You are using an out of date browser. It may not display this or other websites correctly.
You should upgrade or use an
alternative browser.
-
उस रात मंजुने देवायतको पुछकर पहेली बार चंदाको नींदकी गोली देकर सुला दीया.. लेकीन फीर भी चंदाको लेकर देवायतका मुड आज ठीक नही था.. तो दया...
-
उनकी आंखसे लगातार पानी बहेने लगा.. वो हांथ पावं मारते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तभी लखनने अेक ओर जटका मारदीया.. ओर अपना पुरा लंड...
-
फीर पुनमने फोन रख दीया तो थोडी देरमे राधीका भी अेक दुल्हनकी तराह सजके आगइ.. ओर आते ही उसने दरवाजा बंध करलीया.. फीर कुछ ही देरके बाद...
-
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २३८
कहेते पुनम सर्मसार होते मुस्कुराते वहासे दोडकर अपने रुममे चली गइ.. तो सबलोग उनको देखकर हसने...
-
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
-
नीलम : (रजीयाकी ओर मुस्कुराते) दीदी.. आज मे भी आपके साथ मम्मीके रुममे सोजाउगी..
रजीया : (मुस्कुराते) हां.. चेन्ज करके आजाना.. आज हम...
-
फीर धिरेन चला गया.. तो लखन उनकी ओर देखते कातील मुस्कान करने लगा.. फीर खडा होकर होस्टेलके कीचनमे चला गया ओर वहा सभी लडकीयोके खानेका जायजा...
-
धिरेनको समजमे नही आरहा था.. की पुनमको डीवोर्स देनेके बाद भी लखन उनके साथ अच्छेसे बात कैसे करता हे..? कही लखन उनके साथ कोइ गेम तो नही खेल...
-
जब जानेका समय हुआ तो सबलोग अेक दुसरेको गले मीलने लगे.. बी्रन्दा जवेरीलालके पांव छुने लगी.. तो जवेरीलालने ब्रीन्दाको आशीर्वाद देते...
-
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २३७
कहेते दोनोने फोन कट करदीये.. फोन रखते ही सृती खुस होते हसने लगी.. जब उनको पता चलाकी लखन उनसे...
-
पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. सच कहु..? वो आपसे कोइ नाराज नही.. बस.. लता दीदीके कहेनेपे आपसे रुठनेका नाटक कर रहे हे.. हें..हें..हें..
सृती...
-
पुनम : (फोनपे) हाइ दीदी.. कैसी हो..?
सृती : (भारी मनसे) दीदी ठीक ही हु.. मे आपहीके फोनका इन्तजार कर रही थी.. कहीये.. कैसी हे आप...
-
राधीका सरमाकर देवायतके पांव छुने लगी.. तो देवायत भी सर्मीन्दा हो गया.. फीर लखनने उनकी सांसको मीलवाया तो देवायतने उनका हाल चाल पुछा.. फीर...
-
दोनो ही रातके अंधेरेमे गांवके बहारकी ओर पैदल चलने लगे.. दोनोमेसे कोइ कुछ नही बोल रहा था.. दोनो चलते गांवके काफी बहार नीकल गये.. ओर अेक...
-
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २३६
पुनम जाने लगी.. तो लखनने उनका हाथ पकडलीया ओर खडा होकर अेक बार फीर पुनमको अपनी बाहोमे भर लीया ओर...