अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड) - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड)

hotaks

Administrator
Staff member
Joined
Dec 5, 2013
Messages
95,125
दोस्तों ये मेरी रोमन फॉण्ट में पहली स्टोरी है ,मुझे देवनागरी में लिखने की आदत है लेकिन देवनागरी बहुत से लोग नहीं पद पाते जिनमे से कुछ दोस्तों ने मुझसे ये कहा था की मैं रोमन में लिखू तो ये उन दोस्तों के लिए जो देवनागरी नहीं पद पते ...

ये एक सामान्य सी स्टोरी होगी जिसमे थोड़ा सा रोमांस , थोड़ी अडुल्टेरी , थोड़ा थ्रिल और सस्पेंस होगा ..

आगे की बाटे तो स्टोरी पद कर hi पता लगेगी तो एन्जॉय थे स्टोरी ..

BHABHI-MAA-2.jpg
 
★ इंडेक्स ★

�������������

अपडेट 1अपडेट 2अपडेट 3अपडेट 4अपडेट 5अपडेट 6अपडेट 7अपडेट 8अपडेट 9अपडेट 10अपडेट 11अपडेट 12अपडेट 13अपडेट 14अपडेट 15अपडेट 16अपडेट 17अपडेट 18अपडेट 19अपडेट 20अपडेट 21अपडेट 22अपडेट 23अपडेट 24अपडेट 25अपडेट 26अपडेट 27अपडेट 28अपडेट 29अपडेट 30अपडेट 31अपडेट 32अपडेट 33अपडेट 34अपडेट 35अपडेट 36अपडेट 37अपडेट 38अपडेट 39अपडेट 40अपडेट 41अपडेट 42अपडेट 43अपडेट 44 अपडेट 45अपडेट 46अपडेट 47अपडेट 48अपडेट 49अपडेट 50अपडेट 51अपडेट 52अपडेट 53अपडेट 54अपडेट 55अपडेट 56अपडेट 57अपडेट 58अपडेट 59अपडेट 60अपडेट 61अपडेट 62अपडेट 63अपडेट 64अपडेट 65अपडेट 66अपडेट 67

[TR] [/TR]

[TR] [/tr]

[TR][/tr]
 
भाभी माँ





अपडेट 1


कभी वो मुझे मेरी माँ से लगती थी तो कभी बहन का प्यार देती थी ,वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी थी जिससे मैं दिल खोलकर अपनी बाटे कर सकता था ,माँ बाप के जाने के बाद वही तो थी जिसने मुझे सम्हाला था ,हर दर्द में साथ थी वो और हर ख़ुशी उससे hi शुरू होती थी ,जिस भाई से मैं इतना डरता था वो उसकी पत्नी थी , लेकिन मुझे अभी उनसे कोई भी दर नहीं लगता ,असल में तो उनके होते मैं ऐसा होता की मुझे कोई भी दर कभी छू भी नहीं सकता ,वो थी मेरी भाभी माँ …

माँ इसलिए क्योकि उन्होंने मुझे माँ वाला प्यार भी दिया था ,मैं अभी अभी तो अपनी जवानी की दहलीज में कदम रख रहा था जब मेरे एकलौते भाई ने अपने पसंद से और घर वालो के विरुद्ध जाकर शादी कर ली थी ,मेरे परिवार ने उन्हें अपने से अलग hi कर दिया था ,मेरी माँ का रो रो कर बुरा हाल कर दिया था, मुझे नहीं पता था की समाज के ये बंधन आखिर क्यों है लेकिन एक लड़की जिसने मेरे भाई को अपनाने के लिए अपने परिवार को छोड़ा था वो मेरे लिए बेहद खास hi थी …

उनकी शादी को एक साल हो चुके थे, मैं उस समय स्कूल में hi था कभी कभी स्कूल से छूटकर तो कभी स्कूल ना जाकर मैं उनके पास पहुंच जाता था, वो बड़े प्यार से मुझे अपने पास बिठाती दुनिया भर की बाटे करती और फिर आखिर में उनकी आंखे hi भर जाती ..

“सोनू काश मम्मी पापा भी मुझे अपना पते जैसे तूने मुझे अपना लिया “

मैं क्या कहता, मैं तो उनके हाथो से बने खाने के लिए वंहा चला जाता था और फिर खाने के बाद मिलने वाली मिठाई के लिए, मैं चुप hi रहता लेकिन जब वो रोने लगती तो उनकी पायरी आँखों में आया आंसू मुझे मेरा दुशमन hi लगता था

“अरे भाभी माँ आप भी क्यों मम्मी पापा की टेंशन ले रहे हो ,वो कुछ भी बोले आपका ये सोनू हमेशा आपके साथ है ..”

मैं बस इतना hi बोलता था और भाभी के चेहरे में ख़ुशी खिल सी जाती जैसे उन्हें कोई जन्नत मिल गई हो ,वो मुझ पर और भी प्यार लुटाती थी ,भाभी पास के hi गांव की थी, भाई के कॉलेज के पास एक छोटा सा दुकान चलती थी ,बेहद hi गरीब घर की थी पता नहीं कैसे लेकिन भाई का उनपर दिल आ गया ,जाट अलग थी तो भाई को भी शादी करने में परेशानी हुई ,भाभी एक गरीब परिवार की थी वही हम थे अपने गांव के पंडित ,दूर दूर तक हमारे परिवार के चर्चे थे ये मेरे बापू मुझे बोलै करते थे..

“तू कही अपने भाई जैसे जाट के बहार की लुगाई ना ले आना “

कभी कभी बोलते हुए उनकी आंखे पता नहीं कहा खो जाती थी

“अरे बापू भाभी बहुत hi अच्छी है आप लोग उन्हें क्यों इतनी नफरत से देखते हो “

मैं बोल उठता था ..

और फिर बापू का लेक्चर हो जाता था चालू, जाट पैट के कई कहानिया शुरू हो जाते थे ..

“मैं तो उस रैंड के हाथो से पानी तक ना पीयू “

बापू का इस तरह भाभी के लिए बोलना मुझे कभी सोभा नहीं देता

“बापू वो मेरी भाभी माँ है उन्हें ऐसा कुछ मत कहा करो “

“तेरी इतनी मजाल तू मुझसे जुबान लड़ता है वो भी उस रैंड के लिए ,तेरे भाई को तो खा गई है मादरचोद अब तुझे भी अपने बस में कर लिया है क्या उसने “

बापू की बात से मेरा दिल hi भर जाता, मुझमे समझ hi थी की आखिर मेरी प्यारी सी भाभी ने ऐसा क्या अपराध कर दिया है ,लेकिन मैं उनके लिए लड़ जाता था और बदले में मुझे मिलती थी जोरदार मार …

कभी बापू से तो कभी माँ से ..फिर मैं अपना चेहरा लटकाये हुए पहुंच जाता था अपनी पैरी भाभी के पास …

भाई तो मुझसे 10 साल का बड़ा था उससे कुछ बोलते मेरी हालत hi खास्ती हो जाती थी लेकिन भाभी मुझे समझती थी मेरी एक एक राग का उन्हें पता था ..

“क्या हुआ सोनू फिर से पापा ने तुझे मारा “

मैं दौड़ता हुआ जब गांव से दूर बने उनके घर में जाता वो मेरा चेहरा देख कर hi बता देती थी की मैं आज मार खा कर आया हु ..

“देखो ना पापा आपको रैंड बोल रहे थे ,मुझे अच्छा नहीं लगता अगर आपको कोई कुछ भी बोले “

पता नहीं मेरी मासूमियत थी या मेरा भोलापन लेकिन मुझे रैंड शब्द की असलियत उस समय नहीं पता थी मुझे बस इतना hi पता था की ये एक गाली है ..

वो बेचारी मेरी बात सुनकर थोड़ी उदास सी हो जाती ..

“तू क्यों उनसे बहस करता है, आखिर जनता है ना की उनसे बहस करने से मार खायेगा “

वो धीमी सी आवाज में बोलती थी

“तो क्या आपको वो गली देंगे तो मैं सुनूंगा “

मैं थोड़ा गुस्सा हो जाता

“अरे तो क्या हुआ सुन लिया कर ना “

“कैसे सुनु आप मेरी भाभी माँ हो “

मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ती थी, कभी कभी मेरे गलो को खींच लेती ..

“तू इतना प्यार करता है अपनी भाभी माँ से “

वो मुझे अपलक निहारती

“प्यार का तो नहीं पता लेकिन मुझे पसंद नहीं की आपको कोई कुछ भी बोले “

“अच्छा तो अपने भाई से क्यों नहीं कहता जो पापा ने कहा “

भाई की बात सुनकर hi मैं घबरा जाता था..

“उन्हें क्यों बिच में लाती हो “

“अरे क्या हुआ ??”

वो मुस्कुराते हुए कहती थी

“उनसे मुझे दर लगता है “

और वो जोरो से हंस पड़ती, मेरे बालो को प्यार से सहलाती

“भला क्यों ...??”

“पता नहीं बस लगता है “

“अच्छा और मुझसे ??”

वो फिर से मेरे चेहरे को बड़े hi प्यार से देखती थी

“आप तो मेरी भाभी माँ हो, आपसे क्यों डरूंगा “

वो मुझे कभी कभी खींचकर अपने साइन से लगा लेती ,तो कभी सिर्फ मेरे गलो में एक प्यारा सा चुम्मन दे देती

“अच्छा मेरा प्यारा सोनू ..”

मैं खुश हो जाता था ,ऐसा प्यार तो मेरी माँ hi मुझे करती थी ,माँ जैसा प्रेम और बहन जैसी केयर करने वाली ये अद्भुत सी ायरत एक वो hi तो थी मेरी भाभी माँ ………..

 
सबसे पहले बहुत बहुत बॅधाई डाॅक्टर साहब एक नई कहानी शुरू करने के लिए। मुझे आशा ही नहीं बल्कि यकीन है कि आपकी क़लम से निकली हुई ये कहानी बेहतरीन कहानियों में से एक होगी।

कहानी के टाइटल से ही पता चलता है कि इस कहानी में रिश्तों के प्रति प्यार अपनापन व त्याग जैसी बातें देखने को मिलेंगी। फिलहाल अभी तो शुरुआत है इस लिए ज़्यादा कुछ कह नहीं सकते, किन्तु शुरुआत बेहतरीन हुई है।

अब देखना ये है कि भाभी माॅ और देवर के बीच दिख रहे इस प्यार और अपनेपन की इमारत कितनी ऊॅचाईयों तक जाती है। कहानी में ये तो पता चल ही चुका है कि भाभी माॅ एक ग़रीब घर की लड़की थी और साथ ही दूसरी जाति की भी। जिसकी वजह से माॅ बाप ने अपने बेटे और बहू को घर से अलग कर दिया है। अब देखना ये है कि ऐसे माहौल में इन लोगों के साथ क्या क्या होता है???
 
नई कहानी शुरू करने के लिए एक बार पुनः बहुत बहुत बॅधाई डाॅक्टर साहब। इसके पहले आपने देवनागरी में कहानियाॅ लिखी थी और अब इस कहानी को रोमन में लिख रहे हैं। संभव है कि शुरू शुरू में थोड़ा मुश्किल पेश आए किन्तु अंततः ये सब आसान तो हो ही जाएगा। जो रीडर्स देवनागरी नहीं समझ पाते उनके लिए ये कहानी पढ़ना सहज होगा।

ख़ैर, आग़ाज़ तो बेहतरीन हुआ है भाई और अब देखते हैं कि इस कहानी में कितना आनंद आता है हम सबको।
 
हम्म्म्म ... ठीक है फॉर्मेलिटी के लिए बोल डाटा हु .. कॉंग्रट्स नयी स्टोरी स्टार्ट करने के लिए .. और झूठा गुडलुक डॉ. साब ...

काम से काम एक - दो दिन का रेस्ट तो लेने देते यार .. एकदम से नयी स्टोरी स्टार्ट करने की क्या जरूरत थी .. लगता है भाई आपके क्लिनिक पर आज कल कोई पेशेंट्स नहीं आ रहे .. जो टाइम पास करने के लिए रोज हम रीडर्स को परेशां करने के लिए नयी - नयी कहानी लिखते रहते हो .. खुद तो थाली हो hi अपने साथ हमारा भी बेशकीमती समय ख़राब करते रहते हो .. पता है डॉ. साब आप जैसे writer's की वजह से hi मैं शादी नहीं कर प् रहा हु .. अब आप लोग इतनी मस्त - मस्त कहानिया लिखते हो की .. साला शादी - वादी करने का मैं hi नहीं करता .. पर अगर ये hi आलम रहा तो .. मुज़हे तो लगता है .. मैं कुंवारा बुद्धा hi मर जाऊँगा ... हे हे हे :विंक:

:बात: .. सो डॉ. साब .. शराफत से मान जाओ .. अपनी शादी करवालो और बच्चे बनाओ .. और घ्रस्त जीवन जियो .. और हमे परेशां और ch***ya बनाना छोड़ो ... >:( ... नहीं तो अगर टाइम निकल गया न .. तो फिर कहानिया hi लिखते रह जाओगे .. और आपकी होने वाली डाक्टरनी साहिबा किसी और की हो जाएगी .. किर्प्या सभी कुंवारे व् रंडवे भाई और उनकी बहने िस्सपर अमल करे ... ये नसीहत जनहित में जारी ... :lol: :lol:
 
अमेजिंग अपडेट डॉ साहब,

बेहद hi शानदार, लाजवाब और अद्भुत अपडेट है भाई,

इस अपडेट की जितनी भी तारीफ़ कारु काम hi हैं,

आपका ये रोमन में पहली कहानी है,

और फर्स्ट अपडेट पढ़ने के बाद ऐसा लग रहा है जैसे ये आपकी सभी कहानियों से अधिक शानदार होने वाली है,

वेटिंग फॉर नेक्स्ट अपडेट
 
कोंग्रटुलतिओन्स डॉ. नयी स्टोरी सुरु करने के लिए. पहला अपडेट बड़ा इमोशनल था यार. आँखों में पानी आ गया पढ़ क्र. जिस तरह से आपने भाभी का करैक्टर बिल्ड उप किया हे वो दिल को छू गया. बस आपसे एक रिक्वेस्ट हे की भाभी के करैक्टर को गन्दा मत करना. इसे साफ़ hi रखना प्ल्ज़्ज़. बाकि जैसा आप चाहे.

वेटिंग 4 नेक्स्ट अपडेट
 
दोस्तों ी थिंक ी नीड ा ब्रेक ,

मैं कई मनिहो से लगातार लिखे hi आ रहा हु और लाइफ भी थोड़ी बिजी चल रही है जो की आने वाले समय में और भी बिजी होने वाली है ,अभी इस स्टोरी में बस एक hi अपडेट आया है तो रीडर्स का इससे कोई इमोशनल कनेक्शन अभी नहीं हुआ है ,इसलिलये मेरे खेल से ये सही टाइम है स्टोरी होदी आगे चली जाएगी तो मेरे लिए भी इसे छोड़ना मुश्किल हो जाएगा ..

तो फिर अभी इसे क्लोज कर रहा हु मिलते है ब्रेक के बाद :)
 
:ः: नहीं भाई जिनकी बात का आजतक बुरा नहीं मन अब कैसे मान सकता हु ,एक्चुअली सच में थोड़ी प्रॉब्लम से गुजर रहा हु कुछ दिनों से ,इसलिए जादुई लकड़ी भी जड़ी एन्ड कर दी और जो तांत्रिक वाली स्टोरी शुरू करने वाला था उसे भी नहीं किया बल्कि लिखने में आसान स्टोरी शुरू करि लेकिन कल रत को एक और न्यूज़ का पता चला ,तो आने वाला समय बहुत बिजी रहने वाला है ..बिना क्रिएटिविटी के लिखने से अच्छा ना लिखना hi सही होता है बीआरओ ,इसलिए ब्रेक ले लिया हु ,टाइम पर उपदटेस नहीं दे पाउँगा और स्टोरी भी बोरिंग हो जायेगी तो मजा नहीं आएगा न ..

जब फ्री हो जाऊंगा तो फिर से स्टार्ट करूँगा इसे ...
 
Back
Top