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लखन : (नजरे जुकाते धीरेसे) ठीक हे भाभी.. आप सीमा बता दीजीये.. मे इनसे आगे नही बढुगा.. आइ अेम सोरी..
चंदा : (सामने देखते मनमे...
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तो गांवमे भी साहीलके घरपे नीकाहकी तैयारीया गुपचुपसे चल रही थी.. बीचमे सलमाने मौका मीलते ही साहीलको सबकुछ समजा दीया तो साहील सरमाके हसने...
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लखन : (होंठ चुमते) नही.. आज आपकी इमानदारीपे बहुत प्यार आरहा हे.. अेक बार ओर होजाये..?
भावीका : (हसते) क्या ओर होजाये.. अरे बाबा...
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लखन : (सामने देखते) ये क्या बात हुइ..? धोखेके बदले धोखा..?
भावीका : (सामने देखते) तो क्या आप अपनी बीवीओको धोखा नही देते..?
लखन ...
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दुसरी ओर सहेरमे दस बजे लखन उसी होटेलमे चला गया जहा उनको भावीकाने मीलनेके लीये बुलाया था.. लखनने नीचेसे उनको फोन कीया तो भावीकाने उसे...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २८३
उनकी सांस तेज चलने लगी.. फीर वो हल्केसे सरमाकर मुस्कुराइ.. उसे अपनी हसीपे आस्चर्य हुआ.. की आज...
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फीरोज : (सलमाके उपरसे उतरते बैठते) तु कहेना क्या चाहती हे..? की मे तुम दोनोको सम्हालनेमे काबील नही हु..? मत भुल मे असली मर्द हु.. दो...
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इस रात रजीया राधीकाको चोदनेके बाद लखन पुनमके पास चला गया.. पुनम अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. ओर सृती घोडे बेचकर सो रही थी.. लखनने...
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इसी बीच लखन ओर चंदा भी दोस्तीके नामसे काफी करीब आचुके थे.. अब तो दोनो हल्कीसी छेडखानी भी करने लगे थे.. चंदाको फीरसे जींन्दा महेसुस होने...
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श्रीधर : (मुस्कुराते) फीर..?
वृन्दा : (मुस्कुराते) तो फीर क्या..? जवान लडकोको फसाना कौनसा मुस्कील काम हे.. बस.. मेने जीतुको सेट...
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फीर दोनोने साथमे सावर लीया.. तो श्रीधरने वहा भी वृन्दाके मना करनेके बावजुद उनको फीरसे खडे खडे चोद लीया.. ओर वृन्दाको पुरी तराह संतुस्ट...
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फीर श्रीधर वृन्दाके उपर लेट गया.. ओर उनके दोनो हाथके पंजे कसके पकड लीये.. क्युकी वो जानता थाकी आगे क्या होगा.. वो वृन्दाके होठोको चुमने...
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २८२
कहेते तीनो खाने लगे.. जयश्री बच्चेके साथ सो गइ थी.. तभी वृन्दाने ब्रीन्दाकी नजर बचाते श्रीधरकी...
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लेकीन वृन्दाका मक्सद तो कुछ ओर ही था.. उनको तो बस श्रीधरसे गले मीलनेका बहाना चाहीये था.. ओर वो ब्रीन्दासे अलग होते श्रीधरकी ओर घुम गइ...
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दीन बीतने लगे.. अब सृती भी काफी ठीक हो गइ थी.. ओर अेक दीन उसने घरपे आनेकी जीद की.. तो लखन पुनम ओर चंदा मीलकर सृतीको लेकर घर आगये...