Maa Sex Kahani माँ का आशिक
10-08-2020, 01:01 PM,
#21
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
इतना बोलकर शहनाज अपने ससुर को पानी देने के थोड़ा सा आगे हुई जिससे उसके पैर टेबल के नीचे से ही शादाब के पैरो से जा टकराए तो शादाब ने एक बार अपनी अम्मी की तरफ देखा तो शहनाज़ का चेहरा शर्म से लाल होकर झुक गया।

शादाब अपनी अम्मी के पैरो को अपने पैरो से सहलाते हुए बोला:"

" अम्मी मूसल की आप फिक्र ना करे उसकी जिम्मेदारी मेरी हैं आप बस औखली तैयार रखें !

इतना कहकर उसने जोर से अपनी अम्मी का पैर दबा दिया जिससे शहनाज़ के मुंह से हल्की सी मस्ती भरी आह निकलते निकलते बची। कमीना पैर भी इतनी जोर से दबा रहा है मानो मसाला कैसे कुटेगा ये दिखा रहा हो। शहनाज़ ने अपने बेटे के पैर में हल्का सा नाखून चुभा दिया तो शादाब ने अपनी अम्मी की तरफ शिकायत भरी नजरो से देखा तो शहनाज़ पहली बार उसकी आंखो में देखते हुए बोली:"

" तेरे दादा जी को खूब तगड़ा कुटा हुआ बारीक मसाला पसंद हैं क्या तू कूट पाएगा इतना बारीक ?

अपने सास ससुर के सामने ऐसी बाते करते हुए शहनाज की हालत खराब हो चुकी थी। लेकिन वो पीछे हटने के लिए तैयार नहीं थी चाहे कुछ भी हो जाए।

" अम्मी मैं मसाले को ऐसा तगड़ा करके कूट दूंगा कि उसकी सारी धज्जियां उड़ा दूंगा, दादा जी खुश हो जाएंगे ऐसे बारीक मसाले की सब्जी खाकर। क्यों दादा जी?

इतना कहकर शादाब ने थोड़ा जोर से अपनी अम्मी का पैर दबा दिया तो उसकी चूत टप टप करने लगी। वो अपने नीचे वाले होंठ को दांतो से काट रही थीं

ससुर:" हान बेटी, मुझे अपने पोते पर पूरा यकीन हैं, ये मूसल से बहुत तगड़ा मसाला कूटेगा, बस तुम औखली को अच्छे से साफ करके तैयार कर लेना कहीं धूल ना जम गई हो !!

शहनाज बुरी तरह से तड़प उठी अपने ससुर की बात सुनकर, उफ्फ ये कहीं मुझे मेरी चूत साफ करने की सलाह तो नहीं दे रहे हैं।

दादा की बात सुनकर दादी भी मैदान में कूद पड़ी और बोली:"

" जाओ जी आप तो अपने पोते का ही पक्ष लोगे, बेटी तुम खूब टाइट टाइट मसाला डालना अपनी औखली में फिर देखती हू कैसे कूट पाएगा ये !!

उफ्फ शहनाज़ की तो जिससे बोलती बंद हो गई। ये दोनो मिलकर मुझे मेरे बेटे से चुदवाना तो नहीं चाह रहे है सोचते ही शहनाज का पूरा जिस्म मस्ती से कांपने लगा।

दादा दादी दोनो खाना खा चुके थे इसलिए वो चुपचाप बर्तन समेटकर उपर की तरफ चल पड़ी तो शादाब अपने दादा दादी के पास ही बैठ गया।

शहनाज खाना बनाते हुए पसीने से भीग गई थी इसलिए नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। उसने धीरे धीरे अपने सारे कपड़े उतार दिए और हमेशा की तरह आंखे बंद करके नहाने लगी क्योंकि उसमे अभी भी खुद को नंगा देखने की हिम्मत नहीं आई थी। इसलिए वो आराम आंखे बंद करके नहा रही थी, जैसे ही उसका हाथ उसकी चूचियों से टकराया तो उसकी उंगलियां उस जगह पर रुक गई जहां उसके बेटे के मस्ती से अपने दांत गड़ाए थे। शहनाज रोमांच से भर उठी और उस जगह को हल्के हल्के सहलाने लगी। उसका दूसरा हाथ अपनी चूत पर चला गया तो उसे अपनी सास की बात याद आ गई कि बेटी अपनी औखली को अच्छे से साफ कर लेना, ये सोचते ही उसकी सांसे रुक सी गई और उसने अच्छे से अपनी चूत पर हाथ फेरकर देखा तो उस पर कल साफ होने के कारण एक भी बाल नहीं था, मगर फिर भी उसने वीट क्रीम उठाई और फिर से अपनी चूत के आस पास लगा दिया ताकि बिल्कुल चिकनी कर सके। थोड़ी देर के बाद उसने अपने शरीर का पानी से साफ कर दिया तो उसकी चूत चांद की तरह चमक उठी। शहनाज़ ने कांपते हुए हाथो से अपनी चूत पर हाथ फिराया और एक दम चिकनी पाकर खुशी के मारे उसके मुंह से हल्की सी आह निकल गई और अपने बदन को टॉवल से साफ करने लगी।

नीचे शादाब अपने दादा दादी के पास बैठा हुआ था और उनसे बात करने लगा।

शादाब:" और बताए दादा जी कुछ, क्या आपका मन लग जाता हैं घर में लेटे हुए पूरे दिन?

दादा के मुंह पर एक दर्द भरी टीस साफ दिखाई दी और उन्होंने भावुकता के साथ बोलना शुरू किया :" हान बेटा, थोड़ी दिक्कत तो होती हैं लेकिन क्या करे अब जिस्म में ताकत नहीं रही पहले जैसी इसलिए जब कभी ज्यादा दिल करता है तो लाठी के सहारे थोड़ा घूम आता हूं!!

शादाब को अपने दादा जी की पीड़ा का अनुभव हुआ और वो उनका हाथ प्यार से सहलाने लगा जिससे दादा दादी दोनो भावुक हो गए और उन्हें लगा कि उनका अपना बेटा वापिस लौट आया हैं।

दादी:" बेटा बस तेरे आने से थोड़ी हिम्मत बढ़ गई है इसलिए अब अच्छा लगता है कुछ। बस हमारी खुशियों की किसी की नजर ना लगे।

दादा जी:" हान बेटा, हमने बेटा बहुत बुरे दिन देखे हैं सबने जिसका तुझे अंदाजा भी नहीं हैं, खासतौर से तेरी अम्मी शहनाज़ ने तो अब तक ज़िन्दगी में बस दुख ही उठाए हैं।

दादी दादा जी की बात सुनकर सिसक उठीं और उसकी आंखो से आंसू की एक बंद छलक आई जिसे शादाब ने आगे बढ़कर साफ किया और बोला:"

" क्या हुआ दादी आपकी आंखो में आंसू ?

दादी:" बस बेटा तेरी मां के बारे में सोच कर आंसू निकल पड़े। बेचारी जैसे दुख उठाने के लिए ही पैदा हुई है। छोटी सी थी तो मा गुजर गई और बाप ने दूसरी शादी कर ली और सौतेली मा ने बेचारी को एक पल के लिए भी चैन नहीं लेने दिया, ज़ुल्म पर ज़ुल्म करती रही और उसका पढ़ना भी बंद हो गया!!

दादी उम्र ज्यादा होने के कारण इतना बोलकर सांस लेने के लिए रुकी तो उसने देखा कि शादाब उसकी बाते ध्यान से सुन रहा हैं।
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10-08-2020, 01:01 PM,
#22
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
दादी उम्र ज्यादा होने के कारण इतना बोलकर सांस लेने के लिए रुकी तो उसने देखा कि शादाब उसकी बाते ध्यान से सुन रहा हैं।

शादाब के दिल में अपनी अम्मी के लिए प्यार उमड़ पड़ा और भावुक होते हुए बोला:" फिर क्या हुआ दादी ?

दादी की आंखे फिर से नम हो गईं और अपने आंसू को थामते हुए भारी गले के साथ बोलना शुरू किया :" बेटा फिर तेरी अम्मी की छोटी सी उम्र में ही शादी हो गई और वो दुल्हन बनकर हमारे घर में आ गई, तेरे बाप ने भी कभी उसकी कद्र नहीं करी लेकिन इस बेचारी ने कभी एक शब्द नहीं बोला और अपने आपको किस्मत के सहारे छोड़ दिया, लेकिन जैसे अभी ज़ुल्म की इंतहा बाकी थी इसलिए एक दिन तेरा बाप भी इसे भरी जवानी में बेवा बनाकर इस दुनिया से चला गया। जब तू इसके पेट में था बेटे, मैंने और तेरे दादा जी ने बहुत कोशिश करी कि इसकी दूसरी शादी कर दी जाए लेकिन इसने साफ मना कर दिया कि अब वो इस घर को छोड़कर कहीं नहीं जाएगी क्योंकि मेरा बिना आप दोनो का कोई सहारा नहीं है।

इतना कहकर दादी की सांसे उखड़ने लगी तो दादी फिर से सांसे लेने के लिए रुकी तो उसने देखा कि शादाब की आंखो से भी आंसू निकल रहे थे जिन्हें उसने साफ किया और बोलना शुरू किया:"

" बेटा इस बेचारी ने हमारी खूब मन लगाकर सेवा करी, भरी जवानी में भी इसने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे घर की इज्ज़त खराब हो बेटा। हमारी सगी बेटी रेशमा भी शादी के बाद बदल गई और हमसे मुंह मोड़ लिया लेकिन तेरी मा ने कभी हमे बेटी की कमी महसूस होने नहीं दी और एक बहु बेटी सब का फ़र्ज़ उसने निभाया। जब तू छोटा सा था तो उसने गांव की भलाई के लिए तुझे शहर भेज दिया और अकेले में घुट घुट कर रोती रही लेकिन कभी उफ्फ तक नहीं की, उसने अपनी ममता का पूरी तरह से गला घोट दिया।

शादाब की हिम्मत जवाब दे गई और वो अपने दादा जी के गले लगकर फफक पड़ा तो दादा जी ने उसे सहारा दिया और बोले:"

" बेटा अगर आज हम दोनों जिंदा हैं तो बस तेरी मा की वजह से हैं, उसके एहसान हम कभी नहीं भूल सकते बेटा।

दादी अपने दोनों हाथों को जोड़ते हुए बोली:" बेटा बस तुझसे एक गुज़ारिश हैं कि हम दोनों का तो पता नहीं कब तक जिए इसलिए तू हमेशा अपनी मा का ख्याल रखना बेटा ।

दादा जी:" हान बेटा, अब बस तू ही उसका एकमात्र सहारा हैं, इसलिए बेटा कभी उसकी आंखो में आंसू मत आने देना। कभी भूलकर भी उसका दिल मत दुखाना मेरे बच्चे।

शादाब ने अपना चेहरा उपर उठाया जो कि पूरी तरह से आंसुओ से भीगा हुआ जिससे दादा जी का कुर्ता भी गीला हो गया था, दादी दादा दोनो अपने बेटे के चेहरे को साफ करने लगे तो शादाब उनका इतना प्यार देख कर फिर से सिसक उठा। बार बार उसकी आंखो के आगे उसकी मा का मासूम चेहरा घूम रहा था। उफ्फ मेरी मा तो त्याग की देवी हैं और उसके दिल में अपनी मम्मी के लिए इज्जत और प्यार बहुत ज्यादा बढ़ गया।

दादी उसके बालो में उंगलियां निकालते हुए बोली:"

" बेटा संभालो अपने आप को तुम, तुम तो मेरे बहादुर बेटे हो ऐसे बच्चो कि तरह नहीं रोते।

शादाब ने बड़ी मुश्किल से अपने आंसू रोके और मन में एक आखिरी निर्णय किया और अपने दादा दादी के सिर पर हाथ रख कर बोला:"

" आप दोनो की कसम, मैं अपनी अम्मी को कभी किसी तरह की दिक्कत नहीं आने दूंगा, अपने आपसे ज्यादा उनका ख्याल रखूंगा।

अपने पोते की बात सुनकर दोनो की आंखे खुशी के मारे छलक उठी और दादी बोली:"

" बस अब रोना बंद कर मेरे बच्चे और जा उपर जाकर खाना खा ले तेरी मा भूखी होगी, वो तेरे बिना खाना नहीं खाएगी बेटा!

शादाब ने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला और उपर की तरफ चल दिया। बाथरूम के अन्दर घुसी शहनाज़ अब बाहर निकल रही थी जिसने अपने जिस्म पर सिर्फ एक लाल रंग का टॉवेल बांधा हुआ था वो बाथरूम से बाहर निकल गई।

जैसे ही दोनो की नजरे टकराई तो शादाब को अपने अम्मी में अब त्याग और समर्पण की मूर्ति नजर आई और बहुत प्यार के साथ उन्हें देखने लगा। शहनाज़ के दोनो कंधे बिल्कुल नंगे थे जिन पर उसके काले घने बाल बिखरे हुए थे और बालो से टपकती पानी की बूंदे उसकी खूबसूरती को पूरी तरह से निखार रही थी। काले बालों में बीच में उसका खूबसूरत चेहरा ऐसे लग रहा था मानो बादलों के बीच से चांद निकल आया हों। अपने बेटे को देखकर उसे बड़ी शर्म महसूस हुई और उसके गाल एक दम गुलाबी हो उठे। उसने एक हाथ से कसकर टॉवल को पकड़ लिया और अपने बेटे की तरफ देखा जो पूरी तरह से खोया हुआ सिर्फ उसे ही देख रहा था। शहनाज ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए उसे बोली:

" जाओ बेटा अपने कमरे में जाओ, मुझे अपने कमरे में जाना हैं , जल्दी जाओ।

अपनी अम्मी की बात सुनकर शादाब जैसे नींद से जागा और बिना कुछ बोले अपने कमरे में घुस गया। शहनाज़ ने उसके जाने के बाद राहत की सांस ली लेकिन अपने बेटे का ऐसे बिल्कुल भावहीन चेहरा देख कर उसे हैरानी हुई और वो अपने कपड़े पहनने लगीं। जल्दी ही वो बाहर आ गई और दोनो मा बेटे खाना खाने लगे। शादाब ने खाने का एक निवाला बनाया और अपनी अम्मी के मुंह की तरफ बढ़ा दिया तो शहनाज़ ने अपना मुंह खोलते हुए निवाला अंदर ले लिया और खाते हुए कहा:"

" क्या बात हैं आज अपनी अम्मी पर बड़ा प्यार आ रहा हैं मेरे बेटे को ??

शादाब एकटक अपनी अम्मी की तरफ प्यार भरी नजरो से देख रहा था जिनमें वासना नाम के लिए भी नही थी। शहनाज अपने बेटे की आंखो में झांकने लगी। खुदा ने औरत के अंदर ये गजब की ताकत दी है कि वो अपनी तरफ देखने वाली हर नजर को बड़ी सफाई से पहचान लेती है। शहनाज़ को अपने बेटे की आंखो में अपने लिए प्यार और सिर्फ प्यार नजर आ रहा था। इसलिए जैसे ही अगली बार शादाब ने खाने का निवाला उसकी तरफ बढ़ाया तो शहनाज़ ने निवाले के साथ साथ उसकी उंगली में हल्का सा काट खाया जिससे शादाब के होंठो पर पहली बार स्माइल आ गई और बोला:"

" अम्मी लगता हैं आप बहुत भूखी है, खाने के साथ साथ मेरी उंगली भी खा जाएगी क्या!!

शहनाज को अपने बेटे के चेहरे पर स्माइल देख कर खुशी हुई और बोली:"

" बेटा तूने जब मुझसे इतनी ज्यादा मेहनत कराई हैं तो भूख तो जोर से लगनी ही थी।

शादाब पूरी तरह से अपनी अम्मी की बात नहीं समझ पाया और बोला:" अम्मी मैंने तो आपसे कोई मेहनत नहीं कराई, आप ही बताए।
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10-08-2020, 01:01 PM,
#23
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शहनाज़ को अपने बेटे के भोलेपन पर तरस आ गया और उसके थोड़ा करीब होते खाने का निवाले बनाकर उसके मुंह में डालते हुए बोली:"

" भूल गया मेरा राजा बेटा, इतनी मेहनत जो कराई तूने मसाला कूटने में अपनी मा से !!

शहनाज ने बड़ी मुश्किल से ये बात कहीं और कांपने लगी। शादाब का भी चेहरा लाल हो गया और बोला :"

" मुझसे गलती हो गई, आगे से मैं ध्यान रखूंगा, आराम से मसाला कूट दूंगा !!

शहनाज़ अपने बेटे के इस बदले हुए रुख को देखकर थोड़ा हैरान हुई और उसे छेड़ते हुए उसके कान के पास धीरे से बोली:"

" बेटा मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा, जब तेरे पास इतना बड़ा मूसल हैं तो उससे तो ऐसे ही जोर जोर से औखली को ठोकना चाहिए !!

शहनाज़ ने जान बूझकर मसाला नहीं बल्कि सीधे औखली बोल दिया जिससे शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर थोड़ा खुश हुआ और बोला:" अम्मी क्या फिर से आप मेरे साथ मसाला कुटना चाहोगी?

शहनाज़:" नहीं बिल्कुल नहीं, अगर मैं तेरे साथ ऐसे ही मसाला कूटने लगी तो तू तो दो चार दिन में ही मेरे सारे कपड़े फाड़ देगा!!

शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से बोला और शर्म से लजा गई। शादाब ने अपनी अम्मी की तरफ देखा और बोला

" आपका ये दोस्त आपके लिए कपड़ों की लाइन लगा देगा एक से बढ़कर एक मॉडर्न कपडे, आप बस मसाला कूटने के लिए हान तो करो?

दोनो बात करते हुए खाना भी खाते जा रहे थे। अपने बेटे की बात सुनकर अवाक रह गई और बोली:" ना बेटा, रोज एक सूट फटेगा तो कितना ज्यादा खर्च बढ़ जाएगा हमारा ?

शादाब तो जैसे इसके लिए पहले से ही तैयार था इसलिए बोला:"

" अम्मी अगर आप थोड़े ढीले कपडे पहनोगी तो सूट फटने से बच जाएगा।

शहनाज़ को जैसे ही अपनी बेटे की बात का मतलब समझ आया तो जैसे शर्म के मारे हालत खराब हो गई और वो अपने दांत निकालते हुए अपने बेटे को मारने के लिए बढ़ी तो शादाब उसकी तरफ जीभ निकालता हुआ भाग उठा। शहनाज़ उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़ पड़ी।

शादाब कमरे में घुस गया और गेट बंद करने लगा तो शहनाज ने तेजी से अपना पैर गेट में फसा दिया क्योंकि वो जानती थी कि उसका बेटा चाह कर उसे चोट नहीं पहुंचा पाएगा। शादाब ने जैसे ही अपनी अम्मी के पैर को दरवाजे में देखा तो उसने गेट पर से हाथ हटा दिया और शहनाज़ मौके का फायदा उठाकर अंदर घुस गई और शादाब को पकड़ लिया और उसे बेड पर गिराकर उसके उपर चढ़ गई और बोली :"

" अब बता ना क्या बोल रहा था शैतान मुझे ?

शहनाज भगाकर आई थी जिससे उसकी सांसे तेज होने के कारण चूचियां उपर नीचे हो रही थी जिन्हे देखकर शादाब मुस्कुरा दिया तो शहनाज़ की नजर अपने चूचियों पर पड़ी तो उसका चेहरा एक बार फिर से लाल हो उठा।

शहनाज ने अपने बेटे के एक हाथ को पकड़ लिया और दूसरे हाथ को उसकी आंखो पर रख दिया और बोली:"

" बेटे ऐसे मत देख मुझे, शर्म आती हैं मेरे राजा बेटा,

शादाब अपनी अम्मी की बात पर मुस्कुरा दिया और उसका हाथ फिर से सहलाने लगा जिससे शहनाज़ की सांसे एक बार फिर से उखड़ने लगी और उसकी चूचियां अपने बेटे के सीने में घुसने लगी। शादाब इस एहसास से तड़प उठा और उसने अपनी अम्मी से हाथ छुड़ाकर उसकी कमर पर रख दिया और जोर से अपनी तरफ खींचा तो शहनाज के मुंह से एक दर्द भरी आह निकल पड़ी और उसका हाथ उसके मुंह पर से हट गया।

शादाब अपनी अम्मी को दर्द में देख कर परेशान हो गया और बोला:" क्या हुआ अम्मी? आपको दर्द हुआ क्या ?

शहनाज़ की कमर पर शादाब ने उस जगह दबा दिया था जहां पर लंड ने अपना जोर दिखाया था, वो जगह लाल होकर सूज गई थी जिससे शहनाज को दर्द हुआ था। शर्म के मारे वो दोहरी हो गई अब अपने बेटे को कैसे बताए!!

शादाब ने हाथ की प्यार से उसकी कमर पर फेरा तो उसकी सूजी हुई कमर का एहसास हुआ तो डर के मारे बोला:"

" अम्मी प्लीज़ बताओ ना कैसे हुआ ये सब?
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10-08-2020, 01:02 PM,
#24
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शहनाज़ ने अपने बेटे की बेटे सुनकर शर्म से अपना मुंह उसकी छाती में छुपा लिया और उसके एक हाथ को पकड़ लिया। शादाब अपनी अम्मी की हालत समझते हुए बोला:" अम्मी प्लीज़ बताओ ना आप मुझे, कैसे हुआ ये सब ?

शहनाज़ उसके कान में धीरे से बोली :" उफ्फ बेटा कैसे बताऊं तुझे, मुझे बहुत शर्म आती है

शादाब बोला: " अम्मी बेटा नहीं एक दोस्त समझ कर ही बता दो आप मुझे,!

शहनाज़ ने उसके हाथ पर अपने हाथ से थोड़ा ज्यादा दबाव बढ़ाते हुए कहा"

" वो बेटा तूने मसाले के साथ साथ म म म री !!!

शहनाज शर्म के मारे इससे आगे नहीं बोल पाई तो शादाब अपनी अम्मी के बालो में प्यार से उंगली फिराने लगा तो शहनाज भावनाओ में बह गई और एक झटके के साथ बोल पड़ी:"

" बेटा तूने मसाले के साथ साथ मेरी कमर को भी कूट दिया था !

इतना कहकर शहनाज ने अपने बेटे का मुंह चूम लिया और उसके अपने एक हाथ से अपना चेहरा फिर से ढक लिया। शादाब को सब कुछ समझ में आ गया और उसका लंड खड़ा हो गया जिसका एहसास शहनाज़ को अपनी जांघो पर हुआ और चेहरा लाल सुर्ख होकर दहकने लगा।, उसने अपनी अम्मी को शरमाते हुए देखकर थोड़ा मजा लेने की सोची और बोला:"
" आपकी कमर को कैसे कूट दिया मूसल तो औखली में था और मसाला कूट रहा था।

शहनाज ने एक बार अपने बेटे की तरफ देखा तो उसे अब सिर्फ अपने सपनों का शहजादा नजर आया और वो पूरी तरह से बहक गई और बोली:"

" जरूर तेरे पास कोई दूसरा मूसल रहा होगा जिससे तूने मेरी कमर कूटी हैं! बता ना क्या तेरे पास नहीं था?

शादाब का लंड अपनी अम्मी की बात सुनकर अपनी औकात पर आ गया एक तेज झटके के साथ उसकी जांघो में जा लगा जिससे शहनाज़ के मुंह से फिर से एक दर्द भरी आह निकल पड़ी।

शादाब सब कुछ जानता था इसलिए उसका गाल चूमते हुए बोला:* क्या हुआ अम्मी फिर से मूसल चुभ गया क्या?

शहनाज़ की आंखे एक दम वासना से लाल हो उठी और उसके चेहरे के भाव बिगड़ने बनने लगे और उसने एक बार अपनी टांगो को थोड़ा सा लंड पर दबा दिया तो लंड किसी सांप की तरह फुफकारते हुए झटके मारने लगा जिससे शहनाज़ का मुंह फिर से मस्ती से खुल उठा

" आह राजा ये मूसल तो औखली वाले मूसल से भी ज्यादा खतरनाक हैं, उफ्फ कितना ठोस हैं ये, ये तो अपने आप ही झटके मार मार कर मेरी जांघों को कूट रहा है; हाय मेरे राजा कहां से लाया तू ये करामाती मूसल ??

शादाब अपनी अम्मी की मस्ती भरी बाते सुनकर जोश में आ गया और अब थोड़ा जोर से लंड के झटके मारने लगा तो शहनाज़ ने पूरी तरह से अपने जिस्म पर से काबू खोते हुए अपने बेटे के हाथ को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया और उसके शहनाज के जिस्म को अपने आप मस्ती से झटके लगने लगे जिससे उसका जिस्म हिलने लगा और उसका जिस्म थोड़ा सा ऊपर खिसक गया जिससे अब उसकी चूत लंड के ठीक ऊपर थी और लंड के झटके उसकी चूत पर पड़ रहे थे।

शहनाज़ की मस्ती भरी सिसकारियां अब कमरे में गूंज रही थी और शादाब पूरी मस्ती से उसके गाल चूम रहा था। शादाब ने एक हाथ को उसकी कमर पर से नीचे की तरफ लाते हुए जैसे ही उसकी गांड़ पर रखा तो शहनाज़ का समूचा जिस्म मस्ती से भर उठा। उफ्फ मेरे बेटे के चौड़े चौड़े हाथ मेरी गांड़ पर हैं ये सोचकर वो अपनी सब लाज शर्म त्याग कर अपने बेटे की गर्दन चाटने लगी।

शादाब ने भी जोश में आते हुए अपनी अम्मी की भारी भरकम उभरी हुई गांड़ को अपने चौड़े हाथो में भर लिया। शहनाज़ की मस्ती का अब कोई ठिकाना नहीं था, उसकी मोटी गांड़ पूरी तरह से उसके बेटे के हाथो मे भर गई थी तो शहनाज़ को यकीन हो गया कि उसकी गांड़ सिर्फ उसके बेटे के लिए ही बनी हैं और शहनाज़ के लिए तो जैसे ये सपने के साकार होने जैसा था । जैसे ही शादाब ने अपनी अम्मी की गांड़ को पहली बार दबाया तो शहनाज़ के मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी आह निकल पड़ी और उसने अपनी चूत को जोर से लंड पर दबा दिया और एक बार फिर से झड़ती चली गई। शादाब भी अपनी अम्मी की चूत की पहली रगड़ लंड पर बर्दाश्त नही कर पाया और उसके लंड ने एक बार फिर से अपना लावा उगल दिया। दोनो मा बेटे ने एक दूसरे को पूरी तरह से कस लिया और अपनी सांसे दुरुस्त करने लगे।

जैसे ही शहनाज़ की सांसे नॉर्मल हुई तो उसे शर्म का एहसास हुआ और अपने बेटे का मुंह चूमते हुए उठकर अपने कमरे में घुस गई।

शहनाज अपने कमरे में अा गई और उसकी सांसे अभी तक तेजी से चल रही थी। वो सोचने लगी कि मुझे पता नहीं क्या हो जाता हैं जब मैं शादाब को हाथ लगाती हू। कैसे नशा , कैसी मदहोशी हैं उसके स्पर्श में कि मेरा रोम रोम महक जाता हैं, काश ये मेरा बेटा ना होता तो मैं कब की मर मिटी होती इस पर। ये सोचते ही उसके होंठो पर मुस्कान अा गई और खुद से ही बाते करते हुए बोली कि मैं तो उसके उपर मर मिटी ही चुकी हूं, बस मेरे अंदर की मा मुझे कभी कभी मुझ पर हावी हो जाती है। ये सब सोचते हुए उसे नींद आने क्योंकि उसका तपता हुआ जिस रात से दो बार ठंडा हो चुका था इसलिए बिस्तर पर गिरते ही उसकी आंख लग गई।

दूसरी तरफ शादाब को अपने उपर हैरानी हो रही है कि अपनी दादा दादी जी की बात सुनकर निस देवी की वो इबादत करने की सोच कर रहा था, उसके साथ फिर से बहक गया। तभी उसे अपनी अम्मी की बाते याद आने लगी तो उसे एहसास कि बहकने में सिर्फ उसकी अकेले की गलती नहीं है शायद मेरी अम्मी को भी ये सब अच्छा लग रहा है इसलिए मेरे साथ ऐसी बाते करती है। लेकिन कुछ भी हो मेरी अम्मी शहनाज हैं बहुत खूबसूरत, एक दम किसी किसी परी की तरह जो किसी के भी सपनो की शहजादी हो सकती है। इस उम्र में भी इतनी सुंदर लगती है कि कुंवारी लड़कियां भी उन्हें देख कर पानी मांग उठें। आपको आपको अम्मी में इतना फिट रखा हैं कि उनकी उम्र 30 साल के ही आस पास लगती हैं, एक दम कसा हुआ बदन, उफ्फ चूचियां कितनी ठोस थी मानो बहुत ज्यादा फुरसत से बनी हो। इन्हीं विचारों में खोया हुआ शादाब अपने कमरे से बाहर निकल आया तो उसने देखा कि उसकी अम्मी गहरी नींद में सो रही हैं और उनका चांद सा सुंदर चेहरा चमक रहा हैं तो ना चाहते हुए भी उसके कदम अपनी अम्मी के कमरे में घुस गए। शहनाज़ उल्टी लेटी हुई थी और उसकी गांड़ पूरी तरह से उभरी हुई और उसके काले लम्बे बाल उसके जिस्म पर फैले हुए थे।

शादाब अपनी अम्मी के पास पहुंच गया और उनके चेहरे को देखते हुए खुद पर से काबू खो बैठा और अपनी अम्मी का माथा चूम लिया। जैसे ही शादाब के होंठो का एहसास शहनाज़ को हुआ तो उसकी नींद टूट गई और आंखे बंद किए हुए ही लेटी रही। शादाब ने अपना चेहरा थोड़ा नीचे लाते हुए अपनी अम्मी के गाल को चूम लिया और बहुत धीरे से बुदबुदाया :" अम्मी आप दुनिया की सबसे अच्छी अम्मी हैं, आपका बेटा आपसे बहुत प्यार करता है।!!
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10-08-2020, 01:02 PM,
#25
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
इतना कहकर उसने फिर से एक बार अपनी अम्मी का गाल चूम लिया और एक हसरत भरी नजर उसके चेहरे पर डालते हुए अपने कमरे में लौट आया और सोने लगा। शहनाज़ अपनी बेटे की इस हरकत से पूरी तरह से अपने बेटे की दीवानी हो गई क्योंकि उसका बेटा चाहता तो उसे नींद में सोचकर उसके होंठ भी चूम सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया! सचमुच मेरा बेटा करोड़ों में एक हैं ये सब सोचते हुए शहनाज़ भी गहरी नींद में चली गई।

कमर में सूजन होने के कारण शहनाज़ थोड़ा देर तक सोती रही और कोई 6 बजे के आस पास उसकी आंखो खुली तो वो अपने आंखे मलती हुई कमरे से बाहर निकल अाई तो उसने देखा कि शादाब ने मसाला कूट कर रख दिया और सब्जी भी काट दी थी और आटा गूथने के लिए हल्का गर्म पानी भी रख दिया था शहनाज की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। वो अपने बेटे के कमरे में गई तो देखा कि वो अपनी पढ़ाई कर रहा था।
शहनाज़ को देखते ही उसने एक स्माइल दी तो शहनाज़ ने उसके पास बैठ गई और उसके बालो में उंगली फिराने लगी तो शादाब अपनी अम्मी के थोड़ा और करीब खिसक कर उससे सट गया।

शहनाज़ :" बेटा क्या बात हैं घर के काम सीख रहा हैं सब, तुझे किसने बोला था ये सब करने के लिए मेरे बच्चे ?

शादाब अपनी अम्मी की तरफ देखते हुए:" अम्मी मैं आपका दोस्त हूं , इसलिए मेरा फ़र्ज़ बनता हैं कि आपकी मदद करूं और मैं अब बच्चा नहीं रहा, बड़ा हो गया हैं अम्मी !!

शहनाज़ को अपने बेटे को छेड़ने का बहाना मिल गया:"

" मैं भी तू देखू मेरा बेटा कहां से बड़ा हो गया हैं, मुझे तो अभी भी बच्चा ही लगता है।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर जोश में अा गया क्योंकि बात उसके स्वाभिमान पर अा गई थी इसलिए बोला:"

" अगर आप मेरी अम्मी ना होती तो मैं आपको जरूर बताता कि मैं कहां से कितना बड़ा हो गया हूं।

शहनाज अपने बेटे की बात सुनकर शर्मा उठी और बोली:"

" धत तेरी की, बदतमीज कहीं का, कोई अपनी अम्मी से ऐसे बात करता हैं क्या ?

शादाब अम्मी का हाथ पकड़ते हुए बोला:"
" अब आप मेरी दोस्त हूं अम्मी नहीं, इसलिए इतना मजाक तो चलता है ना दोस्त ?

शहनाज अपने बेटे की चालाकी पर मुस्कुरा उठी और बोली:"

" तू ना सचमुच बहुत चालाक हो गया है, दोस्ती के बहाने अपनी अम्मी को बिगाड़ना चाहता है !!

हालाकि शहनाज़ ने ये बाते सिर्फ उससे मजाक में कही थी लेकिन शादाब के दिल में किसी तीर की तरह चुभ गई और उसकी आंखो में पानी अा गया और वो बिना कुछ बोले कमरे से बाहर निकल गया। शहनाज़ को एहसास हुआ कि उसने गलती से अपनी बेटे पर इल्ज़ाम लगा दिया हैं तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने तेजी से बाहर निकलते हुए आगे बढकर शादाब का हाथ पकड़ लिया और बोली:"

" माफ नहीं करेगा अपनी दोस्त को मेरे राजा ? गलती हो गई मुझसे, मेरा वो मतलब नहीं था।

शादाब ने एक बार अपने चेहरे को उपर उठा कर अपनी अम्मी की तरफ देखा तो शहनाज़ को उसकी आंखो में आंसू साफ दिखाई दिए और एक झटके के साथ अपना हाथ छुड़ाकर बाहर चला गया। शहनाज़ का दिल टूट सा गया, उसने अपने बेटे को आवाज लगाई लेकिन उसने एक बार भी पीछे मुड कर नहीं देखा और सीढ़ियों से नीचे उतर गया तो उसकी नजर उसके दादा दादी पर पड़ी जिन्हे देखते ही उसने सलाम किया तो दादा सलाम लेकर बोले:"

" बड़ी जल्दी में हो, कहीं जा रहे हो क्या बेटा ?

शादाब को एक पल के लिए तो कुछ नहीं सूझा मगर जल्दी है बोल उठा:" बस दादा जी सोच रहा था थोड़ा बाहर घूम आऊ!

दादा जी थोड़ा खुश होते हुए:"
" ठीक है बेटा, अच्छा हैं घूम लो देख लो गांव को ठीक से, फिर बाद में तो घूम ही नहीं पाओगे,
अच्छा बेटा एक काम करना बाहर शर्मा जी की दुकान से मेरे लिए गुलाब जामुन लेते आना !!

इतना कहकर दादा जी ने कुछ पैसे उसकी तरफ बढ़ाए तो शादाब ने लेने से मना कर दिया और बोला:"
" मेरे पास पैसे हैं दादा जी, आप रहने दीजिए।

दादा जी:" कोई बात नही बेटा, पहली बार तेरे दादा जी कुछ से रहे हैं तो मना नहीं करते।

शादाब ने पैसे ले लिए और दादी से बोला:"
" आपके लिए भी कुछ लेकर आना हैं क्या दादी जी ?

दादी:" बेटा अब मुझ में दांत नहीं है तो क्या कुछ खा पाऊंगी, बस गुलाब जामुन ही लेते आना, तेरे दादा जी की तरह मैं भी चूस चूस कर ही खा लूंगी!!

इतना कहकर उसने अपनी पति की तरफ देखा और दोनो एक साथ मुस्कुरा दिए। शादाब भी उनके साथ हल्का सा मुस्कुरा दिया और उसे सच में बुढ़ापे की पीड़ा का अनुभव हुआ। भारी मन के साथ वो बाहर की तरफ निकल गया और एक पार्क में जाकर बैठ गया।

शादाब को अपनी अम्मी याद आने लगी तो उसे उनकी बड़ी फिक्र होने लगी। तभी उसे अपनी अम्मी की बाते याद अाई कि तू अपनी अम्मी को बिगाड़ना चाह रहा हैं तो उसका दिल फिर से उदास हो गया। अम्मी को ऐसा नहीं बोलना चाहिए मैंने तो उनकी कितनी मदद करी थी मसाला भी कूट दिया था और सब्जी काट कर पानी भी गर्म कर दिया था। अम्मी को ये सब समझना चाहिए था लेकिन उन्होंने मुझ पर इतना बड़ा इल्ज़ाम लगा दिया एक बार भी नहीं सोचा कि मैं तो उनका अपना खून हूं क्या मैं उनके बारे में ऐसा सोच सकता हूं।

अपने खून शब्द के ध्यान में आते ही शादाब को एक झटका सा लगा। अम्मी भी तो मेरा अपना ही खून हैं क्या मैंने जो उनके साथ किया वो सही है । बेशक उनसे गलती हुई है लेकिन वो तो माफी भी मांग रही थी मुझसे साथ साथ ही, मैंने उनके साथ कई बार गलती करी, गाल पर जोर से काट दिया, सीने पर दांत गडा दिए, जोश में उनका सूट फाड़ दिया, उफ्फ मसाले के साथ साथ कमर कूट दी लेकिन उन्होंने तो मुझे हमेशा माफ कर दिया। नहीं मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, इससे अम्मी को दुख होगा और मैं अपनी अम्मी को दुखी नहीं देख सकता क्योंकि मैंने तो उन्हें हमेशा खुश रखने का वादा किया हैं अपने दादा दादी के साथ।

ये सब विचार मन में आते ही वो उसने अम्मी को कॉल करने के लिए मोबाइल निकाला तो देखा कि उसकी अम्मी की दस से ज्यादा कॉल अाई हुई थी और फोन साइलेंट होने की वजह से उसे पता नहीं चल पाया।

उसने देखा कि एक संदेश भी था तो उसने मैसेज को ओपन किया और पढ़ने लगा !

" बरसो बाद मैंने अपने दोस्त की वजह से मुस्कुराना सीखा था, हर ग़म भुला कर खुशियों को गले लगाना सीखा था, एक तेरे सहारे ज़िन्दगी कोई चांदी सोना नहीं चाहती, लौट आओ फिर से मेरे राजा मैं तुम्हे खोना नहीं चाहती।
कुबूल करूंगी हंस कर हर सजा तुम खुशी से जो भी दोगो
नहीं तो ज़िन्दगी भर पछताओगे जब मेरा मरा हुआ मुंह देखोगे।

प्लीज़ लौट आओ बेटा

तुम्हारी दोस्त
नाज

शादाब ने जैसे ही अपनी अम्मी का मैसेज पढ़ा तो वो बुरी तरह से डर गया और अम्मी को वापिस कॉल किया जो शहनाज ने नहीं उठाया तो शादाब एक के बाद एक लगातार कॉल करने लगा लेकिन कोई उत्तर ना पाकर वो उसकी आंखे नम हो गईं और वो अपने दादा दादी के गुलाब जामुन भी भूल कर तेजी से वापिस घर की तरफ दौड़ पड़ा।
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10-08-2020, 01:02 PM,
#26
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शहनाज़ पूरी तरह से टूट चुकी थी और जब उसके बेटे ने बार बार कॉल करने के बाद भी फोन नहीं उठाया तो उसका दिल बैठ गया और सब्जी बनाने के लिए किचेन में घुस गई ताकि दादा दादी जी को खाना मिल सके।

शादाब घर के अंदर घुस गया तो दादा दादी को देखा और उनसे पहले खुद ही बोल पड़ा:"

" माफ करे दादा जी मुझे काफी ढूंढने के बाद भी दुकान नहीं मिली लेकिन कल मैं आपको पक्का ला दूंगा।

दादा और दादी थोड़ा सा उदास हुए और बोले:"

" कोई बात नहीं बेटा, तुम गांव में रहे ही कहां हो, शायद इसलिए तुम्हे दुकान नहीं मिल पाई, कल तुम ला देना।

शादाब :" ठीक हैं दादा जी,

इतना कहकर शादाब तेजी से दौड़ता हुआ उपर की तरफ चल दिया और अपनी अम्मी को उसके कमरे में देखा तो नहीं मिली, अपने कमरे में देखा नहीं मिली तभी उसे किचेन से खाना बनने की आवाज सुनाई दी तो किचेन की तरफ चल पड़ा। उसने देखा कि उसकी अम्मी रोटी बना रही थी और आंखे पूरी तरह से भीगी हुई थी। शादाब से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो आगे बढ़ा और पीछे से अपनी अम्मी को बांहों में भर लिया और उनके आंसू साफ करने लगा

शहनाज़ अपने बेटे का स्पर्श महसूस करते ही सब कुछ भूलकर पलटी और एक दीवानी की तरह उससे लिपट गई।

शादाब भी अपनी अम्मी से लिपट गया
शादाब की आंखो से भी आंसू निकल पड़े और अपनी अम्मी के खूबसूरत चेहरे को हाथो में भर कर बोला:"

" अम्मी बस चुप हो जाइए आप, माफ कर दो मुझे, आपका बेटा अब कभी आपसे नाराज नहीं होगा ये आपके दोस्त का वादा हैं।

शहनाज़ ने उसका माथा चूम लिया और बोली :"

" गलती मेरी ही है बेटा, मुझे तुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था लेकिन मैंने तो सिर्फ मजाक में बोला था मेरे लाल!

इतना कहकर शहनाज़ एक बार फिर से सिसक उठी।शादाब अपनी अम्मी के गाल सहलाता हुआ बोला:"

" बस अम्मी अब आप नहीं रोएगी, अम्मी मुझे लगा था शायद आप मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है

शहनाज़ उसका माथा चूम कर बोली:"
" नहीं बेटा, ऐसा कभी मत सोचना, तू तो मेरा अपना खून हैं और खुदा के बाद मैं सबसे ज्यादा भरोसा तुझ पर ही करती हूं। चल बता क्या सजा देगा अपनी इस दोस्त कों?

शादाब अपनी अम्मी की तरफ देखकर पहली बार स्माइल किया और बोला:"
" जाओ आपको माफ किया, आपके दोस्त का दिल बहुत बड़ा है क्या याद रखोगी !

शहनाज़ के होंठो पर भी मुस्कान तैर गई और अपने बेटे को छेड़ते हुए बोली:" तेरा तो सिर्फ दिल ही नहीं और भी कुछ बहुत बड़ा है

इतना कहकर शहनाज़ ने शर्म के मारे अपना मुंह उसकी छाती में छुपा लिया, अपनी अम्मी को पहले की तरह छेड़ छाड़ करते देख कर शादाब बहुत खुश हुआ और बोला:"
" अच्छा दिल के अलावा और क्या बड़ा लगा मेरी अम्मी को ?

शहनाज़ के गाल एक दम फिर से गुलाबी हो उठे और उसका एक हाथ हल्के से दबाते हुए बोली:"

" मूसल नहीं देखा तूने कितना बड़ा है, आज तूने इतना बारीक मसाला पीस दिया, पता नहीं कौन से मूसल से पीसा हैं?

शादाब का लंड अपनी अम्मी की बाते सुनकर खड़ा होना शुरू हो गया और वो बोला:"

" अम्मी मसाला कूटने के लिए तो घर में मूसल है ही, मेरे वाले से मसाला थोड़ी ही कुटा जाता हैं?

शहनाज़ ने अपने बेटे की बात सुनकर जोश में आते हुए अपनी जांघो का दबाव उसके लंड पर बढ़ा दिया और बोली:"

" मसाला नहीं तो फिर और क्या कूटा जाता है मेरे राजा ?

शादाब अपनी अम्मी की इस हरकत पर अपना काबू खो बैठा और अपनी अम्मी की कमर पर सूजी हुई जगह को सहलाते हुए बोला "

" आपको सब हैं अम्मी , उससे क्या कूटा जाता हैं,

शहनाज़ को अपनी बेटे के भोलेपन पर हंसी अा गई और अपनी कमर का दबाव उसके हाथ पर बढ़ाते हुए बोली:"

" मेरे राजा ये तो तुम कूट ही चुके हो बुरी तरह से !!

शादाब अपनी अम्मी के मुंह से राजा सुनकर बहुत खुश हुआ और बोला:"
" अम्मी अगर आपका ये दोस्त आपको सजा देना चाहे तो आप कुबूल करेगी ?

शहनाज़:" जान भी हाज़िर है बोल कर तो देख!

शादाब अपने लंड का दबाव अपनी अम्मी की जांघो पर बढ़ाता हुआ बोला;"

" ठीक है आज के बाद आप मुझे सिर्फ मेरा राजा बुलाएगी, मंजूर हैं तो बोलो!

शहनाज़ ने अपने बेटे का गाल चूम लिया और बोली:"

" ठीक हैं मेरे राजा, अब तो मुस्कुरा दे ज़ालिम

शादाब जोर से हंस पड़ा तभी रोटी जलने की बदबू पूरे किचेन में फैल गई। शहनाज़ को जैसे होश आया और बोली:'

" तेरे चक्कर में रोटी ही जल गई मेरे राजा, तुम चलो मैं आती हूं।

शादाब अपनी अम्मी की तरफ स्माइल देकर बाहर निकल गया और अपने कमरे में बैठ गया। थोड़ी देर बाद खाना बन गया और शादाब और शहनाज़ ने पहले दादा दादी को खाना खिला दिया और उसके बाद दोनो उपर अा गए। खाना लग चुका था तो शहनाज आगे बढ़कर अपने बेटे की गोद में बैठ गई और अपने हाथ से उसे खाना खिलाने लगी।
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10-08-2020, 01:02 PM,
#27
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
दोनो मा बेटे ने एक दूसरे को अच्छे से खाना खिलाया और शहनाज बरतन उठा कर किचेन जाने लगी तो शादाब भी उसके पीछे पीछे उसके साथ ही अा गया और दोनो मा बेटे ने एक साथ बर्तन धोए। शहनाज़ अपने बेटे का ऐसा प्यार देखकर गदगद हो उठी। वो किचेन में बर्तन सजाने लगी और शादाब को बोली:

" राजा तुम एक बार अपने दादा दादी से पूछ लो कि उन्हें कुछ चाहिए तो नहीं, कहीं रात में बेचारे परेशान ना हो।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनते ही नीचे चला गया और दादा दादी से बोला:"

" आपको किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो बता दीजिए, कहीं आपको रात को कोई तकलीफ़ ना उठानी पड़े!
दादा: बेटा मुझे कुछ नहीं चाहिए, जाओ अब तुम आराम कर लो!

शादाब:" दादा जी अगर आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो बता देना चाहे कोई भी टाइम हुआ हो।

दादा जी अपने बेटे की बात सुनकर खुश हो गए और शादाब उपर की तरफ चल पड़ा कि उसका मोबाइल बज उठा। उसने देखा कि रेशमा उसकी बुआ का फोन था, उसने सलाम किया और बात करते हुए उपर की तरफ जाने लगा!

रेशमा:" हां शादाब, मैं ठीक पहुंच गई हूं बेटा, बस तू अा जाता तो अच्छा होता!

शादाब उपर पहुंच गया था और उसकी आवाज शहनाज के कानों में पड़ रही थी तो शहनाज ध्यान से उसकी बाते सुनने लगी। शहनाज़ अब अपने कपड़े बदल चुकी थी और उसने एक ढीली एक गहरे रंग का नाइट सूट पहन लिया था।

शादाब:" बुआ मैं तो घर पर ही रहूंगा यहीं अपनी अम्मी और दादा जी के साथ। मेरी अम्मी बहुत अच्छी हैं और मुझे लगता हैं कि मुझे अपनी मा का ध्यान रखना चाहिए।

रेशमा:" हां बेटा वो बात तो हैं, कोई बात नहीं, थोड़े दिन के बाद अा जाना मैं सब्र कर लूंगी।

शादाब:" अब तो मै अपनी सारी छुट्टी अपनी मा के साथ घर पर ही रहूंगा, बुआ बुरा मत मानना मैं बाद में फिर कभी आपके पास अा जाऊंगा। अच्छा मैं बाद में करूंगा मुझे नींद अा रही हैं।

इतना कहकर शादाब ने कॉल काट दिया। शहनाज अपने बेटे की बाते सुनकर खुशी के मारे उछल पड़ी। मेरा बेटा सचमुच बहुत समझदार हो गया है और अब उस चुड़ैल रेशमा के कब्जे में नहीं आएगा।

शादाब को अपने दादा दादी की बात सुनकर रेशमा से नफ़रत सी हो गई थी इसलिए उसने उसको ज्यादा भाव नहीं दिया और सबसे बड़ी बात अब अपनी अम्मी को छोड़कर कहीं जाने का उसका बिल्कुल भी मन नहीं था। फोन जेब में रख कर वो अंदर की तरफ चल पड़ा।

शहनाज़ अपने बेटे को देखते ही खुश हो गई और दोनो मा बेटे एक दूसरे से बाते करते रहे। थोड़ी देर के बाद शादाब को नींद आने लगी तो वो बोला:"

" अम्मी मुझे नींद आ रही हैं, अगर आप कहें तो मैं सो जाऊ ?

शहनाज ने तरफ देखते हुए बड़ी अदा के साथ अपना दुपट्टा थोड़ा सा नीचे गिरा दिया जिससे उसकी चूचियों का उभार साफ़ नजर आने लगा और वो अपनी आंखो को नचाते हुए अपने होंठो पर कामुक मुस्कान लाती हुई बोली:"

" अच्छा इतनी जल्दी नींद आने लगी, तूने जो मसाले के चक्कर में मेरी कमर कूटी हैं उसकी मालिश कौन करेगा ?

शादाब अपनी अम्मी की इस अदा पर पूरी तरह से फिदा हो गया और अलमारी की तरफ बढ़ कर एक ट्यूब निकाल ली और अपनी अम्मी के पास अा गया। शहनाज़ अपने बेटे की आंखो में देखते हुए उल्टी होकर पेट के बल लेट गई। आज पहली बार उसका बेटा उसकी पूरी सहमति के साथ उसको छूने जा रहा था ये सोच सोच कर उसकी हालत खराब होती जा रही थी।

शादाब बेड पर अपनी अम्मी के पास बैठ गया और हाथ में क्रीम निकाल कर नाईट सूट के अंदर से ही शहनाज़ की कमर पर अपने हाथ को रख दिया और उसकी कमर की सूजी हुई जगह की मालिश करने लगा। शहनाज़ अपने बेटे के स्पर्श से पूरी तरह से रोमांचित हो गई और अपनी कमर हल्की सी उपर की तरफ उभार दी जिससे उसका बेटा और ज्यादा अच्छे से मालिश करने लगा। थोड़ी देर बाद ही शहनाज़ का सारा दर्द जैसे गायब हो गया और वो बोली:"

" बस बेटे, तेरे हाथो में तो एकदम जादू हैं, पूरा दर्द जैसे गायब हो गया हैं।
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10-08-2020, 01:48 PM,
#28
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शादाब अपनी अम्मी को गोद में भर कर नाच रहा था। शहनाज़ उसके कान खींचते हुए बोली:"

" अब कुछ बताएगा भी कि हुआ क्या हैं मेरे राजा?

शादाब :" अच्छा एक बात बताओ, आपका शहर जाने का घूमने का मन करता हैं या नहीं ?

जैसे शादाब ने शहनाज की दुखती हुई रग पर हाथ रख दिया था, इसलिए वो उदास होकर बोली :"

" बेटे मैं तो शादी के बाद से आज तक शहर नहीं गई, पहले बहुत मन करता था घूमने के लिए, लेकिन ये सब एक सपना बनकर रह गया है, लेकिन तू ये सब क्यों पूछ रहा हैं?

शादाब अपनी अम्मी के गाल चूम कर बोला:"
" अपनी दोस्त उसी सपनो के पूरा करने के लिए, मैंने दादा दादी जी से बात कर ली हैं, आप जल्दी से उनके लिए कुछ बनाओ और तैयार ही जाओ।

शहनाज खुशी से चहकते हुए उसका हाथ चूम लिया और बोली

" ये तो बहुत खुशी की बात हैं मेरे राजा, अच्छा तू इसलिए ही चाय लेकर नीचे गया था , अब समझी, मैं जल्दी से उनके लिए देशी घी का हलवा बना देती हूं, फिर चलते हैं।

शादाब उसका एक हाथ थोड़ा जोर से दबाते हुए:"

" हमे भी खिला दी कभी देशी घी का हलवा, अपने राजा से क्या दुश्मनी हैं तुम्हारी ?

शहनाज़ को उसके दबाने से हल्का सा दर्द महसूस हुआ और उसकी छाती हौले हौले मारती हुई बोली :"
" तेरे अंदर तो पहले ही सांड जैसे ताकत हैं, अगर देशी घी का हलवा तुझे खिला दिया तो तू तो अगली बार मसाले के साथ औखली को भी कूट देगा,

इतना कहकर शहनाज़ ने शर्म के मारे अपना मुंह उसके सीने में छुपा लिया ।

शादाब:" आय हाय इतनी शर्म, अच्छा जल्दी से हलवा बना दो आप, फिर चलते हैं!

शहनाज़ उसे उलाहना देते हुए बोली :" पहले मुझे नीचे उतारेगा तभी तो हलवा बनाऊंगी, इतनी भारी हूं फिर भी गुड़िया की तरह उठा लेता हैं मुझे !!

शहनाज़ ने उसे धीरे धीरे नीचे उतार दिया और बोला:".

" किसने कहां आप भारी हो, आप एक दम नाजुक हो किसी गुड़िया की तरह।

शहनाज़ उसकी बात सुनकर हंसते हुए बोली:" जब देखो झूठी तारीफ करता रहता हैं मेरी, तुम भी तैयार हो जाओ।

इतना कहकर वो किचेन में घुस गई और दूध गर्म करके एक थरमस में भर लिया और जल्दी दे हलवा तैयार कर लिया। उसे खुद पर हैरानी हो रही थी कि उसने इतनी जल्दी सब कुछ कैसे बना दिया। फिर वो तैयार होने के लिए कमरे में अा गई और तैयार होने लगी। उसने एक एक हल्के गहरे रंग का सूट पहन लिया और फिर अपने चेहरे का मेक अप करने लगी। उसने अपने बालो को खुला छोड़ दिया

शहनाज़ ऐसे ही अपने बेटे के रूम की तरह जाने लगी। शादाब उसे देखते ही बोला "

" क्या बात हैं बहुत सज ढक गई हो, आज किस पर बिजलियां गिराने का इरादा है ?

शहनाज एक दम से लजा गई और बोली:"

" मुझे तो तेरे सिवा कोई और नजर नहीं आता यहां मेरे राजा?

शादाब मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ा और बोला:"

" हम तो पहले ही आपके दीवाने हो गए हैं मल्लिका ए हुस्न, अब जान ही ही ले लोगी क्या ?

शहनाज़ ने अपनी एक उंगली को अपनी बेटे के होंठो पर रख दिया और उसे चुप रहने का इशारा करके उससे लिपट गई। शादाब ने भी अपनी अम्मी को अपने गले से लगा लिया और बोला:"

" चले फिर?

शहनाज़ ने अपना बुर्का निकाला और उसे औढ़ने लगी तो शादाब की हंसी छूट गई और बोला:"

" अम्मी आप बिना बुर्के के ज्यादा खूबसूरत लगती हो, रहने दो ना बुर्का !

शहनाज़ उसकी तरफ थोड़ा नाराजगी से देखते हुए:"

" मेरे साथ खुद भी मार खाएगा क्या, आज तक बिना बुर्के के मैंने चौखट के बाहर कदम नहीं रखा।

और इतना कहकर उसने अपना बुर्का पहन लिया और दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़े नीचे की तरफ चल पड़े। दादी दादा के पास जाने से पहले ही शादाब ने शहनाज़ का हाथ छोड़ दिया और शादाब ने हलवा और दूध का थार्मास दादा जी को से दिया और फिर शादाब गाड़ी निकालने चला गया।

दादी :" बेटी अच्छा हुआ शादाब को कॉलेज का कुछ काम पड़ गया इसके बहाने तू भी शहर घूम आएगी और हमे भी कुछ नए कपड़े मिल जाएंगे।

शहनाज़ को अब जाकर सारी बातें समझ अाई कि उसके बेटे का कॉलेज का कुछ काम है इसलिए वो शहर साथ में उसे भी घूमने ले जा रहा है।

तब तक शादाब कर लेकर गेट पर अा गया और शहनाज़ आगे बढ़ते हुए उसके बैठ गई।

दादी चिंतित होते हुए:"

" बेटा थोड़ा आराम से ही जाना और जल्दबाजी मत करना, तेज गाड़ी मत चलाना बेटा ।

शादाब अपनी दादी की बात मानते हुए उन्हें एक स्माइल देकर आगे बढ़ गया। गाड़ी गांव के रास्ते को पर करती हुई मुख्य रोड पर अा गई और शहर की तरफ चल पड़ी।

शहनाज़ आज अपने आपको दुनिया की सबसे खुश नसीब मा समझ रही थी कि उसका बेटा उससे इतना प्यार करता । उससे लग रहा था मानो उसका बेटा नहीं बल्कि उसके सपनों का शहजादा सपनो से बाहर निकल आया हैं।

शादाब अपनी अम्मी की तरफ देखते हुए बोला:"

" अम्मी आप खुश तो हो ना अपने दोस्त के साथ घूमने आकर!!

शहनाज़ ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए उसका हाथ अपनी हाथ में भर लिया और बोली:"

" बहुत ज्यादा मेरे राजा, शुक्रिया मेरे दोस्त मेरी ज़िन्दगी में आने के लिए ।।

शादाब उसकी तरफ स्माइल देकर:"

" अम्मी अब आप ये बुर्का उतार दीजिए ना, ये आप पर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा हैं

शहनाज का दिल जोर से धड़क उठा और बोली:"
" मा बेटा कभी ऐसा सोचना भी मत, अगर किसी ने मुझे बिना बुर्के के देख लिया तो गजब हो जाएगा मेरे राजा!

शादाब समझ गया कि उसकी मम्मी के मन में डर हैं इसलिए वो बोला:"

" देखो अम्मी ना तो आज तक आपका चेहरा किसी ने देखा हैं और ना ही गांव में मुझे कोई जानता है, इसलिए आप बेफिक्र होकर उतार दीजिए।
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10-08-2020, 01:48 PM,
#29
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
शहनाज़ को अपने बेटे की बात बिल्कुल सही लगी लेकिन समाज का डर उसके ऊपर पूरी तरह से हावी था, उसके बचपन से लेकर अब तक के संस्कार उसे इसकी इजाज़त नहीं दे रहे थे। इसलिए वो डरते हुए बोली:"

" ना बेटा मुझसे ना हो पाएगा, समझने की कोशिश कर तू।

शादाब ने थोड़ा उदास होते हुए कहा :" क्या अम्मी आप अपने दोस्त के लिए इतना भी नहीं कर सकती है ?

शहनाज़ ने एक बार अपने बेटे की तरफ देखा और बोली:"

" प्लीज़ बेटा जिद मत कर, मुझसे नहीं हो पाएगा, बहुत शर्म आएगी बुर्का निकालते हुए घर से बाहर!

शादाब अपनी अम्मी की मजबूरी समझ गया और बोला:"

" मानता हूं आप खुद नहीं निकाल पायेगी, लेकिन अगर आपका ये दोस्त आपकी मदद करे तो क्या ख्याल हैं आपका ?

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर एक बार प्यार से उसकी तरफ देख कर मुस्कुराई और फिर लजा गई, चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसने अपनी आंखे बंद करते हुए अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया। शादाब समझ गया कि उसकी अम्मी ने उसे एक मूक सहमति दे दी है।

शादाब ने रोड पर एक खाली जगह देखकर साइड में गाड़ी रोक दी और शीशे चढ़ा दिए तो शहनाज़ की हालत खराब होने लगी। शादाब ने अपनी अम्मी के एक हाथ को अपने हाथ में लिया और हल्का हल्का सहलाना शुरू कर दिया तो शहनाज़ ने भी उसके हाथ हल्का सा दबा दिया। शादाब थोड़ा आगे हुआ तो उसकी अम्मी उससे पूरी तरह से चिपक गई। शादाब ने एक हाथ नीचे की तरफ बढ़ाया और उसके बुर्के के नीचे वाले हिस्से को पकड़ लिया तो शहनाज़ की सांसे किसी सुपर फास्ट ट्रेन की तरह दौड़ने लगी और उसने अपने हाथ अपने बेटे की गर्दन में लपेट दिए। शादाब ने बुर्के के सिरे को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठाया तो शहनाज़ का जिस्म सूखे पत्ते की तरफ कांपने लगा, उसे ऐसे लग रहा था कि शादाब सिर्फ उसका बुर्का ही नहीं उतार रहा है बल्कि उसे पूरी नंगी कर रहा है। शहनाज़ का एक पैर अपने आप उसके दूसरे पैर को रगड़ने लगा। शादाब ने बुर्के को सिरे को घुटनो तक उठा दिया और उसकी जांघो पर बहुत धीरे धीरे हाथ फेरते हुए ऊपर की तरफ बढ़ता जा रहा था। एक तो बुर्का उतारने कि शर्म और ऊपर से शादाब के हाथ की उंगलियां जो कि शहनाज़ के जिस्म पर एक सितार की तरह बज रही थी उससे शहनाज पूरी तरह से उत्तेजित हो गई और अपने चेहरे को और आगे करते हुए उसकी गर्दन के बिल्कुल पास ले गई।

शादाब को अपनी गर्दन पर जैसे ही अपनी अम्मी की गरम गरम सांसे महसूस हुई तो उसने जोश में आकर बुर्के को थोड़ा और ऊपर उठाया जिससे अब बुर्का उसके पेट से उपर आते हुए उसके सीने की गोलाईयों तक अा गया। शहनाज़ को जैसे ही अपने बेटे के हाथ अपनी चूचियों पर महसूस हुए तो उसकी सांसे और तेज हो गई । शहनाज़ ने अपने हाथों की उंगलियों का दबाव अपने बेटे की कमर पर थोड़ा सा और बढ़ा दिया। बुर्का शहनाज़ की शानदार, शानदार चूचियों पर आकर हल्का सा फस सा गया तो शादाब ने अपनी हथेलियों का दबाव बढ़ाते हुए बुर्के को जोर से पकड़ा जिससे एक पल के लिए ही सही लेकिन शहनाज की चूचियों उसके बेटे की हथेलियों में समा गई जिसे महसूस करके शहनाज का रोम रोम कांप उठा । शादाब ने जैसे ही उपर की तरफ बुर्के को उठाते थोड़ा दबाव दिया तो शहनाज़ की चुचिया दब गई और उसके मुंह से एक हल्की मस्ती भरी सिसकी निकल पड़ी और उसके हाथ की उंगलिया शादाब की कमर में गड़ गई।
शादाब से अब बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने एक झटके के साथ बुर्के को उतार दिया तो शर्म और डर के मारे शहनाज़ के मुंह से एक आह निकल पड़ी

"हाय अल्लाह, उफ्फ ये क्या गुनाह हो गया मुझसे !!

और शहनाज़ के अमर बेल की तरह शादाब से लिपटती चली गई। शादाब ने भी अपनी अम्मी को अपनी बांहों में कस लिया और उसकी कमर थपथपाने लगा मानो उसे तसल्ली दे रहा हो। आज एक पर्दे की बहुत बड़ी दीवार दोनो मा बेटे के बीच गिर चुकी थी। शहनाज़ की आंखे अभी तक बंद थी और उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि अपनी आंखे खोल पाए। उसे ऐसा लग रहा मानो किसी ने भरे बाजार उसके कपड़े उतार दिए हो और शर्म से सिमटी हुई अपने बेटे की बांहों में थी। शादाब समझ रहा था कि ये उसकी अम्मी के लिए कितनी बड़ी बात है इसलिए उसने कोई जल्दबाजी नहीं करी और अपनी अम्मी को गले लगाए रखा। धीरे धीरे शहनाज़ की सांसे नॉर्मल होने लगी और जब उसकी सांसे एकदम सामान्य हो गई तो शादाब ने उसका माथा चूम लिया और बोला:"

" मल्लिका ए हुस्न जरा एक अपनी नाजुक प्यारी सी आंखो को खोल दीजिए !

शहनाज़ ने अपने दिल पर पत्थर रखते हुए बड़ी मुश्किल से अपनी आंखे खोली और अपने बेटे से मिला दी और अगले ही पल शर्म के मारे फिर से उसकी पलके झुक गई और दोनो आंखे बंद हो गई। शादाब ने उसका हौसला बढ़ाने के लिए फिर से उसके हाथ को सहलाना शुरू कर दिया जिसका नतीजा ये हुआ कि शहनाज़ ने अपनी आंखे खोल दी। शहनाज़ इस बार गजब का आत्म विश्वास दिखा रही थी और लगातार अपनी आंखे खोले रही तो शादाब ने आगे बढ़कर उसका माथा चूम लिया और बोला:

" अगर इजाज़त हो तो शहर की तरफ चले ?

शहनाज ने अपने बेटे को हल्की सी स्माइल देते हुए आगे बढ़ने का इशारा किया और शादाब ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। थोड़ी देर बाद ही वो शहर पहुंच चुके थे इसलिए शादाब ने गाड़ी सबसे पहले एक शॉपिंग मॉल के सामने रोक दी और बाहर निकल आया। शहनाज़ की हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि वो बिना बुर्के के बाहर निकले इसलिए शादाब ने अपनी अम्मी का हाथ पकड़ कर उसे बाहर खींच लिया। शहनाज़ बाहर निकलते ही बुरी तरह से शर्मा गई और उसकी दोनो आंखे फिर से एक बार बंद हो गई। शहनाज़ का हुस्न एक बार फिर से पूरी तरह से खिल उठा और अपनी हालत के बारे में सोचते हुए मंद मंद मुस्कुराने लगी।

शादाब एक बार फिर से अपनी अम्मी की हालत देख कर मुस्कुरा उठा। आज शहनाज़ का अंग अंग निखर कर चमक रहा हैं और उसका हुस्नों शबाब पूरे उफान पर था। शादाब ने एक योजना बनाते अपनी अम्मी का हाथ पकड़ लिया और आगे की तरफ बढ़ गया तो शहनाज़ की आंखे डर के मारे अपने आप खुल गई। सब लोग आंखे खोल फाड़ फाड़ कर उसकी तरफ देख रहे थे, ये सब देख कर जहां एक और उसे शर्म महसूस हुई वहीं शहनाज़ थोड़ा खुश हुई कि आज भी उसके हुस्न और बलखाते जिस्म में वो जादू हैं कि लोगो की निगाहें उस पर ठहर रही हैं। उसने थोड़ा सा मजा लेने के लिए अपने बेटे को छेड़ा और बोली:"

" राजा ये सब लोग मुझे ऐसे घूर घूर कर क्यों देख रहे हैं ?

शादाब अपनी अम्मी का हाथ जो कि उसके हाथ में था उसे हल्का दबाते हुए बोला:"

" अम्मी क्योंकि आपसे खूबसूरत इन्हे यहां कोई लग नहीं रही है इसलिए आपको देख कर अपनी आंखे ठंडी कर रहे है।

शहनाज़ के होंठ हल्की सी मुस्कान के साथ खुले और वो अपने बेटे से बोली:"

" लेकिन बेटा यहां तो एक से बढ़कर एक जवान लड़कियां हैं, मैं तो इनके सामने कुछ भी नहीं हु

शादाब अपनी अम्मी का हाथ सहलाते हुए उसकी आंखो में देखते हुए बोला:"

" अम्मी सिर्फ उम्र कम होने से कोई जवान नहीं होता, आपकी दिलफरेब खूबसूरती और कसे हुए शरीर के आगे ये आज कल की तितलियां पनाह मांगती है,और सबसे बड़ी बात अम्मी कच्चे फल की जगह लोग पके हुए मीठे फल खाने से ज्यादा खुश होते हैं !

इतना कहकर उसने एक बार बड़ी हसरत भरी निगाहों से अपनी अम्मी की गोल गोल चूचियो की तरफ देखा तो उसकी नजरो का आभास होते ही शहनाज़ शर्म के मारे फिर से लाल ही गई और अपने बेटे के हाथ में हल्का सा नाखून चुभाते हुए बोली:

" बेशर्म कहीं का, कुछ भी बोल देता है। तुझे घर जाकर ठीक करती हूं।

शादाब उसे छेड़ते हुए:"घर जाकर क्या आप मेरे साथ मसाला कुटोगी ?

शहनाज़ ने उसे एक बार घूर कर देखा और आगे बढ़ गई। वो दोनो एक साथ मॉल के अंदर घुस गए तो एस्केलेटर सीढ़ियां देख कर शहनाज़ के चेहरे पर हैरानी फैल गई और बोली:" बेटे ये सब क्या हैं ये कैसी सीढ़ियां है?

शादाब जानता था कि उसकी अम्मी ने ये सब पहली बार देखा हैं तो उसने समझाया:

" अम्मी ये अब ऑटोमैटिक सीढ़ियां होती हैं जो अपने आप उपर नीचे जाती रहती हैं।

इतना कहकर शादाब शहनाज़ का हाथ पकडकर जैसे ही एस्केलेटर पर पैर रखने लगा तो शहनाज़ डर गई और उसने अपना पैर वापिस खींच लिया। शादाब ये सब देखकर मुस्कुरा उठा और बोला:

" अम्मी आप डरों मत, जैसे ही मैं अपना पैर रखू, आप भी एकदम से अपना पैर रख देना।

शहनाज़ ने अपने बेटे की बात मानते हुए शादाब के पैर के साथ ही पैर रख दिया और उसके साथ ही एस्केलेटर पर सवार हो गई। लेकिन पैर रखते ही उसे एक झटका लगा और वो डर के मारे अपने बेटे से लिपट गई और देखने लगी कि एस्केलेटर में सीढ़ियां बन गई और दोनो उपर जाने लगे तो शादाब ने अपनी अम्मी को समझाया कि उसके साथ ही पैर हटाए तो दोनो ने एक एक साथ पैर हटा दिया तो एक हल्का सा झटका शहनाज़ को लगा लेकिन उसके बेटे ने उसका हाथ पकड़ रखा था इसलिए कोई दिक्कत नहीं अाई। शादाब और शहनाज़ उपर पहुंच गए थे लेकिन शादाब अपनी अम्मी के दिल से पूरी तरह से एस्केलेटर का डर निकालना चाहता था इसलिए उसे समझाते हुए वो एक बार फिर नीचे की तरफ जा रहे एस्केलेटर पर सवार हो हुए। इस बार पहले के मुकाबले शहनाज़ का आत्म विश्वास गजब का था और जल्दी ही वो दोनो नीचे पहुंच गए।

शादाब ने इस बार अपनी अम्मी को खुद अकेले ही जाने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया तो शादाब उसके साथ चल पड़ा लेकिन उसने इस बार शहनाज़ का हाथ नहीं पकड़ा और वो अपने आप ही आराम से एस्केलेटर पर चढ़ गई। शहनाज मुस्कराई और अपने बेटे की तरफ देखा तो शादाब ने भी मुस्करा कर अपनी अम्मी का साथ दिया क्योंकि वो जानता था कि अब शहनाज़ का डर निकल चुका हैं। दूसरी तरफ शहनाज़ ऐसा महसूस कर रही थी मानो उसने बहुत बड़ी जंग जीत ली है। जल्दी ही वो एक कॉटन की दुकान में घुस गए और दादा दादी के लिए कपडे पसंद करने लगें। शहनाज़ ने अपने सास ससुर के लिए बहुत ही अच्छे डिजाइन के कॉटन के दो दो जोड़ी कपड़े लिए और कुछ चादर भी ले ली क्योंकि आगे गर्मियां आने वाली थी।

उसके बस शादाब अपनी अम्मी को एक लेडीज शॉप के सामने ले गया जहां बाहर ही एक से बढ़कर एक बेहतरीन ड्रेस लगी हुई जिन्हे देख कर शहनाज़ खुश हुई और बोली:"

" बेटा ड्रेस तो अच्छी हैं, लेकिन मेरे पास तो पहले से ही काफी कपडे हैं इसलिए रहने देते हैं।

शादाब :" अम्मी आपको ड्रेस मुझ पर उधार हैं क्योंकि उस दिन मसाला कूटते हुए आपका सूट फट गया था।
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10-08-2020, 01:48 PM,
#30
RE: Maa Sex Kahani माँ का आशिक
अपने बेटे की बात सुनते ही शहनाज़ की आंखों के आगे एक बार फिर से वो नजारा घूम गया और वो शर्म से गड़ गई। हिम्मत करके वो बोली:"
" नहीं बेटा कोई बात नहीं, मुझे नहीं चाहिए बस आदत सी नहीं रही नए कपड़ों की अब !

शादाब अपनी अम्मी का हाथ पकड़ कर सहलाते हुए बोला:

" इसका मतलब ये है कि आपको उस दिन अच्छा नहीं लगा और अब आप आगे से मेरे साथ मसाला नहीं कूटना चाहती ?

शहनाज़ की पलके एक बार फिर से हया से झुक गई और उसने अपने बेटे का दबाते हुए कहा:"

" नहीं बेटा, मैंने ऐसा तो कुछ नहीं कहा मेरे राजा !

शादाब खुश हो गया और अपनी अम्मी को लेकर अंदर स्टोर में घुस गया। अंदर एक से बढ़कर एक मॉडर्न ड्रेस लगी हुई थी जो कि जिनमें से कुछ घुटनो तक अा रही थी तो कुछ में कंधे बिल्कुल नंगे नजर अा रहे थे। शहनाज़ ने ऐसी ड्रेस पहली बार देखी थी इसलिए उसे बड़ी शर्म महसूस हुई। शहनाज़ मुंह नीचे किए हुए खड़ी थी और चोरी चोरी बीच बीच में ड्रेस की तरफ देख रही थी। ये देखकर सेल्स गर्ल को हंसी अा गई और बोली:"

" मैडम अगर इतनी शर्म करोगी तो ड्रेस कैसे खरीद पाओगी आप, देखिए ना आपकी गर्ल फ्रेंड कैसे शर्मा रही हैं?

सेल्स गर्ल ने अपने आखिरी शब्द शादाब के खूबसूरत चेहरे पर अपनी नजरे टिका कर कहे। शहनाज़ खुद को अपने बेटे की गर्ल फ्रेंड कहे जाने से हैरान हुई और बोली :"

" देखिए आपको गलतफहमी हो रही है, मैं इनकी गर्ल फ्रेंड नहीं हूं, मैं तो इसकी .....

इससे पहले की शहनाज़ की बात पूरी होती सेल्स उसकी बात काटते हुए बीच में ही बोल पड़ी :

" मैडम यहां आने वाली हर औरत कोई अपने आपको लडको की आंटी तो कोई भाभी कहती है, उफ्फ जब बेटे की उम्र के लड़के फसाने में शर्म नहीं करती तो फिर बताने मा कैसी शर्म ?

सेल्स गर्ल की बात सुनकर दोनो मा बेटे अवाक से खड़े रह गए, शहनाज की गुस्से से आंखे लाल होने लगी तो शादाब ने सेल्स गर्ल से बोला:"

" आप फालतू बात बंद कीजिए और ड्रेस दिखा दीजिए, अपने काम पर ध्यान दो

शादाब को भड़कते देख कर सेल्स गर्ल की फट गई क्योंकि उसे लग रहा था ये दोनो कपल हैं और रोमांस पर निकले हैं।

सेल्स गर्ल:" सोरी सर, माफ कीजिए, मैं आगे से ध्यान दूंगी, मैडम ये देखिए हमारे पास नए डिजाइन के एक से बढकर एक सूट हैं!!
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