अहसास जिंदगी का
हेलो मित्रो,
सीधे कहानी पे आता हूं ।
कहानी में 2 मैन चरित्र है । राहुल और उसकी माँ रमा देवी। राहुल की उम्र21 साल है और माँ 42 साल की है। रमा देवी एक नर्स है जिनके पति की मुत्यु 10 साल पहले कार दुर्घटना में हो चुकी थी। राहुल फार्मेसी की पहले साल में था।
राहुल अपनी माँ के बहुत...
मेरी बहनें मेरी जिंदगी
हेल्लो दोस्तो कैसे है आप बहुत दिनो से थोड़ा बिजी था अब जाकर थोड़ा सा फ्री हुआ हूँ तो मैने सोचा एक कहानी शुरू कर ही देता हूँ मित्रो ये कहानी एक भाई और तीन बहनो की है उनकी जिंदगी में कैसे उतार चढ़ाव आते है यही सब इस कहानी मे दर्शाया गया है वैसे तो इस कहानी को मैने नही...
एक नंबर के ठरकी
ये कहानी है राहुल की. जिसकी उम्र करीब 25 साल है.
कहानी शुरू करने से पहले राहुल की लाइफ का बॅकग्राउंड बता दूँ ..जिससे आपको इसकी आगे की कहानी समझने में मदद मिलेगी.
राहुल पुणे में एक मल्टिनॅशनल कंपनी में काम करता था..और उसे अपने ऑफीस में काम करने वाली एक लड़की से प्यार हो गया...
जब यह सब मादक घटनाएं घटना शुरू हुईं तब मैं काफी छोटा था | अभी अभी किशोर अवस्था में कदम रखा था | गाँव के बड़े पुश्तैनी मकान में मैं कुछ ही दिन पहले माँ के साथ रहने आया था | नौ साल की उम्र से मैं शहर में मामा के यहाँ रहता था और वहीँ स्कूल में पड़ता था | तब गाँव में सिर्फ प्राइमरी स्कूल था , इसलिए...
माँ का चैकअप
दोस्तो ये कहानी दीक्षा ने लिखी है मैं इसे हिन्दी फ़ॉन्ट मे कॅन्वेर्ट कर रहा हूँ और आशा करता हूँ की ये कहानी आपको बहुत पसंद आएगी . इस कहानी का श्रेय इसके लेखक को जाता है मैं तो सिर्फ़ माध्यम मात्र हूँ आपका दोस्त राज शर्मा
"सर !! आप की मदर आई हैं" रिसेप्षनिस्ट जूही ने अपने बॉस ड्र...
साला बहन्चोद कहीं का
अशोक सुबह सुबह जब सो कर उठता है तो उसका लंड एकदम टाइट होता है.....
वो अंगड़ाई लेते हुए अपने लंड को मसलता है ऑर उठ आर जाता है बाथरूम की ओर... वहाँ उसकी बेहन मनीषा झुकी हुई झाड़ू मार रही थी ऑर उसने नाइटी पहनी थी जो कि एक शर्ट ऑर पाजामा था ऑर वो झाड़ू मारती हुई पीछे आ रही थी...
राबिया का बेहेनचोद भाई--1
यू तो मैने जवानी की दहलीज़ पर पहला कदम उमर के चौदह्वे पराव में ही रख दिया था. मेरी छातियों के उभर छोटे छोटे नींबू के आकर के निकल आए थे. घर में अभी भी फ्रॉक और चड्डी पहन कर घूमती थी. अम्मी अब्बू के अलावा एक बड़ा भाई था, जो उमर में मुझसे दो साल बड़ा था. यानी वो भी सोलह...
यह कहानी नहीं बल्कि मेरी सच्ची दास्तां है।
इसे लिखने का उद्देश्य किसी पाठक की यौनेच्छा को जागृत करना नहीं बल्कि उन्हें इस समाज की घिनौने सच्चाई को बेनक़ाब करना है, उन्हें यह बतलाना है कि आज इस समाज में किस तरह से लोग अपने दोस्तों की भोली-भाली, कमसिन बेटियों को फुसलाकर, उसके यौनेच्छा को जगा कर...