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सृती : (सरमाते) ठीक हे दीदी.. अगर आप कहेती होतो मान लेती हु.. करनेदो मजे दोनोको..
लखन : (सामने देखते) यार तुम दोनो हेनां.. मरवाओगी...
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पुनम : (मुस्कुराते) सोरी भैया.. आज ही तुम दोनोकी सादी हुइ हे ओर आज ही रामुकाका चले गये.. तो तुम दोनोकी सुहागरात नही हो सकी..
सृती ...
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देवायत : (मुस्कुराते) तु टेन्शन मत ले.. अेक बार यहा आनेदे उसे.. उनके चाचासे सब बाते कर लुगा.. साहील बहुत ही होशीयार लडका हे.. अच्छा हुआ...
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लता बार बार लखनकी ओर देखती रही.. लेकीन लखनने अेक बार भी लताकी ओर नही देखा.. तो लता खडी होकर भावनाके पास चली गइ.. सृतीने भुमीकाका हाथ...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २६४
तभी लखन भी आकर मंजुका पांव छुता हे.. तो मंजु उसे भी गले लगा लेती हे.. तबतक लता भी सबको गले...
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लखन : (आस्चर्यसे देखते) हमारे बडे भैयाको..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. भानु भाइ ओर भैया अच्छे दोस्त थे तो भैया अक्सर उनके घरपे जाते थे...
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आन भावना लखनसे नजरे चुराते बहुत सरमा रही थी.. उनकी चुत लखनको देखते ही फीरसे फडफडाने लगी.. ये सोचते की लखनने उनको दो घंटे लगातार चौदा था...
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भावना : (सरमाते मुस्कुराते) लखन.. आजसे ये भाभी आपकी हो गइ हे.. आपको मुजसे जब भी मीलनेका मन होतो बता देना.. मे मना नही करुगी.. आजसे मेरा...
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लखन उनके बुब्सको ओर होठोको चुमता रहा.. भावनाका दर्द बहुत जल्द खतम होगया.. ओर सीसकारीया करते अपनी कमर उछालने लगी.. लखन अेक बार फीर...
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तभी अचानक अेक हाथ नीचे लेजाते लखनने भावनाकी चुतपे हाथ रख दीया.. तो भावनाकी सीसकारीया नीकल गइ.. उनकी चुत ओर पनीयाने लगी.. ओर अपना हाथ...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २६३
ओर भावना इस मोकेको गवाना नही चाहती थी.. उनको पता था आज पुनम भी नही हे ओर रजीया दया दोनो साथमे...
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
Bhavna gai.....
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भावना सृती वाले रुममे अपनी बच्चीको लेकर चली गइ.. जहा कल पुनम ओर लखनने सुहागरात मनाइ थी.. सृती लखन अपने रुममे चले गये.. लखनने अपनी गोदसे...
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पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. हो जायेगी नही होगइ हे.. प्यारका इजहार करनेके बाद कल रात हम दोनो पहेली बार मीले.. हमारे बीच सबकुछ होगया...
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पुनम : (मुस्कुराते) क्या वो यहा सीर्फ आपको मीलनेके लीये ही आते थे..? कीसी ओरको नही..?
रा. मम्मी : (मुस्कुराते) तुम भी सब जानती हो...