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- Dec 5, 2013
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संजू रात को खाने के बाद हरिया के घर में हे रुक जाता है...
लेकिन उसका मैं पता नहीं क्यों बार बार हवेली जाने का करता रहता है...
संजू अपने आप को हवेली जाने से रोक नहीं पता है और धीरे से बिना किसी की नींद को बिना तोड़े चुपचाप हरिया के घर से निकल के धीरे धीरे अपने कदम बढ़ाते हुए हवेली की ऑर्डर चल पड़ा...
और वह वापस उस जगह पे पहुंच गया... जहा पर कल उसने सफ़ेद साड़ी में एक चुड़ैल को अपनी तरफ आते हुए देखा था...
संजू -- आज कहा है वो चुड़ैल.... मुझसे मिलने क्यों नहीं आ रही...
संजू ने कुछ समय तक उसका वही खड़े होकर इंतज़ार किया.... लेकिन आज संजू को खड़े हुए आधा घंटा से ज्यादा हो गया... कोई चुड़ैल वह नहीं आयी न हे किसी के रोने की आवाज़ वह आयी...
संजू ने अब अपने कदम हवेली की तरफ बढ़ा लिए...
संजू - ये हो क्या रहा है... साला... वह हरिया काका बोलता है की जिसको मैंने देखा हवेली में वह सुंदरी नहीं बल्कि कोई चुड़ैल है... और अब जब मई उस चुड़ैल का इंतज़ार कर रहा हु यहाँ... तोह आ नहीं रही.... जरूर कुछ गड़बड़ है...
संजू ऐसे हे अपने कदम बढ़ाते हुए हवेली पहुंच गया...
हवेली के अनादर पहुंचते हे संजू के होश उड़द गए....
हवेली.... में आज कोई उजाला नहीं था हवेली वीरान थी.... और बाकी दिन की तरह वह कोई लाइट भी नहीं जल रही थी....
संजू अपनी फ़ोन की टोर्च जला के हवेली के अंदर अपने कदम बढ़ाने लगा....
संजू -- सुंदरी.... सुंदरई.... कहा.. हो तुम सुंदरी....
संजू सुंदरी को आवाज़ देते हुए हवेली की सीडिया छेड़ने लगा...
तभी.... संजू के कान में किसी के रोने की आवाज़ आयी...
ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ....... ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ....
संजू ( घबराते हुए) -- कक्क... कौन.. है...
सुंदरी.... कहीए... तुम तोह नहीं...
no रिस्पांस.....
संजू -- देखो... सुंदरी..... अगर तुम हो तोह मुझे बता दो.... मुझे ऐसे डराओ मत न..
no रिस्पांस.....
तभी एक काला साया... राजू के टोर्च से निकल रही रोशिनी से तेज़्ज़ी से पार हुआ...
संजू -- कककक.... कौन... है.... सुंदरी.... देखो... मुझे डराओ mat....please सुंदरी.... कहा हो तुम आज अपना खाना नहीं खिलाओगी क्या... य्र्र..??
ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ..... ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ.....
संजू अपनी कदम सीढ़ियों पे बढ़ाते हुए ऊपर छेड़ने लगा...
तभी संजू को उसके पैरो की आवाज़ के साथ साथ किसी और के भी पैरो की आवाज़ सुनाई देने लगी...
संजू ( ारी साला... ये क्या... मई जब एक कदम आगे बढ़ता हु तोह ये 2 कदमो की आवाज़ कहा से आ रही है...)
संजू ने अपने पीछे मुद के देखा की ये दूसरा कदम बढ़ाने वाला कौन है...
पीछे पलट ते हे... संजू चौक गया...
संजू -- ारी यहाँ तोह कोई भी नहीं है... तोह फिर ये दूसरे कदम की आवाज़ कहा से आयी... हो सकता है की मेरा वहां हो...
संजू ने फिर से अपने कदम आगे बढ़ने के लिए जैसे हे उठाये थी की.... किसी के कदमो की आवाज़ ने संजू को हैरान कर दिया...
संजू -- ारी कौन मादरचोद है जो बार बार कछार कर रहा... अगर जाना है तोह जा न बी भोस्डिके ले... जा तू हे पहले जा मई हाथ देता हु सामने से...
ये कहते हुए संजू सीढ़ी की एक साइड खिसक के खड़ा हो गया...
संजू -- ले... जा न अब... क्या हुआ भोस्डिके के अब बजा न बजा न बजता क्यों नहीं अपने कदम... निकल भोस्डिके.... बहुत जल्दी मच रही थी न तोह जा...
संजू घबराहट के मारे... अनाप सनाप बोले जा रहा था..
जब कुछ देर तक कोई आवाज़ नहीं हुई... तोह संजू ने अपने कदम फिर से आगे बढ़ाने का सोचा और जैसे हे अपना एक कदम बढ़ाया... की फिर से किसी के कदमो की आवाज़ आने लगी...
संजू -- अब तुझे नहीं छोडूंगा मई... साले
जैसे हे गुस्से में संजू पलटा की उसको एक बाल बिखरे हुए अपने मुँह में चुना पोती हुई औरत अपने लम्बे नाखूनों को संजू के शर्ट पे सहलाते हुए मिली...
संजू ने उसको देख के कहा...
संजू - साली कमीनी.... कबसे तुझे वह रस्ते में ढूंढ रहा था अब आयी है तू... अब जेक टाइम मिला तुझे..... कुटिया चिन्तल... कहा अपनी गांड मरवा रही थी जो इतनी देर कर दी बता बोल... और ऊपर से जब आयी है तोह मुझे डराने की कोशिश कर रही मुझे....
संजू उसको गुस्से में जोर से डाटने लगा...
तभी
चुड़ैल ( अपने दत्तू को किटकिटाते हुए... संजू के चेस्ट पे अपने नाखून घड़ाने लगी...
संजू - आह्हः.... मादरचोद.... मेरे जिस्म पे नाखून तोह आज तक मैंने नहीं गदया तू भैसिडीकी... चूड़ाकड चुड़ैल मेरे जिस्म पे नाखून गड़ायेगी रे...
चटाककक.....
संजू ने इतनी जोर का तमाचा मारा... वह चुड़ैल.... सीढ़ियों से लुड़कते हुए गिरने लगी... और जेक ग्राउंड फ्लोर पे गिर पड़ी...
चुड़ैल-- आअह्हह्ह्हुउउउउ आआह्ह्हुउउ
करके रोने लगी...
संजू - साली एक तोह लेट से आती है और ऊपर से मैनर्स भी नहीं है.. लगता है तेरी चुड़ैल माँ ने तुझे कोई चुडैलू वाले संस्कार नहीं दिए... चल जा और यहाँ तभी आना जब तेरी माँ तेरे साथ आयी हो...
वह चुड़ैल रोटी हुई अपने गाल सहलाते हुए भाग कड़ी हुई...
तभी पीछे से संजू के कानो mein...phir से किसी की रोने की आवाज़.... आयी...
संजू ने उस आवाज़ का पीछा करना चालू किया... और जेक देखा तोह वह आवाज़ तोह उसके हे कमरे से आ रही थी...
संजू -- ारी.. किसकी मौत आयी है जो मेरे कमरे में घुसा है...
वह आवाज़ संजू की आवाज़ सुनके संत हो गयी..
संजू -- देखो जो कोई भी है निकलो निकल जाओ मेरे कमरे से बहार.... वर्ण अच्छा नहीं होगा...
फिर से ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ करके किसी की रोने की आवाज़ बीएड के बगल से आने लगी..
संजू ने अपने हलके हलके कदम बढ़ाते हुए.... उस आवाज़ के पास गया..
वह बीएड के बगल में एक लड़की अपने घुटने मोड़ के बैठी अपना सर अपने घुटने से टिका के बिकते हुए रो रही थी...
संजू -- hello..excuse... में... मैडम... छूटनी मैडम... hello.. आप कौन हो..
वह लड़की बिना संजू की बात का जवाब दिए..
रोये जा रही थी... ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ...
संजू ने उसको अपनी किसी भी बात का जवाब न देता हुआ देख... अपने हाथो को आगे... बढ़ाते हुए उस लड़की के कंधे पे रखा...
उस लड़के का कन्धा.... बहुत हे ठंढा सा महसूस हो रहा था...
संजू ने उसके कंधे को पकड़ के थोड़ा हिलाया...
संजू -; hello चुटनी मैडम..... आप रो क्यों रही है... कही आपकी छूट में खुजली तोह नहीं हो रही न..
संजू के अपने कंधे पे हाथ पड़ते हे उसका रोना बंद हो गया...
और उसने... अपना चेहरा थोड़ा सा ऊपर उठाया.. और संजू को देखने लगी..
संजू ने उसके चेहरे पे फ़ोन की टोर्च मारी.
संजू -- सुंदरी तुम... यहाँ ऐसे क्यों बैठी हो और रो क्यों रही हो
सुंदरी - no रिस्पांस...
संजू -- उठो बीएड पे बैठो...
संजू ने उसको उठा के बीएड पे बिठाया...
सुंदरी अब भी संजू को बस देखे जा रही थी... लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी..
संजू -- बताओ.. न... क्या हुआ है... तुम रो क्यों रही थी...
सुंदरी -- क्यों की कल आप मुझसे गुस्सा होकर मेरा बनाया खाना बिना खाये आ गए थी और जब मई आयी दरवाज़ा खटखटाया तोह पर भी आपने दरवाजा नहीं खोला...
संजू -- अच्छा.. उस बात के लिए तुम रो रही हो.. वह तोह मई कब का भूल भी गया... और मई गुस्सा नहीं हुआ था वह तुमने मुझे बोरिंग करने के लिए मन किया न इसलिए मई थोड़ा वररेक्ट कर गया... ी ऍम सॉरी...
संजू ने अपने कान पकड़ लिए...
सुंदरी - ये आप क्या कर रहे है... मैंने आपको माफ़ किया...
संजू - मई नहीं मानता.
सुंदरी -; मई कह रही न की मैंने आपको माफ़ किया...
संजू -; न न न.. न बाबा न... मई नहीं मानता..
सुंदरी - क्यों... नहीं मान रहे...
संजू - अगर तुम मुझसे एक वादा करोगी तब हे मई मानूंगा की तुमने मुझे माफ़ कर दिया...
सुंदरी -- वादा... कैसा वादा..
संजू -- पहले वादा करो फिर बताऊंगा...
सुंदरी -- अच्छा बाबा ठीक है.. वादा. अब बताओ न साहब..
संजू - पहले तोह ये साहब साहब बोलना बंद करो और चुपचाप अपने वाडे के मुताबिक मेरे सवालों का जवाब दो..
सुंदरी - सवाल कैसे सवाल..
संजू -; यही की तुम कौन हो और है मुझे सिर्फ सच सुन न है...
सुंदरी -- वह वह.. मई नहीं बता सकती...
संजू -; अच्छा तोह अब तुम अपने वाडे से मुकर रही हो... और मुझे ऐसे लोग से सख्त नफरत है जो वादा तोड़ते है...
संजू वह से उठ के जाने लगा...
सुंदरी -; रुकिए.....
संजू - क्या फायदा अब रुकने का.. जब तुम्हे मेरी बातों का जवाब हे नहीं देना..
सुंदरी को संजू की बातों से तकिल्फ़ होने लगी..
सुंदरी -; ठीक है आपको जो. पूछना है पूछिए... मई सब का सही सही जवाब देने को तैयार हु...
संजू -- अच्छा.. तोह सबसे पहले मुह्जे ये बताओ की तुम कौन हो...
सुंदरी -- मेरा नाम सुंदरी है
संजू -- झूट.. तुम्हारा नाम सुंदरी नहीं है..
सुंदरी -- नहीं... मेरा नाम हे सुंदरी है...
संजू -- अच्छा... तोह ये बताओ की तुम्हारे घर वाले कहा..
सुंदरी - वह हरिया... मेरे भाई का लड़का है..
संजू -- झूट...
सुंदरी -- नहीं ये सच है...
संजू -- अच्छा एक बात बताना की हरिया काका ने कभी तुम्हे जिन्दा देखा था..
सुंदरी -; हां.. जब मई 30 साल की थी तब हरिया 12 साल का था...
संजू -- क्या...
सुंदरी -- हआ..... ये सच है की मई हरिया की बहिन nhi...balki बुआ हु...
संजू -: तोह फिर हरिया काका ने तुम्हारी तस्वीर देख के मुझे ऐसा क्यों कहा की ये एक चुड़ैल की तस्वीर थी जिसको ठाकुर सुरेंद्र सिंह ने बीच चौराहे पे जलाया था..
सुंदरी - क्या... ये तुम क्या बोल रहे हो...
संजू -- मुझे जो हरिया काका ने कहा मई बस वही बोल रहा..
सुंदरी - क्या हरिया ने तुमसे मेरी फोटो देख ये सब कहा..
संजू -- हां.. तोह अब चलो अब अपना सच बताओ की कौन हो तुम.... क्युकी सुंदरी तोह तुम हो नहीं... वर्ण हरिया काका अपनी बुआ को नहीं पहचानते ऐसा कभी हो नहीं सकता..
सुंदरी - मेरा यकीन कीजिये..
मई हे सुंदरी हु... हरिया की बुआ.. लेकिन हरिया ने ऐसा क्यों कहा ये मुझे नहीं पता..
संजू -- हरिया काका मुझसे क्यों झूट बोलेंगे... जरूर तुम हे झूट बोल रही हो...
सुंदरी -- नहीं मई सच बोल रही हु.. मेरी बातो का यकीन करिये..
संजू - अच्छा तोह एक बात बताओ... तुम जिन्दा हो या मर चुकी हो..
सुंदरी -- मई एक आत्मा... हु... जो भटक रही हु अपने प्रेमी की तलाश में...
संजू -; क्या प्रेमी की तलाश में...
सुंदरी -- हां.. अपने प्रेमी की तलाश में....
संजू -- फिर झूट...
सुंदरी - नहीं ये झूट नहीं सच है...
संजू -- पर मुझे तोह हरिया काका ने कुछ और हे बताया.. था... की देशराज ने तुम्हारी इज़्ज़त लूटनी चाही थी और तुमने छत से कुड़के अपनी जान दे दी...
सुंदरी -- नहीं ये सच नहीं है..
संजू - तोह फिर सच क्या है..
सुंदरी -- बात तब की है.. जब मेरी शादी के लिए लड़के देखे जा रहे थी और मेरी शादी के लिए रिश्ता.... आया था एक बड़े घर का....
मई बहुत खुस थी... क्यों की लड़का सुन्दर था..
संजू ( जलते हुए) - ओह्ह आगे..
सुंदरी - वह एक दिन मई जब नहाने जा रही थी तब मैंने देखा जंगल की तरफ... कुछ लोग एक लड़की को उठा के ले जा रहे है...
मैंने उनका पीछा किया. और उनकी जगह का पता लगा कर... वह से भागी भागी हवेली पहुंची और ठाकुर साहब को ये बात बताई...
ठाकुर साहब ने तुरंत अपनी बन्दूक निकली और उस जगह पे मेरे साथ अपने कुछ आदमी लेकर चल दिए....
वह पहुंच के ठाकुर साहब ने उन लोगो को गोली मार दी...
लेकिन उनमे से एक बच निकला... और उसने ठाकुर को मारने के लिए भूत प्रेतों का सहारा लेना शुरू किया..
कुछ दिन बाद.... जब देशराज जी यहाँ आये थी तोह ठाकुर साहब हवेली में नहीं थी... तब मेरा भाई देशराज के साथ रहता था... एक रात को देशराज ने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी लेकिन... उसका अंजाम यह हुआ की इस हवेली में रह रही सुमित्रा देवी की आत्मा ने उसको सबक सीखा दिया.... और देशराज रातों रात यहाँ से भाग खड़ा हुआ.. उसके दूसरे दिन हे मुझे सुबह पानी भरने जाना था जंगल के कुए में तब सुबहब के 5 बज रहे थी... तोह मई जब जंगल के कुए में पानी भरने पहुंची तोह वही मुझे वह भागा हुआ उस दिन का वह आदमी मिल गया.. उसने मुझे ठाकुर साहब के साथ देख लिया... था उसने मुझे देखते हे पहचान लिया... और उसके बाद उसने मुझे मार के मेरे टुकड़े टुकड़े करके हवेली के पीछे की जमीं पे सरीर के टुकड़ो को गाड़ दिया... इसलिए सबको ये लगता है की मैंने छत से कूद के अपनी जान दी थी... लेकिन ऐसा नहीं है..
संजू -- अच्छा... तोह यहाँ तुम्हारे अलावा सुमित्रा नाम की एक और आत्मा रहती है...
सुंदरी -- हआ.....
संजू -- लेकिन तुम किसी प्रेमी की तलाश वाली बात कर रही थी उसका क्या..
सुंदरी -- हां.. उसकी शकल तुमसे मिलती थी... मैंने जो उसकी फोटो देखि थी वह बिलकुल तुंहरे जैसी थी...
संजू -: क्या मेरे जैसी.... पर ऐसा कैसे हो सकता है... मेरी सकल तोह मेरे दादा जी जैसी है तोह क्या तुम्हारा रिश्ता मेरे दादा से तय हुआ था
सुंदरी - क्या वह तुम्हारे दादा थी .
संजू - हां... सब को पता है की मेरी सकल दादू से मिलती है... दादी ने तोह ये भी कहा था की जिस रात दादू की मौत हुई उसके ठीक कुछ हे देर बाद मेरा जन्म हुआ इसलिए दादी मुझे दादा का हे रूप मानती थी..
सुंदरी -- मुझे..... कुछ नहीं पता ... मुझे तोह बस इतना पता है की मई इस शकल और शुरआत की वाले आदमी की प्रेमिका हु.... चाहे दादा हो या पोता मुझे उससे कुछ फरक नहीं होता...
संजू -- ओह्ह्ह... अच्छा.. तोह क्या यही वजह थी की तुमने मुझे नहीं मारा..
सुंदरी -- ारी नहीं... मई मानती हु की तुम मुझे देखते हे पसंद आ गए थी.. लेकिन मई तुम्हे एक बात आज बता देना चाहती हु...
संजू -- कौन सी बात...
सुंदरी -- की.... वह मारने वाला काम मेरा नहीं है... बल्कि.... यहाँ भटक रही एक और आत्मा सुमित्रा देवी की आत्मा का है...
संजू -- क्या... अभी वह आत्मा कहा है...
सुंदरी -- अभी उनकी आत्मा ..... 2 दिन के लिए... हवेली को छोड़ के गयी है... उनका कुछ अधूरा काम था जिसको पूरा करना था उनको... इसलिए...
संजू -- कैसी अधूरा काम..
सुंदरी -- किसी को मौत के घात उतारने का..
संजू- किसको...
सुंदरी -- वह तोह मुझे नहीं पता..
संजू -- अच्छा... तोह अब ये बताओ.. की यहाँ की लाइट क्यों नहीं है...
सुंदरी -- वह तोह मई उदास थी न... इसलिए..
और ऊपर से सुमित्रा देवी की आत्मा भी यहाँ नहीं है... वह रहती है तोह.... उनकी खिदमत में हम आत्माओ को यहाँ रहना पड़ता है..
संजू -; एक मिनट... यहाँ तुम दोनों की आत्माओ के अल्वा भी और आत्माएं है क्या...
सुंदरी -- हां.. इस हवेली में हे क्या... इस गाओं में जिस तरह इंसान घर बना के रहते है वैसे हे इनविजिबल रूप में भूत भूतनिया और उनके बच्चे भी रहते है...
संजू
-- क्या... भूतो के बच्चे भी होते है..
सुंदरी -- हआ....
संजू -- अच्छा तोह इस हवेली में तुम्हारे अलावा और कौन कौन सी भूत या भूतनी है..
सुंदरी - हवेली में मेरी अलावा सुमित्रा देवी की और उनकी नन्द की और यहाँ काम करने वाली 2 और नौकरानी चंपा और कजरी का भी भूत है...
संजू -- अगर ऐसा है तोह वह मुझे क्यों नहीं दिखती सिर्फ तुम हे क्यों दिखती हो...
सुंदरी -- वह इसलिए क्यों की.... अभी तक उन सब को आपके यहाँ होने का पता नहीं चला है... वह सब 2ंद फ्लोर और 3रद फ्लोर में रहती है...
2ंद फ्लोर में चंपा और कजरी का भूत रहता है.. और 3रद फ्लोर में सुमित्रा देवी और उनकी ननद कंचन का भूत रहता है... और इस 1सत फ्लोर का कार्यभार मुझे सौपा गया है...
संजू -- अच्छा... तोह क्या अगर मई उन फ्लोर में जाओ तोह वह मुझे दिखाई देंगी क्या मई उनको छू पाऊंगा..
सुंदरी - हां दिन में आपको नहीं छू सकते लेकिन रात में ऐसा संभव है.. दिन में वह दिखाई भी नहीं देगी.... दिखेगी तोह बस एक काली परछाई...
संजू -- ओह्ह.... यहाँ तक तोह समझ आ गया... लेकिन मेरी एक बात समझ में नहीं आयी... की हरिया ने मुझे ऐसा क्यों कहा की तस्वीर वाली आवर्त कोई चुड़ैल है... उसकी बुआ सुंदरी नहीं जबकि ये तस्वीर तोह तुम्हारी है....
बाकि नेक्स्ट अपडेट में..
लेकिन उसका मैं पता नहीं क्यों बार बार हवेली जाने का करता रहता है...
संजू अपने आप को हवेली जाने से रोक नहीं पता है और धीरे से बिना किसी की नींद को बिना तोड़े चुपचाप हरिया के घर से निकल के धीरे धीरे अपने कदम बढ़ाते हुए हवेली की ऑर्डर चल पड़ा...
और वह वापस उस जगह पे पहुंच गया... जहा पर कल उसने सफ़ेद साड़ी में एक चुड़ैल को अपनी तरफ आते हुए देखा था...
संजू -- आज कहा है वो चुड़ैल.... मुझसे मिलने क्यों नहीं आ रही...
संजू ने कुछ समय तक उसका वही खड़े होकर इंतज़ार किया.... लेकिन आज संजू को खड़े हुए आधा घंटा से ज्यादा हो गया... कोई चुड़ैल वह नहीं आयी न हे किसी के रोने की आवाज़ वह आयी...
संजू ने अब अपने कदम हवेली की तरफ बढ़ा लिए...
संजू - ये हो क्या रहा है... साला... वह हरिया काका बोलता है की जिसको मैंने देखा हवेली में वह सुंदरी नहीं बल्कि कोई चुड़ैल है... और अब जब मई उस चुड़ैल का इंतज़ार कर रहा हु यहाँ... तोह आ नहीं रही.... जरूर कुछ गड़बड़ है...
संजू ऐसे हे अपने कदम बढ़ाते हुए हवेली पहुंच गया...
हवेली के अनादर पहुंचते हे संजू के होश उड़द गए....
हवेली.... में आज कोई उजाला नहीं था हवेली वीरान थी.... और बाकी दिन की तरह वह कोई लाइट भी नहीं जल रही थी....
संजू अपनी फ़ोन की टोर्च जला के हवेली के अंदर अपने कदम बढ़ाने लगा....
संजू -- सुंदरी.... सुंदरई.... कहा.. हो तुम सुंदरी....
संजू सुंदरी को आवाज़ देते हुए हवेली की सीडिया छेड़ने लगा...
तभी.... संजू के कान में किसी के रोने की आवाज़ आयी...
ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ....... ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ....
संजू ( घबराते हुए) -- कक्क... कौन.. है...
सुंदरी.... कहीए... तुम तोह नहीं...
no रिस्पांस.....
संजू -- देखो... सुंदरी..... अगर तुम हो तोह मुझे बता दो.... मुझे ऐसे डराओ मत न..
no रिस्पांस.....
तभी एक काला साया... राजू के टोर्च से निकल रही रोशिनी से तेज़्ज़ी से पार हुआ...
संजू -- कककक.... कौन... है.... सुंदरी.... देखो... मुझे डराओ mat....please सुंदरी.... कहा हो तुम आज अपना खाना नहीं खिलाओगी क्या... य्र्र..??
ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ..... ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ.....
संजू अपनी कदम सीढ़ियों पे बढ़ाते हुए ऊपर छेड़ने लगा...
तभी संजू को उसके पैरो की आवाज़ के साथ साथ किसी और के भी पैरो की आवाज़ सुनाई देने लगी...
संजू ( ारी साला... ये क्या... मई जब एक कदम आगे बढ़ता हु तोह ये 2 कदमो की आवाज़ कहा से आ रही है...)
संजू ने अपने पीछे मुद के देखा की ये दूसरा कदम बढ़ाने वाला कौन है...
पीछे पलट ते हे... संजू चौक गया...
संजू -- ारी यहाँ तोह कोई भी नहीं है... तोह फिर ये दूसरे कदम की आवाज़ कहा से आयी... हो सकता है की मेरा वहां हो...
संजू ने फिर से अपने कदम आगे बढ़ने के लिए जैसे हे उठाये थी की.... किसी के कदमो की आवाज़ ने संजू को हैरान कर दिया...
संजू -- ारी कौन मादरचोद है जो बार बार कछार कर रहा... अगर जाना है तोह जा न बी भोस्डिके ले... जा तू हे पहले जा मई हाथ देता हु सामने से...
ये कहते हुए संजू सीढ़ी की एक साइड खिसक के खड़ा हो गया...
संजू -- ले... जा न अब... क्या हुआ भोस्डिके के अब बजा न बजा न बजता क्यों नहीं अपने कदम... निकल भोस्डिके.... बहुत जल्दी मच रही थी न तोह जा...
संजू घबराहट के मारे... अनाप सनाप बोले जा रहा था..
जब कुछ देर तक कोई आवाज़ नहीं हुई... तोह संजू ने अपने कदम फिर से आगे बढ़ाने का सोचा और जैसे हे अपना एक कदम बढ़ाया... की फिर से किसी के कदमो की आवाज़ आने लगी...
संजू -- अब तुझे नहीं छोडूंगा मई... साले
जैसे हे गुस्से में संजू पलटा की उसको एक बाल बिखरे हुए अपने मुँह में चुना पोती हुई औरत अपने लम्बे नाखूनों को संजू के शर्ट पे सहलाते हुए मिली...
संजू ने उसको देख के कहा...
संजू - साली कमीनी.... कबसे तुझे वह रस्ते में ढूंढ रहा था अब आयी है तू... अब जेक टाइम मिला तुझे..... कुटिया चिन्तल... कहा अपनी गांड मरवा रही थी जो इतनी देर कर दी बता बोल... और ऊपर से जब आयी है तोह मुझे डराने की कोशिश कर रही मुझे....
संजू उसको गुस्से में जोर से डाटने लगा...
तभी
चुड़ैल ( अपने दत्तू को किटकिटाते हुए... संजू के चेस्ट पे अपने नाखून घड़ाने लगी...
संजू - आह्हः.... मादरचोद.... मेरे जिस्म पे नाखून तोह आज तक मैंने नहीं गदया तू भैसिडीकी... चूड़ाकड चुड़ैल मेरे जिस्म पे नाखून गड़ायेगी रे...
चटाककक.....
संजू ने इतनी जोर का तमाचा मारा... वह चुड़ैल.... सीढ़ियों से लुड़कते हुए गिरने लगी... और जेक ग्राउंड फ्लोर पे गिर पड़ी...
चुड़ैल-- आअह्हह्ह्हुउउउउ आआह्ह्हुउउ
करके रोने लगी...
संजू - साली एक तोह लेट से आती है और ऊपर से मैनर्स भी नहीं है.. लगता है तेरी चुड़ैल माँ ने तुझे कोई चुडैलू वाले संस्कार नहीं दिए... चल जा और यहाँ तभी आना जब तेरी माँ तेरे साथ आयी हो...
वह चुड़ैल रोटी हुई अपने गाल सहलाते हुए भाग कड़ी हुई...
तभी पीछे से संजू के कानो mein...phir से किसी की रोने की आवाज़.... आयी...
संजू ने उस आवाज़ का पीछा करना चालू किया... और जेक देखा तोह वह आवाज़ तोह उसके हे कमरे से आ रही थी...
संजू -- ारी.. किसकी मौत आयी है जो मेरे कमरे में घुसा है...
वह आवाज़ संजू की आवाज़ सुनके संत हो गयी..
संजू -- देखो जो कोई भी है निकलो निकल जाओ मेरे कमरे से बहार.... वर्ण अच्छा नहीं होगा...
फिर से ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ करके किसी की रोने की आवाज़ बीएड के बगल से आने लगी..
संजू ने अपने हलके हलके कदम बढ़ाते हुए.... उस आवाज़ के पास गया..
वह बीएड के बगल में एक लड़की अपने घुटने मोड़ के बैठी अपना सर अपने घुटने से टिका के बिकते हुए रो रही थी...
संजू -- hello..excuse... में... मैडम... छूटनी मैडम... hello.. आप कौन हो..
वह लड़की बिना संजू की बात का जवाब दिए..
रोये जा रही थी... ऊऊऊह्ह्हह्हुउउउउ...
संजू ने उसको अपनी किसी भी बात का जवाब न देता हुआ देख... अपने हाथो को आगे... बढ़ाते हुए उस लड़की के कंधे पे रखा...
उस लड़के का कन्धा.... बहुत हे ठंढा सा महसूस हो रहा था...
संजू ने उसके कंधे को पकड़ के थोड़ा हिलाया...
संजू -; hello चुटनी मैडम..... आप रो क्यों रही है... कही आपकी छूट में खुजली तोह नहीं हो रही न..
संजू के अपने कंधे पे हाथ पड़ते हे उसका रोना बंद हो गया...
और उसने... अपना चेहरा थोड़ा सा ऊपर उठाया.. और संजू को देखने लगी..
संजू ने उसके चेहरे पे फ़ोन की टोर्च मारी.
संजू -- सुंदरी तुम... यहाँ ऐसे क्यों बैठी हो और रो क्यों रही हो
सुंदरी - no रिस्पांस...
संजू -- उठो बीएड पे बैठो...
संजू ने उसको उठा के बीएड पे बिठाया...
सुंदरी अब भी संजू को बस देखे जा रही थी... लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी..
संजू -- बताओ.. न... क्या हुआ है... तुम रो क्यों रही थी...
सुंदरी -- क्यों की कल आप मुझसे गुस्सा होकर मेरा बनाया खाना बिना खाये आ गए थी और जब मई आयी दरवाज़ा खटखटाया तोह पर भी आपने दरवाजा नहीं खोला...
संजू -- अच्छा.. उस बात के लिए तुम रो रही हो.. वह तोह मई कब का भूल भी गया... और मई गुस्सा नहीं हुआ था वह तुमने मुझे बोरिंग करने के लिए मन किया न इसलिए मई थोड़ा वररेक्ट कर गया... ी ऍम सॉरी...
संजू ने अपने कान पकड़ लिए...
सुंदरी - ये आप क्या कर रहे है... मैंने आपको माफ़ किया...
संजू - मई नहीं मानता.
सुंदरी -; मई कह रही न की मैंने आपको माफ़ किया...
संजू -; न न न.. न बाबा न... मई नहीं मानता..
सुंदरी - क्यों... नहीं मान रहे...
संजू - अगर तुम मुझसे एक वादा करोगी तब हे मई मानूंगा की तुमने मुझे माफ़ कर दिया...
सुंदरी -- वादा... कैसा वादा..
संजू -- पहले वादा करो फिर बताऊंगा...
सुंदरी -- अच्छा बाबा ठीक है.. वादा. अब बताओ न साहब..
संजू - पहले तोह ये साहब साहब बोलना बंद करो और चुपचाप अपने वाडे के मुताबिक मेरे सवालों का जवाब दो..
सुंदरी - सवाल कैसे सवाल..
संजू -; यही की तुम कौन हो और है मुझे सिर्फ सच सुन न है...
सुंदरी -- वह वह.. मई नहीं बता सकती...
संजू -; अच्छा तोह अब तुम अपने वाडे से मुकर रही हो... और मुझे ऐसे लोग से सख्त नफरत है जो वादा तोड़ते है...
संजू वह से उठ के जाने लगा...
सुंदरी -; रुकिए.....
संजू - क्या फायदा अब रुकने का.. जब तुम्हे मेरी बातों का जवाब हे नहीं देना..
सुंदरी को संजू की बातों से तकिल्फ़ होने लगी..
सुंदरी -; ठीक है आपको जो. पूछना है पूछिए... मई सब का सही सही जवाब देने को तैयार हु...
संजू -- अच्छा.. तोह सबसे पहले मुह्जे ये बताओ की तुम कौन हो...
सुंदरी -- मेरा नाम सुंदरी है
संजू -- झूट.. तुम्हारा नाम सुंदरी नहीं है..
सुंदरी -- नहीं... मेरा नाम हे सुंदरी है...
संजू -- अच्छा... तोह ये बताओ की तुम्हारे घर वाले कहा..
सुंदरी - वह हरिया... मेरे भाई का लड़का है..
संजू -- झूट...
सुंदरी -- नहीं ये सच है...
संजू -- अच्छा एक बात बताना की हरिया काका ने कभी तुम्हे जिन्दा देखा था..
सुंदरी -; हां.. जब मई 30 साल की थी तब हरिया 12 साल का था...
संजू -- क्या...
सुंदरी -- हआ..... ये सच है की मई हरिया की बहिन nhi...balki बुआ हु...
संजू -: तोह फिर हरिया काका ने तुम्हारी तस्वीर देख के मुझे ऐसा क्यों कहा की ये एक चुड़ैल की तस्वीर थी जिसको ठाकुर सुरेंद्र सिंह ने बीच चौराहे पे जलाया था..
सुंदरी - क्या... ये तुम क्या बोल रहे हो...
संजू -- मुझे जो हरिया काका ने कहा मई बस वही बोल रहा..
सुंदरी - क्या हरिया ने तुमसे मेरी फोटो देख ये सब कहा..
संजू -- हां.. तोह अब चलो अब अपना सच बताओ की कौन हो तुम.... क्युकी सुंदरी तोह तुम हो नहीं... वर्ण हरिया काका अपनी बुआ को नहीं पहचानते ऐसा कभी हो नहीं सकता..
सुंदरी - मेरा यकीन कीजिये..
मई हे सुंदरी हु... हरिया की बुआ.. लेकिन हरिया ने ऐसा क्यों कहा ये मुझे नहीं पता..
संजू -- हरिया काका मुझसे क्यों झूट बोलेंगे... जरूर तुम हे झूट बोल रही हो...
सुंदरी -- नहीं मई सच बोल रही हु.. मेरी बातो का यकीन करिये..
संजू - अच्छा तोह एक बात बताओ... तुम जिन्दा हो या मर चुकी हो..
सुंदरी -- मई एक आत्मा... हु... जो भटक रही हु अपने प्रेमी की तलाश में...
संजू -; क्या प्रेमी की तलाश में...
सुंदरी -- हां.. अपने प्रेमी की तलाश में....
संजू -- फिर झूट...
सुंदरी - नहीं ये झूट नहीं सच है...
संजू -- पर मुझे तोह हरिया काका ने कुछ और हे बताया.. था... की देशराज ने तुम्हारी इज़्ज़त लूटनी चाही थी और तुमने छत से कुड़के अपनी जान दे दी...
सुंदरी -- नहीं ये सच नहीं है..
संजू - तोह फिर सच क्या है..
सुंदरी -- बात तब की है.. जब मेरी शादी के लिए लड़के देखे जा रहे थी और मेरी शादी के लिए रिश्ता.... आया था एक बड़े घर का....
मई बहुत खुस थी... क्यों की लड़का सुन्दर था..
संजू ( जलते हुए) - ओह्ह आगे..
सुंदरी - वह एक दिन मई जब नहाने जा रही थी तब मैंने देखा जंगल की तरफ... कुछ लोग एक लड़की को उठा के ले जा रहे है...
मैंने उनका पीछा किया. और उनकी जगह का पता लगा कर... वह से भागी भागी हवेली पहुंची और ठाकुर साहब को ये बात बताई...
ठाकुर साहब ने तुरंत अपनी बन्दूक निकली और उस जगह पे मेरे साथ अपने कुछ आदमी लेकर चल दिए....
वह पहुंच के ठाकुर साहब ने उन लोगो को गोली मार दी...
लेकिन उनमे से एक बच निकला... और उसने ठाकुर को मारने के लिए भूत प्रेतों का सहारा लेना शुरू किया..
कुछ दिन बाद.... जब देशराज जी यहाँ आये थी तोह ठाकुर साहब हवेली में नहीं थी... तब मेरा भाई देशराज के साथ रहता था... एक रात को देशराज ने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी लेकिन... उसका अंजाम यह हुआ की इस हवेली में रह रही सुमित्रा देवी की आत्मा ने उसको सबक सीखा दिया.... और देशराज रातों रात यहाँ से भाग खड़ा हुआ.. उसके दूसरे दिन हे मुझे सुबह पानी भरने जाना था जंगल के कुए में तब सुबहब के 5 बज रहे थी... तोह मई जब जंगल के कुए में पानी भरने पहुंची तोह वही मुझे वह भागा हुआ उस दिन का वह आदमी मिल गया.. उसने मुझे ठाकुर साहब के साथ देख लिया... था उसने मुझे देखते हे पहचान लिया... और उसके बाद उसने मुझे मार के मेरे टुकड़े टुकड़े करके हवेली के पीछे की जमीं पे सरीर के टुकड़ो को गाड़ दिया... इसलिए सबको ये लगता है की मैंने छत से कूद के अपनी जान दी थी... लेकिन ऐसा नहीं है..
संजू -- अच्छा... तोह यहाँ तुम्हारे अलावा सुमित्रा नाम की एक और आत्मा रहती है...
सुंदरी -- हआ.....
संजू -- लेकिन तुम किसी प्रेमी की तलाश वाली बात कर रही थी उसका क्या..
सुंदरी -- हां.. उसकी शकल तुमसे मिलती थी... मैंने जो उसकी फोटो देखि थी वह बिलकुल तुंहरे जैसी थी...
संजू -: क्या मेरे जैसी.... पर ऐसा कैसे हो सकता है... मेरी सकल तोह मेरे दादा जी जैसी है तोह क्या तुम्हारा रिश्ता मेरे दादा से तय हुआ था
सुंदरी - क्या वह तुम्हारे दादा थी .
संजू - हां... सब को पता है की मेरी सकल दादू से मिलती है... दादी ने तोह ये भी कहा था की जिस रात दादू की मौत हुई उसके ठीक कुछ हे देर बाद मेरा जन्म हुआ इसलिए दादी मुझे दादा का हे रूप मानती थी..
सुंदरी -- मुझे..... कुछ नहीं पता ... मुझे तोह बस इतना पता है की मई इस शकल और शुरआत की वाले आदमी की प्रेमिका हु.... चाहे दादा हो या पोता मुझे उससे कुछ फरक नहीं होता...
संजू -- ओह्ह्ह... अच्छा.. तोह क्या यही वजह थी की तुमने मुझे नहीं मारा..
सुंदरी -- ारी नहीं... मई मानती हु की तुम मुझे देखते हे पसंद आ गए थी.. लेकिन मई तुम्हे एक बात आज बता देना चाहती हु...
संजू -- कौन सी बात...
सुंदरी -- की.... वह मारने वाला काम मेरा नहीं है... बल्कि.... यहाँ भटक रही एक और आत्मा सुमित्रा देवी की आत्मा का है...
संजू -- क्या... अभी वह आत्मा कहा है...
सुंदरी -- अभी उनकी आत्मा ..... 2 दिन के लिए... हवेली को छोड़ के गयी है... उनका कुछ अधूरा काम था जिसको पूरा करना था उनको... इसलिए...
संजू -- कैसी अधूरा काम..
सुंदरी -- किसी को मौत के घात उतारने का..
संजू- किसको...
सुंदरी -- वह तोह मुझे नहीं पता..
संजू -- अच्छा... तोह अब ये बताओ.. की यहाँ की लाइट क्यों नहीं है...
सुंदरी -- वह तोह मई उदास थी न... इसलिए..
और ऊपर से सुमित्रा देवी की आत्मा भी यहाँ नहीं है... वह रहती है तोह.... उनकी खिदमत में हम आत्माओ को यहाँ रहना पड़ता है..
संजू -; एक मिनट... यहाँ तुम दोनों की आत्माओ के अल्वा भी और आत्माएं है क्या...
सुंदरी -- हां.. इस हवेली में हे क्या... इस गाओं में जिस तरह इंसान घर बना के रहते है वैसे हे इनविजिबल रूप में भूत भूतनिया और उनके बच्चे भी रहते है...
संजू
सुंदरी -- हआ....
संजू -- अच्छा तोह इस हवेली में तुम्हारे अलावा और कौन कौन सी भूत या भूतनी है..
सुंदरी - हवेली में मेरी अलावा सुमित्रा देवी की और उनकी नन्द की और यहाँ काम करने वाली 2 और नौकरानी चंपा और कजरी का भी भूत है...
संजू -- अगर ऐसा है तोह वह मुझे क्यों नहीं दिखती सिर्फ तुम हे क्यों दिखती हो...
सुंदरी -- वह इसलिए क्यों की.... अभी तक उन सब को आपके यहाँ होने का पता नहीं चला है... वह सब 2ंद फ्लोर और 3रद फ्लोर में रहती है...
2ंद फ्लोर में चंपा और कजरी का भूत रहता है.. और 3रद फ्लोर में सुमित्रा देवी और उनकी ननद कंचन का भूत रहता है... और इस 1सत फ्लोर का कार्यभार मुझे सौपा गया है...
संजू -- अच्छा... तोह क्या अगर मई उन फ्लोर में जाओ तोह वह मुझे दिखाई देंगी क्या मई उनको छू पाऊंगा..
सुंदरी - हां दिन में आपको नहीं छू सकते लेकिन रात में ऐसा संभव है.. दिन में वह दिखाई भी नहीं देगी.... दिखेगी तोह बस एक काली परछाई...
संजू -- ओह्ह.... यहाँ तक तोह समझ आ गया... लेकिन मेरी एक बात समझ में नहीं आयी... की हरिया ने मुझे ऐसा क्यों कहा की तस्वीर वाली आवर्त कोई चुड़ैल है... उसकी बुआ सुंदरी नहीं जबकि ये तस्वीर तोह तुम्हारी है....
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