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इधर सहेरमे सुबह जब सृतीकी आंख खुली तो खुदको होलमे सोफेपे पाया.. तभी उसे पता चला की कल वो भुमी ओर देवायतके बारेमे सोचते होलमे ही बैठी...
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मंजुला : (जोरोसे) लखन बेटा.. तु जाग गया हे..? चल फटाफट नहाकर नीचे आजा.. तुजे सादीमे नही जाना क्या..?
लखन : (बाथरुमसे) जी भाभीमां.. मे...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २३३
तो नीचेकी ओर आज सृतीकी वजहसे देवुका मुड भी ठीक नही था.. तो तीनो अैसे ही अेक दुसरेसे चीपककर सो...
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जैसे ही लखन ओर पुनमने अेक दुसरेको देखा.. तो पुनम सरमाकर लखनके सामने मुस्कुराने लगी.. ओर लखनने इसारोमे पुनमके ड्रेसकी तारीफ की.. जीसे...
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भुमीका : (चंदाके जाते ही) मंजु.. क्या ये सब सच मे होगा..? इस बात पे तेरी सब सौतने मान गइ..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां आंटी.. आपतो जानती...
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मंजुला : (धीरेसे) मेरी बच्ची.. जीसका डर था वो हो गया.. अब तुम ओर लखन सबकुछ सम्हाल लेना..
पुनम : (गले लगते) जी दीदी.. आप सृती दीदीकी...
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सृती : (थोडा जोरोसे) मम्मी.. ये सब क्या हे..? आपने अैसा क्यु कीया..?
भुमीका : (आस्चर्यसे देखते) बेटा क्या हुआ..? क्या कीया मैने...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २३२
आज पता नही सृतीको देवायतके पास जानेका मन नही हुआ.. तो पुनम करवट लेकर सृतीकी ओर होगइ.. ओर उसे...
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ओर उपरसे दोनोको ये भी नही पता थाकी दोनो कीतनी देर तक चुदाइ कर रहे थे.. लखन जाही रहा था.. तब उसने देखा सरलाके रुमका दरवाजा खुला था.. तो...
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कहातो दोनो कपडे नीकालकर नंगे होगये.. ओर रमाने लखनको पीठके बल लीटा दीया ओर खुद उनकी कमरपे आकर पैर फैलाके बैठ गइ.. दोनो ही कारमे थे तब ही...
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सरला : (मुस्कुराते) आ गया बेटा तु.. चलो.. चलो.. अब हमे घरपे छोडदो..
भुमीका : (थोडा गुस्सा होते) अरी बैठना क्या कबसे घरकी रट लगाये बेठी...
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तो दुसरी ओर लखन भी मंजुको कहेकर सादीमे श्रीधरके घरपे चला गया.. ओर उसने देवायतको सबको लेआनेकी खबर दी.. फीर वो भी अपने यार दोस्तोके पास...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २३१
कहा तो तब चंदाको ये नही पता था.. की अब पुनम ओर धिरेन अलग हो चुके हे.. ओर सब लोग बाते करते...
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नीर्मला : (हसते) लखन बेटा.. अब जाने दो.. कहो.. तुमने यहा घरपे सब सामान सेट करलीया..?
लखन : (मुस्कुराते) हां आंटी.. वो रमा भाभी ओर लता...
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तो आज सुबहसे ही सृतीका मन कही नही लग रहाथा.. उसे आज ना जाने कैसे बैचेनी जैसा लग रहा था.. कल वो सोने तक अपनी मम्मी भुमीकाके बारेमे सोचती...