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सृती : (जोरोसे हसते) क्या..? हें..हें..हें.. दीदी.. देखना.. कही वोभी हमारी सासुमां ना होजाये.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते)...
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पुनम : (धीरेसे हसते) कहीअे मेडम.. आज तो मेरी सौतन बहुत खुस लग रही हे..? हें..हें..हें..
सृती : (सरमाते धीरेसे) हां दीदी.. खुस तो...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४६
कहेते सृती सरमाते धीरेसे सलवार घुटनो तक करती हे.. तो लखनको उनकी दिलवाइ रेड चडी दीखाइ देती हे...
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अैसे ही सुबह होगइ.. आजका सुरज अेक परीवर्तनकी नइ उर्जा लेकर नीकला.. लखन सुबह देर तक सोता रहा.. तो राधीका रजीया ओर नीलम जागकर कंपलीट...
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भावना : (सामने घुरते धीरेसे) मील लीया आसीकको..?
लता : (सामने देखते) बेसर्म लडकी.. कैसी आवाजे कर रही थी.. जैसे सचमे चुदवा रही हो...
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लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर वो.. अपनी ब्रा नीकालदो..
पुनम : (सरमाते ब्रा नीकालते) हंम.. पता था.. आप मानोगे नही.. चलो नीकालदी...
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नीलम : (मदहोसीमे आंख बंध करते) ओह.. जीजु.. आइ लव यु.. आज सारी हदे पार करदो.. मे आपके लीये बहुत तडपी हु.. मम्मीकी तराह मीललो मुजे.. बनादो...
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लखन : (मुस्कुराते) क्या बात हे नीलु.. आज तो सामनेसे दोडकर आ गइ..?
नीलम : (सरमाते धीरे) जीजु.. आइ लव यु.. मुजे आपसे प्यार हो गया हे...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४५
कहेते पुनमने फोन रखदीया.. तभी उनको ढुंढती हुइ मंजु वहा आ गइ.. ओर उसने पुनमको लखनके साथ बात...
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
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नीलम : (सामने देखकर मुस्कुराते) जीजु.. बडी मम्मीसे बात हो रही थी..?
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. मेरी मांसे.. वो मां हे मेरी.. नीलु.. तुम...
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लखन : (मुस्कुराते) बस बस.. पहेले खाना खालो.. फीर प्यार कर लेना..
सृती : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. आज आप यही सोजाओनां.. मुजे आपका साथ...
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राधीका : (होलमे आते) अरे.. लखन आप इधर बैठेहो..? फ्रेस नही होना क्या..? चलो आपको मम्मी बुला रही हे.. आपसे कुछ काम हे.. आप फ्रेस होकर...
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तो दोनोने फटाफट अपने कपडे वही नीकाल दीये.. तो लखन वही टेबलपे बैठ गया.. ओर रजीयाको अपनी गोदमे बीठाकर अपना लंड रजीयाकी चुतपे सेट करते घुसा...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४४
कहातो सबाना सरमा गइ.. तो दुसरी ओर जैसे ही साहील सबानाको लेकर चला गया.. तो लखनके घरपे राधीकाकी...