XXX Kahani मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें
08-04-2021, 12:20 PM,
#21
RE: XXX Kahani मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें
अब मैंने चुदाई अपने कंट्रोल में ले ली और धीरे धीरे धक्कों के साथ चुदाई की स्पीड बढ़ाता गया और करीब 5 मिन्ट की चुदाई बाद वो पहली बार छूट गई.उसके छूटने का ढंग कुछ अलग था, छूटने से पहले उसने अपनी कमर को एकदम ऊपर उठाया और मेरी कमर के साथ जोड़ दिया और ज़ोर ज़ोर से कांपना शुरू कर दिया और जब तक वो पूरी तरह नहीं छूटी वो मुझसे चिपकी रही.मेरा लंड पूरा उसके अंदर समाया हुआ था और उसकी चूत का खुलना बंद होना लंड को महसूस हो रहा था, उसके मोटे मम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे.
थोड़ा रुक कर मैंने फिर चुदाई शुरू कर दी और धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ाता गया और फुलवा एक बार फिर छूट गई और एकदम ढीली पढ़ गई लेकिन मैंने चुदाई जारी रखी और थोड़े टाइम बाद जब फुलवा तीसरी बार छूटी तो मैं अपने को नहीं रोक सका और उस के साथ मेरा भी फुवारा छूट गया और फुलवा का चेहरा एकदम खुशी से खिल उठा.
हम दोनों थक कर लेट गए और छाया फुलवा के होटों को चूसने लगी और उसके स्तनों को दबाने लगी. फुलवा ने ‘थैंक यू’ मुझको आँखों से ही कह दिया.
छाया उठी और नीचे बिस्तर बिछा कर लेट गई और फुलवा को मेरे साथ सोने का इशारा करके खुद सो गई.10-15 मिन्ट बाद मैंने फुलवा को फिर चोदा और उसके दो बार छूटने के बाद मैंने भी छूटा लिया और करवट बदल कर सो गया.
आधी रात को मेरा हाथ फिर फुलवा के नंगे स्तनों पर लगा और फिर मेरा लंड चोदने के लिए तैयार हो गया और मैंने फुलवा की चूत को हल्के से मसला और जब उसकी टांगें फिर अपने आप खुल कर चौड़ी हो गई तो मैं जल्दी से अंदर घुसा और उसकी चूत में लंड को डाल दिया.फुलवा की चूत अभी भी पनिया रही थी, थोड़े धक्कों के बाद वो झड़ गई लेकिन मैं अभी भी मस्ती में था तो आधा घंटा उसको चोदने के बाद ही अपना छुटाया और फिर गहरी नींद सो गया.
सुबह छाया ने मुझको जगाया और पूछा कि हम दोनों जाएँ क्या?
मैंने इशारे से कहा कि फुलवा को एक बार और चोदना चाहता हूँ तो फुलवा जो धोती पहन चुकी थी, धोती को उतारने लगी.मैंने इशारे से कहा- रहने दो, धोती ऊपर उठा कर ही चोद दूंगा.
वो फिर मेरे पास लेट गई और मैंने उसको जल्दी ही फिर तैयार कर लिया और उसकी ज़ोरदार चुदाई कर दी और उसका कम से कम 2 बार छूटने के बाद भी मैं नहीं छूटा और उसको कहा- जाओ तुम दोनों, बाकी हिसाब रात को कर लेंगे.
यह सिलसिला 4-5 दिन चला और फिर सिर्फ छाया ही आई, कुछ उदास दिख रही थी, मैंने पूछा- उदास क्यों हो छाया?वो बोली- फुलवा नहीं आई इसलिए!‘तो क्या परेशानी है?’‘आप से पूछे बगैर हम उसको कैसे लाते?’‘अरे इसमें पूछना क्या है? ले आओ न उसको!’
और छाया ख़ुशी ख़ुशी चली गई और थोड़ी बाद वो फुलवा को लेकर आ गई. दोनों मेरे पलंग पर बैठ गई मेरी अगल बगल… मैंने पहले छाया को चूमा और फिर फुलवा को.
मैं बोला- अब क्या इरादा है छाया रानी?
‘आप बुरा तो नहीं मान जायेंगे अगर मैं कहूं कि आप हम दोनों को बारी बारी से चोदो. आप बीच में लेट जाओ और हम दोनों को बारी बारी से चोदो जैसे पहले मुझको और फिर फुलवा को, मंज़ूर है क्या?’‘जैसा तुम कहो छाया!’
‘चलो फुलवा और सतीश तुम भी कपड़े उतार दो और मैं भी उतार देती हूँ फिर आप बीच में लेट जाना ठीक है?’
‘ठीक है, या ऐसा करो कि मैं बीच में लेट जाता हूँ और तुम बारी से मेरे ऊपर चढ़ जाना और चुदाई का सारा काम तुम दोनों को करना पड़ेगा. मंज़ूर है क्या?’दोनों ने सर हिला दिया.
पहले छाया ने मुझ को मुंह से लेकर लंड तक चूमा और फुलवा मेरे खड़े लंड से खेलती रही.थोड़ी देर बाद फुलवा ने मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैं एकदम से बिफर गया क्यूंकि पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था, मुझ को लगा कि मेरा लंड फट जाएगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और तब छाया मेरे लंड के ऊपर आ गई और मेरे खड़े लंड को हाथ से चूत में डाल दिया और फिर आहिस्ता आहिस्ता ऊपर से नीचे धक्के मारने लगी.
उसकी चूत से टपक रहा रस मेरे लंड और अंडकोष पर गिर रहा था, मैं भी नीचे से धक्के का जवाब धक्के से दे रहा था. फुलवा मेरी छाती के निप्पलों को चूस रही थी और हम तीनों ही चुदाई में मस्त थे.
तभी छाया ने धक्के मारना तेज़ कर दिया और फिर उसने आखरी एक धक्का ज़ोर से मारा और वो मेरे ऊपर पसर गई, उसका रस पूरी तरह से मेरे ऊपर फैल गया और उसके उरोज मेरी छाती में दब गए.
फुलवा ने प्यार से छाया को मेरे ऊपर से हटाया और बिस्तर पर लिटा दिया. और फिर वो अपनी मोटी गांड को लेकर मेरे लंड के ऊपर बैठ गई और जब लंड उसकी चूत में पूरा चला गया तो वह भूखी शेरनी की तरह से धक्के मारने लगी और जल्दी जल्दी ऊपर नीचे होने लगी.मैं उसकी धक्के की लय को समझ पाता तब तक वो भी झड़ गई और हांपते हुए मेरे ऊपर पसर गई.
दो दो चूतों से निकला रस मेरे ऊपर फैल गया और उस रस से बहुत मादक सुगंध आ रही थी.सारी रात यही क्रम चलता रहा, कभी छाया ऊपर और कभी फुलवा ऊपर! दोनों कई बार छूटी और मैं भी 2 बार छूट गया, दोनों में एक एक बार!सुबह हुई तो हम तीनों मस्त नींद में थे लेकिन छाया सजग थी और टाइम पर उठ कर फुलवा को लेकर चली गई और जब मेरी चाय ले कर आई तो पलंग की चादर की हालत देख कर उसने झट चादर बदल दी और बोली कि इसको वो खुद धोएगी क्यूंकि चादर पर ढेरों चूत का रस और वीर्य फैला था.छाया की होशियारी के कारण हमारा यह खेल निर्विघ्न चलता रहा.

कहानी जारी रहेगी.

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08-04-2021, 12:20 PM,
#22
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*फुलवा को गर्भ ठहर गया*

अब ढलती उम्र में कभी कभी सोचता हूँ कि यह कैसे संभव हुआ कि मेरी हरकतों को बारे में मेरे माँ और पिता को कभी कोई खबर नहीं लगी.यह सब शायद पहले नैना और बाद में छाया की होशियारी के कारण संभव हुआ. दोनों बहुत ही सतर्क रहती थी कि कभी भी हवेली में काम करने वाला नौकर या नौकरानी के मन में उठ रहे संशय को फ़ौरन दबा दिया जाये.
छाया का कहना था कि वो समय समय पर सब को यही कहती थी कि छोटे मालिक रात को बहुत डर जाते हैं तो किसी का उनके साथ सोना बहुत ज़रूरी था. यह कहानी इतनी प्रचलित कर दी गई कि नैना और फिर छाया का मेरे कमरे में सोना एक साधारण बात बन गई और छोटे मालिक की भलाई के लिए ही मालकिन ने यह उचित समझा है.और फिर छोटे मालिक एक सीधे साधे लड़के हैं और उनको दुनिया दारी का कुछ भी ज्ञान नहीं.इस बात को मेरे कमरे में रहने वाली सारी नौकरानियों के दिल में बिठा दी जाती थी और अपने शारीरिक सुख को जारी रखने के लिए ये बातें वो बार बार दोहराती थीं.
उधर मैं भी नैना छाया और अब फुलवा को बिना मांगे थोड़ा बहुत धन दे दिया करता था. जैसे नैना को हर महीने 100 रुपया देता था जो उसकी पगार के अलावा होता था. इसी तरह छाया और अब फुलवा को भी इतने ही पैसे हर महीने दे दिया करता था.
मेरी मम्मी हर महीने मुझको हज़ार रुपया जेब खर्चे के लिए देती थी और मैं जहाँ तक हो सके इन लोगों की मदद कर दिया करता था. यही हाल स्कूल में भी था, मैं हर एक दोस्त की मदद कर दिया करता था, वो सब मेरे अहसानों तले दबे रहते थे और मेरा बड़ा आदर करते थे.शायद यही आदत मुझ को कष्टों से बचा लेती थी.
अब हर रात को हम तीनों चुदाई का यह खेल खेलते थे. कभी छाया नीचे होती थी और मैं उसके ऊपर और फुलवा मेरे ऊपर.छाया ने नीचे से मारा गया हर धक्का मेरे ऊपर लेटी फुलवा मुको धक्का मार कर जवाब देती थी. नीचे से छाया और ऊपर से फुलवा के धक्कों के कारण छाया जल्दी ही झड़ जाती और तब फ़ोरन छाया अपनी जगह फुलवा को दे देती और मैं फिर उन दोनों के बीच में ही रहता.

जब दो दो बार दोनों झड़ गई तब मेरा एक बार फ़व्वारा छूटा लेकिन मैं अपना लंड फुलवा की चूत में ही डाले लेटा रहा.मेरा लंड उसकी चूत में पूरा खड़ा था और वो धीरे धीरे नीचे से धक्के मारती रही. छाया एक हाथ से मेरे अंडकोष पकड़ रही थी और दूसरे की ऊँगली मेरी गांड में डाल रखी थी. उन दोनों के ऐसा करने से मुझ को बड़ा आनन्द आ रहा था.
और फिर एक दिन हम तीनों आसमान में उड़ते हुए ज़मीन पर आ गिरे.उस रात मैं उन दोनों को चुदाई का नया तरीका सोच रहा था की वो दोनों मुंह लटकाये कमरे के अंदर आई.मैंने पूछा- क्या बात है?
दोनों चुप रहीं और फिर मेरे दोबारा पूछने पर छाया बोली- फुलवा को गर्भ ठहर गया है.‘गर्भ? यह कैसे हुआ?’‘हम जो हर रात को अंदर जो छुटाती थी उसी कारण हुआ है शायद?’‘तुमको कैसे पता है कि यह गर्भ ही है?’‘दो महीने से फुलवा को माहवारी नहीं हुई, इससे पक्का है कि वो गर्भवती है.’
मैं घबरा गया और घबराहट में कुछ कह नहीं पाया.छाया मेरी हालत समझ रही थी और प्यार से बोली- सतीश, तुम घबराओ नहीं, हम इसका कोई उपाय ढूंढ निकालेंगी.उस रात इस बुरी खबर के बाद किसी का भी चुदाई का मन नहीं किया.
अगले दिन छाया ने मुझको दिलासा दिलाई और कहा- मैं इस मुसीबत से छुटकारे के बारे में गाँव की पुरानी दाई से बात करूंगी.
अगले दिन स्कूल से वापस आने पर छाया ने बताया- दाई कहती है कि वो गर्भ गिरवा देगी, बस कुछ रुपये देने होंगे उसको!मैंने पूछा- कितने मांग रही है?‘100 रूपए में काम हो जाएगा.’
मैंने झट अलमारी से 100 रुपये निकाल कर छाया को दे दिए. छाया मम्मी से एक दिन की छुट्टी ले गई और साथ में फुलवा को भी ले गई.मेरा सारा दिन बेचैनी से गुज़रा.अगले दिन छाया आई और आते ही बोली- काम हो गया छोटे मालिक, आप घबराएँ नहीं..मैंने चैन की सांस ली और उस रात मैंने और छाया ने जम कर चुदाई की, 4-5 बार छाया का छुटाने के बाद हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में सो गए.
कुछ दिनों बाद फुलवा फिर वापस आ गई.तब मैंने और छाया ने यह फैसला लिया कि अब से मैं फुलवा की चूत में नहीं छुटाऊँगा लेकिन छाया की चूत में मैं अंदर ही छुटाऊंगा क्यूंकि उसमें शायद गर्भ नहीं ठहरता.
हम ऐसा ही करते रहे और दोनों को मैं पूरा यौन आनन्द देता रहा और दोनों के चेहरे काम तृप्ति के कारण खूब चमक रहे थे.
करीब 6 महीने शान्ति से और मौज मस्ती में गुज़रे लेकिन फिर एक और मुसीबत आ गई.एक दिन छाया ने बताया कि उसका पति लौट कर आ रहा है एक हफ्ते में!‘अब कैसे होगा?’ यही प्रश्न हम तीनों के दिमाग में बार बार उठने लगा.छाया के जाने के बारे में सोचने से मैं काफी उदास हो गया था.
वो 7 दिन हमने धुआंधार चुदाई में गुज़ारे. जैसा कि तय किया गया, सारी चुदाई का केंद्र छाया को ही बनाया गया. फुलवा और मैंने छाया को पूरा प्रेम दिया.
उसकी चुदाई की हर इच्छा को पूरा किया, कभी ऊपर से कभी घोड़ी बना कर और कभी साइड से और कभी उसकी टांगों के बीच बैठ कर छाया की चुदाई की, मैंने और फुलवा ने उस काम में मेरा पूरा साथ दिया.
और फिर छाया एक दिन नहीं आई और फुलवा ने बताया कि उसका पति आ गया है और वो अब शायद नहीं आ पायेगी.मैं छाया को बहुत मिस कर रहा था, चाहे फुलवा बाकायदा रोज़ आती थी, मेरी सेवा भी बहुत करती थी लेकिन छाया का साथ कुछ और ही रंग का था.फुलवा मुझको रोज़ छाया के ख़बरें देती थी.

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08-04-2021, 12:20 PM,
#23
RE: XXX Kahani मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें
*छाया के गर्भवती होने की समस्या*

और फिर छाया एक दिन नहीं आई और फुलवा ने बताया कि उसका पति आ गया है और वो अब शायद नहीं आ पायेगी.मैं छाया को बहुत मिस कर रहा था, चाहे फुलवा बाकायदा रोज़ आती थी, मेरी सेवा भी बहुत करती थी लेकिन छाया का साथ कुछ और ही रंग का था.फुलवा मुझको रोज़ छाया के ख़बरें देती थी.
एक दिन उसने बताया कि छाया को उसके पति ने शराब पी कर बहुत मारा और उसके शरीर में बहुत चोटें आई हैं.मैं बहुत व्याकुल हो गया यह सुन कर… लेकिन अपने को कुछ करने में बिल्कुल असमर्थ पाता था.मैंने फुलवा से पूछा- क्यों मारता है वो उसको?वो बोली- सुना है कि वो उस को बाँझ बुलाता है. कह रहा था एक दो महीने में अगर उसके बच्चा होने के आसार नहीं हुए तो वो दूसरी शादी कर लेगा. अब बताओ छाया क्या करे?
मैंने कुछ सोचते हुए कहा- अगर छाया को मैं चोदू हर रोज़ तो हो सकता है कि छाया को गर्भ ठहर जाए जैसे कि तुमको हो गया था.‘लेकिन आप तो छाया को रोज़ ही चोदते थे न? फिर उसके तो बच्चा नहीं ठहरा?’‘फुलवा, मैं छाया को चोदते टाइम अक्सर बाहर छूटा लेता था, बहुत कम ही अंदर छुटाया था. तुम एक काम करो, छाया से पूछो कि उसका पति कब शहर जाता है?’उसने कहा- आज ही पूछती हूँ! वैसे भी मेरी माहवारी शुरू हो गई है सो तुम्हारे साथ चुदाई तो हो नहीं सकती. कल दोपहर को मिलते हैं.

अगले दिन जब स्कूल से वापस आया तो वो बोली- छाया कह रही थी की कल शायद 2-3 दिनों के लिए शहर जा रहा है, छाया का पति. अब बोलो, क्या करना है आगे?
मैंने कहा- हमारी एक बड़ी अच्छी छोटी सी कुटिया है जंगल में… जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. कल तुम दोपहर को छाया को लेकर आ जाना वहाँ, बाकी बात वहीं करेंगे. और देखो वो जगह यहाँ से सिर्फ 2 मील है और तुमको वहाँ का रास्ता हवेली का दरबान बता देगा. ठीक है?
स्कूल से आकर खाना खाने के बाद मैं अपनी साइकिल पर बैठ कर 10 मिनट में वहाँ पहुँच गया और चाबी से दरवाज़ा खोल कर अंदर आ गया.कॉटेज बोलते थे हम सब इस सुन्दर सी कुटिया या कॉटेज को, और जिसमें कभी कभी पापा जब अपने मित्रों के साथ ऐश मौज करने की इच्छा होती तो वो इस कॉटेज में आ जाते थे जहाँ सारे इंतेज़ाम पहले से किये रहते थे.
यह बड़ी एकांत जगह थी और पूरे साज़ो सामान से सजी थी. एक ड्राइंग रूम और दो बैडरूम थे जिनमें सुन्दर सोफे और पलंग बिछे थे. पीने के लिए हर किस्म की शराब वहां रखी थी लेमन सोडा और भी कई पीने के शरबत रखे थे.यहाँ दिन रात चौकीदार रहता था जिसको मैंने पटाया हुआ था, उसको 10 रुपये दे देता था यदा कदा और वो उसी में खुश रहता था और मेरे लिए छोटे मोटे काम कर दिया करता था.
उससे मैंने पहले ही थोड़ी सी बर्फ मंगवा के रखी थी आर 3-4 लेमन सोडा की बोतलें ठंडी करने के लिए रख दी थी.
आधे घंटे बाद छाया और फुलवा दोनों आई.जैसे ही छाया अंदर घुसी और दरवाज़ा बंद हुआ मैंने झपट कर छाया को बाहों में बाँध लिया और लगातार उसको चूमता रहा और जल्दी से उसकी धोती उठा दी और अपना लौड़ा जो पूरी तरह से खड़ा था उसकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा.
छाया मेरे उतावलेपन को समझती थी, वो स्वयं ही पलंग पर लेट गई और अपनी धोती ऊपर उठा दी और अपने मम्मे ब्लाउज से निकाल दिए और मैंने बिना देरी के लंड उसमें डाल दिया और तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा.
उस वक्त मैं नैना के सिखाये हुए सारे सबक भूल गया और छाया को चोदने में एकदम लीन हो गया और जब छाया का पहली बार छूटा तब मुझ को होश आया और मैंने अपनी स्पीड नार्मल कर दी और जब छाया दूसरी बार छूटी तो मैं उसके ऊपर से उतर कर उस के पलंग पर लेट गया.
तब छाया मुझको बेहद प्यार से चूमने लगी.जब हम दोनों थोड़ा संभले तो मैंने बात छेड़ी- छाया, अब क्या करें तुम्हारे पति का?वो रोने लगी और अपने पति को बहुत बुरा भला कहने लगी.
तब मैंने उसको रोका और कहा- देखो छाया, रोने से काम नहीं चलेगा, हमको यह सोचना है कि इस मुश्किल का हल क्या है. सच बताओ क्या तुम अपने पति को छोड़ना चाहती हो?वो बोली- छोड़ कर जाऊँगी कहाँ और कैसे जिऊँगी? यह नहीं हो सकता.‘अगर तुम्हारे बच्चा पैदा हो जाता है तो?’‘तो शायद मेरा पति बदल जाए और मेरी इज़्ज़त करने लगे?’‘तो प्रश्न है तुम्हारा बच्चा कैसे पैदा हो? क्या कभी तुमने डॉक्टर को दिखाया है?’
छाया बोली- डॉक्टर? वो क्यों?‘अरे यह देखने के लिए कि क्या तुम्हारे अंदर कोई खराबी तो नहीं? जिसके कारण तुमको बच्चा नहीं हो रहा.’‘नहीं कभी नहीं दिखाया डॉक्टर को.’‘अच्छा कल चलो मेरे साथ, 4 बजे के बाद मैं तुम्हें एक अच्छी सी लेडी डॉक्टर को दिखाता हूँ, वो बता देगी कि तुमको क्या कमी है, बोलो मंज़ूर है?’
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08-04-2021, 12:20 PM,
#24
RE: XXX Kahani मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें
‘अच्छा जैसा तुम कहते हो सतीश… फुलवा भी जायेगी मेरे साथ!’‘ठीक है, कल 4 बजे मुझको बस स्टैंड पर मिलना, ठीक है?’दोनों ने सर हिला दिया और ठंडी लेमन का मज़ा लेने लगी.
अगले दिन मैंने एक टैक्सी का अरेंजमेंट कर दिया और हम तीनों पास के कसबे में गए जहाँ डॉक्टर का नाम मेरे स्कूल के दोस्त ने पहले ही बता दिया था.डॉक्टर की फीस देने के बाद वो दोनों तो डॉक्टर के पास चली गई और मैं बाहर बैठा रहा.
एक घंटे बाद वो दोनों बाहर आई और छाया और फुलवा दोनों मुस्कराते हुई आई और दोनों एक साथ बोली- डॉक्टर साहिब कहती हैं कि सब ठीक है, छाया में कोई खराबी नहीं. और बच्चा कैसे हो इसका भी तरीका बता दिया है. यह भी कहा है कि इसका पति भी अपनी जांच करवाये, हो सकता है उसमें कुछ खराबी हो?
छाया बोली- मुझको पक्का यकीन है कि उसमें ही खराबी है. साला घाट घाट का पानी पीने की आदत है उसको तो वो ही ठीक नहीं है.
हम तीनों ख़ुशी ख़ुशी वापस घर आ गए. छाया अपने घर चली गई और फुलवा मेरे साथ हवेली में आ गई.रात को जब फुलवा मेरे कमरे में आई तो उसने खुल कर सारी बात बताई.फुलवा ने बताया- डॉक्टर साहिबा ने यह भी बताया है की माहवारी के शुरू होने के बाद 10-18 दिन में अगर चुदाई की जाए तो बच्चा अक्सर ठहर जाता है. उन दिनों के पहले और बाद में बच्चा नहीं होता. छोटे मालिक यह बात तो बहुत अच्छी बताई उसने, आगे से हम चुदाई करते हुए इन दिनों में अंदर नहीं छुटाएँगे और बाकी दिनों में अंदर छुटा सकते हैं.वो बड़ी खुश लग रही थी तो उस रात हमने सारी चुदाई के दौरान अंदर ही छुटाया.
फिर मैं बड़ी बेसब्री से छाया की चुदाई का उसके पति द्वारा करने का इंतज़ार करने लगा और फिर फुलवा ने बताया- छाया अब ख़ुशी ख़ुशी उसको चूत देती है जिससे वो बड़ा प्रसन हो गया है.
दो महीने गुज़र जाने के बाद भी जब छाया गर्भवती नहीं हुई तो हमको यकीन हो गया कि उसके पति में ही खराबी है. लेकिन छाया को कैसे गर्भवती बनाएं ताकि उसका पति उसको छोड़ने का विचार छोड़ दे?
उस रात मैंने फुलवा को तरह तरह से चोदा. हर बार से वो पूरी तरह से सखलित हो जाती थी. उसका छूटना अब काफी आम बात हो गया था.वो लंड को डालते ही छूटना शुरू हो जाती थी और थोड़ी देर धक्के मारने के बाद ही वो ढेर सारा पानी छोड़ते हुए ढीली पड़ जाती थी. लेकिन जब मेरा लंड उसके अंदर ही पड़ा रहता था तो वो शीघ्र ही दुबारा तैयार हो जाती थी.यह बात ख़ास तौर से उन दिनों में ज्यादा दिखाई देती थी जब उसके गर्भवती होने के दिन होते थे, वो उन दिनों कुछ ज्यादा ही बेशरम हो जाती थी और बार बार लंड अपने अंदर डालने की कोशिश करती थी.यह देख कर मेरे मन में एक सवाल उठा- क्या छाया के साथ भी ऐसा ही होता होगा.
अगली बार जब छाया का पति शहर गया तो मैंने छाया को कॉटेज में बुला लिया और उसके आते ही उससे पूछा कि माहवारी के बाद कौन सा दिन है उसका?वो बोली- शायद 10वाँ या 11वा दिन है.मैंने कुछ कहा नहीं और फ़ौरन उसके कपड़े उतारने लगा और अपना भी पायजामा उतार कर बिल्कुल नंगा हो गया और उसको भी नंगी कर दिया और फिर मैंने उसको बड़े कायदे से पूरी तरह गरम कर दिया और जब तक उसने हाथ नहीं जोड़े कि अब अंदर डालो लंड को… और नहीं सहा जाता, तब तक मैंने चूत में लंड नहीं डाला.
और जब वो पूरी तरह से गीली हुई चूत को उठा उठा कर मुझ को लंड डालने के लिए कहने लगी, तभी मैंने लंड को चूत के मुँह पर रख कर उसके दाने पर रगड़ा और थोड़ा सा अंदर डाला और छाया ने अपने चूतड़ उठा कर पूरा का पूरा अपने अंदर ले लिया और लगी ज़ोर से नीचे से धक्के मारने.तभी मेरे लंड को महसूस हुआ कि उसके गर्भाशय का मुँह खुलने और बंद होने लगा तो मैंने भी अपनी पिचकारी उसके गर्भ के मुख पर रख पूरी तरह से छोड़ दी और ऐसा लगा कि मेरा लंड उसके गर्भ के मुख में अंदर तक फव्वारा छोड़ रहा है.
छाया की आँखें पूरी बंद थी और उसका शरीर ज़ोर ज़ोर से कांप रहा था और उसके चेहरे पर एक मंद मंद मुस्कान छाई हुई थी.मैंने मन ही मन सोचा कि आज छाया ज़रूर पर ज़रूर गर्भवती हो जायेगी.
थोड़ी देर वो ऐसे ही लेटी रही और फिर उसकी टांगें अपने आप ऊपर उठने लगी और एक हाथ चूत के ऊपर रख दिया ताकि वीर्य सारा का सारा अंदर ही रहे और बाहर न निकले.आधे घंटा तक वो ऐसे ही पड़ी रही.
मैंने पूछा- पति कब वापस आ रहा है?वो बोली- शायद 2 दिन बाद आयेगा? क्यों पूछ रहे हो?‘कल भी आ जाना क्यूंकि मुझको लगता है कि तुम आजकल में ज़रूर गर्भवती हो जाओगी और जब पति आ जाए तो रात उससे भी चुदवाना ताकि उस को शक न हो! ठीक है?’
उसने खुश होते हुए सर हिला दिया और लेमन पीकर अपने घर चली गई.
उसके अगले दिन भी छाया आ गई और इस तरह चोद कर उसको निहाल कर दिया.मुझको यकीन था कि छाया ज़रूर गर्भवती हो जायेगी.

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08-04-2021, 12:21 PM,
#25
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*फुलवा और बिंदू*

जैसे की मुझ को उम्मीद थी कि छाया जल्दी ही गर्भवती हो जायेगी और वैसा ही हुआ. वो शायद उस दिन की चुदाई के बाद से ही गर्भवती हो गई थी क्यूंकि उसको चुदाई में अब बिल्कुल ही आनन्द नहीं आ रहा था.और फिर सबने देखा कि उसके चेहरे पर एक चमक आ गई है जिसको देख गाँव की औरतों ने कहना शुरू कर दिया था कि छाया को लड़का ही होगा.
फुलवा बता रही थी कि छाया का पति भी काफ़ी सुधर गया था, उसकी इज़्ज़त करने लगा था और उसकी अच्छी देखभाल कर रहा था.छाया की इच्छा की पूर्ति देख कर मैं भी बहुत खुश था.
फुलवा के साथ चुदाई अभी भी जारी थी और क्यूंकि फुलवा अब अकेली मेरी देखभाल कर रही थी तो हम दोनों पति पत्नी की तरह रहने लगे थे.पर मेरे मन में शायद यह डर था कि कहीं फुलवा का पति न वापस आ जाए और मुझको फुलवा से भी हाथ धोना पड़े.

मैं अब बड़ी कक्षा में हो गया था और मुझको काफी पढ़ना पड़ता था. इसी कारण मेरा और फुलवा का हर रोज़ का यौन कार्यक्रम नहीं हो पाता था, अब रोज़ की बजाये उसको हफ्ते में 3-4 दिन बार ही चोद पाता था और अक्सर मैं अपना नहीं छूटने देता था, मुझे उसके गर्भवती होने का भय भी लगा रहता था.
एक दिन फुलवा कमरे में आने के बाद अपने बिस्तर को बिछा लेने के बाद मेरे पलंग पर आकर बैठ गई. मुझको ऐसा लगा वो कुछ कहने की कोशिश कर रही है लेकिन किसी जिझक के कारण कह नहीं पा रही.मैंने उसके ब्लाउज बटन खोलते हुए उससे पूछा- फुलवा, कुछ कहना है क्या?
वो बोली- आप बुरा तो नहीं मान जाओगे?‘ऐसी क्या बात है कि मैं बुरा मान जाऊँगा?’‘है ऎसी ही बात.’‘तो बोलो क्या बात है?’‘आप वायदा करो कि बुरा नहीं मानोगे?’‘अरे बाबा नहीं बुरा मानूंगा. बोलो क्या बात है?’
‘मेरी एक सहेली है बिंदू, 5 साल हो गए शादी को लेकिन उसको अभी तक बच्चा नहीं हुआ.’‘तो मैं क्या कर सकता हूँ?’‘नहीं नहीं, मैं आपको कुछ करने के लिए नहीं कह रही!’‘तो फिर?’‘मैं सोच रही थी मैं अकेली आपको पूरी तरह चुदाई में तसल्ली नहीं दे पाती शायद?’‘नहीं नहीं, ऐसा मत सोचना कभी, तुम मेरे लिए काफी हो.’
‘वही तो…’ लेकिन मालकिन कह रही थी कि छोटे मालिक के लिए एक और कामवाली ढूंढनी चाहिए. इसीलिए मैं सोच रही थी कि मेरी सहेली बिंदू को यहाँ आप के काम के लिए रखवा दूँ क्यूंकि पता नहीं कब मेरा पति भी वापस आ जाए? तब आपके पास कोई कामवाली नहीं रहेगी ना!’
‘हाँ कह तो ठीक रही हो, कौन है यह बिंदू?’‘अरे छोटे मालिक देखोगे तो देखते रह जाओगे, बिल्कुल छाया की तरह है उसकी बनावट, और उसका पति भी मुम्बई गया है और लौट के नहीं आ रहा.’‘अच्छा तो कल लाना उसको, मैं देख लेता हूँ उसको?’
और फिर मैंने फुलवा को नंगी करके चोदना शुरू कर दिया, पहले धीरे और फिर बाद में तेज़ी से.वो आम दिनों की तरह 3-4 बार छूट गई और हम नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सो गए.
अगले दिन दोपहर को वो एक काफी अच्छी दिखने वाली लड़की को लेकर आई और बोली- यह बिंदू है मेरी सेहली.मैंने कहा- इसको काम बता दो, अगर इसको वो सब मंज़ूर हो तो मम्मी से बात कर लो.फुलवा बोली- इसको सब समझा दिया है और जैसा हम करती हैं, वैसे ही यह भी करेगी.‘ठीक है, कितनी उम्र इसकी?’‘यह 21-22 की है और 4 साल शादी के बाद भी इसके बच्चा नहीं हुआ अब तक… तो बेचारी बहुत परेशान है.’‘आखरी बार इसका पति कब आया था?’‘2 साल हो गए छोटे मालिक!’‘अच्छा, चलो मम्मी से पूछ लेना और मुझ को बता देना, ठीक है?’
मुझको बिंदू ठीक ही लगी और थोड़ी देर बाद मम्मी फुलवा और नई लड़की बिंदू के साथ मेरे कमरे में आई और बोली- सतीश, यह नई लड़की तुम्हारे काम के लिए रखी है तुम और फुलवा इसको सारा काम समझा देना. ठीक है न?
मैंने कहा- ठीक है मम्मी, लेकिन अब मैं बड़ा हो गया हूँ मुझको कामवाली लड़कियों की कोई ज़रुरत नहीं है.
‘अरे नहीं सतीश, फुलवा बता रही थी कि तुम रात को बहुत डर जाते हो कभी कभी. इसका मतलब है कि तुमको अभी भी बुरे सपने बहुत आते हैं. ये दो लड़कियाँ रहेंगी तुम्हारे पास तो पूरा ख्याल करेंगी तुम्हारा. क्यों लड़कियो? रखोगी न पूरा ध्यान?’‘जी मालकिन!’ दोनों एक साथ बोल पड़ी.
‘अच्छा ठीक है फुलवा, तुम सतीश की पूरी देखभाल करोगी और बिंदू तुम्हारी इस काम में मदद करेगी, दोनों रात इसी कमरे में ही सोना. ठीक है?’दोनों ने सर हिला दिया और फिर मम्मी चली गई.
तब फुलवा बिंदू को काम समझाने लगी. अभी वो बातें कर ही रही थीं, मैं सो गया. शाम को उठा तो फुलवा को आवाज़ लगाई.जब वो आई तो मैं उससे छाया का हाल पूछा.
वो कहने लगी- छाया को बहुत उल्टियाँ आ रही हैं और बेचारी कुछ खा पी नहीं रही है. कह रही थी कि जब तबियत थोड़ी ठीक होगी तो वो आपसे मिलेगी.मैंने कुछ सोचते हुए फुलवा से कहा- देखो मुझको इस नई कड़की के बारे में चिंता हो रही है. क्या तूने चुदाई का कार्यक्रम भी उसको बता दिया था?फुलवा बोली- बताया तो था छोटे मालिक, लेकिन पूरी तरह खोल कर नहीं बताया था.‘क्या तुमने उसको चुदाई के खेल के बारे में बताया था?’वो सर नीचे करके बोली- नहीं मालिक, पूरी तरह से शायद उसको अभी समझ नहीं आया होगा. मैंने तो सिर्फ यह कहा था कि हम दोनों वहाँ मौज करेंगी.‘अरे वाह! उसको समझा देना अभी से… वरना वो हमारे लिए मुसीबत बन सकती है फुलवा!’
मैं परेशान हो गया यह जान कर कि बिंदू की सहमति नहीं हमारे चुदाई कार्यकर्म के बारे में. यानि उसको पूरी बात की जानकारी नहीं है अभी तक.मैं फुलवा को डाँट कर बोला- क्या फुलवा, तुमको यहाँ लाने से पहले उसकी रज़ामंदी ले लेनी थी. खैर तुम अब जाकर उसको समझा देना, अगर कुछ न नुकर करे तो वापस भेज देना या दूसरे काम पर लगा देना. समझ गई न?
फुलवा रुआंसी हो रही थी और जल्दी से बाहर चली गई. रात हुई तो खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेटा ही था कि फुलवा आ गई, साथ में बिंदू भी थी.फुलवा मेरे दूध का गिलास लेकर आई थी और बिंदू पूरा पल्लू सर पर ढक कर खड़ी थी.
फुलवा बोली- छोटे मालिक, आज हम दोनों आप शरीर को दबाएँगी क्यूंकि बड़ी मालकिन कह रहीं थी कि आज आप बहुत थक गए होंगे स्कूल में खेल कर… हम दबाएँ आपको?यह कहते हुए फुलवा ने मेरे को आँख का इशारा किया.
मैंने कहा- ठीक है मैं आज बहुत थक गया हूँ.मैं बीच मैं लेट गया और वो दोनों मेरी बगल में आकर बैठ गई. पहले फुलवा ने शुरू किया और मेरे टांगों को हल्के हल्के दबाना शुरु कर दिया.एक टांग फुलवा दबा रही थी और दूसरी बिंदू दबा रही थी. बिंदू का हाथ बहुत हल्का था जबकि फुलवा काफी ज़ोर से दबा रही थी.मैंने आँखें बंद कर ली.तभी महसूस किया कि फुलवा का हाथ मेरी जांघों को दबा रहा था और बिंदू अभी भी हल्के हाथ से टांग को ही दबा रही थी.मैंने अधमुंदी आँख से देखा कि फुलवा ने बिंदू को इशारे से ऊपर को दबाने के लिए कहा.बिंदू झिझकते हुए अपना हाथ मेरी जांघों तक ले आई, 5-7 मिन्ट ऐसे ही दबाती रहीं दोनों.
तभी फुलवा ने शरारत करते हुए अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और फिर जल्दी से हटा भी लिया.इस हरकत से मेरा लंड अपने आप खड़ा होने लगा और मेरा पायजामा एक तम्बू बनता गया.मैं आँखें बंद किये पड़ा रहा और तब दबी मुस्कान से फुलवा ने बिंदू का हाथ भी मेरे लौड़े पर रख दिया और बिंदू ने झट से हाथ हटा लिया और जांघों पर दबाती रही.फुलवा अब दबाते हुए मेरे लंड से भी खेलने लगी.

कहानी जारी रहेगी.

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#26
RE: XXX Kahani मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें
* और बिंदू की चूत चुदाई *

यह प्रसंग कोई 10 मिन्ट तक चला और तब तक बिंदू की झिझक काफ़ी दूर हो गई थी. अब वो बेझिझक मेरे लंड पर हाथ फेरने लगी और मेरा लंड और अकड़ गया.फुलवा ने जानबूझ कर मेरा पयजामा लंड के ऊपर से खिसका दिया और लंड एकदम आज़ाद होकर लहलहाने लगा.दबी आँख से मैंने देखा कि लंड को बिंदू बड़े अचरज से देख रही है और तब फुलवा के इशारे पर उसने लंड को हाथ में ले लिया और उसको अच्छी तरह देखने लगी और अपने हाथ को ऊपर नीचे करने लगी.
फुलवा एक हाथ से मेरे अंडकोष से खेल रही थी और दूसरा उसने अपनी धोती में डाल दिया और अपनी चूत को रगड़ने लगी.उसने इशारे से बिंदू को भी ऐसा ही करने को कहा, तब बिंदू ने भी एक हाथ अपनी धोती के अंदर डाल दिया.
फुलवा ने मौका देख कर मुझ को इशारा किया और मैंने भी एक हाथ बिंदू की धोती में डाल दिया और सीधा उसकी चूत को छूने लगा.उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी.मेरे हाथ को बिंदू ने रोकने की कोई कोशिश नहीं की और मैं उसके भगनासा को हल्के हल्के रगड़ने लगा.बिंदू अपनी जांघों को बंद और खोल रही थी और काफी गरम हो चुकी थी.
तब फुलवा ने बिंदू को पलंग से नीचे उतारा और उसके कपड़े उतारने लगी, पहले ब्लाउज उतार दिया और फिर धोती खींच दी और फिर पेटीकोट भी उतार दिया.बिंदू ने अपना एक हाथ स्तनों पर रखा और दूसरे से चूत को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी.अब तक फुलवा भी पूरी नंगी हो चुकी थी और मैं भी एकदम नंगा हो चुका था और मेरा लौड़ा पोरे जोबन में अकड़ा था.मैंने देखा कि बिंदू की नज़र मेरे खड़े लौड़े पर टिकी थी.
तब फुलवा ने बिंदू का हाथ मेरे लौड़े पर रख दिया और मेरा हाथ उसको मोटे और गोल स्तनों पर. तब मैंने बिंदू को अपनी बाँहों में जकड़ लिया और उसको होटों को बार-बार चूमना शुरू कर दिया.मैंने अपनी जीभ उसके मुख में डाल दी और उसकी मुंह में गोल गोल घुमाने लगा. एक हाथ मैं उसको मोटे और गोल नितम्बों पर रख कर उनको दबाने लगा.

तब फुलवा हम दोनों को धीरे धीरे पलंग की और ले आई और जैसे ही बिंदू लेट गई मैंने उसकी जांघों को चौड़ा किया और अपने खड़े लंड को उसकी चूत के मुंह पर टिका दिया और धीरे से एक हल्का धक्का मारा और लंड एक बेहद टाइट चूत में पूरा चला गया, उसकी चूत की पकड़ गज़ब की थी.
फुलवा भी अपने मुंह से बिंदू के मम्मे चूस रही थी. तभी बिंदू के मुंह से आहा ऊह्ह्ह के आवाज़ें आने लगी और फुलवा ने झट मेरा रुमाल उसके मुंह पर रख दिया ताकि कोई आवाज़ न निकल सके.बिंदू की चूत इतनी प्यासी हो रही थी कि अब तक वो 3-4 बार छूट चुकी थी लेकिन अभी भी वो नीचे से चूतड़ ज़ोर ज़ोर से ऊपर उठा उठा कर लंड को अंदर लेती थी. उसकी आँखें पूरी तरह से बंद थीं और शायद उसको याद भी नहीं था उसको कौन चोद रहा है.उसका केंद्र बिंदू उस वक्त सिर्फ उसकी चूत थी जिसकी 2 साल की प्यास वो बुझा रही थी.
फुलवा भी उसको उकसा रही थी, कभी उसकी गांड में उंगली डाल कर कभी उसके होटों को चूस कर.तभी बिंदू एक आखिरी झटके से ऐसी छूटी कि ढेर सारा पानी उसकी चूत से निकला और सारे बिस्तर की चादर पर फैल गया.बिंदू अब एकदम ढीली पड़ गई और बिस्तर में आँखें बंद करके पसर गई.
मेरा लंड तो अभी भी खड़ा था, तो मैंने लण्ड मेरे साथ लेटी हुई फुलवा की एकदम गीली चूत में डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा क्यूंकि फुलवा बिंदू की चुदाई देख कर बहुत गरम हो चुकी थी और जल्दी ही झड़ गई, तब मैंने अपना भी छूटा दिया.
बिंदू अभी भी आँखें बंद किये लेटे हुए थी और उसके होटों पर पूरी तरह से यौन सुख की मुस्कान थी.
मैं दोनों के बीच लेट गया और बिंदू के एक सख्त स्तनों को दबाने लगा और धीरे धीरे उसके निप्पल खड़े होने शुरु हो, उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो फिर गीली होनी शुरू हो गई थी.तब मैंने उसका हाथ अपने खड़े लंड पर रख दिया और वो उसको सहलाने लगी. उसने आँख खोल कर मुझ को देखा और मुस्करा कर मेरा शुक्रिया अदा किया.मेरे लंड को खींच कर बताया- आ जाओ, फिर चढ़ जाओ.
मैं भी झट उसकी टांगों के बीच आ गया और एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया. फिर 10 मिन्ट की चुदाई के बाद वो 2 बार झड़ गई.
फुलवा ने उससे पूछा- कैसे लगी छोटे मालिक की चुदाई?उसने शर्म के मारे मुंह पर हाथ रख लिया.

मेरा लंड अभी भी खड़ा था सो मैंने फुलवा को सीधा किया और उसके ऊपर चढ़ गया.फुलवा ने बिंदू का हाथ अपनी चूत के पास रख दिया और लंड के अंदर बाहर जाते हुए उसको महसूस करवाया.फुलवा की चुदाई खत्म करने के बाद मैंने उससे पूछा- आखरी बार तेरे पति ने कब तुझको चोदा था?
वो बोली- 2 साल से ऊपर हो गए हैं, इस बीच मैंने किसी की ओर आँख उठा कर भी नहीं देखा लेकिन छोटे मालिक आपको देख कर पता नहीं क्यों मेरा मन किया कि आप मुझ को चोदें. और आप ने शरीर दबवाने का बहाना बना कर मेरी दिल की मुराद पूरी कर दी.
फुलवा बोली- अगर तू हमारे साथ रहेगी तो रोज़ रात को 3-4 बार चुदेगी छोटे मालिक से. लेकिन याद रख, किसी से कुछ भी नहीं कहना और मन लगा कर छोटे मालिक और मालकिन का काम करती जा… तो बहुत सुखी रहेगी. धन कपड़ा लत्ता और अच्छा खाना मिलता रहेगा. मालकिन खुश होकर इनाम में बड़ी अच्छी साड़ी भी देती हैं और छोटे मालिक भी इनाम देते हैं हम सबको.
थोड़ी देर बाद हम तीनों सो गए और फिर कोई आधी रात को मुझको लगा कि कोई मेरे लंड को छेड़ रहा है.आँख खोलकर देखा तो बिंदू थी जो मेरे लंड के साथ खेल रही थी.मैंने भी उसकी चूत को हाथ लगा कर देखा तो एकदम गीली थी, मैं समझ गया कि इसकी अभी तृप्ति नहीं हुई है और फिर मैंने उसको पहले धीरे और फिर तेज़ी से चोदा, और तब तक नहीं उतरा जब तक उसने तौबा नहीं की.
इस सारी हलचल में फुलवा भी जाग गई और अपनी चूत को रगड़ने लगी. उसकी गर्मी को देखकर मैंने उसको भी चोदा. तब फुलवा ने बिंदू का हाथ मेरे अंडकोष पर रख दिया और उनको दबाने का इशारा करने लगी.
मैं चोद रहा था फुलवा को लेकिन मेरा मुंह तो बिंदू के मम्मों पर था और उसके मोटे निप्पल मेरे मुंह में गोल गोल घूम रहे थे.इस सेक्सी नज़ारे पर मेरा लंड और भी सख्त हो गया था और तब मैंने महसूस किया कि फुलवा भी छूट गई है.
मैं उतर कर बिस्तर पर लेट गया लेकिन मेरे लौड़ा सीधा तना खड़ा था. यह देख कर शायद बिंदू से रहा नहीं गया और वो मेरे लौड़े पर चढ़ बैठी, ऊपर से धक्के मारते हुए उसको कुछ मिन्ट ही हुए होंगे कि वो भी झड़ कर मेरे ऊपर पसर गई.
जल्दी ही सुबह हो गई और वो दोनों मेरे कमरे से निकल कर अपने दैनिक कार्यकर्म में लग गई और मैं बड़ी गहरी नींद में सो गया.

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कहानी जारी रहेगी.

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08-04-2021, 12:21 PM,
#27
RE: XXX Kahani मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें
*फुलवा और बिंदू का लेसबीयन सेक्स*

मैं चोद रहा था फुलवा को लेकिन मेरा मुंह तो बिंदू के मम्मों पर था और उसके मोटे निप्पल मेरे मुंह में गोल गोल घूम रहे थे.इस सेक्सी नज़ारे पर मेरा लंड और भी सख्त हो गया था और तब मैंने महसूस किया कि फुलवा भी छूट गई है.
मैं उतर कर बिस्तर पर लेट गया लेकिन मेरे लौड़ा सीधा तना खड़ा था. यह देख कर शायद बिंदू से रहा नहीं गया और वो मेरे लौड़े पर चढ़ बैठी, ऊपर से धक्के मारते हुए उसको कुछ मिन्ट ही हुए होंगे कि वो भी झड़ कर मेरे ऊपर पसर गई.
जल्दी ही सुबह हो गई और वो दोनों मेरे कमरे से निकल कर अपने दैनिक कार्यकर्म में लग गई और मैं बड़ी गहरी नींद में सो गया.कोई आधे घंटे बाद फुलवा मेरी सुबह की चाय लाई और यह देख कर हैरान रह गई की मेरा लंड तब पूरा खड़ा था.वो दाँतो तले ऊँगली दबाते हुए बोली- कमाल है छोटे मालिक आप का तो अभी भी खड़ा है? यह कैसे संभव हो सकता? मैं जानती हूँ कि आपने रात भर कम से कम 10 बार हम दोनों को चोदा है और फिर भी यह खड़ा है. हाय लखन!!!और उसने हाथ लगा कर पक्का किया कि लंड खड़ा है. लेकिन अजीब बात यह थी कि मुझ को थकावट या कमज़ोरी बिल्कुल महसूस नहीं हो रही थी.

कुछ दिनों बाद मेरे इम्तेहान शुरू होने वाले थे तो मैं दिल लगा कर पढ़ने में लग गया. फुलवा और बिंदू को रात में सिर्फ 1-2 बार ही चोदता था और चुदाई की सारी मेहनत उन दोनों से करवाता था.मैं सर के नीचे हाथ रख कर लेट जाता था और वो दोनों बारी बारी से मेरे ऊपर चढ़ कर अपनी यौन इच्छा पूरी करती थीं. ऐसे करते हुए कुछ दिनों में मेरे पेपर्स खत्म हो गए और अब मैं फिर फ्री था.
अब मैं चुदाई के साथ उन दोनों से उन की अपनी काम तृप्ति के बारे में सवाल करने लगा. जैसे कि अगर दो साल पति नहीं है तो यकीनन उनको काम तृप्ति नहीं मिलती होगी तो कैसे वो अपना गुज़ारा करती थी?दोनों ही इस बारे में बताने से कतरा रहीं थी लेकिन मैंने भी उनको अपनी कसम देकर सच बताने पर मजबूर कर दिया.
पहले फुलवा बोली- पति चुदाई का ज़्यादा शौक़ीन नहीं था और शुरू शुरू में तो रोज़ रात को चुदाई करता था लेकिन 7-8 दिन बाद हफ्ते में दो दिन चुदाई पर आ गया था. उसको चुदाई के बारे कुछ ज्यादा नहीं मालूम था, लंड खड़ा किया और धोती ऊपर उठाई और अंदर डाला और जल्दी जल्दी धक्के मारे और अपना छुटा के उतर जाता और फिर सो जाता था.उसके साथ चुदते हुए मैं एक बार भी नहीं छूटी जैसे छोटे मालिक मुझ को रात में 4-5 छूटा देते हैं, वैसा पति के साथ एक बार भी नहीं हुआ.यह कहते हुए उसकी आँखों से आंसू गिरने लगे.
मैंने पूछा- फिर चूत को कैसे ठंडा करती थी तुम?
वो कुछ बोली नहीं और अपने पल्लू में मुंह छुपाने लगी. उसकी हिचकिचाहट ठीक थी. कोई भी औरत अपना निजी काम क्रिया के बारे में नहीं बताती आसानी से.
मैंने उसको अपनी कसम याद दिलाई, तब उसने बताया- मैं ऊँगली मारती थी चूत में.‘कैसे?’तब उसने चूत में ऊँगली से अपनी भगनासा को रगड़ा और कहा- यह मैं रात को बिस्तर में लेटने के बाद ऐसे चूत को शांत करती थी.मैं बोला- अच्छा, तभी मेरी ऊँगली चूत पर पड़ते ही तुम को मज़ा आने लगता था! और तुम बिंदू क्या करती थी?
बिंदू बोली- मैं भी ऐसे ही करती थी.‘बिंदू, तेरे पति कैसे चोदता तुझको?
बिंदू शर्माते हुए बोली- मेरा पति थोड़ा पड़ा लिखा था और यौन क्रिया के बारे में थोड़ा बहुत जानता था. पहली रात उसने मुझ को बड़े प्यार से चोदा. पहली कोशिश में उसका लंड चूत में जा नहीं पा रहा था तो उसने मेरे चूतड़ के नीचे तकिया रख दिया और थोड़ा सरसों का तेल अपने लंड पर लगा कर धीरे धीरे धक्के मारे जिससे मुझको दर्द तो हुआ लेकिन बहुत ही कम. पहली बार उसके करने पर मैं नहीं छूटी थी लेकिन दुबारा करने पर मेरा छूट गया और उसके बाद वो हर बार मेरा छूटा देता था. लेकिन वो ज्यादा देर कर नहीं पाता था और जल्दी ही छूट जाता था.मैं कोशिश करती थी कि जब वो चोदे तो मैं अपनी ऊँगली से चूत रगड़ती रहती थी ताकि उसके छूटने के साथ ही मेरा भी छूट जाए.
‘उसके जाने के बाद क्या किया तुमने?’‘वही ऊँगली का सहारा लिया लेकिन मेरी एक सहली थी गाँव में, उसने मुझ को एक और ही तरीका सिखाया.’‘वो क्या था?
मैंने और फुलवा ने एक साथ ही पूछा.
वो बोली- जब मेरी सास घर पर नहीं होती थी तो मैं उसको बुला लेती थी और फिर हम दोनों करती थी.
मैंने पूछा- क्या करती थी?
वो बोली- अगर फुलवा मान जाए तो मैं उसके साथ करके दिखा सकती हूँ.
मैंने फुलवा की ओर देखा तो वो हिचकिचा रही थी लेकिन थोड़ी देर बाद बोली- क्या करोगी तुम?‘देख लेना कुछ ख़ास नहीं है यह सब?’‘दोनों नंगी लेटी थी मेरे साथ, मैं बीच में था और वो दोनों मेरे साइड्स में लेटी थीं मुझको एक साइड में आने के लिए कहा और खुद फुलवा की बगल में लेट गई.’
अब उसने हल्के हल्के फुलवा के उरोजों पर हाथ फेरना शु्रू किया और साथ ही अपना मुंह फुलवा के मुंह से जोड़ दिया और उसको पहले हल्की और बाद मैं बड़ी गहरी किसिंग करना शुरू कर दिया. और फिर उसका एक हाथ फुलवा की चूत पर घने बालों के साथ खेलने लगा और उसकी ऊँगली कभी कभी उसकी बालों में छिपी चूत पर चलने लगी.

[Image: 44563.gif]
मैंने नोट किया कि फुलवा भी अब गर्म हो रही थी और बिंदू की चूमा-चाटी का जवाब दे रही थी, उसके भी हाथ बिंदू के चूतड़ों पर फिसल रहे थे और उसकी एक ऊँगली बिंदू की गांड में गई हुई थी.
तभी बिंदू का मुंह अब फुलवा के मम्मों के ऊपर उसके निप्पल को चूस रहा था और उधर फुलवा के चूतड़ ऊपर की ओर उठ रहे थे. अब धीरे धीरे बिंदू का मुंह मम्मों से हट कर उसकी चूत पर टिक गया था.पास जाकर देखा कि बिंदू की जीभ अब फुलवा की भगनासा को चाट रही थी और फुलवा के चूतड़ एकदम ऊपर उठकर अकड़ रहे थे. बिंदू का मुंह और शरीर फुलवा की जाँघों के बीच था और वो अब तेज़ी से फुलवा की चूत को चूस रही थी.
फुलवा के मुख से हल्की सिसकारी निकल रही थी और उसके चूतड़ एकदम ऊपर उठे हुए थे.बिंदू के जीभ अब बड़ी तेज़ी से फुलवा की चूत को चूस रही थी, तभी ही फुलवा का शरीर एकदम अकड़ गया और उसके मुंह से एक ज़ोर सी आआआह्ह्ह् की आवाज़ निकली और उसका सारा शरीर कंपकंपाने लगा.धीरे आवाज़ निकल रही थी- मर गई… मर गई… उईईई उईई…और उसकी जांघों ने बिंदू के सर और मुंह को जकड़ लिया. दोनों ऐसी ही पड़ी रहीं और फिर धीरे से फुलवा की जांघों ने बिंदू का सर और मुंह आज़ाद कर दिया और वो बुरी तरह से निढाल होकर पड़ रही और उधर बिंदू भी ऐसे लेट रही थी जैसे उसका भी पानी छूट गया हो.मैंने बिंदू की चूत को हाथ लगा कर देखा तो वो भी सारी गीली हो रही थी और उसकी चूत से भी सफ़ेद पानी निकल रहा था. दोनों एक दूसरी के साथ लिपट कर लेटी हुई थी.और मेरे लौड़े का भी बुरा हाल था, ऐसा लग रहा था कि अभी फट जाएगा.हम तीनों एक दूसरे के साथ लिपट कर सो गये.

कहानी जारी रहेगी.

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#28
RE: XXX Kahani मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें
*पहली बार चूत चाटी बिंदू की*

बिंदू और फुलवा का आपस का प्रेमालाप देख कर मन बड़ा विचिलत हो गया था.उधर फुलवा को शायद बिंदू के साथ प्रेम बहुत अच्छा लगा क्यूंकि वो भी उसके पीछे पीछे लगी हुई थी. मेरे सारे काम भुला कर बिंदू के पीछे लगी हुई थी.उसको बार बार याद करवाना पड़ रहा था कि मेरे स्कूल के कपड़े निकाल दो, मेरा नाश्ता इत्यादि ला दो लेकिन वो तो बिंदू की दीवानी हो कर उसके पीछे पीछे घूम रही थी.मैं हैरान था कि यह फुलवा को क्या जनून चढ़ा हुआ था… सोचा कि स्कूल से आ कर पूछूंगा.
स्कूल से आया तो देखा की फुलवा की आँखें तो बिंदू के ऊपर ही टिकी और उसके चेहरे से लग रहा था कि वो बिंदू की आशिक हो गई थी.मैंने फुलवा को बुला कर पूछा- क्या हुआ है उसको?वो बोली- कुछ नहीं हुआ है.‘तो फिर यह बिंदू की दीवानी हुई क्यों घूम रही हो?’वो बोली- नहीं तो. मैं तो वैसे ही हूँ जैसे कल थी.
‘अच्छा तो फिर तुम बिंदू के पीछे पीछे क्यों घूम रहीं हो?’‘वो क्या है उसको काम बताना पड़ता है न, नई है न!’कहीं रात की उसका मुंह चुसाई ज्यादा अच्छी लगी क्या?‘नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं.’‘चलो ठीक है, खाना खाने के बाद आना दोनों मेरे कमरे में!’
खाना खाने के बाद वो दोनों आई और नीचे चटाई बिछा कर लेट गई.फुलवा जो मेरे संग ही लेटी रहती थी, आज वो बिंदिया के साथ लेट गई और लेटते ही उसके होटों को चूमने लगी.बिंदिया तो मुझको देख रही थी, मैंने उसको आँख का इशारा किया कि वो फुलवा के साथ लगी रहे.
फिर फुलवा ने उसका ब्लाउज खोल दिया और उसके मम्मों को चूसने लगी.बिंदिया ने भी उसकी धोती को उल्टा दी और उसको नंगी कर दिया और वो फुलवा के साथ वैसे ही खेलने लगी जैसे एक मर्द औरत के साथ खेलता है.

तभी फुलवा अपनी चूत उघाड़ कर बिंदू के मुंह की तरफ बार बार लाने लगी.अब बिंदू ने फुलवा की चूत को चाटना शुरू कर दिया और फुलवा के मुंह से हलकी सी सिसकारी निकलने लगी, यह नज़ारा देख कर मैं भी अपना आप खो रहा था और कपड़े उतार कर मैं भी खड़े लंड को लेकर दोनों के साथ लिपट गया.
जाने क्या सूझी कि मेरा मुंह बिंदू की खाली चूत की तरफ बढ़ गया और पहले उसको सूंघा और फिर जीभ उसकी चूत पर टिका दी और हाथों से बिंदू के मम्मों को मसलने लगा.जीभ का जैसे ही बिंदू की चूत पर लगना था कि वो अपनी कमर उठा कर मेरे मुंह को चूत में घुसाने के कोशिश करने लगी.मैं भी लपालप जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा.उसके चूत में से बड़ी मादक ही सुगन्धि आ रही थी, मैं एकदम पागल हो गया और एक ऊँगली को बिंदू की चूत में डाल कर गोल गोल घुमाने लगा और जीभ से उसका भग्नासा चूसता रहा..
थोड़ी देर में ही बिंदू ज़ोर ज़ोर से काम्पने लगी और उधर फुलवा भी झड़ चुकी थी और बिंदू के मुंह को चूत में घुसड़ने की कोशिश कर रही थी.मेरा तो छूटा नहीं था तो मैंने अपना खड़ा लंड बिंदू की टाइट चूत में डाल दिया और तेज़ी से धक्के मारने लगा.मैं इतना उत्तेजित हो चुका था कि कुछ धक्कों में ही मैंने फ़व्वारा बिंदू की चूत में छोड़ दिया.हम तीनों एक दूसरे से चिपके हुए लेटे थे, एक अजीब सी खुमारी हम तीनों पर छा गई थी.
कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद हम उठ कर बैठ गए और दोनों लड़कियाँ बाहर चली गई, शायद नौकरों के गुसलखाने की ओर गई होंगी.उनके जाने के बाद मैं बड़ी गहरी नींद में सो गया.
रात को मैंने फुलवा से पूछा कि आज क्या बना है खाने में?तो वो बोली- आज तो सिर्फ दाल सब्ज़ी है.मैंने फुलवा को कहा कि वो रसोइये को बुलाये, मैंने उससे कुछ कहना है.
जब रसोइया आया तो मैंने उसको डांट कर कहा- यह क्या आप रोज़ दाल सब्ज़ी बना देते हो? कभी कुछ मुर्गा शुर्गा भी बनाया करो ना.हमारा रसोईया थोड़ा बुज़ुर्ग था, वो बोला- छोटे मालिक, हुक्म करो, जो कहो बन जाएगा. वैसे मालिक और मालिकन तो बाहर खाना खा रहे हैं.
‘अच्छा तो ऐसा करो कि एक पूरा तंदूरी मुर्गा बना दो और मुझ को रात को परोस देना मेरे कमरे में, साथ में कुछ नान भी बना लेना. ठीक है?’
वो सर हिलाते हुए चला गया.उसके जाने के बाद मैंने फुलवा को कहा- रात को तुम दोनों खाना मेरे कमरे में मेरे साथ खाओगी.वो भी मुस्कराते हुए चली गई और मैं भी रात को आने वाले आनन्द के बारे में सोचते हुए अपनी पढ़ाई में लग गया.
रात को दोनों आ गई. फुलवा ने तो वही सादी धोती पहन रखी थी लेकिन बिंदू काफी रंगदार साड़ी पहने हुए थी.
फिर फुलवा गर्म गर्म तंदूरी मुर्गा ले आई और साथ में नान.हम तीनों ने जी भर के खाया.फुलवा ने पहले कभी नहीं खाया था ऐसा मुर्गा लेकिन बिंदू ने खाया था क्यूंकि क्योंकि उसका पति शौक़ीन था.खाने के बाद हम तीनों ने सोडा लेमन भी पिया.
फिर हम बातें करने लगे और बातों में ही बिंदू ने बताया कि उसकी सहेली चंदा भी चुदवाने की बहुत शौक़ीन है. उसका पति अक्सर काम धंधे के सिलसिले में बाहर जाता रहता है और हफ्ते भर गायब रहता है और चंदा को तो रोज़ रात को लंड चाहिए ऐसा वो खुद कहती है.‘अभी तक उसके कोई बच्चा नहीं हुआ. छोटे मालिक… अगर बुरा न माने तो उसको भी प्रेमरस पिला दो थोड़ा सा?’
मैं हैरान हो गया कि यह क्या कह रही है? मेरे घर वालों या गाँव वालों को पता चला तो वो मुझको मार देंगे, ऐसा विचार मेरे मन में आया ‘क्या मैं एक सरकारी सांड हूँ जो हर एक गाय पर चढ़ जाता है?’मैंने साफ़ मना कर दिया, मैंने बिंदू को कहा- देख बिंदू, तेरे साथ मेरा सम्बन्ध बना फुलवा के कारण. उसने बताया था कि तुम भी लंड की बहुत प्यासी हो तो मैं मान गया. लेकिन चंदा का घर वाला यहीं है, उसने पकड़ लिया या उसको पता लग गया तो अनर्थ हो जायेगा.
बिंदू बोली- नहीं मालिक, आप उसको किसी ऐसी जगह बुला सकते हैं जो कम लोगों को मालूम हो?‘वो तो मैं कर सकता हूँ. लेकिन इसके बारे में सोचना पड़ेगा. अच्छा मेरे इम्तेहान खत्म होने दो उसके बाद देखेंगे.’‘अच्छा बिंदू यह बताओ, तुम्हारा पति तो तुम को अच्छा चोदता था फिर भी तुमको बच्चा क्यों नहीं हुआ?’बिंदू बोली- क्या मालूम छोटे मालिक, मैंने तो सरकारी अस्पताल में भी दिखाया था और उन्होंने तो कहा था कि सब ठीक है. लगता है मेरे मर्दवा ही में कुछ कमी है.‘कब आ रहा है तेरा मर्द?’‘शायद अगले महीने आ जाएगा.’
‘अच्छा और फुलवा, तेरा मर्द कब आ रहा है?’‘वो तो किसी टैम आ सकता है, छाया का पति बता रहा था कि वो भी छुट्टी ले रहा है और जल्दी आ जाएगा.’‘मेरा क्या होगा तेरे बिन फुलवा?’‘क्यों छोटे मालिक, मेरे बाद बिंदू है न… आपकी हर तरह की सेवा करेगी. क्यों बिंदू करेगी न? वैसे बिंदू छोटे मालिक हर तरह तेरी मदद करेंगे, पैसे और कपड़े लत्ते से, क्यों छोटे मालिक करोगे न?मैंने कहा- यह भी कोई कहने की बात है. फुलवा, ला वो मेरा बटुवा दे.
फुलवा ने बटुवा दे दिया और मैंने दोनों को 100-100 रूपए इनाम में दे दिए.दोनों बहुत खुश हो गई, वो अपनी चटाई पर सो गईं और मैं पलंग पर सो गया, लेटे हुए सोचने लगा अगर बिंदू के बाद यह चंदा भी मिल जाती है तो क्या फर्क पड़ता है. फिर ख्याल आया कि चंदा काफी खाई खेली है यौन के मामले में. कहीं कोई बवाल न खड़ा कर दे मेरे जीवन में क्यूंकि वो काफी चंट्ट लग रही है.मन ही मन फैसला किया कि देखेंगे वक्त आने पर.

कहानी जारी रहेगी.

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08-04-2021, 12:22 PM,
#29
RE: XXX Kahani मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें
‘छोटे मालिक, मेरे बाद बिंदू है न… आपकी हर तरह की सेवा करेगी. क्यों बिंदू करेगी न? वैसे बिंदू छोटे मालिक हर तरह तेरी मदद करेंगे, पैसे और कपड़े लत्ते से, क्यों छोटे मालिक करोगे न?मैंने कहा- यह भी कोई कहने की बात है. फुलवा, ला वो मेरा बटुवा दे.
फुलवा ने बटुवा दे दिया और मैंने दोनों को 100-100 रूपए इनाम में दे दिए.दोनों बहुत खुश हो गई, वो अपनी चटाई पर सो गईं और मैं पलंग पर सो गया, लेटे हुए सोचने लगा अगर बिंदू के बाद यह चंदा भी मिल जाती है तो क्या फर्क पड़ता है. फिर ख्याल आया कि चंदा काफी खाई खेली है यौन के मामले में. कहीं कोई बवाल न खड़ा कर दे मेरे जीवन में क्यूंकि वो काफी चंट्ट लग रही है.मन ही मन फैसला किया कि देखेंगे वक्त आने पर.
15 दिन के समय के बाद मेरे इम्तेहान खत्म हो गए और मेरे हिसाब से मेरे पर्चे अच्छे हुए थे और मुझ को उम्मीद थी कि मैं अच्छे नंबरों से पास हो जाऊंगा और फिर शायद मुझ को शहर जाना पड़ेगा कॉलेज की पढ़ाई के लिए.अभी रिजल्ट आने में दो महीने का समय था तो मैं काफी रिलैक्स हो गया और रोज़ रात को फुलवा और बिंदू की चुदाई जम के कर रहा था.
बिंदू ख़ास तौर से हैरान थी मेरी यौन शक्ति देख कर क्यूंकि उसका पति तो रात में एक बार झड़ कर सो जाता था और फुलवा का पति भी हफ्ते में 2-3 बार छूटा कर थक जाता था, दोनों का लौड़ा भी दुबारा नहीं खड़ा होता था.बिंदू कहती थी कि छोटे मालिक शायद एक समय में 10-15 औरतों को चोद सकते थे और वो भी बिना थके!
अब मैं सोचता हूँ कि वाकयी ईश्वर की मुझ पर बेइंतेहा कृपा रही जिन्होंने मुझ में इतनी अधिक यौन शक्ति दी.कुछ लोग सोचते थे कि मैं अभी पूरा जवान नहीं हुआ था तो मेरी यौन शक्ति अभी तो बहुत ज्यादा थी लेकिन जवानी की दौड़ में हल्की पड़ जायेगी.लेकिन मुझको यकीन था कि ऐसा नहीं होगा और मैं सारी उम्र चुदाई के मामले में पूरा सक्षम रहूँगा. मेरी यह धारणा जीवन में आगे चल कर पूरी तरह खरी उतरी. मैं काफी उम्र होने के बावजूद भी यौन क्रिया के मामले में जवान ही रहा.

अब बिंदू मेरे पीछे पड़ गई कि चंदा का भी कल्याण कर दूँ.मैंने कहा- एक दिन चंदा को मिलवा तो दो?
तब बिंदू और फुलवा उसको लेकर हमारी कॉटेज आई. उसको देखा तो पाया कि वो बहुत ही तीखे नयन नक्श वाली सांवली सी औरत है, उम्र होगी कोई 25 के आस पास, सुन्दर सुडौल शरीर अच्छी तरह बाल बनाये हुए थे. सुन्दर साड़ी पहनी थी उसने.
मुझको देखकर ही कहने लगी- अरे यह तो छोटे लल्ला हैं. यह क्या करेंगे री बिंदू?बिंदू बोली- दीदी, इनका कमाल दखोगी तो दांतों तले ऊँगली दबाओगी. उम्र में ज़रूर छोटे हैं, लेकिन बाकी कामों में बहुत बड़े हैं. क्यों फुलवा?फुलवा बोली- सच कह रही है बिंदू!‘बस रहने दो. अपने लल्ला की ज्यादा बड़ाई न करो तुम दोनों!’
चंदा की बातें सुन कर मुझ को बड़ा गुस्सा आ रहा था, मैंने कहा- छोड़ो जी, आओ ठंडा शरबत पीते हैं. फुलवा बना तो हम सबके लिए शरबत?शरबत पीने के बाद चंदा बोली- कुछ नमूना देख लेती तो तसल्ली हो जाती.फुलवा को अब बहुत गुस्सा आने लगा और गुस्से में बोली- रहने दो दीदी, यह काम तुम्हारे बस में नहीं है. तुम शरबत पियो और जाओ. नमूना हम दिखा देंगी कभी!बिंदू बोली- दीदी, ऐसा करते हैं हम दोनों अपना काम शुरू करते हैं और फुलवा और छोटे मालिक अपना काम शुरू करते हैं ठीक है क्या?
चंदा ने सर हिला दिया, तब हम सब बड़े बैडरूम में चले गए और वहाँ बिंदू चंदा को नग्न करने में लग गई और फुलवा मुझको, और फिर हम सब नंगे हो गए तो मैंने देखा कि चंदा का जिस्म एकदम सख्त और सुडौल है. उसके मम्मे बहुत अधिक मोटे लेकिन सख्त थे और पेट भी एकदम पतला और स्मूथ था और उसके चूतड़ बहुत मोटे और गोल थे.
चंदा ने जब मेरा खड़ा लंड देखा तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गई. उसकी नज़र उस पर टिकी थी और फुलवा मेरे लंड को जानबूझ कर हवा में लहलहा रही थी.चंदा बिंदू को छोड़ कर मेरे और फुलवा के पास आ गई और मेरे लंड को पकड़ लिया, उसको बड़े प्यार से इधर उधर करने लगी लेकिन फुलवा ने उसका हाथ हटा दिया और वो लेट गई और मुझ को अपने ऊपर लिटा लिया.
मैंने भी अपना लंड फुलवा की गीली चूत में डाल दिया और पहले हल्के और फिर ज़ोर के धक्के मारने लगा.मेरी कमर की स्पीड इतनी तेज़ हो जाती थी जब पूरे ज़ोर की चुदाई शुरू करता था कि कई लड़कियों की सांस फूलने लगती थी.फुलवा के मुख से हल्की सी आवाज़ निकली और वो ढेर सारा पानी छोड़ती हुई झड़ गई.यह सारा नजारा चंदा नज़दीक से देख रही थी.
मैंने भी लंड चूत से निकाले बैगैर ही फुलवा की फिर चुदाई शुरू कर दी. अब मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और फिर पूरा लंड बाहर निकाल कर फिर उसके अंदर डालने लगा.हर बार 7 इंच का लौड़ा पूरा बाहर आता और फिर उसको अंदर धकेल देता.
फुलवा की चूत से रस टपकने लगा और बिंदू उस रसको ऊँगली में लेकर चाटने लगी. चंदा का एक हाथ उसकी बालों से भरी चूत में गया हुआ था और वो बहुत ज़ोर ज़ोर से अपनी भग्न रगड़ रही थी.
मैं आँखों की कोर से देख रहा था कि चंदा अब बहुत बेसब्र हो गई थी और उसने फ़ुलवा और मुझ को हटा कर अपने आप घोड़ी बन बैठी थी और मेरा लंड अपनी चूत में डाल दिया था और खुद ही वो आगे पीछे होकर धक्के मारने लगी.
उसकी चूत इतनी टाइट नहीं थी और पनिया गई होने के कारण उस में से फुच फुच की आवाज़ें आ रही थी. वो यह सब देख कर इतनी गर्म हो चुकी थी क़ि वो 15-20 धक्कों में ही झड़ गई.लेकिन मैंने भी अपना लंड उसकी चूत से नहीं निकाला और फिर चोदना चालू हो गया.
ऐसे वो चार बार छुटी और फिर हाथ जोड़ने लगी कि छोटे मालिक निकाल लीजिये बस अब और नहीं तब मैंने ज़ोरदार चुदाई के बाद अपना छूटा लिया और साइड में लेट गया.
तब बिंदू और फुलवा ने मुझ को दबाना शुरू किया जैसे कि मैं लम्बी दौड़ के बाद बहुत थक गया हूँ. चंदा के मुख पर हैरानी साफ़ दिख रही थी.कुछ देर चुप रह कर बोली- छोटे मालिक आपको यह सब सिखाया किसने? क्यूंकि आप जिस तरह से यह काम करते हैं उससे लगता है कि आपको सिखाने वाली खुद भी काफी माहिर थी. उसने आप को काफी अच्छी ट्रेनिंग दी है..
‘थैंक यू… लेकिन सुना है आप तो औरतों के बीच के सम्बन्ध की माहिर हैं?’‘नहीं छोटे मालिक, मैं तो जब लंड नहीं मिलता तो गाँव वाली अनजान स्त्रियों को यह तरीका बताती हूँ बस और कुछ नहीं.’‘गाँव वाली बेचारी औरतों को वर्षों अपने पतियों के बिना रहना पड़ता है तो उनको अपनी इच्छा को मारना पड़ता है या फिर ऊँगली का सहारा लेना पड़ता है. लेकिन स्त्रियों का आपस का प्रेम उनको पथ भ्रष्ट होने से रोकता है ऐसा मेरा विश्वास है. क्यों बहनो, क्या मैं ठीक कह रही हूँ?’
दोनों ने सर हिला दिया और फिर हम सब विदा हो गए और यह प्रण लिया कि एक दूसरे के भेद नहीं बताएँगे किसी को.मुझको इससे तसल्ली हो गई.इस बीच मेरा बिंदू और फुलवा का खेल चलता रहा.अब दोनों को मुझसे चुदने की जैसे आदत पड़ गई थी, वो दोनों रोज़ रात को हाज़िर हो जाती थीं और पूरी शारीरिक भूख को समाप्त कर के ही जाती थी हर रोज़ और साथ में मुझ से हर महीने की इनाम की रकम भी लेती रहीं.
जैसा कि अनुमान था फुलवा का पति भी लौट आया विदेश से, और उसका मेरे पास आना भी कम हो गया और अब सिर्फ मैं और बिंदू रह गए थे.
कुछ दिन बीतने के बाद फुलवा आई मेरे पास और बोली- छोटे मालिक, जैसे आपने छाया को गर्भवती बनाया वैसे मैं भी बनना चाहती हूँ.मैंने हँसते हुए कहा- कुछ नहीं किया पति ने?‘नहीं करता तो है लेकिन मैंने महसूस किया है कि उसका वीर्य पानी की माफिक पतला है तो बच्चा होने की कोई सम्भावना नहीं है, साला 5 मिन्ट में ही झड़ जाता है और मेरी भी तसल्ली नहीं होती ज़रा सी भी.मैंने पूछा- कितने दिन हो गए माहवारी को?वो बोली- आज 14वाँ दिन है, अगर आप मुझ को दो दिन लगातार चोदो तो शायद मैं भी गर्भवती हो जाऊँगी.
मैंने बिंदू को बुलाया और उससे कहा- देख बिंदू, मैं और फुलवा वही काम करने वाले हैं, तुम ज़रा ध्यान रखना.दोपहर का टाइम था तो मैंने शांति से फुलवा को दो बार चोदा और दोनों बार अपना वीर्य उसके अंदर छुटाया.
थोड़ी देर रुकने के बाद वो चली गई और जाने से पहले मैंने उसको कल भी आने को कहा.इस तरह दो दिन मुझ से चुदने के बाद वो फिर नहीं आई और एक महीने के बाद सुना कि फुलवा के भी पैर भारी हैं और फुलवा बड़ी खुश थी इस खबर से.
फुलवा के आने वाले मेहमान की खबर पूरे गाँव में फैल गई और सब औरतें उसको बधाई देने लगी क्यूंकि वो पूरे 3 साल शादी के बाद माँ बन पाई थी.

कहानी जारी रहेगी.

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08-04-2021, 12:22 PM,
#30
RE: XXX Kahani मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें
नई लड़की बसन्ती मेरे कमरे में सोई
पहले छाया और अब फुलवा दोनों ही गर्भवती हो गई तो मुझको ऐसा नहीं महसूस हुआ कि उन दोनों को गर्भवती करने में मेरा कोई रोल है लेकिन एक दिन छाया और फुलवा मुझको मिलने आई उसी कॉटेज में, दोनों के चेहरे चमक रहे थे और दोनों बेहद खुश थी.छाया का चौथा माह चल रहा था और फुलवा अभी तीसरे माह में थी, दोनों ही मेरा आभार प्रकट कर रही थीं लेकिन मैं नहीं मान रहा था कि दोनों को गर्भवती मैंने बनाया है. मैं उनके पतियों को ही अपनी पत्नियों को गर्भवती करने का पूरा श्रेय देता था.
अब बिन्दू के साथ मेरा काम वासना का खेल चलने लगा. पहले वो मुझको फुलवा के साथ बंटाती थी लेकिन अब वो अकेले ही मेरे साथ यौन क्रीड़ा करने लगी.मैं भरसक कोशिश करता कि मैं बिन्दू के अंदर न छुटाऊँ लेकिन कभी कभी थोड़ा सा पानी उसकी चूत में छूट जाता था. मुझको डर लगा रहता था कि कहीं वो गर्भवती न हो जाए.बिन्दू अब काफी ज़ोर डालने लगी थी कि चंदा को भी चोदा करूँ!‘कहाँ चोदूँ उसको?’‘वहीं उस कॉटेज में और कहाँ!’
मैं चंदा से डरता था क्यूंकि वो उम्र की 24-25 की थी और दूसरे वो अपनी उम्र से बड़ी लगती थी. उसकी शक्ल में भोलापन नहीं था. बिन्दू के मन में शायद उसको मेरे से गर्भवती करवाने का प्लान था जो मुझको मंज़ूर नहीं था.

तभी चंदा ने कुटिल चाल खेली, वो अपनी कुंवारी छोटी बहन को मेरे पास भेजने की कोशिश करने लगी.वो भी मैं ने मंज़ूर नहीं किया.अब बिन्दू ने मुझको कहना छोड़ दिया और खुद मुझसे रोज़ चुदती रहती थी.
नतीजा निकलने में कुछ दिन ही बचे थे कि पड़ोस के गाँव से एक औरत अपनी लड़की के साथ मेरी मम्मी से मिलने आई.बाद में पता चला वो अपनी लड़की को नौकरी दिलवाने मम्मी के पास आई थी.मैं इस बात को भूल गया लेकिन एक दिन बिन्दू नहीं आई क्यूंकि उसको बुखार चढ़ा था.
दोपहर को मम्मी किसी लड़की को लेकर आई और बोली- सतीश, यह नई लड़की आई है और मैंने इसको रख लिया है. यह घर का थोड़ा काम देख लिया करेगी. लेकिन 2-3 दिन बिन्दू नहीं आ पायेगी क्यूंकि उसको बुखार हो गया है इसलिए यह तुम्हारा काम देखा करेगी जब तक बिन्दू नहीं आती. ठीक है न?मैं बोला- ठीक है मम्मी !‘इसका नाम बसंती है. और देख बसंती, तू छोटे मालिक से पूछ लेना कि क्या काम करवाना है, वो बता दिया करेंगे.’यह कह कर मम्मी तो चली गई.बसंती वहीं पर खड़ी रही.
मैंने देखा, एक पतले जिस्म वाली 18-19 साल की लड़की सामने खड़ी थी, रंग गंदमी लेकिन चेहरा पतला और बाकी शरीर धोती ब्लाउज में ढका था तो पता नहीं चला कि उसके मम्मे और नितम्ब कैसे हैं.यानि कुल मिला कर मैं कोई ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ था इस नई लड़की से.मैंने उसको छोटे मोटे काम बता दिए और अपने बिस्तर पर लेट गया.
शाम को वो चाय लेकर आई तो उससे बात करने की कोशिश की लेकिन वो ज्यादा उत्साहित नहीं दिखी तो मैंने भी उसको परेशान करना उचित नहीं समझा.रात को खाने के बाद वो डरते हुए कमरे में आई और चुपचाप चटाई बिछा कर और चादर लेकर लेट गई.
तब मैंने उस का डर दूर करने की खातिर बात शुरू कर दी.उसने बताया कि वो बगल के एक गाँव में रहती है और 5 जमात तक स्कूल में पढ़ी है और अब अपनी माँ का हाथ घर के काम में बटाती है. उसकी एक छोटी बहिन भी है और एक छोटा भाई भी है, दोनों स्कूल जाते हैं.
रात सोते समय हम कभी कमरे की पूरी लाइट ऑफ नहीं करते थे लेकिन नाईट बल्ब जला कर रखते थे.अचानक मेरी नींद रात में खुली तो देखा की बसंती का हाथ चादर के अंदर हिल रहा था. ध्यान से देखा कि उसकी आँखें बंद थी लेकिन उसका दायां हाथ उस की चूत के ऊपर हिल रहा था.मैं समझ गया कि वो चूत में ऊँगली कर रही है और अपना छूटा लेने की कोशश कर रही थी.फिर उसकी उंगली बड़ी तेज़ी से चलने लगी और फिर एक लम्बी गहरी सांस के साथ उसका हाथ रुक गया.मैं समझ गया की बसंती झड़ गई है.
मेरे को पता नहीं क्या सूझी, मैं चुपके से उठा और उसके पास जाकर बैठ गया और धीरे से उसकी चादर को खींच कर ऊपर कर दी. उसकी धोती एकदम पेट पर चढ़ी हुई थी और उसका हाथ अभी तक बालों भरी चूत के ऊपर था और वो धीरे धीरे हाथ से अभी भी चूत को रगड़ रही थी.लेकिन उस की आँखे बंद थी पर हाथ अभी भी चल रहा था, लगता था कि वो नींद में ही यह सब कर रही थी.
मैंने धीरे से उसका हाथ हटा दिया और अपने हाथ से उसकी भगनासा को दबाने लगा और उसको फिर आनन्द आने लगा.मैं समझ गया कि वो पक्की नींद में है, मैंने अपना पायजामा खोला और खड़े लंड को उसकी चूत पर टिका दिया.तभी देखा कि उसने भी झट से अपनी टांगें पूरी खोल कर फैला दी जिस वजह से मुझ को लंड को उसकी चूत में डालने में कोई दिक्कत आई.
मैं लंड डाल कर धीरे धीरे धक्के मारने लगा, मेरा हिलना बस ना के बराबर था, धीरे से लंड अंदर और फिर धीरे से बाहर.कोई 10 मिनट बाद उसका शरीर एकदम अकड़ा और वह पानी छोड़ बैठी.मैं भी चुपके से उस के ऊपर से उतरा और उसके ऊपर पहले धोती और चादर ठीक कर दी और आ कर अपने बिस्तर पर लेट गया और जल्दी ही मैं सो गया.
सवेरे उठा तो बसंती चाय ले कर खड़ी थी और मेरे पायज़ामे की तरफ घूर रही थी.जब मैंने पायज़ामा देखा तो वो तम्बू बना हुआ था और मेरा लौड़ा एकदम अकड़ा खड़ा था.बिना शर्म किये वो मेरे लंड को घूर रही थी.
मैंने झट से चादर को अपने खड़े लंड पर डाल दिया और उसके हाथ से चाय ले ली और उसकी तरफ देखा तो वो मंत्रमुग्ध हुई चादर में छिपे मेरे लंड को ही देख रही थी.मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो ऐसे क्यों कर रही थी. फिर सोचा शायद उस को रात का चुदना याद है और वो आगे बात करना चाहती है.लेकिन वो बिना कुछ कहे खाली कप लेकर चली गई.

कहानी जारी रहेगी
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