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साहील : (मुस्कुराते) क्यु चीन्ता करती हो.. मे हुनां.. हें..हें..हें..
सायरा : (सामने देखते) मतलब..? मे कुछ समजी नही..
साहील : (सामने...
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सायरा : (आस्चर्यसे सामने देखते) तो क्या अबु कुछ बोले नही..? तुजे डाटा नही..?
साहील : (मुस्कुराते) भाभी.. अब चाचा काफी बदल गये हे.. उनको...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २८१
दोनोके पास सामान ही बहुत कम था.. तो सब पेकींग होगइ.. फीर खाना आगया तो दोनोने खाना खालीया.. ओर...
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सायरा : (मुस्कुराते) भाइ.. अच्छा हुआ तुम थोडी देरके बाद आये.. बडे भैयासे फोनपे बात हो रही थी..
साहील : (गलेको चुमते) क्या केह रहे थे...
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सायरा : (हसते) साहील.. सोचा नही थाकी पहेले ही दीन बात इतनी आगे बढ जायेगी.. ओर तुम मुजे चोदलोगे.. सोचा था धीरे धीरे सुरुआत करुगी.. लेकीन...
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कहेते सायराने साहीलकी कमरमे हाथ डालकर उसे अपने उपर खीच लीया.. ओर साहीलके होठोसे होंठ मीला दीये.. फीर दोनो अेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी...
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जीसे साहील साफ सुन रहा था.. कुछ देर कुछ नही हुआ.. सायराकी आंखोसे नींद गायब थी.. वो सोनेका नाटक करते अैसे ही लेटी रही.. ओर सीनेमा ओर...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २८०
जीसे सायरा बहुत ही सरमाकर हसने लगती.. फीर सायरा खाना बनाने चली गइ.. ओर साहील नहाने चला गया...
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साहील : (मुस्कुराते) हर जगह मतलब कहा..?
सायरा : (मुस्कुराते) कभी गार्डन.. तो कभी मेरी स्कुल बंक करवाके सीनेमा होल.. फीर मोलमे या...
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सायरा : (कातीलाना मुस्कुराते) कमीने.. अब तेरे भैया नही हे.. बहेन मानकर नही बता सकता.. भाभीको तो सब बता सकता हेनां..? बहेनसे सादी कर सकता...
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फीर वो घर आगया तो सायरा साहीलकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. उसे सायराकी आंखोमे अेक अजीबसी चमक देखी.. सायराने फटाफट अपना काम नीपटा लीया...
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कादीर : (अंगडाइ लेते खडे होते) भाइ अब सोते हे.. सुबह रेल्वे स्टेशन भी जाना हे.. तो मुजे बाइकपे छोड देना.. अच्छा हुआ तुम आज ही आगये...
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ओर अबतो तीन दीन वो साहीलके साथ अकेली रहेने वाले थी.. ये सोचते ही सायराकी चुत गीली होने लगी.. जबसे साहील फ्रायडेको आनेकी बात करके गया था...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २७९
इधर गांवमे मुना बसंतीकी सुहागरातके लीये खुद बरखा जागृती सांती ओर ब्रीन्दाने फुलोसे कमरा ओर सेज...
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लखन : (मुस्कुराते) फीर भी.. क्या क्या फर्क पडता हे.. हम दोस्त हे.. आप खुलकर बता सकती हो..
चंदा : (सरमाते नजरे जुकाते) पती चाहे कैसा भी...