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लखन : (बेडपे बैठते) हां बोलो..
पुनम : (सामने देखते धीरेसे) सृतीदीका बच्चा गीर गया हे.. ओर इस बातका उसे कोइ अफसोस भी नही हे.. आज कहेती...
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भावीका : (मुस्कुराते) यार होता हे अैसा.. कमसे कम तुजे इतना तो पता हे मेरे पीता कौन हे.. यहा तो वो भी नही पता.. बस.. अेक मां थी.. ओर...
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भुमीका : (गाल सहेलाते) बेटा.. तुमने मेरी सृतीको बचा लीया.. उनको नइ जींदगी दी हे.. वरना उनका क्या होता..? क्युकी उनकी सहेलीने बताया खुन...
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फीर कुछ प्रोसेसके बाद सृतीको लखनका खुन चढाया.. ओर कुछ ही घंटोके बाद सृतीको होस आगया.. तबतक रातके तीन बज चुके थे.. कीसीको पता नही थाकी...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २७३
वो सभी लोग दोडधाम करते सब तैयारीया करने लगी.. अेक नर्स सृतीको पेड लगाते खुन रोकनेकी कोसीस करने...
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दीन बीतने लगे.. अब रश्मी भी अपने नये घरमे जा चुकी थी.. वो ओर वंदना साथ ही रहेने लगी थी.. तो चारु कभी कभी नीशाको लेकर अपने पुराने घरपे...
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श्रीधर : (मुस्कुराते) हां तो आंटी.. अब आप ओर मुना कब सादी कर रहे हे..? आपको भाभी कहेनेका बडा मन कर रहा हे.. हें..हें..हें..
बसंती ...
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ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां बेटा.. बोल.. कुछ काम था..?
जयश्री : (सरमाते धीरेसे) मम्मीजी.. वो.. वो मान गये हे.. पुछ रहेहे कब सादी करनी...
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जयश्री : (मुस्कुराते बात रखते) तो सोचो यही सीचुअेशन अब हमारे घरपे आगइ हे..
श्रीधर : (गभराते सामने देखते) मतलब..?
जयश्री : (गलेमे हाथ...
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बसंती : (मुस्कुराते) आओ जयश्रीबेटा.. इधर बैठ.. हमे तुमसे कुछ बात करनी हे..
जयश्री : (सरमाते मुस्कुराते) जी आंटी.. कहीये..
बसंती ...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २७२
उस रात लखनने रजीया ओर राधीकाकी दो दो बार जमकर बजाइ.. फीर सृतीको लगातार तीन बार जमकर चोदलीया ओर...
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फीर छोडकर कामका बहाना बनाकर घरसे नीकल गया.. ओर सीधा होस्टेलपे आगया.. वो कुछ देर ओफीसमे बैठा.. जब लडकीयोका सोर कम होगया तो धीरेसे उपर चला...
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पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. प्यारसे.. बच्चेका खयाल रखना..
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) सोरी दीदी.. तुम मुजे मना क्यु नही करती..?
पुनम...
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पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सोफेपे बैठकर अपनी चुत साफ करने लगी.. तभी उसे खयाल आयाकी सृती सामने बैठी हे.. पुनमने जटसे अपनी सारीको सही...
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लखन नीचे ही फ्रेस होगया.. पुनम सबकुछ जानती थी.. राधीका होस्टेलपे थी.. तभी सृती भी कार लेकर आगइ.. ओर आते ही उसने लखनको कीस करलीया ओर...