कांटा
ब्लू लाइन कंस्ट्रक्शन का शानदार आफिस नेहरू प्लेस जैसे हाई प्रोफाईल कामर्शियल इलाके में एक इमारत की एक तीसरी मंजिल पर स्थित था।
ब्लू लाइन इंस्ट्रक्शन रियल एस्टेट से जुड़ी राजधानी दिल्ली की एक जानी-मानी कम्पनी थी, जिसका मालिक जानकी लाल था।
जानकी लाल उस वक्त अपने आलीशान केबिन में मौजूद था।...
कोमल जी एक और नई कहानी के लिए आपको मुबारकबाद
आप तो प्रतिभाओं का भंडार हो इस कहानी को हिन्दी फ़ॉन्ट में लिख कर आपने अपने पाठक वर्ग पर विशेष अनुकंपा की बरसात की है हम सब आपके आभारी हैं
स्पेशल करवाचौथ
" रूबी प्लीज़ मान जाओ ना मेरी बात समझने की कोशिश करो "
अनूप ने ये बात लगभग गिड़गिड़ाते हुए कही थीं।
रूबी का गुस्सा तो जैसे आज सातवे आसमान पर था इसलिए वो अनूप की तरह गुस्से से पलटी तो अनूप उसकी जलती हुई लाल आंखे देखकर एक पल के लिए तो बुरी तरह से डर गया और अपने आप दो कदम पीछे हट...
देवराज चौहान और मोना चौधरी एक साथ
जथूरा
वो बेढंगा-सा पत्थर था जो कि उस सुनसान सड़क के पचास फीट ऊपर हवा में देर से लहरा रहा था। अजीब-सा पत्थर। इधर-उधर से दो-चार चोंचें बाहर निकली हुई थीं। कहीं से गहरा तो कहीं से उभरा हुआ था। परंतु उसमें एक बात बेहद खास थी, वो थी उसका चमकना । जब भी वो सूर्य...
नेहा बह के कारनामे
लेखक - Casinar
दोस्तों, यह कहानी नेहा बहू की है। अब सिर्फ़ अकेली उसकी कहानी तो हो ही नहीं सकती। दर असल जितने लोग उनसे जुड़े हुए हैं किसी भी तरह, यह उन सबकी कहानी है। हाँ मुख्य किरदार नेहा है। तो इसे ट्रेलर समझिए
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उसकी शादी 18 साल की उम्र में रवींद्र से हो गई थी।...
दोस्तो मैं आपका सलिल फिर एक नई कहानी शरू करने जा रहा हु जो एक पारिवारिक इन्सेस्ट कहानी है जो एक डॉक्टर के परिवार पर आधारित है अगर कुछ स्पेलिंग में त्रुटि हो तो माफ करना और अच्छी हो या बुरी कमेंट जरूर करना
आपका अपना
सलिल
तारक मेहता का नंगा चश्मा
दोस्तो इस कहानी को शुरू करते हुए मुझे अपार खुशी हो रही है मैं काफ़ी दिन से इस कहानी को शुरू करने की सोच रहा था
अब जब ये कहानी शुरू हो ही रही है तो मैं आप सब से भी साथ बने रहने का आश्वासन चाहूँगा
गोकुल धाम सोसाइटी
गोकुलधाम सोसाइटी की पहली सुबह....सोसाइटी के बुजुर्ग...
प्यास बुझाई नौकर से
पात्र (किरदार) परिचय
01. हरदयाल- रूबी के ससुर,
02. कमलजीत- रूबी की सास,
03. प्रीति- हरजीत की पत्नी, हरदयाल की बेटी,
04. लखविंदर- रूबी का पति, दुबई में नौकरी, हरदयाल का बेटा,
05. रूबी- उम्र 28 साल, लखविंदर की पत्नी, रंग गोरा, कद 54” इंच, सुडौल मुम्मे, कम्प्यूटर डिग्री...
याराना
जर, जोरू और जमीन- कहा जाता है कि झगड़े की यही सबसे बड़ी वजहें होते हैं और इनके कारण भाई-भाई भी दुश्मन हो जाते हैं। खास कर जोरू तो भाइयों तो क्या गहरे से गहरे दोस्तों में भी अलगाव करा देती है। लेकिन हमारे मामले में कुछ उल्टा ही हुआ था। 'जोरुओं' की वजह से हम दो दोस्तों की टूट चुकी दोस्ती...
प्रीत की ख्वाहिश
written by Ashok
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मेला ..........
अपने आप में एक संसार को समेटे हुए, तमाम जहाँ के रंग , रंग बिरंगे परिधानों में सजे संवरे लोग . खिलोनो के लिए जिद करते बच्चे, चाट के ठेले पर भीड , खेल तमाशे . मैं हमेशा सोचता था की मैं मेला कब देखूंगा. और मैं क्या मेरी उम्र के तमाम लोग जो मेरे...
जलन
लेखक कुशवाहा कांत
"चलिए, भोजन कर लीजिए!"
"भोजन की इच्छा नहीं है।" -मैंने कहा।
"इच्छा क्यों नहीं है? भला इस तरह भी कोई क्रोध करता है? दादी ने जरा-सी बात कह दी, बस आप रूठ बैठे।
"मैं नहीं खाऊंगा।" -मैंने पूर्ववत् हठ किया।
उसके मुंह से एक सर्द आवाज निकली। बोली, “मत खाइए, मैं भी नहीं...
दोस्तो यह कहानी के पहले तीन भाग मेरी फेवरेट लेखिका कामिनी जी ने लिखे है जो आप इस फोरम पे "कामिनी" नाम से पढ़ चुके है अगर नही पढ़े तो जल्द पढ़ ले यह कहानी वही से आगे शुरू कर रहा हु जहां कामिनी जी ने छोड़ी थी मैं आशा करता हु कामिनी जी को मेरा यह प्रयास जरूर पसंद आएगा अपने बहुमोल कमेंट जरूर दे यह...
दोस्तो मैं आपका अपना सतीश एक और नई कहानी शरू कर रहा हु यह एक इनसेस्ट कहानी है एक ऐसे बेटे की जो अपनी बेहद हसीन माँ और खूबसूरत बहन का दीवाना है पर अब उसकी बहन शादी करके चली गई है मैं भी क्या आपको बोर करने लगा मैं अपनी बकवाणी बंद करता हु और कहानी शुरू करता हु जो आपको जरूर पसंद आयेगी ……सतीश...
मेरा नाम राहुल है और मैं अभी मात्र 16 साल का हु मेरी लंबाई साढ़े5 फिट है रंग गोरा है । मेरे घर मे सभी लोग है केवल पिता जी को छोड़ कर पिता जी आर्मी में थे तो एक लड़ाई में वो सहीद हो गए । हम बहुत अमीर तो नही और न ही गरीब है माध्मयवर्गीय परिवार है । मेरे पापा के गुजर जाने के बाद घर की पूरी जिमेदारी...
अगिया बेताल
मैं उस दृश्य को देख रहा था। इससे पहले भी मैंने लोगों के मुँह से सुना था, पर मुझे यह सब देखने का अवसर पहली बार मिला था। मैं स्तब्ध था कि यह सब जो मैं देख रहा हूँ - इसमें कितनी सच्चाई है। कल तक जो बात कानो सुनी थी, वह प्रत्यक्ष नजर आ रही थी।
हवा बर्फ की तरह सर्द थी। ऊपर से पानी...
ठहाकों के बाद आवाज गूंजी ---- " देखा इस्पक्टर ! देखा ? इसे कहते हैं चमत्कार ! अपने अगले शिकार की हत्या मैंने तेरे हाथों से करा दी । सबके सामने करा दी । और करना क्या पड़ा मुझे ? सिर्फ तेरे रिवाल्वर से छेड़छाड़ ! उसमें तेरे द्वारा डाली गयीं नकली गोलियां निकालकर असली गोलियां डालना कितना आसान था ।...
साहस रोमांच और उत्तेजना के वो दिन!
जीवन की भूलभुलैया में कुछ ऐसे लम्हे आते हैं।
जिन को हम कितना ही चाहें फिर भी न कभी भूल पाते हैं।।
जब मानिनियोँ का मन लाखों मिन्नत मन्नत नहीं मानता है।
तब कभी कभी कोई बिरला रख जान हथेली ठानता है।।
कमसिन कातिल कामिनियाँ भी होती कुर्बां कुर्बानी पर।
न्यौछावर...
अनौखा जाल
भाग १)
ट्रिन ट्रिन ... ट्रिन ट्रिन.... ट्रिन.. ट्रिन... | लैंडलाइन फोन की घंटी बज रही थी | मैं ऊपर अपने कमरे में सो रहा था | फोन था तो नीचे पर सुबह के टाइम इसकी आवाज़ कुछ ज़्यादा ही ज़ोरों से आ रही थी | मैंने अपने ऊपर अपना दूसरा तकिया बिल्कुल अपने कान के ऊपर रख लिया | आवाज़ फिर भी आ...
कोई तो रोक लो
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दोस्तो आज से एक और नई कहानी शुरू कर रहा हूँ ये कहानी प्रीतम ने लिखी है मैं इसे हिन्दी फ़ॉन्ट में आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ . उम्मीद है कि ये कहानी आपको पसंद आएगी .
मेरा नाम पुनीत है. मैं 24 साल का हूँ और मेरी हाइट 5'7" फुट है. देखने मे किसी हीरो की तरह हॅंडसम तो...