने पूछा:

" हान बोलो क्या हुआ?

रेशमा:" खाना तो सबने खा लिया हैं और सब लोग एक दूसरे से मिल भी चुके हैं। मुझे लगता हैं कि पार्टी अब खतम कर देनी चाहिए।

शहनाज ने एक दम रेशमा की बात का समर्थन किया क्योंकि वो नहीं चाहती थी कि उसके बेटे को फिर से और किसी की नजर लग जाए। धीरे धीरे पार्टी खत्म हो गई और एक एक करके सभी मेहमान जाने लगे। ।

वो दोनो औरतें जो कि सगी देवरानी और जेठानी थी एक बहुत बड़े सरकारी अधिकारी के घर से अाई थी जो किसी मजबूरी के कारण नहीं अा पाया था। वो शादाब के दादा के पास अाई और एक बोली:"

" बाबा हमे भी अपने बेटे को डाक्टर बनाना हैं, अगर आप हमे शादाब का नंबर दे तो हम जरूरत पड़ने पर उससे बात कर लगी।

दादा:" हान हान बेटी क्यों नहीं, इंसान ही इंसान के काम आता हैं लो मैं दे देता हूं।

दादा जी ने उन्हें नंबर दे दिया तो वो दोनो खुशी से चहकती हुई चली गई। शहनाज़ ये सब देख रही थी और उसका मूड पूरी तरह से खराब हो गया था। खैर सभी मेहमान चले गए और घर में रुकी बाद शादाब की बुआ रेशमा। शहनाज का दिल कर रहा था कि ये कमीनी भी चली जाए लेकिन मेहमान के साथ जबरदस्ती करना ही अच्छी बात नहीं होती और रेशमा इस घर की बेटी हैं इसलिए वो चुप रहीं।

धीरे धीरे शाम का अंधेरा बढ़ने लगा और दादा दादी खाना खाकर लेट गए थे। रेशमा काफी दिनों के बाद घर अाई थी इसलिए अपनी सहेली चंपा से मिलने का सोचने लगी।

रेशमा:" भाभी अगर आप कहें तो मैं अपनी सहेली चंपा से मिलकर अा जाऊ ?

शहनाज खुश हो गई कि कुछ देर के लिए ही सही लेकिन मुसीबत दूर हो रही है।

शहनाज़:" आप चली जाओ, को बात नहीं आराम से मिलकर आना आप।

अब रेशमा ने अपना असली जाल फेंका और बोली:" वो भाभी अंधेरा होने लगा है बाहर, अगर आपकी इजाज़त हो तो मैं शादाब को अपने साथ ले जाऊं?

शहनाज़ की झांटे सुलग उठी और मन किया कि इसे थप्पड़ मार दे लेकिन खुद को संभालते हुए बोली:"

"एक काम करना आप सुबह चली जाना, अभी अंधेरा भी बढ़ रहा है बाहर !!

रेशमा भी कुछ जरूरत से ज्यादा चालाक थी इसलिए बोली:".

" कल सुबह 6 बजे उसकी ट्रेन हैं इसलिए अभी जाऊंगी तो मिल जाएगी । भाभी प्लीज भेज दो ना आप इसे मेरे साथ।

शादाब:" अम्मी जब बुआ इतनी गुज़ारिश कर रही है तो भेज दो आप मुझे। मैं भी गांव देख आऊंगा।

शहनाज़ के पास अब कोई बहाना नहीं बचा था इसलिए दुखी मन के साथ उसे जाने की इजाज़त दे दी।

शहनाज़:" ठीक हैं लेकिन जल्दी वापिस लौट आना, कहूं मैं इंतजार करती रहूं।

रेशमा का चेहरा खिल उठा और इससे पहले कि वो बाहर की तरफ निकलते शादाब के चाची अा गई जो कि रेशमा को अपने घर ले जाने की जिद करने लगी।
रेशमा मना करती रही लेकिन उसकी एक नहीं चली तो वो बोली आखिरकार बोली:"..

" बेटा मैं थोड़ी देर बाद आती हूं जब तक तुम आराम करो, उसके बाद चलते हैं।
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10-08-2020, 12:57 PM,
#14
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शहनाज ने ये सब सुनकर राहत की सांस ली और उपर की तरफ चल पड़ी। शादाब भी अपनी अम्मी के पीछे पीछे ही चल दिया।

सीढ़ियों पर चढ़ती शहनाज़ सोच रही थी कि उसे कुछ करना होगा ताकि इन चुड़ैल औरतो से अपने बेटे को बचा सके। वो अपने कमरे में पहुंच में पहुंच गई और अपने बेटे को आने को बोला तो शादाब उसके पीछे पीछे ही अंदर चला आया। शहनाज़ को समझ नहीं आ रहा था कि वो कहां से शुरू करे क्योंकि एक तो वो बहुत ज्यादा शर्मीली थी और उससे भी बड़ी मुश्किल ये थी वो अपने सगे बेटे से ये सब बाते कैसे करे। शादाब अपनी अम्मी के चेहरे पर परेशानी साफ़ देख रहा था इसलिए उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और बोला:" क्या हुआ अम्मी सब ठीक तो हैं, आप कुछ परेशान सी लग रही हो?

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर एक पल के लिए तो सकपका सी गई लेकिन फिर अपने आपको संभालते हुए कहा :" नहीं बेटा मैं तो बिल्कुल ठीक हूं। बस सोच रही थी आज तुझे सबने कुछ ना कुछ गिफ्ट दिया बस मैं ही कुछ नहीं दे पाई।

शादाब:" अरे अम्मी मा बेटे में कोई गिफ्ट नहीं होता, आप तो मेरी प्यारी अम्मी हैं, आपका प्यार ही तो मेरे लिए गिफ्ट हैं।

शहनाज़ उसकी तरफ देखते हुए:" वो बात तो ठीक हैं बेटा लेकिन फिर भी मुझे कोई तो गिफ्ट देना चाहिए अपने प्यारे बेटे को ताकि मुझे तसल्ली हो। लेकिन मैं तो बेटा घर से बाहर भी नहीं निकलती इसलिए कुछ ला भी नहीं पाई तेरे लिए!!

शादाब:" अम्मी आप परेशान ना हो, मुझे बस आपका प्यार चाहिए और कुछ नहीं।

शहनाज़ ने अपनी जेब के अंदर हाथ डालकर एक गुलाब का लाल सुर्ख फूल निकाल लिया तो शादाब की आंखे खुशी के साथ हैरानी से फैलती चली गई।

शहनाज़ थोड़ा सा आगे बढ़ी और अपने बेटे के ठीक सामने पहुंच गई। उसका पूरा जिस्म बुरी तरह से कांप रहा था और चेहरा लाल हो गया था। उसने एक बार चेहरा उपर उठाया और अपने बेटे की आंखो में देखते हुए बोली:"

" बेटा अपनी अम्मी की तरफ से ये छोटा सा गिफ्ट कुबूल करो।

शादाब ने खुशी के साथ अपनी मा के हाथो से वो फूल ले लिया और उसकी आंखो में देखते हुए कहा:"

" अम्मी ये तो मेरे लिए आज का सबसे बड़ा गिफ्ट हैं, आप सच में बहुत अच्छी हो अम्मी।

शादाब ने खुश होकर अपनी अम्मी को गले लगा लिया और अपनी बांहे उसकी कमर पर लपेट दी। शहनाज़ ने भी अपने बेटे के मजबूत कंधे पर अपना सिर झुका दिया और उससे चिपक गई।

शहनाज:" बेटा ये फूल बड़े नाजुक होते हैं, बहुत प्यार से संभाल कर रखना इसे क्योंकि पहली बार मैंने किसी को गिफ्ट दिया हैं मेरे लाल।

शादाब:" अम्मी इस फूल से ज्यादा नाजुक तो मुझे आप लगती है, देखो अभी भी कैसे शर्मा रही हैं आप !!

अपने बेटे की बात सुनकर शहनाज़ सच में शर्म से लाल हो गई और उसकी आंखो में लाल डोरे तैरने लगे। उसने एक हाथ से अपने बेटे के हाथ को कस कर पकड़ लिया तो शादाब ने फूल को अपनी मा के चेहरे पर घुमाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ को उसकी सांसे रुकती हुई सी महसूस होने लगी। उसके गालों को छूते नाजुक फूल की पंखुड़ियां जैसे ही उसके होंठो से टकराई तो शहनाज़ के मुंह से एक आह निकल पड़ी जिसे उसने बड़ी मुश्किल से दबाया। शादाब ने जैसे ही फूल को उसके होंठो पर उपर नीचे फिराया तो शहनाज़ के गाल एक दम गुलाबी होकर अपनी छटा बिखेरने लगे। उसकी आंखे बंद हो गई और उसने अपने बेटे को कस कर पकड़ लिया।शादाब ने फूल को अपनी जेब में रखते हुए अपनी मा को अपनी मजबूत बांहों में जोर से कस लिया। शहनाज़ का दिल किसी बुलेट ट्रेन की रफ्तार से धड़कने लगा और उसकी चूचियां उसके बेटे के सीने में अपना दबाव बनाने लगी। शादाब ने अपनी अम्मी का खुबसुरत चेहरा पकड़ कर उपर उठाया तो शहनाज़ की आंखे बंद हो गई। शादाब अपनी अम्मी के बालो में अपना हाथ फेरते हुए अपने चेहरे को उसके चेहरे के पास ले जाने लगा तो शहनाज़ किसी सूखे हुए वर्क्ष की तरफ कांपने लगी। उसके होंठ कांप रहे थे और पूरे जिस्म में एक अजीब सी मस्ती छाई हुई थी।

शादाब ने अपने चेहरे को थोड़ा सा और आगे की बढ़ाया तो उसकी गर्म गर्म सांसे अपनी मा के चेहरे पर पड़ने लगी जिससे शहनाज की हालत और खराब होने लगी। जैसे ही शादाब के होंठ अपनी मा शहनाज के होंठ के पास पहुंचे तो शहनाज़ ने अपने हाथो की पकड़ अपने बेटे पर बढ़ा दी तो शादाब के होंठ शहनाज़ के होंठो को हल्का सा छूते हुए उसके गालों पर जा लगे।

उफ्फ शहनाज़ तो इस अनोखे एहसास से पूरी तरह से मस्त हो गई उसके जिस्म ने उसका साथ छोड़ दिया तो उसने अपने आपको पूरी तरह से अपने बेटे की बांहों में ढीला छोड़ दिया। शादाब ने अपनी मा के एक कश्मीरी सेब की तरह लाल सुर्ख हो चुके गाल को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा। जैसे ही शादाब के होंठ शहनाज़ के होंठो को हल्का सा छूते हुए उसके गाल से टकराए तो शहनाज़ ने पूरी तरह से मस्ती में आकर अपनी पकड़ अपने बेटे पर और बढ़ा दी। शादाब कभी उसके गाल को होंठो से चूम रहा था तो कभी जीभ से हल्का हल्का सहला रहा था। शहनाज़ की हालत खराब होने लगी , उसकी आंखे इस अदभुत सुख के कारण पूरी तरह से अभी तक बंद पड़ी हुई थी और पूरा चेहरा लाल हो चुका था और उसके चेहरे पर फैले हुए उसके वाले बाल उसे और खूबसूरत बना रहे थे। उसका पूरा जिस्म किसी आग की भट्टी की तरह तप रहा था, उसकी चूत से रस टपकना शुरू हो गया था और पेंटी गीली हो रही थी। उसके मुंह से निकलती गर्म गर्म सांसे शादाब को पूरी तरह से मदहोश कर रही थी जिस कारण वो अपने एक हाथ से अब अपनी मा की कमर को हल्का हल्का सहला रहा था।शहनाज़ पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और उसकी चूत में आग लगी हुई थी इसलिए वो अपनी चूत को खुद ही अपने टांगो से हल्का हल्का मसल रही थी। शादाब ने जैसे ही उसके गाल पर हल्के से दांत गड़ाए तो शहनाज़ काम वासना से पागल होकर उससे पूरी ताकत से लिपट गई जिससे उसकी चूत शादाब के खड़े हुए लंड से कपड़ों के उपर से ही टकरा गई। अपने बेटे के लंड का अपनी चूत पर ये पहला एहसास उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसकी चूत ने अपना बांध तोड़ते हुए अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया। शहनाज़ ने अपनी सब लाज शर्म छोड़कर अपनी चूत को पूरी ताकत से अपने बेटे के लंड पर दबा दिया और जोश में आकर अपने बेटे के चेहरे को थाम लिया और उसके गाल को जोर जोर से चूमने लगी।
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10-08-2020, 12:57 PM,
#15
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
तभी उसे उपर किसी के आने की आहट हुई तो दोनो की हालत खराब हो गई। शादाब के गाल पर उसकी लिपस्टिक से लाल लाल निशान पड़ गए थे इसलिए उसने जल्दबाजी में अपने बेटे का गाल जीभ निकाल कर चाट लिया और उसके गाल को साफ कर दिया। शादाब अपनी अम्मी के इस कामुक अवतार को देखकर हैरान हो गया। शहनाज़ की जीभ के इस मस्त एहसास से शादाब को बहुत सुखद अनुभव हुआ और उसके मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। रेशमा वापिस आ गई थी शादाब को अपने साथ ले जाने के लिए ।

रेशमा:" भाभी कहां हो आप ?

शहनाज़:" अरे रेशमा मैं अपने ही कमरे में हूं, तुम अंदर ही आ जाओ!!

रेशमा अंदर घुस गई और बोली :"

" मैं आ गई हूं जल्दी से आप शादाब को मेरे साथ भेज दो ताकि मैं चंपा के घर से जल्दी ही वापस आ सकू।

शहनाज़:" जाओ बेटा अपनी बुआ के साथ, लेकिन ध्यान रखना कि जल्दी आ जाना।

शहनाज का दिल तो नहीं कर रहा था अपने बेटे को उसके साथ भेजने के लिए लेकिन अब कोई रास्ता नहीं बचा था। रेशमा शादाब को लेकर अपने साथ निकल गई तो शहनाज़ का दिल उदास हो गया और घर का बाकी काम देखने लगी।

शादाब कार निकालने लगा तो रेशमा बोली:"

" अरे बेटा बाइक से चलते हैं, अच्छा मौसम हैं, थोड़ी गांव की खुली हवा भी लग जाएगी।

शादाब ने रेशमा की बात मानते हुए बाइक निकाल ली। शादाब ने बाइक स्टार्ट करी और अपनी बुआ को बैठने का इशारा किया तो रेशमा ने ठीक शादाब के सामने आते हुए जान बूझकर
अपना दुपट्टा नीचे गिरा दिया जिससे उसकी गोरी चूचियों का उभार नजर आने लगा, शादाब की नजरे किसी चुंबक की तरह उसकी चूचियों पर चिपक गई। रेशमा मुस्कुराई और नीचे की तरफ अपना दुपट्टा उठाने के लिए झुकी तो उसकी चूचियां आधे से ज्यादा बाहर की तरफ छलक पड़ी, रेशमा ने तिरछी निगाहों से एक बार शादाब की तरफ देखा और फिर अपने हाथ से अपनी चूचियों को अंदर की तरफ ठूसने लगी और बोली:"

" हाय ये दुपट्टा भी बार बार गिर जाता हैं, कैसे संभालू इसको!!

शादाब इस नजारे को देखकर गरम हो गया और उसके लंड में तनाव आने लगा। उसने बड़ी मुश्किल से अपनी नजरे रेशमा की चूचियों पर से हटाई और आगे की तरफ देखने लगा। रेशमा अब सीधी खड़ी हो गई थी और उसे शादाब की पेंट का उभार साफ़ नजर आ रहा था जिसे देखकर वो लंड की लंबाई का अंदाजा लगा रही थी और उसकी चूत से रस की कुछ बूंदे निकल गई।

रेशमा ने आगे कदम रखा और लड़खड़ाने का बहाना करते हुए शादाब के ठीक लंड के उपर हाथ रख कर उसे पकड़ लिया और उसकी लम्बाई मोटाई को अच्छे से महसूस करते हुए हल्का सा सहला दिया । रेशमा शादाब के पीछे बाइक पर उससे चिपक कर बैठ गई और अपनी चूचियों का दबाव उसकी कमर पर डाल रही थी जिससे शादाब को बहुत अच्छा लगा रहा था। जैसे ही बाइक को हलका सा झटका लगा तो रेशमा जान बूझकर उसके और करीब सिमट अाई। शादाब एक जवान लड़का था और उस दौर से गुजर रहा था जिसमें औरत के जिस्म और सेक्स के बारे में जानने की बड़ी इच्छा होती हैं। शादाब की तरफ से कोई भी विरोध ना पाकर वो अब अच्छे से अपनी चूची उसकी कमर पर रगड़ रही थी।

रेशमा:" शादाब बेटा तुम बहुत खूबसूरत और प्यारे हो, एकदम जवान हो गए हो तुम!!

शादाब कुछ नहीं बोला लेकिन मुस्कुरा उठा और रेशमा को उसके जिस्म के इशारों से सब कुछ समझ अा गया। रेशमा उससे थोड़ा खुलना चाहती थी ताकि आगे उसे पटाने में आसानी हो ।

रेशमा:"बेटा वहां शहर में तो तुम खूब मस्ती करते होंगे दोस्तो के साथ !?

शदाब:" हान बुआ, थोड़ा कम ही किया मैंने, बस पढ़ाई पर ध्यान ज्यादा दिया!!

रेशमा अब एक हाथ से उसके कंधे को हल्का सा सहलाते हुए बोली:" बेटा सुना है कि दिल्ली में तो लडको की दोस्त लड़कियां भी होती हैं !!

शादाब:" हान बुआ होती तो मैं, मैंने देखा मेरे कुछ भी लड़कियों के साथ घूमते थे ।

रेशमा को लगा कि लड़का लाइन पर अा रहा हैं और जल्दी ही उसका काम बन जाएगा। उसने हाथ को थोड़ा नीचे की तरफ लाते हुए उसकी चौड़ी छाती पर टिका दिया और बोली:"
" तेरी कोई दोस्त नहीं थी क्या शादाब वहां पर लड़की!?

शादाब को अपनी बुआ का हाथ अपनी छातियों पर अच्छा लगा और वो थोड़ा सा पीछे की तरफ हुआ जिससे उत्साहित होकर रेशमा ने अपने हाथ की पकड़ थोड़ा और बढ़ा दी!!

शादाब:" नहीं बुआ, मेरी कोई कोई लड़की दोस्त नहीं थी,

रेशमा ने अब उसकी शर्ट का एक उपर वाला बटन खोल दिया और हाथ को हल्का सा अंदर डालकर सहलाते हुए बोली:"

"जरूरी तूने ही किसी को लाइन नहीं दी होगी नहीं तो तेरे उपर तो लड़कियां अपनी जान भी लुटा देती बच्चे!!

इतना कहकर रेशमा के हाथ की उंगलियां उसकी छाती के बालों से खेलने लगी। शादाब पूरी तरह से मस्त हो गया क्योंकि पहली बार किसी औरत ने उसकी छाती को सहलाया था इसलिए उसके मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। रेशमा समझ गई कि लड़का पट गया है और अब जल्दी ही उसे एक कुंवारे लड़के की सील तोडने का मौका मिलेगा। रेशमा ने अब शादाब पर भावनात्मक रूप से हमला किया और बोली:'

" शादाब तुझे पता है तेरे फूफा मेरा बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखते, मुझे एक दोस्त की बड़ी कमी महसूस होती हैं, क्या तू मेरा दोस्त बन सकता है?

शादाब की सांसे तेज होने लगी और उसके मुंह से उत्तेजना के मारे कोई आवाज नहीं निकल रही थी, रेशमा ने अपनी उंगलियों में शादाब के एक निप्पल को भर लिया और हल्का सा दबाते हुए बोली:" बता ना बेटा अपनी बुआ का दोस्त बनेगा ना ?

शादाब अपने निप्पल पर हुए इस प्रहार से मस्ती से भर उठा और बोला:" हान बुआ बनूंगा मैं आपका दोस्त !!

तभी चंपा का घर अा गया और दोनो उसके घर के अंदर घुस गए। रेशमा को देखते ही चंपा खुशी के मारे उससे लिपट गई तो रेशमा ने भी अपनी बांहे में उसे कस लिया।
मेल मिलाप कर बाद चंपा ने दोनो को हल्का सा नाश्ता कराया क्योंकि खाना सभी खा चुके थे। चंपा ने शादाब की तरफ देखते हुए कहा:"

" रेशमा ये लड़का किसका हैं? तेरा बेटा तो इतना बड़ा नहीं होगा अभी !!

रेशमा:" अरे चंपा ये मेरे भाई का लड़का हैं, अभी सीपीएमटी पास किया हैं इसने।

चंपा;" ओह मतलब लड़का सुंदर होने के साथ साथ होशियार भी हैं। सच में ऐसे लडके आज कल कहां मिलते है!! बेटा आया करो कभी कभी ये भी तुम्हारा अपन ही घर हैं।

ये बोलकर चंपा की आंखो में एक चमक उभर आई थी जिसे रेशमा ने साफतौर पर नोटिस किया।
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10-08-2020, 01:00 PM,
#16
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शादाब:" जी आंटी, कोशिश करूंगा मैं टाइम निकालकर आने की आपके यहां।

फिर काफी देर तक दोनो में बाते होती रही और फिर रेशमा बोली:"

" अच्छा चंपा मैं चलती हूं अपने घर, रात बहुत हो गई हैं, देख 10 बजने वाले हैं ।

चंपा उन्हें छोड़ने बाहर तक अाई और एक प्यार भरी स्माइल उसने शादाब को दी । उसके बाद शादाब ने बाइक स्टार्ट कर दी और रेशमा उसके पीछे चिपक कर बैठ गई। रास्ते भर रेशमा उस पर डोरे डालती रही और थोडी देर बाद वो अपने घर के सामने खड़े थे। शादाब ने बाहर ही बाइक लगा दी। सड़क पर हल्का अंधेरा था इसलिए किसी को कुछ भी साफ नजर नहीं आ सकता था जिसका फायदा उठाने की रेशमा ने सोची और उसने एक प्लान बनाया और शादाब को बोली:"

" मुझे रात को ठीक से दिखाई नहीं देता अंधेरा ज्यादा हो तो इसलिए मुझे अपने साथ ही अंदर ले चल।

रेशमा ने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया जिसे शादाब ने पकड़ लिया और दोनो हल्के हल्के अंदर की तरफ चल पड़े।

दूसरी तरफ जब से शादाब गया था शहनाज बहुत परेशान थी क्योंकि वो रेशमा के बारे में जानती थी कि ये एक नंबर की चालू और अय्याश औरत हैं इसलिए उसका दिल बहुत घबरा रहा था। नींद उसकी आंखो से कोसो दूर थी और वो आराम से बिस्तर पर पड़ी हुई करवटें बदल रही थी। जैसे ही उसने बाइक की आवाज सुनी तो वो खड़ी हो गई और बाहर बालकनी में खड़ी हो गई जहां पूरी तरह से अंधेरा था इसलिए वो किसी को नजर नहीं अा रही थी।

रेशमा शादाब के हाथो में अपना हाथ फसाए इस बात से बेखबर घर के अंदर घुस गई। शादाब के दादा दादी गहरी नींद में जा चुके थे इसलिए उसे इनकी कोई चिंता नहीं थी, बस उसने एक बार उपर की तरफ देखा ताकि पूरी तरह से निश्चिंत हो सके। उसे रात के घोर अंधेरे में वहां खड़ी शहनाज नजर नहीं आई।

रेशमा ने जान बूझकर कदम आगे बढ़ाते हुए गिरने का बहाना किया तो शादाब ने उसका हाथ तो पकड़ ही रखा था इसलिए उसे पकड़ कर उपर की तरफ खींच लिया जिससे वो एकदम शादाब से सीने से जा लगी और पूरी तरह से उससे चिपक गई मानो गिरने से बचने के लिए ऐसा कर रही हो। शहनाज़ ये सब देख रही थी इसलिए उसकी आंखे हैरत से फैलती चली गई। रेशमा ने कसकर अपने दोनो हाथ शादाब की कमर पर बांध लिए और उसका मुंह थोड़ा नीचे करते हुए अपनी चुचियों के बीच में घुसा दिया और बोली:"

" ओह शादाब मैं तो डर गई थी,अच्छा किया तूने पकड़ लिया, देख मेरा दिल कितनी तेजी से धड़क रहा हैं!

इतना कहकर वो अपनी चूचियों को शादाब के मुंह पर रगड़ने लगीं तो शादाब ने भी जोश में आते हुए दोनो हाथो से उसके कंधो को थाम लिया। रेशमा पूरी तरह से शादाब को अपने कब्जे में कर लेना चाहती थी इसलिए अपनी अपनी टांगे उसकी टांगो से रगड़ते हुए बोली:"
" शादाब मेरी साथ चलेगा ना सुबह शहर, तेरे फूफा सुबह ऑफिस चले जाते हैं और सब बच्चे स्कूल, मेरा मन नहीं लगता अकेले बेटे!!

शहनाज़ की आंखे ये सब देख और सुनकर गुस्से से लाल होकर दहकने लगी, कमीनी उसके बेटे को बिगाड़ रही है, इसका कुछ करना पड़ेगा। ये सोचकर वो अंदर अपने कमरे में गई और गैलरी की लाइट जला दी तो डर के मारे रेशमा की हालत खराब हो गई और उससे एक झटके के साथ शादाब से अलग हो गई। डरते डरते वो ऊपर की तरफ चल पड़ीं तो उसने देखा कि शहनाज़ की आंखे पूरी तरह से नींद में लग रही थी और वो अपने कमरे से बाहर निकली!

रेशमा डरते हुए:" भाभी हम अा गए हैं, बस अभी आए हैं, आपकी तबियत ठीक हैं?

शहनाज़;" हान ठीक हूं, बस थोड़ा नींद में थी, बाथरूम लगा तो अब बस लाइट जलाकर बाथरूम जा रही हूं।

रेशमा ने ये सुनकर राहत की सांस ली, थोड़ी देर बाद शहनाज वापिस अा गई तो रेशमा बोली:

" भाभी मुझे अकेले सोने की आदत हैं इसलिए मैं सामने वाले कमरे में सो जाउंगी।

शहनाज जानती थी कि उसका कमरा का गेट अंदर की तरफ शादाब के रूम में खुलता हैं इसलिए ये कमीनी चाल चल रही है तो शहनाज़ बोली:"

" रेशमा मुझे रात को अकेले डर लगता हैं इसलिए आज तुम मेरे साथ ही सो जाओ, दोनो आराम से बात भी करेंगे, बहुत दिनों के बाद अाई हो तुम!!

रेशमा का मूड खराब हो गया लेकिन उसने सब्र किया क्योंकि एक ही रात की तो बात है, सुबह मैं शादाब को अपने साथ ले ही जाऊंगी।
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10-08-2020, 01:00 PM,
#17
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
रेशमा शहनाज की बात मान गई और उसके साथ ही सो गई, शहनाज़ जान बूझकर उससे देर रात तक बाते करती रही ताकि वो जब सोए तो गहरी नींद में सोए। आखिर कार जान बात करते हुए रेशमा सो गई तो शहनाज ने सुकून की सांस ली और वो भी सो गई। दूसरी तरफ शादाब भी मन बना चुका था कि वो सुबह अपनी बुआ के साथ शहर चल जाएगा।

अगले दिन सुबह उठकर सबने साथ में नाश्ता किया और सब बैठे हुए बाते कर रहे थे। तभी रेशमा ने अपना जाल फेंका।

रेशमा:" अब्बू मैं सोच रही थी कि अगर आप सच इजाज़त दे तो मैं शादाब को अपने साथ शहर के जाऊ कुछ दिन के लिए! इतने दिन बाद मिला हैं बच्चे भ खुश हो जाएंगे इससे मिलकर ।

दादा:" हान बेटी ले जाओ इसमें पूछने वाली क्या बात हैं !

शादाब भी खुश हो गया और बोला :" हां बुआ मेरा भी मन है आपके साथ शहर जाने का! यहां गांव में मेरा कोई दोस्त भी नहीं है

रेशमा:" बस एक बार शहनाज भाभी भी हां कर दे तो अच्छा होगा!!

शहनाज:" मुझे कोई दिक्कत नही है, बस सोच रही थी कि इतने साल बाद मेरा बेटा घर आया है, अभी तो ठीक से देखा भी नहीं है मैंने अपने लाल को, मैं सोच रही थी कि पहले कुछ दिन मेरे साथ ही रह ले तो अच्छा होगा।

रेशमा की झांटे सुलग गई और बोली:" भाभी मैं तो एक हफ्ते बाद ही वापिस भेज दूंगी।

दादी:" देख बेटी रेशमा, तुम्हे शहनाज की बात समझनी चाहिए क्योंकि एक मा होने के नाते बेटे के लिए उसका दर्द मैं समझ सकती हूं और तुम्हे भी समझना चाहिए ये ।

अब किसी के पास कोई जवाब नहीं बचा था इसलिए रेशमा अकेले ही जाने को मजबूर हो गई। लेकिन उसे उम्मीद थी कि एक हफ्ते के बाद वो जरूर शादाब को अपने साथ ले जाएगी।

शहनाज़ की खुशी का आज कोई ठिकाना नहीं था इसलिए रेशमा के जाने के बाद उसने अपनी सास का मुंह चूम लिया। दादा दादी बहुत खुश हुए और शादाब भी ये सब देखकर मुस्कुरा दिया ।

शहनाज थोड़ी देर खाना बनाने के लिए उपर चली गई। वो जानती थी कि अगर उसे अपने बेटे को इन चुड़ैल औरतों से बचाना हैं तो उसे अपने साथ ही रखना होगा और सही गलत का फर्क मैं खुद समझाऊंगी। तभी शहनाज़ के होंठ मुस्करा उठे क्योंकि उस एहसास हुआ कि वो क्या अपने बेटे को सही गलत का पाठ पढ़ाएगी वो तो खुद ही उसे देखते ही सब कुछ भूलकर बहक जाती है। तभी शहनाज़ का दिल तड़प उठा और उसके विचार आया कि ये ही तो हैं वो तेरे सपनो का शहजादा जिसके री दिन रात सपने देखा करती थी। अब जब तेरे सामने हैं तो क्यों खुद को रोक रही हैं, बस तेरा बेटा हैं सिर्फ इसलिए। तुझे याद रखना चाहिए कि वो पहले एक मर्द हैं और जवान हो चुका हैं जिसे देखकर लड़कियां ही नहीं बल्कि औरतें भी तड़प रही है। रेशमा तो उसे अपने साथ ही ले जाना चाहती थी ताकि उसे फसा ले। उफ्फ कल वो दो औरतें कितनी गंदी गंदी बाते कर रही थी मेरे बेटे के बारे में और वो तो उसका नंबर भी लेकर गई है। मुझे ध्यान रखना होगा कि वो रेशमा के साथ उन सब से भी बच सके, इसलिए लिए मुझे क्या करना होगा!!

क्या मुझे अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहिए, क्या मैं इस उम्र में ऐसा कर पाऊंगी, उफ्फ मै ये क्या सोचने लगी। ये बात सोचते ही उसका चेहरा एक बार फिर से शर्म से लाल हो उठा। उसकी सांसे फिर से तेजी से चलने लगी जिससे उसकी चूचियां अपना आकार दिखाते हुए नजर आने लगी।
शहनाज़ ने गौर से अपनी चूचियों को देखा तो उसे आज पहली बार अपनी चुचियों पर घमंड हुआ। उफ्फ आज भी कैसी तनी हुई और ठोस हैं मेरी चूचियां, रेशमा के मुकाबले तो कहीं ज्यादा अच्छी हैं। वो शीशे के सामने खड़ी खड़ी हो गई और अपने आपको आज पहली बार जी भर कर निहारने लगी तो उसकी खुद की आंखे ही शर्म से झुक गई। उसने एक बार अपने हाथ को अपने सूट के गले में डाल कर हल्का सा चौड़ा किया तो उसकी चूचियों की गोरी खाई साफ नजर आने लगी, चूचियां एक दूसरे से ऐसे मिली हुई थी मानो एक दूसरे को दबाने की कोशिश कर रही हो। शहनाज की आंखे ये सब देखकर लाल सुर्ख हो उठी और उसने एक बार शीशे में अपनी खुद से नजरे मिलाई तो शर्म के मारे घूम गई जिससे उसकी भारी भरकम गांड़ शीशे के सामने अा गई। वैसे तो इसके जिस्म का हर हिस्सा एक से एक खूबसूरती लिए हुआ था लेकिन शहनाज़ की गांड़ उसके शरीर का सबसे खूबसूरत और सेक्सी हिस्सा थी। उसके मन में एक बार शीशे में अपनी गांड़ को देखने की इच्छा जाग उठी तो उसका दिल तेजी से धड़का और शर्म के मारे उसकी आंखे बंद हो गई। उसने बड़ी मुश्किल से बंद आंखो के साथ ही शीशे की तरफ अपना मुंह किया और कांपते हुए अपनी आंखो को हल्का सा खोला तो उसकी नजर अपनी गांड़ पर पड़ी और शर्म और उत्तेजना के मारे उसकी आंखे फिर से बंद हो गई। उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था मानो फट ही जाएगा और उसकी चूचियां कपडे फाड़ कर बाहर निकल जाएगी। उसने अपनी उछलती हुई चूचियों को काबू करने के लिए अपने दोनो हाथ अपने सीने पर टिका दिए और हिम्मत करके फिर से अपनी आंखो को खोलते हुए गांड़ को देखा तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उसे अपनी गांड़ देख कर ऐसा लग रहा था मानो उसकी सलवार में दो गोल गोल फुटबाल जबरदस्ती घुसा दी गई है।उसकी गांड़ रेशमा के मुकाबले कहीं ज्यादा ठोस और बड़ी थी। सच पूछो तो उसने आज तक किसी की भी इतनी तगड़ी गांड़ नहीं देखी थी। शहनाज आज बहुत खुश हुई क्योंकि आज उसे सच में पहली बार पता चल रहा था कि वो एक जीती जागती क़यामत हैं जिसके एक इशारे पर दुनिया का कोई भी मर्द उसके तलवे चाटने पर मजबूर हो जाएगा फिर मेरा बेटा क्या चीज़ है।
शहनाज़ के दिल में एक और सोच उभरी और उसके होंठो पर एक कातिल मुस्कान तैर गई और वो खुद ही अपने आप से शर्मा गई और उसने दोनो हाथो से शर्म के मारे अपने चेहरे को ढक लिया।
और मन ही मन मैं सोचने लगीं

" उफ्फ हाय अल्लाह मैं ये क्या गंदा सोच रही थी, कैसे आखिर कैसे मैं खुद ही अपनी वो वो क्या कहते हैं उसको उफ्फ मुझसे से नाम भी नहीं लिया जाएगा देख पाऊंगी जो मेरी टांगो के बीच में छिपी हुई है। शादाब के अब्बू बोलते थे कि मेरा असली खजाना तो वो ही हैं। लेकिन मैं कभी शर्म के मारे उन्हें नहीं दिखा पाई। खुद कैसे देखू !!

तभी उसे उपर किसी के आने की आहट हुई तो वो अपने ख़यालो से बाहर अाई और उसने देखा कि उसका बेटा शादाब उपर अा गया हैं जो कुछ उदास लग रहा था।

शहनाज़:" बेटा क्या हुआ ? कुछ परेशान लग रहे हो?

शादाब:" अम्मी गांव में मेरा एक भी दोस्त नहीं हैं, मेरा कैसे मन लगेगा यहां अकेले, इससे अच्छा तो आपने बुआ के साथ जाने दिया होता।

शहनाज़ अपने बेटे की पीड़ा समझ गई क्योंकि सचमुच गांव में उसका कोई दोस्त नहीं था। उसने अपने बेटे को समझाते हुए कहा:"

" बेटा दोस्त भी बन जाएंगे तेरे यहां, बस मेरा मन नहीं किया तुझे इतनी जल्दी अपने से जुदा करने का। इसलिए तुझे नहीं जाने दिया। क्या तेरा इतनी बड़ी अपनी अम्मी से मन भर गया क्योंकि ऐसी बाते कर रहा हैं।

इतना बोलकर शहनाज का फूल सा नाजुक चेहरा उदास हो गया तो शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ और बोला:" गलती हो गई अम्मी माफ कर दो,!!

इतना कहकर वो दौड़ता हुआ अपनी अम्मी के गले लग गया और उसे अपनी बांहों में भर लिया, शहनाज ने भी अपनी बांहे अपने बेटे की कमर पर कस दी।
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10-08-2020, 01:00 PM,
#18
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शहनाज़:" बेटा मुझे कभी छोड़ कर मत जाना, मैं तेरे बिना नहीं जी पाऊंगी मेरे लाल क्योंकि अब तेरे सिवा मेरा कोई नहीं है।

शहनाज़ ने ये सब पूरी तरह से भावुक होकर कहा और अपना चेहरा अपने बेटे के सीने में छुपा लिया। शादाब भी अपनी अम्मी के साथ भावनाओ में बहता चला गया और शहनाज़ के बालो में उंगली फिराने लगा। अपने बेटे का इतना प्यार देख कर शहनाज की आंखे छलक उठी और जैसे ही शादाब को उसके आंसुओ का एहसास हुआ तो वो तड़प उठा और अपनी अम्मी के चेहरे को उपर उठा कर उसके आंसू अपनी जीभ से चाटने लगा और उसका चेहरा साफ करने के बाद बोला:"

" बस अम्मी, मत रोओ आप, आपके सिर की कसम मैं सब आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा। अब स्माइल करो जल्दी से प्यारी सी आप।

शहनाज़ ने अपने आंखे खोलकर अपने बेटे को देखा तो खुशी के मारे उसकी आंखो से फिर से एक आशू टपक पड़ा तो शादाब ने उसका चेहरा अपने दोनो हाथों में थाम लिया और बोला:"

" अम्मी आपके इस चांद से खूबसूरत मुखड़े पर आंसू अच्छे नहीं लगते, आपको मेरी कसम अब आप नहीं रोएगी।

शहनाज ने बड़ी मुश्किल से अपने आंसू रोके और बोली:"
" चल झूठा कहीं का, जब देखो मेरी तारीफ़ करता रहता हैं, तुझे तो तेरी बुआ ज्यादा खुबसुरत लगती हैं तभी तो अपनी मा को छोड़कर उसके साथ जा रहा था।।
शादाब:"नहीं अम्मी, ऐसा कुछ भी नहीं हैं, वो तो आपके सामने कुछ भी नहीं हैं, आपसे हसीन से पूरी दुनिया में कोई हो ही नहीं सकती। बस मेरा दोस्त नहीं हैं यहां कोई इसलिए शहर जा रहा था।

शहनाज अपने बेटे की बाते सुनकर खुश हो गई और उसके कंधे को सहलाते हुए बोली:"

" मैं समझती हूं कि तेरा यहां कोई दोस्त नहीं हैं, क्या तू अपनी मा से दोस्ती करेगा बेटा ?

शहनाज़ ये बाते जाने किस आवेश में आकर बोल गई और जब उसने अपने शब्दो पर ध्यान दिया तो लाज शर्म के मारे उसका चेहरा लाल हो गया और वो अपने से पूरी जोर से चिपक गई उसका सीना बहुत तेजी से धड़कने लगा।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश हो गया कि जरूर अम्मी भी मुझसे रेशमा बुआ की तरह दोस्ती करना चाहती हैं, लेकिन मेरी सगी मा हैं इसलिए मुझे धैर्य और प्यार से काम लेना होगा।

शादाब:" सच अम्मी क्या आप सचमुच आप अपने बेटे से दोस्ती करेंगी ?
शहनाज़ की तो जैसे बोलती बंद हो गई, उसने अपने बेटे के कंधे पर अपने हाथो का दबाव बढ़ा दिया मानो उसे इशारा कर रही हो कि हा मैं तुझसे दोस्ती करने के लिए तैयार हूं। शादाब समझ तो सब कुछ गया लेकिन फिर वो जानता था कि उसकी अम्मी एक दम फूल की तरह नाजुक और शर्मीली हैं इसलिए वो उसके मुंह से फिर से सुनना चाहता था ताकि उसकी शर्म और घबराहट कुछ कम हो सके।

शादाब ने अपनी अम्मी के चेहरे को हाथ से पकड़ कर उपर की तरफ उठाया तो उसका चेहरा अपने आप उपर उठता चला गया। शर्म और डर के मारे उसकी आंखे बंद हो गई थी और गाल आज कुछ ज्यादा ही गुलाबी होकर दमक रहे थे। उसके गुलाब की पंखुड़ियों के जैसे नाजुक और रसभरे होंठ अपने आप खुल और बंद हो रहे थे।

शादाब अपनी अम्मी के चांद से सुंदर मुखड़े को जी भर कर देख रहा था और अपने एक हाथ से शहनाज़ के गाल सहलाते हुए बोला:" मेरी चांद सी प्यारी अम्मी प्लीज़ अपनी आंखे खोल दीजिए एक बार बस!!

शहनाज ने बड़ी मुश्किल से अपनी आंखो को खोल दिया तो शादाब उसकी आंखो में झांकने लगा जहां सिर्फ उसे अपने और अपने लिए बेशुमार मोहब्बत नजर आईं। ऐसा पहली बार हुआ था कि शहनाज ऐसे अपने बेटे की आंखो में झांक रही थी जिस असर ये हुआ कि वो उसकी आंखो में पूरी तरह से खोल गई।
शादाब अपने अम्मी के बालो के गाल को हल्का सा सहला कर बोला:"
" अम्मी एक बार मेरी आंखो में देख कर बोलिए ??

शहनाज़ को अपने बेटे की आंखो में अपने लिए सिर्फ प्यार नजर आया और भावनाओ में बहकर उसने हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे का चेहरा थाम लिया।

शहनाज़ उसकी आंखो में पूरी तरह से खोते हुए बोली:"

" बेटा तेरी ये मा शहनाज़ तुझसे दोस्ती करना चाहती है, क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?

शादाब के हाथ अपने आप अपनी अम्मी की पतली और नाजुक कमर पर पहुंच गए और उसकी कमर को सहलाते हुए बोला:"

" अम्मी मुझसे आपकी दोस्ती कुबूल हैं! आपका ये बेटा आपकी दोस्ती में अपनी जान भी लुटा देगा आपकी कसम!!

अपने बेटे की बात सुनकर शहनाज को यकीन हुआ कि उसका बेटा पूरी तरह से अब सिर्फ उसका हैं इसलिए उसने आगे बढकर अपने बेटे का मुंह चूम लिया। शादाब भी अपनी अम्मी से पूरी तरह से कस कर गया और उनकी कमर को जोर से अपनी तरफ खींच लिया जिससे मा बेटे के बीच की सारी दूरी खत्म हो गई जिससे कपड़ों के ऊपर से ही उनके जिस्म एक दूसरे से मिल गए। जैसे ही शहनाज़ ने अपने बेटे का गाल छोड़ा तो उसका बेटा पूरे जोश के साथ उसके गुलाबी गाल पर टूट पड़ा और मुंह में भर कर जोर जोर से चूसने लगा। अपने बेटे के प्रहार से शहनाज़ बुरी तरह से कसमसाने लगी और उसके हाथ को जोर जोर से दबाने लगी। शादाब ने अपनी अम्मी के गाल पर हल्के से अपनी जीभ को फिराया तो शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी सिसकी निकल पड़ी जिसके उसके बेटे ने सुन लिया और उसकी कमर को जोर जोर से सहलाने लगा। उत्तेजना के मारे शहनाज़ की हालत खराब होने लगी और उसकी गर्म गर्म सांसे शादाब की गर्दन पर पड़ने लगी तो शादाब ने पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी अम्मी के गाल पर जोर से दांत गड़ा दिए जिसकी उम्मीद को शहनाज़ को बिल्कुल भी नहीं थी जिस करण उसके मुंह से एक हल्की दर्द भरी चींखं निकल पड़ी तो शादाब ने डर के मारे उसका गाल छोड़ दिया। शहनाज़ का गला दांतो के निशान से पूरी तरह से लाल पड़ गया था।

शादाब को अपनी गलती का एहसास हुआ तो उसने अपनी अम्मी को छोड़ते हुए अपने दोनो कान पकड़ लिए और उठक बैठक लगाने लगा। ये सब देखकर शहनाज की हंसी छूट गई और बोली:"
" बस कर मेरे बच्चे, मैं नाराज नहीं हूं तुझसे!
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10-08-2020, 01:00 PM,
#19
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शादाब " अम्मी मैं जानता हूं कि मुझसे गलती हुई है इसलिए एक दोस्त होने के नाते माफी मांगना मेरे फ़र्ज़ हैं।

शहनाज़ ने आगे बढ़कर अपने बेटे को गले लगा लिया और उसके गाल को खींचती हुई बोली:" चल जा माफ किया तुझे तू भी क्या याद रखेगा !!

शहनाज़ को अब खाना बनाना था क्योंकि दोपहर होने वाली थी और उसके दादा दादी को भूख दोपहर को थोड़ा जल्दी लग जाती थी। इसलिए वो बोली:"
" अच्छा बात सुन मुझे अब खाना बनाना होगा तब तुम कहीं घूम कर आना चाहो तो जा सकते हो!

शादाब अपनी अम्मी की तरफ देखते हुए शिकायती लहजे में बोला:" इतनी जल्दी अपने दोस्त से उब गई क्या जो बाहर जाने के लिए बोल रही हो??

शहनाज थोड़ा स्माइल करते हुए:" अरे बेटा ऐसी कोई बात नहीं है, मेरा ऐसा मतलब नहीं था।
शादाब:" अम्मी मैं चाहता हूं कि मैं खाना बनाने में आपकी मदद करूं !!
शहनाज़ को खुशी हुई कि उसका बेटा उसकी कितनी फिकर कर रहा हैं इसलिए वो बोली:"

" ठीक हैं बेटा, तुम एक काम करो सब्जी धोकर ले आओ तब तक मैं मसाले तैयार कर लेती हूं।

शहनाज़ अपनी मा की बात सुनते ही सब्जी धोने के लिए किचन में चला गया जबकि शहनाज़ ने एक पीतल की औखली निकाल ली जिसमें वो अक्सर मसाला कूटा करती थी। जल्दबाजी में उसने एक दूसरी बड़ी औखली का मूसल निकाल लिया। शहनाज़ ने मसाले को औखलीं में डाल दिया और जैसे ही उसने मसाला कूटने के लिए पीतल का मोटा मूसल उठाया तो मूसल हाथ में लेते ही उसे अपने बेटे का लंड याद आ गया तो उसका चेहरा गुलाबी हो उठा। उसने एक बार ध्यान से मूसल को उपर से नीचे तक निहारा और उसे एहसास हो गया था कि उसके बेटे का लंड किसी भी तरह से इस मूसल से कम नहीं, ना लंबाई में और ना ही मोटाई में बिल्कुल उसके जैसा हैं बल्कि उससे कहीं ज्यादा ठोस हैं अगर कठोरता की बात करू तो।

शहनाज़ की सांसे अपने आप उपर नीचे होने लगी और उसकी चूत में चीटियां सी दौड़ने लगी, उसने मूसल को औखलीं से बाहर निकाल लिया और उस पर अपनी उंगलियां फिराने लगी तो उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई । शहनाज़ को लगा जैसे वो अपने बेटे के तगड़े और कठोर लंड पर उंगलियां फिरा रही है । बीच बीच में वो मूसल को दबाने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो कहां दबता तो उसके होंठो फड़क उठे और वो मन ही मन में बोली कि मेरे बेटा का तो बिल्कुल इतना ही कठोर हैं, ना ये दब रहा हैं और ना ही वो दबा था मुझसे।

शहनाज़ पूरी तरह से मस्ती में डूबी हुई अपनी बंद आंखो के साथ उस पर हाथ फेर रही थी। शादाब सब्जी धोकर वापिस आ रहा था और जैसे ही उसकी नजर अपने अम्मी पर पड़ी तो उसकी आंखे हैरत से फैलती चली गई। उफ्फ मम्मी कैसे मूसल पर हाथ फिरा रही है। वो दबे पांव आगे बढ़ा और शहनाज़ के बिल्कुल पास पहुंच गया जिसकी शहनाज़ को बिल्कुल भी खबर नहीं थी कि उसका बेटा ठीक उसके सामने आ चुका हैं। शहनाज़ की सांसे तेज हो रही थी और होंठ अपने आप मस्ती से आधे खुल बंद हो रहे थे।
शादाब धीरे से अपने मुंह को उसके कान के पास ले गया और अपनी आवाज को पूरी मधहोश बनाकर धीर से बोला:"

" क्या कर रही हो अम्मी?

अपने बेटे की आवाज सुनते ही शहनाज़ एक झटके के साथ कांप उठी और मूसल उसके हाथ से छूट गया। उसका पूरा शरीर इतनी बुरी तरह से कांप रहा था मानो वो चोरी करती हुई रंगे हाथों पकड़ ली गई हो। एक बार के लिए उसकी आंखे खुली और उसने मूसल को उठा लिया और अपने बेटे को देखते ही शर्म के मारे फिर उसकी आंखे झुक गई। उसकी चूत टप टप करने लगी और चूचियां बगावत पर उतर आई। उसने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला और धीरे से मूसल को औखलि में डाल दिया तो मूसल पूरा फस कर उसमे चला गया तो शहनाज़ धीरे धीरे मसाला कूटने लगी जिससे उसका पूरा शरीर हिलने लगा और चूचियां किसी रबड़ की मोटी बॉल की तरह उछलने लगी और शहनाज़ अपना मुंह नीचे किए ही मसाला कूटने लगी।

डर और शर्म के मारे उसके हाथ कांप रहे थे और उसकी होंठो पर हल्की सी स्माइल आ रही थी , वो सफाई देती हुई बड़ी मुश्किल से बोली:"

" मसाला कूट रही हूं बेटा,

शादाब ने देखा कि मूसल पूरी तरह से फस कर जा रहा हैं और उसकी अम्मी की चूचियां पूरी तरह से उछल रही है। उसकी आंखे अपने आप उन दूध से गोरे चिकने ठोस कबूतरों पर जम गई और उसने पूछा

"अम्मी आपको नही लगता हैं कि ये मूसल इस औखलीं के हिसाब से कुछ ज्यादा बड़ा नहीं है?

शाहनाज की अपने बेटे की बात सुनकर हालत खराब हो गई और उस बात से बेखबर कि उसका बेटा उसे देख रहा है उसने एक बार मूसल की तरफ देखा और ना चाहते हुए भी उसकी निगाहें अपनी जांघो के बीच में चली गई मानो अपनी चूत की उस औखलीं से तुलना कर रही हो।

शादाब अपनी अम्मी की इस हरकत से पागल सा हो उठा और अपने चेहरे को उसके पास लाते हुए शहनाज़ के कंधे थाम लिए और मुंह को उसकी गर्दन के पास लाते हुए अपनी गर्म सांसे उसकी सुराहीदार गर्दन पर छोड़ने लगा। शहनाज पूरी तरह से मस्ती से भर उठी।

शादाब ने उसके कंधे पर अपने हाथ का हल्का सा दबाव बढ़ाया तो शहनाज की चूत में खुजली और बढ़ने लगी । शादाब ने फिर से अपना सवाल दोहराया:"

" अम्मी क्या ये मूसल इस औखलीं के हिसाब से बड़ा नहीं हैं कुछ ?

शहनाज़ अब पूरी तरह से मस्ती से बहक चुकी थी इसलिए बोली:"

" बड़ा तो जरूर हैं मेरे राजा बेटा लेकिन देख ना कैसे रगड़ रगड़ कर घुस रहा है हर बार, मसाला जल्दी कुट जाएगा!!

इतना कहकर शहनाज़ शर्मा गई और मूसल की गति थोड़ा सा बढ़ा दी जिससे उसकी चूंचियों की उछाल थोड़ी और ज्यादा होने लगी तो शादाब ने अब अपनी अम्मी के ठीक पीछे आते हुए अपने चेहरे को उसकी गर्दन पर टिकाते हुए आगे की तरफ झुका दिया जिससे शहनाज़ की उछलती हुई चूचियों और उसके मुंह में बस थोड़ा सा फासला रह गया था। शहनाज़ अपने बेटे की इस हरकत से मजे से झूम उठी और उसने अपने जिस्म को हल्का सा ढीला छोड़ दिया जिससे शादाब का खड़ा लंड उसकी कमर पर अपना प्रभाव डालने लगा तो शहनाज़ के मुंह से हल्की हल्की मस्ती भरी सिसकारियां निकल रही थीं जिन्हें वो बड़ी मुश्किल से दबा रही थी। शादाब ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए अपना मा के हाथ पर रख दिया जिससे शहनाज़ का रोम रोम कांप उठा और चूत से अमृत रस की कुछ बंदे बाहर टपक पड़ी। अब मूसल जरूर शहनाज़ के हाथ में था लेकिन शहनाज़ का हाथ अब पूरी तरह से उसके बेटे के कब्जे में था जिस पर वो हलके हलके अपनी उंगलियां फिरा रहा था और शहनाज़ की गर्दन और उसकी चूचियों के बीच पड़ती शादाब की गर्म गर्म सांसे उस पर और ज्यादा ज़ुल्म कर रही थी जिसका नतीजा ये हुआ कि शहनाज़ के हाथ पूरी तरह से कांप उठे और मूसल उससे छूट गया। शादाब धीरे से अपनी अम्मी को बोला:"
" अम्मी आपको अगर इतने बड़े मूसल से अपना मसाला कुटवाना हैं तो आपको ताकत की जरूरत पड़ेगी ताकि आप ठीक से मूसल को थाम सको।
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10-08-2020, 01:01 PM,
#20
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
अपने बेटे की बात सुनकर शहनाज़ शर्म से पानी पानी हो गई तो शादाब थोड़ा सा आगे को हुआ जिससे उसका लंड पूरी तरह से शहनाज़ की कमर से सट गया और उसने अपनी अम्मी का हाथ पकड़े हुए अपना हाथ नीचे झुकाया और शहनाज़ ने मूसल को उठा लिया। शादाब ने मूसल को तेजी से नीचे की तरफ मारा तो वो एक झटके के अंदर घुस गया, जितनी जोर से मूसल अंदर घुसा इतनी ही जोर से शादाब का लंड शहनाज की कमर पर लगा जिससे शहनाज़ के जिस्म को एक तेज झटका लगा जिससे उसकी चूचियां रबड़ की बॉल की तरह उछली और शादाब के मुंह से जा टकराई जिससे दोनो मा बेटे के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। फिर क्या था देखते ही देखते शादाब ने पूरी स्पीड पकड़ ली और बिजली की गति से मूसल अंदर बाहर होने लगा। शहनाज़ फैसला नहीं कर पा रही थी कि उसके बेटा का लंड ज्यादा ठोस हैं या मूसल क्योंकि जैसे ही लंड उसकी कमर पर लगता तो एक झटके के साथ वो आगे को झुक जाती और जैसे ही मूसल बाहर आता था तो वो शादाब के हाथ के साथ साथ थोड़ा सा पीछे को खींच जाती। जब भी मूसल अंदर की तरफ घुसता तो औखलीं से घरर घरर की आवाज निकलने लगती। शहनाज़ को लग रहा था जैसे ये धक्के औखलीं में नहीं बल्कि उसकी चूत में पड़ रहे हैं इसलिए उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और शर्म लिहाज छोड़कर अपनी एक अंगुली को अपनी जांघो के बीच में घुसा दिया और अपनी चूत को सलवार के ऊपर से रगड़ने लगी। मूसल के हर झटके पर शहनाज़ के हाथ तेजी से उपर नीचे हो रहे थे जिसका नतीजा ये हुआ कि आगे से उसके सूट का गला चरर की आवाज करते हुए फट गया जिससे उसकी काले रंग की ब्रा में कैद चूचियां पूरी तरह से खिल उठी। मूसल के शोर के कारण और मस्ती में डूबी हुई होने के कारण शहनाज़ को इसका आभास नहीं हुआ क्योंकि उसका पूरा ध्यान तो अपने कमर पर पड़ रहे अपने बेटे के लंड और औखली से निकलती हुई आवाज पर था। उसे लग रहा था जैसे ये औखली की नहीं बल्कि उसकी चूत की आवाज हैं। मसाला तो कब का कुट चुका था और हर झटके पर मसाला बाहर गिर रहा था जिसकी दोनो मा बेटे को खबर नहीं थी। अम्मी की चूचियां देखते ही शादाब सब कुछ भूलकर पूरी ताकत से मूसल को ठोकने लगा। अपने बेटी के लंड की कमर पर पड़ती मार की वजह से वो अपनी जगह से कम से कम दो फुट खिसक चुकी थी। शादाब अपनी अम्मी के कान में बहुत सेक्सी आवाज में बोला:"

" मूसल लंबा मोटा ठोस होने से कुछ नहीं होता, उससे ठोकने के लिए दम भी होना चाहिए।

अपने बेटे की बात सुनकर शहनाज़ की सांसे पूरी तरह से बेकाबू हो गई और उसने जोर से अपनी क्लिट को दबा दिया जिससे उसके मुंह से एक तेज मस्ती भरी सिसकी निकल पड़ी जिसे सुनकर शादाब ने अपनी जीभ को अपनी अम्मी की चूचियों पर फेर दिया तो शहनाज़ ने अपनी चूत को जोर से मसल दिया और उसका पूरा बदन अकड़ता चला गया और उसके मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी सिसकी निकल पड़ी

" हाय अल्लाह मर गई मैं तो, उफ्फ आह मा बचा ले मुझे एसआईआईआईआईआई आह नहीं आईआईआई हाय सीई उफ्फ

शहनाज़ का शरीर एक दम बेजान सा होकर पीछे झुक गया जिससे शादाब का मुंह पूरी तरह से अपनी अम्मी की चुचियों में घुस गया। शादाब से ये कामुक और मस्ती भरा एहसास बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने पूरी ताकत के साथ मूसल को जोर से औखली में ठोक दिया। जितनी जोर से मूसल औखलि में घुसा उससे कहीं ज्यादा जोर से शादाब का लंड आगे की तरफ आया और शहनाज़ की कमर में घुसा। शहनाज़ एक बार फिर दर्द से कराह उठी और उसने दर्द को दबाने के लिए अपने बेटे के हाथ को पूरी जोर से दबा दिया। इस धक्के के साथ ही शादाब के लंड ने अपने वीर्य की पहली बरसात अपनी अम्मी की कमर पर दी। शादाब इस एहसास से पूरी तरह से बहक गया और शादाब ने मस्ती में आकर अपनी अम्मी की चूची के उभार पर दांत गडा दिए और उसके ऊपर ढेर हो गया जिससे शहनाज़ उसके भारी भरकम शरीर का वजन नहीं झेल पाई और आगे की तरफ गिर पड़ी और शादाब भी कटे हुए पेड़ की तरह अपनी अम्मी की कमर पर गिर गया जिससे एक बार फिर से शहनाज़ के होंठो से आह निकल पड़ी।

शहनाज़ की चूत से अभी भी गर्म गर्म रस निकल रहा था और वो अपनी दोनो आंखे बंद किए हुए पूरी तरह से मदहोश पड़ी हुई थी। शादाब के लंड से निकलता हुआ वीर्य शहनाज़ की कमर को हल्का हल्का भिगो रहा था और वो अभी भी मस्ती में डूबा हुआ अपनी अम्मी की गर्दन जीभ से चाट रहा था जिससे शहनाज़ एक अलग ही मस्ती महसूस कर रही थी। थोड़ी देर के बाद जैसे ही उसकी चूत से रस टपकना बंद हुआ तो अपनी हालत का एहसास हुआ तो वो शर्म के मारे लाल हो गई और उसकी नजर औखली पर पड़ी जो कि पास में पड़ी हुई थी और उसमें से सारा मसाला कूटकर जमीन पर बिखर गया था और औखली पूरी तरह से खाली पड़ी हुई थी जिसका मूसल की मार से डिजाइन बिगड़ गया था। उसने धीरे से अपनी चूत को छुआ तो उसे एहसास हुआ कि उसकी चूत से सारा रस बहकर जमीन पर बिखर गया था और उसकी चूत औखलीं की तरह से एक दम खाली हो चुकी थीं। उफ्फ मेरा बेटा ऐसे ही मेरी चूत की भी हालत औखली की तरह बिगाड़ देगा ये सोचते ही वो एक बार फिर से कांप उठीं।

अब उससे अपने शरीर पर अपने बेटे का भारी भरकम शरीर बर्दाश्त नहीं हो रहा था इसलिए बोली:"

" बेटा हट जा मेरे उपर से मुझे बहुत वजन लग रहा है , उफ्फ कितना तगड़ा है तू!

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर उसके उपर से हट गया और जैसे ही शहनाज़ खड़ी हुई तो पहली बार उसकी नजर अपने फटे हुए सूट से बाहर झांकती अपनी ब्रा पर पड़ी जिसमे से उसके चूचियां आधे से ज्यादा बाहर झांक रही थी। शहनाज़ शर्म के मारे जमीन में गड़ गई और उसने दोनो हाथो से अपना मुंह ढक लिया और बोली:"

" उई मा, ये क्या हो गया,उफ्फ

शहनाज़ तेजी से भागती हुई अपने कमरे में घुस गई।

शहनाज़ अपने कमरे में घुस गई और शर्म के मारे उसका समूचा जिस्म पूरी तरह से हिल रहा था। उफ्फ ये क्या हो गया शादाब क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में। उसकी नजर अपनी चुचियों के उभार पर पड़ी तो उसने देखा कि उसकी चूचियां कितनी खूबसूरत और ठोस हैं इस उम्र में भी। अपनी चूचियों को ललचाई नज़रों से देखते उसका एक हाथ अपने आप उन पर पहुंच गया तो उसे महसूस हुआ कि उसकी चूचियां पूरी तरह से भीगी हुई थी तो उसे एक झटका सा लगा और धुंधला धुंधला याद आने लगा कि उसका बेटा उसकी चूचियों के बीच में अपनी जीभ फिरा रहा था। ये याद आते ही शहनाज़ की सांसे शर्म के मारे थम सी गई और उसने एक अपनी गोलाईयों को अच्छे से छूकर देखा तो उसे एहसास हुआ कि उसके बेटे ने पूरी मस्ती से अपनी जीभ से उन्हें चाटा हैं।

शहनाज़ ने जैसे ही अपनी गोलाईयों को ध्यान से देखा तो उसे एक हल्का सा निशान दिखाई दिया तो उसने हल्का सा हाथ फेरकर देखा तो उसे बहुत अच्छा मीठा मीठा दर्द महसूस हुआ। उफ्फ इस कमीने शादाब ने तो मेरी चुचियों पर अपने दांत भी गड़ा दिए हैं ये सोचकर शहनाज़ अंदर ही अंदर मुस्कुरा उठी।

शहनाज़ को अपनी कमर पर कुछ गीला गीला महसूस होने लगा तो उसका एक हाथ उत्सुकतावश उसकी कमर पर पहुंच गया तो उसने देखा कि सचमुच उसकी कमर भीगी हुई है तो उसने अपनी उंगलियों को अच्छे से अपनी कमर पर घुमाया तो उसकी उंगलियां काफी हद तक गीली हो गई और वो ये देखने के लिए कि उसकी कमर पर क्या लगा था अपनी उंगलियां अपनी आंखो के सामने लाकर देखने लगी। उफ्फ ये क्या हैं सफ़ेद सफ़ेद सा इतना गाढ़ा मेरी कमर पर कहां से लग गया। शहनाज उसे गौर से देखने के लिए थोड़ा सा और अपनी आंखो के पास लाई तो एक कस्तूरी जैसी मस्त खुशबू का एहसास उसे हुआ तो वो मस्ती से भर उठी। उफ्फ कितनी अच्छी खुशबू आ रही है इसमें से, मैं मदहोश होती जा रही हूं। अगर सूंघने से ही इतना अच्छा है तो ये कितना स्वादिष्ट होगा, उसके मन में सबसे पहले यही सवाल आया कि क्या मुझे इसका टेस्ट करना चाहिए ये सोचते ही उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई। उफ्फ पता नहीं क्या होगा ऐसे ही किसी चीज को चाटना अच्छा नहीं होगा ये सोचकर उसने अपना विचार बदल दिया। लेकिन एक बार फिर से अच्छे से सूंघने की इच्छा हुई तो उसने अपनी कमर को अपनी उंगलियों से अच्छे से रगड़ा तो उसे अपनी कमर पर दर्द का एहसास हुआ तो उसकी आंखो के आगे वो दृश्य तैर गया जब उसके बेटा का लंड औखली में घुसते मूसल के साथ उसकी कमर को ठोक रहा था। लंड के उस कठोर स्पर्श को याद करते ही शहनाज के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। कमीना कहीं का मसाले के साथ साथ मेरी कमर को भी कूट दिया। शहनाज़ अपनी बेटी की ताकत की कायल हो गई और उसने अपनी चूचियों की तरफ देखते हुए उन्हें शुक्रिया बोला क्योंकि इनका दूध पीकर ही वो इतना ताकतवर बना था।

शहनाज़ ने रेडीमेड मसाले निकाले और सब्जी बनाने के लिए किचेन में घुस गई। आज वो बहुत दिनों के बाद इतनी ज्यादा खुश थी और हल्की आवाज में मधुर गीत गुनगुनाती हुई अपना काम कर रही थी।

दूसरी तरफ शादाब अभी तक अपने पहले स्खलन के एहसास में डूबा हुआ था। उफ्फ उसे रह रह कर अपनी अम्मी की गोरी चिकनी चूचियां याद आ रही थी, उफ्फ कितनी सुंदर लग रही थी वो, अम्मी कैसे मस्ती से मेरे साथ मसाला कूट रही थी।

तभी उसे फर्श पर कुछ गीला गीला महसूस हुआ तो उसने हाथ फेर कर देखा तो उसकी उंगलियां अपनी अम्मी के रस से भीग गई। शादाब को याद आया कि यहां तो उसकी अम्मी बैठी हुई थी तो क्या ये उनके अंदर से निकला हैं। उसने सोचा उफ्फ आज मेरा भी कितना सारा दूध सा कुछ निकला हैं तो क्या अम्मी के अंदर से भी ऐसे ही निकलता हैं। उसने उंगली को अपनी नाक के पास किया और सूंघने लगा तो उसे बहुत अच्छा लगा और उसने उसे टेस्ट करने के लिए अपने मुंह में अपनी उंगली को घुसा लिया।एक खट्टे खट्टे तेज नमकीन स्वाद से आज उसका परिचय हुआ जो उसे बहुत स्वादिष्ट लगा और ज्यादा चूसने का लालच उस पर सवार हो गया। शादाब सोच रहा था कि अब अम्मी क्या सोच रही होगी मेरे बारे में!! जोर से मसाला कूटने के चक्कर में उनका सूट भी फाड़ दिया मैंने और सारे मसाले का भी सत्यानाश कर दिया। कहीं अम्मी मुझे डांटने ना लग जाए, शादाब हल्का सा डर गया और अम्मी का मूड चेक करने के लिए बाहर निकला तो उसके कानों में शहनाज़ के गीत की मधुर आवाज सुनाई पड़ी तो उसे कुछ सुकून मिला और वो वापिस अपने कमरे में आ गया और फर्श पर पड़ा हुआ मसाला साफ करने लगा।

थोड़ी देर में खाना बन गया। शादाब नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया था और जल्दी ही नहाकर बाहर आ गया और अपने कमरे में घुस गया। शहनाज़ ने खाना बनाने के बाद शादाब को आवाज लगाई तो वो डरता हुआ अपनी अम्मी के पास पहुंच गया।

उसे देखकर शहनाज भी थोड़ी शर्म महसूस कर रही थी लेकिन उसका डर देखकर उसकी हिम्मत बढ़ गई और बोली:"

" शादाब खाना बन गया है इसलिए नीचे ले जाने में मेरी मदद करो। तुम्हारे दादा दादी को खाना खिलाना हैं नहीं तो वो आवाज लगाने लगेंगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा बिल्कुल भी बेटा।

शादाब अपना मुंह नीचे किए ही आगे बढ़ा और खाना लेकर नीचे की तरफ चल पड़ा तो उसके साथ ही शहनाज़ भी गरम गरम रोटी लेकर उसके साथ ही चल पड़ी। नीचे जाकर उहोंने खाना सजा दिया तो उसके सास ससुर खाना खाने लगे। जैसे ही ससुर ने पहला निवाला खाया तो उसे एहसास हो गया कि आज आज खाने का टेस्ट कुछ अलग हैं इसलिए बोला:"

" बेटी आज खाने का टेस्ट कुछ अलग हैं इसमें से कुटे हुए मसालों की खुशबू नहीं आ रही हैं।

शहनाज़ और शादाब दोनो के दिल एक साथ धड़क उठे और उन्होंने चोर निगाहों से एक दूसरे की तरफ देखा और शहनाज़ बोली:" अब्बा दर असल वो औखली नहीं मिली थी, सफाई करते हुए याद नहीं रहा कहां रख दी थी मैंने, मैं शाम तक पक्का ढूंढ़ लूंगी और शाम को सब्जी में कुटे हुए मसाले ही इस्तेमाल करूंगी।

ससुर:" ठीक है बेटी, दर असल आदत सी बन गई हैं इसलिए उसके बिना खाना अच्छा नहीं लगता मुझे।

शादाब:" आप फिक्र ना करे दादा जी, मैं खुद अम्मी के साथ मिलकर औखली ढूंढ़ लूंगा।

शहनाज़ अपने बेटे की इस बात से बुरी तरह से लजा गई क्योंकि औखली सुनते ही उसे अपनी चूत याद आ गई। उफ्फ कमीना कैसे अपने दादा जी के आगे ही ऐसी बात कर रहा है।

शहनाज़ ने जल्दी से कहा:"
" औखली तो मिल गई थी बेटा मूसल नहीं मिला था। इसलिए मसाला नही कुट पाया था!
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