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सृती : (कातील नजरोसे धीरेसे सरमाते) भाइ.. मेरा बर्थडे गीफ्ट..?
लखन : (मुस्कुराते) हां बोलो.. क्या चाहीये..?
सृती : (कातील नजरोसे...
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धीरे धीरे करते दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. बंसीके हर सोटके साथ जागृतीके बुब्स तालमेलमे उछलने लगे.. अब तो जागृती भी कामुक...
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जागृती : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. आज हम दोनोकी सुहागरात हे.. तो क्या मे आपके लीये थोडासा शींगार करलु..?
बंसी : (गोदमे उठाते) नही.. तु...
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जागृती : (सरमाते धीरेसे बुब्सको हाथोसे ढकते) भाइ.. बहुत सरम आ रही हे.. प्लीज.. धीरेस करना.. समज गयेनां..?
बंसी : (हाथ हटाकर बुब्स...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४८
कहातो बंसी कपडे पहेनकर मुस्कुराते जागृतीके रुमकी ओर चला गया.. उनका लंड जटके मारने लगा.. क्युकी...
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
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तो दुसरी ओर रश्मी ओर वंदना भी वापस गांवमे आ गये थे.. तो पुनम ओर लता उनको मीलने चली गइ.. फीर दोनोको देवायत ओर मंजुने कही बदलावकी बात...
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पुनम : (फोन उठाते ही) हेपी बर्थडे माय स्वीटहार्ट.. जन्म दिनकी खुब खुब बधाइ हो.. कैसी हो दीदी..?
सृती : (आंख गीली करते मुस्कुराते)...
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लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अब आपकी सरप्राइजके लीये तैयार होजाइअे..
सृती : (मुस्कुराते) अरे बाबा.. मे तैयार ही हु.. ये पटीतो खोलीये...
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नीलम : (जटसे खडी होकर उपर जाते) दीदी.. मे अभी आइ.. आप बर्तन मत लेना.. मे आकर लेलुगी..
रजीया : (सामने देखते) ये लडकी भीनां.. लता दीदी...
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सृती : (सरमाते धीरेसे) रजुदीदी.. वो.. आज लखन भैया नही आये..? कही बहार गये हे क्या..?
रजीया : (मुस्कुराते) नही.. नीचे ही हे.. वो...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४७
वो इतने दिन वहा रही.. लेकीन अेक बारभी भावनाने उनसे अच्छी तराह बात नहीकी.. उनका देवायतके प्रती...
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सरला : (मुस्कुराते) हां बेटा.. वो वहा खुस हेतो उसे वहा ही रहेने दे.. ओर छोड ये मजदुरनोको.. अब नीलुके बारेमे सोच.. वो भी जवान हो गइ हे...
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तो इधर जबसे रमा घरपे आगइ थी.. तबसे भानु भी रमाकी कइ बार चुदाइ कर चुका था.. फीर भी वो खेतोमे जब कामसे फ्रि होजाता छोटुके रुममे घुस जाता...
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रजीया : (जुठा गुसा करते मुस्कुराते) अच्छा.. होने वाली बीवीका बर्थडे याद हे.. कभी हमारा बथ्रडे तो मनाया ही नही..
लखन : (मुस्कुराते गाल...